Home Blog Page 2251

‘राम-कृष्ण ने हमारे साथ की है नाइंसाफी’: प्रशांत किशोर के मंच से हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान, बोले हिन्दू संगठन – चंपारण की भूमि पर ये बर्दाश्त नहीं

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) पिछले कई दिनों से ‘जन सुराज यात्रा’ पर हैं। ‘जन सुराज यात्रा’ के 42वें दिन रविवार (13 नवंबर, 2022) को जिला अधिवेशन का आयोजन बिहार के बेतिया स्थित MJK कॉलेज परिसर में किया गया। कार्यक्रम में प्रशांत किशोर के सामने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया गया। हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाला रिटायर्ड शिक्षक है। उसका नाम गोरख महतो है।

प्रशांत किशोर के सामने गोरख महतो ने मंच से कहा, “राम, द्रोणाचार्य, कृष्ण और विश्वकर्मा ने हमारी जाति के साथ नाइंसाफी की है।” इसके बाद आनन-फानन में वॉलंटियर्स ने रिटायर्ड टीचर को पोडियम से हटा दिया। इसका वीडियो भी सामने आया है। इस घटना के बाद से विहिप और बजरंग दल सहित जिले के अन्य लोगों में काफी रोष है। लोग इस यात्रा का जमकर विरोध कर रहे हैं।

दैनिक भास्कर ‘के मुताबिक, बजरंग दल के जिला मंत्री रमन गुप्ता ने प्रशांत किशोर को घेरते हुए उनसे कई सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा कि वे किस प्रकार की राजनीति करना चाहते हैं? क्या वो देवी-देवताओं का उपहास उड़ाकर अपनी राजनीति शुरू करना चाहते हैं? क्या वो जाति आधारित बातें एवं डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी अपनाकर राजनीति शुरू करना चाहते हैं?

इसके अलावा रमन गुप्ता ने प्रशांत किशोर से कहा कि वो अपने लोगों को समझाएँ कि अगर इस प्रकार की राजनीति होगी तो विहिप और बजरंग दल इसका कड़ा विरोध करेगा एवं चंपारण की पावन भूमि पर इस प्रकार का कृत्य बर्दाश्त नहीं करेगा।

वहीं, ‘जन सुराज’ पदयात्रा अधिवेशन में प्रशांत किशोर ने कहा, “मेरा सपना बिहार का मुख्यमंत्री बनना नहीं है। मेरा सपना है कि अपने जीवन में ऐसा बिहार देख सकूँ, जहाँ मुंबई, गुजरात से लोग काम करने बिहार आएँ। लोग कह रहे हैं कि आपने बहुत कठिन काम ले लिया है यह कैसे संभव होगा। बिहार में इतनी जाति, बाहुबल, पैसा है, पहले से समीकरण है।”

प्रशांत किशोर आगे कहा, “मैं केवल यहाँ लड़ने नहीं आया, मैं तो लड़कर जीतने आया हूँ। अभी मुझे केवल 40 दिन हुए हैं और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि किसका वोट कटेगा। महागठबंधन का वोट कटेगा या बीजेपी का वोट कटेगा। तो मैं आपको बता दूँ कि जनता अगर एक बार जाग गई तो दोनों को काटकर अलग कर देगी।”

उल्लेखनीय है कि प्रशांत किशोर ने बंगाल चुनाव के बाद अपनी भूमिका बदलने और एक साल में स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। पिछले साल पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने चुनावी कामकाज से संन्यास लेने की बात कही थी। उन्होंने बताया0- था कि वो अपनी कंपनी I-PAC को छोड़ कर दूसरे करियर को आगे बढ़ाने वाले हैं। किशोर ने कहा था कि वह अपने लिए कुछ समय निकालना चाहते हैं और एक वैकल्पिक करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

आफताब ने पहले श्रद्धा का गला दबाया, फिर किए 35 टुकड़े: 18 दिन तक फेंकता रहा बॉडी पार्ट्स, मुंबई में हुई पहचान-दिल्ली में लाकर मारा

श्रद्धा की आफताब अमीन पूनावाला से मुंबई में जान-पहचान हुई। फिर एक दिन आफताब ने दिल्ली में श्रद्धा को गला दबाकर मार डाला। उसके शव के 35 टुकड़े किए। 18 दिन तक रात के करीब 2 बजे वह घर से निकल श्रद्धा के बॉडी पार्ट्स दिल्ली में इधर-उधर फेंकता रहा। श्रद्धा की हत्या के करीब छह महीने बाद यह खुलासा हुआ है। 12 नवंबर 2022 को आफताब की गिरफ्तार हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रद्धा मूल रूप से महाराष्ट्र के पालघर की रहने वाली थी। आफताब से उसकी मुलाकात मुंबई में हुई थी। दोनों मलाड के एक कॉल सेंटर में साथ काम करते थे। जान-पहचान कुछ समय बाद प्यार में बदल गई। दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगे। जब श्रद्धा ने शादी का दबाव बनाया तो शुरुआत में आफताब ने टालमटोल की। आखिर में उसे जान से ही मार डाला।

बताया जा रहा है कि शादी का दबाव बढ़ने पर आफताब दिल्ली आया। फिर बहाने से श्रद्धा को बुलाया। यहाँ पर भी दोनों साथ रहने लगे। पुलिस पूछताछ में आफ़ताब ने बताया कि 18 मई 2022 को उसका शादी को लेकर श्रद्धा से काफी झगड़ा हुआ था। इसी दौरान उसने गुस्से में श्रद्धा को गला दबाकर मार डाला। बाद में सबूत छिपाने के लिए उसके शव के 35 टुकड़े किए और उसे दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में फेंक दिया।

इस बीच महाराष्ट्र में मौजूद श्रद्धा के 59 वर्षीय पिता मदान वाकर ने लंबे समय से बेटी से सम्पर्क न होने पर उसकी खोजबीन शुरू की। वे बेटी बताए गए फ्लैट के पते पर पहुँचे तो वहाँ ताला लगा मिला। आखिरकार 8 नवम्बर 2022 को उन्होंने बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने अपनी जाँच के केंद्र में आफ़ताब को रखकर खोजबीन शुरू की। आरोपित का नंबर सर्विलांस पर लगा कर शनिवार को उसे खोज निकाला।

पुलिस पूछताछ में आफताब ने अपना गुनाह कबूल किया। अब पुलिस आफताब से हुई पूछताछ के आधार पर मृतका श्रद्धा के शव के हिस्से तलाशने में जुटी हुई है। बताया जा रहा है कि अभी तक पुलिस कुछ हड्डियों को बरामद कर पाई है। रिपोर्ट के अनुसार हत्या के बाद 18 दिनों तक आफताब रोज रात के करीब 2 बजे घर से निकलता था। श्रद्धा के शव के टुकड़ों को जंगलों के फेंक आता था ताकि जानवर उसे खा लें।

कहीं दुःखी न हो जाएँ लॉर्ड माउंटबेटन, इसीलिए नेहरू ने नहीं उतारा था अंग्रेजों का झंडा: गाँधी ने ‘अशोक चक्र’ को सलामी देने से कर दिया था इनकार

जो ब्रिटिश राज़ भारत में लाखों लोगों की मौत का कारण बना, स्वतंत्रता मिलने के बाद जवाहरलाल नेहरू उसी के झंडे को उतारने के खिलाफ थे। यही नहीं, मोहनदास करमचंद गाँधी का मानना था कि देश के झंडे में ‘यूनियन जैक’ (अंग्रेजी साम्राज्य का राष्ट्रीय ध्वज) भी होना चाहिए।

दरअसल, देश की आजादी के बाद पहली बार तिरंगा लाल किले में नहीं फहराया गया था। देश के पहले प्रधानमंत्री बने नेहरू ने इंडिया गेट के पास प्रिंसेस पार्क में पहली बार तिरंगा फहराया गया था। भारत की आजादी के दिन, यानी 15 अगस्त 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन अंतिम गवर्नर जनरल के रूप में शपथ लेने के बाद प्रिन्सेस पार्क में आयोजित मुख्य समारोह में पहुँचा था।

प्रिंसेस पार्क में आयोजित कार्यक्रम में यह तय किया गया था कि प्रधानमंत्री नेहरू अंग्रेजी सरकार के झंडे ‘यूनियन जैक’ को उतारेंगे और फिर तिरंगा फहराया जाएगा। हालाँकि, इससे पहले ही लॉर्ड माउंटबेटन ने नेहरू से कहा कि वह चाहता है कि यूनियन जैक को न उतारा जाए, क्योंकि इससे वह दुःखी हो सकता है। इसके बाद नेहरू ने माउंटबेटन की बात मान ली और यूनियन जैक को बिना उतारे ही तिरंगा फहराया गया।

इस बारे में जब नेहरू से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह देश की आजादी के बाद सभी को खुश देखना चाहते है, इसलिए यदि वह यूनियन जैक को नीचे उतारते या हटाते हैं तो इससे किसी ब्रिटिश (माउंटबेटन) की भावना आहत होती है। इसलिए, उन्होंने यूनियन जैक को नहीं उतारा।

माउंटबेटन की पत्नी और नेहरू

नेहरू और लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी एडविना माउंटबेटन के संबंधों को लेकर हमेशा ही चर्चा होती रहती है। कई लोगों की लिखी किताबों और उपलब्ध दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आती है कि नेहरू और एडविना के बीच जो रिश्ता था, वह किसी अधिकारिक जान-पहचान से कहीं अधिक था।

एडविना की बेटी पामेला हिक्स भी नेहरू से खास प्रभावित थीं और उन्होंने यह बात अपनी किताब ‘डॉटर ऑफ एम्पायर’ में बताई है। उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए बताया था कि उनकी माँ एडविना और नेहरू एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। पामेला का यह भी कहना था, “वह पंडितजी (नेहरू) में साहचर्य और समझ को देखतीं हैं, जिसके लिए वह तरसती थीं। दोनों ने एक-दूसरे के अकेलेपन को दूर करने में मदद की।”

नेहरू और लेडी माउंटबेटन के बीच संबंध इतने गहरे थे कि भारत की आजादी के बाद भी नेहरू और एडविना की मुलाकात होती रहती थी। जवाहरलाल नेहरू जब भी लंदन जाते, एडविना के साथ कुछ दिन जरूर बिताते थे। इसकी पुष्टि लंदन में तत्कालीन भारतीय उच्चायोग में काम करने वाले खुशवंत सिंह ने अपनी आत्मकथा ‘ट्रुथ, लव एण्ड लिटिल मेलिस’ मे की है।

यही नहीं, मोहनदास करमचंद गाँधी भी भारतीय तिरंगे झंडे में अशोक चक्र का उपयोग किए जाने से खुश नहीं थे। महात्मा गाँधी दो कारणों से तिरंगे की डिजाइन से नाखुश नहीं थे। पहला, तिरंगे में यूनियन जैक का न होना और दूसरा चरखे की जगह अशोक चक्र का उपयोग किया जाना। ‘द कलेक्टेड वर्कर्स ऑफ महात्मा गाँधी‘ के अनुसार, गाँधी जी ने एक पत्र में भारत के अंतिम गवर्नर जनरल माउंटबेटन द्वारा प्रस्तावित झंडे का समर्थन किया था, जिसमें कॉन्ग्रेस के झंडे के साथ यूनियन जैक भी था।

महात्मा गाँधी जी ने अपने पत्र में यूनियन जैक को भारत के राष्ट्रीय ध्वज में शामिल करने के तर्क देते हुए कहा था, “अपनी इच्छा से भारत छोड़ने’ वाले अंग्रेजों ने भले ही भारतीयों को नुकसान पहुँचाया हो, लेकिन यह सब उनके झंडे ने नहीं किया है।”

लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा प्रस्तावित भारतीय ध्वज

उन्होंने भारत के राष्ट्रीय ध्वज में यूनियन जैक को शामिल न किए जाने पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा था, “यूनियन जैक को हमारे झंडे के एक कोने में रखने में क्या गलत है? अंग्रेजों ने हमारा नुकसान किया है, लेकिन उनके झंडे ने नहीं किया है। हमें अंग्रेजों के गुणों का भी ध्यान रखना चाहिए। वे हमारे हाथों में सत्ता छोड़कर स्वेच्छा से भारत से जा रहे हैं।”

महात्मा गाँधी ने कहा था, ‘यूनियन जैक ने हमारा कुछ नहीं बिगाड़ा’

महात्मा गाँधी ने आगे कहा था, “हम लॉर्ड माउंटबेटन को अपने मुख्य द्वारपाल के रूप में रख रहे हैं। इतने लंबे समय तक वह ब्रिटिश राजा के सेवक रहे हैं। अब, उन्हें हमारा सेवक बनना है। यदि हम उन्हें अपने सेवक के रूप में नियुक्त करते हैं तो हमारे झंडे के एक कोने में यूनियन जैक भी होना चाहिए। इससे भारत के साथ विश्वासघात नहीं होता।”

गाँधी ने कहा कि वह ‘तिरंगे’ को सलामी नहीं देंगे

मोहनदास गाँधी जी ने इस बात को बार-बार दोहराया था कि जिस झंडे को कॉन्ग्रेस पार्टी ने से 1931 में अपनाया था, उसी झंडे को भारतीय ध्वज होना चाहिए। कॉन्ग्रेस का झंडा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के समान ही था, लेकिन उसमें अशोक चक्र की जगह चरखा बना हुआ था। गाँधी चाहते थे कि यूनियन जैक के साथ स्वतंत्र भारत भी उसी झंडे को अपनाए। इसलिए, जब चरखे की जगह अशोक चक्र के उपयोग किए जाने का प्रस्ताव रखा गया तो वह इतने दुखी हुए कि उन्होंने घोषणा कर दी कि वे झंडे को सलामी नहीं देंगे।

‘यूनियन जैक’ को लेकर गाँधी के विचार

ज्ञानवापी पर फैसले से पहले श्री काशी विश्वनाथ धाम में घुसते पकड़े गए 2 मुस्लिम, ‘हरा गमछा’ से पड़ी नजर: हिंदू दोस्त को भी लाए थे साथ

वाराणसी फास्ट ट्रैक कोर्ट में ज्ञानवापी से जुड़े मसले की आज (14 नवंबर 2022) सुनवाई होनी है। उससे पहले श्री काशी विश्वनाथ धाम में प्रवेश करने की कोशिश करते तीन संदिग्ध पकड़े गए हैं। तीनों झारखंड के रहने वाले हैं। इनमें दो मुस्लिम और एक कथित तौर पर इनका हिंदू दोस्त है। हरे रंग के गमछे के कारण इन पर सुरक्षा में जवान तैनातों को शक हुआ। केंद्रीय जाँच एजेंसियाँ इनसे पूछताछ कर रही हैं।

तीनों को 13 नवंबर को पकड़ा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों संदिग्ध गिरडीह के निवासी हैं। तीनों को मंदिर में इंट्री करते समय वहाँ मौजूद सुरक्षा बल ने पकड़ा। ये सभी गेट नंबर 4 से मंदिर में घुसने का प्रयास कर रहे थे। पकड़े जाने पर तीनों ने बताया कि उन्हें मंदिर में सिर्फ हिन्दुओं के इंट्री होने की जानकारी नहीं थी।

पूछताछ में तीनों ने बताया कि वो वाराणसी के बाद दिल्ली जाने की तैयारी में थे, जहाँ से उन्हें अजमेर के लिए निकलना था। जानकारी के अनुसार मंदिर में घुसने से पहले तीनों संदिग्ध गंगा नदी के पास बने घाटों पर काफी देर तक घूम कर आए थे। एसीपी दशाश्वमेध अवधेश पांडेय के मुताबिक पकड़े गए संदिग्धों से केंद्रीय जाँच एजेंसी की पूछताछ के बाद आए निष्कर्ष पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि जिला अदालत में आज शिवलिंग की पूजा के अधिकार पर दायर याचिका पर सुनवाई होनी है। याचिका दाखिल करने वाले वैदिक सनातन संघ ने अदालत के आगे तीन माँगे रखी हैं। इनमें ज्ञानवापी परिसर हिंदुओं को सौंपने, मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने और सर्वे में मिले शिवलिंग नुमा आकृति की पूजा की अनुमति शामिल है। संभावना जताई जा रही है कि इस याचिका पर काशी की फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला आज आ सकता है। मिल रही जानकारी के मुताबिक सुनवाई से पहले कोर्ट, ज्ञानवापी के साथ आस-पास के इलाकों में सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

पंजाब में माता के जागरण में घुसकर तलवार से किया हमला: महिलाओं से अभद्रता, माता की ज्योति को भी बनाया निशाना

पंजाब के जालंधर में माता के जागरण में घुस कर हमले की खबर है। बताया जा रहा है कि दो लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया। महिलाओं से बदतमीजी की। विरोध करने वालों से मारपीट की। माता की ज्योति पर भी तलवार से वार किया। आरोपित नशे की हालत में थे। श्रद्धालुओं का आरोप है कि इस घटना में प्रशासन की भी मिलीभगत है। घटना रविवार (13 नवंबर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बाबू लाभ सिंह नगर का है। माता के जागरण में नशे में धुत 2 युवक घुस गए। दोनों ने प्रसाद बाँट रहे लोगों से अभद्रता की। इसके बाद उन्हें बाहर कर दिया गया। दोनों थोड़ी देर बाद फिर लौट आए और तलवारों से जागरण में मौजूद लोगों पर हमला कर दिया। जब उनकी हरकत का महिलाओं ने विरोध किया, तब उन पर भी वार किया गया। हमले में कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी है। इनमें कुछ महिलाएँ भी हैं।

लोगों का आरोप है कि हमलावरों ने जागरण में रखी गई माता की ज्योति पर भी तलवार मारी। हमले से बचने के लिए कई लोग छिपने लगे और भगदड़ मच गई। इस घटना से क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण हो गया। आपाधापी के बीच जागरण बंद हो गया। जागरण के लिए आई बैंड पार्टी भी सामान समेट कर वहाँ से चली गई। घटना की जानकारी मिलने पर अतिरिक्त फ़ोर्स के साथ पहुँचे स्थानीय थाना प्रभारी जितेंद्र ने लोगों से फिर से जागरण शुरू करने का निवेदन किया और आरोपितों को जल्द गिरफ्तार करने का भरोसा दिया।

इस घटना के बाद हिन्दू समाज के नाराज लोगों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में लोगों को पुलिस के आगे विरोध करते देखा जा सकता है। एक महिला कह रही है, “आज धार्मिक कार्यक्रम है तो ऐसा हुआ। कल किसी लड़की की शादी हुई तो क्या होगा।” इसी महिला ने आगे कहा कि अगर ऐसी गुंडागर्दी है फिर तो शहर में रहने का फायदा ही क्या है। कार्यक्रम में महिलाओं के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी भी मौजूद दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो में लोगों ने आरोपितों द्वारा ये हरकत पुलिस की मौजूदगी में होना बताया है। बाद में महिलाओं ने वीडियो बना रहे व्यक्ति को हमलावरों द्वारा अस्त-व्यस्त किया गया पंडाल भी दिखाया। यहाँ पानी पीने वाले मग पर भी तलवार मारी गई दिखाई पड़ी। जिस स्थान पर ज्योति जल रही थी, वहाँ भी सामान बिखरा हुआ था।

स्कूल के आसपास मुस्लिम बहुल, छात्राओं से छेड़खानी का विशाल ने किया विरोध… छतों से चले पत्थर, फायरिंग भी: बवाल के बाद 6 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के संभल जिले के चंदौसी में छेड़खानी का विरोध किए जाने पर दो समुदायों में विवाद हो गया। इस दौरान पथराव के साथ फायरिंग भी हुई। हमले का आरोपित अकरम, रिहान, शेर मोहम्मद, साजिद, मेहरबान, असलम, शानू, शाहनवाज, नदीम, निजामुद्दीन, शमशाद, मुसब्बर और मौहम्मद जैद है। अब तक पुलिस ने 6 हमलावरों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। हमले में घायल पीड़ितों के नाम विशाल, विवेक, घनश्याम, अंशु, किशनवती और इंद्रवती हैं। घटना रविवार (13 नवंबर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना चंदौसी तहसील के बनियाठेर थाना क्षेत्र के गाँव मझावली की है। यहाँ के एक स्कूल में रविवार की सुबह लगभग 11 बजे एक NGO द्वारा सामान्य ज्ञान पर प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। स्कूल के आसपास मुस्लिमों की तादाद अधिक है। इस दौरान कुछ लोग स्कूल में मौजूद लड़कियों से अभद्रता करने लगे। वे खिड़कियों से झाँककर छींटाकशी जैसी हरकत कर रहे थे, जिसका विरोध अपने भाई विवेक को पेपर दिलाने आए विशाल सैनी नाम ने किया।

आरोप है कि इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तनातनी हो गई। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने मामले को शांत करवाया और दोनों पक्षों को अलग किया। पेपर देने के कुछ समय बाद विवेक सैनी अपने गाँव के विशाल पाल के साथ एक क्लिनिक पर प्रैक्टिस करने गया। बताया जा रहा है कि यह क्लिनिक भी मुस्लिम बहुल इलाके में है। यहाँ जाते हुए गाँव के चौराहे पर उन दोनों को मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने घेर कर गालियाँ देना शुरू कर दिया। दूसरी तरफ से इस हरकत का विरोध किया गया।

आरोप है कि शोर को सुन कर दोनों तरफ के लोग जमा हो गए। इस दौरान मुस्लिम पक्ष के कुछ लोग छतों पर चढ़ गए और वहाँ से पत्थर फेंके जाने लगे। आरोप है कि इसी दौरान फायरिंग भी हुई। इस हमले में हिन्दू पक्ष के लगभग 5 लोग घायल हो गए, जिनका इलाज चल रहा है। घटना की सूचना पुलिस को मिली तो वो भारी फ़ोर्स के साथ गाँव में पहुँची और उपद्रवियों को तितर-बितर किया। इस दौरान आधे दर्जन हमलावरों को गिरफ्तार भी किया गया। गाँव में तनाव को देखते हुए पुलिस के साथ PAC की भी तैनाती कर दी गई है। छतों से पथराव का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

सम्भल जिले के एडिशनल SP ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि केस दर्ज कर मामले में जरूरी एक्शन लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फरार चल रहे आरोपितों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

T20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड की जीत से भड़के कश्मीरी छात्र: पंजाब के कॉलेज में लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, हिंदू छात्रों से मारपीट

पंजाब के एक कॉलेज हॉस्टल में टी20 वर्ल्ड कप मैच में इंग्लैंड के जीतने के बाद दो गुटों में भिडंत का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि रविवार (13 नवंबर 2022) को जैसे ही इंग्लैंड ने मैच जीता तभी कॉलेज के कश्मीरी छात्र पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने लगे। इसके बाद बिहार के कुछ छात्रों ने उनका विरोध करते हुए ‘भारत की जय जयकार’ की। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि कॉलेज परिसर में ईंट-पत्थर चलने लगे। छात्रों ने एक दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर मारा। इसका वीडियो भी आया है।

घटना फिरोजपुर रोड के लाला लाजपत राय ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट कॉलेज का है। इसके हॉस्टल में 60-70 छात्र इकट्ठा होकर मैच देख रहे थे। जैसे ही इंग्लैंड ने ट्रॉफी जीती तभी कश्मीर के छात्र पाकिस्तान समर्थित नारेबाजी करते हुए भारत विरोधी नारेबाजी करने लगे। उनकी इस हरकत का बिहार के कुछ छात्रों ने विरोध किया जिसके बाद वहाँ मारपीट होने लगी।

हॉस्टल वार्डन ने दोनों गुटों को रोकने का प्रयास किया लेकिन उनकी बात सुनने की बजाय छात्रों ने उनसे भी मारपीट की। मामला कंट्रोल न होने पर वार्डन ने पुलिस को बुलाया और दोनों गुटों के छात्रों को लाठियों का इस्तेमाल करके अलग-अलग किया गया। हालाँकि तब तक 3 मेडिकल छात्र घायल हो गए थे जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाकर उनका इलाज करवाया जा रहा है।

पूछताछ में सामने आया है कि कॉलेज के अभिषेक, दुर्गेश, विवेक समेत कई छात्र मैच लाइव देख रहे थे। जैसे ही कुछ छात्रों को लगा कि पाकिस्तान हारने वाली है उनमें गुस्सा बढ़ गया। समुदाय के छात्रों ने पाकिस्तान समर्थित नारे लगाने शुरू कर दिए और हिंसा भड़की। वहीं कश्मीरी छात्रों का कहना है कि उनके मजहब को गाली दी गई इसलिए ये पूरा विवाद हुआ।

सामने आई वीडियोज में देख सकते हैं कि कैसे छात्रों की भीड़ ने सड़क पर रखी ईंटों को उठा-उठाकर एक दूसरे पर बरसाया और फिर सड़क पर भागते नजर आए। इसके अलावा एक अन्य वीडियो में छात्रों की भीड़ को पाकिस्तान जिंदाबाद और भारत मुर्दाबाद कहते सुना गया। अब पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है।

जिस एयरपोर्ट पर बिताए 18 साल, वहीं तोड़ा दम: The Terminal फिल्म के असली ‘हीरो’ थे मेहरन करीमी नासेरी

ईरानी मूल के रिफ्यूजी मेहरन करीमी नासेरी (Mehran Karimi Nasseri) की मृत्यु हो गई है। उन्होंने पेरिस के चार्ल्स डी गॉल हवाई अड्डे पर अंतिम साँस ली। मेहरन करीमी ने 18 सालों तक इसी हवाई अड्डे पर निवास किया।

हवाई अड्डा प्राधिकरण की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार शनिवार दोपहर को जब मेहरन करीमी हवाईअड्डे के टर्मिनल 2F के पास से गुजर रहे थे, तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा। आनन-फानन में पुलिस और मेडिकल टीम मेहरन करीमी के पास पहुँची लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

ईरानी मूल के मेहरन करीमी नासेरी 18 वर्षों (26 अगस्त 1988 से लेकर जुलाई 2006) तक पेरिस के चार्ल्स डी गॉल हवाई अड्डे पर ही अपना जीवन बिताया था। इनकी कहानी ने स्टीवन स्पीलबर्ग को ‘द टर्मिनल (The Terminal)’ जैसी फिल्म बनाने को प्रेरित किया।

दिलचस्प है मेहरन करीमी नासेरी की कहानी

नासेरी का जन्म साल 1945 में ईरान के एक हिस्से सुलेमान में हुआ था। तब ईरान ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा था। नासेरी की माँ एक ब्रिटिश महिला थी और पिता ईरानी। वर्ष 1974 में मेहरन करीमी नासेरी अध्ययन के लिए ईरान से इंग्लैंड पहुँचे। अध्ययन के बाद जब वो अपने देश लौटे तो उन्हें ईरान के ‘शाह’ शासन का विरोध करने के लिए कैद किया गया था और बिना पासपोर्ट के निष्कासित कर दिया गया।

अपने देश से निष्कासन के बाद मेहरन करीमी ने यूरोप के कई देशों में राजनीतिक शरण के लिए आवेदन किया। दावा हालाँकि यह भी किया जाता है कि उन्हें ईरान से निकाला नहीं गया था बल्कि उन्होंने खुद ही ईरान छोड़ा था।

कई जगहों पर आवेदन देने के बाद नासेरी को बेल्जियम स्थित ‘यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजीज’ने रिफ्यूजी का स्टेटस दे दिया। 1988 में वह लंदन आए लेकिन उनके पास इमिग्रेशन अफसरों को दिखाने के लिए पासपोर्ट नहीं था। इस कारण से मेहरन करीमी नासेरी लंदन में नहीं रुक सके, उन्हें पेरिस लौटना पड़ा।

बदकिस्मती मानो उनका पीछा कर रही थी। शरणार्थी प्रमाण पत्र वाला उनका ब्रीफकेस पेरिस रेलवे स्टेशन में चोरी हो गया था। फ्रांसीसी पुलिस ने दस्तावेज न होने की वजह से गिरफ्तार भी कर लिया था लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। एयरपोर्ट में उनकी एंट्री वैध थी लेकिन नासेरी के पास लौटने के लिए कोई देश नहीं था, कोई घर नहीं था। इसलिए पेरिस के चार्ल्स डी गॉल एयरपोर्ट का ‘टर्मिनल वन’ उनका घर बन गया।

ईरानी नहीं ब्रिटिश कहलाना पसंद करते थे नासेरी

फ्रांस में नासेरी का मामला कोर्ट पहुँचा। 1992 में फ्रेंच कोर्ट ने अपनी सुनवाई में कहा कि देश में उनकी एंट्री वैलिड है, इसलिए उन्हें एयरपोर्ट से नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट ने लेकिन एक पेंच फँसा दिया। अदालती आदेश के अनुसार उन्हें फ्रांस में आने (एयरपोर्ट से बाहर निकल कर फ्रांस में रहने) की अनुमति भी नहीं मिल सकती।

बाद में फ्रांस और बेल्जियम ने नासेरी को अपने यहाँ रहने का ऑफर दिया। नासेरी चाहते थे कि उन्हें ब्रिटिश ही कहा जाए लेकिन एक दिक्कत थी। दोनों देशों के पेपर पर वो ‘ईरानियन’ ही थे। आज़ादी का मौका मिलने के बावजूद नासेरी ने पेपर्स साइन नहीं किए। इस तरह वो एयरपोर्ट से निकलने और स्थाई ढंग से रहने का मौका गँवा बैठे।

एयरपोर्ट कर्मियों से दोस्ती कर बन गए मिनी सेलिब्रिटी

मेहरन करीमी नासेरी मिलनसार थे। एयरपोर्ट के टर्मिनल वन पर रहते हुए दिन गुजरते गए। गुजरते वक्त से साथ एयरपोर्ट कर्मचारी उनके मित्र बन गए। एयरपोर्ट पर ही अपना सामान वगैरह जमा लिया था और वहीं पढ़ाई-लिखाई करते थे। खाना और अख़बार उन्हें एयरपोर्ट के कर्मचारियों से मिल जाता था।

एयरपोर्ट पर मेहरन करीमी नासेरी यात्रियों की मदद करने लगे। देखते-देखते लोग उन्हें जानने लगे और उनकी पहचान एक मिनी सेलिब्रिटी के तौर पर बनने लगी। उत्सुक पत्रकार उनकी कहानी जानने के लिए आते रहे। 18 सालों (26 अगस्त 1988 से लेकर जुलाई 2006) तक यह सिलसिला चला।

बीमार रहने लगे मेहरन करीमी

एयरपोर्ट पर भले ही उन्हें कुछ सुविधाएँ मिल रही थीं परंतु उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा था। बढ़ती उम्र की वजह से कई परेशानियाँ सामने आने लगीं। खराब स्वास्थ्य की वजह से जुलाई 2006 में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और टर्मिनल में उनके रहने की जगह को हटा दिया गया। 6 मार्च, 2007 को उन्हें पेरिस के शेल्टर होम में भेज दिया गया। 2008 के बाद से नासेरी वहीं रह रहे थे।

मेहरन करीमी नासेरी की जिंदगी पर बनी हॉलीवुड फिल्म

एक रिफ्यूजी की कहानी, जिसने 18 साल तक एयरपोर्ट टर्मिनल को अपना घर बना लिया (तस्वीर साभार ‘आउटलुक’)

नासेरी एयरपोर्ट पर रहते हुए आत्मकथा भी लिख रहे थे। उनकी यह आत्मकथा 2004 में ‘द टर्मिनल मैन’ के नाम से छपी। यह किताब उन्होंने ब्रिटिश लेखक एंड्र्यू डॉन्किन के साथ मिलकर लिखी थी। किताब लोकप्रिय हो गई, जिसके बाद स्टीवन स्पीलबर्ग ने इस पर फिल्म बनाने की ठानी। स्पीलबर्ग की प्रोडक्शन कंपनी ड्रीमवर्क्स ने 2003 में फिल्म बनाने के लिए नासेरी से 2,50,000 डॉलर (अभी लगभग 2 करोड़ रुपए) में राइट्स खरीदे। साल 2004 में ‘द टर्मिनल (The Terminal)’ के नाम से फिल्म बनी, जो बेहद कामयाब रही।

भाजपा नेता को बदनाम करने की साज़िश, फर्ज़ी निकली ‘द वायर’ की एक और रिपोर्ट, सार्वजनिक माफ़ी की मांग

प्रॉपगेंडा और झूठ फैलाने के नाम से कुख्यात हो चुकी वेबसाइट The Wire का एक और झूठ पकड़ा गया है। इस झूठ के लिए प्रॉपगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ से भाजपा नेता देवांग दवे (Devang Dave) ने सार्वजनिक तौर पर माफी की माँग की है।

दरअसल ‘द वायर’ ने अपनी एक रिपोर्ट में तथाकथित ऐप ‘टेक फॉग (Tek Fog)’ का संबंध देवांग दवे से जोड़ा था। यह रिपोर्ट उनकी दूसरी रिपोर्ट्स की तरह फर्ज़ी निकली और अब द वायर ने उस रिपोर्ट को हटा भी लिया है।

The Wire सार्वजनिक माफी माँगे: देवांग दवे

देवांग दवे ने इस संबंध में एक ट्वीट किया और फर्ज़ी वेबसाइट The Wire से सार्वजनिक रूप से माफी की माँग की। ट्वीट में उन्होंने लिखा:

“जिस तरह द वायर ने मुझ पर तथाकथित #TekFog ऐप बनाने और चलाने का आरोप लगाया, उसी तरह उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए। इस माफी को उन्हें घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मीडिया घरानों से वैसे ही कवर करवाना चाहिए, जिस तरह से यह फर्ज़ी स्टोरी चलवाई गई थी।”

आपको बता दें कि ‘द वायर’ की इस झूठी रिपोर्ट के सामने आने के बाद कई मीडिया घरानों ने इसे हाथों हाथ लिया था। ट्वीट के अंतिम लाइन में भाजपा नेता ने ”कानून इन सब का ख्याल रखेगा” तो लिखा लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि अपनी छवि खराब करने के लिए देवांग दवे ‘द वायर’ के खिलाफ कोई कानूनी कदम उठा रहे हैं या नहीं।

देवांग दवे पर The Wire के आरोप क्या?

अप्रैल 2020 के एक ट्वीट और फर्जी सूत्रों के आधार पर The Wire ने भाजपा नेता देवांग दवे को ‘टेक फॉग’ ऐप के पीछे का दिमाग बताया था और कहा था कि ये शक्तिशाली ऐप सोशल मीडिया में अपने हिसाब से ट्रेंड्स चलाता है और आलोचकों के लिए घृणा फैलाता है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस ऐप के जरिए भाजपा सोशल मीडिया को कंट्रोल कर रही है। देवांग दवे ने उस समय ही इससे इनकार किया था, लेकिन फिर भी The Wire ने बिना किसी सबूत इस स्टोरी को चलाया।

‘द वायर’ ने जनवरी 2022 में प्रकाशित किए गए ख़बर में दावा किया था कि इस ऐप के माध्यम से भाजपा कई व्हाट्सएप्प ग्रुप्स को मैनेज करती है और भाजपा विरोधी पत्रकारों को प्रताड़ित करने के अलावा ट्विटर ट्रेंड्स भी हाईजैक करती है। साथ ही दावा किया गया था कि ये ऐप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के सभी सिक्योरिटी फीचर्स की धज्जियाँ उड़ाता है। इस रिपोर्ट की मानें तो इस ‘सुपरपावर’ ऐप के पास अमेरिका और नासा से भी ज्यादा शक्तियाँ हैं। रिपोर्ट में यह तक लिखा गया था कि व्हाट्सएप्प-ट्विटर एकाउंट्स को हैक करना इस ऐप के लिए बच्चों का खेल है।

ऑपइंडिया ने ‘द वायर’ के फेक न्यूज़ और फर्ज़ी रिपोर्ट्स को कई बार एक्सपोज़ किया है। अपनी रिपोर्टिंग में हमने कई बार बताया है कि इस तरह का कोई ऐप नहीं है और यह सब ‘द वायर’ के दिमाग की उपज है। अब हाल यह है कि ‘Meta’ मामले में बेइज्जती के बाद प्रोपेगंडा पोर्टल The Wire ने ‘टेक फॉग’ वाली स्टोरीज भी अपनी वेबसाइट से हटा ली है। अब देखना है कि फर्ज़ी रिपोर्ट के लिए सार्वजनिक रूप से माफी कब और कितनी बार माँगी जाती है।

राधा स्वामी के डेरे में लिखा गया खालिस्तानी नारा, संस्था के मुखिया से मिलने पहुँचे थे PM मोदी: धमकी – केंद्र के साथ मत दो, पाकिस्तान-खालिस्तान में एक चुनो

पंजाब में एक बार फिर खालिस्तान पैर पसारने लगा है। यहाँ के फिरोजपुर में राधा स्वामी डेरे की दीवारों पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए हैं। खालिस्तान समर्थक आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ ने इसकी जिम्मेदारी ली है। साथ ही खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने डेरा मुखी गुरिंदर सिंह ढिल्लों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को लेकर धमकी दी भी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिरोजपुर के राधा स्वामी डेरे की दीवारों पर ये नारे शनिवार (12 नवंबर, 2022) की रात लिखे गए हैं। इसकी जानकारी मिलने पर थाना तलवंडी भाई के प्रभारी गुरमीत सिंह डेरा पहुँचे और देश विरोधी नारों को हटा दिया।

उल्लेखनीय है कि देश विरोधी नारे लिखने के बाद इसका वीडियो भी बनाया गया, जिसे खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने जारी किया। वीडियो में पन्नू ने डेरा मुखी गुरिंदर ढिल्लों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को लेकर धमकी देते हुए है कि वह केंद्र का साथ न दें। यही नहीं उसने डेरे के श्रद्धालुओं को खालिस्तान व पाकिस्तान या हिंदुस्तान में से एक को चुनने की धमकी भी दी है।

बता दें, राधा स्वामी डेरे को लेकर खालिस्तानी आतंकी पन्नू का यह दूसरा वीडियो है। इससे पहले उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डेरा राधा स्वामी से मुलाकात के पहले एक वीडियो वीडियो शेयर किया था। उस वीडियो में पन्नू ने डेरा मुखी गुरिंदर ढिल्लों को प्रधानमंत्री से न मिलने के लिए कहा था। बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गत 5 नवंबर को अमृतसर के ब्यास स्थित राधा स्वामी डेरा पहुँचे थे। वहाँ उन्होंने करीब एक घण्टे तक डेरे का भ्रमण किया था और डेरा मुखी ढिल्लों से बातचीत की थी।

गौरतलब है कि इससे पहले 2 अक्टूबर को पंजाब के बठिंडा स्थित डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिस की दीवार पर खालिस्तान समर्थक और भारत विरोधी नारे लिखे गए थे। इस दीवार पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ लिखा गया था। तब भी पन्नू ने वीडियो जारी कर देश विरोधी टिप्पणी की थी। आतंकी पन्नू ने यह भी कहा था कि 1984 में श्री दरबार साहिब पर हमले के बाद सिखों और हिंदुस्तान के बीच एक बड़ी लाइन खिंच गई है।