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‘पारसी है आफताब, मुस्लिमों को बदनाम मत करो’: दलित श्रद्धा के 35 टुकड़े करने वाले के मजहब पर क्यों डाला जा रहा पर्दा

दिल्ली पुलिस ने शनिवार (12 नवंबर, 2022) को श्रद्धा नाम की दलित लड़की की हत्या और लाश के 35 टुकड़े करने के आरोप में आफ़ताब को गिरफ्तार किया है। दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। इस खबर के वायरल होते ही सोशल मीडिया के एक खास वर्ग ने आफताब के मज़हब को छिपाने की कोशिश शुरू कर दी। उस समूह ने यह अफवाह उड़ानी शुरू कर दी कि श्रद्धा का कातिल आफताब मुस्लिम नहीं बल्कि पारसी है।

इस नैरेटिव को भी सेट किया जाने लगा कि आफ़ताब को इस्लाम मजहब से जुड़ा बता कर मुस्लिमों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

भ्रम फैलाने की कोशिश

‘मियाँ ज़ालिक (@XunizXan)’ नाम के हैंडल ने भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के ट्वीट को Quote करते हुए लिखा, “वो तेरी बिरादरी का है।” बता दें कि शहजाद भी मुस्लिम समुदाय से ही आते हैं।

लगभग इसी प्रकार का कमेंट सईद मोहम्मद ने भी @Syed5056 नाम के हैंडल से किया है। उन्होंने लिखा, “लड़के का नाम आफ़ताब पूनावाला है जो पारसी है न कि मुस्लिम। इसे कुछ लोग हिन्दू-मुस्लिम का रंग दे रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है।”

एक अन्य यूजर मोहम्मद मीराज ने भी आफ़ताब के पारसी होने का दावा किया है।

आफ़ताब ने ही खुद को बताया था मुस्लिम

अक्सर ये देखने को मिलता है कि मुस्लिम समुदाय के लोग आरोपित के अपने मज़हब और पीड़ित के हिन्दू होने के मौकों पर मामले को उलझाने का प्रयास करते हैं। जबकि, सच्चाई इस से थोड़ा अलग होती है। आफ़ताब की ही साल 2014 में की गई एक पोस्ट में उसने खुद के मुस्लिम होने की बात कबूली है। आफताब का इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल ‘@thehungrychokro’ नाम से है।

इंस्टाग्राम पर ‘@zloymom’ नाम के हैंडल ने साल 2014 में आफताब का मज़हब पूछा था। उस पोस्ट के जवाब में भी आफताब ने खुद को मुस्लिम बताया था।

चित्र साभार- आफताब के इंस्टाग्राम कमेंट

ऊपर दिए तमाम सबूतों से जाहिर है कि श्रद्धा का कातिल आफताब इस्लाम मजहब का है। इसके अतिरिक्त मृतका के पिता द्वारा पुलिस में दर्ज FIR में भी आरोपित को मुस्लिम मज़हब का बताया गया है।

FIR Copy

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि साल 2019 में मुंबई के कॉल सेंटर में एक साथ काम करने के दौरान आफ़ताब और श्रद्धा लिव इन रिलेशन में रहना शुरू कर दिए थे। बाद में श्रद्धा ने आफताब पर शादी का दबाव बनाया। हालंकि इसके लिए मृतका के परिजन तैयार नहीं थे। बाद में सबको छोड़ कर श्रद्धा आफताब के साथ दिल्ली में रहने चली आई। यहाँ आफताब ने 18 मई 2022 को श्रद्धा का गला दबा कर मार डाला और लाश के 35 टुकड़े कर के 18 दिनों में ठिकाने लगा दिया। नवम्बर 2022 में श्रद्धा के पिता की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

जनजातीय गौरव दिवस: जो ईसाई मिशनरी, अंग्रेज, इस्लामी आक्रांता… सबसे लड़े, 12 नायकों की गाथा एक साथ पढ़िए

भगवान बिरसा मुंडा की जयंती ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन उन नायकों को याद करने का है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दिया। वे ईसाई मिशनरियों की धर्मांतरण की साजिशों से लड़े। अंग्रेजों से लड़े। इस्लामी आक्रांताओं से लड़े।

सबसे पहले बात भगवान बिरसा मुंडा की। युवावस्था में ही बिरसा मुंडा अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह में नायक बन कर उभरे और जनजातीय समूह ने उन्हें अपना नेता माना। 25 से भी कम उम्र में उन्होंने देश के लिए बलिदान दे दिया। उनका जन्म छोटानागपुर पठार क्षेत्र में 1875 ईस्वी में हुआ था। ईसाइयों द्वारा संचालित एक विद्यालय में कुछ दिन पढ़ने के दौरान उन्हें जनजातीय वर्ग के धर्मांतरण की साजिशों का पता चला।

उन्होंने मुंडा और उराँव समुदाय को एकजुट किया। 1886-90 में वो चाईबासा के विद्रोह में शामिल रहे। 3 मार्च, 1900 को चन्द्रक्रधरपुर के जम्कोपाई जंगलों में जब वे अपने साथियों के साथ सो रहे थे, तभी अग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनके संघर्ष और दबाव का ही नतीजा था कि ब्रिटिश सरकार को जनजातीय समुदाय के जमीन के अधिकारों के संरक्षण के लिए कानून बनाना पड़ा

अकाल पीड़ित जनता की सहायता के लिए उन्हें ‘धरती बाबा’ की उपाधि लोगों ने दी। 1897-1900 के बीच अंग्रेजों से उनका समाज का कई बार युद्ध हुआ। 1897 में उन्होंने तीर-कमान और तलवार से लैस साथियों के साथ खूँटी थाने पर हमला किया था। 1898 में तांगा नदी के किनारे संघर्ष हुआ। 1900 में डोमबाड़ी पहाड़ी पर संघर्ष हुआ। इस दौरान अंग्रेजों ने काफी क्रूरता की।

रघुनाथ शाह और शंकर शाह : मध्य प्रदेश का गोंडवाना, जिसे वर्तमान में जबलपुर के नाम से जाना जाता है, वहाँ के राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुँवर रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों से लड़ते हुए बलिदान दे दिया था। सितंबर 2021 में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इन जनजातीय नायकों के सम्मान में ‘जनजातीय गौरव समारोह’ में शिरकत की थी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत ने दोनों को तोपों से बाँधकर उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। दोनों ने अपने आसपास के राजाओं को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट किया था। उनकी कविताओं ने शहरवासियों में विद्रोह की अग्नि सुलगा दी थी। हालाँकि, एक गद्दार के कारण इन दोनों को अंग्रेजों ने पकड़ लिया था।

खाज्या नायक : ये जनजातीय नायक गुमा नायक नाम के एक चौकीदार के बेटे थे। अंग्रेजों से लोहा लेते हुए ये बलिदान हुए थे। अंग्रेजों की भील-गोंड पलटन में सिपाही रहे खाज्या नायक सेंधवा-जामली चौकी से सिरपुर तक 24 मील लम्बे मार्ग की निगरानी का कार्य सौंपा गया था। 1831-51 तक नौकरी के बाद उन्होंने एक लुटेरे को एक व्यक्ति को लूटते देखा तो उस पर हमला किया। उसकी मौत हो गई तो इन्हें नौकरी से निकाल कर जेल भेज दिया गया। 1857 के युद्ध में उन्हें वापस बुलाया गया, लेकिन कैप्टन बर्च नाम के एक अंग्रेज अधिकारी ने उनके जाति-समुदाय और रंग-रूप पर भद्दी टिप्पणियाँ की। उन्होंने अपने साथियों के साथ अंग्रेजों को लूटा और कइयों को मार गिराया। बाद में 1860 में एक मुठभेड़ में वो बलिदान हुए। बड़वानी में उनका बड़ा प्रभाव था।

सीताराम कँवर : 1857 की क्रांति के दौरान उन्होंने बड़वानी राज्य के नर्मदा पार के क्षेत्र (जिनमें आज का निमाड़ क्षेत्र सम्मिलित है) में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बड़े विद्रोह का नेतृत्व किया था। सतपुरा श्रेणी के भीलों में उन्होंने आज़ादी की अलख जगाई। तांत्या टोपे के साथ उनके संपर्क थे। 9 अक्टूबर, 1958 को उनका बलिदान हुआ था। उन्होंने एक साथ कई जगहों पर विद्रोह किया। होल्कर के राजा ने अंग्रेजों के साथ मिल कर इन्हें मारने का कुचक्र रचा। दिलशेर खान को एक बड़ी सेना के साथ भेजा गया था। गाँव वालों को बचाने के लिए ये अंग्रेजी सेना से भिड़ गए। उस युद्ध में 20 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी बलिदान हुए थे।

भीमा नायक : इन्हें ‘निमाड़ का रॉबिनहुड’ भी कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान भी कहा था कि जैसे मेरठ में मंगल पांडेय थे, वैसे ही मध्य प्रदेश में भीमा नायक। जनजातीय लोगों को एकजुट कर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों से भिड़ने वाले भीमा नायक की कोई तस्वीर/स्केच तक अंग्रेजों के हाथ नहीं लग पाई। बड़वानी रियासत से लेकर महाराष्ट्र के खानदेश तक उनका प्रभाव था। 1857 के अम्बापानी युद्ध में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। तात्या टोपे ने निमाड़ में उनसे मुलाकात की थी। 29 दिसम्बर, 1876 को पोर्टब्लेयर में उन्होंने अंतिम साँस ली। एक गद्दार की मुखबिरी के कारण उन्हें पकड़ा गया था।

रघुनाथ सिंह मंडलोई : ये खरगोन के जनजातीय समाज के ग्राम टांडाबरुड़ के रहने वाले थे। वो भिलाला जनजाति के नायक थे। अक्टूबर 1858 में बीजागढ़ के किले में अंग्रेजों ने उन्हें घेर लिया था। इसी दौरान उन्हें बंदी भी बना लिया गया था। उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूँका हुआ था।

सुरेंद्र साय: मात्र 18 वर्ष की उम्र से ही इन्होने अंग्रेजों के विरुद्ध हथियार उठा लिया था। इनका जन्म 23 जनवरी, 1809 को संभलपुर के पास खिंडा में हुआ था। उन्होंने गोंड और बिंझल जनजातीय समुदाय के लोगों के हक़ की आवाज़ उठाई। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने देश के लिए योगदान दिया। इसके 5 वर्षों बाद उन्हें अंग्रेजों ने पकड़ लिया। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के असीरगढ़ किले में उन्हें कैद कर के रखा गया था। 23 मई, 1884 को उनका निधन हुआ। ये जनजातीय राजवंश के थे, लेकिन अंग्रेजों ने इन्हें नज़रअंदाज़ कर के राजा के निधन के बाद रानी को सत्ता सौंप दी और रिमोट से शासन चलाने लगे। डेबरीगढ़ में भी उन पर अग्रेजों ने जानलेवा हमला किया था, लेकिन वो वहाँ से किसी तरह बच निकले थे।

टंट्या भील: अंग्रेज इन्हें डकैत मानते थे, लेकिन ये एक स्वतंत्रता सेनानी थे। वो अंग्रेजों का धन लूट लेते थे और इसे गरीबों में बाँट देते थे। 19 अक्टूबर, 1889 को इन्हें अंग्रेजों ने मौत की सज़ा दे दी थी। इन्हें फाँसी से लटका दिया गया था। इनका जन्म बरदा तहसीन के पंधाना में 1840 के करीब में हुआ था। अंग्रेजों ने इनका साथ छल किया था। इन्हें माफ़ी देने के नाम पर पकड़ लिया गया था। 12 वर्षों तक इन्होने आक्रांता अग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। जनता भी इनका साथ देती थी। सभी उम्र के लोग प्यार से उन्हें ‘मामा’ कहते थे। गुरिल्ला युद्ध में पारंगत रहे टंट्या भील ने कई बार जेल तोड़ डाली थी। उनकी बहन के पति ने ही गद्दारी कर के उन्हें पकड़वा दिया था।

मंशु ओझा : ये इन जनजातीय योद्धाओं से कुछ पीढ़ी आगे के नायक हैं। 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान इन्होने अंग्रेजों की नाक में दम किया था। नवंबर 1942 में अंग्रेजों ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था। नरसिंहपुर जेल में इन्हें कैद कर दिया गया। कड़ी यातनाएँ दी गईं। लेकिन, इन्होंने अपने सपनों का आज़ाद भारत देखा। 28 अगस्त, 1981 को इनका निधन हुआ। रातामाटी में इनका जन्म हुआ था, लेकिन परिवार बाद में घोड़ाडोंगरी के बैतूल में रहने लगा। निर्धनता थी ही, शिक्षा-दीक्षा भी नहीं हो पाई थी। देशभक्ति गीत गाते हुए इन्होंने अपने साथियों के साथ मिल कर रेल की पटरियाँ उखाड़ी थीं। इनके पिता का नाम उमराव ओझा था।

रानी दुर्गावती: इनका जन्म 5 अक्टूबर, 1524 ईस्वी को हुआ था। ये अंग्रेजों के शासन से कई 3 सदी पहले की वीरांगना थीं। मध्य प्रदेश के गोंडवाना में उनका शासन था। जिस गढ़मंडला राज्य पर उनका शासन था, उसका केंद्र जबलपुर में था। उनके पति गौड़ राजा दलपत शाह की असामयिक मृत्यु हो गई थी। रानी दुर्गावती ने अपने नाबालिग

अपने नाबालिग बेटे वीर नारायण को गद्दी पर बिठाया। हालाँकि, शासन और राजकाज वही संभाला करती थीं। इलाहाबाद के मुग़ल आक्रांता आसफ खान के साथ इनका युद्ध हुआ। इनका शसन 1550-1564 तक चला था। अकबर के आदेश पर जब मुगलों ने उन पर आक्रमण किया, तब उन्होंने होने दीवान से कहा था कि गुलाम रहने से बेहतर है युद्ध के मैदान में सम्मान से मरना। युद्ध में इन्होंने मैदान छोड़ने या दुश्मन के हाथों मरने से अच्छा खुद की जान लेना उचित समझा।

मुड्डे बाई : मध्य प्रदेश के जनजातीय लोगों के लिए 9 अक्टूबर का दिन काफी खास रहता है, क्योंकि इस दिन 1930 में अंग्रेजों के विरुद्ध 400 आदिवासियों ने मिल कर जंगल सत्याग्रह आरंभ किया था।ग्रामीणों के इस सत्याग्रह से बौखलाए अंग्रेजों द्वारा मुड्डे बाई, रेनो बाई, देभो बाई और बिरजू भोई की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस गोलीकांड ने अंग्रेजों की क्रूरता का नया अध्याय लिखा। अंग्रेजों ने जंगल पर जनजातीय लोगों के अधिकार को कुचलते हुए उनके लकड़ी काटने तक पर प्रतिबंध लगा रखा था।

हम हिंदू-वह मुस्लिम… पिता ने कई बार किया आगाह, फिर भी परिवार को ठुकरा श्रद्धा ने आफताब को चुना: जानिए कैसे खुला मामला

दलित श्रद्धा वाकर की हत्या का खुलासा 8 नवंबर 2022 को उसके पिता द्वारा दिल्ली के महरौली थाने में FIR दर्ज करवाने के बाद हुई। शिकायत में श्रद्धा के पिता ने बताया है कि उन्होंने बेटी को खुद के हिन्दू होने की दुहाई दी थी। उसे गैर मजहब के लड़के से रिश्ता न रखने की सलाह दी थी। लेकिन, श्रद्धा ने खुद को बालिग बता परिवार को छोड़ आफताब को चुन लिया।

श्रद्धा के पिता विकास मदन वालकर ने शिकायत में बताया है कि वे मूल रूप से महाराष्ट्र के पालघर के रहने वाले हैं। श्रद्धा की माँ का निधन 23 जनवरी 2020 को हो गया था। श्रद्धा और आफताब की मुलाकात मुंबई के शिशी कॉल सेंटर में हुई थी। साल 2019 में श्रद्धा ने अपने परिवार को बताया कि वह आफताब पूनावाला के साथ लिव इन रिलेशनशिप में है। इसका श्रद्धा के पिता ने विरोध किया।

शिकायत में श्रद्धा के पिता ने कहा है कि वे हिन्दू हैं और कोली जाति से आते हैं। उन्होंने आफताब के मुस्लिम होने और अंतरधार्मिक विवाह न करने की श्रद्धा को सलाह दी। तब श्रद्धा ने अपने पिता के सलाह को सिरे से खरिज करते हुए खुद के बालिग होने और अपने फैसले लेने में सक्षम होने की बात कही। श्रद्धा की दिवंगत माँ ने भी अपनी बेटी को समझाने की बहुत कोशिश की। लेकिन वह अपना घर छोड़ कर आफताब के साथ रहने मुंबई चली गई।

शिकायत में विकास मदन वालकर ने बताया है कि पत्नी की मौत के बाद उनकी श्रद्धा से एक-दो बार बात हुई। इस दौरान उन्होंने बेटी को घर लौट आने की सलाह दी। लेकिन श्रद्धा नहीं मानी। श्रद्धा के पिता बेटी के इस रवैए से नाराज थे और काफी कम बात होती थी। इस दौरान श्रद्धा अपनी दोस्त शिवानी और एक अन्य दोस्त लक्ष्मण से बात किया करती थी। इन्ही दोस्तों से श्रद्धा के पिता को बाद में जानकारी हुई कि आफताब आए दिन श्रद्धा को मारता-पीटता था।

शिकायत में बताया गया है कि 14 सितम्बर 2022 को श्रद्धा के भाई जय को उसके दोस्त लक्ष्मण ने 2 महीने से श्रद्धा से सम्पर्क न होने की जानकारी दी। श्रद्धा का फोन भी बंद आ रहा था। श्रद्धा के पिता ने सबसे पहले महाराष्ट्र के मानिकपुर में अपनी बेटी की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करवाई। यह रिपोर्ट महाराष्ट्र पुलिस ने दिल्ली के महरौली थाना ट्रांसफर कर दी। महाराष्ट्र में सचिन नाम के पुलिस अधिकारी ने श्रद्धा के पिता को उनकी बेटी के दिल्ली छतरपुर इलाके में आफताब के साथ रहने की जानकारी दे दी थी।

शिकायत में श्रद्धा के पिता ने कहा है कि उनकी बेटी और आफताब के रिश्ते खराब रहते थे। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

CM गहलोत के गृह जिले में मास्टर जस्सू खान, 10वीं की छात्रा से किया गंदा काम: क्लास से खींचा-बेल्ट से पीटा, देखिए Video

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर से एक शिक्षक की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें कुछ लोगों को शिक्षक को बेल्ट से ​पीटते हुए देखा जा सकता है। शिक्षक का नाम जस्सू खान बताया जा रहा है। वह प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता है। उस पर नाबालिग छात्रा से अश्लील हरकत करने का आरोप लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला जोधपुर के देचू ग्रामीण क्षेत्र का है। आरोपित शिक्षक जस्सू खान (30) के खिलाफ देचू थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। बताया जा रहा है कि गुरु नानक जयंती (Guru Nanak Jayanti 2022) के मौके पर स्कूलों में छुट्टी थी। उसी दिन जस्सू खान ने एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर नाबालिग छात्रा को स्कूल बुलाया और फिर उसके साथ अश्लील हरकत की। छात्रा 10वीं कक्षा में पढ़ती है। घर पहुँचकर छात्रा ने अपने परिजनों को जस्सू खान की घिनौनी करतूतों के बारे में बताया।

राजस्थान भाजपा के प्रदेश मंत्री लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने भी अपने ट्विटर हैंडल से सोमवार (14 नवंबर 2022) को वीडियो शेयर कर लिखा है, “राजस्थान के मुख्यमंत्री के जिले जोधपुर में अपनी ही छात्रा से छेड़छाड़ करने वाले शिक्षक जस्सू खान को गाँव वालों ने सबक ​सिखाया।”

देचु थाना इंचार्ज राजेश बिश्नोई के मुताबिक घटना से आक्रोशित परिजनों ने स्कूल पहुँचकर हंगामा किया और आरोपित जस्सू खान को क्लास से खींचकर बाहर ले आए। इसके बाद बेल्ट से उसे पीटना शुरू कर दिया। पिटाई के बाद टीचर अपनी गलती स्वीकार करते हुए सुनाई दे रहा है और खुद को छोड़ देने की गुहार लगा रहा है। जस्सू ने कहा कि अब उसे अक्ल आ गई। आगे से ऐसी गलती दोबारा नहीं करेगा। पिटाई के बाद गुस्साए परिजनों ने आरोपित टीचर को पुलिस के हवाले कर दिया। इसी दौरान खान की पिटाई का वीडियो किसी ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

बकरा काटने में ट्रेंड है आफताब, हिमाचल-उत्तराखंड दिखा श्रद्धा को काटा: दूसरी लड़की से उसी कमरे में ‘इश्कबाजी’ जहाँ फ्रीज में रखे थे शव के टुकड़े

27 साल की श्रद्धा वाकर (Shraddha Walker) के 35 टुकड़े करने वाला आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) बकरा काटने में ट्रेंड है। हत्या करने से पहले वह श्रद्धा के साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड घूमने गया था। इतना ही नहीं दक्षिणी दिल्ली के महरौली के उसी फ्लैट में वह एक और लड़की के साथ इश्कबाजी कर रहा था, जहाँ फ्रिज में श्रद्धा के शव के टुकड़े रखे हुए थे। हालाँकि लड़की को इसकी भनक नहीं लगी।

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि श्रद्धा की हत्या के बाद आफताब फ्लैट में इस लड़की को लेकर आया था। साइकोलॉजिस्ट बताई जा रही यह लड़की बंबल एप के जरिए आफताब के संपर्क में आई थी। इसी डेटिंग एप से श्रद्धा से भी उसकी पहचान हुई थी।

बताया जा रहा है कि श्रद्धा की हत्या की प्लानिंग आफताब ने मुंबई में ही अप्रैल में कर ली थी। इसी प्लानिंग के तहत वह श्रद्धा को घुमाने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड लेकर गया था। इसके बाद दिल्ली लौटकर उसने जान-बूझकर ऐसी जगह पर फ्लैट लिया, जहाँ जंगल पास में हो।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल में हिमाचल से लौटने के बाद श्रद्धा को लेकर आफताब पहले पहाड़गंज के एक होटल में रहा। फिर एक सस्ते पीजी में रुका। इसमें आफताब की मदद उसके साथियों ने की थी। जंगल के बगल में फ्लैट मिलते ही आफताब वहाँ शिफ्ट हो गया। इसी फ्लैट में 18 मई 2022 को गला सोते समय उसने गला दबाकर श्रद्धा की हत्या कर दी। रात भर वह लाश के साथ रहा। अगली सुबह बाजार से फ्रिज और आरी खरीद कर लाया था।

श्रद्धा की हत्या के बाद आफताब ने केमिकल से पूरे कमरे और हर सामान को साफ किया था। दिल्ली पुलिस की जाँच में फ्रिज से एक बूँद खून का कतरा भी नहीं मिला। बताया जा रहा है कि ग्रेजुएशन के बाद आफताब मुंबई के एक होटल में शेफ की नौकरी कर चुका था। वहाँ उसने मुर्गा और बकरा काटने की ट्रेनिंग ली थी। डेक्सटर नाम की वेब सीरीज देख उसने लाश 18 दिनों में ठिकाने लगाई थी।

बताया जा रहा है कि साल 2019 में एक डेटिंग एप के जरिए आफताब और श्रद्धा की मुलाकात हुई थी। तब से दोनों एक साथ ही रह रहे थे। श्रद्धा की हत्या के बाद आफताब ने फिर से डेटिंग एप को डाउनलोड कर लिया और गुरुग्राम के एक कॉल सेंटर में नौकरी भी कर ली। श्रद्धा की हत्या के राज को छिपाने के लिए उसके इंस्टाग्राम एकाउंट से दोस्तों को मैसेज भेजे। श्रद्धा के क्रेडिट कार्ड बिलों का भी भुगतान किया।

‘श्रद्धा ने मैसेज कर कहा था – मुझे बचा लो’: दोस्त ने किया खुलासा, कहा – आफताब से उसका होता था खूब झगड़ा, परिवार से नहीं करती थी बातचीत

श्रद्धा की दर्दनाक मौत की कहानी सुनकर पूरा देश स्तब्ध है। अब एक नए खुलासे से स्पष्ट हो गया है कि श्रद्धा और उसके प्रेमी के बीच पहले सी ही सब कुछ ठीक नहीं था और दोनों में बहुत झगड़े होते थे। दरअसल, श्रद्धा मौत से कुछ दिन पहले तक अपने जिस दोस्त के संपर्क में थी – उसी ने अब इन बातों का खुलासा किया।

श्रद्धा के दोस्त लक्ष्मण नाडर ने ‘इंडिया टुडे’ को बताया कि आफताब और श्रद्धा का बहुत झगड़ा होता था। उसने कहा कि एक बार श्रद्धा ने मैसेज कर खुद को बचा लेने की बात कही थी। वो सभी दोस्त रात में उसके पास पहुँचे थे और उसे बचाया था। दरअसल, लक्ष्मण नाडर की वजह से ही श्रद्धा हत्याकांड का पर्दाफाश हो पाया। श्रद्धा अपने परिवार से पूरी तरह से कट गई थी और बातचीत करना बंद कर दिया था। मगर, वह अपने दोस्त नाडर के संपर्क में थी।

लक्ष्मण ने बताया की श्रद्धा को लेकर अगस्त 2022 से ही चिंता बढ़ने लगी थी। दो महीने से ये लोग संपर्क में नहीं थे और श्रद्धा किसी भी मैसेज का रिप्लाई नहीं कर रही थी। लक्ष्मण ने कहा कि उसके बाद उन्हने हमारे कोमन दोस्तों से संपर्क साधा, लेकिन कुछ पता नहीं चला, फिर इन लोगों ने उसके भाई को पूरी बात बताई और पुलिस की सलाह लेने की बात कही।

श्रद्धा की आफताब अमीन पूनावाला से मुंबई में जान-पहचान हुई। फिर एक दिन आफताब ने दिल्ली में श्रद्धा को गला दबाकर मार डाला। उसके शव के 35 टुकड़े किए। 18 दिन तक रात के करीब 2 बजे वह घर से निकल श्रद्धा के बॉडी पार्ट्स दिल्ली में इधर-उधर फेंकता रहा। श्रद्धा की हत्या के करीब छह महीने बाद यह खुलासा हुआ है। 12 नवंबर 2022 को आफताब की गिरफ्तार हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रद्धा मूल रूप से महाराष्ट्र के पालघर की रहने वाली थी। आफताब से उसकी मुलाकात मुंबई में हुई थी। दोनों मलाड के एक कॉल सेंटर में साथ काम करते थे। जान-पहचान कुछ समय बाद प्यार में बदल गई। दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे। जब श्रद्धा ने शादी का दबाव बनाया तो शुरुआत में आफताब ने टालमटोल की। आखिर में उसे जान से ही मार डाला।

बताया जा रहा है कि शादी का दबाव बढ़ने पर आफताब दिल्ली आया। फिर बहाने से श्रद्धा को बुलाया। यहाँ पर भी दोनों साथ रहने लगे। पुलिस पूछताछ में आफ़ताब ने बताया कि 18 मई 2022 को उसका शादी को लेकर श्रद्धा से काफी झगड़ा हुआ था। इसी दौरान उसने गुस्से में श्रद्धा को गला दबाकर मार डाला। बाद में सबूत छिपाने के लिए उसके शव के 35 टुकड़े किए और उसे दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में फेंक दिया।

दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व CEO एसएम अली पर होगी कार्रवाई, LG ने गृह मंत्रालय से की सिफारिश: अमानतुल्लाह खान के इशारों पर लिए थे अवैध फैसले

दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने गृह मंत्रालय से दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व सीईओ और आईएएस अधिकारी एसएम अली के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की सिफारिश की है। एसएम अली पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान के कहने पर अवैध प्रस्तावों को मंजूरी दी थी।

‘इंडिया टुडे’ ने एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने सीसीएस (CCA) रूलिंग 1965 के नियम 16 ​​के अंतर्गत केंद्रीय गृह मंत्रालय से दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व सीईओ और आईएएस अधिकारी एसएम अली के खिलाफ कार्यवाही करने की सिफारिश की है।

दरअसल, एसएम अली पर दिल्ली वक्फ बोर्ड के सीईओ रहते हुए, नए सीईओ और संविदा कर्मियों की नियुक्ति मामले में अनियमितता बरतने और नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लगे हैं। इस मामले में बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान के खिलाफ चल रही सीबीआई की जाँच रिपोर्ट में सामने आया है कि एसएम अली ने वक्फ वॉर्ड के सीईओ रहते हुए बिना किसी आपत्ति के अवैध प्रस्तावों को मंजूरी दे दी थी।

यही नहीं, उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड के सीईओ पद के लिए प्रकाशित विज्ञापन में दिल्ली वक्फ अधिनियम और नियम का उल्लंघन किया गया था। साथ ही, नए सीईओ के रूप में महबूब आलम की नियुक्ति को मंजूरी देते हुए औपचारिक तौर पर अपना पद भी महबूब आलम को सौंप दिया था।

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान दिल्ली वक्फ बोर्ड में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधी शाखा (ACB) ने कहा था कि अमानतुल्लाह खान के खिलाफ बेहद गंभीर आरोप हैं। इन आरोपों के चलते उन्हें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान खान कथित तौर पर कई अनियमितताओं में शामिल थे।

अमानतुल्लाह खान पर दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रहते हुए वित्तीय गड़बड़ी, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में किरायेदारी का निर्माण, वाहनों की खरीदी में भ्रष्टाचार और दिल्ली वक्फ बोर्ड में सेवा नियमों में उल्लंघन करते हुए 33 लोगों की नियुक्ति के आरोप है। इन तमाम आरोपों को लेकर ही एंटी करप्शन ब्यूरो ने साल 2020 में अमानतुल्लाह खान के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) के विभिन्न प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया था।

तिहाड़ में सत्येंद्र जैन को VVIP ट्रीटमेंट: जेल सुपरिटेंडेंट को किया गया निलंबित, ED ने बताया था – जेल में मसाज करा रहे हैं AAP के मंत्री

दिल्ली सरकार के मंत्री व AAP नेता सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) को वीआईपी ट्रीटमेंट देने के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला किया गया है। इस मामले में तिहाड़ जेल के अधीक्षक अजीत कुमार को निलंबित कर दिया गया है। प्रथम दृष्टया पाया गया है कि उन्होंने ऐसी अनियमितताएँ की हैं, जिनको लेकर जाँच करने की आवश्यकता है। दिल्ली सरकार के कारागार विभाग ने यह कार्रवाई की है।

भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने पिछले हफ्ते दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन को वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने का आरोप लगाते हुए उन्हें तिहाड़ जेल से स्थानांतरित करने की माँग की थी। इससे पहले जेल में जैन को वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया था। मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के चीफ सेक्रेट्री से रिपोर्ट माँगी थी। जैन पर आरोप है कि वह तिहाड़ जेल में रहते हुए जेल अधिकारियों की मिलीभगत से सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।

ईडी ने आरोप लगाया था कि सत्येंद्र जैन को तिहाड़ जेल में स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। इडी ने सत्येंद्र जैन से संबंधित समस्त डेटा गृह मंत्रालय को भी दिया था। आरोप लगाया गया था कि सत्येंद्र जैन की पत्नी पूनम जैन को उनके सेल तक पहुँचने की सुविधा दी गई है। कई बार वह मुलाकात के लिए तय समय से अधिक देर तक वहाँ रुकती हैं। इसके अलावा जैन को जेल में हेड मसाज, फुट मसाज और बैक मसाज जैसी तमाम सुविधाएँ दी जा रही हैं।

ईडी ने कोर्ट को दी शिकायत में कहा था कि सत्येंद्र जैन जेल के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। ईडी ने सत्येंद्र जैन के ऐशो-आराम की तमाम सीसीटीवी फुटेज भी कोर्ट को सौंपी थीं। इसके अलावा महाठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) ने भी सत्येंद्र जैन के खिलाफ सनसनीखेज दावे किए थे। उसने दिल्ली के उप-राज्यपाल वी के सक्सेना को चिट्ठी लिखकर बताया था कि जैन उससे मिलने तिहाड़ जेल में आते थे और ‘प्रोटेक्शन मनी’ के तौर पर उससे 10 करोड़ रुपए लिए थे।

महाठग के पत्र में लिखा था, ”2017 में मेरी गिरफ्तारी के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में कई बार सत्येंद्र जैन मुझसे मिलने आए थे।” सुकेश चंद्रशेखर ने पत्र में लिखा है कि 2019 में सत्येंद्र के पीए ने उसे जेल के अंदर सभी बुनियादी सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए प्रोटेक्शन राशि के रूप में हर महीने 2 करोड़ रुपए देने को कहा था। उस वक्त जैन के पास जेल विभाग का जिम्मा था। बताया जा रहा है कि जेल में बैठकर लिखे गए इस पत्र को सुकेश ने अपने वकील अनंत मलिक के जरिए भेजा था।

13 साल की बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार, काट डाले स्तन, गुप्तांग और जीभ: खून से लथपथ नाबालिग को बगीचे में फेंक कर चले गए दरिंदे

बिहार (Bihar) के समस्तीपुर (Samastipur) जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ कुछ बदमाशों ने 13 वर्षीय लड़की के साथ गैंगरेप करने के बाद उसका गुप्तांग, स्तन और जीभ काटा। फिर उसे मरा समझ बगीचे में फेंक कर चले गए। इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है। वहीं, पुलिस मामला प्रकाश में आने के बाद जाँच में जुट गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना समस्तीपुर जिले के चकमेहसी थाना क्षेत्र की है। परिजनों ने बताया कि 11 नवंबर, 2022 को कुछ दरिदें बच्ची को घर से उठा कर अपने साथ ले गए। इसके बाद सभी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और बेहोशी की हालत में बच्ची को घर के पास वाले बगीचे में छोड़ कर चले गए। काफी खोजबीन के बाद बच्ची बगीचे में खून से लथपथ मिली थी। भाकपा माले की स्थानीय टीम को जब इस मामले का पता चला, तब इस घटना का खुलासा हुआ।

स्थानीय ग्रामीण चंदा जमा कर बच्ची का इलाज करा रहे हैं। बच्ची की हालत काफी नाजुक बताई जा रही है। समस्तीपुर के एसपी हृदय कांत ने कहा, “एक 13 वर्षीय लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला आया है। चकमेहसी पुलिस को मुजफ्फरपुर बयान लेने के लिए भेजा गया है। मामले की छानबीन चल रही है। इस घटना को अंजाम देने वालों को किसी भी हाल में नहीं बख्शा जाएगा।”

बता दें कि यह मामला सामने आने के बाद भाकपा माले की टीम भी गाँव पहुँचकर बच्ची के परिजनों से मिली। इस घटना को लेकर भाकपा माले के कल्याणपुर प्रखंड सचिव दिनेश कुमार और पूसा प्रखंड सचिव अमित कुमार ने परिजनों को आरोपितों को सजा दिलाने का भरोसा दिलाया। वहीं, बच्ची के साथ हैवानियत की सारी हदें पार करने वाले बदमाशों को लेकर इलाके में काफी रोष है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुलिस से इस घटना को अंजाम देने वाले बदमाशों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की माँग की है।

अदनान सामी को क्यों छोड़ना पड़ा था पाकिस्तान? गायक ने किया बड़ा खुलासा, कहा – सालों से चुप रहा, Pak सरकार ने मेरे साथ जो किया…

भारतीय नागरिक बनने के लिए साल 2015 में अपनी पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ने वाले गायक अदनान सामी ने दावा किया है कि जब वह पाकिस्तान में रह रहे थे तो वहाँ की सरकार ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। अदनान ने पाकिस्तान प्रशासन पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा है कि वह जल्द ही वहाँ की सच्चाई का खुलासा करेंगे। सोमवार (14 नवंबर, 2022) को अदनान सामी ने ट्विटर पर एक नोट शेयर करते हुए कहा है, “लोग पूछते हैं कि पाकिस्तान के लिए मेरे दिल में इतनी नफरत क्यों है? सच तो यह है कि मेरे मन में पाकिस्तान के लोगों के प्रति कोई नफरत नहीं है, वहाँ के लोग भी मुझे प्यार करते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा, “मेरी समस्या वहाँ की सरकार से है, जो लोग मुझे जानते हैं उन्हें पता है कि प्रशासन ने मेरे साथ क्या किया। यही वजह थी कि मैंने पाकिस्तान छोड़ दिया। जल्द ही इस पूरी सच्चाई का पर्दाफाश करूँगा, कि उन्होंने मेरे साथ क्या किया। इस बारे में कई लोगों को नहीं पता है, मेरे खुलासे से कम से कम आम जनता तो हैरान हो ही जाएगी। कई सालों तक मैं चुप रहा, सही समय आने पर खुलासा करूँगा।”

गौरतलब है कि अदनान सामी ने साल 2015 में पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ दी थी। इसके बाद, भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया और साल 2016 में भारतीय नागरिक बन गए। अदनान संगीत की दुनिया के मशहूर गायक हैं। यही कारण है कि संगीत में उनके योगदान के लिए साल 2020 में उन्हें भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म श्री भी दिया गया था। हालाँकि, पद्म श्री के लिए अदनान के नाम का ऐलान होने के बाद देश के एक बड़े वर्ग ने सरकार की पसंद की आलोचना की थी।

इस आलोचना का कारण अदनान के पिता अरशद सामी खान थे। जो कि पाकिस्तानी वायु सेना के रिटायर्ड अधिकारी थे, उन्होंने 1965 के युद्ध में भारत के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इस आलोचना के बाद उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वह एक भारतीय हैं और एक संगीतकार के रूप में उन्हें यह पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने कहा था, “आप एक बेटे को उसके पिता के कृत्यों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते और पिता को उसके बेटे के कृत्यों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।”

अदनान सामी ने यह भी कहा था, “जहाँ तक ​​मेरे पिता का सवाल है, वह एक सम्मानित सैनिक थे। उन्होंने, अपने मुल्क के लिए देशभक्ति का प्रदर्शन किया और मुझे इस पर गर्व है। मैंने उनसे एक वफादार नागरिक बनने को लेकर कई सबक सीखे हैं। आज मैं एक गौरवान्वित भारतीय हूँ। मेरी देशभक्ति और निष्ठा मेरे प्यारे देश के प्रति है और मुझे पुरस्कार मिलना विशुद्ध रूप से एक संगीतकार के रूप में मेरी योग्यता के आधार पर है और मेरे पिता के साथ मेरे जुड़ाव से इसका कोई लेना-देना नहीं है।”