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श्रवण शुक्ल

I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

गणतंत्र दिवस को बनाया शोक दिवस, हिंदी पर की घटिया राजनीति और 70+ छात्रों की मौत: जानें कैसे 61 साल पहले भाषाई घृणा फैलाकर...

डीएमके ने इसे उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत का रंग दे दिया, जबकि कॉन्ग्रेस ने अपने विरोध को हिंदी विरोध से जोड़कर सत्ता बचाने की कोशिश की।

286 किलो वजन, 08 फीट लंबाई, पंच धातु से निर्मित… क्या है ‘कोदंड’ जो अजानबाहु को किया समर्पित: जानिए इसके बारे में क्या कहते...

पंचधातु से बना यह धनुष ओडिशा से भव्य शोभायात्रा के साथ अयोध्या पहुँचा। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इसे विधि-विधान से स्वीकार किया।

बीएमसी चुनाव 2026 में कॉन्ग्रेस ने कैसे डुबोई ठाकरे परिवार की लुटिया, जानें- अगर ‘पंजे’ ने नहीं छुड़ाया होता हाथ, तो क्या हो सकते...

कॉन्ग्रेस के करीब 2.4 लाख वोट ऐसे थे, जो गठबंधन में शिवसेना-UBT उम्मीदवारों को मिलते थे। इससे 20 से 25 प्रतिशत वार्डों में नतीजे बदल सकते थी।

बीजेपी में कैसे होता है राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव: जानें- प्रक्रिया, नियम, वोटर और अब तक के अध्यक्षों की पूरी सूची

बीजेपी के पार्टी संविधान की धारा-19(3) के अनुसार उम्मीदवार को कम से कम 15 साल प्राथमिक सदस्य और करीब 12 साल तक सक्रिय सदस्य रहना जरूरी है।

मुस्लिम वोटबैंक की नई दिशा, कॉन्ग्रेस की छाया से निकलकर ‘अपनी’ पार्टियों की ओर बढ़ते कदम: महाराष्ट्र में दिखा ट्रेलर, असम-पश्चिम बंगाल में दिखने...

क्या भारत में अब तक कथित अल्पसंख्यक होने का ढोंग कर रहा मुस्लिम वोटबैंक अब पूरी तरह से अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है?

उस पंजाब केसरी को धमका रही AAP सरकार, जिसके 51+ पत्रकारों को मार डाला था खालिस्तानी आतंकियों ने, फिर भी लिखता रहा उनके खिलाफ

तमाम हमलों के बावजूद आज भी पंजाब केसरी राष्ट्रवादी रिपोर्टिंग करता है। वो तमाम चुनौतियों के बीच खालिस्तानी गतिविधियों के खिलाफ खड़ा है।

बाढ़ हो या चक्रवात… हर राज्य को सबसे पहले भारतीय सेना की ही आती है याद: जानें आपदा के समय आर्मी कैसे निभाती है...

भारतीय सेना देश के हर बड़े संकट में पहली पंक्ति की रक्षक बनकर उभरती है। प्राकृतिक आपदाओं से लेकर आंतरिक अशांति तक सबसे पहले सेना याद आती है।