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पहले निर्दलीय मुख्यमंत्री देखा, अब ‘भाभीजी CM’ देखेगा झारखंड? खनन लीज मामले में EC के फैसले पर नजरें, हेमंत सोरेन की सदस्यता को खतरा

माना जा रहा है कि हेमंत सोरेन लालू यादव के रास्ते पर चल सकते हैं। साल 1997 में चारा घोटाले में जेल जाने से पहले बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम की कुर्सी सौंप दी थी।

झारखंड में राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी विधानसभा की सदस्यता जाती देख पत्नी को मुख्यमंत्री बनाने की की तैयारी कर रहे हैं। यह दावा भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने किया है।

गोड्डा से भाजपा सांसद दुबे ने ट्वीट कर कहा, “झारखंड में भाभी जी के ताजपोशी की तैयारी, परिवारवादी पार्टी का बेहतरीन नुस्ख़ा गरीब के लिए।” उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन (Kalpna Soren) की ओर इशारा किया।

अपने एक अन्य ट्वीट में निशिकांत दुबे ने कहा था, “झारखंड मुक्ति मोर्चा और कॉन्ग्रेस दिल्ली-राँची क्यों दौड़ लगा रही है? हमने बोला बरहेट, दुमका में उपचुनाव होगा तो हमें काँके भेज रहे थे। अब तो विधानसभा अध्यक्ष को कनाडा जाने से रोक दिया गया। इस्तीफा ही विकल्प है, इसलिए दे दीजिए।”

इसके पहले दुबे ने भाजपा कार्यकर्ताओं को विधानसभा उपचुनाव के लिए तैयार रहने को कहकर राज्य की राजनीति गर्मा दी थी। उन्होंने कहा था कि बरहेट से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दुमका से उनके भाई बसंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता जा सकती है। उन्होंने दावा किया था कि सीएम सोरेन अगस्त बीता लें तो बड़ी बात होगी।

बता दें कि खनन लीज मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कुर्सी को लेकर चुनाव आयोग का फैसला आने वाला है। सोरेन पर विभागीय मंत्री होते हुए अपने नाम से खनन लीज लेने का आरोप है। मामला राज्यपाल कार्यालय से होते हुए चुनाव आयोग तक पहुँचा और आयोग ने इस पर कई दिनों तक सुनवाई की। 

इसके साथ ही हाल ही में कॉन्ग्रेस के तीन विधायक 48 लाख रुपए की नकदी के साथ पश्चिम बंगाल (West Bengal) में पकड़ाए थे। इसके बाद से उन्हें पार्टी में टूट का डर सताने लगा है। इस घटना के बाद से दोनों पार्टियाँ अलर्ट मोड में हैं।

इसको देखते हुए हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कॉन्ग्रेस (Congress) वाली गठबंधन सरकार में मंथन चल रहा है। इसको लेकर शनिवार (20 अगस्त 2022) को 11 बजे महत्वपूर्ण बैठक भी थी, जिसका विवरण सामने आना अभी बाकी है। महागठबंधन के दलों ने अपने-अपने विधायकों को राँची में ही रहने के लिए कहा है।

लालू यादव के रास्ते पर चल सकते हैं सोरेन

अगर चुनाव आयोग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन के खिलाफ फैसला देेता है और वर्तमान सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि लालू यादव की तर्ज पर हेमंत सोरेन अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो कल्‍पना सोरेन झारखंड की पहली महिला मुख्‍यमंत्री होंगी।

साल 1997 में चारा घोटाले में जेल जाने से पहले बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम की कुर्सी सौंप दी थी। विश्लेषकों का मानना है कि JMM प्रमुख शिबू सोरेन (Shibu Soren) के नाम पर सहमति बन सकती है, लेकिन उनके खिलाफ भी दिल्ली लोकपाल में 25 अगस्त को सुनवाई होने वाली है।

कुछ विश्लेषक हेमंत सोरेन की माँ रूपी सोरेन और जामा से विधायक हेमंत की भाभी सरिता सोरेन के नाम को लेकर भी चर्चा हो सकती है। महागठबंधन की बैठक में राजनीति के अगले के कदम के बारे में महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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