Friday, September 18, 2020
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पिंजरा तोड़ हाइ-क्लास वाले, बेल मत दीजिए… भाग जाएँगे: HC से दिल्ली पुलिस, भड़काऊ वीडियो पर TheWire ने फैलाया झूठ

प्रोपेगेंडा वेबसाइट TheWire की हाल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देवांगना कलीता से संबंधित भड़काऊ भाषण पुलिस के पास नहीं है। जबकि दिल्ली पुलिस ने 5 जनवरी और 23 फरवरी के दो वीडियो कोर्ट को दिखा कर...

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को दिल्ली पुलिस को उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में केस डायरी पेश करने की अनुमति दी है। हाईकोर्ट ने पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य देवांगना कलीता और नताशा नरवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को यह निर्देश दिया।

हाईकोर्ट में दिल्ली पुलिस द्वारा 29 अगस्त को केस डायरी प्रस्तुत की जाएगी और सुनवाई 31 अगस्त को होगी। इससे पूर्व, 14 अगस्त को अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को निर्धारित की थी।

इस मामले में देवांगना कलिता और समूह की एक अन्य सदस्य नताशा नरवाल को इस साल मई में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत उन पर मामला दर्ज किया, जिसमें दंगा, गैरकानूनी सभा आयोजित करने और हत्या का प्रयास संबंधी धाराएँ शामिल हैं।

उन पर दंगों में ‘पूर्व-नियोजित साजिश’ का कथित तौर पर हिस्सा होने के आरोप में, सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक अलग मामले में कड़े आतंकवाद-रोधी कानून- गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। नताशा और देवांगना ने साजिश रच के 66 फूटा सड़क को ठप्प करवाया था। दोनों का काम जाफराबाद तक ही सीमित नहीं था। इन्होंने कई अन्य इलाकों में घूम-घूम कर संप्रदाय विशेष के लोगों को भड़काया और नागरिकता कानून की गलत व्याख्या कर संप्रदाय विशेष को दंगों में भाग लेने के लिए भी उकसाया था।

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नए नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़कने के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में कई सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिनमें कम से कम 53 लोग मारे गए थे और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।

देवांगना कलिता के खिलाफ 4 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि नताशा तीन मामलों में आरोपित है। निचली अदालत ने 14 जून को नताशा और देवांगना कलिता की जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि आवेदनों में कोई ठोस आधार नहीं है और आरोप-पत्र से यह स्पष्ट है कि जाँच अभी लंबित है और इसे अन्य आरोपितों के खिलाफ भी दायर किया गया है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने पिंजरा तोड़ संगठन की सदस्य देवांगना कलीता मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से आग्रह किया कि देवांगना कलीता और उसके सहयोगी को कुछ आधारों पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने इस दलील में कहा है कि यह हाईक्लास शिक्षित परिवारों से जुड़े लोग हैं, जिन्होंने सोच-समझ कर लोगों को भड़काया और संप्रदाय विशेष की भीड़ का इस्तेमाल किया। और जमानत मिलने पर यह जाँच के पहले ही चरण में भाग भी सकते हैं। पुलिस का कहना है कि यह मामला दंगों की कई घटनाओं में से एक है, जो 23 से 26 फरवरी के बीच पूर्वोत्तर दिल्ली में दर्ज की गईं, जिसमें 53 लोग मारे गए, 581 लोग घायल हुए।

पुलिस ने कहा है कि इन दंगों के संबंध में 751 एफआईआर दर्ज की गई हैं। आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद भी अभियुक्त देवांगना कलीता को इस कारण भी जमानत नहीं दी जा सकती है क्योंकि वर्तमान में हालातों में अभी तक बहुत बदलाव नहीं आया है और जाँच जारी हैं और आरोपित को जाँच के प्रथम चरण में जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि जैसा कि चार्जशीट में विस्तृत रूप से कहा गया है, यह स्पष्ट रूप से सामने आया है – वर्तमान आवेदक, देवांगना कलीता दंगों की मुख्य और प्रमुख साजिशकर्ता है और घटना के वक्त प्रदर्शन स्थल पर वह जाफराबाद मेट्रो स्थल के नीचे 66 फुटा स्पॉट रोड ब्लॉक साइट/विरोध प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थी। पुलिस के अनुसार, देवांगना शुरुआत से ही दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे यानी फरवरी 22, 2020 से हिंसक भीड़ के वापस जाने तक यानी, फरवरी 25, 2020 की देर शाम लगभग 7:00 बजे तक भीड़ का नेतृत्व कर रही थी।

पुलिस ने कहा है कि जमानत की वर्तमान आवेदक देवांगना कलीता इस प्रकार इन दंगों का मुख्य चेहरा थी, जिसने संगठित तरीके से अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर भीड़ जुटाई और स्थानीय संप्रदाय विशेष की भीड़ और आम जनता को सक्रियता से दंगे भड़काने के लिए उकसाया। इसीका नतीजा था कि भीड़ ने गोलियाँ चलाईं और पथराव किया, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर बोतलें आदि फेंकीं और यह जमानत की आवेदक देवांगना कलीता द्वारा आपराधिक मानसिकता से लगाए गए बल का ही परिणाम था, जिससे पुलिस और जनता को गंभीर चोटें आईं।

दिल्ली पुलिस ने माननीय उच्च न्यायलय के सामने अपना पक्ष रखते हुए लिखा है कि आरोपित को जिन कारणों से जमानत नहीं दी जानी चाहिए, वो कुछ इस प्रकार हैं –

  1. जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे 66 फूटा रोड पर विरोध प्रदर्शन स्थल पर वह मौजूद थी, तब तक भी वहाँ पर हालात सामान्य थे।
  2. 24 फरवरी को जिस जगह पर देवांगना कलीता भीड़ का नेतृत्व कर रही थी, वहीं शाहरुख पठान नाम का युवक बन्दूक तानकर पुलिस की ओर बढ़ा और उसने फायरिंग की। जिसे कि जाफराबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया।
  3. 5 जनवरी और 23 फरवरी को दिए गए भाषणों की वीडियो साक्ष्य में पिंजरा तोड़ के सदस्यों को भड़काऊ भाषण देते देखा गया है।
  4. इन्होने लोगों को हिंसक होने, लाठी और फायर आर्म्स से पुलिस से मुठभेड़ करने के लिए लोगों को उकसाया। वह दंगाइयों से लगातार सम्पर्क में थी।
  5. आरोपित देवांगना कलीता और उनके सहयोगी गुल्फिशा, नताशा, सुहैल, अदनान, तस्लीम, शादाब, गुड्डू चौधरी, फैजान और कासिम अंसारी की पहचान की गई है। इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। देवांगना की रूममेट नताशा ने मई 05, 2020 को अपने बयान में इस मामले में अपनी उपस्थिति को स्वीकार किया है।
  6. देवांगना और उनके सहयोगियों को दिसम्बर 2019 में ही पूर्वोत्तर दिल्ली में बैठकें और कैंडल मार्च करते हुए देखा गया।
  7. संप्रदाय विशेष के लोगों से सम्पर्क कर नामी चेहरों के जरिए उन्हें नागरिकता कानून के सम्बन्ध में गलत जानकारी दी और कहा कि इस कानून से उनको देश से भगा दिया जाएगा।

हालाँकि, प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देवांगना कलीता की ज़मानत याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट के उनके कथित भड़काऊ भाषण के वीडियो माँगने पर पुलिस ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई वीडियो नहीं है।

जबकि, दिल्ली पुलिस द्वारा देवांगना कलीता की जमानत रद्द करने के लिए जो तर्क दिए गए हैं, उसमें इस बात का स्पष्ट जिक्र किया गया है कि पुलिस के पास दो अलग-अलग दिनों – जनवरी 05, 2020 और फरवरी 23, 2020 को घटनास्थल के वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।

सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार 05 जनवरी और 23 फरवरी के विरोध प्रदर्शन के वीडियो बरामद कर लिए गए हैं। 5 जनवरी को CAA-NRC के विरोध में दिए गए उसके (देवांगना कलीता) शुरुआती भाषण और विरोध प्रदर्शन के लिए दिए गए भड़काऊ भाषण इसके साथ संलग्न हैं।

इससे पहले की एक सुनवाई में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि उनके पास देवांगना कलीता के 24 और 25 फरवरी को हुए दंगों से पहले कथित तौर पर लोगों को भड़काने के वीडियो हैं और उनके 22 तथा 23 फरवरी के भी वीडियो हैं, जब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे थे।

पुलिस ने कहा है कि वीडियो क्लिप्स, चश्मदीदों के बयान और जमानत याचिका दायर करने वाली आरोपित के कॉल रिकॉर्ड विवरण (CDR) से भी यही नतीजे निकले हैं कि वह उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान भी दंगाइयों, मास्टर माइंड, उपद्रवियों, विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं, विभिन्न विरोध प्रदर्शन स्थलों के सूत्रधारों और दंगों के मुख्य षड्यंत्रकारियों के सम्पर्क में थे।

ऐसे में, द वायर का यह दावा, कि पुलिस ने देवांगना कलीता के वीडियो साक्ष्य होने से इनकार किया, द वायर के इरादों पर संदेह प्रकट करता है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने अपने जवाब में लिखा है कि आरोपित देवांगना कलीता ने वीडियो साक्ष्यों की जाँच में भी उनका सहयोग नहीं किया है और अपनी जमानत के लिए दायर याचिका के लिखित जवाब में देवांगना के द्वारा जो वीडियो दिया गया है, उसमें भी घटना के चश्मदीद गवाह इंस्पेक्टर मिथिलेश को देखा जा सकता है। इसके साथ ही, ट्विटर पर मौजूद 23 फरवरी के वीडियो में भी देवांगना की मौजूदगी और भीड़ पुलिस के होने पर भीड़ को भड़काने वाले उसके बयान देखे जा सकते हैं।

पुलिस ने अपने जवाब में कहा है कि देवांगना के मोबाइल फोन से बरामद जानकारी के अनुसार यह भी पता चला है कि वह पूर्वोत्तर दिल्ली के दंगाइयों के साथ लगातार और सीधे सम्पर्क में थी। पुलिस द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया है कि स्टेटस रिपोर्ट में जिन तथ्यों को वर्णित किया गया है, उससे भी स्पष्ट है कि देवांगना प्रथम दृष्टया आरोपित हैं।

देवांगना कलीता की जमानत याचिका रद्द किए जाने की इस अपील में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि उसे इस कारण भी जमानत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि आरोपित को यदि जमानत दे दी जाए, तो वह भाग सकती है।

इसके अनुसार, आरोपित देवांगना असम की निवासी है और उसका पति यूनाइटेड किंगडम में रहता है। वह खुद दिल्ली में बतौर किराएदार रह रही है। यह पाया गया है कि देवांगना का इस सोसायटी में कोई परिवार और सम्बन्धी नहीं है और ऐसे में यदि उसे जमानत दे दी जाती है तो वह दिल्ली दंगों की जाँच के बीच ही भाग सकती है, जिससे कि जाँच प्रक्रिया बाधित होगी।

पुलिस का कहना है कि चश्मदीदों को यह भय है कि आरोपित देवांगना जमानत पर यदि बाहर आती है तो वह और उसका समूह उनके लिए खतरा पैदा कर सकते हैं क्योंकि वह गवाह इस समूह के खिलाफ बयान दे रहा है। उनकी माँग है कि उनकी पहचान गोपनीय रखने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाए। पुलिस ने कहा है कि गवाहों को अपनी सुरक्षा का भय है और उन्हें लगता है कि ये आरोपितों के बाहर आने के बाद उन्हें निशाना बना सकते हैं।

इसके साथ ही, आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस ने लिखा है कि कॉलम संख्या 11 में वर्णित आरोपित (देवांगना कलीता) हाइक्लास शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने जो कुछ भी किया, वह यह जानते हुए किया कि उनके काम से समाज में हलचल पैदा होगी और साम्प्रदयिक सौहार्द भी ख़राब होगा।

इसके अलावा उन्हें यह भी आभास था कि उनके कारणों से राष्ट्रीय राजधानी की शांति भी भंग होगी। अपने गलत इरादों के साथ ही आरोपितों ने ऐसी जगहों को चुना, जहाँ संप्रदाय विशेष की आबादी निवास करती है, जहाँ मस्जिद भी हैं और हिन्दू आबादी भी उसके पास ही रहती है।

उन्होंने संप्रदाय विशेष के समूह बनाने शुरू किए। इसके लिए सब्जी विक्रेता, संप्रदाय विशेष की महिलाएँ, ढाबा व्यापारी आदि चुने गए और उन तक नागरिकता कानून और जनसंख्या रजिस्टर की गलत व्याख्या की गई, उनसे कहा गया कि यदि ये कानून लागू हो गए तो उन सब को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।

पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र के अनुसार, पिंजरा तोड़ समूह की एक्टिविस्ट नताशा और देवांगना ने संप्रदाय विशेष के लोकल लोगों को प्रभावित करने के लिए प्रभावशाली चेहरों, स्थानीय नेताओं की मदद ली। इसके लिए वो गुल्फिशा खातून और अन्य देश विरोधी तत्वों से मुलाकात की, जहरीले भाषणों से लोगों के मन में डर पैदा किया और उन्हें हिंसा के लिए उकसाया।

दिल्ली पुलिस ने माननीय उच्च न्यायलय से निवेदन किया है कि इन सभी आधारों पर आरोपित पिंजरा तोड़ संगठन के सदस्यों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही, पुलिस ने कहा है कि अभी जाँच जारी है और उन चेहरों को भी सामने लाया जाएगा जो दिल्ली दंगों की साजिश में शामिल थे और अब तक भी छुपे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि सीएए के विरोध में उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में पिंजरा तोड़ की सदस्य एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा देवांगना कलीता और नताशा नरवाल के अलावा जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और गुलफिशा खातून, कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ, जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर, मीरान हैदर, जामिया एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा-उर-रहमान, आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, कार्यकर्ता खालिद सैफी और पूर्व छात्र नेता उमर खालिद शामिल हैं, जिन पर आतंकवाद निरोधक कानून-गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया है।

उमर खालिद को इस मामले में अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में दावा किया था कि उमर और उसके साथियों ने इलाके में लोगों को दंगा भड़काने के लिए उकसाया था और यह पूर्व नियोजित साजिश थी। हाईकोर्ट ने इससे पहले नताशा नरवाल की जमानत अर्जी को खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था।

इस सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि उस दौरान हर तरफ मीडिया की मौजूदगी थी और वे रिकॉर्डिंग कर रहे थे। न्यायाधीश ने कहा कि मैं जानना चाहता हूँ कि उन्होंने क्या कहा, जिससे भीड़ भड़की। ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस ने नताशा नरवाल तथा देवांगना कलीता को मई, 2020 में दंगा मामले में गिरफ्तार किया था।

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

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