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अभी मस्जिदों को आबाद करो, लॉकडाउन मुस्लिमो को डराने का, मिलने से रोकने की साजिश है: मरकज का मौलाना

कहते हैं गुरु और धर्म गुरू जीवन में पथ प्रदर्शक होते हैं। मगर किसी आम इंसान को अगर इनमें से कोई भी गलत मिल जाए तो जीवन अंधकार में चला जाता है। आज कुछ यही मुसलामनों के साथ हो रहा है। मोहम्मद साद कंधालवी- जमाती प्रमुख। जिसकी बातों में आकर समुदाय के लोगों ने न केवल खुद को बल्कि पूरे भारत को खतरे में डाल दिया है। जी हाँ। दिल्ली में बढ़ते कोरोना के मामलों के पीछे निजामुद्दीन की मरकज़ का खुलासा होने के बाद तबलीग जमात के प्रमुख का एक ऑडियो वायरल हुआ है।

इस ऑडियो ने सबको झकझोर दिया है। इसमें सुना जा सकता है कि धर्मगुरू जिसके ‘उपदेश’ सुनने के लिए न केवल भारत के अलग अलग राज्यों से लोग इकट्ठा हुए बल्कि विदेशों से भी भारत आए। उसने न सिर्फ उनके बीच में गलत जानकारी फैलाई, बल्कि उन्हें गलत रास्ते पर चलने के लिए उकसाया, प्रशासन के निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

ऑडियो में कोरोना विषय पर बात करते हुए कंधालवी ने डॉक्टर, सरकार, प्रशासन, विज्ञान सबको खारिज कर दिया। मौलवी ने सिर्फ सुन्नत की बातें की। मस्जिदों को आबाद करने की बात की। साथ ही लॉकडाउन को एक प्रोग्राम बताया। पूरी ऑडियो ने वायरल होने के बाद तस्वीर साफ कर दी है। मालूम चल चुका है कि तेलंगाना में हुई मौत, आँध्र प्रदेश, यूपी, दिल्ली में अकस्मात बढ़े मामलों के लिए कौन जिम्मेदार है।

कंधालवी को ऑडियो में स्पष्ट कहते सुना जा सकता है, “ये मौका मस्जिदों को आबाद करने का है। इन बातों का नहीं कि मस्जिदों को छोड़ दो, क्योंकि हालात सही नहीं है… जिनकी अक्लों पर दूसरों का पहरा होता है, वे ऐसे मशवरे देते हैं।” मौलाना साद ये भी कहता है कि इस परेशानी से लड़ने के लिए अल्लाह का आजाब हटाने के लिए घर में मत बैठो, औरतों को, बच्चों को, जानवरों को, बकरियों को, बैलों को, भैंसों को, ऊँटों को… सबको मैदान में ले आओ… और अल्लाह की मदद से इस आजाब को हटाओ।

बता दें कि अपने हर दूसरे वाक्य में साद को बार-बार मस्जिदों को आबाद रखने के लिए कहते सुना जा सकता है और ये पूछते भी सुना जा सकता है कि आखिर लोगों को क्यों यकीन आ गया कि दूर रहने से समाधान होगा। इसका यकीन क्यों नहीं है कि इकट्ठा होंगे तो अल्लाह फरिश्ते तैनात करेंगे, जिनके करम से दुनिया में सुकून और राहत आएगी।

“लॉकडाउन और कोरोना का खौफ फैलाना सिर्फ़ एक स्कीम है। ताकि मुस्लिम दूसरे मुस्लिम से न मिल सके। एक थाली में साथ न खा सके।” वायरल ऑडियो में कंधालवी साद को यह भी कहते सुना जा सकता है कि यह सब प्रोग्राम है ताकि मुस्लिमों को बिखेरा जा सके। जिससे दिमाग में बैठ जाए कि साथ में मत बैठो वरना बीमारी लग जाएगी। वो कहता है कि अगर आज मुस्लिमों में इस बीमारी का खौफ फैल जाता है, तो बीमारी खत्म हो जाएगी, लेकिन मुस्लिम अलग हो जाएगा। ये सब एक प्रोग्राम बनाया गया है, जिससे मुस्लिम-मुस्लिम से अलग हों और इस बहाने से इन्हें अछूत बनाया जा सके। अंत में बातों में तालमेल बिठाने के बाद साद ये भी कहता है कि अगर बीमारी हो जाए तो एहतियात बरती जानी चाहिए क्योंकि ये भी सुन्नत है। मगर मुस्लिम का मुस्लिम से न मिलना जहालत है।

उल्लेखनीय है कि उक्त बातें, वो बातें हैं जो बताती है कि एक मौलाना ने किस तरह हजारों की संख्या में मुस्लिमों को भड़काया और मजहब के नाम पर डराया। उसने अपनी बात की शुरुआत में ही कुरआन की आयतों का हवाला देते हुए पूछ लिया कि मौत से भाग कर कहाँ जाओगे, वो तो तुम्हारे आगे-आगे चल रही है, पीछे नहीं। मौत इंसान के आगे रखा है अल्लाह ने, सामने, पीछे नहीं। इसीलिए, मौलाना ‘न भागने’ की सलाह देता है।

इसके अलावा ये भी समझाता है कि इस हालात में भागना अल्लाह के गुस्से को और बढ़ा देगा। इसके बाद उसने एक कहानी सुनाई। इस कहानी में एक कातिल होता है, जो खून करने के बाद अदालत में पेश किया जाता है तो जज को ही मार डालने की धमकी देता है। इसके बाद मौलाना ने पूछा कि क्या उस मुजरिम को छोड़ दिया जाएगा? फिर वो बताता है कि अदालत में अपील की जाती है, माफ़ी माँगी जाती है, जज का क़त्ल नहीं किया जाता। फिर वो समझाता है कि अल्लाह की तरफ़ से जब ऐसी कोई स्थिति आए तो ये मौका अल्लाह-ताला से माफ़ी माँगने का है।

साथ ही मौलवी लोगों को डॉक्टरों की सलाह न मानने की भी सलाह देता है। वो कहता है कि उनके कहने पर मिलना-जुलना नहीं छोड़ना चाहिए और नमाज भी जारी रखना चाहिए। मौलवी का कहना है कि अगर बीमारी है तो 70000 फरिश्तों से दुआ करो, किसी भी डॉक्टर से नहीं। वो कहता है कि अगर 70000 फ़रिश्ते साथ हैं तब बचाव नहीं हो पाया तो कोई मेडिकल विशेषज्ञ या डॉक्टर क्या कर लेगा? वो बार-बार मुस्लिमों को कहता है कि जब ऐसी आपदा आए तो अल्लाह की ज्यादा इबादत करो।

‘पैगंबर का इत्र’ नाक से सटा मौलवी ने किया कोरोना का इलाज, 2 दिन के बाद मरीज और उसके 2 दोस्तों की मौत

एक तरफ पूरा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा है। चिंता की बात यह कि अभी तक इसके ईलाज के लिए कोई कारगर दवा सामने नहीं आई है। इस बीच ईरान से एक हास्यास्पद खबर सामने आई है। दरअसल ईरान में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या के बीच कुछ मौलवी पैगंबर के इत्र और फूलों के तेल से इस्लामी चिकित्सा को बढ़ावा दे रहे हैं। ईरान के मौलवियों की मूर्खता से वहाँ लगातार कोरोना के मरीजों की संख्या और मौतों का आँकड़ा भी बढ़ता चला जा रहा है। हालाँकि अब ईरान के कुछ लोग इन इस्लामिक प्रचारकों पर कई तरह के सवाल भी खड़े कर रहे हैं।

द आब्जर्वर की खबर के मुताबिक ईरान में लगातार बढ़ते कोरोना के प्रकोप के बीच शुरुआत से ही कुछ लोग मौलवियों की तारीफ कर रहे हैं कि किस तरह से उन्होंने ऐसे समय में लोगों का सहायता की है, तो वहीं देश के कुछ लोग ईरान में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के लिए मौलवियों को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यहाँ तक कि आरोप भी लगा रहे हैं कि ये लोग इस्लामिक चिकित्सा को बढ़ावा दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ईरान में सबसे पहले कोरोना का केस शिया मुस्लिमों के सबसे पवित्र शहरों में से एक, कोम से आया था। इसकी पहली घोषणा 19 फरवरी को आधिकारिक तौर पर की गई थी। हालाँकि तभी सार्वजनिक तौर पर अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने शहर को लॉकडाउन करने का आह्वान किया था, लेकिन धार्मिक कट्टरपंथियों ने शहर को लॉकडाउन करने से साफ इंकार कर दिया।

अब आप ईरान से ट्विटर पर डाली गई एक वीडियों में साफ तौर पर देख सकते हैं कि दो मौलवी सड़क पर चलती कारों पर छिड़काव कर रहे हैं, और इस छिड़काव से कोरोना के कीटाणुओं को मारने का दावा कर रहे हैं। अब केवल एक तरफ से कार को कीटाणुरहित करने का क्या मतलब है? इस वीडियो पर ईरान में कई लोगों ने तीखी टिप्पणी की।

अब आप ईरान की दूसरी घटना देखिए। एक तरफ तो विश्व के बड़े-बड़े देश इसकी दवा बनाने में नाकाम हैं वहीं एक इस्लामिक व्यक्ति पैगंबर इत्र से कोरोना वायरस के रोगियों को ठीक करने का दावा कर रहा है। इतना ही नहीं, ईरान के कोरोना वायरस संकट में चरमपंथी धार्मिक मौलवी कोरोना पीड़ितों के उपचार में पारंपरिक इस्लामी चिकित्सा का भी उपयोग कर रहे हैं।

दरअसल 21 मार्च को एक मौलवी मोर्तेजा कोहंसल ने उत्तरी ईरान के गिलान प्रांत के अंजली स्थित एक अस्पताल में कोरोनो वायरस मरीज सेक्शन का दौरा किया।
अपने इस दौरे में कोहंसल ने कुछ कोरोनो वायरस रोगियों के लिए इस्लामी उपाय लागू किया। दरअसल उसके हाथ में इत्र था, जिसे वह कोरोना रोगियों की नाक के नीचे लगा रहा था, जिसे उसने पैगबंर इत्र का नाम दिया। इतना ही नहीं, इस दौरान उसने वहाँ खड़े डॉक्टरों और नर्सों के साथ भी कुछ तस्वीरें लीं। गौर करने वाली बात यह कि कोहंसल ने जिस व्यक्ति के साथ फोटो ली थी, दो दिनों के बाद गिलान प्रांत में स्थानीय मीडिया में एक खबर छपी कि उस मोहसिन शरीफ की मौत हो चुकी है। वहीं दूसरी तस्वीरों में दिख रहे शरीफ के दो दोस्तों की भी मौत हो गई।

अंजली के स्थानीय प्रशासन ने मोर्तेजा कोहंसल के लिए गिरफ्तारी वॉरंट जारी कर दिया है। इसके बाद से ही आरोपित अपनी गिरफ्तारी से बचता घूम रहा है। आपको बता दें कि कई सालों से ईरान में धार्मिक कट्टरपंथियों ने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की आलोचना की है। इसके बजाय वहाँ इस्लामी उपायों के माध्यम से किसी भी बीमारी को ठीक करने का दावा किया जाता रहा है।

गौरतलब है कि इसके पहले ईरान में एक अफवाह बड़े स्तर पर फैली थी कि कि मेथनॉल (इंडस्ट्रियल अल्कोहल) पीने से कोरोना संक्रमण का इलाज हो सकता है। इसके सेवन से कोरोना के वायरस मर जाते हैं। बॉडी सैनिटाइज हो जाती है। इस अफवाह पर विश्वास कर कई लोगों ने जहरीली शराब का सेवन कर लिया। इसके बाद ये अफवाह लोगों के लिए जानलेवा साबित हो गई। इसके कारण 300 से अधिक लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे और हजारों लोग अस्पताल में भर्ती हुए थे।

जानकारी के मुताबिक ईरान में कोरोना वायरस महामारी से मरने वालों की संख्या अब बढ़कर 3,036 हो गई है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1 अप्रैल, 2020 तक 47593 हो गई है। हालाँकि ईरान की सरकार पर वास्तविक मौत के आँकड़ों को छिपाने का भी आरोप है।

‘वायर’ बना लायर: फैलाया झूठ, केस दर्ज होने पर ‘प्रपंची जात भाई’ ऑल्टन्यूज कूदा बचाव में

कोरोना पर योगी सरकार के ख़िलाफ़ एक फर्जी खबर चलाने के मामले में कल द वायर पर केस दर्ज होने के बाद स्वघोषित फैक्ट चेकर प्रतीक सिन्हा इस पर बौखला उठा। फर्जी फैक्ट चेकर ने अपने जात भाई का बचाव करते हुए पहले सरकार और न्यूज एजेंसी ANI पर सवाल उठाए और फिर प्रेस स्वतंत्रता को इससे जोड़ दिया।

गौरतलब है कि द वायर के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने से पहले योगी सरकार ने प्रोपेगेंडा वेबसाईट ‘दी वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह अपनी फर्जी खबर को डिलीट करें, वरना इस पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इसके बावजूद भी द वायर ने ऐसा नहीं किया।

इसके बाद, फर्जी खबर को वेबसाइट से न हटाने पर योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने ट्वीट करते हुए लिखा- “हमारी चेतावनी के बावजूद इन्होंने अपने झूठ को ना डिलीट किया, ना माफ़ी माँगी। कार्यवाही की बात कही थी, FIR दर्ज हो चुकी है, आगे की कार्यवाही की जा रही है। अगर आप भी योगी सरकार के बारे में झूठ फैलाने की सोच रहे हैं, तो कृपया ऐसे ख़्याल दिमाग़ से निकाल दें।”

उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थ वरदराजन के ‘द वायर’ ने न सिर्फ़ एक गलत जानकारी दी बल्कि चेतावनी के बावजूद उसे नहीं हटाया। जिसका सीधा अर्थ है कि वो एक गलती मात्र नहीं थी बल्कि ऐसी खबरों का प्रयोग प्रोपेगेंडा के लिए किया जा रहा था। इस खबर को पैदा किया गया क्योंकि निज़ामुद्दीन मरकज के कारण पूरे देश में मौलवियों और तबलीगी जमात पर थू-थी हो रही है।

अब हालाँकि, ये बात सब जानते (सेकुलर गिरोह के लोगों को छोड़कर) हैं कि द वायर का अजेंडा हमेशा से एक ही दिशा में केंद्रित रहा है। इसीलिए सरकार की चेतावनी के बाद भी वे इसे नजर अंदाज करते रहे। मगर, अब जब सरकार ने उनके ख़िलाफ़ कड़ा एक्शन ले लिया तो ऐसे में एक स्वघोषित फैक्टचेकर का, अपने ‘जात भाई’ के बचाव में आना, लाजमी है।

एएनआई द्वारा द वायर पर दर्ज हुए केस की जानकारी देने वाले पोस्ट पर प्रतीक ने अपनी नफरत निकाली। सिन्हा ने लिखा, “एएनआई ने कई बार गलत रिपोर्ट की। लेकिन फिर भी इसके संपादक को पीएम स्पेशल विडियो कॉन्फ्रेंस में बुलाते रहे। इसके अलावा कई अन्य मीडिया संगठन हैं, जिन्हें पीएम के साथ कॉन्फ्रेंस में बुलाया गया। अब क्या ये महामारी एक अनियोजित लॉकडाउन के प्रभाव को कवर करने के लिए प्रेस की स्वतंत्रता पर और अंकुश लगाएगी?”

बता दें कि स्वघोषित फैक्टचेकर की कई करामातों में से सबसे ताजातरीन जामिया के दंगाई छात्रों के हाथ के पत्थर को पर्स/वॉलेट बताना शामिल है। उसी शृंखला में ये आदमी मतिभ्रष्ट हो कर यह नहीं कह रहा कि ‘वायर’ ने जो लिखा वो झूठ है, बल्कि उसका जोर इस पर है कि मामला कैसे दर्ज हो गया। यहाँ ऑल्टन्यूज यह बताना चाह रहा है कि अभी कोरोना के समय, जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मीडिया वाले झूठ न फैलाएँ, वरदराजन का प्रपंच फैलाना गलत नहीं है, लेकिन हाँ झूठ पकड़े जाने पर पुलिस द्वारा मामला दर्ज करना अभिव्यक्ति को दबाने जैसा है।

तबलीगी मरकज से निकले 72 विदे‍शियों सहित 503 जमातियों ने हरियाणा में मारी एंट्री, मस्जिदों में छापेमारी से मचा हड़कंप

दिल्ली निजामुद्दीन में हुए मजहबी सम्मेलन के बाद विभिन्न राज्यों के लिए रवाना हुए जमातियों ने पूरे देश में हड़कंप पैदा कर दिया है। एक तरफ तो पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है, लेकिन इस समय कोरोना से जंग लड़ने के लिए प्रदेश सरकारों ने जमातियों को खोज निकालने का अभियान शुरू कर दिया है, जिससे कि कोरोना से जारी जंग को जीता जा सके। कुछ ऐसा ही अब उत्तर प्रदेश के बाद हरियाणा में हो रहा है, क्योंकि हरियाणा सरकार को जानकारी मिली है कि दिल्ली में हुए तबलीगी मरकज के बाद 72 विदेशियों के साथ 500 से अधिक जमातियों ने प्रदेश में एंट्री की है।

दरअसल, मंगलवार तक हरियाणा सरकार के पास ऐसे करीब 200 लोगों के राज्‍य में एंट्री की सूचना थी, लेकिन बुधवार को पता चला कि यह संख्या 503 हो गई है। बताया जा रहा है कि ये लोग निजामुद्दीन से हरियाणा के अलग-अलग जिलों में प्रवेश कर गए हैं। इनमें अधिकतर तमिलनाडु के जमाती शामिल हैं साथ ही इनके साथ 72 लोग विदेशी भी हैं। इस जानकारी के बाद राज्य में हड़कंप मच गया है। हरियाणा सरकार ने ऐसे सभी लोगों का पता लगाकर उन्हें क्वारंटीन करने का आदेश दिया है।

हरियाणा सरकार के आदेश के बाद से ही पुलिस और स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीमें प्रदेश की मस्जिदों में छापेमारी करके उन लोगों की तलाश में जुट गई हैं, जो दिल्ली मजहबी सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद प्रदेश में इस्लाम के प्रचार के लिए आए हैं। हालाँकि, राज्य सरकार ने कुछ विदेशियों की पहचान कर ली है, लेकिन फिलहाल जिलावार सूची सार्वजनिक करने से सरकार बच रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग को चिंता सता रही है कि अगर एक भी विदेशी कोरोना पॉजीटिव पाया जाता है तो वह पूरे राज्य में महामारी को फैला सकता है।

एक जानकारी के मुताबिक हरियाणा के अकेले अंबाला छावनी में 44 से अधिक नागरिक हैं जो निजामुद्दीन से पहुँचे हैं। वहीं हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने बताया कि सभी की मेडिकल जाँच की जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी 503 लोगों के बारे में पूरी जानकारी मिल चुकी है, लेकिन उनकी जानकारी को पुख्ता करने के लिए गृह विभाग अपने ढंग से काम करने में जुटा हुआ है। इन जमातियों में 72 लोग विदेशी भी हैं, जबकि अधिकतर दूसरे राज्यों के हैं। अनिल विज ने इस बात से इन्‍कार किया कि इन सभी 503 लोगों की मंशा राज्य में किसी तरह का षड्यंत्र करने अथवा साजिश की थी, लेकिन लॉकडाउन के बावजूद मजहब के प्रचार प्रसार के काम के लिए हरियाणा में घुसकर उन्होंने बड़ी मूर्खता की है।

फैक्ट चेक: क्या तबलीगी मरकज की नौटंकी के बाद चुपके से बंद हुआ तिरुमला तिरुपति मंदिर?

निजामुद्दीन स्थित मरकज में मार्च के माह हुए तबलीगी जमात के आयोजन से कोरोना वायरस के संक्रमण का जो खतरा अब देशभर में मंडरा रहा है, उसने कई लेफ्ट-लिबरल ‘विचारकों’ को अपने हिस्से का काम थमा दिया है। यह संभव ही नहीं है कि एक मजहब की कारस्तानी के उजागर होते ही मीडिया का एक ख़ास वर्ग समाज के एक ख़ास वर्ग के पक्ष में ‘तथ्य’ जुटाने का प्रयास ना करे। ऐसा ही एक नया प्रयास निजामुद्दीन स्थित मरकज में आयोजित जलसे के बाद देखने को मिल रहा है।

क्या है मामला

मरकज बंद करने के फ़ौरन बाद सोशल मीडिया पर एक खबर यह कहकर फैलाई गई कि आंध्रप्रदेश में स्थित तिरुमाला के भगवान वेंकेटेश्वर मंदिर को तबलीगी जमात मामला के जलसे के सामने आने के बाद बंद किया गया है। यह खबर फैलाने वालों में सबसे प्रमुख नाम है साक्षी जोशी का। साक्षी जोशी के ट्विटर अकाउंट पर उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि वो डॉग लवर होने के साथ ही बीबीसी में भी काम कर चुकी हैं और वर्तमान में न्यूज़ 24 टीवी चैनल में एंकर हैं।

साक्षी जोशी ने इण्डिया टुडे की एक लिंक साझा करते हुए अपने ट्वीट में लिखा है- “चलो इन्होंने भी एहसान कर दिया आखिरकार मंदिर बंद करके। देखा होगा #TablighiJamaat टारगेट पर है। हम चुपके से बंद करके निकल लेते हैं। किसी को पता नहीं चलेगा। लेकिन पूजा अब भी नहीं रुकेगी। एकांत में चलती रहेगी। क्यों?”

क्या है सच्चाई

दरअसल, साक्षी जोशी ने इण्डिया टुडे की जिस लिंक को शेयर किया है, उसमे बताया गया है कि तिरुमला तिरुपति मंदिर में 128 वर्ष में पहली बार श्रद्धालुओं के आगमन पर प्रतिबन्ध लगा है। जबकि जिस मंदिर के तबलीगी जमात मामले के बाद बंद होने का दावा पूर्व बीबीसी कर्मी ने किया है, वह 19 मार्च को ही बंद कर दिया गया था। यही नहीं, 11 मार्च से ही इसमें विदेशी नागरिकों और प्रवासी भारतीयों को परामर्श जारी करते हुए कह दिया गया था कि वे भारत पहुँचने के 28 दिनों तक मंदिर में नहीं आएँगे। इसके साथ ही, 19 मार्च को ही यह घोषणा कर दी गई थी कि मंदिर में पूजा एवं अनुष्ठानों को 31 मार्च तक के लिए रद्द कर दिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर लॉकडाउन के दौरान अफवाह और फर्जी खबर फैलाने को लेकर पुलिस और प्रशासन काफी सख्त है। @attomeybharti ने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए लिखा है कि क्या दिल्ली पुलिस इसे फर्जी खबर फैलाने के लिए गिरफ्तार करेगी? इसके साथ ही न्यूज़ 24 को टैग करते हुए लिखा है कि क्या गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के लिए चैनल इसे निकालेगा?

इंदौर: कोरोना वायरस संदिग्ध की जाँच करने गई मेडिकल टीम पर ‘मुस्लिम भीड़’ ने किया पथराव, पुलिस पर भी हमला

एक तरफ पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर कुछ इस्लाम के मानने वाले लोग कोरोना से जंग लड़ने वाली मैडीकल टीम से ही दो-दो हाथ करने में लगे हुए हैं। कुछ ऐसी ही खबर मध्य प्रदेश के इंदौर से आई है, जहाँ कोरोना की जाँच करने गई डॉक्टरों की टीम पर लोगों ने पथराव कर दिया।

जानकारी के मुताबिक इंदौर के टाटपट्टी बाखल और सिलावट पुरा में कोरोना वायरस की जाँच के लिए गई डॉक्टरों की टीम पर गली में पहले से मौजूद लोगों ने पथराव किया, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम को वहाँ से जान बचाकर भागना पड़ा। इतना ही नहीं जब सूचना पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची तो आरोपितों ने महिलाओं को आगे कर दिया और फिर घरों की छतों से पुलिस और डॉक्टरों की टीम पर फिर से पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान वहाँ लगी बैरिकेडिंग को भी उपद्रवियों ने तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस फोर्स ने तत्काल पूरे इलाके को सील कर दिया।

वहीं दूसरी ओर बड़वानी जिले में भी मेडिकल जाँच और कुछ लोगों की तलाश करने गई सीएमएचओ की टीम का लोगों ने विरोध कर दिया। इसके बाद मेडीकल टीम को मजबूरन वहाँ से लौटना पड़ा। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर सबसे अधिक कोरोना महामारी की चपेट में है, जहाँ मंगलवार को एक ही दिन में 20 नए मामले सामने आए, जिनमें 11 महिलाएँ और शेष बच्चे शामिल थे। साथ ही मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 6, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है। उधर निजामुद्दीन मरकज से लौटे जमातियों की प्रदेश में लगातार तलाश करके उन्हें आइसोलेट किया जा रहा है।

आपको बता दें कि इससे पहले, बिहार और गुजरात से भी पुलिस अधिकारियों पर मुस्लिमों की भीड़ द्वारा हमले और पथराव करने की खबरें सामने आई थीं। दरअसल, बिहार के मधुबनी में एक मस्जिद में सामूहिक नमाज की शिकायत मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची थी, जिस पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया। लोगों ने पहले तो पुलिस पर जमकर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक मस्जिद में 100 से अधिक बाहर के जमाती मौजूद थे, जोकि मौका पाकर पहले ही वहाँ से निकल गए।

गौरतलब है कि तबलीगी जमात द्वारा दिल्ली के निज़ामुद्दीन क्षेत्र में आयोजित मजहबी सम्मेलन के बाद कोरोनो वायरस के कई दर्जन मामले नए सामने आए हैं। इसके बाद पूरे देश में कोरोना के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसे लेकर पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं सभी राज्य ऐसे लोगों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाए हुए हैं, जो दिल्ली के मजहबी सम्मेलन में शामिल हुए थे। वहीं दिल्ली सरकार ने सभी लोगों को निजामुद्दीन से निकालकर क्वारंटाइन कर दिया है। गौरतलब है कि एक तरफ पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने वाले लोगों के लिए ताली-थाली बजाकर अभिवादन कर रहा है तो दूसरी ओर कुछ इस्लाम को मानने वाले लोग इसी टीम का विरोध ही नहीं बल्कि मौका मिलने पर हमलावर भी हो रहे हैं।

योगी सरकार के खिलाफ फर्जी खबर फैलानी पड़ी महँगी: ‘द वायर’ पर दर्ज हुई FIR

लेफ्ट-लिबरल मीडिया की प्रोपेगंडा की आजादी के दिन शायद अब पूरे हो चुके हैं। कोरोना की महामारी के दौरान भी बीजेपी सरकार विरोधी एजेंडा में मशगूल दी वायर का सामना इस बार उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से हुआ है और लगता नहीं है कि इस बार वो आसानी से भाग निकलेंगे। कम से कम सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार का ट्वीट तो यही सन्देश देता है।

कोरोना पर योगी सरकार के खिलाफ चलाई एक फर्जी खबर के सम्बन्ध में योगी सरकार ने प्रोपेगंडा वेबसाईट ‘दी वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह अपनी फर्जी खबर को डिलीट करें वरना इस पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इसके बावजूद भी फर्जी खबर न हटाने पर योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने ट्वीट करते हुए लिखा- “हमारी चेतावनी के बावजूद इन्होंने अपने झूठ को ना डिलीट किया ना माफ़ी माँगी। कार्यवाही की बात कही थी, FIR दर्ज हो चुकी है आगे की कार्यवाही की जा रही है। अगर आप भी योगी सरकार के बारे में झूठ फैलाने के की सोच रहे है तो कृपया ऐसे ख़्याल दिमाग़ से निकाल दें।”

दरअसल, ‘द वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में फेक न्यूज़ फैलाई थी। तबलीगी जमात को बचाने के लिए ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चलाते हुए लिखा कि जिस दिन इस इस्लामी संगठन का मजहबी कार्यक्रम हुआ, उसी दिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 25 मार्च से 2 अप्रैल तक अयोध्या प्रस्ताविक विशाल रामनवमी मेला का आयोजन नहीं रुकेगा क्योंकि भगवान राम अपने भक्तों को कोरोना वायरस से बचाएँगे।

‘द वायर’ और उसके संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने फैलाया झूठ

समस्या यह थी कि हाल ही में सोशल मीडिया पर तमाम ऐसे मौलानाओं के बयान सामने आ रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि अल्लाह मजहब विशेष को कोरोना वायरस से बचा लेगा। अपनी तकरीर में दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज के मौलाना साद ने भी अपने समर्थकों से कहा कि वो डॉक्टरों और सरकार की सलाह न मानें क्योंकि मिलने-जुलने और एक-दूसरे के साथ बैठ कर खाने से कोरोना नहीं होगा। ऐसे कई मौलानाओं के बयानों को ढकने के लिए ‘द वायर’ ने फेक न्यूज़ चला तो दी लेकिन वो पकड़ा गया। ‘द वायर’ ने अपने लेख में ऐसा दावा किया और उसके संपादक वरदराजन ने इस लेख को शेयर भी किया। लेकिन, उनकी पोल खुलते देर न लगी।

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने सिद्धार्थ वरदराजन की ये चोरी पकड़ ली और उन्हें जम कर फटकार लगाई। उन्होंने ‘द वायर’ और उसके संस्थापक पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने कभी कोई ऐसी बात कही ही नहीं है, जैसा कि लेख में दावा किया गया है। उन्होंने सिद्धार्थ को चेताया कि अगर उन्होंने अपनी इस फेक न्यूज़ को तुरंत डिलीट नहीं किया तो कार्रवाई की जाएगी और उन पर मानहानि का मुकदमा भी चलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए ये भी कहा कि कार्रवाई के बाद वेबसाइट के साथ-साथ केस लड़ने के लिए भी सिद्धार्थ वरदराजन को डोनेशन माँगना पड़ जाएगा।

बिहार के एक गाँव में मस्जिद की जाँच करने पहुँची पुलिस पर हमला, देखें Video

Note: इस खबर में त्रुटिवश हमने गलत विडियो लगा दिया था। एक पाठक ने इस ओर हमारा ध्यान दिलाया, अब उसे हटा दिया गया है। इस घटना से संबंधित सही विडियो नीचे जोड़ा जा रहा है। हम ऐसे जागरुक पाठक का धन्यवाद करते हैं।

दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के इज्तिमा में शामिल लोगों के कोरोना संक्रमित होने की बात सामने आने के बाद से पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। इस घटना के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में जमात के मरकज से निकले लोगों की तलाश की जा रही है, ताकि उनकी जॉंच की जा सके। इसी कड़ी में एक मस्जिद में जमात के लोगों के ठहरे होने और सामूहिक नमाज की सूचना मिलने पर बिहार पुलिस जॉंच के लिए पहुॅंची तो उस पर समुदाय विशेष की भीड़ ने हमला कर दिया।

घटना मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी ब्लॉक के गीदड़गंज गाँव की है। पुलिस को मंगलवार की शाम निशाना बनाया गया था। इस घटना के कई विडियो सामने आए हैं। इनमें औरतें और बच्चें भी भीड़ में शामिल दिख रहे हैं। विडियो में काफी शोरगुल के बीच मैथिली में गोली चलाए जाने और पुलिसकर्मियों के गाड़ी छोड़ कर भागने की बात कहते लोगों को आप सुन सकते हैं। एक शख्स पीएम मोदी का भी नाम ले रहा है।

मीडिया रिपोर्टों में हमलावर मदना पंचायत के पूर्व मुखिया और राजद प्रखंड अध्यक्ष के समर्थक बताए गए हैं। गीदड़गंज मदना पंचायत में ही आता है। जिस मस्जिद में जॉंच के लिए पुलिस टीम पहुॅंची थी वह राजद के इस नेता के घर के पास ही है। वही इसकी देखरेख भी करते हैं। बताया जाता है कि इस उपद्रव का फायदा उठाकर जमात के लोग फरार हो गए।

हिंसक भीड़ ने पुलिस की जीप को पास की तालाब में पलट दिया। गोली चलाए जाने की भी खबर है। बीडीओ, थानेदार सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस मामले में 15 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर की गई है। चार लोगों को गिरफ्तार किए जाने की सूचना है। इस पूरी घटना को पूर्व नियोजित बताया जा रहा है, क्योंकि लोगों ने छतों पर पहले से पत्थर जमा कर रखे थे।

जमात के लोगों की तलाश में लगी पुलिस के कार्य में समुदाय विशेष के लोगों की तरफ से व्यवधान डाले जाने की घटना देश के अन्य राज्यों से भी सामने आई है। गुजरात के अहमदाबाद के गोमतीपुर में पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। इसी तरह छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक मस्जिद में चार महिलाओं सहित आठ लोग छिपे मिले। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के रहने वाले ये लोग मरकज से निकलने के बाद यहॉं पनाह लिए हुए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम जब इनकी जॉंच करने पहुॅंची तो इन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया। पुलिस को भी गुमराह करने की कोशिश की।

तबलीगी जमात वालों ने अस्पताल के क्वारंटाइन में भी डॉक्टरों पर थूका, बदतमीजी जारी है

तबलीगी जमात निजामुद्दीन के 167 लोग कल 5 बसों में तुगलकाबाद क्वारंटाइन सेंटर ले जाए गए। इनमें से 70 लोगों को डीजल शेड ट्रेनिंग स्कूल हॉस्टल क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया और 70 को आरपीएफ बैरक क्वारंटाइन सेंटर में ले जाया गया था।

लेकिन उत्तर रेलवे के CPRO दीपक कुमार का कहना है कि ये लोग सुबह से किसी की नहीं सुन रहे थे और खाने की चीजों की अनुचित माँग कर रहे थे। उन्होंने क्वारंटाइन सेंटर में कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया। यही नहीं, उन्होंने वहाँ पर मौजूद डॉक्टरों समेत अन्य काम करने वाले सभी लोगों पर थूकने लगे। वे हॉस्टल बिल्डिंग में भी घूमते रहे।

कुछ देर पहले ही एक अन्य खबर में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ताहिरपुर में स्थित राजीव गाँधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया जब कोरोना वायरस से संदिग्ध एक मरीज ने क्वारंटाइन किए जाने पर अस्पताल की खिड़की से कूदकर जान देने की कोशिश की। यह मरीज निजामुद्दीन मरकज के तबलीगी जमात में शामिल होने के लिए आया था।

उत्तर रेलवे सीपीआरओ दीपक कुमार ने कहा कि इस घटना के बाद यह डीएम साउथ ईस्ट दिल्ली को उन्हें नियंत्रित करने या उन्हें किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक सुरक्षा की व्यवस्था करने के लिए कह है। साथ ही, 5.30PM पर 4 दिल्ली पुलिस के सिपाही और 6 सीआरपीएफ के जवानों के साथ पीसीआर वैन को क्वारंटाइन केंद्रों पर तैनात किया गया है।

मजनू-का-टीला गुरुद्वारे में फँसे सिखों को एक स्कूल में किया गया शिफ्ट, मनजिंदर सिंह सिरसा ने की थी सरकार से अपील

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देश में घोषित किए गए लॉकडाउन के बीच 28 मार्च से उत्तरी दिल्ली के मजनू-का-टीला गुरुद्वारा में फँसे सिखों को दिल्ली सरकार ने नेहरू विहार के एक स्कूल में शिफ्ट करने का फैसला किया है। साथ ही सरकार ने फैसला लिया है कि सभी लोगों को क्वारंटाईन करके जाँच के लिए उनके सैंपल लिए जाएँगे।

वहीं मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक ट्वीट कर जानकारी देते हुए बताया कि गुरुद्वारा मजनू का टीला साहिब में दिल्ली की अलग-अलग जगहों से इकट्ठा हुए पंजाब के लोगों में से 205 को दिल्ली सरकार ने नेहरू विहार के एक स्कूल में शिफ़्ट कर दिया है, हमने दिल्ली और पंजाब सरकार से विनती की थी कि इन लोगों को उनके घरों तक पहुँचाया जाए।

दरअसल, दिल्ली के मजनू का टीला इलाक़े में फँसे हुए लोगों की कुछ तस्वीरों को पोस्ट करते हुए पत्रकार आदित्य राज कौल ने एक ट्वीट किया था और अकाली दल, भाजपा और कॉन्ग्रेस- तीनों ही दलों से सवाल पूछा था कि वो किस चीज का इन्तजार कर रहे हैं? कौल ने बताया कि मजनू का टीला स्थित गुरुद्वारा में सिख समुदाय के क़रीब 400 लोग फँसे हुए हैं। पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही ये लोग वहाँ फँसे हुए हैं। क़ौल ने कहा कि न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार ने उनको सही जगह पहुँचाने की व्यवस्था की है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा कमिटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा था कि वो दोनों मुख्यमंत्रियों से हाथ जोड़ कर आग्रह करते हैं कि मजनू का टीला में फँसे लोगों को निकालें। उन्होंने बताया कि उनमें से कई लोगों को सर्दी-बुखार भी है और कई खाँस भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सबकी मेडिकल जाँच करानी ज़रूरी है लेकिन बार-बार आग्रह करने के बावजूद कैप्टेन अमरिंदर सिंह कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी उन सभी के खाने-पीने का ध्यान रख रही है और उन्हें सारी सुविधाएँ दी जा रही हैं लेकिन उन्हें वहाँ से निकाला जाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, जिसके लिए दिल्ली व पंजाब की सरकारों को व्यवस्था करनी चाहिए।