नेपाल में 17 वर्ष लोकतंत्र की विफलता देखने के बाद जनता वापस राजशाही चाहती है। वह नेपाल को वापस हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहती है और इसके आंदोलन भी हो रहे हैं।
एक समय था कि मजदूरों को पूंजीपतियों और विकास के विरुद्ध भड़का कर कम्युनिस्ट नेतागिरी चमकाया करते थे। अब वह दौर नहीं रहा। कन्हैया की इस राजनीति को बिहार नहीं स्वीकार करने वाला है।
सबसे अधिक दोगलापन तो कुणाल कामरा का ही विक्टिम कार्ड खेलना होगा। आज बोलने की आजादी पर रोने वाला कुणाल कामरा कंगना रनौत का दफ्तर BMC द्वारा गिराए जाने पर अट्टाहास कर रहा था।