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जयन्ती मिश्रा

जब 4 दिन में स्मॉग से मरे 12000 लोग: वे सॅंभल गए, लेकिन हम दिल्ली वाले कब सीखेंगे

ये वाकया लंदन के सबसे बड़े नागरिक संकटों में गिना गया। जिसके कारण 2 लाख से ज्यादा लोग बीमार पड़े और 12,000 लोगों से ज्यादा की जानें गईं। तबाही के इस धुएँ को वहाँ ग्रेट स्मॉग ऑफ लंदन का नाम दिया गया।

ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव: पाकिस्तान से आए हिंदू बच्चों को स्कूल ने निकाला, केजरीवाल सरकार में अनसुनी फरियाद

अपने माता-पिता के साथ इसी साल 14 मई को पाकिस्तान से आए तीन बच्चों के भविष्य पर मॅंडरा रहा संकट। दिल्ली के एक सरकारी स्कूल ने 5 जुलाई को उन्हें एडमिशन दिया। 8 जुलाई से क्लास अटेंड करने की इजाजत भी मिली। लेकिन, 14 सितंबर को स्कूल से यह कह कर निकाल दिया गया कि उनकी उम्र ज्यादा है।

बिरयानी बैन, सख्त लौंडे बनेंगे अब PAK खिलाड़ी: कोहली के चिप्स से आया मिस्बाह को आइ़डिया

बताया जा रहा है कि भले ही टीम इस फैसले का खुलकर विरोध नहीं कर पा रही है, लेकिन उनके भीतर के स्वर मिस्बाह के ख़िलाफ़ ठीक वैसे ही आग बबूला हो रहे हैं, जैसे आर्टिकल 370 पर उनके मुल्क के नेताओं के स्वर!

मानवाधिकार की आड़ में कश्मीर पर आवाज उठाने वाले Amnesty के काले करतूतों का कच्चा चिट्ठा

अर्बन नक्सलियों का साथ देने से लेकर तालिबान से संबंध होने तक के आरोप लग चुके होने के बावजूद Amnesty International सुधर नहीं रहा। अब वह कश्मीर के मुद्दे को भुनाने के चक्कर में कुछ नहीं बल्कि जिहाद का संरक्षण ही कर रहा है।

गणपति के आगे सारा अली खान ने जोड़े हाथ, शांतिदूतों ने दिखा दी औकात

अगर आप हिंदू हैं और अपने धर्म के बारे में लिखते, पढ़ते और बोलते हैं तो आप असहिष्णुता और कट्टरता का चेहरा हैं। आप विशेष मजहब से हैं और गंद भी परोस रहे हैं तो आप देश का वो अल्पसंख्यक चेहरा हैं जो बेचारा खुद के अस्तित्व को बचाए रखने की लड़ाई लड़ रहा है।

मनमोहन सिंह की नीति से बढ़ी बीमारी: हर साल मरती हैं 1000 गायें, आज भी सॅंभले तो 1000 साल में खत्म होगा मर्ज

यह मर्जी का मसला नहीं है। न ही प्रधानमंत्री की अपील या सख्त नियम-कायदों का होना जरूरी है। यह मसला आपकी जिंदगी, आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी से जुड़ा। इसलिए, खुद से ही संभलिए। देर हुई तो न हम बचेंगे न पर्यावरण।

केजरीवाल के कारनामे: नए खुले नहीं, 37 बंद हो गए फिर भी दिल्ली में बढ़ गए ठेके

दिल्ली की शराब की तलब पुरानी। राजस्व में भारी इजाफा। पर अपने ही वादों और आँकड़ों से उलझी केजरीवाल सरकार। आप विधायक ने ही पूछा सत्ता में आते ही क्यों दी 133 ठेके खोलने की अनुमति? नई नीति के बाद 37 ठेके बंद करने का दावा तो फिर कैसे बढ़ गई दुकानें?

मोदी है तो मुमकिन है: 2022 नहीं, अगले ही साल ‘सबको घर’ का सपना होगा हकीकत

मोदी सरकार की तेजी से कार्यान्वयन करने की नीति के कारण हकीकत बनती दिख रही है। मार्च 2020 तक शहरी क्षेत्र में 1.12 करोड़ घर बनकर हो जाएँगे तैयार। ग्रामीण क्षेत्रों में 2.95 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य भी जद में...