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इतिहास में दर्ज होगा ‘ऑपरेशन सिंदूर’, यह भारतीय सेना-स्वदेशी हथियारों के पराक्रम का प्रतीक: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का देश को संदेश, कहा- भारत को 2047 तक AI हब बनाएँ

भारत 15 अगस्त 2025 को अपना 79वां स्वतंत्रता मनाएगा। स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बधाई देते हुए इसे गर्व का क्षण बताया है। साथ ही, राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ को याद करते हुए विभाजन के दौरान हुई हिंसा का शिकार लोगों को श्रद्धांजलि भी दी है।

भारत लोकतंत्र की जननी है: राष्ट्रपति मुर्मू

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा, “स्वाधीनता प्राप्त करने के बाद हम एक ऐसे लोकतंत्र के मार्ग पर आगे बढ़े जिसमें सभी वयस्कों को मतदान का अधिकार था। लोकतंत्र को अपनाना हमारे प्राचीन लोकतांत्रिक मूल्यों की सहज अभिव्यक्ति थी। भारत-भूमि, विश्व के प्राचीनतम गणराज्यों की धरती रही है। इसे लोकतंत्र की जननी कहना उचित है। संविधान की आधारशिला पर, हमारे लोकतंत्र का भवन निर्मित हुआ है। हमारे लिए हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सर्वोपरि हैं।”

उन्होंने कहा, “78 वर्षों में हमने सभी क्षेत्रों में असाधारण प्रगति की है। भारत ने आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के मार्ग पर काफी दूरी तय कर ली है और प्रबल आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता जा रहा है।”

देश में अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत: राष्ट्रपति मुर्मू

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “पिछले वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत की सकल-घरेलू-उत्पाद-वृद्धि-दर के साथ भारत, दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में व्याप्त समस्याओं के बावजूद, घरेलू मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बना हुआ है। निर्यात बढ़ रहा है। सभी प्रमुख संकेतक, अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को दर्शा रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “सुशासन के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। सरकार, गरीबों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। आय की असमानता कम हो रही है। क्षेत्रीय असमानताएं भी कम हो रही हैं।”

कश्मीर में रेल संपर्क पर क्या बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू?

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कश्मीर घाटी के रेल संपर्क पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा, “हमने भारतमाला परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया है। रेलवे ने भी नवाचार को प्रोत्साहन दिया है तथा नवीनतम टेक्नोलॉजी से युक्त नए तरह की रेलगाड़ियों और डिब्बों का उपयोग किया जाने लगा है।”

उन्होंने आगे कहा, “कश्मीर घाटी में रेल-संपर्क की शुरुआत करना एक प्रमुख उपलब्धि है। शेष भारत के साथ घाटी का रेल-संपर्क उस क्षेत्र में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगा और नई आर्थिक संभावनाओं के द्वार खोलेगा। कश्मीर में इंजीनियरिंग की यह असाधारण उपलब्धि एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।”

मेट्रो, जल जीवन मिशन और आयुष्मान भारत का राष्ट्रपति मुर्मू ने किया जिक्र

राष्ट्रपति मुर्मू ने देश को संबोधित करते हुए मेट्रो रेल सुविधाओं के विस्तार से लेकर 4G कनेक्टिविटी पर बात की है। उन्होंने कहा, “सरकार ने मेट्रो रेल सुविधाओं का विस्तार किया है। पिछले एक दशक के दौरान, मेट्रो रेल-सेवा की सुविधा से युक्त शहरों की संख्या कई गुना बढ़ गई है।”

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “‘जल जीवन मिशन’ के तहत ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने में प्रगति हो रही है। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य-सेवा योजना ‘आयुष्मान भारत’ के तहत 55 करोड़ से अधिक लोगों को सुरक्षा-कवच प्रदान किया जा चुका है। लगभग सभी गांवों में 4G मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध है।”

उन्होंने कहा, “दुनिया में होने वाले कुल डिजिटल लेनदेन में से आधे से अधिक लेनदेन भारत में होते हैं। ऐसे बदलावों से एक गतिमान डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण किया गया है।”

भारत को 2047 तक Global-AI-Hub बनाने का लक्ष्य

राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया कि भारत को 2047 तक Global-AI-Hub बनाने के प्रयासों के साथ सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा, “सरकार ने देश की AI क्षमताओं को मजबूत करने के लिए India-AI मिशन शुरू किया है। इस मिशन के तहत ऐसे मॉडल विकसित किए जाएंगे जो भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करेंगे। हमारी आकांक्षा है कि वर्ष 2047 तक भारत, एक Global-AI-Hub बन जाए।”

युवा, महिला और हाशिए पर रहे समुदाय भारत को आगे बढ़ाएँगे: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के मार्ग पर अग्रसर है। समाज के तीन ऐसे वर्ग हैं जो हमें प्रगति के इस मार्ग पर आगे बढ़ाएंगे वे ‘युवा, महिलाएं और वे समुदाय जो लंबे समय से हाशिये पर रहे’ हैं।”

उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से दूरगामी बदलाव किए गए हैं। रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। शुभांशु शुक्ला की International Space Station की यात्रा ने एक पूरी पीढ़ी को ऊंचे सपने देखने की प्रेरणा दी है।”

राष्ट्रपति ने कहा, “हमारी बेटियां हमारा गौरव हैं। वे प्रतिरक्षा और सुरक्षा सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। रोजगार में भी जेंडर गैप कम हो रहा है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से महिला सशक्तीकरण अब केवल एक नारा न रहकर यथार्थ बन गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे समाज का एक बड़ा हिस्सा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अन्य समुदायों के लोगों का है। इन समुदायों के लोग अब हाशिए पर होने का टैग हटा रहे हैं।”

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर क्या बोलीं राष्ट्रपति?

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “हमें आतंकवाद का दंश झेलना पड़ा। कश्मीर घूमने गए निर्दोष नागरिकों की हत्या, कायरतापूर्ण और नितांत अमानवीय थी। इसका जवाब भारत ने फौलादी संकल्प के साथ निर्णायक तरीके से दिया।”

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया कि जब राष्ट्र की सुरक्षा का प्रश्न सामने आता है तब हमारे सशस्त्र बल किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम सिद्ध होते हैं। रणनीतिक स्पष्टता और तकनीकी दक्षता के साथ, हमारी सेना ने सीमा पार के आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया। मेरा विश्वास है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आतंकवाद के विरुद्ध मानवता की लड़ाई में एक मिसाल के तौर पर इतिहास में दर्ज होगा।”

उन्होंने कहा, “विश्व-समुदाय ने भारत की इस नीति का संज्ञान लिया है कि हम आक्रमणकारी तो नहीं बनेंगे लेकिन अपने नागरिकों की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेंगे।”

बकौल राष्ट्रपति, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ डिफेंस के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत मिशन’ की परीक्षा का भी अवसर था और भारत सही रास्ते पर हैं। भारत का स्वदेशी विनिर्माण उस निर्णायक स्तर पर पहुंच गया है जहाँ अपनी बहुत सी सुरक्षा-आवश्यकताओं को पूरा करने में भारत आत्मनिर्भर बन गया है।

राष्ट्रपति ने पर्यावरण की रक्षा का किया आग्रह

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोगों से पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रयास करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने के लिए, हमें अपने आप में भी कुछ परिवर्तन करने होंगे।”

उन्होंने कहा, “हमें अपनी आदतें और अपनी विश्व-दृष्टि में बदलाव लाना होगा। हमें अपनी धरती, नदियों, पहाड़ों, पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के साथ अपने संबंधों में भी परिवर्तन करना होगा। हम सब अपने योगदान से, एक ऐसी पृथ्वी छोड़ कर जाएं जहाँ जीवन अपने नैसर्गिक रूप में फलता-फूलता रहे।”

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने कहा- सभी मस्जिद, मदरसे, दरगाह पर 15 अगस्त को फहराए तिरंगा, कॉन्ग्रेस नेता बता रहे- बकवास, बेतुका आदेश: विरोध में ओवैसी की AIMIM भी

देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। राष्ट्र भक्त लोग इस दिन गर्व से तिरंगा फहराएँगे। इस बीच कॉन्ग्रेस का राष्ट्रवाद फिर सवालों के घेरे में हैं। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने सभी मस्जिदों, दरगाहों और मदरसों में तिरंगा फहराने का निर्देश दिया लेकिन कॉन्ग्रेस के सांसद तारिक अनवर को यह ‘बकवास’ लग गया।

अनवर ने 4 कदम आगे बढ़कर धार्मिक स्थलों पर तिरंगा फहराने को परंपरा ना मानकर अपनी बात को सही ठहराने की बेतुकी कोशिश भी की है। सिर्फ कॉन्ग्रेस ही नहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के नेता भी तिरंगा फहराने के आदेश पर सवाल उठा रहे हैं।

तारिक अनवर ने क्या कहा?

बिहार के कटिहार से लोकसभा सांसद तारिक अनवर ने IANS से बातचीत में तिरंगा फहराने की ‘बंदिश’ को गलत बताया है। अनवर ने कहा, “मैं समझता हूँ, ये सब बकवास है। हमारे देश की परंपरा नहीं है कि जो धार्मिक स्थल हैं, वहाँ तिरंगा झंडा फहराया जाए। तिरंगा तो लोग अपनी मर्जी से फहराते हैं। किसी पर दबाव या बंदिश से यह नहीं किया जा सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह व्यक्ति की अंदर से भावना, देश प्रेम होता है, जिसकी वजह से वो तिरंगा लगाता है। इस तरह की बंदिश करना, इस तरह का दबाव बनाना बिल्कुल गलत है।”

कॉन्ग्रेस नेता ने बताया ‘बेतुका आदेश’

छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेस के ही एक नेता सलाम रिजवी ने इसे ‘बेतुका आदेश‘ बताया है। वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन रिजवी ने कहा, “मुस्लिम समुदाय के लोगों पर सवाल BJP-RSS में शामिल मुस्लिम खड़ा कर रहे हैं।” रिजवी का भी कहना है कि धार्मिक स्थलों पर झंडा फहराना अनिवार्य नहीं है।

AIMIM ने भी किया तिरंगे का विरोध

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लीमीन (AIMIM) भी भला तिरंगे का अपमान करने पर क्यों पीछे रहती। AIMIM के नेता और महाराष्ट्र के मालेगांव से विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने तिरंगा लगाने के आदेश को ‘सरकार की चापलूसी‘ बता दिया है।मोहम्मद इस्माइल ने इसे मुस्लिमों की देशभक्ति पर सवाल उठाने वाला फैसला बताया है।

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का क्या है आदेश?

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने 11 अगस्त को आदेश जारी किया था। इसमें छत्तीसगढ़ की सभी मस्जिदों, मदरसा और दरगाह के मुख्य द्वार पर तिरंगा फहराने की बात कही गई थी। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज द्वारा यह आदेश सभी मुतवल्लियों के लिए जारी किया गया था।

सलीम ने मुतवल्लियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जिस मस्जिद में झंडा नहीं फहराया जाएगा उन्हें पाकिस्तानी माना जाएगा। सलीम का कहना है कि कट्‌टरपंथी और गद्दार ही तिरंगा फहराने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय पर्व मनाना और राष्ट्रीय ध्वज से प्रेम करना सभी कर्त्तव्य है। जो राष्ट्र और राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान नहीं करता, वो देशद्रोही है।”

अंग्रेज चले गए, नक्सली आ गए…छत्तीसगढ़ के 14 गाँवों में पहली बार 15 अगस्त पर लहराएगा तिरंगा: ‘डबल इंजन’ के प्रहार ने वामपंथी आतंकियों से दिलाई स्वतंत्रता

नक्सलवाद के खात्मे को लेकर मोदी सरकार ने कमर कसी हुई है। ‘लाल आतंक’ के खिलाफ सरकार की मुहिम को अब सफलता भी मिल रही है। 15 अगस्त 2025 को आजादी के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के 14 दूर-दराज के जनजातीय (Tribal) गाँवों में तिरंगा फहराया जाएगा।

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रेड टेरर यानी नक्सली हिंसा से प्रभावित बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के अंदरूनी इलाकों में 26 जनवरी के बाद बनाए गए सुरक्षा शिविरों के चलते यह स्थिति बनी है।

पहले इन गाँवों पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का कब्जा था। राष्ट्रीय पर्वों पर काले या लाल झंडे लगवाए जाते थे और बैनर या पर्चों के जरिए लोगों को स्वतंत्रता दिवस मनाने से रोक दिया जाता था। सीधे तौर पर कहें तो इन गाँव में लोगों को देशभक्ति दिखाने की भी इजाजत नहीं थी।

अधिकारियों ने बताया कि इस साल CPIM द्वारा ऐसे कोई प्रयास नहीं हुए। बस्तर जोन के पुलिस इंस्पेक्टर जनरल पी. सुंदरराज ने कहा, “गाँवों के सेंटर में तिरंगा फहराया जाएगा जिसमें अर्धसैनिक बल, बस्तर पुलिस और गाँव वाले मौजूद रहेंगे। ये 14 गाँव ऐसे हैं जहाँ नए शिविर 26 जनवरी 2025 के बाद बनाए गए हैं। इन गाँवों में पहले कोई राष्ट्रीय पर्व नहीं मनाया था।”

सुंदरराज ने आगे कहा, “इसके अलावा 15 और गाँव हैं, जहाँ सुरक्षा शिविर 15 अगस्त के बाद बने थे। वहाँ पहले ही गणतंत्र दिवस मनाया जा चुका है लेकिन अब वो पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाएँगे।” उनका कहना है कि नए सुरक्षा शिविर सिर्फ सुरक्षा के लिए ही नहीं हैं बल्कि ये गाँवों में विकास और लोगों से जुड़ाव का काम भी कर रहे हैं।

अधिकारी ने कहा, “यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि बस्तर के अंदरूनी इलाके के लोग इस साल पहली बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाएँगे। यह ऐतिहासिक पल हमारे सुरक्षा बलों की लगातार मेहनत और इन नए शिविरों के कारण संभव हुआ है। इन शिविरों की वजह से न सिर्फ सुरक्षा बेहतर हुई है बल्कि लोगों में आत्मविश्वास भी बढ़ा है, जिससे वे खुले दिल से राष्ट्रीय पर्व में हिस्सा ले पाएँगे।”

उन्होंने कहा, “युवा और बच्चे खास तौर पर अपने गाँव में तिरंगा देखने के लिए उत्साहित हैं। हमारे जवान भी इन गाँवों में लोगों के साथ मिलकर लोकतंत्र की ताकत को मजबूत करने के लिए बेहद खुश हैं।”

नक्सली आतंक का होगा खात्मा

इस बार पहली बार जिन गाँवों में तिरंगा फहराया जाएगा उनमें गुनजेपुरती, पुजारिकांकर, भीमराम, कुटुल, पदमकोट, नेलंगुर, पंगुर और उसकावाया शामिल हैं। कोंडापल्ली, कुटुल, नेलंगुर, रायगुड़ेम, गोमगुड़ा और पिड़िया जैसे गांव नक्सलवाद से सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं। ग्रामीणों को सिर्फ तिरंगा फहराने तक ही नहीं बल्कि आजादी के दिन और उसके महत्व के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

CRPF और स्थानीय अधिकारी पहले ही बस्तर में तिरंगा रैलियाँ आयोजित कर रहे हैं। इस खास मौके पर सुरक्षा के लिए जिला रिजर्व गार्ड (DRG), बस्तर फाइटर्स, स्पेशल टास्क फोर्स (STF), छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF), सीआरपीएफ, कोबरा, SSB, ITBP, BSF और स्थानीय पुलिस तैनात रहेगी।

अधिकारियों का कहना है कि इस कार्यक्रम का मकसद यही है कि चाहे कोई शहर में रहता हो या दूरदराज के गाँव में, हर किसी को देश की आजादी और संविधान की ताकत से जुड़ाव महसूस हो। इसके अलावा सरकार और सुरक्षा बलों के बीच मजबूत तालमेल भी इस आयोजन में साफ दिख रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करना सरकार का लक्ष्य है और इसके लिए केंद्र पूरी ताकत से काम कर रहा है।

सुरक्षाबलों के हालिया ऑपरेशनों की सफलता से जवानों का हौसला बढ़ा है। इस साल अब तक 19 सुरक्षाकर्मी नक्सली हमलों में शहीद हो चुके हैं जबकि 229 नक्सलियों को ढेर किया गया है। वहीं, नक्सलियों ने पुलिस का इनफॉर्मर होने के शक में 28 लोगों की हत्या की है।

पिछले साल भी आजादी के दिन बस्तर के 13 दूरदराज के गाँवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया था। इनमें नर्लीघाट (दंतेवाड़ा), पनिडोबिर (कांकेर), गंडम, पुटकेल और छूटवाही (बिजापुर), कस्तुरमेटा, मसपुर, इरकभट्टी और मोहंडी (नरायणपुर), टेकलगुड़ेम, पुवर्ती, लाखापाल और पुलनपाड़ (सुकमा) गाँव शामिल थे।

नक्सलियों के खिलाफ जारी है ऑपरेशन

छत्तीसगढ़ के मनपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी इलाके में बीते 13 अगस्त को सुरक्षाबलों और माओवादी के बीच मुठभेड़ में 2 नक्सली विजय रेड्डी और लोकेश सलामे मारे गए थे। इन पर कुल 35 लाख रुपए का इनाम था। यह ऑपरेशन बांदा पहाड़ के पास मदनवाड़ा थाना क्षेत्र में हुआ था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस ऑपरेशन में ITBP ने और DRG के जवानों की मदद की थी। ऑपरेशन 12 अगस्त की रात शुरू हुआ क्योंकि सुरक्षा बलों को खबर मिली थी कि इलाके में बड़े नक्सली नेता मौजूद हैं।

विजय रेड्डी दण्डकारण्य स्पेशल जोनल समिति का हिस्सा था और उस पर 25 लाख रुपए का इनाम था। लोकेश सलामे डिविजनल समिति का हिस्सा था और उस पर 10 लाख रुपए का इनाम था। रेड्डी पर महाराष्ट्र में भी इनाम घोषित था। वह महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की सीमा से लगे क्षेत्र का प्रमुख नक्सली नेता था और राजनांदगांव-कांकेर सीमा (RKB) संभाग में संगठन के अभियानों की देखरेख करता था। यह क्षेत्र नक्सलियों के ट्रेनिंग क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।

26 जुलाई को बस्तर पुलिस ने बताया था कि बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 4 नक्सली मारे गए थे। सुंदरराज ने बताया था, “खुफिया जानकारी के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू हुआ था। उनके पास INSAS राइफल, SLR और विस्फोटक सामग्री मिली थी।”

झारखंड के गुमला में भी 26 जुलाई को तीन नक्सली मारे गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये नक्सली CPI (M) की शाखा झारखंड जन मुक्ति परिषद (JJMP) के सदस्य थे। नक्सलियों के पास से 3 ऑटोमैटिक राइफल, AK-47, INSAS और देशी बंदूकें मिली थीं।

गुमला के SP हारिस जमाँ ने कहा था, “सुरक्षा बलों के मौके पर पहुँचते ही नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने जवाबी कार्रवाई में JJMP के तीन नक्सली मारे गए। समूह में शामिल दो अन्य नक्सली भाग निकले।” इस ऑपरेशन को झारखंड जगुआर और गुमला पुलिस ने मिलकर किया था। इससे कुछ दिन पहले बोकारो जिले में भी मुठभेड़ हुई जिसमें दो नक्सली मारे गए थे और एक सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हुआ था।

18 जुलाई को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में 6 नक्सली मारे गए थे। उनके पास भी कई हथियार और विस्फोटक सामग्री मिली। अबूझमाड़ क्षेत्र के जंगल में हुई इस मुठभेड़ को लेकर पी. सुंदरराज ने कहा था, “मुठभेड़ स्थल से 6 नक्सलियों के शव, AK-47 राइफल, सेल्फ लोडिंग राइफल (SLR) व अन्य हथियार, विस्फोटक सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएँ बरामद की गई हैं।”

हथियार डाल रहे नक्सली

सुरक्षा बलों के अभियान के साथ-साथ कई माओवादी अब हथियार डालकर सामान्य जीवन में लौट रहे हैं। 26 जुलाई को जोरिगे नागराजु उर्फ कमलेश और उनकी पत्नी मेदाका ज्योतीश्वरी उर्फ अरुणा ने विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) में DGP हरीश कुमार गुप्ता के सामने आत्मसमर्पण किया। नागराजु CPIM पूर्व बस्तर डिविजनल कमेटी का प्रमुख था और 34 वर्ष तक नक्सली संगठन में सक्रिय था। नागराजु पर 20 लाख रुपए का इनाम था। उसकी पत्नी 30 वर्षों तक नक्सली संगठन में सक्रिय थी और उस पर 5 लाख रुपए का इनाम था।

दोनों नक्सली केंद्रीय समिति की नीतियों से संतुष्ट नहीं और उन्हें एहसास होने लगा था कि नक्सली विचारधारा कमजोर हो रही है। DGP ने बताया, “लोगों के समर्थन की कमी, कम भर्तियाँ, माओवादी पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की मौत और पार्टी की विचारधारा से मोहभंग के कारण उन्होंने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया था।”

DGP के मुताबिक, अल्लूरी सीताराम राजू (ASR) जिला पुलिस ने 23 से 25 जुलाई तक मम्पा, मदुगुकोटा और तांगेदुकोटा जंगलों में 3 माओवादी सशस्त्र ठिकानों का पता लगाया और एके-47, 5 एसएलआर, 2 इंसास राइफल, 5 303 राइफल, 2 बीजीएल हथियार, 1 पिस्तौल, 16 बीजीएल गोले और 20 कारतूस, 15 डेटोनेटर, 8 वॉकी, भारी मात्रा में गोला-बारूद, एक दूरबीन और अन्य सामग्री जब्त की है।

24 जुलाई को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 5 जिलों में 66 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। इन नक्सलियों पर कुल 2.54 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। पी. सुंदरराज के अनुसार, बीजापुर में 25, दंतेवाड़ा में 15, कांकेर में 13, नारायणपुर में 8 और सुकमा जिलों में 5 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।

यह आत्मसमर्पण सुरक्षाबलों के नए कार्यक्रम ‘पूना मार्गम’ (नया रास्ता) के साथ हुआ था। इस योजना के अनुसार, सुरक्षा बल नक्सलियों के परिवारों से संपर्क करके उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मनाने में मदद के लिए और अधिक प्रयास करते हैं।

पुलिस ने बताया, “अंदरूनी क्षेत्रों में नए सिक्योरिटी कैंपों की स्थापना और सड़क, परिवहन, पेयजल, बिजली और अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं की बेहतर पहुँच के साथ विकास अब दूर-दराज के गाँवों तक पहुँच रहा है। नक्सली विचारधारा से मोहभंग, संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक संघर्ष और एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित पारिवारिक जीवन जीने की तीव्र इच्छा इन आत्मसमर्पणों के प्रमुख कारणों में से हैं।”

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अनुसार, पिछले 15 महीनों में 1,521 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इसे साय ने ‘नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की बढ़ती पहुँच और विश्वास का एक मजबूत संकेत’ बताया है। बीते जुलाई में नारायणपुर जिले में अबूझमाड़ क्षेत्र में सक्रिय 22 माओवादियों के आत्मसमर्पण किया जिन पर कुल 37.5 लाख रुपए का इनाम था। साथ ही, बस्तर क्षेत्र के सुकमा जिले में 23 नक्सलियों ने भी सरेंडर किया था जिन पर कुल 1.18 करोड़ रुपए का इनाम था।

‘लाल आतंक’ के खिलाफ भारत का युद्ध

केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों को मुक्त करने और लाल आतंक को खत्म करने के उद्देश्य से ऑपरेशन कगार (ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट) शुरू किया है। इसके चलते जिन इलाकों में अब तक नक्सलियों का नियंत्रण था, वो अब मुक्त हो रहे हैं और विकास के बाद बाकी हिस्सों के साथ मिलकर देश की भागीदारी में हिस्सा बन रहे हैं।

कई खूँखार नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है जबकि कई को मार गिराया गया है। सरकार की ठोस रणनीति और जीरो टॉलरेंस की नीति के कारण 2010 और 2021 के बीच नक्सली हिंसा में 77% की कमी आई है। जो हिंसक घटनाएँ 2009 में 2,258 थीं वो 2021 में घटकर 509 रह गई हैं।

पिछले 10 वर्षों में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में भी भारी कम दिखी है। 2015 में 106 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे जो अब सिर्फ 6 रह गए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर व सुकमा, झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम और महाराष्ट्र का गढ़ चिरौली जिला शामिल है। साथ ही, नक्सलवाद से जुड़ी हत्याओं की संख्या भी 90% तक कम हुई है।

2014 में 63 नक्सली मारे गए थे और 2025 आते-आते यह आँकड़ा कुल 2,089 तक पहुँच गया है। 2024 में 928 नक्सलियों ने सरेंडर किया जबकि 2025 के पहले 4 महीनों में 718 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। राज्य पुलिस की मदद से, सेना ने 2019 और 2025 के बीच माओवाद प्रभावित राज्यों में रात्रिकालीन लैंडिंग क्षमता वाले 68 हेलीपैड सहित 320 शिविर बनाए हैं। किलेबंद पुलिस थानों की संख्या 2014 के 66 से बढ़कर 555 हो गई है।

सरकार, सुरक्षाबल और स्थानीय प्रशासन के जमीनी स्तर पर किए कार्यों के चलते भारत नक्सल मुक्त बनने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है।

(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में रूकमा राठौड़ ने लिखी है, जिसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं। इस खबर का हिंदी अनुवाद शिव ने किया है)

जबरन मुस्लिम बना हिंदू नाबालिग से जुनाब हुसैन ने किया निकाह, कई को देह व्यापार के धंधे में धकेला: बिहार में ऑपरेशन ‘नया सवेरा’ से 10 लड़कियाँ रेस्क्यू

बिहार के नवादा जिले में एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ जुनाब हुसैन नामक व्यक्ति ने नाबालिग हिंदू लड़कियों को झूठे प्रेमजाल में फँसाकर जबरन धर्मांतरण कराया। इनमें से एक लड़की से मस्जिद में निकाह किया और फिर देह व्यापार में धकेल दिया।

जुनाब पश्चिम बंगाल की दो बहनों को ऑर्केस्ट्रा में काम दिलाने के बहाने बिहार लाया था, लेकिन असल में वह उन्हें तस्करी कर नवादा ले आया और एक लड़की से निकाह के बाद जबरदस्ती इस्लाम कबूल कराया।

बाद में पीड़िता गर्भवती हो गई तो उसका जबरन गर्भपात करा दिया गया। पुलिस जाँच में यह भी सामने आया कि जुनाब 2,500 रुपए प्रति रात के हिसाब से इन लड़कियों को ग्राहकों को उपलब्ध कराता था।

यह कोई एकलौता मामला नहीं है। पुलिस ने खुलासा किया है कि जुनाब और उसके गिरोह ने देश के कई राज्यों से 9 से ज्यादा लड़कियों को फँसाकर तस्करी की थी। इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश बिहार पुलिस के बड़े ऑपरेशन ‘नया सवेरा’ के तहत हुआ, जो राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो के निर्देश पर शुरू किया गया था।

यह अभियान बुधवार (13 अगस्त 2025) को सुबह 10 बजे चलाया गया, जिसमें सारण जिले के मसरख और इसुआपुर इलाकों के चार ऑर्केस्ट्रा ग्रुप्स राहुल, संगीता, मुस्कान और विपिन ऑर्केस्ट्रा पर एक साथ छापेमारी की गई।

ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 10 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया, जिनमें 6 पश्चिम बंगाल, 1 ओडिशा, 1 झारखंड और 2 बिहार की थीं। काउंसलिंग के बाद उनके परिवारों को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है।

इस कार्रवाई में मुख्य आरोपित जुनाब हुसैन समेत कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अन्य गिरफ्तार आरोपितों में सारण जिले का नीरज यादव, तालिब खान, शुभम कुमार, अंकित कुमार, मोहम्मद बिट्टू हाशमी और चंदन कुमार तिवारी शामिल हैं।

इन सभी के खिलाफ महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई गई है। इस छापेमारी का नेतृत्व SSP कुमार आशीष ने किया। उन्होंने बताया कि लड़कियों से जबरन डांस करवाया जाता था और उन्हें मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी।

यह छापेमारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के आदेश पर चार थानों की टीम बनाकर एक साथ की गई। फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में है और तस्करी, जबरन धर्मांतरण और शोषण के इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।

साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि अगर किसी को ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

स्वतंत्रता दिवस पर 233 को गैलेंट्री समेत 1090 सुरक्षाकर्मियों का सम्मान: जानिए- क्यों दिए जाते हैं ये वीरता पदक, क्या होती है अहमियत

भारतीय सेना की वीरता किसी भी पहचान की मोहताज नहीं है। समय आने पर भारतीय जवान न केवल अपनी जान देते हैं बल्कि दुश्मन का सीना छलनी भी करने का दम रखते हैं। सीमा पर तैनात इन जवानों के साथ देश के अंदर नागरिकों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को दुरुस्त रखने वाले होमगार्ड्स और पुलिस वालों का हौसला बढ़ाने के लिए हर साल गैलेंट्री अवॉर्ड दिए जाते हैं।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले गैलेंट्री या वीरता पदक पुरस्कार की घोषणा की गई है। ये उन सैनिकों, पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा बलों को दिए जाते हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में जान की परवाह किए बिना देश की रक्षा की। हालाँकि इस बार एक खास बदलाव देखने को मिला है। सरकार ने वीरता पुरस्कारों के साथ-साथ विशिष्ट सेवा पुरस्कारों की भी घोषणा की है। ये पुरस्कार आमतौर पर गणतंत्र दिवस पर दिए जाते हैं।

1090 सुरक्षाकर्मियों हुए सम्मानित

गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस साल कुल 1,090 सुरक्षाकर्मियों को सम्मानित किया गया। 233 गैलेंट्री अवॉर्ड्स दिए गए हैं। इनमें से 226 पुलिसकर्मियों को, 6 अग्निशमन सेवा के कर्मियों को और 1 नागरिक सुरक्षा कर्मी को यह सम्मान मिला है। ये पुरस्कार मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित इलाकों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बहादुरी दिखाने वाले जवानों को दिए गए हैं।

इसके अलावा सरकार ने 99 राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक (President’s Distinguished Service Medals) और 758 मेरिटोरियस सर्विस मेडल (Meritorious Service Medals) भी घोषित किए हैं। ये पुरस्कार खासतौर पर उन अधिकारियों को दिए जाते हैं जिन्होंने लंबे समय तक ईमानदारी, दक्षता और समर्पण के साथ सेवा की है।

गैलेंट्री अवॉर्ड्स में इस बार एक और अहम बात शामिल हुई है। वह ये कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत सुरक्षाबलों की जांबाजी के लिए वॉरटाइम गैलेंट्री और वॉरटाइम विशिष्ट सेवा पुरस्कारों की भी घोषणा भी की गई है।

ऑपरेशन सिंदूर को मिला खास सम्मान

इस साल सेना के जवानों को मिलने वाले गैलेंट्री अवॉर्ड्स में ऑपरेशन सिंदूर के वीरों को विशेष स्थान मिला। रक्षा मंत्रालय की सूची अनुसार, गैलेंट्री अवॉर्ड्स 2025 की सूची में सेना के 86 जवानों को गैलेंट्री अवॉर्ड दिए गए हैं।

वायुसेना के 52 जवानों को वीरता पुरस्कार और 9 अधिकारियों को वीर चक्र दिया गया है। इसके साथ ही 13 अधिकारियों को युद्ध सेवा मेडल और 26 एयरफोर्स ऑफिसर्स को वायु सेना मेडल दिया गया है। वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी समेत एयरफोर्स के 4 अधिकारियों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।

थल सेना के 18 जवानों को वीरता मेडल से सम्मानित किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2 सीनियर इंडियन आर्मी ऑफिसर को सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक के साथ ही सेना को 4 कीर्ति चक्र, 4 वीर चक्र और 8 शौर्य चक्र दिए गए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं का एक संयुक्त सैन्य अभियान था, जिसे भारतीय सेना ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया। इस ऑपरेशन में थल, वायु और नौसेना ने असाधारण समन्वय और साहस दिखाया।

कारगिल युद्ध (1999) के बाद यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर वॉरटाइम गैलेंट्री अवॉर्ड्स दिए गए हैं। उस समय 4 सैनिकों को परमवीर चक्र, 9 को महावीर चक्र और 55 को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था

सेना के गैलेंट्री अवॉर्ड्स की श्रेणियाँ

सेना के जवानों को मिलने वाले गैलेंट्री अवॉर्ड को चार मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है- वॉरटाइम गैलेंट्री, पीस टाइम गैलेंट्री, वॉरटाइम विशिष्ट सेवा और पीस टाइम विशिष्ट सेवा। इनमें परमवीर चक्र, अशोक चक्र, युद्ध सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल जैसे प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं।

वॉरटाइम गैलेंट्री अवॉर्ड्स युद्ध या सैन्य ऑपरेशन के दौरान असाधारण वीरता दिखाने पर दिए जाते हैं। इनमें युद्धकाल का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र (PVC), युद्ध में अत्यंत साहस के लिए महावीर चक्र (MVC), युद्ध में वीरता का प्रदर्शन के लिए (वीर चक्र) और युद्ध या किसी खास ऑपरेशन में वीरता के लिए सेना मेडल (SM) दिया जाना तय होता है।

पीस टाइम गैलेंट्री अवॉर्ड्स आतंकवाद, नक्सल या ऐसे अन्य संकटों में वीरता के लिए दिए जाते हैं। इनमें शांति काल का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र, अत्यंत साहस के लिए कीर्ति चक्र और अपने साहस भरे निर्णय और कार्य के लिए शौर्य चक्र से नवाजा जाता है।

इसी तरह युद्धकाल में उत्कृष्ट नेतृत्व और सेवा के लिए वॉरटाइम विशिष्ट सेवा पुरस्कार दिया जाता है। इसमें युद्ध में सर्वोत्तम सेवा के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM), उत्कृष्ट सेवा के लिए उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और विशिष्ट सेवा के लिए युद्ध सेवा मेडल (YSM) दिया जाता है।

इसके अलावा, पीस टाइम विशिष्ट सेवा पुरस्कार शांति काल में दीर्घकालिक उत्कृष्ट सेवा के लिए दिया जाता है। इसमें सर्वोच्च सेवा सम्मान परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उच्च स्तर की सेवा के लिए अतिविशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट योगदान के लिए विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) दिया जाता है।

जिसके पति को अतीक अहमद के 25 शूटरों ने 5 किमी तक दौड़ाकर मारा, शादी के 9 दिन बाद ही बना दिया विधवा… उस पूजा पाल को ‘न्याय’ मिलना अखिलेश यादव को अखर गया

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की चायल विधानसभा सीट से पूजा पाल विधायक थीं। वह समाजवादी पार्टी (सपा) से चुनी गई थीं। यूपी विधानसभा में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की। पूजा पाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनके पति के हत्यारों को सजा दिलाई। इससे उन्हें वर्षों बाद न्याय मिला। पूजा पाल का इशारा माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की ओर था। दोनों पर पूजा के पति राजू पाल की हत्या का आरोप था। पूजा पाल के पति राजू पाल बसपा के विधायक थे।

पूजा के इस बयान से सपा में बवाल मच गया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नाराजगी जताई और तंज कसते हुए कहा कि पूजा को पहले ही बीजेपी से टिकट पक्का करा लेना चाहिए था। इसके कुछ ही घंटों बाद सपा ने कड़ा फैसला लिया। पार्टी ने पूजा पाल को ‘अनुशासनहीनता’ का दोषी ठहराया और उन्हें ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के कारण समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

इसके बाद पूजा पाल ने मीडिया से बातचीत कर कहा, “शायद आप उन महिलाओं की बात नहीं सुन पाए जो मुझसे भी ज्यादा परेशान थीं। मैं उनकी आवाज हूँ। मुझे लोगों ने चुनकर विधानसभा में भेजा है। उन माताओं और बहनों ने मुझे यहाँ भेजा है, जिन्होंने अपनों को खोया है।”

पूजा पाल ने आगे कहा कि प्रयागराज में जितने भी लोग अतीक अहमद से परेशान थे, मुख्यमंत्री ने सिर्फ मुझे नहीं, बल्कि उन सभी को न्याय दिया है। 1 यह बात मैं पहले दिन से कह रही हूँ, जब मैं पार्टी में थी, तब भी। मुझे तो आज निकाला गया है। मैं आज भी अपने बयान पर कायम हूँ। मैं विधायक बाद में बनी, लेकिन पहले एक पीड़ित महिला हूँ, एक पत्नी हूँ।

पूजा पाल के पति राजू पाल का कत्ल

साल 2004 में, फूलपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद बने अतीक अहमद ने अपनी इलाहाबाद पश्चिम की विधानसभा सीट खाली कर दी। इस सीट पर उपचुनाव हुआ। समाजवादी पार्टी ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को टिकट दिया। उनके सामने थे बहुजन समाज पार्टी के युवा नेता राजू पाल।

उपचुनाव में राजू पाल ने अशरफ को हरा दिया और पहली बार विधायक बने। यह बात अतीक और अशरफ को बहुत बुरी लगी। विधायक बनने और पूजा पाल से शादी करने के 9 दिन बाद 16 जनवरी 2005 राजू पाल की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। राजू पाल की गाड़ी को GT रोड पर ओवरटेक करके रोका गया।

इसके बाद स्कॉर्पियो सवार 25 हमलावरों ने राजू पाल पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाईं। अंधाधुंध फायरिंग के दौरान राजू पाल को 19 गोलियाँ लगीं। हमलावरों ने राजू पाल का पीछा करते हुए 5 किलोमीटर तक दौड़ाकर उन्हें मारा था। इस हमले में उनके दो साथी संदीप यादव और देवीलाल की भी मौत हुई थी।

राजू पाल की हत्या के बाद उनकी पत्नी पूजा पाल ने अपने पति को न्याय दिलाने की लड़ाई शुरू की। इस मामले में एक अहम गवाह उमेश पाल थे, जो राजू पाल के फुफेरे भाई भी थे। उमेश पाल पर अतीक अहमद के गुर्गों ने कई बार हमला किया और अपहरण भी किया ताकि वो गवाही न दे सकें।

लेकिन उमेश पाल डटे रहे और अतीक के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे। उमेश पाल ने अतीक अहमद और उसके गिरोह के खिलाफ कई FIR दर्ज कराईं। पूजा पाल ने भी कई बार उमेश पाल की हत्या की आशंका जताई थी।

गवाह की हत्या और माफिया परिवार का अंत

24 फरवरी 2023 को प्रयागराज में उमेश पाल की भी गोली मारकर और बम फेंककर हत्या कर दी गई। यह सब कैमरे में कैद हो गया। इस हमले में उनके दो सरकारी गनर भी मारे गए। उमेश पाल की हत्या का आरोप भी अतीक अहमद और उसके बेटे असद पर लगा। उमेश पाल की हत्या के बाद यूपी सरकार और पुलिस हरकत में आ गई और तेजी से कार्रवाई शुरू हुई।

इस हत्याकांड के बाद एक-एक करके सभी आरोपित मारे गए। सबसे पहले 13 अप्रैल 2023 को उमेश पाल की हत्या में शामिल अतीक अहमद का बेटा असद और उसका साथी झांसी में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए।

इसके दो दिन बाद, 15 अप्रैल 2023 को अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ को पुलिस हिरासत में मेडिकल जाँच के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। तभी तीन लोगों ने उन पर हमला कर दिया और गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना लाइव टीवी पर हुई। इस तरह, जिस अतीक अहमद पर राजू पाल की हत्या का आरोप था, उसका भी अंत हो गया और यह चक्र पूरा हुआ।

पूजा पाल का सीएम योगी की तारीफ और पार्टी से निष्कासन

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद, पूजा पाल ने विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस‘ (अपराध के प्रति बिलकुल बर्दाश्त न करना) की नीति की जमकर तारीफ की

पूजा पाल ने कहा कि सीएम योगी ने ही उनके पति के हत्यारों को ‘मिट्टी में मिलाया’ और उन्हें न्याय दिलाया। पूजा ने कहा कि उन्होंने वो दर्द देखा है जो किसी ने नहीं देखा था और सीएम ने उनकी बात सुनी। उन्होंने सीएम को धन्यवाद देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की वजह से ही अतीक जैसे अपराधियों का सफाया हुआ है।

पूजा पाल की सीएम योगी की तारीफ समाजवादी पार्टी को पसंद नहीं आई। पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उन पर सख्त कार्रवाई करते हुए पार्टी से बाहर निकाल दिया। पार्टी की तरफ से जारी एक पत्र में ‘पार्टी विरोधी गतिविधियाँ’ बताई और चेतावनी के बावजूद उन्होंने पार्टी को नुकसान पहुँचाया है।

इसके साथ ही पूजा पाल को पार्टी के सभी पदों से भी हटा दिया गया। पत्र में यह भी कहा जाता है कि पूजा पाल ने राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, जिससे वह पहले से ही पार्टी में अलग-थलग चल रही थीं।

SC ने Delhi-NCR में आवारा कुत्तों को पकड़ने के खिलाफ याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा, बच्चों की मौत पर चिंता जताई: SG बोले- नसबंदी से रेबीज नहीं रुकेगा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली NCR में आवारा कुत्तों से संबंधित मामले में गुरुवार (14 अगस्त 2025) को सुनवाई की। मामले में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय बेंच ने सुनवाई की। कपिल सिब्बल और एसजी तुषार मेहता की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रख लिया है।

जानकारी के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि दिल्ली NCR में आवारा कुत्तों के कारण बच्चों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस समस्या को सुलझाने की आवश्यकता है, न कि इस पर विवाद खड़े करने की।

किसने क्या दलीलें दी?

मामले में सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “दो तरह के लोग हैं। एक जो इस बारे में बोलते हैं और दूसरे वो जो इससे परेशान हैं। उन्होंने एक वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि कुत्तों की नसबंदी से रैबीज नहीं रुकेगा।”

उन्होंने कहा, “आवारा कुत्ते छोटे बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं। बच्चे मर रहे हैं, वीडियो देखिए बहुत सारे हैं। दूसरा विकल्प है बधियाकरण। मैं एनिमल लवर हूँ, वो ठीक है, मगर आँकड़ा देखिए।” यह कहते हुए एसजी ने रेबीज और कुत्तों के काटने का डेटा भी माँगा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि चिकन-मटन खाने वाले आज एनिमल लवर बन गए हैं। उन्होंने कहा, “एक ‘तेज आवाज वाली अल्पसंख्यक’ आबादी आवारा कुत्तों के पक्ष में बोल रही है, जबकि पीड़ित बहुसंख्यक आबादी’ चुपचाप गंभीर नुकसान झेल रही है। इनमें बच्चे भी शामिल हैं।”

उन्होंने स्पष्ट रुप से कहा कि नसबंदी और टीकाकरण से न तो रेबीज रुकता है और न ही बच्चों पर हमले और दूसरी तरफ बच्चों की मौतें और विकृति अब भी जारी हैं।

मेहता ने दलीलें रखते हुए कहा कि भारत में हर साल लगभग 37 लाख कुत्ते के काटने के मामले दर्ज होते हैं। हालाँकि, WHO के अनुमान के अनुसार वास्तविक आँकड़ा अधिक हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पहले के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को स्थगित करने की माँग की। कपिल सिब्बल ने कहा, “मसला दिल्ली NCR के विभिन्न इलाकों से कुत्तों को हटाने का है। शेल्टर बनाने और दो माह में रिपोर्ट देने का है। मसला ये है कि उन्हें छोड़ा नहीं जाए, मेरा कहना है वो कहाँ जाएँगे।”

कपिल सिब्बल ने कहा, “कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। शेल्टर है नहीं और हैं तो बहुत कम। जहाँ जगह कम होने की वजह से वो और खतरनाक हो जाएँगे। रोक लगाई जानी चाहिए।” इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या सभी बिंदुओं पर? जिस पर सिब्बल ने कहा, “जी हाँ, मैं प्रोजेक्ट काउंडनेस की तरफ से हूँ। बधियाकरण एक उपाय है पर उसे ठीक से लागू किया जाए।”

कोर्ट का फैसला

सभी की दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस नाथ ने कहा, “संसद नियम और कानून बनाती है, लेकिन उनका पालन नहीं होता। एक तरफ इंसान पीड़ित हैं और दूसरी तरफ पशु प्रेमी यहाँ खड़े हैं। थोड़ी जिम्मेदारी लीजिए। जिन-जिन ने हस्तक्षेप याचिकाएँ दायर की हैं, उन्हें हलफनामा दाखिल कर सबूत पेश करने होंगे।” इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान मामले में अंतरिम राहत के तहत स्टे लगाने की माँग पर आदेश सुरक्षित रखा।

तालिबान को सौंपा अफगानिस्तान, ISIS के जिहादी को सौंपी सीरिया की कमान और अब इस्लामिक जिहाद को पालने वाली पाक फौज से मिलाया हाथ: क्या दुनिया बर्बाद करके ही मानेंगे ट्रंप और अमेरिका?

राजनीति हो या भू-राजनीति दोनों का एक नियम होता है। यहाँ कोई ना स्थाई दोस्त होता है, ना कोई स्थाई दुश्मन। अपने देश का हित ही भू-राजनीति का सबसे बड़ा सिद्धांत है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देखिए वो खुलेआम इस बात का प्रदर्शन कर रहे हैं कि कैसे उनके लिए अपने देश का स्वार्थ ही सबसे बड़ा है। अब चाहे इसके लिए इस्लामी जिहादी आतंकवादियों या उनके समर्थकों को खुश ही करना पड़े।

मई 2025 में ट्रंप ने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद हुसैन अल-शरा से मुलाकात की। इसी अल-शरा के सिर पर कुछ दिनों पहले तक अमेरिका ने $10 मिलियन (87.5 करोड़ रुपए) का इनाम रखा हुआ था। कहा जाता है कि अल-शरा ने 9/11 आतंकी हमलों का जश्न मनाया था। अमेरिका में हुए इस हमले में हज़ारों लोग मारे गए थे लेकिन अब ट्रंप इसका जश्न मनाने वाले की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं। ट्रंप ने शरा की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक आकर्षक और सख्त आदमी हैं जिनका अतीत काला रहा है। ट्रंप ने उन्हें फाइटर तक बता दिया।

2021 में जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी कराई तो उनकी खूब आलोचना की गई। अमेरिका से लेकर अन्य देशों के लोग भी उनके पीछे पड़ गए। हालाँकि, यह ट्रंप का 2020 का दोहा समझौता था जिसके चलते अमेरिका की वापसी हुई। वहीं, अफगानिस्तान को तालिबानी आतंकियों के हाथों में छोड़ दिया गया।

अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान से लड़ने में 20 साल, 2 ट्रिलियन डॉलर और सैकड़ों सैनिकों की जान गंवाई। 2021 में उन्होंने तालिबान से समझौता करके वहाँ से सेना हटा ली और अरबों डॉलर के सैन्य हथियार और संसाधन उसी तालिबान को सौंप दिए जिससे वे 20 साल से लड़ रहे थे।

सीरिया में एक पूर्व ISIS आतंकी से हाथ मिलाने और अफगानिस्तान को तालिबान के हवाले करने के बाद, ट्रंप ने पाकिस्तान फौज से दोस्ती गाँठी है। वही पाकिस्तानी फौज, जो इस क्षेत्र में इस्लामी आतंक का सबसे बड़ा गिरोह है।

पाकिस्तान प्रायोजित पहलगाम इस्लामी आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी फौज को करारी शिकस्त दी। इसके सिर्फ एक महीने बाद पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ लंच करने पहुँच गए थे। हालाँकि, यह मुलाकात भारत-पाक संघर्ष के कुछ ही दिनों बाद हुई लेकिन इसका मुख्य एजेंडा भारत नहीं बल्कि ईरान-इजरायल संघर्ष था।

इतिहास गवाह है कि अमेरिका ने हमेशा पाकिस्तान का इस्तेमाल अपने क्षेत्रीय हित साधने के लिए किया है। खुद पाकिस्तान के बड़े-बड़े नेता लाइव टीवी पर आकर यह कबूल चुके हैं। अमेरिका ने वर्षों तक अफगानिस्तान समेत इस क्षेत्र के कई हिस्सों में अपने रणनीतिक अभियानों के लिए पाकिस्तान को मोहरा बनाया है।

हाल ही में पाकिस्तानी फौजी के मुखिया मुनीर एक बार फिर अमेरिका गए। उन्होंने वहाँ अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) के रिटायर हो रहे कमांडर के विदाई समारोह में हिस्सा लिया। ट्रंप को या तो खुलकर मुनीर का समर्थन है या अमेरिका उसे उकसा रहा है कि वो भारत के खिलाफ बयानबाजी करे। इसी से ‘चने के झाड़’ पर चढ़े मुनीर ने अमेरिकी धरती से भारत को परमाणु हमले की गीदड़भभकी तक दे डाली।

पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीति को नियंत्रित करने वाले और मदरसे में पढ़े जिहादी वर्दीधारी ने 10 अगस्त को फ्लोरिडा के टैम्पा शहर में एक निजी डिनर के दौरान एक उदाहरण दिया। उसने पाकिस्तान को ‘स्पॉइलर’ ताकत बताते हुए मर्सिडीज और डंप ट्रक की तुलना की। उसने कहा, “भारत एक चमकती हुई मर्सिडीज है जो हाईवे पर फरारी की तरह दौड़ रही है और हम बजरी से भरा डंप ट्रक हैं। अगर ट्रक कार से टकरा जाए, तो नुकसान किसको होगा?”

मुनीर ने उद्योगपति मुकेश अंबानी को धमकाने के लिए कुरान की आयतों का भी जिक्र किया। उसने कहा, “एक ट्वीट करवाया था, जिसमें सूरह अल-फील और मुकेश अंबानी की तस्वीर थी ताकि उन्हें दिखा सकें कि अगली बार हम क्या करेंगे।”

आसिम मुनीर की यह परमाणु धमकी बेहद अहम समय पर आई। पहली बात, यह धमकी अमेरिकी जमीन से दी गई। इसके अलावा, मुनीर ने ना सिर्फ पाकिस्तान के इस्लामी आतंकियों को खुश करने के लिए कुरान की आयतों का हवाला दिया बल्कि परमाणु हथियार की धमकी देकर भारत को ब्लैकमेल भी किया।

मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान आधी दुनिया को अपने साथ तबाह कर देगा। भारत को यह धमकी ठीक उसी दिन दी गई जिस दिन 80 साल पहले अमेरिका ने जापान के नागासाकी पर परमाणु बम गिराया था।

भारत ने इस धमकी पर कड़ा बयान जारी किया और दोहराया कि भारत को ऐसे ब्लैकमेल से कभी डराया नहीं जा सकता। अमेरिकी सरकार और मीडिया ने मुनीर की इस गीदड़भभकी पर चुप्पी साध रखी है। इससे अटकलें लग रही हैं कि यह धमकी सिर्फ मुनीर की भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी सोच नहीं है। यह भी संभव है कि यह अमेरिका के इशारे पर की गई एक सोची-समझी चाल हो।

परमाणु धमकी और मुकेश अंबानी को निशाना बनाने के अलावा मुनीर ने फिर से अपना पुराना बयान दोहराया कि ‘कश्मीर हमारे गले की नस है’। पहलगाम हमले से कुछ दिनों पहले भी मुनीर ने यही बयान दिया था। उसने कहा था, “कश्मीर भारत का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि अधूरा अंतरराष्ट्रीय एजेंडा है। जैसे कायदे-आजम (मोहम्मद अली जिन्ना) ने कहा था कि कश्मीर पाकिस्तान की ‘गले की नस’ है।”

मुनीर ने ट्रंप को भारत-पाक संघर्ष खत्म कराने में उनके ‘काल्पनिक योगदान’ के लिए धन्यवाद दिया। हालाँकि, आसीम मुनीर की ट्रंप की चापलूसी बेकार नहीं गई। ट्रंप प्रशासन ने बूलचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी मजीद ब्रिगेड को ‘विदेशी आतंकी संगठन’ घोषित कर दिया। इससे पाकिस्तान आर्मी की झूठी कहानी को नया सहारा मिला कि अपनी आजादी के लिए लड़ रहे बलूच ‘आतंकवादी’ हैं।

इसके जरिए बलूचों की आजादी की लड़ाई को उन इस्लामी आतंकियों के बराबर बताने की कोशिश की गई जिन्हें पाकिस्तान आर्मी समर्थन देती है। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और पहलगाम हमले के आरोपी लश्कर का नया गुट द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं। अमेरिका ने कुछ दिनों पहले ही TRF को ‘विदेशी आतंकी संगठन’ घोषित किया था।

पाक सरकार के शोषण और चीनी परियोजनाओं के खिलाफ लड़ रहे हैं बलूच विद्रोही

पाकिस्तानी सरकार के शोषण और अपनी जमीन पर चीन की परियोजनाओं के खिलाफ बलूच विद्रोही वर्षों से लड़ते रहे हैं। वर्षों से BLA ने पाकिस्तानी फौज, चीनी कर्मचारियों और चीन की परियोजनाओं पर हमले किए हैं। बलूच लोग लगातार पाकिस्तान और चीन को लेकर कहते हैं कि वे यहाँ के संसाधन लूट रहे हैं और स्थानीय लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ नया व्यापार समझौता घोषित किया। इसमें पाकिस्तान के कथित ‘विशाल तेल भंडार’ को मिलकर विकसित करने की योजना है। इस घोषणा के कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने भारतीय आयात पर 25% शुल्क और अतिरिक्त जुर्माना लगाया था। ट्रंप ने यहाँ तक दावा किया कि शायद एक दिन पाकिस्तान, भारत को तेल बेच सकता है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ने लिखा, “हमने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत हम दोनों मिलकर उनके विशाल तेल भंडार को विकसित करेंगे… कौन जाने, एक दिन वे भारत को तेल बेचें!”

पाकिस्तान के ज्यादातर तेल और गैस के बलूचिस्तान में हैं। इस वजह से यह कदम राजनीतिक चर्चा का कारण बना कि अमेरिका की यहाँ क्या भूमिका हो सकती है। बलूचिस्तान संसाधनों से भरपूर है लेकिन राजनीतिक रूप से अशांत इलाका है। पाकिस्तान और चीन पहले से ही यहाँ संसाधनों का दोहन कर रहे हैं।

अमेरिका की एक कंपनी ने पाकिस्तान के साथ एक क्रिप्टो डील साइन की है। इस कंपनी में ट्रंप के परिवार की 60% हिस्सेदारी है। इसके बाद ट्रंप की नजर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर है। चीन ने भी यहाँ निवेश करने की कोशिश की थी लेकिन यह सफल नहीं हो पाई। बलूच आजादी के लिए लड़ने वाले लोग, चीनी इंजीनियरों और CPEC पर काम कर रहे अधिकारियों और पाकिस्तानी फौज पर लगातार हमले करते रहे हैं।

अमेरिका, पाकिस्तान में तेल खोजना चाहता है। वर्षों पहले पाकिस्तान ने यही तेल भंडार अमेरिका को ‘लाहौरी चूरन’ के नाम पर चिपका दिया था। लगातार खोज के बाद भी वहाँ तेल और गैस कुछ नहीं मिला।

दशकों से इस्लामी आतंकियों को बढ़ावा दे रही पाक आर्मी

1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद से ही पाकिस्तानी फौज आतंकियों को पालती रही है। पाक ने इनका इस्तेमाल भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ किया है। अमेरिका का भी इतिहास इन इस्लामिक जिहादी आतंकियों के समर्थन का ही रहा है। हालाँकि, ओसामा बिन लादेन के मामले में अमेरिका के साथी पाकिस्तान की पोल खुल गई थी।

लादेन खुद को आतंक की लड़ाई में अमेरिका का दोस्त बताने वाले पाकिस्तान की नाक के नीचे मिला था। 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड को अमेरिका कई वर्षों तक ढूंढ रहा था और वो 2011 में एबटाबाद में पाकिस्तानी फौज की एक छावनी के पास मिला।

पाकिस्तानी फौज दशकों से अलग-अलग नामों से इस्लामी आतंकियों को फंड और ट्रेनिंग देती रही है। चाहे 1980 के दशक में कश्मीर के जिहादी समूहों को धन या लॉजिस्टिक की मदद देना हो, कश्मीरी पंडितों की हत्याएँ और पलायन कराना हो या डोडा नरसंहार जैसे अन्य हमले हों।

सेना के अफसर इन आतंकियों को पैसा और प्रशिक्षण देते हैं। साथ ही, अपने देश में उन्हें सुरक्षा भी देते हैं। पाकिस्तान की सिविल सरकार इन आतंकियों के हवाला से आए पैसों को छिपाने में मदद करती है। ये काम चैरिटी और धार्मिक संगठनों के नाम पर किया जाता रहा है। भारत और हिंदुओं से नफरत करने वाली पाकिस्तान फौज ने भारत से 4 बार युद्ध लड़ा लेकिन वे हर बार हारे। पाकिस्तान भी जानता है कि भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान की कोई औकात नहीं है।

पाकिस्तानी फौज, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों का समर्थन करती है। वे संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकियों जैसे सैयद सलाउद्दीन, मसूद अजहर, हाफिज सईद जैसे अनगिनत आतंकियों को पाकिस्तान में सुरक्षित पनाहगाह भी मुहैया कराते हैं। मई में जब भारत ने कुछ आतंकियों को मार गिराया, तो पाकिस्तानी फौजी उनके जनाजों में भी शामिल हुए। खुद पाकिस्तानी सेना के पीआर विंग का मौजूदा प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित एक आतंकी का बेटा है।

अमेरिका, खासकर डोनाल्ड ट्रंप आतंकियों और जिहादी आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाले देशों के बारे में अपना रुख बदलते रहते हैं। उन्हें पाकिस्तान के ओसामा बिन लादेन वाले धोखे और अफगानिस्तान में डॉलर ऐंठने वाली चालें भी याद नहीं है। भारत कभी नहीं भूलेगा कि पाकिस्तान ने कितने निर्दोष भारतीयों का खून बहाया है।

2018 की बात है, ट्रंप ने X पर एक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान को अरबों की आर्थिक मदद देकर अमेरिका मूर्खता कर रहा था। उन्होंने लिखा, “अमेरिका ने मूर्खता की हद तक जाकर पाकिस्तान को पिछले 15 साल में 33 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद दी। बदले में हमें सिर्फ झूठ और धोखा मिला। वे हमारे नेताओं को मूर्ख समझते हैं। अफगानिस्तान में जिन आतंकियों को हम मारते हैं, वे उन्हें सुरक्षित पनाह देते हैं। अब और नहीं!”

इससे एक साल पहले ही ट्रंप ने पाकिस्तान का धन्यवाद दिया था और रिश्ते बेहतर करने को लेकर वो बहुत उत्साहित थे। पाकिस्तान उसके आतंकवाद और उसके धोखों पर ट्रंप का रुख उतना ही बदलता रहता है जितना कि उनका एप्सटीन फाइल्स जारी करने का वादा।

ट्रंप सरकार ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी संगठन तो घोषित किया लेकिन पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूच जनता पर किए जा रहे जुल्म पर कोई सवाल नहीं उठाया। ट्रंप ने ये नहीं पूछा कि ग्वादर इलाके में 1 लाख से ज्यादा लोगों के पास पीने का साफ पानी क्यों नहीं है। ना ही उन्होंने यह पूछा कि बलूच बच्चों को बलूची भाषा क्यों नहीं पढ़ने दी जाती और उन पर उर्दू थोपी दी जाती है। ट्रंप ने इस पर भी सवाल नहीं उठाया कि क्यों बलूचिस्तान का सुई गैस फील्ड पूरे पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतें पूरी करता है लेकिन खुद बलूचिस्तान में गैस की पहुंच सीमित है।

शायद, डोनाल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर की बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का लालच बलूच जनता पर हो रहे अन्याय से ज्यादा अहम है। BLA आजादी के लिए लड़ रही है लेकिन पाकिस्तान का दमनकारी शासन और अमेरिकी लालच इसके रास्ते में खड़े हैं।

वर्षों से पाकिस्तान ने PoK और अपने दूसरे इलाकों में जिहादी आतंकियों को पाला-पोसा है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों को ताकत दी है। बलूच लोगों पर जुल्म किया है, जबरन गायब किया है और महरंग बलूच जैसे कई नेताओं को गिरफ्तार किया है। अब पाकिस्तानी सेना को बलूच जनता का शोषण और दमन करने का एक नया मौका मिल गया है। अमेरिका को शायद एक नई जगह मिल गई है जहाँ वह अपने कभी ना खत्म होने वाले युद्ध चला सके जिनसे उसकी हथियार बनाने वाली इंडस्ट्री को फायदा होता है।

आसिम मुनीर असल में एक फौजी वर्दी में मसूद अजहर या हाफिज सईद जैसा ही है। कोई हैरानी नहीं कि ट्रंप भारत से नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत जैसे बराबरी के साझेदार के बजाय पाकिस्तान जैसे झगड़ों में उलझे हुए गुलाम मुल्क पसंद हैं, जिन्हें हड्डी फेंककर खुश करना आसान है। एक आजाद, मजबूत और गर्व से भरे भारत के साथ इज्जत से रिश्ता निभाना ट्रंप को यकीनन मुश्किल ही लगेगा।

(मूल रूप से यह खबर अंग्रेजी में श्रद्धा पांडेय द्वारा लिखी गई है, जिसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।)

हमारे मतदाताओं के लिए ‘वोट चोर’ जैसे गंदे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करें राहुल गाँधी: चुनाव आयोग, कॉन्ग्रेस नेता को याद दिलाया 73 साल पुराना कानून

चुनाव आयोग ने ‘वोट चोरी’ के राहुल गाँधी समेत तमाम विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया है। आयोग ने हाल में किए गए दावों को भ्रामक और गलत करार दिया है। बिहार में SIR का शुरुआत से विरोध कर रहे विपक्ष और कर्नाटक में वोट चोरी का आरोप लगा रहे राहुल गाँधी की पोल फैक्ट चेक के जरिए चुनाव आयोग ने खोली है। आयोग ने चुनौती दी है कि अगर कोई सबूत है तो उन्हें दिखाएँ, लोगों को गुमराह न करें।

आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में कोई भी नाम कानूनी प्रमाण के बिना न ही हटाया या जोड़ा जा सकता। मतदाता सूची कानून का सख्ती से पालन करते हुए तैयार की जाती है। इसमें नाम जोड़ना या हटाना ‘मतदाता पंजीकरण 1960’ के तहत किया जाता है। बिहार में SIR को लेकर चुनाव आयोग का कहना है कि 14 अगस्त तक एक भी शिकायत किसी राजनीतिक पार्टी ने दर्ज नहीं कराई है।

विपक्ष संसद से सड़क तक वोटर लिस्ट में नाम काटने के नाम पर बवाल कर रहा है। चुनाव आयोग ने 1 अगस्त से एक महीने तक किसी भी तरह की शिकायत होने पर राजनीतिक दलों को दर्ज कराने को कहा है। 14 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी आपत्ति या शिकायत कोई भी पार्टी दर्ज नहीं करा पाई है।

बिहार में जमीन पर विपक्ष के कार्यकर्ता जो बीएलए हैं, उन्होंने भी प्रक्रिया पर संतुष्टि जताई है। लेकिन राहुल गाँधी को बस चुनाव प्रक्रिया पर हमला कर जनता के लोकतंत्र पर विश्वास को तोड़ने की ही कोशिश में लगे हुए हैं। ये लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण भी दिया है।

चुनाव आयोग का कहना है कि ‘एक व्यक्ति एक वोट’ का कानून 1951-1952 में भारत के पहले चुनाव से ही अस्तित्व में है। अगर किसी के पास किसी भी चुनाव में किसी व्यक्ति द्वारा दो बार वोट देने का कोई सबूत है, तो उसे बिना किसी सबूत के भारत के सभी मतदाताओं को ‘चोर’ बताने के बजाय, एक लिखित हलफनामे के साथ चुनाव आयोग के साथ साझा किया जाना चाहिए।

आयोग ने वोट चोर शब्द पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा, “हमारे मतदाताओं के लिए ‘वोट चोर’ जैसे गंदे शब्दों का इस्तेमाल करके एक झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश करना लाखों चुनाव कर्मचारियों की ईमानदारी पर भी हमला है। साथ ही ये करोड़ों भारतीय मतदाताओं पर सवाल खड़े करना है।” चुनाव आयोग का जवाब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने ‘वोट चोरी’ का आरोप चुनाव आयोग पर लगाया था।

थैंक्यू CM योगी…मेरे पति के हत्यारे को मिट्टी में मिलाया: अतीक मामले में SP MLA पूजा पाल ने विधानसभा में खुल कर की तारीफ, कहा – माफिया के खिलाफ दिलाया न्याय

समाजवादी पार्टी की विधायक पूजा पाल ने विधानसभा में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की है। पाल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीएम ने उनके पति के हत्यारे को मिट्टी में मिलाने का काम किया और उन्हें न्याय दिलाया।

जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा में ‘विजन डॉक्यूमेंट 2047’ को लेकर चर्चा की जा रही है। इसी चर्चा के बीच समाजवादी पार्टी की विधायक पूजा पाल ने सीएम योगी की तारीफ करती नजर आई।

विधायक ने कहा, “मेरे पति की हत्या किसने की? मैं मुख्यमंत्री का शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ कि उन्होंने मुझे न्याय दिलाया और मेरी बात तब सुनी जब किसी ने नहीं सुनी।” 

रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति की सराहना करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में जीरो टॉलरेंस जैसी नीतियाँ लागू करके मुझ जैसी कई महिलाओं को न्याय दिलाया, जिसके कारण अतीक अहमद जैसे अपराधी मारे गए।”

पूजा पाल ने आगे कहा, “आज पूरा प्रदेश मुख्यमंत्री की ओर भरोसे से देखता है। मैंने तब आवाज उठाई जब मैंने देखा कि कोई भी अतीक अहमद जैसे अपराधियों के खिलाफ लड़ना नहीं चाहता। जब मैं इस लड़ाई से थकने लगी, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे न्याय दिलाया।”

बता दें कि पूजा पाल के पति राजू पाल की अतीक अहमद और उसके गुर्गों ने दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। मामले में पूजा पाल ने कहा, “बहुत ही कम उम्र में शादी के 9वें दिन मेरे पति की हत्या की गई थी। प्रयागराज में जो कोई भी नहीं सोचता था, वो हुआ।”

उन्होंने कहा, “मैं बहुत गरीब परिवार से आती हूँ, लेकिन वहाँ की जनता ने अपना पैसा लगाकर मुझे चुनाव लड़ाया और जिताया। मैं अकेली माफिया अतीक अहमद से लड़ी थी, मैंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। हनुमान जी को मानने वाले हमारे प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने मेरे साथ इंसाफ किया और न्याय दिलाया।”