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बिहार वोटर लिस्ट पर राहुल गाँधी का हर दावा हुआ फेल, चुनाव आयोग के बुलेटिन से खुलासा-कॉन्ग्रेस ने नहीं दाखिल की एक भी आपत्ति: वोट चोरी के नाम पर सिर्फ नौटंकी कर रहे युवराज!

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही सियासी बहस अब एक नए मोड़ पर आ गई है। चुनाव आयोग ऑफ इंडिया ने 30 अगस्त 2025 को एक डेली बुलेटिन जारी किया है, जो राहुल गाँधी और विपक्ष के उन दावों पर सवाल उठाता है, जिनमें SIR प्रक्रिया को वोट चोरी का हथियार बताया गया था।

इस बुलेटिन के मुताबिक, 1 अगस्त से 30 अगस्त तक ड्राफ्ट रोल पर दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया में सिर्फ 2 दिन बचे हैं और जो आँकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आइए, इस रिपोर्ट में हर पहलू को विस्तार से समझते हैं, ताकि जनता को सचाई का पता चले।

चुनाव आयोग के बुलेटिन के मुताबिक, अब तक राष्ट्रीय और राज्य स्तर की राजनीतिक पार्टियों ने जो दावे-आपत्तियाँ दर्ज कीं, वे काफी कम हैं। नेशनल पार्टियों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 1, बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने 74, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 53,338, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने 899, और भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस (INC) ने 0 दावे-आपत्तियाँ दर्ज कीं।

बिहार की पार्टियों में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी लिबरेशन) ने 1,496 (जिनमें 103 बहिष्करण के लिए), जनता दल (यूनाइटेड) ने 36,550, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) ने 1,210, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने 47,506 (जिनमें सिर्फ 10 बहिष्करण के लिए), राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी ने 1,913, और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने 270 दावे-आपत्तियाँ दर्ज कीं।

सबसे हैरानी की बात यह है कि कॉन्ग्रेस ने एक भी दावा या आपत्ति नहीं की जबकि राहुल गाँधी SIR को लेकर लगातार हमलावर रहे हैं।

सामान्य मतदाताओं की ओर से दायर दावों-आपत्तियों में भी आँकड़े चौंकाने वाले हैं। कुल 2,27,636 दावों में से सिर्फ 29,872 नामों को शामिल करने और 1,97,764 नामों को हटाने के लिए आवेदन आए। 7 दिन के निपटान के बाद सिर्फ 33,771 मामले सुलझे। नई वोटरों के लिए 18 साल या उससे अधिक उम्र के 13,33,793 फॉर्म-6 और डिक्लेरेशन आए, जिनमें से 61,248 का निपटान हो चुका है। यह आँकड़ा साफ करता है कि ज्यादातर आवेदन नाम हटाने के लिए हैं न कि जोड़ने के लिए, जो विपक्ष के 65 लाख वोटरों के नाम कटने के दावों के उलट है।

चुनाव आयोग द्वारा जारी आँकड़ें

अब बात करते हैं राहुल गाँधी के उन दावों की, जो SIR को लेकर हवा में तैर रहे थे। राहुल गाँधी ने बिहार में वोटर अधिकार यात्रा के दौरान बार-बार आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और BJP के बीच साठगाँठ है और SIR के जरिए 65 लाख वोटरों के नाम जानबूझकर काटे गए। उन्होंने दावा किया कि यह गरीब, दलित, और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला है। लेकिन चुनाव आयोग का बुलेटिन इन दावों को खोखला साबित करता है। कॉन्ग्रेस ने एक भी दावा दायर नहीं किया, जो उनके आरोपों की गंभीरता पर सवाल उठाता है। क्या यह दर्शाता है कि उनके दावे महज प्रचार थे?

राहुल गाँधी ने एक और वीडियो वायरल किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि मृत वोटरों के नाम सूची में बने हुए हैं और SIR उनकी सफाई नहीं कर रहा। इस वीडियो में उन्होंने बीएलओ रानी कुमारी पर सवाल उठाए, लेकिन चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि रानी कुमारी सिर्फ सत्यापन कर रही थीं, न कि कोई गड़बड़ी। यह वीडियो फर्जी निकला और राहुल के दावों पर सवाल उठे। इसके अलावा, उन्होंने कर्नाटक के महादेवपुरा में एक लाख फर्जी वोटरों का डेटा पेश किया, लेकिन चुनाव आयोग ने जवाब माँगा, जो अब तक नहीं आया। क्या यह उनकी तैयारी की कमी को दर्शाता है?

राहुल ने विदेशी मीडिया जैसे Al Jazeera, NYT, BBC को इस्तेमाल करके ‘वोट चोरी’ प्रोपगैंडा फैलाया, दावा किया कि SIR से लाखों असली नाम कट रहे हैं। ये सब सपोर्ट राहुल के नैरेटिव को था, लेकिन ECI की रिपोर्ट्स से साफ है कि कोई सबूत नहीं, बस पॉलिटिकल नौटंकी। राहुल ने EC की चुनौती पर हलफनामा तक नहीं दिया।

एक और बड़ा दावा राहुल गाँधी ने यह किया कि SIR के जरिए संस्थागत वोट चोरी हो रही है, और उन्होंने इसे गुजरात मॉडल बताया। उन्होंने अररिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चुनाव आयोग BJP के इशारे पर काम कर रहा है। लेकिन चुनाव आयोग ने जवाब दिया कि 22 लाख मृत वोटर पिछले 20 साल की गलतियों से जुड़े हैं और SIR इनको ठीक करने की प्रक्रिया है। राहुल के दावों के जवाब में आयोग ने चुनौती दी कि अगर गड़बड़ी थी, तो ड्राफ्ट जारी होने पर आपत्ति क्यों नहीं की गई? यह सवाल अब जनता के सामने है।

राहुल गाँधी ने मिंता देवी और शकुन रानी के नाम लेकर भी हंगामा मचाया। उन्होंने दावा किया कि मिंता देवी की उम्र 124 साल बताई गई, जो फर्जीवाड़ा है, और शकुन रानी ने दो बार वोट डाला। लेकिन जाँच में पता चला कि मिंता देवी का नाम सही था और शकुन रानी का मामला डुप्लिकेट EPIC नंबर से जुड़ा था, जो तेजस्वी यादव के साथ भी हुआ। चुनाव आयोग ने तेजस्वी के दो वोटर कार्ड का खुलासा किया, जो उनके अपने दावों पर सवाल उठाता है। क्या यह विपक्ष की अपनी गलतियों को छिपाने की कोशिश थी?

योगेंद्र यादव जैसे विश्लेषकों ने भी दावा किया था कि SIR से 2 करोड़ वोटरों के नाम कटेंगे, और यह जनता को वोट से वंचित करने की साजिश है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ 1.97 लाख नाम हटाने के लिए आवेदन आए, जो उनके दावों से कोसों दूर है। राहुल गाँधी की 16 अगस्त से शुरू हुई वोटर अधिकार यात्रा जो 1 सितंबर को पटना में खत्म होगी, को जनता का समर्थन नहीं मिल रहा। नवादा में एक शख्स सुबोध कुमार ने दावा किया कि उनका नाम कटा, लेकिन आँकड़ों से यह साबित नहीं होता।

चुनाव आयोग का कहना है कि SIR एक पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसमें हर मतदाता और दल के लिए दरवाजे खुले हैं। उन्होंने कहा कि 90,817 मतदान केंद्रों की सूची शेयर की गई और 1 अगस्त से 1 सितंबर तक दावे-आपत्तियाँ आमंत्रित की गईं। बुलेटिन में यह भी कहा गया कि कोई भी नाम 1 अगस्त की सूची से बिना जाँच के नहीं हटाया जाएगा। यह दर्शाता है कि आयोग हर एलिजिबल वोटर को शामिल करने की कोशिश कर रहा है, जैसा कि 13.33 लाख नए फॉर्म से जाहिर होता है।

जनता के मन में सवाल है कि अगर वाकई 65 लाख नाम कटे, तो इतने कम दावे-आपत्तियाँ क्यों? क्या यह विपक्ष की नाकामी है या उनके दावों में दम नहीं था? राहुल गाँधी की यात्रा और बयानों ने सियासी माहौल गरम किया, लेकिन आँकड़े उनकी बातों को चुनौती दे रहे हैं। बिहार की जनता अब सचाई को समझ रही है और यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले कुछ दिन में क्या नया मोड़ आता है।

ये डेटा राहुल गाँधी को पूरी तरह एक्सपोज़ कर रहा है। बिहार में कोई ‘वोट चोरी’ नहीं, बल्कि ECI ने पारदर्शिता से काम किया। योगेंद्र यादव जैसे ‘चार्लटन’ की बातें भी हवा हो गईं। लोग SIR का सपोर्ट कर रहे हैं, फर्जी नाम हटाने चाहते हैं। ECI ने 3 लाख संदिग्ध वोटर्स को नोटिस भेजे, लेकिन सही लोगों को लेकर कोई समस्या नहीं। ये रिपोर्ट बताती है कि चुनाव प्रक्रिया मजबूत है और प्रोपगैंडा फैलाने वाले अब चुप हैं। बिहार के लोग समझदार हैं, वे ऐसे झूठ में नहीं फँसते। कुल मिलाकर SIR सफल हो रहा है और राजनीतिक शोर सिर्फ चुनावी स्टंट था।

हाथी-ड्रैगन फिर आए साथ: हजारों वर्ष पुराने भारत-चीन संबंधों में गर्माहट से डोनाल्ड ट्रंप को सीधा संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीन पहुँचे हैं। पीएम मोदी के दौरे की अहमियत का अंदाजा इससे भी लगता है कि यह उनका चीन दौरा 7 वर्षों के बाद हो रहा है।

SCO सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रविवार (31 अगस्त 2025) को द्विपक्षीय वार्ता हुई है। दोनों नेताओं ने रसातल में चले गए भारत-चीन संबंधों में फिर से गर्माहट लाने के लिए काम पहल शुरू की है। दोनों नेताओं ने अपनी बैठक में भारत-चीन के एक बार फिर से साथ आने पर जोर दिया है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

पीएम मोदी ने बैठक के दौरान पिछले कुछ समय में दोनों देशों के संबंधों में आई प्रगति का जिक्र किया है। पीएम मोदी ने कहा, “सीमा पर डिसएंगेजमेंट के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना हुआ है। हमारे विशेष प्रतिनिधियों के बीच बॉर्डर मैनेजमेंट के संबंध में सहमति बनी है। कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई है।”

उन्होंने बात का जिक्र किया है कि भारत-चीन का आपसी सहयोग कितना जरूरी है। पीएम ने कहा, “हमारे सहयोग से दोनों देशों के 2.8 बिलियन लोगों के हित जुड़े हुए हैं। इससे पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा। परस्पर विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर हम अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और चीन दोनों ही रणनीतिक स्वायत्तता के पक्षधर हैं और उनके संबंधों को किसी तीसरे देश के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही, पीएम मोदी ने जिनपिंग को 2026 में भारत द्वारा आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आमंत्रित भी किया। पीएम मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर राष्ट्रपति जिनपिंग का साथ माँगा है।

जिनपिंग बोले- ‘साथ आएँ ड्रेगन-हाथी’

चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने पीएम मोदी का चीन में स्वागत किया है। जिनपिंग का कहना है कि ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) को एक साथ आने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “दुनिया परिवर्तन की ओर बढ़ रही है और ऐसे समय में भारत और चीन की भूमिका बेहद अहम है।”

जिनपिंग ने कहा है कि भारत और चीन दुनिया की दो सबसे पुरानी सभ्यताएं हैं और सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं व ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे में मित्र बने रहना, अच्छे पड़ोसी बनना और ड्रैगन व हाथी का साथ आना जरूरी है।”

जिनपिंग ने कहा है, “चीन-भारत प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार हैं और दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं बल्कि विकास के अवसर हैं। दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने और संभालने की आवश्यकता है।”

जिनपिंग ने कहा कि भारत-चीन को अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। साथ ही, सीमा के मुद्दे को पूरे भारत-चीन संबंधों की धुरी नहीं बनने देना चाहिए।

भारत-चीन का अमेरिका को संदेश

पीएम मोदी और जिनपिंग की इस मुलाकात पर जितनी भारत-चीन के लोगों की नजरें हैं, उतनी ही अमेरिका की भी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए बेतुके टैरिफ से दोनों ही देशों को समस्याएँ हैं। हालाँकि, उनका असर भारत पर ज्यादा है लेकिन चीन भी कब इसके लपेट में आ जाए कहना मुश्किल है।

हालाँकि, ट्रंप के इस टैरिफ वॉर से पहले ही भारत-चीन ने अपने संबंधों में सुधार के संकेत देने शुरू कर दिए थे। नरमी पिछले साल अक्टूबर से ही शुरू हुई जब पीएम मोदी और जिनपिंग ने रूस में ब्रिक्स समिट के दौरान मुलाकात की। अमेरिकी राष्ट्रपति की इस चुनौती के बाद संबंधों के सुधार की दिशा तेज हो गई है।

एक्सपर्ट भी यह मान रहे हैं कि ट्रंप के बेतुके टैरिफों ने अमेरिकी विदेश नीति को उल्ट-पुल्ट कर दिया है। इससे पहले अमेरिका में भारत को चीन के लिए एक संतुलन के रूप में देखा जाता था। लेकिन भारत के बढ़ते कद ने अमेरिका को भी परेशान किया है। भारत भी SCO समिट के जरिए यह साबित कर रहा है कि वह सिर्फ अमेरिकी खेमे में नहीं है। बल्कि दुनिया में उसके पास भी विकल्प मौजूद हैं।

फिनोक्रेट टेक्नोलॉजीज के संस्थापक गौरव गोयल ने मिंट से कहा है कि चीन-रूस अपनी अर्थव्यवस्थाओं को भारत के लिए खोल रहे हैं, जिससे व्यापार को पुनर्निर्देशित करने और टैरिफ के बोझ को कम करने में मदद मिल रही है।

गोयल ने कहा, “SCO शिखर सम्मेलन…एक रणनीतिक मोड़ है जहाँ भारत, चीन और रूस अपनी आर्थिक राह खुद तय करने, साझेदारी को मजबूत करने और यह संकेत देने के लिए तैयार हैं कि अमेरिकी व्यापार दबाव उनके भविष्य को तय नहीं करेगा।”

ट्रंप इस टैरिफ के पीछे भारत द्वारा रूसी तेल का खरीदा जाना बताते हैं। चीन में SCO बैठक के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी पीएम मोदी की मुलाकात होगी जिसका संदेश स्पष्ट होगा कि भारत अपनी नीतियाँ अपनी स्वायत्ता के हिसाब से तय करेगा ना कि दुनिया के किसी स्वघोषित चौधऱी के दबाव में।

भारत-चीन के हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंध

भारत और चीन के सांस्कृतिक संबंध हजारों वर्ष पुराने हैं। चीन में भारतीय दूतावास का कहना है कि भारत और चीन के बीच संपर्कों के लिखित रिकॉर्ड दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के मौजूद हैं, जो आगे चलकर बौद्ध धर्म और व्यापार के माध्यम से और मजबूत हुए हैं।

चीनी भिक्षु फाह्यान 402 ईस्वी में भारत आए और करीब 10 साल यहाँ रहकर संस्कृत और बौद्ध ग्रंथों का चीनी भाषा में अनुवाद किया। उनकी किताब ‘फो गुओ जी’ आज भी एक अहम ऐतिहासिक दस्तावेज मानी जाती है। भारतीय पिता और चीनी माता से जन्मे विद्वान कुमारजीव ने भी संस्कृत सूत्रों का चीनी में अनुवाद किया, जो आज तक प्रासंगिक हैं।

पाँचवीं शताब्दी में दक्षिण भारत के भिक्षु बोधिधर्म चीन गए और उन्होंने शाओलिन मठ की स्थापना की। यहीं से जेन बौद्ध धर्म की नींव चीन में पड़ी। सातवीं शताब्दी में ह्वेनसांग (शुआनजांग) भारत आए। हर्षवर्धन के शासनकाल में उन्होंने बौद्ध ग्रंथों का अध्ययन किया और उन्हें चीन ले गए।

19वीं और 20वीं शताब्दी में स्वतंत्रता आंदोलनों के दौरान दोस्ती का भाव फिर से उभरा। चीनी विद्वान कांग युई 1890 के दशक में भारत आए। वहीं, रवींद्रनाथ टैगोर ने 1924 में चीन का दौरा किया और 1937 में उनकी प्रेरणा से विश्वभारती विश्वविद्यालय में चीना भवन की स्थापना हुई।

भारत-चीन कूटनीतिक संबंधों के 75 साल

भारत और चीन के कुटनीतिक संबंधों को भी इस वर्ष 75 वर्ष पूरे हुए हैं। इन वर्षों में दोनों देशों के संबंध ‘रोलर कोस्टर राइड’ की तरह रहे हैं। आजादी के बाद हिंदी चीनी भाई-भाई को दौर था और भारत-चीन के बीच 1 अप्रैल 1950 को कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए। भारत ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता देने वाला पहला गैर-साम्यवादी देश बनकर इतिहास रचा था।

इसके बाद 1962 के युद्ध ने दोनों देशों के रिश्तों पर गहरा असर डाला और इसके बाद लंबे समय तक दोनों के बीच दूरी बनी रही। इस बीच पाकिस्तान और चीन करीब आते गए। हालाँकि, 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बीजिंग यात्रा से संबंधों को पटरी पर लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

2003 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चीन यात्रा के दौरान सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र (Special Representatives Mechanism) की स्थापना की गई। 2005 में चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ भारत आए और दोनों देशों के बीच सामरिक और सहयोगात्मक साझेदारी की शुरुआत हो गई।

पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच भी रिश्तें में गर्माहट दिखी, जिनपिंग भारत आए तो पीएम मोदी भी अपने कार्यकाल में चीन गए। हालाँकि, 2020 में गलवान में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई झड़प ने रिश्तों को एक बार फिर पटरी से उतार दिया। अब पीएम मोदी की इस यात्रा के बाद एक बार फिर भारत-चीन करीब आते दिख रहे हैं।

दोनों देशों के आर्थिक संबंध भी मजबूत बने हुए हैं। चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024 में दोनों देशों के बीच 127 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। वहीं, बहुपक्षीय मंच पर भारत और चीन BRICS, SCO और G-20 जैसे मंचों पर एक-दूसरे सहयोग करते हैं। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) जैसी पहलों का समर्थन करते हैं।

भारत को सतर्कता के साथ दोस्ती बढ़ाने की जरूरत

कूटनीतिक कदमों से दोनों देशों के संबंधों में गर्माहट जरूर आई है लेकिन अब भी भारत को संभलकर चलने की जरूरत है। 2020 की गलवान झड़प की कड़वी यादें, अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश पर जारी चीन का दावा अभी भी दोनों देशों के बीच दीवार बने हुए हैं।

साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन का पाकिस्तान को खुला समर्थन यह दिखाता है कि चीन किसी भी समय अपने रणनीतिक हित भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है। साथ ही, पाकिस्तान के साथ चीन की नजदीकी और बेल्ट ऐंड रोड पहल भारत की रणनीतिक चिंताओं को और गहरा करती है।

चीन की विस्तारवादी सोच के भारत हमेशा खिलाफ रहा है और चीनी सामानों पर निर्भरता कम करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल भी चलाई गई हैं, जो दिखाती हैं कि भारत को चीन पर अत्यधिक निर्भरता का खतरा भी नहीं लेना होगा।

इसके अलावा, चीन की आक्रामक सैन्य तैनाती, इंडो-पैसिफिक में बढ़ती मौजूदगी और दक्षिण एशिया में छोटे देशों पर उसका आर्थिक दबाव भारत के लिए चुनौती रहते ही हैं। नेपाल, श्रीलंका और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत की भू-राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करता है। ऐसे माहौल में भारत के लिए जरूरी है कि वह संतुलन साधते हुए आगे बढ़े।

नेपाल में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं पर बोला हमला, जनकपुर में गणेश प्रतिमा पर भीड़ ने किया पथराव: हमले में 2 हिंदू घायल, पुलिस को लगाना पड़ा कर्फ्यू

नेपाल के जनकपुर में मूर्ति विसर्जन यात्रा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने भगवान गणेश की प्रतिमा पर पथराव किया। यात्रा जब मुस्लिम बहुल इलाके से निकली तो मुस्लिम भीड़ ने सड़क पर जाम लगाकर रोकने की भी कोशिश की। घटना के बाद इलाके में कर्फ्यू लगाया गया है।

पुलिस ने मौके पर पहुँचकर पथराव रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। स्थिति नियंत्रण करने के लिए 200 नेपाली पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती की गई। पुलिस के अनुसार, घटना में दो स्थानीय लोग घायल हो गए हैं। वहीं एक को मामूली चोटें आई हैं।

क्या है मामला ?

नेपाल में हिंदू समुदाय के लोग भगवान गणेश की प्रतिमा की विसर्जन यात्रा निकाल रहे थे। यात्रा जनकपुरधाम के वार्ड नंबर 20 स्थित देवपुरा-रुपैठा से शुरू हुई, जो मुस्लिम बहुल बस्ती काशीभुई में बने तालाब की ओर प्रस्थान कर रही थी। रास्ते में देवपुरा-रुपैथा के झंडा चौक पर मुस्लिम भीड़ ने यात्रा को निशाना बनाया।

मुस्लिम भीड़ ने पहले विसर्जन यात्रा को रोकने की कोशिश की। सड़क को घेर लिया गया। इसके चलते दोनों समुदायों के बीच झड़प हुई। तभी मुस्लिम भीड़ की ओर से गणेश प्रतिमा पर पत्थर फेंके गए। मामला इतना बिगड़ गया कि पुलिस मौके पर भारी पुलिस बल के साथ पहुँची।

इलाके में तनाव का माहौल, पुलिस की कड़ी सुरक्षा

पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को काबू करने के लिए आँसू गैस के 9 गोले दागे। पुलिस उपाधीक्षक और धनुषा जिला पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता बहादुर सिंह ने बताया कि दोनों समुदायों के बीच झड़प को रोकने के लिए आँसू गैस के गोले दागे गए।

DCP सिंह ने बताया कि घटना में मची भगदड़ में दो स्थानीय लोग घायल हो गए हैं और एक को हल्की चोट आई हैं। सभी घायलों को जरूरी सहायता दे दी गई है। वहीं इलाके में अब भी तनाव का माहौल है।

उन्होंने बताया कि जनकपुरधाम से देवपुरा-रुपैथा और जटही से जनकपुरधाम जाने वाली सड़क के दोनों ओर कड़ी सुरक्षा रखी जा रही है। लगभग 200 नेपाली पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल तैनात किया गया है।

देवी दुर्गा की मूर्ति को हटाने पर हर साल होता है विवाद

नेपाल में हिंदू त्योहारों में मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंसा की खबरें सामने आती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले देवी दुर्गा की मूर्ति हटाने पर विवाद हुआ करता था। इस बार भगवान गणेश की मूर्ति हटाने के दौरान भी यही हुआ।

लोगों ने कहा कि सतर्क रहना जरूरी है क्योंकि समाज के हानिकारक तत्व हर साल धर्म के नाम पर सामाजिक अशांति और सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनकपुरीधाम में हर साल देवी दुर्गा की मूर्ति हटाने को लेकर इस्लामी कट्टरपंथी विवाद करते हैं, जिसका अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। यही कारण है कि हर साल मुस्लिम भीड़ हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमा पर हमला करते हैं।

नेपाल में हिंदू देवी-देवताओं को कई बार बनाया गया निशाना

नेपाल में आए दिन हिंदू देवी-देवताओं को निशाना बनाया जाता है। हाल ही में अप्रैल 2025 में नेपाल के बिरगुंज में हनुमान जयंती की शोभा यात्रा को निशाना बनाया गया था। जब मुस्लिम भीड़ ने शोभा यात्रा पर पथराव किया। विवाद में पुलिस समेत काफी लोग घायल हुए थे। घटना के बाद इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया था।

रौतहट जिले में सरस्वती प्रतिमा की विसर्जन यात्रा में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। यात्रा जब मस्जिद के पास पहुँची तो मुस्लिम भीड़ ने यात्रा पर पथराव किया। इस दौरान भगवान राम के चित्र वाले भगवा ध्वज को नोंचकर गटर में फेंक दिया गया। यहाँ भी कर्फ्यू लगाया गया था।

डोनाल्ड ट्रंप के साथी पीटर नवारो ने 50 फीसदी टैरिफ को लेकर फैलाया झूठ, रूसी तेल से उठा रहे US-EU: पढ़ें- कैसे भारत विरोधी प्रोपेगेंडा का चेहरा बना हुआ है अमेरिका का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने को सलाहकार पीटर नवारो ने एक के बाद एक 9 ट्वीट कर भारत पर झूठे आरोप लगाए। उनके झूठ की कलई खुल गई है।

नवारो ने भारत के रूस से तेल खरीदने का मुद्दा उठाया। साथ ही, कहा कि भारत राष्ट्रपति पुतिन की ‘युद्ध मशीनरी’ को ताकत दे रहा है।

यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ कहने वाले नवारो ने कहा कि भारतीय कंपनियाँ रूस के लिए ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ कर रही हैं। उन्होंने 9 ट्वीट का एक थ्रेड लिखा, जिसमें भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ का समर्थन किया गया।

नवारो ने दावा किया, “ये केवल भारत के व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि ये पुतिन के युद्ध मशीन को भारत द्वारा दी गई आर्थिक जीवनरेखा को काटने के बारे में है।”

ये बताना जरूरी है कि रूस दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक और निर्यातक देश है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, कच्चे तेल की कीमतें 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं।

लगभग 1.4 अरब की आबादी वाले भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना था। ईरानी तेल और वेनेज़ुएला के तेल पर संयुक्त राज्य अमेरिका, जी-7 देशों और यूरोपीय संघ (ईयू) ने प्रतिबंध लगाई है, जबकि रूसी तेल पर प्रतिबंध नहीं लगाई है। इनलोगों ने रूसी तेल पर ‘प्राइस कैप’ लगाई है, जो रूसी कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय कीमत को कम रखने रखने में मदद करता है।

भारत ने रूसी तेल की खरीद के माध्यम से किसी भी अंतर्राष्ट्रीय मानदंड का उल्लंघन नहीं किया, क्योंकि उसने ‘प्राइस कैप’ का पालन किया है।

भारत अगर रूसी तेल नही खरीदता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। इसका असर सिर्फ भारत पर ही नहीं, बल्कि दुनिया के बाकी देशों पर भी पड़ेगा।

मोदी सरकार के इस फैसले से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर और संतुलित बनी रहीं। और इस तथ्य को कम से कम तीन अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया है, जिनमें अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलेन, राजदूत एरिक गार्सेटी और राजनयिक ज्योफ्री पायट शामिल हैं।

एक दूसरे ट्वीट में पीटर नवारो ने आरोप लगाया, ‘‘भारत हमारे डॉलर का इस्तेमाल रियायती दर पर रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए करता है।”

वास्तविकता में, भारत तीसरे देशों से रूसी कच्चा तेल खरीदता है, जहाँ लेन-देन अमेरिकी डॉलर में नहीं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात के दिरहम (एईडी) जैसी मुद्राओं में किया जाता है।

ये बात भी सच है कि अमेरिका ने पहले कभी भी रूसी तेल की खरीद पर आपत्ति नहीं जताई थी, क्योंकि इससे भारत के तेल खरीदने से कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ने से रुकी थीं।

यदि अमेरिका चाहता कि अन्य देश रूसी तेल खरीदना बंद कर दें, तो वह रूसी कच्चे तेल पर प्रतिबंध लगा सकता था, जैसा उसने वेनेजुएला और ईरान के मामले में किया था।

पीटर नवारो ने दावा किया, “भारतीय रिफाइनिंग कंपनियाँ, अपने रूसी साझेदारों के साथ मिलकर, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बड़े मुनाफे के लिए तेल को रिफाइन करके बेचती हैं। इससे रूस को युद्ध के लिए पैसा जुटाने में मदद मिल रही है।”

रूसी कच्चे तेल को ‘काला बाजारी तेल’ कहना भी गलत है, क्योंकि इसकी खरीद पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। सिर्फ ‘प्राइस कैप’ यानी अधिकतम कीमत तय की गई है। भारत सभी अंतरराष्ट्रीय ढाँचों का पालन करता है और रूस में प्रतिबंधित परियोजनाओं से एलएनजी और एलपीजी नहीं खरीदता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्यापार और विनिर्माण मामलों के वरिष्ठ सलाहकार ने दावा किया कि भारत द्वारा रूसी तेल का आयात ‘घरेलू मांग’ से प्रेरित नहीं है, बल्कि अवैध मुनाफाखोरी से प्रेरित है।

इस दावे का कोई सबूत नहीं है। भारत को अपनी 1.4 अरब आबादी के ऊर्जा खर्च को वहन करना है। रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया।

भारत में तेल लोक सेवा उपक्रमों (PSU) ने रूसी तेल खरीदा। अप्रैल 2022 से जनवरी 2023 तक तीन PSUs की कुल हानि Rs 21,000 करोड़ रुपए यानी 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। ये घाटा सिर्फ इसलिए उठाया गया ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर रहें।

मोदी सरकार ने ऐसे नियम बनाए, जिनके तहत निजी रिफाइनिंग कंपनियों को अपने निर्यात किए गए पेट्रोल का कम से कम 50% घरेलू बाजार में वापस बेचना अनिवार्य कर दिया गया । डीजल के निर्यात पर भी 30% की सीमा लगा दी गई।

साथ ही, बड़े पैमाने पर मुनाफाखोरी को रोकने के लिए निर्यात पर टैक्स लगाया गया। इन रणनीतिक फैसलों से न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिली।

यह बताना जरूरी है कि उस समय ओपेक+ देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन में 58.6 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती की थी। भारत के समय पर हस्तक्षेप करने और अहम फैसलों ने ईंधन की कीमत नियंत्रित रखने में मदद की।

अपने एक ट्वीट में पीटर नवारो ने दावा किया, “भारत की बड़ी तेल लॉबी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्रेमलिन के लिए एक विशाल रिफाइनिंग केंद्र और तेल मनी लॉन्ड्रोमेट में बदल दिया है।”

सच तो यह है कि भारत 2022 से नहीं, बल्कि कई दशकों से पेट्रोलियम उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनकर्ता और निर्यातक रहा है। भारत 150 देशों को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि रूस से ‘रियायती कीमतों’ पर खरीदे गए अधिकांश कच्चे तेल को देश की 23 रिफाइनरियों में से एक में संसाधित करने के बाद घरेलू स्तर पर ही खपत कर लिया गया।

यह सच है कि यूरोप, अफ्रीका और एशिया ने भारत से परिष्कृत कच्चा तेल और ईंधन खरीदा। लेकिन, देशों के बीच के लेन-देन को ‘लॉन्ड्रिंग’ नहीं कहा जा सकता।

अपने एक ट्वीट में पीटर नवारो ने दावा किया, “भारत की बड़ी तेल लॉबी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्रेमलिन के लिए एक विशाल रिफाइनिंग केंद्र और तेल मनी लॉन्ड्रोमेट में बदल दिया है।”

सच तो यह है कि भारत 2022 से नहीं, बल्कि कई दशकों से पेट्रोलियम उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और निर्यातक रहा है। भारत 150 देशों को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि रूस से ‘रियायती कीमतों’ पर खरीदे गए अधिकांश कच्चे तेल को देश की 23 रिफाइनरियों में से एक में संसाधित करने के बाद घरेलू स्तर पर ही खपत कर लिया गया।

यह सच है कि यूरोप, अफ्रीका और एशिया ने भारत से परिष्कृत कच्चा तेल और ईंधन खरीदा, लेकिन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होने के नाते उन्होंने अपनी इच्छा से ऐसा किया। इसलिए, देशों के बीच के लेन-देन को ‘लॉन्ड्रिंग’ नहीं कहा जा सकता।

एक अन्य ट्वीट में पीटर नवारो ने दावा किया, ” भारत अब प्रतिदिन 1 मिलियन बैरल से अधिक रिफाइन पेट्रोलियम का निर्यात करता है, जो कि रूस से मँगाए गए कच्चे तेल की मात्रा के आधे से भी अधिक है। “

भारत के कुल तेल आयात में रूसी तेल का लगभग 30-35% हिस्सा है। और सभी रिफाइन पेट्रोलियम उत्पादों का 70% घरेलू माँग को पूरा करने के लिए उपयोग किया जाता है। इसलिए, व्यापार और विनिर्माण मामलों के वरिष्ठ सलाहकार के दावों में सच्चाई नहीं है।

हालाँकि, परिष्कृत रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के फिर से बेचने या निर्यात पर कभी भी ‘कीमत कवर’ नहीं लगाई गई थी। हाल ही में जुलाई 2025 में रूसी कच्चे तेल से परिष्कृत उत्पादों पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे।

वित्तीय वर्ष 2024-2025 में यूरोपीय संघ ने भारत से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात बढ़ा दिया। ये करीब 221 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) हो गया है। यूरोपीय संघ रूसी कच्चे तेल से रिफाइन ईंधन के आयात को निलंबित कर सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। फ्रांस, नीदरलैंड और बेल्जियम भारत से पेट्रोलियम उत्पादों के शीर्ष आयातक बने हुए हैं।

पीटर नवारो ने भारत विरोधी बयानबाजी के माध्यम से सोशल मीडिया पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ‘व्यापार घाटे’ का मुद्दा उठाया।

उन्होंने बेशर्मी से कहा, ” भारत के साथ हमारा 50 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है—और वे हमारे डॉलर का इस्तेमाल रूसी तेल खरीदने के लिए कर रहे हैं। वे खूब पैसा कमा रहे हैं और यूक्रेन के लोग मर रहे हैं। “

सच तो यह है कि अमेरिका यूरोपीय संघ, मेक्सिको और यहाँ तक कि ‘कट्टर प्रतिद्वंद्वी’ चीन के साथ भी बड़ा व्यापार घाटा झेल रहा है। जैसा कि पहले बताया गया है, भारत रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल नहीं करता (क्योंकि यह तेल तीसरे देशों की रिफाइनरियों द्वारा खरीदा जाता है)।

विडंबना यह है कि संयुक्त राज्य अमेरिका रूस से संवर्धित यूरेनियम खरीदता है और पीटर नवारो के संदिग्ध तर्क के अनुसार, यह देश पुतिन के युद्ध कोष को ‘आर्थिक मदद’ है।

रूस से अमेरिका का वर्तमान आयात 2024 में 3 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अगस्त 2025 में दावा किया है कि अमेरिका के साथ देश का द्विपक्षीय व्यापार 20% बढ़ गया है।

पीटर नवारो ने भारत पर ‘रणनीतिक मुफ्तखोरी’ का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया, “भारत रूसी हथियार खरीदना जारी रखे हुए है, जबकि माँग कर रहा है कि अमेरिकी कंपनियाँ संवेदनशील सैन्य तकनीक हस्तांतरित करें और भारत में संयंत्र स्थापित करें।”

एक संप्रभु देश होने के नाते, भारत किसी भी साझेदार देश से हथियार खरीदने का विकल्प चुन सकता है। रूस भारत का एक विश्वसनीय सहयोगी रहा है। इसलिए हथियारों और गोला-बारूद का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

भारत फ्रांस, इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों से भी हथियार खरीदता है। भारत एशिया की एकमात्र बड़ी शक्ति है जो सैन्य रूप से चीन के खतरे का मुकाबला कर सकती है।

भारत और अमेरिका क्वाड और हिंद-प्रशांत रक्षा सहयोग का हिस्सा हैं। चूँकि कूटनीति और व्यापार में कुछ भी मुफ्त नहीं होता, इसलिए भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में ‘रणनीतिक मुफ्तखोरी’ की कोई अवधारणा नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्यापार एवं विनिर्माण मामलों के वरिष्ठ सलाहकार ने भारत से अमेरिकी आयात पर लगाए गए 50% टैरिफ को सही ठहराया है।

उन्होंने कहा, ” यूक्रेन में शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर गुजरता है। ” सच्चाई यह है कि भारत ने लगातार यूक्रेन और रूस के बीच शांति का आह्वान किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एक साक्षात्कार में कहा है , “रूस और यूक्रेन, दोनों के साथ मेरे घनिष्ठ संबंध हैं।” उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रपति पुतिन के साथ बैठकर कह सकता हूँ कि यह युद्ध का समय नहीं है। मैं राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से भी दोस्ताना अंदाज में कह सकता हूँ कि भाई, दुनिया में चाहे कितने भी लोग आपके साथ खड़े हों, युद्ध के मैदान में कभी कोई समाधान नहीं निकलेगा।”

भारत और उसकी सरकार ने हमेशा शांति और कूटनीति की वकालत की है। विडंबना यह है कि जो अमेरिका रूस से यूरेनियम खरीदता है, वही अमेरिका उसी देश से कच्चा तेल खरीदने और वैश्विक बाजारों को स्थिर रखने के लिए भारत पर 50% टैरिफ लगा रहा है।

यह कुछ और नहीं बल्कि ट्रम्प प्रशासन का झूठा बहाना है और भारत को बलि का बकरा बनाने की एक सोची समझी साजिश है।

नेपाल तक भागा, सिम बदली, दाढ़ी कटवाई… फिर भी पकड़ा गया अनवर कादरी: लव जिहाद फंडिंग केस में फरहाना-आयशा की मदद से छिपने तक के कई खुलासे, दूसरी बीवी के गहने बेचकर कर रहा था गुजारा

इंदौर में लव जिहाद फंडिंग मामले के मुख्य आरोपित कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी ने 75 दिन की फरारी के बाद कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर 3 सितंबर 2025 तक रिमांड पर लिया है। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। नेपाल भागने, इंटरनेशनल सिम इस्तेमाल करने, दूसरी बीवी और बेटी की मदद से छिपने जैसे कई हथकंडे अपनाए गए। अब पुलिस उसकी फंडिंग नेटवर्क, संपत्ति और रिश्तेदारों की भूमिका की भी जाँच कर रही है।

फरारी और गिरफ्तारी की कहानी

एफआईआर दर्ज होने के बाद अनवर कादरी पुलिस से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। वह इंदौर से भोपाल और फिर दक्षिण भारत होते हुए नेपाल के काठमांडू पहुँचा। वहाँ वह एक होटल में रुका था, जिसका बिल उसकी बेटी आयशा ने दिल्ली से चुकाया। आयशा लगातार अपने अब्बू की मदद कर रही थी।

आयशा ने सुप्रीम कोर्ट में अनवर कादरी की अग्रिम जमानत के लिए भी कोशिश की थी, लेकिन आयशा की गिरफ्तारी के बाद यह प्रक्रिया रुक गई। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि अनवर कादरी की दूसरी बीवी फरहाना भी नेपाल में उसके साथ थी। वह इंदौर की गतिविधियों की जानकारी उसे देती थी।

पैसों की तंगी और नेपाल से वापसी

पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान अनवर कादरी को पैसों की दिक्कत होने लगी थी। उसने अपनी दूसरी बीवी फरहाना के सोने के कंगन बेचकर गुजारा किया। वह नेपाल में खुद को एक व्यापारी बताता था और इंटरनेट कॉल के जरिए परिवार और दोस्तों से संपर्क में रहता था, ताकि पुलिस उसकी लोकेशन का पता न लगा सके।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के सख्त बयानों के बाद अनवर कादरी को अपनी संपत्ति जब्त होने या एनकाउंटर का डर सता रहा था। इसी डर से उसने इंदौर लौटकर कोर्ट में सरेंडर करने का फैसला किया। सरेंडर से ठीक एक दिन पहले पुलिस उसकी संपत्ति जब्त करने वाली थी।

कानूनी मामले और आरोप

अनवर कादरी पर कई गंभीर आरोप हैं। वह हिंदू लड़कियों को लव जिहाद के लिए फँसाने वाले मुस्लिम युवकों को पैसे देता था। गिरफ्तार किए गए आरोपित साहिल खान और अल्ताफ खान ने पूछताछ में बताया था कि अनवर कादरी ने उन्हें लव जिहाद के लिए ₹3 लाख दिए थे।

वह लड़कियों से दोस्ती करने के लिए ‘अर्जुन’ और ‘राज’ जैसे नाम भी इस्तेमाल करता था। अनवर कादरी के खिलाफ इंदौर के अलग-अलग थानों में 20 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें जानलेवा हमला, डकैती और अवैध हथियार रखना जैसे आरोप शामिल हैं। इंदौर कलेक्टर ने उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई का आदेश भी दिया था।

मामला क्या है?

यह मामला जून 2025 में सामने आया, जब दो पीड़ित लड़कियों ने साहिल खान और अल्ताफ खान के खिलाफ लव जिहाद और धर्मांतरण का आरोप लगाया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने अनवर कादरी का नाम लिया और बताया कि वह हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मुस्लिम युवकों को ₹1 लाख देता था और निकाह कराने पर ₹2 लाख देता था।

इस खुलासे के बाद से ही कादरी फरार चल रहा था। पुलिस ने उस पर ₹40 हजार का इनाम भी रखा था और उसकी बेटी आयशा को भी गिरफ्तार किया था। अब कादरी के पकड़े जाने से इस मामले की और भी परतें खुल सकती हैं।

इजरायल से बदला लेने की कर रहा था तैयारी, तभी आसमान से बरसीं मिसाइलें: यमन पर कब्जा जमाए हूतियों का प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी मंत्रियों समेत ढेर

यमन की राजधानी सना में बीते 28 अगस्त को हुए इजरायली हवाई हमले ने मध्य पूर्व की राजनीति में नया मोड़ ला दिया। इस हमले में हूती विद्रोहियों की सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी की मौत हो गई है, जिसकी पुष्टि खुद हूतियों ने दो दिन बाद की है।

यह सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि इजरायल के लिए एक बड़ी जीत थी, जिसने सबसे वरिष्ठ हूती नेता को निशाना बनाया। अल-रहावी को पिछले साल ही प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था और अल-रहावी की मौत इजरायल-हूती संघर्ष की दिशा को बदल सकती है।

हमले के वक्त अल-रहावी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सना के बाहरी इलाके में सरकारी सेमिनार में मौजूद थे। उसी दौरान टीवी पर उनके नेता अब्दुल-मलिक अल-हौती का पहले से रिकॉर्ड किया गया भाषण चलाया जा रहा था, जिसमें वे गाजा संघर्ष पर इजरायल से बदला लेने की धमकी दे रहे थे।

हवाई हमले ने हूती नेतृत्व की कमजोरियों को उजागर किया और यह स्पष्ट कर दिया कि इजराइल अब केवल बुनियादी ढाँचे पर नहीं बल्कि नेतृत्व पर सीधे वार करने की रणनीति अपना रहा है। अहमद अल-रहावी कभी यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के करीबी रहे थे और 2014 में हूतियों के साथ जुड़े।

हाल ही में उन्होंने इजराइल पर हमलों का समर्थन करते हुए कहा था कि यमन फिलिस्तीनी संघर्ष के लिए बहुत कुछ सहने को तैयार है। उनकी हत्या के बाद हूती नेतृत्व में गहरा आघात है। सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के प्रमुख महदी अल-मशात ने बदला लेने की घोषणा की और विदेशी कंपनियों को इजरायल छोड़ने की धमकी दी।

इजराइली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इसे हूतियों पर ‘करारा झटका’ बताया और कहा कि यह तो बस शुरुआत है। विश्लेषकों के अनुसार, यह हमला इजरायल की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अब हमास और हिज़्बुल्लाह की तरह हूतियों के नेतृत्व को भी सीधे निशाना बना रहा है।

क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी ने कहा कि यह बदलाव हूतियों के कमांड ढाँचे को भारी खतरे में डालता है। हूती अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से ही सक्रिय हैं। उन्होंने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिप्स को निशाना बनाया और इजरायल पर मिसाइलें दागीं, जिससे वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हुआ।

हाल ही में उन्होंने इजरायल की ओर क्लस्टर हथियारों से लैस बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जो 2023 के बाद अपनी तरह का पहला हमला था लेकिन अल-रहावी पर हुआ ताजा हमला दिखाता है कि इजरायल अब केवल हमास या लेबनान के हिज़्बुल्लाह तक सीमित नहीं है।

सीरिया में असद सरकार के ठिकाने, ईरान समर्थक मिलिशिया और अब यमन के हूती सब इजरायली निशाने पर हैं। मानो इजरायल अपने आखिरी बड़े दुश्मनों तक का सफाया करने की ओर बढ़ रहा हो। गाजा से लेकर बेरूत, दमिश्क से लेकर सना तक, इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रहा है और धीरे-धीरे हर दुश्मन की रीढ़ तोड़ने की कोशिश में है।

‘खुद कुत्ते भी मुझे शुभकामनाएँ भेज रहे हैं’: जस्टिस विक्रम नाथ ने मशहूर होने का दिया श्रेय, आवारा कुत्तों के समर्थन में दिया था फैसला, CJI का भी जताया आभार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ का कहना है कि आवारा कुत्तों वाले मामले ने उन्हें दुनिया भर में मशहूर कर दिया है। उन्होंने कहा, “अब तक मैं सिर्फ अपनी थोड़ी-बहुत कानूनी सेवाओं के लिए ही जाना जाता था लेकिन अब आवारा कुत्तों वाले मामले की वजह से ना सिर्फ देश में बल्कि दुनिया भर में लोग मुझे जानने लगे हैं।”

यह बातें जस्टिस विक्रम नाथ ने केरल में आयोजित नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (NALSA) और केरल स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (KeLSA) ने तिरुवनंतपुरम की ओर से आयोजित ‘ह्यूमन वाइल्डलाइफ कॉन्फ्रेंस’ में कहीं। इस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज भी शामिल हुए थे।

जस्टिस नाथ ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई को भी धन्यवाद दिया कि उन्होंने यह मामला उन्हें सौंपा। उन्होंने बताया कि हाल ही में जब वह ‘Law Asia POLA Summit’ में शामिल हुए तो वहाँ विदेशों से आए वकील संघों के अध्यक्षों ने उनसे आवारा कुत्तों के केस के बारे में सवाल पूछे। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “मुझे बहुत खुशी हुई कि अब विदेशों में भी लोग मुझे जानने लगे हैं।”

जस्टिस नाथ ने यह भी कहा कि उन्हें लोगों के साथ-साथ कुत्तों से भी आशीर्वाद मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “लोगों के संदेश आए हैं कि सिर्फ कुत्ता प्रेमी ही नहीं बल्कि खुद कुत्ते भी मुझे शुभकामनाएँ भेज रहे हैं।”

गौरतलब है कि दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने 11 अगस्त 2025 को एक आदेश दिया था। इसमें कहा गया था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों को पकड़कर उन्हें शेल्टर होम बनाकर शिफ्ट किया जाए।

इस आदेश के बाद एनिमल राइट ऐक्टिविस्ट्स और तमाम डॉग लवर्स ने इसका खूब विरोध किया। CJI ने यह केस जस्टिस नाथ की अध्यक्षता में बनाई गई तीन जजों वाली बेंच को सौंपा था।

इसके बाद 22 अगस्त 2025 को जस्टिस नाथ की बेंच ने 11 अगस्त वाले आदेश पर रोक लगा दी और निर्देश दिया कि कुत्तों को टीकाकरण और नसबंदी के बाद उसी जगह वापस छोड़ा जाए जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।

यूनिवर्सिटी के नाम 135 एकड़ जमीन लेकर नहीं किया किया काम, लद्दाख प्रशासन ने रद्द की डील तो विक्टिम कार्ड खेलने पर उतरे ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक: ‘विचहंट’ के नाम पर बने पाकिस्तानियों का प्रोपेगेंडा टूल

लद्दाख प्रशासन द्वारा जमीन का आवंटन रद्द करने के कुछ ही दिनों बाद ही पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स ने ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक का समर्थन करना शुरू कर दिया है।

वांगचुक फरवरी 2025 में एक ‘क्लाइमेट कॉन्फ्रेंस’ में हिस्सा लेने पाकिस्तान गए थे। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के हालिया फैसले को ‘लद्दाख पर हमला‘ करार दिया था।

इस बीच, पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट्स झूठी कहानियाँ फैलाकर ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि सोनम वांगचुक को भारत सरकार द्वारा परेशान किया जा रहा है।

वांगचुक के समर्थक में पाकिस्तानी ट्वीट्स

ये अकाउंट्स जानबूझकर भारत के आंतरिक मामले में दखल देकर यह प्रचार कर रहे हैं कि लद्दाख प्रशासन का फैसला एक ‘राजनीतिक चाल’ है, जिससे राज्य का दर्जा मांगने वाली आवाजों को दबाया जा सके।

क्या है पूरा विवाद?

साल 2018 में स्थानीय प्रशासन ने लेह के फियांग गाँव में करीब 135 एकड़ जमीन ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक और उनके हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) को आवंटित की थी।

यह जमीन 40 साल की लीज पर दी गई थी लेकिन इस साल 21 अगस्त को लेह के डिप्टी कमिश्नर ने पूरा आवंटन रद्द कर दिया।

प्रशासन को यह सख्त कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि आवंटित की गई जमीन का इस्तेमाल उस काम के लिए नहीं हो रहा था, जिस पर दोनों पक्षों ने सहमति बनाई थी।

‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक आज तक उस 135 एकड़ जमीन पर मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी नहीं बना पाए हैं। साथ ही, उन्होंने न तो लीज एग्रीमेंट पर अमल किया और न ही जमीन को औपचारिक तौर पर तहसीलदार को सौंपा।

अपने आदेश में लेह के डिप्टी कमिश्नर रोमिल सिंह डोंक ने लिखा, “आवंटन आदेश 5-5-2019 को खत्म हो चुका है और आवंटन आदेश की शर्त संख्या IV के तहत इसे रद्द माना जाता है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह जमीन अब ‘राज्य को सौंप’ दी गई है और तहसीलदार को निर्देश दिया गया कि वह जमीन को खाली कराए और राजस्व रिकॉर्ड में अपडेट करे।

‘विचहंट’ के झूठे दावे

लद्दाख प्रशासन के आदेश के बाद से ही ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक खुद को सरकारी दबाव का शिकार दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

उन्होंने दावा किया है, “HIAL का जमीन आवंटन रद्द करने का फैसला उस वक्त लिया गया है जब लद्दाख के लोग अपने अधिकार, सुरक्षा और लोकतंत्र की माँग कर रहे हैं। यह एक तरह से विचहंटिंग लगती है।”

इसी तरह के ‘विचहंट’ वाले दावे लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) जैसे राजनीतिक समूहों ने भी किए हैं। हालाँकि, हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

सच, जो सोनम वांगचुक नहीं बताना चाहते

‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक ने कई सालों से 135 एकड़ जमीन का किराया तक नहीं चुकाया है, जिसकी मौजूदा कीमत 27 से 30 करोड़ रुपए के बीच है। जबकि डिप्टी कमिश्नर ने क्लॉज 4(b) के तहत नोटिस भी जारी किए थे।

साथ ही, लीज एग्रीमेंट के एक साल के भीतर यूनिवर्सिटी भी नहीं शुरू की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि HIAL ने ‘यूनिवर्सिटी का दर्जा’ पाने के लिए आवेदन भी 2022 में किया, यानी आवंटन के 4 साल बाद।

इससे साफ झलकता है कि सोनम वांगचुक ने लीज एग्रीमेंट का पालन नहीं किया लेकिन फिर भी वे झूठे बहाने बनाकर प्रशासनिक अड़चनों का रोना रो रहे हैं।

इतना ही नहीं, HIAL ने 3 साल तक लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) से संपर्क नहीं किया। बल्कि सीधे लेह के डिप्टी कमिश्नर से बात करने की कोशिश की।

इसके अलावा, सोनम वांगचुक ने दावा किया कि HIAL को 14 करोड़ रुपए के प्रीमियम से छूट मिली थी। लेकिन LAHDC ने ऐसा कोई अनुरोध कभी मंजूर ही नहीं किया। इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड में किसी तरह की छूट मौजूद नहीं है।

असल में, HIAL के खिलाफ जमीन के गलत इस्तेमाल की शिकायतें दर्ज हुईं। फरवरी 2020 में फियांग गाँव के सरपंच और नम्बदार ने LAHDC को इस बारे में पत्र भी भेजा था।

इन हालात और लीज एग्रीमेंट के कई उल्लंघनों को देखते हुए लद्दाख प्रशासन को मजबूरन HIAL का आवंटन रद्द करना पड़ा।

‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक ने न तो लीज की शर्तों का पालन किया और न ही LAHDC की शिकायतों को सुलझाया। कई सालों तक भुगतान न करने के बावजूद अब वे राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनने का नाटक कर रहे हैं।

HIAL और सोनम वांगचुक की ये सारी गड़बड़ियाँ अब प्रशासनिक रिकॉर्ड, नोटिस और लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल के एग्जीक्यूटिव काउंसलर द्वारा दर्ज हो चुकी हैं।

पाकिस्तान से मिल रहा वांगचुक को समर्थन

यह साफ है कि ‘एक्टिविस्ट’ भले ही बौखलाए हुए हैं लेकिन असल चिंता की बात यह है कि सोनम वांगचुक को सीमा पार से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।

यह एक गंभीर मसला है क्योंकि पाकिस्तान आधे-अधूरे सच और साजिश की थ्योरी फैलाकर भारत में मतभेद पैदा करना चाहता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी हाल के दिनों में कई झूठ फैलाए गए हैं जिनका PIB ने खुलासा किया है।

‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक सच्चाई न बताकर सार्वजनिक संसाधनों के गलत इस्तेमाल को छिपाकर पाकिस्तान को भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने में मदद कर रहे हैं।

रूस और कनाडा में श्रीराम की भक्ति, पुलवामा-श्रीनगर में ‘खेलो इंडिया’ को बढ़ावा: ‘मन की बात’ में PM मोदी ने की बिहार की ‘सोलर दीदी’ की तारीफ, UPSC की परीक्षा में चूकने वाले युवाओं के लिए प्रतिभा सेतु पोर्टल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 125वां एपिसोड में भारत के लोगों को चीन से संबोधित किया। पीएम ने संबोधन में स्वदेशी का मंत्र दिया। उन्होंने रूस के व्‍लाडिवोस्‍टक में रामायण की थीम पर लगी पेंटिंग्‍स प्रदर्शनी का भी उल्‍लेख किया। पीएम ने प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे देशभर के कई शहरों पर भी चिंता जताई।

प्राकृतिक आपदा से लोगों का जीवन संकट में फँसा: PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा, “मॉनसून के इस मौसम में प्राकृतिक आपदाएँ देश की कसौटी कर रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हमने बाढ़ और भूस्खलन का कहर देखा है। कहीं घर उजड़ गए, कहीं खेत डूब गए। परिवार के परिवार उजड़ गए, पानी के तेज बहाव में कहीं पुल बह गए, सड़के बह गईं और लोगों का जीवन संकट में फँस गया।”

उन्होंने आपदा की घड़ी में रेस्कयू ऑपरेशन की प्रशंसा की। पीएम मोदी ने कहा, “आपदा की घड़ी में सेना मददगार बनकर सामने आई। स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, डॉक्टर, प्रशासन, संकट की इस घड़ी में सभी ने हर संभव प्रयास किया। मैं ऐसे हर नागरिक को हृदय से धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने इस कठिन समय में मानवीयता को सबसे ऊपर रखा हुआ है।”

पुलवामा और श्रीनगर को खेलों में उपलब्धियाँ

पीएम मोदी ने कहा, “जम्मू कश्मीर ने दो बड़ी उपलब्धियाँ भी हासिल की हैं। पुलवामा के स्टेडियम में रिकॉर्ड संख्या में लोग इकट्ठा हुए और यहाँ डे-नाइट क्रिकेट मैच खेला गया। पहले यह होना असंभव था लेकिन अब मेरा देश बदल रहा है। यह मैच रॉयल प्रीमियर लीग का हिस्सा था।”

जम्मू कश्मीर की दूसरी उपलब्धि का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “देश में पहला खेलो इंडिया वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर की डल झील में हुआ। इसमें पूरे भारत से 800 से ज्यादा एथलीट्स ने हिस्सा लिया।” पीएम मोदी ने इसमें हिस्सा लेने वाले दो खिलाड़ियों, ओडिशा की रस्मिता साहू और श्रीनगर के मोहसिन अली का भी नाम लिया।

पीएम मोदी ने कहा, “एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना और देश की एकता, देश के विकास के लिए बहुत जरूरी है। खेल इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए मैं कहता हूं कि जो खेलता है वो खिलता है।”

रूस और कनाडा में प्रभु राम की भक्ति

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि रामायण और भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम अब दुनिया के हर कोने में पहुँच रहा है। अगस्त 2025 में रूस के व्लाडिवोस्टक (Vladivostok) शहर में अनूठी प्रदर्शनी लगाई गई थी। पीएम ने बताया कि इसमें रूसी बच्चों ने रामायण पर बनी अलग-अलग थीम की पेंटिग्स को प्रदर्शित किया।

ऐसा ही कुछ कनाडा के मिसीसागा में भी हुआ। पीएम मोदी ने बताया कि मिसीगागा में प्रभु श्रीराम की 51 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण किया गया। सोशल मीडिया पर भी इस भव्य प्रतिमा के वीडियो खूब शेयर किए गए।

बलिदान सैनिकों की जानकारी जुटा रहे जितेंद्र सिंह राठौर

पीएम मोदी ने गुजरात के सूरत में सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाले जितेंद्र सिंह के बारे में बताते हुए कहा, “जितेंद्र सिंह राठौर ने एक ऐसी पहल की है जो देशभक्त के लिए बेहद अच्छी प्रेरणा है। पिछले कुछ सालों से वह उन सभी जवानों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, जिन्होंने भारत माता की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर किए।”

उन्होंने आगे कहा, “आज उनके पास प्रथम विश्व युद्ध से लेकर अबतक शहीद हुए हजारों वीर जवानों के बारे में जानकारियँ मौजूद हैं। उनके पास शहीदों की हजारों तस्वीरें भी हैं।”

बिहार की देवकी अब ‘सोलर दीदी’

बिहार के मुजफ्फरपुर के रतनपुरा गाँव की देवकी पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “उन्होंने सोलर पंप से गाँव की किस्मत बदल दी है। अब लोग उन्हें प्यार से सोलर दीदी कहते हैं। उनका जीवन आसान नहीं था लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। वो सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी, जहाँ उन्हें सोलर पंप की जानकारी मिली।”

मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों की जर्मनी में फुटबॉल ट्रेनिंग

मध्य प्रदेश के शहडोल के फुटबॉल खिलाड़ियों की जर्मनी में ट्रेनिंग का भी पीएम मोदी ने जिक्र किया। पीएम ने कहा, “शहडोल स्थित एक गाँव में फुटबॉल क्रांति का जिक्र किया था, जिसे जर्मनी के एक बड़े कोच ने देखा और अब वो शहडोल के खिलाड़ियों को जर्मनी में फुटबॉल की ट्रेनिंग देना चाहते हैं।”

सिविल सेवा परीक्षा में असफल होने वाले छात्रों को भी मिलेगी नौकरी

पीएम मोदी ने कहा, “कोई सिविल सेवा की तैयारी कर रहा था, कोई इंजीनियरिंग में जाना चाहता था, कोई मेडिकल परीक्षा के हर पड़ाव पार कर चुका था लेकिन अंत में उसका चयन नहीं हुआ। ऐसे सभी उम्मीदवारों की जानकारी अब ‘प्रतिभा सेतु’ पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है।”

उन्होंने बताया कि इस पोर्टल से प्राइवेट कंपनियाँ इन होनहार छात्रों की जानकारी लेकर उन्हें अपनी कंपनी में नियुक्ति दे सकती हैं। पीएम ने कहा, “इस प्रयास के नतीजे आने लगे हैं। सैकड़ों उम्मीदवारों को इस पोर्टी की मदद से तुरंत नौकरी भी मिली है।”

‘लकड़ी की माला पहनकर खैरात लेने वाले’…महुआ मोइत्रा ने फिर किया हिंदुओं का अपमान: SC, नामशूद्र और मतुआ समुदाय को बताया ‘चुनावी सनातनी’

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने हिंदुओं को लेकर अपमानजनक बातें की हैं। उन्होंने जातियों को निशाना बनाया और हिंदू प्रतीकों तक का मजाक उड़ाने से भी वह नहीं चूकीं। वो भी जानती हैं कि हिंदू धर्म और इसको मानने वाले सहिष्णु हैं तो वो कुछ भी कहकर बचकर निकल जाएँगी।

महुआ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है। गुरुवार (28 अगस्त 2025) के बताए जा रहे इस वीडियो को बीजेपी की IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी X पर शेयर किया है।

महुआ इस वीडियो में वह हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए बंगाली में कह रही है, “पूरे साल आप तृणमूली रहते हैं और चुनाव के दौरान सनातनी?” जाहिर है कि वह बताना चाहती हैं कि कोई एक साथ हिंदू (सनातनी) और TMC का समर्थक नहीं हो सकता है।

अपने बयान में आगे उन्होंने SC (अनुसूचित जाति), नामशूद्र, मतुआ समुदायों को भी अपमानजनक तरीके से निशाना बनाया और वैष्णव समुदाय की पवित्र कंठी माला का मजाक उड़ाया है। उन्होंने उसे ‘लकड़ी की माला पहनने और खैरात लेने वालों की निशानी’ के रूप में पेश किया।

तृणमूल सांसद ने कहा कि SC, नामशूद्र और मतुआ समुदाय के लोग ममता बनर्जी सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ उठाते हैं लेकिन चुनावों के दौरान वे बीजेपी के पक्ष में वोट देते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनका वीडियो शेयर करते हुए अमित मालवीय ने कहा कि भाजपा इस भाषण की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने मोइत्रा पर हिंदू-विरोधी नफरत फैलाने का आरोप लगाया और माँग की कि उन्हें इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट रूप से हिंदू-विरोधी, जातिवादी नफरत भरा भाषण है। इस तरह के सांप्रदायिक जहर के लिए कोई माफी नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा, “भाजपा हमेशा नामशूद्र, SC और मतुआ समुदायों के साथ मजबूती से खड़ी रही है। अब समय आ गया है कि ये समुदाय महुआ मोइत्रा के तत्काल इस्तीफे की माँग करें और एक बड़ा आंदोलन शुरू करें। SC-ST और हिंदू समुदायों का अपमान करने के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

बता दें कि इससे पहले गुरुवार (28 अगस्त 2025) को सांसद महुआ मोइत्रा ने एक और विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि गृहमंत्री अमित शाह का सिर काट दिया जाना चाहिए और कटे हुए सिर को मेज पर रख कर लोगों को दिखाना चाहिए। महुआ ने ये बयान अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर बोलते हुए दिया था।

महुआ ने कहा था, “मैं पूछती हूँ कि क्या हमारी सीमाओं की रक्षा करने वाला कोई नहीं है? और अन्य देशों के लाखों और करोड़ों की संख्या में लोग भारत में घुस रहे हैं, अगर वे हमारी माताओं और बहनों पर नजर रख रहे हैं, अगर वे हमारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं, तो सबसे पहले अमित शाह का सिर काटकर मेज पर रख देना चाहिए।”

url – TMC Mahua Moitra said You remain Trinamool throughout the year and Sanatani during elections? Amit Malviya demanded resignation