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फेसबुक पर फाँसता था आगरा धर्मांतरण गैंग, तीसरी-चौथी बीवी बन जिंदगी सँवारने का देता था लालच: देहरादून की सृष्टि ने खोला राज, आयशा-अब्दुल रहमान का रैकेट कैसे करता है काम

उत्तर प्रदेश के आगरा में एक बड़े अवैध धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जो हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर उन्हें धोखे, लालच और दबाव के जरिए इस्लाम में परिवर्तित करने की साजिश रचता था। इस रैकेट के तार आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआईएस से जुड़े होने का संदेह है। देहरादून की 21 वर्षीय सृष्टि, जिसका नाम इस गिरोह ने मरियम रखा था, उसने अपनी आपबीती के जरिए इस स्लीपर सेल की पूरी कार्यप्रणाली को उजागर किया है।

सृष्टि ने आज तक से बातचीत में इस रैकेट के हर किरदार और उनकी साजिश का खुलासा किया। आगरा पुलिस ने सात राज्यों में छापेमारी कर 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान कुरैशी, आयशा उर्फ कृष्णा और अन्य शामिल हैं। यह रिपोर्ट सृष्टि की गवाही के आधार पर इस रैकेट की कार्यप्रणाली, लड़कियों को फँसाने के तरीके और विदेशी फंडिंग के खेल को विस्तार से उजागर करती है।

पढ़ें – सृष्टि की आपबीती, फेसबुक से शुरू हुआ जाल

देहरादून की रहने वाली एक साधारण 21 वर्षीय लड़की सृष्टि साल 2020 में इस रैकेट के जाल में फँसी। उसने बताया, “सब कुछ तब शुरू हुआ जब फेसबुक पर मुतालिब नाम के एक शख्स ने मुझसे संपर्क किया। उसने पहले दोस्ती की और फिर अपने धर्म की बातें शुरू कीं। मुझे इस्लाम के बारे में बताया और धीरे-धीरे मेरे मन में उत्सुकता जगाई।” मुतालिब ने सृष्टि को अपनी बहन सुमैया और शफीया से मिलवाया, ताकि वह उन पर भरोसा करे। इसके बाद सृष्टि का संपर्क आयशा (उर्फ कृष्णा) और दिल्ली के अब्दुल रहमान से करवाया गया।

पुलिस जाँच में पता चला कि यह रैकेट सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म जैसे लूडो के जरिए लड़कियों को निशाना बनाता था। कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि और भावनात्मक रूप से कमजोर लड़कियों को पहले दोस्ती के जाल में फँसाया जाता था। फिर उन्हें इस्लामिक वीडियो, प्रचार सामग्री और वॉयस नोट्स भेजकर रेडिकलाइज किया जाता था।

सृष्टि ने बताया, “मुझे व्हाट्सएप ग्रुप्स में जोड़ा गया, जहाँ जावेद, अब्दुल रहमान उर्फ रूपेंद्र प्रताप और दिल्ली के एक अन्य अब्दुल रहमान जैसे लोग थे। मुझे बार-बार इस्लाम अपनाने और शादी के लिए दबाव डाला गया।”

बेहतर जिंदगी का लालच देकर देते थे झाँसा

सृष्टि ने खुलासा किया कि आयशा ने उसकी आर्थिक स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की। “आयशा ने मुझसे मेरे घर की हालत के बारे में पूछा और फिर लालच दिया कि अगर मैं इस्लाम कबूल कर लूँ और किसी की दूसरी, तीसरी या चौथी पत्नी बनने को तैयार हो जाऊँ, तो मुझे बेहतर घर, सुरक्षा और पैसा दिया जाएगा। उसने कहा कि मेरे ऊपर तभी ‘इन्वेस्ट’ किया जाएगा, जब मैं उनकी शर्तें मानूँ।”

यह रैकेट सुनियोजित तरीके से लड़कियों को आर्थिक मदद का लालच देता था। सृष्टि को बताया गया कि अगर वह शादी के लिए तैयार नहीं होती, तो उसकी कोई मदद नहीं की जाएगी। उसे कई लोगों से मिलवाया गया, जिनमें जावेद, अब्दुल रहमान (उर्फ रूपेंद्र), और दिल्ली के एक अन्य अब्दुल रहमान शामिल थे। इन लोगों ने सृष्टि को बार-बार यही कहा कि इस्लामिक नियमों का पालन और शादी ही उनकी मदद की शर्त है।

पुलिस के अनुसार, यह रैकेट लड़कियों को पहले मानसिक रूप से तैयार करता था। उन्हें इस्लामिक नाम चुनने, कलमा पढ़ने और हिजाब पहनने जैसे नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया जाता था। सृष्टि का नाम बदलकर मरियम रखा गया और उसे वॉयस नोट्स रिकॉर्ड करने को कहा गया, जिसमें वह खुद को कट्टर मुस्लिम बताए। इन नोट्स का इस्तेमाल विदेशों से फंडिंग जुटाने के लिए किया जाता था। खुद सृष्टि ने ये बात स्वीकार की है।

घर से बाहर निकालने की पूरी योजना

इस रैकेट का एक बड़ा हिस्सा लड़कियों को उनके घरों से निकालना था। सृष्टि ने बताया, “झारखंड के अयान ने मुझे कहा कि अगर मैं घर छोड़ना चाहती हूँ, तो मुझे देहरादून के किसी चौक तक अकेले जाना होगा। वहाँ से एक कैब मुझे दिल्ली ले जाएगी। दिल्ली में एक लड़का मुझे 10-12 घंटे की यात्रा के बाद किसी ‘सुरक्षित जगह’ पर छोड़ेगा।”

इस प्रक्रिया में सृष्टि को अपने फोन और सिम को तोड़ने की हिदायत दी गई। आयशा ने उसे सेकेंड-हैंड कीपैड फोन और 4,000-5,000 रुपये की फर्जी सिम दी, ताकि उसकी पहचान और लोकेशन गुप्त रहे।

सृष्टि ने बताया, “मुझे फोन तोड़कर पानी में डुबाने की पूरा तरीका सिखाया गया। मैंने यह सब किया, लेकिन मैं डर गई और घर से नहीं निकली। इसके बाद उन्होंने मेरी मदद बंद कर दी।” जब सृष्टि ने घर छोड़ने से इनकार किया, तो अब्दुल रहमान (उर्फ रूपेंद्र) ने उस पर दबाव डाला कि वह तीसरी या चौथी पत्नी बनने को तैयार हो, वरना कोई मदद नहीं मिलेगी। सृष्टि ने इस दबाव को ठुकरा दिया। इसके बाद रैकेट ने उसे बताया कि उनके पैसे किसी अन्य लड़की पर खर्च हो गए, जो उनके साथ चली गई।

कई देशों से फंडिंग का खेल

आगरा पुलिस की जाँच में सामने आया कि इस रैकेट को अमेरिका, कनाडा, लंदन और दुबई से फंडिंग मिल रही थी। सृष्टि ने बताया, “एक लड़के ने मुझसे मेरी पूरी कहानी लिखने को कहा, ताकि वह उसे सोशल मीडिया पर स्टेटस के रूप में डाल सके और फंड जुटा सके। वह आयशा का फंड मैनेजर था और दूसरी लड़कियों की कहानियाँ भी शेयर करता था।” इन कहानियों और वॉयस नोट्स को विदेशों में प्रचारित कर यह दिखाया जाता था कि लड़कियाँ हिंदू से मुस्लिम बन चुकी हैं, जिसके आधार पर फंडिंग जुटाई जाती थी।

पुलिस ने पाया कि अब्दुल रहमान का भतीजा लंदन से फंडिंग को री-रूट करता था। यह रैकेट आईएसआईएस की तर्ज पर काम करता था, जिसमें अलग-अलग मॉड्यूल थे। एक मॉड्यूल फंडिंग जुटाने का काम करता था, दूसरा रेडिकलाइजेशन का और तीसरा लड़कियों को छिपाने और उनके धर्मांतरण के बाद निकाह की व्यवस्था करता था। जाँच में यह भी संदेह जताया गया कि रैकेट के तार पीएफआई और पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं।

जिहादी टीचर आयशा की भूमिका

आयशा उर्फ कृष्णा इस रैकेट की अहम कड़ी थी। सृष्टि ने बताया, “आयशा 18 साल से ऊपर की लड़कियों को निशाना बनाती थी। वह जिहाद का पाठ पढ़ाकर उनका ब्रेनवॉश करती थी। आयशा कई नंबरों का इस्तेमाल करती थी और सेकेंड-हैंड फोन खरीदती थी।” आयशा की गिरफ्तारी गोवा से हुई और उसके फोन से जिहाद से संबंधित वीडियो और प्रचार सामग्री बरामद हुई।

आयशा न केवल लड़कियों को रेडिकलाइज करती थी, बल्कि उन्हें फर्जी सिम और फोन देकर उनकी पहचान छिपाने में मदद करती थी। सृष्टि ने बताया, “मुझे सिखाया गया कि घर से निकलने से पहले फोन तोड़कर पानी में डुबाना है। मुझे एक फर्जी सिम दी गई थी, लेकिन मैंने घर छोड़ने से मना कर दिया।”

कार्रवाई में जुटी आगरा पुलिस, सृष्टि की गवाही अहम

मार्च 2025 में आगरा के सदर बाजार थाने में दो बहनों की गुमशुदगी की शिकायत ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया। साइबर सेल की मदद से पुलिस ने कोलकाता में इन बहनों को रेस्क्यू किया और रैकेट के नेटवर्क का पता लगाया। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार की अगुआई में 100 सदस्यीय टीम ने सात राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान और झारखंड में छापेमारी कर 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनमें अब्दुल रहमान कुरैशी, आयशा, मोहम्मद अली और ओसामा शामिल हैं।

पुलिस ने अब्दुल रहमान के घर से धर्मांतरण से जुड़ी किताबें और मौलाना कलीम सिद्दीकी की लिखी प्रचार सामग्री बरामद की। सृष्टि की गवाही ने इस रैकेट के हर किरदार को बेनकाब किया। उसने बताया, “मुझे कलमा पढ़ने और इस्लामिक नाम चुनने के लिए मजबूर किया गया। दिल्ली के अब्दुल रहमान ने मुझसे वॉयस नोट माँगा, जिसमें मुझे कहना था कि मैं कट्टर मुस्लिम हूँ और हिजरत करना चाहती हूँ। यह नोट विदेशी फंडिंग के लिए इस्तेमाल होता था।”

खतरनाक स्तर पर सक्रिय हैं धर्मांतरण गिरोह के स्लीपर सेल

पुलिस ने सात राज्यों में दर्जनों लड़कियों को ट्रेस किया, जिनमें से कई इतनी रेडिकलाइज हो चुकी हैं कि काउंसलिंग का असर नहीं हो रहा। एक पीड़िता की तस्वीर AK-47 के साथ सामने आई, जो इस रैकेट की खतरनाक मंशा को दर्शाती है। यह रैकेट न केवल धर्मांतरण बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए भी लड़कियों को तैयार करता था।

सृष्टि ने कहा, “मैं इस जाल से बाहर निकल पाई, लेकिन कई लड़कियाँ अभी भी फँसी हैं। मैं चाहती हूँ कि लोग इस साजिश को समझें और ऐसी गलती न करें।” उसकी गवाही न केवल इस रैकेट को तोड़ने में मददगार रही, बल्कि उन लड़कियों को खोजने में भी सहायक होगी, जो इस गिरोह के चंगुल में गायब हो चुकी हैं।

आगरा धर्मांतरण रैकेट का खुलासा देश में फैले स्लीपर सेल नेटवर्क की गंभीरता को उजागर करता है। यह रैकेट सोशल मीडिया, विदेशी फंडिंग और संगठित मॉड्यूल के जरिए हिंदू लड़कियों को निशाना बनाता था। सृष्टि की साहसी गवाही और आगरा पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस साजिश को बेनकाब किया।

यूपी एटीएस और पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और फंडिंग के स्रोतों की तह तक जाने के लिए जाँच कर रही है। यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सावधान रहें और किसी भी लालच में न आएँ।

सुंदरवन की डेमोग्राफी बदली, हिन्दू भी करने लगे मुस्लिम ‘देवी’ की पूजा: मुर्शिदाबाद हिंसा की दिल दहला देने वाली तस्वीरों की प्रदर्शनी, ये है ग्राउंड की सच्चाई

नई दिल्ली स्थित कंस्टीटूशन क्लब में शुक्रवार (25 जुलाई, 2025) को Organiser मीडिया संस्थान द्वारा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में अप्रैल 2025 में हुई हिंसा की तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई। इसका उद्देश्य था कि लोग इस हिंसा को भूलें नहीं और न्याय मिलने की दिशा में बहस आगे बढ़े। पत्रकार निशांत आज़ाद वहाँ ग्राउंड रिपोर्टिंग करने गए थे और ये तस्वीरें उन्होंने ही वहाँ से लाईं। ख़तरा मोल लेकर इस तरह की बहादुरी भरी रिपोर्टिंग के लिए लोगों ने उनकी प्रशंसा की।

मुर्शिदाबाद में इस्लामी हिंसा की तस्वीरें, कब मिलेगा न्याय?

इस अवसर पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता, पूर्व राज्यसभा सांसद व पत्रकार स्वप्न दासगुप्ता, लेखक एवं ‘द प्रिंट’ में कंट्रिब्यूटिंग एडिटर दीप हलदर और Organiser के संपादक प्रफुल्ल केतकर के अलावा आसनसोल (दक्षिण) विधानसभा क्षेत्र की विधायक व पश्चिम बंगाल भाजपा की जनरल सेक्रेटरी अग्निमित्रा पॉल मौजूद थीं।

इन तस्वीरों में हरगोविंद दास और उनके बेटे चंदन दास की विधवाओं और उनके घर के बच्चों की हृदय विदारक तस्वीरें भी शामिल थीं। साथ ही हिन्दू देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियों की तस्वीरें भी थीं। इसके अलावा हिंसक इस्लामी भीड़ ने किस तरह गाड़ियों को जलाया, ये भी लोगों ने देखा।

कंस्टीटूशन क्लब में आयोजित इस प्रदर्शनी के दौरान वक्ताओं ने पश्चिम बंगाल में जारी हिंसा, बदलती जनसांख्यिकी और राजनीतिक चुप्पी पर गंभीर सवाल उठाए। वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व राज्यसभा सांसद स्वप्न दासगुप्ता ने कहा, “पश्चिम बंगाल पश्चिम बांग्लादेश बनने की कगार पर है। अगर आज भी लोग चुप रहे तो आने वाले समय में बंगाल का स्वरूप पहचानना मुश्किल हो जाएगा।”

प्रफुल्ल केतकर, संपादक, Organiser ने कहा, “यह मामला केवल टीएमसी बनाम बीजेपी या पहले का टीएमसी बनाम सीपीएम तक सीमित नहीं है। यह लोकतंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। सबसे ज्यादा पीड़ित महिलाएँ और अनुसूचित जाति के लोग हैं। हिंदू समाज, जो देश की धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक माना जाता है, आज हिंसा का सबसे बड़ा शिकार बन गया है।”

मंदिरों का ध्वस्तीकरण, मूर्तिकारों की हत्या

आसनसोल (दक्षिण) की विधायक अग्निमित्रा पॉल ने अपने संबोधन में कहा कि “मुर्शिदाबाद में 9 हिंदू मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया। यह वही भूमि है जो शक्ति की भूमि कहलाती है – माँ दुर्गा, माँ काली की मूर्तियों को अपवित्र किया गया। जलापूर्ति के स्रोतों को काट दिया गया और जलाशयों को जहर देकर दूषित किया गया। शमशेरगंज के ओसी शिव प्रसाद घोष ने कोई कार्रवाई नहीं की और बीएसएफ को निष्क्रिय बैठा दिया गया।”

उन्होंने आगे बताया कि “मूर्ति बनाने वाले हरगोविंद दास और चंदन दास की नृशंस हत्या कर दी गई। यह हमला न इसलिए हुआ कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े थे या उन्होंने विरोध किया था, बल्कि इसलिए कि वे हिंदू थे। यह हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि यह टीएमसी नेता इनामुल हक की साजिश के तहत पूर्व-नियोजित थी। कोलकाता हाईकोर्ट ने भी इस पर सख्त टिप्पणियाँ की हैं।”

वक्ताओं ने इस हिंसा की तुलना कश्मीर के हालात से करते हुए कहा कि बंगाल और कश्मीर में हिंसा का तरीका लगभग एक जैसा है। मस्जिदों से भीड़ को भड़काया गया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करवाई गई। हम नहीं चाहते कि आसनसोल भी अनंतनाग बन जाए। यह विधानसभा चुनाव का मुद्दा नहीं है, यह अस्तित्व का सवाल है।

कंचन गुप्ता ने जनसांख्यिकी में हो रहे बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल की जनगणना में हिंदू आबादी का अनुपात तेजी से घट रहा है। 1/4, 1/3, 1/2 के आँकँड़े यह संकेत देते हैं कि मुर्शिदाबाद बंगाल के पतन का एक और मील का पत्थर है। पुलिस की थोड़ी भी सक्रियता से हालात बदले जा सकते थे। लेकिन प्रशासन की भूमिका संदेहास्पद रही।”

सुंदरबन की डेमोग्राफी बदली, ‘बोनबीबी’ की पूजा

कंचन गुप्ता ने कहा कि सुंदरबन की जनसांख्यिकी पूरी तरह बदल चुकी है और हिन्दू भी अब मुस्लिम ‘देवी’ बोनबीबी की पूजा कर रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि कैसे तबलीगी जमात लगातार सुंदरबन, सिलीगुड़ी और झारखंड में कैंप लगा रही है। बांग्लादेश से समुद्री रास्तों और मुहानों से घुसपैठ हो रही है। ममता बनर्जी अब बंगाली बनाम बीजेपी शासित राज्यों का नैरेटिव खड़ा कर रही हैं। बंगाल की भाषा उर्दू असर में आ रही है। यहां तक कि उनके आधिकारिक लेटरहेड पर बंगाली नहीं बल्कि उर्दू और अंग्रेज़ी प्रमुख हो गई है। उन्होंने पूछा कि क्या यही बंगाली अस्मिता है?

दीप हलदर, लेखक और ‘द प्रिंट’ में कंट्रिब्यूटिंग एडिटर, ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अगर ‘पंचायत’ सीरीज बनती तो उसका नाम ‘मिर्ज़ापुर’ हो जाता क्योंकि वहाँ हिंसा से पंचायत चुनाव भी अछूता नहीं है। यह मज़ाक नहीं, बल्कि भयावह यथार्थ है। बंगाल और बांग्लादेश में एकमात्र फर्क यह है कि बांग्लादेश का बौद्धिक वर्ग अब जागरूक है, जबकि यहां चुप्पी साधी हुई है।”

कार्यक्रम के अंत में विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, “अब बंगाली हिंदुओं को पलायन की नहीं, पराक्रम की आवश्यकता है। उन्हें अपने अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा के लिए संगठित होना होगा।”

अंग्रेजी नहीं बोल पाते, ADM की जिम्मेदारी संभाल कैसे पाएँगे: याचिका का जवाब हिंदी में देने पर उत्तराखंड HC ने PCS अधिकारी पर उठाया सवाल, मुख्य सचिव और SEC को मिले उनकी काबिलियत जाँचने के निर्देश

नैनीताल के ADM और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के तौर पर कार्यरत PCS अधिकारी उत्तराखंड हाई कोर्ट में अंग्रेजी नहीम बोल पा रहे थे। उन्होंने कोर्ट से हिंदी में बातचीत की गुजारिश की और अंग्रेजी बोलने में असमर्थता जताई। इसके बाद कोर्ट ने उनकी काबिलियत की जाँच करने के आदेश दे दिए हैं।

दरअसल यह मामला पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ा था जिस पर PCS अधिकारी जवाब दे रहे थे। इसमें केवल परिवार रजिस्टर के आधार पर नाम जोड़ने की वैधता पर सवाल उठे हैं।

चीफ जस्टिस जी नरेंद्र और जस्टिस आलोक माहरा की खंडपीठ ने अंग्रेजी न बोल पाने के मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त (SES) और उत्तराखंड के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे जाँच करें कि क्या अंग्रेजी में बात न कर पाने वाला कोई अधिकारी कार्यकारी जिम्मेदारियाँ प्रभावी ढंग से निभा सकता है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होनी है।

अदालत में क्या हुआ?

मामला पंचायत मतदाता सूची में प्रविष्टियों को लेकर दायर एक याचिका से जुड़ा था, जिसमें केवल परिवार रजिस्टर के आधार पर नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर सवाल उठाया गया।

कोर्ट को बताया गया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नामांकन के लिए बूथ स्तर के अधिकारी घर-घर जाकर परिवार के किसी प्रतिनिधि से सदस्यों के नाम इकट्ठा करते हैं और बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज या सत्यापन के उन्हें मतदाता सूची में दर्ज कर लेते हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से सवाल उठाया गया कि इस प्रक्रिया में कोई वैधानिक दस्तावेजी साक्ष्य या क्रॉस वेरिफिकेशन नहीं होता, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ जाती है। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूछा कि क्या नाम जोड़ने से पहले परिवार रजिस्टर की एंट्री की सत्यता की पुष्टि के लिए कोई प्रमाण या साक्ष्य इकट्ठा किए जाते हैं?

इसके जवाब में अधिकारियों ने बताया कि परिवार रजिस्टर को ही अंतिम प्रमाण मानकर उसी के आधार पर नाम दर्ज किए जा रहे हैं। जब ADM अदालत में पेश हुए तो उन्होंने हिंदी में जवाब दिया।

अंग्रेजी दक्षता का मुद्दा

अदालत ने अंग्रेजी में बात न करने की वजह पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अंग्रेजी समझ सकते हैं लेकिन बोलने में समस्या होती है। इस पर पीठ ने सवाल उठाया कि क्या इस स्तर का अधिकारी, जो अंग्रेजी में बात करने में सक्षम नहीं है, वह उच्च स्तर के प्रशासनिक या संवैधानिक कार्यों को प्रभावी रूप से संचालित कर सकता है?

इसके साथ ही याचिका पर बेंच ने टिप्पणी दी कि यदि यह तरीका राज्य भर में अपनाया जा रहा है, तो यह मतदाता सूची की पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाता है।

कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई में वीडियो कॉल के जरिए मौजूद होकर इस मुद्दे पर अपनी बात रखें और हलफनामे के माध्यम से कोर्ट को अपनी ओर से जवाब दें।

यह मामला न केवल प्रशासनिक दक्षता बल्कि चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है, जिसे उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लिया है।

झारखंड में ST महिलाओं को नौकरी का झाँसा देकर किया जा रहा रेप, फिर डाला जाता है धर्मांतरण का दबाव: आफताब अंसारी गिरफ्तार, साहिबगंज में पहला नहीं है ऐसा मामला

झारखंड में आफताब अंसारी नाम के व्यक्ति ने जनजातीय महिला को नौकरी का झाँसा दिया। इसके बाद दुकान पर बुलाकर उसके साथ रेप किया। इसके बाद उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाकर धमकी भी दी।

जानकारी के अनुसार, आफताब अंसारी ने एक शादीशुदा जनजातीय महिला को अच्छी नौकरी दिलाने का झाँसा देकर अपने जाल में फँसाया। इसके लिए उसने उसे अर्शी गारमेंट्स नाम की एक दुकान पर बुलाया था।

जब महिला दुकान पर पहुँची तो आफताब ने खुद को दुकान का मालिक बताया। इसके बाद वह उसे दुकान के पीछे लेकर गया। महिला के वहाँ पहुँचते ही उसने दरवाजा बंद कर उसके साथ रेप किया और उसका वीडियो भी बनाया। इसके बाद आरोपित आफताब ने महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा। जब उसने इनकार किया, तो उसने उसके परिवार वालों को धमकियाँ दी।

झारखंड में इस तरह का मामला कोई पहला नहीं है बल्कि इस तरहल के मामले वहाँ जब तब सामने आ ही जाते हैं। पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने इस तरह के मामलों के लिए लगभग 8 महीने पहले ग्राउंड रिपोर्टिंग कर वहाँ के स्थानीय लोगों से बात की। उन्होंने एक्स पर एक जानकारी साझा की है।

शुभी ने लिखा, “झारखंड के साहिबगंज इलाके में गए, जहाँ ऐसे मियाँ भाइयों द्वारा आदिवासी महिलाओं को फँसाना आम बात है। यहाँ पर जिनमें ज्यादातर महिलाएँ शादीशुदा हैं। इसके बावजूद उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं और हिंदू बस्तियों के बाहर बस जाते हैं। दिन-ब-दिन जमाई लोगों की ये बस्तियाँ बढ़ती जा रही हैं, जबकि जनजातीय आबादी घटती जा रही है।

अपनी रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने पंचायत अध्यक्ष से मुलाकात की। इस बारे में शुभी ने लिखा, “हमारी मुलाकात मोनिका किस्कू से हुई, जो एक पंचायत अध्यक्ष थीं और जिन्हें उमेद ने सबसे पहले अपने जाल में फँसाया था। उनके निधन के बाद, उनके भाई अली ने उनसे शादी कर ली। एक छोटी सी बस्ती में, अली और उनके परिवार का एक बड़ा सा घर है, जो इस बात को सही ठहराता है कि ये मियाँ भाई राजनीतिक ताकत, जमीन हड़पने और पहचान की चोरी के लिए जनजातीय महिलाओं से शादी करते हैं।”

शुभी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पार्टी पर सवाल करते हुए लिखा, “मोनिका के मामले में, उन्होंने अपना नाम नहीं बदला है, क्योंकि नाम बदलने से उन्हें जनजातीय महिला होने के नाते मिलने वाले सभी लाभ और सबसे बढ़कर आदिवासी सीट से चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित होना पड़ेगा। अली एक स्थानीय झामुमो (JMM) नेता हैं। अब आप गणित समझ गए होंगे। यह सब चुपचाप, हर दिन होता रहा है।”

गौरतलब है कि जनजातीय महिलाओं के साथ झारखंड में होने वाली ये घटनाएँ नई नहीं हैं। इससे पहले झारखंड के सरायकेला- खरसावाँ में एक मुस्लिम युवक को अपने से 13 वर्ष छोटी जनजातीय लड़की का धर्मांतरण करवाने के लिए गिरफ्तार किया गया था। मुस्लिम युवक ने लड़की का धर्मांतरण करवाने के बाद उसे पश्चिम बंगाल ले जाकर निकाह भी कर लिया था।

स्थानीय लोगों ने बताया था कि 32 साल के तस्लीम आलम ने 19 वर्षीय जनजातीय समाज की लड़की का अपहरण किया। इसके बाद जबरन उसका धर्मांतरण करवाया गया। शिकायत के बाद पुलिस ने तस्लीम को गिरफ्तार कर लिया था। साल 2023 झारखंड की राजधानी रांची में इरशाद अंसारी नामक युवक के ब्लैकमेल से परेशान हो एक जनजातीय महिला ने आत्महत्या कर ली थी।

इरशाद अंसारी ने महिला के साथ बलात्कार कर उसका वीडियो बना लिया था। इसके बाद वह महिला को वीडियो वायरल करने की धमकी दे रहा था। इससे परेशान होकर महिला ने 29 जुलाई 2023 को अपने घर में फाँसी लगा ली थी।

मृतक महिला के देवर ने पुलिस को बताया था कि करीब ढाई महीने पहले उसकी भाभी को कुत्ते ने काट लिया था। इसी को लेकर आरोपित इरशाद अंसारी उन्हें रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए हॉस्पिटल ले गया था। इसी दौरान उसने बलात्कार कर उनका अश्लील वीडियो बना लिया था। इसके बाद से वह मृतक महिला को लगातार परेशान कर रहा था।

इस तरह रेप कर धर्मांतरण के कई मामले सुर्खियों में आ चुके हैं। इन पर लागातार कार्रवाई की माँग भी उठती रही है लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम उठते नजर नहीं आ रहे हैं।

भोपाल में हिंदू लड़कियों से ड्रग्स डिलीवरी कराता था यासीन मछली, पुलिस ने बताया- मुंबई, पंजाब, राजस्थान से लाते थे चरस: सारिक के पास था युवतियों को फाँसने के लिए पूरा गैंग

भोपाल में ड्रग तस्करी और उससे जुड़े गंभीर अपराधों का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें यासीन मछली, उसके चाचा शाहवर और बड़े मछली कारोबारी सारिक मछली (यह भी यासीन का चाचा है) जैसे लोग शामिल हैं। ये लोग न सिर्फ ड्रग्स का धंधा चला रहे थे, बल्कि हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने जैसे घिनौने काम भी कर रहे थे।

जानकारी के अनुसार, यासीन मछली और उसके चाचा शाहवर भोपाल में ड्रग्स का बड़ा कारोबार चला रहे थे। पुलिस की पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे मुंबई, राजस्थान और पंजाब से चरस और अन्य ड्रग्स लाते थे। राजस्थान से सड़क के रास्ते ड्रग्स भोपाल पहुँचाए जाते थे। फिर इन्हें शहर के पब, लाउंज और पार्टियों में खास ग्राहकों तक पहुँचाया जाता था।

ये लोग ड्रग्स की डिलीवरी के लिए कई बार हिंदू लड़कियों का इस्तेमाल करते थे। इन लड़कियों को ड्रग्स फ्री में दिए जाते थे, ताकि वे इस काम में शामिल हो जाएँ।

पुलिस को यह भी पता चला कि यासीन और शाहवर का पंजाब के ड्रग तस्करों से भी सीधा कनेक्शन था। शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को पुलिस ने शाहवर को तलैया थाने से बुधवारा तक जुलूस निकालकर ले गई, ताकि लोग इनके कारनामों को जान सकें।

उसी दिन यासीन को पुलिस राजस्थान ले गई, जहाँ से और भी अहम जानकारी सामने आई। शाहवर को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे दो दिन की रिमांड पर लिया गया। पुलिस ने इन दोनों की निशानदेही पर आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ चल रही है।

क्राइम ब्रांच ने यासीन के मोबाइल से मिले सबूतों के आधार पर मोहित बघेल और गौरव चौहान नाम के दो लोगों को भी हिरासत में लिया। यासीन के फोन में गौरव का एक वीडियो मिला, जिसमें वह शराब पीकर झूम रहा था। पुलिस ने इन दोनों से करीब 10 घंटे तक पूछताछ की, लेकिन अभी तक इन्होंने ड्रग तस्करी से जुड़ी कोई खास जानकारी नहीं दी।

हिंदू लड़कियों का शोषण

इस मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि यासीन और शाहवर ड्रग्स का इस्तेमाल हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण करने के लिए करते थे। ये लोग पहले लड़कियों को फ्री में ड्रग्स देकर उनकी लत लगाते थे। फिर उन पर शारीरिक संबंध बनाने और धर्म बदलने का दबाव डालते थे। एक पीड़ित युवक ने तलैया थाने में शिकायत की कि यासीन और उसके साथियों ने उसे बंधक बनाकर बुरी तरह पीटा था। डर की वजह से उसने पहले शिकायत नहीं की थी।

सारिक मछली पर दुष्कर्म का आरोप

यासीन का चाचा और भोपाल का बड़ा मछली कारोबारी सारिक मछली भी इस मामले में फँस गया है। बागसेवनिया की एक युवती ने पिपलानी थाने में सारिक पर दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन का दबाव डालने का आरोप लगाया। युवती ने बताया कि सारिक का एक गुंडा, दिव्यांश अहिरवार, मैनिट का स्टूडेंट बनकर उससे कोचिंग में मिला और दोस्ती की। एक दिन उसने घर छोड़ने के बहाने उसे क्लब-90 ले जाकर उसका रेप किया।

युवती ने अपनी शिकायत में बताया कि दिव्यांश ने उसे सारिक मछली से मिलवाया। दिव्यांश ने उस पर दबाव डाला कि वह सारिक और उसके साथियों के साथ दोस्ती करे और उन्हें खुश करे। पीड़िता का कहना है कि सारिक के दबाव में पिपलानी थाना पुलिस ने पहले उसकी शिकायत पर दुष्कर्म का केस दर्ज नहीं किया। बाद में एक ब्लैंक कागज पर उसके हस्ताक्षर करवाकर ऐसी FIR दर्ज की गई, जिससे दिव्यांश को आसानी से जमानत मिल गई।

वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग

युवती ने यह भी खुलासा किया कि सारिक के गुंडे हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण करते थे और क्लब में उनके अश्लील वीडियो बनाते थे। इन वीडियोज को वायरल करने की धमकी देकर उन्हें बार-बार शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था।

पीड़िता ने बताया कि दिव्यांश ने उसे रामकृपाल मेहरा, अविनाश आनंद, मोहित बघेल, साहिल जैसे कई लोगों से मिलवाया। इन लोगों ने उसका अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद पुलिस को शिकायत दर्ज करनी पड़ी।

बता दें कि कुछ दिन पहले भोपाल पुलिस ने सैफुद्दीन और शाहरुख नाम के दो ड्रग पेडलरों को पकड़ा था। दोनों भोपाल के क्लबों और पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई करते थे। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे पार्टी, क्लब और जिम के माध्यम से युवाओं को फिटनेस और पार्टी कल्चर के नाम पर ड्रग्स की लत लगाते थे।

दोनों ने पुलिस को बताया कि यहाँ संपन्न घरों की हिंदू लड़कियों को पहले फ्री में नशा करवा कर उनका शोषण किया जाता था। जब युवतियाँ नशे की गिरफ्त में आ जाती थीं, तब उन्हें ड्रग्स के बदले शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था।

यह पूरा मामला भोपाल में ड्रग तस्करी और उससे जुड़े अपराधों का एक काला सच सामने लाता है। यासीन मछली, शाहवर और सारिक मछली जैसे लोग न सिर्फ ड्रग्स का धंधा चला रहे थे, बल्कि हिंदू लड़कियों का शारीरिक और मानसिक शोषण भी कर रहे थे।

पुलिस इस मामले में गहराई से जाँच कर रही है और कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है कि हमें अपने आसपास हो रही ऐसी गतिविधियों पर नजर रखनी होगी और समय रहते पुलिस को सूचित करना होगा।

जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन SIO की मेहमान बनीं ‘ट्विटर हिस्टोरियन’ रुचिका: मंच पाकर किया हिंदुत्व को किया बदनाम, इस्लामी आक्रांताओं का बचाव करने में कोई कसर नहीं छोड़ी

ट्विटर हिस्टोरियन के नाम से मशहूर और विवादों में घिरी रुचिका शर्मा को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में बोलने के लिए गुरुवार  (24 जुलाई 2025) को बुलाया गया। यह कार्यक्रम स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) की ओर से आयोजित किया गया था, जो कि कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ‘जमात-ए-इस्लामी’ की छात्र इकाई है।

SIO का मुख्य उद्देश्य इस्लाम का प्रचार और धर्मांतरण को बढ़ावा देना माना जाता है। यह कार्यक्रम उनके शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (CERT) द्वारा आयोजित किया गया।

जिसमें रुचिका शर्मा को हिंदुत्व और भारतीय इतिहास को लेकर भ्रामक और झूठी जानकारियाँ फैलाने के लिए आमंत्रित किया गया था। रुचिका पर पहले भी आरोप लग चुके हैं कि वे भारत में इस्लामी आक्रमणकारियों द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों को नजरअंदाज या छिपाने का प्रयास करती रही हैं।

हिंदू धर्म को लेकर झूठ फैलाने और इस्लामी कट्टरता को कमतर दिखाने के लिए पहचानी जाने वाली ‘ट्विटर हिस्टोरियन’ रुचिका शर्मा को अब जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा खुलकर समर्थन दे रही है।

SIO ने रुचिका को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में बोलने के लिए बुलाया। ये वही संगठन है जिसने सितंबर 2022 में मोदी सरकार की ओर से बैन लगाए गए इस्लामिक आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का खुलकर बचाव किया था।

SIO ने उस समय ट्वीट करके कहा था, “PFI के खिलाफ देशभर में की गई कार्रवाई सरकार द्वारा असहमति की आवाज को दबाने के लिए जाँच एजेंसियों के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वे इस सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाएँ।”

पिछले साल, स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) ने हमास के आतंकवादी नेता इस्माइल हानिया की तारीफ की थी। इतना ही नहीं, केरल में इस संगठन से जुड़े लोगों ने हमास के एक और कुख्यात आतंकी याह्या सिनवार के लिए जनाजे की नमाज भी अदा की थी।

महाराष्ट्र में स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) के अध्यक्ष सलमान अहमद को फरवरी 2020 में, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 109 (अपराध के लिए उकसाना), 153 (दंगे भड़काने की नीयत से उकसाना) और 34 (साझा इरादे से किया गया अपराध) के तहत केस दर्ज किया गया था।

जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र शाखा SIO के कट्टरपंथी सोच के बावजूद रुचिका शर्मा को इस संगठन से जुड़ने में कोई हिचकिचाहट नहीं हुई। ‘ट्विटर हिस्टोरियन’ के नाम से जानी जाने वाली रुचिका, इस्लामी आक्रमणकारियों की क्रूरता को छिपाने और हिंदू धर्म को गलत तरीके से दिखाने में इस संगठन के लिए एक आसान और उपयोगी चेहरा बन गईं।

रुचिका शर्मा और कैसे इस विकृत कलाकार ने प्रसिद्धि पाई

पिछले कुछ वर्षों में, रुचिका शर्मा अक्सर गलत कारणों से सुर्खियों में रही हैं। उन्होंने कई बार सनातन धर्म और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों का मजाक उड़ाने और उन्हें गलत ढंग से पेश करने की कोशिश की है।

उन्हें अपने विचारों को इतिहास के नाम पर भोले-भाले दर्शकों के सामने रखने का शौक है। रुचिका JNU की पूर्व छात्रा हैं और ‘आईशैडो एंड इतिहास विद डॉ. रुचिका शर्मा’ नाम से एक यूट्यूब चैनल भी चलाती हैं।

एक बार उनके द्वारा लिखा गया एक लेख को स्क्रॉल वेबसाइट ने प्रकाशित किया था, पर उनके लिखे झूठे दावों के कारण बाद में उसे हटा दिया गया था। 2017 में स्क्रॉल ने उनका एक लेख प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था इतिहास का पाठ: पद्मावती को एक राजपूत राजकुमार ने आत्मदाह के लिए मजबूर किया था, अलाउद्दीन खिलजी ने नहीं।’  

इस लेख में दावा किया गया था कि रानी पद्मिनी, रावल रतन सेन की हार और मौत के बाद, कुंभलनेर के राजा देवपाल द्वारा बलात्कार की आशंका से डरकर जौहर (आक्रमणकारियों के हाथों अपमान से बचने के लिए किया गया आत्मदाह) करने पर मजबूर हुई थीं।

यह लेख बाद में हटा दिया गया क्योंकि इसमें इतिहास को लेकर गंभीर गलतियाँ थीं। लेख में झूठे तथ्य पेश किए गए थे, जिससे स्क्रॉल की काफी आलोचना हुई और मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप भी लगा। रुचिका शर्मा खुले तौर पर मुगल तानाशाह औरंगजेब और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की प्रशंसा करती हैं।

वे अक्सर अपने ट्वीट्स और इंटरव्यूज में इन दोनों की कथित उदारता की तारीफ करती हैं, जो आमतौर पर वामपंथी विचारधारा से सहमत मीडिया संस्थानों द्वारा बढ़ावा दी जाती है। हालाँकि, ऐतिहासिक रूप से यह स्पष्ट है कि औरंगजेब और टीपू सुल्तान दोनों ने हिंदुओं, उनके मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर अत्याचार किए। उन्हें मारा, अपंग किया और लूटा।

इसके बावजूद, रुचिका शर्मा इन शासकों का लगातार महिमामंडन और मानवीकरण करती हैं, जिनका इतिहास हिंदुओं के खिलाफ नरसंहार, जबरन धर्मांतरण, जजिया कर (गैर-मुसलमानों पर टैक्स) लगाने और धार्मिक कट्टरता से भरा हुआ है।

सैनिक की बिटिया से लेकर गरीब-लाचार तक… इस्लामी धर्मांतरण गिरोहों ने हिंदू लड़कियों को कैसे फँसाया, जानें सब: छांगुर के गुर्गे ने 5 को दिया था झाँसा, 3 का अब तक कुछ पता नहीं

हिंदू महिलाओं को अपने जाल में फँसाकर उनका धर्म परिवर्तन करने और फिर उन्हें जिस्मफरोशी जैसे धंधे में धकेलने के लिए विदेशों में भेजने वाले धर्मांतरण गिरोह को लेकर लागातार नए खुलासे हो रहे हैं। धर्मांतरण करने वाला कोई एक नहीं बल्कि कई गिरोह देश के अलग-अलग शहरों में अपना जाल बिछाए हुए हैं। कई गिरोहों की पहुँच तो अधिकारियों से लेकर जजों तक भी है।

उत्तर प्रदेश में बीते दो महीने में 6 शहरों में ये गिरोह जाँच एजेंसियों के हत्थे चढ़ चुके हैं। इनमें से बलरामपुर में रहने वाला छांगुर पीर और आगरा के धर्मांतरण गिरोह का सरगना अब्दुल रहमान से पूछताछ के बाद पुलिस ने कुछ बड़े खुलासे किए हैं। इन दोनों गिरोहों के दुबई- पाकिस्तान से फंडिंग और जिस्मफरोशी के धंधे को लेकर कई बड़े कनेक्शन जुड़ते दिख रहे हैं।

छांगुर के मुरीद बदर सिद्दीकी ने फँसाई 5 लड़कियाँ, 3 लापता

छांगुर पीर के गिरफ्तार होने के बाद लगातार नई बातें सामने आ रही हैं। UP-ATS को जाँच में पता चला कि उसका एक चेला मेरठ का बदर सिद्दीकी है। उसने दिल्ली और आसपास के शहरों के साथ बैंगलोर की भी लड़कियों को फाँसा था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बदर अख्तर सिद्दीकी ने 5 लड़कियों को प्रेम जाल में फँसाया लेकिन उनमें से 2 का ही पता चल पाया है। 3 लड़कियाँ वर्तमान में कहाँ हैं इसके बारे में न तो उनके परिवार को पता है और न ही पुलिस को। यहाँ तक कि परिजनों ने उन लड़कियों के जीवित होने की आस भी छोड़ दी है।

चंगुल में फँसने वाली हिंदू पीड़िताएँ लगातार नए खुलासे कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बैंगलुरु की रहने वाली पीड़िता ने बदर सिद्दीकी के बारे में कई बातें बताईं। पीड़िता के इनुसार, उसकी पहचान राजू राठौर नाम के व्यक्ति से हुई।

राजू ने युवती से दोस्ती की और बताया कि वह सहारनपुर का रहने वाला है। उसने झाँसा दिया कि दुबई में पीड़िता को एक बढ़िया नौकरी मिल सकती है। साथ ही वह एक अमीर शेख से उसका निकाह भी करवा देगा।

झाँसे में आई पीड़िता 2021 में दुबई पहुँच गई। उसे बाद में पता चला कि राजू राठौर असल में ‘वसीम’ है। वसीम ने छांगुर पीर का नाम लेकर उससे बात करवाई। छांगुर ने पीड़िता को फोन पर अपने ‘मुरीद’ बदर सिद्दीकी से मिलने को कहकर धर्मांतरण की बारे में कहा।

हालाँकि बदर और वसीम के दबाव डालने के बावजूद पीड़िता ने धर्म बड़ले से मना कर दिया। इसके बाद उसे चुप रहने की धमकी देकर वापस भारत भेज दिया गया। पीड़िता ने वापस आकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को इसके बारे में ईमेल लिखा। 6 जून को गोरखपुर में सीएम योगी से जनता दरबार में जब पीड़िता ने अपनी बात कही तो छांगुर को गिरफ्तार किया गया।

परिवार के खिलाफ जिसके लिए गई, उसी ने किया लापता

इसके अलावा मेरठ की रहने वाली एक अन्य युवती आशा नेगी ने LIC एजेंट महमूद सिद्दीकी से बीमा करवाया। इसके बाद उसके बेटे बदर सिद्दीकी ने आशा से नजदीकियाँ बढ़ाईं और प्रेम जाल में फाँस लिया। 2017 में आशा ने परिवार के खिलाफ जाकर धर्म परिवर्तन किया और बदर से निकाह कर लिया।

2019 में आशा ने अपने भाई को फोन पर शौहर बदर की प्रताड़ना के बारे में बताया। साथ ही उसे अपनी रोती हुई फोटो और बदर के पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी के फोटो खींचकर वॉट्सऐप पर भेज दिए। परिवार के पास बस यही एक आखिरी निशानियाँ हैं। इसके बाद से आशा का कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है।

आशा के परिवार वाले बदर के मेरठ वाले घर भी पहुँचे। वहाँ पर बदर के अब्बू-अम्मी ने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि बदर से उनका अब कोई वास्ता नहीं है। आशा की माँ मेरठ के सिविल लाइन्स थाने पर भी गईं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।

रिपोर्ट में बताया गया है कि परिजनों को ये भी नहीं पता कि उनकी बेटी जिंदा है या मर गई। इसके अलावा बदर ने जिन 5 लड़कियों को फँसाया था, उनमें से आशा के अलावा 2 और लड़कियों का कोई अता-पता नहीं है। ये दोनों लड़कियाँ 2021 में लापता हुईं। परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई लेकिन कोई सफलता नहीं मिला।

आशा के गायब होने के 6 वर्ष बाद जाकर 24 जुलाई 2025 में FIR दर्ज की है। पुलिस ने बदर को खोजने के लिए 2,00,000 रुपए का इनाम भी रखा है। ATS ने भी उसके खिलाफ जाँच तेज कर दी है।

फोटो साभार- दैनिक भास्कर

खाड़ी देशो में मिले खाते

रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई है कि पहले भी जाँच के दौरान क्राइम ब्रांच जब बदर तक पहुँचने के बिल्कुल करीब थी, उस समय मेरठ में तैनात रहे एक जज ने इंस्पेक्टर को अपने कमरे में बुलाया और केस पर पूछताछ की। इसके बाद उसकी टीम को इस केस से दूर होने तक के लिए कह दिया था।

छांगुर के गिरोह में शामिल नीतू उर्फ नसरीन और नवीन उर्फ जमालुद्दीन के नाम पर कई खाड़ी देशों में बैंक खाते मिले हैं। इनमें अल नहदा, अल अंसारी एक्सचेंज, एमिरेट्स NBD, वोस्ट्रो और मसरफ बैंकों के नाम सामने आए हैं। इनमें ट्रांजैक्शन करने के लिए नीतू और नवीन 2014 से 2020 के बीच 30 से अधिक बार UAE का दौरा किया।

आगरा धर्मांतरण के तार दुबई- पाकिस्तान से जुड़े

आगरा के धर्मांतरण गिरोह के सरगना अब्दुल रहमान ने भी पुलिस की पूछताछ में अपने कई राज खोले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रहमान ने धर्मांतरण के इस खेल के लिए पाकिस्तान से फंडिंग मिलने की बात भी कुबूल की है। साथ ही ये पूरा रैकेट दुबई से संचालित किया जाता था। इसके अलावा उसे कनाडा, अमेरिका, दुबई के साथ अन्य खाड़ी देशों से फंडिंग की बात भी सामने आ चुकी है।

आगरा धर्मांतरण के मामले में पुलिस अब तक 6 राज्यों से 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें रहमान के साथ गोवा से आयशा को भी गिरफ्तार किया गया है। रहमान ने बताया कि लड़कियों का धर्म परिवर्तन करने के बाद उन्हें ‘रिवर्ट मुस्लिम’ नाम के एक ग्रुप में जोड़ा जाता था। इस व्हाट्सएप ग्रुप का एडमिन असल में एक पाकिस्तानी तनवीर नाम का शख्स है। ये दुबई में रहता है। इसी ग्रुप के जरिए लड़कियों को दीनी तालीम, नमाज पढ़ने और अन्य इस्लामी बातें सिखाईं जाती थीं।

पुलिस पूछताछ में आयशा के मोबाइल से तनवीर की ओर से भेजे गए तीन हिंदू लड़कियों की वीडियो मिली है जिनका धर्म परिवर्तन किए जाने की तैयारी चल रही थी। पर उससे पहले ही पुलिस की बड़ी कार्रवाई ने उनका काम बिगाड़ दिया।

पुलिस के द्वारा रेस्क्यू की गई 4 में से 1 लड़की ने बताया कि उसके पिता सेवानिवृत्त फौजी हैं। वह देहरादून पढ़ने गई थी। वहाँ उसकी दोस्ती एक मुस्लिम लड़की उरूज से हुई थी। उसने उसका ब्रेनवॉश कर 2022 अब्दुल रहमान से मिलवाया। उसके बाद उसे कलमा पढ़वाकर धर्मांतरण किया गया। इसके बाद उसे कहा गया कि एक मुस्लिम की तीसरी या चौथी बीवी बनना पड़ेगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, लड़की का निकाह एक रिवर्ट मुस्लिम अब्दुल्ला से ही रहमान के घर पर ही करवा दिया गया। पुलिस के अनुसार, धर्मांतरण के लिए लड़कियों को दिल्ली से कोलकाता ले जाने की तैयारी हो रही थी।

धर्मांतरण गिरोह के मामले में लड़कियों से दोस्ती की गई और धीरे-धीरे उनका ब्रेनवॉश किया गया। जिनका ब्रेनवॉश हो गया, उन्हीं पर धर्म परिवर्तन का पूरा जाल बिछाकर उन्हें देश या विदेशों में अपने काले कारनामों को अंजान देने के लिए भेज दिया गया।

किसी अन्य धर्म के बारे में जानकारी होने की जिज्ञासा अच्छी बात है, लेकिन उस धर्म के झाँसे में आकर अपनी पहचान बदल लेना सामान्य नहीं है बल्कि ये भविष्य के किसी बड़े खतरे की ओर इशारा है। इस बारे में सोचना और सतर्क रहने का काफी जरूरत है।

सिद्धार्थनगर के अल फारुक कॉलेज का मैनेजर शब्बीर अहमद गिरफ्तार, नौकरी के नाम पर करवा रहा था धर्मांतरण: छांगुर पीर से निकला कनेक्शन, शिकायतकर्ता बोला- ₹20 लाख का लालच भी दिया

उत्तर प्रदेश के जिला सिद्धार्थनगर के एक इंटर कॉलेज से धर्मांतरण का खेल सामने आया है। यहाँ नौकरी दिलाने की आड़ में लोगों का धर्मांतरण किया जा रहा था। इस मामले में लिखित शिकायत मिलने के बाद यूपी पुलिस ने आरोपित मैनेजर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपित के तार छांगुर पीर से भी जुड़े हो सकते हैं पुलिस इसे लेकर भी जाँच कर रही है।

इस पूरे मामले को लेकर ऑपइंडिया ने शिकायकर्ता अखंड प्रताप सिंह से बातचीत की। बातचीत में शिकायतकर्ता ने इंटर कॉलेज के मैनेजर मोहम्मद शब्बीर अहमद पर गंभीर आरोप लगाए और कॉलेज में शिक्षा की आड़ में हो रहे धर्मांतरण के खेल का भी खुलासा किया है।

दरअसल मामला सिद्धार्थनगर जिले के इटवा थाना क्षेत्र के अल फारुक इंटर कॉलेज का है और शिकायतकर्ता अखंड प्रताप सिंह पुत्र उमेश प्रताप सिंह नगर पंचायत डुमरियागंज जिला सिद्धार्थनगर के मूल निवासी हैं। शिकायतकर्ता ने पुलिस और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी लिखित शिकायत में बताया कि वर्ष 2020-21 के सत्र में उन्हें अल फारुक इंटर कॉलेज में बाबू के रिक्त पद की जानकारी मिली। इस पर जब वह कॉलेज गए तो मैनेजर शब्बीर अहमद ने 15 हजार रुपए महीने देने की बात करते हुए, नौकरी ज्वाइन करने को बोला। इस पर अगले दिन से प्रताप सिंह कॉलेज जाने लगे।

अखंड प्रताप सिंह के मुताबिक, करीब 8-10 दिन बाद मैनेजर शब्बीर अहमद ने उन्हें अपने ऑफिस बुलाया। ऑफिस में बैठे चार-पाँच लोगों के बीच ड्यूटी एग्रीमेंट के नाम पर मुझसे 100 रुपए के ब्लैंक स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर कराए। इसके बाद मैनेजर शब्बीर ने हिंदू धर्म और पूजा पद्धति को लेकर विरोध करते हुए अखंड प्रताप सिंह से इस्लाम धर्म स्वीकार करने की बात कही। जब इंकार किया तो उन पर दवाब बनाया गया। फिर इस्लाम स्वीकार करने पर लालच देते हुए व्हाट्सऐप कॉल से विदेश में बैठे एक मौलाना से बात कराई।

अखंड प्रताप सिंह द्वारा दी गई शिकायत की प्रति

मौलाना ने कॉल पर इस्लाम में आने की दावत देते हुए इस्लाम स्वीकार करने पर 20 लाख रुपए देने की बात कही और फिर बड़ोदरा-गुजरात जमात में मिलने के लिए कहा। इसके बाद अखंड प्रताप कैसे भी मैनेजर की ऑफिस से निकल गए। घटना के कुछ दिन बाद से शब्बीर सादे स्टांप पेपर पर धर्म परिवर्तन की बात लिखकर दिखाते हुए अखंड प्रताप पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाता रहा। विरोध करने पर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी गई।

पहले भी की थी पुलिस में शिकायत

शिकायतकर्ता अखंड प्रताप सिंह के मुताबिक, इस संबंध में वह पहले नजदीकी थाने में शिकायत लेकर गए थे लेकिन थाना पुलिस ने मामले की शिकायत एसएसपी और मुख्यमंत्री से करने की बात करते हुए थाने से टाल दिया था। प्रताप सिंह का दावा है कि आरोपित शब्बीर अहमद करोड़पति होने के साथ ही काभी प्रभावशाली व्यक्ति है। इसी के चलते प्रताप सिंह डर कर घर बैठ गए, लेकिन झांगुर पीर की धर्मांतरण मामले में गिरफ्तारी के बाद आत्मविश्वास बढ़ा तो अखंड प्रताप ने मीडिया में आकर अपनी पीड़ा बताई और पुलिस को लिखित शिकायत दी।

शिकायतकर्ता अखंड प्रताप सिंह

मैनेजर शब्बीर अहमद गिरफ्तार, भेजा गया जेल

शिकायतकर्ता अखंड प्रताप सिंह की लिखित शिकायत के बाद अल फारुक इंटर कॉलेज के मैनेजर मोहम्मद शब्बीर अहमद को सिद्धार्थनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इटवा पुलिस और इस मामले की जाँच कर रहे चौकी इंचार्ज अनिल ओझा ने ऑपइंडिया को बताया कि आरोपी शब्बीर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। कुछ दस्तावेज भी पुलिस ने इंटर कॉलेज से बरामद किए हैं। शिकायतकर्ता के आरोपों को लेकर मामले की जाँच की जा रही है। छांगुर पीर से कनेक्शन के एंगल से भी पुलिस जाँच कर रही है।

आरोपित शब्बीर के समर्थन में आए भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर रावण

मामले में आरोपित शब्बीर अहमद की गिरफ्तारी के बाद भीम आर्मी चीफ ने एक ट्वीट के माध्यम से शब्बीर अहमद को धार्मिक शिक्षा, सामाजिक समरसता और सद्भाव का प्रतीक बताया, साथ ही शिकायतकर्ता के आरोपों को निराधार और फर्जी करार दिया। इस पर अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि चन्द्रशेखर रावण अपनी राजनीति कर रहे हैं। उन्हें इतना ही सामाजिक बनने का शौक है तो वह अपने संसदीय क्षेत्र नगीना की चिंता करे, बाकी पूरा प्रदेश सीएम योगी संभाल लेंगे।

जब 10000 फीट की ऊँचाई पर भारतीय सेना ने पाकिस्तान को दिखाई औकात… कारगिल युद्ध में देश के 527 जवान हुए थे बलिदान, 323+ घायल: PM बोले- ये उस शौर्य और साहस को याद करने का दिन

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शनिवार (26 जुलाई 2025) को करगिल वॉर मेमोरियल में रीथ लेइंग सेरेमनी की गई। कारगिल विजय दिवस की इस 26वीं वर्षगाँठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को शुभकामनाएँ दी।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यह अवसर हमें माँ भारती के उन वीर सपूतों के अप्रतिम साहस और शौर्य का स्मरण कराता है, जिन्होंने देश के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मातृभूमि के लिए मर-मिटने का उनका जज्बा हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।”

वर्ष 1999 में इसी दिन भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय की सफलता की घोषणा की थी। पाकिस्तानी घुसपैठियों के साथ भारतीय सेना का यह युद्ध मई से जुलाई 1999 तक चला था।

क्यों और कब हुआ कारगिल युद्ध?

अप्रतिम साहस का प्रतीक ‘कारगिल विजय दिवस’ हर साल 26 जुलाई को पूरे भारत में गर्व और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सेना के उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर होता है, जिन्होंने 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देकर भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की।

जानकारी के अनुसार, दरअसल पाकिस्तानी फौज ने ‘ऑपरेशन बदर’ के तहत भारत की सीमा में घुसपैठ की। कारगिल क्षेत्र में नियंत्रण रेखा को पार कर पाक ने कई फौजियों और आतंकवादियों को गुप्त रूप से भेजा।

इसी ऑपरेशन में भारत के कैप्टन सौरभ कालिया सहित 5 भारतीय सैनिकों को पाकिस्तानी फौज ने पकड़ लिया। उन्हें प्रताड़ित किया और मार दिया था। उनकी बेरहमी का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ था।

पाकिस्तान की फौज और आतंकवादियों ने मिलकर भारतीय सीमाओं में घुसपैठ के बाद कई ऊँची पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद साल 1999 के मई महीने में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ नामक अभियान चलाकर लगभग दो महीने की कठिन और भीषण लड़ाई की और इन क्षेत्रों को फिर से अपने नियंत्रण में लिया।

भारतीय सेना ने पाकिस्तानियों को कैसे सिखाया था सबक

युद्ध के दौरान सबसे पहले तोलोलिंग की चोटी भारतीय सेना के कब्जे में आई। इसके बाद भारतीय सेना और पाकिस्तानी आतंकवादियों के बीच 11 घंटे तक लड़ाई चली। इसमें टाइगर हिल्स पर भी भारत ने जीत हासिल की और अगली कड़ी में भारतीय सेना द्वारा द्रास पर कब्जा कर लिया गया।

युद्ध में एक और सफलता तब मिली जब भारतीय फौज ने ‘थ्री पिंपल्स’ एरिया पर कब्जा किया। ‘थ्री पिंपल्स’ एरिया में नॉल, ब्लैक रॉक हिल और थ्री पिंपल्स पहाड़ियाँ शामिल थीं। पाकिस्तानी घुसपैठियों से एक और छोटे संघर्ष के बाद सेना ने प्वाइंट 4700 पर जीत हासिल की थी।

25 जुलाई 1999 को पाकिस्तान ने भारतीय सेना के अदम्य साहस से थक-हारकर कदम पीछे कर लिए और 26 जुलाई को आधिकारिक तौर पर भारत की विजय के साथ कारगिल में इस युद्ध की समाप्ति हुई।

इस युद्ध में भारत के 527 जवान बलिदान हुए, वहीं 363 जवान घायल हुए थे। यह युद्ध अत्यंत विषम और कठिन परिस्थितियों में लड़ा गया था। भारतीय सैनिकों ने इस युद्ध में ऊँचे पहाड़ी इलाकों, बर्फबारी और कम ऑक्सीजन जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए अद्भुत साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। 10 हजार फीट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित बटालिक, कारगिल, लेह और बाल्टिस्तान के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण कारगिल युद्ध का केंद्र बिंदु था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज पांडे, ग्रेनेडियर योगेंद्र यादव, राइफलमैन संजय कुमार, कैप्टन अमोल कालिया, लेफ्टिनेंट बलवान सिंह जैसे अनेक वीर जवानों ने असाधारण वीरता दिखाई। इनमें से कई जवानों को भारत सकरार द्वारा मरणोपरांत परमवीर चक्र और अन्य वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

कारगिल विजय दिवस सिर्फ एक सैन्य विजय का दिन नहीं है, बल्कि यह दिन भारतीय जनता के लिए देशभक्ति, एकता और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है। इस दिन देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है, उनके योगदान को याद किया जाता है और सेना के पराक्रम को सलाम किया जाता है।

आज देश का युवा कारगिल युद्ध से प्रेरणा लेकर राष्ट्र सेवा की भावना को अपनाता है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि देश की रक्षा में हमारे वीर जवानों का बलिदान सर्वोपरि है। कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस और आत्मबलिदान की अमिट कहानी है, जो आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, निष्ठा और कर्तव्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देती रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता, ट्रंप और मेलोनी पिछड़े: ‘मॉर्निंग कन्सल्ट’ की सर्वे रिपोर्ट में जारी हुए आँकड़े, भारतीय पीएम बने 75% लोगों की पसंद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता बन गए हैं। अमेरिका की बिजनेस इंटेलिजेंस कंपनी मॉर्निंग कन्सल्ट (Morning Consult) ने जुलाई 2025 की अपनी सर्वे रिपोर्ट शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को जारी की। इसके अनुसार, पीएम मोदी को 75% लोगों की अप्रूवल रेटिंग मिली है।

जानकारी के अनुसार, अमेरिका की बिजनेस इंटेलिजेंस कंपनी मॉर्निंग कंसल्ट ने इसके लिए एक सर्वे किया था। सर्वे में 4 जुलाई 2025 से 10 जुलाई 2025 तक का डेटा शामिल किया गया है। इसके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के नेताओं में 75% अप्रूवल रेटिंग के साथ सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता हैं। सर्वे में विश्व के 20 से अधिक देशों के नेताओं की रेटिंग शामिल की गई है।

पीएम मोदी के सबसे लोकप्रिय नेता चुने जाने के बाद बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत सुरक्षित हाथों में है। उन्होंने लिखा, “एक अरब से ज्यादा भारतीयों के प्रिय और दुनिया भर में लाखों लोगों के सम्मान के पात्र, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर मॉर्निंग कंसल्ट ग्लोबल लीडर अप्रूवल ट्रैकर में शीर्ष पर हैं। दुनिया भर में सर्वोच्च रेटिंग वाले और सबसे विश्वसनीय नेता। मजबूत नेतृत्व। वैश्विक सम्मान। भारत सुरक्षित हाथों में है।”

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को पीछे छोड़ जवाहरलाल नेहरू के बाद सबसे लंबे समय तक बने रहने वाले प्रधानमंत्री भी बन गए हैं। मॉर्निंग कंसल्ट के सर्वे में भाग लेने वाले कुल 75% लोगों ने PM मोदी को एक लोकतांत्रिक विश्व नेता के रूप में पसंद किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, मॉर्निंग कंसल्ट ने बताया कि लेटेस्ट अप्रूवल रेटिंग 4 से 10 जुलाई, 2025 तक इकट्ठा किए गए डेटा पर आधारित हैं। रेटिंग हर देश में वयस्कों के विचारों का सात दिन का सिंपल मूविंग एवरेज दिखाती हैं।

फोटो साभार- इंडिया टुडे

पीएम मोदी के बाद साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग 59% के साथ दूसरे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई हैं। उन्हें 57% वोट मिले हैं। वहीं सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 44% वोट के साथ आठवें स्थान पर हैं।

लिस्ट में कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी चौथे स्थान पर हैं। उन्हें 56% वोट मिले हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के एंथोनी अल्बानीस लिस्ट में 54% वोट के साथ पाँचवें स्थान पर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे कम वोटों के साथ पोलैंड के डोनाल्ड टस्क नौवें स्थान पर हैं। वहीं इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी दसवें स्थान पर हैं।