Homeदेश-समाजजामिया और AMU के बाद लखनऊ के नदवा कॉलेज के छात्र हुए बवाली, पुलिस...

जामिया और AMU के बाद लखनऊ के नदवा कॉलेज के छात्र हुए बवाली, पुलिस ने काबू पाया

कैब के बहाने उपद्रवियों ने पटना में भी उत्पात मचाया। कारगिल चौक पर हंगामा करते हुए आधा दर्जन वाहनों और पुलिस पोस्ट में आग लगा दी।

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों की हिंसा के बाद लखनऊ के नदवा कॉलेज से भी माहौल बिगड़ने की खबर आई है। कॉलेज के छात्रों ने पथराव किया है।

रविवार की देर रात यहाँ छात्रों ने गेट पर खड़े होकर नारेबाजी भी की थी। हालाँकि उस समय सूचना मिलते ही आधा दर्जन थानों की पुलिस ने मौक़े पर पहुँचकर सभी छात्रों को तुरंत गेट के अंदर कर दिया था। मगर सुबह फिर बड़ी तादाद में छात्र इकट्ठा हुए और पथराव किया। इसके बाद मौक़े पर मौजूद पुलिस कॉलेजों के गेट को बंद कर दिया। जामिया के छात्रों के समर्थन में यहाँ विरोध प्रदर्शन किया गया।

लखनऊ के एसपी कालनिधि नैथानी ने बताया कि प्रदर्शन और नारेबाजी करने के लिए बाहर आए 150 लोगों ने लगभग 30 सेकेंड तक पत्थरबाजी की थी। लेकिन, अब हालात सामान्य हैं और सभी छात्र कक्षाओं में लौट गए हैं।

लखनऊ के अलावा बिहार की राजधानी पटना में भी उत्पात की खबर है। रविवार की शाम वहाँ वीआईपी इलाका कारगिल चौक पर उपद्रवियों ने न केवल जमकर हंगामा किया, बल्कि आधा दर्जन वाहनों और पुलिस पोस्ट में भी आग लगा दी

इस दौरान पुलिस पर पथराव भी हुआ। जिसमें डीएसपी सुरेश शर्मा घायल हो गए। इसके बाद जब पुलिस ने उत्पातियों को खदेड़ा तो उन्होंने पीएमएचसी के पास जाकर आगजनी की। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उपद्रवियों को रोकने के लिए पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी।

उल्लेखनीय है कि अभी इस बात की सूचना नहीं मिल पाई है कि वीआईपी इलाके में ये उपद्रवी कहाँ से आए। लेकिन, इस उत्पात को देखकर इलाके में हर कोई दहशत में हैं। पुलिस फिलहाल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार इलाके में मार्च कर रही है।

ये जो आग लगा रहे हैं, कपड़ों से ही पता चल जाता है कि वे कौन हैं: PM मोदी ने दंगाइयों को चेताया
‘दिल्ली में गोधरा दोहराने की साज़िश’: जामिया नगर में DTC की 3 बसों को किया आग के हवाले
ममता के बंगाल में जुमे की नमाज के बाद योजना बनाकर की जमकर हिंसा, पत्थरबाजी, आगजनी
Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -