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राहुल गाँधी-तेजस्वी यादव SIR पर मचा रहे हंगामा, प्रक्रिया में शामिल बिहार के कॉन्ग्रेस नेता खुद को बता रहे चुनाव आयोग से संतुष्ट: अब तक नहीं दर्ज कराई गई है एक भी आपत्ति

INDI गठबंधन ने सोमवार (11 अगस्त 2025) को दिल्ली स्थित चुनाव आयोग (ECI) के मुख्यालय तक मार्च निकाला। यह मार्च बिहार में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध में किया गया था। गठबंधन ने आरोप लगाया कि इस अभियान के जरिए वोटर लिस्ट में हेराफेरी की जा रही है और ‘वोट चोरी’ हो रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया से कई लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। उनका आरोप था कि यह सब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार द्वारा सत्ता में बने रहने के लिए किया जा रहा है।

बिहार में महागठबंधन इस अभियान को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। यह फर्जी वोटरों को हटाने और वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए चलाया जा रहा है। तेजस्वी यादव जैसे वरिष्ठ नेता चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं और उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वे चुनाव बहिष्कार पर भी विचार कर सकते हैं।

चुनाव आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। दिलचस्प बात यह रही कि जिन नेताओं ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाए, उन्हीं के पार्टी कार्यकर्ता और बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) ने बताया कि प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है। इससे उनके नेताओं के दावे गलत साबित हुए।

BLA ने क्या कहा?

नवादा जिले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रतिनिधि ने बताया कि पूरी मतदाता सूची समय पर जाँच कर उन्हें सौंप दी गई है। साथ ही जिन मतदाताओं के नाम किसी कारणवश सूची से हटाए गए हैं, जैसे कि स्थानांतरण, नाम दोहराव आदि, उनकी जानकारी भी दी गई है। ये नाम अब पंचायत और बूथ प्रमुखों को भेजे जाएँगे।

उन्होंने बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल असिस्टेंट (BLA) अब आगे की प्रक्रिया तय करेंगे। यदि सूची में कोई गलती मिलती है, तो उसे 1 अगस्त से 1 सितंबर तक चलने वाली आपत्ति अवधि के दौरान सुधारा जाएगा। RJD प्रतिनिधि ने कहा, “हम संतुष्ट हैं। हमारे क्षेत्र में कोई समस्या नहीं है और किसी भी राजनीतिक पार्टी ने प्रशासन को परेशान नहीं किया है।” उन्होंने प्रशासन का धन्यवाद भी किया।

गोपालगंज जिले के कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि प्रशासन द्वारा तैयार की गई मतदाता सूची की एक प्रति सभी राजनीतिक दलों को दी गई है, जिसमें हटाए गए नामों की भी जानकारी है। उन्होंने कहा, “हमें एक महीना दिया गया है ताकि अगर कोई नाम गलती से हट गया हो, तो हम उसमें आपत्ति दर्ज कर सुधार करवा सकें।”

पूर्णिया जिले के कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन के साथ बैठक हुई और मतदाता सूचियाँ राजनीतिक दलों को सौंप दी गई हैं। उन्होंने कहा, “हमें निर्देश दिए गए हैं कि जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, उन्हें शामिल कराने में मदद करें और यह भी जाँच करें कि जो लोग स्थानांतरित हो गए हैं या जिनका निधन हो चुका है, उनकी जानकारी सही है या नहीं।”

उन्होंने कहा, “हम अपने BLAs के माध्यम से BLOs की पूरी सहायता करेंगे। सभी पार्टियों को संशोधित सूची दे दी गई है। जिला प्रशासन का कार्य बहुत अच्छा रहा है और हम उनका पूरा सहयोग करेंगे।”

इसके अलावा, कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें विपक्षी दलों के BLAs ने प्रशासन की पारदर्शी प्रक्रिया की तारीफ की है और भरोसा जताया है कि सभी संबंधित पक्षों को इसमें शामिल किया गया।

चुनाव आयोग ने विपक्ष के दुष्प्रचार का किया खंडन

बिहार में चलाए गए SIR अभियान को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने तथ्यों, आँकड़ों और BLA की गवाही के साथ गलत साबित कर दिया है। निर्वाचन आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह पूरी प्रक्रिया सभी राजनीतिक दलों की पूर्ण भागीदारी से पारदर्शिता के साथ की गई थी और अगर कहीं कोई गलती थी, तो उसे ठीक भी किया गया।

इसके बावजूद जब विपक्ष ने इस अभियान को लेकर गलत जानकारी फैलानी शुरू की, तब आयोग को दोबारा वही बात समझानी पड़ी। राहुल गाँधी ने सोशल मीडिया पर विपक्षी सांसदों के विरोध की तस्वीरें साझा करते हुए ‘वोटर चोरी’ का आरोप लगाया। इसके जवाब में चुनाव आयोग ने कई लिंक साझा किए, जिनमें यह दिखाया गया कि पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी।

आयोग ने बताया कि मतदाता सूची के ड्राफ्ट प्रकाशित होने से पहले, उसके दौरान और उसके बाद भी BLA के साथ बैठकें हुईं, और सभी दलों को शामिल कर पूरी पारदर्शिता बरती गई। ECI ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने ड्राफ्ट रोल को लेकर कोई आपत्ति या शिकायत दर्ज नहीं करवाई है।

इससे यह साफ होता है कि यह विरोध सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है, न कि किसी असली मुद्दे पर। महागठबंधन और RJD ने ECI पर दलितों, अल्पसंख्यकों, गरीबों और हाशिए पर गए वर्गों के वोटिंग अधिकारों को SIR के नाम पर खत्म करने का आरोप लगाया।

इसके जवाब में आयोग ने फिर दोहराया कि SIR अभियान में हर राजनीतिक दल के BLA को शामिल किया गया, उन्हें उनके क्षेत्रों की वोटर लिस्ट और संशोधित सूचियाँ दी गईं और हर स्तर पर उनकी शिकायतें सुनी गईं। यह भी बताया गया कि कई विपक्षी पार्टियों के BLA ने खुद सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी थी और उनकी पूरी भागीदारी रही।

इस प्रकार आयोग ने यह साफ कर दिया कि विपक्ष के आरोप बेबुनियाद, भ्रामक और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं, जबकि पूरी प्रक्रिया को नियमों और पारदर्शिता के तहत अंजाम दिया गया।

बिहार में SIR अभियान

चुनाव आयोग के SIR अभियान के तहत बिहार में बड़ी संख्या में फर्जी वोटरों का पता चला है। जाँच में लगभग 65 लाख ऐसे वोटर मिले जो असल में मौजूद ही नहीं थे। इनमें ज्यादातर लोग या तो मर चुके थे या फिर अपने पते पर नहीं मिले। इसके बाद इन नामों को मतदाता सूची से हटा दिया गया।

हालाँकि कुछ जिलों में नामों की भारी संख्या में कटौती चौंकाने वाली रही, खासतौर पर किशनगंज जिले में, जो मुस्लिम बहुल इलाका है। वहाँ से 1.45 लाख वोटर हटाए गए। यह जिले के कुल वोटरों का लगभग 11.8% है। एक चुनाव में जहाँ 4-5% का अंतर भी नतीजा बदल सकता है, वहाँ इतने वोटरों का हटना बेहद अहम माना जा रहा है।

राज्य में विपक्षी पार्टियाँ इस मुहिम के खिलाफ एकजुट हो रही हैं क्योंकि इन हटाए गए फर्जी वोटरों में से कई उनके समर्थक माने जा रहे थे। जाँच के दौरान कई विदेशी नागरिक, खासकर बांग्लादेशी, भी पकड़े गए जिनके पास आधार कार्ड जैसे भारतीय दस्तावेज पाए गए।

अब ऐसी ही जाँच पश्चिम बंगाल में भी शुरू होने जा रही है। इससे तृणमूल कॉन्ग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार में हड़कंप मच गया है। ममता पहले भी बांग्लादेशी घुसपैठियों के समर्थन में बयान दे चुकी हैं, इसलिए उन्हें डर है कि यह अभियान उनके वोटबैंक को प्रभावित कर सकता है।

चुनाव आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए है, ताकि केवल वैध और जीवित वोटरों को ही मतदान का अधिकार मिले।

दिलचस्प बात यह है कि जिन शोधकर्ताओं ने पहले बिहार में 70 लाख फर्जी वोटरों की चेतावनी दी थी, वो अब सही साबित हुई। उन्होंने अब दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में 2024 के लिए मतदाता सूची में करीब 1 करोड़ अतिरिक्त वोटर हो सकते हैं। अब आगे यह जाँच का विषय बनेगा।

(मूल रुप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में रुक्मा राठौर ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

जो रामजी 17 साल से ‘लापता’, जिनकी पत्नी आज भी जी रही सुहागन की जिंदगी, उन्हें टॉर्चर कर मार डाला था: मालेगांव ब्लास्ट की जाँच से जुड़े रहे अधिकारी का दावा

“ATS ने RSS से जुड़े तीन लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया था। उन्हें टॉर्चर करके मार दिया और रिकॉर्ड में फरार बता दिया।”

यह दावा 2008 के मालेगाँव ब्लास्ट की जाँच में शामिल रहे महबूब मुजावर ने दैनिक भास्कर से बातचीत में किया है। इसी ब्लास्ट का फैसला सुनाते हुए NIA की कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय समेत 7 लोगों को बरी कर दिया।

मुजावर जिन तीन लोगों की हत्या की बात कर रहे हैं उनका नाम संदीप डांगे, रामजी कलसंगार और दिलीप पाटीदार है। इनमें से एक रामजी कलसंगार NIA कोर्ट के फैसले के बाद सुर्खियों में आए थे। वे 17 साल से लापता हैं और उनकी पत्नी आज भी सुहागिन की तरह जीवन जी रही हैं।

मुजावर ने दैनिक भास्कर को बताया है कि इन तीनों लोगों की हत्या के बाद भी ऐसा दिखाया गया कि ये सभी जीवित हैं। इसे साबित करने के लिए इनके घरों में जाँच के लिए अधिकारी भी भेजे जाते थे। इससे लोगों को लगता था कि इनकी जानकारी पुलिस के पास नहीं है और ये फरार हैं। मुजावर ने कहा है:

“संदीप, रामजी और दिलीप को जिंदा बताने की कोशिश सब परमबीर के कहने पर हो रही थी। तीनों की मौत को राज रखने के लिए सिचुएशन क्रिएट की गई”

मालेगाँव ब्लास्ट में मोहन भागवत को फँसाने के अपने दावे को ATS में रहे महबूब मुजावर ने फिर से दोहराया है। कहा है कि उन्हें जो दो टास्क दिए गए थे, उनमें से एक मोहन भागवत को उठाने का आदेश था। मुजावर के अनुसार, इन आदेशों का मकसद ‘भगवा आतंकवाद’ की झूठी कहानी गढ़ना था।

हालाँकि, मुजावर ने यह आदेश मानने से इनकार कर दिया था। उनका कहना है कि मोहन भागवत जैसी बड़ी शख्सियत को बिना किसी ठोस वजह के पकड़ना उनके बस की बात नहीं थी। इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ा और IPS अधिकारी परमबीर सिंह ने झूठे केस में फँसा दिया, जिससे उनकी 40 साल की पुलिस सेवा खत्म हो गई।

मुजावर ने बताया कि पूरी जाँच एक ‘फर्जी अफसर’ ने की थी, जो कि झूठ पर आधारित थी। उन्होंने हालिया NIA कोर्ट के फैसले पर कहा कि इससे साबित हो गया है कि ‘भगवा आतंकवाद’ नहीं था, यह सब कुछ फर्जी था।

जिस 600 किलो RDX को जमा करने के आरोपों में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित को पकड़ा गया था, उस पर मुजवार कहते हैं, “अफसरों ने 600 किलो RDX की कहानी गढ़ी और साध्वी प्रज्ञा-कर्नल पुरोहित को इससे जोड़ने की कोशिश की।”

महबूब मुजावर ने 2016 में सोलापुर कोर्ट में अपने ऊपर चल रहे केस में जमा किए गए एफिडेविट में भी इसका जिक्र किया था।

मस्जिद से ऐलान कर जुटाई गई भीड़, हरियाणा-राजस्थान की सीमा पर पथराव-आगजनी: रिपोर्ट, पीड़ित बोले- नूहं में हिंदुओं पर हमले के बाद से बने हुए हैं हमारे दुश्मन

राजस्थान-हरियाणा की सीमा पर हुई हिंसा के लिए मस्जिद से ऐलान कर भीड़ जुटाई गई थी। इस भीड़ ने आगजनी और पथराव किया। कच्चे मकानों पर काँच की बोतलें फेंकी गई। सड़क पर खड़ी एक बाइक और कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, घटना में 10 लोग घायल हैं। दोनों प्रदेशों से लगी इस सीमा पर मंगलवार (12 अगस्त 2025) को हिंसा की गई। जब हिंदू युवक समय सैनी ने दो मुस्लिम युवक नस्सी और लुकमान को रास्ते से हटने को कहा। इससे गुस्साए नस्सी ने सैनी के सिर पर काँच की बोतल दे मारी। वे यहीं नहीं रुके, दोनों ने भीड़ जुटाकर दंगे करवाए।

इस मुस्लिम भीड़ ने डेढ़ घंटे तक छतों से पथराव किया और सड़कों पर घूमकर उत्पात मचाया। हालात काबू करने के लिए पुलिस की 2 कंपनियाँ तैनात की गई। इसके बाद भी दंगाइयों ने सड़क को जाम करके रखा। तब राजस्थान बॉर्डर की पुलिस टीम को भी बुलाया गया। इस हिंसा से आसपास के कई गाँवों में दहशत फैल गई।

वहीं, पीड़ित ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक मुंडाका गाँव के समय सिंह सैनी राजस्थान बॉर्डर पर टेंट की दुकान चलाते हैं। मंगलवार (12 अगस्त 2025) की शाम करीब 4.30 बजे वे अपने दादा की रस्म पगड़ी कार्यक्रम के लिए टेंट का सामान लेकर बाइक से जा रहे थे। तभी गाँव की सड़क पर एक कार रास्ता रोककर खड़ी थी।

समय सैनी ने बताया कि कार में नस्सी और लुकमान शराब पी रहे थे। सैनी ने दोनों को रास्ते से ट्रक हटाने के लिए कहा तो नस्सी भड़क गया और बोला कि सड़क तुम्हारे बाप की नहीं है। इसके बाद सैनी के सिर पर शराब की बोतल से हमला कर दिया, जिससे वह खून में लथपथ हो गया। सैनी ने मदद के लिए अपने भाई चुन्नी, गोपाल और बीर सिंह को बुलाया।

उधर, नस्सी ने राजस्थान के अलवर जिले के हाजीपुर गाँव से रमजान, मुहरखों, रुस्तम, शमशेर, हारून, सुब्बन, इस्माइल, अरशद, कालू, जुबेर, यूनुस, इस्लाम, जुहरूदीन, उम्मर, सकरुल्ला, साहुन, करीम, सफी, सुब्बा, याकूब और जुनैद को बुला लिया। सभी लाठी-डंडों से लैस होकर आए। इसके बाद मामूली कहासुनी ने सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया।

मुस्लिम भीड़ ने पूरे गाँव में आगजनी की। मकानों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया। लाठी-डंडों से पीड़ित सैनी और उसके भाई को बुरी तरह पीटा गया। मौके पर पहुँची पुलिस भी दंगाइयों को काबू में नहीं कर पाई। वहीं, पीड़ित सैनी ने बताया कि दंगाइयों ने साल 2023 में नूहं में हुए दंगों की दुश्मनी निकालते हुए हमला किया है।

उल्लेखनीय है कि साल 2023 में 31 जुलाई 2023 को हरियाणा के नूहं में मुस्लिम भीड़ द्वारा विश्व हिंदू परिषद के जुलूस को रोकने की कोशिश की गई थी। उन्होंने हिंदुओं पर हमला कर दिया था। इस दौरान मंदिर को घेर कर किए गए हमले में 5 लोगों और दो होमगार्डों की मौत हो गई थी और कई पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 15 अन्य घायल हो गए थे।

पुलिस के सामने भी पथराव करती रही मुस्लिम भीड़

मंडाका गाँव में हुए दंगों को शांत करवाने के लिए आसपास की 5 थाने की पुलिस पहुँची। इसके बाद भी मुस्लिम भीड़ शांत नहीं हुई। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिसमें पुलिस दंगाइयों के सामने बेबस खड़ी है। एक वीडियो में दंगाई पुलिसकर्मी के सामने पथराव करते नजर आए। वहीं, एक वीडियो में पुलिस को तेवर दिखाते हुए झड़प भी की।

घटना में नूहं SP राजेश कुमार ने बताया कि हिंसा में चुन्नीलाल, गोपाल, लेखराज, वीर सिंह, फूलचंद, हंसराज गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका फिरोजपुर झिरका के स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, मुस्लिम भीड़ में शामिल खुर्शीद, फरहान और शाहबाज को भी हल्की चोटें आई हैं।

SP ने कहा कि कुछ शरारती तत्वों ने शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया। कुछ शरारती तत्वों ने एक बाइक में आग लगा दी। 2 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। घटनास्थल पर 2 DSP, 2 पुलिस कंपनियाँ और भारी पुलिस बल तैनात है।

NYT, अल जजीरा, ABC… राहुल गाँधी का ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा फैलाने को सबने एक साथ बजाया भोंपू, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदनाम करने के लिए विदेशी मीडिया एकजुट

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग पर धांधली के बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। इसमें विपक्ष के साथ-साथ विदेशी मीडिया भी उन्हें समर्थन दे रहा है। द वाशिंगटन पोस्ट, द न्यूयॉर्क टाइम्स, अल जजीरा सहित कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने गुमराह करने वाले लेख प्रकाशित किए हैं ताकि ‘वोट चोरी’ के राहुल गाँधी के प्रोपेगेंडा को हवा दिया जा सके।

INDI गठबंधन के नेताओं ने 11 अगस्त 2025 को संसद से लेकर चुनाव आयोग मुख्यालय तक विरोध मार्च निकालकर हंगामा काटा। हालाँकि इस मार्च के लिए प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी। लिहाजा विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। धक्का मुक्की की स्थिति पैदा हो गई।

इस दौरान विपक्षी नेताओं ने यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि बल प्रयोग से उनकी आवाज दबाई जा रही है। तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद सांसद महुआ मोइत्रा और समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव जैसे कुछ नेता पुलिस बैरिकेड्स पर भी चढ़ गए थे।

इस घटना को द न्यूयॉर्क टाइम्स ने ‘चुनावी अनियमितताओं का विरोध करने पर भारतीय सांसदों को हिरासत में लिया’ शीर्षक के साथ प्रकाशित किया ताकि विपक्ष के बेबुनियाद आरोपों को बल मिल सके।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ वेब पोर्टल का स्क्रीनशॉट

इसी तरह वाशिंगटन पोस्ट ने बिहार में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को शातिर तरीके से ‘विवादास्पद मतदाता सूची पुनरीक्षण’ बताया है।

‘वॉशिन्गटन पोस्ट’ वेब पोर्टल का स्क्रीनशॉट

अल जजीरा ने भी विरोध मार्च की रिपोर्टिंग में INDI गठबंधन के नेताओं के आरोपों को प्रमुखता दी है।

‘अल जजीरा’ वेब पोर्टल का स्क्रीनशॉट

इनके सुर में सुर मिलाते हुए ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (ABC) ने भी बिहार में मतदाता सूची संशोधन को “विवादास्पद” बताया

ABC वेब पोर्टल का स्क्रीनशॉट

गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने 7 अगस्त 2025 को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया। कॉन्ग्रेस पार्टी की चुनावी हार के लिए चुनाव आयोग और सत्ताधारी बीजेपी को दोषी ठहराया। बिना किसी प्रमाण 2024 के लोकसभा चुनावों को ‘फिक्स’ बता दिया।

राहुल गाँधी की रायबरेली में ‘फर्जी मतदाता’

इस दौरान राहुल गाँधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का जिक्र किया। कहा कि उनकी पार्टी ने यहाँ एक ‘आंतरिक सर्वेक्षण’ कर 1,00,250 मतों की ‘वोट चोरी’ पकड़ी है। उनका कहना था कि कर्नाटक को कॉन्ग्रेस में 16 सीट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन वह 9 सीट ही जीत पाई और ऐसा ‘वोट चोरी’ से ही संभव है।

उनका कहना था कि उनकी पार्टी ने इस अप्रत्याशित हार का विश्लेषण करने के बाद पाया कि ‘वोट चोरी’ हुई थी। राहुल गाँधी ने सत्ता में आने पर चुनाव आयोग के अधिकारियों को ‘परिणाम’ भुगतने की धमकी भी दी।

राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूचियों में ‘मकान नंबर 0’ जैसी विसंगतियों का हवाला देते हुए, चुनाव आयोग पर फर्जी मतदाता बनाने का आरोप लगाया। लेकिन बाद में कुछ मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि राहुल गाँधी के खुद के निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली में भी बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में इस तरह की विसंगति है।

एक तरफ ‘फर्जी वोटरों’ का रोना, दूसरी तरफ SIR का विरोध

कॉन्ग्रेस पार्टी समेत पूरा INDI गठबंधन बिहार में SIR का विरोध कर रहा है। इस पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं। हालाँकि शीर्ष अदालत ने मतदाता सूची संशोधन को नियमित प्रक्रिया और चुनाव आयोग का अधिकार बताते हुए रोक से इनकार कर दिया था।

दिलचस्प तथ्य यह भी है कि चुनाव आयोग राहुल गाँधी से उनके आरोपों पर शपथ देने को कह चुका है ताकि जाँच शुरू की जा सके। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता ने यह कहते शपथ पत्र देने से इनकार कर दिया कि एक नेता होने के कारण उनके कहे को ही शपथ के तौर पर लिया जाना चाहिए। इससे उनके आरोपों की ‘गंभीरता’ का अंदाजा लगाया जा सकता है।

यही कारण है कि एक तरफ राहुल गाँधी मतदाता सूची में फर्जी लोगों का नाम जोड़ने का आरोप लगाते हैं, दूसरी तरफ मतदाता सूची से फर्जी, अयोग्य और मृत लोगों के नाम हटाए जाने का विरोध भी करते हैं। उल्लेखनीय है कि बिहार में चुनाव आयोग की मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया ने भारी विसंगतियाँ पकड़ी है।

आयोग ने पाया है कि सूची में 18 लाख मृत लोगों के नाम दर्ज थे। 7 लाख नाम डुप्लीकेट थे। इसके अलावा 26 लाख लोग ऐसे थे जो दूसरे जगहों पर जा चुके हैं।

‘…मानसिक संतुलन खो चुके थे राम’: जिस मंच पर बैठे थे तमिलनाडु के CM स्टालिन, उसी से हिंदुओं के अराध्य पर तमिल कवि ने उगला जहर; बीजेपी ने बताया ‘मूर्ख’

तमिलनाडु के गीतकार और कवि वैरामुथु (Vairamuthu) ने भगवान श्रीराम पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। वैरामुथु ने कहा कि सीता को खोने के बाद श्रीराम ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया था। इस बयान के बाद बीजेपी ने वैरामुथु को ‘मूर्ख’ बताते हुए कहा कि वे अक्सर हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित करते रहते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वैरामुथु ने ये बयान तमिलनाडु से मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की मौजूदगी में दिया। जब वे तमिल कवि कंबन के नाम पर दिए गए एक पुरस्कार लेते समय दिया। कंबन ने ही रामायण के तमिल संस्करण ‘रामायणम्’ की रचना की थी।

वैरामुत्तु ने कहा, “सीता से अलग होने के बाद, राम ने मानसिक संतुलन खो दिया था, उन्हें नहीं पता था कि वो क्या कर रहे हैं। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 84 के मुताबिक, अगर किसी ने मानसिक बीमारी या दिमागी खराबी की वजह से कोई काम किया है तो वो अपराध नहीं माना जाता।”

उन्होंने तमिल संस्करण की रामायण के रचयिता कंबन के बारे कहा, “कंबन को भले ही कानून का ज्ञान न रहा हो, लेकिन वह समाज और मानव मन को जानते थे।” वे आगे कहते हैं, “राम को पूरी तरह से बेकसूर माना गया है, माफ कर दिया गया है। जिससे राम को इंसान बना दिया गया और कंबन को भगवान का रूप दे दिया गया।”

BJP ने वैरामुथु के बयान पर की आलोचना

वैरामुथु के इस बयान पर बीजेपी ने उनकी आलोचना की है। तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नैनार नागेन्द्रन ने बयान पर सीएम स्टालिन पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री उनके इस बयान को स्वीकार करेंगे? वहीं, बीजेपी के प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने वैरामुत्तु को ‘मूर्ख’ बता दिया।

नारायणन तिरुपति ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट कर लिखा, “मुझे वैरामुथु को मूर्ख कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है, क्योंकि वे मूर्ख हैं। ये मूर्ख खुद को भगवान से ऊपर समझते हैं और हर बात को सही ठहराते हैं।”

बीजेपी नेता सीआर केसव ने वैरामुथु के बयान पर कहा, “वैरामुथु रामासामी पवित्र हिंदू देवताओं का अपमान करते हैं और हिंदू धर्म का बहुत गलत इस्तेमाल करते हैं। वो ऐसा बार-बार करते हैं और ये बहुत गलत है। वैरामुथु ने अपने नाम में ‘राम’ शब्द लगाया है, लेकिन अब वो कम्ब रामायण को गलत तरीके से समझकर भगवान राम को मानसिक रूप से बीमार बताते हैं।”

‘वाराणसी में 50 बच्चों के पिता का नाम राजकमल दास’: राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा को हवा देने के लिए ‘गुरु-शिष्य’ परंपरा को बदनाम कर रहा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम

सोशल मीडिया पर एक बार फिर भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है। साल 2023 की एक पुरानी वोटर लिस्ट का स्क्रीनशॉट वायरल कर दावा किया गया कि वाराणसी में एक आदमी के 48 बेटे हैं, वो भी एक ही घर में और कुछ तो बिल्कुल एक ही उम्र के है। इस लिस्ट को शेयर कर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस समर्थकों और कुछ कथित पत्रकारों ने इसे सच बताकर खूब प्रचारित किया। लेकिन जब इस वायरल स्क्रीनशॉट दावे की पड़ताल की तो सच्चाई कुछ और ही निकली। दरअसल यह कहानी 2023 के वाराणसी नगर निगम चुनाव की है और 48 बेटों वाली बात एक धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, न कि कोई गड़बड़ी।

फैक्ट चेक: क्या रामकमल दास के 48 बेटे हैं?

सोशल मीडिया पर वायरल हुई वोटर लिस्ट के स्क्रीनशॉट में वाराणसी के वार्ड नंबर 51 की मतदाता सूची दिखाई गई है। इसमें एक ही पते पर रहने वाले कई मतदाताओं के पिता का नाम रामकमल दास लिखा गया है। इन सभी मतदाताओं की उम्र अलग-अलग है, जिससे यह दावा किया गया कि एक ही व्यक्ति के इतने सारे बेटे कैसे हो सकते हैं।

यह दावा पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह लिस्ट 2023 के वाराणसी नगर निगम चुनाव की है, जिसमें 48 वोटरों के पिता के रूप में राम जानकी मठ के महंत स्वामी रामकमल दास वेदांती का नाम दर्ज है। ये सभी उनके बच्चे नहीं, बल्कि शिष्य हैं।

जब से बिहार में चुनाव आयोग ने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन शुरू करने का ऐलान किया है, तभी से विपक्ष बौखला रहा है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इससे वोटिंग लिस्ट में गड़बड़ियाँ हो रही हैं। 7 अगस्त 2025 को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वोटर लिस्ट से जानबूझकर छेड़छाड़ की जा रही है।

इसी गर्मा-गर्मी में 2 साल पुरानी एक वायरल तस्वीर सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि एक ही व्यक्ति के 48 बेटे हैं। इस फोटो को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें की जा रही हैं।

असली सच्चाई क्या है?

वायरल तस्वीर की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर खोज की। हमें कई बड़े मीडिया प्लेटफॉर्म की खबरें भी मिलीं, जिनमें दैनिक जागरण, अमर उजाला और ईटीवी भारत शामिल है। इनमें सबसे पहले मई 2023 की एक रिपोर्ट पर ध्यान गया।

वायरल तस्वीर वाराणसी की वोटर लिस्ट की है। यह लिस्ट वार्ड नंबर 51 भेलूपुर की नगर निगम चुनाव के दौरान बनी थी। इसमें एक नाम है– रामकमल दास। उन्हें 48 लोगों का पिता बताया गया है।

अब जानिए असल बात। रामकमल दास एक साधु महात्मा हैं। वह शादीशुदा नहीं हैं। वह वाराणसी के राम जानकी मठ के महंत हैं। उनके साथ जो 48 लोग रहते हैं, वे उनके बेटे नहीं बल्कि शिष्य हैं। मठ में गुरु-शिष्य परंपरा चलती है। यहाँ शिष्य अपने गुरु को पिता जैसा मानते हैं।

जब ये शिष्य वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाते हैं तो पिता के नाम की जगह गुरु का नाम लिखते हैं। इसलिए सभी ने रामकमल दास का नाम पिता के तौर पर दिया। यह कोई धोखा या फर्जीवाड़ा नहीं है।

मठ के प्रबंधक ने भी यही बात बताई। उन्होंने कहा कि ये सभी शिष्य मठ में ही रहते हैं। कुछ तो आजीवन वहीं रहते हैं। उनकी पढ़ाई के कागजों में भी पिता के नाम पर गुरु का नाम होता है। पहले लिस्ट में 150 और नाम भी थे, लेकिन बाद में कुछ हटाए गए। अब कुल 48 शिष्यों का नाम लिस्ट में है।

हमने निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से लिस्ट भी चेक की। B, 24/19 नाम के घर में 51 वोटर्स हैं। इनमें 48 ने रामकमल दास को पिता बताया है। यह जानकारी आपको भाग-5, संख्या-725 पर मिलेगी। कई की उम्र एक जैसी है- जैसे 13 लोग 37 साल के हैं। बाकी की उम्र भी 39, 40 या 42 साल है।

रामकमल दास किसी के जैविक पिता नहीं हैं। जो नाम उनके नीचे लिखे हैं, वे शिष्य हैं, बेटे नहीं। यह परंपरा के तहत हुआ है। और यह सब कानूनी और सही तरीके से हुआ है। सोशल मीडिया पर जो बातें फैलाई गईं, वो अधूरी और भ्रामक हैं।

पोर्न सीन करने वाले (रणबीर कपूर) को रामायण का श्रीराम बनने से रोको: मोदी के मंत्री को पत्र, बोले ‘भीष्म पितामह’- वे अच्छे एक्टर, आज के हिंदू छोड़ेंगे नहीं

फिल्म ‘रामायण’ में बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की भूमिका के लिए रणबीर उपयुक्त नहीं हैं। इनमें वरिष्ठ पत्रकार उदय माहुरकर से लेकर महाभारत में पितामह भीष्म की भूमिका निभाने वाले मुकेश खन्ना तक शामिल हैं।

‘सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन’ के संस्थापक माहुरकर ने इसको लेकर मोदी सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भी लिखा है। इसमें कहा है कि फिल्म ‘एनिमल’ में पोर्न सीन करने के बाद रणबीर कपूर का भगवान श्रीराम का किरदार निभाना सही नहीं है।

रणबीर कपूर को रामायण से निकालने के लिए लिखा पत्र

वहीं मुकेश खन्ना का कहना है कि रणबीर अच्छे अभिनेता हैं। लेकिन एनिमल की जो उनकी छवि है उसके बाद उन्हें राम की भूमिका में दर्शक स्वीकार नहीं करेंगे। आदिपुरुष का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसे किसी और नजरिए से दिखाया गया तो आज के हिंदू छोड़ेंगे नहीं।

वरिष्ठ पत्रकार उदय माहुरकर ने पत्र लिखकर भारत सरकार से माँग की है कि एनिमल फिल्म में पोर्न सीन करने वाले रणबीर कपूर को रामायण फिल्म में श्रीराम की भूमिका से हटा देना चाहिए। उन्होंने लिखा कि एनिमल फिल्म में रणबीर कपूर ने नशा, अपराध और पोर्नोग्राफी को प्रमोट किया था। ऐसे अभिनेता के श्रीराम की भूमिका निभाने से भगवान की छवि भी खराब होगी।

पत्र में उदय माहुरकर लिखते हैं, “रामायण फिल्म के निर्माताओं ने 5000 करोड़ रुपए का PR कैंपेन चलाने की प्लानिंग की है। अगर पब्लिक फेस रणबीर कपूर होंगे तो इसमें यौन अश्लीलता, अपराध और नैतिक पतन जैसी चीजों को बढ़ावा मिलेगा। इससे बच्चे और आने वाली पीढ़ी समेत देशभर के हिंदुओं के मन में भगवान श्रीराम की गलत छवि जाएगी।”

उन्होंने आगे लिखा, “यह कला की स्वतंत्रता नहीं है बल्कि यह सोची समझी सांस्कृतिक बर्बादी है। जो बड़े स्तर पर मीडिया के जरिए की जा रही है। जो काम कोई औरंगज़ेब या गजनी नहीं कर सका अब वह किया जा रहा है। यानि मंदिर की किसी दीवार को छुए बिना भक्ति के अंदरूनी हिस्से को खराब किया जा रहा है।”

उदय माहुरकर ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और फिल्म (MIB) के निर्माता नमित मल्होत्रा से माँग की कि रामायण फिल्म के लिए दोबारा से कास्टिंग की जाए। श्रीराम का किरदार रणबीर कपूर से हटाकर किसी अन्य अभिनेता को दे दिया जाए।

बता दें कि रामायण फिल्म दीपवाली 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तैयार है। इसका ट्रेलर रिलीज किया जा चुका है। इसके बाद से ही फिल्म को लेकर बॉयकॉट का हैशटैग सोशल मीडिया पर ट्रेन्ड कर रहा है। फिल्म में रणबीर कपूर को श्रीराम का किरदार निभाने के लिए आपत्ति जताई जा रही है।

हिंदू रणबीर कपूर को नहीं छोड़ेंगे: मुकेश खन्ना

‘शक्तिमान’ सीरियल के मशहूर एक्टर मशहूर खन्ना ने भी रणबीर कपूर पर रामायण फिल्म में श्रीराम का किरदार निभाने पर आपत्ति जताई है। गलाटा इंडिया से बात करते हुए मुकेश खन्ना ने कहा, “मुझे नहीं पता कि रणबीर कपूर मर्यादा पुरुषोत्तम राम की छवि को बखूबी निभा पाएँगे या नहीं। वो एक अच्छे अभिनेता हैं लेकिन उनके पीछे ‘एनिमल’ की छवि लगी हुई है।”

गलाटा इंडिया से बात करते हुए मुकेश खन्ना ने कहा, “मुझे नहीं पता कि रणबीर कपूर मर्यादा पुरुषोत्तम राम की छवि को बखूबी निभा पाएँगे या नहीं। वो एक अच्छे अभिनेता हैं लेकिन उनके पीछे ‘एनिमल’ की छवि लगी हुई है।”

मुकेश खन्ना ने आगे कहा, “रामायण से बड़ा विषय कोई हो ही नहीं सकता। लेकिन मैंने देखा है कि कैसे उन्होंने ‘आदिपुरुष’ की चटनी बना दी। अब इसे कोई और बना रहा है। अगर आप इसे उसी नजरिए से बनाएँगे, तो आज के हिंदू आपको नहीं छोड़ेंगे।”

रणबीर कपूर ने साल 2022 की फिल्म ‘एनिमल’ में गैगस्टर रोल को प्रमोट किया था। फिल्म में वह अपराध और नशे को प्रमोट करते नजर आए। उन्होंने फिल्म में कुछ पोर्न सीन भी किए थे। इसके बाद से उनकी छवि गैंगस्टर और अश्लील फिल्म बनाने वाले अभिनेता के रूप में जानी जाने लगी।

अब इसी छवि के साथ वे रामायण फिल्म में श्रीराम की भूमिका निभाने जा रहे है, जिसके लिए उन्हें ट्रोल किया जा रहा है और लगातार उनको रिप्लेस करने की माँग उठ रही हैं। इससे पहले भी रणबीर कपूर हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत करने को लेकर ट्रोल किया जा चुका है।

उज्जैन के महाकाल मंदिर में नहीं मिले दर्शन

साल 2022 में फिल्म ब्रह्मास्त्र की रिलीज से पहले रणबीर कपूर और आलिया भट्ट उज्जैन में महाकाल के दर्शन करने पहुँचे थे। लेकिन हिंदू संगठन के विरोध के बाद उन्हें दर्शन करने से रोक दिया गया। मंदिर के बाहर खड़े हिंदू संगठनों ने काली पट्टी दिखाकर उनका जमकर विरोध किया। लोगों ने कहा कि वह रणबीर जैसे गौ-भक्षक को महाकाल के मंदिर में नहीं जाने देंगे।

यह विरोध 11 साल पुराने रणबीर कपूर के वायरल वीडियो से जुड़ा था, जिसमे एक्टर खुद को ‘बिग बीफ गाय’ बता रहे थे। उनकी इसी टिप्पणी के कारण साल 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेने पर भी रणबीर कपूर का विरोध किया गया था।

रणबीर कपूर ने दारू के साथ लगाया ‘जय माता दी’ का जयकारा

साल 2023 में क्रिसमस पार्टी के दौरान के रणबीर कपूर और उनकी पत्नी आलिया भट्ट का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें कपूर परिवार क्रिसमस का जश्व मनाते देखा गया। क्रिसमस के मौके पर केक में दारू डलवाई गई और फिर आग लगाते हुए ‘जय माता दी’ के जयकारे लगाए। जयकारे लगाते हुए पूरा कपूर परिवार हँस रहा था।

वीडियो वायरल होने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट में रणबीर कपूर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी। शिकायत में कहा गया था कि एक्टर और उनके परिवार के खिलाफ IPC की धारा 295, 509 और 34 के तहत FIR की माँग की थी।

पाकिस्तान प्रेम दिखाने में नहीं चूके रणबीर कपूर

रणबीर कपूर को पाकिस्तान का समर्थन करते भी सुना गया है। साल 2022 में सऊदी अरब में हुए ‘रेड सी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ पर रणबीर कपूर ने पाकिस्तान की फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट’ की काफी तारीफ की थी। साथ ही यह भी कहा था कि उन्हें पाकिस्तानी कलाकार के साथ काम करने में खुशी होगी।

जहाँ एक तरफ एक्टर पाकिस्तान का गुणगान करते हैं तो दूसरी तरफ भारत के समर्थन में चुप्पी साध लेते हैं। अप्रैल 2025 में भारत में काले पन्ने में शामिल पहलगाम आतंकी हमले पर एक्टर रणबीर कपूर ने कुछ नहीं बोला। यहाँ तक कि उनके पूरे परिवार से इस निंदनीय आतंकी हमले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देखी गई।

हमास आतंकियों के लिए बैटिंग करने उतरी प्रियंका गाँधी, इजरायल के राजदूत ने किया बोल्ड: जानिए वायनाड की कॉन्ग्रेस MP के पोस्ट को क्यों कहा ‘शर्मनाक’

कॉन्ग्रेस की नीति इजरायल विरोध की रही है। ईरान युद्ध हो या फिलिस्तीन से जंग, कॉन्ग्रेस हमेशा केन्द्र को इजरायल के खिलाफ कदम उठाने की नसीहत देती है। कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा ने इजरायल के बहाने केन्द्र सरकार को घेरने की कोशिश की है। उन्होंने इजरायल पर फिलिस्तीन के नरसंहार का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि केन्द्र सरकार इस पर चुप क्यों है?

प्रियंका के बयान को इजरायल के राजदूत रेवुएन अजार ने कहा, ” आपकी धुर्तता कितनी शर्मनाक है। इजरायल ने 25,000 हमास आतंकवादियों को मारा। मानव जीवन को हुई क्षति के लिए हमास की घिनौनी रणनीति जिम्मेदार है। नागरिकों के पीछे छिप कर कायराना हमला, पलायन करने वालों पर गोली चलाना और रॉकेट दागना हमास कर रहा है।”

इजरायल के राजदूत ने ये भी कहा है कि इजरायल ने गाजा में 20 लाख टन खाद्य सामग्री पहुँचाई। हमास ने उसे जब्त करने की कोशिश की, जिससे भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने दावा किया कि पिछले 50 सालों में गाजा की आबादी 450% बढ़ी है। वहाँ कोई नरसंहार नहीं हुआ है। हमास के आँकड़ों पर यकीन मत कीजिए।

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा ने कहा, “इजरायल नरसंहार कर रहा है। उसने 60,000 से ज़्यादा लोगों की हत्या की है, जिनमें 18,430 बच्चे थे। सैकड़ों लोगों को भूख से मरने के लिए मजबूर किया गया। इनमें कई बच्चे भी शामिल हैं। लाखों लोगों को भूखा मारने की धमकी दी जा रही है।”

केन्द्र सरकार पर इस मामले में निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए प्रियंका गाँधी ने कहा, “चुप्पी साधकर और निष्क्रियता से अपराधों को बढ़ावा देना अपने आप में एक अपराध है। यह शर्मनाक है कि भारत सरकार चुप बैठी है जबकि इजरायल फिलिस्तीन के लोगों पर तबाही मचा रहा है।”

दरअसल कॉन्ग्रेस ने 9 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायली हमले के दूसरे दिन खुले तौर पर फिलिस्तीनियों के समर्थन में प्रस्ताव पास किया था। इसमें फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का समर्थन किया था।

प्रस्ताव में कहा गया था कि CWC फिलिस्तीनी लोगों के जमीन, स्वशासन और आत्मसम्मान एवं गरिमा के साथ जीवन के अधिकारों के लिए अपने दीर्घकालिक समर्थन को दोहराती है। लेकिन इस प्रस्ताव में हमास के आतंकी हमले का जिक्र तक नहीं किया गया था। कॉन्ग्रेस की नीति में इजरायल का विरोध शुरू से नजर आता है। लेकिन भारत की विदेश नीति निस्पक्ष रही है। इसके तहत बगैर भेदभाव के मानवीय आधार पर सहायता भारत करता रहा है।

अगवा कर हिंदू नर्स से किया गैंगरेप, फिर सड़क पर फेंक दी क्षत-विक्षत लाश… कौन थी कश्मीरी पंडित सरला भट्ट, जिनकी हत्या में यासीन मलिक और उसके साथियों के ठिकानों पर छापे

जम्मू-कश्मीर में 1990 में हुई कश्मीरी पंडित सरला भट्ट की हत्या का मामला एक बार चर्चा में है। राज्य जाँच एजेंसी (SIA) ने इस मामले की जाँच आगे बढ़ाई है। मंगलवार (12 अगस्त 2025) को श्रीनगर में SIA ने 8 जगह छापेमारी की है। यह छापेमारी जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का मुखिया यासीन मलिक और उसके साथियों के घरों पर की गई है।

JKLF ही 1990 में हुए कश्मीरी पंडितों के नरसंहार का जिम्मेदार है। सरला भट्ट को भी इसी आतंकी संगठन ने अपहरण और गैंगरेप कर हत्या कर दी थी। इस घटना को 35 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सरला भट्ट को न्याय नहीं मिला है।

SIA को मामले की जाँच सौंपे जाने के बाद तेजी आई है। SIA को जाँच में सरला भट्ट की हत्या से जुड़े काफी सबूत मिले, जिसके आधार पर SIA आगे की कार्रवाई शुरू की गई।

कौन थीं सरला भट्ट?

27 साल की सरला भट्ट जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में रहने वाली एक कश्मीरी पंडित थीं। शायद यही उनका गुनाह था। जब 1990 में घाटी में कश्मीरी पंडितों का जिहादियों ने नरसंहार किया, तब सरला भी उसका शिकार हुईं।

वे कश्मीर के सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में एक नर्स के रूप में कार्यरत थीं। आतंकी उन्हें उठाकर ले गए 5 दिन बाद सड़क पर उनका शव पड़ा मिला था।

सरला भट्ट के शरीर के टुकड़े कर बाजार में फेंके गए

14 अप्रैल 1990 का दिन था। जब सरला भट्ट SKIMS के हब्बा खातून हॉस्टल से आतंकियों ने उन्हें बंदूक की नोक पर अगवा कर ले गए। सरला भट्ट का 5 दिन तक कुछ पता नहीं लगा। रिपोर्टों के अनुसार, उनके साथ गैंगरेप किया गया। उन्हें बुरी तरह टॉर्चर किया गया। 19 अप्रैल 1990 को उनका क्षत-विक्षत शव सड़क पर पड़ा मिला था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरला भट्ट के शव के पास एक नोट भी मिला था, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर बताया गया था। द हिंदू के मुताबिक, इस मामले में निगीन पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई थी। इसकी संख्या 56/1990 है। हालाँकि, इसमें हिंदू नर्स के साथ रेप का कोई जिक्र तक नहीं है। इस बर्बर मामले में JKLF के पूर्व नेता पीर नूरुल हक शाह उर्फ एयर मार्शल का भी नाम सामने आया था।

सरला भट्ट की हत्या में JKLF के खिलाफ सबूत

SIA को जब सरला भट्ट मामले की जाँच सौंपी गई तो JKLF सरगना यासीन मलिक और उसके साथियों के खिलाफ सबूत मिले। इसी के आधार पर SIA ने यासीन मलिक और उसके गुर्गों के घरों पर छापेमारी की है। बता दें कि यासीन मलिक आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के चलते तिहाड़ जेल में बंद है।

NIA ने यासीन मलिक को फाँसी की सजा सुनाने की माँग की है। यासीन मलिक पर 1990 में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार में शामिल होने के भी आरोप हैं।

700 से अधिक कश्मीरी पंडितों की हुई हत्या

सरला भट्ट केवल एकलौता नाम नहीं है, जिनकी बर्बरता से हत्या की गई। 1980-90 तक ऐसे 700 कश्मीरी पंडितों की घाटी में हत्या कर दी गई। ये हत्या कश्मीरी पंडितों के बीच दहशत फैलाने के लिए की गई थी।

आतंकी सरेआम हिंदू महिलाओं को घर से उठा ले जाते थे, कई माँ-बाप के सामने उनके बच्चों की हत्या हुई, हिंदुओं का मकान चुनकर निशाना बनाया जाता था। इन सब से परेशान होकर उस समय लगभग 3.5 लाख कश्मीरी पंडितों ने घाटी से पलायन किया।

रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 तक घाटी में केवल 728 गैर-प्रवासी पंडित ही बचे हैं, जबकि 2021 में 808 परिवारों की थी। ‘द कश्मीर फाइल्स’ भी कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार और उनके पलायन को दर्शाने वाली फिल्म थी, जिसमें घाटी की असलियत दिखाई गई थी।

जैसे ‘कबूल’ से हो जाता है निकाह, वैसे ही मुस्लिमों का तलाक भी जुबानी हो सकता है: ‘मुबारात’ पर गुजरात हाई कोर्ट का फैसला, कहा- अलग होने के लिए दस्तावेज जरूरी नहीं

मुस्लिम में तलाक अब मौखिक तौर पर लिए जा सकेंगे। गुजरात हाईकोर्ट ने इस पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट का कहना है कि ‘मुबारात’ के जरिए तलाक संभव है। ‘मुबारात’ का मतलब है आपसी सहमति से बगैर लिखित समझौते के मौखिक तौर पर लिया जाने वाला तलाक।

‘मुबारात’ के जरिए तलाक हो सकता है- हाई कोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट के वकील जस्टिस ए वाई कोगजे और जस्टिस एन एस संजय गौड़ा की खंडपीठ ने तलाक को लेकर दायर केस में सुनवाई के दौरान ये फैसला दिया। कोर्ट ने कुरान और हदीस का हवाला देते हुए राजकोट की एक फैमिली कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें मुस्लिम कपल के ‘मुबारात’ द्वारा तलाक से रोका गया था।

हाई कोर्ट ने कहा, “कुरान और हदीस के आयात या मुस्लिम पर्सनल लॉ से फैमिली कोर्ट का फैसला मेल नहीं खाता है। इनमें कही भी नहीं लिखा कि मुबारात के लिए लिखित समझौता जरूरी है।”

हाई कोर्ट का कहना है कि ऐसा कोई रिवाज मुस्लिम में नहीं है कि आपसी सहमति से तलाक के लिए रजिस्ट्री या रिटन कॉन्ट्रैक्ट जरूरी हो। निकाहनामा निकाह का दस्तावेज है। जैसे निकाह के लिए कबूल पर्याप्त है, वैसे ही तलाक के लिए मुबारात काफी है।

राजकोर्ट फैमिली कोर्ट ने क्या कहा था?

राजकोट की फैमिली कोर्ट का कहना था कि धारा 7 के तहत ये मुकदमा सुनने योग्य नहीं है क्योंकि तलाक के लिए आपसी सहमति के साथ लिखित समझौता जरूरी है। केस में लिखित समझौते का दस्तावेज संलग्न नहीं था इसलिए इसे खारिज कर दिया गया था।

हालाँकि हाई कोर्ट ने ये मामला एक बार फिर फैमिली कोर्ट में भेज दिया है और इसे 3 महीने के अंदर दोबारा सुनवाई करने के लिए कहा है।

मुस्लिम दंपति के तलाक का मामला

ये मामला ऐसे दंपति का है जिनका निकाह 2021 में बिहार में हुआ था। कुछ समय बाद दोनों मियाँ-बीवी में मतभेद शुरू हो गए । दोनों ने मुबारात के जरिए अलग होने का फैसला किया और राजकोट के फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए केस दायर किया।