जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आतंकवाद और अलगाववादी को लेकर शनिवार (जून 22, 2019) को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “यदि सामने से फायरिंग की जा रही होगी तो उन्हें (आतंकियों) गुलदस्ता नहीं दिया जा सकता है। हम चाहते हैं कि कट्टरपंथ के रास्ते पर गए युवा मुख्यधारा में वापस आएँ।
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आगे कहा, “शुक्रवार को नमाज के बाद की जाने वाली पत्थरबाजी तकरीबन रुक चुकी है। हम युवाओं की मुख्यधारा में वापसी चाहते हैं। इसके लिए योजनाओं पर विचार किया जा रहा है। हालाँकि, एक बात यह भी सच है कि यदि सामने से फायरिंग की जा रही है तो आप उन्हें गुलदस्ता नहीं थमा सकते हैं। जनरल साहब गोलियों का जवाब गोलियों से ही देंगे। हमें नेक इरादों के साथ काम करना चाहिए।”
युवाओं को संबोधित करते हुए सत्यपाल मलिक ने कहा कि जन्नत के नाम पर युवाओं को बरगलाया जाता है कि हथियार उठाने पर वे जन्नत जाएँगे। उन्होंने कहा कि वास्तव में यहाँ के युवाओं के पास दो जन्नत हैं। एक तो खुद कश्मीर है और दूसरा वो जो वे एक अच्छा मुस्लिम बनकर बाद में हासिल करेंगे।
सत्यपाल मलिक ने कहा, “मुझे इस बात की खुशी है कि मीरवाइज उमर फारूक ने ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाई है, यह एक बड़ा खतरा है। यह यहाँ पर युवाओं के बीच फैल रहा है। जम्मू में स्थिति बुरी है, पंजाब में इसकी वजह से काफी नुकसान हो रहा है।”
ख़बर के अनुसार, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक को शनिवार (22 जून) को श्रीनगर स्थित उनके ही घर में नज़रबंद कर दिया गया। मीरवाइज़ के नेतृत्व वाले हुर्रियत के एक प्रवक्ता ने बताया कि शहर के बाहरी इलाक़े में मीरवाइज़ उमर फ़ारूक के आवास पर एक पुलिस दल पहुँचा और उन्हें सूचित किया कि अब वह अपने घर से बाहर नहीं जा सकते। प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस द्वारा मीरवाइज़ को नज़रबंद करने का कोई कारण नहीं बताया गया।
पत्रकार के वेश में अभद्र गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी ने फिर भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री आमिर शाह के बारे में फेक न्यूज़ फैलाई है। स्वाति के एक ट्वीट में दावा किया गया है कि गृह मंत्री संसद सत्र के बीच में सो रहे थे।
लेकिन लगता है स्वाति चतुर्वेदी और उनके जैसे अभद्र ट्रोल लोक सभा की कार्यवाही की प्रासंगिक रिकॉर्डिंग नहीं देखते, इसी लिए ऐसे निष्कर्ष पर पहुँच जाते हैं। अगर पूरा वीडियो देखा जाए तो अमित शाह कानून, दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद के वक्तव्य को ध्यानपूर्वक सुन रहे थे। जिस पल का स्क्रीनशॉट स्वाति ने ट्विटर पर डाला, उस पल वह रवि शंकर प्रसाद के भाषण के दौरान अपनी मेज पर रखे कुछ कागज़ देख रहे थे। आँखें नीची होने के इस क्षण को जान बूझकर स्क्रीनशॉट के लिए चुना गया। पूरी कार्यवाही का वीडियो नीचे आप खुद देख सकते हैं:
इस वीडियो में देख कर यह साफ पता चल जाता है कि अमित शाह उक्त समय पर पूरी तरह सक्रिय और सजग थे। और-तो-और, यह वीडियो इस संसद सत्र का है भी नहीं। यह संसद के इस साल जनवरी में हुए सत्र का वीडियो है। स्पष्टतः स्वाति को ट्विटर पर जाने के पहले अपने दावों को खुद जाँच लेने की कोई ज़रूरत महसूस नहीं हुई है। उनके इस ट्वीट को ट्विटर पर जब कई सारे यूज़र्स ने निशाने पर लिया तो उन्हें अपना ट्वीट हटाने पर मजबूर होना पड़ा।
फेक न्यूज़ फ़ैलाने और सोशल मीडिया पर भ्रम फ़ैलाने का स्वाति चतुर्वेदी का पुराना इतिहास है। उन्होंने हाल ही में ऑपइंडिया को मानहानि का नोटिस भेजते हुए हम पर यह आरोप लगाए कि हमारे उनके द्वारा की जा रही निम्न गुणवत्ता की पत्रकारिता पर लिखे गए लेखों के चलते उन्हें पाठकों की संख्या में कमी झेलनी पड़ी है। अतीत में स्वाति ने ठुकराए हुए प्रेमी के हाथों हिंसा की शिकार लड़की को बीएचयू की हिंसा के रूप में दिखाया था। उन्होंने एक राष्ट्रीय स्तर के नेता के बयानों के साथ भी राष्ट्रीय टीवी पर छेड़छाड़ की थी। इसके अलावा वह पहले भी अमित शाह के भाषण पर फेक न्यूज़ फ़ैलाने का प्रयास कर चुकीं हैं। उन्होंने एक संदिग्ध वेबसाइट द्वारा फैलाई गई फेक न्यूज़ को भी विश्वसनीयता प्रदान की है। उन्होंने इससे पहले इस पर भी फेक न्यूज़ फैलाई थी कि कन्हैया कुमार पर भाजपा पदाधिकारी ने हमला किया है।
केंद्रीय कानून व न्याय, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेन्सी सर्विसेज (TCS) जल्दी ही पटना में अपना एक बड़ा केंद्र शुरू करने जा रही है। इसकी जानकारी रविशंकर प्रसाद ने खुद अपने ट्विटर एकाउंट द्वारा दी है।
Chairman of Tata Sons Shri N. Chandrasekaran met me today. We had an enriching discussion on India’s digital future. I am delighted that soon TCS is starting a major centre in Patna. Investment by India’s largest IT company in Bihar should promote IT investments in the state. pic.twitter.com/fyQc70W0vt
रोजगार के लिए बिहार से बढ़ते पलायन को रोकने लिए केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। TCS के पटना में निवेश करने से वहाँ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शनिवार (जून 22, 2019) को केंद्रीय कानून व न्याय, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद से दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान रविशंकर प्रसाद और चंद्रशेखरन ने भारत के डिजिटल सेक्टर से जुड़े विषयों के साथ ही डिजिटल भविष्य के निर्माण के लिए नई पहलों पर भी चर्चा की।
बिहार में किसी बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी द्वारा यह पहला बड़ा निवेश होगा
बिहार में किसी बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी द्वारा यह पहला बड़ा निवेश होगा। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि TCS जैसी बड़ी कंपनी का बिहार में निवेश एक अच्छी शुरुआत है। इससे प्रेरित हो कर अन्य आईटी कंपनियाँ भी राज्य में निवेश करने के लिए आगे आएँगी। इससे राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। संभावना है कि जल्द ही टीसीएस के केंद्र का उद्घाटन होगा।
देश में नियम, कानून, औपचारिकताएँ निभाने की जब बात आती है तो ऐसा लगता है जैसे ये सभी सिर्फ आम आदमी और निचले वर्ग के लोगों के लिए बनाई गई प्रथाएँ हैं। क्योंकि अक्सर हम देखते हैं कि जब भी किसी सरकारी संस्था, सार्वजानिक जगह पर नियमों के पालन की बात आती है तो ऐसे लोग, जिन्हें खुद के ‘विशेष’ होने का एहसास होता है उन्हें नियमों का पालन करना संस्था पर एहसान करना लगता है।
हालाँकि, कुछ लोगों का यहाँ पर या भी कहना है कि दीपिका पादुकोण ने अपना पहचान पत्र दिखाकर ‘सहयोग’ किया है लेकिन, उनके ‘चाहिए?’ वाले प्रश्न से तो कम से कम ऐसा महसूस नहीं होता है। जो उन्होंने दिखाया वो ID प्रूफ कम और ‘सेलिब्रिटी कार्ड’ ज्यादा नजर आता है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर ‘माई चॉइस’ वाली एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण का एक वीडियो सामने आया था जिसे लेकर वो खबरों में थीं। दरअसल दीपिका हाल ही में अपने पिता प्रकाश पादुकोण के साथ बेंगलुरु रवाना हुईं और उनका ये वीडियो इसी दौरान रिकॉर्ड किया गया। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि दीपिका अपने पिता के साथ एयरपोर्ट के अंदर जा रही हैं। लेकिन जब दीपिका एयरपोर्ट के अंदर एंट्री कर रही थीं, तभी एक सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें रोक लिया और उन्हें आवाज लगाते हुए पूछा- ‘आईडी-आईडी‘। इतना सुनकर दीपिका मुड़कर देखती हैं और पूछती हैं- ‘चाहिए?‘ इसके बाद दीपिका वापस आती हैं और अपना आईडी कार्ड उसे दिखाती हैं।
दीपिका का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। लोग उनके विनम्र रिएक्शन को काफी पसंद कर रहे हैं। फैंस का कहना है कि आईडी के बारे में सुनते ही दीपिका तुरंत रुक गईं और अपना आईडी कार्ड दिखा दिया। उनमें एटिट्यूड नहीं है। एक अन्य यूजर ने कहा कि जिस तरह वो अपनी आईडी दिखाने के लिए तैयार थीं वह मुझे पसंद आया।
लेकिन, ऐसा नहीं है कि उन्हें केवल पॉजिटिव रिस्पॉन्स ही मिला। कुछ लोग इसपर दीपिका को गलत बताते हुए उन पर कमेंट भी कर रहे हैं जो कि बेहद स्वाभाविक है। खासकर तब जब आप अपनी फिल्मों की रिलीज़ से पहले अक्सर सामाजिक रूप से अचानक से सक्रीय होकर अपनी जागरूकता के नमूने दिखाने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहते हों।
कुछ लोगों का कहना है कि एयरपोर्ट पर जाने से पहले आईडी प्रूफ दिखाना जरूरी होता है तो दीपिका बिना आईडी दिखाए आगे कैसे गईं? वहीं कुछ का कहना है कि वो सेलेब हैं इसलिए उन्होंने आईडी दिखाना जरूरी नहीं समझा। कुछ का कहना है- “शुरुआत में भी गार्ड उनसे आईडी माँग रहा है लेकिन वो आगे बढ़ गईं। जब गार्ड ने उन से फिर से आईडी प्रूफ माँगा तो दीपिका पूछ रही हैं ‘चाहिए?’, बिलकुल चाहिए। वो वीवीआईपी हो सकती हैं। अपने फैंस के लिए भगवान या क्वीन हो सकती हैं लेकिन नियम सबके लिए बराबर होते हैं। बाकी दूसरे सेलेब्स की तरह उन्हें भी अपने आप आईडी दिखानी चाहिए थी।”
‘माई लाइफ माई चॉइस’ जैसी प्रगतिशील विचारधारा रखने वाली दीपिका पादुकोण को ऐसे नियम कानून मानने में आखिर समस्या भी क्यों होनी चाहिए जो बने ही हम सबकी सुविधा के लिए हों? लेकिन फिर भी अक्सर देखा जाता है कि अपनी पहचान बताना या प्रूफ देना उन्हें अपने अहंकार और सम्मान पर चोट नजर आती है। चाहे वाकया शाहरुख खान का हो या फिर दीपिका पादुकोण का हो, आम आदमी को कभी सिक्योरिटी गार्ड से पलटकर “चाहिए” या फिर “दूँ क्या?” जैसे सवाल पूछते नहीं देखा जाता है।
तीन तलाक बिल लोक सभा में बृहस्पतिवार को रखा गया। राजग सरकार इस मुस्लिम कुप्रथा को मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आपराधिक बनाने का सतत प्रयास कर रही है। लेकिन विपक्ष मुस्लिम महिलाओं की रक्षा के इस कदम की लगातार आलोचना कर रहा है।
इस बार भी विपक्ष के नेताओं ने बिल की आलोचना की। शशि थरूर ने कहा कि बिल खुद संविधान का उल्लंघन है और यह भी जोड़ा कि पत्नी का परित्याग यदि आपराधिक कृत्य है तो यह एक ऐसे व्यापक कानून के रूप में सभी भारतीयों पर लागू होना चाहिए जो पत्नी और बच्चों का परित्याग करने को आपराधिक बनाए। जैसी उम्मीद थी, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिल का मुखर विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह बिल संविधान का उललंघन करता है। “यह बिल संविधान के अनुच्छेदों का उललंघन करता है। संविधान ने व्यवस्था दी है कि यदि हम विभेदकारी कानून बनाते हैं तो उन्हें दो शर्तों को पूरा करना होगा- स्पष्ट विभेदक (इंटेलीजिबल डिफ्रेंशिया) और तर्कसंगत संबंध (रैशनल नेक्सस)। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि शादी का अंत नहीं होगा। हमारे पास घरेलू हिंसा अधिनियम, मुस्लिम महिला सुरक्षा अधिनियम 1986 हैं। अतः आपका बिल स्पष्ट विभेदक की शर्त पूरी नहीं करता है।”
उसके बाद वह तीन तलाक और सबरीमाला की परम्पराओं में भ्रामक समानता बताने लगे, जहाँ रजस्वला आयु की महिलाओं का प्रवेश निषिद्ध है। उन्होंने कहा, “इसके ज़रिए मैं पूछना चाहूँगा सरकार से कि उन सबको मुस्लिम महिलाओं से बड़ा प्रेम है। क्यों नहीं उनके यही उद्गार केरल की हिन्दू महिलाओं के लिए हैं? आप सबरीमाला के खिलाफ क्यों हैं?”
सबरीमाला की परम्पराओं और तीन तलाक के बीच समानता बताने का यह प्रयास सेब और संतरों की तुलना के जैसा है। सबसे पहले, महिलाओं के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता अगर वह किसी एक मंदिर विशेष में नहीं जा रहीं हैं। लेकिन अगर किसी औरत को उसका शौहर तीन तलाक दे दे तो यह उसकी पूरी ज़िंदगी को तहस-नहस कर देता है।
दूसरी बात, सबरीमाला की परम्पराएँ व्यापक नहीं हैं। यह भगवान अय्यप्पा के मंदिरों की भी व्यापक प्रथा नहीं है। अतः अगर किसी महिला को उनकी पूजा करनी है, वह उनके अन्य मंदिरों में जा सकती है, या तब तक प्रतीक्षा कर सकती है जब तक कि वह सबरीमाला के लिए उचित आयु की न हो जाए। तीन तलाक के मामले में ऐसा नहीं है। यह मुस्लिम प्रथा हर मुस्लिम महिला पर लागू होती है, और इससे उसके बचने का कोई उपाय नहीं है; यह तलवार की तरह उनकी गर्दन पर जीवन के हर क्षण टँगी रहती है।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात, सबरीमाला की पम्पराओं में महिलाओं के दमन की क्षमता नहीं है, जबकि तीन तलाक की प्रथा में है। तीन तलाक के परिणामस्वरूप कई महिलाएँ निकाह हलाला जैसी निंदनीय परम्परा की शिकार होतीं हैं, जिसके अंतर्गत यौन उत्पीड़न के लिए मुस्लिम महिलाओं का मवेशियों की तरह मुस्लिम पुरुषों में आदान-प्रदान होता है।
इसलिए इन दोनों प्रथाओं के बीच समानता स्थापित करने के कोई भी प्रयास अत्यंत घृणित है और मुस्लिम महिलाओं द्वारा तीन तलाक के परिणामस्वरूप झेले जा रहे दमन के चरम की गंभीरता को कमतर करता है। लोक सभा में तीन तलाक पर हो रही बहस में यह भी दिख रहा है कि कैसे ‘सेक्युलर’ पार्टियाँ हमेशा मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथी धड़े का सशक्तिकरण करतीं हैं और मुस्लिम महिलाओं की चिंताओं को नज़रअंदाज़ कर देतीं हैं।
कन्हैया कुमार ने मुज़फ्फरपुर के अस्पताल श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SKMCH) में समर्थकों सहित दौरा किया है। रिपब्लिक टीवी की खबर के मुताबिक 100 से ज्यादा समर्थकों को साथ लेकर हालिया लोकसभा निर्वाचन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के उम्मीदवार रहे कन्हैया कुमार पूरे दल-बल के साथ ‘मरीजों का हालचाल लेने’ पहुँचे। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने तो बाकायदा उनका वहाँ ‘माल्यार्पण’ होने की भी बात कही है।
कन्हैया के खिलाफ प्रदर्शन
एईएस से 170 मौतें हो जाने के बावजूद डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन पर पड़ रहे दबाव व तीमारदारों की मानसिक हालत की परवाह किए बगैर नेताओं का अस्पताल पहुँच कर अराजक स्थिति बनाना बदस्तूर जारी है। इसी शृंखला में पहुँचे कन्हैया की संवेदनहीनता से क्षुब्ध हो अस्पताल में भर्ती बीमारों के रिश्तेदारों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकर्ताओं के मुताबिक कन्हैया के साथ आया हुजूम इतना बड़ा था कि अस्पताल के कर्मचारियों और सफाई कर्मचारियों के लिए भी अस्पताल में प्रवेश करना मुश्किल हो गया।
लेकिन मर रहे बच्चों के माहौल में हुए इस ‘शक्ति प्रदर्शन’ के बारे में जब कन्हैया कुमार से बात की गई तो उन्होंने पहले तो सवालों से कन्नी काटने का प्रयास किया, और जब ऐसा नहीं कर पाए तो कहते नज़र आए, “मैं अकेले आया हूँ। मेरे साथ कोई नहीं आया। ये अस्पताल है, यहाँ प्रार्थना कीजिए, कोई बात मत कीजिए।”
‘यहाँ आने से अच्छा गाँवों में जागरुकता फैलाएँ’
महज़ तीन दिन पहले ही SKMCH के अधीक्षक सुनील कुमार शाही ने राजनीतिक पार्टियों से आग्रह किया था कि अस्पताल में आकर अव्यवस्था फ़ैलाने और मरीजों व स्टाफ़ के लिए परेशानी खड़े करने से बेहतर होगा वे गाँवों में जाकर जागरुकता फैलाएँ। लेकिन इस अपील के बाद 20 जून की सुबह जब शरद यादव अस्पताल दौरे पर पहुँचे तो उन्हें VVIP सुविधा देने के लिए न केवल अस्पताल के दरवाज़े बंद कर दिए गए, बल्कि मरीजों तक को अस्पताल में प्रवेश के लिए संघर्ष करना पड़ा। शरद यादव को यह VVIP ट्रीटमेंट देने के पीछे राजनीतिक दबाव के कयास लगाए जा रहे हैं।
वहीं मरीजों का आरोप है कि शरद यादव का प्रतीकात्मक दौरा कतई ज़रूरी नहीं था क्योंकि अस्पताल की सुविधाएँ बनाए रखने में और भी समस्या हो गई। रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए एक मरीज के घर वालों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर कोई मीडिया से बात करेगा तो उसके बच्चों को अस्पताल से निकाल दिया जाएगा। क्रुद्ध प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों की असंवेदनशीलता का भी पर्दाफाश किया।
राज्य सरकार पर भी एईएस के बढ़ रहे मामलों और उसके परिणामस्वरूप हो रहीं मौतों का कोई असर पड़ता हुआ नहीं दिख रहा है। बिहार में इस जानलेवा बीमारी से हो रही मौतों पर असंवदेनशीलता के शर्मनाक प्रदर्शन में बिहार के स्वास्थ्य-मंत्री मंगल पांडे 17 जून को कैमरे के सामने राज्य की बदतर होती स्थिति की बजाय भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर ज्यादा चिंतित नज़र आए। इसके पहले पत्रकारों अंजना ओम कश्यप और TV9 भारतवर्ष के अजीत अंजुम को भी आईसीयू में घुस जाने को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। बिहार सरकार अपने प्रबंधन की कमी और महामारी को रोक पाने में नाकामी को लेकर आलोचनाओं के केंद्र में है। आज ही संवेदनहीनता और लापरवाही की एक घटना सामने आई जब पोस्टमॉर्टम विभाग की लावारिस लाशों के कई कंकाल अस्पताल परिसर की पीछे पड़े मिले।
भारतीय टीम के मशहूर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की बचपन की एक तस्वीर ने पाकिस्तान और ट्विटर में बवाल मचा हुआ है। इसके पीछे कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सबसे खास व्यक्ति जिम्मेदार हैं।
दरअसल, एक फोटो नईम उल हक नाम के ट्विटर हैंडल से शेयर की गई है और दावा किया गया है कि फोटो 1969 के समय में पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री इमरान खान की है। इस ट्विटर हैंडल को संचालित करने वाले को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का विशेष सहायक बताया जा रहा है। यहाँ तक कि खुद पाकिस्तान मीडिया ही उस फोटो को सचिन तेंदुलकर की बता रही है इसी वजह से पाकिस्तान के लोग ही अब उन्हें ट्रोल करने लग गए हैं।
जैसे ही नईम उल हक ने यह तस्वीर ‘पीएम इमरान खान 1969’ कैप्शन के साथ पोस्ट की, ट्विटर यूजर्स ने ट्रोलिंग शुरू कर दी। एक यूजर ने ट्रोल करते हुए विराट कोहली की बचपन की तस्वीर पोस्ट की और उस पर कैप्शन लिखा इंजमाम-उल-हक 1976। उसके बाद तो इस फोटो पर मीम्स की बाढ़ आ गई। यूजर्स ने एक के बाद एक ऐसे मीम्स भेजने शुरू कर दिए।
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि हुर्रियत भारत सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है जो एक सकारात्मक पहल है। जम्मू कश्मीर में बोलते हुए अपने संबोधन में राज्यपाल मलिक ने कहा कि शुक्रवार (21 जून) की प्रार्थना के बाद पथराव होना लगभग बंद हो गया है। हम युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना चाहते हैं। उसके लिए योजनाएँ बनाई जा रही हैं। लेकिन यह सच है कि अगर सामने से फायरिंग होती है तो आप गुलदस्ते नहीं दे सकते। जनरल साहब गोलियों का जवाब गोलियों से देंगे।
J&K Guv: Stone pelting after Friday prayers have almost stopped. We want to bring the youth back to mainstream. Schemes are being thought for that. But it is true that if there is firing from the front then you can’t give bouquets. General sa’ab will reply to bullets with bullets pic.twitter.com/1sOWn6keSj
अपने संबोधन में मलिक ने युवाओं के नाम भी संदेश दिया जिसमें उन्होंने कहा, “हमें नेक इरादों के साथ काम करना चाहिए। जिस तरह से युवाओं को गुमराह किया जा रहा है कि वे स्वर्ग में जाएँगे… उनके पास वास्तव में दो स्वर्ग हैं, एक कश्मीर में, और दूसरा जो उन्हें बाद में मिलेगा यदि वे एक अच्छे मुस्लिम बने रहेंगे।”
J&K Governor Satya Pal Malik: We should work with noble intentions. The manner in which the youth is being misled that they will ascend to heavens…they actually have two heavens, one in Kashmir, and the other which they will get later if they stay a good Muslim. https://t.co/i8VVsBUkLi
सत्यपाल मलिक ने हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज़ उमर फ़ारुक के ड्रग के ख़तरे पर बोलने के लिए उनका धन्यवाद दिया और कहा, “मुझे ख़ुशी है कि मीरवाइज़ उमर फारूक ने ड्रग के ख़िलाफ़ बोला है, यह एक बड़ा ख़तरा है। यह बात यहाँ के युवाओं में फैल रही है। जम्मू में स्थिति ख़राब है, इसी वजह से पंजाब बर्बाद हो रहा है।”
J&K Governor Satya Pal Malik: I am happy that Mirwaiz Umar Farooq has spoken against drug, it is a big menace here. This is spreading among the youth here. The situation is bad in Jammu, Punjab is getting destroyed due to this.
ख़बर के अनुसार, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक को शनिवार (22 जून) को श्रीनगर स्थित उनके ही घर में नज़रबंद कर दिया गया। मीरवाइज़ के नेतृत्व वाले हुर्रियत के एक प्रवक्ता ने बताया कि शहर के बाहरी इलाक़े में मीरवाइज़ उमर फ़ारूक के आवास पर एक पुलिस दल पहुँचा और उन्हें सूचित किया कि अब वह अपने घर से बाहर नहीं जा सकते। प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस द्वारा मीरवाइज़ को नज़रबंद करने का कोई कारण नहीं बताया गया।
अगर यह कहा जाए कि सचिन तेंदुलकर के बाद मैरी कॉम राज्य सभा में पहुँचने वाली सबसे बड़ी ‘स्पोर्ट्स स्टार’ हैं तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। लंदन ओलंपिक में काँस्य, एशियाड-कॉमनवेल्थ-विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण तो हर किसी को पता हैं लेकिन मैरी कॉम की ‘प्रोफाइल’ इन सबसे भी गहरी और ज़्यादा है। वह पशु-अधिकारों के लिए काम करतीं हैं, वह ‘अमैच्योर’ श्रेणी में हो कर भी ‘प्रोफेशनल’ श्रेणी के भारतीय एथलीटों से ज्यादा कमाई करतीं हैं और महिला बॉक्सिंग में विश्व चैंपियनशिप सबसे अधिक (10 में से 6) बार उन्होंने ही जीती है। मणिपुर-निवासी मैरी कॉम शायद भाला फेंक या 400 मीटर दौड़ की धुरंधर होतीं, अगर उनके प्रेरणा-स्रोत और मणिपुर के ही निवासी डिंगको सिंह 1998 के एशियाड में स्वर्ण पदक न लाते। इनकी जीत के बाद मैरी का ध्यान मुक्केबाजी की ओर मुड़ा।
जैकी चैन, जेट ली की फिल्मों से पड़ा बीज
टेलीग्राफ को दिए गए साक्षात्कार में मैरी ने बताया कि बचपन से ही जैकी चैन और जेट ली की एक्शन फ़िल्में उन्हें बहुत आकर्षित करतीं थीं। उन्हें मुहम्मद अली की मुक्केबाजी देखना भी बहुत पसंद था, और जब 17-18 साल की उम्र में उन्होंने मुक्केबाजी में कैरियर बनाने का निश्चय किया, तो यह ठीक से पता भी नहीं था कि महिला बॉक्सिंग जैसा कोई खेल होता भी है या नहीं। कोई ‘मेंटर’ भी नहीं था- थी तो बस ‘ज़िद’। अपनी ज़िद के बारे में मैरी बतातीं हैं कि उनके राज्य स्तर पर चैंपियनशिप जीतने तक पिता को पता ही नहीं था कि वह क्या कर रहीं हैं, क्योंकि मैरी जानतीं थीं कि घर वाले सहायता नहीं कर पाएँगे।
अपने आप को साबित करने, लोगों को ‘दिखा देने’ की ललक का भी मैरी के कैरियर के शुरू होने से लेकर लम्बा खिंचने में बड़ा हाथ है। उन्होंने नकारात्मक आलोचकों को ‘दिखा दिया’, परिवार के सामने भी खुद को साबित करना पड़ा- राष्ट्रीय स्तर के लिए राज्य स्तर पर चयन होता है, और उसकी तैयारी इतनी खर्चीली होती है कि मैरी को परिवार से मदद लेनी ही पड़ गई, और उसके साथ ही यह दबाव भी आ गया कि हार गईं तो शायद दो और बच्चों के भविष्य की चिंता के तले दबा परिवार और मदद न कर पाए। लेकिन मैरी ने लड़कर दिखाया, जीतकर दिखाया।
पति ने पूरा साथ दिया, शादी के पहले किया वादा निभाया
मैरी कॉम अपने पति ओनलर कॉम और ससुर के योगदान को भी महत्वपूर्ण मानतीं हैं। फुटबॉल में रुचि रखने वाले ओनलर से उनकी मुलाकात भी मुक्केबाजी के चलते ही हुई। राष्ट्रीय खेलों के लिए पंजाब जाते हुए सामान खोने के बाद उस समय डीयू में कानून के छात्र और नार्थ-ईस्ट के छात्रों की संस्था के अध्यक्ष ओनलर ने उनकी सामान ढूंढ़ने आदि में सहायता की थी। लेकिन 2005 में शादी करने के पहले उन्होंने साफ़-साफ़ पूछ लिया कि शादी के बाद ओनलर बॉक्सिंग कैरियर को समर्थन दे पाएँगे या नहीं; साथ ही यह वादा भी किया कि अगर ओनलर हाँ करते हैं तो वह दिखा देंगी कि किस मिट्टी की बनीं हैं।
आज भी वह पति के समर्थन की कितनी ज़रूरत महसूस करतीं हैं, इसका पता इस बात से चलता है कि 2013 में उन्होंने 2016 के रियो ओलम्पिक को ही अपना आखिरी माना था, लेकिन आज पति और परिवार के अपने पीछे खड़े होने से उनकी एक और सुनहरे तमगे की ज़िद 2020 के टोक्यो ओलम्पिक के लिए उनसे तैयारी करा रही है। सी-सेक्शन सर्जरी, छोटी-बड़ी चोटें, दर्द, थकता शरीर- इन सबसे बड़ी जीतने की भूख है।
‘हाथी जंगल में अच्छे लगते हैं, हमारी बेड़ियों में नहीं’
यह कई लोगों के लिए अचरज का विषय हो सकता है, लेकिन मुक्केबाजी जैसे ‘हिंसक’ खेल में कैरियर बनाने और खुद माँसाहारी होने के बाद भी मैरी कॉम जानवरों के लिए काम करने वाली संस्था PETA (पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ़ एनिमल्स) से जुड़ी हुईं हैं। उन्होंने सर्कसों में हाथियों के इस्तेमाल और उनके साथ होने वाले क्रूर व्यवहार के खिलाफ 2014 में आवाज़ उठाई थी। उन्होंने एक खुला पत्र लिख कर करुणा, मानवीयता और पशुओं का सम्मान करने को बच्चों की शिक्षा का अंग बनाए जाने की माँग की थी।
लोहे का मुक्का, कोमल दिल… cliche है, cheesy है, लेकिन सच है!
स्पष्टभाषी, थोड़ी-सी गुस्सैल
मैरी कॉम स्पष्टभाषी हैं- इस हद तक कि उनकी बात चुभ भी सकती है। वह टेलीग्राफ़ को दिए गए इंटरव्यू में नई पीढ़ी के एथलीटों में दीर्घकालिक जिजीविषा और जुझारूपन की कमी पर सीधे उँगली रख देतीं हैं (“मैं देखती हूँ कि युवा लड़के-लड़कियाँ पहला मेडल जीतने के बाद दूसरी बार के लिए कोशिश नहीं करते। ऐसा नहीं चल सकता। अगर लम्बे समय तक चलना है, तो यह मानसिकता नहीं चलेगी…”) वह बहुत जल्दी सफलता को सर पर चढ़ जाने देने वाले युवाओं को सीधे-सीधे कहतीं हैं, “प्रदर्शन में तुम मेरे सामने (फ़िलहाल) कुछ नहीं हो। मेरी उपलब्धियों की कोई बराबरी नहीं कर सकता।”
एशियाड में काँस्य जीतने वाली निखत ज़रीन की “मैरी कॉम से (इंडिया ओपन, मई 2019) मुकाबले में मैं अपना 100% दूँगी। उम्मीद है कि यह मुकाबला टूर्नामेंट का सबसे अच्छा मुकाबला होगा।” को जब मीडिया रिपोर्टों में उन्होंने ‘नई लड़की की चुनौती’ के रूप में पढ़ा तो झल्लाई हुई मैरी कॉम ने निखत को सेमीफाइनल में हराने के बाद नए मुक्केबाज़ों को नसीहत दी कि वह भाग्यशाली हैं कि उनके (मैरी) साथ मुकाबला कर सीखने का अवसर मिल रहा है, अतः बातें बाद में करें और खुद को पहले बॉक्सिंग रिंग में साबित करें।
ऑब्ज़र्वर की भूमिका में भी सक्रिय
2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य सभा में नामित की जाने वालीं मैरी कॉम बॉक्सिंग के खेल में सरकार की ऑब्ज़र्वर भी हैं। और उनके लिए यह केवल एक दिखावटी पद या टाइटल नहीं रहा है, उन्होंने परिस्थिति के अनुसार इस भूमिका का सक्रिय निर्वहन भी की किया है- 2017 में महिला बॉक्सिंग के पहले विदेशी कोच स्टेफान कोट्टालोर्डा ने भुगतान में देरी और राष्ट्रीय संघ के गैर-पेशेवर रवैये का कारण बताकर नियुक्ति के कुछ ही महीनों में इस्तीफ़ा सौंप दिया तो मैरी कॉम ने न केवल व्यक्तिगत तौर पर मामले में हस्तक्षेप कर स्टेफान का फैसला बदलने की कोशिश की, बल्कि प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा मामले को लेकर।
पक्ष-विपक्ष सब कायल, संसद में सक्रियता ‘भगवान’ से अधिक
प्रधानमंत्री मोदी से लेकर विपक्ष के सबसे जाने-माने चेहरे डॉ. शशि थरूर तक मैरी कॉम के प्रशंसक राजनीति की हर धारा और विचार धारा में हैं।
At the Prime Minister’s dinner for MPs, delighted to sit between two outstanding sportspersons who are now Members of Parliament, MC MaryKom @MangteC & @GautamGambhir pic.twitter.com/lkWcsMWCg4
वह संसद में सक्रिय भी खासी रहीं हैं- बावजूद इसके कि उनका कैरियर पूरे उफ़ान पर है, और उन्होंने खिताबी मुकाबले जीतना बंद नहीं किया है, वह संसद में पिछले साल के अगस्त तक 53% उपस्थित रहीं। और इस आँकड़े की महत्ता तब और बढ़ जाती है जब हम राज्य सभा में नामित होने के एक साल के भीतर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लेने के बावजूद संसद में महज़ 8% उपस्थिति रखने वाले सचिन तेंदुलकर से तुलना करें।
कई संसदीय स्तरों में तो मैरी मँजे हुए नेताओं की तरह 70-75% तक मौजूद रहीं, और उन्होंने चार चर्चाओं में भाग भी लिया। वह भोजन, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों में संसद की प्रवर समिति की भी सदस्या हैं।
उत्तर प्रदेश के अमेठी दौरे पर आईं स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें वो एक बीमार युवती की मदद करती नजर आ रही हैं। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद पहली बार अमेठी के दौरे पर आईं ईरानी का काफिला अमेठी के एक गाँव से गुजर रहा था तभी उन्होंने महिला को व्हीलचेयर पर अस्पताल जाते देखा। इसके बाद उन्होंने उसे अपने काफिले में सरकारी सेवा में लगे ऐंबुलेंस से अस्पताल पहुँचाया।
#WATCH Uttar Pradesh: Smriti Irani, BJP MP from Amethi takes a woman to hospital in her convoy ambulance. pic.twitter.com/ohWl12minG
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास व कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी अपने दो दिवसीय दौरे पर शनिवार (जून 22, 2019) को अमेठी पहुँची। अमेठी के तिलोई में स्मृति ईरानी ने जन कल्याण योजनाओं की शुरुआत की। अमेठी पहुँचने के साथ ही स्मृति ईरानी बरौलिया पहुँचीं। यहाँ उन्होंने पूर्व ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान स्मृति के साथ गोवा के मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और जिला प्रभारी मंत्री मोहसिन रजा भी मौजूद थे।
गौरतलब है कि, इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान भी अमेठी के एक गाँव में लगी आग के दौरान ईरानी खुद आग बुझाने में लग गई थीं। उनका यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह की हत्या हो जाने पर स्मृति का उनके शव को कंधा देने को लेकर भी उनकी काफी सराहना की गई थी।