Monday, March 8, 2021
Home रिपोर्ट मीडिया जिंदा है शाकिर! मीडिया गिरोह ने जामिया के 3 छात्रों के मरने की अफवाह...

जिंदा है शाकिर! मीडिया गिरोह ने जामिया के 3 छात्रों के मरने की अफवाह फैलाई, कुलपति ने किया खंडन

मीडिया से ऐसे मौक़ों पर उम्मीद की जाती है कि वह शांति कायम करने की कोशिश करेगी। ख़बरों की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी जाँच-परख करने के बाद ही उन्हें प्रकाशित करेगी। लेकिन, एक बड़ा वर्ग इसके एकदम विपरीत चल रहा है।

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के हिंसक प्रदर्शन के दौरान अफवाहों का बाजार भी गर्म रहा। सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से अफवाहें फैलाई गई कि दिल्ली पुलिस ने छात्रों ने साथ न सिर्फ़ बर्बरता की, बल्कि 3 छात्रों को मार भी डाला। पुलिस ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है और जामिया प्रशासन ने भी ऐसी किसी भी ख़बर को नकार दिया है। व्हाट्सप्प ग्रुप्स में बेहोश या घायल छात्रों की फोटो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि ये पुलिस की गोली से मरे हैं।

कई प्रोपेगंडा पोर्टल्स ने भी इस अफवाह को फैलाने में हाथ बँटाया। मीडिया से ऐसे मौक़ों पर उम्मीद रहती है कि वो शांति कायम करने के लिए प्रयास करेगी और ख़बरों की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी तरह जाँच-परख करने के बाद ही उन्हें प्रकाशित करेगी। लेकिन, एक बड़ा वर्ग इसके एकदम विपरीत चल रहा है। जामिया के छात्र उग्र प्रदर्शन कर रहे थे, वहाँ 4 बसों को जला डाला गया और कई वाहन क्षतिग्रस्त कर डाले गए। इसके बाद पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले छोड़े।

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘इंडस डिक्टम’ ने अपनी फेक ख़बर को बाद में किया अपडेट

‘इंडस डिक्टम’ और ‘जनता का रिपोर्टर’ जैसे प्रोपेगेंडा पोर्टल्स ने लिखा कि पुलिस ने छात्रों को मार डाला है। हालाँकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन का बयान आने का बाद इंडस ने अपनी वेबसाइट पर ख़बर को अपडेट करते हुए लिखा कि पुलिस ने सभी छात्रों को छोड़ दिया है और किसी के भी मरने की सूचना नहीं है। कोटा के रहने वाले शाकिर नामक युवक की मौत की ख़बर चलाई गई थी, जो ग़लत निकली। उसे बस कुछ चोटें आई थीं, जिससे वह घायल हो गया था।

‘जनता का रिपोर्टर’ ने भी फैलाई झूठी अफवाह

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने भी पुष्टि की है कि पुलिस ने जिन उपद्रवी छात्रों को हिरासत में लिया था, उन सभी को रिहा कर दिया गया है। जामिया की कुलपति नज़मा अख्तर ने बताया कि 2 छात्रों के मारे जाने की जो अफवाह फैली है, यूनिवर्सिटी उसका पूरी तरह से खंडन करता है। उन्होंने कहा कि संपत्ति का काफ़ी नुकसान हुआ है, जिसके लिए वो एफआईआर दर्ज कराएँगी। उन्होंने दावा किया कि लगभग 200 लोग चोटिल हुए हैं, जिनमें से अधिकतर जामिया के छात्र हैं।

अफवाहों को चारों तरफ़ से नकारे जाने के बाद भी सोशल मीडिया पर पुलिस की गोली से जामिया के छात्रों के मारे जाने की ख़बरें लगातार सर्कुलेट होती रहीं। न सिर्फ़ प्रोपेगंडा पोर्टलों बल्कि कई पत्रकारों ने भी छात्रों को भड़काने के लिए झूठी ख़बरें शेयर की। अब आप सोचिए, अगर सही में ऐसा होता, किसी की मौत होती, तो कितना बड़ा बवाल हो जाता?

जामिया और AMU में हिंसक प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सुनेंगे पर पहले हिंसा रुकनी चाहिए

उपद्रव, उत्तेजक नारों के बाद जामिया कैंपस में दाखिल हुई दिल्ली पुलिस, काबू में हालात

जामिया में लगे ‘हिंदुओं से आजादी’ के नारे; AAP विधायक अमानतुल्लाह कर रहा था हिंसक भीड़ की अगुवाई

नोट: जामिया में छात्रों के मरने की अपुष्ट ख़बर ऑपइंडिया के पास भी आई थी लेकिन हमनें इंतज़ार करना बेहतर समझा। ट्रैफिक या वित्त के लालच में प्रोपेगंडा पोर्टल्स ने इन ख़बरों को चला कर अफवाह फैला दिया, जिससे और भारी क्षति हो सकती थी। हमें जानबूझकर ऐसा नहीं किया। जामिया के कुलपति, पुलिस और छात्र संगठन- सभी ने इन अफवाहों को नकार दिया है, खंडन किया है। शुक्र मनाइए कि मीडिया के एक वर्ग विशेष की ये चाल कामयाब नहीं हुई, वरना हिंसा की और भी वारदातें हो सकती थीं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

BJP पैसे दे तो ले लो… वोट TMC के लिए करो: ‘अकेली महिला ममता बहन’ को मिला शरद पवार का साथ

“मैं आमना-सामना करने के लिए तैयार हूँ। अगर वे (भाजपा) वोट खरीदना चाहते हैं तो पैसे ले लो और वोट टीएमसी के लिए करो।”

‘सबसे बड़ा रक्षक’ नक्सल नेता का दोस्त गौरांग क्यों बना मिथुन? 1.2 करोड़ रुपए के लिए क्यों छोड़ा TMC का साथ?

तब मिथुन नक्सली थे। उनके एकलौते भाई की करंट लगने से मौत हो गई थी। फिर परिवार के पास उन्हें वापस लौटना पड़ा था। लेकिन खतरा था...

अनुराग-तापसी को ‘किसान आंदोलन’ की सजा: शिवसेना ने लिख कर किया दावा, बॉलीवुड और गंगाजल पर कसा तंज

संपादकीय में कहा गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई इसलिए की जा रही है, क्योंकि उन लोगों ने ‘किसानों’ के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है।

‘मासूमियत और गरिमा के साथ Kiss करो’: महेश भट्ट ने अपनी बेटी को साइड ले जाकर समझाया – ‘इसे वल्गर मत समझो’

संजय दत्त के साथ किसिंग सीन को करने में पूजा भट्ट असहज थीं। तब निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी बेटी की सारी शंकाएँ दूर कीं।

‘कॉन्ग्रेस का काला हाथ वामपंथियों के लिए गोरा कैसे हो गया?’: कोलकाता में PM मोदी ने कहा – घुसपैठ रुकेगा, निवेश बढ़ेगा

कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में अपनी पहली चुनावी जनसभा को सम्बोधित किया। मिथुन भी मंच पर।

मिथुन चक्रवर्ती के BJP में शामिल होते ही ट्विटर पर Memes की बौछार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मिथुन चक्रवर्ती ने कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भाजपा का दामन थाम लिया।

प्रचलित ख़बरें

मौलाना पर सवाल तो लगाया कुरान के अपमान का आरोप: मॉब लिंचिंग पर उतारू इस्लामी भीड़ का Video

पुलिस देखती रही और 'नारा-ए-तकबीर' और 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगा रही भीड़ पीड़ित को बाहर खींच लाई।

14 साल के किशोर से 23 साल की महिला ने किया रेप, अदालत से कहा- मैं उसके बच्ची की माँ बनने वाली हूँ

अमेरिका में 14 साल के किशोर से रेप के आरोप में गिरफ्तार की गई ब्रिटनी ग्रे ने दावा किया है कि वह पीड़ित के बच्चे की माँ बनने वाली है।

आज मनसुख हिरेन, 12 साल पहले भरत बोर्गे: अंबानी के खिलाफ साजिश में संदिग्ध मौतों का ये कैसा संयोग!

मनसुख हिरेन की मौत के पीछे साजिश की आशंका जताई जा रही है। 2009 में ऐसे ही भरत बोर्गे की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।

‘ठकबाजी गीता’: हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने FIR रद्द की, नहीं माना धार्मिक भावनाओं का अपमान

चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने कहा, "धारा 295 ए धर्म और धार्मिक विश्वासों के अपमान या अपमान की कोशिश के किसी और प्रत्येक कृत्य को दंडित नहीं करता है।"

‘40 साल के मोहम्मद इंतजार से नाबालिग हिंदू का हो रहा था निकाह’: दिल्ली पुलिस ने हिंदू संगठनों के आरोपों को नकारा

दिल्ली के अमन विहार में 'लव जिहाद' के आरोपों के बाद धारा-144 लागू कर दी गई है। भारी पुलिस बल की तैनाती है।

माँ-बाप-भाई एक-एक कर मर गए, अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया: 20 साल विष्णु को किस जुर्म की सजा?

20 साल जेल में बिताने के बाद बरी किए गए विष्णु तिवारी के मामले में NHRC ने स्वत: संज्ञान लिया है।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,301FansLike
81,958FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe