Home Blog Page 6186

सुनो पप्पू बाबू, संसद तुम्हारे बाप, दादी या परनाना की नहीं

रहुलबा के पैंट में अलकतरा की तरह राफ़ेल चिपक गया है और वो चाहे किरासन तेल डाल ले, पेट्रोल डाल ले, लेकिन वो छुटाए नहीं छूटता। जब देह में घोटालों का अलकतरा बाप से लेकर परनाना तक ने डीएनए के स्तर तक घुसा दिया हो तो ‘रोम-रोम’ से भ्रष्टाचार करनेवाले आदमी को फ़्रान्स-फ़्रान्स तक घोटाला ही दिखता है। ख़बर यह है कि हमारे अपने पपुआ ‘ठाकुर’ ने संसद में राफ़ेल सौदे पर चर्चा के दौरान अपने चिरकुट सांसदों की फ़ौज से लोकसभा के अंदर काग़ज़ों के जहाज उड़वाए। 

जिस आदमी का काग़ज़ से इतना ही नाता हो कि कभी वो अपनी मम्मा के मनोनीत प्रधानमंत्री के कैबिनेट को डिसीजन के प्रिंट आउट को फाड़ चुका हो, या फिर उसके हवाई जहाज बनाए हों, (या फिर जीभ लगाकर रोल किया हो) उससे राफ़ेल के दामों के गणित पर क्या सवाल करना! जेटली बाबू भी ये सब बेकार की बातों में उलझ जाते हैं कि रहुलबा को बेसिक एरिथमेटिक नहीं आता! ऐ भैबा! उसको तो एरिथमेटिक होता क्या है वो भी नहीं पता होगा। 

इसीलिए तो रहुलबा बहुत गुस्सा हो गया! संसद में गुस्सा हो गया कि ये सुमित्रा महाजन उसको बताएगी कि उसको क्या बोलना चाहिए, क्या नहीं? मतलब नेहरू के परनाती, इंदिरा के पोते और राजीव के बेटे को आजकल की स्पीकर बनी महिला बताएगी कि उसको संसद के भीतर कैसा व्यावहारिक करना चाहिए? जिसकी माँ चाभी से चलने वाले रोबोट को प्रधानमंत्री बना चुकी हो, उसे स्पीकर हेडफ़ोन लगाकर आदेश सुनने कहेगी? जिसके परनाना ने संसद बनाया हो, रात के बारह बजे उठकर डेस्टिनी के साथ इंडिया का ट्रिस्ट कराया हो, उस आदमी को संसद में कैसे और क्या बोलना है, वो बात दस साल सत्ता में रही पार्टी की सांसद बताएगी?

इसी को रहुलबा घोर कलजुग कहता है काहे कि डिम्पल वाले हंस को दाना-पानी चुगने कह दिया और ये कौआ सब मोती खा रिया है! जिसका बचपन इसी संसद में बोफ़ोर्स के मॉडल की चटनी चाटते बीता है, उस चिरयुवा व्यक्ति को बताया जाएगा कि संसद में पेपर प्लेन उड़ाना ग़लत है! वो काहे नहीं उड़ाएगा प्लेन? बचपन से उड़ाया है, अब तो जवान हुए हैं, संसद में परिवार है, घर का मामला है, तो पेपर मोड़ कर प्लेन नहीं बना सकते? “आपको मज़ा नहीं आया? अच्छा, मज़ा आया? तो आप भी उड़ा लीजिए प्लेन! ऐसे मोड़कर बना लीजिए न प्लेन! मैं वही मज़ा आपको देना चाहता हूँ जो एक बार महिलाओं को देना चाह रहा था।”

जिस परिवार के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का जज कौन बनेगा ये तय होता था, उस परिवार का छोना बाबू सुप्रीम कोर्ट के अवलोकन को सही मानेगा? रहुलबा का माइंड इज़ इक्वल टू ब्लोन हो गया जब गोगोई ने बंद लिफ़ाफ़े में राफ़ेल के दस्तावेज मँगाए और कह दिया कि सब सही है। हैं! सब सही कैसे है, रहुलबा कह रहा है कि गलत है, तो गलत है।  

महीनों की मेहनत, फ़्रान्स के अनाम पोर्टल को बहलाकर, ओलांद से कहवाकर, इतना इलेबोरेट झूठ बुना था चाटुकारों ने, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गुड़गोबर कर दिया। इस मामले में एक्के बात बुझाता है और वो ये है कि कॉन्ग्रेस को घोटाले करने का अनुभव तो है, लेकिन जब न किया हो तो मैनुफै़क्चर करने का बिलकुल नहीं। पहले कभी ज़रूरत नहीं हुई, और प्रैक्टिस करने से बेहतर घोटाला ही कर लेना इनकी हर सरकार का हॉलमार्क रहा है, तो ठीक से ताना-बाना बुन नहीं पाए। 

बात भी सही है कि जब पूरा ध्यान घोटाला करने और उससे बाल-बाल बच जाने पर हो, और मगज में ये गर्मी कि हम कभी सत्ता से बाहर नहीं होंगे, उसको चौवालीस कर देना, ठीक बात थोड़े ही है। अब ऐसी स्थिति में नया स्किलसेट डेवलप करना पड़ा रहा है। मोदी डिजिटल इंडिया ले आया और अम्बानी जियो, उसका अलग ही टंटा है। हर आदमी को थोड़ा सर्च करने पर काम का मैटेरियल मिलिए जाता है। 

पपुआ के बर्तन वाले जीजू से लेकर बोफ़ोर्स वाले अब्बू, इमरजेन्सी वाली दादी और जीप वाले नाना तक ने ऐसे कांड किए हैं कि पार्टी कार्यकर्ता तक मुख्यालयों की हवा सूँघकर ही करप्ट हो जाता है। ऐसे में दिन-रात वहीं बिताने वाली लीडरशिप जन्मजात अनुभव के साथ आती है, और घोटाले तो बस नैसर्गिक रूप से हो जाते हैं। 

जब ये कहते हैं कि इन्होंने व्हीलचेयर से लेकर कोयला, स्पैक्ट्रम, कॉमनवेल्थ और अगस्ता वैस्टलैंड के हेलिकॉप्टर तक घोटाला नहीं किया, तो आप मानिए कि वो बिलकुल सही कह रहे हैं। क्योंकि इनकी ख़ून में घोटाले के इतने तत्व घुल चुके हैं कि इन्हें ‘करना’ नहीं पड़ता, वो बस ‘हो’ जाते हैं। यही कारण है कि ये लोग अपने घोटाले को, अगस्ता वाले हेलिकॉप्टर और ‘HAL को कॉन्ट्रैक्ट क्यों नहीं दिया’ को आसानी से भूल जाते हैं क्योंकि इन्होंने कभी सोचा ही नहीं कि ये जो कर रहे हैं, वो घोटाला है। 

मतलब देखिए आप, अपने आस-पास कॉन्ग्रेसी सरकारों की लाई गई परम्परा को निहारिए तो पाएँगे कि चपरासी को सौ रुपए देकर ‘आवासीय प्रमाण पत्र’ बनवाने से लेकर, पासपोर्ट के लिए तिमारपुर के पुलिसवाले को 1000 रूपए देने तक, आप झिझकते भी नहीं, क्योंकि आईआईटी ही नहीं भ्रष्टाचार के घूमते-फिरते संस्थान भी तो इनके परनाना ने ही दिए हैं, जो कि आपको कभी भी आउट ऑफ़ प्लेस नहीं लगेंगे। आप अपने दोस्तों को कहेंगे, तो वो उल्टे आपको कह देंगे कि ‘इतना तो चलता है’। ये एटीट्यूड बाय डिफ़ॉल्ट भारतीय जनता में भर देना, कम्प्यूटर लाने से कम थोड़े ही है! 

कम्प्यूटर इनके बाप ने दिया, आईआईटी इनके परनाना, और ‘इमरजेन्सी’ में ‘पावर’ ले गई इनकी दादी, तो  चपरासियों की ऊपरी कमाई के इस नायाब स्टार्टअप का ज़िम्मा भी तो उन्हें ही लेना होगा ना? अब ऐसे में घोटाला न कर पाने का ‘विथड्राअल सिम्पटम’ तो दिखेगा ही कॉन्ग्रेसियों में। ‘यार चार साल हो गए यार! घोटाला नहीं किया यार…’ की फ़ीलिंग कितनी मजबूर कर देती है इन्सान को, इसका उदाहरण कॉन्ग्रेस और राफ़ेल को लेकर उनके प्रेम से दिखता है। 

चोर वाली प्रवृत्ति हो, और ऐसे माहौल में पले-बढ़ें हों जहाँ आपके शरीर के हर मॉलीक्यूल घोटालों की कोवेलेंट बॉन्डिंग से बने हुए हों, तो फिर लगता है कि सबको चोर बताकर अपने आप को नॉर्मल बता पाना ज़्यादा सही रहेगा। इसीलिए पपुआ कभी भी अपने पप्पा या पार्टी के पापों का ज़िक्र नहीं करता क्योंकि उसको लगता होगा कि घोटाला तो नॉर्मल-सी बात है, जो नहीं करते वो एब्नॉर्मल हैं। 

इसी चक्कर में उसको विश्वास ही नहीं हो रहा है कि रक्षा क्षेत्र में सौदा हो गया और घोटाला हुआ ही न हो। बात सही या गलत की है ही नहीं, बात है कि किसी का विश्वास सरकारों के घोटाला करने की प्रवृत्ति में इतना प्रगाढ़ हो तो उसके लिए भ्रष्टाचार से दूर रहने वाली सरकार के अस्तित्व में होने की संभावना पर खुद को समझा पाना अत्यंत कठिन हो जाता है। वो तो यही कहेगा, “अबे चल! सरकार घोटाला नहीं करेगी… मतलब कुछ भी बोलेगा!” 

इसीलिए, डिम्पल पड़नेवाले क्यूट आदमी का शातिर होना मुझे तो बिलकुल सही अवधारणा नहीं लगती। इतना क्यूट आदमी, जो पार्टी का अध्यक्ष होकर संसद में काग़ज़ के हवाई जहाज उड़वा देता हो, मैडम को सर बोल देता है, चार सवाल के बारे में ट्वीट करता हो और तीसरा लिखना ही भूल जाता हो, वो रहुलबा, हमारा पपुआ, भले ही कॉन्ग्रेस में जन्मा, लेकिन सोच-समझकर विरोधियों पर हमला करेगा, ये गलत बात है। 

मोदी सरकार की वो 6 योजनाएँ, जिन्होंने 2014 से ही बदलनी शुरू कर दी थी देश की तस्वीर

तमाम मुश्किलों के बाद भी यदि भाजपा का शुरुआती समय याद किया जाए, तो मालूम पड़ेगा कि देश की सत्ता संभालने के साथ ही मोदी जी ने ऐसी योजनाओं को शुरू किया, जिसने समाज के उस तबके को आगे बढ़ाया है, जो सालों से पिछड़ा था। जिनकी वजह से लोगों के उज्ज्वल भविष्य की न केवल कामना की गई, बल्कि उन्हें समाज में आगे बढ़ने का पूरा मौका दिया गया। ऐसे में भी कुछ नकारात्मक शक्तियों के लगातार वार करने के बाद भी विकास गति धीमी नहीं हुई।

विपक्ष में बैठे लोगों का कहना है कि मोदी जी देश मे बुलेट ट्रेन को लाने का सपना देख रहे हैं, जबकि ग़रीब तबके की स्थिति बिगड़ती जा रही है। ऐसे में लोगों को उन योजनाओं के बारे में जानना ज़रूरी है, जो कि आम लोगों की ज़िंदगी पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से असर करती हैं और जिन पर प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता सँभालते ही काम करना शुरु कर दिया था।

सरकार तरह- तरह की योजनाओं के ज़रिये देश के आख़िरी आदमी को रोजगार दिलाने के लिए मशक्कत कर रही है, जिसमें ‘स्टार्टअप इंडिया’ से लेकर ‘स्किल इंडिया’ और ‘मुद्रा योजना’ जैसी योजनाएँ प्रमुख हैं। साथ ही, सरकार न सिर्फ रोज़गारदाता बनना चाहती है, बल्कि उसका एक लक्ष्य देश के युवाओं की क्षमता को विस्तार देते हुए उन्हें भी हर संभव मदद दे रही है जिससे वो समाज में कई लोगों को रोज़गार दे सकें।

जहाँ, मोदी सरकार आम आदमी की ज़िंदगी को बेहतर बनाने के उपाय करती नज़र आती है, वहीं 2014 में चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने बेहतर विपक्ष के रूप में सरकार की मदद की बजाय भाजपा के हर कार्य पर प्रश्न चिन्ह लगाने का काम किया है। फिर चाहे वो 2016 में की गई नोटबंदी हो या फिर दुश्मनों के खिलाफ उठाया गया सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में सबसे कड़ा कदम, विरोधी खेमा हर बात में अपने विचारों और सवालों का स्तर गिराता ही जा रहा है।

आज हम आपको भाजपा के उन शुरुआती योजनाओं के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनकी वजह से भाजपा ने आम आदमी के कल्याण का सपना पहले साल से ही देखा है। इसमें भारत का विकास सर्वोपरि है। लेकिन कांग्रेस ने जनता को भाजपा के प्रति ऐसे बरगलाया है, कि देश की जनता अब इन बातों में आने लगी है कि भाजपा द्वारा किए गए देश के या देश के नागरिकों के लिए कार्य उनके हित में नही हैं। इसलिए जानना ज़रूरी है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद उसने किस प्रकार जनता के भविष्य को उज्ज्वल करने के लिए लाभकारी कदम उठाए हैं। आइये जानते हैं उन शुरुआती योजनाओं के बारे में जिनके तमाम फ़ायदे यदि आम आदमी की समझ में आ जाएँ, तो भाजपा के लिए 2019 में दोबारा बहुमत से पाना आसान ही होगा।

विपक्ष की कुर्सी पर बैठे कांग्रेस ने विपक्ष की भूमिका अदा करने से ज्यादा भाजपा से अपनी दुश्मनी का समय-समय पर प्रमाण दिया है। क्योंकि, जहां तक राजनैतिक मूल्यों की बात है, उसमें विपक्ष की भूमिका सत्ता में बैठे लोगों को सही दिशा में लाना होता है। सत्ताधारियों को उनकी ज़ुबाँ से किए गए वादे याद दिलाने का होता है, जिन्हें अक्सर राजनेता कुर्सी पाने के बाद भूलते दिखाई पड़ते हैं। लेकिन बेवजह ही लगातार हर मुद्दे पर भाजपा पर ऊँगली उठाना, मोदी सरकार को कटघरे में लेना, साफ़ बताता है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव जीतने के लिए जनता तक पहुँचने की बजाय भाजपा को नीचा दिखाने का एजेंडा बना कर चल रही है।

डिजिटल इंडिया

आधार कार्ड के माध्यम से भारत सरकार ने देश के 121.9 करोड़ निवासियों को डिजिटल पहचान दिलाई है। जिसमें 30 नवम्बर 2018 तक के आंकड़ों में 99% वयस्क शामिल हैं। ‘डिजिटल इंडिया’ के बढ़ते हुए प्रभावों से देश की अर्थव्यवथा में भी बड़ा बदलाव आया है। आधार कार्ड से पैसों का लेन-देन भी डिजिटल तरीकों से किया जाने लगा है। ये सरकार की उपलब्धि है कि भीम एप और आधार कार्ड को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है।

बीते 4 सालों में डिजिटल रास्ता अपनाकर लोगों ने इन आँकड़ों को काफी उछाला है। एक तरफ 2014-15 में जहाँ मात्र ₹316 करोड़ के ट्रान्जेक्शन हुए थे, वहीं 2017-2018 में यह आँकड़ा ₹2,071 करोड़ तक पहुँच गया। यहीं ध्यान देने योग्य बात यह है कि आज के समय में ‘डिजिटल इंडिया’ के लिए भारत सरकार द्वारा बनाए गए ‘भीम एप्लीकेशन’ के ज़रिए सबसे ज्यादा डिजिटल ट्रान्जेक्शन होता है।

इसके अलावा ‘डिजिटल इंडिया’ की दिशा में ‘डिजी लॉकर’ नाम की एप भी लॉन्च की गई। इसमें आप अपने आधार नंबर से ही सभी ज़रूरी काग़ज़ात निकाल सकते हैं, चाहे वो दसवीं की मार्कशीट ही क्यों न हो। जिन काग़ज़ात के खो जाने पर हमें संस्थानों के चक्कर लगाने पड़ते थे, आज वो सब इंटरनेट के ज़रिये मात्र आधार नंबर से पाए जा सकते हैं।

अटल पेंशन योजना

2015 में शुरू हुई यह योजना प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए काफी लाभकारी है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्रों में कार्य करने वालों और मजदूरों के लिए 60 की उम्र के बाद एक नियमित पेंशन प्रदान करना है, ताकि वह मात्र 42 रुपये निवेश करने के साथ खुद को और अपने बुढ़ापे को सुरक्षित कर सके। अब तक ‘अटल पेंशन योजना’ के लाभार्थियों की संख्या 1.24 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। साल 2018-19 में इनकी संख्या में लगभग 27 लाख से ज़्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है।

जन-धन योजना

28 अगस्त 2014 से इस योजना की शुरुआत हुई थी। एक दिन में ही लोगों ने इस योजना के तहत लगभग डेढ़ करोड़ खाते खोले। इन सभी लोगों को 1 लाख रुपये दुर्घटना का बीमा कवर दिया गया। 2016 में तक ये आंकड़े 3.02 करोड़ तक पहुँच गए थे। मार्च 2018 के रिकॉर्डों के अनुसार इस योजना के तहत खोले गए खातों की संख्या 31.20 करोड़ हो गई है। जिनमें 75 लाख से अधिक की धन राशि भी जमा है। लोगों द्वारा इस योजना का बढ़-चढ़ कर फायदा उठाया जा रहा है। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ प्रधानमंत्री द्वारा ‘डायरेक्ट बेनिफ़िट ट्रॉन्सफ़र’ योजना द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का सीधा लाभार्थी के बैंक अकाउंट में पहुँचना था। पहले ग़रीबों, वंचितों आदि के पास बैंक अकाउंट न होने के कारण भ्रष्टाचार करनेवाले उनके हक़ के पैसे खा जाते थे, और उचित लोगों तक उनके हिस्से का पैसा नहीं पहुँच पाता था।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना

जिस देश में युवाओं के रोजगार को लेकर आए दिन संशय की स्थिति जताई जाती है, वहीं ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना’ का यही उद्देश्य है कि गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ी जाए। देश के युवाओं को इस काबिल बनाया जाए कि वो बढ़ते दौर में रोज़गार के लिए न सिर्फ़ खुद को सक्षम बना पाएँ बल्कि अपने स्टार्टअप के ज़रिये दूसरों को भी अवसर दे सकें। ‘स्किल इंडिया’ जैसी योजना के द्वारा युवाओं को कई संस्थानों में प्रशिक्षण भी दिया गया।

12 दिसंबर 2018 के आँकड़ों के अनुसार 33,43,335 अभ्यर्थियों को या तो प्रशिक्षण दिया जा चुका है या दिया जा रहा है। इनमें में से कुछ को कम अवधि वाला प्रक्षिक्षण दिया जा रहा है तो कुछ को विशेष परियोजनाओं के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। साल 2018 में इस योजना के तहत 10 लाख से ज्यादा लोगों को प्लेसमेंट के ज़रिए रोज़गार मिला जिसमें एक बेहतर बात देखने को मिली कि महिलाओं ने पुरुषों को लगभग एक लाख की संख्या से पछाड़ दिया है। साथ ही, अन्य प्रशिक्षुओं के लिए रोज़गार के कई क्षेत्र खुलते दिखाई दिए।

मेक इन इंडिया

‘मेक इन इंडिया’ एक ऐसी सोच का नतीजा है, जिसमें भाजपा ने भारत के सशक्त होने का सपना देखा था। जिसके ज़रिए मोदी सरकार ने एक ऐसे देश की कल्पना की थी जहाँ पर विदेशी और देशी सभी कंपनियाँ भारत में ही वस्तुओं का निर्माण करें। ‘मेक इन इंडिया’ में 4 चीजों पर ज़ोर दिया गया था: नई कार्यविधि, नए बुनियादी ढाँचे, नए क्षेत्र और नई सोच। ‘डिजिटल इंडिया’ के बाद ‘मेक इन इंडिया’ एक ऐसा प्रयोग था जिसने लोगों को अपनी क्षमताओं को विस्तार करने का मौका दिया।

आज हर दिन तिगुनी रफ्तार से लोग अपने बिज़नेस को ऑनलाइन शिफ्ट कर रहे है। घर बैठे अपने हुनर को व्यवसाय का रूप देते लोग ही ‘मेक इन इंडिया’ के उद्देश्य को कामयाब बना रहे हैं। सैमसंग जैसी प्रतिष्ठित मोबाइल कंपनी जो अभी तक केवल विदेशों में अपने मोबाइल सेट का निर्माण करती थी, उसने पहली बार इसी बीच भारत मे अपने मोबाइल बनाने शुरू किए। ये भारत जैसे देश के लिए बहुत बड़ी बात है। जिसे लोग मामूली-सी चीज समझ कर नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के ज़रिये भाजपा ने देश के लिए एक ऐसा सपना देखा, जहाँ हर घर की रसोई में चूल्हे के धुएँ की जगह एलपीजी सिलिंडर पहुँचाए गए। उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले से इस योजना की शुरुआत की गई थी, जिसमें 5 करोड़ महिलाओं की रसोई में मुफ्त गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। पर, हाल ही के आंकड़ों पर यदि पर गौर करें तो इस योजना ने 6 करोड़ का आँकड़ा छू लिया है।

एलपीजी की शुरुआत के बाद से 50 वर्षों में केवल 13 करोड़ कनेक्शन लोगों को उपलब्ध कराए गए थे, जबकि पिछले 54 महीनों में सरकार ने लगभाग इतने ही कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं। आज लगभग 80 प्रतिशत लाभार्थी अपने एलपीजी सिलेंडरों की रीफ़िलिंग करवा रहे हैं।

तो, ये थी वो योजनाएँ जिन्हें कुर्सी को सँभालने के साथ ही मोदी सरकार ने कार्यान्वित किया था और जिनका लाभ करोड़ों लोगों ने उठाया है। 2014 से लेकर 2018 के बीच में आज भी कई योजनाएं शुरू की जा रही हैं। जिनका उद्देश्य, बिना जाति-धर्म आदि देखे, हर व्यक्ति का कल्याण है। लेकिन आज भ्रम की स्थिति में फँसकर लोग इन बातों को भी भूल गए हैं कि देश के व्यवस्थित तबके को सुव्यवस्थित करने के साथ ही मोदी सरकार ने बिगड़ी चीजों को भी सुधारा है।

आज हमें समझने की जरूरत है कि विकास की राह इतनी आसान नहीं होती जितनी अपेक्षा की जाती है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लिए गए छोटे-बड़े फ़ैसले देश के हित में कार्य कर रहे हैं, जिन्हें समझने के लिए सकारात्मक नज़रिये की ज़रूरत है। 60 साल तक देश को सँभालने वाली कांग्रेस सरकार को ये बात अच्छे से समझनी चाहिए कि यदि उनका लक्ष्य देश का विकास है तो फिर उन्हें हर बात में कमी निकालने की जगह समस्याओं के समाधान के लिए विस्तार से बात करके उन पर सुझाव देना चाहिए। जो लोग भाजपा की कोशिशों को समझते हैं उन्हें बेहतर भारत की तस्वीर भी दिखती ही होगी।

मध्यम वर्ग के लिए मोदी सरकार बनाम कांग्रेस का रिपोर्ट कार्ड आप यहाँ विस्तार से पढ़ सकते हैं।

चर्च की चारदीवारियों के बीच पादरियों के कुकर्मों की पोल खोलती एक डरावनी दास्तान

भारतीय चर्चों में नन्स के साथ हो रहे दुर्व्यवहार ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा है। ऐसी अगनित ख़बरें आती रही है जिनसे चर्च की चहारदीवारीयों के बीच ननों के साथ बलात्कार, दुर्व्यवहार और छेड़छाड़ की घटनायों का पता चलता है और इन घृणित कार्यों के पीछे अक्सर पादरियों का हाँथ होता है। मीडिया द्वारा इन ख़बरों को तवज्जो नहीं दी जाती या फिर ये मुख्यधारा की ख़बरें नहीं बन पाती। भारत में मामला चर्च और मस्जिदों का आता है तो फिर मुद्दा संवेदनशील हो जाता और फिर इस पर कुछ बोलने से पुलिस अधिकारी से लेकर बड़े-बड़े राजनेता तक बचते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी एपी न्यूज़ ने एक लेख प्रकाशित किया है जिसमे ऐसे कई चौंकाने वाले खुलासे किये गए हैं। ननों की दर्दनाक दास्तान सुनाती इन रिपोर्ट में पादरियों की करतूतों की पोल खोली गई है। ये एक दिल दहला देने वाली घटनाओं को ननों के हवाले से सुनाती है ताकि आम जन भी चर्च की बंद दीवारों के पीछे क्या चल रहा है इस बारे में जाने। आइये आगे जानते हैं कि टिम सुल्लिवन द्वारा लिखे गए इस रिपोर्ट में क्या खुलासे हुए हैं। एसोसिएट प्रेस ने पिछले साल ही ये बात बताई थी कि एशिया, अमेरिका और यूरोप के चर्चों में नन्स के साथ हो रहे दुर्व्यवहार से वेटिकन भलीभांति वाकिफ था और उसने इस बारे में कोई एक्शन नहीं लिया।

“वो शराब के नशे में था” एक नन ने कहा वहीं दूसरे ने बताया “ऐसे समय पर पता नहीं चलता कि कैसे मना किया जाये”। यहाँ अपनी डरावनी आपबीती सुनाती ये नन्स बता रही है कि कैसे उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और चर्च प्रशासन ने उन्हें बचाने और आरोपियों को सजा दिलाने के लिए कुछ भी नहीं किया। एपी न्यूज़ कि वेबसाइट के मुताबिक़ जब उन्होंने भारत में ननों से इस बारे में बात करनी चाही तो वो इतनी डरी हुई थी कि अधिकतर ने कुछ भी बताने इ इनकार कर दिया। काफी मशक्कत के बाद कुछ ने बताया भी तो अपने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर।

अभी कुछ महीनों पहले ही एक 44 साल की नन ने एक पादरी पर पिछले 3 साल में उसके साथ 13 बार बलात्कार करने का आरोप लगा कर खलबली मचा दी थी और अदालत में इस मामले की सुनवाई भी हुई थी। सिस्टर जोसेफिन ने एपी को बताया कि कुछ लोग उन्हें कहते हैं कि वो चर्च के विरुद्ध काम रही है और शैतान की पूजा कर रही है। उन्होंने बताया कि इन सबसे बावजूद उन्हें सच्चाई के लिए खड़े होने की जरूरत है। 23 सालों से नन रही जोसेफिन दर्द भरे आवाज में बताती है कि वो सभी सिस्टर्स मर जाना चाहती है।

कुछ घटनाएँ तो दसीयों साल पुरानी है। एक नन जो कि 1990 के दशक में किशोरावस्था में थी और एक कैथोलिक चर्च में पढ़ा रही थी, ने बताया कि वो लोग नयी दिल्ली रिट्रीट सेंटर में कुछ अन्य सिस्टर्स के साथ गयी थी और उनका नेतृत्व करने के लिए एक पादरी को लाया गया। नाम नहीं बताने की शर्त पर उन्होंने बताया कि 60 साल के उस पादरी ने रात के साढ़े नौ बजे उनका दरवाजा खटखटाया और उनसे मिलने की इक्षा व्यक्त की। अपने से चालीस साल छोटी लड़की पर बुरी नजर डाल रहे उस पादरी की नजर में खोट उन्हें साफ़-साफ़ नजर आ रहा था और अव्वल तो ये कि उसने पी भी रखी थी।

“आप अभी सही अवस्था में नहीं हैं और इसीलिए मै आपसे नहीं मिलना चाहती”- नन ने उस पादरी से कहा लेकिन वो जिद करता रहा कि वो उनसे आध्यात्मिक चर्चा करना चाहता है। मना करने पर वह पागल हो गया और उसने नन को जकड लिया और बलपूर्वक दरवाजा खोल कर उनके शरीर पर जहां-तहां छूने लगा और फिर जबरदस्ती किस करने की कोशिश की। घबराई हुई नन ने उसे जोर से धकेला और दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया। आज भी इस घटना को याद कर वो सिहर उठती है। वो बताती है कि उन्होंने चर्च प्रशासन को गुप्त रूप से एक चिट्ठी भी लिखी लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। साथ ही उन्होंने बताया कि उस समय वो डर के मारे उस विकृत पादरी के खिलाफ आवाज उठाने की सोंच भी नहीं सकती थी।

कैथोलिक इतिहास में महिलाओं के साथ क्रूरता का पुराना गवाह रहा है। संत लूसी का वक्षस्थल सिर्फ इसीलिए चीर दिया गया था क्योंकि उन्होंने शादी करने से मना कर दिया था, संत लूसी को उनकी वर्जिनिटी साबित करने के लिए जिन्दा दफ़न कर दिया गया था और उनका गला रेत दिया गया था। संत मरिया गोरेटी को 11 वर्ष की उम्र में ही बलात्कार के प्रयास के बाद हत्या कर दी गई थी।

केरल में हालत और भी बुरी है। वहाँ कि नन्स अपने साथ हुए दुर्व्यवहार की घटनाओं को अपने दिल में दबाये रखती है और सार्वजनिक तौर पर न तो कुछ बोल पाती है और ना ही इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का साहस कर पाती है। केरल की एक नन ने बताया कि रविवार के दिन वहां कई चर्चों में आवारा लड़के जमा हो जाते हैं ताकि वो अन्दर जाती हुई लडकियों को घूर सके। वो बताती हैं कि जब वो किशोर अवस्था में थी तभी गोवा से आये एक साठ वर्षीय पादरी ने उन्हें जोड़ से जकड लिया था और फिर उनके साथ जबरदस्ती की थी। इस से पहले कि वो कुछ समझ पाती, वो पादरी उन्हें इधर-उधर किस करने लगा। उन्होंने बताया कि वो एक प्रभावशाली पादरी था जिस वजह से वो डर के मारे चिल्ला भी नहीं सकती थी।

चर्च के पादरी के खिलाफ आवाज उठाने का मतलब हुआ कि आप चर्च व्यवस्था में अपने से सीनियर के ऊपर आरोप लगा रही हैं और आपको अलग-थलग होना पड़ता है। चर्च और उनके पादरी इतने शक्तिशाली और प्रभावशाली होते हैं कि कोई भी उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों का समर्थन करने से डरता है।

केरल के कैथोलिक पादरी फ्रांसो मुलक्कल का ही उदहारण लीजिये। केरल के एक गाँव से निकल कर उत्तर भारत में बिशप बने मुल्क्कल पर एक नन ने बलात्कार का आरोप लगाया था। तीन सप्ताह जेल में रह कर छूटे मुल्क्कल का स्वागत एक हीरो की तरह किया गया था और केरल में कई लोग ऐसे हैं जो उसे एक हीरो की तरह ही मानते हैं। केरल में इसाई मिशनरियों का दबदबा कुछ ऐसा है कि लोग अपने व्यापार और कम्पनी का नाम भी कुछ इस तरह रखते हैं- संत मेरी फर्नीचर, मरिया इलेक्ट्रॉनिक्स इत्यादि। आलम कुछ यूँ रहा कि पीड़ित नन से मिलने मुट्ठी भर लोग ही पहुंचे और उनके समर्थन में तो न के बराबर ही लोगों ने आवाज उठाई लेकिन उस आरोपित पादरी के समर्थन में तो नेता-विधायक तक ने बयान दिया। ये इस बात को जाहिर करता है कि चर्च और पादरियों की पैठ कितनी गहरी है।

पीड़ित सिस्टर एक आर्मी के पूर्व जवान की बेटी है। जब वो उच्च विद्यालय में थी तभी उनके पिता की मृत्यु हो गयी थी। उस नन ने बाते कि इतने शक्तिशाली आदमी के खिलाफ वो शिकायत करने जाए भी तो कहाँ जाये। वो बताती है कि उन्होंने कई अन्य ननों और चर्च प्रशासन से भी इस मामले की शिकायत की लेकिन सब व्यर्थ।

एपी न्यूज़ द्वारा इस विस्तृत रिपोर्ट में जो बातें बताई गयी है वो चर्चों में चल रहे पादरियों के कुकर्मो पर पर्दा डालने वालो और उनका समर्थन करने वालों की पोल खोलती है। ये सवाल है प्रसाशन और न्याय व्यवस्था के ऊपर भी क्योंकि एक तरफ पीडिता के लिए कोई बोलने वाला भी खड़ा नहीं होता वहीँ दूसरी तरफ बलात्कार का आरोपित पादरी ठीक से एक महीने भी जेल में नहीं रह पाता और जमानत पर बाहर आ जाता है। ये दुखद है और मुख्यधारा की मीडिया द्वारा इस पर बात नहीं करना, पीडिता के लिए आवाज नहीं उठाना- ये सब और भी दुखद है।

धार्मिक स्थल से ऐलान के बाद मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप

नई दिल्ली। झारखण्ड की राजधानी रांची स्थित कांके थाना क्षेत्र के मुरूम गांव में मामूली विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। इस दौरान युवकों के दो गुटों में जमकर मारपीट हुई। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने पुलिस की टीम पर भी हमला बोल दिया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और उनके वाहन को भी भीड़ ने आग के हवाले कर दिया। साथ ही उपद्रवियों ने कई घरों और दुकानों में भी आग लगा दी, जिसके चलते कई लोग गांव छोड़कर चले गए हैं। हालांकि पुलिस अधीक्षक, यातायात पुलिस अधीक्षक ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह के अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।

धार्मिक स्थल से ऐलान के बाद भड़की हिंसा

दरअसल नए साल के मौके पर पिकनिक मना कर लौट रहे युवक की मोटरसाइकिल होचर गांव के एक युवक की मोटरसाइकिल से टकरा गई, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। इसके बाद मुरूम गांव के युवक के घर पर लोगों ने हमला कर दिया, जिसके बाद दो गांव आमने-सामने हो गए। कुछ देर बाद ही धार्मिक स्थल से ऐलान होने के बाद दो गुट आपस मे भीड़ गए और पत्थरबाजी शुरू हो गई। उपद्रवियों ने पुलिस की बोलेरो समेत दो अन्य बोलेरो और तीन मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और भीड़ से शांति की अपील की। लेकिन भीड़ मानी नहीं तो पुलिस ने बल का प्रयोग करना शुरू कर दिया। इसके बाद भीड़ और आक्रोशित हो गई और पुलिस की टीम पर हमला बोल दिया, जिसमें थानेदार और उनके ड्राइवर घायल हो गए। भीड़ ने धार्मिक स्थल के पास खड़ी थानेदार की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद भारी संख्या में पुलिसबल मौके पर पहुंची और हालात को काबू में कर लिया। पूरे घटना क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया।

पुलिस ने की शांति की अपील

हालात की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अनीश गुप्ता, एसपी यातायात अजीत पीटर डुंगडुंग, एसपी ग्रामीण आशुतोष शेखर, कांके के सीओ प्रभात भूषण सिंह सहित एक दर्जन थानेदार व डीएसपी मौके पर पहुंचे। इसके बाद भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई। इस दौरान एसएसपी ने लोगों से अपील किया है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। जो दोषी हैं, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

500 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ मामला दर्ज

मुरूम गांव की स्थानीय महिला के बयान पर तीन गांव होचर, मुरूम व कनादु के 59 लोगों को नामजद आरोपित बनाया गया है। इसमें जिला परिषद सदस्य मोजीबुल अंसारी भी शामिल हैं। इसके अलावा पांच सौ अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है।

इससे पहले भी रांची में पुलिस पर हुआ था हमला

बता दें कि बीते वर्ष 28 दिसंबर को भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया था, जिसमें रांची जिले के पुलिस उपाधीक्षक उदय चंद्र झा शहीद हो गए थे। दरअसल थाने की गाड़ी से धक्का लगने पर एक बच्चे की मौत हो गई थी, जिसके बाद भीड़ सड़क पर प्रदर्शन करने लगी थी। इस दौरान लोगों को समझाने गई पुलिस की टीम पर हमला बोल दिया था, जिसमें उदय चंद्र झा शहीद हो गए थे। इसके अलावा यूपी के बुलंदशहर जिले में भी भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

घोड़े की लीद के सेवन से उपजते हैं ऐसे तर्क और आतंकियों के प्रति इतना प्रेम

एनआईए (NIA) ने जब से कुछ आतंकियों को पकड़ा है तब से लगातार सोशल मीडिया पर NIA का मज़ाक उड़ाया जा रहा है। एक से बढ़कर एक तर्क गढ़े जा रहे हैं। मोदी विरोध अपनी जगह है लेकिन उस विरोध में तथाकथित लिबरल बुद्धिवादी और विद्वान इतने आगे निकल चुके हैं कि जब तक उनकी आँखों के सामने विस्फोट नहीं होगा तब तक वो ये भी नहीं मानने को तैयार हैं कि ऐसे ‘जुगाड़-टेक्नोलॉजी’ से भी बम बनाया जा सकता है।   

आईईडी ( IED) ऐसे ही जुगाड़ से बनाया जाता है। बम बनाने के लिए बनारस में कुकर, टिफिन और साइकिल का भी इस्तेमाल हुआ था। अगर यहाँ प्रेशर कुकर मिल जाता तब भी ये कोई न कोई कुतर्क गढ़ लेते। ऐसी प्रतिक्रियाओं से ही ऐसे नरपिशाचों  का मनोबल बढ़ता है।

अभी साल भर पहले सेना ने दंतेवाड़ा के जंगलों से गुण्डाधुर नाम के एक नक्सली कमांडर को उसके साथियों सहित पकड़ा था, जिनके पास से कुछ पाइप बम बरामद किए गए थे जो रॉकेट लॉन्चर की तरह काम करते थे। इनको बनाने के लिए वाहनों का प्रेशर नोज़ल काम में लिया गया था जो कि पाइप बम में मौजूद विस्फोटक को ठीक रॉकेट लॉन्चर की तरह दूर तक फेंकता था। यह पाइप बम आम पाइप बम से कई गुना ज्यादा खतरनाक था क्योंकि साधारण पाइप बम के धमाके में इतनी तीव्रता नहीं होती थी। जिससे सेना के वाहनों को कभी-कभी कम क्षति पहुँचती थी और उसमें मौजूद जवानों के बचने की पूरी सम्भावना बनी रहती थी। लेकिन प्रेशर नोज़ल से बने रॉकेट लॉन्चर की तरह काम करने वाले पाइप बम की मारक क्षमता साधारण पाइप बम से कई गुना अधिक थी। इसे दूर से रिमोट कंट्रोल डिवाइस से भी चलाया जा सकता था।

पूछताछ में गिरफ्तार नक्सली कमांडर ने बताया कि प्रेशर बम से एक-दो वाहन ही चपेट में आते हैं लेकिन इस तकनीक से एक बार में एक से ज्यादा वाहनों और जवानों को टार्गेट किया जा सकता है। इसके दायरे में आए वाहनों या जवानों का बचना नामुमकिन है। प्रेशर बम को ज़मीन में 20 से 25 डिग्री के कोण पर दबाकर रखा जाता था, ताकि पहले वाहन के पीछे चल रहे अन्य वाहन भी धमाके के दायरे में आ सकें।

ये सारी बातें इसलिए बतानी ज़रूरी हैं क्योंकि पिछले दो-चार दिन से एक से बढ़कर एक हाई क्वालिटी ईर्ष्या और कुढ़न की डोज़ लिए हुए पत्रकार और तथाकथित विद्वान जो सरकार का मज़ाक उड़ाते हुए लिख रहें हैं कि NIA जिसको रॉकेट लॉन्चर कह रही है, वो राकेट लॉन्चर नहीं था बल्कि वह तो ट्रैक्टर की ट्रॉली का प्रेशर नोज़ल था।

यह तो कमाल की बात हो गयी कि एक आदमी के पास आईईडी बम नहीं पकड़ा गया, सिर्फ कुछ किलोग्राम पोटैशियम नाइट्रेट, अमोनियम नाइट्रेट, सल्फर पेस्ट, सुगर मैटेरियल, लोहे के पाइप व छड़ें, कंचें, नोकदार कीलें, तार के बंडल, सैकड़ो डिजिटल अलार्म घड़ियां, मोबाइल फोन सर्किट, मोबाइल की बैटरियाँ, रिमोट कंट्रोल डिवाइस, वायरलेस स्विच पकड़े गए। अब बताइये कि इनमें आईईडी बम कहाँ है? यह तो सिर्फ सामान भर था। जब आईईडी बम पकड़ा जायेगा तब ही माना जायेगा कि ये लोग आतंकवादी हैं? नहीं, तब तक हमारे कई मीडिया के पुरोधा और तथाकथित समाज सेवकों की नज़र में वर्कर माने जायेंगे। हो सकता है फिर भी ये लोग नहीं माने। ऐसे हाई क्वालिटी के महानुभाव तब भी कहेंगे कि सिर्फ आईईडी बनाया ही तो है, फोड़ा कहाँ है?

जब तक कहीं किसी स्कूल-कॉलेज में, मंदिर में, बाजारों, बस अड्डों पर बम नहीं फोड़ेंगे तब तक ये नहीं मानेंगे कि पकड़े गए लोग आतंकवादी हैं। वैसे, ऐसे महानुभाव तब भी कहेंगे कि बम धमाके में जो लोग पकड़े गए हैं वह तो इनोसेंट हैं, यह काम तो आरएसएस का है, या यह हिन्दू आतंकवाद है, और सिर्फ समुदाय विशेष से होने की वजह से मोदी सरकार इनको फँसा रही है।

शायद इन्होंने नक्सलियों और आतंकवादियों के काम करने के तरीकों को ठीक से नहीं जाना है जो साधारण चीजों से भी खतरनाक से खतरनाक बम बनाने में एक्सपर्ट हैं। या फिर जानबूझकर ये ऐसी दलीलें लाते हैं ताकि इनके गिरोह के लोग, और वो आतंकी बचे रहें जिन्हें इनका मूक समर्थन मिलता रहता है।

इसलिए यह किसी हालत में नहीं मानेंगे कि पकड़े गए लोग आतंकवादी हैं। यह तो तभी मानेंगे जब इनके कान के नीचे धमाका होगा ।

नये साल पर किसानों को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा; 0% ब्याज पर मिलेगा कर्ज

ख़बरों के अनुसार नये साल पर केंद्र सरकार किसानों को बड़ा तोहफा देने का मूड बना चुकी है। अभी कुछ दिन पहले ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाहने केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाक़ात की थी, तभी से ये अटकलें तेज हो गई थी कि सरकार चुनावी साल में किसानों के लिए बड़ी घोशनाए करने वाली है। मोदी सरकार किसानों को हर एक क्रॉप सीजन में एक प्रति एकड़ चार हजार रुपये देने की तैयारी कर रही है। इतना ही नहीं, किसानों को एक लाख तक के ब्याज मुक्त कर का लाभ भी दिया जा सकता है। ये सारे पैसे किसानों को डायरेक्ट ट्रान्सफर यानी सीधे उनके बैंक खातों में दिए जायेंगे।

वहीं इन फैसलों से केंद्र सरकार के खजाने पर सालाना ढाई लाख करोड़ तक का बोझ पड़ने की उम्मीद है। इसके अलावे अन्य योजनाओं की भी घोषणा की जा सकती है। कहा जा रहा है कि केंद्र ने प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग के साथ बैठक भी बुलाई है जो इसी सप्ताह होने की उम्मीद है। इन बैठकों में कृषि और खाद्य सम्बन्धी मंत्रालयों और विभागों के प्रमुख अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री खुद इन योजनाओं की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने कई किसान नेताओं से मुलाकात कर उनका सुझाव भी मांगा है।

बता दें कि अभी हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने किसानों की कर्जमाफी को मुद्दा बनाया था और हिंदी बेल्ट के तीनो राज्यों में भाजपा की हार हुई थी। विश्लेषकों ने कांग्रेस द्वारा किसानों से किये गए कर्जमाफी के वादे को उसकी जीत की प्रमुख वजहों में से एक गिनाया था। इसके बाद से ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी इस मुद्दे को लेकर पीएम मोदी पर अक्सर निशाना साधते रहे हैं। ख़बरों से पता चलता है कि इन चुनावों में मिली हार के बाद सचेत भाजपा ने किसानों को बड़ी रहत देने के लिए चुनावी साल में ये फैसला लिया है।

पिछले साल केंद्र सरकार ने दस लाख करोड़ के कृषि ऋण का लक्ष्य निर्धारित किया था जिसे हासिल भी किया गया लेकिन अब कई दलों द्वारा किया जा रहे कर्जमाफी के चुनावी वादों के बाद बैंकों ने किसानों को कर्ज देना लगभग बंद कर दिया है। ताजा निर्णय में रुपये और अहयता सीधे किसानों के पास भेजे जायेंगे। इसके लिए किसानों से कुछ जानकारियां जैसे कि जमीन विवरण, आधार कार्ड डिटेल, फसल की जानकारी इत्यादि मांगी जा सकती है।

बता दें कि केंद्र सरकार लगातार 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने की बात कहती आ रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने भी कुछ दिनों पहले कहा था कि सरकार किसानों की आया दुगुनी करने के लिए अमान्य फसलों की खेती के अलावे पशु, मछली इत्यादि के पालन के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। अब देखना यह है कि होने वाली घोषणाओं में इन योजनाओं के साथ-साथ किसानों को और क्या सौगातें मिलती है।

सचिन तेंदुलकर के कोच रमाकांत आचरेकर का निधन; क्रिकेट जगत ने जताया शोक

भारतीय क्रिकेट के द्रोणाचार्य कहे जाने वाले दिग्गज कोच रमाकांत अचरेकर का कल उनके मुंबई स्थित आवास में निधन हो गया। 87 वर्षीय आचरेकर काफी दिनों से व्हीलचेयर पर थे और उनकी तबियत भी ख़राब चल रही थी। उनके परिजनों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को फोन पर बताया कि उन्होंने कल शाम को अंतिम साँस ली। मुंबई क्रिकेट में अभूतपूर्व योगदान देने वाले आचरेकर को क्रिकेट के भगवन कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट करियर को नयी ऊँचाइयों तक पहुंचाने के लिए जाना जाता है। बचपन में ही सचिन आचरेकर के संपर्क में आ गए थे और उन्होंने काफी दिनों तक उनकी निगरानी में ही अपने क्रिकेट करियर को आकार दिया। स्वर्गीय आचरेकर सचिन के अलावा अजित अगरकर, विनोद काम्बली और प्रवीन आमरे सहित कई दिग्गजों के कोच भी रहे थे।

सचिन तेंदुलकर ने आचरेकर के निधन पर शोक जताया। अपने शोक सन्देश में तेंदुलकर ने कहा;

“आचरेकर सर की उपस्थिति में क्रिकेट स्वर्ग में भी समृद्ध होगा। उनके कई विद्यार्थियों की तरह मैंने भी क्रिकेट की एबीसीडी सर के मार्गदर्शन में ही सीखा है। मेरी ज़िन्दगी में उनके योगदान को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने उस आधार को बनाया जिस पर आज मई खड़ा हूँ। पिछले महीने ही मैंने सर के कुछ अन्य विद्यार्थियों के साथ उनसे मिला था और उनके साथ कुछ समय बीताया था। हम पुरानी बातों को याद कर हँसे भी। आचरेकर सर ने हमें साफ़-सुथरा खेलने और साफ़-सुथरे तरीके से जीने के गुर सिखाये थे। मुझे अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाने के लिए धन्यवाद।

वहीं विश्व में क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था आईसीसी ने भी आचरेकर के निधन पर शोक जताया। वहीं भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी संस्था बीसीसीआई ने अपने शोक सन्देश में कहा कि आचरेकर ने न सिर्फ अच्छे क्रिकेटर्स बनाये बल्कि उन्हें एक अच्छा आदमी बनना भी सिखाया। बीसीसीआई ने कहा कि भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान अभूतपूर्व है।

रमाकांत आचरेकर के शिष्य रहे पूर्व भारतीय क्रिकेटर अजीत अगरकर ने उनके निधन पर शोक जताते हुए उन्हें ‘बहुत बहुत ख़ास’ आदमी बताया और लिखा “सभी चीजों के लिए धन्यवाद सर”।

भारत सरकार द्वारा पद्मश्री और द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित रामाकांत आचरेकर मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में क्रिकेट का प्रशिक्षण देने के लिए प्रसिद्ध थे। उनके निधन की खबर सुनते ही देर शाम सचिन और अगरकर उनके निवास पर पहुंचे।


राजस्थान सरकार का नया फरमान; सरकारी दस्तावेजों से हटेंगे दीनदयाल उपाध्याय के फोटो

राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने नया फरमान जारी करते हुए सभी सरकारी दस्तावेजों से एकात्म मानवतावाद के पुरोधा पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाने का आदेश जारी किया है। सरकार ने ये आदेश सभी सरकारी डिपार्टमेंट, कारपोरेशन और एजेंसियों को ये आदेश जारी किया है। कुल मिलाकर देखा जाये तो सभी 73 सरकारी विभागों में ये आदेश लागू होगा। ये आदेश राज्य की नवगठित सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग के चार दिन बाद आया है। बता दें कि चार दिन पहले हुए कैबिनेट मीटिंग में अशोक गहलोत मंत्रिमंडल ने ही अपनी पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार के कई फैसलों को भी पलट दिया है।

राज्य सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा कि सभी सरकारी लैटरपैड से स्वर्गीय उपाध्याय की फोटो वाले लोगो हटा दिए जाएँ। गौरतलब है कि दिसम्बर 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार ने यह निर्णय लिया था कि सभी सरकारी लैटरपेड पर पंडित उपाध्याय की फोटो वाला लोगो इस्तेमाल किया जायेगा। उस आदेश में कहा गया था;

“पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सही आकार की एक तस्वीर पहले से मौजूद लैटरपेड में लगाईं जाये और भविष्य में छपने वाले लैटरपेड में इसे अनिवार्य रूप से छपवाया जाये।”

अब ताजा आदेश के बाद वसुंधरा सरकार का ये फैसला पलट दिया गया है। इसके निर्णय के पीछे कारण बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने देश और समाज के लिए कोई भी ऐसा उल्लेखनीय कार्य नहीं किया था जिस से उनकी फोटो को अशोक स्तम्भ के साथ स्थान दिया जाये। साथ ही सरकार ने सभी दस्तावेजों पर उनकी फोटो की जगह राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह इस्तेमाल करने का आदेश दिया। इसके अलावे ताजा कैबिनेट बैठक में पंचायती चुनावों में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता सम्बन्धी बंदिश भी खत्म करने का निर्णय लिया गया।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक थे और जन संघ के संस्थापकों में से एक थे। भाजपा उन्हें अपना आदर्श पुरुष मानती है और केंद्र सरकार की कई योजनायें उनके नाम पर चल रही है। फरवरी 1968 में मुगलसराय रेलवे स्टेशन के पास उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। गांधीजी के तीन प्रमुख विचारों- स्वदेशी, स्वराज्य और सर्वोदय को आगे ले जाने वाले पंडित उपाध्याय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे थे।

संसद में राफेल पर चर्चा के दौरान पूरे तेवर में दिखे जेटली; कॉन्ग्रेस के हर एक आरोप का दिया करारा जवाब

संसद की कार्यवाही के दौरान देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली आज पूरी रौ में दिखे। राफेल मुद्दे पर चर्चा के दौरान उन्होंने राहुल गाँधी और कांग्रेस के हर एक आरोपों और सवालों का जवाब तो दिया ही, साथ ही विपक्षी पार्टी पर करारा हमला बोला। राफेल सौदे में विमानों की खरीद से लेकर ओफ़्सेट पार्टनर चुनने और जेपीसी की मांग तक, जेटली ने हर एक मुद्दे पर कई बातों को स्पष्ट किया और साथ ही कांग्रेस पर पलटवार भी करते रहे। पूरी बहस के दौरान कांग्रेस के सांसद कागज़ के हवाई जहाज उड़ाते रहे जिस से लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन काफी नाराज दिखी। जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी केंद्र सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा रहे थे तब श्रीमती महाजन ने उन्हें टोकते हुए अनिल अम्बानी का नाम न लेने की सलाह दी और कहा कि जो सदन में नहीं हैं उनका नाम न लें।

कांग्रेस द्वारा राफेल की जांच के लिए जेपीसी के गठन की मांग को ठुकराते हुए जेटली ने कहा;

“कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें स्वभाविक रूप से सच्चाई नापसंद होती है। उन्हें सिर्फ पैसे का गणित समझ में आता है, देश की सुरक्षा का नहीं। जेपीसी में संयुक्त संसदीय समिति नहीं हो सकती है, यह नीतिगत विषय नहीं है। यह मामला सौदे के सही होने के संबंध में है। उच्चतम न्यायलय में यह सही साबित हुआ है।”

इस से पहले राहुल गाँधी ने सदन में एक टेप चलाने की अनुमति मांगी। कांग्रेस द्वारा उस टेप को लेकर देश के पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर पर निशाना साधा जा रहा है। लोकसभाध्यक्ष ने राहुल से कहा कि वो तभी उन्ही ये मांग मान सकती है जब वह इस टेप के सत्य होने की बात लिखित में स्वीकार करें लेकिन फिर अपने ही दांव में फंसे राहुल गाँधी ने सदन के सामने उस ऑडियो क्लिप की ट्रांसक्रिप्ट पढ़ने की मांग कर दी। लेकिन श्रीमती महाजन ने उनकी इस मांग को भी ठुकरा दिया। वहीं जेटली ने पलटवार करते हुए कहा कि ये टेप फर्जी है इसलिए राहुल गांधी घबरा रहे हैं, कुछ लोगों को सच पसंद नहीं।

“राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं, वो जिस टेप की बात कर रहे हैं वो पूरी तरह फर्जी है इसलिए सत्यता नहीं बताई।”

– अरुण जेटली, केंद्रीय वित्त मंत्री

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा अनिल अम्बानी का नाम लेने की मनाही के बाद राहुल गाँधी ने अम्बानी को डबल ए (एए) से संबोधित करना शुरू कर दिया जिस पर चुटकी लेते हुए जेटली ने क्वाचोत्री की तरफ अप्रत्यक्ष रूप से इंगित करते हुए कहा कि राहुल गाँधी बचपन में ‘क्यू’ की गोद में खेले थे। साथ ही उन्होंने कांग्रेस से नेशनल हेराल्ड, बोफोर्स और अगस्ता वेस्टलैंड को लेकर जवाब माँगा। राफेल पर अपनी सरकार की उपलब्धि गिनाते हुए जेटली ने कहा;

”जो यूपीए के ज़माने में शर्तें थीं उनसे बेहतर शर्तों पर सौदा करने का हमने फ़ैसला किया. इस बातचीत में एयरफ़ोर्स विशेषज्ञों को शामिल किया गया. हमने सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 2016 में दस्सौल्ट के साथ समझौता किया. सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कहा है कि सारी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है.”

“कांग्रेस के मुख्य वक्ता ने सब कुछ झूठ बोला है, पिछले छह माह से इस मामले में बोला गया हर शब्द फर्जी और झूठा है।”

– अरुण जेटली, केंद्रीय वित्त मंत्री

शीर्ष अदालत द्वारा राफेल मामले में केंद्र सरकार को दिए गए क्लीन चिट का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि राहुल गाँधी ने इस बारे में जो भी कहा है वो शीर्ष अदालत के निर्णय के खिलाफ है।उन्होंने कांग्रेस पर सच को नकारने का आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल को विमान की समझ ही नहीं है। अरुण जेटली ने ऑडियो क्लिप को लेकर भी राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वो इसकी पुष्टि क्यों नहीं कर रहे। उन्होंने सदन को ये भी बताया कि राफेल में तीस से पचास प्रतिशत तक सामान भारत में खरीदने की बात है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस को ऑफसेट का मतलब समझने की नसीहत दी। अनिल अम्बानी को लेकर लगे आरोपों पर उन्होंने कहा कि ये हमने नहीं बल्कि दस्सौल्ट ने तय किया कि ऑफसेट पार्टनर कौन होंगे।

इस से पहले राहुल गाँधी ने राफेल पर सरकार को घेरते हुए उन्ही आरोपों की झड़ी लगाईं जो वह अक्सर बोलते रहे हैं। उन्होंने राफेल को लेकर अपने सारे आरोपों को सदन में दोहराया। कमोबेश ये वही आरोप हैं जिन्हें वो अक्सर मीडिया के सामने कई बार दोहरा चुके हैं।

यूट्यूब से गायब हुआ ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ का ट्रेलर; अनुपम खेर ने किया गुस्से का इजहार

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की बायोपिक ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब ताजा मामला यूट्यूब से फिल्म के ट्रेलर के गायब हो जाने का है। बता दें कि फिल्म का ट्रेलर रिलीज होते ही कांग्रेस ने फिल्म के प्रदर्शन रोकने की धमकी दी थी। विरोध प्रदर्शनों के बाद फिल्म के अभिनेता अनुपम खेर ने यहाँ तक कहा था कि अगर डॉक्टर सिंह चाहते हैं तो उनके लिए फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी जा सकती है।

अनुपम खेर ने ट्वीट कर के कहा कि विडियो स्ट्रीमिंग वेबसाइट यूट्यूब पर फिल्म के ट्रेलर का विडियो खोजने पर चोटी के 50 परिणामों में भी ट्रेलर नहीं आ रहा है। अनुपम खेर ने कहा;

“प्रिय यूट्यूब, मुझे कई सन्देश और कॉल मिल रहे हैं जिनमे कहा जा रहा है कि आपकी वेबसाइट पर अगर #TheAccidentalPrimeMinister का ट्रेलर टाइप किया जाता है तो यह दिखाई नहीं देता है या पचासवें स्थान पर है। हम कल नंबर एक पर ट्रेंड कर रहे थे। कृपया मदद करें।”

बता दें कि ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ इसी नाम से लिखी गई संजय बारू की किताब पर आधारित है। संजय पूर्व प्रधानमंत्री सिंह के मीडिया सलाहकार रहे हैं और उनके साथ करीब से काम किया है। इस फिल्म में संजय बारू का किरदार अक्षय खन्ना निभा रहे हैं। फिल्म में मनमोहन सिंह के किरदार में अनुपम खेर लोगों को खासे पसंद आ रहे हैं और अब तक लगभग चार करोड़ लोग यूट्यूब पर इसका ट्रेलर देख चुके हैं। इसे 11 जनवरी से सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जायेगा।

भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस फिल्म के ट्रेलर को शेयर किया था जिसके बाद काफी सियासी बवाल मच गया था। उधर मध्य प्रदेश में कांग्रेस के छात्र संगठन के अध्यक्ष विपीन वानखेड़े ने सिनेमाघरों के मालिकों को चेतावानी देते हुए कहा है कि अगर उन्होंने फिल्म का प्रदर्शन किया तो वो परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहें। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें होने वाले नुकसान के जिम्मेवार वो खुद होंगे।