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दुबई में भी इस्लामी धर्मांतरण का काम, 6 महीने में 3600+ बने मुसलमान: जानिए – साम-दाम-दंड-भेद के दम पर इस्लाम को कैसे आगे बढ़ा रहा सरकारी विभाग, जो सीधे ‘किंग’ को करता है रिपोर्ट

दुबई में 2025 के पहले छह महीनों (जनवरी से जून) में 3,600 से ज्यादा लोगों ने इस्लाम कबूला है। यह काम मोहम्मद बिन राशिद सेंटर फॉर इस्लामिक कल्चर के जरिए हुआ, जो कि दुबई की सरकारी संस्था इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज डिपार्टमेंट (IACAD) के अधीन है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चौंकाने वाली जानकारी दुबई सरकार की एक अहम संस्था IACAD ने जारी की है। इस संख्या के साथ ही सैकड़ों लोग इस्लाम से जुड़े एजुकेशनल और जागरूकता कार्यक्रमों में भी शामिल हुए हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य मकसद इस्लाम मजहब के बारे में और विचारों को बेहतर ढंग से समझाना है।

IACAD: कौन सी संस्था है और इसका उद्देश्य क्या है?

IACAD यानी इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज डिपार्टमेंट दुबई सरकार का एक विभाग है, जो वहाँ पर इस्लाम से जुड़े सभी कामों की देखरेख करता है। इसकी स्थापना 1969 में हुई थी, जिसका मकसद पूरे दुबई में मजहबी जागरुकता और इस्लामिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।

IACAD यानी इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज़ डिपार्टमेंट एक सरकारी संस्था है, जो इस्लाम मज़हब से जुड़ी तमाम गतिविधियों को संभालती है। इसका काम सिर्फ कुरान बाँटना, मस्जिदों की देखरेख करना या इस्लामी शिक्षकों को लाइसेंस देना ही नहीं है, बल्कि यह संस्था इस्लाम की सीखों को दुनिया के सामने पेश करने का भी काम करती है।

IACAD का मानना है कि इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जो इल्म (ज्ञान), सहनशीलता (सबर), और आपसी बातचीत (मशवरा) को बढ़ावा देता है। संस्था चाहती है कि दुनिया को इस्लाम की नरम और समझदारी वाली तस्वीर दिखे।

इसलिए वो न सिर्फ मजहबी तालीम देती है, बल्कि लोगों को इस्लामी तहज़ीब यानी इस्लामिक तौर-तरीकों से भी जोड़ने की कोशिश करती है। IACAD उन लोगों से भी बात करती है जो इस्लाम को जानना या समझना चाहते हैं। चाहे वो मुस्लिम हों या गैर-मुस्लिम। IACAD संस्था कोर्सों और इंटरएक्टिव सेशन्स के जरिए इस्लाम की बातों को लोगों तक पहुँचाने का काम करती है।

IACAD का दावा है कि वह इस्लामी तालीम और अदब (संस्कार) के जरिए अलग-अलग समाजों और सोच वाले लोगों के बीच पुल बनाता है। इस तरह का काम वह मोहम्मद बिन राशिद सेंटर फॉर इस्लामिक कल्चर के जरिए करता है। यहाँ ऐसे लोग आते हैं जो इस्लाम अपनाना चाहते हैं या उसके बारे में सीखना चाहते हैं।

IACAD कैसे काम करती है और इसकी क्या जिम्मेदारियाँ हैं?

IACAD की जिम्मेदारियाँ बहुत विस्तृत हैं और यह कई तरीकों से अपने उद्देश्यों को पूरा करती है। यहाँ विस्तार से बताया गया है कि यह संस्था क्या-क्या काम करती है।

फतवा जारी करना: IACAD संस्था लोगों को मजहबी मामलों में मार्गदर्शन देती है और उनके सवालों का जवाब फतवा के रूप में देती है। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है, ताकि लोग आसानी से अपने सवालों का हल पा सकें।

कुरान और इस्लामिक साहित्य का वितरण: यह संस्था कुरान और अन्य इस्लामिक किताबों को छापती है और लोगों के बीच बाँटती है। इसका उद्देश्य इस्लामिक ज्ञान को लोगों तक पहुँचाना है।

हज और उमराह का प्रबंधन: IACAD संस्था हज और उमराह करने वालों की मदद करता है। यह संस्था सफर की पूरी योजना बनाती है और लोगों को रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) करवाने में भी सहायता करती है। ताकि जो लोग मक्का-मदीना जाना चाहते हैं, उनका सफर आराम से और सही तरीके से हो सके।

मस्जिदों की देखरेख: दुबई की सभी मस्जिदों की जिम्मेदारी IACAD की होती है। यह संस्था देखती है कि मस्जिदों में नमाज और दूसरी इबादतें ठीक से हों। साथ ही यह भी ध्यान रखती है कि मस्जिद का माहौल शांत और लोगों के लिए अच्छा बना रहे।

ऑनलाइन सेवाएँ: IACAD संस्था तकनीक का इस्तेमाल करके अपनी वेबसाइट पर लोगों के लिए कई सुविधाएँ देती है। जैसे- (1) लोग अपने मजहबी सवाल ऑनलाइन पूछ सकते हैं। (2) नए मुस्लिम लोगों को इस्लाम समझाने के लिए गाइड मिलती है। (3) दुबई में कहाँ-कहाँ मस्जिदें हैं, उसकी पूरी लिस्ट मिलती है। (4) हर दिन की नमाज का सही समय पता चलता है। (5) साल भर की इस्लामिक छुट्टियों की जानकारी भी मिलती है।

निशाने पर कौन लोग हैं और कितने लोग अपना धर्म बदल चुके हैं?

IACAD संस्था का मुख्य उद्देश्य वो लोग है, जो दुबई में रहते हैं और इस्लाम मजहब को जानना या समझना चाहते हैं। इसमें न सिर्फ दुबई के नागरिक, बल्कि विदेशों से आए लोग भी शामिल हैं। यह संस्था उन लोगों को खासतौर पर निशाना बनाती है, जिन्होंने नया-नया इस्लाम कबूला है।

दिए गए आँकड़ों के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में 3,600 से ज़्यादा लोगों ने इस्लाम कबूल किया। रिपोर्ट में ये तो नहीं बताया गया कि ये लोग पहले किस धर्म के थे, लेकिन ये ज़रूर कहा गया है कि वे अलग-अलग देशों और सभ्यताओं से आए थे।

धर्म परिवर्तन के अलावा, IACAD संस्था ने ऐसे शैक्षिक कोर्स शुरू किए हैं जिनमें इस्लाम के बारे में गहराई से सिखाया जाता है। इनमें 1,300 से ज्यादा लोगों ने दाखिला लिया। इन कोर्सों में इस्लाम के रोजमर्रा के तौर-तरीके, नियम और उसूल समझाए जाते हैं।

IACAD ने कुल 47 जागरुकता वाले ऐसे कोर्स कराए, जिनमें 1,400 से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। इनका मकसद था कि लोग इस्लामिक सोच और मान्यताओं को सही तरीके से समझ सकें। ये कोर्स इस्लाम की तालीम और समझ बढ़ाने के लिए चलाए जाते हैं।

शिक्षा में ‘सस्टेनेबल नॉलेज रूम’ तकनीक का इस्तेमाल

IACAD संस्था ने इस्लाम मजहब की शिक्षा को आधुनिक और ज़्यादा आकर्षक बनाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया है। ‘सस्टेनेबल नॉलेज रूम’ एक ऐसा ही प्रोजेक्ट है, जो मोहम्मद बिन राशिद सेंटर फॉर इस्लामिक कल्चर में मौजूद है।

यह एक 360-डिग्री का वर्चुअल क्लासरूम है, जहाँ लोग इंटरैक्टिव तरीके से इस्लाम के बारे में सीखते हैं। यह तकनीक शिक्षा को एक वास्तविकता में बदल देती है। इससे लोग इस्लाम से जुड़ी जानकारी को ज़्यादा आसानी से समझ पाते हैं। इस तकनीक से 190 से ज़्यादा लोगों ने अपना मजहब बदला है। इस रूम का इस्तेमाल बच्चों और बड़ों दोनों पर किया जाता है।

₹61000 में इमाम अकबर अली ने खरीदा अवैध पिस्टल, पैसे लेकर डेविड सोनी ने थमा दिया तमंचा: ठगे जाने से दुखी होकर पहुँचा पुलिस के पास तो खुली गैंग की पोल, 5 गिरफ्तार

यूपी के इटावा में अवैध असलहा की सौदेबाजी करते पुलिस ने मस्जिद के इमाम अकबर अली समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से तीन तमंचे, एक बाइक और एक मोबाइल बरामद किए गए हैं।

मुरादाबाद का रहने वाला है इमाम अकबर अली

पकड़े गए आरोपितों में इमाम अकबर अली के अलावा डेविड सोनी, सूरज उर्फ रुद्रा, अरविंद और एकलव्य शर्मा का नाम शामिल है। अकबर अली मुरादाबाद का रहने वाला है और सैफई के कुम्हावर की मस्जिद में इमाम है। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया है कि उसे जान का खतरा है। गाँव के कुछ लोग और ससुराल पक्ष से उसे जान से मारने की धमकी दी है। इसलिए उसने 2 अगस्त को 61 हजार रुपए में पिस्टल का सौदा किया था, लेकिन उसे तमंचा दिया जा रहा था। इसको लेकर उसने सिविल लाइन थाने में ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

इस बीच पुलिस को सूचना मिली कि रेलवे स्टेशन के पास मौजूद मजार में कुछ लोग अवैध तरीके से असलहों की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस वहाँ पहुँची और 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

अवैध असलहे की खरीद-फरोख्त

पुलिस ने जाँच में पाया कि इमाम अकबर अली अवैध तरीके से पिस्टल खरीद रहा था। उसने आरोपी डेविड सोनी के साथ सौदा किया था। डेविड सोनी पर हत्या की कोशिश, डकैती, गैंगस्टर और आर्म्स एक्ट के तहत कई मामले दर्ज हैं। पुलिस ने डेविड के तीन दोस्तों को भी गिरफ्तार किया। इनकी तलाशी के दौरान दो तमंचे, तीन हजार रुपए और एक मोबाइल बरामद किया गया। जबकि इमाम केपास से एक तमंचा और दो कारतूस बरामद किया गया है।

स्थानीय सीओ सिटी अभय नारायण राय के मुताबिक पूछताछ में चारों ने माना है कि अकबर अली ने पिस्टल खरीदने के लिए उन लोगों को 61 हजार रुपए दिए थे। पुलिस ने अब ठगी की जगह आर्म्स एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कर लिया है। अकबर अली समेत सभी को जेल भेज दिया गया है।

सोशल मीडिया पर महिलाओं को धमकाने वालों के खिलाफ सख्त कानून की जरूरत, अभी सिर्फ जमानती धाराएँ: MP हाई कोर्ट ने जताई निराशा, आरोपित को दी अग्रिम जमानत

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि सोशल मीडिया पर महिलाओं को धमकाने या अश्लील मैसेज भेजने वालों के खिलाफ सख्त कानून की कमी है। कोर्ट ने एक मामले में आरोपित को अग्रिम जमानत दे दी, जिसमें उसने पीड़िता को धमकी भरे संदेश भेजे थे।

कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर महिलाओं को अश्लील या धमकी भरे संदेश भेजने जैसे गंभीर मामलों में भी आरोपित पर केवल जमानती धाराएँ लगाई जाती हैं। कोर्ट का कहना है कि ऐसे मामलों के लिए अलग से कोई सख्त कानून नहीं बनाया गया है।

जानकारी के अनुसार, मामले में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घिनौनी और मानसिक रूप से परेशान करने वाली हरकतों के बावजूद आरोपित पर केवल जमानती धाराएँ लगाई जाती हैं। ऐसे मामलों की शिकार महिलाएँ, विशेष रूप से युवा लड़कियाँ असुरक्षित महसूस करती हैं और उन्हें राज्य या कोर्ट से भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती।”

क्या है मामला?

आरोपित और पीड़िता की छह साल पहले सगाई हुई थी, लेकिन बाद में वह टूट गई। सगाई टूटने के बाद आरोपित ने पीड़िता को सोशल मीडिया  पर लगातार परेशान करना शुरू कर दिया। उसने धमकी भरे और डराने वाले संदेश पोस्ट किए, जैसे “तू चाहे शादी कर ले, मैं तेरी शादी बर्बाद कर दूँगा, ये मेरा वादा है। मुझे केस करवाना है अपने ऊपर… तू सोचती है कि मुझे छोड़ कर चैन से जी लेगी, ऐसा नहीं होगा। मुझे जेल जाना ही है तो 10 दिन चला जाऊँगा, फिर क्या… मैं तेरी शादी नहीं होने दूँगा, चाहे कुछ भी हो जाए।”

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 183 के तहत पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की धमकियों की वजह से उसकी एक और सगाई टूट गई। उसे कॉलेज जाना भी छोड़ना पड़ा, क्योंकि आरोपित के संदेश उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे।

कोर्ट की टिप्पणी

रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने माना कि आरोपित के खिलाफ जो धाराएँ लगाई गई हैं (जैसे पीछा करना और डराना), वे जमानती हैं, जबकि ऐसे मामलों के लिए अलग और सख्त कानून होने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराधियों को रोकने के लिए और महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए विधायिका को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

₹5 लाख के लिए अब्बू ने नाबालिग बेटी को बेचा, 50 साल के अधेड़ से करा दिया निकाह: जबरन संबंध बनाने के दौरान भागी पीड़ित, राजस्थान के बीकानेर में 11 के खिलाफ केस

राजस्थान के बीकानेर में एक व्यक्ति ने 5 लाख रुपए में 15 साल की नाबालिग बेटी को बेच दिया। इतना ही नहीं उसने जबरन 50 साल के आदमी से उसका निकाह भी करवा दिया। लड़की की अम्मी ने 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मामला खाजूवाला थाना क्षेत्र का है। नाबालिग की अम्मी ने बताया कि उनकी 15 साल की बेटी का निकाह 50 साल की उम्र के शख्स से करने का प्रस्ताव आया था, लेकिन उसने इंकार कर दिया था। इसके बावजूद शौहर और बेटा इस निकाह के लिए लगातार दबाव बना रहे थे।

उसने बताया कि 6 अगस्त 2025 को शौहर के साथ कुछ लोग आए, जिन्होंने उसकी बेटी को धमकाया। इसके बाद वे जबरन बेटी को अपने साथ ले गए, शौहर और बेटा भी उन लोगों के साथ ही गए।

उन लोगों ने 8 अगस्त तक नाबालिग को एक घर में बंधक बनाकर रखा। 9 अगस्त को उसे नशीला पेय पिलाकर उसके घर वापस ले आए। उसी रात वे सभी एक मौलवी के साथ आए और निकाह कराने लगे।

लड़की की अम्मी ने विरोध किया तो शौहर और बेटे ने बताया कि 5 लाख में सौदा हुआ है, इसलिए निकाह तो जरूर होगा। निकाह के बाद उसकी अम्मी को कमरे में बंद कर वे नाबालिग को साथ ले गए। 50 साल के आरोपित ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, जिसके बाद पीड़ित किशोरी किसी तरह उसके चंगुल से भागकर अपने घर आ गई।

नाबालिग की अम्मी ने शौहर, बेटे और निकाह करने वाले 50 साल के व्यक्ति सहित 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। थानाधिकारी सुरेंद्र कुमार प्रजापत ने बताया कि पॉक्सो एक्ट और बाल विवाह प्रतिषेध (2006) की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। पीड़िता के बयान के बाद आगे की जाँच की जाएगी।

गणेश झाँकी पर नहीं लगाई फोटो तो गुर्गों संग कर लिया अगवा, प्रताड़ित कर वसूले ₹50000: भोपाल गैंग के लीडर शारिक मछली के खिलाफ दर्ज हुई एक और FIR

ड्रग तस्करी रैकेट चलाने वाला भोपाल का यासीन मछली और उसके चाचा सारिक मछली ने हिंदू पर अत्याचार किया। हिंदू की जमीन को अतिक्रमण बताकर ढहा दिया। जहाँ रेव पार्टियाँ होती थी, उसी फार्महाउस में ले जाकर बँधकर बनाया। यहाँ तक की झूठे मामले में FIR भी करवा दी। अब पीड़ित राजेश तिवारी ने सामने आकर आपबीती सुनाई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, राजेश तिवारी ने बताया कि साल 2021 में सारिक ने गणेश झाँकी में अपने और उसके करीबी मंत्री का बैनर लगाने का दबाव बनाया था। राजेश ने वह धार्मिक कार्य में राजनीतिक व्यक्ति के बैनर नहीं लगाते हैं। तभी से सारिक ने उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

दुकान को तुड़वाया, मंदिर बनाकर कब्जे से बचाई

राजेश तिवारी बताते हैं कि सारिक मछली उनकी अशोका गार्डन इलाके में बनी दुकान पर कब्जा करना चाहता था। सारिक ने दुकान को अतिक्रमण बताकर तुड़वा दिया। राजेश ने अपनी जमीन बचाने के लिए वहाँ मंदिर बनवा दिया, जिसके बाद सारिक ने हिंदू स्थल होने के चलते जमीन को छोड़ दिया।

इस बात का बदला लेने के लिए 29 सितंबर 2021 को सारिक और उसके तीन गुर्गे लाल रंग की थार में आए और बंदूक की नोक पर राजेश तिवारी को अगवा कर ले गए। राजेश को उसी हथाईखेड़ के फार्महाउस ले जाया गया, जहाँ रेव पार्टियाँ आयोजित की जाती थीं। यहाँ अलग-अलग कमरों में लड़कियों को बंधक बनाके रखा गया था।

पुलिस की जाँच में भी सामने आया था फार्महाउस में लड़कियों को नशा देकर दुष्कर्म किया जाता था। राजेश तिवारी के साथ भी इसी फार्महाउस में लूट मचाई गई।

‘पंडित’ राजेश तिवारी पर बकरी खरीदने का आरोप लगाकर फँसाया

राजेश तिवारी को फार्महाउस में 16 घंटे तक बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया। इस दौरान सारिक ने राजेश से ₹50 हजार रुपए भी वसूल लिए। बाद में इन पैसों के जरिए बेबुनियाद आरोप में फँसाया गया।

राजेश बताते हैं कि सारिक ने जिस व्यक्ति के मोबाइल में ₹50 हजार ट्रांसफर करवाए थे, उसने पुलिस के सामने झूठा बयान दिया। उस व्यक्ति ने कहा कि बकरा खरीदने के बदले राजेश तिवारी से यह पैसे लिए गए हैं। राजेश कहते हैं कि वह पंडित आदमी हैं और इस झूठे आरोप से उनके परिवार की काफी बदनामी हुई।

इतना ही नहीं सारिक ने किसी मंत्री का संरक्षण लेकर राजेश तिवारी के खिलाफ रेप और हत्या के झूठे आरोप भी लगाए। इसके चलते राजेश तिवारी को अपनी नौकरी से निकाल दिया गया। राजेश ने बताया कि हत्या मामले में फरियादी सारिक का कोई करीबी है।

वहीं, जब सारिक के खिलाफ शिकायत करने राजेश तिवारी थाने पहुँचे, तो पुलिस ने 15 दिन तक FIR दर्ज नहीं की थी।

यासीन मछली पर हिंदू युवती के रेप में FIR दर्ज

भोपाल में ड्रग तस्करी के आरोप में पकड़े गए यासीन मछली और चाचा सारिक मछली ने सालों से लोगों पर अत्याचार किए। युवाओं को नशे में धखेलने का काम करते थे। इससे पहले एक हिंदू युवती ने भी यासीन मछली पर रेप का मुकदमा दर्ज करवाया था।

युवती ने शिकायत में बताया था कि करीब एक साल पहले एक पब में यासीन से मुलाकात हुई थी। यासीन ने युवती से दोस्ती की। दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लग गईं। यासीन ने युवती को शादी का झाँसा देकर फाइव स्टार में बुलाया और रेप किया।

युवाओं को रेव पार्टी में बुलाकर नशे की लत डालते

यासीन मछली भोपाल में युवाओं को टारगेट कर रेव पार्टी में बुलाता था। इस काम के लिए कई पब और लॉन्ज अड्डा बने हुए थे। पार्टी में आने वाली हिन्दू लड़कियों को ड्रग्स की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल करता था। इन लड़कियों को प्रेम जाल में फँसा कर उनका रेप करता और फिर ब्लैकमेल करता था। रेव पार्टियों से जुड़े कई वीडियो भी पुलिस के हाथ लगे थे।

वह शहर के बाहरी इलाकों में रेव पार्टी आयोजित करता था। इन पार्टियों में एंट्री के लिए 10 से 25 हजार रुपए वसूले जाते थे। पार्टी में ड्रग्स के लिए अलग से रकम ऐंठी जाती थी। इस पूरे काले कारोबार में यासीन मछली और उसका परिवार शामिल था।

यासीन के परिवार ने 55 साल में अवैध काम कर खड़ा किया ‘साम्राज्य’

ड्रग तस्कर यासीन मछली के परिवार ने 55 साल में अवैध कारोबार के जरिए बड़ा साम्राज्य खड़ा किया। यासीन का परिवार 1970 से पहले बुधवारा में रहता था और मछलियों की दलाली करता था। इसके बाद हथाईखेड़ा आया और यहाँ मछली पालने का ठेका लिया।

1980 में राजनीतिक पार्टियों की मदद कर इलाके में दबदबा बनाया। राजनीतिक मदद से ही मुस्लिमों की बस्ती बसा ली और पत्थर खदानों ने अवैध खनन शुरू किया।

जानें पूरा मामला

18 जुलाई 2025 को भोपाल के गोविंदपुरा से सैफुद्दीन और आशू उर्फ शाहरुख को गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से ₹3 लाख और बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद की गई। इन्हीं की निशानदेही पर ड्रग तस्करी का सरगना शाहवर मछली और उसका भतीजा यासीन मछली को क्राइम ब्रांच ने दबोचा। दोनों के पास से 3 ग्राम एमडी ड्रग और एक देशी पिस्टल बरामद की गई थी।

जाँच में सामने आया कि यासीन और उसके चाचा शाहवर ड्रग्स तस्करी का धंधा करते थे। मुंबई, राजस्थान और पंजाब से चरस और अन्य ड्रग्स लाते थे। फिर इन्हें शहर के पब, लाउंज और क्लब में पार्टियों में बेचा करते थे। ड्रग्स की डिलीवरी के लिए हिंदू लड़कियों को इस्तेमाल किया जाता था।

युवाओं के लिए रेव पार्टी आयोजित कर उन्हें नशे की लत लगाते थे। ये दोनों हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण करते थे और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव भी बनाते थे।

‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सबसे पहले RSS स्वयंसेवक ने दिया था सर्वोच्च बलिदान, उमाकांत कड़िया को अंग्रेजों ने अहमदाबाद में मारी थी गोली: ‘अर्धसत्य’ कब तक बताता रहेगा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम?

15 अगस्त को भारत अपना 79वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस स्वतंत्रता की खातिर लाखों लोगों ने अपनी बलिदानी दी । कुछ क्रांतिकारियों के नाम इतिहास में दर्ज हैं, लेकिन कई ऐसे भी रहे जिन्हें भुला दिया गया। इनमें से एक नाम है उमाकांत कड़िया का।

महात्मा गाँधी के नेतृत्व में हुए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (Quit India Movement) की शुरुआत 8 अगस्त 1942 को हुई थी। इस आंदोलन का देशव्यापी असर हुआ और आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा मिली। इस आंदोलन के पहले नायक अहमदाबाद के उमाकांत कड़िया थे। वे स्वयं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक थे।

भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत

जब यह आंदोलन शुरू हुआ, उस वक्त एक तरफ दुनिया में दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था और दूसरी तरफ भारत में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष तेज हो गया था। कॉन्ग्रेस ने अंग्रेजों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। ब्रिटिश सरकार ने जवाब में कॉन्ग्रेस के सभी बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया और आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया।

8 अगस्त को गाँधीजी द्वारा ‘भारत छोड़ो’ का नारा दिए जाने के अगले ही दिन, यानी 9 अगस्त 1942 को, अहमदाबाद में भी विरोध शुरू हो गया। अंग्रेजों ने यहाँ भी कॉन्ग्रेस के नेताओं की गिरफ्तारियाँ शुरू कर दीं, लेकिन प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे थे। जगह-जगह जुलूस और रैलियाँ निकलने लगीं। अंग्रेजों ने आंदोलन को दबाने के लिए क्रान्तिकारियों पर गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं।

पहले बलिदानी: उमाकांत कड़िया

उमाकांत मोतीराम कड़िया, अहमदाबाद के दरियापुर इलाके के रहने वाले थे। आंदोलन के समय उनकी उम्र सिर्फ 21 साल थी। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक थे और शाखा के मुख्य शिक्षक भी थे। संघ के स्वयंसेवकों के अनुसार, उमाकांत संघ की विचारधारा को लेकर पूरी तरह समर्पित थे और शाखा के कार्यों में सक्रिय रहते थे।

9 अगस्त को जब प्रदर्शन शुरू हुआ तो उमाकांत सबसे आगे खड़े थे। भीड़ में किसी ने उन्हें पीछे हटने को कहा, लेकिन वे डटे रहे। एक युवा में इतनी निडरता देख, एक अंग्रेज ने उन पर गोली चलाई, जो सीधे उनके माथे पर लगी और वहीं उनकी मौत हो गई। इस तरह उमाकांत भारत छोड़ो आंदोलन में वीरगति पाने वाले पहले युवक बने।

अहमदाबाद के खाडिया इलाके में जहाँ यह घटना हुई, वहाँ बाद में एक स्मारक बनाया गया। उस पर लिखा है कि उमाकांत मोतीराम कड़िया ने यहीं शहादत प्राप्त की थी। वे इस आंदोलन के प्रथम बलिदानी थे।

उमाकांत के बलिदान के अगले ही दिन, 10 अगस्त को लॉ कॉलेज के छात्रों ने एक रैली निकाली। जब यह रैली गुजरात कॉलेज पहुँची, तो और छात्र भी जुड़ गए। अंग्रेजों ने रैली को रोकने के लिए लाठीचार्ज और फिर गोलीबारी की।

इस दौरान विनोद किनारीवाला नाम के एक युवा ने भारतीय तिरंगा फहराने की कोशिश की और एक ब्रिटिश अफसर ने उन्हें गोली मार दी। विनोद ने भी इस आंदोलन में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

उमाकांत कड़िया जैसे स्वयंसेवकों का बलिदान यह सिद्ध करता है कि RSS ने भारत की आजादी में अहम भूमिका निभाई थी। हालाँकि अक्सर कॉन्ग्रेस और वामपंथी विचारधारा द्वारा इसे नजरअंदाज ही किया जाता रहा है।

ऐसे ही कई स्वयंसेवकों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और उमाकांत जैसे कई स्वयंसेवकों ने देश प्रेम को प्राणों से भी ऊपर रखा। उमाकांत कड़िया 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में देश के पहले बलिदानी थे, जिन्हें कॉन्ग्रेस ने नजरअंदाज किया। यहाँ तक कि इतिहास में भी उनका नाम देश के पहले बलिदानी नहीं बल्कि गुजरात के पहले बलिदानी के रूप में लिखा गया।

राहुल गाँधी की ‘जान को खतरा’ मामले में नया ड्रामा, अब वकील के जरिए ही अर्जी ली जाएगी वापस: वीर सावरकर पर कई दफे मुँह की खा चुकी कॉन्ग्रेस का नया पैंतरा भी फेल

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सावरकर मानहानि केस में पुणे की अदालत में उनके वकील ने उनकी जान को खतरा बताते हुए एक अर्जी दायर की थी। इस अर्जी ने राजनीतिक गलियारों में तूफान मचा दिया। लेकिन अब खबर है कि राहुल ने इस अर्जी से खुद को अलग कर लिया है।

कॉन्ग्रेस की आईटी सेल प्रमुख सुप्रिया सुनेत ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि ये अर्जी बिना राहुल की सहमति के दायर की गई थी और वो इस बात से बेहद नाराज हैं। गुरुवार को उनके वकील इस बयान को कोर्ट से वापस लेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने कॉन्ग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा विवाद विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ा है। मार्च 2023 में लंदन में एक भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने सावरकर की रचनाओं का हवाला देते हुए दावा किया था कि सावरकर ने अपनी किताब में लिखा था कि उन्होंने और उनके पाँच-छह दोस्तों ने एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी और उन्हें इस बात पर खुशी हुई थी।

इस बयान को सावरकर के वंशज सत्यकी सावरकर ने अपमानजनक माना और राहुल के खिलाफ पुणे की स्पेशल MP-MLA अदालत में मानहानि का केस दर्ज कराया था।

इस बीच, बुधवार (13 अगस्त 2025) को राहुल के वकील मिलिंद दत्तात्रय पवार ने कोर्ट में एक अर्जी दायर की, जिसमें दावा किया गया कि सत्यकी सावरकर की वंशावली को देखते हुए राहुल की जान को खतरा है। अर्जी में कहा गया कि सत्यकी, नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे यानी महात्मा गाँधी की हत्या के मुख्य आरोपितों के मातृ पक्ष से जुड़े हैं।

इसके अलावा, सत्यकी का सावरकर से भी संबंध होने का दावा किया गया। अर्जी में ये भी जिक्र था कि सावरकर की विचारधारा और उनके अनुयायियों की हिंसक प्रवृत्तियों के इतिहास को देखते हुए राहुल को नुकसान पहुँचाए जाने या गलत फँसाए जाने का डर है।

अर्जी में और क्या था?

वकील ने अर्जी में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने हाल ही में संसद में “वोट चोर सरकार” का नारा दिया और चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ सबूत पेश किए। इसके बाद उनकी राजनीतिक दुश्मनी बढ़ गई।

अर्जी में दो बीजेपी नेताओं की धमकियों का जिक्र था। केंद्रीय मंत्री रवीनीत सिंह बिट्टू ने राहुल को ‘देश का नंबर वन आतंकवादी’ कहा था, जबकि बीजेपी नेता तरविंदर सिंह मारवाह ने खुलेआम धमकी दी कि अगर राहुल ‘सही व्यवहार’ नहीं करेंगे, तो उनका अंजाम उनकी दादी इंदिरा गाँधी जैसा हो सकता है।

अर्जी में ये भी कहा गया कि महात्मा गाँधी की हत्या कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी, जो एक खास विचारधारा से जुड़ी थी। वकील ने कोर्ट से माँग की कि राहुल की सुरक्षा के लिए ‘निवारक उपाय’ किए जाएँ।

अर्जी के जरिए कहा गया कि ये कदम न केवल राहुल की जान बचाने के लिए जरूरी है, बल्कि ये राज्य का संवैधानिक कर्तव्य भी है। अर्जी में ये भी जिक्र था कि सत्यकी सावरकर अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर सकते हैं, जिससे राहुल को निशाना बनाया जा सकता है।

राहुल का यू-टर्न

लेकिन इस अर्जी के कुछ ही घंटों बाद कॉन्ग्रेस की ओर से सुप्रिया सुनेत का बयान आया, जिसने सबको हैरान कर दिया।

सुप्रिया श्रीनेता ने एक्स पर लिखा कि वकील ने राहुल से बिना पूछे ये अर्जी दायर की थी। राहुल ने इस पर सख्त आपत्ति जताई और इसे वापस लेने का फैसला किया। सुप्रिया ने वकील के प्रेस नोट को भी शेयर किया, जिसमें वकील ने माना कि उन्होंने राहुल की सहमति के बिना ये बयान कोर्ट में दिया। सुप्रिया ने लिखा, “राहुल गाँधी ने इस अर्जी के कंटेंट से असहमति जताई है। उनके वकील गुरुवार को इसे कोर्ट से वापस लेंगे।”

पहले भी कर चुके हैं सावरकर पर विवादित बयानबाजी

ये पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी ने सावरकर को लेकर विवादित बयान दिए हों। 17 नवंबर 2022 को महाराष्ट्र के अकोला में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल ने एक रैली में सावरकर पर निशाना साधा था। उन्होंने एक चिट्ठी दिखाते हुए कहा कि सावरकर ने अंग्रेजों को लिखा था कि वो उनका नौकर बने रहना चाहते हैं और डर के मारे माफी माँगी थी।

राहुल ने कहा, “गाँधी, नेहरू और पटेल ने सालों तक जेल में समय बिताया, लेकिन उन्होंने कभी ऐसी चिट्ठी पर साइन नहीं किए। सावरकर ने ऐसा करके गाँधी और पटेल को धोखा दिया।”

इस बयान के बाद लखनऊ के वकील नृपेंद्र पांडे ने 14 जून 2023 को राहुल के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया। पांडे ने आरोप लगाया कि राहुल ने सावरकर को ‘अंग्रेजों का नौकर’ और ‘पेंशनभोगी’ कहकर समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की।

सुप्रीम कोर्ट से लग चुकी है फटकार

सावरकर पर राहुल के बयानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी 26 अप्रैल को उन्हें फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा, “हम स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ अनाप-शनाप बयानबाजी की इजाजत नहीं दे सकते। उन्होंने हमें आजादी दिलाई, और हम उनके साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं।” कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर राहुल ने भविष्य में ऐसा कोई बयान दिया, तो स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि, कोर्ट ने सावरकर मामले में राहुल के खिलाफ ट्रायल कोर्ट के समन पर रोक लगा दी थी।

कॉन्ग्रेस पर सवाल, नहीं चलेगा पुराना पैंतरा

इस पूरे घटनाक्रम ने कॉन्ग्रेस की रणनीति पर सवाल उठा दिए हैं। कुछ लोग इसे राहुल की छवि को चमकाने का हथकंडा बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर चर्चा गरम है कि पहले जान को खतरा बताकर सुर्खियाँ बटोरी गईं और अब अर्जी वापस लेकर नया ड्रामा रचा जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “कॉन्ग्रेस पहले डर का माहौल बनाती है, फिर सहानुभूति बटोरने के लिए अर्जी वापस लेती है। ये पुराना पैतरा अब नहीं चलेगा।”

अब सबकी नजर गुरुवार को पुणे कोर्ट की सुनवाई पर है। क्या वकील की अर्जी वाकई वापस ली जाएगी? और अगर हाँ, तो इसका सावरकर मानहानि केस पर क्या असर पड़ेगा? कॉन्ग्रेस की इस रणनीति का राजनीतिक फायदा होगा या नुकसान, ये भी देखने वाली बात होगी। फिलहाल, ये मामला कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कॉन्ग्रेसी राजनीति में ड्रामे और ट्विस्ट की कोई कमी नहीं है।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में इन्फ्लूएंसर संदीपा विर्क गिरफ्तार, ED ने छापेमारी कर पकड़ा: सोशल मीडिया पर चलाती है कॉन्ग्रेस प्रोपेगेंडा, राहुल गाँधी-रवीश कुमार की है फैन

इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर संदीपा विर्क को 40 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने गिरफ्तार किया है। उसने मनी लॉन्ड्रिंग के लिए फर्जी वेबसाइट बनाई थी। संदीपा विर्क को अक्सर सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार का समर्थन करते देखा गया है।

कौन हैं संदीपा विर्क

संदीपा सोशल मीडिया इन्फ्लएंसर हैं, जो इंस्टाग्राम पर 12 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनके इंस्टाग्राम आईडी के मुताबिक वह एक बिजनेसमैन और अभिनेत्री हैं। साथ ही hyboocare.com वेबसाइट की ऑनर हैं। मनी लॉन्ड्रिंग का मामले को लेकर 12 और 13 अगस्त को ईडी ने दिल्ली और मुंबई के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद 14 अगस्त को संदीपा को हिरासत में लिया गया।

पूछताछ के दौरान संदीपा ने कहा कि hyboocare.com वेबसाइट त्वचा की देखभाल से जुड़ी प्रोडक्ट को बेचने का प्लेटफॉर्म है। जबकि ईडी का कहना है कि ये वेबसाइट मनी लॉन्ड्रिंग के लिए मुखौटा है।

सेतुरमन और संदीपा के करीबी रिश्ते

संदीपा विर्क और अब बंद हो चुके रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व निदेशक अंगाराई नटराजन सेतुरमन के बीच काफी करीबी रिश्ता था। सेतुरमन के घर पर भी ईडी ने तलाशी ली थी, उस वक्त गैरकानूनी लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और फंड डायवर्जन समेत कई सबूत मिले थे, जिससे पता चलता है कि पर्सनल फायदे के लिए पैसों का दुरुपयोग किया गया।

ईडी की जाँच में सामने आया है कि 2018 में सेतुरमन को नियमों को ताक पर रख कर रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड ने 18 करोड़ रुपए का लोन दिया था। लोन का व्याज और मूलधन भी नहीं दिया गया। इसके बाद फिर 22 करोड़ रुपए का रिलायंस कैपिटल ने दिया। इसकी रकम अभी भी बकाया है।

पंजाब पुलिस ने इसको लेकर पहले एफआईआर दर्ज किया था। जिसके बाद पीएमएलए के तहत 12 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद ईडी ने जाँच शुरू की। इस दौरान एक व्यक्ति फारुख अली को पकड़ा गया जो खुद को संदीपा का मददगार बता रहा था। उसके बयान भी दर्ज किए गए।

वेबसाइट पर दिखाए गए प्रोडक्ट पर सवाल

संदीपा वर्क की वेबसाइट पर जो सौंदर्य उत्पाद बेचा जा रहा है। उसमें जो दावा किया जा रहा था वह उत्पाद में नहीं थे। एफडीए अप्रूवल भी फर्जी था और पोर्टल में कंज्यूमर रजिस्ट्रेशन का कोई ऑपशन नहीं था। ईडी का कहना है कि वेबसाइट की जाँच में पता चलता है कि इसके सोशल मीडिया, व्हाट्सअप नंबर निष्क्रिय हैं और पारदर्शिता का अभाव है। ये लोगों को गलत जानकारी देती है। ईडी इसकी जाँच भी कर रहा है।

इंटरनेशनल कोर्ट के जिस फैसले पर कूद रहा पाकिस्तान, उसकी भारत में कोई औकात नहीं: सिंधु-झेलम-चिनाब पर मोदी सरकार का फैसला ही आखिरी, समझें पूरी बात

पाकिस्तान के लोग सिंधु जल समझौते पर स्थाई मध्यस्थता अदालत (PCA) के फैसले को अपनी बड़ी जीत मानकर जश्न मना रहे हैं। शाहबाज शरीफ और आसिम मुनीर इसे भारत के खिलाफ कूटनीतिक कामयाबी बता रहे हैं, क्योंकि कोर्ट ने कहा कि भारत एकतरफा इस समझौते को नहीं रोक सकता।

पाकिस्तान का मानना है कि यह फैसला उनकी पानी की सुरक्षा को मजबूत करता है। वो न सिर्फ जश्न में डूबे हैं, बल्कि भारत को मिसाइल हमले जैसी गीदड़भभकियाँ भी दे रहे हैं, जबकि कुछ समय पहले ही वो ऑपरेशन सिंदूर में बुरी तरह से मार खाए हैं।

दरअसल, ये बात है सिंधु जल समझौते की, जिसे भारत ने अस्थाई रूप से रोक दिया है। इस समझौते के तहत सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी पाकिस्तान को मिलता है और अब स्थाई मध्यस्थता अदालत के फैसले को अपनी जीत बताकर पेश कर रहे हैं। हालाँकि भारत ने साफ कह दिया है कि इस फैसले का उसके लिए कोई मतलब नहीं है।

आखिर ये पूरा मामला क्या है और भारत क्यों इस कोर्ट के फैसले को नहीं मानता? इस बात को समझते हैं।

क्या है सिंधु जल समझौता?

सबसे पहले बात करते हैं कि ये सिंधु जल समझौता है क्या। 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से एक समझौता हुआ था, जिसे सिंधु जल समझौता कहते हैं। इसके तहत छह नदियों – सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज के पानी का बँटवारा हुआ। रावी, ब्यास और सतलुज का पूरा नियंत्रण भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का ज्यादातर पानी पाकिस्तान को देने का फैसला हुआ।

भारत को इन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का कुछ हद तक इस्तेमाल करने का हक मिला, जैसे बिजली बनाने के लिए, लेकिन पानी रोकने की इजाजत नहीं थी। इस समझौते की वजह से दोनों देशों के बीच पानी को लेकर बड़ा विवाद टलता रहा, भले ही 1965, 1971 और 1999 के युद्धों में तनाव रहा।

क्यों भड़का पाकिस्तान?

दरअसलस अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भाकत ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा कदम उठाया और सिंधु जल समझौते को अस्थाई रूप से रोक दिया। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, वह इस समझौते को मानने के लिए बाध्य नहीं है।

इसी के बाद भारत ने जम्मू-कश्मीर के सिंधु गाँव के पास चिनाब नदी पर नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की। पाकिस्तान को डर है कि इस प्रोजेक्ट से भारत इन नदियों का पानी रोक सकता है, जिससे उसकी खेती, बिजली और पीने के पानी की सप्लाई पर बुरा असर पड़ेगा।

पाकिस्तान की 80% खेती और 70% पानी की जरूरतें इन तीनों नदियों पर निर्भर हैं। लाहौर, कराची जैसे बड़े शहरों में पीने का पानी और टेक्सटाइल जैसे उद्योग, जो पाकिस्तान के 60% निर्यात का हिस्सा हैं, इन नदियों के पानी पर चलते हैं।

अगर पानी रुका, तो पाकिस्तान में खेती ठप हो सकती है, बिजली उत्पादन कम हो सकता है, और बड़े शहरों में पानी की किल्लत हो सकती है। यही वजह है कि पाकिस्तान बौखलाया हुआ है।

शाहबाज और मुनीर की गीदड़भभकी

पाकिस्तान के फौजी मुखिया जनरल आसिम मुनीर ने पहले बयान दिया था कि सिंधु जल समझौता उनके लिए ‘लक्ष्मण रेखा’ है और वे पानी के मसले पर कभी झुकेंगे नहीं। उन्होंने भारत पर बलूचिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। इसके बाद शाहबाज शरीफ ने भी भारत को धमकी दी कि “पाकिस्तान अपने हक का एक बूँद पानी भी नहीं छोड़ेगा।” मुनीर ने तो यहाँ तक कह दिया कि अगर भारत डैम बनाएगा, तो पाकिस्तान मिसाइल से उसे उड़ा देगा।

पाकिस्तान की ये बयानबाजी कोई नई नहीं है। वह अक्सर भारत को डराने की कोशिश करता है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगा। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत मई 2025 में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमला किया था, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के अड्डे तबाह हुए। इसके बाद पाकिस्तान ने सीजफायर की गुहार लगाई थी।

स्थाई मध्यस्थता अदालत का फैसला क्या?

पाकिस्तान अब स्थाई मध्यस्थता अदालत (Permanent Court of Arbitration – PCA) के एक फैसले का हवाला दे रहा है। 27 जून 2025 को हेग में स्थित इस कोर्ट ने कहा कि भारत का सिंधु जल समझौते को एकतरफा रोकना गलत है, क्योंकि इस समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह समझौता बाध्यकारी है और इसे एकतरफा निलंबित नहीं किया जा सकता। इस फैसले को पाकिस्तान अपनी जीत बता रहा है।

लेकिन भारत ने इस फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कोर्ट अवैध है, क्योंकि इसका गठन ही 1960 के समझौते का उल्लंघन करके किया गया। भारत ने कभी इस कोर्ट को मान्यता नहीं दी और न ही इसके पहले के फैसलों को स्वीकार किया। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, वह इस समझौते से जुड़े किसी दायित्व को नहीं मानेगा।

स्थाई मध्यस्थता अदालत क्या है?

स्थाई मध्यस्थता अदालत (PCA) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो 1899 में हेग, नीदरलैंड्स में स्थापित हुई थी। यह देशों, संगठनों और निजी पक्षों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थता और मंच प्रदान करती है। यह कोई पारंपरिक कोर्ट नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच है जो विवादों के लिए तटस्थ विशेषज्ञों की नियुक्ति करता है। इसका इस्तेमाल अक्सर अंतरराष्ट्रीय संधियों से जुड़े मामलों में होता है।

सिंधु जल समझौते में भी विवादों को सुलझाने के लिए एक तंत्र है, जिसमें तटस्थ विशेषज्ञ या मध्यस्थता अदालत शामिल हो सकती है। लेकिन भारत का कहना है कि PCA का गठन इस मामले में गलत तरीके से हुआ, क्योंकि पाकिस्तान ने एकतरफा इसे चुना, जबकि समझौते में दोनों पक्षों की सहमति जरूरी है। भारत ने इस कोर्ट की वैधता को ही नकार दिया है।

भारत ने विश्व बैंक की क्यों नहीं सुनी?

सिंधु जल समझौता विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुआ था, और इसमें विवादों को सुलझाने के लिए विश्व बैंक की भूमिका भी तय थी। लेकिन भारत ने हमेशा कहा है कि वह इस समझौते को तभी मानेगा, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।

साल 2016 में उरी हमले के बाद भी भारत ने इस समझौते की समीक्षा की बात की थी, लेकिन इसे रद्द नहीं किया। इस बार, पहलगाम हमले के बाद भारत ने साफ कर दिया कि वह विश्व बैंक या किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था के दबाव में नहीं आएगा।

भारत का तर्क है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है, जिसके चलते वह समझौते के नियमों का पालन करने का हक खो चुका है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि PCA का फैसला ‘पाकिस्तान की नौटंकी’ है, जिसका मकसद आतंकवाद से ध्यान हटाना है।

भारत के लिए इस फैसले का कोई महत्व क्यों नहीं?

भारत के लिए PCA के फैसले का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि भारत इस कोर्ट को मान्यता ही नहीं देता। भारत का कहना है कि यह कोर्ट गैरकानूनी तरीके से बनाया गया और इसका कोई भी फैसला भारत पर लागू नहीं होता। दूसरा, भारत ने साफ किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को प्राथमिकता देगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का अड्डा है, और वह ऐसी नौटंकी करके दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

इसके अलावा भारत का कहना है कि सिंधु जल समझौता 1969 की वियना संधि के तहत आता है, जिसमें किसी समझौते को एकतरफा खत्म करने के लिए ‘भौतिक उल्लंघन’ जैसे गंभीर आधार चाहिए। भारत का मानना है कि पाकिस्तान का आतंकवाद को समर्थन देना ऐसा ही उल्लंघन है।

बहरहाल, पाकिस्तान की बयानबाजी और PCA के फैसले को जीत बताने की कोशिश को भारत ने ‘फर्जी नौटंकी’ करार दिया है। भारत का कहना है कि वह अपने हितों और सुरक्षा को सबसे ऊपर रखेगा। अगर पाकिस्तान आतंकवाद बंद नहीं करता, तो भारत और सख्त कदम उठा सकता है।

बंगाल चुनावी हिंसा 2021 के दौरान रेप कर फरार हो गया था आरोपित मीर उस्मान अली, CBI ने गाजियाबाद की मस्जिद के पास से पकड़ा: SC ने दिया था पेश करने का आदेश

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक रेप मामले में फरार आरोपित मीर उस्मान अली को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार (12 अगस्त 2025) को यूपी के गाजियाबाद गिरफ्तार कर लिया।

CBI के मुताबिक, तकनीकी जानकारी और लगातार मेहनत के बाद मीर उस्मान अली उर्फ आरा गाजियाबाद के इलायचीपुर इलाके में एक मस्जिद के पास से पकड़ा गया। यह मामला 30 अगस्त 2021 को दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप था कि 4 मई 2021 को उस्मान अली ने पीड़िता के घर में घुसकर उसके साथ बलात्कार किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, CBI ने 5 मई 2022 को तमलुक, पुरबा मेदिनीपुर की विशेष अदालत (SC/ST POA एक्ट) में उस्मान अली के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। 25 सितंबर 2024 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी, लेकिन CBI ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में नोटिस भेजने के बावजूद न तो उस्मान और न ही उसका वकील पेश हुआ। इसके बाद 2 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उस्मान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया और CBI को उसे 13 अगस्त को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया। CBI ने आखिरकार उसे पकड़ लिया और उसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया।

CBI ने बताया कि उस्मान अली, जिसे मीर उस्मान अली या आरा के नाम से भी जाना जाता है.. वो लंबे समय से फरार था। हाल ही में CBI ने 2021 की चुनाव बाद हिंसा के मामलों में सक्रियता दिखाई है। जुलाई में तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक विधायक और कोलकाता नगर निगम के दो पार्षदों को इस हिंसा से जुड़े एक मामले में आरोपित बनाया गया था। हालाँकि, तृणमूल कॉन्ग्रेस का कहना है कि यह बीजेपी की साजिश है, ताकि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उनकी पार्टी पर दबाव बनाया जाए।