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झारखंड पुलिस को पता था अंकिता नाबालिग है, फिर भी बयान वाले उम्र को बढ़ा 19 साल किया: DSP नूर मुस्तफा पर शाहरुख को बचाने का लगा है आरोप

झारखंड के दुमका में बात नहीं करने पर जिंदा जलाकर मारी गई अंकिता के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। झारखंड बाल कल्याण समिति ने कहा कि जब मृतक की हत्या की गई, तब वह नाबालिग थी। हालाँकि, पुलिस को इसकी जानकारी होने के बावजूद उसने रिपोर्ट में मृतक को बालिग दिखाया था।

रिपोर्टों के अनुसार, झारखंड पुलिस ने अपनी FIR में मृतक की उम्र 19 वर्ष की लिखी थी। दरअसल, अंकिता ने अपने बयान में अपनी उम्र 17 वर्ष बताई थी। इसके बाद पुलिस ने 17 साल को बढ़ाकर 19 साल कर दिया था। हालाँकि, गुरुवार (1 सितंबर 2022) को पुलिस ने माना कि लड़की की उम्र उस समय 15 वर्ष थी। इसके बाद आरोपितों के खिलाफ POCSO एक्ट की धाराएँ जोड़ीं।

माना जा रहा है कि मृतक की उम्र को बढ़ाकर उसे बालिग साबित करने की कोशिश की जा रही थी। इसके जरिए पुलिस एक तरह से आरोपित शाहरुख हुसैन और नईम खान उर्फ छोटू की मदद कर रही थी। बता दें कि इस मामले में डीएसपी नूर मुस्तफा पर आरोपितों की मदद करने का आरोप लगा है।

हालाँकि, मृतक लड़की ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अपना बयान दिया था और अपनी उम्र 17 साल बताई थी, इसके बावजूद बयान वाले अंकित उम्र को काटकर वहाँ 19 वर्ष लिखा गया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने दुमका के डीआईजी को जाँच का निर्देश दिया है।

झारखंड बाल कल्याण समिति ने इस घटना का संज्ञान लिया था और खुलासा किया था कि 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली अंकिता नाबालिग थी। समिति ने कहा था कि मृतका की 10वीं की मार्कशीट में उसकी जन्मतिथि 26 नवंबर 2006 बताई गई है। इसके बाद पुलिस ने आनन-फानन में बताया कि लड़की की उम्र 15 साल थी।

बता दें कि DSP नूर मुस्तफा पर हिन्दू विरोधी आरोप लगने के बाद इस केस की जाँच से हटा दिया गया है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कुछ दस्तावेज साझा करते हुए कहा था कि उनके पास डीएसपी नूर मुस्तफ़ा के आदिवासी विरोधी एवं कम्यूनल होने के प्रमाण हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि आदिवासियों के एक शोषक ज़ुल्फ़िकार पर ST एक्ट का मामला दर्ज हुआ और वह जेल भी गया, लेकिन DSP नूर मुस्तफ़ा ने 90 दिनों तक चार्जशीट नहीं की। इसके आधार पर ज़ुल्फ़िकार को जमानत मिल गई। डीएसपी नूर मुस्तफ़ा ने जुल्फिकार के जेल से निकल जाने के कुछ ही देर बाद चार्जशीट दाखिल कर दिया था।

‘बॉलीवुड में KGF-2 किसी को नहीं आई पसंद’ : राम गोपाल वर्मा ने द कश्मीर फाइल्स को बताया- सबसे स्लो फिल्म, RRR को सर्कस कहा

साल 2022 में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली फिल्म द कश्मीर फाइल्स और केजीएफ-2 को लेकर बॉलीवुड निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने टिप्पणी की है। राम गोपाल वर्मा ने केजीएफ-2 के बारे में कहा कि ये फिल्म बॉलीवुड के बड़े निर्देशकों से आधे घंटे से ज्यादा नही झिल पाई। वहीं द कश्मीर फाइल्स को लेकर वह बोले कि ये फिल्म अब तक सबसे धीमी फिल्म बनाई गई।

बॉलीवुड हंगामा से बात करते हुए राम गोपाल वर्मा ने कहा, “दो फिल्म जिन्होंने सबकुछ गड़बड़ किया- KGF-2 और द कश्मीर फाइल्स हैं। इनमें KGF-2 तो ऐसी है जिसे बॉलीवुड में किसी ने पसंद नहीं किया। यही वजह है कि जब आपको फिल्म नहीं पसंद आती तो आप सोचते हैं कि इसके कामयाबी के पीछे क्या कारण है।”

उन्होंने कहा, “एक बहुत बड़े डायरेक्टर ने मुझसे कहा था- ‘रामू, मैंने ये फिल्म 5 बार देखने की कोशिश की, लेकिन आधे घंटे से ज्यादा नहीं देख पाया।” वर्मा कहते हैं, “आप KGF-2 को पसंद करें या न करें लेकिन आप इसकी कामयाबी को नजरअंदाज नहीं कर सकते। केजीएफ चैप्टर-2 बॉलीवुड पर मंडराते भूत जैसा है।”

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि उन्हें फिल्म पसंद नहीं आई लेकिन उन्हें फिल्म देख हैरानी हुई। फिल्म निर्माता- फिल्म बनाने से पहले लॉजिक ढूँढते हैं, लेकिन जब केजीएफ-2 जैसी तर्कहीन फिल्म सारे रिकॉर्ड तोड़े, तब क्या कर लेंगे।

द कश्मीर फाइल्स सबसे स्लो फिल्म: राम गोपाल वर्मा

द कश्मीर फाइल्म पर बात करते हुए वह बोले, “ये फिल्म कम नहीं है। इसे एक गुमनाम डायरेक्टर ने बनाया जिसे बॉलीवुड में लोग गंभीरता से नहीं लेते। अनुपम खेर ही इस फिल्म का सबसे जाना-माना चेहरा थे। इसके बावजूद ये फिल्म 250 करोड़ रुपए कमा ले गई।”

वर्मा ने द कश्मीर फाइल्स को लेकर कहा, “ये फिल्म अब तक की सबसे धीमी फिल्म थी। फिल्म निर्माताओं के रूप में हमने अब तक जो कुछ बनाया, ये उसके विपरीत थी। इसमें कोई कहानी नहीं, कोई पहला-दूसरा स्क्रीनप्ले नहीं, कोई इंटरवल और कोई क्लाइमैक्स नहीं। लेकिन लोग फिर भी इसके लिए पागल हो रहे थे। मुझे नहीं लगता कि बीते 20 सालों में कोई फिल्म इतनी गंभीरता से देखी गई जितनी द कश्मीर फाइल्स को लोगों ने देखा।”

इसी तरह राम गोपाल वर्मा ने RRR पर कहा, “मैंने राजमौली को कहा कि RRR मेरे लिए एक सर्कस जैसी है। गलत ढंग में नहीं। सर्कस को लोग जोकर की वजह से याद रखते हैं। पर हकीकत में वहाँ बहुत कुछ होता है। RRR में जब राम चरण और जूनियर एनटीआर ने जब बच्चे को बचाया, तो मुझे जंगली सर्कस की याद आई, उसमें लोग इसी तरह रस्सी से लटक इधर-उधर जाते हैं।”

गुरुग्राम में यूनिवर्सिटी में नमाज, फुटबॉल खेलते हुए इबादत: नमाज के लिए अलग कमरा ‘अफवाह’ और आंतरिक मामला है विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए

सार्वजनिक स्थलों के बाद गुरुग्राम में अब जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी कैम्पस के अंदर नमाज का मामला सामने आया है। आरोप है कि मुस्लिम छात्रों द्वारा कमरे में नमाज़ पढ़े जाने का हिन्दू छात्रों ने विरोध किया और जय श्री राम के नारे लगाए। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस पहुँची लेकिन किसी भी पक्ष द्वारा लिखित शिकायत न मिलने पर वापस लौट गई।

जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी से जुड़ा यह मामला मंगलवार (30 अगस्त 2022) का बताया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नमाज के लिए अलग कमरा दिए जाने की बातों को अफवाह करार दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हंगामा कर रहे छात्रों का आरोप था कि यूनिवर्सिटी में मुस्लिम छात्रों को नमाज के लिए अलग से कमरा दिया गया है। विरोध कर रहे छात्रों का कहना था कि शिक्षा को किसी मत या मज़हब से नहीं जोड़ना चाहिए। इस दौरान छात्रों ने यूनिवर्सिटी की प्रॉक्टर तनूजा कौशिक को एक ज्ञापन भी सौंपा। छात्रों का कहना था कि उन्होंने इससे पहले भी कैम्पस में नमाज का विरोध किया था लेकिन उनकी शिकायत को अनसुना कर दिया गया था।

इस मामले पर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार धीरेंद्र सिंह परिहार के मुताबिक विश्वविद्यालय में कई सालों से सभी धर्म के लड़के पढ़ते हैं और वो एक दूसरे से मिल-जुल कर रहते हैं। उनका कहना है कि कैम्पस में न सिर्फ भारत के विभिन्न हिस्सों से बल्कि दूसरे देशों के छात्र भी पढ़ाई करते हैं। धीरेन्द्र सिंह के मुताबिक शायद फुटबॉल खेलते हुए अफ्रीकी महाद्वीप के विदेशी छात्रों ने नमाज पढ़ी थी। परिहार के अनुसार छात्रों ने आपस में मामले को सुलझा लिया है और अब विवाद जैसी कोई बात नहीं है।

इस घटना के वायरल हो रहे एक वीडियो में छात्रों का समूह एक जगह खड़े हो कर नमाज का विरोध दर्ज करवा रहा है। वहीं दूसरे वीडियो में लड़के कॉलेज कैम्पस में समूह बना कर घूम रहे हैं और नारेबाजी कर रहे हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए गुरुग्राम के सोहना थाने के SHO इंस्पेक्टर उमेश कुमार ने बताया कि फोन पर मिली सूचना के बाद वो जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी के अंदर गए थे लेकिन वहाँ कोई लिखित शिकायत किसी के भी तरफ से नहीं मिली। इंस्पेक्टर का कहना है कि हालात पूरी तरह से सामान्य हैं और यूनिवर्सिटी ने उन्हें बताया है कि यह उनका आंतरिक मामला था, जिसे उन्होंने सुलझा लिया है।

गौरतलब है कि विगत कुछ समय से सार्वजनिक स्थलों पर नमाज के विवाद को ले कर गुरुग्राम देश भर में चर्चा का केंद्र बना रहा था। मुख्यमंत्री खट्टर ने भी इस मामले में बयान देते हुए सार्वजानिक स्थल पर इबादत न करने की सलाह दी थी।

असम में हिमंता सरकार की अवैध कब्जाधारियों पर बड़ी कार्रवाई: 330 एकड़ जमीन खाली कराने के लिए 1200 जवान और 50 से अधिक बुलडोजर तैनात

असम की हिमंता बिस्वा सरमा (Assam CM Himanta Vishwa Sarma) सरकार आतंकी गतिविधियों वाले मदरसों और सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों को लेकर सख्त रूख अपनाए हुए है। शनिवार (3 सितंबर 2022) को बेदखली का काम शुरू किया है।

पुलिस का कहना है कि सोनितपुर जिले में 330 एकड़ जमीन को खाली कराने की कार्रवाई जारी है। इसके लिए भारी सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित बरचल्ला में नंबर 3 चीतलमारी इलाकों के अवैध घरों को ध्वस्त करने के अभियान में 50 से अधिक बुलडोजर एवं अन्य भारी मशीनों को लगाया गया है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में मजदूरों को तैनात किया गया है।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि बेदखली की कार्रवाई अभी तक शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रही है। अधिकारी का कहना है कि इलाके के अवैध निवासियों को बेदखली का नोटिस भेजा गया था। नोटिस मिलने के बाद अधिकांश निवासी अपना सामान लेकर वहाँ से जा चुके हैं।

बेदखली और अवैध इमारतों को ध्वस्त करने का काम शनिवार को सुबह 5 बजे से शुरू किया गया। अवैध इलाके के एक तिहाई हिस्से में ध्वस्तीकरण का काम पूरा भी हो चुका है। वहीं, कानून-व्यवस्था में किसी भी तरह की रूकावट को देखते हुए 1200 अर्द्धसैनिकों को तैनात किया गया है।

इसके पहले विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने गुरुवार (1 सितंबर 2022) को इलाके का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। उन्होंने कहा था कि बेदखली के दौरान एक IG रैंक का अधिकारी और तीन SP रैंक के अधिकारी मौजूद रहेंगे।

सरकारी आँकड़ों में बताया गया है कि इस इलाके में 299 परिवार अवैध रूप से रह रहे थे। सरकार ने इन परिवारों को जमीन खाली करने के लिए लगभग 8 महीने पहले नोटिस दिया था। नोटिस मिलने के बाद इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक परिवार यहाँ से जा चुके हैं।

इस इलाके में सबसे ज्यादा बांग्लाभाषी मुस्लिम थे। उसके बाद बंगाली हिंदू और गोरखा थे। इस क्षेत्र के दो बार से भाजपा विधायक गणेश कुमार लिम्बु का कहना है कि यहाँ रहने वाले अधिकांश लोगों के दूसरी जगहों पर भी घर है। इसलिए वे बिना किसी विरोध के चले गए।

‘शबाना आजमी, जावेद अख्तर और नसीरुद्दीन शाह… ये सब टुकड़े-टुकड़े गैंग के स्लीपर सेल’ : MP के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने लिबरल गैंग पर निशाना साधा। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने शबाना आजमी, जावेद अख्तर और नसीरुद्दीन शाह तीनों को ही टुकड़े-टुकड़े गैंग का स्लीपर सेल कह दिया।

बॉलीवुड में काम करने वाली शबाना आजमी ने हाल ही में बिलकिस बानो गैंगरेप के दोषियों की रिहाई को लेकर नराजगी जाहीर की थी। इस पर जब मंत्री नरोत्तम मिश्रा से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “शबाना आजमी, लेखक जावेद अख्तर और नसीरुद्दीन शाह टुकड़े-टुकड़े गैंग के स्लीपर सेल हैं।”

गुरुवार (2 सितंबर 2022) की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एमपी के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “शबाना आजमी को बिलकिस बानो का केस तो दिखाई देता है, लेकिन राजस्थान में कन्हैया लाल की हत्या नहीं दिखाई देती। इस पर शबाना आजमी कुछ नहीं बोलीं। झारखंड में हमारी बेटी की जिंदा जलाकर हत्या की गई। इस पर इनकी गैंग कुछ नहीं बोली।”

इस दौरान उन्होंने कहा कि टुकड़े-टुकड़े गैंग को और अवॉर्ड वापसी गैंग को यह सब दिखाई नहीं देता है। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने यह भी कहा कि बीजेपी शासित राज्य में कुछ हो जाए तभी ये गैंग जागता है। तभी इन सभी को देश में रहने में डर लगने लगेगा। यह सभी लोग तब गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाने लगेंगे। अवॉर्ड वापसी गैंग भी सक्रिय हो जाएगी।

क्या है बिलकिस बानो केस

वर्ष 2002 में गोधरा में ट्रेन के भीतर हिंदुओं को जला कर मारा गया था। इसके बाद गुजरात दंगे हुए। बिलकिस बानो केस इसी का एक चर्चित मामला है। आरोप के अनुसार गुजरात के दाहोद जिले के राधिकपुर गाँव में रहने वाली बिलकिस बानो के घर अनुमानतः 20 लोगों ने हमला कर दिया था।

आरोप है उन हमलावरों ने बिलकिस, उनकी माँ और तीन अन्य महिलाओं के साथ बलात्कार किया। इसके अलावा यह भी आरोप है कि हमलावरों ने बिलकिस के खानदान के कुल 8 सदस्यों हत्या की थी, जबकि 6 लोग लापता हो गए थे। गौर करने वाली बात है कि हमला करने वालों ने 3 साल की एक मासूम को जिंदा छोड़ दिया था।

हमले के बाद बिलकिस बेहोश हो गई थीं। होश में आने के बाद उन्होंने एक आदिवासी महिला से मदद ली थी। इसके बाद वह एक होमगार्ड से मिली थीं, जो उन्हें लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन लेकर गया था। इस मामले में सीबीआई ने बताया तथ्यों को दबाया गया और शिकायत का एक विकृत तथा छोटा संस्करण लिखा गया।

ब्रिटेन को पीछे धकेल भारत बना विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था: GDP ग्रोथ का IMF भी हुआ कायल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं- ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’ आदि का प्रभाव दिखने लगा है। ब्रिटेन को पछाड़कर भारत विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत से आगे अब सिर्फ अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी ही हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था में इस तरह की बड़ी छलांग पिछले 10 वर्षों के दौरान देखने को मिला। आज से 10 साल पहले यानी 2012 तक भारत विश्व की 10 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भी शामिल नहीं था। इस सूची में भारत का स्थान 11वाँ था, जबकि ब्रिटेन पाँचवें नंबर पर ही था।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर विनिमय दर पर आधारित नॉमिनल कैश के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार नॉमिनल कैश में 854.7 अरब डॉलर (68.13 लाख करोड़ रुपए) हो चुका है। वहीं, उसी अवधि में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का आकार 816 अरब डॉलर (65 लाख करोड़ रुपए) था।

वहीं, सालाना आधार पर बात करें तो भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 3.17 लाख करोड़ डॉलर का है, जबकि ब्रिटेन का जीडीपी 3.19 लाख करोड़ डॉलर का है। भारतीय अर्थव्यवस्था ब्रिटेन से कुछ पीछे छठे स्थान पर है। इस आधार पर भारत की GDP ने बीते 20 वर्षों में 10 गुना वृद्धि हासिल की है।

बात दें कि भारत ने हाल ही में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी आँकड़े जारी किए हैं। इन आँकड़ों में भारतीय अर्थव्यवस्था की शानदार ग्रोथ का पता चलता है। भारत की अर्थव्यवस्था इस तिमाही में 13.5 फीसदी की दर से बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के जीडीपी आँकड़ों में भी कहा गया है कि भारत ने अपनी GDP को मजबूत किया है।

IMF के मुताबिक, साल 2019 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था नॉमिनल जीडीपी के आधार में 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनी थी। ब्रिटेन छठे स्थान पर चला गया था। उस समय भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2.9 लाख करोड़ डॉलर था। उस समय ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 2.8 लाख डॉलर पर आ गई थी। 

भगवान नीलकंठ महादेव का मंदिर तोड़ बना डाली 23000 नमाजियों वाली जामा मजिस्द: UP के बदायूँ में याचिका दायर, कोर्ट में सभी सबूत पेश

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में हिन्दू संगठनों ने वहाँ की जामा मजिस्द में नीलकंठ महादेव के होने का दावा किया है। इस दावे के साथ जिले की सिविल कोर्ट में एक याचिका भी दायर हुई है, जिसे कोर्ट ने स्वीकार भी कर लिया है। इसमें नीलकंठ महादेव की तरफ से हिन्दू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल खड़े हुए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितम्बर 2022 को तय की गई है। 2 अगस्त 2022 को दायर इस याचिका पर आदेश शुक्रवार (2 सितम्बर 2022) को हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नीलकंठ महादेव की तरफ से कुल 5 पक्षकार कोर्ट में पेश हुए हैं। मामले में मुख्य पक्षकार स्वयं भगवान नीलकंठ महादेव को बनाया गया है। उनके अलावा अन्य पक्षकारों में मुकेश पटेल, एडवोकेट अरविन्द परमार, ज्ञान प्रकाश, डॉक्टर अनुराग शर्मा और उमेश चंद्र शर्मा शामिल हैं। पेश हुए पक्षकारों ने जामा मस्जिद को इतिहास में पहले हिन्दू राजा महीपाल का किला और उसी जगह पर भगवान शिव का नीलकंठ मंदिर होने का दावा किया है।

याचिकाकर्ता मुकेश पटेल का दावा है कि उन्हें इस जगह के इतिहास की जानकारी है। उन्होंने कोर्ट से जामा मस्जिद का सर्वे करवाने की माँग की है। पटेल का दावा है कि भगवान शिव के मंदिर को तोड़ कर जामा मस्जिद बनाई गई है।

याचिकाकर्ताओं के वकील वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि उन्होंने सभी सबूत कोर्ट में पेश किए हैं, जो उस स्थान को प्राचीन हिन्दू मंदिर साबित करती है। मुकेश पटेल के मुताबिक:

“1192 में भारत पर मोहम्मद गोरी के आक्रमण के दौरान उसके सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने बदायूँ आकर राजा महिपाल को मार डाला था। बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक के दामाद इल्तुतमिश ने यहाँ के मंदिर को तोड़ कर उस पर जामा मस्जिद बनवाई है।”

इस मामले में मुस्लिम पक्ष इस जामा मस्जिद को सन 1222 में शाशुद्दीन इल्तुतमिश द्वारा बनावाई गई मानता है। आपको बता दें कि बदायूँ की जामा मस्जिद मौलवी टोला इलाके में बनी है, जिसमें एक साथ लगभग 23000 लोगों के नमाज पढ़ने की जगह है।

मामले में सुनवाई कर रहे सीनियर डिवीजन जज विजय कुमार गुप्ता की कोर्ट से अब विपक्षियों को भी उनका पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजी जाएगी। बताया जा रहा है कि इस वाद में विपक्षी के तौर पर जामा मस्जिद की इंतजामिया कमिटी है। उनके अलावा उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड, उत्तर प्रदेश पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार को अपना-अपना पक्ष रखना है।

गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व वाराणसी में हुए ज्ञानवापी ढाँचे के सर्वे में हिन्दू पक्षकारों ने प्राचीन शिवलिंग मिलने का दावा किया था। हालाँकि मुस्लिम पक्षकारों ने उसे फव्वारा बताया था और TV डिबेट के दौरान भी कई इस्लामी स्कॉलरों ने उसके लिए अपमानजनक शब्द बोले थे।

JDU में नीतीश कुमार से बगावत: अब्दुल नासिर को छोड़ मणिपुर के 6 में से 5 विधायकों ने BJP का थामा हाथ, NDA से अलग होने पर थे नाराज

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता तोड़ा तो उनकी पार्टी के 5 विधायकों ने पार्टी को छोड़ बीजेपी से नाता जोड़ लिया। मणिपुर में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के 6 में से 5 विधायक भाजपा में शामिल होकर नीतीश कुमार बड़ा झटका दे दिया है।

पार्टी के 5 विधायकों के भाजपा में विलय करने को जेडीयू ने असंवैधानिक बताया है। वहीं, भाजपा ने उन विधायकों का स्वागत किया है। इस उलटफेर को लेकर मणिपुर विधानसभा के सचिव को भी सूचित कर दिया गया है।

दरअसल, मणिपुर में मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह (CM N Biren Singh) के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को जेडीयू समर्थन दे रही थी। कहा जा रहा है कि जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार ने राज्य में भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेने का निर्णय लिया था।

ये भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार के इस फैसले से राज्य के विधायक खुश समर्थन में नहीं थे। इतना ही नहीं, बिहार में भी भाजपा से गठबंधन तोड़ने के पक्ष में मणिपुर के जेडीयू विधायक नहीं थे। यही कारण है कि इन विधायकों ने भाजपा में विलय कर लिया। जेडीयू के कुल 6 में विधायकों में मोहम्मद अब्दुल नासिर को छोड़कर 5 ने भाजपा में विलय कर लिया।

उधर मणिपुर विधानसभा के सचिव मेघजीत सिंह ने कहा कि जेडीयू के पाँच विधायकों के भाजपा में विलय को संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत स्वीकार कर लिया गया है। बता दें कि इस साल हुए विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने कु 38 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें 6 सीटों पर जीत दर्ज हुई थी।

बता देें कि कुछ समय पहले ही अरुणाचल प्रदेश में जनता दल यूनाइटेड (JDU) का इकलौता विधायक भी भाजपा में शामिल हो गया था। 25 अगस्त को जेडीयू के इकलौते विधायक टेकी कासो ने भाजपा जॉइन कर लिया था। इस तरह राज्य में जदयू का पूरी तरह सफाया हो गया था।

साल 2019 में हुए अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में जदयू को 7 सीटें मिली थीं। उस समय राज्य में भाजपा के बाद जदयू दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी। भाजपा के कुल 41 विधायक थे और जेडीयू के 7 विधायक थे। हालाँकि, बाद में जेडीयू के 6 विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे।

मणिपुर में भाजपा में विलय करने वाले 5 विधायकों की तरह तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं जारी किया गया है। जेडीयू के जिन पाँच विधायकों ने भाजपा में विलय किया है, उनके नाम हैं- केएच जॉयकिशन, एन सनाते, मोहम्मद अछबउद्दीन, पूर्व पुलिस महानिदेशक एएम खाउटे और थांगजाम अरूण कुमार।

इन विधायकों में एएम खाउटे और थांगजाम अरुण कुमार ने विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से टिकट की माँग की थी। जब भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे जेडीयू की टिकट पर चुनाव लड़े और जीते थे। अब दोनों ने जेडीयू छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है।

बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने पार्टी में बगावत को लेकर JDU पर कटाक्ष किया है। उन्होंने ट्वीट किया, “अरुणाचल के बाद अब मणिपुर भी JDU मुक्त। बहुत जल्द लालूजी बिहार को भी JDU मुक्त कर देंगे।”

बिहार में अब BTET अभ्यर्थियों पर बरसी पुलिस की लाठियाँ, इससे पहले BPSC छात्रों को भी पीटा था: नीतीश-तेजस्वी सरकार में तीसरी बार पिटे युवा

बिहार में एक बार फिर अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज की खबर सामने आई है। पटना में परीक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे BTET अभ्यर्थी राजभवन का घेराव करने के लिए डाकबंगला चौराहे से आगे की ओर बढ़ रहे थे। इस दौरान पुलिस ने इन अभ्यर्थियों पर जमकर लाठियाँ बरसाई हैं। पुलिस की लाठीचार्ज में कई अभ्यर्थियों के घायल होने व एक लड़की के बेहोश होने की बात सामने आई है।

हाल में दो बार हो चुके हैं इसी तरह के लाठीचार्ज

इससे पहले बुधवार (31 अगस्त 2022) को भी ‘बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC)’ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था। जिससे कई छात्र घायल हो गए था। पत्रकार शुभांकर मिश्रा ने अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज को लेकर ट्वीट भी किया था। उन्होंने लिखा, “लाखों नौकरी का ऐलान करने वाली सरकार की पुलिस ने अब पटना में BPSC छात्रों पर लाठीचार्ज किया है। छात्र परीक्षा का पैटर्न बदलने का विरोध कर रहे थे। उधर पटना के लाठीचार्ज ADM, जिन्होंने 22 August को ‘तिरंगा’ पकड़े छात्र की बेरहमी से पिटाई की थी, उन पर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार लोक सेवा आयोग की 67वीं BPSC परीक्षा के पैटर्न में बदलाव को लेकर छात्र लगातार विरोध कर रहे थे। पटना में एकत्रित हुए बीपीएससी अभ्यर्थियों ने एक दिन में ही परीक्षा आयोजित करने की माँग की थी। उनका कहना था कि इसी के आधार पर मेरिट लिस्ट भी तैयार की जाए। उनका कहना था कि दो दिन परीक्षा आयोजित की जाएगी तो दोनों दिन परीक्षा के सवाल का लेवल अलग-अलग होगा। इसलिए, दो दिन की जगह परीक्षा एक ही दिन में ली जाए। इन दोनों माँगों को लेकर बुधवार को सैकड़ों अभ्यर्थी पटना की सड़कों पर उतरे। इसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया।

बता दें कि इसी तरह 22 अगस्त 2022 को भी पटना ADM ने लाठी बरसा कर एक शिक्षक अभ्यर्थी को लहूलुहान कर दिया था। ADM का गुस्सा सिर्फ शिक्षक अभ्यर्थियों पर ही नहीं बरसा, बल्कि उन्होंने एक मीडियाकर्मी की भी धुनाई कर दी थी। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था। वीडियो में पटना ADM को खुलेआम उस शिक्षक अभ्यर्थी पर लाठियाँ बरसाते हुए देखा गया, जो हाथ में तिरंगा लिए हुए था। वो जमीन पर गिर गया था, इसके बाद भी ADM लगातार उसकी पिटाई करते रहे। अधिकारी ने इस दौरान भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे पर लाठी बरसाने से भी परहेज नहीं किया।

शादीशुदा रब्बानी अंसारी ने नाम-धर्म छुपा दलित नाबालिग से की दोस्ती, फिर रेप: अश्लील वीडियो किया वायरल, कुएँ में धकेल कर मारने की कोशिश

झारखंड के लोहरदगा (Lohardaga, Jharkhand) लव जेहाद (Love Jihad) का एक मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम युवक ने पहले अपना नाम और धर्म छुपाकर एक नाबालिग दलित युवती से दोस्ती की, फिर शादी के नाम पर उसका यौन शोषण करने लगा। जब लड़की को सच्चाई पता चली तो आरोपित ने कुएँ में धकेल कर उसकी हत्या करने की कोशिश की।

हालाँकि, लड़की की किसी तरह जान बच गई और उसने घटना की जानकारी अपने परिजनों को दी। इसके बाद इलाके के लोगों ने इस घटना को लेकर आक्रोश व्यक्त किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर और उसे गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल, 6 महीना पहले राँची के रब्बानी अंसारी ने लोहरदगा जिले की 17 साल की नाबालिग पीड़िता को कॉल किया था। उस दौरान उसने अपना नाम साजन उरांव और खुद को अनुसूचित जनजाति (ST) का बताया था। इसके बाद अंसारी लड़की को अपनी बातों में फँसा लिया और दोस्ती के नाम पर फोन पर बातें करने लगा।

अंसारी अपने मकसद को कामयाब होता देख आगे की रणनीति अपनाई और लड़की को बताया कि वह उससे प्यार करने लगा है। लड़की आरोपित के झाँसे में आ गई। इस बीच फरवरी से जुलाई महीने के बीच रब्बानी अंसारी ने लड़की को कई बार राँची बुलाया और किराए पर कमरा लेकर उसके साथ रेप किया। उसने लड़की का अश्लील वीडियो भी बना लिया।

इसी दौरान लड़की को पता चला कि जिसे वह साजन उरांव समझ रही है, वह असल में रब्बानी अंसारी है और वह शादीशुदा है। लड़की ने जब इसका विरोध किया तो अंसारी उसके साथ मारपीट करने लगा। इतना ही नहीं उस पर दबाव बनाने के लिए उसने अश्लील वीडियो भी वायरल कर दिया। उसने एक कुएँ में धक्का देकर उस पर पत्थर भी मारे।

खुशकिस्मती से नाबालिग दलित लड़की की किसी तरह जान बच गई और वहाँ से भागकर वह लोहरदगा अपने घर पहुँची। घर पर उसने परिजनों को घटना के बारे में जानकारी दी। उसके बाद परिजन लड़की को लेकर महिला थाने पहुँचे।

लोहरदगा महिला थाना पुलिस ने IPC की धारा 376, 427, 379, 417, 307 और पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज कर रब्बानी अंसारी को गिरफ्तार कर लिया। रब्बानी अंसारी राँची जिले के मांडर थाना अंतर्गत नवाटाड़ का रहने वाला है और वह जिले के नारकोपी थाने के अंतर्गत मोबाइल की एक दुकान चलाता है।

बता दें कि झारखंड के दुमका में शाहरुख हुसैन नाम के एक लड़के ने एक नाबालिग हिंदू युवती पर दोस्ती का दबाव डाला था। जब लड़की नहीं मानी तो उस पर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। अंत उस लड़की की मौत हो गई। इस घटना के बाद राज्य भर में लव जेहाद की घटनाओं को लेकर हिंदू संगठनों मेें रोष है।