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ट्रंप के टैरिफ से पस्त दिखें PM मोदी इसलिए वामपंथी मीडिया ने सूरत की डायमंड इंडस्ट्री की ‘मंदी’ को दिया नया नैरेटिव, विशेषज्ञों ने खोली पोल: ऑपइंडिया एक्सक्लूसिव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगा दिया है, जो बुधवार (27 अगस्त 2025) से लागू हो गया। इसके बाद भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर कुल शुल्क 50% हो गया है। यह कदम अमेरिका ने भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण उठाया है।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत के हीरा उद्योग पर बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सूरत का हीरा कारोबार पहले से ही गहरी मंदी का सामना कर रहा था और अब टैरिफ बढ़ने से हालात और बिगड़ सकते हैं। इस मंदी से हजारों नौकरियों पर संकट मंडराने की आशंका है।

सूरत भारत का हीरा निर्यात केंद्र है, जहाँ से हर साल हजारों करोड़ रुपए के हीरे अमेरिका समेत कई देशों में भेजे जाते हैं। रॉयटर्स और बीबीसी जैसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थाओं ने रिपोर्टिंग करते हुए इस मंदी को ट्रंप के टैरिफ से जोड़कर प्रस्तुत किया। बाद में गुजराती और हिंदी मीडिया ने भी यही नैरेटिव आगे बढ़ाया।

रिपोर्ट के अनुसार, सूरत की कई हीरा फैक्ट्रियों में पहले बड़ी संख्या में लोग काम करते थे, लेकिन अब ऑर्डर न मिलने की वजह से कर्मचारियों की संख्या घटा दी गई है और कई लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन लोगों की नौकरी बची है, उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कई ज्वेलर्स का कहना है कि उनकी सैलरी कम कर दी गई है या फिर उन्हें काम से हटा दिया गया है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, टैरिफ से पैदा हुई मंदी का सीधा असर अब मजदूरों पर दिखने लगा है। रिपोर्ट में कुछ लोगों के हवाले से कहा गया है कि एक लाख से ज्यादा ज्वेलर्स की नौकरियाँ खतरे में हैं और उनका भविष्य अनिश्चित है।

रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में सूरत के डायमंड बोरस पर फोकस किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ समय पहले इसका उद्घाटन किया था, लेकिन यह अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टैरिफ बढ़ने से ऑर्डर कम हो गए हैं, कई दफ़्तर खाली पड़े हैं और कई कारोबारी यहाँ अपना बिजनेस शिफ्ट करने से कतराने लगे हैं।

रिपोर्ट में छोटे हीरा कारोबारियों के हवाले से भी मंदी की बात कही गई है। कई गुमनाम लोगों ने भी यही दावे दोहराए हैं। विदेशी मीडिया के बाद अब गुजराती मीडिया ने भी इस मुद्दे को उठाया है।

गुजरात समाचार ने 28 अगस्त को एक रिपोर्ट प्रकाशित की और दावा किया कि ट्रंप के 50% टैरिफ से सूरत के हीरा-टेक्सटाइल उद्योग में 50 हजार से अधिक नौकरियाँ खतरे में पड़ सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि सूरत के हीरा व्यापार का लगभग 30% हिस्सा अमेरिका से जुड़ा है, इसलिए टैरिफ का असर उद्योग पर ज्यादा पड़ेगा।

सत्य क्या है?

सूरत गुजरात की आर्थिक राजधानी है और गुजरात प्रधानमंत्री मोदी का गृह राज्य है। अगर यह प्रचार किया जाए कि सूरत का सबसे बड़ा उद्योग टैरिफ और वैश्विक हालात की वजह से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, तो इससे यह संदेश जाता है कि ट्रंप सीधे मोदी और उनके राज्य को निशाना बना रहे हैं।

लेकिन जरूरी है यह समझना कि कई रिपोर्ट्स में पूरी तस्वीर या सही संदर्भ नहीं दिए जा रहे, जिससे गलत नैरेटिव फैल रहा है।

असलियत यह है कि सूरत का हीरा उद्योग पिछले एक साल से मंदी का सामना कर रहा है। इस दौरान कई रिपोर्ट्स प्रकाशित हुईं, जब जो बाइडेन राष्ट्रपति थे, तब टैरिफ का कोई मुद्दा सामने नहीं था। यानी अगर बीबीसी की टीम ट्रंप के आने से पहले सूरत गई होती, तो वहाँ की स्थिति वही मिलती, जो अब दिखाई दे रही है।

यह सही है कि अमेरिकी टैरिफ का असर हीरा उद्योग पर पड़ेगा, लेकिन यह भी सच है कि भारतीय हीरा कारोबारियों की पकड़ मज़बूत है। भारत के पास अमेरिका के अलावा अन्य बाजार भी हैं, जबकि अमेरिका के पास ऐसे वैकल्पिक सप्लायर नहीं हैं जो इतने बड़े पैमाने पर हीरे निर्यात कर सकें। अमेरिका में हीरों की माँग बहुत अधिक है, जिसे केवल भारत ही पूरा कर सकता है।

जहाँ तक डायमंड बोरस का सवाल है, उसकी स्थिति पर सवाल इसके उद्घाटन के समय से ही उठते रहे हैं। कई दफ़्तर अब तक शुरू नहीं हुए हैं, लेकिन इसका सीधा संबंध अमेरिकी टैरिफ से नहीं है। जब टैरिफ का मुद्दा नहीं था, तब भी डायमंड बोरस की यही हालत थी। हकीकत यह है कि सरकार लगातार इसे सक्रिय बनाने की कोशिश कर रही है।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

सूरत डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीशभाई खुंट के अनुसार, हीरा उद्योग में भयंकर मंदी आने की बातें ज्यादातर मीडिया की बनाई हुई हैं।

उन्होंने बताया कि सूरत में पिछले दो साल से मंदी का माहौल है और पिछले एक साल में यह और बढ़ा है। यह स्थिति टैरिफ विवाद से पहले से ही मौजूद थी। अमेरिकी टैरिफ के असर पर बोलते हुए खुंट ने कहा कि इसका असर शॉर्ट टर्म जरूर होगा, लेकिन लंबे समय में उद्योग इस स्थिति को संभाल लेगा।

‘अमेरिका भारत पर निर्भर है, अगर नुकसान भी होगा तो अल्पकालिक होगा’

उन्होंने कहा कि आज करीब 90% हीरों का उत्पादन भारत में होता है और अमेरिका भी यह अच्छी तरह जानता है। इसलिए दुनिया का कोई भी देश अमेरिका की जरूरत के हिसाब से इतने बड़े पैमाने पर हीरे निर्यात नहीं कर सकता। अमेरिका पूरी तरह भारत पर निर्भर है, जबकि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं है।

खुंट ने कहा कि अगर अमेरिका टैरिफ बढ़ाता भी है तो असली नुकसान वहीं के आम नागरिकों को होगा। अमेरिका में हीरे शादी और सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा हैं, जैसे भारत में सोने का महत्व है। अगर वहाँ लोगों को हीरे नहीं मिलेंगे तो असंतोष पैदा होगा या फिर लोग महँगे दाम देकर भी खरीदेंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को इससे नुकसान नहीं होगा। जो हीरे पहले अमेरिका भेजे जाते थे, उन्हें अन्य देशों को भेजकर आसानी से भरपाई की जा सकती है। क्योंकि भारत दुनिया के लगभग सभी देशों में हीरे निर्यात करता है।

इसी लिए उनके अनुसार, अमेरिकी टैरिफ से भारत के हीरा उद्योग पर कोई बड़ा संकट नहीं आएगा। बल्कि अमेरिका ही भारत पर ज्यादा निर्भर है, भारत अमेरिका पर नहीं।

यह रिपोर्ट झूठी है कि मंदी का कारण टैरिफ था

उन्होंने वही तर्क दिया कि अमेरिका में हीरे उतने ही अहम हैं जितना भारत में सोना। इसलिए हीरे महंगे होने पर भी अमेरिकी इन्हें खरीदेंगे। अगर वे नहीं खरीदते, तो भारत अन्य देशों को हीरे बेच सकता है।

असली नुकसान अमेरिका को होगा, क्योंकि भारत के अलावा कोई और देश इतनी मात्रा में हीरे नहीं दे सकता। सूरत में 10-12 फैक्ट्रियों का संचालन करने वाले ठाकरसिभाई पटेल ने भी यही बात दोहराई।
उन्होंने कहा कि मंदी से कोई इनकार नहीं कर सकता, लेकिन यह मंदी अमेरिकी टैरिफ की वजह से नहीं है। टैरिफ का असर थोड़े समय के लिए जरूर पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय तक इसका कोई बड़ा असर नहीं होगा। इसी तरह, एक अन्य फैक्ट्री मालिक लक्ष्मणभाई और कुछ ज्वेलर्स ने भी यही राय रखी।

गौर करने वाली बात यह है कि 2024 में भी गुजराती मीडिया ने हीरा उद्योग में मंदी की रिपोर्ट प्रकाशितकी थी, जबकि तब टैरिफ विवाद का कोई मुद्दा नहीं था। यानी यह साफ है कि सूरत की हीरा इंडस्ट्री में मंदी पहले से थी, लेकिन यह अमेरिकी टैरिफ की वजह से नहीं आई।

इसके अलावा, उद्योग जगत ने अमेरिका पर निर्भरता घटाने और अन्य देशों को हीरे बेचने की योजना भी बनाई है। खुंट के अनुसार, राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों हीरा उद्योग के साथ खड़ी हैं और जरूरत पड़ने पर हमेशा सकारात्मक कदम उठाती हैं।

मूल रूप से यह रिपोर्ट गुजराती में भार्गव राजगुरु ने लिखी है, इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ें।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से घुटने पर आया पाकिस्तान नीचता पर उतरा, प्रोपेगेंडा हैडल्स से शेयर करवा रहा नौसेना प्रमुख का फर्जी वीडियो: PIB ने खोली पोल

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मुँह की खाया पाकिस्तान अपनी हार झुठलाने के लिए लगातार प्रोपेगेंडा का सहारा ले रहा है लेकिन वहाँ भी उसके झूठ की हर बार पोल खुल रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा हैंडल्स ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा है, “मोदी सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर को रोक दिया, जिसकी वजह से भारतीय वायुसेना को नुकसान हुआ।”

इस वायरल वीडियो में एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी को यह कहते सुना जा सकता है, “महोदय, कुछ दिन पहले, विक्रांत (INS विक्रांत) के डेक पर भारतीय नौसेना को संबोधित करते हुए आपने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और जरूरत पड़ने पर, भारतीय नौसेना को अगली बार हमला करने का मौका मिल सकता है। हमें उम्मीद थी कि सरकार हमें लड़ाई (ऑपरेशन सिंदूर) में हिस्सा लेने की इजाजत देगी, लेकिन सरकार ने हमें लड़ाई में शामिल होने की कमान नहीं दी। यही वजह है कि भारतीय वायुसेना को नुकसान उठाना पड़ा।”

वीडियो में एडमिरल त्रिपाठी को यह कहते हुए दिखाया गया कि सरकार ने नौसेना को लड़ाई में हिस्सा लेने का आदेश नहीं दिया और इसलिए वायुसेना को नुकसान उठाना पड़ा। यह वीडियो पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा हैंडल्स द्वारा सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर फैलाया गया, ताकि भारत के खिलाफ गलत जानकारी फैलाई जा सके।

भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इस वीडियो का फैक्ट-चेक किया है और साफ बताया कि यह वीडियो एडिट किया गया है। एडमिरल त्रिपाठी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था। PIB ने एडमिरल त्रिपाठी का असली वीडियो भी जारी किया, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार की तारीफ की है और कहा है कि भारतीय नौसेना आधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस है।

रियल वीडियो में वे कह रहें हैं, “सर, कुछ दिन पहले आपने INS विक्रांत के डेक पर भारतीय नौसेना को संबोधित करते हुए कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है और अगर जरूरत पड़ी, तो अगली बार नौसेना को पहला हमला करने का मौका मिल सकता है। मैं कहना चाहता हूँ कि INS उदयगिरि और INS हिमगिरि जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म हमें दुश्मन पर पहला जबरदस्त हमला करने में सक्षम बनाते हैं।”

जाहिर है कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो फैलाया गया, वह झूठा और भ्रामक था। एडमिरल त्रिपाठी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। असल में उन्होंने भारत की सरकार और नौसेना की ताकत की सराहना की थी।

गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना द्वारा पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस हमले में आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, जो कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक ग्रुप है।

हमले के बाद भारत ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की तैयारी की थी, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।

पानी की टंकी में हिंदुओं को खड़ा कर बना देते थे ईसाई, कासगंज से आकर बदायूं में 20 लोगों का कराया धर्मांतरण: फोटो-वीडियो वायरल होने के बाद पकड़ा गया पास्टर हृदयेश

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के कुंदावली गाँव में बीते छह सालों से ईसाई धर्मांतरण का खेल चल रहा था। कासगंज का रहने वाला पास्टर हृदयेश गाँव में आता-जाता था और लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर करता था।

उसकी पत्नी नीतू और गाँव की कुछ महिलाएँ भी इस काम में शामिल थीं। गाँव में बने एक मकान में अस्थायी चर्च बनाकर वहाँ लोगों का ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराया जाता था। गाँव में लगभग 20 लोगों को पानी की टंकी में खड़ा कर उन्हें शपथ दिलाने के फोटो और वीडियो भी सामने आए हैं।

इसी के बाद यह मामला सामने आया, लेकिन पुलिस ने पहले इसे नजरअंदाज किया। थाने से लेकर सीओ स्तर तक के अधिकारी शुरुआत में पूरे मामले को दबाने की कोशिश करते दिखे।

मामले में पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने भी एक्स पर शपथ दिलाने की फोटो शेयर करते हुए पुलिस की लापरवाही का खुलासा किया। उन्होंने लिखा, उत्तर प्रदेश के बदायूं में हिंदुओं के अवैध धर्मांतरण के मामले को स्थानीय थाने और यहाँ तक कि सर्किल ऑफिसर ने भी दबा दिया। उन्होंने यह कहकर पूरी बात को रफा-दफा कर दिया कि किसी ने धर्मांतरण नहीं किया (हालाँकि स्क्रीनशॉट में दिखाई गई धर्मांतरण की तस्वीरें भी मौजूद हैं)।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, सीओ बिल्सी संजीव कुमार ने जल्दबाजी में बयान देते हुए कहा कि उन्हें ट्विटर के जरिए जानकारी मिली थी कि गाँव में प्रार्थना सभाएँ होती हैं। जब पुलिस मौके पर पहुँची तो उन्हें कोई पीड़ित नहीं मिला जिसने सीधे तौर पर धर्मांतरण की शिकायत की हो।

हालाँकि दूसरी ओर सोशल मीडिया पर लगातार फोटो और वीडियो सामने आते रहे, जिनमें लोगों को धर्म बदलने के लिए प्रलोभन दिया जा रहा था। इन साक्ष्यों के सामने आने के बाद पुलिस की सफाई और झूठ पकड़े गए।

अंत में किसी तरह पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। हालाँकि अब भी पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने मौके से चार लोगों को पकड़ा था, जिनमें दो महिलाएँ भी थीं। लेकिन अब सिर्फ पास्टर हृदयेश को हिरासत में लेने की बात कही जा रही है और महिलाओं की तलाश जारी होने का दावा किया जा रहा है।

इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध और लापरवाह नजर आई, लेकिन जनता और सोशल मीडिया के दबाव में आकर आखिरकार कार्रवाई करनी पड़ी।

‘भारत आइए, दुनिया के लिए बनाइए’: अमेरिका से टैरिफ वॉर के बीच PM मोदी का जापान की कंपनियों को न्योता, कहा- मेट्रो से मैन्युफैक्चरिंग तक हमारी साझेदारी विश्वास का प्रतीक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जापान यात्रा की शुरुआत में शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को टोक्यो में भारत-जापान इकनॉमिक फोरम को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने जापान से अपने पुराने रिश्तों को याद किया और जापानी कंपनियों को भारत में निवेश करने न्योता दिया है।

Come, Make in India: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया सिर्फ भारत को देख ही नहीं रही है बल्कि भारत पर भरोसा भी कर रही है। पीएम मोदी ने वहाँ मौजूद बिजनेस लीडर्स से कहा, “मैं आपसे आग्रह करता हूँ- ‘Come, Make in India, Make for the world’ (आइए, भारत में बनाइए, विश्व के लिए बनाइए) और ‘सुजुकी’ और ‘डाइकिन’ की सफलता की कहानी आपकी भी सफलता की कहानी बन सकती है।” अमेरिका से चल रहे टैरिफ वॉर के बीच पीएम मोदी का जापानी कंपनियों को यह आमंत्रण अहम माना जा रहा है।

भारत उम्मीदों से भरा है: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि मेट्रो से मैन्युफैक्चरिंग तक हर क्षेत्र में भारत और जापान की साझेदारी विश्वास का प्रतीक बनी है। पीएम ने इस दौरान बताया कि जापानी कंपनियों ने भारत में 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है और पिछले 2 वर्षों में 13 बिलियन डॉलर का प्राइवेट इन्वेस्टमेंट हुआ है।

उन्होंने कहा, “JBIC कहता है कि भारत सबसे अधिक उम्मीदों से भरा गंतव्य है। JETRO बताता है कि 80% कंपनियाँ भारत में विस्तार करना चाहती हैं और 75% मुनाफे में हैं।”

वैश्विक ग्रोथ में भारत का 18% योगदान: PM

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में आज राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता है। उन्होंने कहा, “आज भारत विश्व की सबसे तेज बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द विश्व की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनने जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “वैश्विक ग्रोथ में भारत 18% योगदान दे रहा है। 2017 में हमने ‘वन नेशन-वन टैक्स’ की शुरुआत की थी। अब इसमें नए और बड़े रिफार्म लाने पर काम चल रहा है।” साथ ही, भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर भी बल दिया गया है और डिफेंस और स्पेस जैसे सेन्सिटिव क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि जापान एक ‘टेक पावरहाउस’ है और भारत एक ‘टैलेंट पावर हाउस’। उन्होंने कहा, “जापान की टेक्नोलॉजी और भारत का टैलेंट मिलकर इस सदी की ‘टेक क्रांति’ नेतृत्व कर सकते हैं।” वहीं, जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने कहा कि भारतीय टैलेंट और जापानी तकनीक एक-दूसरे के लिए बने है।

PM ने याद किए जापान से अपने पुराने रिश्ते

पीएम मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी जापान के साथ अपने पुराने संबंधों को याद किया है। पीएम मोदी ने फोरम को संबोधित करते हुए कहा, “बहुत लोग हैं जिनसे मेरा व्यक्तिगत परिचय रहा है। जब मैं गुजरात में था, तब भी, और गुजरात से दिल्ली आया तो तब भी।”

उन्होंने आगे कहा, “आप में से कई लोगों से निकट परिचय मेरा रहा है। मुझे खुशी है की आज आप सब से मिलने का अवसर मिला है।” साथ ही उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री इशिबा का भी धन्यवाद दिया है।”

‘चुनाव आयोग ने एक घर में बसा दिया गाँव’: फिर बिहार SIR पर झूठ फैलाते पकड़ा गया कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम, जानिए ‘मकान संख्या 6 में 947 वोटर’ के दावे की सच्चाई

‘वोट चोरी’ का प्रोपेगेंडा रचने वाली कॉन्ग्रेस मतदाता गहन पुनरीक्षण बिहार (SIR) पर एक और झूठ फैलाते पकड़ी गई है। कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि बोधगया विधानसभा क्षेत्र के निदानी गाँव में सभी 947 मतदाताओं का मकान संख्या ‘6’ ही दिखाया गया है। पार्टी ने कहा कि ऐसा करके चुनाव आयोग ने असली मकान नंबर गायब कर दिए हैं।

मकान नंबर ‘6’ में 947 वोटर, कॉन्ग्रेस का दावा

कॉन्ग्रेस ने ‘वोट चोरी’ को लेकर यह दावा बाराचट्टी विधानसभा के निदानी गाँव के बूथ नंबर 161 को लेकर किया है। कॉन्ग्रेस ने एक सोशल मीडिया एक पोस्ट में दावा किया कि बूथ नंबर 161 की मतदाता सूची में 947 मतदाता एक ही घर (मकान नंबर ‘6’) में रहते हैं।

कॉन्ग्रेस ने कहा कि निदानी गाँव में सैकड़ों घर और परिवार हैं, मगर मतदाता सूची में पूरा गाँव एक काल्पनिक मकान में समा गया। चुनाव आयोग से 3 सवाल भी किए- BLO ने किस तरह डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन की?, असली मकान नंबर वोटर लिस्ट से क्यो गायब कर दिए? और इसका फायदा किसे पहुँचाया जा रहा है?

आगे कॉन्ग्रेस ने फर्जी वोटर, डुप्लीकेट नाम और भूतिया पहचान छिपाए जाने का भी दावा किया। कॉन्ग्रेस ने ‘लोकतंत्र की चोरी’ और ‘लोकतंत्र को लूटने’ जैसे गंभीर आरोप भी चुनाव आयोग पर लगाए।

कॉन्ग्रेस के इस दावे को विपक्ष के नेता राहुल गाँधी समेत पूरे कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ने प्रचारित किया। उल्लेखनीय है कि इस समय INDI गठबंधन राहुल गाँधी के नेतृत्व में बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाल रहा है।

बिहार SIR का ड्राफ्ट डाटा क्या कहता है?

चुनाव आयोग ने बिहार SIR को जो ड्राफ्ट अपलोड किया है, उसमें निदानी गाँव के बूथ नंबर-161 का डाटा ऑपइंडिया ने खंगाला। सभी लोगों को मकान संख्या ‘6’ दिया गया है। हमने पाया कि इस बूथ पर 947 मतदाताओं का नाम दर्ज है। इनमें 526 पुरुष और 421 महिलाएँ हैं।

मकान संख्या ‘6’ में 947 वोटर- क्या है सच्चाई?

कॉन्ग्रेस के दावे के बाद गया के जिलाधिकारी ने इस बूथ पर सभी मतदाताओं के मकान संख्या ‘6’ होने का कारण बताया है। उन्होंने एक्स पोस्ट में बताया है, “कई गाँवों में गृह संख्या आवंटित नहीं होती है, जिसके कारण वोटर रोल में सांकेतिक गृह संख्या दी जाती है। जिन मतदाताओं का उल्लेख किया गया है, वे सभी गाँव में मौजूद हैं और सही वोटर हैं। निदानी गाँँव के 161 बूथ संख्या के वोटर स्वयं स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।”

इस जानकारी के साथ ही जिलाधिकारी ने गाँव के मतदाता का वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में मतदाता बताते हैं कि SIR से वे लोग संतुष्ट हैं और इससे कोई परेशानी नहीं हो रही है। साथ ही मतदाता यह भी बताते हैं कि गाँव में कोई गृह संख्या नहीं होता है। सभी मतदाताओं ने मकान संख्या ‘6’ पर फैलाई जा रही अफवाहों को झूठा करार दिया।

चुनाव आयोग ने ऑपइंडिया को बताया है, “Notional House Number एक काल्पनिक (प्रतीकात्मक) मकान संख्या होती है, जो तब दी जाती है जब किसी मतदाता के निवास स्थान पर वास्तविक मकान संख्या उपलब्ध नहीं होती। कई गाँवों, झुग्गियों या अस्थायी बस्तियों में घरों पर कोई स्थायी मकान संख्या नहीं होती। ऐसे में BLO क्षेत्र का भौतिक भ्रमण करके प्रत्येक घर को स्वतः एक क्रमांक (जैसे 1, 2, 3…) प्रदान करता है।”

चुनाव आयोग ने आगे कहा, “यह संख्या केवल सूचीकरण में सुविधा और मतदाताओं को सही क्रम में दर्ज करने के लिए दी जाती है। इसका प्रयोग मतदाता की पहचान और मतदाता सूची को क्रमबद्ध रूप से तैयार करने में होता है।”

मकान संख्या ‘6’ की तरह ही मकान संख्या ‘0’ पर भी किया था गुमराह

जिस तरीके से मकान संख्या ‘6’ को लेकर झूठ फैलाया गया है। इससे पहले भी मकान संख्या ‘0’ को लेकर कॉन्ग्रेस ने लोगों को गुमराह करने की कोशिश की थी। राहुल गाँधी ने दावा किया था कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में मकान नंबर ‘0’ वाले कई मतदाता हैं। राहुल गाँधी ने इन्हें ‘फर्जी मतदाता’ बताया था, जिनके घर का पता नहीं था।

बाद में चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी के दावे को झूठा करार दिया था। चुनाव आयोग ने बताया कि बेघर लोगों को ये नंबर दिया गया है, जिनका पता स्पष्ट नहीं होता है। ऐसे लोगों का चुनावी फॉर्म में पूरा पता दर्ज नहीं होता है।

धर्मस्थल मामले में कसा SIT का शिकंजा, कर्नाटक के साथ पड़ोसी राज्यों में बढ़ेगा छानबीन का दायरा: सफाईकर्मी ने गढ़ी थी झूठी कहानी, BJP ने की NIA जाँच की माँग

कर्नाटक के धर्मस्थल में सामूहिक दफन के मामले की जाँच का दायरा बढ़ने वाला है। विशेष जाँच दल (SIT) 7 साल पुरानी पैनल रिपोर्ट की जाँच करेगी, जिसमें धर्मस्थल के आसपास हुई महिलाओं और बच्चों की संदिग्ध मौत की जानकारी दी गई है। SIT ने कहा कि सफाईकर्मी की सारी बातें झूठी नहीं है इसीलिए जाँच के दायरे को बढ़ाया जा रहा है।

Deccan Herald की रिपोर्ट के अनुसार, SIT कर्नाटक और उसके पड़ोसी राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और गोवा में धर्मस्थल आने वाले तीर्थयात्रियों के लापता होने के बारे में दर्ज FIR की भी जाँच करेगी। SIT ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि सफाईकर्मी की गिरफ्तारी के बाद जाँच खत्म होने का दावा किया गया था।

ये 5000 पन्नों की रिपोर्ट महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न रोकने के मामले में साल 2018 में प्रस्तुत की गई थी, जिसमें कर्नाटक में महिलाओं के अचानक गायब होने के भी कई मामले उल्लेख किए गए हैं। यह मामले धर्मस्थल क्षेत्र से भी जुड़े थे।

इसके साथ SIT 1995 से 2014 के बीच अचानक लापता हुए धर्मस्थल के श्रद्धालुओं के मामले को भी खंगाल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सफाईकर्मी की शिकायतों के अलावा भी कई ऐसे आरोप सामने आए हैं कि बिना पोस्टमार्टम के बगैर शवों को संदिग्ध तरीके से दफनाया गया।

टीम ने कई जगह खुदाई की है और अवशेष भी मिले हैं, जिनकी फॉरेंसिक जाँच रिपोर्ट का इंतजार है। शव की पहचान करने के लिए कर्नाटक के धर्मस्थल में सामूहिक दफन के मामले की जाँच का दायरा बढ़ने वाला है।ने एक तकनीकी तौर बहुआयामी फॉरेंसिक जाँच भी शुरू कर दी है।

सफाईकर्मी पर झूठे गवाही के भी लगे आरोप

धर्मस्थल में सामूहिक दफन मामले में गवाही देने वाले सफाईकर्मी पर गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद ही झूठे सबूत पेश करने और झूठी गवाही देने के नए आरोप लगाए गए हैं।

अब तक की जाँच के बाद सफाईकर्मी पर BNS की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 227 (झूठी गवाही देना), धारा 228 (झूठी गवाही गढ़ना), धारा 229 (झूठी गवाही के लिए दंड), धारा 336 (जालसाजी), धारा 230 (मृत्युदंड की सज़ा दिलाने के इरादे से झूठी गवाही गढ़ना), धारा 231 (आजीवन कारावास की सज़ा दिलाने के इरादे से झूठी गवाही गढ़ना), धारा 236 (झूठी घोषणा), धारा 240 (झूठी जानकारी देना) और धारा 248 (झूठा आरोप) शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सफाईकर्मी को 18 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया गया था। जब मामले की जाँच कर रही SIT ने सफाईकर्मी पर सबूत के तौर पर एक मानव खोपड़ी पेश करने का आरोप लगाया था। तब SIT ने दावा किया कि यह खोपड़ी धर्मस्थल से खोदकर निकाली गई है।

हालाँकि, जाँच के दौरान SIT ने पाया कि यह खोपड़ी सफाईकर्मी को किसी व्यक्ति ने सौंपी थी। पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि खोपड़ी किसी चिकित्सा प्रयोगशाला से आई थी या किसी दूसरी जगह से।

कर्नाटक BJP की NIA जाँच की माँग

धर्मस्थल मामले में कर्नाटक बीजेपी लगातार NIA जाँच की माँग कर रही है। कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने धर्मस्थल के खिलाफ ‘झूठे प्रचार’ के चलते जनता का विश्वास खोने का हवाला देते हुए NIA या CBI जाँच की माँग की।

कर्नाटक बीजेपी ने धर्मस्थल मामले में विरोध प्रदर्शन के लिए 01 सितंबर 2025 को ‘धर्म जागृति समावेश’ आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इसमें 50 हजार से 1 लाख हिंदू लोग शामिल होंगे।

जानें पूरा मामला

यह मामला तब सामने आया जब एक सफाईकर्मी ने चौंकाने वाला दावा किया कि उसे 1998 से 2014 के बीच धर्मस्थल में कई जगहों पर सैकड़ों शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। यह सफाईकर्मी भगवान मंजूनाथ मंदिर में काम करता था और उसने 3 जून 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

उसके आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, राज्य सरकार ने 19 जुलाई को इस मामले की जाँच के लिए SIT  का गठन किया। इसके बाद SIT उसे धर्मस्थल के स्नान घाट लेकर गई, जहाँ उसने 13 जगहों की पहचान की, जहाँ कथित रूप से शव दफनाए गए थे।

सफाईकर्मी ने अपनी शिकायत में बताया कि जिन शवों को वह दफनाता था, उनमें कई महिलाएँ और नाबालिग लड़कियाँ थीं, जिनका यौन शोषण किया गया था।

उसकी शिकायत के कुछ समय बाद, सुजाता नाम की 60 साल की एक महिला ने भी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। उसने बताया कि उसकी बेटी धर्मस्थल की तीर्थ यात्रा के दौरान लापता हो गई थी। हालाँकि, बाद में महिला अपनी बात से पलट गई और सामने आया कि उसकी कोई बेटी नहीं है।

गायत्री मंत्र से जापान में PM मोदी का स्वागत, दोस्ताने अंदाज में मिले प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा: 15वें शिखर सम्मेलन में AI-सेमीकंडक्टर्स और वैश्विक साझेदारी पर होगी बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को दो दिन की जापान यात्रा पर टोक्यो पहुँचे। हानेडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी का जोरदार स्वागत किया गया। इसके बाद टोक्यो में जापानी समुदाय के लोगों ने गायत्री मंत्र गाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया।

इस दौरे में पीएम मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मिलकर आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। पीएम मोदी ने तस्वीरें साझा करते हुए एक्स पर लिखा, “टोक्यो पहुँच गया हूँ। भारत और जापान अपने विकासात्मक सहयोग को निरंतर मज़बूत कर रहे हैं, और मैं इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री इशिबा और अन्य लोगों से मिलने के लिए उत्सुक हूँ, जिससे मौजूदा साझेदारियों को और मजबूत करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर मिलेगा।”

यात्रा से पहले जारी एक बयान में पीएम मोदी ने कहा कि यह दौरा भारत और जापान के बीच ‘सभ्यतागत संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव’ को गहरा करने का अवसर है। उन्होंने बताया कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक और ग्लोबल पार्टनरशिप’ को अगले स्तर पर ले जाना है, जो पिछले 11 सालों में लगातार मजबूत हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस यात्रा में दोनों देश अपनी साझेदारी को नए पंख देने, आर्थिक और निवेश संबंधों को और विस्तार देने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व सेमीकंडक्टर्स जैसी नई और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने की कोशिश करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीएम मोदी का सुबह 10:30 से 10:50 बजे तक व्यावसायिक कार्यक्रम है। उसके बाद वे 11:30 से 1:10 बजे तक जापान के गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात करेंगे। दोपहर 1:15 से 1:20 बजे के बीच शोरिनजान दारुमा जी मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा पीएम मोदी को दारुमा गुड़िया भेंट की जाएगी। इसके बाद दोपहर 2:30 से 5:15 बजे तक 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी शामिल होंगे।

बता दें कि जापान में पीएम मोदी का दौरा शनिवार (30 अगस्त 2025) तक चलेगा, इसके बाद पीएम मोदी चीन के शहर तिआनजिन जाएँगे। वहाँ वे 31 अगस्त और 1 सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक भी होने की संभावना है।

हर परिवार में हो 3 बच्चे, धर्मांतरण-घुसपैठ से बदल रही डेमोग्राफी: मोहन भागवत, 75 की उम्र में रिटायरमेंट, आरक्षण से लेकर BJP-RSS रिश्तों पर हर सवाल का दिया जवाब

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी वर्ष व्याख्यान शृंखला के तहत दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिवसीय कार्यक्रम का गुरुवार (28 अगस्त 2025) को समापन हुआ। समापन सत्र में सरसंघचालक मोहन भागवत ने लोगों के संघ और उसकी कार्यशैली से जुड़े सवालों के जवाब दिए हैं। इस कार्यक्रम में 50 से अधिक देशों के राजदूतों, उद्योगपतियों, न्यायाधीशों, राजनीतिक नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियों सहित लगभग 2,000 लोगों को आमंत्रित किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पूछे गए कुछ सवाल और उनके जवाब –

प्रश्न:  देश में जनसांख्यिकीय असंतुलन की वजह क्या है?
मोहन भागवत:  धर्मांतरण और अवैध प्रवास इसके बड़े कारण हैं। धर्म व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद होनी चाहिए, उसमें किसी तरह का दबाव या प्रलोभन नहीं होना चाहिए।

प्रश्न: अवैध प्रवास पर सरकार की कोशिशों को आप कैसे देखते हैं?
भागवत: सरकार रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। हमें अवैध प्रवासियों को नौकरी नहीं देनी चाहिए। पहले अपने लोगों को, चाहे वे मुसलमान ही क्यों न हों, रोजगार देना चाहिए।

प्रश्न: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर आपका क्या विचार है?
भागवत: यह सही दिशा में कदम है। हमारी शिक्षा व्यवस्था विदेशी आक्रांताओं के समय नष्ट हो चुकी थी। वे देश पर शासन करना चाहते थे, विकास नहीं। अब जब हम स्वतंत्र हैं तो हमें जनता को आगे बढ़ाना है।

प्रश्न: आरएसएस और भाजपा के रिश्तों को लेकर हमेशा सवाल उठते हैं। क्या भाजपा अध्यक्ष चुनने में संघ का हाथ होता है?
भागवत: यह पूरी तरह गलत धारणा है। अगर हम तय करते तो इतना समय क्यों लगता? सुझाव दिए जा सकते हैं लेकिन फैसला उनका ही होता है।

प्रश्न: प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को हटाने वाले हालिया विधेयकों पर आपकी राय?
भागवत: नेतृत्व पारदर्शी और बेदाग होना चाहिए, यही मूल आधार है। संसद सर्वोच्च संस्था है, वही जो भी निर्णय लेगी, लागू होगा। अभी चर्चा चल रही है, देखते हैं आगे क्या होता है।

प्रश्न: भाजपा अध्यक्ष के नाम को लेकर चर्चा है, क्या संघ इसमें कोई भूमिका निभा रहा है?
भागवत: हमने कभी ऐसा फैसला नहीं किया और न करना चाहते हैं। यह पार्टी का अधिकार है। हम सिर्फ वैचारिक मार्गदर्शन देते हैं।

प्रश्न: क्या 75 साल की उम्र होते ही नेताओं को पद छोड़ देना चाहिए?
मोहन भागवत: मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे पद छोड़ना चाहिए या किसी और को पद छोड़ देना चाहिए। जिस दिन मुझसे कहा जाएगा, “जाओ, शाखा चलाओ,” मैं चला जाऊँगा।

उन्होंने आगे कहा, “संघ में हमें काम दिया जाता है, चाहे हम चाहें या न चाहें। अगर मैं 80 साल का भी हो जाऊँ और मुझे शाखा संचालित करने के लिए कहा जाए, तो मुझे जाना ही पड़ेगा। हम वही करते हैं जो संघ कहता है। मैं सरसंघचालक हूँ लेकिन क्या आपको लगता है कि सिर्फ मैं ही सरसंघचालक हो सकता हूँ? यह किसी के लिए रिटायरमेंट का मामला नहीं है।”

वहीं, मोहन भागवत ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कहा, “भारत की जनसंख्या नीति 2.1 बच्चों की है। एक परिवार में तीन बच्चे हों, हर नागरिक को यह देखना चाहिए कि उसके परिवार में तीन बच्चे होने चाहिए।” उन्होंने कहा, “जनसंख्या बोझ भी हो सकती है। इसलिए जनसंख्या नीति भी है। जनसंख्या नियंत्रित रहे इसलिए तीन से बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ना चाहिए। जन्मदर कम होने की अगर बात है तो वह सबका कम हो रहा है।”

कार्यक्रम के अंतिम दिन मोहन भागवत ने इस मंच से साफ किया कि संघ की विचारधारा भारत की परंपराओं से जुड़ी है और विकास की राह पर सभी को साथ लेकर चलने का लक्ष्य है। तीन दिन चली इस व्याख्यान शृंखला में दुनिया भर से आए मेहमानों और देश के अलग-अलग तबकों की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया। 100 वर्ष पूरे होने पर संघ कई विशेष कार्यक्रम चला रहा है जिसमें यह व्याख्यान शृंखला भी शामिल है।

फायर गन से फूँक दिया कुरान, कहा- अमेरिका से खत्म कर दूँगी इस्लाम: कौन है ट्रंप की पार्टी की महिला नेता वेलेंटीना गोमेज, LGBT+ से लेकर अश्वेतों के खिलाफ भी मुखर

अमेरिका में टेक्सास की 31वीं संसदीय सीट से चुनाव लड़ रही रिपब्लिकन उम्मीदवार वेलेंटीना गोमेज (Valentina Gomez) एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वह फ्लेमथ्रोवर गन से कुरान जलाती हुई दिख रही हैं। हालाँकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे बैन कर दिया गया है, लेकिन ट्विटर पर ये वीडियो अभी भी वायरल है।

कौन हैं वेलेंटीना गोमेज

रिपब्लिकन उम्मीदवार गोमेज राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) कैम्पेन की समर्थक हैं। उनका आरोप है कि मुस्लिम हमेशा ईसाई देशों में हिंसा फैलाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सब लोग उनके मिशन में उनका साथ दें।

वेलेंटीना गोमेज का जन्म 8 मई 1999 को कोलंबिया के मेडेलिन शहर में हुआ था। 2009 में वह परिवार के साथ अमेरिका आ कर बस गईं। पढ़ाई-लिखाई के बाद रियल एस्टेट और फाइनेंस सेक्टर में हाथ आजमाया। वह नेस्ले से भी जुड़ी रही हैं।

राजनीति में आते ही गोमेज का करियर विवादों से घिर गया। सार्वजनिक तौर पर मुसलमानों, LGBT+ कम्युनिटी, अश्वेतों और इमिग्रेंट्स के खिलाफ उन्होंने विवादित बयान दिए।

अमेरिका से इस्लाम खत्म करना चाहती हैं गोमेज

नए वीडियो में गोमेज कहती हैं कि उनका उद्देश्य ‘टेक्सास से इस्लाम को खत्म करना है।’ इसके बाद उन्होंने गालियाँ दीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के मुस्लिम दुनिया के 57 मुस्लिम देशों में से किसी में भी जा सकते हैं।

गोमेज के मुताबिक, “अगर हम इस्लाम को हमेशा के लिए खत्म नहीं कर देते, तो आपकी बेटियों का बलात्कार होगा और आपके बेटों का सिर कलम कर दिया जाएगा।” फिर वह कैमरे पर कुरान जलाती हैं और कहती हैं, “अमेरिका एक ईसाई राष्ट्र है, इसलिए वे आतंकवादी मुसलमान 57 मुस्लिम देशों में से किसी में भी जा सकते हैं।”

वीडियो के अंत में गोमेज कहती हैं कि ईसा मसीह के बताए रास्ते पर वह चलती हैं। गोमेज ने एक और पोस्ट शेयर किया है, जिसमें वह कहती हैं, “मैं अपनी बातों पर कायम हूँ और मैं उस किताब के आगे कभी घुटने नहीं टेकूँगी, जो 7 अक्टूबर के नरसंहार के लिए जिम्मेदार है। उस दिन एबी गेट पर 13 अमेरिकी सैनिकों की हत्या कर दी गई थी।”

यह पहली बार नहीं है जब गोमेज ने मुस्लिमों के खिलाफ खुल कर बोला हो। मई 2025 में, उन्होंने टेक्सास में एक मुस्लिम सहभागिता कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की थी। माइक्रोफोन छीन कर जबरदस्ती अपनी बात की। उन्होंने कहा था कि टेक्सास में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है। कॉन्ग्रेस उनकी मदद करे, ताकि अमेरिका के इस्लामीकरण को रोक जा सके। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ गॉड से डरती हैं।

आज हुए लोकसभा चुनाव तो NDA को मिलेंगी 324 सीटें, मोदी सरकार के कामकाज से 58% लोग संतुष्ट: INDI गठबंधन की घटेंगी सीटें, LoP के तौर पर भी राहुल गाँधी फेल

2024 के लोकसभा चुनावों के साल भर बाद BJP के नेतृत्व वाली NDA की लोकप्रियता बढ़ी है। नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज से लोग संतुष्ट हैं। यदि आज चुनाव हुए तो एनडीए लोकसभा की 324 सीटें जीत सकती है। अकेले बीजेपी की सीटें भी 2024 के 240 से बढ़कर 260 होने का अनुमान है। वहीं, विपक्ष के तौर पर राहुल गाँधी की भूमिका लोगों को प्रभावित नहीं कर रही है और INDI गठबंधन की सीटें 2024 के 234 से घटकर 208 हो सकती है।

जनता का यह मिजाज इंडिया टुडे और सी-वोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे से सामने आया है। इस सर्वे के आँकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं, जब INDI गठबंधन ‘वोट चोरी’ का प्रोपेगेंडा रचकर जनादेश को खारिज करने की कोशिश में जुटा है।

प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी आज भी देश के लोगों की पहली पसंद हैं। 52 प्रतिशत लोगों का मानना है कि पीएम के तौर पर वे सबसे बेहतर हैं। वहीं, 25% लोग ही राहुल गाँधी को पीएम के तौर पर देखना चाहते हैं। एनडीए में नरेंद्र मोदी के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए 28% लोगों की पसंद अमित शाह, 26% लोगों की पसंद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और 7% लोगों की पसंद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हैं।

सर्वे के दौरान लोगों से प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल किया गया। 34 प्रतिशत लोगों ने उनके कार्यकाल को ‘बहुत अच्छा’ और 24 प्रतिशत लोगों ने ‘अच्छा’ बताया। यानी 58 प्रतिशत लोग उनके काम से संतुष्ट हैं। वहीं विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गाँधी के प्रदर्शन को 15% लोगों ने ‘खराब’ और 12% लोगों ने ‘बहुत खराब’ बताया है।

17 प्रतिशत लोग अयोध्या में राम मंदिर और वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण को एनडीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। 12 प्रतिशत लोगों ने ऑपरेशन सिंदूर, 10 प्रतिशत लोगों ने बुनियादी ढाँचे के विकास, 9 प्रतिशत लोगों ने अनुच्छेद 370 के खात्मे, 7 प्रतिशत लोगों ने लोक कल्याणकारी योजनाओं और 6 प्रतिशत लोगों ने भ्रष्टाचार मुक्त सरकार को बड़ी उपलब्धि बताया है।

यह सर्वे 1 जुलाई 2025 से 14 अगस्त 2025 के बीच किया गया। 2 लाख 6 हजार 826 लोगों से रायशुमारी की गई। इसमें हर जाति, धर्म, मजहब के लोग शामिल हैं। आज तक की रिपोर्ट में इन आँकड़ों में मोटे तौर पर 3 प्रतिशत का मार्जिन एरर होने की बात कही गई है।

इन आँकडों से यह स्पष्ट है कि 11 साल से लगातार सत्ता में बने रहने के बावजूद देश के आमलोगों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख बरकरार है। लोग उनके सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं। साथ ही विपक्षी प्रोपेगेंडा के झाँसे में लोग नहीं आ रहे हैं।