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अमेरिका से F-35 फाइटर जेट नहीं खरीदेगा भारत, ट्रंप ने PM मोदी को दिया था ऑफर: रूस से Su-57 का हो सकता है सौदा, देश में ही बनेंगे 60% पुर्जे

अमेरिका द्वारा लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से एफ -35 फाइटर जेट नहीं खरीदेगा। इसके बजाए भारत रूस का एसयू-57 फिफ्थ जनरेशन जेट खरीदने वाला है। अमेरिकी विमान खरीदने पर भारत को हर पुर्जे के लिए भी उस पर निर्भर रहना होगा। जबकि रूसी विमान भारत में ही बनेगा। इतना ही नहीं इसके तकनीक का भी हस्तांतरण होगा। विमान के करीब 60 फीसदी पुर्जे भी भारत में ही निर्मित होंगे । इसका फायदा रोजगार के क्षेत्र में मिलेगा साथ ही भविष्य में भारत इसका निर्माण भी कर पाएगा।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अमेरिका से कुछ उत्पादों की खरीद बढ़ा सकता है, लेकिन रक्षा से जुड़े किसी भी उपकरण को अमेरिका से खरीदने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अमेरिका से प्राकृतिक गैस, संचार उपकरण और सोने की खरीद बढ़ाने पर विचार कर रहा है। लेकिन अमेरिकी रक्षा उपकरण, खासकर F-35 फाइटर जेट, खरीदने के लिए भारत सरकार इच्छुक नहीं है।

जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान भारत को F-35 स्टील्थ फाइटर जेट देने की पेशकश की थी। वहीं भारत सरकार चाहती है कि रक्षा उपकरणों का संयुक्त रूप से विकास और निर्माण भारत में ही हो।

हालाँकि ट्रंप भारत पर रूस से हथियार और तेल खरीदने पर अतिरिक्त जुर्माना लगाने की धमकी दे चुके हैं, फिर भी भारत फिलहाल अमेरिका से नए रक्षा सौदे नहीं करना चाहता, खासकर तब जब पहले से ऑर्डर किए गए अमेरिकी उपकरणों की डिलीवरी में वर्षों की देरी हो रही है।

F-35 नहीं खरीदने के फैसले का मतलब है कि भारत लगभग 50-60 रूसी Su-57 फिफ्थ जनरेशन जेट खरीदेगा। भारतीय वायुसेना (IAF) को अगले कुछ वर्षों में चीन और पाकिस्तान की हवाई ताकत का मुकाबला करने के लिए करीब तीन स्क्वॉड्रन फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट्स की जरूरत है।

भारत अपने खुद के AMCA फिफ्थ जनरेशन फाइटर जेट पर भी काम कर रहा है, लेकिन इसके 2035 से पहले तैयार होने की संभावना नही है। इसलिए, जब तक स्वदेशी जेट तैयार नहीं होता, तब तक भारत को विदेशी विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ेगा। इस समय केवल F-35 (अमेरिका) और Su-57 (रूस) ही ऐसे उपलब्ध विकल्प हैं।

बता दें कि अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर 25% टैक्स लगा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (30 जुलाई 2025) को इसकी घोषणा की थी। इस पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार (31 जुलाई) को लोकसभा में जवाब देते हुए कहा था कि भारत वैश्विक विकास में लगभग 16 फीसदी का योगदान दे रहा है।

उन्होंने कहा, “सरकार हमारे किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों, निर्यातकों, एमएसएमई और उद्योग के सभी वर्गों के कल्याण की रक्षा को सर्वोच्च महत्व देती है।” गोयल ने कहा, “हम किसानों और भारतीय कृषि के कल्याण के लिए लगातार काम कर रहे हैं ताकि समृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।”

अमेरिका ने भारत पर 25% टैरिफ तो लगा दिया, पर भीतर ही भीतर काँप रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप: 7 दिन के लिए फैसला टाला, जानिए किन 70 देशों के लिए दरों का किया ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (31 जुलाई 2025) को दुनिया के 70 देशों पर 10 फीसदी से 41 फीसदी तक नए रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। 7 अगस्त से ये लागू होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे व्यापार असंतुलन को कम करने और अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।

व्हाइट हाउस की ओर से एक फैक्टशीट जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि इससे न सिर्फ आयात शुल्क दरों में बदलाव होगा बल्कि ये कब लागू होगा इसको भी बता दिया गया है। ट्रंप ने पहले टैरिफ के लिए 1 अगस्त का दिन तय किया था लेकिन अब जिन 70 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया है उन्हें 7 अगस्त से ये टैरिफ देना होगा। यानी अगर कोई सामान 7 अगस्त तक अमेरिका के लिए रवाना हो जाए तो उस पर नया टैरिफ लागू नहीं होगा।

नया रेसिप्रोकल टैरिफ क्या है?

व्हाइट हाउस ने गुरुवार को घोषणा की कि अमेरिका में आने वाले सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 10% ही रहेगा, जो 2 अप्रैल को लागू किया गया था। लेकिन यह 10% की दर केवल उन देशों के लिए है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार फायदे में है। यानी वे देश जिनके साथ अमेरिका आयात कम करता है और निर्यात ज्यादा।

15% टैरिफ उन देशों पर लागू होगा जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है। इसके अंतर्गत 40 देश हैं, जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा तुलनात्मक रूप से थोड़ा कम है।

15 फीसदी से ज्यादा टैरिफ वाले कुल 26 देश हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक इन देशों का अमेरिका के साथ व्यापार घाटा ज्यादा है। भारत पर 25% टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि भारत उनके सामानों पर ज्यादा टैरिफ वसूलता है, इसलिए ये टैरिफ लगाया गया है।

15 फीसदी से ज्यादा टैरिफ वाले देश

  1. ब्राजील 50%
  2. म्यांमार 40%
  3. लाओस 40%
  4. कंबोडिया 36%
  5. थाईलैंड 36%
  6. बांग्लादेश 35%
  7. सर्बिया 35%
  8. कनाडा 35%
  9. मेक्सिको 30%
  10. दक्षिण अफ्रीका 30%
  11. बोस्निया और हर्जेगोविना 30 %
  12. श्रीलंका 30%
  13. अल्जीरिया 30%
  14. इराक 30%
  15. लीबिया  30%
  16. चीन 30%
  17. भारत 25%
  18. ब्रूनेई 25%
  19. मलेशिया 25%
  20. साउथ कोरिया 25%
  21. वियतनाम 20%
  22. इंडोनेशिया 19%
  23. फिलिपींस 19%

मेक्सिको और कनाडा को उन वस्तुओं पर ज्यादा टैरिफ देना होगा जो अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते के तहत छूट में शामिल नहीं हैं। ऐसे वस्तुओं पर 25 फीसदी टैरिफ देना होगा।

भारत पर उम्मीद से ज्यादा टैरिफ

भारत के साथ बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया था कि भारत पर टैरिफ 20 फीसदी से कम रह सकता है लेकिन 25 फीसदी टैरिफ का ऐलान काफी चौकाने वाला है। इससे भारत के निर्यात पर असर पड़ेगा। भारत को वियतनाम से कई प्रमुख सेक्टर्स में चुनौती मिलेगी जिनका सामान 20 फीसदी टैरिफ की वजह से अमेरिका में सस्ता होगा। इनमें कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, सी फूड शामिल हैं। इसी तरह इंडोनिशिया और फिलीपींस की स्थिति भी भारत की तुलना में मजबूत रहेगी जिनका कपड़ा, तेल , ज्वैलरी, पाम ऑयल का निर्यात अमेरिका से होता है।

भारत- अमेरिका वार्ता में क्यों नहीं बनी बात?

भारत के साथ व्यापार वार्ता के दौरान कृषि और डेयरी प्रोडक्ट पर अमेरिका की बात नहीं बन पाई है। हालाँकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अगस्त के पहले सप्ताह में नई दिल्ली आने वाले हैं जहाँ अगली बातचीत होगी। अमेरिका चाहता है कि मांस खाने वाले पशुओं के दूध और उसके प्रोडक्ट, जेनेटिकली मोडिफाइड फसलों के लिए भी भारत अपना बाजार पूरी तरह खोल दे, लेकिन भारत उसके लिए तैयार नहीं है।

भारत बातचीत से सुलझाएगा मसला

आज तक के मुताबिक भारत अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा, बल्कि इस मामले में नेगोशिएशन टेबल पर बातचीत करेगा। गुरुवार को लोकसभा में केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत का दौर जारी है। टैरिफ को लेकर 10 से 15 फीसदी तक की बात हुई थी। देशहित में जो होगा, सरकार कदम उठाएगी।

ब्राजील ने दी अमेरिका को चेतावनी

सबसे ज्यादा टैरिफ ब्राजील पर लगाया गया है जिसको लेकर ब्राजील के वित्त मंत्री फर्नाडो हद्दाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि टैरिफ को लेकर अमेरिका से अगर उनकी वार्ता विफल हो जाती है तो वो अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में अपील दायर करेंगे।

तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था, वैश्विक विकास में 16% हिस्सेदारी… भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ कहने वाले ट्रंप को पीयूष गोयल ने दिखाया आईना, 25% टैरिफ पर बोले- राष्ट्रहित से समझौता नहीं

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 25 परसेंट टैरिफ लगाने के बाद और देश की अर्थव्यवस्था को डेड इकॉनॉमी बोलने के बाद विपक्ष इस मुद्दे को खूब भुनाने के प्रयास में है। ऐसे में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने विपक्ष के शोर के बीच देश को इस बात की जानकारी दी कि अमेरिका की ओर से भारत पर जो 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, उसपर सरकार गंभीरता से समीक्षा कर रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत-अमेरिका के बीच अब तक चार दौर की बात हो चुकी है। सरकार हर वो जरूरी कदम उठाएगी जिससे भारत के राष्ट्र हित सुरक्षित रहे। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि हम अपने किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों और निर्यातकों को और उद्योग जगत के कल्याण की रक्षा और संवर्धन को सर्वोच्च महत्व देते हैं और हम अपने राष्ट्र हितों को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएँगे।

पीयूष गोयल ने आगे देश की आत्मनिर्भरता पर बात करते हुए बताया, “हमारे निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही है। भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। आज भारत टॉप 5 अर्थव्यवस्थाओं में से है। भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। भारत ने UAE, UK ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ पारस्परिक लाभकारी सौदे किए हैं। हम अन्य देशों के साथ भी ऐसे व्यापार समझौते करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि भारत इस समय वैश्विक विकास में 16% हिस्सेदारी दे रहा है।

उन्होंने सदन को यह भी बताया कि एक दशक से भी कम समय में 5 कमजोर अर्थव्यवस्थाओं से निकलकर भारत प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। उनका उम्मीद जताई कि भारत कुछ ही वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

पहले पैसे लेकर बाँटी नौकरी, फिर अपने पूर्व मंत्री को बचाने के लिए 2000+ को बना दिया आरोपित: सुप्रीम कोर्ट ने DMK सरकार को फटकारा, जानिए क्यों कहा स्टेडियम की पड़ेगी जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की डीएमके सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी से जुड़े ‘नौकरी के बदले कैश’ मामले में कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार कार्यवाही को देर कर मंत्री को बचाने की कोशिश कर रही है। राज्य सरकार बनाम सेंथिल एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर न्यायपालिका ने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो राज्य सरकार इस केस को बंद कर देती। वहीं अभियुक्तों की तादाद देख उन्होंने कहा कि ट्रायल के लिए तो स्टेडियम की जरूरत पड़ेगी।

कोर्ट ने मामले में राज्य की स्टालिन सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, “केस में लगभग असंभव काम करने की कोशिश की गई। कई अभियुक्त अपनी मौजूदगी दर्ज कराने आ जाएँगे। सरकार की अभियोजन की योजना क्या है। फिलहाल यह एक पतवार के बगैर चल रहे जहाज की तरह है।”

बता दें कि ये मामला ‘नौकरी के बदले कैश’ का है जिसमें 2000 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने राज्य परिवहन विभाग में नौकरी के लिए रिश्वत दी थी। केस में 2000 अभियुक्त और 500 गवाह को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि इसके ट्रायल के लिए क्रिकेट स्टेडियम की जरूरत है।

जब मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति का अनुरोध किया गया तो पीठ ने कहा, “जब ताकतवर मंत्री और धनी आरोपित होते हैं तो ये आशंका होती है कि सरकारी वकील न्याय नहीं कर पाएँगे।”

तमिलनाडु सरकार के रवैये पर सवाल खड़ा करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को पूर्व मंत्री और उनके करीबियों पर मुकदमा चलाने में दिलचस्पी होनी चाहिए थी। ये मामला अलग-अलग पदों के लिए पैसे लेने की है लेकिन राज्य सरकार ने सभी मामले को मिला दिया, इसमें रिश्वत देने वाले गरीब माँ-बाप के बच्चे भी शामिल हैं जो नौकरी चाहते थे। ऐसा लगता है कि राज्य इस मामले को भी खत्म नहीं करना चाहती है।

कोर्ट ने कहा, “ऐसा लगता है कि 2000 से ज्यादा अभियुक्तों और 500 गवाहों के साथ ये भारत का सबसे ज्यादा भीड़भाड वाला ट्रायल होगा। निचली कोर्ट का छोटा सा रूम इसके लिए पर्याप्त नहीं होगा इसलिए क्रिकेट स्टेडियम की जरूरत पड़ी होगी।”

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से पूछे कई सवाल

2000 से ज्यादा अभियुक्तों की सूची पर कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, “आप उन पर मुकदमा चलाने के लिए ज्यादा उत्साहित हैं, ताकि मंत्री के पूरे जीवन में ये केस कभी खत्म ही न हो। यही आपका तरीका है। ये व्यवस्था के साथ धोखाधड़ी है।”

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु से उन लोगों की पहचान करने का भी आदेश दिया, जिनकी मंत्री के साथ मिलीभगत थी। कोर्ट ने पूछा कि मंत्री के सिफारिशों को किसने माना? मामले में बिचौलिए और दलाल कौन थे और किसने इस काम में अधिकारियों को नियुक्त किया? इसकी जानकारी कोर्ट को दें।

जस्टिस बागची ने कहा, “इस मामले में कथित दलाल या बिचौलिए कौन थे? वे अधिकारी कौन थे जिन्होंने मंत्री के सिफारिशों पर काम किया। इनका चयन किसने किया और किस अधिकारी ने इन्हें नियुक्त किया?”

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी, “असली आरोपित कौन हैं, जैसे मंत्री और उनके भाई, उनके पीएम और करीबी लोग जिन्होंने ये सब करवाया। दूसरे लोगों को आरोपित बनाया जा रहा है क्या वो असली आरोपित हैं या उन्हें गवाह बनाया जा सकता है।”

वकील शंकरनारायणन ने ये भी सुझाव दिया कि मुकदमे की सुनवाई के लिए विशेष सरकारी अभियोजक नियुक्ति की जाए ताकि निष्पक्ष सुनवाई हो सके।

कोर्ट की नाराजगी के बाद दिया था इस्तीफा

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के कैबिनेट मंत्री सेंथिल बालाजी को मंत्री पद या आजादी में से किसी एक को चुनने के लिए कहा था। इसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 26 सितंबर को सेंथिल बालाजी को ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग केस में जमानत मिल गई जिसके दो दिन बार वो फिर मंत्री बन गए। उन्हें पुराने मंत्रालय वापस कर दिए गए और स्टालिन कैबिनेट में जगह मिल गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि इससे गवाह भी प्रभावित होंगे क्योंकि जमानत मिलते ही आप मंत्री बन गए। इसके बाद फिर सेंथिल को पद से हटाया गया।

सेंथिल बालाजी पर नौकरी के लिए कैश का आरोप

साल 2011 से 15 के बीच सेंथिल बालाजी तमिलनाडु सरकार में राज्य परिवहन मंत्री थे। इस दौरान परिवहन विभाग में कई तरह की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई। बाद में पैसे लेकर नौकरी देने का आरोप मंत्री पर लगा। ईडी ने सेंथिल बालाजी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। इस मामले पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।

क्या भारत के ब्रह्मोस हमलों के चलते बौखलाए हैं ट्रंप, टैरिफ ऐलान के बाद उठे सवाल: पाकिस्तान के जिस रहीम यार खान बेस को भारत ने किया तबाह, क्या वहाँ मौजूद थे US सैनिक

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (30 जुलाई 2025) को भारत पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि भारत तेल की खरीद रूस से करता है, ऐसे में उस पर टैरिफ के साथ ही पेनाल्टी भी लगेगी। उनके इस ऐलान पर लगातार विवाद चल रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने एक और चौंकाने वाला दावा किया कि पाकिस्तान के पास बड़े पैमाने पर तेल भंडार मौजूद हैं और अमेरिका वहाँ तेल कुओं की खुदाई के लिए एक समझौते पर काम कर रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहने वाले ट्रंप ने इन बयानों के जरिए भारत की आर्थिक नीतियों और ऊर्जा सहयोग को सीधे तौर पर निशाने पर लिया।

उन्होंने कहा कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो उसे आर्थिक दंड झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा, ट्रंप ने संकेत दिया कि भविष्य में भारत को तेल या गैस के लिए पाकिस्तान की ओर देखना पड़ सकता है।

ट्रंप के इन बयानों ने न सिर्फ भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है, बल्कि दक्षिण एशिया में ऊर्जा राजनीति की दिशा को भी सवालों के घेरे में ला दिया है।

ट्रुथ सोशल पर ट्रम्प की पोस्ट

यह दावा भले ही हकीकत से दूर लगे, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को दुनिया का सबसे महान नेता और शांति स्थापित करने वाला पुरोधा बताते हुए बड़ी-बड़ी बातें करने से नहीं चूकते। वे अक्सर अपनी तारीफ खुद ही करते हैं और बढ़ा-चढ़ाकर बातें कहने की आदत भी दिखाते हैं। हालाँकि, उनके किए गए दावे कई बार सच्चाई से मेल नहीं खाते।

अब अगर हम उनके हालिया दावे कि पाकिस्तान में विशाल तेल भंडार मौजूद हैं तो जरूरी है कि पहले इस बात की सच्चाई की जाँच ली जाए।

पाकिस्तान के तेल के दावे बनाम हकीकत

पाकिस्तान में कुल मिलाकर लगभग 540 मिलियन बैरल कच्चे तेल के प्रमाणित भंडार होने का अनुमान है, जो मुख्य रूप से पोटवार पठार और निचले सिंध जैसे इलाकों में स्थित हैं।

यह मात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत कम मानी जाती है और किसी भी तरह से ‘विशाल’ तो नहीं कही जा सकती। तुलना के लिए, सऊदी अरब के पास करीब 260 बिलियन बैरल और इराक के पास लगभग 140 बिलियन बैरल कच्चे तेल के भंडार हैं।

पाकिस्तान के अपतटीय सिंधु बेसिन (समुद्री क्षेत्र) में कुछ सर्वेक्षण किए गए हैं, जिनसे संकेत मिले हैं कि वहाँ मरे रिज के पास लगभग 9 बिलियन बैरल तेल के बराबर तेल-गैस के संसाधन मौजूद हो सकते हैं। लेकिन यह सिर्फ एक अनुमान है, जिसे अभी तकनीकी भाषा में ‘भंडार’ नहीं माना जाता।

इन संभावित संसाधनों की न तो अभी कोई खुदाई हुई है, न ही यह तय है कि इनमें से कितना तेल वाकई निकाला जा सकता है। इसके अलावा, इन तेल के फील्ड के विकास को लेकर कोई स्पष्ट योजना भी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल ट्रंप का यह दावा कि पाकिस्तान के पास विशाल तेल भंडार हैं, एकदम हवा-हवाई प्रतीत होता है।

कराची तट पर 2019 के अन्वेषण के बारे में रिपोर्ट

पाकिस्तान में पहले भी कुछ तेल और गैस की खोज (जाँच पड़ताल) की कोशिशें की गई थीं, लेकिन इनमें कोई खास सफलता नहीं मिली। केकरा-1 नाम की एक बड़ी जाँच परियोजना से भी कोई तेल या गैस नहीं निकला।

जून 2023 में, दुनिया की जानी-मानी कंपनी शेल ने अपने पाकिस्तानी कारोबार की हिस्सेदारी सऊदी अरब की कंपनी अरामको को बेच दी थी। इसी साल पाकिस्तान सरकार ने 18 तेल और गैस ब्लॉकों की नीलामी की कोशिश की, लेकिन एक भी निवेशक या कंपनी ने इनमें दिलचस्पी नहीं दिखाई।

ये घटनाएँ दिखाती हैं कि फिलहाल पाकिस्तान में तेल और गैस के क्षेत्र में न तो संभावनाएँ हैं और न ही निवेशक इस पर भरोसा कर रहे हैं।

बलूचिस्तान

पाकिस्तान आज कई मोर्चों पर एक असफल मुल्क माना जा रहा है। चाहे वह अर्थव्यवस्था हो, जनसंख्या मैनेज करना या फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति। मुल्क पर लगभग 126 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है और ऊर्जा आयात पर ही 17.5 अरब डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।

ऐसे में पाकिस्तान के पास इतना पैसा ही नहीं है कि वह बड़े स्तर पर तेल और गैस की खोज, पाइपलाइन बिछाने या रिफाइनरी बनाने जैसे काम कर सके। यह तभी हो सकता है कि जब तक कि अमेरिका खुद ही यह सब फंड न करे और वह भी सिर्फ किसी राजनीतिक फायदे या सनक के तहत।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर अब तक अरबों डॉलर और कई साल का समय लगा, लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। इसके अलावा, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम और पश्चिमी इलाकों में लगातार अशांति और हिंसा रहती है।

बलूचिस्तान वर्तमान में पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी समस्या है। यह पाकिस्तान का करीब 44% हिस्सा है, वहाँ सुरक्षा हालात बेहद खराब हैं। वहाँ की स्थानीय आबादी (बलूच विद्रोही) बाहरी हस्तक्षेप और संसाधनों के दोहन का विरोध करती है।

ऐसे माहौल में अगर डोनाल्ड ट्रंप यह सोचते हैं कि वे पाकिस्तान जाकर आसानी से तेल निकाल पाएँगे, तो या तो वे हकीकत से अनजान हैं या फिर जानबूझकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। अफगानिस्तान का हाल देखकर भी यह समझना मुश्किल नहीं है कि पाकिस्तान में ऐसा कोई ऑपरेशन आसान नहीं होगा और वह भी बिना हिंसा या विरोध के।

ट्रंप का पाकिस्तान प्रेम और भारत के ब्रह्मोस हमले

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर ऐसा हमला किया जैसे कोई ‘Call of Duty’ जैसा वीडियो गेम खेल रहा हो। इस हमले में भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया और नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया।

यह एयरबेस पाकिस्तान की स्ट्रैटेजिक प्लान्स डिवीजन यानी उसके परमाणु कमान के काफी करीब है और पाकिस्तान की सैन्य मुख्यालय (GHQ) से भी सिर्फ 10 किलोमीटर की दूरी पर है।

बाद में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि नूर खान एयरबेस पर अमेरिका का नियंत्रण था, लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि अमेरिका वहाँ क्या कर रहा था या उसकी क्या भूमिका थी।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के हमले बेहद सटीक और जोरदार थे। भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान की चीन में बनी वायु रक्षा प्रणाली को बेकार कर दिया, बल्कि कई रनवे पर गहरे गड्ढे कर दिए और भारी सैन्य नुकसान पहुँचाया।

इन हमलों में पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमान, Saab 2000 AEW&C विमान, Erieye रडार सिस्टम और दूसरी अहम एसेट्स नष्ट कर दी गई। इस कार्रवाई के बाद डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले से ही असमंजस में थे, अचानक युद्धविराम समझौते की बातें करने लगे।

उन्होंने यह दावा किया कि व्यापार के जरिए शांति स्थापित करने पर बातचीत हो रही है, लेकिन ये बातें बेबुनियाद और अविश्वसनीय लगती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ट्रंप के पास दिखाने के लिए कोई ठोस व्यापार समझौता नहीं है वहीं दूसरी तरफ भारत ने अपनी सैन्य ताकत पूरी दुनिया के सामने साबित कर दी है।

कोई भी समझदार व्यक्ति यह नहीं मानेगा कि भारत ने इतने बड़ा सैन्य ऑपरेशन सिर्फ ट्रंप की अनुमति से किया होगा। यह फैसला भारत ने अपनी रणनीति और जरूरत के मुताबिक लिया था।NDTV के पत्रकार विष्णु सोम ने तो हल्के-फुल्के अंदाज़ में तंज कसते हुए कहा कि शायद भारत ने रहीम यार खान एयरबेस पर ब्रह्मोस मिसाइल इसलिए दागी थी कि वहाँ तेल ढूंढा जा सके!

डोनाल्ड ट्रंप के हालिया अजीब और बेवकूफाना बयानों को लेकर अब भारतीय ट्विटर पर चर्चा तेज हो गई है। लोग यह अंदाजा लगा रहे हैं कि कहीं ये बेसुध और घबराए हुए बयान भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर में किए गए चौंकाने वाले और सफल हमलों की प्रतिक्रिया तो नहीं हैं।

ट्रंप जैसा व्यवहार किसी भी वैश्विक नेता के लिए असामान्य माना जाता है। भले ही वो डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता ही क्यों न हों। सोशल मीडिया पर अब लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या भारत की यह सैन्य कार्रवाई इतनी असरदार और अप्रत्याशित थी कि उसने ट्रंप को बौखलाहट की स्थिति में डाल दिया है।

निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों लगातार बड़े-बड़े वादे और दावे कर रहे हैं। वे अपनी काल्पनिक उपलब्धियों की जमकर तारीफ (ट्रंप-एटिंग) कर रहे हैं और MAGA (Make America Great Again) के सपने दुनिया को दिखा रहे हैं।

लेकिन आज की दुनिया और विशेषकर ग्लोबल साउथ अब पहले जैसी नहीं रही। यह नई बहुध्रुवीयता को समझती है और ट्रंप के दिखाए सपनों से प्रभावित नहीं होती। ट्रंप की धमकियों से चीन, रूस और अब भारत भी नहीं डरता। भारत पहले भी धमकियाँ और प्रतिबंध झेल चुका है।

इन मुश्किलों के बावजूद, भारत ने खुद को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में खड़ा किया है और अंतरराष्ट्रीय हालात को संभालना अच्छी तरह जानता है।

कुछ लोग भले ही इसे मजाक कहें, लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान में ऐसे गहरे गड्ढे बना दिए हों कि अब पाकिस्तानी और उनके नए गार्जियन डोनाल्ड ट्रंप वहीं से तेल मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हों।

यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में संघमित्रा ने लिखी है। इसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे।

नहीं Mr. President! ‘डेड’ नहीं, ‘डैशिंग’ इकॉनमी है भारत… दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था भी: सीजफायर पर नहीं मिला क्रेडिट तो बौराओ मत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर बुधवार (30 जुलाई, 2025) को 25% टैरिफ का ऐलान किया था। ट्रंप ने इसी के साथ कहा था कि भारत के रूस से हथियार सौदों और तेल-गैस खरीदने के चलते भारत अपर अतिरिक्त टैरिफ भी लगेगा। ट्रंप ने इसके बाद गुरुवार (31 जुलाई, 2025) को भारत और रूस को ‘डेड इकॉनमी’ बता दिया। उनका इशारा था कि दोनों देश एक साथ हैं और अब वह जो चाहें वो करें।

ट्रंप के यह ‘मूड स्विंग्स’ भारत और पाकिस्तान के बीच मई, 2025 मे हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद से जारी हैं। तब से वह कहीं ट्रेड डील की बात करते हैं, कहीं टैरिफ का ऐलान करते हैं और हर तीसरे घंटे कथित सीजफायर पर शोर मचाते हैं। हालाँकि, भारत ने एक भी बार उनकी सीजफायर वाली बात को मानने से इनकार किया है। संभवत: इसी से चिढ़ के डोनाल्ड ट्रंप अब भारत को ‘डेड इकॉनमी’ बता रहे हैं। वो यूक्रेन या किसी अफ्रीकी देश को ऐसी बात कहें तो ठीक भी है लेकिन भारत के विषय में वह पूर्णतया गलत हैं।

डेड नहीं ‘डैशिंग’ इकॉनमी है भारत

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप अपनी खीझ में भारत को डेड इकॉनमी यानी मृत अर्थव्यवस्था बता रहे हैं। उनका कहने का अर्थ है कि भारतीय अर्थव्यवस्था फेल हो चुकी है और अब वह गर्त को जाने वाली है। यह ना सिर्फ ट्रंप की अज्ञानता बल्कि उनकी मूर्खता और घमंड को तक दर्शाता है। भारत डेड इकॉनमी होने से कोसों दूर है। भारत डेड इकॉनमी तो कहीं से नहीं है बल्कि वह वर्तमान में वैश्विक अर्थव्यवस्था में रफ़्तार का इंजन है। यह सब केवल कहने की बातें नहीं हैं बल्कि आँकड़े इनकी गवाही देते हैं।

भारत वर्तमान में विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है इसका आकार लगभग 4 ट्रिलियन है। जल्द ही यह जर्मनी को पीछे छोड़ कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। भारत वर्तमान में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। और यह सिलसिला बीते 10 वर्षों से लगातार चल रहा है तथा आगे और भी चलना इसका पक्का है। वर्ष 2015-25 के बीच भारत की औसत GDP वृद्धि दर 6%-6.5% रही है।

जबकि इस बीच भारत ने कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और दूसरे वैश्विक संकट झेले हैं। भारत के मुकाबले चीन इस दौरान 6% या उससे नीचे की ही रफ़्तार से बढ़ा है। अब चीन की GDP वृद्धि दर और भी धीमी होती जा रही है। भारत वर्तमान में वैश्विक GDP वृद्धि में 17% का योगदान दे रहा है। यह आगे चलके 20% तक होने का अनुमान है। भारत इसी के चलते वैश्विक ग्रोथ का इंजन बना हुआ है। उसकी अर्थव्यवस्था का आकार 2015-25 में 105% बढ़ा है।

जबकि इसी दौरान चीन की GDP का आकार मात्र 44% बढ़ा है। विश्व में तेल-गैस जैसे महत्वपूर्ण चीजों की माँग में भी भारत का हिस्सा बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में विश्व में खपत होने वाले कुल ऊर्जा स्रोतों का 25% भारत में होगा। जिस भारत को डोनाल्ड ट्रंप डेड इकॉनमी बता रहे हैं, वह वर्तमान में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। भारत की आबादी 140 करोड़+ है। यह अभी और बढ़ेगी। वर्तमान में भारत का मध्यम वर्ग लगभग 60 करोड़ है।

यह मध्यम वर्ग 2047 तक 100 करोड़ पहुँचने के आसार हैं। यही मध्यम वर्ग वर्ष 2030-2031 तक लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर की खपत करेगा। ऐसे में विश्व की कम्पनियों का धंधा भी चीन के अलावा भारत के ही भरोसे होगा। इतना बड़ा मध्यम वर्ग उसे और कहीं नहीं मिलेगा। यह बाजार जिस देश में है, वह कभी भी डेड इकॉनमी नहीं हो सकता। भारत सिर्फ बड़ा बाजार ही नहीं है बल्कि बहुत ऐसी ऐसी चीजों की फैक्ट्री भी है, जिन पर विश्व निर्भर है।

भारत विश्व में जेनेरिक दवाइयों का विश्व का सबसे बड़ा सप्लायर है। अमेरिका भी वर्तमान में भारत निर्मित जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। भारत का फार्मा एक्सपोर्ट वर्ष 2030 तक 65 बिलियन डॉलर (₹5.5 लाख करोड़) तक पहुँचने का ऐलान है। इसके अलावा भारत भले ही कच्चे तेल का बड़ा उत्पादक ना हो लेकिन वह तेल की रिफायनरी के मामले में बहुत आगे है। भारत विश्व का चौथा सबसे तेल रिफाइन करने वाला देश है। इसके अलावा गाड़ियाँ, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक समेत बाकी कई वस्तुओं का भारत बड़ा सप्लायर है।

ट्रंप की खीझ है भारत पर रोने का कारण

ट्रंप ने बुधवार से भारत के खिलाफ लगातार अपना प्रलाप जारी रखा है। पहले उन्होंने ट्रेड डील पर जारी बातचीत के बावजूद 25% और पेनाल्टी वाले टैरिफ का ऐलान किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि अभी बातचीत चल रही है। ट्रंप ने इसके बाद पाकिस्तान के एक ट्रेड डील का ऐलान कर दिया। उन्होंने साथ में यह भी बताया कि अमेरिका की कोई कंपनी पाकिस्तान में तेल की खोज में भी मदद करेगी। उन्होंने इसके साथ भारत पर तंज कसते हुए कहा, “क्या पता पाकिस्तान किसी दिन भारत को तेल बेचे।”

इससे पहले वह पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को भी डिनर पर बुला चुके हैं। वह लगातार पाकिस्तान के साथ ट्रेड बढ़ाने की बात करते रहे हैं। वह इसी दौरान पाकिस्तान को और भी बढ़ावा देते रहे हैं। इसके उलट उनका भारत पर प्रहार जारी रहा है। पहले उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर हुए सीजफायर का क्रेडिट लेने का प्रयास किया। भारत ने यह मानने से इनकार कर दिया। भारत ने ट्रंप के दावों को हर बार नकार दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्रंप को सामने से मिलने से इनकार कर दिया।

ट्रंप ने अपने सीजफायर के दावों में कहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान से ट्रेड डील की है, जिसके चलते दोनों देश अपना-अपना युद्ध रोकने पर राजी हुए हैं। भारत ने सीजफायर में ट्रंप की मध्यस्थता के दावों के साथ ही यह मानने से इनकार कर दिया कि भारत ने किसी भी व्यापार सम्बन्धित धमकी के आधार पर यह सीजफायर किया। हालाँकि, ट्रंप ने अपने दावी जारी रखे। भारत इन्हें नकारता रहा। अपने झूठ को ट्रंप ने खुद ही 30 जुलाई, 2025 साबित कर दिया जब उन्होंने भारत के खिलाफ टैरिफ का ऐलान किया।

यदि भारत सीजफायर करने पर व्यापार के आधार पर ही मानता तो भला अब उसे टैरिफ क्यों झेलने पड़ते। इन सबकी खीझ के चलते ट्रंप अब भारत पर हमलावर हो रहे हैं। हालाँकि, उनकी इन धमकियों से भारत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ना ही वह दबाव में कोई ट्रेड डील करने जा रहा है, ना ही अपने अंतरराष्ट्रीय मामलों में उनका दखल स्वीकार करेगा। ट्रंप के कह भर देने से भारत डेड इकॉनमी भी नहीं बन जाएगा।

ट्रंप की खीझ को एक राजस्थानी कहावत से समझा जा सकता है। यह कहावत है- रांडा रोवती रेवे, पामणा जिमंता रेवे। इसका अर्थ है कि विधवाएँ कोसती रहती हैं जबकि दूसरों के पति ज़िंदा रहते हैं। इसी तरह ट्रंप भी भारत को लेकर रोते रह सकते हैं, हमें कोई नहीं फर्क पड़ने वाला।

भगवा आतंकी का लगा लें ठप्पा, बेगुनाही के बावजूद बन जाएँ मालेगाँव ब्लास्ट के गुनाहगार: जानें – कैसे कॉन्ग्रेस की सरकार में सेना के अधिकारियों पर ढाया गया जुल्म, पत्नी-बेटी के रेप की देते थे धमकी

मालेगाँव बम धमाका मामले में गुरुवार (31 जुलाई, 2025) को साध्वी प्रज्ञा, कर्नल श्रीकांत पुरोहित और मेजर रमेश उपाध्याय समेत 7 लोगों को बाइज्जत बरी कर दिया। कोर्ट को इन लोगों के खिलाफ मालेगाँव धमाके में कोई सबूत नहीं मिले। इसी के साथ पिछले 17 वर्षों से चली आ रही ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी का अंतिम संस्कार हो गया।

17 वर्षों तक इन हिन्दुओं को केवल इसलिए प्रताड़ित किया जाता रहा ताकि कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति चमक सके। कॉन्ग्रेस की इस तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार भारतीय सेना के दो अफसर भी हुए। उनके परिवारों तक को नहीं छोड़ा गया, उनके सैन्य करियर बर्बाद कर दिए गए, देश की दशकों तक सेवा के बावजूद उन्हें जनता में शर्मिंदगी झेलनी पड़ी और वामपंथी मीडिया ने उनका वर्षों तक पीछा किया।

कर्नल का पैर तोड़ा, नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर मारा

भारतीय सेना में देश की सेवा करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को कॉन्ग्रेस सरकार ने आतंकवादी साबित करने की कोशिश की। उन्हें मालेगाँव ब्लास्ट 2008 की जिम्मेदारी लेने के लिए यातनाएँ दी गईं थी। कर्नल से सेना की खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिश की गई। कर्नल के साथ पाकिस्तान पहुँचे विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान से भी बुरा बर्ताव किया गया।

यहाँ तक कि कर्नल का पैर तोड़ा गया, नंगा कर प्राइवेट पार्ट पर मारा गया, बाल पकड़कर खींचे जाता था। उन्हें वर्षों तक जेल में रखा। इस दौरान उन्हें सेना की नौकरी से भी हाथ धोना पड़ गया। महाराष्ट्र ATS गवाहों को भी बंदूक की नोक पर बयान दिलवाती थी। कोर्ट को कर्नल पुरोहित ने बताया था कि यह सब तत्कालीन UPA सरकार और राज्य की कॉन्ग्रेस NCP सरकार के इशारे पर किया गया था।

कोर्ट के सामने कर्नल पुरोहित ने बयान दिया था कि कॉन्ग्रेस सरकार ने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ, विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को फँसाने की साजिश की थी। कर्नल से भी मामले में उनका नाम लेने का दबाव डाला गया था। कर्नल के परिवार को भी फँसाने की धमकी दी गई थी।

मेजर की बेटी से रेप और पत्नी को नंगा करने की दी गई थी धमकी

मेजर रमेश उपाध्याय के सेनानी थे। उन्हें भी तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने मालेगाँव बम धमाका मामले में फँसाया गया था। कॉन्ग्रेस सरकार के इशारे पर ATS उन्हें प्रताड़ित करती थी। यहाँ तक कि उनकी पत्नी को नंगा घुमाने और बेटी के रेप तक की धमकी दी गई। मेजर उपाध्याय को भी बम धमाके की जिम्मेदारी लेने के लिए मानसिक और शारीरिक शोषण किया गया था।

ATS ने मेजर उपाध्याय को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। मेजर पर MCOCA लगाने की धमकी देकर आतंकवादी करार दिया गया, उनके किराए के घर को भी खाली करवाया गया। मेजर का परिवार सड़क पर आ गया था। मेजर के शादीशुदा बेटियों के घर पर भी ATS ने छापा मारा। मेजर का पॉलीग्राफ और नारको टेस्ट भी करवाया गया और क्लीन चिट मिलने के बाद कोर्ट के सामने पेश नहीं की।

गजवा-ए-हिंद, काफिरों पर हमला, मोदी सरकार निशाने पर… आतंकी शमा परवीन निकली अलकायदा चीफ की फैन, भाषण सुनवाकर करती थी युवाओं का ब्रेनवॉश

गुजरात ATS की ओर से पकड़ी गई अलकायदा की मास्टरमाइंड शमा परवीन के बारे में हर दिन नए खुलासे हो रहें हैं। अब जानकारी में सामने आया है कि वह अलकायदा इंडिया सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के चीफ रहे मौलाना असीम उमर से काफी प्रभावित थी। असीम को अलकायदा के चीफ अल जवाहिरी का चेला माना जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, AQIS से जुड़ी आतंकी शमा परवीन और उसके नेटवर्क का मकसद भारत में धार्मिक आधार बनाकर तनाव और हिंसा फैलाना था। इसके लिए वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेती थी।

जानकारी के अनुसार, ATS ने बताया है कि शमा दो फेसबुक पेज और एक इंस्टाग्राम अकाउंट को संभालती थी, इससे करीब 10 हजार यूजर जुड़े हुए थे। शमा इसके सहारे ही अलकायदा और अन्य कट्टरपंथियों के भड़काऊ भाषण साझा करती थी।

इनमें AQIS नेता मौलाना असीम उमर, अनवर अल-अवलाकी और लाहौर के लाल मस्जिद के मौलाना अब्दुल अजीज के भाषणों के वीडियो शेयर किए जाते थे। इनमें अधिकतर गजवा-ए-हिंद, काफिरों पर हमले और भारत सरकार के खिलाफ बातें कही गई होती थी।

ATS  ने बताया कि इनमें भारतीय मुस्लिम युवाओं को देश के लोकतंत्र को खारिज करके सशस्त्र विद्रोह करके शरिया कानून लागू करने के लिए उकसाया जाता था। शमा के सोशल मीडिया अकाउंट की जाँच में सामने आया है कि वह मौलाना असीम उमर के भड़काऊ बयान सोशल मीडया पर पोस्ट करके लोगों का ब्रेनवॉश करने की कोशिश करती थी।

बता दें कि 2014 में AQIS का चीफ मौलाना असीम उमर को बनाया गया था।अलकायदा चीफ अल जवाहिरी ने ही असीम को AQIS का चीफ भी बनाया था। उमर उत्तर प्रदेश के संभल का रहने वाला था, लेकिन बाद में पाकिस्तान और उसके बाद अफगानिस्तान चला गया था।

पुलिस का कहना है कि शमा और उसके साथ गिरफ्तार सभी आतंकी मौलाना असीम उमर के बयान सुनते थे और सोशल मीडिया पर शेयर भी करते थे।

अन्य जानकारियों के अनुसार, शमा के अब्बू शमशुल हक की 2019 में मौत हो गई थी। इसके बाद से शमा परवीन का पूरा परिवार बेंगलुरु में रहता है। शमा तीन बहन और दो भाइयों में सबसे छोटी है।

जाँच में ये भी सामने आया है कि शमा परवीन बचपन से ही कट्टर इस्लामी सोच की है। वह कभी भी निकाह नहीं करना चाहती थी, घर वालों से कम लगाव रखती थी और पर्दे में रहना ज्यादा पसंद करती थी। जबकि उसके घरवाले पढ़े-लिखे हैं। जहाँ उसकी एक बहन कोलकाता में एग्रीकल्चर साइंटिस्ट हैं, वहीं दोनों भाई शमशेर और आजम कंप्यूटर इंजीनियर हैं। 

क्या हिंदू होना ही है साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित और मेजर उपाध्याय का दोष?

मालेगाँव ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी की विशेष अदालत ने आज (31 जुलाई 2025) उन सातों आरोपितों को बरी कर दिया, जिनके नाम का इस्तेमाल करके कभी UPA सरकार ने ‘हिंदू आतंकवाद’ के नैरेटिव को गढ़ने का प्रयास किया था। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए उस बाइक वाली थ्योरी को भी खारिज किया जिसके आधार पर हिंदू संत और सेना से जुड़े लोग निशाने पर लिए गए थे।

कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित, मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी, अजय रहीरकर, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर द्विवेदी के खिलाफ सबूतों की कमी बताई। स्पेशल जज ए.के. लाहोटी ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा और सबूतों में कई असंगतियाँ हैं। कोर्ट ने ‘हिंदू आतंकवाद’ की थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए जोर दिया कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन दोषसिद्धि नैतिक आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सबूतों पर होनी चाहिए।

स्पेशल जज एके लाहोटी ने 500 पेज से ज्यादा के अपने फैसले में विस्तार से बताया कि अभियोजन पक्ष ने केस को साबित करने में कई गलतियाँ कीं। उन्होंने कहा, “पूरी जाँच के बाद यह साफ है कि अभियोजन कोई ठोस सबूत लाने में विफल रहा है। सबूतों में कई असंगतियाँ हैं, इसलिए सभी आरोपितों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए।”

हिंदुत्व को बदनाम करने के लिए छाँटे गए तीन नाम

29 दिसंबर 2008, ब्लास्ट वाले दिन और 31 जुलाई 2025, यानी फैसले वाले दिन के बीच 16 साल 10 महीने (लगभग 17) बीत चुके हैं। इस लंबे अंतराल में निर्दोषों के साथ क्या-क्या हुआ ये सोच भी रूह कँपाने वाली है। केस में तीन ऐसे नाम हैं जिनके साथ अत्याचार की हर हदें पार की गईं।

ये तीन नाम- साध्वी प्रज्ञा, मेजर रमेश उपाध्याय और लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित के हैं। केस की जाँच के नाम पर राज्य एटीएस ने इन बेगुनाहों को न केवल मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया, बल्कि इन्हें शारीरिक यातनाएँ भी दीं।

इन्हें इतना तड़पाया गया कि साध्वी प्रज्ञा को तो वेंटिलेटर तक पर जाना पड़ा था और मेजर उपाध्याय को सरेआम धमकी मिलती थी कि उनकी बेटी का रेप हो जाएगा। वहीं कर्नल पुरोहित को ‘देशद्रोही’ साबित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया गया।

आज जब ये सारे लोग अदालत की नजर में भी बेगुनाह साबित हो चुके हैं तो आइए एक बार फिर याद दिलाएँ कि जाँच के नाम पर इन ‘हिंदुओं’ को कैसे निशाना बनाया गया था।

जाँच के दौरान तीनों पर बरपाया गया कहर

साध्वी प्रज्ञा के साथ अमानवीयता की हर हद की गई पार

  • साध्वी प्रज्ञा की बात करें तो वह कई बार इस मामले में अपना दर्द साझा करके भावुक हो चुकी हैं। वह वो दर्दनाक समय को नहीं भुला पातीं जब जेल के भीतर उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित करने का काम हुआ था। उनके अनुसार, इस केस में हिरासत में लिए जाने के बाद पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो दिखाए जाते थे और भद्दे सवाल होते थे।
  • इसके अलावा कथिततौर पर 4-5 पुलिसकर्मी लगाकर उन्हें मारा जाता था। उनकी पिटाई चमड़े की बेल्ट से होती थी। उनको बिन किसी सबूत के भगवा आतंकी कहा जाता था। उनपर इतने अत्याचार होते थे कि उनकी हालत खुद के पाँव पर चलने लायक नहीं बची थी।
  • उनकी रीढ़ की हड्डी में समस्या आ गई थी और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था। इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा ने ये भी बताया था कि इन्हीं सबके कारण उन्हें कैंसर और न्यूरो की बीमारी हो गई थी और उनके शरीर में पस पड़ गया था।

मेजर की पत्नी को नंगा घुमाने, बेटी का रेप करने की धमकी

  • मेजर रमेश उपाध्याय ने भी अपने बारे में बताया था कि मालेगाँव ब्लास्ट में कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार ने उनको फँसाया था। हिरासत में लिए जाने के बाद एटीएस उनके साथ बर्बरता करती थी। उन्हें धमकी दी जाती थी कि पत्नी को नंगा घुमाया जाएगा, बेटी का रेप किया जाएगा, बेटे का जबड़ा तोड़ दिया जाएगा।
  • इसके अलावा उनके मकान मालिक तक को उनके खिलाफ भड़काया गया- आतंकी को क्यों रख रहे हों। जिसके कारण उनके परिवार के सिर से छत छिन गई। उनकी शादीशुदा बेटियों के घरों पर दबिश दी गई । हर वो हालात पैदा कर दिए गए कि वो कैसे भी वो जुर्म कबूलें जो उन्होंने किया ही नहीं।
  • प्रशासन उन्हें इस कदर इस मामले में दोषी बनाना चाहता था कि मेजर का नार्को टेस्ट भी कराया। हालाँकि जब उसमें उन्हें क्लीनचिट मिल गई तो ये बर्दाश्त नहीं हुआ और रिपोर्ट को दबा दिया गया।

लेफ्टिनेंट कर्नल का तोड़ दिया गया पैर

  • इसी तरह प्रताड़ना की कहानी भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मालेगाँव ब्लास्ट केस में राज्य (महाराष्ट्र) एटीएस ने कथिततौर पर कर्नल पुरोहित को फँसाने के बहुत प्रयास किए।
  • ये जानते हुए कि जिस समय ये ब्लास्ट हुआ था, उस वक्त वो अपने मिशन पर थे उन्हें हिरासत में लिया गया और देशद्रोही घोषित करने की कोशिश हुई। बाद में उनपर दबाव बनाया गया कि वो पूछताछ में आरएसएस और वीएचपी नेताओं का जबरन नाम लें ताकि हिंदू आतंकवाद की थ्योरी सही साबित हो सके।
  • जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनका पैर तोड़ा गया, उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा, उन्हें नंगा करके मारा गया, उनके प्राइवेट पार्ट पर हमला किया गया, उन्हें बाल से नोचा और खींचा गया।

मालेगाँव ब्लास्ट के इस पूरे मामले में भगवाधारी साध्वी प्रज्ञा या सेना की वर्दी वाले कर्नल पुरोहित-मेजर उपाध्याय जैसे लोग निशाने पर क्यों लिए गए, ये समझना अब कोई कठिन नहीं है। धमाका मस्जिद के पास हुआ था। कॉन्ग्रेस ने इसे अपने वोटबैंक के लिए जमकर भुनाया। रैली कर करके हिंदुओं को आतंकवादी कहा गया।

जब सवाल उठे कि ये किस आधार पर दावे हो रहे हैं तो खुद को सही साबित करने के लिए यूपीए सरकार में फँसाए गए 7 निर्दोष, जिन्हें तरह-तरह की यातना देकर मजबूर किया गया कि वो मानें ब्लास्ट में उनका हाथ था। इन निर्दोषों संत और सेना से जुड़े लोग थे।

पूर्व नौकरशाह आरवीएस मणि ने कॉन्ग्रेस के दौर में गृह मंत्रालय में एक अंडर-सेक्रेटरी के रूप में काम किया था। अपनी पुस्तक ‘हिंदू टेरर’ में, मणि ने संपूर्ण मिलीभगत का वर्णन किया हुआ है। उन्होंने बताया है कि किन-किन खिलाड़ियों ने ‘भगवा आतंक’ की कहानी गढ़ने के लिए मिलीभगत की और कैसे, कई वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता से लेकर कई अन्य लोग इस साजिश में शामिल थे।

वहीं कोर्ट में भी कोर्ट में भी गवाहों ने यह जानकारी दी थी उनके ऊपर हिंदू नेताओं को फँसाने के लिए कहा गया था। ये जानकारी चौंकाने वाली थी, लेकिन जब तक ये सच सामने आया तब तक कॉन्ग्रेस के तुष्टिकरण का शिकार ‘निर्दोष’ हो चुके थे। कॉन्ग्रेस ने देश की सेना के कर्नल पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय और भगवाधारी साध्वी प्रज्ञा का इस्तेमाल ये फैलाने के लिए किया कि उनकी हिंदू आतंकवाद की थ्योरी एकदम सही है।

ये ध्यान रहे कि आज कोर्ट ने जो फैसला दिया है उससे न तो वो लोग खुश हैं जिनका मकसद हिंदुत्व को बदनाम करने का रहता है और न ही वो लोग, जिन्हें कुछ भी करके हिंदुत्व को आतंकवाद का पर्याय बताना था। 2008 के उस दौर में इस मालेगाँव ब्लास्ट के बाद एक तरफ मुस्लिमों को रैलियों के दौरान ये बताकर खुश किया जा रहा था कि इसे इस्लामी आतंकियों ने अंजाम नहीं दिया है बल्कि हिंदू आतंकवादियों ने दिया है। वहीं दूसरी तरफ, हिंदू नेताओं को पूरे मामले में फँसाने की साजिश चल रही थी।

खुद गवाहों ने इस बात को स्वीकारा था कि उन पर योगी आदित्यनाथ समेत अन्य हिंदू नेताओं का नाम लेने का दबाव था। इसके अलावा जो प्रताड़नाएँ मेजर और कर्नल को दी गई थीं उसका मकसद भी यही था कि ये अपने बयानों में हिंदू नेताओं का नाम ले… लेकिन ये सब होता कैसे? कुछ दिन यूपीए शासन में ये नैरेटिव गढ़ा-बढ़ा। मगर फिर हकीकत सामने आने लगी।

केस एनआईए के पास गया, चार्जशीट दाखिल हुई, गवाहों की पेशी हुई और हकीकत खुलती गई। ये भी सामने आया कि ये पूरा नैरेटिव सिर्फ जनता का ध्यान CWG घोटाले से हटाने के लिए किया था। इसी बीच ब्यूरोक्रेट आरवीएस मणि की किताब जनता के बीच आई, जिनसे कॉन्ग्रेस के हिंदूविरोधी चेहरे को शीशे जैसा साफ कर दिया।

रात भर पिटाई, रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, 24 दिनों तक रखा भूखा… आज भी ‘कॉन्ग्रेस का टॉर्चर’ भोग रहीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर, एक साध्वी को पोर्न दिखाने वालों को दंड कब?

मालेगाँव ब्लास्ट 2008 मामले में NIA की विशेष अदालत ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी 7 आरोपितों को बरी कर दिया है। 17 वर्षों बाद भले ही ‘भगवा आतंकवाद’ की कहानी झूठी साबित हो गई हो लेकिन आरोपित बनाई गईं साध्वी प्रज्ञा को मिली प्रताड़ना कॉन्ग्रेस के काले कारनामों का चिट्ठा दिखाती है।

कोर्ट के निर्णय आने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने जज के सामने अपनी बात भी रखी। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा ही कहा कि जिन्हें भी जाँच के लिए बुलाया जाता है, उसके पीछे कोई आधार होना चाहिए। मुझे बिना किसी आधार के जाँच के लिए बुलाया गया और गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया गया। मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो गया। मैं एक साधु का जीवन जी रही थी, पर मुझे फँसाकर झूठे आरोप लगाए गए। कोई भी हमारे साथ खड़ा होने को तैयार नहीं था।”

अपनी बात जारी रखते हुए साध्वी प्रज्ञा ने आगे कहा, “मैं जिंदा हूँ क्योंकि मैं एक संन्यासी हूँ। एक साजिश के तहत भगवा को बदनाम किया गया। आज भगवा की जीत हुई है, हिंदुत्व की जीत हुई है और ईश्वर उन आरोपितों के दंड देगा। हालाँकि, जिन्होंने भारत और भगवा को बदनाम किया, उन्हें अभी तक आपने गलत साबित नहीं किया है।”

गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगाँव में भिक्खू चौक मस्जिद के पास धमाका हुआ। मोटरसाइकिल में बांधकर किए गए इस धमाके में 6 लोग मारे गए थे और 100 से भी अधिक लोग घायल हुए थे। इसके तहत साध्वी प्रज्ञा समेत 7 लोगों पर UAPA, आतंकवाद, आर्म्स एक्ट और IPC की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। 17 वर्षों तक इसे लेकर मुकदमा चला। 323 गवाह पेश किए गए। इनमें से 37 गवाह अपने बयान से मुकर गए। इसके अलावा बचाव पक्ष के भी 8 गवाह पेश हुए।

प्रताड़ना के 17 वर्ष

मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा को ब्लास्ट के बाद 23 अक्टूबर 2008 को ATS ने गिरफ्तार किया। साध्वी प्रज्ञा पर आरोप लगा कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई एलएमएल फ्रीडम मोटरसाइकिल के इंजन और चेसिस नंबर से पता चला कि वह बाइक साध्वी प्रज्ञा के नाम पर रजिस्टर्ड थी। हालाँकि रजिस्ट्रेशन नंबर फर्जी पाया गया था।

महाराष्ट्र ATS ने दावा किया था कि उस मोटरसाइकिल का इस्तेमाल विस्फोटक लगाने के लिए किया गया और इसी आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। इस दौरान उन्हें इस कदर प्रताड़ित किया गया कि मेडिकल इमरजेंसी के तहत वह वेंटिलेटर तक पहुँच गईं।

अप्रैल 2011 में यह मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया, जिसने ATS की जाँच में कई खामियाँ पाईं। NIA ने अपनी जाँच में ये भी कहा कि मोटरसाइकिल भले ही प्रज्ञा के नाम पर थी, लेकिन उसका इस्तेमाल रामचंद्र कलसांगरा नामक फरार आरोपित कर रहा था।

UAPA के तहत साध्वी पर की गई कार्रवाई भी दोषपूर्ण मानी गई। NIA ने जब जमानती वारंट जारी किया तब साध्वी प्रज्ञा ने साल 2020 में अपने साथ हुए अमानवीय व्यवहार को लेकर रिपब्लिक टीवी को एक साक्षात्कार दिया।

इसमें उन्होंने बताया था कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह के सामने 3-4 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बहुत अधिक प्रताड़ना दी थी। उन्हें हिरासत में लेकर पूरी रात बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बताया कि हिरासत के दौरान उनको पुरुष कैदियों के साथ रखकर पॉर्न वीडियो दिखाया जाता था और साध्वी होने का लिहाज किए बिना उनसे भद्दे सवाल किए जाते थे। उन्होंने बताया था कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया, फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था।

भूख, मार और बिजली के झटके

साध्वी प्रज्ञा ने बताया था कि उन्हें चमड़े की बेल्ट से पीटा जाता था। उन्हें 24 दिनों तक भूखा रखा गया था। उनको बिजली के झटके दिए जाते थे। गाली-गलौज तो उनके साथ आम बात हो गई थी। उनको लगातार पीटने के लिए 5-6 पुलिस वाले लगाए जाते थे और जब वह थक जाते थे तो दूसरे पुलिसकर्मी उनको पीटने लग जाते थे। इनके पैरे के तलवे तक में बेल्ट से पीटा गया। पिटाई के दौरान उनका पूरा नर्वस सिस्टम सुन्न पड़ जाता था।

साध्वी प्रज्ञा की यातनाएँ सिर्फ बेल्ट की मार तक ही सीमित नहीं रहीं थीं। उन्हें उल्टा लटकाकर मारा जाता था और हाथों को गर्म पानी में नमक डालकर डुबोया जाता था। हाथ फट जाते थे तो जख्मों पर नमक छिड़का जाता था।

उन्होंने बताया कि जेल में उन्हें इतनी गंदी-गंदी गालियां दी जाती थीं जिन्हें कोई स्त्री सुन भी नहीं सकती। उन्हें निर्वस्त्र किए जाने की बार-बार धमकी दी जाती थी। भोजन में उन्हें अंडा खाने के लिए मजबूर किया जाता था जबकि वे शाकाहारी हैं।

साध्वी प्रज्ञा को मिली प्रताड़नाओं से उनके पूरे शरीर में सूजन आ गई थी। कई हिस्सो में पस पड़ गया था। आज भी वह कई शारीरिक परेशानियों से जूझ रही हैं। उन्हें कैंसर और न्यूरो की बीमारी तक हो गई। अपनी प्रताड़ना के बारे में बताते हुए साध्वी प्रज्ञा कोर्ट में रो पड़ी थीं।

आज जब साध्वी प्रज्ञा ठाकुर समेत सभी आरोपितों के बरी किया गया तो साध्वी ने कहा कि षडयंत्र के तहत भगवा को बदनाम किया गया, आज हिंदुत्व की जीत हुई है।