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दुनिया की सड़कों पर राज करेगी e-Vitara SUV, 100+ देशों को होगी एक्सपोर्ट: Make In India का ग्लोबल EV कार मार्केट में बजेगा डंका, PM मोदी ने Maruti Suzuki की फैक्ट्री का किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मारुति सुजुकी की पहली ग्लोबल इलेक्ट्रिक कार e- Vitara SUV को लॉन्च के लिए हरी झंडी दिखाई। पूरी तरह भारत में निर्मित ये इलेक्ट्रिक कार अब गुजरात से 100 से अधिक देशों में निर्यात की जाएगी। इनमें यूरोप और जापान जैसे दुनियाभर के विकसित बाजार भी शामिल हैं।

मंगलवार (26 अगस्त 2025) को पीएम नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय गुजरात के दौरे के दूसरे दिन हसंलपुर स्थित सुजुकी मोटर प्लांट पहुँचे। यहाँ दो स्वदेशी परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें मारुति सुजुकी के e- Vitara को निर्यात के लिए हरी झंडी दिखााई। इसके अलावा हाईब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड बनाने वाले पहले TDS लिथियम-आयन बैटरी प्लांट का भी उद्घाटन किया।

उद्घाटन कार्यक्रम से पहले पीएम मोदी ने एक्स/ट्विटर पर लिखा, “आज का दिन भारत की आत्मनिर्भरता और ग्रीन मोबिलिटी का केंद्र बनने की दिशा में बेहद खास है। हंसलपुर में आयोजित कार्यक्रम में e-VITARA को फ्लैग ऑफ किया जाएगा। यह बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV) पूरी तरह भारत में बना है और इसे 100 से अधिक देशों में निर्यात किया जाएगा। हमारी बैटरी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए गुजरात के एक संयंत्र में हाइब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड का उत्पादन भी शुरू होगा।”

e-Vitara में दो बैटरी ऑप्शन, सितंबर में लॉन्च के लिए तैयार

CarDekho के मुताबिक, पूरी तरह से भारत में निर्मित मारुति सुजुकी की e-Vitara सितंबर 2025 में लॉन्च के लिए तैयार है। इसकी अनुमानित कीमत 17 से 23 लाख रुपए के बीच तय की गई है। ये इलेक्ट्रिक SUV गुजरात में मैन्युफैक्चर होकर देशभर और विदेशों में भी निर्यात की जाएगी।

e-Vitara को पहली बार साल 2024 में ग्लोबल स्तर पर यूरोप में पेश किया गया था। इसके अलावा भारत मोबिलिटी शो 2025 में भी प्रदर्शित किया गया था। ये इलेक्ट्रिक कार 40PL समर्पित EV प्लेटफॉर्म पर बनाई गई है, जिसमें टोयोटा का भी सहयोग है।

ये इलेक्ट्रिक SUV 49kWh और 61kWh के दो बैटरी ऑप्शन में मिलेगी। बड़ी बैटरी डुअल-मोटर AWD (AllGrip-e) कॉन्फिगरेशन में उपलब्ध होगी। इसके वेरिएंट, फीचर्स और भारत में लॉन्च की सही तारीख के बारे में जानकारी जल्द ही सामने आने की उम्मीद है। लॉन्च होने के बाद इसका मुकाबला महिंद्रा BE6, हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक, MG ZS EV और अन्य जैसी इलेक्ट्रिक कारों से होगा।

640 एकड़ में फैला मोटर प्लांट, हर साल 7.5 लाख कार का उत्पादन


जिस मारुति सुजुकी के हंसलपुर स्थित मोटर प्लांट में पीएम मोदी ने भारत में निर्मित पहली इलेक्ट्रिक कार को हरी झंडी दिखाई। वह प्लांट 640 एकड़ में फैला हुआ है। प्लांट की उत्पादन क्षमता हर साल करीब 7.5 लाख यूनिट है, जो इस नए e-Vitara का उत्पादन के शुरू होने के बाद और भी बढ़ जाएगी।

मारुति सुजुकी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में 67000 इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रोडक्शन का टार्गेट रखा है। इसका बड़ा हिस्सा निर्यात में जाएगा। इसके अलावा इस दशक के अंत तक कंपनी ने प्रोडक्शन क्षमता को लगभग दोगुना करके 40 लाख कारों तक पहुँचाने की भी योजना का ऐलान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्लांट साल 2014 में शुरु किया गया। प्लांट में सबसे पहले मारुति सुजुकी की बलेनो कार का उत्पादन हुआ। फिर जनवरी 2018 में नेक्सट जेनरेशन मारुति सुजुकी स्विफ्ट हैचबैक का प्रोडक्शन शुरू किया गया।

बड़े निवेशकों को मुफ्त में जमीन, 300% SGST की प्रतिपूर्ति और 1 करोड़ युवाओं को रोजगार: बिहार की नीतीश सरकार ने किया ‘BIPPP-2025’ का ऐलान, जानें कब हैं आवेदन की अंतिम तिथि

बिहार में औद्योगिक विकास के मद्देनजर और युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज (26 अगस्त 2025) ‘बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 (BIPPP-2025)’ की घोषणा की। इस पॉलिसी के तहत राज्य में उद्योगों को और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई रियायत दी जाएँगी।

इस फैसले के तहत बिहार में 40 करोड़ रुपए तक के निवेश पर ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही नई इकाइयों को स्वीकृत परियोजना लागत का 300% तक शुद्ध SGST की प्रतिपूर्ति 14 वर्षों तक की जाएगी। इसके अतिरिक्त, 30% तक पूंजीगत सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी।

नई नीति के तहत निर्यात प्रोत्साहन की सीमा 14 वर्ष की अवधि के लिए 40 लाख रुपए प्रतिवर्ष की गई है। इसके अलावा कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग, स्टाम्प ड्यूटी एवं भूमि रूपांतरण शुल्क की प्रतिपूर्ति, निजी औद्योगिक पार्कों को सहयोग, पेटेंट पंजीकरण एवं गुणवत्ता प्रमाणन हेतु सहायता देने का भी ऐलान किया गया है।

बिहार में निवेश को बढ़ावा देने के लिए इस नई नीति के तहत ये भी निर्णय लिया गया है कि बड़े निवेशकों जैसे 100 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली एवं 1000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने वाली औद्योगिक इकाइयों को 10 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी।

इसके अलावा 1000 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली औद्योगिक इकाइयों को 25 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी। फॉर्च्यून 500 कंपनियों को 10 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी।

इस योजना के लाभ के लिए निवेशकों के 31 मार्च 2026 से पहले आवेदन करना होगा। सरकार का उद्देश्य है कि उनके इस कदम से 5 वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को राज्य के भीतर रोजगार देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

‘वनतारा’ की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई SIT, 12 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट: जानवरों की अवैध खरीद-फरोख्त और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 अगस्त 2025) को रिलायंस फाउंडेशन के स्वामित्व वाले वनतारा ग्रीन जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर के खिलाफ लगे आरोपों की जाँच के लिए एक विशेष जाँच टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह SIT सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस चेलमेश्वर के नेतृत्व में काम करेगी। टीम में तीन अन्य सदस्यों में उत्तराखंड और तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य जज जस्टिस राघवेंद्र चौहान, मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर हेमंत नगराले, और भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी आनंद गुप्ता शामिल हैं।

क्या है मामला और कोर्ट ने क्या दिया आदेश?

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पंकज मित्थल और प्रसन्ना बी वरले की बेंच ने कुछ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिनमें वनतारा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जैसे, भारत और विदेश से अवैध तरीके से जानवरों खासकर हाथियों को लाना, जानवरों के साथ बुरा व्यवहार इसके अलावा वित्तीय अनियमितताएँ और मनी लॉन्ड्रिंग।

कोर्ट ने माना है कि याचिकाएँ मुख्यतः समाचार रिपोर्ट्स, सोशल मीडिया पोस्ट्स और NGOs की शिकायतों पर आधारित थीं और उनके पास अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं। लेकिन चूँकि आरोप सरकार के कुछ विभागों जैसे सेंट्रल जू अथॉरिटी और CITES (वन्यजीवों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संधि) से भी जुड़े हैं, इसलिए कोर्ट ने निष्पक्ष जाँच को जरूरी समझा है।

SIT को जिन बिंदुओं की जाँच करनी है, उनमें शामिल है:

1. भारत और विदेश से, खासकर हाथियों की खरीद की प्रक्रिया।

2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और जू के नियमों का पालन।

3. CITES और अन्य आयात/निर्यात नियमों का पालन।

4. पशुपालन, पशु चिकित्सा, जानवरों की देखभाल के मानदंड, मृत्यु दर और उसके कारण।

5. औद्योगिक क्षेत्र के पास होने और मौसम की स्थिति से जुड़े आरोप।

6. निजी संग्रह/शौक के लिए जानवरों का इस्तेमाल, संरक्षण और जैव विविधता से जुड़े आरोप।

7. पानी और कार्बन क्रेडिट के दुरुपयोग की शिकायतें।

8. वन्यजीवों की तस्करी, जानवरों/उनके अंगों के व्यापार, कानूनों के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतें।

9. वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी शिकायतें।

10. याचिकाओं में दिए गए अन्य सभी मुद्दे।

कोर्ट ने केंद्र सरकार, गुजरात सरकार, पर्यावरण मंत्रालय, सेंट्रल जू अथॉरिटी और CITES प्रबंधन प्राधिकरण को SIT को पूरा सहयोग देने का आदेश दिया है।

SIT को वनतारा सेंटर का भौतिक निरीक्षण भी करना होगा और पूरी जाँच के बाद अपनी रिपोर्ट 12 सितंबर 2025 तक सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी होगी। वहीं अगली सुनवाई 15 सितंबर 2025 को होगी।

बता दें कि यह जाँच केवल तथ्यों की जाँच के लिए है, जिससे कोर्ट को सच्चाई पता चले और आगे उचित आदेश दिया जा सके। कोर्ट ने अभी तक लगाए गए आरोपों को सही या गलत नहीं माना है।

3 हजार एकड़ में फैला प्राकृतिक इकोसिस्टम ‘वनतारा’

वनतारा सेंटर की स्थापना मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी ने की थी और यह रिलायंस फाउंडेशन की एक पहल है। इसका उद्देश्य जानवरों को बचाना, उनकी देखभाल करना और पुनर्वास देना है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर और मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी ने 26 फरवरी 2024 को अपने खास प्रोजेक्ट ‘वनतारा (जंगल के सितारे)’ की सार्वजनिक घोषणा की थी। यह प्रोजेक्ट गुजरात के जामनगर में बनाया गया है और इसका उद्देश्य जानवरों का बचाव और पुनर्वास करना है।

वनतारा एक प्राकृतिक इकोसिस्टम है जो करीब 3000 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें से 600 एकड़ सिर्फ हाथियों के लिए बनाया गया है। यहाँ पर अब तक 200 से ज्यादा हाथियों को देश के अलग-अलग हिस्सों से लाकर बसाया गया है। इसके अलावा 43 प्रजातियों के 2000 से अधिक जानवर यहाँ रह रहे हैं, जिनमें 300 से ज्यादा तेंदुए, शेर, बाघ और 300 से अधिक शाकाहारी जानवर शामिल हैं।

मीडिया से बातचीत करते हुए अनंत अंबानी ने बताया था कि उन्होंने कोविड महामारी के दौरान जानवरों को बचाने का काम शुरू किया था। उन्हें जानवरों की सेवा करने की प्रेरणा बचपन में उनके माता-पिता से मिली।

इसे बनाने और जानवरों की सेवा को लेकर अनंत ने कहा था कि जानवरों की सेवा करना भगवान की सेवा के बराबर है, क्योंकि हिंदू धर्म में जानवरों को देवताओं से जोड़ा गया है, जैसे माता दुर्गा का वाहन शेर, लक्ष्मी माता का उल्लू, सरस्वती माता का मोर और श्रीकृष्ण का जुड़ाव गाय-बछड़ों से है।

यहाँ पर एक आधुनिक पशु चिकित्सालय भी बनाया गया है, जिसमें MRI और CT स्कैन मशीनें, एंडोस्कोपिक रोबोटिक सर्जरी तकनीक, 6 सर्जरी सेंटर और कृत्रिम अंग लगाने की सुविधाएँ मौजूद हैं।

दिल्ली से ‘मुर्दों की तलाश में’ बिहार गया यूट्यूबर, INDI गठबंधन के लिए खोज रहा ‘मसाला’; पर मोदी-नीतीश के ‘स्तुतिगान’ को होना पड़ा मजबूर

खुद को पत्रकार कहने वाले यूट्यूबर अजीत अंजुम का एजेंडा एकदम क्लियर है। जो लाइन माई-बाप (INDI गठबंधन) खींच दे उसको पकड़कर चलना। बिहार में इस लाइन पर चलते-चलते अजीत अंजुम रोजाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों का बखान करने को भी मजबूर हैं।

बिहार में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव ‘वोट चोरी’ का कैंपेन चला रहे हैं। इसे देखते हुए अजीत अंजुम भी ‘मुर्दों की तलाश में’ बिहार घूम रहे हैं ताकि अपने ‘माई-बाप’ के प्रोपेगेंडा को हवा दे सके। इसमें उन्हें महत्ती कामयाबी अब तक तो नहीं मिली है, लेकिन बिहार की चकाचक सड़कों को इस चुनावी मौसम में खूब प्रचार मिल रहा है।

इससे पहले अजीत अंजुम बिहार उस समय भी गए थे, जब मतदाता सूची पुनरीक्षण (बिहार SIR) की प्रक्रिया चल रही थी। उस समय जबरन एजेंडा ठूँसने के फेर में वे अपने ऊपर केस करवाकर दिल्ली लौट आए थे। अब उनके ‘माई-बाप’ ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू की है तो वे भी बिहार लौट आए हैं। एक-जगह से दूसरी जगह दौड़ रहे हैं ताकि ‘माई-बाप’ के लिए कुछ मसाला का जुगाड़ हो सके।

इसी क्रम में ​एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में अजीत अंजुम ने लिखा, “बिहार में सड़कें बहुत अच्छी बन गई हैं और लगातार बन रही है। लंबा सफर पहले की तुलना काफी आसान हो गया है। एक वक्त था जब हम लोग सोचते थे कि हरियाणा-पंजाब में इतनी अच्छी सड़कें हैं तो बिहार में क्यों नहीं हो सकती। मोदी राज में हाईवे का काफी बेहतर विस्तार हुआ है।”

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा है, “बेगूसराय से पटना जाना अब बहुत आसान हो गया है। सिमरिया का ये नया पुल इस रूट से सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि है। पीएम मोदी ने दो दिन पहले इसी पुल का उद्घाटन किया था।”

इसके अलावा भी बिहार की अपनी यात्रा की जानकारी को साझा करने के लिए उन्होंने कई पोस्ट किए हैं जो राज्य में विकास कार्यों की तस्वीर दिखाते हैं। अजीत अंजुम खुद भी बिहार से हैं। उसी बिहार से जहाँ का मुख्यमंत्री हेमा मालिनी की गाल जैसी सड़कें बनवाने की बात करता था, पर सड़क और गड्ढों का अंतर मिट गया था। बिना हिचकोले खाए, कमर तोड़े कोई सफर पूर्ण नहीं होती थी। आज उसी बिहार की सड़कों पर अजीत अंजुम सरपट भाग रहे हैं।

उसी बिहार की सड़कों पर राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव बुलेट दौड़ा रहे हैं, जबकि इनकी पार्टियों के राज्य में बिहार के लोगों ने गड्ढों को ही सड़क मान लिया था। पर अजीत अंजुम के पोस्ट केवल सड़कों के ही बारे में नहीं बताते। ये बिहार की कानून-व्यवस्था के बारे में भी बताते हैं।

अजीत अंजुम ने लालू-राबड़ी का जंगलराज भी देखा है। वे बखूबी जानते हैं कि एक जज पुत्र होने के बावजूद उस दौर में वे बिहार में इतनी सुगमता से सफर नहीं कर सकते थे। इतना ही नहीं हर समय अनहोनी की आशंका भी बनी रहती थी। आज रात में भी बिना किसी आशंका के सफर कर सकते हैं। सड़क किनारे अपनी गाड़ी रोककर सत्तू का आनंद ले सकते हैं। यह बताता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में भी व्यापक बदलाव आया है।

नीतीश कुमार के इधर-उधर होने वाले छिटपुट कालखंडों को छोड़ दें तो बिहार के एनडीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि ही यही है कि कटु से कटु आलोचक भी इस बात को खारिज नहीं कर पाते कि बिहार में विकास नहीं हुआ है। उन लोगों के लिए तो ये सब कुछ स्वप्न सरीखा है, जिन्होंने लालटेन युग को ही अपनी नियति मान ली थी।

इसलिए अब कोई भी तंज कसते हुए आपसे ‘विकास’ का पता पूछे तो उसे एक बार बिहार की यात्रा पर जाने की सलाह जरूर दीजिएगा।

7 दिन बीत गए, राहुल गाँधी ने चुनाव आयोग को न दिया हलफनामा-न देश से माँगी माफी: बगैर सबूत ही ‘वोट चोरी’ का प्रोपेगेंडा फैला रहा INDI गठबंधन

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और उनकी INDI गठबंधन ने हाल में चुनाव प्रक्रिया और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने ‘वोट चोरी’, ‘जनता को वोट देने से वंचित करना’, और ‘चुनाव आयोग और भाजपा की मिलीभगत’ जैसे नारे और बयान दिए। उन्होंने यहाँ तक कहा, ‘बच्चे तक मुझसे कह रहे हैं – वोट चोर, गद्दी छोड़।’

इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने 17 अगस्त 2025 को राहुल गाँधी से एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर अपने दावों के सबूत पेश करने या फिर पूरे देश से माफी माँगने को कहा था। यह समय सीमा 25 अगस्त 2025 को समाप्त हो गई।

अब तक राहुल गाँधी ने न तो कोई सबूत दिए और न ही माफी माँगी। इसके बाद चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “राहुल के वोट चोरी के आरोपों को अब अमान्य मानते हुए आगे कोई कार्यवाही की आवश्यकता नहीं है।”

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को सख्त लहजे में कहा था कि या तो वो अपने आरोपों को साबित करने के लिए हलफनामा दें या फिर देश से माफी माँगें। उन्होंने साफ कहा कि अगर सात दिनों में हलफनामा नहीं मिला, तो इसका मतलब है कि ये सारे आरोप बेबुनियाद हैं।

ज्ञानेश कुमार ने यह भी बताया था कि अगर किसी को चुनाव परिणाम पर आपत्ति है, तो वह 45 दिनों के भीतर संबंधित हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर सकता है, लेकिन किसी भी विपक्षी नेता या उम्मीदवार ने उस समय कोई आपत्ति नहीं उठाई।

SIR अभियान और विपक्ष की राजनीति

बता दें कि बिहार में चल रहे विशेष पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision – SIR) के जरिए चुनाव आयोग मतदाता सूची की गड़बड़ियों को सुधार रहा है। इसमें मतदाता, राजनीतिक दल और बूथ लेवल अधिकारी साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

बिहार में कॉन्ग्रेस और राजद की महागठबंधन सरकार इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि यह अभियान फर्जी वोटरों को हटाकर असली वोटरों का अधिकार सुरक्षित करने का काम कर रहा है। इसमें कई विदेशी नागरिकों का भी पता चला है जो आधार कार्ड और अन्य भारतीय दस्तावेजों के सहारे वोटर बने हुए थे।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि उनके दल द्वारा की गई रिसर्च में आपराधिक सबूत मिले हैं, जिससे साफ होता है कि भारत में चुनाव आयोग (ECI) लोकतंत्र को नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग की कार्रवाई देशभर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर रही है।

इसके जवाब में महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) ने राहुल गाँधी से एक हस्ताक्षरित घोषणा-पत्र, शपथपत्र या हलफनामा माँगा, जिसमें वह उन वैध वोटरों के नाम दें जिन्हें सूची से बाहर कर दिया गया हो, और ऐसे लोगों के नाम भी दें जो अपात्र होते हुए भी वोटर लिस्ट में शामिल हैं।

राहुल गाँधी लगातार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते आ रहे हैं। वे दावा करते हैं कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हो रही है और इससे जनता का लोकतंत्र से भरोसा उठ रहा है। लेकिन उनके ज्यादातर दावे अब तक झूठे और बेबुनियाद साबित हुए हैं। ऐसा लगता है कि ये एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे लोगों को भड़काकर कुछ वोट हासिल किए जा सकें।

SIR  के दौरान विपक्षी दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) ने भी इस प्रक्रिया पर भरोसा जताया था। इसके बावजूद कॉन्ग्रस और राहुल गाँधी आरोप लगाते रहे, लेकिन कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सके। अब चुनाव आयोग ने साफ किया है कि कॉन्ग्रस की ओर से SIR को लेकर कोई लिखित शिकायत नहीं आई है।

राहुल गाँधी ने यह भी दावा किया कि कई फर्जी वोटर लिस्ट में ‘हाउस नंबर 0’ लिखा है, जो संदिग्ध है। जबकि चुनाव आयोग ने बताया कि यह उन लोगों के लिए किया जाता है जिनके पास स्थायी या स्पष्ट पता नहीं होता, जैसे बेघर, किराएदार, या जिनके मकान का नंबर नहीं है। ये प्रावधान पहले से हैं और कानूनन मान्य हैं।

राहुल गाँधी के आरोप बार-बार चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ दल को बदनाम करने के लिए लगाए जा रहे हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में कोई ठोस सबूत नहीं मिलते। आयोग ने हर बार तथ्यों और रिकॉर्ड के साथ जवाब दिया है, जबकि कॉन्ग्रेस ने ज्यादातर मामलों में औपचारिक शिकायत तक नहीं की। इससे यह स्पष्ट होता है कि ये आरोप ज्यादातर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं, न कि किसी सच्ची समस्या का समाधान खोजने की कोशिश।

पश्चिम बंगाल में अपराधियों को नहीं कानून का खौफ, एक्स बॉयफ्रेंड ने पूर्व प्रेमिका के घर में घुसकर मारी 2 गोलियाँ: पुलिस की गिरफ्त से बाहर है हत्यारा, उठ रहे ममता सरकार के काम पर सवाल

पश्चिम बंगाल में अपराधिक घटनाए बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में नदिया जिले से हत्या का मामला सामने आया है। यहाँ जिले के कृष्णानगर शहर में छात्रा की घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतका की पहचान 12वीं की छात्रा ईशिता मलिक के रूप में हुई है। पुलिस 23 वर्षीय आरोपित देबराज सिंह की तलाश में जुटी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सोमवार (25 अगस्त 2025) दोपहर करीब 2.30 बजे की है। जब छात्रा घर पर अकेली थी। इसका फायदा उठाकर आरोपित ने घर में घुसकर छात्रा को गोली मारी और फरार हो गया। गोली लगने से छात्रा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सूचना पर पुलिस ने पहुँचकर शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए भेज दिया है।

मामले में कृष्णानगर के एसपी के अमरनाथ ने बताया, “कृष्णानगर महिला कॉलेज की छात्रा ईशा को उसकी माँ ने ड्रॉइंग रूमें में खून से लथपथ पाया। देबराज को हाथ में देसी रिवॉल्वर लेकर भागते देखा गया। छात्रा के शरीर पर दो गोलियों के निशान मिले हैं।”

NEET की तैयारी कर रही थी छात्रा

19 साल की छात्रा इशिता मलिक काफी समय से उत्तर 24 परगना जिले में रहकर पढ़ाई कर रही थी। कुछ समय पहले ही अपने घर कृष्णानगर लौटी थी। यहाँ साल 2023 विक्टोरिया कॉलेज में छात्रा का दाखिला हुआ था लेकिन NEET की तैयारी के चलते कॉलेज ज्वाइन नहीं किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छात्रा का देबराज सिंह नाम के युवक से रिलेशनशिप था लेकिन वह इसे खत्म कर चुकी थी। बावजूद इसके देबराज छात्रा से बात करने का दबाव बनाने लगा। पुलिस की शुरुआती जाँच में भी हत्या का कारण प्रेम-प्रसंग ही सामने आया है।

नजदीक से मारी गई गोली

हत्या के सामने आए वीडियो के मुताबिक छात्रा को काफी नजदीक से गोली मारी गई है। पुलिस ने भी बताया कि छात्रा को आरोपित ने बेहद पास से (प्वाइंट ब्लैक रेंज) से गोली मारी है। फिलहाल छात्रा के शव को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।

वहीं घटना के बाद से आरोपित देबराज सिंह फरार है। पुलिस ने हत्या के मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरु कर दी है।

बंगाल में अपराध पर नहीं कोई लगाम

पश्चिम बंगाल में आए दिन अपराधिक घटनाएँ सामने आ रही हैं। प्रदेश की ममता सरकार अपराध पर लगाम लगाने के लिए कोई एक्शन नहीं ले रही है। राज्य में हिंदुओं के साथ अत्याचार किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों रेप और हत्या के काफी मामले सामने आए हैं और ममता सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। सरकार को अपराध पर नकेल कसने की जरूरत है।

‘गुजरात की धरती 2 मोहन की, एक सुदर्शन-चक्रधारी और दूसरे चरखाधारी, इनके दिखाए रास्ते पर चल रहा भारत’: Make In India की अपील कर बोले PM मोदी- जो देश में बना, वही उपहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (25 अगस्त 2025) को दो दिन के दौरे पर गुजरात पहुँचे। यहाँ अहमदाबाद के खोडलधाम मैदान में ₹5400 करोड़ की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान जनता को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि गुजरात दो मोहनों की धरती है, एक है सुदर्शन चक्रधारी मोहन और दूसरे चरखाधारी मोहन।

पीएम ने कहा, “गुजरात की यह धरती दो मोहनों की धरती है। एक हैं सुदर्शन चक्रधारी मोहन, हमारे द्वारकाधीश श्री कृष्ण और दूसरे हैं चरखाधारी मोहन, साबरमती के संत पूज्य बापू (महात्मा गांधी)। इन दोनों के दिखाए मार्ग पर चलकर भारत निरंतर सशक्त हो रहा है।”

प्रधानमंत्री आगे कहते हैं, “सुदर्शन चक्रधारी मोहन ने हमें देश और समाज की रक्षा करना सिखाया है। उन्होंने सुदर्शन चक्र को न्याय और सुरक्षा का कवच बनाया, जो दुश्मन को ढूँढकर उसे दंड देता है। आज देश, भारत के निर्णयों में उसी भावना का अनुभव कर रहा है। देश ही नहीं, दुनिया इसे अनुभव कर रही है…”

PM की त्योहारों पर देशवासियों से ‘स्वदेशी’ अपनाने की अपील

पीएम ने पूरे देश ‘मेक इन इंडिया’ की अपील की और व्यापारियों से स्वदेशी माल बनाने और बेचने पर जोर देने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने कहा, “2047 तक देश 100 वर्ष पूरा करेगा और विकसित भारत बन जाएगा। इसके लिए स्वदेशी अपनाना होगा। अब नवरात्रि, धनतेरस, दीपावली… आदि त्योहार आ रहे हैं। ये आत्मनिर्भर के त्योहार हैं।”

PM ने कहा, “देशवासियों से अपील है कि जीवन में मंत्र बनाओ की जो भी खरीदेंगे मेड इन इंडिया होगा। चाहे वो घर की सज्जा के लिए सामान हो, दोस्त के लिए उपहार हो….। उपहार वही जो भारत में बना हो।”

देशभर के व्यापारियों और दुकानदारों से पीएम ने कहा कि वे देश को आगे बढ़ाने के लिए बहुत बड़ा योगदान कर सकते हैं। पीएम ने अपील की, “व्यापारी और दुकानदार विदेशी सामान न बेचे। साथ ही दुकान पर बोर्ड लगाइए कि हमारे यहाँ स्वदेशी सामान बिकता है। जो मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन करते हैं उन लोगों से आग्रह है कि गुणवत्ता सुधारे और कीमत कम करें। मैं यकीन से कहता हूँ कि हर भारतीय आपसे सामान खरीदेगा।”

पीएम ने कॉन्ग्रेस पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। पीएम ने कहा, “चरखाधारी मोहन, हमारे पूज्य बापू ने स्वदेशी के माध्यम से भारत की समृद्धि का मार्ग दिखाया था। यहाँ हमारा साबरमती आश्रम है, ये आश्रम इस बात का साक्षी है कि जिस पार्टी (कॉन्ग्रेस) ने उनके नाम पर दशकों तक सत्ता का आनंद लिया, उसने बापू की आत्मा को कुचल दिया।”

स्वदेशी पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “उन्होंने (कॉन्ग्रेस) बापू के स्वदेशी के मंत्र के साथ क्या किया?… जो लोग दिन-रात गाँधी के नाम पर अपनी गाड़ी चलाते हैं, आपने उनके मुंह से एक बार भी स्वच्छता या स्वदेशी शब्द नहीं सुना होगा। यह देश समझ नहीं पा रहा है कि उनकी समझ को क्या हो गया है…।”

सरकार GST रिफॉर्म कर रही है: PM मोदी

दीपावली से पहले व्यापारियों को खुशखबरी देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सरकार GST रिफॉर्म कर रही है। सरकार के इस कदम से व्यापारियों को बहुत सी चीजों पर टैक्स कम हो जाएगा।

GST रिफॉर्म पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “हमारी सरकार GST रिफॉर्म कर रही है और दीवाली से पहले आपको बड़ी भेंट मिलेगी। GST रिफॉर्म के कारण हमारे लघु उद्योगों को बहुत मदद मिलेगी और बहुत सी चीज़ों पर टैक्स कम हो जाएगा। इस दिवाली, चाहे वह व्यापारिक वर्ग हो या हमारे परिवार के बाकी सदस्य, सभी को खुशियों का दोहरा बोनस मिलने वाला है।”

आतंकवादियों के आकाओं को नहीं छोड़ेंगे: PM मोदी

गुजरात की धरती से भी पीएम मोदी ने पाकिस्तान को धमकी दी। पीएम ने कहा, “आज हम आतंकवादियों और उनके आकाओं को नहीं छोड़ेंगे, चाहे वे कहीं भी छिपे हों। दुनिया ने देखा है कि भारत ने पहलगाम का बदला कैसे लिया। भारत ने उन्हें सिर्फ़ 22 मिनट में मिटा दिया। हम सैकड़ों किलोमीटर अंदर गए और आतंकवाद के केंद्र पर हमला किया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर हमारी सेना के पराक्रम और सुदर्शन चक्रधारी मोहन (महात्मा गाँधी) की भारत की इच्छाशक्ति का प्रतीक बन गया है।

पीएम ने ₹1400 करोड़ की कई रेलवे परियोजनाओं की दी सौगात

गुजरात से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ₹1400 करोड़ की कई रेलवे परियोजनाओं की सौगात दी। इनमें ₹530 करोड़ की लागत से बनी 65 किलोमीटर लंबी महेसाणा-पालनपुर रेलवे लाइन का दोहरीकरण, ₹860 करोड़ से बनी 37 किलोमीटर लंबी कलोल-कदी-कटोसन रोड रेल लाइन का परिवर्तन और 40 किलोमीटर बेचराजी-रानुज रेल लाइन शामिल है।

वामपंथ के ‘जहर’ और ममता के मुस्लिम ‘तुष्टिकरण’ ने पश्चिम बंगाल को डुबोया, अब बीजेपी का ‘मॉडल’ ही है आखिरी उम्मीद

पश्चिम बंगाल पहले भारत का एक चमकता हुआ राज्य था। यहाँ की कला, सोच और उद्योग देश में सबसे आगे थी। कोलकाता को भारत की बुद्धि और ज्ञान की राजधानी कहा जाता था। बंगाल के कारखानों में लाखों लोगों को काम मिलता था। यहाँ कई महान राष्ट्रवाद लोग पैदा हुए, जिन्होंने देश को नई दिशा दी थी। इनमें बंकिमचंद्र, स्वामी विवेकानंद, अरविंदो, सुभाष चंद्र बोस और श्यामा प्रसाद मुखर्जी शामिल थे। इन्हीं राष्ट्रवादी लोगों ने भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने का सपना दिखाया था।

लेकिन आज की तस्वीर बहुत अलग है। जो जमीन कभी तरक्की की मिसाल थी, वह अब पीछे रह गई है। बंगाल के युवा अब काम की तलाश में बाहर चले जाते हैं। गाँव सुनसान हो गए हैं क्योंकि काम करने वाले लोग घर छोड़ चुके हैं। राज्य के उद्योग बंद हो गए हैं। जो लोग व्यापार करना चाहते हैं, वे भ्रष्टाचार में फँस जाते हैं। यहाँ की राजनीति अब इस्लामी तुष्टिकरण की ओर झुक गई है। इससे यहाँ रहने वाले आम हिंदू लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

यह बर्बादी किस्मत का खेल नहीं है, बल्कि यह एक धोखा है। पहला धोखा कम्युनिस्टों ने दिया। उन्होंने बंगाल पर 34 साल राज किया और सब कुछ बर्बाद कर दिया। फिर ममता बनर्जी आईं। उन्होंने कम्युनिज़्म की जगह मुस्लिम तुष्टिकरण को अपनाया। इन दोनों ने मिलकर बंगाल की अर्थव्यवस्था और सम्मान को मिटा दिया। अब जो बचा है, वह बंगाल नहीं, जैसा पहले था। यह राज्य अब ‘माँ-माटी-मानुष’ से नहीं चलता। यह अब ‘माइग्रेंट, मिसरूल और ममता’ से चल रहा है। यानि पलायन, बदहाली और गलत नेतृत्व से।

वामपंथी अभिशाप: राष्ट्र से ऊपर वर्ग-युद्ध

34 साल तक लेफ्ट फ्रंट ने बंगाल पर राज किया। उन्होंने मार्क्सवादी सोच से लोगों का दिमाग भरा और उद्योगों को शोषण कहा। कारोबार को दुश्मन की तरह देखा। जो भी बंगाल में कारखाना लगाना चाहता था, उसे डराया गया। टाटा और बिड़ला जैसे बड़े उद्योगपति भी राज्य छोड़कर चले गए। हज़ारों फैक्ट्री बंद हो गईं। लाखों लोग बेरोज़गार हो गए। धीरे-धीरे गरीबी ने जड़ पकड़ ली और बंगाल की तरक्की रुक गई।

मार्क्सवादी सिर्फ उद्योगों के खिलाफ नहीं थे। वो देशभक्ति के भी विरोधी थे। उन्होंने हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया। संस्कृति को भी नीचा दिखाया। उन्होंने दुर्गा पूजा को सिर्फ एक ‘लोक उत्सव’ कहा। लेकिन वो खुद लेनिन की पूजा करते रहे। उन्होंने लोगों के दिल से देश का गर्व निकाल दिया। देश में अवैध घुसपैठियों के लिए रास्ता खोल दिया।

2011 में जब ममता बनर्जी सत्ता में आईं। तब तक बंगाल बहुत बुरी हालत में था। मानो, जैसे कोई मरीज आखिरी साँसें गिन रहा हो। लेकिन ममता बनर्जी ने उसे संभालने की वजह हालात और बिगाड़ दिए। जो राज्य पहले से ही बीमार था, ममता की नीतियों ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया।

ममता का मुस्लिम तुष्टिकरण राज

ममता बनर्जी खुद को बंगाल की ‘दीदी’ कहती हैं। लेकिन सवाल ये है कि वो किसकी दीदी हैं? क्या वो उस बंगाली हिंदू मजदूर की दीदी हैं, जो केरल की ईंट भट्टियों में काम कर रहा है?क्या वो मालदा के उस बेरोजगार नौजवान की दीदी हैं, जो रोज़ काम की तलाश में भटकता है? या फिर वो बांग्लादेश से आए घुसपैठिए की दीदी हैं, जिसे राशन कार्ड, आधार और राजनीति का पूरा सहारा मिला है?

सच बहुत साफ़ है। ममता बनर्जी ने बंगाल को तुष्टिकरण का राज्य बना दिया है। त्योहारों पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। यह पैसा संस्कृति के लिए नहीं, बल्कि वोट खरीदने के लिए दिया जाता है। जो लोग बांग्लादेश से गैरकानूनी तरीके से आए हैं, उन्हें आम नागरिकों से भी ज़्यादा सुविधाएँ मिलती हैं। मदरसों को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन नौजवानों को काम सिखाने वाली ट्रेनिंग पर ध्यान नहीं है। पुलिस का काम सुरक्षा देना है। लेकिन यहाँ पुलिस हिंदुओं को नहीं बचाती, बल्कि हमला करने वालों को बचाती है।

ममता बनर्जी की पार्टी की सांसद सुष्मिता देव ने एक अजीब बात कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का बंगाल से बाहर काम कर रहे मजदूरों की जानकारी लेना ‘नस्लीय भेदभाव’ है। क्या सच में? जब लाखों बंगाली लोग बेरोजगारी के कारण घर छोड़कर बिहार जैसे राज्यों में मजदूरी कर रहे हैं, तब यह सरकार घुसपैठियों का बचाव कर रही है। अपने ही लोगों की मदद नहीं कर रही। इसे सरकार चलाना नहीं कहते। इसे धोखा कहते हैं।

जनसांख्यिकीय टाइम बम

बॉर्डर से जुड़े ज़िले जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर अब बदल चुके हैं। इन जगहों पर अब हिंदू लोग अल्पसंख्यक बन गए हैं। यानि अपनी ही धरती पर वे अब कम संख्या में हैं। यह कोई अचानक हुआ बदलाव नहीं है। यह सब सरकार की योजना का हिस्सा है। यह वोट-बैंक बनाने के लिए किया गया है। घुसपैठियों को बसाकर वोट जुटाए जा रहे हैं और हिंदुओं पर हमला करवाकर उन्हें पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है। जिससे बंगाल की सत्ता ममता बनर्जी के इशारों पर ही चल सके।

हर हिंदू बच्चा जो नौकरी की तलाश में बंगाल छोड़ता है, उसकी जगह एक घुसपैठिया आ जाता है। हर बार जब बंगाली हिंदू पलायन करता है तो उसकी भरपाई बांग्लादेश से आए लोगों से होती है। इसका नतीजा साफ है। बंगाल के अंदर ही धीरे-धीरे एक नया बँटवारा हो रहा है। यह वही चेतावनी है जो आरएसएस ने बहुत पहले दी थी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1947 में कहा था कि अगर तुष्टिकरण नहीं रोका गया तो हिंदू अपने ही देश में दूसरे दर्जे के नागरिक बन जाएँगे। आज ममता के बंगाल में वही बात सच होती दिख रही है। हिंदू पीछे हट रहे हैं और घुसपैठिए बढ़ते जा रहे हैं।

पलायन की त्रासदी

किसी भी बिल्डिंग साइट को देखिए- चाहे वो बेंगलुरु हो, हैदराबाद या गुरुग्राम। वहाँ आपको बंगाली भाषा सुनाई देगी। ये युवक मुर्शिदाबाद, मालदा, बीरभूम और जलपाईगुड़ी से आए होते हैं। इन्हें मजबूरी में अपना घर छोड़ना पड़ा है। उनकी जमीन उन्हें पेट भरने लायक काम नहीं दे पाती। ये लोग शौक से नहीं, बल्कि मजबूरी से प्रवासी बने हैं।

बंगाल की हालत बहुत दुखद है। पहले बंगाल को ‘पूरब का मैनचेस्टर’ कहा जाता था। अब बंगाल सामान नहीं, बल्कि मजदूर बाहर भेजता है। यहाँ के पढ़े-लिखे युवा दिल्ली में ओला कैब चलाते हैं। जबकि बंगाल में घुसपैठिये सरकारी मदद पा रहे हैं। यह प्रवासन नहीं, अपमान है। ऐसे में ममता बनर्जी केंद्र सरकार को दोष देती हैं। बीजेपी को भी जिम्मेदार ठहराती हैं। ‘बाहरी लोगों’ को भी दोष देती हैं। इस बीच, पूजा के लिए करोड़ों रुपए खर्च करती हैं। अल्पसंख्यकों को खुश करने में भी पैसा लगाती हैं। यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं है। यह संस्कृति के साथ धोखा है।

सिंडिकेट राज: सरकार नहीं, माफिया

अगर बंगाल में कुछ भी अच्छा होने की थोड़ी भी उम्मीद थी, तो TMC ने उसे ‘सिंडिकेट राज’ से खत्म कर दिया। यहाँ कोई भी निर्माण कार्य, व्यापार, या छोटा-मोटा कारोबार तब तक नहीं हो सकता, जब तक TMC के सिंडिकेट को पैसा न दिया जाए। कोयला हो या रेत, स्कूल में नौकरी हो या स्वास्थ्य सेवा, सब कुछ एक माफिया की तरह यहाँ चलाया जाता है।

यहाँ तक कि नौकरियाँ भी बेची जाती हैं। SSC घोटाला, शिक्षक भर्ती घोटाला, और कोयला घोटाला- हर घोटाले से एक बात साफ होती है कि बंगाल को चलाया नहीं जा रहा, बल्कि उसे लूटा जा रहा है। व्यापारी भाग जाते हैं, क्योंकि कोई भी व्यापारी ऐसे नेताओं के साथ काम नहीं करना चाहता। जो नेता जैसे दिखते हैं, लेकिन असल में वह गुंडे हैं।

2011 से 2024 के बीच, 6600 से ज्यादा कंपनियाँ बंगाल छोड़ गईं। यह सिर्फ लोगों का जाना नहीं है, बल्कि एक तरह का पलायन है। बंगाल सिर्फ अपने लोगों को नहीं खो रहा, बल्कि अपनी उम्मीदें भी खो रहा है।

बीजेपी का रास्ता: गौरव और प्रगति साथ-साथ

अब बंगाल को BJP शासित राज्यों से तुलना करके देखते हैं। गुजरात में मोदी ने बड़े बदलाव किए। वहां बंदरगाह, सड़कें, बिजली के प्लांट और फैक्ट्रियाँ बनीं। इससे गुजरात भारत की आर्थिक ताकत बना। योगी के उत्तर प्रदेश को ही देख लीजिए, पहले ये एक बीमार राज्य था, लेकिन आज निवेश का केंद्र बन चुका है। यहाँ ग्लोबस समिट हो रहे हैं और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं। असम में हिमंता सरकार ने गैरकानूनी घुसपैठ और बाल विवाह पर रोक लगाई। साथ ही, असम में आईटी पार्क, मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय बनाए गए। यह BJP का डबल इंजन वाला मॉडल है। यहाँ देशभक्ति और विकास साथ-साथ चलते हैं। संस्कृति में गर्व और अर्थव्यवस्था में समृद्धि। यह RSS की ‘समग्र मानवतावाद’ की सोच को साकार करता है।

यह वहीं प्रगति, विकास है जिसकी जरुरत बंगाल को है। बंगाल को अब मजदूर भेजने की बजाय सामान बेचना चाहिए। घुसपैठियों को खुश करने के बजाय, उसे अपने ही युवाओं को मजबूत बनाना चाहिए। त्यौहारों पर पैसा लुटाने के बजाय, बंगाल को कारखानों, नौकरियों और सम्मान की जरूरत है।

बंगाल की नियति: ममता का मुस्लिम तुष्टिकरण या बीजेपी का प्रगति

आज बंगाल एक चौराहे पर खड़ा है। एक तरफ ममता का रास्ता है, जहाँ सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण, घुसपैठ, पलायन और अपमान है। दूसरी तरफ बीजेपी का रास्ता है, जो विकास, राष्ट्रवाद, सम्मान और गौरव का वादा करता है। सवाल बहुत स्पष्ट है कि क्या बंगाल घुसपैठियों की कॉलोनी बनकर रहेगा या फिर से ज्ञान और प्रगति का केंद्र बनेगा। बंगाल ने भारत को बंकिम, विवेकानंद, सुभाष और श्यामा प्रसाद जैसे महान लोग दिए हैं।

क्या अब यह घुसपैठियों और माफियाओं के सामने हार मान लेगा या फिर एक राष्ट्रवादी सरकार के साथ मिलकर, गौरव और प्रगति के लिए फिर से खड़ा होगा। लोगों का पलायन किस्मत नहीं है, यह ममता के धोखे का नतीजा है। बंगाल का विकास न तो वामपंथ में है और न ही ममता में, बल्कि यह मोदी, योगी, हिमंता और RSS के ‘विकसित भारत’ के सपने में छिपा है। जब तक ऐसा नहीं होता, बंगाल अपनी दुखी हालत में फँसा रहेगा। यह ‘माँ-माटी-मानुष’ नहीं, बल्कि प्रवासी, कुशासन और ममता के भरोसे चलेगा।

डॉ प्रोसेनजित नाथ का यह लेख मूल रूप से ऑपइंडिया अंग्रेजी पर प्रकाशित है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

शेख हसीना की सरकार गिराने के बाद से बांग्लादेश में महिलाओं-बच्चियों के खिलाफ बढ़ा अपराध, 7 माह में 75% बढ़े रेप केस: 2 सालों में गरीबी हुई दोगुनी, आँकड़ों में खुली यूनुस सरकार की पोल

बांग्लादेश इस समय दोहरी त्रासदी से जूझ रहा है। एक ओर मासूम बच्चियों के साथ रेप की घटनाओं में भयानक वृद्धि हुई और दूसरी ओर तेजी से बढ़ती गरीबी। साल 2025 के पहले सात महीनों में देश में बच्चियों के साथ रेप के मामलों में लगभग 75% की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं गरीबी की दर भी 28% के करीब पहुँच गई है, जो महज दो वर्षों में दोगुनी हो चुकी है। यह सब तब हो रहा है जब देश की बागडोर मुहम्मद यूनुस के हाथ में है, जो एक ‘लोकतांत्रिक और पारदर्शी सरकार’ के वादे के साथ सत्ता में आए थे।

रेप के बढ़ते आँकड़े – एक राष्ट्रीय शर्म

बांग्लादेश में बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले में चौंकाने वाली वृद्धि हुई है। मानवाधिकार संगठन आईन ओ सालिश केंद्र (ASK) के आँकड़ों के अनुसार, 2025 के पहले सात महीनों (जनवरी-जुलाई) में 306 लड़कियों के साथ बलात्कार हुआ, जबकि 2024 में इसी अवधि में यह संख्या 175 थी। इसका मतलब है कि केवल सात महीनों में ही बलात्कार के मामलों में लगभग 75% की बढ़ोतरी हुई है।

यह संख्या 2024 के पूरे साल के कुल 234 मामलों को भी पार कर गई है। इनमें से 49 पीड़ित बच्चियाँ 0-6 साल की थीं, 94 बच्चियाँ 7-12 साल की थीं और 103 किशोरियाँ थीं। 30 लड़कों के साथ बलात्कार हुआ, जिनमें से अधिकांश 12 साल से कम उम्र के थे। इनमें मात्र 20 मामलों में केस दर्ज हो सके। बलात्कार के प्रयास के भी 129 मामले सामने आए। कानूनी कार्रवाई की बात करें तो, 306 में से केवल 251 मामलों में ही केस दर्ज हो पाया, यानि 55 बच्चियों को अब तक न्याय नहीं मिल सका। इस भयावह वृद्धि का कारण कमजोर कानून-व्यवस्था और अपराधियों में जवाबदेही की कमी है।

बांग्लादेश में बढ़ती गरीबी

जहाँ एक तरफ अपराध बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ती जा रही है। पावर एंड पार्टिसिपेशन रिसर्च सेंटर (PPRC) के अनुसार, बांग्लादेश में गरीबी दर 2022 के 18.7% से बढ़कर अब 27.93% हो गई है। इसी तरह, अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों का अनुपात भी 5.6% से बढ़कर 9.35% हो गया है। विश्व बैंक का अनुमान है कि 2025 में लगभग 30 लाख और लोग गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं।

जब शेख हसीना सत्ता में थीं, तब बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था जीडीपी वृद्धि के मामले में मजबूत दिख रही थी। वर्तमान में, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार काम कर रही है, जहाँ गरीबी और बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है। मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल के पहले नौ महीनों में 21 लाख से ज्यादा नौकरियाँ खत्म हो गईं, जिनमें से अधिकांश महिलाओं की थीं।

बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमले और अत्याचार की घटनाएँ लगातार हो रही हैं। लूटपाट, मंदिरों पर हमले और धार्मिक मूर्तियों को निशाना बनाना आम बात हो गई है। यूनुस के शासन में, भारत के साथ संबंधों में तनाव भी बढ़ा है, जिससे हिंदुओं की स्थिति और भी नाजुक हो गई है। कुल मिलाकर, बांग्लादेश में यूनुस सरकार के आने के बाद से अपराध और आर्थिक चुनौतियों में कोई खास कमी नहीं आई है, जिससे वहाँ की जनता, खासकर बच्चों और अल्पसंख्यकों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

लाखों का रेप, करोड़ों का कत्लेआम… 1971 में पाकिस्तान ने खून तो बहाया, लेकिन करतूतों को लिए नहीं माँग रहा माफी: बांग्लादेश माँग रहा ₹3.75 लाख करोड़ का मुआवजा, मंत्री बोला – मामला पहले ही सुलझ चुका

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के बांग्लादेश दौरे के बीच ‘संबंध सुधारने की कोशिश’ को धक्का लगा है। ढाका ने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि वह 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हुए अत्याचारों के लिए माफी माँगे। उस वक्त पाकिस्तानी सेना ने लाखों बांग्ला भाषी नागरिकों की हत्या कर दी थी और अनगिनत महिलाओं के साथ बलात्कार किया था। लेकिन पाकिस्तान ने माफी माँगने से साफ इनकार कर दिया है।

1971 के युद्ध के मुद्दे पर पाकिस्तान बोला

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार (23 अगस्त 2025) को ढाका दौरे पर आए डार ने कहा, “1971 के मुक्ति संग्राम से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान पहले ही हो चुका है। 1974 में और फिर 2002 में।” उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच पिछले समझौतों और प्रयासों से इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है।

ढाका ने माँगा 3.75 लाख करोड़ की क्षतिपूर्ति

यूनुस की अंतरिम सरकार में विदेश मंत्री तौहीद हुसैन ने डार के बयान को खारिज कर दिया। ढाका ने पाकिस्तान से अनुरोध किया कि वह 1971 के दौरान पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हुए अत्याचार के लिए माफी माँगे।आपको बता दें कि बांग्लादेश की आजादी के वक्त युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने सामूहिक नरसंहार किया था और हजारों महिलाओं के साथ बलात्कार किया था। यूनुस सरकार ने पाकिस्तान से ‘अविभाजित पाकिस्तान’ की 1971 से पहले की संपत्ति में से बांग्लादेश को उसका हिस्सा यानी3.75 लाख करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति की माँग की।

बांग्लादेश में 1971 का दर्द आज भी गहरा है। पाकिस्तानी सेना ने रक्तपात मचाया था जिसमें लाखों लोग मारे गए और अनगिनत महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ। आधिकारिक माफी की माँग ढाका की विदेश नीति में शामिल है। हर बार जब दोनों देशों के बड़े नेता मिलते हैं तो ये माँग की जाती है। इस बार पाकिस्तानी विदेश मंत्री डार ने इस मुद्दे को ‘ऐतिहासिक रूप से सुलझा लेने’ की बात कही है। जबकि बांग्लादेश के विदेश मंत्री हुसैन इससे सहमत नहीं दिख रहे हैं।

तनाव के बावजूद समझौतों पर हस्ताक्षर

इन मतभेदों के बावजूद, दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौते किए। इनमें आधिकारिक और राजनयिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा आवश्यकता से छूट, व्यापार समझौता, विदेश सेवा संस्थानों के बीच सहयोग, राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के बीच सहयोग और थिंक टैंकों के बीच सहयोग शामिल हैं। दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर भी सहमति बनी।