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19 साल की मॉडल से 45 मिनट तक गैंगरेप, सड़क पर दौड़ती महिंद्रा थार: केरल में 1 महिला सहित 4 गिरफ्तार

केरल के कोच्चि में 19 वर्षीय मॉडल के साथ गैंगरेप की खबर है। आरोप है कि पीड़िता का रेप चलता थार वाहन में किया गया, जो शहर में 45 मिनट तक घूमती रही। पुलिस ने इस मामले में 1 महिला सहित कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पीड़िता को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घटना गुरुवार (17 नवम्बर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना एर्नाकुलम दक्षिणी पुलिस थानाक्षेत्र की है। पीड़िता की जान पहचान 3 आरोपितों से पहले से थी। वो एक दूसरे से रविपुरम के एक बार में मिले थे। तीनों आरोपितों के साथ जो महिला गिरफ्तार की गई है, वो मूल रूप से राजस्थान की है। इन सभी ने महिला को विश्वास में लेकर बार से अपनी कार में बिठाया और सड़क पर 45 मिनट तक चलती कार में रेप किया। महिला आरोपित पर रेप में इन तीनों की मदद करने का आरोप है।

बताया जा रहा है कि गैंगरेप के बाद तीनों आरोपित पीड़िता को उसके आवास पर छोड़ कर चले गए। इस दौरान महिला की तबियत काफी खराब होने लगी। महिला ने अपने एक दोस्त को पूरी बात बताई। इसी दोस्त ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पीड़िता को अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता रात से सुबह 5 बजे तक बेसुध हालत में पड़ी रही थी। पुलिस ने उसे कक्कानड अस्पताल में भर्ती करवाया था, जहाँ से हालत गंभीर होने के चलते उसे कलमस्सेरी मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया गया था।

इस दौरान पीड़िता ने आरोपितों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई, जिस पर एक्शन लेते हुए सभी चारों आरोपित गिरफ्तार कर लिए गए हैं। मामले की पहले शिकायत कासरगोड थाने में हुई थी, जिसे बाद में दक्षिणी एर्नाकुलम में ट्रांसफर कर दिया गया।

पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त थार जीप को भी बरामद कर लिया है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इस घटना को चौंकाने वाली और निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पीड़िता का बेहतर इलाज करवाने के साथ आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

‘मुस्लिम प्रेमिका और घरवालों ने जबरन खतना कराया, ₹11 लाख वसूले’: महाराष्ट्र के दलित युवक पर इस्लाम अपनाने का दबाव, AIMIM सांसद जलील पर भी आरोप

श्रद्धा वॉकर की हत्या (Shraddha Walker Murder Case) से पूरा देस सन्न है। इसी बीच शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें पीड़ित एक दलित लड़का है। मुस्लिम प्रेमिका होने के कारण इस युवक को तरह-तरह की प्रताड़ना दी जा रही है। इसमें उसकी प्रेमिका का भी हाथ है। इस मामले में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के एक नेता का नाम भी सामने आया है।

दलित युवक दीपक सोनवणे महाराष्ट्र के संभाजीनगर में स्थित मराठवाड़ा प्रौद्योगिकी संस्थान (MIT) में पढ़ाई करता है। यहाँ उसकी एक मुस्लिम लड़की सना फरहीन शाहमीर शेख से दोस्ती हुई, जो बाद में प्रेम संबंधों में बदल गई। अब दीपक को सना के परिवार से लगातार प्रताड़ना मिल रही है और उससे जबरन वसूली की जा रही है। यहाँ तक कि उसका जबरन खतना भी कर दिया गया।

दीपक सोनवणे ने संभाजीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना दर्द साझा किया। दीपक ने बताया कि उसकी मुस्लिम प्रेमिका के परिवार में इस्लामवादियों को इस मामले में हर कदम पर प्रभावशाली स्थानीय सांसद इम्तियाज जलील का लगातार समर्थन मिल रहा है। इम्तियाज जलील AIMIM का सांसद हैं।

दीपक सोनवणे ने अपनी गर्लफ्रेंड सना फरहीन शाहमीर शेख के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस आयुक्त, संभाजीनगर को संबोधित शिकायत में शाहमीर शमशुद्दीन शेख, ख्वाजा सैय्यद, शबाना बेगम शेख, साजिया सदफ शाहमीर शेख, AIMIM के सांसद इम्तियाज जलील और उनके अंगरक्षकों के नाम हैं।

कॉलेज में शुरू हुआ लव अफेयर

दीपक सोनवणे ने संभाजीनगर के मराठवाड़ा प्रौद्योगिकी संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। सना उसकी सहपाठी थी। दोनों पहले दोस्त बने और फिर दोनों के बीच प्यार हो गया। दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में कहा, “सना शेख और मैं एमआईटी कॉलेज में साल 2018 से हम सहपाठी थे। सना और मैं परिचित हो गए। उसके बाद हमारा यह प्रेम प्रसंग हुआ। सना ने मुझे शादी का लालच दिया और कहा, ‘मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ। तुम इस्लाम कबूल कर लो। नमाज पढ़ो, कुरान पढ़ो’।”

दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे लिखा, “मैंने उसे माता-पिता (अब्बू शाहमीर शमशुद्दीन शेख और अम्मी शबाना बेगम शेख) से यह बात कही। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वे अपनी बेटी को ठीक से समझाएँगे और मुझे चिंता नहीं करनी चाहिए।”

प्रताड़ना की हुई शुरुआत

दीपक सोनवणे ने बताया कि उन्हें किस तरह की यातनाओं से होकर गुजरना पड़ा। उन्होंने कहा, “मार्च 2021 में उसके अम्मी-अब्बू, चाचा और बहन ने मुझे गुलमंडी इलाके में मिलने के लिए बुलाया। जब मैं वहाँ गया तो उन्होंने मुझे अपनी बाइक वहीं खड़ी करने को कहा और कहा कि ‘हम सभी को कहीं बाहर जाने की जरूरत है। जैसे ही मैंने उन्हें मना किया, ख्वाजा सैय्यद और शाहमीर शेख मुझे जबरन अपने घर ले गए। वहां उन्होंने मुझे कमरे में बंद कर दिया।”

दीपक सोनवणे ने आगे बताया, “शाहमीर शेख और ख्वाजा सैय्यद ने मेरे कपड़े उतार दिए। शबाना बेगम और साजिया सदफ ने मेरे हाथ-पैर बाँधकर मेरे मुँह में कपड़ा डाल दिया। इसके बाद शाहमीर शेख ने मेरे शरीर पर पेशाब कर दिया। इसका वीडियो सना और शाहमीर शेख के मोबाइल पर शूट किया गया था। इसके बाद उन्होंने मुझे इस्लाम में धर्मांतरित करने का दबाव बनाने के लिए पीटना शुरू कर दिया।”

जबरन कराया खतना

दीपक सोनवणे ने आगे कहा, “उसके बाद सना और उसकी माँ एवं बहन मुझे सिटी चौक थाने के पीछे की गली में एक अस्पताल ले गए और कहा कि हम यहाँ तुम्हें मुस्लिम बनने के लिए लाए हैं। हम यहाँ तुम्हारा खतना करा रहे हैं। अगर आप यहाँ किसी से कुछ कहोगे तो हम तुम्हारा वीडियो वायरल कर देंगे और समाज में तुम्हें बदनाम करेंगे।”

दीपक ने बताया कि इस दौरान आरोपितों ने उसे और उसके परिवार को मारने की धमकी भी दी। दीपक ने आगे कहा, “हम तुम्हें और तुम्हारे परिवार को भी मार डालेंगे। उनकी बात सुनकर मैं बहुत डरा हुआ था, क्योंकि मेरी और मेरे परिवार की जान खतरे में थी। अगर मेरा वीडियो वायरल हुआ तो मैं बदनाम हो जाऊँगा।”

दीपक ने आगे बताया, “उन्होंने इसका फायदा उठाया और मेरा खतना कार दिया। इसके बाद मुझसे कहा कि तुम अब एक सच्चे मुसलमान हो। अगर तुमने किसी को बताया कि क्या हुआ है तो याद रखना, तुम्हें इसका पछतावा होगा। इसके बाद वे लोग मुझे वापस गुलमंडी ले आए। मैं वहाँ से अपने घर आया और फिर मैंने सना से दूर रहने का फैसला कर लिया।”

11 लाख रुपए भी वसूले गए

दीपक के खिलाफ प्रताड़ना यहीं नहीं रूका। उससे लगातार वसूली की जाती रही। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा, “सना और उसकी माँ मेरे घर आए और पैसे की माँग करते हुए धमकी दी कि हम दीपक का वीडियो वायरल करेंगे। दीपक के खिलाफ गंभीर मामला दर्ज करेंगे और उसकी जिंदगी बर्बाद कर देंगे। मैंने उसे समय-समय पर 7 लाख रुपए नकद और 4 लाख रुपए ऑनलाइन दिए। मैंने कुल 11 लाख रुपए भेजे, लेकिन उन्होंने मुझसे 25 लाख रुपए की माँग की। इसके बाद मैंने उन्हें मना कर दिया, क्योंकि उस समय मेरे पास पैसे नहीं थे।”

उन्होंने आगे कहा, “तब सना ने मेरे खिलाफ 29-09-2021 को एमआईडीसी सिडको थाने में शिकायत दर्ज कराई। IPC की धारा 354 के तहत मामला दर्ज कराया है। मामला दर्ज करने के बाद सना ने मुझे फोन किया और कहा कि मैंने तुमसे कहा था। तुमने मेरी बात नहीं मानी। मेरे अम्मी-अब्बू तुम्हारे खिलाफ मामला दर्ज कराया है, लेकिन मैं सँभाल लूँगी। उसके बाद 19-12-2021 को मैं सना और उसके माता-पिता से जिला सत्र न्यायालय में मिला और उस समय उन्होंने कहा कि 25 लाख दो या इस्लाम स्वीकार करो, फिर हम केस वापस ले लेंगे।”

जाकिर नाइक का वीडियो दिखाया, जातिसूचक गालियाँ दीं

दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे कहा, “12-08-2022 को सना शाहमीर शेख और ख्वाजा सैय्यद ने मुझे क्लाउड कैंपस में आने के लिए मजबूर किया। वहाँ उन्होंने मुझे एक प्रोजेक्टर पर मुस्लिम धर्मगुरु जाकिर नाइक के वीडियो दिखाए और मुझे नमाज अदा करने के लिए मजबूर किया।”

दीपक ने कहा, “अगर मैं उनका विरोध करता तो वे मुझे पीटते और जातिसूचक गालियाँ देते। उन्होंने कहा कि तुम महार जाति के हो। महार जाति नीची जाति है। तुम लोग गंदगी खाने वाले लोग हो। तुम महार नहीं, बल्कि वेश्या समुदाय से हो। वे निचले स्तर पर जाकर मुझे जातिवादी अपमान किया।”

AIMIM सांसद जलील कर रहा मदद

संभाजीनगर मुस्लिम बहुल सीट है। AIMIM नेता इम्तियाज जलील इस सीट से लोकसभा सांसद हैं। मुस्लिम सांसद स्थानीय मुस्लिमों के प्रति नरम रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं। इस मामले में उनका नाम इस्लामवादियों के प्रमुख संरक्षक के तौर पर सामने आया है। दिलचस्प बात यह है कि जलील ने दलित जाति के लोगों के सहारे अपनी सीट जीती है, लेकिन अब उन पर एक दलित व्यक्ति को प्रताड़ित करने वाले इस्लामवादियों को बचाने का आरोप लगाया गया है।

दीपक सोनवणे ने अपनी शिकायत में आगे कहा है, “20-08-2022 को दोपहर 2.00 बजे नामित व्यक्तियों ने मुझे पैठण गेट के पास एक कार में अपने साथ बैठने के लिए मजबूर किया और मुझे सत्यविष्णु अस्पताल रोड पर ‘क्लाउड कैंपस’ के पास ले गए। रोजाबाग इलाके में सांसद इम्तियाज जलील का घर है। वहाँ सांसद इम्तियाज जलील की मौजूदगी में उन्होंने मुझे एक हॉल में बंद कर दिया।”

दीपक ने बताया, “उसके बाद उनके अंगरक्षकों ने मेरे साथ मारपीट की और नामजद लोगों ने रुपए छीन लिए। मेरी ओर से 1,50,000 नकद, एक लैपटॉप और एक प्लस कंपनी का मोबाइल फोन। मुझे वहां पीटा गया, उन्होंने मुझे जान से मारने की धमकी दी और पैसे की माँग की। इसके साथ ही मुझे जातिवादी गालियाँ दीं। यह सब पिछले दो साल से चल रहा है।”

दीपक ने बताया कि इन सबकी शिकायतें उन्होंने पुलिस से कीं। उन्होंने सीपी कार्यालय को कई शिकायतें भेजी, लेकिन किसी ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। दीपक सोनवणे और उनके साथियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “क्या सीपी ऑफिस से ही कोई लिंक है? यह किसके इशारे पर किया गया?”

आफताब पर पुलिस थर्ड डिग्री प्रयोग नहीं कर सकती, कोर्ट ने आदेश दिया: श्रद्धा खोज रही थी अपने ‘पार्टनर’ का गुस्सा कम करने की दवा

दिल्ली की महरौली में हुए श्रद्धा मर्डर केस में आफ़ताब की कस्टडी रिमांड देते हुए कोर्ट ने पुलिस को सख्त हिदायतें दी हैं। इन हिदायतों में आरोपित पर थर्ड डिग्री प्रयोग न करना भी शामिल है। पुलिस को इन्हीं 5 दिनों के अंदर ही आफताब का नार्को टेस्ट भी करवाना होगा। इसी के साथ पुलिस को आफ़ताब का मेडिको लीगल केस (MLC) भी नियमों के मुताबिक बनाना होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 18 नवम्बर 2022 (शुक्रवार) को आफ़ताब का और 5 दिनों का कस्टडी रिमांड स्वीकृत करते हुए मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विजयश्री राठौर ने ये दिशा निर्देश दिए। उन्होंने केस के जाँच अधिकारी के साथ रोहिणी की फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला को भी आदेश जारी करते हुए 5 दिनों के भीतर ही आफ़ताब का नार्को टेस्ट करने के लिए कहा।

बेल बजाने से नाराज होता था आफताब

सामने आ रही एक नई जानकारी के मुताबिक आरोपित आफताब को घर में लगी बेल (घंटी) बजने से दिक्कत होती थी। सुदर्शन न्यूज़ के पत्रकार प्रेम कश्यप की एक ग्राउंड रिपोर्ट में आफ़ताब के एक पड़ोसी मिथलेश कुमार ने इस बात का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वो आफताब के ही फ़्लैट में 1 माह पहले किराएदार के तौर पर आए थे। मिथलेश ने आगे बताया कि जब उन्होंने पहली बार घर की बेल बजाई थी, तब आफ़ताब काफी नाराज हुआ था।

मिथलेश का दावा है कि घंटी बजने से नाराज हो कर आफ़ताब नीचे उत्तर आया था और दुबारा उन्हें ऐसा न करने की नसीहत दी थी। इसके अलावा मिथलेश का दावा है कि आरोपित काफी रिजर्व रहता था और रात में अपना खाना आदि लेने के लिए घर से बाहर निकलता था। जिस घर में आफताब किराए पर रहता था, वो हरे रंग में रंगा गया है। मिल रही जानकारी के मुताबिक यहाँ के मकान मालिक से भी पूछताछ चल रही है। ऑपइंडिया के पास वीडियो बयान मौजूद हैं।

आफ़ताब के गुस्से की दवा खोज रही थी श्रद्धा

मुंबई के एक डॉक्टर प्रणव काबरा का दावा है कि श्रद्धा आफ़ताब के गुस्से की दवा खोज रही थी। उन्होंने दावा किया है कि फरवरी 2021 में श्रद्धा ने उन्हें फोन करके बताया था कि उनका पार्टनर काफी गुस्से वाला है, जिसके लिए वो दवा चाहती हैं। डॉक्टर के मुताबिक वो इस बात को भूल चुके थे लेकिन TV पर न्यूज़ चलती देख कर उन्हें सब याद आ गया।

नाच रहे कोहली के फैंस, शेयर कर रहे Memes… निशाने पर हैं 2 शर्मा और 1 गांगुली

टी20 वर्ल्ड कप में इंडियन क्रिकेट टीम ने देश और फैंस को निराश किया। इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में हार गए और वो भी 10 विकेट से। अब BCCI ने एक्शन लिया है। चेतन शर्मा सहित पूरी राष्ट्रीय चयन समिति को बर्खास्त कर दिया गया। गलत या सही का पता नहीं लेकिन कोहली के फैंस के लिए यह जश्न के जैसा है, सोशल मीडिया पर दबा कर memes शेयर किया जा रहा है।

इंडियन क्रिकेट टीम की राष्ट्रीय चयन समिति के लिए BCCI ने लोगों से नए आवेदन मँगवाए हैं। 28 नवंबर 2022 तक नए-पुराने खिलाड़ी लोग यहाँ खुद को सेलेक्ट होने की प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं, अपना-अपना रेज्यूमे भेज सकते हैं।

वर्ल्ड कप जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर शर्मनाक परफॉर्मेंस के बाद एक्शन लिया जाना एक आम प्रक्रिया है। आम प्रक्रिया लेकिन BCCI जैसे संस्थान के लिए है। सोशल मीडिया के दौर में यह फैंस के लिए ट्रोलिंग और मीम का जरिया बन जाता है। विराट कोहली के फैंस के लिए यह कुछ ऐसा ही रहा।

भले ही इंडियन क्रिकेट टीम का परफॉर्मेंस टी20 वर्ल्ड कप में बहुत शानदार नहीं रहा लेकिन विराट कोहली के फैंस उनके परफॉर्मेंस से खुश हैं। इसलिए जब चेतन शर्मा सहित पूरी राष्ट्रीय चयन समिति को बर्खास्त किया गया तो वो खुशियाँ मनाने लगे, पुरानी बातों को जोड़ कर मीम शेयर करने लगे।

विराट कोहली के फैंस यह याद दिलाने में जुट गए कि 18 नवंबर 2011 को इंडियन क्रिकेट टीम की राष्ट्रीय चयन समिति ने उन्हें एकदिवसीय क्रिकेट टीम की कप्तानी से हटा दिया था। उसके ठीक एक साल बाद BCCI ने पूरी चयन समिति को ही बर्खास्त कर दिया।

चेतन शर्मा के साथ-साथ सौरभ गांगुली से लेकर रोहित शर्मा तक को ट्रोल किया जा रहा है।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स एक कदम आगे जाकर कोहली को फिर से कप्तान बनाए जाने की भविष्यवाणी भी कर दिए हैं।

विराट कोहली के कुछ पुराने डांस करते, मस्ती करते वीडियो को शेयर करके मजे ले रहे।

‘हनीट्रैप में फँसे नेहरू के कारण देश बँटा, 12 साल तक वे देश की खुफिया रिपोर्ट अंग्रेजों को भेजते रहे’: सावरकर के पोते ने PM मोदी से की जाँच की माँग

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Congress Leader Rahul Gandhi) ने ‘भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra)’ के दौरान महाराष्ट्र में विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) पर देश के साथ धोखा देने का आरोप लगाया था। अब सावरकर के पोते ने राहुल गाँधी के नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सावरकर के पोते रंजीत सावरकर (Ranjit Savarkar) ने राहुल गाँधी के आरोपों का खंढन करते हुए कहा कि पंडित नेहरू एक ‘महिला’ के कहने के कारण देश का विभाजन करने पर सहमत हुए थे। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद 12 वर्षों तक पंडित नेहरू ने देश की गुप्त जानकारियाँ अंग्रेजों के साथ साझा की थी। रंजीत सावरकर ने इस पर राहुल गाँधी से जवाब माँगा है।

बता दें महाराष्ट्र के वाशिम में राहुल गाँधी ने सावरकर पर देश से गद्दारी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सावरकर अंग्रेजों को पत्र लिखकर उनका नौकर बने रहने के लिए कहा था और आजीवन पेंशन लेते रहे थे। इस दौरान उन्होंने सावरकर का एक पत्र भी मंच से लोगों को दिखाया था।

रंजीत सावरकर ने शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी एंडविना और पंडित नेहरू के बीच हुए पत्रचारों को अंग्रेजों से वापस माँगा जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा, “इससे पता चलेगा कि जिसे देश चाचा नेहरू कहता है, उसने देश के साथ कैसे धोखा किया।”

स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए रंजीत सावरकर ने कहा कि पंडित नेहरू 9 मई से 12 मई 1947 के बीच अकेले हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला गए थे वे वहाँ चार दिनों तक रहे। रंजीत ने आगे कहा, “उस दौरान एडविना के ब्रिटिश सरकार को लिखे पत्रों में कहा गया था कि मैंने पंडित नेहरू को अपना अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।”

व्यक्तिगत संबंधों को लेकर एडविना के पत्र में उल्लेखित बातों का जिक्र करते हुए रंजीत सावरकर ने कहा, पंडित नेहरू बहुत व्यस्त हैं। इसलिए वे ‘नर्वस ब्रेकडाउन’ के करीब पहुँच रहे हैं। उन्होंने मेरे साथ चार दिन बिताए। हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए हैं और यह दोस्ती लंबे समय तक चलेगी।” रंजीत सावरकर ने यह कहा कि एडविना ने अपने पत्र में लिखा था कि ‘पंडित नेहरू मेरे काबू में आ गए हैं’।

रंजीत यहीं नहीं रूके। उन्होंने कि पंडित नेहरू ने देश की सुरक्षा को दरकिनार कर लॉर्ड माउंटबेटन को वायसराय नियुक्त किया था। उन्होंने कहा, “बलवंत सिंह ने कहा था कि माउंटबेटन वायसराय होने के कारण पाकिस्तान में सेना नहीं भेज सकते। 20,000 लड़कियों का अपहरण कर पाकिस्तान ले जाया गया। नरसंहार को देखकर भारतीय नेताओं को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें, इसलिए मैंने पूर्ण नियंत्रण ले लिया।”

माउंटबेटन का हवाला देते हुए रंजीत ने कहा, “वायसराय ने लिखा था कि उनके भारत छोड़ने के बाद पंडित नेहरू ने उन्हें 12 वर्षों तक हर दिन अपनी रिपोर्ट भेजी थी।” रंजीत सावरकर ने कहा कि यह खुफिया एजेंसियों की बड़ी नाकामी है। उन्होंने कहा कि नेहरू को हनीट्रैप में फँसाया गया था और वे फँस गए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसकी जाँच की माँग करते हुए रंजीत ने कहा कि पीएम को इस पूरे मामले की जाँच कराना चाहिए। इसके पहले भी कई लोग हनीट्रैप में पकड़े जा चुके हैं और उन्हें सजा भी दी जा चुकी है, लेकिन नेहरू की बता कौन करे। उन्होंने इस हनीट्रैप पर राहुल गाँधी से जवाब माँगा।

रवीश कुमार पर बन गई डॉक्यूमेंट्री, बज रहीं तालियाँ… लेकिन इसमें पैसा लगा है भारत विरोधी जॉर्ज सोरोस और फोर्ड फाउंडेशन का

NDTV के न्यूज एंकर रवीश कुमार (Ravish Kumar) पर एक डॉक्यूमेंट्री बनी है। ‘व्हाइल वी वाच्ड (While We Watched)’ नाम की यह डॉक्यूमेंट्री बनते के साथ विवादों से घिर गई। विवादास्पद फोर्ड फाउंडेशन और जॉर्ज सोरोस ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के साथ संबंधों को लेकर। सबसे पहले इसका खुलासा डिजिटल मीडिया स्टार्टअप द पैम्फलेट ने किया है।

विनय शुक्ला के डायरेक्शन में बनी ‘व्हाइल वी वाच्ड (While We Watched)’ नाम की यह डॉक्यूमेंट्री NDTV के न्यूज एंकर रवीश कुमार (Ravish Kumar) पर बनी है। इससे पहले, विनय शुक्ला साल 2016 में आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक करियर पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘एन इंसिग्निफिकेंट मैन’ में को-डायरेक्टर की भूमिका में थे।

‘व्हाइल वी वाच्ड’ की वेबसाइट पर एक नजर देखें तो पता चलता है कि फिल्म को ‘ब्रिट डॉक फिल्म्स’ द्वारा फंडिंग की गई है, जिसका नाम बदलकर अब ‘डॉक सोसाइटी’ कर दिया गया है।

‘व्हाइल वी वाच्ड’ वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

रवीश कुमार पर जो डॉक्यूमेंट्री बनी है, उसके स्क्रिप्ट का सार कुछ ऐसा कह कर बेचा जा रहा: “उथल-पुथल से भरा न्यूजरूम ड्रामा, जहाँ पत्रकार रवीश कुमार सच के लिए हर दिन फर्जी खबरों से लड़ते हैं। वो भी ऐसे समय में जहाँ तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पूरे विश्व से गायब हो रही। ‘While We Watched’ को देखिए और इस रसातल को समझिए।”

‘डॉक सोसाइटी’ की वेबसाइट की जाँच करने के दौरान ऑपइंडिया ने पाया कि विवादास्पद अमेरिकी फाउंडेशन, फोर्ड को गैर-लाभकारी संगठन के प्रमुख पार्टनर के रूप में दिखाया गया है। गौरतलब है कि ऑनलाइन पोर्टल द पैम्फलेट ने पहले भी इन लिंक्स का खुलासा किया था।

‘डॉक सोसाइटी’ वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

इस साइट में फोर्ड फाउंडेशन की ‘जस्टफिल्म्स इनिसिएटिव’ के पूर्व डायरेक्टर कारा मर्ट्स का एक कोट भी शामिल है, जिसमें उन्होंने डॉक सोसाइटी की तारीफ की है। कारा मर्ट्स का वह कोट “सहयोग, नवाचार और तेजी से प्रोटोटाइप में विशेषज्ञ” है।

नीचे स्क्रॉल करने पर, ऑपइंडिया वेबसाइट के एक ऐसे हिस्से पर पहुँचा, जहाँ फोर्ड फाउंडेशन को फिर से प्रमुख पार्टनर के रूप में दिखाया गया है। ‘डॉक सोसाइटी’ के एक मैसेज में कहा गया है, “हम केवल वही कर सकते हैं जो हम उन संगठनों और व्यक्तियों की वजह से कर सकते हैं, जो हमारे काम को फंडिंग करते हैं।”

फोर्ड फाउंडेशन को डॉक सोसायटी के पार्टनर के रूप में दिखाया गया

भारत विरोधी गतिविधियाँ और फोर्ड फाउंडेशन

साल 2015 में, गुजरात सरकार ने तीस्ता सीतलवाड़ द्वारा किए गए घोटाले की जाँच करते हुए पाया था कि फोर्ड फाउंडेशन द्वारा उसकी संस्थाओं को फंडिंग की गई थी। साथ ही यह भी सामने आया था कि तीस्ता की संस्था ने एफआरसीए के नियमों का उल्लंघन किया। दरअसल, तीस्ता सीतलवाड़ की संस्था ‘सबरंग कम्युनिकेशन एंड पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड’ को “मीडिया रणनीतियों सहित भारत में सांप्रदायिकता, जाति-आधारित भेदभाव को बढ़ावा देने के लिए” फोर्ड फाउंडेशन से 2.9 लाख डॉलर की बड़ी राशि मिली थी।

इस फंडिंग की जानकारी सामने आने के बाद गुजरात पुलिस द्वारा एक पत्र जारी किया गया था, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने भी फोर्ड फाउंडेशन की गतिविधियों की जाँच करने की बात कही थी। जिसके बाद, विकीलीक्स ने भी इस बारे में खुलासे किए थे।

फोर्ड फाउंडेशन ने दावा किया था कि वह तीस्ता सीतलवाड़ के सबरंग ट्रस्टों को फंड देने के विवाद में फँस गया था। 26 मई, 2015 को फोर्ड फाउंडेशन इन इंडिया: नोट्स टू जॉन पोडेस्टा नामक टाइटल वाले लेटर में सरकार की कार्रवाई के संभावित कारणों में अरविंद केजरीवाल (राजनीति में आने से पहले) के एनजीओ को की गई फंडिंग को भी बताया गया था।

इस बात की पुष्टि किसी और ने नहीं बल्कि भारतीय वामपंथियों की प्रमुख ‘सेलीब्रिटी’ अरुंधति रॉय ने की थी। सागरिका घोष के साथ एक इंटरव्यू में, अरुंधति रॉय ने उस लेख के बारे में बात की थी जो उन्होंने द हिंदू के लिए लिखा था। इस लेख में अरुंधति ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल और सिसोदिया के गैर सरकारी संगठनों ने तीन वर्षों में फोर्ड फाउंडेशन से $400,000 (अभी की कीमत 3 करोड़ 26 लाख रुपए लगभग) से अधिक प्राप्त किए थे।

अरुंधति रॉय ने यह भी दावा किया था कि आंदोलन के शीर्ष मैनेजमेंट वाले दस लोगों के समूह के पास अच्छी तरह से फंडिंग वाले एनजीओ थे। अरुंधति ने कहा था कि टीम के तीन मुख्य सदस्यों ने मैग्सेसे पुरस्कार जीता था, जिसे फोर्ड फाउंडेशन द्वारा फंडिंग की जाती है।

यह सुनने में दिलचस्प लग सकता है कि NDTV के एंकर रवीश कुमार को भी संयोग से साल 2019 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला। पिछले साल, क्रिस्टोफर ब्रुनेट द्वारा उनके सबस्टैक ‘कार्लस्टैक’ पर कोट किए गए व्हिसल-ब्लोअर ईमेल से पता चलता है कि फोर्ड फाउंडेशन असहिष्णु और कट्टर वामपंथी चरमपंथियों का गढ़ है।

डॉक सोसाइटी और जॉर्ज सोरोस का जुड़ाव

डॉक सोसाइटी के कई दर्जन ‘समर्थक’ हैं। लेकिन अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन इस कथित ‘गैर-लाभकारी कंपनी’ डॉक सोसाइटी को फंडिंग करने वाले प्रमुख संगठनों में से एक है। खासतौर से जॉर्ज सोरोस मीडिया और ‘सिविल सोसायटी’ का उपयोग करके एक खतरनाक भारत विरोधी नैरेटिव को हवा दे रहा है।

उल्लेखनीय है कि जॉर्ज सोरोस ‘राष्ट्रवादियों’ और रूढ़िवादी सरकारों से लड़ाई के बारे में कहता रहा है। जिसे वह अक्सर ‘सत्तावादी’ सरकारों के रूप में भी संबोधित करता है। बीते वर्षों में यह सामने आया है कि जॉर्ज सोरोस को अगर किसी चीज से सबसे अधिक नफरत रही है, तो वह है भारत और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी सरकार।

ओपन सोसायटी फाउंडेशन को ‘डॉक सोसायटी’ के समर्थक के रूप में दिखाया गया

साल 2008 में, सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड (SEDF) ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए अपने 17 मिलियन के फंड को लॉन्च करने के लिए ओमिडयार नेटवर्क, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) और Google.org के साथ हाथ मिलाया था। इसके बाद, सोरोस ने अन्य नेटवर्कों के साथ मिलकर, पॉलिटिकल नैरेटिव में हेरफेर करने के लिए मीडिया संस्थानों को बड़े पैमाने पर फंडिंग की। फिलहाल, MDIF साइट पर लिस्टेड वामपंथी वेबसाइट स्क्रॉल और ग्राम वाणी नामक एक अन्य वेबसाइट है। 

मीडिया को फंडिंग के अलावा, ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन वामपंथी झुकाव वाले ऐसे तथाकथित बुद्धिजीवियों का भी हितैषी रहा है, जिन्होंने मौजूदा सरकार के खिलाफ लगातार फर्जी बयानबाजी की है। जॉर्ज सोरोस के साथ जुड़ाव वाले कई बड़े नाम भी हैं, लेकिन इस बात की बहुत कम संभावना है कि ये कनेक्शन किसी को भी आश्चर्यचकित करेंगे। उनमें से कुछ सबसे प्रमुख हर्ष मंदर, प्रताप भानु मेहता, इंदिरा जयसिंह और अमर्त्य सेन हैं।

ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन ने ‘पत्रकार’ राणा अय्यूब जैसे लोगों के ट्वीट का भी समर्थन किया है। जॉर्ज सोरोस द्वारा फंड प्राप्त सोसाइटी ने अब एनडीटीवी न्यूज एंकर रवीश कुमार पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘व्हाइल वी वाच्ड (While We Watched)’ को भी फंडिंग की है।

भारतीय मीडिया के स्व-घोषित मसीहा रवीश कुमार फिलहाल अमेरिका में हैं, जहाँ वह निर्देशक विनय शुक्ला के साथ फिल्म ‘व्हाइल वी वाच्ड (While We Watched)’ का प्रचार कर रहे हैं। फिल्म ने अब तक 4 पुरस्कार जीते हैं, जिसमें टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ‘एम्पलीफाई वॉयस अवार्ड’ भी शामिल है।

कथित तौर पर, फिल्म को दर्शकों से स्टैंडिंग ओवेशन मिला है और डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के दौरान और बाद में रवीश कुमार को उनके प्रशंसकों द्वारा बधाई दी गई है। कुल मिलाकर, फोर्ड फाउंडेशन और जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन ने अपने धन का सदुपयोग (अपने एजेंडे के लिए) किया है।

आमिर खान की बेटी इरा की सगाई नूपुर शिखरे से: हिंदू दामाद के कारण कट्टरपंथी मुस्लिम दे रहे माँ-बहन की गाली, इस्लाम की दुहाई

आमिर खान की बेटी इरा खान (Ira khan) जल्द ही शादी के बंधन में बंधने जा रही हैं। उन्होंने शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को मुंबई में अपने बॉयफ्रेंड नूपुर शिखरे (Nupur Shikhare) से सगाई की। इरा और नूपुर लंबे समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। इंगेजमेंट सेरेमनी (Ira Khan engaged to Nupur Shikhare) में आमिर खान के पारिवारिक सदस्यों के अलावा दोनों एक्स वाइफ भी मौजूद रहीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आमिर खान की बेटी इरा खान और नूपुर शिखरे की दोस्ती 2020 में हुई थी। नूपुर एक जिम ट्रेनर हैं। उन्होंने आमिर खान समेत कई बॉलीवुड स्टार्स को ट्रेन किया है। कोविड-19 के कारण देश भर में लगाए गए लॉक डाउन के दौरान नूपुर इरा को फिटनेस ट्रेनिंग दे रहे थे। इसी दौरान, दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए।

इसी साल सितंबर में एक कार्यक्रम के दौरान नूपुर ने इरा को शादी के लिए प्रपोज किया था, तब इरा ने भी हाँ कर दी थी। इरा खान ने इसका वीडियो भी इंस्टाग्राम पर शेयर किया था।

इरा खान और नूपुर शिखरे की सगाई के वीडियो और फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। फोटोज में, इरा खान लाल गाउन में वहीं नूपुर ब्लैक टक्सीडो में नजर आए। आमिर खान सफेद कुर्ते में दिखाई दिए। इंगेजमेंट सेरेमनी में आमिर खान की दोनों एक्स वाइफ रीना दत्ता और किरण राव भी मौजूद रहीं। साथ ही, इरा का भाई जुनैद, किरण राव का बेटा आजाद राव खान, आमिर की बहन निखत और फरहत तथा भाँजे इमरान खान समेत कई स्टार्स मौजूद रहे।

इरा खान और नूपुर शिखरे की सगाई (Ira Khan engaged to Nupur Shikhare) में एक्ट्रेस फातिमा सना शेख भी नजर आईं, उन्होंने हर किसी का ध्यान आकर्षित किया। दरअसल, जब आमिर खान का अपनी दूसरी पत्नी किरण राव के साथ तलाक हुआ था, तब आमिर खान का नाम फातिमा सना शेख के साथ जोड़ा जा रहा था। सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा था कि फातिमा के साथ अफेयर के कारण आमिर और किरण राव का तलाक हुआ है।

इरा खान की सगाई जिस नूपुर शिखरे से हुई है, वह हिंदू हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी मुस्लिम लोग मजहब की दुहाई देने के साथ-साथ माँ-बहन वाली गंदी-गंदी गालियाँ भी देते दिखाई दे रहे हैं।

भाजपा सांसद के घर में तोड़फोड़, भगवान की मूर्तियों को भी बनाया निशाना: मुख्यमंत्री KCR की बेटी ने दी थी चप्पल से मारने की धमकी

हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी के सांसद अरविंद धर्मपुरी के घर पर शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (TRS) जो अब भारत राष्ट्र समिति (BRS) बन चुकी है, के समर्थकों ने लाठी-डंडे से हमला कर दिया। आरोप है कि बीआरएस समर्थकों ने भाजपा सांसद के घर में घुस कर उत्पात मचाया। न्यूज एजेंसी एएनआई ने हमले का एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें बीआरएस का झंडा लेकर कुछ लोग अरविंद धर्मपुरी के घर पर हंगामा करते नजर आ रहे हैं।

पुलिस की मौजूदगी में तोड़-फोड़

वीडियो में देखा जा सकता है कि एक पुलिसकर्मी हंगामा कर रहे लोगों को रोकने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बीआरएस समर्थक पुलिस की मौजूदगी में अपना उत्पात जारी रखते हैं। बीजेपी सांसद अरविंद ने दावा किया है कि घर की खिड़कियों, गाड़ियों और दूसरे सामान के साथ-साथ भगवान की मूर्तियों को भी निशाना बनाया गया है। वीडियो में नजर आ रहे लोग जय तेलंगाना के नारे लगाते सुने जा रहे हैं। भीड़ में शामिल कुछ लोग सांसद के घर पर पत्थर फेंकते हुए भी नजर आ रहे हैं।

केसीआर की बेटी ने करवाया हमला?

न्यूज़ एजेंसी एएनआई को दिए अपने बयान में भाजपा सांसद अरविंद धर्मपुरी ने हमले का आरोप बीआरएस की एमएलसी और केसीआर की बेटी कल्वाकुंतला कविता पर लगाया है। उन्होंने कहा कि कल्वाकुंतला कविता के कहने पर ही टीआरएस (अब बीआरएस) के गुंडों ने उनके आवास पर हमला किया।

भाजपा सांसद को चप्पल से मारने की धमकी

मीडिया रिपोर्टस की मानें तो इस हमले के पीछे की वजह बीजेपी सांसद धर्मपुरी के कविता को लेकर किए गए एक दावे को माना जा रहा है। धर्मपुरी ने दावा किया था कि सीएम केसीआर की बेटी कविता ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से संपर्क किया था और पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई थी।

बीजेपी सांसद धर्मपुरी ने यह भी दावा कि था कि कविता अपने मुख्यमंत्री पिता केसीआर से नाराज चल रही हैं। इसलिए अब कविता ने टीआरएस छोड़ने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा सांसद धर्मपुरी के इस बयान के बाद कल्वाकुंतला कविता भड़क गई थीं। इतना ही नहीं एमएलसी कविता ने भाजपा सांसद अरविंद धर्मपुरी को निजामाबाद के चौराहे पर चप्पल से मारने की धमकी भी दी थी।

हमले को लेकर भाजपा नेताओं ने रोष प्रकट किया है। तेलंगाना बीजेपी प्रमुख बंडी संजय कुमार ने हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि टीआरएस में लोकतांत्रिक रूप से बीजेपी का सामना करने की हिम्मत नहीं है, इसलिए इस तरह के हमलों का सहारा लिया जा रहा है।

विदेश मंत्रालय का ड्राइवर हनीट्रैप में फँसा, पाकिस्तान को भेजता था खुफिया जानकारी: जवाहर लाल नेहरू भवन से गिरफ्तार

विदेश मंत्रालय के एक ड्राइवर को नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू भवन से जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वह पैसों के बदले पाकिस्तान को गुप्त सूचनाएँ और दस्तावेज मुहैया कराता था। बताया गया है कि वह जिस व्यक्ति को जानकारी देता था, वह पूनम शर्मा या पूजा के रूप में उसे बेवकूफ बना रहा था। ANI के अनुसार, इसके पीछे पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई (ISI) का हाथ है।

ड्राइवर को गिरफ्तार करने वाले दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने बताया कि ड्राइवर हनीट्रैप (Honeytrap) के मामले में फँसा हुआ था। ड्राइवर पैसे के एवज में पाकिस्तान के एक अधिकारी को सूचना या दस्तावेज भेज रहा था।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय में तैनात आरोपित ड्राइवर का नाम श्रीकृष्ण बताया जा रहा है। उसके पास एक लड़की की तस्वीर और वीडियो बरामद हुई है। पाकिस्तानी जासूस ने विदेश मंत्रालय के ड्राइवर को फँसाने के लिए फर्जी आईडी दिखाई थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक वह पूनम शर्मा नाम की जिस महिला के संपर्क में था, उसने ड्राइवर को बताया था कि वह कोलकाता में रहती है। अब पुलिस और ख़ुफ़िया अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विदेश मंत्रालय में काम करने वाले अन्य कर्मचारी कहीं इस मामले में शामिल तो नहीं हैं।

इससे पहले अगस्त 2022 में 46 वर्षीय एक व्यक्ति को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में राजस्थान पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। उस शख्स को 2016 में भारतीय नागरिकता मिली थी। भागचंद नाम के जासूस का जन्म पाकिस्तान में हुआ था और वह 1998 में अपने परिवार के साथ दिल्ली आया था। जासूस ने 2016 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की और दिल्ली में एक टैक्सी चालक और मजदूर के रूप में काम करना शुरू किया। भागचंद पाकिस्तान में अपने रिश्तेदारों के जरिए अपने आकाओं के संपर्क में था।

2 साल पहले जब आफताब को पुलिस पकड़ने वाली थी, श्रद्धा ने ही उसे बचाया था: बुरी तरह मार खाकर भी उसी के पास वापस लौटी

श्रद्धा मर्डर केस (Shraddha Walker Murder) में एक और जानकारी सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) ने नवंबर 2020 में श्रद्धा वाकर को मौत के घाट उतारने की कोशिश की थी। उसे बहुत पीटा था। इस बात का खुलासा श्रद्धा के दोस्त गॉडविन ने किया है।

गॉडविन ने इंडिया टुडे को बताया कि आफताब उसकी दोस्त के साथ दरिंदों जैसा व्यवहार करता था। उन्होंने आफताब के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन वह उसे बार-बार फोन करता रहता, धमकी देता कि अगर वह उसके पास वापस नहीं आई, तो वह अपनी जान दे देगा। आफताब के आत्महत्या की धमकी देने के बाद श्रद्धा उसके पास वापस चली गई।

2020 में श्रद्धा वाकर का इलाज करने वाले एक डॉक्टर ने भी खुलासा किया है कि आफताब अमीन पूनावाला उस वक्त अस्पताल में मौजूद था, जब श्रद्धा को कंधे और पीठ में तेज दर्द के लिए भर्ती कराया गया था। नालासोपारा के ओजोन मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में दो साल पहले श्रद्धा का इलाज करने वाले डॉ एसपी शिंदे ने कहा कि श्रद्धा को कोई गंभीर चोट नहीं आई थी, लेकिन उसने कंधे और पीठ में तेज दर्द की शिकायत की थी।

ओजोन मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में श्रद्धा वाकर ने हालाँकि इसका खुलासा नहीं किया था कि उसे ये दर्द किस वजह से हो रहा था। जब वह अस्पताल में भर्ती थी, उस वक्त श्रद्धा के परिवार का कोई भी सदस्य वहाँ मौजूद नहीं था। वहाँ केवल आफताब दिखाई दे रहा था।

‘मदद के लिए हमारे पास आई थी श्रद्धा’

श्रद्धा वाकर के दोस्तों द्वारा किए गए खुलासे के मुताबिक, श्रद्धा और आफताब 2018 से रिलेशनशिप में थे, लेकिन श्रद्धा ने आफताब के बारे में अपने दोस्तों को 2019 में बताया था। श्रद्धा के एक और दोस्त राहुल राय ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया:

“2020 में जब वह हेल्प के लिए हमारे पास पहुँची और कहा कि आफताब ने उसके साथ मारपीट की, तो हम सभी ने एफआईआर दर्ज कराने में उसकी (श्रद्धा) मदद की। पुलिस अधिकारी ने जब पूछताछ के लिए आफताब को हिरासत में लेने को कहा, तो उसने कहा कि रिलेशनशिप में ऐसी चीजें होती रहती हैं।”

‘वह आफताब से बहुत डरती थी’

राहुल राय के अनुसार, “अगले दिन पुलिस ने उसे (श्रद्धा) थाने बुलाया, जहाँ उसने कहा कि वह आफताब से बहुत डरती है। वह उसे मार डालेगा। क्योंकि वह इससे पहले भी उसे जान से मारने की कोशिश कर चुका है और उसे कई बार बुरी तरह पीटा है। आफताब ने उसे घर में बंद कर दिया था। उसका एक और अफेयर चल रहा था। वह दूसरी और लड़कियों से भी बात करता था। उसने कहा था कि आफताब ड्रग्स लेता है।”

राहुल ने आगे बताया कि जब उन्होंने फिर से श्रद्धा से संपर्क करने की कोशिश की तो उसने कहा कि चिंता मत करो। ऐसी चीजें होती रहती हैं। इसके बाद वे कभी संपर्क में नहीं आए।

‘सिगरेट से श्रद्धा को जला देता था’

बता दें कि 26 वर्षीय श्रद्धा की उसके लिव-इन पार्टनर आफताब ने 18 मई 2022 को दिल्ली के छतरपुर स्थित अपने फ्लैट में हत्या कर दी थी। श्रद्धा के पिता के गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के छह महीने बाद इस हत्याकांड का खुलासा हो पाया है। दिल्ली पुलिस इस मामले की जाँच जुटी हुई है। वहीं, हत्या आरोपित आफताब रोज एक नई कहानी सुनाकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

श्रद्धा के दोस्त रजत शुक्ला ने दावा किया है कि जब वह मुंबई में थी, तब भी आफताब उससे मारपीट करता था। जलते हुए सिगरेट से श्रद्धा को जला देता था। जले हुए निशान को श्रद्धा ने अपने दोस्तों को भी दिखाया था। उस वक्त उसके सभी दोस्त पुलिस में जाना चाहते थे। लेकिन श्रद्धा आफताब को सुधरने का मौका देना चाहती थी।