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जयन्ती मिश्रा

मनमोहन सिंह की नीति से बढ़ी बीमारी: हर साल मरती हैं 1000 गायें, आज भी सॅंभले तो 1000 साल में खत्म होगा मर्ज

यह मर्जी का मसला नहीं है। न ही प्रधानमंत्री की अपील या सख्त नियम-कायदों का होना जरूरी है। यह मसला आपकी जिंदगी, आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी से जुड़ा। इसलिए, खुद से ही संभलिए। देर हुई तो न हम बचेंगे न पर्यावरण।

केजरीवाल के कारनामे: नए खुले नहीं, 37 बंद हो गए फिर भी दिल्ली में बढ़ गए ठेके

दिल्ली की शराब की तलब पुरानी। राजस्व में भारी इजाफा। पर अपने ही वादों और आँकड़ों से उलझी केजरीवाल सरकार। आप विधायक ने ही पूछा सत्ता में आते ही क्यों दी 133 ठेके खोलने की अनुमति? नई नीति के बाद 37 ठेके बंद करने का दावा तो फिर कैसे बढ़ गई दुकानें?

मोदी है तो मुमकिन है: 2022 नहीं, अगले ही साल ‘सबको घर’ का सपना होगा हकीकत

मोदी सरकार की तेजी से कार्यान्वयन करने की नीति के कारण हकीकत बनती दिख रही है। मार्च 2020 तक शहरी क्षेत्र में 1.12 करोड़ घर बनकर हो जाएँगे तैयार। ग्रामीण क्षेत्रों में 2.95 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य भी जद में...

फर्जी नारीवाद में मत फँसो लड़कियो, वरना प्रेम में सहमति से बना शारीरिक संबंध भी फर्जी बलात्कार ही लगेगा

फर्जी नारीवाद को दो पल के लिए कोने में रखकर एक बार इस पर गौर कीजिए कि हम कथित तौर पर महिला सुरक्षा और महिला अधिकारों के नाम पर क्या गंदगी फैला रहे हैं। हम अभिव्यक्ति की आजादी का प्रयोग कौन सी दिशा में कर रहे हैं? पूछिए एक बार खुद से क्या वाकई प्रेम में अलग होने के बाद आपसी संबंध बलात्कार हो जाते हैं?

न दलित सुरक्षित न महिला, राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार बनते ही चौपट हुई कानून-व्यवस्था

आँकड़े बताते हैं कि राजस्थान में गहलोत सरकार के आने के बाद अपराधों में बड़ा उछाल आया है। पुलिसिया आँकड़ों के मुताबिक इस साल बढ़कर जनवरी से अप्रैल के बीच 62,666 आपराधिक मामले दर्ज हुए। महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के मामलों में 40.56% उछाल आया।

भाजपा विधायक जी, शर्म नहीं आई ‘गोरी लड़कियों’ के बारे में बेहूदगी से बोलते हुए

हम आजम खान जैसे नेताओं के सेक्सिस्ट कमेंट पर हैरान नहीं होते क्योंकि जिस पार्टी के वो नेता हैं उसके संस्थापक ही रेप जैसी घटनाओं को जस्टिफाई करते हैं, लेकिन भाजपा से जुड़े लोग भी जब ऐसी ही भाषा में बात करने लगे और वह भी 370 के संदर्भ में तो यह केवल महिलाओं को लेकर उनकी ओछी सोच ही नहीं है, बल्कि उनको भी नीचा दिखाता है जिन्होंने एक विधान-एक निशान के लिए अपनी जिंदगी खपा दी।

Free ही Free… अरविंद केजरीवाल, वो नेता जो ‘मुफ्त’ की राजनीति और झूठे वादे का चैंपियन है

2015 में फ्री वाई-फाई से लेकर गली-गली में सीसीटीवी लगाने का वादा करके दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने वाले केजरीवाल आज फिर से अपने झूठे वादों की राजनीति खेलकर 2020 फतह करना चाहते हैं लेकिन उनके पिछले वादों की जमीनी हकीकत क्या है, उस पर भी जरा ध्यान डाल लें:

SCROLL से सीखिए हिमा दास की काबिलियत पर तर्कों के साथ शक करना

विनय की गणित के मुताबिक भले ही इतनी जीतों के बावजूद भी हिमा योग्य नहीं हैं, लेकिन हमें फिर भी उम्मीद है कि टोक्यो ओलंपिक में मेडल आएगा। इसका ये मतलब नहीं है कि हम उनके 5 मेडल की चमक में अंधे होकर उनसे आस लगा रहे हैं।