सरिता और अनुज के अनुसार रविवार की सुबह वे दवाई लेने के लिए घर से निकलने वाले थे। तभी सरिता के मायके पक्ष से 20 लोगों ने उनपर हमला बोला और लाठी-डंडो से उनसे मारपीट की गई। उनपर पत्थर बरसाए गए।
अफवाहों को चारों तरफ़ से नकारे जाने के बाद भी सोशल मीडिया पर पुलिस की गोली से जामिया के छात्रों के मारे जाने की ख़बरें लगातार सर्कुलेट होती रहीं। न सिर्फ़ प्रोपेगेंडा पोर्टलों ने बल्कि कुछ पत्रकारों ने भी छात्रों को भड़काने के लिए झूठी ख़बरें शेयर की।
झारखंड की एक चुनावी सभा में राहुल गाँधी ने कहा था, “पहले 'मेक इन इंडिया' था, लेकिन अब यह 'रेप इन इंडिया' बन गया है।” इस बयान को लेकर उनकी काफी किरकिरी हुई थी। लोकसभा में भाजपा ने इसके लिए उनसे माफी की मॉंग भी की थी।
अब्दुल्ला रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से 2017 में चुनाव जीते थे। नवाब काज़िम ने हाई कोर्ट में उनके निर्वाचन को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि 25 साल से कम उम्र होने के कारण अब्दुल्ला चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे।
पुलिस ने बताया कि देर रात छात्रों ने नारेबाजी की तो उन्हें शांत करा दिया गया। इसके बाद सुबह दोबारा करीब 150 छात्रों ने पत्थरबाजी की। लेकिन, हालात पर काबू पाने में पुलिस को ज्यादा देर नहीं लगी।
सावरकर को लेकर राहुल गॉंधी की टिप्पणी पर भाजपा और शिवसेना का आक्रामक रवैया बरकरार है। इसका असर आज से शुरू हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र पर भी दिखा। इस बीच, केंद्रीय मंत्री अठावले ने राज्य में सियासी भूकंप के संकेत दिए हैं।
"छात्र होने का मतलब यह नहीं है कि वे कानून-व्यवस्था अपने हाथ में ले सकते हैं। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अधिकारों के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुॅंचाया जा सकता। ऐसे हालात में पुलिस को कदम उठाना ही होगा।"