वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।
डेढ़ साल की थीं भाषा सुंबली जब अपनी माँ की गोद में रहते हुए उन्हें कश्मीर घाटी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। 19 जनवरी 1990 की उस भयावह रात को अब 31 साल बीत गए हैं।
कॉन्ग्रेस को शाहरुख याद नहीं है। लेकिन, जामिया में गोली चलाने वाले नाबालिग का चेहरा दिखाने से उसे गुरेज नहीं। क्यों? सिर्फ इसलिए कि वह नाबालिग एक हिंदू था।