लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी की सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। उनकी VVIP सुरक्षा संभालने वाली केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर ‘येलोबुक प्रोटोकॉल’ तोड़ने की शिकायत की है।
राहुल गाँधी पर आरोप है कि पिछले 9 महीनों में वे बिना जानकारी दिए 6 बार विदेश यात्रा पर गए। इसमें इटली, वियतनाम, दुबई, कतर, लंदन और मलेशिया जैसे देशों की यात्राएँ शामिल हैं।
CRPF ने राहुल गाँधी को अलग से पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि इस तरह की चूक उनकी Z+ कैटेगरी की सुरक्षा को कमजोर कर सकती है और उन्हें गंभीर खतरा हो सकता है। सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी पर प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप लगे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गाँधी ने साल 2020 से अब तक वे 113 बार सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर चुके हैं। इसमें उनकी भारत जोड़ो यात्रा का दिल्ली वाला हिस्सा भी शामिल है।
क्या है ‘येलोबुक प्रोटोकॉल’ ?
गृह मंत्रालय ने VVIP सुरक्षा के लिए एक खास गाइडलाइन बनाई है जिसे ‘येलोबुक’ कहा जाता है। इस किताब में साफ लिखा है कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को छोड़कर बाकी सभी बड़ी हस्तियों की सुरक्षा इन्हीं नियमों के आधार पर तय होगी।
जिन लोगों को Z+ या Z सुरक्षा दी गई है, उन्हें अपनी सभी गतिविधियों और यात्राओं की जानकारी पहले से सुरक्षा एजेंसियों को देनी होती है। ताकि खतरे का आकलन कर उन्हें सुरक्षित रखा जा सके। अलग-अलग खतरे की स्थिति को देखते हुए X, Y, Z और Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है।
इतिहास गवाह है कि अगर सुरक्षा नियमों को गंभीरता से न लिया जाए तो इसके भयानक परिणाम हो सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने भी अपनी सुरक्षा एजेंसियों की सलाह और प्रोटोकॉल की अनदेखी की थी, जिसका नतीजा उनकी हत्या के रूप में सामने आया। यही वजह है कि CRPF बार-बार राहुल गाँधी को नियमों का पालन करने की सलाह दे रही है।
तमिलनाडु की DMK सरकार की विफलता सामने आई है। जहाँ कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (CMCH) में एक बीमार पिता को कंधे पर खींचते हुए लाचार बेटे का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो के बाद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकारी अस्पताल में व्यवस्थाएँ उजागर होती है।
Tamil Nadu News – Video of man dragging father in absence of wheelchair in Coimbatore Govt Hospital goes viral. pic.twitter.com/0E5OgYLdn9
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो मंगलवार (09 सितंबर 2025) का है, जब वी कालीदासन अपने 84 वर्षीय पिता सी वडिवेल का इलाज कराने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (CMCH) पहुँचे थे।
वी कालीदास ने बताया, “रिसेप्शन में सिर्फ एक ही स्टाफ था, जो सही से बात भी नहीं कर रहा था। डॉक्टरों ने मेरे पिता का पैर काटने की सलाह दी थी। मैं उन्हें लिफ्ट की मदद से तीन मंजिला ऊपर ले गया। चूँकि मेरा भी मेडिकल ट्रीटमेंट चल रहा है इसलिए मैं वजन नहीं उठा सकता। उन्हें फिर से नीचे ले जाना मेरे लिए बहुत मुश्किल था।”
उन्होंने आगे कहा, “जब मैं एक महिला स्टाफ के पास गया, जिसके पास खाली व्हीलचेयर थी तो उसने 100 रुपए माँगे। मैं देने को तैयार हो गया। लेकिन फिर उसने मुझे 30 मिनट और इंतजार करने को कहा। इसीलिए मैं लिफ्ट की मदद से पिता को ले गया। हमारे साथ आए एक व्यक्ति ने वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया तो कर्मचारी व्हीलचेयर बढ़ाने के लिए आगे आया। लेकिन तब तक हम ऑटोरिक्शा तक पहुँच चुके थे।”
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद अस्पताल के खिलाफ जाँच शुरू की गई। जाँच के बाद CMCH के दो सुपरवाइजर एस्थर रानी और मनी मणि वासगम को 5 दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया।
CMCH की डीन एम गीतांजलि ने मीडिया से बातचीत में पीड़ित वी कालीदासन की बात को नकारते हुए कहा कि स्टाफ के पैसे माँगने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। डीन ने कहा, “भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए और मरीजों के इंतजार के समय को कम करने के लिए ग्रीन ब्रिगेड पहले लॉन्च की जाएगी।”
DMK सरकार की विफलता, CM स्टालिन को विदेश घूमने से नहीं फुरसत
कोयंबटूर के सरकारी अस्पताल का ये निंदनीय मामला सामने आने से तमिलनाडु की DMK सरकार की विफलता भी उजागर हुई है। उधर, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन विदेश का दौरा करते नहीं थक रहे हैं। एक RTI के अनुसार, मुख्यमंत्री की विदेश यात्राों पर राज्य सरकार ने ₹7.12 करोड़ खर्च कर दिए हैं। इसमें भी साल 2022 की दुबई यात्रा का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, जिसकी पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए थे।
मार्च 2025 में तमिलनाडु के बजट पेश करने के बाद यह भी सामने आया था कि पिछले चार साल में प्रदेश पर दोगुना कर्जा हो गया है। इसके बावजूद तमिलनाडु की DMK सरकार ने 46,467 करोड़ रुपए के घाटे वाला बजट पेश किया था।
जहाँ तमिलनाडु की एमके स्टालिन सरकार सिर्फ विदेश में घूमने पर खर्चा कर रही है और राज्य पर खर्चा बढ़ाए जा रही है, ऐसे में जनता तो परेशान होगी ही। इसके बाद जब सरकारी अस्पताल में भी मरीज को व्हीलचेयर न मिले तो इससे निंदनीय क्या ही होगा।
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पिछले 8 सालों में विकास की ऐसी गति पकड़ी है कि निवेश और रोजगार दोनों ही रफ्तार पकड़ चुके हैं। मिशन रोजगार की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य को निजी क्षेत्र से 45 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से 15 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट जमीन पर उतर चुके हैं, जिससे लाखों नौकरियाँ पैदा हुई हैं।
खास बात ये है कि यूपी के 60 लाख से ज्यादा युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी मिल चुकी है। ये आँकड़े बताते हैं कि कैसे मजबूत नीतियाँ, केंद्र सरकार के साथ तालमेल और लगातार प्रयासों से भारत का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य औद्योगिक हब बन रहा है।
विगत 08 वर्षों में ₹45 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से ₹15 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारा जा चुका है। इसके माध्यम से 60 लाख युवाओं को प्रदेश में रोजगार मिला है। #MissionRojgarUPpic.twitter.com/bCFrdzelVb
गोरखपुर के गोरखपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GIDA) इलाके में एक सभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने खुद ये आँकड़े साझा किए। उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार का मकसद है कि यूपी का कोई युवा बाहर नौकरी तलाशने न जाए। हर बच्चे को राज्य में ही रोजगार मिले।’
इसी मौके पर उन्होंने 2251 करोड़ रुपये के प्रोजेक्टों का शिलान्यास और उद्घाटन किया। ये प्रोजेक्ट पूर्वांचल के विकास को नई गति देंगे और हजारों नौकरियाँ पैदा करेंगे। योगी ने बताया कि GIDA के चल रहे और आने वाले प्रोजेक्ट्स से 15,000 से ज्यादा नौकरियाँ मिलेंगी। अलॉटेड प्लॉट्स पर 5903 करोड़ का निवेश होगा, जो 10,000 रोजगार देगा।
बता दें कि 2017 से पहले यूपी को बीमारू राज्य कहा जाता था, जहाँ अपराध और माफिया राज के कारण निवेशक दूर भागते थे। लेकिन योगी सरकार ने माफिया पर सख्ती बरती, कानून-व्यवस्था सुधारी और निवेशकों का भरोसा जीता। नतीजा ये कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में यूपी 7वें से 2रे स्थान पर पहुँच गया। अब राज्य दुनिया भर से निवेश खींच रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि ये सब पीएम मोदी के विकसित भारत विजन का हिस्सा है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए योगी बोले, ‘जो लोग समाज को जाति-धर्म के नाम पर बाँटते थे, दंगे करवाते थे, वे विकास की बात कैसे करेंगे? हमने पारदर्शिता लाई, भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाया।’
गौरतलब है कि योगी सरकार ने एमएसएमई पॉलिसी 2022 के तहत 96 लाख यूनिट्स को बढ़ावा दिया, जो देश में नंबर वन है। इससे 1.75 करोड़ नौकरियाँ पैदा हुईं। औद्योगिक लोन 2017 के 3.54 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 9.24 लाख करोड़ हो गया। हाल ही में 60,000 पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई, जिसमें गोरखपुर के कई युवा शामिल हैं। आईटीआई में 1.84 लाख सीटें उपलब्ध हैं, जहाँ स्किल ट्रेनिंग दी जा रही है।
सीएम योगी ने कहा, ‘सुरक्षित माहौल में निवेश फलता-फूलता है, जो खुशहाली लाता है।’ ये प्रयास यूपी को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में मील का पत्थर हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (11 सितंबर 2025) को उत्तराखंड के देहरादून का दौरा किया, जहाँ भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन से मची तबाही का जायजा लिया। पीएम वाराणसी से सीधे जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुँचे, जहाँ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके मंत्रिमंडल ने उनका स्वागत किया।
सीएम धामी ने कहा, ‘आपदा की इस कठिन घड़ी में पीएम की प्रदेशवासियों के बीच उपस्थिति प्रभावितों के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता दिखाती है।’ एयरपोर्ट पर ही पीएम ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और आपदा मित्र स्वयंसेवकों के साथ राहत और पुनर्वास कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई।
उत्तराखंड में बाढ़ की स्थिति को लेकर एक समीक्षा बैठक की। राज्य में बाढ़ से हुए नुकसान को देखकर बहुत पीड़ा हुई है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इसके साथ ही मैं सभी घायल लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं। प्रभावित लोगों की… pic.twitter.com/iag1JI34q0
हालाँकि मौसम खराब होने की वजह से धराली और थराली जैसे प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण टल गया, लेकिन पीएम ने मीटिंग में प्रेजेंटेशन के जरिए पूरे राज्य की बाढ़ स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूर्ण सहयोग देगी और बहुआयामी तरीके से पूरे क्षेत्र को पटरी पर लाने का काम होगा।
इस दौरान पीएम मोदी ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, उनका दर्द सुना और सांत्वना दी। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
उत्तराखंड में बाढ़ और लैंडस्लाइड से प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनका हाल जाना। हम उनके साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं और उनकी हरसंभव सहायता के लिए प्रतिबद्ध हैं। pic.twitter.com/eYjXo05F55
पीएम ने तत्काल राहत के तौर पर उत्तराखंड के लिए 1200 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता का ऐलान किया। इसके अलावा, बाढ़ और संबंधित आपदाओं में मरने वालों के परिवारों को 2 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
हाल की बाढ़ और भूस्खलन से अनाथ हुए बच्चों को पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत व्यापक समर्थन देने का भरोसा दिलाया, जिसमें उनकी लंबी अवधि की देखभाल और कल्याण शामिल होगा। पीएम ने कहा कि यह सहायता आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत अस्थायी है, लेकिन राज्य की माँग पर और केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की मदद पर विचार होगा।
बता दें कि उत्तराखंड में इस साल अप्रैल से अब तक प्राकृतिक आपदाओं से 85 लोगों की जान चली गई, 128 घायल हुए और 94 लापता हैं। भारी बारिश ने उत्तरकाशी के धराली-हरसिल, चमोली के थराली, रुद्रप्रयाग के चेनागढ़, पौड़ी के सैंजी, बागेश्वर के कपकोट और नैनीताल के कई हिस्सों को बुरी तरह प्रभावित किया। करोड़ों रुपए की संपत्ति नष्ट हुई, सड़कें, स्कूल, घर और पशुधन को भारी नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार ने केंद्र से 5700 करोड़ रुपये की विशेष सहायता माँगी है, जिस पर पीएम के दौरे से सकारात्मक फैसला की उम्मीद है।
पीएम ने पुनर्निर्माण के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत ‘विशेष परियोजना’ के जरिए क्षतिग्रस्त ग्रामीण घरों के लिए वित्तीय मदद देने का ऐलान किया। राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत, स्कूलों का पुनर्निर्माण, पीएम राष्ट्रीय राहत कोष से सहायता और पशुधनों के लिए मिनी किट वितरण जैसे कदमों पर जोर दिया। उन्होंने NDRF, SDRF, सेना, राज्य प्रशासन और अन्य सेवा संगठनों के जवानों की तारीफ की, जो तुरंत राहत पहुँचाने में जुटे हैं।
पीएम ने कहा, ‘केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस मुश्किल वक्त में हर संभव मदद करेंगी।’ दौरे के बाद पीएम दिल्ली रवाना हो गए। यह दौरा न केवल राहत का संदेश देता है, बल्कि भविष्य की तैयारी पर भी फोकस करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस की को फटकार लगाई है। कोर्ट ने अकोला दंगे 2023 में हुई हत्या की जाँच पर ढिलाई बरतने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया जाए, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हों और मामले की निष्पक्ष जाँच की जाए।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने दिया। याचिकाकर्ता ने खुद को उस हत्या का आँखों देखा गवाह बताया है, जो अकोला दंगों के दौरान हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि असली दोषियों के बजाए कुछ अन्य व्यक्तियों पर FIR दर्ज की गई और पक्षपातपूर्ण जाँच की गई थी। याचिकाकर्ता ने अपनी पिटाई और गाड़ी जलाए जाने की भी शिकायत की है।
मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “एक बार कोई व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहनता है तो उसे जाति, धर्म आदि से ऊपर उठकर कानून के अनुसार निष्पक्ष रूप से काम करना चाहिए।” कोर्ट ने यह भी माना कि मामला गंभीर है और निष्पक्ष जाँच के लिए SIT जरूरी है।
क्या है मामला ?
महाराष्ट्र के अकोला में मई 2023 में दंगे भड़क उठे थे। कारण था सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट, जो पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी थी। इसमें विलास महादेवराव गायकवाड़ नाम के व्यक्ति की हत्या की गई थी और याचिकाकर्ता (उस समय 17 वर्ष का) घायल हो गया था।
याचिकाकर्ता का दावा है कि उसने 4 लोगों को गायकवाड़ पर तलवार, लोहे की पाइप और अन्य हथियारों से हमला करते देखा। जब वह बीच-बचाव करने गया तो उसे भी पीटा गया और उसकी गाड़ी जला दी गई। महाराष्ट्र पुलिस ने कहा कि उन्हें याचिकाकर्ता के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली थी लेकिन जब पुलिस अधिकारी वहाँ पहुँचे तो याचिकाकर्ता बोलने की स्थिति में नहीं था।
पुलिस ने अपनी जाँच में कुछ आरोपितों को गिरफ्तार किया, जिनसे हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद किए गए और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मामला फिर से एक नए विशेष जाँच दल (SIT) द्वारा देखा जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वास्तव में जाँच में धार्मिक आधार पर पक्षपात किया गया था या नहीं।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिका क्यों की थी खारिज?
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उन्होंने समय रहते पुलिस को जानकारी नहीं दी। मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी थी और पीड़ित पक्ष (मारे गए व्यक्ति के परिवार) ने कोर्ट में कोई शिकायत नहीं की थी। कोर्ट को याचिका में ‘छिपा हुआ मकसद'(ulterior motive) नजर आया। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक IIT बॉम्बे इन दिनों विवादों में घिरा हुआ है। वजह है संस्थान द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाया जाना।
यह कार्यक्रम दक्षिण एशियाई पूंजीवाद ‘South Asian Capitalism(s)’ नाम से दो दिन का वर्कशॉप है, जिसे यूसी बर्कले और यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स-एमहर्स्ट के साथ मिलकर आयोजित करने वाली है।
इस वर्कशॉप का एक पोस्टर कॉलमनिस्ट हर्षिल मेहता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। पोस्टर में भारत की तथाकथित ‘कैपिटलिस्ट पिरामिड’ दिखाई गई। इस पिरामिड के एक हिस्से में “We fool you” लिखा है और उसमें PM नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्टून जैसी तस्वीरें बनाई गई हैं।
New Political Economy Initiative works under Central for Liberal Education, IIT Bombay. It was co-organiser of South Asia Capitalism event.
This NPEI is headed by IIT Bombay faculty member and UK citizen Anush Kapadia. He is on Indian government payroll.
यह निशुल्क वर्कशॉप है, जो कि 12 और 13 सितंबर 2025 को आयोजित होने वाली है। इसमें चर्चा की जाएगी कि दक्षिण एशिया में पूंजीवादी व्यवस्था किस तरह सामाजिक ढाँचे के जरिए बनी है। इस कार्यक्रम का आयोजन न्यू पॉलिटिकल इकोनॉमिक इनिशिएटिव (NPEI) कर रहा है, जो सीधे IIT बॉम्बे के अधीन काम करता है।
इस पहल (NPEI) के प्रमुख अनुष कपाड़िया हैं, जिन्हें फोर्ड फाउंडेशन से करीब 4 मिलियन डॉलर (लगभग ₹35 करोड़) की फंडिंग मिली है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अनुष कपाड़िया ब्रिटेन (UK) के नागरिक हैं और IIT बॉम्बे में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
हालाँकि, गौर करने वाली बात यह है कि पिछले 10 साल में अनुष कपाड़िया ने सिर्फ 2 शोध-पत्र (जर्नल पेपर्स) ही लिखे हैं और उनका H-Index मात्र 7 है(H-Index वह पैमाना है जिससे किसी शोधकर्ता के प्रकाशित काम की संख्या और प्रभाव का आकलन किया जाता है)।
विवाद बढ़ने के बाद IIT बॉम्बे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सफाई दी। संस्थान ने कहा कि उसे इस वर्कशॉप की कोई जानकारी नहीं थी। IIT बॉम्बे ने कहा, “IIT बॉम्बे का ‘न्यू पॉलिटिकल इकोनॉमिक इनिशिएटिव’ नाम का एक प्रोजेक्ट है। हालाँकि, हमें प्रकाशित फ़्लायर के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। इस पोस्ट के बारे में पता चलने पर हमने आयोजकों को तुरंत निर्देश जारी किए कि वे सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से फ़्लायर हटा दें और इस आयोजन से जुड़ी हर चीज़ से IIT बॉम्बे का नाम हटा दें।”
संस्थान ने यह भी कहा, “न्यू पॉलिटिकल इकोनॉमी इनिशिएटिव (NPEI) की वेबसाइट से कार्यक्रम का विवरण तुरंत हटा दिया गया है। IIT बॉम्बे से कोई भी इस सम्मेलन में भाग नहीं ले रहा है। संस्थान से इस फ़्लायर के बारे में कोई भी परामर्श नहीं लिया गया। हम भी इसे देखकर हैरान और आहत हुए हैं।”
IIT बॉम्बे ने यह भी साफ किया कि वह इस घटना के बाद यूसी बर्कले और यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स-एमहर्स्ट के फैकल्टी सदस्यों से सभी संबंध खत्म करेगा।
A post regarding a flyer of a workshop on South Asian Capitalism was brought to the attention of the Institute authorities. This workshop is to be held at University of Berkeley in partnership with UC Berkeley and University of Massachusetts-Amherst for young scholars. IIT Bombay… pic.twitter.com/BhMZV8A4Ds
जल्द ही यह मामला भी सामने आया कि IIT बॉम्बे ने कॉलमिस्ट हर्षिल मेहता को सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया।
हर्षिल मेहता ने सवाल उठाया, “IIT बॉम्बे का ऑफिशियल अकाउंट ने मुझे क्यों ब्लॉक किया? क्या सार्वजनिक संस्थानों से सवाल करना और प्रशासन पर सवाल उठाना अपराध है? यह एक सार्वजनिक और आधिकारिक अकाउंट है, तो फिर ऐसा बचकाना व्यवहार क्यों? क्या प्रधानमंत्री @narendramodi का बचाव करना अपराध है?”
Why IIT Bombay’s official account has blocked me? Is questioning public institutions and mis governance a crime?
This is a public and official account. Then why this childish behaviour?
कॉलमिस्ट हर्षिल मेहता ने पहले यह मुद्दा उठाया था कि IIT बॉम्बे के फैकल्टी सदस्य प्रभीर विष्णु पोरुथियिल, जो मूल रूप से भारतीय सरकार के वेतनभोगी हैं, ने एक शोध पत्र प्रकाशित किया, जिसमें बड़े कारोबारियों को फासीवाद के सहयोगी बताया गया। इसके अलावा, प्रभीर विष्णु पोरुथियिल को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के ‘संपत्ति का दोबारा वितरण’ वाले विचारों का समर्थन करते हुए भी देखा गया।
IITB’s faculty Prabhir Vishnu Poruthiyil claims corporators are collaborators with fascism.
He advocates a communist principle of redistribution of wealth.
देश के चार राज्यों में छापेमारी के बाद ISIS के 5 आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं। इन आतंकी को दिल्ली, मध्य प्रदेश, झारखंड और हैदराबाद से पकड़ा गया है। पकड़े गए आतंकियों में अशहर दानिश पाकिस्तान से हैंडल किए जा रहे पैन इंडिया टेरर मॉड्यूल का हेड निकला है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और राष्ट्रीय जाँच एजेंसियों के संयुक्त अभियान चलाकर दो दिल्ली, एक मध्य प्रदेश और एक-एक आतंकी तेलंगाना के हैदराबाद और झारखंड के राँची से 5 आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से हथियार और IED बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान भी बरामद हुआ है।
Press Conference : The Special Cell busted international and interstate terror module. pic.twitter.com/nNIM2HXVfs
पुलिस ने बताया कि मध्य प्रदेश के ब्यावरा से कामरान कुरैशी, राँची के एक लॉज से हेड अशरफ दानिश और दिल्ली से आफताब और सूफियान को खुफिया इनपुट के बाद पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक, अशरफ दानिश भारत से टेरर मॉडयूल ऑपरेट कर रहा था। दानिश को गिरफ्तार कर ट्रांजिड रिमांड पर दिल्ली लाया गया है।
अशरफ दानिश टेरर मॉड्यूल का हेड
दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर प्रमोद सिंह ने बताया कि अशरफ दानिश पूरे नेटवर्क का मुखिया था। उसकी पहचान संगठन में गजवा लीडर के तौर पर थी। उसका कोड नेम सीईओ रखा गया था। जाँच में यह भी सामने आया कि वह भारत में खिलाफत घोषित करने और आतंकी स्ट्राइक की बड़ी साजिश रच रहा था।
पुलिस को राँची में दानिश के ठिकाने से एक देसी पिस्टल, कारतूस, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, सल्फर पाउडर जैसे रसायन, कॉपर शीट, बॉल बेयरिंग, स्ट्रिप वायर, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, लैपटॉप, मोबाइल फोन और कैश मिला है।
बोकारो के रहने वाले दानिश के अब्बा पेशे से अधिवक्ता हैं। दानिश को ब्रेनवॉश किया गया था। वह कोडरमा के एक छात्र के साथ राँची के लॉज में रहता था। लेकिन दानिश ने अपने रूममेट को आतंकी संगठन की बात नहीं बताई। लॉज संचालक और उसके करीबियों ने बताया कि दानिश बेहद शांच रहता था और ज्यादा समय कमरे में बिताता था।
वहीं दानिश से पूछताछ में भी सामने आया कि ट्रेनिंग के दौरान आतंकियों को सिखाया जाता है कि वे अपनी गतिविधियों की जानकारी घरवालों और दोस्तों के साथ साझा ना करें।
भारत में आतंकी स्ट्राइक की थी तैयारी
पुलिस के मुताबिक, अशरफ दानिश को ही पाकिस्तान का हैंडलर सारी जानकारियाँ देता था। दानिश को IED के लिए रॉ मैटेरियल जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। पकड़े गए सभी आतंकी भारत में एक जगह तय कर खिलाफत का ऐलान करने और वहाँ से स्ट्राइक की शुरुआत करने की तैयारी में थे।
दिल्ली से पकड़े गए आफताब को हथियार खरीदने की जिम्मेदारी मिली थी। आफताब के दिल्ली से मुंबई लौटने पर ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आफताब की निशानदेही पर सुफियान भी पकड़ा गया। पुलिस ने बताया कि सभी आतंकी सोशल मीडिया से आपस में संपर्क में रहते थे।
11 सितंबर 2025 को नरेंद्र मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि चुनावी फायदे के लिए सरकार बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को मंजूरी देती है।। एक्स पर एक पोस्ट में, सरदेसाई ने बिहार से गुज़रने वाली रेलवे परियोजना और एक एक्सप्रेसवे परियोजना का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मंजूरी दी गई है।
गौरतलब है कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 10 सितंबर 2025 को कुल ₹7,616 करोड़ की दो अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी। पहली परियोजना बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट सिंगल रेलवे लाइन खंड का है। इसमें कुल 177 किलोमीटर लंबा रेलवे लाइन का दोहरीकरण किया जाएगा। इसकी कुल लागत ₹3,169 करोड़ है।
दूसरी परियोजना बिहार में बक्सर-भागलपुर हाई-स्पीड कॉरिडोर के 82.4 किलोमीटर लंबे मोकामा-मुंगेर खंड का 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल है, जिसकी लागत ₹4447.38 करोड़ है। रेलवे ट्रैक दोहरीकरण परियोजना बिहार सहित तीन राज्यों से होकर गुजरती है, जबकि एक्सेस-कंट्रोल हाईवे परियोजना बिहार के लिए है।
Story that caught the eye: Cabinet okays Rs 7,616 crore worth of infra projects for poll-bound Bihar. 5 qs: 1) why are mega projects for states unveiled only at election time? 2) Is there any rigorous audit on how the money (obtained from us taxpayers) is actually spent? 3)…
राजदीप सरदेसाई ने आरोप लगाया कि दोनों परियोजनाओं को आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के कारण ही मंज़ूरी दी गई है। उन्होंने 5 सवाल उठाए – राज्यों के लिए बड़ी परियोजनाओं का अनावरण केवल चुनाव के समय ही क्यों किया जाता है? क्या इस बात का कोई ऑडिट होता है कि पैसा वास्तव में कैसे खर्च किया जाता है? क्या केंद्र और विपक्ष शासित राज्यों के लिए नियम अलग-अलग हैं? अगर एक राष्ट्र, एक चुनाव हो तो क्या होगा? क्या ये कहा जा सकता है कि एक पार्टी की फ्रीबीज या रेवड़ी, दूसरी पार्टी के लिए कल्याणकारी/विकास कहलाता है?
राजदीप सरदेसाई ने ये सवाल पूरी तरह से झूठे और निराधार दावे के आधार पर उठाए हैं, क्योंकि यह आरोप लगाना पूरी तरह से गलत है कि मोदी सरकार केवल चुनाव के समय ही बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी देती है। एनडीए सरकार का बुनियादी ढाँचे पर जोर जगजाहिर है और लगभग हर कैबिनेट बैठक में ऐसी बड़ी परियोजनाओं को नियमित रूप से मंज़ूरी दी जाती है। पिछले कुछ महीनों में, सरकार ने पूरे भारत में ऐसी कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ऐसी परियोजनाओं में एनडीए और गैर-एनडीए दोनों दलों द्वारा शासित राज्य और वे राज्य शामिल हैं जहाँ हाल ही में चुनाव नहीं हुए हैं।
पिछले कुछ महीनों में घोषित प्रोजेक्ट
Date
Project
States
Amount
27 August 2025
Railway multi tracking projects
Karnataka, Telangana, Bihar, Assam
₹12,328 Crore
27 August 2025
New railway line project
Gujarat
₹2,526 Crore
19 August 2025
Green Field Airport at Kota-Bundi
Rajasthan
₹1,507.00 Crore
12 August 2025
700 MW Tato-II Hydro Electric Project
Arunachal Pradesh
₹8,146.21 Crore
8 August 2025
4-lane Marakkanam – Puducherry Road
Tamil Nadu
₹2,157 Crore
31 July 2025
Railway multi tracking projects
Maharashtra, Madhya Pradesh, West Bengal, Bihar, Odisha, and Jharkhand
₹11,169 Crore
1 July 2025
4-Lane Paramakudi – Ramanathapuram Road
Tamil Nadu
₹1853 Crore
11 June 2025
Railway multi tracking projects
Jharkhand, Karnataka and Andhra Pradesh
₹6,405 Crore
28 May 2025
Railway multi tracking projects
Maharashtra and Madhya Pradesh
₹3,399 Crore
28 May 2025
4-Lane Badvel- Nellore Highway
Andhra Pradesh
₹3,653.10 Crore
9 April 2025
6 lane access controlled Zirakpur Bypass
Punjab and Haryana
₹1,878.31 Crore
9 April 2025
Railway multi tracking projects
Andhra Pradesh and Tamil Nadu
₹1,332 Crore
4 April 2025
Railway multi tracking projects
Maharashtra, Odisha, and Chhattisgarh
₹18,658 Crore
28 March 2025
4-Lane Highway project
Bihar
₹3,712.40 Crore
28 March 2025
Kosi Mechi Intra-State Link Project
Bihar
₹6,282.32 Crore
19 March 2025
6- lane access controlled Greenfield Highway
Maharashtra
₹4,500.62 Crore
5 March 2025
Govindghat to Hemkund Ropeway project
Uttarakhand
₹2,730.13 Crore
5 March 2025
Sonprayag to Kedarnath Ropeway project
Uttarakhand
₹4,081.28 Crore
Total
₹66,039.06 Crore
उपरोक्त तालिका से साफ पता चलता है कि राजदीप सरदेसाई केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाने के लिए कैसे झूठ बोल रहे हैं। पिछले छह महीनों में, सरकार ने हर महीने कई ऐसी ही बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
इसके अलावा, राज्यों पर एक नज़र डालें तो पता चलता है कि राजदीप सरदेसाई का केवल चुनाव से पहले ही परियोजना शुरू करने की पहल करना और विपक्षी राज्यों के साथ भेदभाव करने का दावा भी पूरी तरह से गलत है। कई परियोजनाओं को उन राज्यों के लिए भी मंजूरी दी गई है, जहाँ विधानसभा चुनाव नहीं होने वाले हैं। इनमें गैर-एनडीए शासित राज्यों, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, पंजाब, मेघालय शामिल हैं।
अब, राजदीप सरदेसाई के सवालों के जवाब यहाँ दिए गए हैं।
1) राज्यों के लिए बड़ी परियोजनाओं का अनावरण केवल चुनाव के समय ही क्यों किया जाता है?
उत्तर: यह दावा गलत है, राज्यों के लिए बड़ी परियोजनाओं का अनावरण हमेशा होता रहता है, न कि केवल चुनाव के समय, जैसा कि ऊपर देखा जा सकता है।
2) क्या इस बात का ऑडिट होता है कि (हम करदाताओं से प्राप्त) धन वास्तव में कैसे खर्च किया जाता है?
उत्तर: एक अनुभवी पत्रकार का यह सवाल बेतुका है। CAG बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं सहित सरकार के सभी खर्चों का ऑडिट करता है। रेलवे, NHAI और अन्य संबंधित कार्यान्वयन संगठनों के अपने आंतरिक ऑडिट होते हैं।
इसके अलावा, ये सभी परियोजनाएँ पूरी तरह से सरकारी पैसों पर निर्भर नहीं हैं, कई परियोजनाओं में निजी क्षेत्र भी मदद कर रहा है।
3) क्या केंद्र और विपक्ष शासित राज्यों के लिए नियम अलग-अलग हैं? क्या भेदभावपूर्ण संघवाद ‘डबल इंजन’ राजनीति का आधार है?
उत्तर: ऊपर दी गई लिस्ट से पता चलता है कि यह एक और झूठा दावा है। कई बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ गैर-एनडीए शासित राज्यों में हैं। सड़क और रेलवे परियोजनाएँ कई राज्यों में फैली हुई हैं और सत्तारूढ़ दल के आधार पर उनका निर्माण संभव भी नहीं है।
नोट: राजदीप सरदेसाई ‘विपक्ष शासित’ शब्द सही नहीं है, क्योंकि विपक्ष का अर्थ सरकार में न होना है, कोई ‘विपक्ष शासित सरकार’ नहीं हो सकती। शायद वह ‘गैर-एनडीए शासित’ कहना चाहते थे।
4) अगर एक राष्ट्र, एक चुनाव हो तो क्या होगा?
उत्तर: यह एक काल्पनिक प्रश्न है जिसका फिलहाल कोई मतलब नहीं है। हालाँकि यह पहले ही बताया जा चुका है कि परियोजनाओं को बिना किसी चुनाव के मंजूरी दी जाती है।
5) क्या यह कहना उचित है कि एक पार्टी की मुफ्त/रेवड़ी दूसरी पार्टी के कल्याण/विकास का खजाना है?
उत्तर: एक और बेतुका सवाल, बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर पैसा खर्च होना फ्रीबीज या रेवड़ी नहीं है। रेवड़ी सीधे लोगों को दिया जाता है। जबकि ये पूँजीगत व्यय है, जो प्रमुख बुनियादी ढाँचे का निर्माण करेंगे, रोजगार पैदा करेंगे और उन स्थानों के समग्र आर्थिक विकास में योगदान देंगे।
2025 में परियोजनाओं की लगातार मंज़ूरी, यह साबित करता है कि राजदीप सरदेसाई कितनी बेशर्मी से झूठ बोल रहे हैं। ये परियोजनाएँ पीएम गति शक्ति जैसी पहलों के तहत राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। इनका चुनावों या राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।
(मूल रूप से ये लेख अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)
आम आदमी पार्टी (AAP) जम्मू-कश्मीर में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के चक्कर में घाटी की शांति को खतरे में डाल रही है। पार्टी के विधायक मेहराज मलिक को ‘पब्लिक सेफ्टी एक्ट’ (PSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है, जिसके बाद उनके समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं।
इसके बाद, AAP सांसद संजय सिंह और दिल्ली के विधायक इमरान हुसैन ने कश्मीर में प्रदर्शन कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस ने दोनों नेताओं को श्रीनगर में नजरबंद कर दिया और इंटरनेट सेवाएँ भी बंद कर दी गई है।
मेहराज मलिक एक वीडियो में आतंकी बुरहान वानी को अपना आदर्श बताते है और कहते है कि ‘सिस्टम ठीक करने के लिए लश्कर-ए-तैयबा जैसी आतंकी संगठन जरूरी हैं।’ यह वीडियो अभी भी उनके सोशल मीडिया पर है और एजेंसियाँ इसकी जाँच कर रही हैं।
डोडा में तनाव, आप नेताओं की नजरबंदी
विधायक मेहराज मलिक की गिरफ्तारी के बाद डोडा में तनाव बढ़ गया है। मंगलवार (9 सितंबर 2025) रात हुई हिंसक झड़पों के बाद प्रशासन ने कर्फ्यू जैसे कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इन सब के बीच, आप सांसद संजय सिंह और इमरान हुसैन बुधवार (10 सितंबर 2025) को श्रीनगर पहुँचे, ताकि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर और विरोध मार्च निकालकर इस मुद्दे को हवा दे सकें।
गुरुवार (11 सितंबर 2025) को, पुलिस ने इन दोनों नेताओं को श्रीनगर के सर्किट हाउस में ही नजरबंद कर दिया। उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला से भी मिलने से रोक दिया गया। इसके बाद, संजय सिंह ने एक वीडियो संदेश जारी कर पुलिस की कार्रवाई को ‘तानाशाही’ और लोकतंत्र पर हमला बताया।
बहुत दुःख की बात है जम्मू कश्मीर के कई बार मुख्यमंत्री रहे डॉक्टर फारूख अब्दुल्ला जी पुलिस द्वारा मुझे हाउस अरेस्ट किए जाने की ख़बर पाकर मुझसे मिलने सरकारी गेस्ट में आये उन्हें मिलने नहीं दिया गया। ये तानाशाही नहीं तो और क्या है? pic.twitter.com/MOcNb1heE6
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस घटना पर तुरंत ट्वीट किया। केजरीवाल ने ‘एक्स’ पर लिखा, “पूर्व मुख्यमंत्री जो कि मौजूदा मुख्यमंत्री के पिता जी हैं, उन्हें भी संजय सिंह से उन्ही के राज्य में मिलने नहीं दिया जा रहा? ये सरासर गुंडागर्दी और तानाशाही है।”
पूर्व मुख्यमंत्री जो कि मौजूदा मुख्यमंत्री के पिता जी हैं, उन्हें भी संजय सिंह से उन्ही के राज्य में मिलने नहीं दिया जा रहा? ये सरासर गुंडागर्दी और तानाशाही है। https://t.co/qhcotbtvLz
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने AAP विधायक मेहराज मलिक के समर्थन में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विधायक की गिरफ्तारी से लोकतंत्र में लोगों का विश्वास कमजोर होगा। अब्दुल्ला ने हज़रतबल दरगाह विवाद का हवाला देते हुए कहा कि निर्दोषों को परेशान किया जा रहा है, जबकि धार्मिक भावनाओं से खेलने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या विधायक ने कोई पथराव किया था? फिर भी उन्हें PSA जैसे सख्त कानून के तहत गिरफ्तार किया गया।”
What has Mehraj Malik done to warrant PSA, while no action has been taken against those who hurt our religious sentiments: CM Omar pic.twitter.com/og1XdMs40h
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह कदम कश्मीर घाटी की शांति बनाए रखने के लिए उठाया गया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि आप नेता प्रदर्शनों को और भड़काने की योजना बना रहे थे, जिससे स्थिति और खराब हो सकती थी।
डोडा में हुए ये विरोध प्रदर्शन 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से सबसे बड़े हैं, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे मामले से यह सवाल उठ रहा है कि क्या आप अपने राजनीतिक फायदे के लिए कश्मीर की शांति को खतरे में डाल रही है।
#WATCH | J&K | On arrest of AAP Leader Mehraj Malik, Poonch DGPC General Secretary Harcharan Singh says, "I am thankful to the LG administration and Omar Abdullah government for the arrest of the Doda MLA… He used to promote drugs and abused an IAS officer…" (08.09) pic.twitter.com/MOHuXhySkN
पुंछ के डीजीपीसी महासचिव हरचरण सिंह ने मेहराज मलिक की गिरफ्तारी का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “मैं डोडा विधायक की गिरफ्तारी के लिए LG प्रशासन का धन्यवाद करता हूँ। वह ड्रग्स का प्रचार करते थे और एक IAS अधिकारी के साथ बदतमीजी करते थे।”
नेपाल की सड़कों पर कुछ ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। हजारों की संख्या में देश के युवा, जिन्हें GenZ यानी ‘जेनरेशन जेड’ कहते हैं, वो सरकार के खिलाफ उतर आए। वजह बनी सोशल मीडिया पर बैन और देश में भ्रष्टाचार।
ये आंदोलन इतना तेज हुआ कि देखते ही देखते नेपाल में तख्तापलट हो गया। अब सवाल उठता है कि भारत के GenZ क्या कर रहे हैं?
GenZ कौन हैं?
GenZ वे युवा हैं, जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। आज इनकी उम्र 12 से 27 साल के बीच है। भारत में इनकी संख्या करीब 37 करोड़ मानी जाती है, जो देश की आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। यानी भारत का भविष्य GenZ के हाथों में ही है। कंपनियाँ, सरकारें और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक इन्हीं को ध्यान में रखकर अपनी नीतियाँ तय कर रहे हैं।
स्लैंग से मशहूर GenZ
भारत के GenZ की इंटरनेट पर अपनी भाषा है, जिसे स्लैंग के रूप में जाना जाता है। ये स्लैंग अब हर जगह छाए हुए हैं। अब ये स्लैंग सिर्फ व्हाट्सऐप के चैट्स तक सीमित नहीं है बल्कि बॉलीवुड के गानों और विज्ञापनों तक पहुँच गए हैं। कुछ स्लैंग का अर्थ समझते हैं:
rizz – मतलब किसी को इम्प्रेस करने की कला। delulu– जब इंसान हकीकत छोड़कर ख्वाबों में जीने लगे। brat– थोड़ा बागी, थोड़ा नखरीला अंदाज।
इसले अलावा skibidi, delulu, और tradwife जैसे कुछ स्लैंग तो कैम्ब्रिज डिक्शनरी तक में भी शामिल किए गए हैं। यह पीढ़ी अपने अलग बोलचाल और अंदाज से बाकी सबको प्रभावित कर रही है।
भारत में GenZ हर साल ₹72 लाख करोड़ करते है खर्च
GenZ न सिर्फ इंटरनेट पर बल्कि अर्थव्यवस्था में भी अपनी पकड़ मजबूत कर चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के GenZ हर साल 72 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करते हैं। देश के कुल उपभोक्ता खर्च का करीब 43 प्रतिशत हिस्सा GenZ से ही आता है। वहीं अन्य रिपोर्ट बताती है कि GenZ अपनी कमाई का 30 प्रतिशत हिस्सा सेविंग में डालते हैं।
GenZ सबसे ज्यादा फैशन, डाइनिंग और मनोरंजन में खर्च कर रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, उनका 50 प्रतिशत खर्च फुटवियर, 48 प्रतिशत डाइनिंग, 48 प्रतिशत बाहरी मनोरंजन और 47 प्रतिशत फैशन और लाफस्टाइल पर खर्च होता है। यही नहीं GenZ ट्रैवलर्स साल में दो से तीन बार ट्रिप पर भी जाते हैं, जिनमें 94 प्रतिशत युवा साल में एक बार तो जरूर ही ट्रैवल करते हैं।
Net Influencer की रिपोर्ट के अनुसार, 85 प्रतिशत GenZ सिर्फ वही ब्रांड खरीदते हैं जो उनके जीवन के सिद्धांतों से मेल खाते हों। उन्हें फालतू विज्ञापन पसंद नहीं है। यही वजह है कि कंपनियाँ अब GenZ की जीवनशैली को फोकस में रखते हुए अपने प्रोडक्ट ला रहे हैं। 15 प्रतिशत ब्रांड ने अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी को सिर्फ GenZ पर फोकस रखा है।
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा GenZ मार्केट भी माना जा रहा है। आने वाले समय में उनका खर्च दोगुना होने का अनुमान है।
भारत की राजनीति में GenZ का दखल
भारत की राजनीति में GenZ का दखल अभी शुरुआती स्तर पर है। ये पीढ़ी शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत राजनीतिक जागरूकता का अनुभव कर रही है। बड़ी संख्या में GenZ अब वोट डालने लायक उम्र में पहुँच चुके हैं लेकिन उनका जुड़ाव ज्यादातर सोशल मीडिया बहसों तक सीमित है।
CSPS लोकनीति सर्वे 2024 के मुताबिक, इस पीढ़ी की सबसे बड़ी चिंताएँ बेरोजगारी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामाजिक एकता है। 48 प्रतिशत GenZ मानते हैं कि बेरोजगारी बढ़ी है, वहीं 55 प्रतिशत GenZ को बढ़ते प्रदूषण की चिंता खल रही है।
सोशल मीडिया GenZ की पहली पसंद
भारत का GenZ दिन की शुरुआत से लेकर रात तक सोशल मीडिया से जुड़ा रहता है। Google और Kantar की रिपोर्ट के मुताबिक, 91 प्रतिशत GenZ न्यूज अपडेट के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर रहते हैं। इनमें भी लगभग 88 प्रतिशत लोग यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर वीडियो के जरिए ही समाचार देखते हैं।
इस पीढ़ी के लिए सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि असली पार्लियामेंट बन चुका है। ये सोशल मीडिया उनके लिए विवादों और ‘ऑनलाइन लफड़ा’ का अड्डा भी बन जाता है, जहाँ हर दिन कोई नया झगड़ा या ट्रेंड जन्म लेता है।
NDTV की रिपोर्ट बताती हैं कि भारत के GenZ बोर होना लगभग भूल चुके हैं। मोबाइल और इंटरनेट ने उन्हें हर पल व्यस्त कर दिया है लेकिन यही व्यस्तता उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। Frontline की रिपोर्ट के मुताबिक, चिंता और मानसिक दबाव इस पीढ़ी की बड़ी चुनौतियों में से एक है।
करियर के मामले में GenZ की सोच
काम और करियर के मामले में GenZ की सोच उनसे पहले वाली पीढ़ियों से अलग है। ये पीढ़ी काम और पढ़ाई के बीच में अक्सर अकेलेपन और थकान का अनुभव करती है। हालाँकि, करियर को लेकर इस पीढ़ी की सोच अलग है।
फोर्ब्स की एक रिपोर्ट बताती है कि यह पीढ़ी शादी, घर खरीदने और बड़ी जिम्मेदारियों जैसे जीवन के बड़े फैसलों को टाल रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि करियर के चलते 50 प्रतिशत GenZ ने अपने निजी शौक छोड़ दिए, जो कि किसी भी अन्य पीढ़ी की तुलना में काफी ज्यादा है।
India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, नौकरी की दुनिया में भी इन्हें सख्त नियम और बॉसगिरी पसंद नहीं। हाल ही में GenZ stare नाम का ट्रेंड चर्चा में आया था, जिसमें मैनेजर्स को इन युवाओं की खामोश घूरती नजरें असहज कर देती हैं। वे फ्लेक्सिबल कामकाज और फ्रीडम चाहते हैं, न कि सुबह 9 से शाम 5 तक दफ्तर की बंधी हुई दिनचर्या।
नेपाल में GenZ ने सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर सरकार को गिरा दिया। वहीं भारत में GenZ की दुनिया रील्स, मीम्स, ब्रांड्स और शॉपिंग के बीच ही अटकी है। लेकिन इस बात को इनकार नहीं किया जा सकता है कि उनके पास संख्या, ताकत और तकनीकी समझ किसी भी दूसरी पीढ़ी से अधिक है। अगर यही GenZ भारत की राजनीति और समाज में सक्रिय रूप से उतरें तो भारत की तस्वीरे बदल देंगे।