गुजरात दंगों को लेकर गुजरात सरकार की छवि खराब करने के आरोप में गिरफ्तार तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (2 सितंबर 2022) को अंतरिम जमानत दे दी। तीस्ता पर गवाहों के झूठे बयानों का मसौदा तैयार कर नानावती आयोग के सामने प्रस्तुत करने का आरोप है।
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए तीस्ता सीतलवाड़ को जाँच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ से अपना पासपोर्ट सरेंडर करने के लिए भी कहा कि यह पासपोर्ट तब तक सरेंडर रहेगा जब तक कि हाईकोर्ट नियमित जमानत के मामले पर विचार नहीं कर लेता।
बता दें कि इस मामले में तीस्ता की जमानत याचिका निचली अदालत और हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। इन दोनों जगहों से आवेदन खारिज होने के बाद तीस्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
तीस्ता की ओर से अदालत में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी 24 जून को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ समाप्त हुई कार्यवाही के बाद आगे बढ़ाने के अलावा और कुछ नहीं थी।
कपिल सिब्बल ने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ दो महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं और उच्च न्यायालय के समक्ष मूल आवेदन के लंबित रहने के दौरान अंतरिम जमानत की हकदार हैं।
वहीं, गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि FIR में तीस्ता सीतलवाड़ की संलिप्तता को लेकर जो बात कही गई है उसके पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने कहा कि तीस्ता का आवेदन उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में मामले को उच्च न्यायालय द्वारा ही विचार करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिरासत में पूछताछ सहित जाँच के सभी आवश्यक तत्व पूरे होने के बाद मामला एक जटिल रूप लेता है। इसलिए उच्च न्यायालय द्वारा मामले पर विचार किए जाने तक अंतरिम जमानत दिया जाना चाहिए।
बता दें कि गुजरात दंगों में भूमिका को लेकर तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात एटीएस टीम ने 25 जून 2022 को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया था। उनके ऊपर दंगों के दौरान गुजरात की छवि खराब करने का आरोप है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, तीस्ता के खिलाफ यह कार्रवाई आईपीसी की धारा 498 के तहत दर्ज एफआईआर पर हुई थी। तीस्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गुजरात दंगों से जुड़े मामले में उनकी भूमिका पर और छानबीन की जरूरत है।
बांग्लादेश के ढाका नेशनल मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने वाली एक भारतीय छात्रा ने 18 अगस्त, 2022 को फेसबुक पर बताया है कि अब्दुल वकील नामक मुस्लिम व्यक्ति होटल के एक कमरे में 3 दिनों तक उसके साथ बलात्कार किया है।
पीड़िता ने फेसबुक पर बताया, “अब्दुल वकील ने कॉक्स बाजार के होटल गैलेक्सी रूम 501 में 8 अगस्त से 11 अगस्त, 2022 तक मेरे साथ बलात्कार किया और मुझे प्रताड़ित किया। अब्दुल ने मेरा मोबाइल और मेरे पैसे भी चुरा लिए थे। वह मुझे और मेरे माता-पिता को जान से मारने की धमकी भी दे रहा है। कृपया मुझे न्याय दें। वह डॉ हलीमा खातून नर्सिंग इंस्टीट्यूट, मेमनसिंह का छात्र है। एक विदेशी छात्र के रूप में यह हमारी सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। कृपया अपनी आवाज उठाएँ।”
पीड़िता ने फेसबुक पर लगाई न्याय की गुहार
पीड़िता ने अब्दुल के साथ हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “अब्दुल वकील अब मेरे वीडियो वायरल कर रहा है। उसके दोस्त और कुछ पत्रकार अब मुझसे जबरन वसूली की कोशिश कर रहे हैं। प्लीज, इसके लिए कुछ करें।” इसके अलावा, पीड़िता ने जाकिया नाम की एक मुस्लिम महिला पर अब्दुल का साथ देने का आरोप लगाते हुए लिखा, “जाकिया ने मेरा फायदा उठाया, क्योंकि मैं उस देश में बिल्कुल अकेली थी।”
Do not inhabit a country where you are not respected, cannot earn your livelihood, have no friends or cannot acquire knowledge.
एक अन्य फेसबुक पर पोस्ट ने पीड़िता ने विदेश में पढ़ाई करने के बाद सामने आई समस्या पर दुःख जताते हुए लिखा, “ऐसे देश में न रहें, जहाँ आपका सम्मान नहीं है या आप अपनी आजीविका नहीं कमा सकते हैं और जहाँ आपका कोई दोस्त नहीं हैं या ज्ञान हासिल नहीं कर सकते हैं।”
पीड़िता ने ऑपइंडिया को बताया अपना दर्द
एक मैसेजिंग ऐप पर ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया, “अब्दुल ने पिछले 5-6 महीने मुझसे प्यार करने का नाटक किया। उसने इस बात का फायदा उठाया कि मैं बांग्लादेश में बिल्कुल अकेली थी।”
पीड़िता ने ऑपइंडिया से यह भी कहा, “मैं बस से होटल पहुँची, तब उसने कहा कि वह गलत व्यवहार नहीं करेगा। हम कहीं घूमने जा रहे थे। हालाँकि, उसने अलग ही प्लान बना रखे थे। मैंने यौन कृत्यों के लिए कभी सहमति नहीं दी। मैं इसके लिए मना कर रही थी। लेकिन, मेरे नहीं मानने पर उसने मुझे जान से मारने की धमकी दी। उसने मेरे पैसे और सामान छीन लिए लिया ताकि मैं कहीं भाग न सकूँ।”
हिन्दू महिला के साथ गैंगरेप
इससे पहले 29 जुलाई को बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले के भेरवेदी यूनियन के कुमार पारा इलाके में धान के खेत में एक हिंदू महिला का शव मिला था।
रिपोर्ट के अनुसार, मृतक महिला की पहचान अपो रानी रॉय के रूप में हुई थी। वह अपने मायके से ससुराल लौट रही थी। हालाँकि, वह घर नहीं पहुँच सकी और बाद में उसका शव धान के खेत में मिला था। पीड़िता के शव के पास 10 साल की बिपाशा रानी रॉय नाम की उसकी बच्ची भी अचेत अवस्था में मिली थी। पीड़िता के परिवार के मुताबिक अपो रानी रॉय के साथ अज्ञात अपराधियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया है। उन्होंने दावा किया कि आरोपितों की पहचान करने से रोकने के लिए पीड़िता की हत्या की गई थी।
Daughter of Apo Rani describes the evening when her mother was dragged, r@ped & k!lled by Mu$lims in Bangladesh.
Till now except @RajatSharmaLive no one has bothered to highlight the pain of these Hindu girls. 2 small girls lost their mother&shelter. Shame on all of us. Shame pic.twitter.com/Qg1snBvdCY
— Radharamn Das राधारमण दास (@RadharamnDas) August 5, 2022
इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमण दास द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में, एक 10 वर्षीय बच्ची को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “मेरी माँ ने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया था। वह अपराधियों से छोड़ देने के लिए कहते हुए गिड़गिड़ा रही थी। वह उनसे पूछती रही कि हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है। उन्होंने मेरी गर्दन से पकड़ ली थी और मेरे सिर पर मारा। मैं बेहोश हो गयी लेकिन उन्हें ऐसा लगा कि मैं मर गई हूँ। मुझे नहीं पता कि उसके बाद मेरी माँ के साथ क्या हुआ।”
शुक्रवार (2 सितंबर 2022) को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने देश को पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर भारतीय नौसेना को सौंप दिया, जिसका नाम ‘आईएनएस विक्रांत’ है। यह नाम 31 जनवरी 1997 को नेवी से रिटायर हुए एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत से लिया गया है। इसने 1971 के युद्ध में अहम भूमिका निभाई थीं, वहीं अब इसके ‘पुनर्जन्म’ से दुश्मनों के दिलों की धड़कने तेज सी हो गई है।
‘मेड इन इंडिया’ INS विक्रांत की खासियत
‘जी बिजनेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना में करीब 25 वर्षों के बाद ‘INS विक्रांत’ की वापसी हुई है। इसका डिजाइन नौसेना के ‘वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो’ ने तैयार किया है, तो वहीं इसका निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की शिपयार्ड ‘कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड’ द्वारा किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि आसानी से 30 विमानों का संचालन इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर किया जा सकता है। आइए, कुछ बिंदुओं में भी इसकी विशेषताएँ समझें:-
आईएनएस विक्रांत का वजन 45 हजार टन है। इसके साथ ही भारत दुनिया का 5वाँ ऐसा देश बन गया है, जिसके पास खुद का 45 हजार टन वजन वाला एयरक्राफ्ट कैरियर है।
INS विक्रांत ऐसा विमान वाहक जहाज है, जो एक तरह से समुद्र के ऊपर तैरता एक एयरफोर्स स्टेशन है।
इस विशाल जहाज से फाइटर जेट्स, मिसाइलें, ड्रोन के जरिए दुश्मनों को जंग में धराशायी किया जा सकता है।
एयरक्राफ्ट कैरियर से 32 बराक-8 मिसाइल दागी जा सकती है।
यह विमान वाहक जहाज 20 मिग-29 लड़ाकू विमान और दस हेलीकॉप्टरों को ले जाने में सक्षम है।
आईएनएस विक्रांत पर कुल 30 एयरक्राफ्ट तैनात होंगे, जिनमें से 20 लड़ाकू विमान होंगे और 10 हेलीकॉप्टर होंगे।
नवंबर 2022 से मिग-29 के एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत पर तैनात होने शुरू हो जाएँगे।
इतने बड़े जहाज को चलाने के लिए GE मरीन के LM2500 इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
विशाल आईएनएस विक्रांत का आकार व बनावट
‘DNA हिंदी’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह एयरक्राफ्ट कैरियर 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है। INS विक्रांत में LM2500 मरीन इंजनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन इंजनों की क्षमता 88 मेगावॉट की है, यानी कि 1,18,010 हॉर्स पावर (HP) बताई जा रही है। इन्हीं तगड़ी इंजनों के कारण क्रूजिंग स्पीड 18 नॉटिकल मील है, वहीं अधिकतम स्पीड 28 नॉटिकल मील यानी 52 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहने वाली है।
भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर में GE मरीन के इंजनों का ही इस्तेमाल किया जाता है। INS विक्रांत को लेकर GE मरीन ने बताया कि LM2500 इंजन 0.373 lb/Shp-hr यानी 227 ग्राम प्रति किलोवॉट घंटा के हिसाब से गैस का इस्तेमाल करता है। इसी वजह से इसकी रेंज 7500 नॉटिकल मील यानी 13,890 किलोमीटर है।
पीएम मोदी ने बताई स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर की विशेषताएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने आईएनएस विक्रांत के अनावरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इसकी कुछ विशेषताओं का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि विक्रांत बड़ा और भव्य है, विक्रांत अलग है, विक्रांत विशेष है। उन्होंने कहा कि विक्रांत सिर्फ एक युद्धपोत नहीं है, यह 21वीं सदी के भारत की कड़ी मेहनत, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
इस दौरान उन्होंने बताया कि आज यहाँ केरल के समुद्री तट पर भारत, हर भारतवासी, एक नए भविष्य के सूर्योदय का साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि INS विक्रांत पर हो रहा ये आयोजन विश्व क्षितिज पर भारत के बुलंद होते हौसलों की हुंकार है। उन्होंने बताया कि युद्धपोत से ज़्यादा ये एक तैरता हुआ एयरफील्ड है, यह तैरता हुआ शहर है।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी बताया कि INS विक्रांत में जितनी बिजली पैदा होती है उससे 5000 घरों को रोशन किया जा सकता है। इसका फ्लाइंग डेक भी दो फुटबॉल फील्ड से बड़ा है। इसमें जितने तार इस्तेमाल हुए हैं, वह कोचीन से काशी तक पहुँच सकते हैं। इसके एयरबेस में जो स्टील लगी है, वो स्टील भी स्वदेशी है।
अफगानिस्तान में शुक्रवार (2 सितंबर 2022) को जुमे की नमाज के दौरान हुए आत्मघाती हमले में कम-से-कम 18 लोगों की मौत और 23 से अधिक लोग घायल हो गए। इस विस्फोट में तालिबान के सबसे बड़े मजहबी उलेमाओं में से एक मुल्ला मुजीब रहमान अंसारी भी मारा गया है। हमले की जिम्मेदारी अभी किसी संगठन ने नहीं ली है।
हेरात प्रांत में गजरगाह मस्जिद में यह आत्मघाती हमला ऐसे वक्त में हुआ है, जब तालिबान के उप-मंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर आधिकारिक बैठक के लिए वहाँ गए थे। माना जाता है कि यह हमला इस्लामिक स्टेट के खुरासान समूह (ISKP) द्वारा किया गया है। हालाँकि, तालिबान ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
घटना के हेरांत प्रांत के गाजारघ शहर की है। राज्यपाल के प्रवक्ता हमीदुल्लाह मोटावकिल ने बताया कि यहाँ के गजरगाह मस्जिद में शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए दर्जनों लोग इकट्ठा हुए थे। इस मस्जिद का इमाम मुल्ला अंसारी था। इसी दौरान आत्मघाती हमला हो गया।
At least 18 people were killed, including Mawlawi Mujeeb Rahman Ansari, and 23 others were wounded in the blast that occurred today at Guzargah mosque in Herat province, said the governor’s spokesman Hamidullah Motawakil. https://t.co/d2w3qsdHEd
इस्लामिक अमीरात के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने ट्वीट कर अंसारी की मौत पर दुख जताया और कहा कि हमले के दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। मुजाहिद ने कहा, “धर्म के दुश्मनों द्वारा कायरतापूर्ण हमले में दीन के विद्वान मुजीब अंसारी शहीद हो गए।”
वहीं, देश के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने ट्वीट कर मस्जिद में हुए विस्फोट की निंदा की है। उन्होंने कहा कि मस्जिद पर हमला मानवता के खिलाफ इस्लामी सिद्धांतों एवं मूल्यों के विरुद्ध है। हेरात सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता महमूद शाह रसूली ने कहा कि विस्फोट में घायल हुए लोगों को प्रांतीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
38 वर्षीय मौलवी मुजीब रहमान अंसारी को एक कट्टर मौलवी माना जाता है, जिसके विचार हमेशा कट्टरता से भरे रहे हैं। तालिबान के जिरगा का सदस्य था। अंसारी ने कहा था कि जो कोई भी इस्लामी शासन के खिलाफ विद्रोह करता है, उसका सिर काट दिया जाना चाहिए।
अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए अंसारी ने कहा था कि अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात के खिलाफ अगर कोई मामूली कदम भी उठाता है तो उसका सिर कलम कर दिया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, अंसारी ने एक बार फतवा दिया था कि अगर किसी व्यक्ति की बीवी बुर्का नहीं पहनती है तो वह मर्द कायर है।
अंसारी ने यह भी कहा था कि व्यभिचारियों को पत्थर मारकर मौत के घाट उतार देना चाहिए और चोरों के हाथ काट देने चाहिए। कोविड-19 को अंसारी ने गैर-मुस्लिमों पर अल्लाह का कहर बताया था। मुल्ला अंसारी लड़कियों की शिक्षा देने और उनके घर से बाहर निकलने का सख्त विरोधी था।
यह हमला इस्लामिक स्टेट (ISIS) का प्रतिशोध माना जा रहा है। बुधवार (31 अगस्त 2022) को तालिबान और ISKP के बीच खूनी झड़प हुई थी। इसमें ISKP के 3 आतंकी मारे गए थे। इसके बाद ISIS ने कहा था कि वह इन मौतों का बदला जरूर लेगा। बता दें कि तालिबान का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी ISKP है और दोनों के बीच खूनी झड़पें होती रहती हैं।
पाकिस्तान में एक बाढ़ प्रभावित हिंदू लड़की से रेप का मामला सामने आया है। घटना सिंध प्रांत की है। राशन दिलाने के नाम पर इस लड़की के साथ दो दिनों तक खालिद और दिलशेख ने बलात्कार किया। इससे पहले 28 अगस्त को पाकिस्तान में 8 साल की एक बच्ची से दरिंदगी का मामला सामने आया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सिंध प्रांत के कई इलाके भीषण बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें से एक संघर जिला भी है। जिले के शाहदादपुर इलाके की रहने वाली एक हिंदू पीड़िता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के लिए कार्य करने वाले एनजीओ ‘वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ ने जारी किया।
वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने ट्विटर पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “सिंध के शाहदादपुर जिले के बाढ़ प्रभावित इलाके में राशन दिलाने का वादा कर एक हिंदू लड़की के साथ 2 दिनों तक बेरहमी से बलात्कार किया गया। यह बहुत ही शर्मनाक और निंदनीय कृत्य है।”
वीडियो में पीड़िता रोते हुए बता रही है, “मुझे राशन दिलाने का बोलकर गाड़ी में बैठने को कहा गया। पहले उसने जबरदस्ती की, फिर नशीला पदार्थ खिलाकर दुष्कर्म किया।”
गौरतलब है कि सिंध प्रांत से ही पिछले दिनों एक 8 वर्षीय बच्ची हिंदू बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। 28 अगस्त को यह बच्ची परिजनों को बेहद गंभीर अवस्था में मिली थी। उसकी ऑंखें फोड़ दी गई थी और पूरा शरीर नोंच लिया गया था।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand CM Hemant Soren) की मुश्किलें कम होने के बजाए बढ़ती जा रही है। हजारीबाग में सरस्वती पूजा के दिन मूर्ति विसर्जन के दौरान मॉब लिंचिंग के शिकार हुए रूपेश पांडेय के मामले की जाँच अब सीबीआई (CBI) करेगी।
दरअसल, रूपेश की माँ उर्मिला पांडेय ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जाँच की माँग की थी। मृतक की माँ ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार में पुलिस पर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उसे बचाने का प्रयास कर रही है।
बता दें कि 6 फरवरी 2022 को हजारीबाग में हिंदू बच्चे सरस्वती पूजा के बाद प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए जा रहे थे। बरही थाना के नईटांड गाँव में लखना दूलमाहा इमामबाड़ा के पास मुस्लिम युवकों ने विसर्जन करने जा रहे लड़कों को रोक लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। मुस्लिम युवक रूपेश कुमार को तब तक पीटते रहे, जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने कुछ दुकानों में आग भी लगा दी थी, जिसके बाद पुलिस को उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। इस मामले में 7 नामजद सहित 100 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है।
मृतक के चाचा अनिल ने बताया था कि रूपेश शाम के 5 बजे दुकान पर बैठा था, तभी उसके कुछ दोस्तों ने उसे सरस्वती पूजा विसर्जन में शामिल होने के लिए बुलाया। ये घटना 5 फरवरी, 2022 (रविवार) की है। चाचा ने बताया है कि असलम अंसारी उर्फ़ पप्पू मियाँ के नेतृत्व में मौजूद मुस्लिम भीड़ ने उनके भतीजे को पकड़ कर पीटा।
इस मामले में आरोपित हैं– असलम अंसारी, मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद गुफरान, मोहम्मद चाँद, मोहम्मद ओसामा, मोहम्मद एहताम, मोहम्मद जाहिद, मोहम्मद सोनू, मोहम्मद फैसल, मोहम्मद शाहबाज, रब्बानी मियाँ, मोहम्मद आशिक, मोहम्मद जाशिद, मोहम्मद आशिक, मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद सलमान, मोहम्मद इरफ़ान, मोहम्मद सलमान उर्फ़ भाले, मोहम्मद छोटे, मोहम्मद इस्तेखार, मोहम्मद इकबाल, मोहम्मद हसन, मोहम्मद अनीस और मोहम्मद नौशाद।
प्राथमिकी में बताया गया है कि मॉब लिंचिंग में कई महिलाएँ भी शामिल थीं। प्राथमिकी में लिखा है, “भीड़ ने मेरे भतीजे के सीने पर चढ़ कर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने देखा कि भीड़ मेरे भतीजे की छाती पर चढ़ कर उसे लगातार पीट रहे थे। वहाँ से उसे अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया। ये एक मॉब लिंचिंग है, जिसमें समुदाय विशेष ने हत्या की है। इस घटना में शामिल सभी अज्ञात और नामजद लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।”
ऑपइंडिया को मिले रुपेश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर गौरव शर्मा ने कहा कि चोट की वजह से खून के थक्के जम गए और इंटरनल ऑर्गन फेल हो गए थे। आँख, कान, छाती, पेट, पैर सहित पूरे शरीर पर चोट के निशान थे। मजबूत और भारी सामान से हमला किया गया था। धारदार हथियार से हमला हुआ। गला दबाने की कोशिश की गई। कान, गले और छाती के निचले हिस्से में घाव थे।
हालाँकि, बाद में मृतक रुपेश के परिजनों ने मीडिया रिपोर्ट में चल रही सरस्वती प्रतिमा विसर्जन में हत्या की बात को नकार दिया था। उनका कहना था, “फोन करके उनको (आरोपितों को) बुलाया गया। मोहम्मडन का लड़का फोन से बुलाया। गाड़ी से बैठा कर जबरदस्ती ले गए उसको (रूपेश को)। ये जो मूर्ति वाली बात झूठ-मूठ के दे रहे हैं कि ये सब मूर्ति विसर्जन में हुआ है, ये सब कुछ नहीं है। ये गलत खबर है। वो मोबाइल की दुकान पर काम कर रहा था।”
जेल के खाने को लेकर हमेशा से ही यह धारणा बनी रही है कि कैदियों को मिलने वाला खाना अच्छा नहीं होता है। हालाँकि, उत्तर प्रदेश की फर्रुखाबाद जिले की फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में मिलने वाले खाने को बेहतर मानते हुए ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI)’ ने 5 स्टार रेटिंग दी है। इस तरह से यह जेल इस उपलब्धि को हासिल करने वाला उत्तर प्रदेश का पहला जेल बन गया है।
दरअसल, फर्रुखाबाद जिले की फतेहगढ़ सेंट्रल जेल की रसोई को आधुनिक किया गया है। इस रसोई में खाना बनाने के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इसलिए, अब यहाँ खाना हाथ से नहीं बल्कि मशीनों से तैयार किया जा रहा है।
चूँकि, खाना मशीन से बन रहा है और हाथों का कम से कम उपयोग हो रहा है। इसलिए, साफ-सफाई से लेकर खाने की गुणवत्ता तक बेहतर हो गई है। यही कारण है कि, फतेहगढ़ जेल में कैदियों को गुणवत्तापूर्ण खाना देने और खाद्य सामग्रियों के बेहतर रख-रखाव के लिए ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI)’ ने इसे 5 स्टार सर्टिफाइड कर दिया है।
इस बारे में, जिला मजिस्ट्रेट संजय सिंह का कहना है कि FSSAI से मान्यता मिलने के बाद यह साफ है कि इस जेल के 1100 कैदियों को स्वच्छ और पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। इस जेल को मार्च, 2022 में FSSAI का लाइसेंस मिला था। इसके बाद, FSSAI के निर्देशों के अनुसार भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता में सुधार किया गया है।
जेल अधीक्षक भीम सेन मुकुंद ने कहा है कि जेल प्रशासन ने FSSAI के दिशानिर्देशों का ठीक से पालन किया। रसोई का आधुनिकीकरण किया गया है और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जेल की रसोई में आटा गूँथने, आलू छीलने, सब्जियाँ काटने और रोटी बनाने के लिए नई और ऑटोमेटिक मशीनें लाई गई हैं। इसके अलावा, कैदियों के साथ ही जेल के कर्मचारियों ने भी खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता का प्रशिक्षण लिया है। रसोई में काम करने वाला प्रत्येक व्यक्ति हर समय एप्रन, हेड गियर और दस्ताने पहनकर रखता है।
बताया जा रहा है कि पिछले दो सालों में कोरोना महामारी को देखते हुए जेल परिसर में नई रसोई का निर्माण करवाया गया है। इस जेल के 1100 कैदियों के लिए दोनों टाइम का खाना इसी रसोई में बनता है। अभी तक रोटी, सब्जी, दाल आदि बनाने में कैदियों की मदद ली जाती थी और मैनुअली होने की वजह से इसमें काफी समय लगता था। लेकिन, अब यही काम जल्दी हो जाता है।
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसमें एक महिला डॉक्टर पत्रकारों और पुलिसकर्मियों से उलझती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में दिख रहीं डॉक्टर का नाम आसमा बेगम है। उनकी पोस्टिंग फर्रुखाबाद के डॉक्टर राममनोहर लोहिया महिला चिकित्सालय में है। इस वीडियो का संबंध एक दलित नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार से जुड़ा हुआ है।
बलात्कार की घटना 20 अगस्त 2022 की है। इस संबंध में 23 अगस्त 2022 को शादाब, वसीम और वशीर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पीड़िता को मेडिकल के लिए ले जाया गया। आरोप है कि डॉक्टर आसमा ने भविष्य का डर दिखाकर पीड़िता से मेडिकल नहीं कराने को कहा। इसकी वजह उनका और आरोपितों का एक ही मजहब से जुड़ा होना बताया जा रहा है। हालाँकि ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।
जो वीडियो वायरल हुआ है वह 24 अगस्त का बताया जा रहा। आरोप है कि इस दौरान डॉक्टर आसमा ने एक पत्रकार को ‘हिंदू काफिर @# का बच्चा’ भी कहा। इसको लेकर उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई हैं। डॉक्टर आसमा ने भी पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। खबर लिखे जाने बलात्कार के एक आरोपित की गिरफ्तारी हो चुकी थी। पीड़िता का भी मेडिकल हो चुका है। पुलिस का कहना है कि वीडियो से जुड़े आरोपों की जाँच चल रही है।
फर्रुखाबाद में हिंदू बेटी के साथ मुसलमान युवक ने रेप किया. पीड़िता के पिता और पुलिसवाले उसका मेडिकल कराने के लिए जिला चिकित्सालय गए. दो दिनों तक दौड़ाने के बाद अस्पताल की डॉक्टर आसमा बेगम ने लड़की को मेडिकल न कराने की सलाह दी. जब मीडिया इसकी कवरेज करने लगी तो आसमा भड़क गईं. pic.twitter.com/5Z2Hp5y7nB
20 अगस्त 2022 को एक दलित नाबालिग लड़की को अगवा कर गैंगरेप का आरोप शादाब, वसीम और वशीर पर है। 23 जुलाई को इस मामले में मऊदरवाजा थाने में केस दर्ज गया। DSP सिटी प्रदीप सिंह के मुताबिक लोकलाज के डर पीड़ित परिवार 3 दिन तक शिकायत दर्ज कराने से बचता रहा।
शिकायतकर्ता के मुताबिक उनकी बेटी को रात के समय सोए हुए अगवा किया गया। दावा है कि पीड़ित पिता ने आरोपितों से अपनी बेटी को छोड़ने की गुहार लगाई तो उनके साथ भी अभद्रता हुई। इस मामले में दर्ज एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पीड़ित पिता के अनुसार इससे पहले भी शादाब ने अपने दोस्तों के साथ उनकी बेटी को अगवा कर लिया था। उस समय शादाब के अब्बा के दखल के बाद लड़की घर लौट आई थी।
पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 363, 366, 342, 376-डी, 504, 506, पॉक्सो और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की है। मुख्य आरोपित शादाब को गिरफ्तार कर लिया है। DSP सिटी प्रदीप सिंह के अनुसार मामले की जाँच चल रही है। कुछ हालात और तथ्य सबूतों से मेल नहीं खा रहे।
ऑपइंडिया से बात करते हुए DSP प्रदीप सिंह ने बताया कि 23 अगस्त की शाम पीड़िता को महिला सिपाही के साथ मेडिकल परीक्षण के लिए सरकारी अस्पताल भेजा गया था। उस समय डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। अगली सुबह उसे फिर अस्पताल भेजा गया। लेकिन मेडिकल नहीं किया गया। इसके बाद उस दिन शाम में वरीय अधिकारी अस्पताल गए। इसी दौरान कुछ पत्रकार भी अस्पताल पहुँच गए।
DSP प्रदीप सिंह ने बताया कि अस्पताल प्रशासन मेडिकल क्यों टाल रहा था, यह समझ से परे है। DSP के अनुसार जब उन्होंने केस की गंभीरता समझने का प्रयास किया तो महिला डॉक्टर भड़क गईं। वायरल हो रहा वीडियो उसी समय का है। प्रदीप सिंह ने ये माना कि अस्पताल प्रशासन का व्यवहार सहयोगात्मक नहीं था।
25 अगस्त को हुआ पीड़िता का मेडिकल
ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO फर्रुखाबाद कोतवाली ने बताया कि पीड़िता का मेडिकल 25 अगस्त को हुआ था। साथ ही बताया कि महिला डॉक्टर और पत्रकार की तरफ से दर्ज कराए गए मामले की जाँच चल रही है। आरोपित शादाब की गिरफ्तारी 26 अगस्त 2022 को हुई थी।
डॉक्टर आसमा बेगम पर आरोप
अस्पताल में हुई घटना को लेकर पत्रकार सुंदरम सिंह ने 24 अगस्त 2022 को ही डॉक्टर आसमा बेगम के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। आरोप लगाया है कि वह पीड़िता के मेडिकल में टालमटोल कर रही थी। पीड़िता को भविष्य खराब होने का डर दिखा रही थी। उनका दावा है कि आरोपितों के भी मुस्लिम होने के कारण वह पीड़िता पर मेडिकल नहीं कराने का दबाव डाल रही थी।
सुंदरम का आरोप है कि डॉक्टर आसमा ने उन्हें ‘हिन्दू काफिर @# के बच्चे’ जैसे शब्दों से संबोधित किया। महिला डॉक्टर ने फोन कर कर अपने शौहर इमरान और देवर रिजवान को अस्पताल बुला लिया। उनके साथ दर्जन भर लोग थे। आरोप है कि इनलोगों ने पत्रकार का गला दबाने और मारपीट का पुलिस के आगे ही प्रयास किया।
पीड़ित पिता ने कहा- बार-बार दौड़ा रहीं थीं डॉक्टर आसमा
दलित पीड़िता के पिता का भी कहना है कि डॉक्टर आसमा बेगम मेडिकल करने में टालमटोल कर रहीं थी। उनकी बेटी को लगातार दौड़ा रहीं थीं। कभी दिन में तो कभी रात में आने को कह रही थी। उनका यह भी दावा है कि वीडियो बना रहे पत्रकार की पिटाई महिला डॉक्टर ने पुलिस के सामने ही की थी।
डॉक्टर आसमा बेगम पर कार्रवाई की माँग
फर्रुखाबाद के विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने आरोपित डॉक्टर आसमा बेगम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने कहा कि जो डॉक्टर पुलिस के सामने इस तरह का व्यवहार कर सकती है वह आम आदमी के साथ क्या करती होंगी, यह सोचनीय है। विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री से डॉक्टर आसमा बेगम को दंडित करने की माँग की है।
उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद में एक जिहादी ने हिन्दू लड़की का बलात्कार किया,पिता अपनी बेटी का जब मेडिकल कराने पहुंचा तो वहां की डॉक्टर आसमा बेगम ने लड़की का मेडिकल करने से मना कर दिया,@brajeshpathakup जी इसे संज्ञान में लीजिये और डॉ0को दण्डित करिये I
करणी सेना ने भी डॉक्टर आसमा बेगम के खिलाफ ज्ञापन दिया है। अपने ज्ञापन में करणी सेना ने पीड़िता का मेडिकल न करने और पत्रकार का मोबाईल तोड़ने का आरोप लगाते हुए डॉक्टर आसमा पर कठोर कार्रवाई की माँग की है।
करणी सेना ज्ञापन
डॉक्टर आसमा ने भी पत्रकार पर दर्ज करवाई FIR
डॉक्टर आसमा बेगम ने भी पत्रकार सुंदरम के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। पत्रकार पर घूस माँगने, सरकारी अभिलेख फाड़ने, खुद को पीटने और नशे में अभद्रता का आरोप लगाया है। इसको लेकर पत्रकार सुंदरम ने ऑपइंडिया से बात करते हुए प्रशासन से घटना के समय अस्पताल की CCTV फुटेज सार्वजानिक करने की माँग की है। उन्होंने CCTV से छेड़छाड़ की भी आशंका जताई है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की महिला विधायक बलजिंदर कौर को उनके पति द्वारा सबके सामने थप्पड़ मारे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो 10 जुलाई का बताया जा रहा है, जिस पर अभी तक महिला विधायक और उनके पति का कोई बयान नहीं आया है। ‘पंजाब महिला आयोग’ की अध्यक्ष ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया है।
यह वीडियो गुरुवार (1 सितम्बर, 2022) से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में घर के अंदर महिला विधायक के पति एक चारपाई पर बैठे दिख रहे हैं। थोड़ी सी बहस के बाद वो उठ कर अपनी पत्नी को थप्पड़ मार देते हैं। घटनास्थल पर महिलाओं और बच्चे सहित कई अन्य लोग मौजूद दिख रहे हैं। उन्होंने विधायक के पति सुखराज सिंह को रोका, जिसके बाद और और पिटने से बच गईं।
Empowering women is not a deterrent to stop violence against women.Shocking to see @BaljinderKaur_ MLA getting slapped in broad day light.Mindset of men has to change. The problem lies in the perpetrator’s of these acts.Change this male chauvinism attitude more then anything else pic.twitter.com/Qxm6rhrtht
पंजाब ‘युवक कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष बरिंदर ने इस वीडियो को शेयर किया है। उन्होंने इस घटना को अप्रत्याशित बताते हुए पुरुषों से महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने के लिए कहा है। पंजाब की राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष मनीषा गुलाटी ने भी इस वीडियो का संज्ञान लिया है। पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा के मुताबिक, यद्यपि ये मामला घरेलू है लेकिन फिर भी ये देखना दुःखद है कि एक विधायक को इन हालात से गुजरना पड़ रहा है।
जानकारी के मुताबिक, AAP की महिला विधायक बलजिंदर कौर ने साल 2009 में पटियाला स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से एम फिल की पढ़ाई की थी। फरवरी 2019 में उनकी सुखराज सिंह से शादी हुई। सुखराज सिंह AAP के यूथ विंग के नेता हैं। बलजिंदर कौर तलवंडी साबो विधानसभा से 2 बार चुनाव जीत चुकी हैं।
मुंबई स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने सात साल की बच्ची का यौन शोषण के आरोपित शख्स को जमानत देते हुए कहा कि प्राइवेट पार्ट में किसी चीज को डालना प्रथम दृष्ट्या रेप की परिभाषा के दायरे में नहीं आता। हाईकोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध) के तहत संभोग के दौरान शरीर में अंग का प्रवेश जरूरी होता है।
आरोपित व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 और पॉक्सो (POCSO) कानून की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है। इस मामले में आरोपित पिछले तीन साल से जेल में बंद था। पिछले हफ्ते बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपित को उपरोक्त आधार पर जमानत दे दी।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस भारती डांग्रे ने कहा, “हाथ से गुदा द्वार को फैलाने और उसमें को पदार्थ डालने की क्रिया को प्रथम दृष्ट्या शारीरिक संभोग में शामिल नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसमें त्वचा से त्वचा का संपर्क और कामुक आनंद शामिल ना हो।”
नई मुंबई के कोपरखैरणे पुलिस स्टेशन के अंतर्गत एक इलाके में 27 सितंबर 2019 को सात साल की एक बच्ची अपने दोस्तों के साथ खेल रही थी। जब बच्चे अपने घर लौटे तो बच्ची के साथियों ने उसकी माँ को बताया कि एक दाढ़ी वाला व्यक्ति उसके कपड़ों को खोल दिया था। इसके बाद उसके गुदा को फैलाकर उसमें लाल रंग का कोई पदार्थ डाल दिया था।
बच्ची की माँ ने कोपरखैरणे पुलिस स्टेशन में जाकर मामले की शिकायत की। पुलिस ने IPC की धारा 377 और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। उसके बाद बच्चों द्वारा बताए गए हुलिया के आधार पर पुलिस ने 30 सितंबर 2019 को आरोपित को पास के ही एक बिल्डिंग से गिरफ्तार कर लिया।
आरोपित ने गिरफ्तारी के बाद निचली अदालत में अगस्त 2020 में को याचिका दी थी, लेकिन अदालत ने आरोपित की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपित ने जमानत के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में आवेदन दिया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट में बहस के दौरान आरोपित के वकील ने तर्क दिया कि धारा 377 के तहत आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। जस्टिस डांग्रे ने कहा कि अप्राकृतिक कृत्य परिभाषित नहीं है और धारा 377 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जानबूझकर किसी व्यक्ति, महिला या पशु के साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। अप्राकृतिक शारीरिक संबंध और शारीरिक संबंध में अंतर है।
जस्टिस डांग्रे ने बच्ची के बयान को उद्धृत करते हुए कहा कि एक ‘अंकल’ ने बच्ची के कपड़े खोलने के साथ-साथ अपने कपड़े भी खोल दिए। जब बच्ची ने चिल्लाने की कोशिश की तो शख्स ने उसका मुँह बंद कर दिया और उसके ऊपर लेट गया। बाद में उसके गुदा को हाथ से फैलाकर उसमें लाल रंग का पदार्थ डाल दिया।
साल 2019 में कराए गए मेडिकल रिपोर्ट में ‘संभोग/शोषण के अनुरूप निष्कर्ष’ और ‘गुदा में कोई भी जख्म नहीं’ कहा गया था। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस डांग्रे ने कहा कि न तो माँ की शिकायत में शरीर में अंग प्रवेश कर यौन प्रताड़ित करने की बात कही गई है और ना ही लड़की ने इसका जिक्र किया। लेकिन, मेडिकल रिपोर्ट में इसका जिक्र है।
जस्टिस डांगरे ने कहा, “तीन दिनों के बाद पीड़िता की जाँच की जाती है और उसके भग (clitoris) को ‘सूजन’ के रूप में वर्णित किया जाता है। इसके साथ ही उसमें कोई हाइमन मौजूद नहीं होता है। मेडिकल राय में कहा गया है कि ‘हाइमेन और मूत्रमार्ग के किनारों पर सूजन’ हैं, जबकि पीड़ित लड़की ने कहा कि उसकी योनि को न तो छुआ गया था और न ही उसके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी।”