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अनुपम कुमार सिंह

भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

भाजपा-सेना गठबंधन: उद्धव को नया ‘पोस्टर बॉय’ बनाने वालों ‘तुझे मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ’

अतीत में शिवसेना की बात को गंभीरता से न लेने का दावा करने वाले कुछ तथाकथित पत्रकारों व विश्लेषकों ने सामना में छपने वाले लेखों का शब्दशः भावार्थ कर इसे भगवद् गीता की तरह बाँचना शुरू कर दिया था।

कश्मीर जनमत संग्रह: पाकिस्तान का एजेंडा चला रहे हैं कमल हासन… लेकिन क्यों?

कमल हासन को पिनाराई विजयन के बदले किसी अच्छे इतिहासकार से ट्यूशन लेने की ज़रूरत है। कश्मीर में जिस जनमत-संग्रह की वह बात कर रहे हैं, उसे कभी पाकिस्तान ने ही अस्वीकार कर दिया था।

जागो कैप्टेन जागो, देशहित में सिद्धू को मंत्रिमंडल से बाहर फेंको

आप सेना में रहे हैं कैप्टेन साहब। इस तरह अनजान न बनिए। इस से पहले कि देश आपको दूसरा मनमोहन पुकारे, जनभावना का अपमान करने वाले सिद्धू को अपने कैबिनेट से निकाल बाहर फेंकिए।

2014 में मसूद अज़हर की वापसी और आतंक की स्क्रिप्ट का पुनर्लेखन

आतंकियों को पाकिस्तानी सत्ता के संरक्षण का जीता-जागता उदाहरण। 5 साल पीछे। मसूद अज़हर की वो रैली जहाँ से पठानकोट और पुलवामा हमले की पटकथा का लिखा जाना शुरू हो गया था।

नाम टाइम्स ऑफ ‘इंडिया’ लेकिन काम ‘पाकिस्तान’ वाला; लानत है!

भारत में रह कर पाकिस्तान की भाषा बोलने वालों को यह बताने का समय आ गया है कि आप ऐसी घटिया हरक़त कर के देश की जनता को और उस जनता की मदद से चला रहे अपने व्यापार को ग्रांटेड नहीं ले सकते। अब समय आ गया है।

राष्ट्र-निर्माण नहीं, राष्ट्र-विरोध की पाठशाला बनता जा रहा है AMU

AMU शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा बाक़ी सभी कारणों से सुर्ख़ियों में रहता है। यहाँ बात-बात में साम्प्रदायिक हिंसा भड़क जाती है। देश-विरोधी नारे और राष्ट्र विरोधी गतिविधियाँ तो जैसे यहाँ एक सामान्य बात हो चुकी है।

चिदंबरम इंटरव्यू ‘कांड’: बेइज्जती सहेंगे लेकिन पैरवी उन्हीं की करेंगे

ज्योति मल्होत्रा को पी चिदंबरम ने जैसे धमकी दी, ऐसा अगर भाजपा के किसी मंत्री ने किया होता तो 'लोकतंत्र खतरे में' और 'मीडिया पर अंकुश' या 'सुपर-इमर्जेंसी' जैसा कुछ भयंकर ट्रेंड कर गया होता ट्विटर पर।

भारत में हिन्दू अल्पसंख्यकों को कब मिलेगा उनका हक़? माइनॉरिटीज़ कमीशन का फ़ैसला होगा हिंदुओं के पक्ष में!

लक्षद्वीप में 96%, जम्मू एवं कश्मीर में 68%, असम में 34% और पश्चिम बंगाल में 27% लोग मुस्लिम हैं, लेकिन वो अल्पसंख्यक हैं। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों की जनसंख्या उतनी ही है, जितनी यमन और उज़्बेकिस्तान में।