Saturday, July 24, 2021
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ये पतित गैंग कंगना की 2009 की तस्वीरें क्यों दिखा रहा है? ‘माह लाइफ माह रुल्ज’ का वोक नारा भी वामपंथियों के लिए ही है?

सवाल ये है कि ऐसे समय में, जब कंगना रनौत रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत पाए गए एक अभिनेता के पक्ष पर सिर्फ और अधिक जानकारी का मुद्दा उठा रही हैं, उन्हें ही निशाना बनाकर यह गैंग क्या साबित करना चाहता है? जबकि कंगना रनौत तो सिर्फ अपनी फिल्म के निर्देशक के साथ अपनी ही फिल्म की सक्सेज पार्टी में बैठी हुई हैं तो फिर इस फोटो को इसे शुद्ध संस्कारी जैसे विशेषणों से जोड़कर सामने रखने का क्या उद्देश्य हो सकता है?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद इसे ‘आत्महत्या’ साबित करने का प्रयास शुरू से ही जारी रहा। सुशांत सिंह की मौत की स्पष्ट जाँच और इसके सम्भावित कारणों पर सवाल उठाने वाले कुछ लोगों में से एक बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत भी थीं। कंगना रनौत ने अपना उदाहरण देकर भी यह सन्देश देने का प्रयास किया कि बॉलीवुड वास्तव में कथित ‘बाहरी’ लोगों के लिए किस प्रकार का विषैला व्यवहार करता है।

ये कंगना रनौत ही थी, जिसने बिना बॉलीवुड में अपने भविष्य की चिंता किए ही इसके भीतर की उन तमाम विकृतियों के बारे में लिखना और बोलना शुरू किया, जिसका शिकार न जाने कितने ही चेहरे इसकी शुरुआत से ही होते आए हैं। उन्होंने बॉलीवुड में व्याप्त भाई-भतीजावाद यानी, नेपोटिज्म पर भी बहस छेड़ी जिस कारण उन्हें सबसे पहले बॉलीवुड निर्देशक और रिया चक्रवर्ती के करीबी महेश भट्ट की बेटी द्वारा भी निशाना बनाया गया।

यही कुछ वजहें हैं कि अब सोशल मीडिया का वह गैंग जो खुद के ‘लिबरल’ होने का दावा करता आया था, भी अब अपने केंचुली से बाहर निकलकर कंगना रनौत की छवि को उन्हीं आधारों पर धूमिल करने का प्रयास कर रहा है, जिन आधारों पर वह आज से पहले महिला अधिकारों के साथ खड़े होने का दिखावा करते आए थे।

कंगना रनौत के मुखर होते ही उन्हें अब मीडिया से लेकर इन्टरनेट का कथित वाम-उदारवादी वर्ग ‘स्लट शेमिंग’ की घटिया हरकत पर उतर आया है। इसमें सबसे नया नाम जुड़ा है इस्लामिक प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ के संस्थापक मोहम्मद जुबैर का!

मोहम्मद जुबैर और उसका गैंग, जिसकी पहली पहचान ही बच्चियों की तस्वीरों को सार्वजानिक करने, उन्हें सार्वजानिक ट्रोलिंग, गाली और धमकियों के लिए छोड़ देना है, अब कंगना रनौत की 2009 की तस्वीरें शेयर कर रहा है। इस तास्वीर में कंगना रनौत दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती के करीबी महेश भट्ट के साथ नजर आ रही हैं।

आर भादुरी ने कंगना रनौत की महेश भट्ट के साथ की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा है, “दक्षिणपंथी हेट एकोसिस्टम कुछ दिन पहले रिया चक्रवर्ती की महेश भट्ट के साथ की कुछ तस्वीरें शेयर कर रहा था। अब ये उन्हीं की शुद्ध संस्कारी कंगना रनौत की राज-2 की सक्सेज पार्टी की कुछ तस्वीरें हैं।” इस ट्वीट के साथ ही आर भादुरी ने ‘आँख मारने वाली इमोजी’ का भी इस्तेमाल किया है।

इसी ट्वीट पर इस्लामिक प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ के संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने भी कुछ और तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा है कि ये राज-2 फिल्म की सक्सेज पार्टी की तस्वीरें हैं।

सवाल ये है कि ऐसे समय में, जब कंगना रनौत रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत पाए गए एक अभिनेता के पक्ष पर सिर्फ और अधिक जानकारी का मुद्दा उठा रही हैं, उन्हें ही निशाना बनाकर यह गैंग क्या साबित करना चाहता है? जबकि कंगना रनौत तो सिर्फ अपनी फिल्म के निर्देशक के साथ अपनी ही फिल्म की सक्सेज पार्टी में बैठी हुई हैं तो फिर इस फोटो को इसे शुद्ध संस्कारी जैसे विशेषणों से जोड़कर सामने रखने का क्या उद्देश्य हो सकता है?

जबकि, इन लोगों को तो उन तस्वीरों पर आश्चर्य प्रकट करना चाहिए, जिनमें ऑड-इवन की तर्ज पर महेश भट्ट को अपना पापा जैसा बताने वाली रिया चक्रवर्ती उनकी गोद में बैठी हुई या फिर उनके साथ बेहद आपत्तिजनक स्थिति में नजर आती हैं।

एक ओर रिया चक्रवर्ती मीडिया मैनेजमेंट और प्रायोजित इंटरव्यू का सहारा लेकर एक ऐसे व्यक्ति की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रही है, जो कि अब उसके द्वारा कही गई बातों और आरोपों पर स्पष्टीकरण तक नहीं दे सकता, वहीं उसका पक्ष रखने वाले लोगों के कपड़ों, उसकी भाषा और उसके करियर पर सवाल खड़े कर उसे भी फ़िल्टर कर दिए जाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।

दूसरी बात, जो कि वाम-उदारवादियों के दोहरे चरित्र को भी स्पष्ट करता है, वो ये कि जो वाम-उदारवादी वर्ग ‘माय लाइफ माय रूल्स’ जैसे नारों का इस्तेमाल महिला अधिकारों के समर्थन में होने का दिखावा करते समय किया करते थे, वही आज कंगना रनौत के कपड़ों और उसकी बेहद अप्रासंगिक तस्वीर के जरिए उन पर ‘शुद्ध संस्कारी’ जैसे तंज कसने का प्रयास कर रहे हैं।

इन उदारवादियों के मसीहाओं को यह सवाल खुद से भी पूछना चाहिए कि क्या इन्हीं लिबरल्स द्वारा गढ़ा गया, इन्हीं के द्वारा सत्यापित किया गया महिला अधिकारों का स्लोगन ‘माय लाइफ माय रूल्स’ का ‘वोक’ प्रगतिशील नारा भी सिर्फ पादुकोण या कपूर परिवार की बेटियों के अधिकारों के लिए ही है?

यह दोहरा चरित्र ही सोशल मीडिया पर बैठे वाम-उदारवादियों की पहली पहचान है। कंगना रनौत के करियर के बारे में भी लोग यह कहते नजर आ रहे हैं कि वह लोकप्रियता के लिए इस विषय को भुना रही हैं। जबकि, कंगना रनौत बॉलीवुड के साथ अपने शुरूआती दिनों के कड़वे अनुभवों को खुद भी स्वीकार कर चुकी हैं और उन्होंने कहा है कि वह इन पर अभी खुलकर बात करने को भी राजी हैं।

इसके अलावा, कंगना रनौत के करियर और लोकप्रियता की ही अगर बात करें तो कंगना की पहचान भारतीय सिनेमा में सबसे ज्‍यादा फीस पाने वाली अभिनेत्री के अलावा 5 बार फोर्ब्स इंडिया की टॉप 100 सेलीब्रिटीज की लिस्‍ट में जगह पाने वाली सफल अभिनेत्री के रूप में भी रही है।

यह भी एक और हकीकत है कि कंगना को अपनी फिल्मों के लिए जितने राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं, उतनी शायद उनकी निंदा करने और उनके करियर पर सवाल उठाने वालों के साथ ही ट्विटर ट्रोल और पार्ट टाइम अभिनेत्रियों के पास कुल फ़िल्में नहीं होंगी।

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

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