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10 दिन में साबित करनी होगी नागरिकता, असम की BJP सरकार का नया SOP: सीएम सरमा बोले- 30000+ घुसपैठियों को राज्य से बाहर किया

असम के नए SOP किसी के संदिग्ध घुसपैठिया होने की दशा में उसे अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 10 दिन का समय दिया जाएगा। इसमें असफल होने पर जिला प्रशासन 24 घंटे के भीतर उसके लिए डिपोर्टेशन का आदेश जारी कर सकता है।

असम में घुसपैठिया होने के शक में पकड़ा जाने पर अब सिर्फ 10 दिन में अपनी नागरिकता का प्रमाण देना होगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार (9 सितंबर 2025) को गुवाहाटी में असम कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि राज्य ने अब तक 30,128 घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा है। इसके साथ ही असम कैबिनेट में सीएम सरमा ने अब एक नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने पर मुहर लगाई है।

असम में घुसपैठिययों को डिपोर्ट करने के लिए सरकार लगातार कमर कस कर काम कर रही है। ऑपरेशन पुशबैक समेत हर तरह से सरकार घुसपैठियों को राज्य और देश से बाहर निकालने पर काम कर रही है। इसी में अब राज्य में अवैध घुसपैठियों की समस्या से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने असम की कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय लिए। इन फैसलों का मूल उद्देश्य असम राज्य की सांस्कृतिक पहचान और जनसांख्यिकीय संतुलन को सुरक्षित रखना है।

बैठक में 1950 के Immigrants (Expulsion from Assam) Act के तहत एक नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) मंजूर किया गया। इसके तहत स्थानीय प्रशासन को सीधे कार्रवाई का अधिकार मिलेगा।

नए SOP पर सीएम सरमा ने कहा, “अब हमें हर बार अदालत जाने की जरूरत नहीं है। जिला आयुक्त अब सीधे घुसपैठियों की पहचान कर डिपोर्टेशन या निष्कासन का आदेश जारी कर सकते हैं।”

क्या है नया SOP

असम में लागू किए गए नए SOP के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध घुसपैठिया पाया जाता है, तो उसे अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 10 दिन का समय दिया जाएगा। अगर 10 दिन में वह अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता तो जिला प्रशासन 24 घंटे के भीतर उसके लिए डिपोर्टेशन का आदेश जारी कर सकता है।

इसके बाद व्यक्ति को या तो होल्डिंग सेंटर में भेजा जाएगा या सीमा सुरक्षा बल (BSF) की मदद से देश से बाहर खदेड़ दिया जाएगा। यह प्रक्रिया अब विदेशी न्यायाधिकरणों (Foreigners’ Tribunals) को दरकिनार कर सीधे प्रशासनिक स्तर पर की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस फैसले को ‘ऐतिहासिक और निर्णायक’ बताया। उन्होंने कहा, “हमारे न्यायाधिकरणों में 82,000 से अधिक मामले लंबित हैं और यह SOP उस प्रणाली को दरकिनार करता है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह SOP उन लोगों पर भी लागू होगा जिनका नाम NRC में शामिल होने के बाद भी उनकी नागरिकता पर संदेह हो।

सीमा में घुसते पकड़े गए तो 12 घंटे में होगी वापसी

कैबिनेट ने यह भी तय किया कि सभी चिन्हित व्यक्तियों के बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय विवरण को Foreigners Identification Portal पर दर्ज किया जाएगा। इससे भविष्य में निगरानी और प्रवर्तन सुनिश्चित किया जा सके।

इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति सीमा पार करते हुए 12 घंटे के भीतर पकड़ा जाता है, तो उसे बिना किसी लंबी कानूनी प्रक्रिया के तुरंत वापस भेजा जा सकता है।

यह SOP सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा अक्टूबर 2024 में दिए गए उस निर्णय के बाद लागू किया गया है जिसमें कहा गया था कि असम सरकार को 1950 के कानून का उपयोग करने की पूरी आजादी है। इस फैसले को असम में दशकों से चली आ रही घुसपैठ की समस्या से निपटने में एक निर्णायक बदलाव माना जा सकता है।

सीएम हिमंता ने यह भी साफ किया कि विदेशी न्यायाधिकरणों में लंबित 42,000 मामलों की सुनवाई जारी रहेगी। नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का उपयोग उन घुसपैठियों के मामलों में किया जाएगा जिनके खिलाफ न्यायाधिकरणों में कोई मामला लंबित नहीं है।

पुराने आँकड़ों के अनुसार, विदेशी न्यायाधिकरणों में कुल 1,68,000 मामले दर्ज थे। हालाँकि इनमें से कई घुसपैठिए गायब हो चुके हैं, जिनके मामले अभी तक निपटाए नहीं गए हैं। ऐसे में यह स्थिति प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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