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लिव इन ‘हराम’, इस्लाम में ‘जिना’ की सजा 100 कोड़े: जानिए हाई कोर्ट को क्यों कहना पड़ा- धर्मांतरण विरोधी कानून से बचने के लिए हो रहा इस्तेमाल

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पुरुष और दलित महिला के उस जोड़े को राहत देने से इनकार किया है, जिसने ‘लिव इन’ में रहने की बात करते हुए गिरफ्तारी पर रोक की गुहार लगाई थी। हाई कोर्ट ने कहा है कि इस्लामी कानून के अनुसार हिंदू और मुस्लिम का लिव इन में रहना ‘हराम’ है।

अदालत ने कहा कि इस्लामी कानून में ‘जिना’ की सजा 100 कोड़े हैं। मोटे तौर पर जिना का अर्थ निकाह के बगैर कामुक रिश्तों से है। अदालत ने कहा कि इस्लाम में निकाह से पहले ‘किस’ और ‘टच’ जैसी किसी भी प्रकार की यौन गतिविधि ‘हराम’ बताई गई है।

29 जुलाई 2025 के अपने इस आदेश में जस्टिस संगीता चंद्रा और ​जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ ने यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश में जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए बनाने गए कानून से बचने के लिए भी लिव इन का दुरुपयोग हो रहा है।

इस मामले में युवती के पिता ने BNS और SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई है। कोर्ट में युवक-युवती लिव इन में रहने से जुड़े पूरे सबूत भी नहीं दे पाए। इसके बाद कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे रिश्तों को धर्मांतरण के कानून या पर्सनल लॉ के तहत नैतिकता से बचने का बहाना नहीं बनाया जा सकता।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे एक-दूसरे से प्यार करते हैं। बालिग हैं। इसके कारण अपनी मर्जी से किसी के भी साथ रहने को स्वतंत्र हैं। लेकिन युवती के पिता और पुलिस उन्हें परेशान कर रही है। इस दलील को मानने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि कपल को साथ रहने के लिए उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी ऐक्ट के हिसाब से कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

क्या है इस्लाम का जिना, इस पर हाई कोर्ट ने क्या कहा?

इलाहाबाद हाई कोर्ट कहा, “इस्लामी कानून में निकाह के बिना यौन संबंध को मान्यता नहीं दी जा सकती। मियाँ-बीवी बीच के यौन संबंध के अलावा किसी भी अन्य यौन संबंध को ‘जिना’ माना गया है। इसमें निकाह से पहले या निकाह के बाद किसी गैर मर्द/औरत से संबंध भी शामिल है। इस तरह निकाह से पहले यौन संबंध इस्लाम में जायज़ नहीं है।”

हाई कोर्ट ने आगे कहा, “निकाह से पहले किसी भी प्रकार की यौन, कामुक, स्नेहपूर्ण क्रिया जैसे चुंबन, स्पर्श, घूरना जैसी चीजें इस्लाम में ‘हराम’ है क्योंकि इन्हें ‘ज़िना’ का हिस्सा माना जाता है। कुरान के अनुसार ऐसे अपराध की सजा व्यभिचार सौ कोड़े मारने की है। ‘सुन्नत’ में इसकी सज़ा पत्थर से मार-मारकर जान लेने की है।”

हाईकोर्ट के आदेश का हिस्सा

हाई कोर्ट ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अपनी रिश्ते को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर पाए। वे अपनी उम्र और अन्य जरूरी तथ्यों की जाँच कराए बगैर रिश्ते पर अदालत की मुहर चाहते थे। हाई कोर्ट ने इस दौरान लिव इन से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का हवाला भी दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि कुछ फैसले बालिगों के सहमति से बनाए संबंधों के पक्ष में हैं, लेकिन इन्हें सभी लिव इन रिलेशनशिप पर लागू नहीं माना जा सकता।

मुस्लिमों को लिव इन में रहने का अधिकार नहीं: हाई कोर्ट

इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अन्य फैसले में कहा ​था कि इस्लाम को मानने वाला व्यक्ति लिव इन रिलेशनशिप में रहने का दावा नहीं कर सकता। खासकर तब जब उसका जीवन साथी जीवित हो। यह फैसला जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनाया था।

लिव इन रिलेशनशिप पर क्या कहता है भारत का कानून?

भारतीय कानून में लिव इन रिलेशनशिप को खास तौर पर परिभाषित करने वाला कोई अधिनियम नहीं है। लेकिन इन संबंधों को संविधान के अनुच्छेद 21 से कानूनी अधिकार मिलता है। सुप्रीम कोर्ट यह मानता है कि वयस्कों को अपनी पसंद के साथी के साथ रहने का मौलिक अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा शर्मा बनाम वीएवी शर्मा 2013 के मामले में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर गाइडलाइंस दी हैं। इनमें ‘लिव-इन में रहने वालों का व्यस्क होना, एक तय अवधि तक साथ रहना, एक घर में साथ रहना, एक ही घर की वस्तुओं का इस्तेमाल करना, बच्चों को प्रेम से रखना और लोगों को यह जानकारी होना कि दोनों साथ रहते हैं’ जैसी चीजें शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2006) मामले में कहा है कि दो बालिगों के बीच सहमति से लिव इन संबंध कोई अपराध नहीं है, भले ही इसे अनैतिक माना जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में कट्टुकंडी एडथिल कृष्णन बनाम वाल्सन मामले में कहा कि लंबे समय के लिव इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जा सकता है। यदि कोई पुरुष और महिला सहमति से लंबे समय तक एक साथ रहते हैं तो उनके बच्चे को पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी से वंचित नहीं किया जा सकता है।

अखिलेश बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2020) में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि कोई पक्षकार पहले से विवाहित है तो लिव इन रिलेशनशिप अवैध मानी जा सकती है।

RG कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर रेप-मर्डर केस के 1 साल, न्याय तो दूर – न्याय माँगने वालों का भी दमन कर रही ममता सरकार: अब प्रदर्शन कर रही माँ पर पुलिस ने बरसाई लाठियाँ

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 9 अगस्त 2024 को महिला जूनियर डॉक्टर के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने राज्यभर में आक्रोश फैला दिया और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो छह हफ्तों से ज्यादा समय तक चले। ये प्रदर्शन अब भी जारी है, जिसे अब ममता सरकार ताकत के दम पर दबाने में जुट गई है।

अब, इस घटना को एक साल बीत चुका है, लेकिन द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता को न्याय दिलाने की माँग को लेकर प्रदर्शन करने वाले जूनियर डॉक्टरों को लगातार कानूनी और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

जिन डॉक्टरों ने विरोध का नेतृत्व किया, उनमें अनिकेत महतो, अशफाकउल्ला नैया, किंजल नंदा और देबाशीष हलदर प्रमुख नाम हैं। इन सभी को या तो दंडात्मक तरीके से दूर-दराज अस्पतालों में भेज दिया गया या फिर उन पर पुलिस एफआईआर, कोर्ट केस और जाँचों के जरिए दबाव डाला जा रहा है। डॉ अनिकेत महतो, अशफाकउल्ला नैया और देबाशीष हलदर को ऐसे समय में ट्रांसफर किया गया जब उन्हें मात्र तीन महीने पहले ही नई नियुक्तियाँ मिली थीं।

उन्होंने इस कार्रवाई को बदला बताया और इसके खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। सरकार का तर्क है कि यह ‘नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया’ है, लेकिन विरोध कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि यह साफ तौर पर उन्हें सबक सिखाने और आंदोलन दबाने की कोशिश है।

पुलिस ने कई डॉक्टरों को उस आंदोलन के सिलसिले में नोटिस भेजे हैं, जिसमें ‘अवैध जमावड़ा’, ‘पुलिस पर हमला’ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें से कुछ डॉक्टरों के घरों पर छापे भी मारे गए।

उदाहरण के तौर पर, डॉ अशफाकउल्ला नैया के खिलाफ उनकी डिग्री को लेकर एक शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा। डॉ किंजल नंदा से भी पूछताछ की जा रही है कि क्या उन्होंने फिल्मों में अभिनय करने से पहले संस्थान से अनुमति ली थी।

साथ ही उनके भत्तों और ड्यूटी घंटों की जानकारी भी माँगी गई है। डॉ अनिकेत महतो का कहना है कि वह अप्रैल से ड्यूटी से बाहर हैं और उन्हें वेतन भी नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि मानसिक रूप से भी वे इस स्थिति से बहुत प्रभावित हुए हैं।

डॉक्टरों की प्रमुख माँगें जैसे कि हेल्थ वर्कर्स की सुरक्षा, केंद्रीय रेफरल प्रणाली और रिक्त पदों की भर्ती अब तक पूरी नहीं की गई हैं। डॉक्टरों को संदेह है कि इस केस में केवल संजय रॉय ही नहीं, बल्कि और भी लोग शामिल हो सकते हैं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है।

हालाँकि सियालदह की एक अदालत ने जनवरी 2025 में संजय रॉय को दोषी ठहराया था, लेकिन अब भी पुलिस जाँच की निष्पक्षता और राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़िता के माता-पिता और साथी डॉक्टर आज भी इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों को अपनी नौकरी और मानसिक स्वास्थ्य की कीमत चुकानी पड़ रही है।

इस बीच, आरजे कर रेप-मर्डर केस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बंगाल पुलिस ने लाठीचार्ज भी कर दिया है, जिसमें पीड़िता की माँ को भी नहीं छोड़ा गया। इस लाठीचार्ज में पीड़िता की माँ गंभीर रूप से घायल हो गई। इस प्रदर्शन में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी, अग्निमित्रा पॉल और अन्य विधायक भी शामिल हुए, उन्हें भी पुलिस की हिंसा झेलनी पड़ी।

इस पूरी घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी महिला डॉक्टर की सुरक्षा और उसके लिए न्याय की माँग करना इतना महँगा पड़ सकता है कि उसकी कीमत एक डॉक्टर को अपनी नौकरी, मानसिक शांति और पेशेवर पहचान से चुकानी पड़े?

BRS ने सत्ता में रहते 600+ के फोन टैप करवाए, चुनाव हारते ही 62 हार्ड डिस्क नष्ट करवाए: जानिए कैसे तेलंगाना में 1 घंटे के लिए CCTV बंद कर सबूत मिटाने की हुई कोशिश

तेलंगाना विधानसभा का चुनाव हारते ही KCR के नेतृत्व वाली BRS सरकार ने 62 हार्ड डिस्क नष्ट कर दिए थे। ये हार्ड डिस्क 600 से अधिक प्रभावशाली लोगों की जासूसी से जुड़े थे। इनमें कई नेता, पत्रकार और एक्टिविस्ट शामिल थे। बीआरएस सरकार ने इनके फोन टैप करवाए थे। लेकिन चुनाव हारते ही करीब 1 घंटे के लिए सीसीटीवी कैमरे बंद कर हार्ड डिस्क नष्ट करवा दिए।

तेलंगाना की विशेष खुफिया शाखा (SIB) के हैदराबाद स्थित दफ्तर में 4 दिसंबर 2023 की रात को यह घटना हुई। रात 8:34 बजे से लेकर 9:34 बजे तक पूरे एक घंटे के लिए SIB ऑफिस के CCTV कैमरे बंद कर दिए गए थे। जाँच में सामने आया है कि इसी एक घंटे के अंदर 62 हार्ड डिस्क नष्ट किए गए।

इन हार्ड डिस्क को काटा गया, उन्हें पीसकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदला गया और फिर उन्हें एक नदी में फेंक दिया गया। ये सब SIB ऑफिस के एक छोटे से कमरे में हुआ।  

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार हैदराबाद पुलिस की जाँच में सामने आया है कि इन हार्ड डिस्क में 600 से ज्यादा प्रभावशाली लोगों की फोन टैपिंग से जुड़ी जानकारी थी। कहा जा रहा है कि भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने अपने कार्यकाल के दौरान इन लोगों की फोन रिकॉर्डिंग करवाई थी।

​जो तकनीक नक्सलियों से लड़ने के लिए उससे राजनीतिक विरोधियों की जासूसी

यह मामला एक बड़े जाँच का हिस्सा है, जिसमें यह आरोप है कि 5 वरिष्ठ पुलिस-खुफिया अधिकारी और एक टीवी चैनल के संचालक ने मिलकर करीब 600 लोगों की अवैध निगरानी (जासूसी) की। यह निगरानी उस समय की सत्तारूढ़ पार्टी BRS के फायदे के लिए की गई थी।

जिन लोगों की जासूसी की गई उनमें नेता, अफसर, व्यापारी और मौजूदा हाई कोर्ट के एक जज तक शामिल हैं। इनलोगों के परिजनों, ड्राइवर और दोस्तों के भी फोन टैप किए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि यह निगरानी उन तकनीकी सिस्टम्स के जरिए की गई, जिन्हें असल में नक्सली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनाया गया था। अब इस पूरे मामले की गहराई से जाँच चल रही है।

बीजेपी नेता ने दर्ज कराया बयान

जिन लोगों की निगरानी की गई उनमें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और बीजेपी नेता बांदी संजय कुमार के होने की बात भी कही जा रही है। वे शुक्रवार (8 अगस्त 2025) को हैदराबाद पुलिस के सामने पेश हुए। बयान दर्ज कराने के बाद उन्होंने दावा किया कि इस जासूसी मामले में करीब 6500 फोन टैप किए गए थे। इनमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और BRS के कई विधायकों के फोन भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अलग टीम सिर्फ रेवंत रेड्डी और उनके करीबियों की निगरानी के लिए बनाई गई थी।

किसके आदेश पर नष्ट किए गए हार्ड डिस्क?

जाँचकर्ताओं का मानना है कि डिस्क को नष्ट करने का आदेश उस समय के SIB प्रमुख टी प्रभाकर राव ने दिया था। उन्होंने राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार बनने के ठीक एक दिन बाद 4 दिसंबर 2023 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में राव ने दावा किया है कि डेटा नष्ट करने का फैसला 2 दिसंबर को ही ले लिया गया था। यह फैसला  एक समिति द्वारा लिया गया था। इस समिति में मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव और विधि सचिव शामिल थे।

डिस्क के अंदर क्या था?

पुलिस का कहना है कि नष्ट की गई ज्यादातर डिस्कों में ‘राजनीतिक खुफिया जानकारी’ थी। जिसमें नेताओं की निजी प्रोफाइल, फोन पर हुई बातचीत और ऑनलाइन चैट्स थे। हालाँकि कुछ डिस्क में CPI (माओवादी) से जुड़ी जानकारी भी थी, जिसे इकट्ठा करना SIB का काम होता है। जाँचकर्ताओं के मुताबिक, इन ड्राइव को नष्ट करने से कई दशकों की उपयोगी खुफिया जानकारी खत्म हो गई और यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है।

SOT के पास भी थे ​नष्ट किए गए डिस्क

62 डिस्कों में से 36 डिस्क एक स्पेशल ऑपरेशंस टीम (SOT) के कंट्रोल में थी, जो 2020 में SIB  के तहत बनाई गई थी। यह टीम नक्‍सल गतिविधियों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक जासूसी पर फोकस कर रही थी। इस टीम का नेतृत्व डीएसपी डी प्रनीत कुमार, जिन्हें प्रनीत राव के नाम से भी जाना जाता है, कर रहे थे। उन्हें इस मामले में बाद गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अब वे जमानत पर बाहर हैं। प्रनीत राव के पास SIB दफ्तर में तीन अलग कमरे, 11 स्टाफ मेंबर, 17 डेस्कटॉप कंप्यूटर, दो लैपटॉप, अलग फोन लाइन और एक प्राइवेट इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा थी।

किसके आदेश पर हुए फोन टैप?

जाँच में पता चला है कि SOT विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों को चिट्ठी भेजकर फोन कॉल्स को इंटरसेप्ट (जासूसी के लिए सुनने) करने की अनुमति माँगता था। इस प्रक्रिया को ‘लीगल इंटरसेप्शन’ कहा जाता है। इसे प्रभाकर राव नाम के अधिकारी द्वारा मँजूरी दी जाती थी।

कानून के मुताबिक, ऐसे डेटा को हर छह महीने में नष्ट करना जरूरी होता है। लेकिन इस मामले में एक गवाह ने पुलिस को बताया कि डेटा नष्ट करने का आदेश एक महीने पहले ही आ गया। इस दौरान CCTV कैमरे भी बंद कर दिए गए, जबकि ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी।

गौर करने वाली बात यह है कि किसी मशीन में खराबी आने पर भी टेक्नीशियन को SOT रूम के अंदर जाने की इजाजत नहीं होती थी। उन्हें मशीन बाहर ही लेकर मरम्मत करनी पड़ती थी।

एक निजी निगरानी कंपनी से सहायता

हैदराबाद की एक निजी कंपनी के साथ मिलकर SOT निगरानी कर रही थी। यह निगरानी कंपनी ऑनलाइन चैट्स, जैसे WhatsApp पर होने वाली बातचीत को इंटरसेप्ट करने में माहिर है। जाँचकर्ताओं के मुताबिक, इस कंपनी ने SOT को तीन खास तकनीकी टूल दिए।

पहला टूल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X, Facebook, Instagram, YouTube और Snapchat से जानकारी निकालने के लिए था। दूसरा टूल नेटवर्क डेटा को डिक्रिप्ट यानी पढ़ने लायक बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। वहीं तीसरे टूल की मदद से टारगेट किए गए मोबाइल फोनों से WhatsApp मैसेज पढ़े जा सकते हैं।

कैसे शुरू हुआ विरोधियों की निगरानी का खेल?

तेलंगाना में अवैध फोन टैपिंग और निगरानी की शुरुआत 2018-19 में हुई थी। लेकिन नवंबर 2023 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले यह बेहद तेज हो गया। 16 नवंबर से 30 नवंबर (चुनाव वाले दिन) तक, कम से कम 600 लोगों की जासूसी की गई। यह SIT की रिपोर्ट में सामने आया है।

जिन लोगों की निगरानी की गई, उनमें प्रमुख राजनीतिक नेता भी शामिल थे। उदाहरण के तौर पर तेलंगाना प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ और केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार। इस मामले का खुलासा मार्च 2024 में तब हुआ जब SIB  के एक एडिशनल एसपी ने डीएसपी प्रनीत राव के खिलाफ FIR दर्ज कराई। उन पर गलत तरीके से जानकारी इकट्ठा करने का आरोप है।

बाद में पंजागुट्टा पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को आरोपित बनाया। इनमें पूर्व SIB प्रमुख टी प्रभाकर राव, डीएसपी प्रनीत राव, एएसपी एम तिरुपथन्ना, एन भुजंगा राव, पूर्व डीसीपी टी राधा किशन राव, टीवी चैनल मालिक एन श्रवण कुमार शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रभाकर राव को अगस्त तक गिरफ्तारी से छूट दी है। बाकी आरोपितों को पहले गिरफ्तार किया गया, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई। एन श्रवण कुमार अभी भी चंचलगुड़ा जेल में हैं। हालाँकि उन्हें फोन टैपिंग केस में अंतरिम राहत मिल चुकी है।

जाँच अधिकारियों के मुताबिक, इस निगरानी के लिए भारतीय टेलीग्राफ नियमों की धारा 419(A) का गलत इस्तेमाल किया गया। यह नियम केवल उच्च सरकारी अधिकारियों या आपात स्थिति में विशेष रूप से अधिकृत अधिकारियों को फोन इंटरसेप्ट करने की अनुमति देता है। लेकिन इस मामले में इसे तोड़-मरोड़कर ऐसे लोगों की जासूसी की गई जिनका नक्सलवाद या किसी सुरक्षा खतरे से कोई लेना-देना नहीं था। यानी यह सब राजनीतिक फायदे के लिए किया गया।

क्या है IAF का ‘सुदर्शन’, जिसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मार गिराए पाकिस्तान के 6 विमान: बोले एयरफोर्स चीफ- राजनीतिक इच्छाशक्ति ने दिलाई जीत

ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तानी रक्षा पंक्ति की कमर तोड़ कर रख दी। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी वायुसेना को भारी नुकसान पहुँचाते हुए 1 अवॉक्स सिस्टम और कम से कम 5 फाइटर जेट्स को तबाह कर दिया। भारत के एयरफोर्स के मुखिया एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बेंगलुरु में 16वें एयर चीफ मार्शल एलएम कात्रे लेक्चर के दौरान इस ऑपरेशन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने रूस निर्मित एस-400 हवाई रक्षा प्रणाली ( भारत में ‘सुदर्शन’) का इस्तेमाल कर 5 पाकिस्तानी फाइटर जेट और एक बड़ा AEW&C (एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) विमान 300 किलोमीटर की दूरी से मार गिराया। यह अब तक की सबसे लंबी दूरी से हवाई हमले में दर्ज की गई कामयाबी है।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, “हमने कम से कम पाँच फाइटर जेट और एक बड़े विमान को पक्के तौर पर मार गिराया। यह बड़ा विमान या तो ELINT विमान था या AEW&C विमान। इसे 300 किलोमीटर की दूरी से निशाना बनाया गया। यह अब तक का सबसे लंबी दूरी का सतह से हवा में मार करने वाला हमला है।”

पाकिस्तानी हवाई ठिकानों पर भारी तबाही

वायुसेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ, जो 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था। इस हमले में पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की जान ले ली थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि पाकिस्तान के शहबाज जैकोबाबाद हवाई अड्डे पर हमला किया गया, जहाँ एक F-16 हैंगर को नष्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा, “शहबाज जैकोबाबाद हवाई अड्डा, जो एक बड़ा हवाई ठिकाना है, वहाँ F-16 का हैंगर था। इसका आधा हिस्सा पूरी तरह से तबाह हो गया। हमें यकीन है कि वहाँ कुछ और विमान थे, जो नष्ट हो गए।” इसके अलावा मुरिदके और चकलाला जैसे कमांड और कंट्रोल सेंटर, छह रडार और भोलारी में एक AEW&C हैंगर पर भी हमला किया गया। भोलारी में एक और AEW&C विमान के नष्ट होने की पुष्टि हुई है।

सुदर्शन मिसाइल सिस्टम साबित हुआ गेमचेंजर

एयर चीफ मार्शल सिंह ने सुदर्शन (S-400) मिसाइल सिस्टम की तारीफ करते हुए कहा कि यह हथियार भारतीय वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। उन्होंने कहा, “हमारी हवाई रक्षा प्रणालियों ने शानदार काम किया। सुदर्शन सिस्टम ने गेम बदल दिया। इसकी लंबी रेंज की वजह से पाकिस्तानी विमान अपने लंबी दूरी के ग्लाइड बम जैसे हथियारों का इस्तेमाल नहीं कर पाए। वे हमारे सिस्टम में घुसपैठ नहीं कर सके।”

उन्होंने आगे बताया कि पाकिस्तानी विमान आकाश और MRSAM की सीमा के पास भी नहीं आ सके। सभी विमान LRSAM की रेंज में आए और वहीं निशाना बनाए गए। सिंह ने कहा, “उनके विमान हमारी सीमा के पास नहीं आ सके। वे दूर रहने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन फिर भी वे हमारी रेंज में थे। यही मौके थे, जिन्हें हमने भुनाया।”

मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा का ठिकाना तबाह

वायुसेना प्रमुख ने मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय पर हमले की तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने कहा, “यह उनके वरिष्ठ नेताओं का रिहायशी इलाका था। यहीं उनकी ऑफिस बिल्डिंग थी, जहाँ वे मीटिंग करते थे। हमें हथियारों से वीडियो मिले, क्योंकि यह जगह हमारी रेंज में थी।”

तस्वीरों में साफ दिखा कि हमले में आतंकी ठिकाने पूरी तरह तबाह हो गए, लेकिन आसपास की इमारतों को कोई नुकसान नहीं हुआ। सिंह ने कहा, “हमें सैटेलाइट तस्वीरों के साथ-साथ स्थानीय मीडिया से भी तस्वीरें मिलीं, जिनसे हमें अंदर की स्थिति का पता चला।”

पाकिस्तान को बहुत नुकसान पहुँचा

एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने कई हवाई ठिकानों को निशाना बनाया, ताकि पाकिस्तान को यह संदेश जाए कि भारत कहीं भी, कभी भी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमारा मकसद एक हवाई अड्डे को पूरी तरह तबाह करना नहीं था। हम चाहते थे कि उन्हें यह एहसास हो कि हम उनके क्षेत्र में गहराई तक हमला कर सकते हैं।”

पाकिस्तान के सरगोधा हवाई अड्डे पर हमले का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा, “हमारी वायुसेना में हम बचपन से सरगोधा पर हमले का सपना देखते थे। मुझे रिटायर होने से पहले यह मौका मिला। हमने वहाँ हवाई अड्डे पर हमला किया।”

एयर चीफ मार्शल ने आगे बताया कि 80 से 90 घंटे के इस हाई-टेक युद्ध में भारत ने इतना नुकसान पहुँचाया कि पाकिस्तान को समझ आ गया कि अगर वे जारी रखते हैं, तो और भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत के DGMO को बातचीत का संदेश भेजा, जिसे भारत ने स्वीकार किया।

सुदर्शन यानी S-400 मिसाइल सिस्टम

भारतीय वायुसेना ने S-400 मिसाइल सिस्टम का नाम ‘सुदर्शन‘ रखा है, जो भगवान कृष्ण के प्राथमिक हथियार सुदर्शन चक्र से प्रेरित है। सुदर्शन चक्र एक बार चलने के बाद अपने लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट कर देता है। वायुसेना ने इस सिस्टम को पूरी तरह एकीकृत कर लिया है और इसके तीन स्क्वाड्रन पहले ही तैनात किए जा चुके हैं। भारत ने 2018-19 में रूस के साथ 35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से 5 स्क्वाड्रन के लिए समझौता किया था। तीन स्क्वाड्रन मिल चुके हैं, और बाकी दो 2026 तक मिलने की उम्मीद है।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की वजह से डिलीवरी में देरी हुई है, लेकिन भारत ने स्वदेशी और इजरायली मिसाइल सिस्टम जैसे प्रोजेक्ट कुशा, आकाश, MRSAM और स्पाइडर क्विक रिएक्शन मिसाइल सिस्टम को भी अपनी सेना में शामिल किया है।

राजनीतिक इच्छाशक्ति ने दिलाई जीत

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि ऑपरेशन की सफलता का एक बड़ा कारण सरकार की स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति थी। उन्होंने कहा, “हमें कोई राजनीतिक बाधा नहीं आई। हमें पूरी आजादी दी गई थी। हमने खुद तय किया कि कितना बढ़ाना है। हमने हमले को सोच-समझकर अंजाम दिया, क्योंकि हम परिपक्व तरीके से जवाब देना चाहते थे।”

ऑपरेशन रोकने का फैसला एकदम सही

एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा, “लोगों ने युद्ध में अपने अहंकार को बीच में ला दिया। एक बार जब हमने अपने लक्ष्य हासिल कर लिए, तो हमें रुकने के लिए सभी मौकों को देखना चाहिए था। मेरे कुछ करीबी लोग कह रहे थे, ‘और मारना था।’ लेकिन क्या हम हमेशा युद्ध में रह सकते हैं? देश ने शांति का सही फैसला लिया।”

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने अपनी ताकत और तकनीकी श्रेष्ठता का शानदार प्रदर्शन किया। सुदर्शन मिसाइल सिस्टम ने न सिर्फ पाकिस्तानी विमानों को दूर रखा, बल्कि उन्हें भारी नुकसान भी पहुँचाया। यह ऑपरेशन भारत की सैन्य ताकत और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का प्रतीक बन गया है।

भगवान श्रीकृष्ण की फोटो पोस्ट कर की गंदी बातें, ​तमिलनाडु पुलिस पता भी नहीं लगा पाई: हाई कोर्ट ने लगाई क्लास, कहा- हिंदू देवी-देवताओं का अपमान नहीं कर सकते

फेसबुक पर भगवान श्रीकृष्ण की फोटो पोस्ट कर एक व्यक्ति ने अपमानजनक बातें की। तमिलनाडु पुलिस ने इस मामले में फाइनल रिपोर्ट यह कहते हुए दाखिल कर दी कि ‘आरोपित’ का पता नहीं चल सका है। मद्रास हाई कोर्ट ने इस पर फटकार लगाते हुए कहा है कि हिंदू देवी-देवताओं का अपमान नहीं किया जा सकता है।

अदालत ने यह भी कहा है कि बोलने की स्वतंत्रता का मतलब हिंदुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाना नहीं है। इससे धार्मिक आक्रोश भड़क सकता है और कानून व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो सकता है। मजिस्ट्रेट कोर्ट की रिपोर्ट को रद्द कर पुलिस को तीन महीने के भीतर जाँच कर इस मामले में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

हाई कोर्ट ने कहा है कि तूतीकोरिन पुलिस ने जाँच में लापरवाही की है। फाइनल रिपोर्ट जल्दबाजी में दाखिल की है। उल्लेखनीय है कि सतीश कुमार नाम के व्यक्ति ने अगस्त 2022 में फेसबुक पर यह अपमानजनक पोस्ट की थी। उसने भगवान कृष्ण द्वारा गोपियों के वस्त्र चुराने की तस्वीर के साथ अभद्र कैप्शन लिखे थे।

भगवान श्रीकृष्ण के अपमान पर मद्रास हाई कोर्ट सख्त

बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने कहा कि देवी-देवताओं के चित्रण को लेकर ज्यादा संवेदनशीलता बरतनी चाहिए और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना न हो। जस्टिस के मुरली शंकर ने 4 अगस्त के आदेश में कहा है, “हिंदू देवी-देवताओं को अपमानजनक तरीके से दिखाना, जानबूझकर लाखों-करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना है। इसे किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता। इससे धार्मिक शत्रुता और सामाजिक अशांति फैल सकती है।”

उन्होंने कहा, “धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था को देखते हुए उनका अपमान समाज के बड़े हिस्से को आहत कर सकता है और सामाजिक अशांति फैल सकती है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना न हो।”

अदालत ने कहा कि भगवान कृष्ण द्वारा गोपियों के कपड़े छिपाने की कहानी एक प्रतीकात्मक कथा है। इसकी कई तरह से व्याख्या की जाती है। इनमें से एक के अनुसार यह जानने के लिए भगवान ने परीक्षा ली थी कि क्या गोपियों की भक्ति सांसारिक मोह-माया से ऊपर है? कोर्ट ने कहा, “यह कहानी आध्यात्मिक साधना और विरक्ति के महत्व को दर्शाती है।”

भगवान श्रीकृष्ण को लेकर किया था अपमानजनक पोस्ट

सतीश कुमार नामक व्यक्ति के अकाउंट से टिप्पणी की गई थी कि कृष्ण जन्माष्टमी उनका त्योहार है, जिन्होंने नहाती हुई महिलाओं के कपड़े चुरा लिए थे। इस मामले में पी. परमेसिवन नामक शख्स ने शिकायत दर्ज कराई थी कि यह पोस्ट हिंदू देवी-देवताओं के अपमान के इरादे से की गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी चिंता जताई थी कि यह पोस्ट कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ सकती है।

इसी साल फरवरी में पुलिस ने निचली कोर्ट में ‘निगेटिव फाइनल रिपोर्ट’ दाखिल की। इसमें कहा गया कि उन्होंने पोस्ट अपलोड करने वाले फेसबुक यूज़र की जानकारी के लिए मेटा से संपर्क किया। लेकिन उन्हें यूज़र की जानकारी नहीं मिल पाई। ट्रायल कोर्ट ने पुलिस की इस निगेटिव रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और मामले को बंद कर दिया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

तमिलनाडु पुलिस को हाई कोर्ट ने फटकारा

हाई कोर्ट ने इस मामले में एमके स्टालिन सरकार की पुलिस को फटकार लगाई है कि उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि फिर से जाँच शुरू कर 3 महीने के भीतर फाइनल रिपोर्ट दाखिल करे। हाई कोर्ट ने कहा, “गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस ने मामले को लापरवाही से देखा, जाँच रोक दी और इसे ‘अनडिटेक्टेड’ बताकर बंद कर दिया।”

हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने जाँच सिर्फ फेसबुक से जानकारी माँगने तक सीमित रखा। कोर्ट ने बताया कि जिस फेसबुक पेज की बात हो रही है, उस पर पहले से कुछ निजी जानकारी मौजूद थी जिसे देखकर फेसबुक यूजर को खोजा जा सकता था। हाई कोर्ट ने कहा कि जाँच को गंभीरता से नहीं किया गया और फाइनल रिपोर्ट बस औपचारिक तौर पर दाखिल कर दी गई।

हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को लेकर कहा कि उन्होंने केस बंद करते समय फाइनल रिपोर्ट पर उठाए गए आपत्तियों पर ध्यान ही नहीं दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार करने का मजिस्ट्रेट का आदेश कानूनी रूप से सही नहीं था।

जिस इलाके में पसरा था आतंकी संगठन SIMI, वही ‘लव जिहाद’ का अड्डा: MP में 283 मामले हुए दर्ज, इस्लामी साजिश के विरोध में सड़क पर उतरे हिंदू

मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने विधानसभा में लव जिहाद से जुड़े आँकड़े पेश किए हैं। इसके अनुसार जनवरी 2020 से 15 जुलाई 2024 तक प्रदेश में लव जिहाद के 283 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 73 पीड़िता नाबालिग है।

इन आँकड़ों से यह भी पता चलता है कि लव जिहाद के सर्वाधिक मामले मालवा-निमाड़ अंचल से सामने आए हैं। इसी इलाके में कभी प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी (SIMI) भी पसरा हुआ था। इंदौर भी इसी इलाके में आता है, जहाँ से हाल ही में ‘मुस्लिम गैंग’ द्वारा हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने के कई मामले सामने आए हैं।

विधानसभा में रखे गए आँकड़ों से यह भी पता चलता है कि काफी मामलों में पीड़िता दबाव नहीं झेल पाती हैं। वे या तो गवाही के दौरान पलटने को मजबूर हो जाती हैं या फिर दबाव बनाकर ‘सुलह’ कर लिया जाता है। आँकड़े बताते हैं कि अब तक ऐसे 86 मामलों में से 50 मामलों में आरोपित बरी हो चुके हैं। सजा केवल 7 मामलों में हुई है। एक मामला ‘सुलह’ के कारण खत्म हो गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहर, जहाँ पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है, वहाँ भी लव जिहादी लड़कियों को अपना निशाना बना रहे हैं। इंदौर के सिर्फ नगरीय क्षेत्र के पुलिस थानों में लव जिहाद के 55 मामले दर्ज किए गए है। वहीं, पूरे इंदौर जिले में लव जिहाद के 74 मामले सामने आए हैं। यह पूरे राज्य में सर्वाधिक है। इसके अलावा राजधानी भोपाल में लव जिहाद के 33 मामले, खंडवा और उज्जैन में 12-12 मामले और छतरपुर में 11 मामले दर्ज किए गए हैं। राज्य के अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज 283 मामलों में से 197 कोर्ट में लंबित हैं।

लव जिहाद पर MP सरकार ने विधानसभा में क्या बताया?

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीजेपी विधायक आशीष गोविंद शर्मा के सवाल के जवाब में विधानसभा में लव जिहाद के मामलों को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा, “2020 से लेकर अब तक हुए लव जिहाद के प्रकरणों में प्रदेश के सभी जिलों में असुरक्षित बालिकाओं/महिलाओं को लक्ष्य बनाकर उनका शोषण करने एवं भय या दबाव पूर्वक मतांतरण कराने की घटनाओं की जाँच के लिए पुलिस मुख्यालय ने 4 मई 2025 को राज्य स्तरीय विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है।”

CM मोहन यादव ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि पुलिस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है और पीड़ितों को कानूनी मदद भी मिल रही है। ये मामले मध्य प्रदेश धार्मिक स्वंतत्रता अधिनियम 2021 के तहत दर्ज किए गए हैं।

लव जिहाद के खिलाफ हिंदू पंचायत

मध्य प्रदेश में लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं को लेकर उज्जैन में शुक्रवार (8 अगस्त 2025) को हिंदू पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें साधु-संतों समेत हजारों हिंदू परिवार शामिल हुए और पूरे शहर में लव जिहाद की घटनाओं के खिलाफ रैली निकाल गई। साथ ही, इस पंचायत में जिहादियों का समर्थन करने वाले समाज का आर्थिक बहिष्कार करने का फैसला लिया गया।

लव जिहाद कहीं बड़ी आतंकी साज़िश तो नहीं?

हिंदू युवतियों को लव जिहाद के जाल में फँसा कर उनकी जिंदगी तबाह करने की साजिश का केंद्र बना मालवा-निमाड़ अंचल वही इलाका है, जहाँ सिमी जैसे इस्लामिक आतंकी संगठन गहराई से अपनी जड़ें जमा चुके थे। सिमी का गढ़ रहे बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन जैसे जिलों से कुछ वर्षों पहले खबरें आई थीं कि ISIS यहाँ अपना नेटवर्क बना रहा है।

ऐसे में यह सवाल भी उठने लगे हैं कि लव जिहाद की साजिश के पीछे आतंकियों का कोई संगठित गिरोह तो साजिश नहीं कर रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी लव जिहाद के पीछे संगठित किसी साजिश की ही आशंका जताई है। ऐसे में इन तथ्यों को और बल मिलता है कि शहरी क्षेत्रों में सफेदपोश लोगों ने सिमी या उस जैसा कोई आतंकी नेटवर्क ने खड़ा कर लिया है और यही लोग लव जिहाद को अंजाम दे रहे हैं।

354 वैगन, 7 इंजन-6 रेक, लंबाई- 4.5 किमी… क्या है ‘रुद्रास्त्र’ जिससे भारतीय रेलवे ने रचा नया कीर्तिमान, जानिए दुनिया की सबसे लंबी मालगाड़ी कहाँ

भारतीय रेलवे ने अपनी अब तक की सबसे लंबी मालगाड़ी ट्रेन ‘रुद्रास्त्र (Rudrastra)’ लॉन्च किया है। यह ट्रेन करीब 4.5 किलोमीटर लंबी है। इसमें 7 इंजन हैं। इसे 6 खाली बॉक्सन रेक को जोड़कर तैयार किया गया है। इसमें 354 वैगन हैं।

जानकारी के अनुसार, इसका संचालन पूर्व मध्य रेल के दीनदयाल उपाध्याय मंडल (DDU) के गंजख्वाजा स्टेशन से गढ़वा रोड स्टेशन तक किया गया। ‘रुद्रास्त्र’ ने उत्तर प्रदेश के गंजख्वाजा स्टेशन से झारखंड के गढ़वा रोड स्टेशन तक का 200 किलोमीटर का सफर लगभग 5 घंटे में पूरा किया।

इस दौरान इसकी औसत रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा रही। ट्रेन का कुछ हिस्सा Dedicated Freight Corridor (DFC) पर चला और बाकी सफर सामान्य पटरियों पर हुआ।

यह मालगाड़ी मुगलसराय के पास स्थित गंज ख्वाजा स्टेशन से खुलने के बाद भभुआ रोड, सासाराम, डेहरी ऑन सोन और सोननगर होते हुए झारखंड के गढ़वा रोड स्टेशन पहुँची। इसके बाद इसे अगले रेल मंडल को हैंडोवर कर दिया गया। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक्स पर इस मालगाड़ी का एक वीडियो भी साझा किया है।

क्यों है ‘रुद्रास्त्र’ खास?

इस ट्रेन को 6 अलग-अलग रेक को जोड़कर बनाया गया है। अगर ये 6 एक अलग-अलग चलाई जातीं, तो हर एक के लिए अलग क्रू व्यवस्था, शेड्यूलिंग और रूटिंग करनी पड़ती। एक साथ चलाने से रेलवे का समय, स्टाफ और संचालन खर्च बचता है। इससे माल ढुलाई तेज और किफायती हो जाती है, जो भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए बड़ा कदम है।

इसे लेकर पूर्व मध्य रेलवे मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चन्द्र ने कहा,“ रुद्रास्त्र’ न केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण है, बल्कि यह माल ढुलाई के भविष्य के लिए एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है जो समय, लागत और श्रम की बचत करेगी। 54 वैगन, 7 इंजन और 4.5 किलोमीटर लंबी ‘रुद्रास्त्र’ मालगाड़ी का सफल संचालन डीडीयू मंडल की नई सोच और नवाचार की शानदार मिसाल है।” 

एशिया की सबसे लंबी मालगाड़ी है रुद्रास्त्र

‘रुद्रास्त्र’ के संचालन के लिए पूर्व मध्य रेलवे के DDU डिवीजन ने विशेष तकनीकी समन्वय और नियंत्रण किया है। यहाँ मालगाड़ियों के डिब्बों की मरम्मत और तकनीकी जाँच कर उन्हें फिर से जोड़ने का कार्य किया जाता है। यह डिवीजन मालगाड़ी डिब्बों की मरम्मत और निरीक्षण में माहिर है। इस उपलब्धि को इनकी दक्षता, नवाचार और टीम वर्क का परिणाम माना जा रहा है।

DDU मंडल के डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) उदय सिंह मीणा ने कहा, “यह एक नया प्रयोग है। इससे माल ढुलाई और लोडिंग तेज होगी। इससे न केवल संसाधनों की बचत होगी, बल्कि समय की भी बचत होगी। इससे भारतीय रेलवे को फायदा होगा। रुद्रास्त्र मालगाड़ी रेलवे के रिकॉर्ड के अनुसार एशिया की सबसे लंबी मालगाड़ी है।”

वैसे दुनिया की सबसे लंबी मालगाड़ी अभी ऑस्ट्रेलिया की BHP कंपनी के पास है। इसकी लंबाई 7.3 किलोमीटर है और उसमें 682 वैगन हैं।

रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत में मिली, सोनिया गाँधी के दामाद होने का फायदा: ED, संपत्ति छिपाने में कॉन्ग्रेस MP प्रियंका वाड्रा भी नपेंगी?

कॉन्ग्रेस महासचिव और वायनाड की सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत में मिली थी। बाद में यह जमीन वाड्रा ने 58 करोड़ रुपए में रियल एस्टेट कंपनी DLF को बेच दी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में यह खुलासा किया है।

यह जमीन गुरुग्राम के सेक्टर 83 में है। वाड्रा ने जमीन के बदले 7.5 करोड़ रुपए भुगतान का दावा किया था। लेकिन यह चेक कभी क्लियर ही नहीं हुआ। चार्जशीट में कहा गया है कि सोनिया गाँधी के दामाद होने का फायदा वाड्रा को मिला। इसके कारण हरियाणा के तत्कालीन कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा उनके प्रभाव में थे।

रॉबर्ट वाड्रा पर ED की चार्जशीट

ED ने 17 जुलाई 2025 को यह चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें कहा गया है कि ओंकारेश्वर प्रॉप्रटीज प्राइवेट लिमिटेड (OPPL) ने जमीन स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (SLHPL) को रिश्वत के तौर पर दी थी ताकि SLHPL के निदेशक रॉबर्ट वाड्रा अपनी व्यक्तिगत पहुँच का इस्तेमाल कर हरियाणा के तत्कालीन ‘नगर एवं ग्राम नियोजन’ मंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से OPPL को उसी गाँव में हाउसिंग लाइसेंस दिला सकें।

इससे पहले ED ने बताया था कि उन्होंने वाड्रा से जुड़ी 37 करोड़ रुपए की संपत्तियाँ अटैच की थी। इसमें वाड्रा और 10 अन्य लोगों पर 58 करोड़ रुपए की ‘अपराध की कमाई’ को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए सफेद करने का आरोप है।

प्रियंका गाँधी तक पहुँची जाँच की आँच

इस मामले में वायनाड की सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा तक भी जाँच की आँच पहुँच गई है। ED की चार्जशीट में फरीदाबाद के अमीपुर गाँव में 39.7 एकड़ की 3 हाई-वैल्यू संपत्तियों का जिक्र है, जिनकी जानकारी प्रियंका ने चुनावी हलफनामे में नहीं दी है। यह मामला केरल हाई कोर्ट में है और अदालत ने नोटिस भी जारी किया है। गौरतलब है कि चुनावी हलफनामे में झूठी या अधूरी जानकारी देने को ‘भ्रष्ट आचरण’ के तौर पर देखा जाता है और इसमें अयोग्यता और जेल की सजा हो सकती है।

कैसे खुला रॉबर्ट वाड्रा का फर्जीवाड़ा?

ED की जाँच के दौरान हरियाणा सरकार के अधिकारियों और OPPL के प्रमोटरों सहित कम से कम 20 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इन लोगों ने शुरू में दावा किया था कि वाड्रा ने जमीन के लिए 7.5 करोड़ रुपए का भुगतान किया था, लेकिन ED ने इस बयान को झूठा बताया है।

ED ने गुरुग्राम पुलिस से वाड्रा के इस कथित भुगतान की जाँच करने को कहा। जाँच में पुलिस उपायुक्त ने पाया कि SLHPL ने OPPL से 3.53 एकड़ ज़मीन 12 फरवरी 2008 को सेल डीड नंबर 4928 के जरिए खरीदी थी। कागजों में दिखाया गया कि भुगतान चेक नंबर 607251 से किया गया है, लेकिन यह चेक कभी क्लियर ही नहीं हुआ। इसके 6 महीने बाद एक और चेक से रकम दी गई।

यह चेक Skylight Realty Pvt Ltd (SLRPL) का था, न कि खरीददार कंपनी SLHPL का। SLHPL की पूँजी केवल 1 लाख थी और SLRPL के खाते में भी 7.5 करोड़ रुपए नहीं थे। 45 लाख का स्टांप ड्यूटी भी बेचने वाले ने दी थी, न कि वाड्रा की कंपनी ने। ईडी के अनुसार, रजिस्ट्री में झूठा भुगतान दिखाकर सौदा बेनामी तरीके से किया गया।

भारत पर बेअसर ट्रंप की टैरिफ की धमकियाँ, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला के बाद पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से की बात: उल्टा पड़ेगा अमेरिका का टैरिफ वाला दाँव?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए टैरिफ वॉर और भारत की दी गई रूस से तेल ना खरीदने की धमकी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार (8 अगस्त 2025) को फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में भारत ने यूक्रेन संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकालने का अपना रुख दोहराया है।

डोनाल्ड ट्रंप ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के साथ जो टैरिफ वॉर शुरू किया था, वो अब अन्य देशों को और पास लाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाकर भारत को धमकाने की कोशिश की कि वो रूस से तेल ना खरीदे लेकिन भारत ने दिखा दिया है कि वो किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। पुतिन से पीएम मोदी की यह बातचीत भारत की स्वतंत्र नीति पर मुहर की तरह है।

मोदी-पुतिन की बातचीत पर क्या बोली भारत सरकार?

पीआईबी ने दोनों नेताओं की बातचीत को लेकर प्रेस रिलीज जारी की है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को यूक्रेन के ताजा हालात की जानकारी दी और पीएम मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत के रुख को दोहराया है।

पीआईबी ने बताया कि दोनों नेताओं ने अपने द्विपक्षीय एजेंडे में हुई प्रगति को लेकर भी बातचीत की है और भारत-रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, पीएम मोदी ने पुतिन को इस साल के अंत में होने वाले 23वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है।

रूस पहुँचे थे अजित डोभाल

भारत और रूस की बढ़ती नजदीकियों और भारत अपने हितों को किस हद तक आगे रखता है इसका अनुमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की रूस यात्रा से भी लगा था। ट्रंप की धमकियों के बीच डोभाल ने मॉस्को जाकर पुतिन से मुलाकात की थी।

पुतिन और डोभाल की मुलाकात के दौरान जो गर्मजोशी दिखाई दी उस पर भी दुनिया की नजरें बनी हुई थीं। साथ ही, डोभाल ने अपने रूस के समकक्ष सर्गेई शोइगु से भी मुलाकात की है। । इस साल के अंत में पुतिन भारत यात्रा पर आने वाले हैं और इसकी जमीन तैयार करने के लिए अजीत डोभाल मॉस्को पहुँचे थे।

ब्राजील के राष्ट्रपति से पीएम मोदी ने की बात

पुतिन से पहले पीएम मोदी ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा से फोन पर बात की थी। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने साझेदारी के विकास और निकट संपर्क में रहने पर सहमति जताई थी।

ब्राजील भी ट्रंप के टैरिफ की मार से जूझ रहा है और उस पर भी भारत की तरह 50% टैरिफ लगाया गया है। इससे पहले लुला डा सिल्वा ने स्पष्ट कर दिया था कि वे ट्रंप से टैरिफ के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि ट्रंप किसी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं हैं, बल्कि वो अपमानित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने लूला से बातचीत के बाद जो ट्वीट किया था उसमें ग्लोबल साउथ की बात प्रमुखता से की गई थी।

चीन जाएँगे पीएम मोदी

रूस के साथ बढ़ती बातचीत के बीच पीएम मोदी इस महीने के अंत में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भाग लेने के लिए चीन का दौरा करेंगे। 31 अगस्त और 1 सितंबर होने वाली उनकी यह यात्रा 2020 की गलवान घाटी में भारत-चीन सैन्य झड़प के बाद पहली चीन यात्रा होगी। इस सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार और आपसी संबंधों को लेकर चर्चा होगी।

उल्टा पड़ेगा अमेरिका का टैरिफ वाला दांव?

ट्रंप जहाँ एक और चेतावनी पर चेतावनी दे रहे हैं तो वहीं दुनिया के दूसरे देश करीब आ रहे हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर रूस ने करीब चार साल से चल रहे यूक्रेन युद्ध को शुक्रवार तक खत्म नहीं किया, तो वह रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर एक और प्रतिबंध लगाएगा।

भारत और रूस के बीच रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में संबंधों पर ही अमेरिका को ऐतराज है लेकिन भारत अपने इरादों से साफ कर चुका है कि वह रूस से व्यापार बंद नहीं करेगा। पीएम मोदी की बातचीत और डोभाल का दौरा बताता है कि भारत, अमेरिका के किसी दबाव में आने वाला नहीं है। यानी अगर आने वाले समय में अमेरिका का साथ छोड़ने की ज़रूरत हुई तो भारत उसके लिए भी पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है।

भारत के अलावा कई अन्य देश भी ट्रंप की इन धमकियों से नाराज हैं और नए विकल्पों की तलाश में है। एकजुट होते देशों को देखकर अमेरिकी विदेश नीति पर ट्रंप का टैरिफ वॉर उल्टा पड़ने की संभावनाएँ ज्यादा नज़र आ रही हैं।

एथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल को लेकर अफवाहें फैला रहा एंटी-इंडिया गिरोह, नितिन गड़करी बोले – एक भी गाड़ी नहीं हुई खराब: डॉलर की बचत से अर्थव्यवस्था होगी मजबूत, किसानों की कमाई ₹1.14 लाख करोड़ के पार

केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ऑटो सेक्टर में आ रहे बदलाव पर बात करते हुए ‘पेट्रोलियम लॉबी’ की चर्चा की है। उन्होंने कहा कि एथेनॉल युक्त पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों पर कोई असर नहीं पड़ता है। इससे माइलेज कम देने की बात पर नितिन गडकरी ने कहा, “ऐसी कोई चर्चा नहीं हो रही है। ये पेट्रोलियम लॉबी वाले पॉलिटिकली इसे मैनिपुलेट कर रहे हैं।” 

क्या है एथेनॉल?

एथेनॉल एक ऐसा अल्कोहल है जो गन्ने और मक्के से मिलकर बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। ई 10, ई 20, ई 27 एथेनॉल पेट्रोल के कटेगरी हैं। ई 10 का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 10 फीसदी एथेनॉल है, ई 20 का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 फीसदी एथेनॉल है और ई 27 का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें 27 फीसदी एथेनॉल है।

E-20 एक बायोफ्यूल है इससे प्रदूषण कम फैलता है। इसलिए इसका इस्तेमाल ज्यादातर देशों में हो रहा है। भारत में तो अभी पेट्रोल में ही एथेनॉल मिलाया जा रहा है लेकिन कई देशों ने डीजल में भी एथेनॉल का इस्तेमाल शुरू कर दिया है क्योंकि ज्यादार बड़ी एसयूवी गाड़ियाँ डीजल से चलती हैं।

देश की बचत, किसानों का फायदा

एथेनॉल गन्ने और मक्के से बनता है इसलिए गन्ना किसानों और मक्का पैदा करने वाले किसानों को इससे सीधा फायदा हो रहा है। गन्ना के मिल मालिक को भी इससे फायदा हो रहा है साथ ही मक्का उत्पादन करने वाले किसान भी लाभांवित हो रहे हैं। साथ ही देश को भी इसका फायदा मिल रहा है। भारत सबसे ज्यादा आयात पेट्रोलियम पदार्थों का करता है। एथेनॉल के इस्तेमाल से इसमें कमी आएगी।

केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “देश में फ्यूल के आयात पर 22 लाख करोड़ रुपए खर्च होते हैं। एथेनॉल के इस्तेमाल से इसमें कमी आ रही है। इससे सरकार को करीब 1 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है। एथेनॉल बनाने के लिए मक्के का इस्तेमाल हो रहा है, इसका फायदा किसानों को मिल रहा है। किसानों को करीब 1.14 लाख करोड़ रुपए की कमाई हुई है।

ऊर्जा आयात नहीं बल्कि निर्यात करने वाला बनें- गडकरी

रूस से कच्चे तेल आयात से खफा अमेरिका ने 50 फीसदी टैरिफ भारत पर लगा दिया है। ऐसे में ऊर्जा उत्पादक देश बनना भारत की अहम प्राथमिकता है। गडकरी ने कहा कि हमें ऊर्जा आयात करने वाला नहीं बल्कि ऊर्जा निर्यात करने वाला देश बनना चाहिए। इससे पेट्रोल-डीजल से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी। केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि पेट्रोल में अभी 20 फीसदी एथेनॉल मिलाया जाता है। लेकिन इसे 27 फीसदी करने को लेकर सरकार की योजना चल रही है, हालाँकि ये अभी फाइनल नहीं हुआ है। ARAI के ट्रायल के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ये तय करेगा कि 27 फीसदी एथेनॉल मिलाना सही है या नहीं। गडकरी के मुताबिक इंडियन ऑयल के एथेनॉल युक्त पेट्रोल के 350 पेट्रोल पंप चल रहे हैं।

फोटो साभार- X @PetroleumMin

ईवी और फ्लेक्स फ्यूल को बराबर महत्व

केन्द्र सरकार ने कहा है कि ग्राहकों को फ्लेक्स फ्यूल और इलेक्ट्रिक वाहनों को बराबर महत्व देगी। उन्होंने कहा कि अब तक जितने भी नियम बनाए गए हैं वो इलेक्ट्रिक वाहनों को सपोर्ट कर रहे हैं। अप्रैल 2027 से कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी 3 (CAFE3)लागू किया जाएगा जिसमें दोनों वाहनों को बराबर वरीयता मिलेगी। CAFE3 ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए चर्चाओं का दौर जारी है। सड़क परिवहन मंत्रालय, बिजली मंत्रालय और पीएम के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने 6 अगस्त 2025 को बैठक की है। इसमें चर्चा की गई है कि छोटी और बड़ी कारों के नियम अलग बनाए जाएं या नहीं।

CAFE नॉर्म्स क्या है?

CAFE नॉर्म्स यानी कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी सालभर वाहन निर्माताओं द्वारा बेची गई वाहनों का औसत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को तय करता है। ये नियम कंपनियों को ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट वाहनों को बनाने के लिए मजबूर करती हैं। फिलहाल सीएएफई 2 नियम लागू है जो 2027 तक मान्य है।

शुद्ध पेट्रोल और मिले हुए पेट्रोल में अंतर

भारत में प्रीमियम पेट्रोल सबसे शुद्ध माना जाता है। इस पेट्रोल में मिलावट नहीं होती। जब इस पेट्रोल में एथेनॉल मिला दिया जाता है तो ये एथेनॉल पेट्रोल कहलाता है। पीएम मोदी ने 2023 में 20 फीसदी एथेनॉल युक्त पेट्रोल को लॉन्च किया था। इसके तहत एक लीटर फ्यूल में 800 मिलीलीटर पेट्रोल और 200 मिलीलीटर एथेनॉल डाला जाता है। अब एथेनॉल युक्त पेट्रोल हर जगह उपलब्ध है।

सोशल मीडिया पर इस तरह के दावे किए जाते हैं कि ऐसे पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन खराब होते हैं, गाड़ियों में गड़बड़ियाँ आ जाती है और माइलेज पर असर पड़ता है। इसका इस्तेमाल प्राइवेट कारों के लिए सही है या नहीं। सरकार ने इन सभी बातों को खारिज करते हुए कहा इससे गाड़ियों पर कोई फर्क नहीं पड़ता, हालाँकि माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। लेकिन इंजन के कुछ हिस्सों में बदलाव और सही ट्यूनिंग के जरिए माइलेज की कमी को दूर किया जा सकता है।

सड़क परिवहन मंत्री गड़करी ने कहा, ” पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल डालने से किसी भी गाड़ी में कोई दिक्कत नहीं आती है। इस मुद्दे पर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी (ARAI) और सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM)ने पहले ही साफ कर दिया है। अभी तक एक भी वाहन में इससे दिक्कत नहीं आई है।”

माइलेज पर कितना पड़ता है असर?

ई 20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ियों पर तो असर नहीं पड़ेगा लेकिन माइलेज को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि इसमें मामूली कमी आएगी। ई-20 के लिए डिजाइन और कैलिब्रेट किए गये वाहनों में एक-दो फीसदी माइलेज कम हो सकता है। वहीं बाकी गाड़ियों में तीन से छह फीसदी माइलेज कम हो सकता है। हालाँकि सही इंजन ट्यूनिंग और ई20 कम्पलायंट एलिमेंट के जरिए इसे कम किया जा सकता है। एथेनॉल के इस्तेमाल से गाड़ियों की माइलेज में कमी को लेकर केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि ये बात सच है कि पेट्रोल में एथेनॉल डालने पर उसकी कैलोरिक वैल्यू कम हो जाती है जिससे माइलेज थोड़ा कम हो सकता है।

एथेनॉल को बेहतर बनाने की कोशिश

रूसी तकनीक की सहायता से एथेनॉल को क्षमता बेहतर बनाने की कोशिश सरकार कर रही है। केन्द्रीय मंत्री के मुताबिक अगर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इसकी टेस्टिंग कर रहा है। इससे पेट्रोल के बराबर एथेनॉल की क्षमता हो जाएगी। केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने साफ कर दिया कि देशहित सर्वोपरि है। किसी भी लॉबी के दबाव में नहीं आएंगे। किसानों का फायदा, पेट्रोल आयात, लागत और प्रदूषण को ध्यान में रखकर सरकार कदम उठाएगी।