Home Blog Page 2441

‘हर नुक्कड़ पर मस्जिद जरूरी नहीं’ : बिल्डिंग को मजहबी स्थल बनाना चाहता था ‘नुरुल इस्लाम’, केरल HC ने कुरान का हवाला देकर याचिका खारिज की

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को केरल के एक इलाके में नई मस्जिद बनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में कहा कि राज्य में पहले से ही कई मजहबी स्थल हैं जो कि राज्य की जनसंख्या के अनुपात से बहुत अधिक हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केरल हाईकोर्ट में नुरुल इस्लाम संस्कारिका संगम द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई हो रही थी। इस याचिका में एक व्यावसायिक बिल्डिंग को मस्जिद में बदलने की माँग की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि यहाँ मस्जिद बनने के बाद इसके आसपास के मुसलमान दिन में पाँच बार नमाज अदा करने के लिए मस्जिद पहुँच सकेंगे।

इससे पहले कलेक्टर ने इस मामले की जाँच करते हुए इस माँग को निरस्त कर दिया था। क्योंकि, जाँच में यह पाया गया था कि जिस बिल्डिंग की जगह मस्जिद बनाने की बात कही जा रही थी उसके आसपास के 5 किलोमीटर क्षेत्र में 36 मस्जिदें थीं।

न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यहाँ की भौगोलिक स्थिति के कारण केरल राज्य को ‘भगवान का अपना देश’ कहा जाता है और यह धार्मिक स्थलों से भरा हुआ है।

हाईकोर्ट की ओर से कहा गया, “केरल में धार्मिक संस्थानों और प्रार्थना कक्षों की संख्या पर्याप्त है। यदि हिंदू, ईसाई, मुस्लिम, यहूदी, पारसी आदि का प्रत्येक भक्त अपने निवास के पास धार्मिक स्थान और प्रार्थना कक्ष बनाना शुरू कर देता है, तो राज्य को सांप्रदायिक विद्वेष सहित गंभीर परिणाम का सामना करना पड़ेगा।”

न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन की बेंच ने यह भी कहा, “इस मामले में खुफिया रिपोर्ट और पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि व्यावसायिक बिल्डिंग को धार्मिक प्रार्थना कक्ष में बदलने की अनुमति दी जाती है, तो सांप्रदायिक विद्वेष की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना है। यह एक संवेदनशील मुद्दा है।”

कुरान में नहीं लिखा हर नुक्कड़ पर मस्जिद हो: केरल हाईकोर्ट

यही नहीं, जस्टिस ने कुरान का भी जिक्र किया और कहा कि कुरान में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि इलाके के हर नुक्कड़ पर मुस्लिम समुदाय के लिए एक मस्जिद होनी चाहिए।

केरल हाईकोर्ट ने कहा, “कुरान की आयतें मुस्लिम समुदाय के लिए मस्जिद के महत्व को स्पष्ट रूप से उजागर करती हैं। लेकिन कुरान की आयतों में यह नहीं कहा गया है कि मस्जिद हर नुक्कड़ पर जरूरी है। हदीस या कुरान में यह नहीं कहा गया है कि मस्जिद हर मुस्लिम के घर के बगल में होनी चाहिए। दूरी कोई मापदंड नहीं है।”

सुनवाई में यह भी कहा गया, “यह सच है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 26 (अ) में कहा गया है कि सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन, प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी भी वर्ग को धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए धार्मिक स्थान बनाने का अधिकार होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि वे देश के कोने-कोने में धार्मिक स्थलों का निर्माण कर सकते हैं। केरल एक बहुत छोटा राज्य है।”

न्यायमूर्ति कुन्हीकृष्णन ने दिवंगत प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय वायलार रामवर्मा के एक फिल्मी गाने का भी हवाला दिया। इस गाने में यह बताया गया है कि कैसे मनुष्य ने धर्मों का निर्माण किया, धर्मों ने ईश्वर का निर्माण किया फिर धर्मों और ईश्वर ने दुनिया और मानवता को विभाजित किया।

सुनवाई के दौरान फैसला देते हुए जस्टिस ने कहा “नागरिकों को एक-दूसरे से प्यार करने दें और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपने धार्मिक प्रथाओं का पालन करें। हर कोई धर्म का पालन अपने घर से कर सकता है और यदि उनके धर्म में यह कहा गया है कि प्रार्थना एक साथ की जानी चाहिए। ऐसे में वे अपने पड़ोस में एक और मस्जिद या प्रार्थना कक्ष बनाने की जगह पास की किसी मस्जिद में जा सकते हैं।”

हेमंत सोरेन की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर खतरा: झारखंड के राज्यपाल ने विधानसभा की सदस्यता की रद्द, रिपोर्ट्स में दावा- पत्नी बन सकती हैं CM

खनन लीज मामले में चुनाव आयोग की अनुशंसा पर राज्यपाल ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand CM Hemant Soren) की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी है। हालाँकि, उनके चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई गई है। इसके बाद हेमंत सोरेन को अब मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी होगी।

मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि राज्यपाल रमेश बैस ने कार्रवाई का आदेश दे दिया है। बता दें कि ऑफिस फॉर प्रॉफिट मामले में चुनाव आयोग ने गुरुवार (25 अगस्त 2022) को झारखंड के राज्यपाल से हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की थी।

कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग से सिफारिश मिलने के बाद राज्यपाल रमेश बैस ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और आयोग के कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा करने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है। उम्मीद है कि चुनाव आयोग इस संबंध में शनिवार (27 अगस्त 2022) को इसकी अधिसूचना जारी करेगा।

उधर सोरेन की विधायकी रद्द होने की खबर आने के बाद उनके आवास पर मंत्रियों और विधायकों के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री भवन में आज महागठबंधन के विधायक दल की बैठक भी हुई। इस बैठक में सोरेन की पार्टी जेएमएम, कॉन्ग्रेस और राजद के विधायक शामिल हुए।

इसमें निर्णय में हेमंत सोरेन के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई है। संभवत: इसके पीछे आरोपों का अभी सिद्ध होना बाकी है। इस आधार पर हेमंत सोरेन कुछ समय बाद चुनाव लड़कर फिर से विधायक चुने जा सकते हैं।

हेमंत सोरेन की कुर्सी जाने के बाद वे अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बना सकते हैं। इसको लेकर पिछले कई दिनों से मीडिया में चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि इस संबंध में महागठबंधन के सहयोगी दलों से भी चर्चा हो चुकी है और वे इस पर सहमत भी हैं।

दरअसल, खनन लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी को लेकर चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट दी है। सोरेन पर विभागीय मंत्री होते हुए अपने नाम से खनन लीज लेने का आरोप है। मामला राज्यपाल कार्यालय से होते हुए चुनाव आयोग तक पहुँचा और आयोग ने इस पर कई दिनों तक सुनवाई की। 

आध्यात्म की राह पर जैकलीन फर्नांडिस, परेशानियों से निकलने के लिए कर रहीं जाप: जबरन वसूली के मामले में ED ने बनाया है आरोपित

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) इन दिनों ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े मनी लॉन्‍ड्र‍िंग केस को लेकर परेशानियों में घिरी हुई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें 215 करोड़ रुपए की जबरन वसूली के मामले में आरोपित बनाया है। ऐसे समय में वह परेशानियों से बाहर आने के लिए आध्यात्म का सहारा ले रहीं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जैकलीन फर्नांडिस गुरु मंत्र का जाप कर रही है हैं। उन्होंने गुरुजी निर्मल सिंह का एक कंगन भी धारण किया है। रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में जैकलीन ने दिल्ली के छतरपुर स्थित गुरुजी द्वारा स्थापित मंदिर में दर्शन भी किए थे।

22 अगस्त को उन्होंने मुंबई के जुहू स्थित मुक्तेश्वर मंदिर में भी भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए थे। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था। जैकलीन फर्नांडिस के एक करीबी सूत्र ने पिंकविला को बताया कि उन्होंने जुलाई महीने में गुरुजी के आश्रम का दौरा किया था। गुरुजी द्वारा स्थापित भगवान शिव के मंदिर में आशीर्वाद भी लिया। अभिनेत्री को उनके एक करीबी ने छतरपुर में गुरुजी के आश्रम जाने की सलाह दी थी।

बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने जैकलीन फर्नांडिस के कई फिक्स्ड डिपॉजिट जब्त किए हैं। उनके द्वारा किए गए निवेशों को भी जाँच एजेंसी ने अटैच किया है। जाँच एजेंसी को जैकलीन फर्नांडिस ने बताया है कि इन फिक्स्ड डिपॉजिट का किसी भी अपराध से कोई लेनादेना नहीं है और न ही इन्हें अवैध तरीके से खोला गया है। उन्होंने कहा कि ये मेरी तभी की कमाई से खोला गया था, जब उन्हें पता भी नहीं था कि इस दुनिया में सुकेश चंद्रशेखर नाम का कोई व्यक्ति अस्तित्व में भी है। बताया जाता है कि जैकलीन को इस बात की जानकारी थी कि सुकेश एक अपराधी और वह जबरन वसूली करने वाला है। एक्ट्रेस को कॉनमैन ने 10 करोड़ रुपए का सामान गिफ्ट किया था।

MLA टी राजा सिंह को माँ की गालियाँ, समर्थकों को भी धमकी: ‘सर तन से जुदा’ वालों ने video से सरकार को ललकारा

सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथियों के दो वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में वे भाजपा से निलंबित विधायक राजा सिंह को पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ उनकी कथित ‘ईशनिंदा’ टिप्पणी के लिए धमकाते हुए बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

सैकड़ों इस्लामवादियों द्वारा हैदराबाद की सड़कों पर ‘अल्लाह-हू-अकबर’, ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक सज़ा, सर तन से जुदा… सर तन से जुदा’ जैसे नारे लगाने के बाद ये वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में राजा सिंह की गिरफ्तारी और उनका सिर काटने की माँग की गई है। कट्टरपंथियों ने ‘राजा सिंह मुर्दाबाद, मुर्दाबाद’ जैसे नारे भी लगाए और दोहराया कि भाजपा विधायक ने कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय और उनके पैगंबर का अपमान किया है।

दोनों वीडियो को तेलुगु लाइव टीवी चैनल तेलंगाना माता ने शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को साझा किया। पहले वीडियो में एक मुस्लिम विधायक कहता है कि यदि हैदराबाद के आयुक्त और गृह मंत्री ने विधायक राजा सिंह के खिलाफ त्वरित कार्रवाई नहीं की तो विधायक को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

वीडियो में मुस्लिम युवक राजा सिंह को परोक्ष रूप से धमकी देता है और निलंबित भाजपा नेता के लिए ‘ह*मी और कु** की औलाद’ जैसे अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करता। विधायक के साथ-साथ उनके समर्थकों को भी धमकी देता है।

इस कट्टरपंथी युवक ने न केवल निलंबित भाजपा नेता को गाली और सिर काटने की धमकी दी, बल्कि उनकी माँ के खिलाफ अपशब्द कहे। उसने राजा सिंह के समर्थकों के को धमकाया और कहा कि यदि तेलंगाना पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है तो इनका हश्र भी राजा सिंह जैसा ही होगा।

धमकी देते हुए यह युवक कहता है, “तुम्हारा हैदराबाद में जीना हराम कर देंगे। हम सभी मुस्लिमों से अपील करते हैं कि इस ह**मी को जहाँ भी देखे उसे सबक सिखाए।” इसके अलावा, वह वीडियो में विधायक राजा सिंह, उनकी माँ और उनके समर्थकों के लगातार गालियों का प्रयोग करता है।

दूसरे वीडियो में खुद आयशा फरहीन बताने वाली बुर्का पहनी एक मुस्लिम महिला ने विधायक राजा सिंह को पैगंबर को कथित तौर पर गाली देने के लिए मौत की धमकी दी। उसने ‘सुअर’ और ‘जाहिल’ कहकर संवैधानिक पद पर बैठे विधायक राजा सिंह का अपमान किया। उसने इस्लाम का अपमान करने पर जान से मारने की धमकी दी।

महिला ने आगे कहा कि राजा सिंह ने पैगंबर के बारे में जो कुछ भी कहा वह इसलिए था, क्योंकि उन्हें तेलंगाना की सत्ताधारी टीआरएस पार्टी का समर्थन प्राप्त था। उसने दावा किया कि अगर TRS का मदद नहीं होता तो राजा सिंह राज्य में इस तरह का भाषण खुले तौर पर नहीं दे पाते। उसने दावा किया कि तेलंगाना सरकार राज्य के सांप्रदायिक संघर्ष से लाभ ले रही है।

बीवी की पिटाई से खौफ खाए पति ने 100 फीट ऊँचे पेड़ पर बनाया घर: 1 महीने से रहना-खाना सब वहीं, लोगों को मारता है ईंट-पत्थर, औरतों के घर में झाँकता है

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के राम प्रवेश नामक व्यक्ति को अपनी ही पत्नी से पिटाई का डर सता रहा है। इसी खौफ के कारण वह ताड़ के 100 फीट ऊँचे पेड़ पर जाकर बस गया है। अब उसी पेड़ पर राम प्रवेश का रहना, खाना और सोना होता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह विचित्र मामला यूपी के मऊ जिले के कोपागंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत बसारथपुर ग्रामसभा का बताया जा रहा है। यहाँ के रहने वाले व्यक्ति राम प्रवेश और उसकी पत्नी के बीच अक्सर मारपीट होती रहती थी। लेकिन एक रोज राम प्रवेश अपनी पत्नी से पिटाई खाने से बचने के लिए पास के ताड़ के पेड़ पर चढ़ गया।

आपको बताते चलें कि ताड़ के जिस पेड़ पर ये व्यक्ति चढ़ा है, उसकी ऊँचाई लगभग 100 फीट बताई जा रही है। जब से राम प्रवेश पेड़ पर चढ़ा है, तब से उसका वहीं रहना, खाना और सोना होता है।

इसके अलावा वो रात के समय पेड़ से उतरकर अन्य क्रियाकलाप करके वापस पेड़ के ऊपर चढ़ जाता है। वहाँ रहने वाले लोगों ने बताया कि जब राम प्रवेश को कोई समझाने या फिर से उतारने की कोशिश करता है तो वह पेड़ पर रखे ईट-पत्थरों से उन लोगों पर हमला कर देता है। राम प्रवेश के पेड़ पर रहने से स्थानीय महिलाओं में भी उसको लेकर आक्रोश है।

बता दें पेड़ की ऊँचाई ज्यादा होने के कारण राम प्रवेश को दूसरे घरों के आँगन और उसमें महिलाओं द्वारा किए गए क्रियाकलाप दिखाई देते हैं। इसी कारण गाँव की महिलाएँ भी यही चाहती है कि जल्द से जल्द उसे उस पेड़ से नीचे उतारा जाए। इसको लेकर महिलाओं ने ग्राम प्रधान से शिकायत भी की है।

राम प्रवेश के पिता ने लगाया अपनी बहु पर आरोप

गौरतलब है कि इस मामले में राम प्रवेश के पिता विष्णुराम ने अपनी ही बहू पर इस घटना का आरोप लगाया है। विष्णुराम ने बताया कि उसकी बहू अक्सर उसके बेटे के साथ मारपीट और लड़ाई झगड़ा करती। इसी लड़ाई-झगड़े से परेशान होकर उसका बेटा पेड़ पर जाकर रहने लगा है। बताया जा रहा है कि लगभग पिछले एक महीने से राम प्रवेश उसी पेड़ पर गुजारा कर रहा है।

वहीं इस मामले में बसारथपुर के ग्राम प्रधान दीपक ने बताया कि राम प्रवेश और उसके परिवार में किसी बात की लड़ाई चल रही है। इसी कारण वह ताड़ के ऊपर चढ़ कर रह रहा है। गाँव वालों ने बताया कि राम प्रवेश के कारण उनकी निजता पर प्रभाव पड़ रहा है। जब इस घटना की जानकारी पुलिस को दी गई तो पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो बनाकर ले गई है।

झारखंड के हजारीबाग का पीड़ित हिंदू परिवार मुस्लिम बहुल गाँव से पलायन को हुआ मजबूर: घर की महिलाओं से पंचायत में की गई थी मारपीट

झारखंड में कुछ जिलों में हिंदुओं के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हजारीबाग (Hazaribagh, Jharkhand) जिले के मुस्लिम बहुल सिरमा गाँव में रहने वाले वाले एक हिंदू परिवार ने प्रताड़ना तंग आकर अपने घर पर ताला लगा दिया है।

यह हिंदू परिवार बड़कागाँव के नापोखुर्द पंचायत अंतर्गत बरवनिया गाँव में अपने रिश्तेदार हीरालाल साव के घर रह रहा है। घटना के बाद से परिवार काफी डरा हुआ है। यहाँ तक पीड़ित लडकी ने स्कूल तक जाना भी बंद कर दिया है। हालाँकि, मुखिया के बेटे मोहम्मद वसीम अंसारी ने 23 अगस्त को पॉस्को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसके बाद भी पीड़ित परिवार वापस अपने गाँव नहीं जाना चाहता है।

दरअसल, इस गाँव की हिंदू परिवार की महिलाओं को मुस्लिमों ने कान पकड़वाकर बीते दिनों उठक-बैठक कराया था। इतना ही नहीं, परिवार वालों पर इस्लाम अपनाने (Religious Conversion in Islam) का भी दबाव बनाया गया। गाँव की विधवा महिला और लड़की की माँ किरण देवी का आरोप है कि 10 अगस्त की रात को मुखिया इशरत जहाँ का बेटा वसीम दर्जनों लोगों के जबरन उनके घर में घुस गया और उनकी बेटियों को अगवा करके ले गया।

किरण देवी ने यह भी आरोप लगाया था कि बाहर बारिश में भरी पंचायत में उनकी दोनों नाबालिग बेटियों के साथ गाली-गलौच और अश्लीलता की गई। उन्हें थप्पड़ मारे गए और कान पकड़वाकर सबके सामने उठक-बैठक कराई गई। इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दिया गया।

दरअसल, आरोपितों ने पीड़िता पर आरोप लगाया था कि जब वे पाकिस्तान का झंडा लहरा रहे थे तब उसने वीडियो बना लिया था और उसे वायरल कर दिया था। इसके बाद से वे हिंदू परिवार को प्रताड़ित करने लगे। आरोपितों ने पीड़ित परिवार को धमकी दी थी कि उनका पूजा-पाठ बंद करवा दिया जाएगा।

पीड़िता और उसकी माँ ने थाने में शिकायत कर मोहम्मद वसीम समेत अन्य पर मामला दर्ज करवाया था। इसके बाद हिंदू लड़की को अपनी बहन और विधवा माँ के साथ अपना घर छोड़ने और फूफा के घर रहने के लिए मजबूर किया गया है।

वहीं, हिंदू संगठनों ने जब इस मामले का विरोध किया तो 21 अगस्त को कॉन्ग्रेस की विधायक अंबा प्रसाद पीड़िता के घर पहुँचे। आरोप है कि उन्होंने जबरन पीड़िता से मुस्लिम युवकों को राखी बँधवाई और कहा कि ‘प्रशासन कब तक तुम्हारे साथ रहेगा। तुम्हें इन्हीं लोगों के साथ रहना है’।

पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस विधायक ने उन्हें धमकी दी कि अगर वे इस मामले को पुलिस के पास ले गए तो उन्हीं लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, कुछ स्थानीय लोगों ने भी पीड़ित परिवार को इस केस में आरोपितों के साथ ‘सहयोग’ करने के लिए धमकाया।

बता दें कि आरोपितों में मुखिया इशरत जहाँ के पुत्र मोहम्मद वसीम, शजीबुल्ला, मोहम्मद नाजिम, मोहम्मद तकिब, मोहम्मद आसिफ समेत 5 अज्ञात लोगों का नाम शामिल है। पुलिस ने इनमें मोहम्मद नदीम और मोहम्मद साकिब को गिरफ्तार कर लिया है।

सिरमा गाँव में हिंदुओं के दो-तीन परिवार ही रहते हैं। जिस परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है उसमें दो नाबालिग लड़कियाँ, एक छोटा भाई और उनकी विधवा माँ है। उनके पिता की मौत हो चुकी है।

योगी आदित्यनाथ पर नहीं चलेगा हेट स्पीच का केस: सुप्रीम कोर्ट ने भी HC के आदेश पर लगाई मुहर, परवेज की याचिका खारिज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हेट स्पीच मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को इस मामले की सुनवाई करते हुए योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार दिया है।

दरअसल, इस मामले में परवेज परवाज नामक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि 27 जनवरी, 2007 को गोरखपुर में ‘हिंदू युवा वाहिनी’ के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने मुस्लिम विरोधी अभद्र टिप्पणी की थी। हालाँकि जाँच हुई तो योगी आदित्यनाथ के खिलाफ केस चलाने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

इससे पहले, राज्य सरकार ने मई, 2017 में हेट स्पीच मामले में योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा दर्ज करने की अनुमति देने से मना कर दिया था। इसके बाद, परवेज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मगर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी फरवरी, 2018 में इस याचिका को खारिज कर दिया था।

इसके बाद, याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हेट स्पीच मामले में योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा दर्ज करने की अनुमति देने वाली याचिका को आरोपों और पेश किए गए तथ्यों को कमजोर मानते हुए खारिज कर दिया है।

इस मामले में फैसला सुनाते हुए भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच की ओर से कहा गया है, “उपरोक्त परिस्थितियों में, हमें नहीं लगता कि मंजूरी देने से संबंधित कानूनी सवालों में जाना आवश्यक है। नतीजतन, अपील खारिज की जाती है।”

क्या है पूरा मामला

दरअसल, 27 जनवरी 2007 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में साम्प्रदायिक हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में 2 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। इस दंगे के बाद तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ, विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल, गोरखपुर की मेयर अंजू चौधरी पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाया गया था।

इस मामले में यह कहा गया था कि इन नेताओं के भड़काऊ भाषण के कारण ही गोरखपुर में दंगा भड़का था। इसके बाद, योगी आदित्यनाथ समेत विधायक व मेयर पर धारा 153, 153ए, 153बी, 295, 295बी, 147, 143, 395, 436, 435, 302, 427, 452 आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया था।

सोनाली फोगाट को पानी में मिलाकर दी गई थी ड्रग्स, मौत से पहले का CCTV फुटेज सामने आयाः गोवा पुलिस का दावा- पीए ने कबूला जुर्म

भाजपा नेता व TikTok स्टार सोनाली फोगाट (Sonali Phogat) का अंतिम संस्कार हो गया है। उनकी बेटी यशोधरा ने शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को उन्हें मुखाग्नि दी। सोनाली फोगाट की मौत के मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले की जाँच कर रही गोवा पुलिस ने दावा किया है कि सोनाली को जबरन ड्रग्स दिए गए थे। यह ड्रग उनके PA सुधीर सांगवान और सुखविंदर ने उनको दिए थे। इन दोनों ने गोवा पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूला है।

गोवा के आईजीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई ने मीडियाकर्मियों को बताया कि सीसीटीवी फुटेज में दोनों आरोपितों में से कोई एक उसे जबरदस्ती लिक्विड पिलाते हुए नजर आ रहा है। लिक्विड पीने के बाद सोनाली से खुद को संभला नहीं जा रहा। वह लड़खड़ाते और गिरते देखी जा सकती हैं। इसके बाद सुधीर और सुखविंदर सोनाली को संभालते नजर आ रहे हैं। कुछ समय बाद एक अन्य कैमरे की फुटेज में दिखा कि दोनों सोनाली को वॉशरूम ले जाते हैं और 2 घंटे तक वहीं रहते हैं। पूछताछ में आरोपित सुखविंदर सिंह और सुधीर सांगवान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

आईजीपी ने बताया कि सोनाली फोगाट सुबह 4:30 बजे तक कंट्रोल में नहीं थी तो आरोपित उसे शौचालय में ले गए। 2 घंटे तक आरोपितों ने सोनाली फोगाट के साथ शौचालय में क्या किया? इसका जवाब उन्होंने नहीं दिया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोनों आरोपितों सुधीर सांगवान और सुखविंदर गिरफ्तार कर लिया है।

आईजी ओमवीर सिंह ने आगे कहा, “आरोपितों से पूछताछ की जा रही है। हमें लगता है कि जो ड्रग उन्हें (सोनाली) जबरदस्ती पिलाया गया था, उससे ही उनकी मौत हुई है, उस पार्टी में दो और लड़कियाँ भी थीं, जिनकी पहचान कर ली गई है और उन्हें भी पूछताछ के लिए बुलाया है। मामले की जाँच जारी है। पुलिस एफएसएल टीम को साथ लेकर आरोपितों के खिलाफ सबूत जुटाएगी। दोनों को 24 घंटे में कोर्ट में पेश किया जाएगा।”

पुलिस के मुताबिक, रात 12 बजे के करीब सोनाली को ड्रग्स दिए गए। हालाँकि, पुलिस ने इस बात का पता लगा लिया है कि सोनाली को कौन सा ड्रग्स दिया गया था, लेकिन वह अभी इसका खुलासा नहीं करेगी।

परिजनों ने जताई बलात्कार और हत्या की आशंका

जब सोनाली फोगाट (Sonali Phogat) की मौत की खबर सामने आई, तभी परिजनों ने उनके पीए पर हत्या के आरोप लगाए थे। इसके साथ-साथ परिजनों ने यह भी दावा किया कि हत्या से पहले सोनाली फोगाट के साथ बलात्कार भी किया गया था। परिजनों के मुताबिक सोनाली का अश्लील वीडियो बनाकर सुधीर और सुखविंदर उसे ब्लैकमेल भी करते थे।

फतेहाबाद के भूथनकलाँ गाँव निवासी व सोनाली के भाई रिंकू ने यह आरोप लगाया कि सुधीर और सोनाली फोगाट के दोस्त सुखविंदर ने खाने में नशीली वस्तु देकर सोनाली फोगाट के साथ रेप किया। ये दोनों वीडियो बना कर ब्लैकमेल भी कर रहे थे। एक लिखित शिकायत में परिजनों ने आरोप लगाया कि 3 साल पहले भी सुधीर ने खाने में नशीला पदार्थ मिला कर खिला दिया था और सोनाली का रेप किया था।

डील से अनजान होने के NDTV के दावों की अडानी ने खोली पोल, बताया- प्रणय और राधिका रॉय पर SEBI की रोक नहीं आता सौदे के आड़े

NDTV ने बीते दिनों अडानी समूह के ऊपर आरोप लगाया था कि उसने RRPR के मालिक प्रणय रॉय और राधिका रॉय से पूछे बिना एनडीटीवी के शेयर्स को खरीदा है। अब इस मामले पर अडानी समूह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और NDTV के आरोपों को आधारहीन बताया है।

अडानी समूह ने 26 अगस्त को अपने बयान में कहा, “वीसीपीएल को दिनांक 23 अगस्त 2022 को RRPR की तरफ से वारंट एक्सरसाज नोटिस का जबाव मिला था, जिसमें 19,90,000 वारंट को 19,90,000 एक्विटी शेयर में बदलने की बात थी। NDTV द्वारा 24 अगस्त 2022 के अपने डिस्क्लोजर में भी इसका जिक्र किया गया था।”

बता दें कि VCPL (विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड) अडानी ग्रुप की अप्रत्यक्ष सहायक कंपनी है। वहीं, NDTV की प्रमोटर कंपनी RRPR होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी है, जिसके मालिक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय हैं। NDTV में RRPR की 29.18 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जिसको खरीदने को लेकर यह पूरा मामला उठा है।

RRPR ने दावा किया था कि वारंट को इक्विटी शेयर में बदलने के लिए SEBI से लिखित मंजूरी की आवश्यकता थी। हालाँकि, अडानी की सहायक कंपनी विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) ने ने RRPR के इस दावे को खारिज कर दिया।

वीसीपीएल का कहना है कि RRPR बाजार नियामक संस्था SEBI के आदेश का पक्षकार नहीं है। इसलिए SEBI के प्रतिबंध उस पर लागू नहीं होते। बता दें कि SEBI ने प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर प्रतिभूतियों (Securities) में किसी भी तरह के लेन-देन के लिए प्रतिबंध लगा रखा है।

कंपनी ने कहा, “VCPL ने वारंट एक्सरसाइज नोटिस एक अनुबंध (Contract) के तहत जारी किया है, जो RRPR के लिए बाध्यकारी है। इसलिए RRPR अपने अनुबंध में लिखी गई बातों का पालन करने के लिए बाध्य है।”

VCPL का यहाँ स्पष्ट कहना है कि वारंट एक्सरसाइज से प्रतिभूतियों में लेनदेन के लिए प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर लगाए SEBI के प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं हुआ। इसलिए नियामक निकाय (SEBI) से किसी पूर्व लिखित अनुमोदन की आवश्यकता भी नहीं थी।

कंपनी ने आगे कहा, “23 अगस्त 2022 को वारंट एक्सरसाइज पर RRPR के 19,90,000 इक्विटी शेयर के लिए 1.99 करोड़ रुपए देय था, जो VCPL द्वारा भुगतान किया गया और RRPR को मिला। RRPR द्वारा ली गई राशि या ऑरिजिनल वारंट सर्टिफिकेट को वापस करने का कोई भी प्रयास VCPL के वारंट एक्सरसाइज, जो कि पूरा हो चुका है, पर कोई भी कानूनी प्रभाव नहीं डाल सकता।”

अडानी समूह ने RRPR द्वारा दिए गए तर्कों को आधारहीन, कानूनी रूप से महत्वहीन और सच्चाई से दूर बताया। कंपनी ने कहा कि RRPR अपने दायित्वों को पूरा करने और वारंट एक्टरसाइज नोटिस में बताए गए इक्विटी शेयरों को उसे आवंटित करने के लिए बाध्य है।

अडानी समूह ने खरीदा NDTV

बता दें कि हाल में खबर आई थी एएमजी मीडिया नेटवर्क लिमिटेड (AMNL) ने NDTV में अप्रत्यक्ष रूप से 29.18% शेयर्स खरीदे हैं। ये सौदा ‘विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL)’ और ‘RRPR होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए हुआ। जहाँ VCPL पूरी तरह से AMNL की 100% सब्सिडियरी कंपनी है, वहीं RRPR एनडीटीवी की प्रमोटर कंपनी है।

अडानी समूह पर NDTV ने लगाया इल्जाम

अडानी समूह द्वारा हिस्सेदारी खरीदने की खबर आने के बाद सोशल मीडिया पर हल्ला मच गया कि अब तक अडानी ग्रुप की आलोचना करने वाला एनडटीवी उसके अधीन काम करेगा। इन सभी पोस्ट के बीच एनडीटीवी न्यूज चैनल ने दावा किया प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर सिक्‍योरिटीज की प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष खरीद-फरोख्‍त पर SEBI ने 26 नवंबर 2022 तक के लिए प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसलिए, कंपनी के अधिग्रहण के लिए SEBI की मंजूरी की जरूरत होगी।

इसके अलावा एनडीटीवी की सीईओ सुपर्णा सिंह का भी इस संबंध में बयान आया था। उन्होंने अपने दर्शकों का भरोसा एनडीटीवी की पत्रकारिता पर बनाए रखने के लिए कहा था। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि ये पूरी डील प्रणय रॉय और राधिका रॉय की सहमति के बिना हुई है।

उन्होंने दावा किया था कि 32% हिस्सेदारी के साथ पति-पत्नी NDTV में सबसे बड़े शेयरधारक बने रहेंगे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि प्रणय रॉय और राधिका रॉय को इस डील की जानकारी ही नहीं थी। कर्मचारियों को भेजे गए इंटरनल सन्देश में CEO ने आगे रेगुलेटरी और कानूनी कदम उठाने की बात भी कही थी।

एनडीवी को पता था पैसे कहाँ से आ रहे हैं

उल्लेखनीय है कि विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी 2008 में अस्तित्व में आई थी। 2009 में इसने NDTV की होल्डिंग कंपनी RRPRH को 403.85 करोड़ रुपए का लोन दिया। इसके बदले RRPR ने VCPL को वारंट जारी किए थे, जो VCPL को RRPR में 99.9 फीसदी इक्विटी शेयर में वारंट को तब्‍दील करने का अधिकार देते थे।

उसी साल VCPL को शिनानो रिटेल प्राइवेट लिमिटेड से असुरक्षित लोन मिला था। शिनानो रिटेल पूरी तरह रिलायंस ग्रुप की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी थी। अब चूँकि इन सब डील्स के दस्तावेज सार्वजनिक हैं, इसलिए एनडीटीवी जानता था कि उसे एक ऐसे समूह से पैसे आ रहा है, जिसका संबंध रिलायंस समूह से है।

‘जम्मू-कश्मीर में बनाऊँगा अपनी नई पार्टी’ : कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद बोले गुलाम नबी आजाद, 5 और नेताओं ने दिया इस्तीफा

कॉन्ग्रेस पार्टी से शुक्रवार (26 अगस्त 2022) को इस्तीफा देने के बाद गुलाम नबी आजाद ने ऐलान किया है कि वो जम्मू-कश्मीर में नई पार्टी का गठन करेंगे। उन्होंने अपना यह बयान भाजपा से जुड़ने के कयासों पर दिया। इस बीच जम्मू-कश्मीर में 5 अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी गुलाम नबी आजाद के समर्थन में पार्टी से इस्तीफा दिया।

गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को कॉन्ग्रेस के हर पद से इस्तीफा देने के बाद भाजपा से जुड़ने के कयासों का खंडन करते हुए इंडिया टुडे से बात की। उन्होंने कहा, “मैं जम्मू-कश्मीर जाऊँगा और राज्य में अपनी खुद की पार्टी बनाऊँगा। उसकी राष्ट्रीय संभावनाओं पर बाद में विचार करेंगे।” मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर में नई पार्टी बनाने की बात आजाद ने ऐसे समय में कही है जब प्रदेश में कुछ ही महीनों में चुनाव होने वाले हैं।

5 अन्य नेताओं ने छोड़ी कॉन्ग्रेस

बता दें कि गुलाम नबी आजाद के पार्टी से हटने के बाद जिन पाँच नेताओं व पूर्व विधायकों ने उनके समर्थन में अपना इस्तीफा दिया है। उनके नाम जीएम सरूरी, हाजी अब्दुल राशिद, मोहम्मद अमीन भट्ट, गुलजार अहमद वानी और चौधरी मोहम्मद अकरम हैं। इनके अलावा पूर्व मंत्री आर एस चिब, पूर्व मंत्री जुगल किशोर शर्मा और महासचिव अशवनी हांडा ने भी त्याग पत्र दे दिया है।

गुलाम नबी आजाद के पत्र में राहुल गाँधी को बनाया गया निशाना

गौरतलब है कि गुलाम नबी आजाद ने कॉन्ग्रेस को छोड़ने के साथ ही सोनिया गाँधी को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने राहुल गाँधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि कैसे राहुल गाँधी के राजनीति में प्रवेश के बाद हालात बदले। अनुभवी नेताओं को किनारे कर दिया गया और चाटुकारों की अनुभवहीनों मंडली पार्टी को चलाने लगी।

पूर्व कॉन्ग्रेस नेता ने राहुल गाँधी द्वारा सरकारी अध्यादेश को फाड़ने की घटना को बेहद बचकाना कहा। उन्होंने कहा कि ये अध्यादेश प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने पारित किया था। इस तरह उसे फाड़ देने से भारत सरकार की गरिमा विकृत हुई और 2014 के चुनावों में इस घटना ने यूपीए की हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।