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अलकायदा आतंकी हारून राशिद असवत को रिहा करेगा ब्रिटेन, 20 साल की हुई थी सजा: लंदन सीरियल ब्लास्ट में गई थी 50+ की जान, 700+ हुए थे घायल

हारून राशिद असवत ने पहले ही माना था कि उसने 7 जुलाई 2005 के हमले की साजिश रची थी, जिसमें चार आत्मघाती हमलावरों ने लंदन ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को निशाना बनाया था। इस हमले में 52 निर्दोष लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक घायल हुए थे।

यूनाइटेड किंगडम या ब्रिटेन में अक्सर इस्लामी अपराधियों के प्रति दया और सहानुभूति का भाव देखा जाता है। फिर चाहे वह पाकिस्तानी मुस्लिम ग्रूमिंग/बलात्कार गिरोह हो या फिर जिहादी आतंकवादी, ब्रिटिश प्रशासन इन इस्लामी अपराधियों को संरक्षण देती है।

हाल ही में ऐसी ही एक और सहानुभूति का मामला सामने आया है। इसके तहत अलकायदा के दोषी आतंकवादी हारून राशिद असवत को ब्रिटेन की कोर्ट ने रिहा करने का फरमान सुनाया है। ये तब है जब उसे ‘गंभीर सुरक्षा खतरा’ माना गया है।हारून ने कश्मीर में इस्लामी आतंकवाद की ट्रिनंग ली। इशके बाद 7/7 लंदन बम धमाकों की साजिश रची थी।

ब्रिटेन के हाई कोर्ट के जज रॉबर्ट मॉरिस जे ने न केवल असवत की रिहाई को मंजूरी दी, पर साथ ही उसे ‘ऑल द बेस्ट’ कहकर शुभकामनाएँ भी दीं।

जे ने हारून से कहा, “मुझे पता है कि अमेरिका में हिरासत में रहना आपके लिए सुखद नहीं रहा होगा। मैं आपको शुभकामनाएँ देता हूँ। आगे का रास्ता यही है कि आप अपनी दवाएँ लेते रहें, जो सलाह मिले उसका पालन करें और उन गतिविधियों से दूर रहें जिनके कारण आप पहले जेल गए थे। आपने देखा कि उसका अंजाम क्या हुआ और मुझे पूरा विश्वास है कि आप फिर से वहाँ नहीं जाना चाहेंगे।”

हारून असवत और इस्लामी आतंकवाद में उसकी भूमिका

हारून राशिद असवत मूल रूप से बैटली, वेस्ट यॉर्कशायर का रहने वाला है। 1990 के दशक में अबू हमजा के साथ अमेरिका के ओरेगन में आतंकी ट्रेनिंग केंप स्थापित करने की कोशिश की थी। इसके लिए 2015 में अमेरिका में उसे 20 साल की सजा सुनाई गई थी।

इसके बाद 2022 में उसे ब्रिटेन वापस भेजा गया। यहाँ उसे सीजोफ्रेनिया नाम की बीमारी का पता चला। इसके इलाज के लिए उसे मानसिक अस्पताल में रखा गया था। अब उसकी रिहाई को मंजूरी दी गई है।

1999 में एक कार में हारून असवत और नफरती भाषण देने वाला अबू हमजा अल मसरी (फोटो- मेट्रो)

गौरतलब है कि हारून ने पहले ही स्वीकार किया था कि उसने 7 जुलाई 2005 को लंदन में हुए आत्मघाती हमलों की योजना बनाई थी। इसमें 52 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। उसने खुद को सार्वजनिक रूप से ‘आतंकवादी’ कहा था।

हारून और उसके साथी आतंकवादी उआसामा कसीर ने पाकिस्तान में जिहाद की ट्रेनिंग ली थी। अमेरिका में मुकदमे के दौरान असवत ने स्वीकार किया था कि उन्होंने ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा का साथ दिया। असवत और कासिर सीएटल भी गए, जहाँ दोनों एक मस्जिद में दो महीने तक रहे।

इन दोनों ने मस्जिद में रहकर वहाँ के लोगों को हथियारों की जानकारी, AK-47 को असेंबल/डिसअसेंबल करने, साइलेंसर बनाने और ग्रेनेड लॉन्च करने की ट्रेनिंग दी।

अमेरिकी प्रशासन की जाँच में यह भी सामने आया कि सितंबर 2002 में पाकिस्तान के कराची में अलकायदा के एक सेफ हाउस से बरामद दस्तावेजों में असवत का नाम शामिल था। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद इस्तेमाल करता था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, लंदन हमलों के आत्मघाती हमलावरों की ओर से की गई 20 कॉल्स एक ऐसे फोन से की गई थीं जो असवत से जुड़ा था। कुछ हफ्तों के बाद हारून को जाम्बिया में गिरफ्तार किया गया। उसके पास से आतंकी मैनुअल और बम बनाने का सामान भी बरामद हुआ था।

हारून ने ये भी माना था कि उसने विदेशी आतंकवादी संगठन को समर्थन दिया और साथ ही उन्हें हमलों से जुड़ी चीजें भी मुहैया करवाई थी। इन दोनों आरोपों के लिए अमेरिका में अधिकतम 10 साल की सजा निर्धारित है।

हालाँकि उसने 20 साल की सजा पूरी नहीं की क्यों कि तब तक ब्रिटेन में उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।

ब्रिटिश जज की जरूरत से अधिक सहानुभूति और कानूनी खामियाँ

हारून की मेडिकल रिपोर्ट बताती है कि ब्रॉडमूर अस्पताल में इलाज के बावजूद उसकी मानसिक स्थिति ‘स्थिर’ होने पर वह हिंसक जिहादी विचारधारा पर ही बात करता रहता है।

इस वर्ष अप्रैल में, जब मेट्रोपोलिटन पुलिस ने हारून और उसके परिवार पर निगरानी के लिए नोटिफिकेशन ऑर्डर की याचिका दायर की, तब जज जे को बताया गया था कि हारून आम लोगों के लिए खतरा है। साथ ही उसकी उनकी मानसिक बीमारी इस्लामी कट्टरता को और अधिक बढ़ाती है।

जज जे ने माना कि हारून अब भी ‘हिंसक कट्टरपंथी वाले आतंकवादी गतिविधियों’ के लिहाज से एक खतरा है, क्योंकि उसने यहूदियों, ईसाइयों और कुछ मुस्लिम समूहों को मारने की धमकी दी है। साथ ही, वह मानसिक रूप से अस्थिर होने के बीवजूद अन्य कमजोर लोगों को प्रभावित कर सकते हैं क्योंकि तब उसका मजहबी उग्रवाद मानसिक बीमारी से और तेज हो जाता है।

हारून के आतंकी इतिहास और भविष्य में आतंकी गतिविधियों से जुड़ने की प्रवृत्ति को जानने के बावजूद जज जे ने हारून से सहानुभूति जताते हुए कहा, “आप शायद अब यह सब पीछे छोड़ना चाहते हैं। अमेरिका की हिरासत में रहना बहुत अच्छा नहीं रहा होगा।”

हारून की मानसिक स्थिति के कारण उसे जेल के बजाय अस्पताल में रखा गया। इसके कारण उसका आतंकवादी जोखिम मूल्यांकन (terrorist risk assessment) नहीं हो सका। अब उसे बिना एंकल टैग मॉनिटरिंग के रिहा किया जा रहा है क्योंकि इस तरह के मानसिक रोगियों पर निगरानी रखने की अनुमति नहीं है।

इस बीच, मेट्रोपॉलिटन पुलिस के आतंकवाद विशेषज्ञ डिटेक्टिव चीफ सुपरिंटेंडेंट गैरेथ रीस ने कोर्ट को बताया, “उसने अफगानिस्तान में अलकायदा के साथ बिताए समय बेहतर बताते हुए फिर से उससे जुड़ने की बात कही है। मेरे अनुभव के अनुसार, यह व्यवहार ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और जनता के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।”

जज रॉबर्ट जे की इस सहानुभूति भरी टिप्पणी ने ब्रिटेन में आक्रोश पैदा कर दिया है। रिफॉर्म यूके पार्टी के नेता नाइजेल फराज ने जज जे को बर्खास्त करने की माँग की है और कहा, “लोग अब कड़ा न्याय चाहते हैं। हारून का बाकी बचा हुआ जीवन कड़ी सुरक्षा वाली जेल में बिताना चाहिए और जज जे को बर्खास्त कर देना चाहिए।”

शैडो जस्टिस सेक्रेटरी रॉबर्ट जेनरिक ने भी जज जे की टिप्पणी की आलोचना की है। उन्होंने कहा , “ये 7 जुलाई के पीड़ितों का अपमान है। एक हाई कोर्ट के जज का किसी भी दोषी आतंकवादी को शुभकामनाएँ देना या सहानुभूति जताना सही नहीं है। जे को शर्म आनी चाहिए कि वे किसी कट्टरपंथी के साथ दोस्ताना व्यवहार कर रहे हैं।”

ये खबर मूल रूप से अंग्रेजी में श्रद्धा पांडेय ने लिखी है। इसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ा जा सकता है। इसका अनुवाद रामांशी मिश्रा ने किया है।

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Shraddha Pandey
Shraddha Pandey
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