Homeदेश-समाजलंबी कुर्ती: छात्राओं के विरोध के बाद कॉलेज प्रशासन ने वापस लिया बेतुका फरमान

लंबी कुर्ती: छात्राओं के विरोध के बाद कॉलेज प्रशासन ने वापस लिया बेतुका फरमान

कॉलेज ने छात्राओं के शॉर्ट्स, स्‍लीवलेस या इस तरह के अन्‍य कपड़ों पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि छात्राएँ घुटने के नीचे तक की कुर्ती पहनकर ही पढ़ने आएँ। इससे पुरुष शिक्षकों का ध्‍यान नहीं भटकेगा और लड़क‍ियों को भी शादी के अच्‍छे प्रस्‍ताव मिलेंगे।

हैदराबाद के सेंट फ्रांसिस कॉलेज ने वह फरमान वापस ले लिया है जिसमें लड़कियों को केवल लंबी कुर्ती पहन कर ही आने का निर्देश दिया गया था। छात्राओं के विरोध-प्रदर्शन के बाद कॉलेज प्रशासन ने यह बेतुका आदेश वापस लिया है।

कॉलेज ने छात्राओं के शॉर्ट्स, स्‍लीवलेस या इस तरह के अन्‍य कपड़ों पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि छात्राएँ घुटने के नीचे तक की कुर्ती पहनकर ही पढ़ने आएँ। इससे पुरुष शिक्षकों का ध्‍यान नहीं भटकेगा और लड़क‍ियों को भी शादी के अच्‍छे प्रस्‍ताव मिलेंगे।

सोमवार को इस आदेश के खिलाफ छात्रों ने कॉलेज परिसर में जमकर प्रदर्शन किया। तकरीबन 150 छात्राएँ प्रदर्शन में शामिल थीं। इस दौरान कॉलेज के गेट तक जाने वाली पूरी लेन को ब्लॉक कर दिया गया था।

कॉलेज के प्राचार्य ने कहा था कि प्राधिकारी वर्ग सुबह 10.30 बजे प्रदर्शनकारियों के दो से तीन प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। हालाँकि, छात्राओं द्वारा इसे खारिज कर दिया गया, क्योंकि उनके द्वारा रखी गई माँगों में यह भी कहा गया था कि प्रिंसिपल को गेट पर आना चाहिए और सभी को सार्वजनिक रूप से संबोधित करना चाहिए, न कि बंद दरवाजों के पीछे।

इससे पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें महिला सुरक्षा गार्ड छात्राओं की कुर्ती की लंबाई जाँच कर उन्हें कॉलेज में प्रवेश दे रही थीं। जब छात्राओं ने इस नियम को लागू करने के वजह के बारे में पूछा तो उन्हें जवाब दिया गया कि ये नियम इसलिए लागू किए जा रहे हैं, ताकि उन्हें अच्छे शादी के प्रस्ताव मिल सकें। इसके साथ  ही कॉलेज प्रबंधन की तरफ से कहा गया कि उनके कपड़ों से मेल फैकल्टी असहज हो जाते हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -