Thursday, July 29, 2021
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फैक्ट चेक: वाराणसी में लॉकडाउन के कारण भूखे 350 नाविक परिवारों और सोनू सूद की मदद की असलियत

"कोरोना से पूरे देश पर असर है इससे इनकार नहीं है लेकिन बनारस में कोई भूख से मर जाए यह नहीं हो सकता। हर साल ही गंगा में पानी बढ़ता है, नावें बंद रहती हैं कुछ समय के लिए, या सीमित मात्रा में चलती हैं। लेकिन इससे रोजी-रोटी की ऐसी भी कोई समस्या नहीं है, जैसा मीडिया में चलाया गया!"

यह सच है कि कोरोना वायरस की महामारी के कारण जारी देशव्यापी बंद के बीच देश का एक वर्ग बेरोजगारी और संसाधनों के लिए परिश्रम कर रहा है, लेकिन इसका फायदा उठाकर मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए कुछ प्रोपेगेंडाबाज, लोगों के रोजगार और उनके पेशे के बारे में कई प्रकार की झूठी कहानियाँ भी गढ़ रहे हैं।

इन्हीं में से सबसे नया फर्जीवाड़ा वाराणसी में नाव चलाकर अपना जीवन यापन करने वाले माझियों को लेकर सामने है। दरअसल, हाल ही में मुख्यधारा की मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में बनारस के माझियों की ‘स्थिति’ के बारे में कहा गया कि प्रतिबंध से कई माँझी परिवारों की आर्थिक स्थिति डगमगाने लगी है। जिस कारण ’84 घाटों में 350 कश्ती चलाने वाले परिवार आज दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं।’

क्या है मामला

कुछ मीडिया संस्थानों ने लिखा कि अपने पेट पालने के लिए माँझी परिवार गहने बेचने को भी मजबूर हैं। यही नहीं, बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद से जब कुछ लोगों ने इस बारे में अपील की तो उन्होंने कहा कि मदद पहुँच जाएगी और अब वो भूखे नहीं रहेंगे।

दैनिक भास्कर ने तो वाराणसी के निषाद समाज की इस झूठी कहानी की शुरुआत ही इस लाइन के साथ की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में नाविकों पर दोहरी मार पड़ी है। इसमें नाविकों के रोजगार ठप होने का जिक्र करते हुए उनके भूखे रहने की नौबत जैसी तमाम फर्जी बातें भी शामिल की गईं हैं। नवभारत टाइम्स ने भी सोनू सूद के मदद की खबर वैसे ही चलाई।

350 नाविकों के भूखे रहने की अफवाह और सोनू सूद की मदद को मीडिया ने प्रकाशित किया है

दैनिक भास्कर की ही रिपोर्ट के अनुसार, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के नाविकों पर दोहरी मार पड़ी है। पहले लॉकडाउन के चलते गंगा नदी में नौकायन ठप रहा तो अब बाढ़ के चलते 15 सितंबर तक के लिए नाव संचालन पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में काशी के 350 नाविक परिवारों के सामने पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है। कोई कर्ज लेकर बच्चों के लिए निवाले का इंतजाम कर रहा है तो कोई पत्नी के गहने बेच रहा है।”

अब वास्तविकता वाराणसी का निषाद समाज ऑपइंडिया के सामने रख चुका है कि उनके साथ कभी भी भूखे रहने और किसी बाहरी आदमी से अन्न के लिए मदद माँगने की आवश्यकता महसूस ही नहीं हुई, समाज और संस्थाएँ मजदूर वर्ग की स्वतः मदद को तत्पर रहीं और 350 नाविकों के परिवार की भुखमरी को लेकर चलाई जा रही बातें कोरोना के समय का लाभ उठाते हुए गढ़ी हुई सिर्फ एक और अफवाह है।

क्या है सच्चाई

जब ऑपइंडिया ने वाराणसी के इन नाविकों तक पहुँचकर वास्तविकता जानने का प्रयास किया तो नाविकों ने इन बातों का खंडन किया। हमने वहाँ के स्थानीय पार्षद और उपसभापति नरसिंह दास से भी बात की जो उस समय भी नायब तहसीलदार के साथ ज़रूरतमंदों को राशन बाँटने में लगे थे।

नरसिंह दास ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “कोरोना से पूरे देश पर असर है इससे इनकार नहीं है लेकिन बनारस में कोई भूख से मर जाए यह नहीं हो सकता। हर साल ही गंगा में पानी बढ़ता है, नावें बंद रहती हैं कुछ समय के लिए, या सीमित मात्रा में चलती हैं। लेकिन इससे रोजी-रोटी की ऐसी भी कोई समस्या नहीं है, जैसा मीडिया में चलाया गया!”

निगम पार्षद नरसिंह दास ने यहाँ तक कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उनके क्षेत्र में आने वाले घाट एरिया में ऐसी कोई समस्या काशी में नहीं आई है, जिसे लेकर मीडिया और सोनू सूद मदद पहुँचाने की बात कर रहे हैं। यहाँ के लोग खुद ही सक्षम हैं जिसे ज़रूरत पड़े खड़े हो जाते हैं साथ देने। समाज के बाकी लोग भी ज़रूरतमंदों की मदद के लिए एक पैर पर खड़े हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए उन्होंने इस बात की तरफ भी हमारा ध्यान आकर्षित किया कि पिछले 6 सालों में वाराणसी में पर्यटन बढ़ा है जिससे लगातार बनारस के लोगों की आय बढ़ी ही है।

आदिनाथ साहनी, दीपू साहनी, शोभनाथ साहनी, संतोष, विनोद, पप्पू, लल्लू साहनी जैसे कई और निषाद समाज के लोगों से भी ऑपइंडिया ने बात की, सबने मीडिया और सोशल मीडिया में चल रहे 18 दिन से 350 परिवारों के भूखे रहने वाली मनगढंत थ्योरी को नकारा है। कहा- बनारस में संस्थाएँ और सरकार लॉकडाउन के शुरुआत से ही राशन और खाने का प्रबंध कर रही है। हमें कभी भी ऐसी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।

आदिनाथ साहनी ने ऑपइंडिया को दिए बयान में कहा – “मैं आदिनाथ साहनी, नावचालक! अफवाह फैलाने वाले तो फैलाते हैं कि मल्लाह लोग खाए बिना मर रहे हैं लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है।”

वाराणसी के कथित सामाजिक कार्यकर्ता दिव्‍यांशु उपाध्‍याय ने नाविक परिवारों की ‘हालत’ की जानकारी अभिनेता सोनू सूद को ट्वीट कर दी थी। दिव्‍यांशु उपाध्‍याय ने ट्विटर पर लिखा, “वाराणसी के 84 घाटों में 350 कश्ती चलाने वाले परिवार आज दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं। इन 350 नाविक परिवारों की आप आखिरी उम्मीद हो। गंगा में बाढ़ आने के कारण और मुश्किलें इनकी बढ़ गई हैं। काशी में 15 से 20 दिन तक इनके बच्चों को भूखे पेट न सोना पड़े।”

इस पोस्ट को संज्ञान लेकर बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने तुरन्त प्रतिक्रिया दी और भरोसा दिया कि उन तक आज मदद पहुँच जाएगी। लेकिन निषाद परिवारों से जब ऑपइंडिया ने बात की तो उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में उन्हें कभी भी किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हुई है और निषाद समाज जब भी जरुरत हुई मदद मिलती रही है, राशन कार्ड पर राशन मुफ्त में मिला ही है, जिन परिवारों को ज़रूरत थी ले आए। बाकी सब सक्षम हैं, देश के साथ हर आपदा झेल जाने के लिए। ऐसी कोई बात नहीं है।

भाजपा कार्यकर्ता नवीन कपूर ने भी वाराणसी के नाविकों में से ही निषाद परिवार के एक सदस्य भारत निषाद के बयान का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “माँ अन्नपूर्णा एवं बाबा विश्वनाथ के इस नगरी में कोई भूखा नहीं सो सकता है। अतः काशी में निषादों के भूखा सोने की गलत अफवाह फैलाई गई है जो पूर्णतया गलत है। काशी का निषाद समाज माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हजारों लोगों को भोजन कराने में सक्षम है।

इस बयान में भारत निषाद कह रहे हैं, “मेरा नाम भारत निषाद, काशी का रहने वाला। ये जो अभी अफवाह उड़ाई जा रही है कि वाराणसी में निषाद भूखे सो रहे हैं यह गलत है। बाबा विश्वनाथ और माँ अन्नपूर्णा के शहर में कोई भी प्राणी भूखा नहीं सोता है। और माननीय प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र में हम बहुत अच्छा जीवन जीते आए हैं और लॉकडाउन में हमें बहुत मदद मिली है। हम उनकी सराहना करना चाहते हैं और जो ट्वीट हुआ है कि 350 निषाद परिवार भूखे सोए हैं, या उनकी मदद करने के लिए कोई आगे नहीं आया है, यह एकदम गलत है। हम लोग तहेदिल से प्रधानमंत्री जी के सहयोग का स्वागत कर रहे हैं।”

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र का दुष्प्रचार है पहला मकसद

वास्तव में, मीडिया द्वारा निषाद समाज को भूखा और बेसहारा साबित करने के इस प्रयास के पीछे एक प्रमुख कारण यह जताना है कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और इसके बावजूद भी वहाँ कोरोना वायरस के दौरान लोग रोजाना की दिनचर्या में भी मुसीबतों से जूझ रहे हैं।

कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान कई वामपंथी मीडिया संस्थानों ने वाराणसी को लेकर कई प्रकार की मनगढ़ंत कहानियाँ भी प्रकशित कीं। इन्हीं में से एक फर्जी रिपोर्ट के लिए प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘दी वायर’ की एक पत्रकार पर एक अनुसूचित जाति की महिला द्वारा भी दलित उत्पीड़न का केस दर्ज किया गया था।

इस महिला ने आरोप लगाया था कि ‘दी वायर’ ने उसे अनुसूचित जाति का होने के कारण ही उन्हें भूखा और बेसहारा कहकर मनगढ़ंत रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसने उनकी सामाजिक छवि को ठेस पहुँचाया है।

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

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