बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की विशेष जाँच (SIR) में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इलेक्शन कमीशन (EC) की जाँच में अब तक करीब 3 लाख वोटरों के दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई है। इन सभी को नोटिस भेजा गया है और 7 दिनों के भीतर अधिकारियों के सामने हाजिर होकर अपने कागजात दिखाने को कहा गया है।
यह संख्या और भी बढ़ सकती है, क्योंकि अभी भी दस्तावेजों की जाँच चल रही है। जाँच के दौरान ऐसे कई वोटर मिले हैं, जिनके भारतीय नागरिक होने पर शक है। खासकर नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से आए लोगों के वोटर बनने की आशंका जताई जा रही है। रविवार (24 अगस्त 2025) को चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा था कि 98.2% मतदाताओं के दस्तावेज प्राप्त हो चुके हैं।
कैसे मिला गड़बड़ी का सुराग?
इलेक्शन कमीशन के अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों को नोटिस भेजा गया है, उन्होंने या तो कोई दस्तावेज जमा नहीं किया या गलत दस्तावेज दिए हैं। कुछ मामलों में तो वोटर की नागरिकता ही संदिग्ध पाई गई है। ये जानकारी बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) और पुलिस जैसी एजेंसियों से मिली है।
नोटिस में कहा गया है कि उनके द्वारा दिए गए दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ियाँ पाई गई हैं, जिससे इस बात पर शक होता है कि उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल होना चाहिए या नहीं।
कहाँ से आए हैं ये ‘संदिग्ध वोटर’?
जानकारी के अनुसार, ज्यादातर नोटिस पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, मधुबनी, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और सुपौल जिलों में भेजे गए हैं। ये इलाके सीमांचल क्षेत्र में आते हैं, जिनकी सीमाएँ खुली हैं। भाजपा जैसे राजनीतिक दलों ने इस इलाके में बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के अवैध रूप से बसने का आरोप लगाया है। हालाँकि, कुछ पार्टियाँ इसे शिक्षा की कमी और बाढ़ की वजह से दस्तावेज खोने का मामला बता रही हैं।
इलेक्शन कमीशन ने साफ किया है कि बिना सुनवाई के किसी भी वोटर का नाम लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। सभी संदिग्ध लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि इन 3 लाख लोगों में से ज्यादातर का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं था। उनके आधार कार्ड और बाकी दस्तावेजों में भी नाम और पता मेल नहीं खा रहा था।
बिहार में कुल 7.89 करोड़ वोटर थे, जिनमें से पहले चरण की जाँच में ही 65 लाख नाम हटा दिए गए। हटाए गए नामों में या तो मर चुके थे, या कहीं और चले गए थे, या फिर एक से ज़्यादा जगह पर नाम रजिस्टर्ड थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जापान यात्रा के दौरान दारुमा डॉल (Daruma Doll) देकर सम्मानित किया गया है। यह डॉल जापान की गहरी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ी हुई है। भारत और जापान के बीच मित्रता और सद्भाव की प्रतीक माने जाने वाली यह डॉल उन्हें दारुम जी मंदिर के मुख्य पुजारी शोरिंजन दरूमा-जी ने भेंट की।
Rev Seishi Hirose, Chief Priest of Darum ji Temple presented a Daruma Doll to PM @narendramodi. The Daruma is an iconic cultural symbol & souvenir of Japan.
It is modelled after Bodhidharma, the founder of Zen Buddhism. They are known as a symbol of perseverance and good luck,… pic.twitter.com/oYQgDTpnfW
दारुमा डॉल जापान में दृढ़ संकल्प, हिम्मत और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है। यह गुड़िया बोधिधर्म नामक भिक्षु से प्रेरित है, जिन्होंने जेन बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। बोधिधर्म को जापान में दारुम दाइशी के नाम से जाना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि बोधिधर्म ने दीवार की ओर मुँह करके, अपने अंगों को मोड़कर लगातार 9 वर्षों तक ध्यान किया था। इससे उनके हाथ-पैर क्षीण होकर गिर गए थे। यही कारण है कि दारुमा गुड़िया का आकार अनोखा है, जिसमें न तो कोई अंग हैं और न ही कोई आँख।
चित्र साभार: ऑब्जेक्ट ऑफ जापान
यह गोल और खोखली होती है और इसे इस तरह से बनाया गया है कि जब भी यह गिरती है, तो वापस खड़ी हो जाती है। यह ‘ननाकोरोबी या ओकी’ की कहावत को चरितार्थ करती है, जिसका मतलब होता है कि ‘सात बार गिरो और आठवीं बार उठ जाओ’।
यह गुड़िया आमतौर पर सफेद आँखों के साथ मिलती है। जब कोई व्यक्ति कोई संकल्प या लक्ष्य तय करता है, तो वह एक आँख (बायीं) में काली स्याही भरता है। जब लक्ष्य पूरा होता है, तब दूसरी आँख (दायीं) भरी जाती है। इस तरह यह एक प्रतिबद्धता और उपलब्धि का प्रतीक बन जाती है।
क्या है इस गुड़िया का इतिहास?
टोक्यो के उत्तर में ताकासाकी में स्थित शोरिंजन दारुमा मंदिर को इस गुड़िया का जन्मस्थान माना जाता है। यहाँ हर साल हजारों लोग आते हैं। नए साल की शुरुआत में दारुमा गुड़िया खरीदते हैं, अपने पुराने संकल्पों के लिए धन्यवाद देते हैं और नए इरादे तय करते हैं। यहाँ हर साल दारुमा मेला (दारुमा-इचि) भी मनाया जाता है।
माना जाता है कि मंदिर के संस्थापक ने पहले बोधिधर्म के चित्र बनाकर उन्हें भाग्यशाली ताबीज की तरह दिया। बाद में नवम पुजारी तोगाकु ने इस चित्र को एक पेपीयर-माशे (कागज-मिट्टी की) गुड़िया का रूप दिया, जो आज की दारुमा बनी।
दारुमा अब सिर्फ एक सजावट की चीज नहीं है बल्कि यह व्यक्तिगत, व्यावसायिक और राजनीतिक जीवन में लोगों के सपनों और संघर्षों की पहचान बन चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी को यह गुड़िया देना, न केवल एक सांस्कृतिक सम्मान था बल्कि यह दृढ़ता, सफलता और भारत-जापान के मजबूत होते रिश्तों के लिए एक शुभकामना भी थी।
VIDEO | Tokyo: PM Narendra Modi (@narendramodi) is presented with a Daruma doll by the priest at Shorinzan Daruma-ji Temple.
The Daruma doll is a traditional Japanese talisman symbolizing perseverance and good luck, often used to set and achieve personal or professional goals.… pic.twitter.com/zfjlPtnAdu
इस डॉल का भारत से भी गहरा नाता है। यह डॉल जिस भिक्षु बोधिधर्म से प्रेरित बताई जाती है, वो भारत के तमिलनाडु स्थित कांचीपुरम के एक बौद्ध भिक्षु थे। बोधिधर्म भगवान बुद्ध का प्रचार करने के लिए चीन गए और फिर वहाँ से जापान चले गए थे। जापान में उन्होंने जेन बौद्ध धर्म की स्थापना की थी।
जापानी परंपरा में किसी को दारुमा देना यह दर्शाता है कि आप उस व्यक्ति के संकल्प और सफलता में विश्वास रखते हैं। इस तरह, यह छोटी सी गोल गुड़िया, जिसकी एक आँख अधूरी है और जो कभी हार नहीं मानती, भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक पुल बन गई है।
रिलायंस उद्योग की 48वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को वर्चुअल माध्यम से आयोजित हुई। इस बैठक में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कई बड़ी घोषणाएँ कीं। इनमें 2026 में Jio का IPO आने और AI आधारित नए उत्पादों की शुरुआत जैसी कई अहम बातें शामिल रहीं। इस बैठक में 44 लाख से अधिक शेयरधारकों ने भाग लिया।
मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो का IPO 2026 की पहली छमाही में लॉन्च किया जाएगा। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है, जिससे वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने की उम्मीद है। Jio के पास वर्तमान में 500 मिलियन (50 करोड़) से अधिक ग्राहक हैं और IPO के जरिए कंपनी को वैश्विक स्तर पर विस्तार का अवसर मिलेगा।
Jio ने अपने 10 साल पूरे कर लिए हैं। और इस दौरान कंपनी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। कंपनी ने 500 मिलियन (50 करोड़) ग्राहकों का आँकड़ा पार कर लिया। यह संख्या अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की कुल जनसंख्या से भी ज़्यादा है।
Watch Live | The 48th Annual General Meeting of Reliance Industries Limited. https://t.co/juxqtjnilp
— Reliance Industries Limited (@RIL_Updates) August 29, 2025
मुकेश अंबानी ने इसे ग्राहकों के अटूट विश्वास और समर्थन का प्रतीक बताया। उन्होंने AGM में कहा, “Jio परिवार ने 500 मिलियन ग्राहकों का आँकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि हर उस व्यक्ति की है जिसने Jio पर भरोसा किया और इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया।”
बैठक में अंबानी ने बताया कि रिलायंस कंपनी ने 2024-25 में 10.71 लाख करोड़ रुपए का रेवेन्यू दर्ज किया है। उन्होंने कहा, “हम पहली भारतीय कंपनी हैं जिसने $125 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया है, 2.84 लाख करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट किया। कंपनी ने 3 साल में 5.6 लाख करोड़ रुपए का निवेश भी किया”
AI नए युग की कामधेनु
AGM में रिलायंस की AI रणनीति भी सामने आई। अंबानी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे युग की कामधेनु है। रिलायंस इंडस्ट्रीज रिटेल, पॉवर, टेलीकॉम और एंटरटेनमेंट सेक्टर में AI को शामिल करने की ओर काम कर रहा है।
अंबानी ने कहा कि जिस तरह अब तक जियो ने भारत को जिडिटल सेवाएं दी थीं, उसी तरह अब रिलायंस इंटेलीजेंस में हर भारतीय को AI की सुविधा देगा।
मुकेश अंबानी ने कहा, “एक दशक पहले, डिजिटल सेवाएँ रिलायंस के लिए एक नया विकास इंजन बनी थीं। अब हमारे सामने AI के साथ जो अवसर है, वह उतना ही बड़ा है, अगर उससे भी बड़ा नहीं। जियो ने हर भारतीय के लिए हर जगह डिजिटल सेवाएँ देने का वादा किया था और उसे पूरा किया। उसी तरह, रिलायंस इंटेलीजेंस हर भारतीय के लिए हर जगह AI देने का वादा करती है।”
बताते चलें कि कंपनी ने ‘JioBrain’ नाम का एक नया AI प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया है। मुकेश अंबानी ने नई AI कंपनी रिलायंस इंटेलिजेंस की भी घोषणा की है। इसके 4 पहलू बताए गए हैं। इनमें AI इंफ्रा, ग्लोबल पार्टनरशिप, AI सर्विसेज और AI टैलेंट को शामिल किया गया है। इस कंपनी के जरिए रिलायंस स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और छोटे उद्योगों के लिए सेवा उपलब्ध कराएगी।
इसके अलावा ‘Jio AI Cloud’ की भी घोषणा की गई, जो भारतीय भाषाओं में वॉयस कमांड के जरिए काम करेगा।
ग्रीन एनर्जी से चलेंगे डेटा सेंटर्स
रिलायंस इंटेलिजेंस के तहत वृहद स्तर पर डेटा सेंटर्स बनाए जाएँगे जो AI के लिए तैयार होंगे। ये डेटा सेंटर्स हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) से चलेंगे, यानी पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे। साथ ही इनका इस्तेमाल पूरे देश में AI को ट्रेन करने और चलाने के लिए किया जाएगा।
कंपनी ने दो नए AI-सक्षम डिवाइस भी पेश किए- JioFrames और JioPC। असल में JioFrames एक स्मार्ट चश्मा है जो HD वीडियो रिकॉर्डिंग, लाइव स्ट्रीमिंग और वॉयस असिस्टेंट जैसी सुविधाएँ देगा। वहीं JioPC एक ऐसा डिवाइस है जो किसी भी टीवी को AI- रेडी कंप्यूटर में बदल सकता है।
अंबानी ने कहा, “Reliance Intelligence विश्वस्तरीय शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, डिजाइनरों और उत्पाद निर्माताओं के लिए एक केंद्र बनाएगी, जहाँ अनुसंधान की गति और इंजीनियरिंग की दृढ़ता को मिलाकर विचारों को नवाचारों और व्यावहारिक अनुप्रयोगों में बदला जाएगा, जिससे भारत और दुनिया को समाधान मिलेंगे।”
इन घोषणाओं से साफ जाहिर है कि रिलायंस अब पारंपरिक ऊर्जा और रिटेल के साथ साथ डिजिटल और AI क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ा रही है। Jio का IPO और AI उत्पादों की श्रृंखला भारत को तकनीकी रूप से एक नई ऊँचाई पर ले जाने की क्षमता रखते हैं।
गूगल के साथ साझेदारी
इसके साथ ही मुकेश अंबानी ने यह भी घोषणा की कि रिलायंस अब गूगल के साथ साझेदारी कर रही है ताकि ऊर्जा, रिटेल, टेलीकॉम और वित्तीय सेवाओं जैसे अपने व्यवसायों को AI के माध्यम से रूपांतरित किया जा सके।
इस AI पर काम करने के लिए दोनों कंपनियाँ मिलकर जामनगर क्लाउड रीजन की स्थापना कर रही हैं, जो गूगल क्लाउड की विश्वस्तरीय AI और कंप्यूटिंग क्षमताओं को रिलायंस की स्वच्छ ऊर्जा से संचालित करेगी और जियो के नेटवर्क से जुड़ी होगी।
मद्रास हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि मंदिर का धन केवल धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए ही इस्तेमाल हो सकता है। इसका इस्तेमाल किसी व्यावसायिक काम के लिए किया जा सकता है। कोर्ट ने तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत 5 मंदिरों के धन का इस्तेमाल विवाह के लिए हॉल बनाने में किया जाना था।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह भले ही एक संस्कार है लेकिन वह करारनुमा शर्तों से बँधा होता है। इसलिए इसे धार्मिक उद्देश्य नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी कि मंदिर निधि भक्तों और दानदाताओं की आस्था से जुड़ी है, इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
जस्टिस एस एम सुब्रमण्यम और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की पीठ ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार का यह आदेश हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम 1959 और उसके नियमों के खिलाफ है।
कोर्ट ने साफ किया कि अधिनियम की धारा 66 के अनुसार मंदिर की बची हुई धनराशि को न तो किसी व्यावसायिक गतिविधि में और न ही लाभ कमाने वाली योजनाओं में लगाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल केवल धार्मिक कार्यक्रमों, मंदिरों के रखरखाव और भक्तों की सुविधाओं के लिए ही होना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि मंदिर के धन का उपयोग इस तरह से करना कानून का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी बताया कि विवाह हॉल बनाने के लिए न तो कोई भवन योजना ली गई थी और न ही नियमों के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई थी, इसके बावजूद धनराशि जारी कर दी गई।
दूसरी ओर सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि हिंदू विवाह धार्मिक गतिविधि है और इस तरह के विवाह हॉल गरीब परिवारों को कम खर्च में विवाह करने की सुविधा देंगे। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने सरकारी आदेश की समीक्षा करते हुए पाया कि बनाए जा रहे विवाह हॉल मुफ्त में उपलब्ध नहीं थे बल्कि किराए पर दिए जा रहे थे। यानी यह एक व्यावसायिक गतिविधि थी, न कि कोई दान या धार्मिक सेवा। कोर्ट ने कहा कि मंदिर निधि का उद्देश्य केवल मंदिर और उससे जुड़े धार्मिक कार्यों तक सीमित है। इस धन का उपयोग भक्तों की आस्था से खिलवाड़ किए बिना होना चाहिए।
फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा कि मंदिरों में जमा धन, आभूषण और अचल संपत्तियाँ भक्तों और दानदाताओं की ओर से भगवान को अर्पित की जाती हैं। यह सार्वजनिक या सरकारी धन नहीं है, जिसे राज्य अपनी सुविधा से कहीं भी खर्च कर दे।
सरकार की भूमिका केवल मंदिर निधि और संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने की है, न कि उन्हें किसी नए काम में लगाने की। अंत में कोर्ट ने यह कहते हुए आदेश को रद्द कर दिया कि राज्य ने न तो नियमों का पालन किया और न ही भवन निर्माण की अनुमति ली।
यदि मंदिर निधि का इस तरह इस्तेमाल किया गया तो यह भक्तों के धार्मिक अधिकारों का हनन होगा और मंदिर की पवित्रता पर आघात करेगा। कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि मंदिर का धन सिर्फ मंदिर और धार्मिक गतिविधियों के लिए ही है, किसी और उद्देश्य के लिए नहीं।
अहमदाबाद के सेवेंथ डे स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग तेज हो गई है। हाल ही में एक हिंदू छात्र की एक मुस्लिम नाबालिग ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद पीड़ित परिवार और अन्य अभिभावकों ने स्कूल पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
मृतक छात्र के माता-पिता और ‘जन आक्रोश वाली मंडल संघर्ष समिति’ के सदस्यों ने गुरुवार (28 अगस्त 2025) को अहमदाबाद के मेयर, DEO, स्थायी समिति और AMC कमिश्नर को आवेदन सौंपकर स्कूल के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की माँग की। उनका कहना है कि स्कूल में पहले भी आपराधिक गतिविधियाँ हो रही थीं और छात्रों के हथियार लाने की शिकायत भी की गई थी, लेकिन प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि स्कूल को AMC की लीज पर मिली सरकारी जमीन पर चलाया जा रहा है। यहाँ न सिर्फ हत्या जैसी गंभीर घटनाएँ हुई हैं, बल्कि ईसाई धर्मांतरण जैसी गतिविधियाँ भी चल रही हैं। अभिभावकों ने माँग की है कि स्कूल की लीज तुरंत रद्द की जाए और अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की जाए।
मृतक छात्र के माता-पिता ने अपने बेटे को ‘वीर’ बताते हुए कहा कि उनके बेटे की आत्मा को तभी शांति मिलेगी जब स्कूल पर सख्त कार्रवाई होगी। अभिभावकों ने कहा कि इस घटना से सबक लेते हुए प्रशासन को एक ऐसी मिसाल कायम करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और बच्चे को अपनी जान न गँवानी पड़े।
‘उचित कार्रवाई की उम्मीद’ – मृतक छात्र की माँ
समिति के अध्यक्ष ने बताया कि स्कूल ने जिन शर्तों पर सरकारी जमीन पट्टे पर ली थी, उनका उल्लंघन किया है। उनका कहना है कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही के कारण ही यह घटना हुई। उन्होंने माँग की है कि सरकार को तुरंत स्कूल का अधिग्रहण कर लेना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और छात्र ऐसी घटना का शिकार न बने।
मृतक छात्र की माँ ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने अधिकारियों से हाथ जोड़कर स्कूल पर सख्त कार्रवाई करने की विनती की है। उन्होंने कहा कि अब तक मिले जवाब से वे संतुष्ट हैं, लेकिन वे जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनके बेटे को न्याय जरूर मिलेगा।
यूपी के मुजफ्फरनगर में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। शाहपुर के एक गाँव में नरेंद्र शर्मा नाम के एक हिंदू युवक का जबरन धर्मांतरण कराया गया और उसकी सारी संपत्ति भी हड़प ली गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस मामले में मुख्य आरोपित यामीन समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित ने शादी का झांसा देकर नरेंद्र शर्मा को नशा दिया, उसका खतना करवाया, चोटी काट और फिर धोखे से उसकी जमीन अपने और रिश्तेदारों के नाम करा ली।
दोस्ती का झाँसा, खतना और संपत्ति पर कब्जा
जानकारी के अनुसार, पीड़ित नरेंद्र शर्मा ने अपनी शिकायत में बताया कि गाँव के ही यामीन ने पहले उससे दोस्ती बढ़ाई। यामीन ने उसे नशीली दवाइयाँ खिलाकर कागजात पर दस्तखत करवा लिए। नरेंद्र शर्मा जब होश में आया तो उसे पता चला कि उसके साथ कितना बड़ा धोखा हुआ है।
नरेंद्र शर्मा ने रोते हुए बताया कि नशे की हालत में उसका खतना किया गया और उसकी चोटी भी काट दी गई। आरोपित ने उसकी पौना बीघा जमीन अपनी बीवी के नाम करवाई और दो बीघा जमीन बेचकर उससे प्लॉटिंग कराई। इस पैसे से ट्रैक्टर और गाड़ी भी खरीदी गई। बाकी संपत्ति भी रिश्तेदारों के नाम कर दी गई।
पुलिस की कार्रवाई
शाहपुर पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की और यामीन, गुलजार, इकराम, हाफिज, नई मुरसिद और यामीन के नाबालिग बेटे को गिरफ्तार कर लिया। SSP मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा ने बताया कि यामीन ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने आरोपितों पर धोखाधड़ी, धमकी, आपराधिक साजिश और धर्मांतरण कानून 2021 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मुजफ्फरनगर पुलिस ने X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर इस संबध में जानकारी साझा की है।
पुलिस ने इस मामले को ‘टेस्ट केस’ मानकर जाँच शुरू कर दी है। आरोपितों पर जल्द ही गैंगस्टर एक्ट लगाया जाएगा और उनकी बाकी संपत्तियों की भी जाँच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने की पूरी कोशिश करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को दो दिन की यात्रा पर जापान पहुँच चुके हैं। इस दौरान वे जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मुलाकात करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री SCO सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन के शहर तिआनजिन जाएँगे। यहाँ उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक भी होने की संभावना है।
SCO सम्मेलन के दौरान ही पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भी मुलाकात होगी। टैरिफ को लेकर भारत की अमेरिका के साथ संबंधों में तल्खी के बीच जापान, रूस और चीन के प्रमुखों से पीएम मोदी की बातचीत को अहम माना जा रहा है।
पीएम मोदी की यात्रा से पहले चीन के सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक संपादकीय लिखा है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को ऐतिहासिक बताया गया है।
#Editorial: Today, as the “twin engines” of Asia’s economic growth, key representatives of the Global South, and members of the SCO, BRICS, and the G20, China and India share a mission to push the international order toward greater democracy and fairness. https://t.co/FjvsXryBirpic.twitter.com/9RTuzx8WbT
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने लिखा है, “भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक चीन के तियानजिन शहर में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं। यह 7 वर्षों में उनकी पहली चीन यात्रा है। इसे दोनों देशों के बीच संबंधों में आई ठंडक के बाद इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन अपने कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे कर रहे हैं।”
आगे लिखा है कि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कुछ सकारात्मक घटनाएँ हुई हैं, जैसे हिमालयी सीमा पर सैनिकों द्वारा मिठाइयों का आदान-प्रदान, भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए तिब्बत की यात्रा फिर से शुरू होना और भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने की संभावना जताई जाना। यह सब इस ओर इशारा करता है कि दोनों देश धीरे-धीरे अपने रिश्तों को सुधारने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने लिखा कि गलवान की घटना के बाद दोनों देश यह मानने लगे हैं कि सीमा विवादों के बजाय, संसाधनों को आर्थिक विकास और रणनीतिक प्राथमिकताओं पर लगाना अधिक तर्कपूर्ण है। सुस्त वैश्विक आर्थिक सुधारों के बीच दोनों देशों को आर्थिक विकास के लिए स्थिरता जरूरी है। 2024 में द्विपक्षीय व्यापार साल-दर-साल 1.7% की बढ़ोतरी के साथ 138.478 अरब डॉलर तक पहुँच गया था।
संपादकीय में लिखा है कि 2025 की शुरुआत से ही दुनिया में ‘रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट की अशांति और अमेरिका की घरेलू राजनीति और विदेश नीति में बदलाव’ जैसी कई समस्याएँ आई हैं। अमेरिका अब अपने सहयोगियों को समर्थन देने के बजाय ‘लेन-देन की राजनीति’ अपना रहा है, कुछ जगहों पर तो अमेरिका ने सहयोगियों और साझेदारों की कीमत पर लाभ लेने की नीति अपनाई है। इससे भारत-अमेरिका संबंधों में भी खटास आई है।
इस संपादकीय में पीएम मोदी के भारत के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए संबोधन का भी उल्लेख किया गया है। इसमें लिखा है, “प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर कहा था कि ‘भारत अपने किसानों के हितों पर कोई समझौता नहीं करेगा और किसी भी दबाव के सामने दीवार बनकर खड़ा रहेगा’। भारत अब व्यापार में विविधता लाने के लिए करीब 40 देशों के साथ मिलकर नीतियों पर काम कर रहा है। यह रणनीतिक स्वतंत्रता चीन की विदेश नीति से मेल खाती है, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग की नई संभावनाएँ बन रही हैं।”
इसमें स्पष्ट रुप से लिखा हुआ है कि कुछ पश्चिमी मीडिया संस्थान इस सुधार को ‘अमेरिका-विरोधी गठबंधन’ के रूप में दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह सच्चाई को गलत ढंग से पेश करता है। भारत और चीन की विदेश नीति स्वतंत्र और अपने-अपने राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित है।
संपादकीय के अनुसार, “CNN की एक टिप्पणी में सही कहा गया कि भारत-चीन संबंधों में बदलाव भारत की ‘रणनीतिक स्वतंत्रता’ की नीति का उदाहरण है, जो किसी भी गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता देती है।”
संपादकीय में आगे लिखा है कि इतिहास की ओर देखें तो भारत उन पहले देशों में से था, जिन्होंने पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता दी थी। भारत और चीन ने 1950 के दशक में ‘पंचशील सिद्धांत’ का प्रस्ताव दिया था जो आज भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एक मूल भावना है।
इसमें कहा गया है, “एशिया के आर्थिक विकास के ‘डबल इंजन’ होने के साथ-साथ, ग्लोबल साउथ के प्रमुख प्रतिनिधि और एससीओ (SCO), ब्रिक्स (BRICS) और जी20 (G20) के सदस्य होने के नाते, चीन और भारत की साझा जिम्मेदारी है कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को और अधिक लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण दिशा में आगे बढ़ाएँ।”
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने आखिर में लिखा, “मोदी की चीन यात्रा भारत-चीन संबंधों को सुधारने का एक बढ़िया अवसर है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि अब दोनों बड़े देश अपने रिश्तों को विरोधी नहीं बल्कि साझेदार की तरह सँभालने की कोशिश कर रहे हैं।”
अखबार ने लिखा, “जब भारत-चीन कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे कर रहे हैं, तब उम्मीद की जा रही है कि नई दिल्ली और बीजिंग दोनों मिलकर एक नया अध्याय लिखेंगे, जहाँ ‘ड्रैगन और हाथी’ मिलकर दुनिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि की दिशा में योगदान देंगे।”
बरेली के फैज नगर में 24 अगस्त 2025 को पुलिस ने एक मदरसे में चल रहे धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश किया। जब पुलिस पहुँची तो वहाँ दो हिंदू युवकों का जबरन खतना कराया जा रहा था। मौके से कई मुस्लिम युवक पकड़े गए। इस खुलासे के साथ एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है कि गैंग की कमान एक जीजा-साले की जोड़ी के हाथ में थी।
अब्दुल मजीद ने जयपुर के हिंदू युवक पीयूष को पहले इस्लाम कबूल करवाया, फिर उसका नाम बदलकर मोहम्मद अली रखा। इसके बाद अपनी बहन आयशा से उसका निकाह करवा दिया। नया मुस्लिम जीजा अब हिंदुओं को बहकाने का ‘प्रूफ’ बन गया। वह खुद को पहले हिंदू बताकर कहता, ‘सनातन धर्म बेकार है, इस्लाम में जन्नत है।’
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरोह पहले युवाओं को पाकिस्तानी मौलाना इंजीनियर अली मिर्जा के विचार सुनवाता, जो मजहब की आधुनिक व्याख्या करता है। जब दिमाग काबू में आ जाता, तो जाकिर नाइक की कट्टर और भड़काऊ किताबें पढ़ाई जातीं। ‘मीडिया और इस्लाम –जंग या अमन’, ‘हिंदू धर्म और इस्लाम में समानता’ जैसी किताबें देकर दिखाया जाता और फिर इस्लाम को ‘बेहतर’ साबित किया जाता।
ये लोग कुरान और बाइबिल की बहस वाले वीडियो दिखाते और साबित करने की कोशिश करते कि इस्लाम सबसे बेहतर है। साथ ही वादा करते कि अगर वो धर्म बदलते हैं तो किसी मुस्लिम लड़की से शादी भी करा देंगे। जो लोग फँस जाते, उनके लिए फर्जी सर्टिफिकेट भी बनवाए जाते। ये सर्टिफिकेट दिल्ली की एक मस्जिद से जारी होते थे।
पुलिस जाँच के मुताबिक, धर्मांतरण गैंग कई राज्यों में फैला है। कॉल डिटेल से पता चला है कि ये लोग दक्षिण भारत के कई लैंडलाइन नंबरों पर बात करते थे। पुलिस अब उन राज्यों में जाकर भी जाँच करेगी। अगर और आरोपित सामने आए तो उन पर भी कार्रवाई होगी।
धर्मांतरण जबरन या अपनी मर्जी से?
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुल मजीद की बहन आयशा खातून इस मदरसे में ही रहती हैं और उसका कहना है कि कोई भी जबरदस्ती मुस्लिम नहीं बना। आयशा खातून के मुताबिक, लोग इस्लाम की खूबसूरती देखकर खुद ही उसे अपना रहे हैं। आयशा खातून ने यह भी कहा कि कोई किसी को जबरदस्ती मुस्लिम कैसे बना सकता है।
हालाँकि, आयशा ने कैमरे पर सिर्फ इतना कहा कि उनकी भाभी को बेटी हुई है और उनकी माँ उनसे मिलने जेल गई हैं। यह सब उन आरोपों के ठीक उलट है, जो पुलिस और जाँच में सामने आए हैं।
जयपुर का ‘पीयूष’ बना ‘मोहम्मद अली’
गाँव के एक बुजुर्ग ने बताया कि अब्दुल मजीद हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था। उसने जयपुर के पीयूष से अपनी बहन की बातचीत करवाई। वॉट्सऐप पर फोटो-वीडियो भेजकर उसे निकाह का लालच दिया।
पहले उसका खतना कराकर नाम मोहम्मद अली रखा गया, फिर 2022 में उसका निकाह आयशा से करा दिया गया। उसे इस्लामिक किताबें और जाकिर नाइक के ऑडियो सुना-सुनाकर कट्टर मुस्लिम बनाया गया। इसके बाद वह खुद इस गिरोह में शामिल होकर अन्य हिंदुओं का ब्रेनवॉश करने लगा। पुलिस ने बताया कि बरामद साहित्य और तकरीरें काफी भड़काऊ हैं।
सुंदर लड़कियों की तस्वीरें भेज फँसाते
इस गिरोह का पर्दाफाश करने वाली एसपी साउथ ने बताया कि यह एक बड़ा गैंग है और इनका निशाना तलाकशुदा, आर्थिक रूप से कमजोर लोग होते है। गैंग लोगों को मुस्लिम लड़कियों से शादी का लालच देकर वॉट्सऐप ग्रुप्स में सुंदर लड़कियों की तस्वीरें भेजकर उन्हें फँसाते हैं।
अब्दुल मजीद गिरोह का मुख्य संचालक था। उसके नीचे सलमान, आरिफ और फहीम जैसे लोग काम करते थे। सलमान कपड़े सिलता था और मजहबी किताबें व CD उपलब्ध कराता था, आरिफ उसकी मदद करता था और फहीम नाई का काम करता था और लोगों की जानकारी जुटाकर गैंग तक पहुँचाता था।
विदेशी फंडिंग और देशभर में नेटवर्क
जाँच में पता चला है कि अब्दुल मजीद की ट्रैवल हिस्ट्री 27 से भी ज्यादा जिलों से जुड़ी है। वह अलग-अलग जगहों से चंदा इकट्ठा करता था। उसके बैंक खातों में ₹13 लाख से ज्यादा मिले हैं और 21 अलग-अलग बैंक खातों का भी पता चला है। पुलिस को विदेशी फंडिंग का भी शक है।
बरेली के इस गिरोह के तार देश के 13 राज्यों से जुड़े हैं। इसमें 200 से ज्यादा मौलानाओं के शामिल होने की आशंका है। पुलिस ने गिरोह के पाँचवें सदस्य महबूब बेग की तलाश में भी दबिश दी है। पुलिस को इस गिरोह के तार नशीले पदार्थों की तस्करी से भी जुड़े होने का शक है। कुछ ऐसे तस्कर जो पहले जेल जा चुके हैं, वे भी अब्दुल मजीद के संपर्क में थे।
खुफिया एजेंसियाँ भी इस मामले की जाँच कर रही हैं। इस गिरोह ने सुभाषनगर के ब्रजपाल साहू और उसके पूरे परिवार का भी धर्मांतरण करा दिया था, जिससे ब्रजपाल अब्दुल्ला, उसकी बहन राजकुमारी आयशा और माँ ऊषा देवी अमीना बन गईं। पुलिस अब इन परिवारों की भी तलाश कर रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगा दिया है, जो बुधवार (27 अगस्त 2025) से लागू हो गया। इसके बाद भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर कुल शुल्क 50% हो गया है। यह कदम अमेरिका ने भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण उठाया है।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत के हीरा उद्योग पर बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सूरत का हीरा कारोबार पहले से ही गहरी मंदी का सामना कर रहा था और अब टैरिफ बढ़ने से हालात और बिगड़ सकते हैं। इस मंदी से हजारों नौकरियों पर संकट मंडराने की आशंका है।
सूरत भारत का हीरा निर्यात केंद्र है, जहाँ से हर साल हजारों करोड़ रुपए के हीरे अमेरिका समेत कई देशों में भेजे जाते हैं। रॉयटर्स और बीबीसी जैसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थाओं ने रिपोर्टिंग करते हुए इस मंदी को ट्रंप के टैरिफ से जोड़कर प्रस्तुत किया। बाद में गुजराती और हिंदी मीडिया ने भी यही नैरेटिव आगे बढ़ाया।
रिपोर्ट के अनुसार, सूरत की कई हीरा फैक्ट्रियों में पहले बड़ी संख्या में लोग काम करते थे, लेकिन अब ऑर्डर न मिलने की वजह से कर्मचारियों की संख्या घटा दी गई है और कई लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन लोगों की नौकरी बची है, उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कई ज्वेलर्स का कहना है कि उनकी सैलरी कम कर दी गई है या फिर उन्हें काम से हटा दिया गया है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, टैरिफ से पैदा हुई मंदी का सीधा असर अब मजदूरों पर दिखने लगा है। रिपोर्ट में कुछ लोगों के हवाले से कहा गया है कि एक लाख से ज्यादा ज्वेलर्स की नौकरियाँ खतरे में हैं और उनका भविष्य अनिश्चित है।
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में सूरत के डायमंड बोरस पर फोकस किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ समय पहले इसका उद्घाटन किया था, लेकिन यह अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टैरिफ बढ़ने से ऑर्डर कम हो गए हैं, कई दफ़्तर खाली पड़े हैं और कई कारोबारी यहाँ अपना बिजनेस शिफ्ट करने से कतराने लगे हैं।
रिपोर्ट में छोटे हीरा कारोबारियों के हवाले से भी मंदी की बात कही गई है। कई गुमनाम लोगों ने भी यही दावे दोहराए हैं। विदेशी मीडिया के बाद अब गुजराती मीडिया ने भी इस मुद्दे को उठाया है।
गुजरात समाचार ने 28 अगस्त को एक रिपोर्ट प्रकाशित की और दावा किया कि ट्रंप के 50% टैरिफ से सूरत के हीरा-टेक्सटाइल उद्योग में 50 हजार से अधिक नौकरियाँ खतरे में पड़ सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि सूरत के हीरा व्यापार का लगभग 30% हिस्सा अमेरिका से जुड़ा है, इसलिए टैरिफ का असर उद्योग पर ज्यादा पड़ेगा।
सत्य क्या है?
सूरत गुजरात की आर्थिक राजधानी है और गुजरात प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य है। अगर यह प्रचार किया जाए कि सूरत का सबसे बड़ा उद्योग टैरिफ और वैश्विक हालात की वजह से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, तो इससे यह संदेश जाता है कि ट्रंप सीधे मोदी और उनके राज्य को निशाना बना रहे हैं।
लेकिन जरूरी है यह समझना कि कई रिपोर्ट्स में पूरी तस्वीर या सही संदर्भ नहीं दिए जा रहे, जिससे गलत नैरेटिव फैल रहा है।
असलियत यह है कि सूरत का हीरा उद्योग पिछले एक साल से मंदी का सामना कर रहा है। इस दौरान कई रिपोर्ट्स प्रकाशित हुईं, जब जो बाइडेन राष्ट्रपति थे, तब टैरिफ का कोई मुद्दा सामने नहीं था। यानी अगर बीबीसी की टीम ट्रंप के आने से पहले सूरत गई होती, तो वहाँ की स्थिति वही मिलती, जो अब दिखाई दे रही है।
यह सही है कि अमेरिकी टैरिफ का असर हीरा उद्योग पर पड़ेगा, लेकिन यह भी सच है कि भारतीय हीरा कारोबारियों की पकड़ मज़बूत है। भारत के पास अमेरिका के अलावा अन्य बाजार भी हैं, जबकि अमेरिका के पास ऐसे वैकल्पिक सप्लायर नहीं हैं जो इतने बड़े पैमाने पर हीरे निर्यात कर सकें। अमेरिका में हीरों की माँग बहुत अधिक है, जिसे केवल भारत ही पूरा कर सकता है।
जहाँ तक डायमंड बोरस का सवाल है, उसकी स्थिति पर सवाल इसके उद्घाटन के समय से ही उठते रहे हैं। कई दफ़्तर अब तक शुरू नहीं हुए हैं, लेकिन इसका सीधा संबंध अमेरिकी टैरिफ से नहीं है। जब टैरिफ का मुद्दा नहीं था, तब भी डायमंड बोरस की यही हालत थी। हकीकत यह है कि सरकार लगातार इसे सक्रिय बनाने की कोशिश कर रही है।
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
सूरत डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीशभाई खुंट के अनुसार, हीरा उद्योग में भयंकर मंदी आने की बातें ज्यादातर मीडिया की बनाई हुई हैं।
उन्होंने बताया कि सूरत में पिछले दो साल से मंदी का माहौल है और पिछले एक साल में यह और बढ़ा है। यह स्थिति टैरिफ विवाद से पहले से ही मौजूद थी। अमेरिकी टैरिफ के असर पर बोलते हुए खुंट ने कहा कि इसका असर शॉर्ट टर्म जरूर होगा, लेकिन लंबे समय में उद्योग इस स्थिति को संभाल लेगा।
‘अमेरिका भारत पर निर्भर है, अगर नुकसान भी होगा तो अल्पकालिक होगा’
उन्होंने कहा कि आज करीब 90% हीरों का उत्पादन भारत में होता है और अमेरिका भी यह अच्छी तरह जानता है। इसलिए दुनिया का कोई भी देश अमेरिका की जरूरत के हिसाब से इतने बड़े पैमाने पर हीरे निर्यात नहीं कर सकता। अमेरिका पूरी तरह भारत पर निर्भर है, जबकि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं है।
खुंट ने कहा कि अगर अमेरिका टैरिफ बढ़ाता भी है तो असली नुकसान वहीं के आम नागरिकों को होगा। अमेरिका में हीरे शादी और सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा हैं, जैसे भारत में सोने का महत्व है। अगर वहाँ लोगों को हीरे नहीं मिलेंगे तो असंतोष पैदा होगा या फिर लोग महँगे दाम देकर भी खरीदेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को इससे नुकसान नहीं होगा। जो हीरे पहले अमेरिका भेजे जाते थे, उन्हें अन्य देशों को भेजकर आसानी से भरपाई की जा सकती है। क्योंकि भारत दुनिया के लगभग सभी देशों में हीरे निर्यात करता है।
इसी लिए उनके अनुसार, अमेरिकी टैरिफ से भारत के हीरा उद्योग पर कोई बड़ा संकट नहीं आएगा। बल्कि अमेरिका ही भारत पर ज्यादा निर्भर है, भारत अमेरिका पर नहीं।
यह रिपोर्ट झूठी है कि मंदी का कारण टैरिफ था
उन्होंने वही तर्क दिया कि अमेरिका में हीरे उतने ही अहम हैं जितना भारत में सोना। इसलिए हीरे महंगे होने पर भी अमेरिकी इन्हें खरीदेंगे। अगर वे नहीं खरीदते, तो भारत अन्य देशों को हीरे बेच सकता है।
असली नुकसान अमेरिका को होगा, क्योंकि भारत के अलावा कोई और देश इतनी मात्रा में हीरे नहीं दे सकता। सूरत में 10-12 फैक्ट्रियों का संचालन करने वाले ठाकरसिभाई पटेल ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि मंदी से कोई इनकार नहीं कर सकता, लेकिन यह मंदी अमेरिकी टैरिफ की वजह से नहीं है। टैरिफ का असर थोड़े समय के लिए जरूर पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय तक इसका कोई बड़ा असर नहीं होगा। इसी तरह, एक अन्य फैक्ट्री मालिक लक्ष्मणभाई और कुछ ज्वेलर्स ने भी यही राय रखी।
गौर करने वाली बात यह है कि 2024 में भी गुजराती मीडिया ने हीरा उद्योग में मंदी की रिपोर्ट प्रकाशितकी थी, जबकि तब टैरिफ विवाद का कोई मुद्दा नहीं था। यानी यह साफ है कि सूरत की हीरा इंडस्ट्री में मंदी पहले से थी, लेकिन यह अमेरिकी टैरिफ की वजह से नहीं आई।
इसके अलावा, उद्योग जगत ने अमेरिका पर निर्भरता घटाने और अन्य देशों को हीरे बेचने की योजना भी बनाई है। खुंट के अनुसार, राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों हीरा उद्योग के साथ खड़ी हैं और जरूरत पड़ने पर हमेशा सकारात्मक कदम उठाती हैं।
मूल रूप से यह रिपोर्ट गुजराती में भार्गव राजगुरु ने लिखी है, इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ें।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मुँह की खाया पाकिस्तान अपनी हार झुठलाने के लिए लगातार प्रोपेगेंडा का सहारा ले रहा है लेकिन वहाँ भी उसके झूठ की हर बार पोल खुल रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा हैंडल्स ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा है, “मोदी सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर को रोक दिया, जिसकी वजह से भारतीय वायुसेना को नुकसान हुआ।”
इस वायरल वीडियो में एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी को यह कहते सुना जा सकता है, “महोदय, कुछ दिन पहले, विक्रांत (INS विक्रांत) के डेक पर भारतीय नौसेना को संबोधित करते हुए आपने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और जरूरत पड़ने पर, भारतीय नौसेना को अगली बार हमला करने का मौका मिल सकता है। हमें उम्मीद थी कि सरकार हमें लड़ाई (ऑपरेशन सिंदूर) में हिस्सा लेने की इजाजत देगी, लेकिन सरकार ने हमें लड़ाई में शामिल होने की कमान नहीं दी। यही वजह है कि भारतीय वायुसेना को नुकसान उठाना पड़ा।”
वीडियो में एडमिरल त्रिपाठी को यह कहते हुए दिखाया गया कि सरकार ने नौसेना को लड़ाई में हिस्सा लेने का आदेश नहीं दिया और इसलिए वायुसेना को नुकसान उठाना पड़ा। यह वीडियो पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा हैंडल्स द्वारा सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर फैलाया गया, ताकि भारत के खिलाफ गलत जानकारी फैलाई जा सके।
भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इस वीडियो का फैक्ट-चेक किया है और साफ बताया कि यह वीडियो एडिट किया गया है। एडमिरल त्रिपाठी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था। PIB ने एडमिरल त्रिपाठी का असली वीडियो भी जारी किया, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार की तारीफ की है और कहा है कि भारतीय नौसेना आधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस है।
?प्रोपेगेंडा से सावधान❗
कुछ पाकिस्तान-समर्थित अकाउंट्स डिजिटल छेड़छाड़ कर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का वीडियो फैला रहे हैं, जिसमें दिखाया जा रहा है कि नौसेना प्रमुख #OperationSindoor के दौरान सरकार पर कार्रवाई रोकने का आरोप लगा रहे हैं, और दावा कर रहे हैं कि… pic.twitter.com/1Csn1LH7Uj
रियल वीडियो में वे कह रहें हैं, “सर, कुछ दिन पहले आपने INS विक्रांत के डेक पर भारतीय नौसेना को संबोधित करते हुए कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और अगर जरूरत पड़ी, तो अगली बार नौसेना को पहला हमला करने का मौका मिल सकता है। मैं कहना चाहता हूँ कि INS उदयगिरि और INS हिमगिरि जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म हमें दुश्मन पर पहला जबरदस्त हमला करने में सक्षम बनाते हैं।”
जाहिर है कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो फैलाया गया, वह झूठा और भ्रामक था। एडमिरल त्रिपाठी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। असल में उन्होंने भारत की सरकार और नौसेना की ताकत की सराहना की थी।
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना द्वारा पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस हमले में आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, जो कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक ग्रुप है।
हमले के बाद भारत ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की तैयारी की थी, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।