आदिनाथ, दीपू साहनी, शोभनाथ साहनी, संतोष, विनोद, पप्पू, लल्लू साहनी जैसे कई और निषाद समाज के लोगों से भी ऑपइंडिया ने बात की, सबने मीडिया में चल रहे 18 दिन से 350 परिवारों के भूखे रहने वाली मनगढंत थ्योरी को नकारा है।
राजदीप को ना ही रिया चक्रवर्ती से और ना ही सुशांत सिंह राजपूत से ही संवेदना है। वह बस TRP की रेस में किसी तरह खुद को खबरों में बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।
लेफ्ट-लिबरल्स को यह सवाल खुद से पूछना चाहिए कि क्या 'माय लाइफ माय रूल्स' का 'वोक' नारा भी सिर्फ पादुकोण या कपूर परिवार की बेटियों के अधिकारों के लिए ही है?
गुप्त सूत्रों से यह खबर भी आ रही है कि पिरंका जी अब अपनी बात से मुकर रही हैं क्योंकि रात में उन्हें माताजी का एक वीडियो कॉल आया और उन्होंने कहा, “अे कीया कार डीया बेटी! असा नेही केना ठा।”