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‘सबको अभिव्यक्ति की आज़ादी’: सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के तहत गिरफ्तार ‘पत्रकार’ सिद्दीकी कप्पन को दी जमानत, हाथरस दंगों की साजिश का है आरोप

यूपी के हाथरस में दलित लड़की के साथ हुई रेप और हत्या के बाद दंगों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार केरल के कथित पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (9 सितंबर 2022) जमानत दे दी। सिद्दीकी को उत्तर प्रदेश पुलिस ने UAPA के तहत 6 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार किया था।

कोर्ट ने जमानत देते हुए कप्पन का पासपोर्ट जब्त कर लिया है। इसके साथ ही उसे अगले 6 सप्ताह तक दिल्ली में ही रहने और हर सप्ताह जंगपुरा थाने में हाजिर होने का आदेश दिया है। इसके बाद कोर्ट ने उसे केरल वापस जाने की अनुमति दी है और कहा है कि वहाँ स्थानीय थाने में उसे हर सप्ताह अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली जस्टिस एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है और अभियोजन द्वारा तैयार की गई सामग्री जिसे टूलकिट के रूप में कप्पन को जिम्मेदार ठहराया गया है, वह विदेशी भाषा में प्रतीत होती है।

पीठ ने कहा, “हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। वह यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि पीड़ित को न्याय की जरूरत है और एक लोग आवाज उठाएँ। क्या यह कानून की नजर में अपराध है।”

जिरह के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि हाथरस की घटना के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा था और कप्पन दंगा भड़काने के लिए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की साजिश का हिस्सा था।

उन्होंने तर्क दिया, “कप्पन सितंबर 2020 में PFI की बैठक में शामिल था, जिसमें कहा गया था कि फंडिंग बंद हो गई है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि वे संवेदनशील क्षेत्रों में जाएँगे और दंगे भड़काएँगे। यहाँ तक ​​कि सह आरोपी ने भी ये बयान दिया था। PFI के अधिकारियों में से एक और उसने साजिश का खुलासा किया।”

जेठमलानी ने तर्क दिया कि ये कुछ हाथरस की पीड़िता को न्याय दिलाने के नाम पर किया जा रहा था। प्रदर्शन का एजेंडा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा देने के बाध्य करना था। इसके लिए ईमेल तक भेजे गए थे।

इस पर न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति भट ने कहा, “2011 में भी निर्भया के लिए इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। कभी-कभी बदलाव लाने के लिए विरोध की आवश्यकता होती है। आप जानते हैं कि उसके बाद कानूनों में बदलाव हुआ था।”

बता दें हाथरस घटना के दौरान वहाँ जाते समय सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा PFI से जुड़े अन्य 8 लोगों को भी SIT ने गिरफ्तार किया था। उस समय उसके साथ PFI का भी एक सदस्य था। गिरफ्तारी के बाद यूपी पुलिस की SIT ने सिद्दीकी कप्पन के खिलाफ 5000 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी।

हलफनामे में कप्पन के उन 36 आर्टिकल्स को हाईलाइट किया है जो उसके लैपटॉप से बरामद हुए थे। इन लेखों में निजामुद्दीन मरकज, एंटी सीएए प्रोटेस्ट, दिल्ली दंगे, राम मंदिर, शरजील इमाम जैसे मुद्दों पर बात है।

हलफनामे में कहा गया था कि कप्पन जिम्मेदार पत्रकार की तरह नहीं लिखता था। उसका काम सिर्फ मुस्लिमों को भड़काने का था। उसकी संवेदनाएँ माओवादी और कम्युनिस्टों के साथ थीं। एएमयू में हुए सीएए प्रोटेस्ट पर लिखे लेख में उसने ऐसे दिखाया था जैसे पीटे गए मुस्लिम पीड़ित हों और पुलिस ने उन्हें पाकिस्तान जाने को कहा हो।

‘ये आपको आसान लग सकता है, लेकिन परिणाम दूरगामी’: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं सुनी नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग वाली याचिका, कहा – वापस लीजिए

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार (9 सितंबर, 2022) को भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) की गिरफ्तारी की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने धारा 32 के तहत दायर की गई याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को इसे वापस लेने का सुझाव दिया।

मुख्य न्यायाधीश UU ललित ने कहा, “यह आपको आसान लग सकता है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम हैं। अदालत को निर्देश जारी करते समय चौकस रहना चाहिए। हम आपको याचिका वापस लेने का सुझाव देते हैं।” इसके बाद इस याचिका को खारिज कर दिया गया। एडवोकेट अबू सोहेल ने अधिवक्ता चाँद कुरैशी के माध्यम से दायर याचिका में घटना की ‘स्वतंत्र, विश्वसनीय और निष्पक्ष जाँच’ के लिए निर्देश देने की माँग की थी।

देश भर में मुस्लिमों ने की थी हिंसा

बता दें कि नूपुर शर्मा पर पैगंबर मुहम्मद (Prophet Mohammad) के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने और मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया था। इसे लेकर देश भर में कट्टर मुस्लिमों ने हिंसा की थी। उदयपुर और अमरावती में नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले का गला रेत दिया गया। वहीं, नूपुर शर्मा के खिलाफ कई मामले दर्ज कराए गए थे और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। जुलाई 2022 में शर्मा ने अपने खिलाफ सभी मामलों को क्लब करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दी थी। इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति पारदीवाला की खंडपीठ ने की थी।

यह महिला अकेले जिम्मेदार: न्यायमूर्ति सूर्यकांत

इस याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा था, “जिस तरह से उन्होंने पूरे देश में भावनाओं को भड़काया है, देश में जो हो रहा है उसके लिए यह महिला अकेले जिम्मेदार है।” अदालत ने यह भी कहा था कि उन्हें पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है और उन्होंने आम नागरिकों के लिए उपलब्ध न्यायिक अधिकार खो दिया है।

महाभियोग के लिए ऑनलाइन अभियान

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी को अपने लिखित आदेश में शामिल नहीं किया था, फिर भी देश भर में इसका विरोध शुरू हो गया था। न्यायाधीशों की इस टिप्पणी के खिलाफ 15 सेवानिवृत्त जजों, 77 रिटायर्ड नौकरशाहों और 25 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने खुला पत्र जारी कर इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण और गलत उदाहरण पेश करने वाला’ बताया था। वहीं, इन न्यायाधीशों के खिलाफ महाभियोग के लिए ऑनलाइन अभियान भी शुरू किया गया था। बाद में इसी पीठ ने उन्हें गिरफ़्तारी से राहत प्रदान करते हुए सभी FIR को दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश दिया।

जिस क्लब से जुड़ी है सोनाली फोगाट की मौत की गुत्थी, उसे ध्वस्त किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक: उधर सुनवाई, इधर चल गया बुलडोजर

सोनाली फोगाट की मौत के बाद चर्चा में आए गोवा के कर्लीज रेस्टॉरेंट पर शुक्रवार (9 सितंबर, 2022) को सरकारी बुलडोजर चल गया। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शुक्रवार (9 सितंबर, 2022) को रेस्टोरेंट को ना गिराने के आदेश जारी किए थे, लेकिन जब तक सुनवाई हुई तब तक रेस्टोरेंट को गिराने का काम शुरू हो गया था। वहीं इस आदेश के बाद प्रशासन ने काम रोक दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तटीय नियमन क्षेत्र (सीआरजेड) के नियमों के उल्लंघन के कारण कर्लीज रेस्टोरेंट को गिराने की प्रक्रिया शुक्रवार की सुबह शुरू हुई थी। यह रेस्टोरेंट उत्तरी गोवा के मशहूर अंजुना बीच पर स्थित है। भाजपा नेता सोनाली फोगाट की मौत की गुत्थी भी इसी रेस्टोरेंट से जुड़ी हुई है। उल्लेखनीय है कि सोनाली फोगाट ने मौत से कुछ घंटों पहले इसी जगह पार्टी की थीं, जहाँ उनके साथ दोनों आरोपित भी थे।

इस रेस्टॉरेंट गिराया जाना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से CJI यूयू ललित की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने ध्वस्तीकरण पर रोक के आदेश जारी कर दिए। वहीं इस बेंच में CJI के साथ ही जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा भी शामिल थे। उच्चतम न्यायालय ने गोवा सरकार और गोवा कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी को एक नोटिस जारी इस पर रोक लगाने के आदेश दिए। वहीं कोर्ट ने इस मामले में अगले शुक्रवार को जवाब माँगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उस रेस्टॉरेंट में अब कोई कमर्शियल गतिविधि नहीं होनी चाहिए। इसी शर्त पर वहाँ बुलडोजर चलने पर रोक लगाई गई है। कोर्ट के मुताबिक, यदि बताई गई सर्वेक्षण संख्या के अलावा अन्य भूमि में अनाधिकृत निर्माण किया जाता है, तो इसे निश्चित रूप से ढहाया जाएगा।

गौरतलब है कि भाजपा की महिला नेता सोनाली फोगाट और उनके PA सुधीर सांगवान का सोनाली की मौत के बाद एक वीडियो सामने आया था। ये वीडियो सोनाली फोगाट की मौत से कुछ देर पहले का बताया गया। वीडियो में दिख रहा था कि सुधीर उन्हें लेकर वॉशरूम में जा रहा है। इस दौरान सोनाली फोगाट ने टॉप और हाफ पैंट पहन रखा है। इन दोनों का वायरल हुआ ये तीसरा वीडियो था। ये वीडियो इसी क्लब का थे।

कर्मचारियों को देने के लिए वेतन नहीं, ड्यूटी के घंटे 8 से बढ़ा कर कर दिया 12: वामपंथियों का ‘केरल मॉडल’, मजदूरों के नाम पर ढपली पीटता है लेफ्ट

वामपंथी गला फाड़कर चिल्लाते हुए ‘केरल मॉडल’ का दावा करते हैं। लेकिन, आज पिनराई विजयन के नेतृत्व में चल रही केरल की वामपंथी सरकार के पास राज्य परिवहन के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए फंड नहीं है। जिसके बाद, केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) के कर्मचारियों की ड्यूटी 8 से बढ़ाकर 12 घण्टे करने का फैसला किया गया है।

गौरतलब है कि वामपंथी खुद को मजदूरों का हितैषी बताते फिरते हैं। लेकिन, सत्ता में आने के बाद अब मजदूरों की बात करने वाले वामपंथी राज्य परिवहन के कर्मचारियों के वर्किंग ऑवर में 4 घण्टे की बढ़ोतरी कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल राज्य परिवहन निगम (KSRTC) के करीब 25000 कर्मचारी वेतन न मिलने के कारण से पिछले कुछ महीनों से आंदोलन कर रहे थे। इस आंदोलन के चलते वेतन संकट को हल करने के लिए मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने केएसआरटीसी मैनेजमेंट और ट्रेड यूनियन के नेताओं की मंगलवार (5 सितंबर, 2022) को बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बाद, सरकार ने परिवहन प्राधिकरण के लिए निर्धारित 100 करोड़ के बजट को रिलीज करने का आदेश दिया था। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि शेष फंड केएसआरटीसी द्वारा मैनेज किया जाएगा।

इस आदेश में सरकार द्वारा वेतन देने के लिए वकायदा शर्त रखी गई है। आदेश में कहा गया है कि सरकार यह फंड इस शर्त पर रिलीज कर रही है कि राज्य परिवहन के कर्मचारियों को 12 घण्टे की सिंगल ड्यूटी करनी होगी।

बताया जा रहा है केरल की वामपंथी सरकार कर्मचारियों की ड्यूटी 8 घण्टे से बढ़ाकर 12 घण्टे करके 1300 अतिरिक्त बसों को चलवाना चाहती है। ऐसा कहा जा रहा है कि ये बसें कर्मचारियों के अभाव में डिपो में खड़ी-खड़ी पड़ी हुई हैं। लेकिन, अब 12 घंटे की ड्यूटी के इन बसों का संचालन किया जा सकेगा। दरअसल, वामपंथी सरकार का मानना है कि कर्मचारियों की ड्यूटी बढ़ाकर करके वह राज्य परिवहन निगम के राजस्व में बढ़ोतरी कर सकती है।

बता दें कि केन्द्र सरकार ने जब नए श्रम कानून पेश किए थे, तब वामपंथियों ने इसका कड़ा विरोध किया था। इस विरोध में कम्युनिस्ट पार्टी भी शामिल थी। कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से कहा गया था कि यह कानून श्रमिकों के शोषण को बढ़ाएँगे। बता दें, श्रम कानून में किसी भी व्यक्ति से 1 दी में 8 घण्टे से अधिक समय की ड्यूटी कराने का प्रावधान नहीं है।

रेवड़ी बाँटने वालों के पास शिक्षकों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं, DUTA अध्यक्ष ने बताया- AAP सरकार ने प्रोफेसरों से लेकर कर्मचारियों तक की रोकी सैलरी

दिल्ली और पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की सरकारें अपने प्रचार पर करोड़ों रुपए खर्च करती हैं, लेकिन जब कर्मचारियों को वेतन देने की बात आती है तो हाथ खड़े कर देती है। दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित कॉलेजों के पास अपने कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं है। वहीं, पंजाब में AAP सरकार ने कर्मचारियों को अगस्त माह का वेतन एक सप्ताह देर से दिया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज (DDU) आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा फंडेड है। इस कॉलेज की हालत ये है कि इसके पास अपने शिक्षण कर्मचारियों का भुगतान करने के लिए बहुत कम पैसे बचे हैं। इस कारण से कर्मचारियों के वेतन के कुछ हिस्से को रोक लिया है।

इन कर्मचारियों को नोटिस देकर कॉलेज को कहना पड़ा कि वह सहायक प्रोफेसरों की नेट सैलेरी या टेक-होम राशि से 30,000 रुपए और एसोसिएट प्रोफेसरों एवं प्रोफेसरों की नेट सैलेरी से 50,000 रुपए रोक रहा है।

दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध एक कॉलेज है, जिसे 1990 में स्थापित किया गया था। इस कॉलेज की शत-प्रतिशत फंडिंग दिल्ली सरकार द्वारा की जाती है। हालाँकि, आम आदमी पार्टी की सरकार में अब इस कॉलेज को फंड की कमी से जूझना पड़ रहा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) के अध्यक्ष प्रोफेसर अजय कुमार भागी ने ऑपइंडिया को बताया, “यह मामला सिर्फ दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज का नहीं है। दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले 12 कॉलेजों को पिछले 5 सालों से ग्रांट देर से दी जारी है। अब पिछले 2 सालों से इनके ग्रांट में कटौती की जा रही है।”

प्रोफेसर भागी ने कहा कि मामला वेतन में ही नहीं, स्टाफ के पुराने एरियर, एलटीसी, मेडिकल, चाइल्स एजुकेशन आदि भी बकाया है और इनका भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फंड की कमी के कारण कॉलेजों की प्रशासनिक और भवनों के रख-रखाव पर भी असर पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली देहात के दो महत्वपूर्ण महिला कॉलेजों- अदिति महाविद्यालय और भगिनी निवेदिता कॉलेज की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है और वो गिरने की कगार पर पहुँच चुकी है। उन्होंने बताया कि फंड की कमी के कारण इन कॉलेजों में मूलभूत सुविधाओं का तक अभाव हो गया है।

प्रोफेसर भागी ने बताया कि इस संबंध में वे पुराने उप-राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक मिल चुके हैं, धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं दे रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर नए उप-राज्यपाल वीके सक्सेना से मुलाकात कर चुके हैं और उन्होंने दिल्ली सरकार से इस पर जवाब माँगा है।

प्रोफेसर भागी का कहना है कि दिल्ली सरकार फंड की कटौती कर इन कॉलेजों को Self Financing Model पर ले जा रही है और उन्हें विवश किया जा रहा है कि छात्रों की फीस में बढ़ोत्तरी कर कॉलेज के लिए फंड जुटाए।

प्रोफेसर भागी का कहना है कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले हायर एजुकेशन संस्थानों में ऐसा किया जा चुका है और अब कॉलेजों को इस दिशा में धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर दबाव बढ़ेगा।

दिल्ली सरकार अक्सर दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात करती है, लेकिन हकीकत कुछ और है। यही हालात धीरे-धीरे पंजाब में होती जा रही है। पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने कर्मचारियों का वेतन देने में विलंब करने लगी है।

पंजाब सरकार ने बुधवार (7 सितंबर 2022) को अपने कर्मचारियों के अगस्त महीने का वेतन देने के लिए 3,400 करोड़ रुपए जारी किया। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार ने 9,000 संविदा और तदर्थ कर्मचारियों को नियमित किया, इसलिए फंड जारी करने में देर हुई।

भाजपा नेता पूनावाला ने इसको लेकर ट्वीट किया, “आप सरकार के पास विज्ञापनों के लिए पैसा है, लेकिन पैसा नहीं है तो 1) पंजाब सरकार के पास कर्मचारियों का वेतन देने के लिए, 2) पंजाब में गरीबों का मुफ्त इलाज देने वाले अस्पतालों का पैसा रिमबर्स करने के लिए, 3) दिल्ली के डीडीयू कॉलेज के शिक्षकों के वेतन देने के लिए, 4) पदक जीतने वाले और भारत को गौरवान्वित करने वाले एथलीटों के लिए।”

‘कमजोर कहानी, घटिया स्क्रिप्ट’: ‘ब्रह्मास्त्र’ को समीक्षकों के साथ-साथ दर्शकों ने भी नकारा, कहा – ये ‘Big Beef Guy’ की डिजास्टर मूवी

बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) और आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की फिल्म ब्रह्मास्त्र (Brahmastra) शुक्रवार (9 सितंबर, 2022) को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म को समीक्षकों के साथ-साथ दर्शकों से भी नकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। ट्रेंड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट कर फिल्म को 5 में से 2 स्टार देते हुए निराशाजनक बताया है। उन्होंने लिखा, “ब्रह्मास्त्र ने निराश किया है। वीएफएक्स का ज्यादा प्रयोग और कमजोर कहानी फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई। फिल्म में कोई नयापन नहीं दिखा।”

इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस फिल्म का जमकर मजाक उड़ाया है। उन्होंने बॉलीवुड की तुलना साउथ सिनेमा से करते हुए उनके कंटेंट और कलाकारों पर सवाल उठाया है। एक यूजर ने लिखा, “साउथ सिनेमा हमेशा इंटरेस्टिंग कॉन्सेप्ट चुनता है और फिल्म की कहानी लिखने में कड़ी मेहनत करता है। वहीं बॉलीवुड में अच्छी स्क्रिप्ट और मेहनत की कमी दिखती है। उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं है। वह केवल अपने स्टारकास्ट और उनके प्रमोशन पर निर्भर रहता है। इसी कारण ये लोग असफल हो रहे हैं, जो बेहद निराश करता है।”

उमर संधु नाम के एक यूजर ने फिल्म का मजाक उड़ाते हुए इसे 5 में से 2.5 स्टार दिया है। उन्होंने लिखा, “ब्रह्मास्त्र सितारों से लेकर बजट, हर लिहाज से एक बड़ी फिल्म थी। बड़े सितारे, बड़े कैनवास, विज्ञापनों और एसएफएक्स पर बड़ा खर्च करने के बाद फिल्म से बड़ी उम्मीदें थीं। अफसोस कि यह उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई।”

फिल्म क्रिटिक सुमित कादेल ने इस फिल्म के स्क्रीनप्ले को 5 में मात्र 2.5 रेटिंग दी। वहीं, एक यूजर ने फिल्म, स्टार कास्ट और निर्देशक का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “ऐसा तब होता है जब आप ‘ये जवानी है दीवानी’ के निर्देशक, लेखक, डायलॉग राइटर, अभिनेता को पुराणों और सनातन धर्म पर आधारित फिल्म बनाने के लिए चुनते हैं। ‘बिग बीफ लवर’ आदमी का ‘बदतमीज दिल’ यहाँ काम नहीं करेगा। डिजास्टर। अब कम से कम अपना दिमाग तो बचाइए और इससे दूर रहिए।”

बता दें कि अयान मुखर्जी के निर्देशन में बनने वाली फिल्म में अमिताभ बच्चन, नागार्जुन और मौनी राय भी मुख्य भूमिका में हैं।

₹14 लाख नकद, 32 महँगी घड़ी, 9 लक्जरी कार: अरबपति पादरी PC सिंह के घर पर छापा, करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप, बच्चों की स्कूल फीस से मिशनरी गतिविधि

मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक ईसाई पादरी के घर पर ‘आर्थिक अपराध शाखा (EOW)’ ने छापेमारी की है। बिशप का नाम पीसी सिंह है। बताया जा रहा है कि इस दौरान तमाम नामी और बेनामी संपत्ति का खुलासा है। जानकारी के मुताबिक, कुछ ही समय पहले धर्म परिवर्तन करने वाला बिशप पीसी सिंह बेहद कम समय में अरबपति बन गया था। छापेमारी गुरुवार (8 सितम्बर, 2022) को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिशप पर बच्चों की स्कूल की फीस धार्मिक संस्थाओं पर खर्च करने का आरोप है। इसी के साथ बिशप लक्जरी लाइफ का शौक़ीन बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पीसी सिंह के यहाँ से 18 हजार डॉलर, 32 महँगी घड़ियाँ, 9 लक्जरी कारें, मूलयवान कपड़े, सोने के जेवर और कैश बरामद हुआ है। छापेमारी के दौरान बिशप EOW टीम को नहीं मिला। परिजनों ने उसके जर्मनी में होने की जानकारी दी। पी सी सिंह ‘द बोर्ड ऑफ एजुकेशन चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया’ का चेयरमैन भी है।

इस छापेमारी की जानकारी देते हुए EOW के SP देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्हें ‘द बोर्ड ऑफ एजुकेशन चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया’ में होने वाली वित्तीय अनियमितता की शिकायत साल 2015 में ही मिली थी। देवेंद्र प्रताप के मुताबिक, इस शिकायत की जाँच DSP मंजीत सिंह से करवाई गई तो पाया गया कि साल 2003 से 2011 तक 2 करोड़ 70 लाख रुपए ट्रांसफर हुए हैं। SP ने बताया कि इस मामले में FIR दर्ज की गई है। इसी के साथ देवेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि कुछ अन्य थानों में आरोपित के खिलाफ केस दर्ज मिले हैं।

छापेमारी के वायरल हो रहे विजुअल में नोट गिनने वाली मशीनें दिखाई दे रहीं हैं। इसी के साथ आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारी भी मौके पर दिख रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, पीसी सिंह के 2 स्कूल और अलग-अलग जगहों पर 3 मकान हैं। बिशप का बेटा पियूष पॉल क्राइस्ट चर्च बॉयज स्कूल का प्रिंसिपल है। बिशप पी सी सिंह क्लास 12 के बाद धर्मांतरित हुआ था। उसकी मज़हबी शिक्षा दिल्ली में हुई थी।

दिल्ली से लौट कर उसने लगभग 5 वर्षों तक जबलपुर के एक चर्च में बतौर पादरी काम किया। इसके बाद उसे बिशप की पदवी दे दी गई। आरोप है कि बिशप बन जाने के बाद उनकी संपत्ति में तेजी से इजाफा हुआ।

पैगंबर मुहम्मद की वंशज थीं महारानी एलिजाबेथ, निधन के बाद वायरल है पोस्ट: मीडिया में छपी खबर का जानें पूरा सच

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth II) का गुरुवार (8 सितंबर, 2022) को 96 साल की उम्र में निधन हो गया। इसी बीच एक ट्वीट खूब वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा गया है कि एलिजाबेथ द्वितीय इस्लाम के संस्थापक मोहम्मद पैगंबर (Prophet Muhammad) की वंशज हैं।

यह हालाँकि पहली बार नहीं है, जब इस तरह के दावे किए जा रहे हों। साल 2018 में भी इस तरह का दावा करते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी। ब्रिटिश पत्रकार एरॉन मेरेट के ट्वीट में शामिल ग्राफिक को पहले ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स ने 2018 में छापा था। इसके बाद उसी साल टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने भी इसी तरह की एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

एलिजाबेथ पैगंबर मुहम्मद की वंशज: दावे और रिपोर्ट

मार्च 2018 में मोरक्कन अखबार अल-ओस्बो (Al-Ousboue) में यह दावा किया गया था कि महारानी के मुहम्मद की बेटी फातिमा से सम्बंध हैं और वह पैगंबर की 43वीं वंशज हैं। TOI ने भी मोरक्को की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा था कि ब्रिटेन की महारानी पैगंबर की 43वीं वंशज हैं।

दरअसल, साल 1986 में शाही वंश पर अध्ययन करने वाली संस्था बर्क्स पीरगे के पब्लिशिंग डायरेक्टर हैरल्ड बी ब्रूक्स बेकर ने यह दावा किया था। इसके बाद मोरक्को के एक अखबार ने अपने आर्टिकल में ऐसा ही दावा किया था।

दावा किया जा रहा है कि एलिजाबेथ द्वितीय की ब्‍लडलाइन 14वीं सदी के अर्ल ऑफ कैंब्रिज से है और यह मध्‍यकालीन इस्लामी स्‍पेन से लेकर पैगंबर मोहम्मद की बेटी फातिमा तक जाती है। फातिमा हजरत मोहम्मद की बेटी थीं और उनके वंशज स्पेन के राजा थे, जिनसे महारानी का संबंध बताया जा रहा है। इसी वजह से, महारानी को मोहम्मद का वंशज कहा जा रहा है।

एलिजाबेथ और पैगंबर मुहम्मद के रिश्ते का फैक्ट चेक

दावों और रिपोर्टों से परे है सच्चाई। कैसे? 2018 में इस विषय पर द टाइम्स से बात करते हुए अंग्रेजी इतिहासकार और टेलीविजन पर्सनेल्टी डेविड स्टार्की ने कहा था कि एलिजाबेथ को पैगंबर मुहम्मद के वंश से जोड़ा गया। हालाँकि, इसे इतिहासकारों द्वारा सत्यापित नहीं किया गया था और न ही पूरी तरह से स्वीकार किया गया था।

तत्कालीन ब्रिटिश प्रधान मंत्री मार्गरेट थैचर को लिखे एक पत्र में, ब्रूक्स बेकर ने दावा किया था कि पैगंबर मुहम्मद का खून महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की रगो में बहता है। उनके अनुसार महारानी मुस्लिम राजकुमारी जैदा के परिवार से हैं।

आपको बता दें कि कथित तौर पर, अबू अल-कासिम मुहम्मद इब्न अब्बाद, पैगंबर मुहम्मद के वंशज सेविले की जैदा के परदादा थे। अलमोराविद्स ने जब अब्बासी सल्तनत पर हमला किया तो जैदा अपनी जान बचाने के लिए स्पेन के राजा किंग अल्फोंसो छठे के दरबार में पहुँच गई थीं। वहाँ उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया और राजा से शादी करके अपना नाम इसाबेला रख लिया। राजा से उनको एक लड़का पैदा हुआ जिनका नाम सांचा था। थर्ड अर्ल ऑफ कैंब्रिज रिचर्ड ऑफ कौन्सबर्ग सांचा के वंशज थे, जो इंग्लैंड के किंग एडवर्ड तृतीय के पोते थे। बाद में उन्होंने यॉर्क के ड्यूक रिचर्ड प्लांटैजेनेट को जन्म दिया, जिन्हें आमतौर पर रानी का पूर्वज माना जाता है।

सबसे बड़ी बात – इन दावों को लेकर बकिंघम पैलेस ने कभी भी कोई जवाब नहीं दिया है।

बाबू खान ने किया दलित नाबालिग का अपहरण और बलात्कार, आरोप – पुलिस ने पीड़िता और परिजनों को लात-घूँसों से पता: 3 निलंबित

मध्य प्रदेश के छतरपुर में 13 साल की नाबालिग दलित लड़की से हुए रेप के मामले में कार्रवाई में लापरवाही बरतने के आरोप में 3 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इन पुलिस वालों पर पीड़िता के ऊपर आरोपित से समझौते का दबाव बनाने का आरोप है। नाबालिग दलित लड़की से रेप के आरोपित का नाम बाबू खान है जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। बाबू खान पर 27 अगस्त को पीड़िता के अपहरण का आरोप लगा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 27 अगस्त को पीड़िता दोपहर लगभग 1 बजे अपने घर से लापता हो गई थी। लड़की के परिजनों को इस कृत्य के पीछे पास के ही रहने वाले बाबू खान के होने की जानकारी मिली। आरोप है कि जब अगले दिन 28 अगस्त, 2022 को जब पीड़िता के घर वाले पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाने पहुँचे तो कि उनकी शिकायत में जबरन लड़की की उम्र 18 साल लिखवाई गई। पीड़िता 30 अगस्त को बरामद कर ली गई। लड़की ने भी अपने बयान में बाबू खान पर खुद के अपहरण और रेप का आरोप लगाया।

पीड़िता के परिजनों के मुताबिक, बेटी की गुमशुदगी के दौरान 2 महिला पुलिसकर्मियों ने उन लोगों पर बयान बदलने का दबाव बनाया। दावा किया गया है कि जब पीड़ित के घर वालों ने ऐसा करने से मना कर दिया तो उन्हें थप्पड़ों से मारा गया। बताया ये भी जा रहा है कि बयान बदलने का दबाव डालने के लिए खुद रेप पीड़िता को लात-घूँसों और बेल्टों से मारा गया। आरोप है कि जब पुलिसकर्मी पीड़िता और उसके घर वालों को समझौते के लिए नहीं तैयार कर पाए तब उन्होंने कार्रवाई न करने की बात कह कर पीड़ितों को थाने से भगा दिया।

पीड़ित दलित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने FIR में अपहरण की धाराएँ नहीं लगाई हैं। इस मामले की जानकारी होते ही CWC (बाल कल्याण समिति) ने प्रशासन से आरोपितों की जाँच और उन पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। जिले के SP सचिन शर्मा ने बताया कि पीड़िता के साथ किसी भी प्रकार की मारपीट नहीं हुई है। कोतवाली प्रभारी के मुताबिक आरोपित पर पॉक्सो एक्ट और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

कहीं महावीरी शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी, कहीं मस्जिद से निकली भीड़ ने पुलिस को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा: बिहार के ‘सुशासन’ का कुछ ऐसा है हाल

बिहार के सीवान जिले में महावीरी अखाड़ा की शोभायात्रा में चल रहे श्रद्धालुओं पर पथराव किया गया है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फ़ैल गया। हालात सँभालने पहुँचे पुलिस बल पर भी पथराव की सूचना है। इस झड़प के चलते दोनों पक्षों के एक दर्जन लोग घायल हो गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। घटना में आधे दर्जन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस द्वारा अब तक कुल 10 आरोपितों को हिरासत में लेने की सूचना है। घटना गुरुवार (8 सितम्बर, 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बड़हरिया थानाक्षेत्र का है। घटना के दिन यहाँ पुरानी बाजार इलाके में महावीरी शोभा यात्रा निकली थी। जब यह यात्रा मस्जिद के सामने से गुजरी तब किसी बात को ले कर मुस्लिम पक्ष से शोभा यात्रा में शामिल लोगों का विवाद हो गया। आरोप है कि इसके बाद कुछ लोग मस्जिद पर चढ़ कर पत्थरबाजी करने लगे। इस पथराव से अफरातरफी मच गई और कुछ लोग घायल हो गए। इस हमले के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि हमले के जवाब में शोभायात्रा में शामिल लोगों ने भी खुद का बचाव करने के लिए पत्थर फेंके। इसी बीच पान की एक गुमटी को आग के हवाले कर दिया गया। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने हालात काबू करने की कोशिश की तो उपद्रवियों ने उन पर भी पत्थर फेंके। इस पत्थरबाजी के चलते 2 पुलिसकर्मियों के सिर फट गए। अब तक पुलिस द्वारा दोनों पक्षों के कुल 10 आरोपित हिरासत में लेने की सूचना है जिनसे पूछताछ की जा रही है।

बड़हरिया थाने के प्रभारी प्रभाकर के मुताबिक, पथराव और आगजनी की घटना में शामिल लोगों की शिनाख्त करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि हमले के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पटना में भी पुलिस पर हमला

वहीं एक अन्य घटनाक्रम में बिहार की राजधानी पटना में पुलिस पर हमले की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में पुलिस वालों को भागना पड़ा लेकिन हमलावरों ने उनका पीछा कर के पिटाई की। मामला पीर बहोर थानाक्षेत्र का है। यहाँ शिया मस्जिद के पास हथियारों से लैस 4 संदिग्धों की सूचना पर पुलिस ने दबिश दी थी। आरोपितों की तलाशी के दौरान आस-पास की भीड़ ने पुलिस पर हमला बोल कर संदिग्धों को छुड़ा लिया।

बाद में भीड़ ने थाने पर पहुँच कर हंगामा भी किया। इस मामले में पुलिस ने अज्ञात आरोपितों पर FIR दर्ज की है, जिसमें पुलिस पर हमले और सरकारी कार्यों में बाधा डालने की धाराएँ लगाई गईं है। थाना प्रभारी के मुताबिक घायल कांस्टेबल सुभाष का इलाज करवाया जा रहा है। आरोपितों की पहचान वीडियो और CCTV फुटेज के आधार पर करवाई जा रही है।