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केजरीवाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट में झटका: दिल्ली LG के खिलाफ मनीष सिसोदिया के हलफनामे को बताया गैर जरूरी, कहा- केंद्र को जवाब देने की जरूरत नहीं

“यह स्पष्ट कर देना चाहते ​हैं कि हम केवल संवैधानिक मुद्दे से ही निपटेंगे, न कि राजनीतिक मुद्दे से। हम नए हलफनामों पर भी कोई जवाब नहीं माँग रहे हैं। यह हलफनामा गैरजरूरी है।"

दिल्ली की केजरीवाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शुक्रवार (11 नवंबर 2022) को उपराज्यपाल वीके सक्सेना के खिलाफ दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) के हलफनामे को गैरजरूरी बताया। साथ ही कहा है कि केंद्र को इसका जवाब देने की कोई जरूरत नहीं है।

केंद्र की ओर से पेश हुए एएसजी संजय जैन (ASG Sanjay Jain) ने कहा कि हलफनामा दाखिल करने की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया है। दिल्ली सरकार ने अपने राजनीतिक घमासान में उच्चतम न्यायालय को घसीटने का प्रयास किया है। वहीं, दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से अनुरोध किया कि शीर्ष अदालत केंद्र और उपराज्यपाल को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दे।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक मुद्दे से नहीं निपटेगा। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट कर देना चाहते ​हैं कि हम केवल संवैधानिक मुद्दे से ही निपटेंगे, न कि राजनीतिक मुद्दे से। हम नए हलफनामों पर भी कोई जवाब नहीं माँग रहे हैं। यह हलफनामा गैरजरूरी है।”

कोर्ट ने आगे कहा कि 24 नवंबर से मामले से जुड़े कानूनी सवालों पर संविधान पीठ को सुनवाई करनी है। नए हलफनामे की जरूरत नहीं थी। जो बात इस तरह कही गई, उसे जिरह के दौरान भी कहा जा सकता था। इस पर केंद्र सरकार के वकील ने आरोप लगाया कि ‘आप’ ने सिर्फ मीडिया में प्रचार के लिए हलफनामा दाखिल किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली की सरकार ने शीर्ष अदालत के समक्ष दायर हलफनामे में आरोप लगाया कि सक्सेना एकतरफा कार्यकारी निर्णय लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शासन की समानांतर प्रणाली चला रहे हैं। अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे। मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया था, “राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सरकार में सेवारत अधिकारी चुनी गई सरकार के प्रति उदासीन रवैया अपना रहे हैं। इसकी वजह से दिन-प्रतिदिन के कामकाज में दिक्कत आ रही है।”

इसके अलावा इसमें यह भी कहा गया है, “इस साल की शुरुआत में उपराज्यपाल की नियुक्ति के साथ यह समस्या और भी जटिल हो गई है। सिविल सेवकों और चुनी हुई सरकार के बीच कोई भी सामंजस्य नहीं है। हमारी शक्तियों का असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक तरीके से अतिक्रमण किया गया।”

बता दें कि शीर्ष अदालत के समक्ष दो अलग-अलग हलफनामे दायर किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट केंद्र और दिल्ली सरकार की विधायी और कार्यकारी शक्तियों से संबंधित इन हलफनामों पर सुनवाई कर रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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