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2 से ज्यादा बच्चे तो नहीं मिलेगा प्रमोशन: राजस्थान हाई कोर्ट का फैसला, कॉन्ग्रेस सरकार ने हटाई थी रोक, बैक डेट में दिया जा रहा था प्रमोशन

राजस्थान हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दो से अधिक संतान वाले सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर रोक लगा दी है। दरअसल, साल 2023 में कॉन्ग्रेस की तत्कालीन राज्य सरकार ने दो से अधिक बच्चों वाले सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर से लगी रोक हटा ली थी। इसके बाद उन्हें बैक डेट से प्रमोशन दिया जा रहा था। इस फैसले से राज्य के हजारों कर्मचारी प्रभावित होंगे।

राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस विनोद कुमार भारवानी की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। संतोष कुमार एवं अन्य लोगों द्वारा दायर की याचिकाओं में कहा गया था कि सरकार 16 मार्च 2023 की अधिसूचना से उन कर्मचारियों को बैक डेट से पदोन्नति दे रही है, जिनके दो से ज्यादा बच्चे होने के कारण 5 साल या 3 साल के लिए प्रमोशन रोके गए थे। 

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि इन कर्मचारियों को बैक डेट से प्रमोशन देने के कारण उनकी वरिष्ठता सूची में बदलाव आ गया है। वे वरिष्ठता सूची में नीचे चले गए हैं। इसके कारण उनकी पदोन्नति प्रभावित हो रही है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत में तर्क दिया कि साल 2001 में राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके तहत 1 जून 2002 के बाद तीसरा बच्चा पैदा होने पर सरकारी कर्मचारियों को 5 साल के लिए प्रमोशन से वंचित करने का नियम लागू कर दिया था। साल 2017 में सरकार ने 5 साल की अवधि को घटाकर 3 साल कर दिया था।

इसके बाद कार्मिक विभाग ने 16 मार्च 2023 को अधिसूचना जारी किया था। इसमें कहा गया था कि ऐसे सभी कर्मचारी, जिनकी पदोन्नति दंड स्वरूप रोकी गई थी उन्हें उनकी पदोन्नति वर्ष से ही प्रमोशन का लाभ दिया जाए। ऐसे में राज्य सरकार के करीब 125 विभागों में रिव्यू डीपीसी के माध्यम से कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ दिया जा रहा था।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि राज्य सरकार ने सूचना जारी करके दो से अधिक बच्चों वाले कर्मचारियों को लेकर अयोग्य घोषित करके प्रमोशन से वंचित कर दिया था। ऐसे में अब उन्हीं कर्मचारियों को फिर से प्रमोशन के लिए योग्य नहीं माना जा सकता है। वह बैक डेट से प्रमोशन देना कानून सम्मत नहीं है। इसे बारां और झालावाड़ के पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

राजस्थान सरकार के ‘टू चाइल्ड पॉलिसी’ को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी देने से मना करना भेदभावपूर्ण नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि नियम दो से ज्यादा जीवित बच्चे होने पर उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित करता है। बकौल कोर्ट, इस नियम का मकसद परिवार नियोजन को बढ़ावा देना है।

बता दें कि महाराष्ट्र में भी टू-चाइल्ड पॉलिसी को लेकर कई नियम लागू हैं। साल 2001 के सरकारी रिजॉल्यूशन में कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी के दो से ज्यादा बच्चे हैं और सेवा के दौरान उसकी मौत हो जाती है तो परिवार के किसी भी व्यक्ति को अनुकंपा पर नियुक्ति नहीं दी जाएगी। साल 2005 से लागू सिविल रूल्स में प्रावधान है कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य होंगे।

लड़कियों को आइटम सॉन्ग पर नचाता, हॉस्टल पर कर रखा था कब्जा: बंगाल में ‘TMC छात्र परिषद’ के गुंडे मुस्ताफिजुर का खौफ, जूनियर डॉक्टरों ने वसूली के लगाए आरोप

पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने गुरुवार (29 अगस्त, 2024) को एक धरना दिया। यह डॉक्टर तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) के नेता मुस्ताफिजुर रहमान मलिक द्वारा उन्हें लगातार परेशान किए जाने के खिलाफ धरना दे रहे थे।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के करीबी मुस्ताफिजुर पर रैगिंग में शामिल होने का आरोप है। उसने कथित तौर पर जूनियर महिला डॉक्टरों को आइटम गानों पर डांस करने तक के लिए मजबूर किया है। धरना दे रहे मोहम्मद सीबी नाम के एक डॉक्टर के अनुसार, मुस्ताफिजुर ने करीब 3 साल पहले मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज से डिग्री ली थी।

वह पढ़ाई पूरी होने के बाद भी यहीं जमा हुआ है और हॉस्टल में ही रहता है। मोहम्मद ने बताया “वह हमें परेशान करते रहता है और जूनियर डॉक्टरों को हॉस्टल से बाहर निकालने की धमकी देता है। जब हम मुस्ताफिजुर से कहते हैं कि हम उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाएँगे तो वह बताता है कि इससे कुछ नहीं होगा। भले ही शिकायत स्वास्थ्य विभाग से ही क्यों ना हो।”

मोहम्मद ने बताया कहा कि मुस्ताफिजुर ने जूनियर डॉक्टरों को उनके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ना मिलने की धमकी दी है। मोहम्मद ने आगे कहा, “TMCP नेता हर चीज को नियंत्रित करके रखता है है, परीक्षा में कौन कैसे बैठेगा से लकर से लेकर छात्रों को फेल-पास करने तक।”

उन्होंने यह भी बताया कि मुस्ताफिजुर ने प्रत्येक जूनियर डॉक्टर से ₹2000 भी वसूले और उन्हें जबरन TMCP में शामिल किया। प्रदर्शनकारी डॉक्टर ने बताया कि मुस्ताफिजुर एक सिंडिकेट चलाता है और मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में सबकुछ नियंत्रित करता है।

श्रेया मंडल नाम की एक मेडिकल छात्रा ने रिपब्लिक टीवी को बताया, “जब हमने इस कॉलेज में एडमिशन लिया, उस दिन ही शिक्षक क्लास छोड़कर चले गए थे और छात्र क्लास में थे, फिर यह यूनिट आई और हमारे दरवाज़े बंद कर दिए, और इस मुस्ताफिजुर के गुंडे यहाँ घुस आए और हमारी रैगिंग की।”

श्रेया मंडल ने बताया, “हमें परेशान किया जाता है। जब हम नए थे, तो हमें ऑडिटोरियम में ले जाया जाता था। पूरे ऑडिटोरियम के सामने, वे कहते हैं कि आइटम सॉन्ग बजाओ और डांस करो। उसी दिन से, हम डरे हुए हैं। कई जूनियर्स को धमकाया जाता है कि अगर तुम इसका विरोध करोगे, तो तुम निशाना बन जाओगे!”

अब मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज के पीड़ित जूनियर डॉक्टरों ने मुस्ताफिजुर रहमान मलिक को हॉस्टल से तत्काल बाहर निकालने की माँ को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने मुस्ताफिजुर के कॉलेज में घुसने पर रोक लगा दी है।

कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा, ”हम यहाँ सुरक्षा सम्बन्धित सभी कमियों को दूर कर रहे हैं। हैं। हम और CCTV ला रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में सूचित कर दिया है। पुलिस से लेकर कांस्टेबल तक सुरक्षा अधिकारी और सुरक्षा के उपायों पर भी काम किया जा रहा है।”

लड़की पर निकाह का दबाव बनाता था कलाम और उसके अम्मी-अब्बू: लड़की की मौत, परिजन बोले- आरोपितों ने दिया जहर, CCTV में है सबूत

महाराष्ट्र पुलिस ने गुरुवार (29 अगस्त 2024) को नासिक जिले में 15 साल की एक नाबालिग लड़की द्वारा आत्महत्या करने के मामले में 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। 22 वर्षीय कलाम इज़हार मंसूरी नामक एक व्यक्ति उसका पीछा करता था और उसे धमकी देता था। इतना ही नहीं, कलाम के परिजनों ने भी भी जब लड़की को धमकाया तो उसने ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली।

ऑपइंडिया के पास एफआईआर की कॉपी मौजूद है। लड़की के माता-पिता की शिकायत के आधार पर आरोपित कलाम के अम्मी नाना खाला, जहाँगीर शेख, बबलू शेख, मुन्ना शेख, लादेन मंसूरी, समीर बबलू शेख, नड्डा मंसूरी शेख, अंजुम सैय्यद और साहिल सैय्यद को नामजद किया गया है। आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 107, 351(2), 3(5) और 78 तथा POCSO ऐक्ट लगा है।

FIR के अनुसार, मृतका को मुख्य आरोपित कलाम कलाम साल 2022 से परेशान कर रहा था। उस समय लड़की स्कूल में पढ़ती थी। आरोपित लड़की को स्कूल आने-जाने के दौरान रास्ता में रोकता था और कहता था कि वह उसे पसंद करता है। कई बार उसने लड़की को बात करने के लिए मजबूर किया और उसका फोन नंबर भी ले लिया। हालाँकि, लड़की ने पहली बार घर पर यह बात बताई।

इस घटना के बाद लड़की के माता-पिता ने उसका विशेष ध्यान रखना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोपित के अम्मी-अब्बू से भी बात की और इस के बारे में बताया। हालाँकि, परिजनों से शिकायत के बाद भी आरोपित कलाम इजहार मंसूरी ने मृतका को परेशान करना जारी रखा। एफआईआर के मुताबिक, लड़की ने अपनी माँ से यह भी कहा था कि उसे डर लग रहा है।

उत्पीड़न के कारण लड़की को घर से ही 10वीं की बोर्ड परीक्षा देनी पड़ी। आखिरकार, लड़की को नासिक के देवलाली इलाके में एक आर्ट्स कॉलेज में दाखिला मिल गया। 23 अगस्त को लड़की रोजाना की तरतह दोपहर 12:15 बजे तक घर नहीं लौटी। लगभग एक घंटे बाद लड़की की माँ को एक कॉल आया, जिसमें बताया गया कि उसकी बेटी एक पुल के पास सड़क पर बेहोश पड़ी मिली है।

यह कॉल आरोपित अंजुम और साहिल की थी। ये दोनों भी इस मामले में नामजद आरोपित हैं। दोनों ने लड़की की माँ को फोन करके बताया कि उन्हें लड़की सड़क पर बेहोशी की हालत में मिली है और वे उसे बिटको अस्पताल ले जा रहे हैं। उन्होंने उसकी माँ से भी कहा कि वह जल्दी अस्पताल पहुँच जाए। हालाँकि, जब माँ अस्पताल पहुँची तो दोनों आरोपित भाग चुके थे।

FIR में लड़की की माँ ने कहा है, “डॉक्टरों ने उसकी जाँच की और उसे दवा दी, लेकिन घर वापस आते समय मेरी बेटी को उल्टी होने लगी और वह बेहोश हो गई। उस समय उसने मुझे बताया कि उसे कलाम और उसके परिवार द्वारा परेशान किया जा रहा था। उसने मुझे बताया कि कलाम उसे निकाह करने के लिए मजबूर करता था और उसे धमकाता था।”

लड़की की माँ ने FIR में आगे कहा है, “उसकी (आरोपित कलाम इजहार मंसूरी की) अम्मी भी मेरी बेटी को उसके बेटे से निकाह करने के लिए धमकाती थी। उसने जहाँगीर, बबलू, मुन्ना, लादेन, समीर और नड्डा के नाम भी बताए, जो उसे कलाम से शादी करने के लिए मजबूर करते थे।” इसके बाद लड़की को उसी दिन मृत घोषित कर दिया गया।

लड़की के परिवार ने 25 अगस्त को अंजुम सैय्यद के घर के पास लगे CCTV फुटेज की जाँच की। फुटेज में दिखा कि अंजुम और साहिल लड़की को अपने स्कूटर पर अस्पताल ले गए। हालाँकि, उन्होंने दावा किया था कि उन्हें लड़की पुल के पास सड़क पर बेहोश मिली थी। शक के आधार पर लड़की के माता-पिता ने दोनों के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया है।

ऑपइंडिया को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार, लड़की के माता-पिता का मानना ​​है कि लड़की को आरोपित और उसके रिश्तेदारों ने जहर दिया है। इसके बाद साहिल और अंजुम सैय्यद ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फोन पर कुछ भी पुष्टि करने में विफल रही। हालाँकि, ऑपइंडिया ने एफआईआर की प्रतियाँ और सीसीटीवी फुटेज हासिल कर ली हैं।

कासिम पठान के आतंक से तंग होकर लड़की ने आत्महत्या की

महाराष्ट्र में 10 दिनों के भीतर इस तरह का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 19 अगस्त को 16 वर्षीय लड़की ने कासिम यासीन पठान नाम के एक व्यक्ति के हाथों उत्पीड़न का सामना करने के 8 महीने बाद आत्महत्या कर ली थी। माना जाता है कि लड़की ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के अहेर गाँव के एक कुएँ में कूदकर अपनी जान दे दी थी।

मृतका नाबालिग थी और 11वीं कक्षा में साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई करती थी। वहीं, आरोपित कासिम यासीन पठान स्थानीय गैराज में मैकेनिक का काम करता था। लड़की शहर में रह रही थी, क्योंकि उसे पढ़ाई के लिए एक निजी कोचिंग सेंटर में दाखिला मिला था। वह हाल ही में रक्षाबंधन के त्योहार मनाने के लिए अपने गाँव आई हुई थी। उसी दौरान यह घटना हुई।

जानकारी के अनुसार, आरोपित कासिम पिछले आठ महीनों से लड़की पर उसका प्रेम प्रस्ताव स्वीकार करने का दबाव बना रहा था। वह लड़की को धमकाता था कि अगर वह उसके प्रेम प्रस्ताव को नहीं मानेगी तो वह उसके भाई को मार देगा। लड़की ने आरोपित से बचने के लिए हरसंभव कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिरकार उसने 18 अगस्त को आत्महत्या कर ली।

(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में सिद्धि ने लिखी है। आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं।)

रुखसार ने प्रेमी समीर संग मिलकर शौहर इमरान की कर दी हत्या: 5 साल के बच्चे ने खोला राज, बोला- अम्मी और चाचा ने मिलकर अब्बू को मार दिया

उत्तर प्रदेश के हापुड़ में एक महिला ने अपने पति की हत्या प्रेमी के साथ मिलके कर दी। महिला ने अपने आशिक के साथ मिल पति का गला घोंटा और पीट-पीट कर उसकी हड्डियाँ भी तोड़ दी। पुलिस ने आरोपित पत्नी और आशिक को गिरफ्तार कर लिया है। मामले का खुलासा महिला के ही 5 वर्षीय बच्चे ने कर दिया।

हापुड़ पुलिस ने शुक्रवार (30 अगस्त, 2024) को रुखसार और समीर को गिरफ्तार किया है। हापुड़ पुलिस ने यह कार्रवाई मंगलवार (27 अगस्त, 2024) को थाना बाबूगढ़ इलाके में हुई एक हत्या के मामले में की है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई चालू कर दी है।

दरअसल, 27 अगस्त को हापुड़ के छपरौली के रहने वाले इमरान की लाश बरामद हुई थी। उसकी बीवी रुखसार ने दावा किया था कि इमरान की मौत सीने में तेज दर्द होने के कारण हुई है। हालाँकि, उसकी थ्योरी पर आसपास के लोगों को शक हुआ था। उन्होंने पुलिस से इस मामले में दूसरे एंगल से जाँच करने को कहा था। पुलिस ने इसके बाद मृतक का पोस्टमार्टम करवाया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इमरान की दो पसलियाँ टूटी हुई मिली थीं और उसकी मौत गला घोंटने के कारण बताई गई थी। पुलिस घटनास्थल पर जाकर सबूत इकट्ठा किए थे। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में इमरान की पत्नी के अलावा अकेले गवाह उसके 5 वर्षीय बेटे विहान से पूछताछ चालू की।

इमरान का बेटा इस मामले में पहले डरा हुआ था। बाद में उसे पुलिसकर्मियों ने समझाया बुझाया तो उसने सारा राज बता दिया। बच्चे ने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन उसका पिता इमरान घर से बाहर था। इस दौरान रुखसार पड़ोस में ही रहने वाले समीर के साथ कमरे में मौजूद थी।

इस बीच इमरान अचानक घर आ गया और इससे विवाद की स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद रुखसार और समीर ने इमरान को मारने का फैसला किया। बच्चे ने पुलिस को बताया कि रुखसार ने इमरान की छाती पर मुक्के बरसाए और इस दौरान समीर उसके हाथ पैर पकड़े रहा।

बच्चे ने पुलिस को बताया कि इसके कुछ देर बाद उसकी माँ रुखसार ने पिता इमरान का मुंह दबा दिया और उनकी मौत हो गई। बच्चे के बयान के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार को दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। बताया गया कि रुखसार और समीर का 4 साल से संबंध था। पुलिस अब मामले में आगे जाँच कर रही है।

पूर्व CRPF जवान ने MLA रफीक खान पर पत्नी को परेशान करने का लगाया आरोप, कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उसे बुरी तरह पीटा: सामने आया वीडियो

राजस्थान की राजधानी जयपुर में गुरुवार (29 अगस्त) को कॉन्ग्रेस नेता रफीक खान के साथ उनके घर के बाहर मारपीट की गई। यह घटना उस समय हुई, जब वे कुछ लोगों के साथ विधानसभा जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, रफीक को एक महिला को परेशान करने के आरोप में एक व्यक्ति ने पीटा है। हमलावर ने पहले रफीक से बहस की, इसके बाद उनका कॉलर पकड़कर थप्पड़ मारने की कोशिश की।

घटना के वक्त रफीक खान के घर में मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया और उसकी पिटाई कर दी। इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में कॉन्ग्रेस विधायक के कई समर्थक हमलावर को पीटते हुए दिखाई दे रहे हैं। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुँची और उसे हिरासत में ले लिया। हमलावर पूर्व CRPF जवान बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि पकड़े गए व्यक्ति की पहचान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के पूर्व सहायक कमांडेंट विकास जाखड़ के रूप में हुई है। विकास जाखड़ को अपनी सेवा के दौरान शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। हालाँकि, कहा जाता है कि उन्होंने साल 2021 में उन्होंने अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया था। इस घटना को भाजपा नेताओं ने भी उठाया है।

राजस्थान भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “कॉन्ग्रेस विधायक रफीक खान के साथ मारपीट का कोई समर्थन नहीं करता, पर एक शौर्य चक्र विजेता को कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा इस तरीक़े से मारना कहाँ तक उचित है राहुल गाँधी?”

रफीक खान जयपुर के आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र से दो बार कॉन्ग्रेस विधायक रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जाखड़ ने उनकी छाती पर मुक्का मारा और उनका दम घोंटने की कोशिश की। खान ने कहा, “जब मैं अपनी कार में बैठने वाला था तो उसने मुझ पर अचानक हमला कर दिया। मैंने खुद को बचाने के लिए उसके दोनों हाथ पकड़ लिए, जिसके बाद मेरे समर्थक और वहाँ मौजूद लोग उसे वहाँ से ले गए।”

विधायक रफीक खान ने आगे कहा, “मुझे इस व्यक्ति या उसकी पृष्ठभूमि और उसके इरादे के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन केवल आपराधिक मानसिकता वाला व्यक्ति ही ऐसा कृत्य कर सकता है।” बता दें कि रफीक खान ने साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के रवि नैयर को 14,073 मतों के अंतर से हराया था।

अधिकारियों के अनुसार, झुंझुनू जिले के 39 वर्षीय विकास जाखड़ ने शिकायत की थी कि रफीक खान उनकी पत्नी को परेशान कर रहे थे। विकास जाखड़ की पत्नी एक सरकारी स्वास्थ्य कर्मचारी है और विधायक ने उनकी पत्नी को परेशान किया था और उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए गुस्से में उन्होंने ऐसा किया। पुलिस ने उन्हें शांति भंग के आरोप में हिरासत में लिया था।

शौहर कमाने जाता सऊदी अरब तो बीवी प्रेमी संग उड़ाती गुलछर्रे: नाजनीन खातून ने रोहित को गहने और ₹3 लाख देकर आफताब की करा दी हत्या​, दोनों गिरफ्तार

बिहार के मोतिहारी में एक शादीशुदा महिला ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर अपने शौहर की हत्या करा दी। महिला का नाम नाजनीन खातून है। उसका शौहर आफताब आलम सऊदी अरब में रहकर नौकरी करता था। वह हाल ही में अपने गाँव आया था। इसी बीच उसकी बीवी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसकी हत्या करा दी। नाजनीन बाल-बच्चेदार औरत है।

बिहार पुलिस ने बताया कि सिकरहना में 35 साल के आफताब आलम की हत्या में उसकी बीवी नाजनीन खातून खुद शामिल थी। पुलिस का कहना है कि यह हत्या उसने प्रेम प्रसंग में कराई है। इसके लिए उसने अपने प्रेमी को कुछ गहने और रुपए भी उसने दिए थे। इस पूरे मामले में पुलिस ने आफताब की बीवी एवं तीन बच्चों की अम्मी नाजनीन को गिरफ्तार कर लिया है।

दरअसल, 4 अगस्त 2024 को आफताब आलम की हत्या को अंजाम दिया गया था। उसका शव घोड़ासहन थाना क्षेत्र के बगहा गाँव में मिला था। महिला का प्रेमी रोहित स्कॉर्पियो से घूमने के बहाने आफताब को लेकर गया था। इसके बाद उसने उसकी हत्या कर दी थी। शव देखने से पता चल रहा था कि चाकू से गोदकर और ईंट-पत्थर से कूचकर उसकी हत्या की गई है। 

बताया जाता है कि जब आफताब आलम विदेश में रहता था, उसी दौरान उसकी बीवी नाजनीन का रोहित नाम के लड़के से प्रेम-प्रसंग शुरू हो गया। करीब तीन साल पहले दोनों के बीच प्रेम प्रसंग एक मिस्ड कॉल से शुरू हुआ था। शौहर के विदेश रहने पर नाजनीन ससुराल में ना रहकर अपने मायके रहती थी। यहाँ पर वह अपने प्रेमी से खूब मिला करती थी। दोनों शादी करने की योजना भी बना रहे थे।

इस बीच आफताब आलम घर आ गया। दोनों को लगा था कि हर बार की तरह आफताब इस बार भी जल्दी विदेश चला जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब दोनों को लगा कि आफताब जल्दी विदेश जाने वाला नहीं है तो उसने यह बात अपने प्रेमी को बताई। उसने प्रेमी रोहित से अपने शौहर की हत्या करने। के लिए कहा। इसके लिए नाजनीन ने रोहित को गहने और करीब तीन लाख रुपए भी दिए थे।

अपने प्रेमी को अपने गहने और रुपए देते हुए नाजनीन ने उससे कहा था कि इसे बेचकर शूटर हायर कर लेना और उससे आफताब की हत्या करवा देना। आफताब आलम और नाजनीन की करीब 10 साल पहले निकाह हुआ था और उनके तीन बच्चे भी हैं। हत्या के बाद नाजनीन अपने प्रेमी रोहित से शादी करके नेपाल चले जाने और वहीं जीवन-यापन करने की योजना बनाई थी।

रोहित ने पूरी योजना के तहत 4 अगस्त की शाम को अपने दोस्तों के साथ मिलकर आफताब को घुमाने के बहाने स्कॉर्पियो में बैठा कर ले गया। घोड़ासहन थाना क्षेत्र के बगहा बैंक टोला के पास चाकू से गोदकर और ईंट पत्थर से कुचलकर आफताब की हत्या कर दी। इससे पहले की रोहित वहाँ से भाग पाता, वहाँ जुटी भीड़ ने उसे पकड़ लिया और पिटाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया।

घटना के बाद SP ने जाँच के लिए SIT की टीम का गठन किया था। पुलिस को पता चला कि रोहित का नाजनीन के साथ अवैध संबंध था और इसलिए हत्या की गई है। खुलासे के बाद पुलिस ने नाजनीन को शेखौना स्थित उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, घोड़ासहन बाजार निवासी उसके प्रेमी रोहित को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने रोहित के स्कॉर्पियो को भी जब्त कर लिया है।

‘सिखों को मारो, इन्होंने हमारी माँ को मार डाला’: इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद भीड़ को उकसा रहा था कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर, 40 साल बाद चलेगा मुकदमा

1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर पर हत्या और दंगे भड़काने समेत कई मामलों में मुकदमा चलेगा। दिल्ली की एक अदालत ने टाइटलर के विरुद्ध आरोप तय करनेके आदेश दिए हैं। जगदीश टाइटलर के खिलाफ कार्यवाही चलाने का कोर्ट को पर्याप्त आधार मिला है।

दिल्ली के राउज अवेन्यु कोर्ट ने शुक्रवार (30 अगस्त, 2024) को सिख दंगा मामले में अपना आदेश सुनाया। कोर्ट ने अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि टाइटलर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की अलग-अलग धाराओं के अंतर्गत हत्या, दंगा भड़काने समेत अन्य कई आरोपों पर मामला चलाने के लिए पर्याप्त आधार हैं।

कोर्ट ने टाइटलर के खिलाफ दंगा, समुदायों में दुश्मनी बढ़ाना, पूजास्थल को नुकसान पहुँचना,और हत्या समेत अन्य मामलों में पर्याप्त आधार पाया गया हैऔर मामले को आगे बढ़ाने के आदेश दिए हैं। टाइटलर के खिलाफ सितम्बर, 2024 में आरोप तय होने पर सुनवाई होगी।

जगदीश टाइटलर के खिलाफ यह मामला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद दिल्ली के एक इलाके में लोगों को भड़काने के लिए चल रहा है। इस मामले में CBI ने मई, 2023 में चार्जशीट दाखिल की थी। CBI ने टाइटलर पर गंभीर आरोप लगाए थे।

इस चार्जशीट में गवाहों के हवाले से कहा गया था कि टाइटलर ने भीड़ को उकसाया था और दंगों का नेतृत्व किया था। इस चार्जशीट में दिए गए एक गवाह के बयान में कहा गया ”जगदीश टाइटलर ने भीड़ से पहले सिखों को मारने और फिर उनकी दुकानें एवं कीमती सामान लूटने के लिए कहा”

चार्जशीट में यह भी कहा गया था कि जगदीश टाइटलर ने दंगाइयों को आश्वासन दिया कि उनके खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में हुई हत्याओं की तुलना दूसरी जगहों से की और अपने फॉलोअरों से अधिक-से-अधिक सिखों पर हमला करने के लिए कहा।

चार्जशीट में दर्ज एक प्रत्यक्षदर्शी के बयान में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस नेता जगदीश टाइटलर अपनी सफेद एम्बेसडर कार से बाहर निकले और भीड़ को उकसाना शुरू कर दिया और दंगाइयों से दुकानें लूटने के लिए कहा। गवाहों ने बताया कि उन्होंने अपनी गाड़ी से उतर कर कहा, “सिखों को मारो, इन्होने हमारी माँ को मार दिया।”

इसी चार्जशीट में एक और गवाह का जिक्र किया गया है। गवाह के बयान में कहा गया है कि तत्कालीन सांसद टाइटलर ने दिल्ली के आज़ाद मार्केट में गुरुद्वारा पुल बंगश पर हमले को भी उकसाया था। इसके परिणामस्वरूप भीड़ ने गुरुद्वारा पुल बंगश को आग लगा दी और 1 नवंबर 1984 को सिख समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी।

असम में जुम्मे की नमाज पढ़ने के लिए मिलने वाला 2 घंटे का ब्रेक खत्म: हिमंता सरकार का फैसला, CM सरमा ने कहा- यह नियम मुस्लिम लीग की सोच थी

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को यानी जुम्‍मे के दिन एक महत्वपूर्ण फैसला लिया। उन्होंने असम में जुम्‍मे की नमाज के लिए दिए जाने वाले दो घंटे के ब्रेक को खत्‍म कर दिया है। सीएम सरमा ने कहा कि इस तरह का नियम बनाना मुस्लिम लीग की सोच थी और अब इसे खत्म कर दिया गया है।

इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर भी शेयर की। एक्‍स पर पोस्‍ट में उन्होंने लिखा, “2 घंटे के जुम्मा ब्रेक को खत्म करके असम विधानसभा ने उत्पादकता को प्राथमिकता दी है और औपनिवेशिक बोझ के एक और निशान को हटा दिया है। यह प्रथा मुस्लिम लीग के सैयद सादुल्ला ने 1937 में शुरू की थी।” उन्होंने स्पीकर बिस्वजीत दैमारी और विधायकों का आभार व्यक्त किया।

आधिकारिक आदेश में कहा गया है, “असम विधानसभा के निर्माण के बाद से मुस्लिम सदस्यों को नमाज के लिए जाने की सुविधा देने के लिए शुक्रवार को विधानसभा की बैठक सुबह 11 बजे स्थगित कर दी जाती थी। विधानसभा दोपहर के भोजन के बाद अपनी कार्यवाही फिर से शुरू करती थी। मुस्लिम सदस्यों के नमाज़ से वापस आने के बाद सत्र आयोजित किया जाता था।”

इस तरह अब असम में विधायकों को नमाज के लिए मिलने वाला दो घंटे का ब्रेक अब नहीं मिलेगा। भाजपा विधायक बिस्वजीत फुकन ने कहा कि ब्रिटिश काल से असम विधानसभा में नमाज पढ़ने के लिए हर शुक्रवार को दो घंटे का ब्रेक मिलता था। यह ब्रेक 12 बजे से लेकर 2 बजे तक का होता था। अब यह नियम बदल गया है।

विधायक फुकन ने कहा, यह स्पीकर के साथ बैठक में फैसला लिया गया। इस फैसले का सभी विधायकों ने स्वागत किया। यह फैसला लिया गया कि जब लोकसभा, राज्यसभा या देश के किसी भी राज्य के सदन में जुम्मे का ब्रेक नहीं है तो यहाँ क्यों है। उन्होंने कहा कि इसके बाद स्पीकर ने तय किया कि यह परंपरा बदली जाए।

बता दें कि इससे पहले असम विधानसभा में गुरुवार (29 अगस्त) को मुस्लिमों के विवाह और तलाक के पंजीकरण के कानून को निरस्त करने के लिए एक बिल पास किया गया। राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री जोगेन मोहन ने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम 1935 को खत्म करने के लिए 22 अगस्त को असम निरसन विधेयक 2024 को पहली बार पेश किया था।

इस बिल पर राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था, “हमारा उद्देश्य केवल बाल विवाह को खत्म करना नहीं है। हमारा उद्देश्य काजी प्रथा को भी खत्म करना है। हम मुस्लिम विवाह और तलाक के पंजीकरण को सरकारी प्रणाली के तहत लाना चाहते हैं।” उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी शादियों का रजिस्ट्रेशन किया जाना है.

CM सुक्खू साहब, सिर्फ आपके तनख्वाह छोड़ने से नहीं सुधरेगी हिमाचल की माली हालत, खटाखट वाली राजनीति भी छोड़ दीजिए: जानें कैसे बने हैं बदतर हालात

हिमाचल प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार के मुखिया सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐलान किया है कि वह अगले 2 माह तक अपनी तनख्वाह नहीं लेंगे। उनके साथ हिमाचल सरकार के अन्य मंत्री और मुख्य संसदीय सचिव ने भी अगले दो महीने तनख्वाह-भत्ते ना लेने का निर्णय लिया है। CM सुक्खू का कहना है कि यह निर्णय उन्होंने हिमाचल प्रदेश के आर्थिक संकट को देखते हुए किया है। हालाँकि, जिस आर्थिक संकट से निकलने की बात CM सुक्खू कर रहे हैं, वो राज्य पर लेकर भी कॉन्ग्रेस की खटाखट राजनीति आई है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने गुरुवार (29 अगस्त, 2029) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मंत्रिमंडल में चर्चा करने के बाद सभी सदस्यों ने फैसला किया है अगले 2 महीने तक वह ना तनख्वाह लेंगे, ना ही DA लेंगे और ना ही TA लेंगे। यही अनुरोध CPS साथियों ने भी मान लिया है। उन्होंने भी अगले दो महीने तक कोई भी तनख्वाह और TA-DA ना लेने का निर्णय किया है। यह छोटी धनराशि है, लेकिन इसका महत्व बड़ा है। मैंने सभी विधायकों से भी यही अनुरोध किया है।”

राजनीतिक स्टंट है तनख्वाह छोड़ने का ऐलान

CM सुक्खू ने इसके बाद बताया कि उन्होंने सुधरती अर्थव्यस्था को और आगे बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया है ताकि इस प्रक्रिया में कोई बाधा ना पड़े। दरअसल, हिमाचल प्रदेश इस वक्त बड़ी आर्थिक समस्या में फंसा हुआ है। दो साल पहले सत्ता में आई कॉन्ग्रेस सरकार लगातार उधार पर उधार लेती जा रही है। इससे भी कोई उपाय नहीं निकल रहा है। हिमाचल सरकार की हालत इतनी खराब हो गई है कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों का पैसा भी रुक रहा है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री इस मर्ज का इलाज तनख्वाह छोड़ने से कर रहे हैं। हालाँकि, इससे आर्थिक समस्या में कोई बदलाव तो नहीं पड़ेगा। हाँ, कुछ अखबारों में मुख्यमंत्री सह्रदयता की हेडलाइन जरूर छप जाएँगी। दरअसल, यह मर्ज इस बात की है ही नहीं कि कौन अपनी तनख्वाह ले या ना ले। बल्कि असल मुद्दा है उनकी पार्टी की खटाखट राजनीति। हिमाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार बड़े-बड़े वादे करके सत्ता में आई थी। चाहे वह मुफ्त बिजली हो या फिर 18 से 60 वर्ष की महिलाओं को हर महीने ₹1500 देने का वादा हो।

इसके अलावा उन्होंने राज्य कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का वादा भी कर दिया था। अब यही सब दाँव उलटे पड़ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश एक छोटा राज्य है, इसके आय के साधन सीमित हैं। इसका खर्चा अपनी आय और केंद्र से मिलने वाली सहायता से पूरा होता है। बाकी की कमी कर्ज लेकर पूरी की जाती है। इन सब के बीच राज्य का कर्ज इतना बढ़ गया है कि उसको चुकाने के लिए नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं। हिमाचल की आर्थिक स्थिति को आँकड़ों से समझा जाना चाहिए।

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया की है स्थिति

हिमाचल की बदहाल आर्थिक स्थिति इसके 2024-25 के बजट से समझी जा सकती है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ₹58,444 करोड़ का बजट सुक्खू सरकार ने पेश किया था। इस बजट में भी सरकार का राजकोषीय घाटा (सरकार की आय और खर्चे के बीच का अंतर, जिसे कर्ज लेकर पूरा किया जाता है) ₹10,784 करोड़ है।

इस बजट का बड़ा हिस्सा तो केवल पुराने कर्जा चुकाने और राज्य के कर्मचारियों की पेंशन और तनख्वाह देने में ही चला जाएगा। इस बजट में से ₹5479 करोड़ का खर्च पुराने कर्ज चुकाने, ₹6270 करोड़ का खर्च पुराने कर्ज का ब्याज देने में करेगी। यानी पुराने कर्जों के ही चक्कर बजट का लगभग 20% हिस्सा चला जाएगा।

इसके अलावा सुक्खू सरकार तनख्वाह और पेंशन पर ₹27,208 करोड़ खर्च करेगी। इस हिसाब से देखा जाए तो ₹38,957 का खर्च तो केवल कर्ज, ब्याज, तनख्वाह और पेंशन पर ही हो आएगा। यह कुल बजट का लगभग 66% है। अगर नए कर्ज को हटा दें तो यह हिमाचल के कुल बजट का 80% तक पहुँच जाता है। यानी राज्य को बाकी खर्चे करने की स्वतंत्रता ही नहीं है।

हिमाचल प्रदेश 2024-25 में लगभग ₹1200 करोड़ सब्सिडी पर भी खर्च करने वाला है। यह धनराशि सामान्य तौर पर छोटी लग सकती है, लेकिन आर्थिक संकट में फंसे हिमाचल के लिए यह भी भारी पड़ रही है। इस सब्सिडी में सबसे बड़ा खर्चा बिजली सब्सिडी का है।

क्यों बन गए आर्थिक संकट के हालात

हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट की इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। इसका एक बड़ा कारण सुक्खू सरकार का आय के नए स्रोतों पर ध्यान ना देना भी हो सकता है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश ने अपने चुनावी वादे के अनुसार पुरानी पेंशन स्कीम लागू कर दी थी। इस कारण से उसको मिलने वाली मदद में भी कमी आई है।

स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि हिमाचल सरकार NPS में डाला गया कर्मचारियों का पैसा भी वापस माँग रही है। इसके अलावा वह बिगड़े आर्थिक हालातों के बीच राज्य की महिलाओं को भी ₹1500 दे रही है। यह भी उसके बजट पर असर डाल रहा है। हिमाचल सरकार 125 यूनिट बिजली भी मुफ्त देती है, यह भी राज्य पर एक बोझ बन रहा है।

आगे भी नहीं सुधरेगी स्थिति

राज्य सरकार ने हाल ही में बताया है कि वर्ष 2030-31 तक उसका पेंशन पर होने वाला खर्च ₹19,728 करोड़ हो जाएगा। यह वर्तमान में लगभग ₹10,000 करोड़ से भी कम है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच कुल ₹90,000 करोड़ का खर्चा हिमाचल प्रदेश को पेंशन पर ही करना पड़ेगा।

कॉन्ग्रेस के OPS के वादे से राज्य के अन्य विकास कार्यों के बजट में कटौती होने की आशंका है। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्य के बजट में पहले पेंशन का हिस्सा मात्र 13% था जो कि OPS के बाद बढ़कर 17% हो जाएगा। पुरानी पेंशन के कारण होने वाला यह खर्च राज्य सरकार के कर्मचारियों को दी जाने वाली तनख्वाह पर खर्च के लगभग बराबर होगा।

2026-27 में राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को ₹20,639 करोड़ तनख्वाह देगी। 2026-27 में दी जाने वाली पेंशन की धनराशि ₹16,728 करोड़ होगी। राज्य में पेंशन पाने वालों की संख्या भी आने वाले सालों में नौकरी कर रहे कर्मचारियों से ज्यादा हो जाने के कयास हैं।

यह भी बात सामने आई है कि 2030-31 तक राज्य में 2.38 लाख पेंशनर हो जाएँगे। यह संख्या आने वाले समय में राज्य कर्मचारियों से भी अधिक होगी क्योंकि औसतन हर वर्ष 10,000 कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं। इसकी तुलना में नए कर्मचारी भर्ती नहीं हो रहे।

हिमाचल प्रदेश को 2026-27 से 2030-31 बीच तनख्वाह और पेंशन पर कुल मिलाकर ₹2.11 लाख करोड़ खर्चने पड़ेंगे। राज्य सरकार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि वह इस बोझ को अकेले सहन नहीं कर पाएगी। इसके लिए उसे विशेष मदद की जरूरत होगी।

कॉन्ग्रेस ने 2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में जोर-शोर से पुरानी पेंशन स्कीम का वादा किया था और इसे राजनीतिक हथियार बनाया था। हालाँकि, अब इसके दुष्परिणाम सामने दिखने लगे हैं। आर्थिक बोझ के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है।

कर्ज का बढ़ रहा है बोझ

कॉन्ग्रेस सरकार का धुआंधार तरीके से कर्ज लेने का मुद्दा इस बीच जोर पकड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में ₹88,000 करोड़ से भी अधिक का कर्ज है। कॉन्ग्रेस सरकार बीते डेढ़ वर्ष में ही लगभग ₹19,000 करोड़ का कर्ज राज्य पर चढ़ाया है। लोकसभा में दिया गया जवाब बताता है वित्त वर्ष 2024-25 खत्म होते-होते राज्य का कर्ज ₹94000 करोड़ के पार हो जाएगा।

राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद माना है कि उनके राज्य को कर्ज चुकाने के लिए ही नया कर्ज लेना पड़ रहा है। राज्य का कर्ज उसकी GDP का 40% से अधिक हो चुका है। उसका राजकोषीय घाटा भी GDP का लगभग 5% है। जबकि नियमों के मुताबिक़, किसी भी राज्य का कर्ज GDP का 20% जबकि राजकोषीय घाटा 3% से अधिक नहीं होना चाहिए।

राज्य की सत्ता में रेवड़ी वादे करके आई कॉन्ग्रेस अब राजनीतिक स्टंट में जुटी है। कॉन्ग्रेस शासित अन्य राज्यों का भी हाल कोई ख़ास अच्छा नहीं है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार भी दलितों के विकास के फंड में से अपनी गारंटियाँ पूरी करने में जुटी हुई हैं। यह राजनीति राज्यों के लिए घातक तो है ही, देश के आर्थिक विकास में भी रोड़े डालने वाली है।

‘पाकिस्तान से बातचीत का दौर खत्म हो चुका है’: जयशंकर का सख्त रूख, कहा- रिश्ते सुधारने के लिए भारत आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं कर सकता

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि पाकिस्तान से बातचीत का दौर खत्म हो चुका है। उसके साथ रिश्तों की कल्पना नहीं की जा सकती। जयशंकर ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का हवाला देते हुए कहा कि ‘कार्रवाई के परिणाम होते हैं’। उन्होंने भारत के इस रूख को दृढ़ता के साथ रखा कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते।

शुक्रवार (30 अगस्त 2024) को दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के साथ लगातार होने वाली बातचीत का युग समाप्त हो चुका है। जहाँ तक ​​जम्मू-कश्मीर का सवाल है तो अनुच्छेद 370 समाप्त हो चुका है। इसलिए, मुद्दा यह है कि हम पाकिस्तान के साथ किस तरह के रिश्ते पर विचार कर सकते हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले पर कोई समझौता नहीं होगा।

विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान के साथ अपने व्यवहार में भारत निष्क्रिय नहीं रहेगा। उन्होंने कहा, “मैं यह कहना चाहता हूँ कि हम निष्क्रिय नहीं हैं। घटनाएँ चाहे सकारात्मक दिशा में हों या नकारात्मक दिशा में, हम निश्चित तौर पर प्रतिक्रिया देंगे।” विदेश मंत्री का यह बयान भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव को दिखाता है।

उन्होंने कहा, “हमने अतीत में पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए कई प्रयास किए, लेकिन आतंकवाद के मुद्दे पर उनकी दोहरी नीति के कारण यह संभव नहीं हो सका। अब समय आ गया है कि पाकिस्तान समझे कि बातचीत के लिए उसे आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म करना होगा।” उन्होंने कहा कि आतंकवाद के साथ बातचीत संभव नहीं है।

जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की मुख्य रणनीति भारत को बातचीत के लिए लाने के लिए सीमा पार आतंकवाद का उपयोग करना रही है। हालाँकि, भारत ने उन शर्तों पर बातचीत करने से इनकार करके उस नीति को अप्रभावी बना दिया है, जिन शर्तों पर पाकिस्तान बातचीत करना चाहता था। पाकिस्तान को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना होगा, यदि वह भारत के साथ बातचीत करना चाहता है।

इससे पहले जयशंकर ने कहा था कि केंद्र सरकार पाकिस्तान के साथ संबंधों को सुधारने के प्रयास में आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवाद लगभग ‘उद्योग स्तर’ का मुद्दा बन गया है और भारत का वर्तमान मूड ऐसे खतरों को बर्दाश्त करने का नहीं है।

वहीं, बांग्लादेश के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा, “यह स्वाभाविक है कि हम मौजूदा सरकार से बात करेंगे। हमें यह स्वीकार करना होगा कि वहाँ राजनीतिक बदलाव हुए हैं और वे खतरनाक हो सकते हैं। जाहिर है, यहाँ हमें एक दूसरे के हितों की पारस्परिकता पर ध्यान देना होगा।”

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया के हर देश के लिए उसका पड़ोसी एक समस्या है। पूरी दुनिया को अगर ध्यान से देखा जाए तो ऐसा कोई देश नहीं है, जिसकी अपने पड़ोसी के साथ समस्याएँ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हर देश की उसके पड़ोसी के साथ कुछ न कुछ समस्याएँ जरूर सामने आएँगी।