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जहन्नुम का डर दिखा इंजीनियर अक्षय को बना दिया फहीम, दोस्तों ने गंगाजल पिला कराई घर वापसी: धर्मांतरण कराने वाले आलिम पर केस

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जहन्नुम के डर से इस्लाम कबूल करने वाले हिंदू युवक अक्षय गौर ने घर वापसी कर ली है। बताया जा रहा है कि दोस्तों, हिंदूवादी संगठन के आशोक पालीवाल और अन्य कार्यकर्ताओं ने उसे समझाया। उन्होंने मंदिर में पूजा-पाठ कर उसका शुद्धीकरण किया। इसके बाद गंगाजल पिलाकर उसकी घर वापसी करवाई।

गुरुवार (17 नवंबर 2022) को अक्षय के पिता गोविंद गौर ने नूरानी मस्जिद के आलिम अमीनुद्दीन कादरी के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया है कि आलिम ने उनके बेटे इंजीनियर अक्षय गौर को हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काया और उसका ब्रेनवॉश किया। उसे नौकरी दिलाने का लालच दिया, धमकाया। फिर मस्जिद में कलमा पढ़वाकर उसका धर्म परिवर्तन कर दिया। इसके बाद आलिम ने अक्षय का नाम मोहम्मद फहीम खान रख दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब चार महीने पूर्व अक्षय गौर ने फेसबुक पर अपने धर्मांतरण की सूचना दी थी। उसने फेसबुक पर कुर्ता पहने और टोपी लगाए हुए एक फोटो शेयर की थी। इसके साथ लिखा था, “मैंने अपना नया धर्म चुन लिया है। मेरा नया नाम मोहम्मद फहीम खान है।” जब हिंदू दोस्तों ने उसकी पोस्ट देखी तो वे हैरान रह गए। अब यह पोस्ट उसने डिलीट कर दी है।

फोटो साभार: दैनिक भास्कर

अक्षय गौर ने बताया, “सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद भी मैं बेरोजगार था। 5 महीने पहले मैं नागचून इलाके के पार्क में बैठा था। बहुत परेशान था। तभी वहाँ आलिम आया। उसने मुझसे कहा कि तुम परेशान लग रहे हो। तुम्हारा सब अच्छा होगा। अगर तुम हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लेते हो। अल्लाह का रास्ता अपनाओ। मस्जिद में आना। वहाँ नमाज पढ़कर देखो। तुम्हें अच्छा लगेगा। आलिम की बात सुनकर मैं दूसरे दिन मस्जिद में पहुँचा तो उसने हिंदू धर्म के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया। उसने यह भी कहा कि मैंने कई हिंदुओं को मुस्लिम बनाया है।”

अक्षय ने बताया, “मैं दो-तीन दिन लगातार मस्जिद में गया। आलिम ने मुझे डराया और कहा कि हिंदू हो या सिख या फिर क्रिश्चियन कितनी ही पूजा कर लो, जहन्नुम नसीब होता है। मुस्लिम ही ऐसा धर्म है कि अल्लाह की इबादत करने से जन्नत मिलेगी। आलिम की ये बातें मेरे दिमाग पर असर करने लगी। आलिम ने मुझे कलमा पढ़वाकर मेरा धर्म बदल दिया। उसने मुझे फहीम खान नाम दिया। जब मैंने अक्षय नाम बदलकर फेसबुक पर फहीम खान डाला तो मेरे दोस्त और परिजन हैरान हो गए।”

खंडवा के SP विवेक सिंह के मुताबिक, मोघट थाना पुलिस ने आलिम अमीनुद्दीन कादरी पर धार्मिक भावना आहत करने और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। वहीं, इस मामले में आलिम अमीनुद्दीन कादरी का कहना है कि उस पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं। युवक खुद ही मस्जिद में मुस्लिम बनने आया था। हमने उसे सलाह दी थी कि कानून के अनुसार काम करें। हम इस तरह के काम नहीं करते हैं, लेकिन वह नहीं माना।

Vikram-S: देश का पहला प्राइवेट रॉकेट लॉन्च, भारत ने रच दिया इतिहास – 3 सैटेलाइट्स के साथ गया 101 किलोमीटर की ऊँचाई तक

देश का पहला प्राइवेट रॉकेट ‘विक्रम-एस (Vikram-S)’ तीन सैटेलाइट्स के साथ सफलता पूर्वक प्रक्षेपित हुआ। इसी के साथ प्राइवेट स्पेस सेक्टर में भारत ने इतिहास रच दिया है। इसरो (ISRO) और हैदराबाद की कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के इस मिशन का नाम ‘प्रारंभ’ रखा गया है। इस मिशन के तीन पेलोड थे और यह एक उप कक्षीय मिशन था।

पृथ्वी की सतह से 101 किलोमीटर की दूरी पर पहुँच कर ‘विक्रम-एस (Vikram-S)’ समंदर (बंगाल की खाड़ी) में गिरा। 300 सेकेंड्स के ‘मिशन प्रारंभ’ से प्राइवेट स्पेस सेक्टर में भारत ने दमदार एंट्री की है। इसरो ने पहले इस मिशन के प्रक्षेपण के लिए स्काईरूट एयरोस्पेस को 12 नवंबर से 16 नवंबर का समय दिया था। लेकिन खराब मौसम के कारण 18 नवंबर को सुबह 11.30 बजे का समय तय हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया है।

Vikram-S की उड़ान 2 भारतीय और 1 विदेशी पेलोड के साथ

विक्रम-एस को हैदराबाद की कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ ने विकसित किया है। इसका नाम स्पेस प्रोग्राम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। देश के लिए नई शुरुआत के प्रतीक के तौर पर इस मिशन को ‘प्रारंभ’ नाम दिया गया है।

विक्रम-एस (Vikram-S) ने 2 भारतीय और 1 विदेशी पेलोड के साथ उड़ान भरी। इनमें चेन्नई के स्टार्टअप स्पेस किड्ज, आंध्र प्रदेश के स्टार्टअप एन-स्पेस टेक और आर्मेनियाई स्टार्टअप बाजूमक्यू स्पेस रिसर्च लैब के सैटेलाइट्स शामिल थे।

इस लॉन्च के बाद इसरो ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से मिशन ‘प्रारंभ’ के सफलता की जानकारी दी और स्काईरूट एयरोस्पेस व देश के लोगों को बधाई दी।

श्री हरिकोटा में विक्रम-एस के प्रक्षेपण के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। ट्विटर पर जितेंद्र सिंह ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम के सदस्यों के साथ एक तस्वीर शेयर की। आपको बता दें कि जितेंद्र सिंह को प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री के साथ-साथ पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रौद्योगिकी का प्रभार भी प्राप्त है।

विक्रम-एस को तैयार करने में लगे 2 वर्ष

स्काईरूट एयरोस्पेस के मुताबिक, इस मिशन पर काम साल 2020 में शुरू हुआ था। विक्रम-एस को बनाने में सिर्फ दो वर्षों का समय लगा है। विक्रम-एस सॉलिड फ्यूल्ड प्रोपल्शन, कटिंग एज एवियोनिक्स और कार्बन फाइबर कोर स्ट्रक्चर से लैस है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने जानकारी दी है कि इसका बॉडी मास 545 किलो, लेंथ 6 मीटर और डायमीटर 0.375 मीटर है।

अब तक इसरो अपने रॉकेट्स का प्रक्षेपण करता रहा है लेकिन यह पहली बार था जब इसरो ने किसी निजी कंपनी का मिशन अपने लॉन्चिंग पैड से प्रक्षेपित किया। जानकारों की मानें तो सरकार चाहती है कि छोटे मिशन का भार जो इसरो पर रहा है, वह अब प्राइवेट सेक्टर के भागीदारी को दिया जाए। ऐसा इसलिए ताकि इसरो से छोटे मिशन का लोड कम हो जाए और भारत की स्पेस एजेंसी इसरो बड़े-बड़े मिशन पर ध्यान केंद्रित कर सके।

मामू के घर गई थी 9 साल की बच्ची, खेल-खेल में बम उठा लिया: विस्फोट होते ही भांजी को छोड़ परिवार संग भागा अब्दुल, बंगाल की घटना

पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में देसी बम विस्फोट में 9 साल की बच्ची की मौत हो गई। धमाका अब्दुल हुसैन के घर में हुआ। अब्दुल मृत बच्ची का मामा है। घटना बुधवार (16 नवंबर 2022) की है।

रिपोर्ट के अनुसार मृत लड़की बछोरा गाँव स्थित अपने ननिहाल गई थी। बुधवार की शाम खेल-खेल में उसने घर में रखे बम को उठा लिया। नीचे गिरते ही बम फट गया। धमाका होते ही अब्दुल अपने परिवार के साथ घर छोड़कर भाग गया। घायल बच्ची को ग्रामीण अस्पताल ले गए, जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

अब्दुल हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार अब्दुल तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का कार्यकर्ता है। मीनाखान अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) अमीनुल इस्लाम ने बताया, “मृतक की पहचान तीसरी कक्षा की छात्रा सोहना खातून उर्फ ​​झूमा के रूप में हुई है। वह दक्षिण 24 परगना जिले के बसंती इलाके की रहने वाली थी। छात्रा घटना से दो दिन पहले अपने मामा के घर आई थी। विस्फोट में उसके साथ खेल रही सहेली रहीमा परवीन और अनीशा खातून घायल हो गईं।”

पुलिस के मुताबिक, “देसी बम झूमा के मामा अब्दुल हुसैन के घर में कैरम बोर्ड के बगल में रखा हुआ था। जब बच्ची ने मचान पर एक गेंद जैसी वस्तु देखी, तो जिज्ञासावश उसे पकड़ने का प्रयास किया। लेकिन देसी बम जमीन पर गिर गया और फट गया।” पुलिस के मुताबिक लड़की को लगा कि मचान पर नारियल रखा हुआ है। उसने उठाने का प्रयास किया तो वह नीचे गिर गया और धमाका हो गया।

अधिकारी के अनुसार बच्ची को ग्रामीण मिनाखान ग्रामीण अस्पताल लेकर आए थे। घटना के बाद अब्दुल अपने परिवार के साथ भाग गया था। लेकिन गुरुवार (17 नवंबर 2022) सुबह वह पकड़ा गया। पुलिस ने कहा कि अब्दुल के घर से 7 देसी बम भी बरामद किए हैं। उस पर आईपीसी की संबंधित धाराओं और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। उसके भाई अब्दुल सत्तार को भी गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के मुताबिक अब्दुल एक निर्माण श्रमिक है और किराने की दुकान भी चलाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह सत्तारूढ़ टीएमसी से भी जुड़ा हुआ है। उसका आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है। हालाँकि पार्टी ने इस दावे का पार्टी ने खंडन किया है। तृणमूल नेता अजीजुल गाजी ने कहा है, “पार्टी का अब्दुल हुसैन के साथ कोई संबंध नहीं है।”

छात्रा से रेप में NSUI का नेता गिरफ्तार: रुहाब मेनन ने मदद के नाम पर पहले दोस्ती की, फिर जंगल ले जाकर की दरिंदगी

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक छात्रा से रेप का आरोपित रुहाब मेनन गिरफ्तार किया गया है। वह कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI का प्रदेश महासचिव रहा है। उसे भानु प्रतापपुर में हो रहे उप चुनाव में भी पार्टी ने जिम्मेदारी दे रखी थी। रिपोर्टों के अनुसार रुहाब ने मदद के बहाने छात्रा से दोस्ती की। फिर जंगल में ला जाकर उसके साथ जबर्दस्ती की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीड़िता कांकेर के ही एक कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। आरोपित रुहाब ने कॉलेज में एडमिशन के दौरान उसकी मदद की थी। इसके बाद, वह लगातार पीड़िता के संपर्क में रहने की कोशिश करने लगा। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कुछ महीने पहले एडमिशन के दौरान रुहाब ने उसकी मदद की थी। एडमिशन के दौरान ही उसने पीड़िता का मोबाइल नंबर ले लिया था। इसके बाद अक्सर ही वह फोन पर बातें करता था।

बुधवार (16 नवंबर 2022) को रुहाब ने पीड़िता को फोन कर स्थानीय घड़ी चौक बुलाया था। जहाँ वह पढ़ाई की बातें करने के बाद घूमने के बहाने पीड़िता को कार में बैठा लिया। पीड़िता का कहना है कि कार में बैठाने के बाद रुहाब जबरन उसे सिंगारभाठ के जंगल में लेकर चला गया। जहाँ, उसने जंगल में ही कार रोककर उसके साथ दुष्कर्म किया।

कहा जा रहा है कि रुहाब की ​हरकतों को लेकर संगठन को पहले से ही जानकारी थी। इसलिए 15 नवंबर को उसे अनुशासनहीनता के आरोप में एनएसयूआई से निलंबित कर दिया गया था। करने का कारण बताते हुए निलंबित किया गया है। कांकेर एसपी शलभ सिन्हा का कहना है कि छात्रा की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। कहा जा रहा है कि रेप के बाद रुहाब ने इसकी शिकायत नहीं करने की धमकी भी छात्रा को दी थी। लेकिन उसके चंगुल से छूटते ही वह पुलिस के पास पहुँच गई।

1 सेकंड के भीतर 83% पासवर्ड क्रैक कर लेते हैं ऑनलाइन चोर: Big Basket ने भी की गड़बड़ी, करना पड़ा ट्वीट डिलीट

क्या आपको पता है लोग कैसे-कैसे पासवर्ड रखते हैं? स्ट्रॉन्ग पासवर्ड कैसे बनाना चाहिए? खराब पासवर्ड बनाने के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं? दुनिया भर के इंटरनेट यूजर्स द्वारा उपयोग किए जाने वाले पासवर्ड पर नॉर्डपास की एक रिपोर्ट है। इसी रिपोर्ट के आधार पर मिंट ने 15 नवंबर 2022 को एक स्टोरी प्रकाशित की।

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में 3.4 मिलियन (34 लाख) से अधिक लोगों ने अपना पासवर्ड रखा है – ‘पासवर्ड (password)’। मतलब भारत के तमाम इंटरनेट यूजर्स के बीच सबसे आम या यूँ कहें कि सबसे कॉमन पासवर्ड है – ‘पासवर्ड (password)’।

भारत के लोगों के द्वारा password के बाद ‘123456’ दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला पासवर्ड है। आश्चर्यजनक रूप से, इस सूची में ‘BigBasket’ चौथे स्थान पर रहा। ऑनलाइन ग्रोसरी शॉप की लोकप्रियता को दर्शाते हुए रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह भारत में चौथा सबसे आम पासवर्ड है।

मोस्ट कॉमन पासवर्ड पर नॉर्डपास की रिपोर्ट, स्रोत: नॉर्डपास

बिगबास्केट ने खुशी में कर दिया प्रचार

बिगबास्केट ने यह जाने बिना कि नॉर्डपास ने यह सूची कैसे तैयार की, अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर मिंट की रिपोर्ट को दर्शा दिया। कंपनी को लगा कि यह गर्व करने वाली बात है। हालाँकि, चीजें उनके अनुकूल नहीं थीं क्योंकि रिपोर्ट में इस्तेमाल की गई जानकारी डेटा लीक की घटनाओं पर आधारित थी।

अब डिलीट कर दिए गए ट्वीट में बिगबास्केट ने लिखा, ”अपने पार्टनर का नाम ‘पासवर्ड’ के तौर पर रखना गलत। हमारे नाम को ‘पासवर्ड’ के रूप में रखना सही।” हालाँकि, जैसे ही उन्हें अहसास हुआ कि इसमें गर्व करने की कोई बात नहीं है और सूची का मतलब है कि उनके सर्वर मजबूत और सुरक्षित नहीं थे, कंपनी ने ट्वीट को हटा दिया।

पासवर्ड पर नॉर्डपास की रिपोर्ट के मायने

एक ट्विटर यूजर रवि हांडा ने इस मुद्दे पर एक विस्तृत थ्रेड लिखा है। इस थ्रेड से इसके बारे में समझा जा सकता है। हांडा ने यह समझने के लिए नॉर्डपास से संपर्क किया कि वे सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले पासवर्ड पर रिपोर्ट कैसे लेकर आए। ईमेल करके हांडा ने नॉर्डपास से डेटा के स्रोत के बारे में पूछा।

जवाब में नॉर्डपास ने पुष्टि की कि उन्होंने स्वतंत्र शोधकर्ताओं के साथ मिलकर सूची तैयार की है, जिन्होंने 3 टेरा बाइट डेटा का अध्ययन किया।

दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि जिन स्वतंत्र शोधकर्ताओं के साथ उन्होंने काम किया, वे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ थे। इसके अलावा, यह पूछे जाने पर कि 3-टीबी डेटा कहाँ से आया, नॉर्डपास ने कहा कि वे स्रोत का खुलासा नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने स्रोत के साथ एक ‘नन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (एनडीए)’ पर हस्ताक्षर किए थे। नॉर्डपास ने यह भी उल्लेख किया कि उक्त जानकारी एकत्र करने के लिए उनके पास किसी कंपनी या सर्वर के डेटाबेस तक पहुँच नहीं थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पासवर्ड सूची लीक हुए डेटा से मिली है।

इसके अलावा, मिंट की रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से बताया गया कि ‘पासवर्ड डेटा’ सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा विश्लेषण किए गए डेटा के आधार पर संकलित किए गए थे। नॉर्डपास के अनुसार, इस वर्ष 200 सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले पासवर्डों में से 73% पिछले वर्ष के समान थे।

नॉर्डपास की बनाई सूची में लगभग 83% पासवर्ड को एक सेकंड के भीतर क्रैक करना आसान था, जिसमें ‘पासवर्ड’ और ‘123456’ शामिल हैं। रिपोर्ट में बता दिया गया है कि हैकर्स को पासवर्ड के रूप में ‘बिगबास्केट’ का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं के पासवर्ड को क्रैक करने में लगभग पाँच मिनट का समय लगेगा।

बिगबास्केट और 2020 का डेटा सुरक्षा मामला

बिगबास्केट अक्टूबर 2020 में डेटा उल्लंघन के लिए जाँच के दायरे में रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 20 मिलियन उपयोगकर्ताओं का डेटा कथित रूप से लीक हो गया था। अप्रैल 2021 में, शाइनीहंटर्स के रूप में पहचाने जाने वाले एक हैकर समूह ने कथित तौर पर एक हैकर फोरम पर मुफ्त में डेटा जारी किया था। हैकर ने लिखा था कि डेटा फाइल में यूजर्स के ईमेल, पासवर्ड, नाम, फोन नंबर, पता, ऑर्डर डिटेल्स और अन्य जानकारियाँ हैं।

सूचना सुरक्षा फर्म Cyble Inc. ने इस उल्लंघन की पहचान की थी और 7 नवंबर 2020 को अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट प्रकाशित की थी। 1 नवंबर 2020 को उन्होंने ‘बिगबास्केट’ को उल्लंघन के बारे में सूचित किया था। कंपनी ने उनसे उल्लंघन का खुलासा नहीं करने का आग्रह किया। Cyble ने उन्हें सलाह दी कि वे ग्राहकों को बताएँ क्योंकि उन्हें उल्लंघन के बारे में जानने का अधिकार है।

7 नवंबर 2020 को Cyble ने उल्लंघन के बारे में सार्वजनिक खुलासा किया। 9 नवंबर 2020 को बिगबास्केट ने स्वीकार किया कि डेटा लीक हो गया था। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि न केवल बिगबास्केट के डेटा बल्कि अन्य कंपनियों के डेटा भी लीक (मतलब चोरी) हो गए था। Cyble को बाद में पता चला कि कुख्यात हैकर समूह शाइनीहंटर्स इस उल्लंघन के पीछे था।

यह संभव है कि सामान्य (कॉमन) पासवर्ड सूची को संकलित करने के लिए उपयोग किए गए लीक डेटा में बिगबास्केट से लीक हुआ डेटा भी शामिल है। इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि बिगबास्केट को पासवर्ड के रूप में उपयोग करने वाले अधिकांश लोग ऑनलाइन स्टोर के ग्राहक हैं। संभवत: उन्होंने इसे अपने बिगबास्केट अकाउंट के लिए उपयोग किया हो।

ऑपइंडिया ने इस लिस्ट के बारे में नॉर्डपास से संपर्क किया है। जैसे ही उनका मेल आएगा, हम इस खबर को अपडेट करेंगे।

भाग र​हा था सूफियान, UP पुलिस ने मारी गोली: निधि गुप्ता की हत्या के बाद से था फरार, मुस्लिम बनने का डाल रहा था दबाव

उत्तर प्रदेश के निधि गुप्ता हत्‍याकांड (Nidhi Gupta Murder) में फरार चल रहे आरोपित सूफियान को शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को लखनऊ पुलिस ने एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी लखनऊ के ठाकुरगंज से हुई है। सूफियान पुलिस से भागने की कोशिश कर रहा था। एनकाउंटर में आरोपित के पैर में गोली लगी, जिससे वह घायल हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने एनकाउंटर के तुरंत बाद घायल आरोपित को गिरफ्तार किया और उसे ट्रॉमा सेंटर लेकर गई। यहाँ उसका इलाज चल रहा है। अभी सूफियान खतरे से बाहर है। सोशल मीडिया पर आरोपित की तस्वीर भी सामने आई है। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि वह एक जंगली इलाके में घायल अवस्था में जमीन पर पड़ा हुआ है।

बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद से सूफियान के घरवाले उसे बचाने का प्रयास कर रहे ​थे। वहीं, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने निधि के हत्यारे सूफियान पर 25 हजार का इनाम घोषित किया था। लखनऊ पुलिस निधि गुप्ता की मौत के बाद से लगातार सूफियान की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी। उसके पीछे लखनऊ पुलिस की 6 से ज्यादा टीमें लगी हुई थीं। पुलिस को सूफियान के फोन की आखिरी लोकेशन चौक में मिली थी। वहीं एक टीम दिल्ली के लिए रवाना की गई थी। इस बीच उसकी लोकेशन दुबग्गा इलाके में पता चली और टीम वहाँ पहुँच गई। यहीं पर पुलिस टीम की सूफियान के साथ मुठभेड़ हो गई। खबर है कि वह ठाकुरगंज से बालागंज की ओर भाग रहा था।

निधि गुप्ता हत्‍याकांड

लखनऊ के दुबग्गा इलाके के डूडा कॉलोनी में 15 नवंबर 2022 को निधि गुप्ता नाम की लड़की हत्या कर दी गई थी। लड़की के परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि सूफियान ने उसे चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया। इलाज के दौरान निधि की मौत हो गई थी। घटना के बाद से सूफियान फरार था। हत्या के पीछे का कारण निधि का धर्म परिवर्तन और निकाह से इनकार करना बताया गया है।

सूफियान पर आरोप है कि वह काफी समय से निधि के पीछे पड़ा था। वह उस पर धर्म परिवर्तन और निकाह का दबाव डाल रहा था। उसकी सनक से तंग आकर निधि को उसके परिजनों ने कुछ समय के लिए ननिहाल भी भेज दिया था। उसके वापस लौटते ही सूफियान की हरकतें फिर शुरू हो गई। इससे तंग आकर 14 नवंबर 2022 को निधि की माँ ने अपने भाई को बुलाया। वे सूफियान के घर जा रहे थे। इसी दौरान सूफियान ने पहले उन्हें धमकाया और फिर बाद में निधि को छत से धक्का दे दिया।

₹1.20 लाख देकर बनाया ईसाई, चर्च जाना बंद किया तो देने लगे धमकी: दलित महिला बोली- ₹90 हजार लौटाया फिर भी माँग रहे चार गुना पैसा

मध्य प्रदेश के दमोह से दलित को लालच देकर ईसाई बनाने और फिर उसे धमकी देने का मामला सामने आया है। पीड़ित महिला का कहना है कि उसे और उसके पति को पैसे देकर ईसाई बनाया गया था। लेकिन, जब उन लोगों ने चर्च जाना बंद कर दिया तो उन्हें धमकी दी जाने लगी। धर्मांतरण के लिए दी गई रकम से चार गुना अधिक पैसे की माँग की जा रही है।

स्वराज्य की पत्रकार शुभी विश्वकर्मा ने इस महिला का वीडियो शेयर करते किया है। इसमें पीड़ित दलित महिला पादरी अजय लाल और उसके सहयोगियों पर 1 लाख 20 हजार रुपए देकर धर्मांतरण कराने और अब चर्च न जाने पर धमकी देने का आरोप लगा रही है।

मीडिया को पीड़िता ने बताया कि थॉमस, साजन व अन्य लोगों ने चर्च न आने और मूर्ति पूजा करने पर उन्हें कई बार धमकी है। पीड़िता का कहना है कि ईसाई धर्म अपनाने के लिए उसे जो पैसे दिए गए थे उससे अब चार गुना अधिक पैसे की माँग हो रही है।

पीडिता का कहना है कि जब ईसाई मिशनरी के लोगों ने धर्मांतरण के लिए उसे पैसे दिए थे, तब यह नहीं कहा था कि उन्हें पैसे लौटाने होंगे। पीड़िता का दावा है कि दिए गए पैसे में से उसने 90 हजार रुपए लौटा दिए हैं। बाकी पैसे भी वह वापस देने के लिए तैयार है। सबूत के तौर पर उसके पास डायरी में आरोपित के हस्ताक्षर भी हैं।

धर्मांतरण का शिकार हुई दलित महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि ईसाई पादरी और उसके लोगों का कहना है कि यदि वो और उसका पति चर्च नहीं जाएँगे तो उन्हें ब्याज के तौर पर चार गुना अधिक पैसे देने पड़ेंगे। पीड़ित दलित महिला का कहना है कि उसे और उसके पति को पानी की टंकी में डुबोकर धर्मांतरण कराया गया था। यही नहीं, उससे कहा गया था कि वह अपने भाइयों को भी चर्च लाए जिसके बाद उन्हें भी धर्मांतरित कर दिया गया।

बीते दिनों दमोह के ईसाई मिशनरी के हॉस्टल में धर्मांतरण का मामला सामने आया था। इसके बाद 13 नवंबर 2022 को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने दमोह देहात थाना में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इस एफआईआर में उस ईसाई पादरी अजय लाल का भी नाम शामिल है, जिस पर धर्मांतरण का शिकार हुई दलित महिला ने पैसे देकर धर्मांतरण कराने और अब चार गुना अधिक वसूली का आरोप लगाया है।

बिना नाम लिए PM मोदी ने पाकिस्तान को चेताया: आतंकवाद को खत्म करने जुटे दुनिया भर के देश, पड़ोसी इस्लामी मुल्क को नहीं भेजा न्योता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काउंटर-टेररिज्म फाइनेंसिंग पर ‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT) सम्मेलन की शुरुआत की। ‘नो मनी फॉर टेरर’ का यह तीसरा सम्मेलन है। इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। शुक्रवार (18 नवंबर 2022) को इस कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग देशों के 450 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पाकिस्तान को कॉन्फ्रेंस के लिए न्योता नहीं भेजा गया था।

‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT) सम्मेलन का आयोजन भारत में होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमारा देश उस समय से आतंकवाद का दंश झेल रहा है, जब दुनिया इसे गंभीरता से नहीं लेती थी। पीएम मोदी ने आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प लेते हुए कहा:

“दशकों से, अलग-अलग रूपों में आतंकवाद ने भारत को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की है। आतंकवाद के कारण हजारों जानें गईं लेकिन हमने हर तरह के आतंकवाद और उग्रवाद का बहादुरी से सामना किया है। हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक आतंकवाद का अंत नहीं हो जाता।”

बिना नाम लिए पाकिस्तान पर निशाना

पीएम मोदी ने आगे कहा कि आतंकवाद मानवता, स्वतंत्रता और सभ्यता पर हमला है। उन्होंने इसके समाधान पर कहा कि केवल एक साथ मिलकर जीरो टॉलरेंस के साथ किया गया प्रयास ही आतंकवाद को हरा सकता है। पाकिस्तान का नाम लिए बगैर ही उन्होंने पड़ोसी देश पर निशाना साधते हुए कहा कि आतंकवादी संगठनों का वित्त पोषण कई स्रोतों से होता है। कुछ देशों के विदेश नीति में आतंकवाद का समर्थन निहित है। ऐसे देश आतंकवादी संगठनों को राजनीतिक, वैचारिक और वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेरर फंडिंग को संगठित अपराध करार दिया। उन्होंने कहा कि टेरर फंडिग को आतंकवाद से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने तर्क रखा कि इन गिरोहों के आतंकी संगठनों से गहरे संबंध होते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद अब तकनीक की मदद ले रहा है, ऐसे में तकनीक की मदद से ही इसे खत्म किया जा सकता है।

आतंकवाद और अर्थव्यवस्था

‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT) सम्मेलन को संबोधित करते हुए में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आतंकवाद का दीर्घकालिक प्रभाव गरीबों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे पर्यटन और व्यापार भी प्रभावित होते हैं। इसकी वजह से आतंकवाद ग्रसित इलाके के लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ता है।

देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ गरीबों की जीविका, उनके व्यवसाय आदि का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने आतंकवाद के खात्मे पर बल दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि आवश्यक है कि आतंवाद की जड़ों पर हमला किया जाए। आतंकवाद को खत्म करने के लिए बड़े, सक्रिय और व्यवस्थित प्रतिक्रिया की जरूरत है।

‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT) सम्मेलन का उद्देश्य

दिल्ली में 18-19 नवंबर 2022 को आयोजित इस सम्मेलन में मुख्य रूप से टेरर फंडिंग, आतंकवाद के लिए धन के औपचारिक व अनौपचारिक स्रोतों, जैसे हवाला नेटवर्क के उपयोग के विषयों पर चर्चा होनी है। इसके अलावा, नई तकनीक की मदद से किस तरह से आतंकवाद को फंड किया जा रहा है और उसे रोकने में जो परेशानियाँ आ रही हैं, उस पर भी चर्चा होनी है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘नो मनी फॉर टेरर’ (NMFT) सम्मेलन का उद्देश्य साल 2018 में पेरिस और साल 2019 में मेलबर्न में हुए पिछले दो सम्मेलनों में टेरर फंडिंग (आतंकवाद के वित्तपोषण) का मुकाबला करने के विषय पर अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के बीच हुई चर्चा को आगे ले जाना है।

नाजनीन बानो को TikTok पर दीपक से हुआ प्यार, घर वाले कर रहे थे विरोध: हिंदू बन मंदिर में लिए फेरे, नाम हुआ- नैंसी गोस्वामी

मध्य प्रदेश के मंदसौर (Mandsaur) में नाजनीन बानो सनातन धर्म स्वीकार कर नैंसी गोस्वामी बन गई हैं। नाजनीन बानो ने गुरुवार (17 नवंबर 2022) को गायत्री मंदिर में हिंदू रीति रिवाज से दीपक गोस्वामी के साथ सात फेरे लिए। नाजनीन गुना जिले की रहने वाली हैं। दोनों 2019 में टिक टॉक के जरिए मिले थे। नैंसी की उम्र 19 साल है और दीपक 22 वर्ष के हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुना जिले के कुंभराज में रहने वाली नाजनीन बानो (अब्बा का नाम मोहम्मद जफर) को 2019 में टिक टॉक पर दीपक (पिता का नाम विट्ठल गोस्वामी) पसंद आ गए। इसके बाद वह उन्हें वहाँ फॉलो करने लगी। नैंसी 9वीं तक पढ़ी है। वहीं, दीपक कॉमर्स में फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है। इसी एप के जरिए दोनों की दोस्ती हुई। कुछ समय बाद यह दोस्ती प्यार में बदल गई। युवती के घर वालों को जब इस बारे में पता चला तो इसका विरोध करने लगे। पर दोनों शादी कर एक-दूसरे के साथ जिंदगी बिताना चाहते थे, इसलिए वे 6 महीने पहले 13 मई 2022 बिना बताए घर से भाग गए। लेकिन अलग-अलग धर्म होने से वजह से दोनों शादी नहीं कर पा रहे थे।

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले लड़के ने अपने परिवार से संपर्क किया और उन्हें बताया कि नाजनीन सनातन धर्म अपनाना चाहती है। इसके बाद युवक के पिता ने मंदसौर के चेतन्य सिंह राजपूत (जफर शेख) से संपर्क किया। फिर गुरुवार रात विधि-विधान से गायत्री मंदिर में सनातन धर्म अपनाकर नाजनीन, नैंसी गोस्वामी बन गई। फिर दोनों ने 7 फेरे लिए और ​विवाह के बंधन में बंध गए।

बता दें, मंदसौर में हाल में कई मुस्लिम हिंदू बने हैं। इस साल 27 मई को शेख जफर कुरैशी ने विधि-विधान से हिन्दू धर्म अपनाते हुए घर वापसी की थी। अब वो चैतन्य सिंह राजपूत बन गए हैं। यह जानकारी उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर की थी।

इसके बाद मंदसौर में ही एक मुस्लिम लड़की ने हिन्दू युवक से शादी करके सनातन धर्म अपनाया था। जोधपुर की इकरा ने  इशिका बनकर 9 सितम्बर 2022 को गायत्री मंदिर में विधि-विधान से घर वापसी की थी। इस शादी को चैतन्य सिंह राजपूत ने ही सम्पन्न करवाया था। 30 सितंबर को मध्य प्रदेश के मंदसौर के रहने वाले मोहम्मद निसार ने इस्लाम त्यागकर हिन्दू धर्म अपना लिया था। मोहम्मद निसार हिंदू धर्म अपनाकर अब सोनू सिंह बन गए हैं। उन्होंने 8 साल पहले हिन्दू युवती से शादी की थी।

श्रद्धा को बुरी तरह पीटता था आफताब, सिगरेट से जला देता था: दोस्त ने कैमरे के सामने किया खुलासा, कहा – ‘उसके अम्मी-अब्बू को सब पता’

श्रद्धा मर्डर केस (Shraddha Walker Murder) में आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) को लेकर कई और नए खुलासे हुए हैं। 2020 की मेडिकल रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि आफताब अक्सर श्रद्धा को बुरी तरह पीटा करता था। इसके अलावा ये दावा भी किया जा रहा है कि श्रद्धा की हत्या के बाद उसके शव के 35 टुकड़े करने वाले आफताब के अम्मी-अब्बू इस केस के बारे में सब कुछ जानते हैं।

यह दावा श्रद्धा के दोस्त रजत शुक्ला ने किया है। रजत ने मीडिया को बताया कि जब वह मुंबई में थी, तब भी आफताब उससे मारपीट करता था। जलते हुए सिगरेट से श्रद्धा को जला देता था। जले हुए निशान को श्रद्धा ने अपने दोस्तों को भी दिखाया था। उस वक्त उसके सभी दोस्त पुलिस में जाना चाहते थे। लेकिन श्रद्धा आफताब को सुधरने का मौका देना चाहती थी।

श्रद्धा के दोस्त रजत ने आजतक को बताया, “आफताब हैवान था। ये लोग महाराष्ट्र वसई के रहने वाले थे। वसई के ही पास नायगाँव पड़ता है। यहाँ ये दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहते थे। इनका जो एग्रीमेंट सामने आया है, उसके मुताबिक, इसमें इन दोनों ने खुद को पति-पत्नी दिखाया था। इसी एग्रीमेंट में आफताब के अम्मी-अब्बू के फोटो, उनके हस्ताक्षर और रजामंदी भी दिखी है।”

रजत ने दावा किया कि आफताब के अम्मी-अब्बू वसई के घर में रहते थे। वह केस की पूछताछ शुरू होने से 15 दिन पहले ही अपना घर छोड़कर कहीं जा चुके हैं। वे 23 साल से यहाँ रह रहे थे। इसका मतलब साफ है कि आफताब के घरवालों को इस बात की जानकारी थी कि उसने श्रद्धा का मर्डर कर दिया है।

श्रद्धा के दोस्त ने पुलिस पर सवाल उठाते हुए आगे कहा कि क्या इतना मुश्किल है आफताब के जिंदा अम्मी-अब्बू को ढूँढना? पुलिस क्या कर रही है अभी तक? अगर आफताब के अभिभावक को जीवित पकड़ लिया जाता है, तो ये जो नार्को टेस्ट की बात हो रही है या वह जो कहानियाँ रच रहा है, उससे यह केस बहुत आसान हो जाएगा।

श्रद्धा ये सब कुछ क्यों सह रही थी? उसके दिमाग में आफताब को लेकर क्या चल रहा था? इसके जवाब में रजत ने कहा, “वह बहुत ही बोल्ड, स्ट्रॉन्ग और आउटस्पोकन लड़की थी। उसको किसी बात का डर नहीं था। वो ब्लंट थी, उसको जो पसंद आ रहा और जो नहीं पसंद आ रहा है, उसको बोलने की क्षमता रखती थी। जिस तरीके से पूरे देश में यह माहौल बनाया जा रहा है कि वो एक बेचारी थी, प्यार में पागल हो गई थी। ये सब चीजें बिल्कुल भी सही नहीं हैं। श्रद्धा उस किस्म की इंसान नहीं थी।”

रजत शुक्ला ने इसके बाद यह भी बताया कि वह इस रिलेशनशिप में किस तरह का बर्ताव कर रही थी। उन्होंने कहा:

“श्रद्धा इस मामले में कुछ ना कुछ छिपा रही थी। वो क्या बात थी, जिसकी वजह से वह कंट्रोल दिख रही थी। वो आफताब से डरी हुई दिख रही थी। मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा ब्लैकमेलिंग हो सकता है। एक मेल पाटर्नर, एक फीमेल पाटर्नर को कई लेवल पर ब्लैकमेल कर सकता है। हो सकता है कि कुछ प्राइवेट मूमेंट्स के बारे में।”

श्रद्धा के दोस्त रजत शुक्ला ने अपनी बात जारी रखते हुए आगे यह भी शक जताया कि शायद उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई हो। उनके अनुसार श्रद्धा शायद मजबूरी में आफताब के साथ रह रही थी। इसके पीछे रजत ने तर्क दिया कि वो इस रिलेशनशिप से बाहर निकलना चाहती थी, कई बार दोस्तों से उसने इस बारे में कहा भी था। फिर भी वह आफताब के साथ रहने को मजबूर थी।

रजत के मुताबिक, वह 2015 से 2019 तक श्रद्धा के साथ लगातार संपर्क में था। 2018 तक वह उससे ठीक से बात कर रही थी, उसके बाद वह थोड़ा डल हो गई थी। 2019 तक वह रूड हो चुकी थी। इसके बाद वह फ्रेंड सर्कल में कुछ ही लोगों तक सीमित रह गई थी। इसमें एक उसकी बेस्ट फ्रेंड थी और एक बचपन का दोस्त था।

दोस्तों के अलावा फैमिली में वो सिर्फ अपनी मम्मी और भाई के साथ टच में थी। रजत का कहना है, “हम एक दूसरे के बारे में जान जरूर रहे थे, लेकिन आफताब ने उसकी लाइफ को बहुत लिमिटेड कर दिया था। इससे श्रद्धा का किसी से सही से कॉमनिकेशन नहीं हो पा रहा था।”