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भारत छोड़ने के लिए मोहम्मद हसन ने माँगी 15 दिन की मोहलत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 3 हफ्ते की दी राहत: पढ़ने के लिए आया था, बीवी-बच्चों के साथ बस ही गया

भारत में एक यमन परिवार लंबे समय से वीजा खत्म होने के बाद भी रह रहा था। कुछ दिन पहले पुणे पुलिस ने भारत छोड़ने को कहा तो मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँचा। वहाँ कोर्ट ने भी फटकारते हुए कहा था कि वो भारत की उदारता का ज्यादा फायदा न उठाएँ और वीजा खत्म हो गया है तो देश छोड़ें। हालाँकि अब इसी मामले में खबर है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस यमनी परिवार को ‘जबरन निर्वासन’ से तीन हफ्ते की राहत प्रदान की है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई की। उन्होंने यमन से आकर भारत में रह रहे खालिद गोमई मोहम्मद हसन, उनकी बीवी, बेटे और बेटी को उनके मूल देश यमन में ‘जबरन निर्वासित’ किए जाने से सुरक्षा प्रदान की, क्योंकि शरणार्थी परिवार ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि वो ऑस्ट्रेलियाई वीजा के लिए आवेदन कर चुके हैं। इसमें बायोमेट्रिक्स, मेडिकल टेस्ट आदि प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी हैं। बस ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों की ओर से जवाब आना बाकी है इसलिए उन्हें 15 दिन की मोहलत दी जाए। यमन परिवार का अनुरोध सुनने के बाद उन्हें तीन सप्ताह का समय दिया गया यानी कि 21 दिन का।

उल्लेखनीय है कि यमन का परिवार पिछले एक दशक से अपने वीजा की अवधि से अधिक समय से भारत में रह रहा है और कुछ समय पहले उन्हें पुणे पुलिस से भारत छोड़ो नोटिस मिला था। इसी के बाद वह अपना आग्रह लेकर कोर्ट पहुँचे और माँग की कि उन्हें जबरन निर्वासन से सुरक्षा प्रदान की जाए, क्योंकि वे केवल ऑस्ट्रेलिया जाना चाहते थे।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, ये लोग 2014-15 में उस समय भारत आए थे जब यमन में मानवीय संकट गहरा गया था और आंतरिक गृहयुद्ध की स्थिति के कारण 45 लाख नागरिक विस्थापित हो गए थे। हसन का परिवार भी इसी दौरान विस्थापित हुआ 2014 में पहले वो खुद छात्र वीजा पर भारत आए फिर उनकी पत्नी 2015 में मेडिकल वीजा पर। कुछ समय बाद दोनों के वीजा की अवधि समाप्त हो गई लेकिन इन्होंने भारत नहीं छोड़ा।

ऐसे में पुणे पुलिस ने उन्हें इस वर्ष पहली बार फरवरी में तथा उसके बाद अप्रैल में भारत छोड़ो नोटिस जारी किया था, जिसमें उन्हें नोटिस प्राप्त होने के 14 दिनों के भीतर भारत छोड़ने को कहा गया था। तब उन्होंने हाईकोर्ट की ओर रुख किया। अपनी याचिका में हसन ने कहा था, “अगर हमें जबरन यमन निर्वासित किया गया तो वहाँ शोषण होगा। उन्हें, उनकी बीवी-बच्चों को जान का खतरा है।”

वहीं पीठ ने  पुणे पुलिस का प्रतिनिधित्व करने वाले विशेष वकील संदेश पाटिल से सहमति जताई थी कि भारत के अलावा याचिकाकर्ता 129 अन्य देशों में जा सकता है जो शरणार्थी कार्ड धारकों को अनुमति देते हैं। फिर भी याचिकाकर्ता ने सुरक्षा पर जोर दिया। तब जस्टिस ने उन्हें मौखिक रूप से यहाँ तक कहा था, “आप पाकिस्तान जा सकते हैं, जो पड़ोस में है। या आप किसी भी खाड़ी देश में जा सकते हैं। भारत के उदारवादी रवैये का अनुचित लाभ न उठाएँ।”

हालाँकि बाद में याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों के समक्ष अपने पासपोर्ट प्रस्तुत किए। कोर्ट ने पाया कि वो 2025 तक वैध हैं। अब वह सिर्फ ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद वो वहाँ चले जाएँगे। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए केस की सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है।

मोईद खान अपना, नवाब यादव पराया… 2 आरोपितों को लेकर सपा का 2 रवैया: एक मामले में DNA जाँच की माँग, दूसरे में झाड़ा पल्ला

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में सोमवार (12 अगस्त, 2024) को पुलिस ने नवाब सिंह यादव नाम के व्यक्ति को नाबालिग लड़की से रेप की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपित सोशल मीडिया पर खुद को समाजवादी पार्टी से जुड़ा नेता बताता है। उसकी अखिलेश और डिम्पल यादव के साथ कई तस्वीरें भी मौजूद हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी ने आधिकारिक पत्र जारी करते हुए इस मामले में अपनी सफाई पेश की है। सपा ने नवाब सिंह यादव को अपनी पार्टी का सदस्य मानने से ही इंकार कर दिया है।

सोमवार (12 अगस्त) को समाजवादी पार्टी की कन्नौज शाखा ने एक पत्र कर किया है। इस पत्र में नवाब सिंह यादव को समाजवादी पार्टी का सदस्य न बताने की अपील की गई है। इस सफाई में बताया गया है कि चंदन सिंह यादव के बेटे नवाब सिंह पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त थे। सपा का यहाँ तक कहना है कि नवाब सिंह यादव को उनकी पार्टी का सदस्य बताना एक साजिश है। अंत में मीडियाकर्मियों से अपील की गई है कि नवाब सिंह यादव का नाम सपा से न जोड़ा जाए।

इस पत्र को मोहम्मद सलीम खान ने जारी किया है। सलीम खान समाजवादी पार्टी से कन्नौज के जिलाध्यक्ष हैं। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज काका ने अपने X हैंडल @ManojSinghKAKA से इसे शेयर किया है।

खुद को सांसद प्रतिनिधि बताते रहे नवाब सिंह यादव

ऑपइंडिया ने इस मामले में नवाब सिंह यादव के सोशल हैंडलों की पड़ताल की। इन हैंडलों से पता चला कि नवाब सिंह यादव एक लम्बे समय से खुद को समाजवादी पार्टी से जुड़ा बताते आ रहे हैं। लगभग 11 साल पहले 15 अगस्त 2023 को नवाब सिंह यादव ने खुद को कन्नौज के सांसद का प्रतिनिधि बताया था। तब वहाँ की सांसद डिम्पल यादव थीं। नवाब सिंह अपने शेयर किए गए बैनर में एक तरफ अखिलेश और दूसरी तरफ डिम्पल यादव की तस्वीर भी लगाई थी।

31 दिसंबर 2013 की पोस्ट में नवाब सिंह यादव ने एक बार फिर से खुद को सांसद प्रतिनिधि घोषित किया है। उन्होने इस बार भी अखिलेश और डिम्पल यादव की तस्वीरों के नीचे अपनी फोटो लगाई थी। यह पोस्ट नवाब सिंह ने लोगों को नए साल की बधाई के तौर पर की थी।

जिस पार्टी कार्यालय कन्नौज से आज नवाब सिंह यादव के सपा कार्यकर्ता न होने की सफाई जारी हुई है वहाँ वो बैठ कर जनता की समस्याएँ सुना करते थे। 16 दिसंबर 2014 को नवाब सिंह ने इसे अपने फेसबुक पर शेयर किया है। तब वो अन्य समाजवादी नेताओं के साथ एक महिला से मुखातिब थे।

नवाब यादव से अधिक गंभीर आरोप, लेकिन मोईद खान अभी भी पार्टी का सदस्य

बताते चलें कि उपरोक्त तमाम सबूतों के बावजूद समाजवादी पार्टी ने 12 घंटे से भी कम समय में नवाब सिंह यादव से अपना पल्ला झाड़ लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नवाब सिंह सपा के समर्पित कार्यकर्ता थे और डिम्पल यादव के चुनावों में जी तोड़ मेहनत किया करते थे। अचानक ही उनसे कोई वास्ता न होने वाला समाजवादी पत्र स्थानीय लोगों के गले उतर नहीं रहा है। ऐसे में कई लोगों के जेहन में मोईद खान का मामला स्वतः कौंध रहा है।

यहाँ ये जानना जरूरी है कि अयोध्या प्रकरण में OBC बच्ची से गैंगरेप केस में सपा नेता मोईद खान पर नवाब सिंह यादव से भी अधिक गंभीर आरोप हैं। इसके बावजूद अभी तक समाजवादी पार्टी ने उनसे इस तरह पल्ला झाड़ना तो दूर मोईद पर अभी तक कोई कार्रवाई तक नहीं की। उलटे समाजवादी पार्टी के पक्ष में अक्सर ट्वीट करने वाले कई यूजर्स ने तो मोईद का ही पक्ष लेते हुए केस में DNA टेस्ट की माँग कर डाली है। अखिलेश यादव सहित किसी भी समाजवादी पार्टी के नेता ने भी अभी तक मोईद खान के खिलाफ खुल कर कुछ भी नहीं कहा।

कभी शेख हसीना के सौजन्य से खाते थे बिरयानी, अब हटा दी ‘बंगबंधु’ की तस्वीर: पत्रकारों ने बताया – ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ में ‘साँपों’ ने मनाया बांग्लादेश तख्तापलट का जश्न

बांग्लादेश में तख्तापलट क्या हुआ, ‘बंगबंधु’ कहे जाने वाले शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ से हटा दी गई है। बता दें कि शेख मुजीबुर रहमान ने ही ‘मुक्ति वाहिनी’ का गठन किया था, जो पाकिस्तानी फ़ौज से लड़ कर बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) की मुक्ति का कारण बना। PCI के दफ्तर में शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटाए जाने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया में विरोध किया, जिसके बाद तस्वीर फिर से लगा दी है।

सुभाष S यादव ने सोमवार (5 अगस्त, 2024) को एक तस्वीर ली, जिसमें शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर हटाई हुई दिख रही है। तस्वीर को देखिए:

5 अगस्त को हटी हुई तस्वीर की ली गई फोटो

इसके बाद उन्होंने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इसे लेकर आवाज़ उठाई। फिर 4 दिन बाद इस तस्वीर को लगा दिया गया। शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) को उनके द्वारा ली गई इस तस्वीर को देखिए:

9 अगस्त को वापस लगा दी शेख मुजीबुर रहमान की तस्वीर

हमने PCI से जुड़े कुछ पत्रकारों से बात की, जिन्होंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए बताया कि अब फिर तस्वीर लगा दी है। उन पत्रकारों ने बताया कि खूब लानत-मलानत के बाद ये कदम उठाया गया है। हमें खबर मिल रही है कि तख्ता पलट के बाद वहाँ जश्न भी मनाया गया था। जश्न के दौरान तस्वीर हटाई गई थी। एक पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शेख हसीना ने ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ में साँप पाल रखा था, जिसने मौका मिलते ही उन्हें ही डस लिया।

PCI में स्थित हमारे सूत्रों ने ये भी बताया कि शेख हसीना के सौजन्य से वहाँ पर बिरयानी पार्टी कभी शुरू की गई थी। बिरयानी बनाने के लिए बांग्लादेश से ही खानसामा आता था। वहीं मौका मिलते ही इन्होंने शेख हसीना के पिता की तस्वीर ही हटा दी। इन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि प्रेस क्लब के वामपंथी किसी के नहीं है। दावा है कि PCI में तो भारत की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले सेनानियों की तस्वीरें तक नहीं लगी हैं। ये वामपंथी नेताओं और एक्टिविस्ट्स को जम कर मंच भी देते हैं।

‘आज बांग्लादेश है, कल भारत होगा’: महताब अंसारी ने शेयर किया भीड़ से घिरी चीखती महिला का वीडियो, यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में एक युवक ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में एक महिला को चीखते हुए सुना जा सकता है। वीडियो शेयर करने का आरोप महताब अंसारी पर लगा है। उसने लिखा कि जो बांग्लादेश में हुआ वो भारत में होगा। हिन्दू संगठनों ने महताब पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई। रविवार (11 अगस्त, 2024) को पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए महताब को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है।

यह मामला मुज़फ्फरनगर के थाना क्षेत्र भोपा का है। यहाँ के गाँव तिस्सा में महताब अंसारी नाम का युवक रहता है। आरोप है कि महताब ने 10 अगस्त (शनिवार) को अपने फेसबुक पर एक आपत्तिजनक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में कुछ लोगों से घिरी एक महिला बाहर चीख रही है। वहीं घर के अंदर से कोई व्यक्ति उस घटनाक्रम का वीडियो बना रहा है। जिन लोगों से महिला घिरी है उनके हाथों में हथियार नजर आ रहे हैं। आसपास कुछ बच्चों के भी रोने की आवाज बीच में सुनाई दे रही है।

मुज़फ्फरनगर के पत्रकार समर ठाकुर ने रविवार (11 अगस्त, 2024) को इस वीडियो को अपने ‘@SudarshanTvMzn’ वाले हैंडल से ‘X’ प्रोफ़ाइल पर शेयर किया। मुज़फ्फरनगर पुलिस को टैग करते हुए उन्होंने लिखा, “बांग्लादेश का यह वीडियो मुजफ्फरनगर के भोपा थाना क्षेत्र से सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया बताया जा रहा है। जिसमें दर्शाया गया है कि आज जो बांग्लादेश में हो रहा है कल भारत में होगा।” वीडियो के कैप्शन में मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा हुआ है कि ‘आज बांग्लादेश है, कल भारत होगा।’

मुज़फ्फरनगर पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज कर के गिरफ्तारी कर ली गई है। वहीं स्वामी यशवीर ने बताया कि पहले आरोपित पर हल्की धाराएँ लगा कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया लेकिन जब आंदोलन की चेतावनी दी गई तो पुलिस ने कड़ी धाराओं में कार्रवाई की। स्वामी यशवीर ने एलान किया था कि अगर महताब अंसारी पर गंभीर धाराओं में एक्शन नहीं हुआ तो वो आरोपित के घर तक जाएँगे।

5 वक्त के पक्के नमाज़ी ने की 7 साल की बच्ची से रेप की कोशिश, रिश्तेदारों ने फरार मौलाना को दी पनाह: यूपी पुलिस ने आखिरकार दबोचा

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में 10 अगस्त को एक 70 वर्षीय मौलाना के खिलाफ 7 साल की नाबालिग बच्ची से रेप की कोशिश का आरोप लगा था। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोगों द्वारा पकड़े जाने के बाद चचा नाम से कुख्यात मौलाना मुख़्तार मज़हब का वास्ता दे कर वहाँ से फरार हो गया था। अब सोमवार (12 अगस्त, 2024) को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। फरारी के दौरान मौलाना के रिश्तेदारों ने उसे पनाह दी थी। मौलाना चचा 5 वक्त का नमाज़ी भी है।

यह घटना कानपुर के थाना क्षेत्र ग्वालटोली की है। सोमवार (12 अगस्त) को DCP दिनेश त्रिपाठी ने मौलाना की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस की टीमें लगातार मौलाना की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रहीं थीं। आरोपित मोबाइल फोन नहीं रखता था इस वजह से उसको दबोचने में दिक्कत आ रही थी। लगभग 2 दिनों की फरारी के दौरान मौलाना मुख़्तार अपने कानपुर स्थित रिश्तेदारों के ही घर रुकता था। पुलिस से बचने के लिए वह लगातार लोकेशन भी बदल रहा था। आखिरकार उसे ग्वालटोली के ही एक इलाके से दबोच लिया गया।

पुलिस ने आगे बताया कि गिरफ्तार मौलाना की आस-पड़ोस में सामाजिक छवि अच्छी नहीं थी। वह 5 वक्त का नमाज़ी है। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। DCP ने बताया कि इसकी जाँच और जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपित पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2) और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। बताते चलें कि आरोपित मौलाना को पकड़ने के लिए पुलिस की 5 टीमें लगाई गईं थीं।

ये टीमें पिछले 48 घंटों में कई इलाकों में दबिश दे चुकी थीं। इस बीच पुलिस को सोमवार को मुखबिर से मौलाना की सटीक लोकेशन मिल गई।

क्या था पूरा मामला

बताते चलें कि वारदात जुमे के दिन अर्थात शुक्रवार (9 अगस्त, 2024) रात की है। तब शाम लगभग 7:30 पर मौलाना ने घर के आगे खेल रही एक बच्ची को चॉकलेट का लालच दे कर अंदर बुलाया था। यहाँ उसने पीड़िता के कपड़े उतार दिए थे और खुद भी नंगा हो गया था। वह बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने ही वाला था कि अचानक आसपास के लोग पहुँच गए थे। उन्होंने मौलाना को रंगे हाथों पकड़ लिया था लेकिन वो कुछ लोगों को मज़हब का वास्ता दे कर फरार हो गया। आखिरकार सोमवार को पुलिस ने मौलाना को दबोच लिया।

‘अपने कॉलेज में बुलाया, टॉप उतार सीने पर हाथ मारा’: अंडरवियर में ‘बुआ’ के साथ 8000 की बात करता धराया सपा नेता नवाब, डिंपल यादव का करता है प्रचार

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में पुलिस ने नाबालिग लड़की से रेप के प्रयास में समाजवादी पार्टी के नेता बताए जा रहे नवाब सिंह यादव को गिरफ्तार किया है। नवाब यादव पर आरोप है कि उन्होंने नौकरी देने के बहाने पीड़िता को अपने डिग्री कॉलेज पर बुलाया और बलात्कार का प्रयास किया। जब पुलिस घटनास्थल पर पहुँची तो आरोपित आपत्तिजनक हालत में मिला था। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में नवाब सिंह यादव को अंडरवियर में लेट कर एक महिला से बात करते देखा जा सकता है।

क्या है FIR कॉपी में

कन्नौज की सदर कोतवाली में यह FIR सोमवार (12 अगस्त, 2024) की सुबह लगभग 7 बजे 15 वर्षीया पीड़िता की शिकायत पर दर्ज हुई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि 11 अगस्त को वह अपनी बुआ के साथ लखनऊ गई थी। लखनऊ से बुआ और भतीजी रात लगभग 11 बजे वापस लौटीं। वो कन्नौज के तिर्वा में उतरे और ऑटो से नवाब सिंह यादव के डिग्री कॉलेज चंदन महाविद्यालय पहुँचे। यहाँ पर नवाब सिंह ने पीड़िता को नौकरी लगवाने का लालच दे कर बुलवाया था।

पीड़िता के मुताबिक, कुछ देर बाद जब उनकी बुआ बाथरूम गईं तब नवाब सिंह यादव बदनीयत हो गया। उसने पीड़िता के कपड़े (टॉप) को उतार दिया। इसके बाद उसने नाबालिग के सीने पर हाथ भी मारा। आखिरकार पीड़िता ने सारी बात अपनी बुआ को बताई। बुआ ने पीड़िता को पुलिस बुलाने की सलाह दी। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। नवाब सिंह यादव पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 76 के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

वायरल हो रहा है घटना का वीडियो

इस घटना से संबंधित होने का दावा करते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पीड़िता बाहर से पुलिस के साथ कॉलेज के अंदर जा रही है। लड़की पुलिस को बताती है कि वो 9 बजे से पहले ही कॉलेज पहुँच गई थी। जब वो जाने लगी तो नवाब सिंह यादव ने ही उसे रात भर कॉलेज में रुकने के लिए कहा। पुलिस के पहुँचने पर पीड़िता के कपड़े अस्त-व्यस्त हालत में थे। पुलिस ने इस बावत पीड़िता से सवाल भी किया।

इसके बाद पुलिस पीड़िता को ले कर अंदर पहुँचती है। अंदर नवाब सिंह यादव अंडरवियर पहन कर लेटा था और पास बैठी एक महिला से बातें कर रहा था। महिला किसी 8 हजार का जिक्र करती सुनी जा सकती है। पीड़िता ने उस महिला को अपनी बुआ बताया। पुलिस ने दोनों का आपस में संबंध पूछा तो वो कोई जवाब नहीं दे पाए। पहले तो नवाब सिंह यादव ने पुलिस से लेट कर बात की लेकिन बाद में वो उठ कर अपनी पैंट पहनने लगे। पुलिस ने आरोपित के साथ पीड़िता की बुआ को भी कस्टडी में ले लिया था। ऑपइंडिया वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता।

क्या कहना है पुलिस का

इस मामले में कन्नौज के पुलिस अधीक्षक का भी बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची थी। यहाँ आरोपित आपत्तिजनक हालत में मिला जिसे FIR दर्ज कर के गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित को अदालत में पेश किया गया है। पुलिस मामले की जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई में जुटी है

बताते चलें कि नवाब सिंह यादव समाजवादी पार्टी का कन्नौज से एक कद्दावर नेता माना जाता है। कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि समाजवादी पार्टी की सरकार में नवाब सिंह यादव की लखनऊ तक तूती बोलती थी। वह खुद को कन्नौज के सांसद का प्रतिनिधि बताता है। छात्र जीवन से ही नवाब सिंह समाजवादी पार्टी से जुड़ा हुआ है। नवाब सिंह यादव के कई फोटो अखिलेश और डिम्पल यादव के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। आरोपित की गिरफ्तारी के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस स्टेशन पर जमावड़ा भी लगाया।

BSF की गोली से मारा गया बांग्लादेशी तस्कर अब्दुल्ला: अँधेरे में झाड़ियों के पीछे से जवानों पर धारदार हथियारों से किया था हमला, बीड़ी लेकर जा रहा था अपने मुल्क

बांग्लादेश में तनाव के बीच पश्चिम बंगाल की सीमा पर BSF ने एक तस्कर को मार गिराया है। घटना मुस्लिम बहुल मालदा की है। तस्करों के एक समूह ने ‘सीमा सुरक्षा बल’ पर हमला कर दिया, जिसके बाद BSF ने भी जवाबी गोलीबारी की। उक्त तस्कर बांग्लादेशी है। सोमवार (12 अगस्त, 2024) को सुरक्षा एजेंसी ने खुद बयान जारी कर के इसकी जानकारी दी है। चाँदनी चक बॉर्डर आउटपोस्ट के पास की उक्त घटना है। एक बीएसएफ जवान ने पेट्रोलिंग के दौरान तस्करों को देखा था।

उक्त जवान जब सीमा के पास गश्त कर रहा था तब उसने 5-6 संदिग्धों के एक समूह को देखा जो अपने सिर पर कुछ सामान लेकर आ रहे थे। भारत की तरफ से ये बांग्लादेश में चीजें लेकर जा रहे थे। जवानों ने तुरंत पहचान लिया कि वो तस्कर हैं और उन्हें रुकने के लिए कहा। जवानों की बात को नज़रअंदाज़ करते हुए झाड़ियों के पीछे छिप कर इन तस्करों ने जवानों पर हमला बोल दिया। जवानों ने पहले 2 राउंड की फायरिंग आत्मरक्षा में की, क्योंकि तस्करों के पास खतरनाक धारदार हथियार थे।

BSF की गोलीबारी के बाद इन तस्करों ने अँधेरे और घनी झाड़ियों का फायदा उठा आकर भागना शुरू कर दिया। वो वापस भारतीय सीमा के भीतर ही भागने लगे। इनमें से एक बांग्लादेशी तस्कर बुरी तरह घायल हो गया था और उसे एक नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान अब्दुल्लाह के रूप में हुई है। वो बांग्लादेश के छपाई नवाबगंज जिले के ऋषिपारा गाँव का रहने वाला है। वो कई दिनों से तस्करी में लिप्त था।

BSF के पास विजन उपकरण थे, जिस कारण वो इन तस्करों को देख पाए। ये भी कहा जा रहा है कि जिस समूह को BSF ने देखा और जिसने जवानों पर हमला किया, वो अलग-अलग थे। जब कंपनी कमांडर ने आकर तलाशी अभियान चलाया तो बीड़ी के 6 बण्डल मिले। अब्दुल्लाह की मौत मुर्शिदाबाद स्थित महेसिल के अस्पताल में हुई है। बता दें कि बांग्लादेश में तख़्तापलट के बाद हिन्दुओं पर हमले की घटनाएँ बढ़ गई हैं। सीमा पर कई पीड़ित हिन्दू इकट्ठा हैं और बॉर्डर खोलने की माँग कर रहे हैं।

‘हम हिन्दुओं की सुरक्षा में विफल रहे’: जिस हिंसा को नकारते रहे भारत के लिबरल उसके लिए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने माँगी माफ़ी, हिन्दू छात्रों से मुहम्मद यूनुस की मुलाकात

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद यूनुस ने हिन्दू छात्र नेताओं के साथ बैठक की है। तख्तापलट के बाद हिन्दुओं पर लगातार हो रहे हमलों के बीच उन्होंने ये कदम उठाया है। बैठक में हिन्दुओं की सुरक्षा को लेकर चर्चा की जाएगी। 52 जिलों में हिन्दुओं पर हमले की सवा 200 के करीब घटनाएँ हो चुकी हैं। अंतरिम सरकार ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। हिन्दू समूहों ने अपनी 8 सूत्रीय माँग मुहम्मद यूनुस के सामने रखी है, जिसमें अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नया कानून बनाना भी शामिल है।

माँग की गई है कि पीड़ित हिन्दुओं को न्याय दिलाने के लिए फास्टट्रैक कोर्ट्स की स्थापना की जाए, हिन्दू कल्याण ट्रस्ट को अपग्रेड कर फाउंडेशन बनाया जाए, शिक्षा बोर्ड को आधुनिक बनाया जाए, शारदीय दुर्गा पूजा के दौरान 5 दिवसीय छुट्टी घोषित की जाए और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय का गठन किया जाए। इससे पहले मुहम्मद यूनुस ने इन घटनाओं को घृणित करार देते हुए युवाओं से अपील की थी कि वो हिन्दू, बौद्ध और ईसाई परिवारों की सुरक्षा करें।

अंतरिम सरकार में गृह विभाग के सलाहकार M शखावत हुसैन ने भी माना है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में चूक हुई है और उन पर हमले हुए हैं। उन्होंने इसके लिए माफ़ी माँगते हुए कहा कि ये जिम्मेदारी सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि बहुसंख्यक मुस्लिमों की है और दोनों अपना फर्ज निभाने में नाकामयाब रहे हैं। बांग्लादेश की सरकार भले माफ़ी माँग रही हो, भारत में मोहम्मद ज़ुबैर, राना अय्यूब, RJ सायेमा और अरफ़ा खानम शेरवानी जैसे लोग मानने को तैयार ही नहीं हैं कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले हुए हैं।

बांग्लादेश में हिन्दू लगातार अपनी सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, साथ ही भारतीय सीमा पर भी उन्होंने पलायन किया है। उधर इस्लामी भीड़ ने 1971 का वो मेमोरियल भी तोड़ डाला, जिसमें पाकिस्तानी सेना को बांग्लादेशियों पर क्रूरता करते हुए दिखाया गया है। इसी के बाद बांग्लादेश का गठन हुआ था। जिस पाकिस्तान के फौजियों ने यहाँ महिलाओं के साथ बलात्कार किया था, अब उसी पाकिस्तान के लिए बांग्लादेश के लोग मूर्तियाँ तोड़ रहे हैं।

क्रिकेटर शिवम दुबे की बीवी का ‘इस्लाम’ जागा, महिला के लिए लिखा- वक्त आ गया है इसकी खबर लेने का: शादी से पहले भी करती थी हिंदूफोबिक पोस्ट लाइक

भारतीय क्रिकेटर शिवम दुबे की बीवी अंजुम खान ने सोशल मीडिया पर महिला कार्यकर्ता व राहुल गाँधी से अक्सर सवाल करने वाली नाजिया इलाही खान के खिलाफ मुस्लिमों को भड़काने का काम किया है। अंजुम ने अपने पोस्ट में मुस्लिमों से अपील की है कि वो लोग नाजिया इलाही का बहिष्कार करें और उनकी खबर लें।

इंस्टाग्राम पर साझा की गई स्टोरी में अंजुम ने लिखा, “नबी की शान पर गुस्ताखी होने पर आपको गुस्सा नहीं आता तो आपका ईमान मर चुका है और अगर आपका ईमान जिंदा है तो रिपोस्ट करिए।” आगे अंजुम खान ने कहा, “सभी साथियों से गुजारिश है अब इस नाजिया इलाही खान की खबर लेने का वक्त आ गया है। मुस्लिमों के खिलाफ बोलते-बोलते ये हमारे आका के बारे में बहुत बेहूदा बातें कर रही है।”

बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब अंजुम ने इस तरह से कट्टर इस्लावादी विचारधारा की मुरीद होने का प्रमाण दिया हो। इससे पहले उनका नाम हिंदू घृणा फैलाने वाले ट्वीट को लाइक करने पर उछला था। साल 2021 में कुछ पोस्ट सामने आए थे जिसे अंजुम ने लाइक किया हुआ था।

इन पोस्टों में से कुछ में लिखा था, “किसी को यूँ ही नहीं मिल जाती अंधभक्ति इस संसार में। इसके लिए पिछ#ड़े पर मुहर लगानी पड़ती है आसाराम के दरबार में।” इसी तरह एक लाइक किए गए ट्वीट में ‘संघियों’ को भला-बुरा कहा गया है और भाजपा को ‘गोबर भक्तों वाली पार्टी’ बताया गया है। साकिब शेख नाम के एक व्यक्ति के जिस ट्वीट को लाइक किया गया है, उसमें हिंदुस्तान को बाबा आदम का देश बताते हुए लिखा है, “तू अपनी माँ से जाकर पूछ किसकी औलाद है। कहीं कोई मुल्ला न निकल जाए।”

अंजुम के ये पोस्ट उस समय ज्यादा चर्चा में आए थे जब भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी शिवम दुबे ने उनसे निकाह किया था। दोनों का निकाह 16 जुलाई 2021 को प्राइवेट समारोह में हुआ था। उसी के बाद AnjumKh60183110 नाम के हैंडल के बारे में दावे हुए थे कि ये शिवम दुबे की पत्नी अंजुम खान का है। इस अकॉउंट को उस समय खुद शिवम दुबे भी फॉलो करते थे इसलिए लोगों ने इसी अकॉउंट द्वारा लाइक पोस्टों को निकालकर सवाल उठाया था।

दलित बच्ची से निकाह कर बना दिया मुस्लिम, अब जमीन में दफन है लाश: अब्बा सहित धराया मुर्तजा, मृतका की विधवा माँ को भी फँसा रखा था

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दलित समाज की एक नाबालिग लड़की के धर्मांतरण और बाल विवाह मामले में पुलिस ने रविवार (11 अगस्त, 2024) को 1 मौलवी सहित 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पीड़िता के पिता की मौत के बाद उसकी माँ को झाँसे में ले कर एक मुस्लिम युवक से बाल विवाह करवाया गया था। बाद में बच्चे को जन्म देने के दौरान पीड़िता की अस्पताल में मौत हो गई थी। मौत के बाद पीड़िता को चुपके से इस्लामिक तौर तरीकों से दफना दिया गया था। इस मामले में पीड़िता की माँ और निकाह करने वाले मुर्तजा को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

यह मामला लखनऊ कमिश्नरेट के दक्षिणी क्षेत्र में आने वाले थाना मोहनलालगंज का है। यहाँ 30 जून 2024 को अनुसूचित जाति (SC वर्ग) के एक व्यक्ति ने पुलिस में तहरीर दी थी। तहरीर देने वाले व्यक्ति ने बताया था कि उनके बड़े भाई की मृत्यु 2 साल पहले हो चुकी है। आरोप है कि मृतक की पत्नी का अवैध संबंध पड़ोस में ही रहने वाले मुर्तजा नाम के युवक से हो गया था। मुर्तजा अक्सर मृतक की पत्नी से मिलने उसके घर आने-जाने लगा। इसी दौरान मुर्तजा की गंदी नजर मृतक की 15 वर्षीया बेटी पर भी पड़ी। वह नाबालिग से निकाह की जिद पर अड़ गया।

मुर्तजा से कथित प्यार के जाल में फँसी नाबालिग की माँ ने आखिरकार हामी भर दी। साल 2023 में नाबालिग से उम्र में कई साल बड़े मुर्तजा का निकाह नाबालिग से हो गया। इस निकाह के साथ पीड़िता को इस्लाम कबूल करवा दिया गया। नाबालिग का निकाह और धर्मांतरण UP के ही बहराइच जिले की एक मस्जिद में हुआ। इस मस्जिद का मौलवी मोहम्मद अहमद इन करतूतों में सक्रिय रूप से शामिल रहा। इस्लाम कबूल करवाने के बाद मस्जिद में ही पीड़िता को नया नाम सानिया दिया गया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

पीड़िता के चाचा ने बताया कि उस समय उन सभी ने धर्मांतरण और बाल विवाह का विरोध किया था। तब आरोपितों ने धमकी देते हुए मुँह बंद रखने के लिए कहा था। निकाह के कुछ ही दिनों बाद नाबालिग पीड़िता गर्भवती हो गई। बच्चे को जन्म देने से पहले की पीड़िता की तबीयत बिगड़ी जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। मौत के बाद पीड़िता को चुपके से इस्लामी तौर-तरीकों से दफना दिया गया। इस बाबत जब शिकायतकर्ता ने हालचाल जानना चाहा तो आरोपितों ने एक बार उसे धमकाया और अपने काम से काम रखने ही हिदायत दी।

आरोप है कि मुर्तजा आपराधिक स्वभाव और हिन्दू लड़कियों पर गंदी नजर रखने वाला इंसान है। इस शिकायत पर पुलिस ने 30 जून, 2024 को ही FIR दर्ज कर ली थी। यह केस IPC की धारा 376 और 504 के साथ SC/ST एवं पॉक्सो एक्ट में दर्ज हुआ है। आरोपितों पर बाल विवाह अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने 2 जुलाई, 2024 को ही आरोपित मुर्तजा और मृतका की माँ को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था।

जाँच के दौरान इन करतूतों में मौलवी मोहम्मद अहमद और मुर्तजा के अब्बा मुश्ताक अली की भी संलिप्तता प्रकाश में आई। रविवार (11 अगस्त) को पुलिस ने इन दोनों आरोपितों को भी दबोच कर जेल भेज दिया। मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।