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‘सुपरहिट होगी पठान, जवान और डंकी, नर्वस नहीं हूँ’: घमंड दिखाने वाली बात पर बोले SRK – मैं रोज इसी विश्वास के साथ सोता हूँ

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) लंबे समय बाद खुद को एक बार फिर से सिल्वर स्क्रीन पर वापसी को लेकर काफी उत्साहित हैं। अगले साल उनकी ​तीन फिल्में ‘पठान’, ‘डंकी’, और ‘जवान’ रिलीज होने वाली है। एक कार्यक्रम के दौरान जब अभिनेता से उनकी आने वाली फिल्मों ‘पठान’, ‘डंकी’ और ‘जवान’ के बारे में पूछा गया कि क्या वह इन्हें लेकर नर्वस तो नहीं हैं? इस पर उन्होंने कहा, “मुझे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ये सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुप​रहिट साबित होंगी।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएई में दो दिन पहले (12 नवंबर, 2022) एक्सपो सेंटर में आयोजित शारजाह इंटरनेशनल बुक फेयर 2022 (Sharjah International Book Fair 2022) के 41वें संस्करण के दौरान शाहरुख खान से उनकी आने वाली फिल्मों के बारे में बात की गई। इवेंट में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपनी आने वाली फिल्मों को लेकर नर्वस हैं, तो इस पर उन्होंने जवाब दिया कि उनको नहीं लगता कि उन्हें घबराने की जरूरत है, क्योंकि वे सभी फिल्में सुपरहिट साबित होंगी।

इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि आप यह घमंड में तो नहीं बोल रहे हैं, तो उन्होंने आगे कहा कि उनका बयान ‘अहंकारी’ नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह उनका विश्वास है, जिसके साथ वह सोते हैं। यही विश्वास एक 57 वर्षीय इंसान को स्टंट करने और दिन में 18 घंटे काम करने के लिए प्रेरित करता है।

शाहरुख के शब्दों में, “अगर मुझे यह विश्वास नहीं होता कि मैं एक ऐसा प्रोडक्ट बना रहा हूँ, जिसे बहुत से लोग पसंद करने जा रहे हैं तो मैं ऐसा नहीं कर पाऊँगा। इसलिए यह कोई अहंकारी बयान नहीं है। यही मैं मानना चाहता हूँ। यह एक बच्चे जैसा विश्वास है कि देखो, मैंने अपना बेस्ट किया है, मैंने अपनी बेस्ट परफॉर्मेंस दी है, मैं अच्छे नंबर्स के साथ पास होने जा रहा हूँ।”

उन्होंने अपनी मैथ्स की परीक्षा को याद किया कि उन्होंने उस वक्त बहुत अच्छा किया था, लेकिन उन्हें 100 में से केवल 3 नंबर मिले। इसके बाद वह कहते हैं, “कभी-कभी फिल्मों के साथ भी ऐसा होता है। मैं एक जीरो बनाता हूँ। कभी-कभी मेरी कोशिशें सामने आ जाती हैं जैसे कि दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे।”

300 लीटर वाला फ्रिज खरीदा, बदबू दबाने के लिए जलाता था अगरबत्ती… जिस कमरे में रखे थे श्रद्धा के टुकड़े, वहीं Zomato से खाना मँगा कर खाता था आफताब

देश की राजधानी दिल्ली में शनिवार (12 नवम्बर, 2022) को श्रद्धा वाकर नाम की दलित लड़की की हत्या के आरोप में पुलिस ने आफ़ताब को गिरफ्तार किया है। आफ़ताब पर शादी का दबाव बना रही अपनी प्रेमिका के शव के 35 टुकड़े कर के दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में फेंकने का आरोप है। बताया जा रहा है कि कटे हुए मांस को सड़ने से बचाने के लिए आफताब ने बाजार से 300 लीटर क्षमता वाले फ्रिज खरीदा था। इसी के साथ लाश से उठ रही बदबू को दबाने के लिए आफ़ताब अगरबत्ती का इस्तेमाल किया करता था। शव को वो महरौली के जंगल में ठिकाने लगाता था।

बताया जा रहा है कि आफ़ताब उसी कमरे से सोता था, जहाँ उसने श्रद्धा का कत्ल किया था। वो जोमैटो से खाना मँगवा कर इत्मीनान से खाता था। पुलिस की पूछताछ में आफ़ताब ने पहले कहा कि श्रद्धा वहाँ नहीं रहती और वो कई महीने पहले जा चुकी है। हालाँकि, बाद में वो टूट गया और सारे गुनाह उगल दिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट ने आफताब को 5 दिनों की कस्टडी रिमांड पर भेज दिया है। इस दौरान उसके कई अन्य कारनामों की पोल खुलने का अनुमान लगाया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि श्रद्धा के परिजन उसके आफ़ताब से रिश्तों के खिलाफ थे। आफ़ताब के साथ दिल्ली में रहने के दौरान वो अपने बचपन के दोस्त लक्ष्मण से सारी बातें शेयर किया करती थी। लक्ष्मण श्रद्धा के परिजनों को सारी जानकारी दिया करता था। बताया जा रहा है कि अपना घर छोड़ने से पहले श्रद्धा ने कहा था कि वो बड़ी हो चुकी है और अपने फैसले खुद ले सकती है।

बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से लक्ष्मण श्रद्धा से संपर्क करने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसका फोन संपर्क से बाहर बता रहा था। आख़िरकार यह जानकारी उसने श्रद्धा के पिता को दी, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली में आफ़ताब के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आफताब के कई लड़कियों से संबंध थे, जिसका श्रद्धा विरोध करती थी। दोनों के बीच अक्सर होने वाले झगड़ों में एक वजह यह भी थी।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, आफ़ताब को अपने किए का बिलकुल भी पछतावा नहीं है। उसके पड़ोसियों के मुताबिक, दोनों में अक्सर झगड़े हुआ करते थे। उन्होंने बताया कि हत्या के दिन पड़ोसियों ने किसी प्रकार की चीख-पुकार नहीं सुनी थी। पड़ोसियों ने बताया कि उन्हें आफताब की करतूत तब पता चली जब 25-30 पुलिसकर्मी उसको साथ लाए और बिल्डिंग को घेर लिया गया था।

पड़ोसियों के मुताबिक, उन्हें भनक ही नहीं लगी कि उनके बगल एक युवक एक लड़की को 35 टुकड़ों में काट कर वहीं पर रह रहा है। बताया जा रहा है कि हत्या के बाद आरोपित लगातार ऑफिस भी जा रहा था और अपना जीवन सामान्य रूप में जी रहा था। आफ़ताब का घर काफी अस्त-व्यस्त और बिखरा हुआ था।

भगवा कुर्ते में रवींद्र जडेजा ने बता दिया अपना पॉलिटकल प्लान, कहा- अबकी बार रिवाबा रहेंगी अटैकिंग: जामनगर से BJP कैंडिडेट हैं रिवाबा

गुजरात (Gujarat Assembly Election 2022) की जामनगर उत्तर सीट का चर्चा में है। बीजेपी ने यहाँ से क्रिकेटर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) की पत्नी रिवाबा को उम्मीदवार बनाया है। जाडेजा की बहन यहाँ कॉन्ग्रेस की प्रमुख नेत्री हैं। ननद-भौजाई की इस टक्कर के बीच रवींद्र जडेजा के राजनीति में एंट्री लेने को लेकर भी अटकलें लग रही है।

सोमवार (14 नवंबर 2022) को रिवाबा ने नामांकन भरा। इस दौरान रवींद्र जडेजा भी उनके साथ थे। नामांकन से पहले मीडिया से हुई बातचीत में जडेजा ने अपनी राजनीतिक पारी को लेकर भी बात की। नामांकन दाखिल करने से पहले जडेजा दंपती बीजेपी के एक स्थानीय कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुँचे। इस कार्यक्रम में रवींद्र जडेजा भगवा कुर्ते में मंच पर बैठे हुए दिखाई दिए।

भाजपा ने मौजूदा विधायक धर्मेंद्र जडेजा का टिकट काटते हुए रिवाबा को उम्मीदवारी दी दी है। पत्नी के समर्थन में सक्रिय दिख रहे जडेजा ने कहा है कि पॉलिटकल पिच पर वे फिलहाल डिफेंसिव ही रहेंगे। उनकी पत्नी को राजनीति के मैदान पर खेलना है, इसलिए वह अटैकिंग रहेंगी।

रवींद्र जडेजा ने रविवार (13 नवंबर 2022) को एक वीडियो ट्वीट कर रिवाबा के लिए वोट माँगे थे। अगले दिन वह भगवा कुर्ते में नजर आए। इसलिए, राजनीतिक हल्के से लेकर सोशल मीडिया तक इस बात की चर्चा थी कि पत्नी रिवाबा की तरह वह भी राजनीति में उतर सकते हैं। ऐसे में, मीडिया से हुई बातचीत में जब जडेजा से उनकी राजनीतिक पारी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझमें अभी भी 4-5 साल की क्रिकेट बाकी है, इसके बाद मैं भी पॉलिटिक्स में एंट्री करूँगा।

रवींद्र जडेजा की बहन नैना जडेजा जामनगर में महिला कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष हैं और क्षेत्र में उनकी अच्छी साख रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा ने उनका तोड़ निकालते हुए रिवाबा को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, रिवाबा ने हाल ही में दावा किया था कि उन्हें मेहनत की बदौलत टिकट मिली है। उन्होंने कहा था कि मैं और मेरे पति 2015 में पीएम मोदी से मिले थे, उसके बाद 2019 में मैंने बीजेपी ज्वाइन की। 200 गाँवों में बतौर कार्यकर्ता घूमी। मुझे मेहनत से टिकट मिली है।

आफताब हो या अकरम… हर श्रद्धा क्यों काट डाली जाती है: एक ने काट कर जानवरों के लिए फेंका, दूसरे ने दोस्तों को ‘दावत’ का दिया न्योता

एक आफताब अमीन पूनावाला। दूसरा मोहम्मद अकरम। इनके बीच एक समानता है। इनके ‘प्रेम’ की जो शिकार बनी, उसकी पहचान हिंदू है। एक ने हिंदू लड़की के टुकड़े-टुकड़े कर जंगल में जानवरों के लिए फेंक दिया। दूसरे ने हिंदू लड़की को खाने की ‘दावत’ सोशल मीडिया के जरिए अपने यारों को दी। दोनों ने अपनी तरफ से यह बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि हर अब्दुल आखिर में अब्दुल ही होता है, भले हिंदू लड़कियों को अपना अब्दुल अलग लगता हो।

श्रद्धा को भी तो अपना आफताब सबसे अलग लगता होगा। ऐसा नहीं होता तो मुंबई के कॉल सेंटर में साथ काम करते हुए वह उसके साथ लिव इन रिलेनशिप में क्यों रहने लगती? क्यों उसके जाल में फँसती हुई दिल्ली तक आती? जाहिर है उसे आफताब पर पूरा भरोसा रहा होगा। इस भरोसे की कीमत उसकी लाश ने 35 टुकड़े होकर चुकाई।

यदि उसकी पहचान हिंदू न होती तो शायद गला दबाकर मारने के बाद ही आफताब उसे छोड़ देता। लेकिन आफताब की हिंदू घृणा देखिए, हत्या के बाद उसने शव को काटकर 35 टुकड़े किए। 18 दिन तक रोज उन टुकड़ों को लेकर जंगल में जानवरों के लिए फेंकता रहा। मानो मुनादी कर रहा हो एक हिंदू लड़की के शरीर को पहले नोच-खसोट कर मैंने अपना मजहब साबित किया, अब उसकी लाश को नोच-खसोट कर तुम अपना जानवरपन साबित करो।

न शिकारी आफताब अकेला है। न श्रद्धा अकेली शिकार है। रोज ऐसी कई कहानियाँ सामने आती ही रहती है। फिर भी ‘मेरा अब्दुल वैसा नहीं’ वाला कीड़ा कुलबुलाना बंद नहीं होता। इसी कीड़े ने इंदौर की उस महिला को अपने चार साल के बच्चे के साथ अकरम के प्यार में फरार होने को मजबूर किया होगा। अकरम ने शादी कर वीडियो सोशल मीडिया में डाला। अपने प्यार की मुनादी करने को नहीं। यार दोस्तों को ‘दावत’ देने के लिए।

हिस्ट्रीशीटर अकरम ने वीडियो डाल लिखा, “भाई लोग, मैंने शादी कर ली है। सभी को पर्सनल में एक एक कर दावत दूँगा। यह कोडवर्ड है। मेरी बात समझ जाना।”

वो तो इस वीडियो पर हिंदूवादी संगठनों की नजर पड़ गई। पुलिस महिला की तलाश कर रही थी। इसलिए अकरम की ‘दावत’ देने की ख्वाहिश पूरी न हुई। संभव है जैसे छह महीने बाद श्रद्धा की निर्ममता से हत्या की खबर दुनिया को पता चली है, वैसे ही ‘दावत’ पूरी होने के बाद कभी इस महिला की खबर भी दुनिया को लगती। या शायद न भी लगती, क्योंकि हम जानते हैं कि ऐसी कई पीड़िताओं की कहानी हम तक पहुँच भी नहीं पाती है।

अकरम और आफताब ऐसा इसलिए करते हैं कि क्योंकि काफिर लड़कियाँ, उनके लिए मेडल के समान होती है, जिसे वे अपनी सोच वालों के सामने बड़ी शान से बघारते हैं। यह सिलिसिला तब तक बंद नहीं होगा जब तक काफिर लड़कियों के भीतर ‘मेरा अब्दुल वैसा नहीं’ वाला कीड़ा कुलबुलाना बंद नहीं होता। इस कीड़े के मरे बिना श्रद्धा कभी नहीं समझ पाएगी कि जिसे वह आफताब का ‘प्रेम’ समझ रही वह, उसके शरीर के टुकड़े करने वाली आरी है।

‘धर्म की आज़ादी, जबरन धर्म-परिवर्तन की नहीं’: सुप्रीम कोर्ट ने जबरन धर्मांतरण को बताया देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा, केंद्र से पूछा – बताइए क्या कार्रवाई कर रहे

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (14 नवंबर, 2022) को जबरन धर्मांतरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने काफी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जबरन धर्मांतरण बहुत ही गंभीर मामला है। इसके साथ ही कोर्ट ने इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस समस्या को रोकने के लिए गंभीर प्रयास करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा कि यदि जबरन धर्मांतरण नहीं रोका गया तो एक हमारे सामने एक बहुत कठिन स्थिति सामने आएगी। न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने भारत सरकार से कहा कि वह इस मामले में 22 नवंबर के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल कर अपना रुख स्पष्ट करे।

पीठ ने कहा, “धर्म-परिवर्तन एक गंभीर मुद्दा है। यह अंततः राष्ट्र की सुरक्षा के साथ-साथ नागरिकों की धर्म और विवेक की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, यह बेहतर है कि केंद्र सरकार अपना रुख स्पष्ट करे और बताए कि संघ और अन्य द्वारा इसके लिए और क्या कदम उठाए जा सकते हैं।”

सुनवाई के दौरान, बेंच ने कहा कि धर्म की स्वतंत्रता हो सकती है, लेकिन जबरन धर्म-परिवर्तन की कोई स्वतंत्रता नहीं है। पीठ ने कहा, “सरकार ने कौन से कदम उठाए हैं, यह बताइए। नहीं तो यह बहुत मुश्किल हो जाएगा। अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट करें कि आप क्या कार्रवाई करने का प्रस्ताव रखते हैं। संविधान के अंतर्गत धर्मांतरण कानूनी है, लेकिन जबरन धर्मांतरण क़ानूनी नहीं हैं।”

संघ की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को अवगत कराया कि इस संबंध में विशेष रूप से मध्य प्रदेश और ओडिशा में राज्य के कानून हैं। इन अधिनियमों की वैधता को शीर्ष न्यायालय ने बरकरार रखा था। शीर्षतम न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में केंद्र और राज्यों को ‘धमकी देकर, धोखे से गिफ्ट और रुपए-पैसों का प्रलोभन देकर’ धर्मांतरण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश देने की माँग की गई थी।

पाकिस्तान ने जिस Joyland को ऑस्कर में भेजा, उसे ही किया बैन: ट्रांसजेंडर महिला की लव स्टोरी से भड़के हुए थे कट्टरपंथी

पाकिस्‍तान (Pakistan) ने इस साल ‘जॉयलैंड’ (Joyland) फिल्म को आध‍िकारिक तौर पर ऑस्कर के लिए भेजा, लेकिन अब उसने इस फिल्‍म को अपने ही मुल्क में बैन कर दिया है। दरअसल, पाकिस्तानी अधिकारियों ने 11 नवंबर को फिल्ममेकर सैम सादिक (Saim Sadiq) की फिल्म ‘जॉयलैंड’ को बैन कर दिया। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि इसमें ‘हद से ज्‍यादा आपत्तिजनक कंटेंट’ दिखाया गया है।

जॉयलैंड फिल्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा जारी अधिसूचना का स्क्रीनशॉट।

बताया जा रहा है कि ‘जॉयलैंड’ (Joyland) फिल्म को 17 अगस्त, 2022 को सरकार ने स्क्रीनिंग, यानी सिनेमाघरों में रिलीज करने के लिए सर्टिफिकेट जारी कर किया था। यह 2023 ऑस्कर के लिए पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक तौर पर भेजी गई थी। यही नहीं, दिलचस्प बात तो यह है कि इस फिल्म को कई फेस्‍ट‍िवल्‍स में खूब सराहना भी मिली है, लेकिन अब इसके कंटेट पर आपत्त‍ि जताई जा रही है। पिछले दिनों फिल्‍म के तथाकथित आपत्तिजनक कंटेट को लेकर कुछ लोगों ने विरोध किया था। ऐसे में जनता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान (Pakistan) के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म पर बैन लगाने का ऐलान किया।

मंत्रालय ने शुक्रवार 11 नवंबर, 2022 को अपनी अधिसूचना में कहा, “हमें लिखित रूप से कई शिकायतें मिली हैं। फिल्म में हद से ज़्यादा आपत्तिजनक चीजें दिखाई गई हैं। यह हमारे समाज के मूल्यों और नैतिक मानकों के अनुसार नहीं है और स्पष्ट रूप से यह मोशन पिक्चर अध्यादेश, 1979 की धारा 9 के तहत ‘शालीनता और नैतिकता’ के मानदंडों के खिलाफ है।”

यह फिल्म पाकिस्तान में 18 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी। फिल्म की कहानी एक पितृसत्तात्मक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे अपना वंश बढ़ाने के लिए बेटा चाहिए। इस बीच परिवार का सबसे छोटा बेटा, जो कहानी का हीरो भी है, वो सबसे छिप कर एक इरॉटिक थिएटर ग्रुप जॉइन करता है। इस दौरान वह एक ट्रांसजेंडर महिला के प्यार में पड़ जाता है। पाकिस्‍तान में कट्टरपंथ‍ियों ने फिल्म को इस्लाम विरोधी करार दिया है।

उन्हें इस फिल्‍म में एक लड़के का ट्रांसजेंडर के प्‍यार में पड़ना काफी बुरा लग रहा है। वो इसे ‘इस्लाम के खिलाफ’ बताते हुए फिल्म की आलोचना कर रहे हैं। पाकिस्तान सीनेट में कट्टरपंथी ‘जमात-ए-इस्लामी’ के एकमात्र सीनेटर मुश्ताक अहमद खान ने ट्वीट किया, “पाकिस्तान एक इस्लामी देश है। किसी भी कानून, विचारधारा या गतिविधि को इस्लाम के खिलाफ जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।”

सीनेटर मुश्ताक अहमद खान ने जॉयलैंड पर प्रतिबंध का समर्थन किया। (फोटो साभार: मुश्ताक का ट्विटर)

सीनेटर मुश्ताक अहमद खान के अलावा सोशल मीडिया पर कई एक्टर्स और यूजर्स ने फिल्‍म पर बैन लगाए जाने की आलोचना की है। एक ट्विटर थ्रेड में एक्‍ट्रेस सरवत गिलानी ने पाकिस्तानी अधिकारियों की खिंचाई भी की है।

उन्होंने लिखा है, “शर्मनाक है कि 6 साल में 200 पाकिस्तानियों द्वारा बनाई गई एक पाकिस्तानी फिल्म, जिसे टोरंटो से काहिरा से लेकर कान्स तक स्टैंडिंग ओवेशन मिला, उसे अपने ही देश में रोका जा रहा है। हमारे लोगों से गर्व और खुशी के इस क्षण को मत छीनो। इसे देखने के लिए कोई किसी से जबरदस्ती नहीं कर रहा है! इसलिए किसी को भी इसे न देखने के लिए मजबूर न करें। पाकिस्तानी दर्शक इतने समझदार हैं, उन्हें पता है कि वे क्या देखना चाहते हैं और क्या नहीं। पाकिस्तानियों को फैसला करने दीजिए। उनकी बुद्धि और हमारी मेहनत का अपमान मत कीजिए।”

बता दें कि ‘जॉयलैंड’ फिल्म में सानिया सईद, अली जुनेजो, अलीना खान, सरवत गिलानी, रस्ती फारूक, सलमान पीरजादा और सोहेल समीर मुख्य भूमिकाओं में हैं।

शिशु गृह में मुस्लिम तो मिशनरी हॉस्टल में पादरी बनाए जा रहे हैं हिंदू, MP के दमोह में धर्मांतरण को लेकर 10 पर FIR

मध्य प्रदेश के शिशु गृह में हिंदू बच्चों के इस्लामी धर्मांतरण के बाद अब राज्य में चल रहे ईसाई मिशनरी के हॉस्टल से भी इसी तरह का मामला सामने आया है। यह हॉस्टल दमोह में चल रहा है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इस संबंध में दमोह देहात थाना में 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

मिशनरी संचालित छात्रावासों में धर्मांतरण की साजिश का खुलासा कानूनगो व एनसीपीसीआर के सदस्य ओंकार सिंह के निरीक्षण के बाद हुआ। कानूनगो की अगुवाई में टीम ने कई ईसाई मिशनरियों का निरीक्षण किया। इस दौरान कई तरह की अनियमितताएँ उजागर हुईं। इस दौरान टीम का सहयोग नहीं करने के आरोप भी ईसाई मिशनरियों के कर्मचारियों पर हैं। पंजीयन दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं करवाए गए।

सबसे पहले टीम बेथलहम बाइबिल परिसर में संचालित बालक एवं बालिका छात्रावास पहुँची। यहाँ छात्रों से जानकारी लेने पर धर्मांतरण का मामला सामने आया। यहाँ से टीम भिड़ावरी गाँव में संचालित छात्रावास पहुँची। यहाँ टीम को अंदर जाने नहीं दिया गया।

काफी मशक्कत के बाद जब टीम पुलिस की सहायता से अंदर पहुँची तो पता चला कि 91 बच्चों में केवल 45 बच्चे मौजूद हैं। इनमें से अधिकतर हिन्दू थे। जिन्होंने पूछे जाने पर बताया कि उन्हें ईसाइयत की शिक्षा दी जा रही है। निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम बाइबिल सोसायटी का निरीक्षण करने पहुँची तो चौकाने वाली जानकारी सामने आई। डिंडोरी के रहने वाले एक 17 वर्षीय किशोर ने बताया कि उसे यहाँ पादरी बनने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इससे पहले राज्य के रायसेन जिले के एक शिशु गृह में 3 हिन्दू बच्चों को मुस्लिम बनाने का मामला सामने आया था। तीनों बच्चे भाई-बहन हैं और कोरोना काल में अपने परिजनों से बिछड़ गए थे। सरकारी अनुदान प्राप्त इस शिशु गृह को हसीन परवेज चलाता है।

आरोप है कि हसीन परवेज ने तीनों बच्चों के इस्लामी नाम ने पहचान-पत्र बनवाकर खुद को उनका अभिभावक दिखाया है। परवेज की इस करतूत का संज्ञान शनिवार (12 नवंबर, 2022) को राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने लिया और जिला प्रशासन को शिशु गृह संचालक के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए। घटना गौहरगंज इलाके की है।

PM मोदी ने किया ₹1700 करोड़ के जिस पुल का उद्घाटन, उसे उड़ाने की गहरी साजिश: ग्रामीणों की जागरूकता से टला बड़ा हादसा, 3 kg डायनामाइट का इस्तेमाल

राजस्थान के उदयपुर जिले में उदयपुर-अहमदाबाद रेलवे लाइन पर बने पुल पर ब्लास्ट कर बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश रची गई थी। ग्रामीणों की जागरूकता से बड़ा हादसा टल गया। शनिवार (12 नवंबर 2022) को पुल पर हुए ब्लास्ट से रेलवे ट्रैक (पटरियों) पर क्रैक आ गया था। हालाँकि, अब इसे रिपेयर कर एक बार फिर ट्रेनों की आवाजाही शुरू कर दी गई है। राजस्थान पुलिस समेत एटीएस, एनआईए व अन्य जाँच एजेंसियाँ आतंकी एंगल से भी घटना की जाँच कर रही हैं।

टाइम्स नाउ नवभारत’ ने एक रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा है कि रेलवे पुल को उड़ाने के लिए करीब 3 किलो डायनामाइट का उपयोग किया था। वहीं, जाँच एजेंसियों को मौके से सुपरपावर 90 (Superpower 90) नामक डेटोनेटर के कुछ पैकेट हैं जिसके बाद कहा जा रहा है इसमें ‘सुपरपावर 90’ का उपयोग विस्फोटक के रूप में किया गया था।

इस मामले में जावर माइंस थानाधिकारी अनिल विश्नाई का कहना है कि रेलवे ट्रैक उड़ाने के लिए माइनिंग ब्लास्ट में काम आने वाली सामग्री का उपयोग किया गया है। यहाँ देसी विस्फोटक सामग्री मिली है। पुलिस हर एंगल से जाँच कर रही है। उदयपुर एसपी का कहना है कि घटना की स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि पूरी तरह से प्लानिंग करके ब्लास्ट किया गया है।

चूँकि शुरुआती जाँच में यह सामने आया है कि पूरी घटना को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया है, इसलिए एटीएस एनआईए और एनएसजी जैसी जाँच एजेंसियों को भी मौके पर पहुँचना पड़ा। क्षतिग्रस्त हुए ट्रैक की मरम्मत के बाद एटीएस (आतंकवाद निरोधी टीम) ने जाँच करने के बाद ट्रैक को फिट घोषित किया गया है। इसके बाद इस ट्रैक में फिर से ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो गई है। इस मामले में राजस्थान पुलिस ने आतंकवादी गतिविधियों में साजिश रचने की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में कहा गया है कि आम लोगों के बीच आतंक पैदा करके देश की सुरक्षा को खतरे में डालने के प्रयास में ट्रैक पर विस्फोटक लगाए गए थे।

इस घटना पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पुनिया ने गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “31 अक्टूबर से रेल ट्रैक ने काम करना शुरू कर दिया था। इस तरह की घटना से लोगों में डर पैदा होता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठते हैं। राज्य में इंटेलिजेंस फेल है। सीएम को जवाबदेह होना चाहिए।” बता दें कि यह घटना उदयपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर ओढ़ा रेलवे पु​ल की है। शनिवार (12 नवंबर, 2022) की रात करीब 10 बजे धमाके की आवाज सुनने के बाद स्थानीय युवा मौके पर पहुँच गए।

लोगों ने देखा कि रेलवे ट्रैक पर बारूद बिखरा हुआ है और पटरियाँ टूट गईं हैं। यही नहीं, रेलवे लाइन के नट-बोल्ट पर खोल दिए गए थे। ट्रैक पर लोहे की पतली चादर भी उखड़ी हुई मिली। रेलवे ट्रैक की हालत देखकर ग्रामीण यह समझ गए थे कि यदि इस ट्रैक पर कोई ट्रेन आती है तो हादसा हो जाएगा। ऐसे में उन्होंने स्थानीय प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई थी।

उल्लेखनीय है कि उदयपुर-अहमदाबाद ट्रेन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर, 2022 को हरी झंडी दिखाकर की थी। इस ट्रैक के लिए 6 साल लंबा इंतजार करना पड़ा था। पहले यहाँ मीटर गेज (छोटी लाइन) थी, जिसे हटाकर ब्रॉड गेज में तब्दील किया गया है। इसके लिए 1700 करोड़ रुपए खर्च किए गए।

सूरत में मोदी-मोदी के नारों से हुआ ओवैसी का स्वागत, लोगों ने दिखाए काले झंडे: सर्वे से खुलासा – गुजरात में मुस्लिमों को AIMIM से ज्यादा पसंद भाजपा

गुजरात में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार जोरों पर है। हर पार्टी वोटरों को लुभाने के लिए अपना पूरा जोर लगा रही है। इसी क्रम में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी रविवार (13 नवंबर, 2022) को गुजरात के सूरत पहुँचे थे। जब वह मंच से लोगों को संबोधित कर रहे थे, उसी दौरान उन्हें काला झंडा दिखाया गया और वहाँ मौजूद लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए।

दरअसल, ओवैसी सूरत पूर्व विधानसभा से चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार के लिए सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए AIMIM ने कई सीटों के लिए अपने उम्मीदवार उतारे हैं। वह सूरत पूर्व सीट से वसीम कुरैशी के लिए चुनाव प्रचार करने आए थे। मुस्लिमों के सबसे बड़े हितैषी होने का दम भरने वाले असदुद्दीन ओवैसी गुजरात में भी खुद को मुस्लिमों की पहली पसंद बता रहे थे, लेकिन एक सर्वे में उनके इस दावे की पोल खुलती नजर आ रही है।

गुजरात की जनता के मन को टटोलने के लिए एबीपी न्यूज़ ने सी-वोटर के साथ मिलकर साप्ताहिक सर्वे किया है। सर्वे में लोगों से पूछा गया था कि गुजरात में मुस्लिम वोटर किस पार्टी को पसंद करते हैं, इसके जवाब काफी चौंकाने वाले आए, जो कम से कम AIMIM के लिए तो किसी झटके से कम नहीं है। देखा जाए तो काले झंडे और मोदी-मोदी के नारे से ओवैसी को यह समझ भी आ गया होगा।

सर्वे के मुताबिक, 47% मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस को अपनी पहली पसंद बताया है, जबकि 25 प्रतिशत ने AAP को अपनी पसंद करार दिया। वहीं मुस्लिम समाज के 19 प्रतिशत लोगों के लिए पहली पसंद भाजपा है और 9 प्रतिशत ने AIMIM को अपनी पसंद बताया है।

राज्य में 1 और 5 दिसंबर को दो चरणों में वोटिंग होनी है और नतीजे 8 दिसंबर को सामने आएँगे। पहले चरण में 89 सीटों पर 1 दिसंबर को वोट डाले जाएँगे तो दूसरे चरण में 93 सीटों पर 5 दिसंबर को वोटिंग होगी। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह AIMIM प्रवक्ता ने आरोप लगाया था कि ओवैसी को निशाना बनाकर ‘वंदे भारत’ ट्रेन पर पत्थर फेंके गए थे। हालाँकि, पुलिस ने इन दावों को खारिज किया था।

PM मोदी गए बाली, जी-20 की कमान हाथों में लेगा भारत: 20 कार्यक्रम-10 मुलाकात, कहा- भारतीय समुदाय को संबोधित करने को उत्सुक हूँ

जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) सोमवार (14 नवंबर 2022) को इंडोनेशिया (Indonesia) के बाली (Bali) गए। रवानगी से पहले पीएम मोदी ने कहा कि वे बाली शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक विकास, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य और डिजिटल परिवर्तन जैसे मसलों पर G-20 के नेताओं के साथ विचार-विमर्श करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा ,”मैं इस सम्मेलन से इतर इसमें भाग लेने वाले कई अन्य देशों के नेताओं से भी मिलूँगा और उनके साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा करूँगा। मैं 15 नवंबर को एक स्वागत समारोह में बाली में भारतीय समुदाय को संबोधित करने के लिए उत्सुक हूँ।”

बाली रवाना होने से पूर्व पीएम ने कहा, “हमारे देश और नागरिकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण होगा, जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो (Joko Widodo) बाली शिखर सम्मेलन के समापन समारोह में भारत को G-20 की अध्यक्षता सौंपेंगे। भारत आधिकारिक तौर पर 1 दिसंबर 2022 से जी-20 की अध्यक्षता करेगा।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जी-20 शिखर सम्मेलन 15-16 नवंबर को है। पीएम मोदी 14 से 16 नवंबर तक बाली में रहेंगे। करीब 45 घंटे के अपने प्रवास के दौरान वह 20 कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। दुनिया के दिग्गज 20 देशों के समूह जी-20 के प्रमुखों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के अलावा प्रधानमंत्री इसमें हिस्सा लेने वाले 10 देशों के प्रमुखों से द्विपक्षीय मुलाकात भी करेंगे। इसमें बहुपक्षीय व द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

क्या है जी-20

जी-20, 19 देशों के साथ यूरोपियन यूनियन का एक समूह है। जी-20 देशों के समूह में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) शामिल हैं। इस समूह में वे देश शामिल हैं, जो अर्थव्यवस्था के मामले में दुनिया में टॉप पर हैं। हर साल इन देशों का एक सम्मेलन होता है। इसमें अलग-अलग देशों के शीर्ष नेता, प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री आदि शामिल होते हैं। ये देश मिलकर ना सिर्फ ग्लोबल इकोनॉमी पर काम करते हैं, बल्कि आर्थिक स्थिरता, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा करते हैं। इनका मूल उद्देश्य आर्थिक स्थिति को नियंत्रित रखना है।

बता दें कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। G-20 में कोई स्थायी अध्यक्ष ना होने की वजह से इसमें हर देश का अपना योगदान होता है। इसी कड़ी में अब कमान भारत के पास आनी है।