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SP MLA इकबाल महमूद ने काँवड़ यात्रा को ‘महापर्व’ बताने की आड़ में की बदजुबानी, काँवड़ियों को बताया ‘गुंडा-मवाली’: कहा- 2027 में सपा सरकार में किए जाएँगे ‘अलग इंतजाम’

उत्तर प्रदेश में काँवड़ यात्रा के पावन अवसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के संभल से विधायक इकबाल महमूद ने एक बार फिर अपनी जहरीली जुबान से सनातन धर्म और शिवभक्तों को अपमानित करने का घिनौना काम किया है। काँवड़ यात्रा को आस्था का महापर्व बताने की आड़ में इकबाल महमूद ने शिवभक्तों को ‘गुंडा’ और ‘मवाली’ करार दे दिया।

इतना ही नहीं इकबाल महमूद ने 2027 में सपा की सरकार बनने की धमकी देते हुए कहा कि तब काँवड़ियों के लिए ‘अलग इंतजाम’ किए जाएँगे। यह बयान न सिर्फ सपा की सांप्रदायिक मानसिकता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि यह पार्टी गुंडागर्दी और नफरत की राजनीति की असली पोषक है।

इकबाल महमूद ने एक चैनल से बातचीत में काँवड़ यात्रा को निशाना बनाते हुए कहा, “इसमें शिवभक्तों से ज्यादा गुंडे और मवाली हैं, जो सड़कों पर बदतमीजी और तोड़फोड़ करते हैं।” उन्होंने मुजफ्फरनगर की एक घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि काँवड़ियों ने स्कूल वैन पर हमला किया।

यह बयान न सिर्फ शिवभक्तों की आस्था पर चोट है, बल्कि लाखों काँवड़ियों की श्रद्धा को बदनाम करने की साजिश भी है। इकबाल ने धमकी भरे लहजे में कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनेगी और तब काँवड़ियों को ‘सबक’ सिखाया जाएगा। यह साफ है कि सपा की नजर में श्रद्धालु नहीं, बल्कि सिर्फ वोटबैंक की राजनीति मायने रखती है।

सपा की यह करतूत कोई नई बात नहीं है। पार्टी के नेता पहले भी हिंदू धर्म, मंदिरों और आस्था के प्रतीकों पर विवादित बयान देकर माहौल बिगाड़ते रहे हैं। चाहे वह महबूब अली का मुस्लिम आबादी बढ़ने का दंभ हो या इंद्रजीत सरोज का मंदिरों और देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी, सपा बार-बार साबित करती है कि वह सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति की असली ठेकेदार है। इकबाल महमूद का ताजा बयान भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जो काँवड़ यात्रा जैसे पवित्र आयोजन को बदनाम करने की कोशिश है।

इस बीच, सीएम योगी आदित्यनाथ ने काँवड़ यात्रा को बदनाम करने वालों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यात्रा मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की जा रही है, ताकि अराजक तत्वों को बेनकाब किया जाए। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत गुंडागर्दी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि सपा जैसे दल जो खुद को ‘गुंडों की पार्टी’ साबित कर चुके हैं, क्या ऐसी कार्रवाई से सबक लेंगे?

इकबाल महमूद का यह बयान न सिर्फ काँवड़ियों, बल्कि पूरे हिंदू समाज के लिए अपमानजनक है। सपा की हरकत दिखाती है कि वह आस्था और संस्कृति का सम्मान करने के बजाय, समाज को बाँटने और नफरत फैलाने में विश्वास रखती है। साल 2027 की धमकी देकर सपा ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि वह सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है।

ऑपरेशन सिंदूर, नक्सलवाद, मेड-इन-इंडिया और अर्थव्यवस्था… ‘मानसून सत्र’ से पहले PM मोदी ने मीडिया से की बात, कहा- ये ‘विजय उत्सव का सत्र’ है

मानसून सत्र से पहले पीएम मोदी ने देश की उपलब्धि को गिनवाया है। मानसून सत्र से पहले पीएम मोदी ने देश की उपलब्धि को गिनवाया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भारत के कदम रखने और ऑपरेशन सिंदूर में देश के पराक्रम की बात कही।

उन्होंने कहा कि इस दशक में शांति और प्रगति देखी गई, लाल गलियारा अब हरित विकास क्षेत्र में बदल रहा है। 2014 से पहले मुद्रास्फीति दर दहाई अंक में हुआ करती थी, अब यह लगभग दो प्रतिशत है। मानसून सत्र में पीएम ने विपक्ष से सकारात्मक बहस का आह्वान किया है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को पूरी तरह सफल बताते हुए कहा कि भारत की सैन्य शक्ति का, भारत के सैन्य के सामर्थ्य का रूप दुनिया देख रहा है। भारत की सेना ने जो लक्ष्य निर्धारित किया था, वह 100 फीसदी हासिल किया।

आतंकियों के घर में घुसकर 22 मिनट में उसे ध्वस्त कर दिया। बिहार के कार्यक्रम के दौरान जो घोषणा की थी, बहुत ही कम समय में सेना ने वो कर के दिखा दिया। मेक इन इंडिया की ताकत पूरी दुनिया ने देखी है।

पीएम ने कहा कि पहलगाम में हुए क्रूर नरसंहार ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया और आतंकवाद तथा उसके केंद्र की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया। दलगत भावना से ऊपर उठकर, पूरे भारत के प्रतिनिधि पाकिस्तान की भूमिका को उजागर करने के लिए एकजुट हुए

उन्होंने कहा, “हमारी सैन्य शक्ति में बहुत ही दमखम है ये दिखा दिया। इसमें मेड इन इंडिया सैन्य शक्ति का नया औजार पर दुनिया अचंभित है। मेड इन इंडिया रक्षा उपकरण बन रहे हैं उससे भारत की सैन्य शक्ति को बल मिलेगा। नौजवानों के रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।”

नक्सलवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “आज नक्सलवाद का दायरा तेजी से सिकुड़ रहा है। माओवाद और नक्सलवाद को पूरी तरह उखाड़ने का काम तेज गति से चल रहा है। मैं गर्व से कह सकता हूँ कि देश में सैकड़ों जिले नक्सल की चपेट से निकल कर मुक्ति का साँस ले रहे हैं। “

पीएम ने भारत की अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पहले हम दुनिया में 10वें नंबर की अर्थव्यवस्था थे, लेकिन अब हम दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं।

पीएम ने कहा, “देश ने एक स्वर का सामर्थ्य क्या होता है ये देखा है, इसलिए सदन में भी ये स्वर निकले। दल हित में मन मिले न मिले लेकिन देशहित में मन जरूर मिले। इसलिए देश की प्रगति को आगे ले जाने वाले बिल को पास करें।”

पीएम ने कहा, “बारिश हर परिवार की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है। आने वाले दिनों में देश को इससे काफी फायदा मिलेगा। मानसून सत्र देश के लिए गौरवपूर्ण सत्र है। मानसून नवीनता और नवसृजन का प्रतीक है। अब तक की खबरों के मुताबिक देश में मौसम बहुत ही अच्छे ढंग से आगे बढ़ रहा है। बारिश किसानों की अर्थव्यवस्था,देश की अर्थव्यवस्था और हर परिवार की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है। “

देश के साथ खड़े हुए शशि थरूर तो केरल कॉन्ग्रेस ने बंद किया दरवाजा: पूर्व मंत्री बोले- वे अब हमारे नहीं, पार्टी कार्यक्रमों में तिरुवनंतपुरम MP को नहीं करेंगे आमंत्रित

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता के. मुरलीधरन ने रविवार को तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को लेकर बड़ा बयान दिया, जिसने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी। मुरलीधरन ने साफ कहा कि जब तक थरूर राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपना रुख नहीं बदलते, उन्हें तिरुवनंतपुरम में कॉन्ग्रेस के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा।

के मुरलीधरन ने शशि थरूर को चेतावनी देते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्य होने के बावजूद अब उन्हें ‘हम में से एक’ नहीं माना जाता। मुरलीधरन ने यह भी कहा कि थरूर के खिलाफ आगे की कार्रवाई का फैसला पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब थरूर ने कोच्चि में एक कार्यक्रम में कहा कि देश और उसकी सीमाओं की सुरक्षा पहले आती है और पार्टियाँ सिर्फ देश को बेहतर बनाने का माध्यम हैं। उन्होंने हाल के घटनाक्रमों में सशस्त्र बलों और केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया था, जिसकी वजह से उनकी अपनी पार्टी में आलोचना हो रही है।

शशि थरूर ने कहा, “मैं अपने रुख पर कायम हूँ, क्योंकि यह देशहित में है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दूसरी पार्टियों से सहयोग की बात करने पर उनकी अपनी पार्टी को यह विश्वासघात लगता है, जो एक बड़ी समस्या है।

मुरलीधरन ने पहले भी थरूर की आलोचना की थी। हाल ही में एक सर्वेक्षण में थरूर को यूडीएफ की ओर से केरल के मुख्यमंत्री पद का पसंदीदा चेहरा बताया गया था, जिस पर मुरलीधरन ने तंज कसते हुए कहा था कि थरूर को पहले अपनी पार्टी की पहचान तय करनी चाहिए। इसके अलावा थरूर के एक लेख में इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गाँधी की भूमिका पर टिप्पणी को लेकर भी मुरलीधरन ने उनसे स्पष्ट राजनीतिक रास्ता चुनने को कहा था।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद थरूर के बयानों ने पार्टी को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर किया, जिससे उनके और कॉन्ग्रेस नेतृत्व के बीच तनाव बढ़ गया। यह घटनाक्रम कॉन्ग्रेस के भीतर विचारधारा और नेतृत्व को लेकर गहरी खींचतान को दर्शाता है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि थरूर का रुख पार्टी लाइन से हटकर है, जिससे आंतरिक एकता पर सवाल उठ रहे हैं।

अलीगढ़ से 17 युवतियों समेत 97 महिलाएँ लापता, उमर की गिरफ्तारी से खुला राज – STF के रडार पर 50 लोग: ‘मिशन अस्मिता’ से धर्मांतरण गिरोहों की कमर तोड़ेगी योगी सरकार

अलीगढ़ में अवैध धर्मांतरण के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इसके झाँसे में आईं करीब 97 महिलाओं का पता नहीं चल पा रहा है। ये महिलाएँ लापता बताई जा रही हैं। खुफिया एजेंसियाँ और यूपी पुलिस की विशेष टीमें जाँच में जुटी हुई हैं।

इसका खुलासा पुलिस को उमर गौतम नाम के शख्स की गिरफ्तारी से हुई है। यहाँ का सरगना उमर गौतम ही था जिसने पूरा नेटवर्क फैला रखा था।

दरअसल मार्च 2025 में 33 साल और 18 साल की दो सगी बहनें लापता हो गईं थी। पुलिस इन्हें ढूँढ रही थी। सोशल मीडिया पर अचानक एक बहन एक-47 के साथ नजर आई। इसके बाद पुलिस के कान खड़े हो गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों बहनों को अवैध तरीके से धर्मांतरण कराकर कोलकाता के एक मुस्लिम बहुल इलाके में रखा गया था। यहाँ से दोनों को विदेश भेजने की तैयारी थी।

उमर गौतम की गिरफ्तारी के बाद पता चला है कि 2018 में 33 महिलाओं का धर्मांतरण कराया गया था जिसमें 3 अलीगढ़ की थीं। लेकिन ये नेटवर्क धीरे-धीरे महिलाओं और युवतियों को अपने झाँसे में लेने लगा। यही वजह है कि जनवरी से अब तक 97 महिलाएँ लापता हैं जिनमें से 17 टीन एजर्स हैं।

सोशल मीडिया, विदेशी फंडिंग और आतंकियों से कनेक्शन

पुलिस जाँच में ये बात सामने आई है कि गैंग सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप, डार्क वेब और दूसरे तरीके से महिलाओं से संपर्क करता था। उन्हें अपने प्रेम जाल में फँसाता था और फिर धर्मांतरण के लिए दबाव डालता था। इस नेटवर्क का संचालन इतना गुपचुप तरीके से होता था कि पुलिस को इतने सालों में भनक तक नहीं लगी। गैंग के तार पीएफआई, सिमी, लश्कर ए तैयबा से जुड़ने के संकेत भी मिले हैं।

इसकी फंडिंग अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, यूएई जैसे देशों से हो रही थी। यूपी पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के मुताबिक इस गैंग ने सैकड़ों लोगों को धर्मांतरण करवाया। गैंग में ओडिशा की एसबी कृष्णा उर्फ आयशा, कोलकाता का शेखर राय उर्फ अली हसन, जयपुर का मोहम्मद अली समेत कई लोग शामिल हैं। इनलोगों को 6 अलग अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया है।

यूपी में धर्मांतरण पर कसा शिकंजा

सीएम योगी ने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ ‘मिशन अस्मिता’ चलाने का निर्देश दिया है। इसके तहत आगरा पुलिस ने 6 टीमें गठित की हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी खासा नजर रखा जा रहा है।

ये पता चला है कि अवैध धर्मांतरण करा कर भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की मुहिम चलाई जा रही है। सोशल मीडिया पर ये लोग मूर्ति पूजा और हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करते हैं। ये लोग उन मंदिरों का जिक्र भी करते हैं जिसे मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़ा था। ये लोग हिन्दू धर्म के पूजा पद्धति और रीति-रिवाजों का विरोध करते हैं और आपत्तिजनक बयान देतें हैं।

50 लोग पुलिस के रडार पर

इस मामले में पुलिस के रडार पर करीब 50 लोग हैं। इनके सोशल मीडिया, मोबाइल और दूसरे अकाउंट की पुलिस जाँच कर रही है। इसमें भारत के लोगों के मन में जहर घोलने की पुष्टि हुई है।

पीएम मोदी के वीडियो को अपने तरीके से इस्तेमाल किया

पुलिस को गोवा की आयशा को कनाडा के सैय्यद दाऊद द्वारा फंडिंग के सबूत मिले। पुलिस को कई वीडियो मिले हैं जिसमें देश विरोधी बातें कही गई हैं। यहाँ तक की पीएम मोदी के मंदिर जाने के वीडियो के साथ तुरंत ताजमहल दिखता है और पीछे से वॉयस आती है कि ये तारीख है इस्लाम से रिश्ते जोड़ने होंगे। बहुत बन चुके सोमनाथ अब तोड़ने होंगे।

बांग्लादेशी हैं या रोहिंग्या… बिहार में 11000 निकले ऐसे वोटरों के नाम, जिनका अस्तित्व ही नहीं: पड़ोसी बोले- इनके बारे में तो हमें भी नहीं कुछ पता, EC की SIR ड्राइव से खुलासा

बिहार में चुनाव आयोग (ECI) की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्राइव ने चौंका देने वाला खुलासा किया है। वोटर लिस्ट की सफाई के लिए चलाए जा रहे इस अभियान में 11,000 मतदाता पूरी तरह ‘नॉट ट्रेसेबल’ हैं। यानी न तो उनके पते पर कोई घर मिला, न ही पड़ोसियों को उनकी कोई खबर।

टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से ECI के एक अधिकारी ने दावा किया कि ये 11,000 ‘नॉट ट्रेसेबल’ लोग बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए हो सकते हैं, जो पड़ोसी राज्यों में रहते हुए बिहार में फर्जी वोटर कार्ड बनवाने में कामयाब रहे। ये सनसनीखेज खुलासा बिहार की सियासत में भूचाल ला सकता है, क्योंकि ये घुसपैठिए कथित तौर पर फर्जी वोटिंग के जरिए चुनावी खेल बिगाड़ने की साजिश रच रहे थे।

ECI के मुताबिक, ये गड़बड़ियाँ पुरानी समीक्षा में लापरवाही या भ्रष्टाचार की वजह से हुईं, जिससे घुसपैठियों को वोटर लिस्ट में जगह मिली। कुछ मामलों में तो पते पर कोई घर ही नहीं था और कई बार पड़ोसियों ने भी ऐसे लोगों के बारे में अनभिज्ञता जताई। SIR ड्राइव का मकसद बिहार की वोटर लिस्ट को पूरी तरह साफ करना है, ताकि सिर्फ योग्य भारतीय नागरिक ही मतदान कर सकें। इसके लिए बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने तीन बार घर-घर जाकर जाँच की है।

वोटर लिस्ट की सफाई के लिए चलाए जा रहे इस अभियान में 7.90 करोड़ मतदाताओं में से 95.92% की जाँच पूरी हो चुकी है, लेकिन 41.64 लाख मतदाता अपने पते पर नहीं मिले। इनमें 14.29 लाख संभावित रूप से मृत, 19.74 लाख स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके और 7.50 लाख लोग एक से ज्यादा जगहों पर रजिस्टर्ड पाए गए। लेकिन सबसे सनसनीखेज बात 11,000 मतदाताओं के नॉन ट्रेसेबल होने की है।

वहीं, बिहार की SIR ड्राइव में अब तक 7.15 करोड़ फॉर्म जमा हो चुके हैं, जिनमें से 6.96 करोड़ डिजिटाइज हो गए हैं। 25 जुलाई तक फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख है, और 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी। इसके बाद 1 से 30 अगस्त तक दावे-आपत्तियाँ दर्ज होंगी और 30 सितंबर को फाइनल लिस्ट आएगी।

ECI ने साफ किया कि अगर कोई नाम गलती से शामिल हुआ या छूट गया, तो उसे 30 अगस्त तक ठीक किया जा सकता है। इसके लिए 1 लाख BLOs, 4 लाख वॉलंटियर्स, और 1.5 लाख बूथ लेवल एजेंट्स दिन-रात काम कर रहे हैं। ECI का दावा है कि कोई भी योग्य मतदाता छूटे नहीं, इसके लिए हर मुमकिन कोशिश हो रही है।

लेकिन इस अभियान ने सियासी तूफान भी खड़ा कर दिया है। विपक्षी INDIA ब्लॉक ने इसे ‘वोटबंदी’ और NDA के फायदे की साजिश करार दिया है। दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है और उसने ECI को आधार, राशन कार्ड और वोटर ID जैसे दस्तावेजों की गहन जाँच करने को कहा है।

इस बीच, SIR ड्राइव में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। BLOs ने नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के विदेशी नागरिकों को भारतीय दस्तावेजों – जैसे आधार, राशन कार्ड और डोमिसाइल सर्टिफिकेट के साथ पकड़ा। इन विदेशी नागरिकों की मौजूदगी ने सवाल खड़े किए हैं कि आखिर कैसे इन्हें भारतीय दस्तावेज मिले।

ECI ने कहा कि 1 से 30 अगस्त के बीच गहन जांच होगी, और जो भी अवैध पाया जाएगा, उसे फाइनल वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा। बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ये अभियान और भी अहम हो गया है, क्योंकि फर्जी वोटिंग का खतरा अब सबके सामने है।

भारत-मालदीव दोस्ती फिर पटरी पर, राष्ट्रपति मुइज्जू के बुलावे पर स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में मुख्य मेहमान बनेंगे पीएम मोदी: पड़ोसी मुल्क को चीनी शिकंजे से निकालने की हो रही तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 जुलाई 2025 को मालदीव जा रहे हैं। ये दौरा भारत और मालदीव के बीच दोस्ती को फिर से मज़बूत करने की एक बड़ी कोशिश है। ये उनकी मालदीव की तीसरी यात्रा होगी, लेकिन सबसे खास बात ये है कि मालदीव के नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद ये किसी बड़े विदेशी नेता की पहली आधिकारिक यात्रा होगी।

मोदी पहले 23-24 जुलाई 2025 को ब्रिटेन जाएँगे। वहाँ ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर से उनकी मुलाकात होगी। ये उनकी ब्रिटेन की चौथी यात्रा होगी। वहाँ वो स्टार्मर के साथ व्यापार, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, रक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे तमाम मुद्दों पर बात करेंगे। वो किंग चार्ल्स तृतीय से भी मिलेंगे। लेकिन सबकी निगाहें उनकी मालदीव यात्रा पर टिकी हैं।

पीएम मोदी को मालदीव की 60वीं स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘मुख्य मेहमान’ बनाया गया है। ये दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि इसका कूटनीतिक और रणनीतिक महत्व भी है। भारत और मालदीव के रिश्तों में पिछले एक साल से काफी उतार-चढ़ाव रहे हैं। नवंबर 2023 में जब मोहम्मद मुइज्जू राष्ट्रपति बने, तो उनके ‘इंडिया आउट’ कैंपेन ने दोनों देशों के बीच तनाव पैदा कर दिया। इस कैंपेन में भारतीय सैनिकों को मालदीव से हटाने की बात कही गई थी।

साल 2024 की शुरुआत में हालात और बिगड़ गए। मुइज्जू सरकार के दो मंत्रियों ने पीएम मोदी के खिलाफ सोशल मीडिया पर भद्दी टिप्पणियाँ कीं। ये टिप्पणियाँ तब आईं, जब मोदी ने लक्षद्वीप के टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पोस्ट डाली थी। कई लोगों ने इसे मालदीव के टूरिज्म के खिलाफ देखा, क्योंकि लक्षद्वीप और मालदीव की खूबसूरती एक जैसी है।

जवाब में भारत में ‘बॉयकॉट मालदीव’ कैंपेन शुरू हो गया। भारतीय पर्यटक, जो मालदीव की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हैं, वहाँ जाना कम कर दिए। 2024 के पहले चार महीनों में भारतीय पर्यटकों की संख्या 42% कम हो गई।

लेकिन दोनों देशों ने तनाव को कम करने की कोशिश की। भारत ने मालदीव में तैनात अपने सैन्य कर्मियों को मई 2023 तक हटाकर उनकी जगह सिविल इंजीनियर्स भेज दिए। भारत ने 2025 के बजट में मालदीव को 600 करोड़ रुपये की मदद दी, जो पिछले साल के 470 करोड़ से कहीं ज्यादा है। साथ ही भारत ने 400 मिलियन डॉलर और 30 बिलियन रुपये का करेंसी स्वैप समझौता भी किया, ताकि मालदीव की आर्थिक मुश्किलें कम हों।

मुइज्जू ने भी रिश्ते सुधारने की कोशिश की। सितंबर 2024 में उन दो मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया, जिन्होंने भारत और मोदी के खिलाफ टिप्पणियाँ की थीं। भले ही इसे ‘निजी कारण’ बताया गया, लेकिन सबको पता था कि ये कदम रिश्ते सुधारने के लिए था। 9 जून 2024 को मुइज्जू मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भारत आए और इस दौरे को ‘सफल’ बताया। उन्होंने भारत के साथ रिश्ते मज़बूत करने की इच्छा जताई और जल्द ही भारत आने की बात कही। अक्टूबर 2024 में मुइज्जू ने भारत का दौरा किया और दोनों देशों ने ‘कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड मैरीटाइम सिक्योरिटी पार्टनरशिप’ पर सहमति जताई।

मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद मालदीव का झुकाव चीन की तरफ दिखा। जनवरी 2024 में उनकी पहली विदेश यात्रा चीन की थी, जहाँ उन्होंने 20 बड़े समझौते किए, जिनमें सैन्य और आर्थिक सहयोग शामिल थे। मालदीव 2014 से चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा है। उसने चीन से करीब 1.4 बिलियन डॉलर का कर्ज लिया है, जो उसके कुल सरकारी कर्ज का 20% है।

चीन ने मालदीव में 200 मिलियन डॉलर का ‘चाइना-मालदीव फ्रेंडशिप ब्रिज’ जैसी बड़ी परियोजनाएँ बनाई हैं। मालदीव का लोकेशन इंडियन ओशियन में बहुत अहम है, क्योंकि वहाँ से चीन का 80% तेल आयात गुजरता है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन मालदीव को अपने प्रभाव में रखना चाहता है, ताकि उसकी तेल सप्लाई सुरक्षित रहे।

लेकिन अब मालदीव और श्रीलंका जैसे देशों में चीनी कर्ज से नाराज़गी बढ़ रही है। मालदीव की अर्थव्यवस्था और कर्ज संकट के बीच वो अब भारत के साथ फिर से दोस्ती बढ़ाना चाहता है। मालदीव ने सितंबर 2024 में भारत की 757 मिलियन डॉलर की मदद से डिफॉल्ट होने से बचा। भारत ने मालदीव में हनीमधू द्वीप पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, माले में हाउसिंग प्रोजेक्ट और ब्रिज जैसी परियोजनाओं में भी मदद की।

भारत और मालदीव का रिश्ता 1965 से है, जब मालदीव ब्रिटिश शासन से आज़ाद हुआ। भारत ने हमेशा मुसीबत में मालदीव की मदद की, चाहे वो 1988 का ऑपरेशन कैक्टस हो, 2004 की सुनामी हो या कोविड-19 महामारी। भारत ने मालदीव में सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसे कई प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाया। 18 मई 2025 को दोनों देशों ने 100 करोड़ रुपये की ग्रांट के तहत 13 समझौते किए। मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील ने कहा कि भारत की मदद हमेशा मालदीव की ज़रूरतों के हिसाब से होती है।

मालदीव भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी और ‘विज़न महासागर’ का अहम हिस्सा है। ये पॉलिसी हिंद महासागर में शांति और कनेक्टिविटी बढ़ाने की बात करती है। मोदी का ये दौरा सिर्फ दो देशों की दोस्ती को फिर से मज़बूत करने का नहीं, बल्कि हिंद महासागर में भारत की ताकत दिखाने का भी मौका है। हाल के सालों में चीन ने मालदीव में अपनी पकड़ मज़बूत की थी, लेकिन अब मालदीव भारत की तरफ लौट रहा है।

मोदी का स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होना सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है। ये दिखाता है कि भारत की नरम कूटनीति और पड़ोसी देशों से दोस्ती की रणनीति काम कर रही है। मालदीव की अर्थव्यवस्था टूरिज्म पर टिकी है, और चीनी कर्ज के बोझ तले वो अब भारत के साथ फिर से नज़दीकी चाहता है। मालदीव के लिए ये आर्थिक और कूटनीतिक सुरक्षा का रास्ता है। पहले मालदीव भारत से दूर जा रहा था, लेकिन अब मंत्रियों के इस्तीफे, भारत की बढ़ी हुई आर्थिक मदद और बड़े नेताओं की मुलाकातों से रिश्ते फिर से पटरी पर आ रहे हैं।

पीएम मोदी की मालदीव यात्रा सिर्फ एक कूटनीतिक दौरा नहीं है, बल्कि एक बड़ा स्टेटमेंट है। ये भारत-मालदीव की ऐतिहासिक दोस्ती, सांस्कृतिक नज़दीकी, आर्थिक निर्भरता और रणनीतिक महत्व को दिखाता है। मालदीव अब चीन के कर्ज और टूरिज्म की चुनौतियों के बीच एक संतुलित रास्ता चुन रहा है, जो भारत की तरफ जाता है।

मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में ऋति सागर ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

ब्रेनवॉश, हिंदुओं का धर्मांतरण, लड़कियों की खरीद-फरोख्त…विदेशी फंडिंग और करोड़ों की संपत्ति: पढ़ें- गिरोह के सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर के गुनाहों का काला चिट्ठा

जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में बड़े पैमाने पर अवैध धर्मांतरण का धंधा चलाने वाला साजिशकर्त है। वह खुद को ‘हाजी पीर जलालुद्दीन’, ‘पीर बाबा’ या ‘हजरत पीर’ कहलवाना पसंद करता था। छांगुर पीर के खिलाफ हिंदू लड़के-लड़कियों, गरीब और असहाय लोगों को बहला-फुसलाकर जबरन धर्मांतरण कराने और उनकी संपत्ति हड़पने के कई आरोप सामने हैं।

इतना ही नहीं, छांगुर पीर को धर्मांतरण का नेटवर्क चलाने के लिए विदेशों से भी फंडिंग भी मिलती थी। छांगुर पीर के 10, 20 नहीं बल्कि 40+ ऐसे बैंक अकाउंट सामने आए, जिसमें लाखों-करोड़ों पैसा केवल हिंदुओं का धर्मांतरण और लड़कियों को बेचने के लिए दिया मिलता था।

छांगुर पीर अपना नेटवर्क बढ़ाने के लिए मुस्लिम के अलावा हिंदुओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने गैंग का सदस्य बना लेता था और उनको राजा-रानी की तरह जिंदनी जीना, दौलत, लग्जरी गाड़ियाँ आदि का लालच देता था। छांगुर पीर के गैंग में जिन हिंदुओं ने इस्लाम कबूल किया, वो लोग फिर अन्य हिंदुओं का ब्रेनवॉश कर इस्लाम कबूल करने के लिए प्रेरित करते और पैसे देते थे।

धर्मांतरण मामले में जिन हिंदुओं ने छांगुर का ऑफर स्वीकार किया, उनको गैंग में शामिल किया। लेकिन जिन हिंदुओं ने इसका विरोध किया, उनकों या तो धमकी दी गई या फिर उन्हें मार दिया गया। अब जानें पूरे सिलसिलेवार तरीके से छांगुर पीर के धर्मांतरण गैंग की थ्योरी, जिसमें मिलेंगे कब, क्यों और कैसे जैसे सभी प्रश्नों के उत्तर।

कैसे चालू किया छांगुर पीर ने धर्मांतरण का धंधा?

जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर पहले फेरीवाला था और गाँव-गाँव जाकर कपड़े और फिर अंगूठी व नग बेचता था। 2020 में कोरोना काल के दौरान मुंबई जाने पर छांगुर पीर की मुलाकात नवीन घनश्याम रोहरा और उसकी पत्नी नीतू रोहरा से हुई।

नीतू और नवीन एक सिंधी परिवार से थे और मुंबई में उनकी ₹158 करोड़ की संपत्ति थी। सबसे पहले तो छांगुर पीर ने उन दोनों हिंदुओं का ब्रेनवॉश किया, जिसके बाद उन्होंने अपनी सारी संपत्ति छांगुर को बेच दी और बलरामपुर के मधुपुर गाँव आकर छांगुर के साथ रहने लगे।

नवीन और नीतू (जिन्हें बाद में नसरीन नाम दिया गया) के कारण ही छांगुर अमीर हुआ और धर्मांतरण का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर सका।

कैसे बनाया गैंग और कौन-कौन शामिल?

छांगुर पीर ने धर्मांतरण के लिए एक संगठित गैंग बनाया था। इस गैंग में उसके बेटे महबूब, भतीजा सबरोज, साले का बेटा शहाबुद्दीन, गोंडा का रिश्तेदार रमजान और बलरामपुर का रसीद शामिल थे।

इसके अलावा, नीतू रोहरा उर्फ नसरीन और उसका पति नवीन रोहरा भी इस गैंग के प्रमुख सदस्य थे। नसरीन छांगुर पीर की गतिविधियों का पूरा हिसाब-किताब रखती थी और धर्मांतरण के खेल को अंजाम देने के लिए टच वाले फोन का इस्तेमाल करती थी।

जबकि छांगुर पीर खुद कीपैड मोबाइल रखता था। नवीन, छांगुर और नसरीन को लग्जरी गाड़ियों में घुमाता था। जाँच में पता चला है कि धर्मांतरण का यह नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ था।

क्या-क्या तरीके अपनाते थे?

जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर धर्मांतरण के लिए कई तरीके अपनाता था।

प्रेमजाल और निकाह- मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को ‘अमित’ या ‘रुद्र शर्मा’ जैसे नाम बताकर प्रेमजाल में फँसाते थे। एक बार संबंध स्थापित होने पर हिंदु लड़कियों का ब्रेनवॉश कर उन्हें दरगाह ले जाकर धर्मांतरण करवाया जाता था और फिर निकाह होता था।

लखनऊ की रहने वाली गुंजा गुप्ता को एक मुस्लिम लड़के ‘अमित’ बनकर प्रेमजाल में फँसाया और उसको दरगाह ले जाकर ब्रेनवॉश कर अलीना अंसारी बना दिया। औरैया जिले की लड़की को मेराज अंसारी नाम के मुस्लिम युवक ने अपना नाम रुद्र शर्मा बताकर प्रेमजाल में फँसाया और छांगुर के पास ले जाकर धर्मांतरण करवाने की कोशिश की।

लालच और धमकी- छांगुर पीर और उसके गुर्गे उन लोगों को सबसे पहले निशाना बनाते थे, जो मुख्यतौर पर गरीब और असहाय है। इन्हीं लोगों को पैसे, विदेश में नौकरी, बंगले और लग्जरी गाड़ियों का लालच दिया जाता था।

अगर कोई व्यक्ति छांगुर पीर के लालच में नहीं फँसता था और इस्लाम कबूल करने से मना कर देता था तो उसे डराया-धमकाया जाता था। इसके अलाव झूठे मुकदमों में फँसाने की धमकी तक दी जाती थी। एक दलित व्यक्ति ने जब छांगुर पीर से मजदूरी माँगी तो उसे काम देने के बजाय इस्लाम कबूल करने के लिए कहा गया।

मालती देवी ने जब धर्मांतरण से इनकार किया तो छांगुर पीर ने उस महिला पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर पुलिस में शिकायत कर दी थी। इस तरह, जो लोग छांगुर पीर की बात नहीं मानते थे उन्हें परेशान किया जाता था।

ब्रेनवॉश और प्रचार- छांगुर पीर ने खुद की एक ‘शिजर-ए-तैयबा‘ नामक किताब छपवाई, जिसमें ब्रेनवॉश कैसे किया जाता है सारी जानकारी थी। यह किताब इस्लाम का प्रचार करती थी और इसमें ऐसे लोगों का जिक्र था जो इस्लाम के लिए अपनी जान दे सकते थे।

जाति के अनुसार फीस- धर्मांतरण के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से एक फीस तय थी। ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए ₹15-16 लाख, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए ₹10-12 लाख और अन्य जातियों के लिए ₹8-10 लाख की रकम फिक्सड थी।

अवैध गतिविधियाँ और कोडवर्ड- जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर सिर्फ धर्मांतरण ही नहीं करवाता था, बल्कि वो सरकारी ज़मीनों पर भी गैरकानूनी तरीके से कब्ज़ा करता था। वो कागजात में बदलाव करके जमीन को अपनी या अपने लोगों के नाम करवा लेता था।

एक बड़े उदाहरण के तौर पर, छांगुर पीर ने कुंडवा नाम के एक सरकारी तालाब को पूरी तरह से भरवा दिया था। तालाब को भरने के बाद, उसने उस जगह पर अवैध तरीके से जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े (प्लॉट) बना दिए और उन्हें बेच दिया। यह सब सरकारी नियमों के खिलाफ था।

छांगुर पीर अपने गैरकानूनी कामों को छुपाने के लिए कुछ खास और गुप्त शब्दों (कोडवर्ड्स) का इस्तेमाल करता था। ताकि बाहर के लोग उसकी बातों को समझ न पाएँ। जब वो लड़कियों को अपने जाल में फँसाने की बात करता था तो उन्हें ‘प्रोजेक्ट’ कहता था। किसी के धर्मांतरण की प्रक्रिया को वो ‘मिट्टी पलटना’ कहता था।

इसके अलावा, यदि छांगुर पीर से कोई मिलने आता था तो इसे ‘दीदार करना’ कहा जाता था। किसी का ब्रेनवॉश करने या उसे अपने विचारों में ढालने को ‘काजल करना’ कहा जाता था। ये कोडवर्ड्स इसलिए इस्तेमाल किए जाते थे ताकि छांगुर पीर के गलत काम किसी को आसानी से समझ न आएँ और वो अपनी साजिशें चुपचाप चलाता रहे।

ईसाई मिशनरियों और ISI कनेक्शन- यूपी ATS की जाँच में सामने आया है कि छांगुर पीर अवैध धर्मांतरण के लिए नेपाल सीमा से सटे 7 जिलों में सक्रिय कुछ ईसाई मिशनरियों की मदद लेता था। वह इन मिशनरियों के वॉलंटियरों से गरीब परिवारों की जानकारी लेकर उन्हें निशाना बनाता था।

इसके अलावा, छांगुर पीर के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से भी कनेक्शन सामने आए हैं। छांगुर पीर ‘मिशन आबाद’ का हिस्सा था, जिसके तहत धर्मांतरण के बदले उसे विदेश से पैसा मिलता था।

कुल मिलाकर कितनी विदेशी फंडिंग ली है?

UP ATS की जाँच के मुताबिक, इस धर्मांतरण नेटवर्क को विदेशों से ₹100 करोड़ से अधिक की फंडिंग मिली है। गैंग के पास 40+ बैंक खाते हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर लेनदेन हुआ है। खास तौर पर खाड़ी देशों से फंडिंग आने की बात सामने आई है।

छांगुर पीर ने समाजिक संगठनों जैसे ‘आस्वी इंटरप्राइजेज’, ‘आस्वी चैरिटेबल ट्रस्ट’, ‘आसिपिया हसनी हुसैनी कलेक्शन’, ‘बाबा ताजुद्दीन आस्वी बुटीक’ के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और इनमें चंदा जुटाकर विदेशों में पैसा भेजा। छांगुर पीर इन पैसों का इस्तेमाल हिंदुओं का धर्मांतरण करने, लग्जरी गाड़ियाँ, बंगले और शोरूम खरीदने में करता था।

कितने पीड़ित इस धर्मांतरण का शिकार बन चुके हैं और उन्होंने क्या बताया?

हालाँकि कुल पीड़ितों की संख्या स्पष्ट नहीं है, क्योंकि हर दिन एक नया खुलासा छांगुर पीर के खिलाफ सामने आ रहा है। UP ATS की गणना के अनुसार अब तक प्रदेश में हजारों हिंदुओं को मुस्लिम बनाया जा चुका है।

दलित परिवार का मामला– 2022 में एक दलित व्यक्ति ने छांगुर पीर पर आरोप लगाया था कि उसने मजदूरी माँगने पर इस्लाम कबूल करने को कहा और ना करने पर धमकी दी थी।

सिंधी परिवार का धर्मांतरण- मुंबई में एक सिंधी परिवार रहता था, जिसमें नवीन घनश्याम रोहरा, उनकी पत्नी नीतू रोहरा और उनकी बेटी शामिल थीं। ये लोग आम ज़िंदगी जी रहे थे, लेकिन फिर इनकी मुलाकात छांगुर पीर से हुई। छांगुर पीर ने इस परिवार को अपने जाल में फँसाया। उनका ब्रेनवॉश किया, जिससे वे अपने धर्म और पहचान से दूर हो गए।

ब्रेनवॉश करने के बाद नवीन घनश्याम रोहरा का नाम बदलकर जलालुद्दीन रख दिया गया। पत्नी नीतू का नाम बदलकर नसरीन रख दिया गया और उनकी बेटी का नाम बदलकर सबीहा रख दिया गया। इस तरह छांगुर पीर ने इस पूरे सिंधी परिवार को धर्मांतरण के लिए मजबूर किया और उनकी मूल पहचान मिटा दी। ये परिवार बाद में छांगुर पीर के अवैध धर्मांतरण के नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा बन गया।

12 लोगों की घर वापसी– उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 12 लोगों की घर वापसी करवाई गई है, जिनका बलरामपुर के जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर ने धर्मांतरण करवाया था। इनमें मंडवी शर्मा (जैनब), सोनू रानी, मालती, रीना, पल्लवी, हरजीत कश्यप जैसे नाम शामिल थे। हरजीत कश्यप ने बताया कि छांगुर पीर ने नागपुर में सुपरवाइजर की नौकरी दिलाने का झाँसा देकर धर्मांतरण कराया था और विरोध करने पर दो मुकदमे दर्ज करा दिए थे।

UP ATS का एक्शन और जाँच कहाँ तक पहुँची?

UP ATS ने जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर को उसकी सहयोगी नीतू रोहरा उर्फ नसरीन के साथ लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया, जहाँ वे 70 दिनों से मियाँ-बीवी बनकर रह रहे थे।

बुलडोजर कार्रवाई- छांगुर पीर की बलरामपुर के मधुपुर गाँव स्थित आलीशान कोठी पर यूपी सरकार द्वारा बुलडोजर चलाया गया, क्योंकि इसे सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बनाया गया था।

मुख्यमंत्री का सख्त रुख- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छांगुर की गतिविधियों को ‘राष्ट्र विरोधी’ बताया है और आदेश दिया है कि आरोपित और उसके गिरोह से जुड़े सभी अपराधियों की संपत्तियाँ जब्त की जाएँगी और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जाँच एजेंसियाँ- यूपी ATS, पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले की जाँच कर रही हैं। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है और छांगुर पीर व उसके साथियों से पूछताछ जारी है।

पुणे में संपत्ति का खुलासा- STF ने खुलासा किया है कि छांगुर पीर ने पुणे में ₹16 करोड़ की संपत्ति बनाई थी जो उसके सहयोगी मोहम्मद अहमद खान के नाम पर रजिस्टर थी।

विदेशी यात्राओं की जाँच- नीतू ऊर्फ नसरीन, नवीन रोहरा ने 2014 से 2019 तक 19 बार UAE की यात्रा की। नवीन घनश्याम रोहरा ने भी 2016 से 2020 के बीच 19 बार UAE की यात्रा की है। इन यात्राओं की जाँच की जा रही है। छांगुर पीर ने खुद भी 40-50 बार इस्लामिक देशों की यात्रा की है।

बैंक खातों की जाँच– धर्मांतरण गैंग के 40+ बैंक खातों में ₹100 करोड़ से अधिक के लेनदेन की जाँच की जा रही है। ED ने छांगुर पीर और उसके सहयोगियों के करीब 30 बैंक खातों की जानकारी माँगी है जिनमें पिछले 10 सालों में पैसे का लेन-देन हुआ है।

माफिया कनेक्शन- जाँच में छांगुर पीर का कनेक्शन माफिया मुख्तार अंसारी गैंग से भी सामने आया है। मोहम्मद अहमद खान ने बताया कि छांगुर पीर मुख्तार की मदद से धर्मांतरण और अवैध जमीन का काम करता था।

अतिरिक्त गिरफ्तारियाँ- ATS का कहना है कि यह नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। गैंग के 14 अन्य सदस्य अभी भी फरार हैं।

जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर का मामला केवल धर्मांतरण का नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित आपराधिक गैंग का है। यह गैंग विदेशी फंडिंग और अन्य तरीकों का उपयोग करके ‘लव जिहाद’ और लालच के माध्यम से कमजोर वर्गों को निशाना बना रहा था। विभिन्न जाँच एजेंसियाँ इस गहरी साजिश की परतों को खोलने में जुटी हुई हैं। हर दिन गिरफ्तारी और नया मामला सामने आ रहा है।

हिंदुओं की घट रही संख्या, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ रही मुस्लिम-ईसाई आबादी: जनसंख्या के आँकड़ों को कैसे बदल रहा है ये धार्मिक वर्गीकरण

भारत एक ऐसा देश है जहाँ कई धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं। यहाँ ज्यादातर लोग हिंदू धर्म से जुड़े हुए हैं। हालाँकि एक बड़ा तबका ऐसा भी है कि जो इस्लाम, ईसाइयत, सिख, बौद्ध, जैन और जनजातीय धर्मों को मानते हैं। समय के साथ धर्मों के लिहाज से जनसंख्या में भी बदलाव देखा जा रहा है।

भले ही राष्ट्रीय स्तर पर ये बदलाव बहुत अधिक महत्व न रखते हों, लेकिन अगर गंभीरता से देखा जाए तो ये बदलाव काफी स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। खास तौर पर पश्चिम बंगाल, असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों में।

हमारे पास जनसंख्या के सर्वे के सबसे ताजा आंकड़े 2011 के ही मौजूद हैं। इस लिहाज से यह एक दशक से भी पुराने आँकड़े हैं जो 2001 से 2011 के बीच हुई जनसंख्या बदलाव को बता रहे हैं।

2001 से 2011 के बीच क्या बदला?

राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो हिंदुओं की जनसंख्या में कुछ कमी देखी गई है। 2001 में हिंदू जनसंख्या 80.46 % थी जो 2011 में 79.8% तक घटी। लेकिन मुस्लिम जनसंख्या में 13.43% से 14.23% का इजाफा देखा गया। यहाँ तक कि ईसाई जनसंख्या में भी थोड़ी बहुत देखी गई।

हालाँकि यह आँकड़े बहुत बड़े बदलाव तो नहीं दिखलाते लेकिन अगर इन्हें जिला स्तर पर देखा जाए तो कहानी पूरी तरह बदल जाएगी। भारत के 640 जिलों में से 468 जिलों में हिंदू जनसंख्या में गिरावट देखी गई यानी 70% से अधिक जिलों में हिंदू जनसंख्या घटी है।

इनमें से 227 जिलों में 0.7% से अधिक गिरवट देखी गई। वहीं दूसरी ओर 513 जिलों में मुस्लिम आबादी और 439 जिलों में ईसाई आबादी में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

पश्चिम बंगाल में क्या चल रहा है?

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या में लगातार और प्रत्यक्ष तौर पर इजाफा देखा जा रहा है। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और उत्तर और दक्षिण 24 परगना आदि जिलों में मुस्लिम आबादी हिंदू जनसंख्या से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है।

इसी वजह से हिंदुओं की संख्या में गिरावट देखी गई है। यहाँ तक कि कई जिलों हिंदुओं की जनसंख्या 1% तक कम हुई है जो राष्ट्रीय औसत से भी काफी अधिक है।

ये बदलाव महज आँकड़ों तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी अपने आसपास बदलाव के साक्षी हैं। दुकानों के खुलने के प्रकार, बाजार में होने वाले शोर और आवाजें, स्कूलों की छुट्टियाँ और यहाँ तक कि स्थानीय राजनीति में भी बदलाव को देखा जा सकता है।

यह कुछ इस तरह का बदलाव है जो धीरे-धीरे बढ़ रहा है लेकिन जैसे ही यह अपने उच्चतम स्तर पर पहुँचता है तो लोगों की नजर में आता है।

असम की सीमा पर चिंता

असम में भी ज्यादातर जिलों में मुस्लिम आबादी बढ़ी है। इनमें खासतौर पर वे जिले शामिल हैं जो बांग्लादेश से सटे हुए हैं। धुबरी, बारपेटा, गोलपारा और मोरीगांव जिलों में मुस्लिम जनसंख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्थानीयों का मानना है कि इस पूरे बदलाव के लिए असम में क्रॉस-बॉर्डर मूवमेंट (सीमापार आवागमन) सबसे अधिक जिम्मेदार है।

हालाँकि जनगणना में धर्म-परिवर्तन या घुसपैठ के बारे में सीधे तौर पर सवाल नहीं पूछे जाते, लेकिन असम में रहने वाले लोग अवैध घुसपैठियों के खिलाफ वर्षों से आवाज उठा रहे हैं। राजनीतिक पार्टियाँ, स्थानीय लोग और आम नागरिक इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। इस भौगोलिक बदलाव ने ही असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) और घुसपैठ के खिलाफ सत्यापन अभियानों की शुरुआत की है।

पूर्वोत्तर राज्यों में तेजी से बढ़ती ईसाई जनसंख्या

पूर्वोत्तर भारत में धार्मिक बदलाव तेजी से आकर ले रहा है। नागालैंड, मिजोरम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में ईसाई जनसंख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। यहाँ तक कि भारत के 238 जिलों में ईसाई जनसंख्या 2001 से 2011 के बीच 50% से भी अधिक बढ़ी है।

यह इजाफा खासतौर पर जनजातीय इलाकों में देखने को मिला है। यहाँ ईसाई मिशनरियों ने कई दशकों से काम किया है। कुछ लोग इसे धार्मिक परिवर्तन मानते हैं तो अन्य इसे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और चर्च संगठनों की कल्याणकारी योजनाओं का परिणाम मानते हैं, जो दूर-दराज के इलाकों में काफी सक्रिय है।

इन राज्यों में अब ईसाई धर्म को बाहरी नहीं माना जाता। इसे स्थानीय और स्वदेशी के तौर पर स्वीकार कर लिया गया है। अधिकांश जनजातीय समुदाय अब स्वयं को ईसाई घोषित करते हैं और अपने पारंपरिक रीति-रिवाज़ों के साथ-साथ नए धर्म का पालन भी करते हैं।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य और अर्थशास्त्री शमिका रवि ने सोशल मीडिया पर कुछ नक्शे साझा किए। इनमें दिखाया गया कि 2001 से 2011 के बीच भारत में धार्मिक जनसंख्या का स्वरूप कैसे बदला। एक नक्शे में उन क्षेत्रों को दर्शाया गया जहाँ हिंदू जनसंख्या का हिस्सा सबसे अधिक घटा और दूसरे नक्शे में उन क्षेत्रों को दिखाया गया जहाँ मुस्लिम और ईसाई जनसंख्या में सबसे अधिक वृद्धि हुई।

मानचित्रों ने इस बात की पुष्टि की कि इन इलाकों के लोगों को कई वर्षों से यह महसूस हो रहा था कि उनके आसपास की जनसंख्या संरचना बदल रही है।

ये बदलाव क्यों हो रहे हैं?

धार्मिक बदलाव के यूँ तो कई कारण हो सकते हैं। लेकिन इसका एक मुख्य कारण जन्म दर भी है। मुस्लिम समुदाय की जन्म दर हिंदू समुदाय से अधिक रही है। हालाँकि हाल के वर्षों में यह अंतर धीरे- धीरे कम हो रहा है। इसी कारण अब धार्मिक संतुलन में बदलाव देखा जा रहा है।

जहाँ मुस्लिम या ईसाई समुदाय पहले से बड़ी संख्या में मौजूद था, वहीं उनकी आबादी भी तेजी से बढ़ी। जन्म दर में थोड़े से बदलाव से लंबे समय में जनसंख्या के लिहाज से बढ़ोतरी हो सकती है।

असम और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में प्रवासन और धर्म परिवर्तन भी इन बदलावों के कारण हैं। सीमा पार प्रवासन और जनजातीय समुदायों में धर्म परिवर्तन से स्थानीय आबादी पर भी असर पड़ा है।

गौर करने वाली बात यह है कि हिंदू जनसंख्या में सबसे तेजी से गिरावट उन क्षेत्रों में हुई जहाँ हिंदू न तो बहुत बड़ी संख्या में थे और न ही बहुत कम यानी मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र रहे। लेकिन जहाँ हिंदू आबादी 90% से अधिक या 20% से कम थी, वहाँ यह गिरावट उतनी स्पष्ट नहीं रही।

मुस्लिम जनसंख्या में इजाफा वहाँ अधिक देखा गया जहाँ वे पहले से अधिक संख्या में थे। वहीं ईसाई जनसंख्या में वृद्धि मुख्य रूप से उन इलाकों में देखी गई जहाँ जनजातीय समुदाय रहते हैं, खासकर दूरदराज पहाड़ी इलाकों में।

अचानक नहीं हुआ ये बदलाव

ये बात भी जानने योग्य जरूरी है कि ये बदलाव रातों-रात नहीं हुए हैं। ये धीरे-धीरे कई वर्षों में हुए हैं। उदाहरण के तौर पर, 1961 से 2011 के बीच हर दशक में भारत में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ा। 1961 से 1971 के बीच ये 0.5% तक बढ़ा, 1991 से 2001 के बीच 0.8% और 2001 से 2011 के बीच 0.8% तक बढ़ा।

ऐसे में 2001-2011 हो रहे बदलाव कोई आश्चर्य की बात नहीं हैं, बल्कि पिछले 50 वर्षों में चला आ रहा एक रुझान है।

कई वजहों से है आँकड़ों का महत्व

जनसंख्या में बदलाव के कई कारण हैं। भारत जैसे देश, जहाँ राजनीति, पहचान और सामुदायिक जीवन धर्म पर आधारित होते हैं, वहाँ छोटे से बदलाव भी बड़ी बहस और विवाद का कारण बन सकते हैं।

पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में भौगोलिक जनसंख्या में बदलाव स्थानीय राजनीति, स्कूलों की शिक्षा, त्योहारों के आयोजन और भूमि विवादों पर भी असर डालता है। जनजातीय इलाकों में ईसाई रूपांतरण के साथ सांस्कृतिक पहचान भी बदल रही है।

कुछ लोग इस बात को लेकर चिंता में हैं कि अगर ये रुझान लगातार बना रहा तो आने वाले दो दशकों में स्थानीय जनसंख्या भौगोलिक तौर पर पूरी तरह बदल सकती है। वहीं कुछ लोग इसे एक खुले देश में प्राकृतिक विस्तार की प्रक्रिया मानते हैं।

कोई नई जानकारी अब तक नहीं

2021 की जनगणना से इन बदलावों की नई जानकारी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन पहले कोविड-19 और फिर प्रशासनिक कारणों से इसमें देरी हुई। इसीलिए हम आज भी 2011 के आँकड़ों पर ही निर्भर हैं।

जब तक नए आँकड़े सामने नहीं आते, तब तक भौगोलिक स्तर पर बदलावों की बहस पुराने आँकड़ों, सैटेलाइट अध्ययनों और सर्वे पर ही आधारित रहेगी। भारत की विविधता ही हमेशा उसकी खासियत रही है। लेकिन इस वृहद और विविध समाज में सामंजस्य बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि हम इस विविधता में आ रहे बदलावों पर नजर रखें।

2001 से 2011 के बीच एक स्पष्ट रुझान सामने आया और वह ये रहा कि अधिकांश जिलों में हिंदू आबादी का अनुपात घटा, जबकि मुस्लिम और ईसाई आबादी का अनुपात बढ़ा। खासकर पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर में। इन बदलावों के हमेशा कई कारण रहे हैं और ये बदलाव नए नहीं हैं। लेकिन अब ये जनसंख्या संतुलन के मामले में संवेदनशील क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई देने लगे हैं।

मूल रूप से ये लेख अंग्रेजी में श्रीति सागर ने लिखा है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। हिंदी में इसका अनुवाद रामांशी मिश्रा ने किया है।

मॉनसून सत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर होगी चर्चा, विपक्ष की माँग पर मोदी सरकार तैयार: 17 बिल लाने की है तैयारी, केन्द्रीय मंत्री रिजीजू बोले- संसद चलाना सरकार-विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी

संसद का मानसून सत्र सोमवार (21 जुलाई 2025) से शुरू हो रहा है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वो ऑपरेशन सिंदूर जैसे बड़े मुद्दों पर खुलकर बहस करने को तैयार है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने रविवार (20 जुलाई 2025) को ऑल-पार्टी मीटिंग के बाद मीडिया से बात की।

किरेन रिजिजू ने कहा, “हम ऑपरेशन सिंदूर जैसे अहम मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सरकार और विपक्ष को मिलकर सदन को सुचारू रूप से चलाना चाहिए।” रिजिजू ने भरोसा दिलाया कि केंद्र किसी भी मुद्दे से नहीं भागेगा और संसद को सुगमता से चलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

ऑल-पार्टी मीटिंग में 51 दलों के 54 सदस्य शामिल हुए। रिजिजू ने इसे सकारात्मक बताया और कहा कि एनडीए, यूपीए (इंडिया ब्लॉक) और निर्दलीयों ने अपने-अपने मुद्दे उठाए। सभी ने अलग-अलग टॉपिक्स पर बहस की माँग की, जिन्हें सरकार ने गंभीरता से लिया है।

रिजिजू ने कहा, “हमारी विचारधाराएँ अलग हो सकती हैं, लेकिन संसद को ठीक से चलाना सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है।” उन्होंने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा अहम मुद्दों पर संसद में मौजूद रहते हैं और रचनात्मक बहस को बढ़ावा देते हैं।

विपक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सीजफायर दावों को उठाने की बात कही, जिस पर रिजिजू ने जवाब दिया कि सरकार बाहर नहीं, बल्कि संसद में सभी सवालों का जवाब देगी। उन्होंने कहा, “हम संसद में सही समय पर जवाब देंगे।” सरकार इस सत्र में 17 विधेयक पेश करने की तैयारी में है और हर सवाल का जवाब देने को तैयार है। रिजिजू ने कहा, “हम खुले मन से बहस के लिए तैयार हैं। संसदीय परंपराओं और नियमों का पूरा सम्मान करेंगे।”

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भी बड़ा कदम उठने वाला है। रिजिजू ने बताया कि 100 से ज्यादा सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकार इसे मौजूदा सत्र में पेश करेगी, लेकिन इसका समय अभी तय नहीं हुआ है। रिजिजू ने कहा, “हम जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएँगे। सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, टाइमलाइन बाद में बताएँगे।”

रिजिजू ने छोटे दलों के सांसदों को कम बोलने का समय मिलने की शिकायत पर भी ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन के सामने उठाएगी। बिजनेस एडवाइजरी कमिटी (बीएसी) में इसे चर्चा के लिए लाया जाएगा ताकि सभी को उचित समय मिले।

कुल मिलाकर ये सत्र काफी गहमागहमी भरा होने वाला है। ऑपरेशन सिंदूर, ट्रंप के दावे और महाभियोग जैसे मुद्दे संसद में छाए रह सकते हैं। रिजिजू ने विपक्ष से सहयोग की अपील की है ताकि संसद की गरिमा बनी रहे। सरकार का जोर रचनात्मक बहस और सदन के सुचारू संचालन पर है।

उड़ने से पहले ही तो नहीं लग गई थी एअर इंडिया के प्लेन में आग, ‘गड़बड़ सेंसर’ पर अब जाँच का फोकस: ब्लैक बॉक्स का डाटा भी नहीं हो पाया डाउनलोड, पायलटों को दोषी बता रहा था मीडिया

अहमदाबाद में हादसे का शिकार हुए एअर इंडिया के 787 ड्रीमलाइनर के पीछे के हिस्से यानी ‘टेल’ में अन्दर आग के निशान मिले हैं। जाँच एजेंसी वायुयान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (AAIB) अब इस टेल वाले हिस्से की जाँच कर रही है। इसके अलावा जिन गड़बड़ियों को विमान के उड़ने से पहले रिकॉर्ड किया गया था, उन पर भी जाँच एजेंसी अब फोकस कर रही है। AAIB अभी तक यह बता पाई है कि एअर इंडिया का विमान फ्यूल कंट्रोल स्विच के बंद होने के चलते हादसे का शिकार हुआ।

क्या विमान के पीछे के हिस्से में लगी थी आग

इंडियन एक्सप्रेस में रविवार (20 जुलाई, 2025) को प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जाँचकर्ताओं को विमान के पीछे के हिस्से में एक छोटी आग लगने का संकेत मिला है। हालाँकि, यह आग फैली नहीं थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि आग संभवतः कुछ ही पुर्जों तक सीमित थी। उन्हें यह पता इसलिए लग पाया है क्योंकि विमान का यह हिस्सा हादसे में क्षतिग्रस्त होने से बच गया। यह हिस्सा हॉस्टल की छत पर जाकर फंस गया जबकि बाकी हिस्सा हादसे के समय आग लगने के चलते जल गया।

विमान के पीछे के हिस्से को हादसे के कुछ दिन बाद उठा लिया गया था और इसके भीतर से जो भी पुर्जे निकले हैं, उन्हें अहमदाबाद में एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। इंडियन एक्सप्रेस से जाँच में जुड़े एक अधिकारी ने बताया है कि इन पुर्जों में विमान के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में हुई गड़बड़ के विषय में जरूरी सूचना हो सकती है। यह इलेक्ट्रिकल गड़बड़ विमान के टेक-ऑफ के समय हुई थी, यह भी सामने आया है।

इंडियन एक्सप्रेस से अधिकारी ने बताया, “इस बात की जाँच करनी पड़ेगी कि क्या विमान की पूँछ में लगी आग उड़ान के दौरान उसके किसी पुर्जे में आई खराबी के कारण लगी थी, जब विमान उड़ान भरने के लिए चलने लगा था, या फिर यह टक्कर के बाद लगी।” यह भी अधिकारी ने बताया कि आग इस दौरान फैली नहीं जबकि यह हिस्सा भी हॉस्टल स जा टकराया था। यह भी कहा गया है कि कहीं आग की ही बझ से तो विमान को आईएएस सिग्नल्स नहीं गए जिससे फ्यूल कंट्रोल स्विच गड़बड़ कर गए हों।

एक ब्लैक बॉक्स का डाटा भी नहीं निकला

AAIB की जाँच के दौरान विमान के दोनों ब्लैक बॉक्स तो बरामद हो गए हैं लेकिन उनमें से एक केवल ही से डाटा डाउनलोड हो सका है। यह डाटा पीछे के हिस्से में रखे जाने वाले ब्लैक बॉक्स से मिला है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पीछे के हिस्से वाला ब्लैक बॉक्स क्षतिग्रस्त हुआ है और उससे डाटा अभी तक नहीं डाउनलोड किया जा सका है। यह भी सामने आया है कि जब पीछे के हिस्से को ब्लैक बॉक्स को डाटा डाउनलोड करने के लिए खोला गया तो उसका मेमोरी कार्ड जला हुआ मिला।

जिस ब्लैक बॉक्स से डाटा बरामद हुआ, उसमें हादसे वाली उड़ान समेत 6 फ्लाइट की जानकारी है। यह पूरा 49 घंटे का डाटा है। इसकी जाँच लगातार चल रही है। जिस ब्लैक बॉक्स से डाटा नहीं निकाला जा सका है, अब उसके लिए विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी क्योंकि हादसे की वजह पता चलने में वह भी अहम रोल निभा सकता है। दोनों ब्लैक बॉक्स में अलग-अलग डाटा होता है, ऐसे में हादसे के बारे में कोई महत्वपूर्ण जानकारी उसमें छुपी हो सकती है, जिसका डाटा डाउनलोड नहीं हो सका है।

विमान के उड़ान से पहले मिली थी गड़बड़

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि हादसे का शिकार होने वाले विमान के पिछले हिस्से में लगे एक सेंसर में गड़बड़ी पायलट ने दर्ज की थी। यह गड़बड़ी दिल्ली से अहमदाबाद जाने के दौरान दर्ज की गई थी और इसे एअर इंडिया के इंजीनियरों ने सुधार दिया था। हालाँकि, पिछले हिस्से में लगी आग का रोल इस सेंसर को लेकर क्या था, यह अब जाँच की जा रही है। फ्लाइट के सेंसर गड़बड़ होना हादसे का कारण बन सकता है।

मामले से जुड़े अधिकारी ने कहा कि विमान के हवा में उड़ने से पहले इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी उड़ान सेंसरों में दिक्कत कर सकती है और इससे विमान के ECU (इंजन नियंत्रण इकाई) को गलत डेटा मिल सकता है। अधिकारी ने कहा कि इसके फलस्वरूप इंजन को तेल की सप्लाई भी बंद हो सकती है। इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि विमान को ज्यादा पॉवर देने के लिए APU (औक्सिलरी पॉवर यूनिट) भी चालू किया था। विमान के APU (औक्सिलरी पॉवर यूनिट) को भी बरामद करके जाँच की जा रही है।

मीडिया ने चलाई पायलट के दोष वाली थ्योरी

जहाँ यह हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि ना अभी AAIB को दूसरे ब्लैक बॉक्स का डाटा मिला है और ना ही जाँच पूरी हुई है वहीं विदेशी मीडिया संस्थानों ने लगातार पायलटों की गलती वाली थ्योरी चलाई थी। उनकी इस रिपोर्ट्स को अमेरिका के ट्रांसपोर्ट विभाग NTSB ने इन रिपोर्ट्स को नकारा है। हालाँकि, WSJ जैसे संस्थानों ने लगातार कैप्टन सुमीत सभरवाल को दोषी ठहराया था। इस पर उन्हें भारतीय पायलट फेडरेशन (FIP) ने नोटिस भेजा है।