उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक प्रतिमा विसर्जन जुलूस में शामिल रामगोपाल मिश्रा की 13 अक्टूबर, 2024 को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी। रामगोपाल मिश्रा को भगवा झंडा लहराने पर गोली मारी गई थी। इस मामले में आधे दर्जन मुस्लिम नामजद किए गए थे। हिंसा की घटना के बाद रामगोपाल मिश्रा के परिजनों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाक़ात की थी। उन्होंने पीड़ित परिवार को इस मामले में त्वरित न्याय का भरोसा दिया था।
घटना के लगभग 6 माह पूरे होने के बाद ऑपइंडिया ने रामगोपाल मिश्रा के परिजनों से बात की है। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दंगाइयों पर कि गई कार्रवाई पर संतोष जताया है। उन्होंने बताया है कि सारे आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। रामगोपाल मिश्रा के भाई हरमिलन मिश्रा ने बताया है कि वह अभी कोर्ट में इस मामले में गवाहियाँ दे रहे हैं। उन्होंने रामगोपाल मिश्रा की पत्नी और बाकी परिवार के विषय में भी जानकारी दी है।
कोर्ट में अभी हो रहे बयान
ऑपइंडिया से मृतक रामगोपाल मिश्रा के भाई हरिमिलन ने बताया, “मामले में मुकदमा दर्ज हो गया था। अभी उस पर सुनवाई होती है। अभी मेरी और भाई की गवाही हो चुकी है। मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। आखिरी बार 9 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। अब अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी।” रामगोपाल मिश्रा की हत्या के मामले के अदालती रिकॉर्ड दिखाते हैं कि अब तक 6 बार इसकी सुनवाई हो चुकी है। इससे सम्बन्धित एक और मुकदमा भी बहराइच कोर्ट में ही चल रहा है।
सारे आरोपित गिरफ्तार
हरिमिलन मिश्रा ने ऑपइंडिया से बताया कि रामगोपाल मिश्रा की हत्या करने वाले अब्दुल हमीद समेत बाकी सारे आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि अब्दुल हमीद और उसके परिजन जमानत का भी प्रयास कर रहे हैं लेकिन वह नहीं उन्हें मिली है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के विषय में पूछने पर उन्होंने बताया, “पुलिस और सरकारी वकील इस मामले को अभी मजबूती से रख रहे हैं। उनकी कार्रवाई पर हमें से हम संतुष्ट हैं।”
रामगोपाल मिश्रा की हत्या के बाद 6 मुस्लिमों को FIR में आरोपित बनाया गया था। इसमें अब्दुल हमीद, सरफराज उर्फ़ रिंकू , फहीम, राजा उर्फ़ साहिल, ननकऊ और साहिल को शुरुआत में आरोपित बनाया गया था। इस मामले में बाद में और भी आरोपित जोड़े गए थे। इन सबकी गिरफ्तारी पुलिस ने कर ली थी।
रामगोपाल की विधवा अब नौकरी के प्रयास में
रामगोपाल मिश्रा की हत्या से मात्र 2 महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी। उन्होंने प्रेम विवाह किया था। ऑपइंडिया से बात करते हुए मृतक रामगोपाल मिश्रा के भाई हरिमिलन ने बताया कि उनकी विधवा भाभी रोली मिश्रा को नौकरी देने की बात कही गई थी। हरिमिलन ने बताया कि वर्तमान उसके लिए वह प्रयासरत हैं। रोली मिश्रा ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं हैं, इसलिए थोड़ा समय लग रहा है, यह भी हरिमिलन ने बताया है। रामगोपाल की पत्नी कुछ दिन अपने घर और कभी मायके में रहती हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह हो गया तो उनकी आजीविका का प्रश्न हल हो जाएगा।
समझौते का प्रश्न ही नहीं उठता
यह पूछने पर कि क्या कोई समझौते का दबाव तो नहीं डाला जा रहा, हरिमिलन मिश्रा ने बताया, “समझौते का तो सवाल ही नहीं उठता। वो लोग ₹1 करोड़ भी दे देंगे तो भी हम किसी प्रकार के समझौते के लिए नहीं मानेंगे। मेरा भाई जिस तरह की बर्बरता से मारा गया है, हमें बस उसके लिए न्याय चाहिए। पैसे लेने से मेरा भाई वापस नहीं आ जाएगा।”
हरिमिलन मिश्रा ने बताया कि अभी तो अब्दुल हमीद या उसकी तरफ से किसी ने उनसे ऐसी बात नहीं की है। उन्होंने यह भी बताया कि कोर्ट में कभी कभार दूसरे पक्ष के लोग समझौते का इशारा करते हैं। हरिमिलन ने कहा कि हमें बस न्याय चाहिए और जल्दी चाहिए।
पिता बीमार, चाहते हैं न्याय
मृतक रामगोपाल मिश्रा के पिता वृद्ध हैं और बीमार रहते हैं। उसने भी ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की हत्या क्रूरता से की गई थी, जिसका दुख लगातार बना रहता है। उन्होंने माँग की कि जल्द कोर्ट अपनी कार्यवाही पूरी करके अब्दुल हमीद और बाकियों को सजा दे। उन्होंने कहा कि अब्दुल हमीद और उसके परिवार को सख्त से सख्त सजा दी जाए और यही उनके मृतक बेटे को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
भगवा झंडा लहराने पर मार दी थी गोली
13 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए बहराइच के महाराजगंज में जुलूस निकल रहा था। इस जुलूस में डीजे आदि बज रहे थे। इसी में रामगोपाल मिश्रा भी शामिल थे। इस जुलूस पर अब्दुल हमीद के घर के पास इस्लामी कट्टरपन्थियों ने पत्थर बरसा दिए थे। जुलूस में शामिल लोगों पर हमला किया गया था। हिंसा के बीच रामगोपाल मिश्रा ने अब्दुल हमीद के घर की छत पर एक भगवा झंडा लगा दिया था। इसी बीच अब्दुल हमीद ने रामगोपाल मिश्रा को गोली मार दी थी। इसकी वीडियो भी वायरल हुई थी।
घटना के बाद सामने आया था कि रामगोपाल मिश्रा की हत्या के बाद भी अब्दुल हमीद और उसके घरवालों ने शरीर के साथ बर्बरता की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नाखून उखाड़ने, करेंट लगाने और आँख के पास नुकीली चीज मारने की बात कही गई थी। हालाँकि, पुलिस ने यह सारी बातें नकार दी थी। अब्दुल हमीद की छत पर इसके बाद खून के धब्बे और कांच के टुकड़े भी मिले थे। घटना के बाद अब्दुल हमीद का परिवार भाग गया था। पुलिस ने इसके बाद एनकाउंटर में कुछ आरोपितों को पकड़ा था।


