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पूतना राक्षसी का वध, बुराइयों का अंत और राजघराने की कहानी: जानिए नागपुर में 149 साल से मनाए जा रहे ‘मारबत उत्सव’ का क्या है महत्व, जब बीमारियों को भगाने के लिए ढोल पर नाचता है पूरा शहर

महाराष्ट्र के नागपुर में शनिवार (23 अगस्त 2025) को एक पुरानी परंपरा निभाते हुए ‘मारबत उत्सव’ मनाया गया। हर साल भाद्रपद महीने में मनाया जाने वाला मारबत उत्सव एक पुरानी और अनोखी सांस्कृतिक परंपरा है।

यह त्योहार अपने रंग-बिरंगे जुलूसों और समाज को बुराई के खिलाफ देने वाले संदेशों के लिए जाना जाता है। इस दिन हजारों लोग नागपुर की सड़कों पर इकट्ठा होते हैं। यह त्योहार सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज कुरीतियों को आईना दिखाने का एक अनोखा तरीका भी है।

नागपुर का सुप्रसिद्ध ‘मारबत उत्सव’

नागपुर, जिसे ‘ऑरेंज सिटी’ कहा जाता है, अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के लिए भी मशहूर है। इन्हीं परंपराओं में से एक है मारबत उत्सव। रिपोर्ट के अनुसार, इसकी शुरुआत 1881-85 के बीच हुई थी। हर साल गोकुल अष्टमी पर इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

इस दिन पीली मारबत और काली मारबत तैयार की जाती हैं, काली मारबत को बुराई और बीमारियों का प्रतीक माना जाता है। वहीं पीली मारबत को लोगों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में जाना जाता है। परंपरा है कि इनका जुलूस शहरभर में घुमाया जाता है और फिर बाहर ले जाकर दहन किया जाता है, जिससे बुराइयाँ और बीमारियाँ दूर हो जाती हैं।

मारबत का इतिहास भी दिलचस्प है। कहा जाता है कि पीली मारबत का निर्माण 1885 से शुरू हुआ। उस समय शहर में बीमारियाँ फैली थीं। लोगों का विश्वास था कि इसे बनाने और जलाने से रोगों से मुक्ति मिलती है। वहीं, काली मारबत की परंपरा 1881 से चली आ रही है।

इस उत्सव में बड़ग्या (कचरे से बनाए पुतले) भी शामिल किए जाते हैं। पहले बच्चे इन्हें कागज और घर के कचरे से बनाते थे, बाद में यह परंपरा बड़ों ने भी अपनाई। बड़ग्या और मारबत दोनों को ही बुराई का प्रतीक माना जाता है।

आज भी नागपुर के कई कारीगर पीढ़ी दर पीढ़ी मारबत का निर्माण करते हैं। जुलूस के दौरान लोग ढोल-नगाड़ों और गानों की धुन पर नाचते-गाते हैं। लगभग 149 वर्षों से चल रहा यह उत्सव नागपुर की खास पहचान बन चुका है और इसे बुरी ताकतों को दूर भगाने तथा समाज को एकजुट करने वाला पर्व माना जाता है।

उत्सव मनाने का धार्मिक कारण

एक अन्य मान्यता के अनुसार, श्रीकृष्ण को दूध पिलाने गयी पूतना राक्षसी का वध होने के बाद गोकुल निवासियों ने घर के सभी कचरों को लेकर एक जुलूस निकाला था और उसे गाँव के बाहर ले जाकर दहन किया था। इसी परंपरा को निभाते हुए यह उत्सव तभी से मनाया जा रहा है।

रानी बाकाबाई और उत्सव के बीच संबंध

जानकारी के मुताबिक, बताया जाता है कि 1881 में नागपुर के भोसले राजघराने की बकाबाई नामक महिला ने विद्रोह कर अँग्रेजों से मिल गई थी। इसके बाद भोसले घराने को काफी कुछ झेलना पड़ा था। इसी बात के विरोध में उसी समय से काली मारबत का जुलूस निकालने की परंपरा चली आ रही है।

भारत ने अमेरिका के लिए निलंबित की डाक सेवाएँ, US के टैरिफ नियमों के चलते पोस्टल विभाग ने लिया फैसला: सिर्फ ₹8 हजार तक के गिफ्ट और चिट्ठियाँ भेज सकेंगे

अमेरिका में डाक भेजने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। भारत के डाक विभाग ने अमेरिका जाने वाली सभी डाक सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह फैसला अमेरिका के नए ‘ड्यूटी’ नियमों के कारण लिया गया है।

इस नियम के तहत, अब 800 डॉलर (करीब 70 हजार) तक के सामान पर भी टैक्स लगेगा। यह रोक 25 अगस्त 2025 से लागू हो जाएगी। हालाँकि, पत्र, दस्तावेज और 100 डॉलर (करीब साढ़े आठ हजार) तक के उपहार अभी भी भेजे जा सकते हैं।

क्यों लगी है डाक सेवा पर रोक?

अमेरिकी प्रशासन ने 30 जुलाई 2025 को एक आदेश जारी किया था। इसके अनुसार, 29 अगस्त 2025 से 800 डॉलर तक के उन सभी सामानों पर कस्टम ड्यूटी लगेगी, जो पहले टैक्स-फ्री थे।

नए नियमों के तहत, डाक भेजने वाले ट्रांसपोर्टरों को ही टैक्स वसूलना और जमा करना होगा। लेकिन अमेरिकी कस्टम्स विभाग ने इस प्रक्रिया को अभी तक पूरी तरह से साफ नहीं किया है। इस वजह से अमेरिका जाने वाली एयरलाइन कंपनियों ने 25 अगस्त 2025 के बाद माल स्वीकार करने से मना कर दिया है।

इन कारणों को देखते हुए भारत के डाक विभाग ने 25 अगस्त 2025 से सभी डाक वस्तुओं की बुकिंग रोक दी है। यह कदम ग्राहकों को होने वाली असुविधा से बचाने के लिए उठाया गया है।

आगे क्या होगा?

जिन लोगों ने पहले ही अपने पार्सल बुक करा लिए हैं और जिनकी डिलीवरी नहीं हो सकती, वे डाक शुल्क वापस ले सकते हैं। डाक विभाग का कहना है कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जल्द से जल्द सेवाएँ फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं।

यह फैसला भारत और अमेरिका में चल रहे व्यापारिक तनाव के बीच आया है। अमेरिका ने हाल ही में भारतीय सामानों पर 50% का शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। भारत ने इस फैसले को ‘अनुचित और अविवेकपूर्ण’ बताते हुए इसकी निंदा की है।

नक्सलियों के ‘सुरक्षा कवच’, गाँधी परिवार के ‘वफादार’… कॉन्ग्रेस ने जिन्हें बनाया उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार, जानिए उन सुदर्शन रेड्डी पर गृह मंत्री शाह ने क्यों उठाए सवाल: पढ़ें चिट्ठा

रिटायर्ड जस्टिस बालकृष्ण सुदर्शन रेड्डी को विपक्षी INDIA गठबंधन ने 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। इस गठबंधन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राजद, सपा, डीएमके, और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल हैं। इस चुनाव में उनका मुकाबला NDA के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन से होगा।

केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ रही INDIA गठबंधन ने रेड्डी को एक न्यायप्रिय, निष्पक्ष और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े चेहरे के तौर पर पेश किया है। हालाँकि जस्टिस रेड्डी अपने कार्यकाल के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने फैसलों से कॉन्ग्रेस के प्रति अपनी वफादारी को साफ तौर पर जाहिर कर दिया है।

गृह मंत्री ने उजागर की असलियत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी पर तीखा हमला बोला।,उन्होंने जस्टिस रेड्डी के पुराने न्यायिक निर्णयों के जरिए वामपंथी उग्रवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया।

केरल में एक कार्यक्रम में बोलते हुए गृह मंत्री ने कहा, “विपक्ष (कॉन्ग्रेस) के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने सलवा जुडूम पर ऐसा फैसला दिया जो नक्सलवाद के समर्थन में था। अगर यह फैसला न दिया गया होता, तो 2020 तक उग्रवाद समाप्त हो चुका होता।”

अमित शाह ने आगे कहा, “केरल ने नक्सलवाद की पीड़ा झेली है और उग्रवाद का दंश सहा है। केरल की जनता निश्चित रूप से देखेगी कि कैसे वामपंथियों के दबाव में कॉन्ग्रेस ने ऐसा उम्मीदवार चुना जिसने सुप्रीम कोर्ट जैसे मंच का इस्तेमाल वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद को समर्थन देने के लिए किया।”

गृह मंत्री के बयान पर सुदर्शन रेड्डी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पीटीआई भोषा से बात करते हुए रेड्डी ने कहा कि सलवा जुडूम पर फैसला उनका अपना नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट का था। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह गृह मंत्री के साथ बहस नहीं करना चाहते।

जस्टिस के तौर पर विवादित रहा सफर

जस्टिस रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को तेलंगाना के रंगा रेड्डी ज़िले में एक किसान परिवार में हुआ। उनका न्यायिक करियर 1995 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर शुरू हुआ। इसके बाद वे गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। 2007 से 2011 तक भारत के सर्वोच्च न्यायालय में बतौर जस्टिस अपनी सेवा भी दी।

जस्टिस रेड्डी के कार्यकाल में कई अहम फैसले आए, जिनमें मानवाधिकार, प्रशासनिक पारदर्शिता और सामाजिक न्याय से जुड़े विषय शामिल थे। लेकिन उनके कुछ ऐसे भी फैसलों रहे जिन पर विवाद हुआ और उसकी आलोचना आज भी होती आ रही है। आइए जानते हैं उन फैसलों के बारे में।

सलवा जुडूम को भंग करने का फैसला

छ्त्तीसगढ़ में नक्सलवादल को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने ‘सलवा जुडूम’ अभियान चलाया था। खास बात ये है कि ये अभियान छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार के समर्थन से ही चलाया गया था। इसका उद्देश्य राज्य में नक्सली हिंसा को रोककर शांति स्थापित करना था। इस अभियान की शुरुआत जून 2005 में कॉन्ग्रेस नेता महेंद्र कर्मा ने की थी।

कई वर्षों तक जनजातीय क्षेत्रों में हिंसा कर अपना गढ़ बना चुके नक्सलियों को खत्म करने में जनजातीय लोगों के हौसलों को सैन्य और पुलिस समर्थन भी मिलने लगा था। लेकिन जस्टिस रेड्डी और जस्टिस एस.एस. निज्जर की पीठ ने अपने फैसले में सलवा जुडूम अभियान को असंवैधानिक करार दिया।

5 जुलाई 2011 ने इसे भंग करते हुए पीठ ने फैसला में कहा कि सरकार गरीब आदिवासियों को बंदूक थमा कर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। जस्टिस रेड्डी के इस फैसले ने नक्सलियों के खिलाफ जंग को स्पष्ट तौर पर कमजोर कर दिया।

भोपाल गैस त्रासदी मामला

1984 की त्रासदी में हजारों लोगों की मौत हुई थी। CBI ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर कर पुराने फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने यूनियन कार्बाइड और वॉरेन एंडरसन पर गंभीर आरोप लगाने की माँग की थी।

जस्टिस रेड्डी उस पाँच सदस्यीय पीठ का हिस्सा थे जिसने याचिका खारिज कर दी। इसका फैसला मई 2012 में आया था। इस फैसले से पीड़ितों को न्याय मिलने का एक मौका तो गया ही पर साथ ही जस्टिस रेड्डी और पीठ ने कॉन्ग्रेस की छत्रछाया में पल रही अमेरिकी कंपनी को भी साफ तौर पर बचाने का काम किया।

अर्मी कॉलेज की सीटों में आरक्षण मामला

दिल्ली स्थित आर्मी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (ACMS) एक प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान है, जिसकी स्थापना भारतीय सेना द्वारा की गई थी। इस कॉलेज में MBBS की सीटें उपलब्ध हैं और लंबे समय से यह परंपरा रही है कि यहाँ प्रवेश केवल सेना के कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मियों के बच्चों को ही दिया जाता है।

इस नीति के खिलाफ कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि कॉलेज सार्वजनिक संसाधनों और रक्षा मंत्रालय के अधीन आता है, इसलिए इसकी सीटें सिर्फ एक वर्ग के लिए आरक्षित करना अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।

जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया कि ACMS की सभी सीटें केवल सैन्यकर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। फैसले में यह भी कहा गया कि चूंकि यह संस्थान रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है और इसका संचालन सेना की आवश्यकताओं के अनुरूप होता है, इसलिए इसकी प्रवेश नीति को संवैधानिक रूप से वैध माना जा सकता है।

इसके अलावा रेड्डी ने 4 जुलाई 2011 को केंद्र सरकार को काले धन पर ढिलाई बरतने के लिए फटकार लगाई थी और एक विशेष जाँच टीम (SIT) गठित करने का निर्देश दिया। यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कदम माना गया था। लेकिन अब कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाला INDIA गठबंधन अब उसी व्यक्ति को अपना उम्मीदवार बना रहा है। इससे सवाल उठना तो बनता है कि आखिर ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार के तौर पर कॉन्ग्रेस ने क्यों खड़ा किया?

क्यों किया गया जस्टिस रेड्डी का चयन?

रेड्डी की उम्मीदवारी को विपक्ष ने न्यायप्रिय और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा बताया है। लेकिन यह चयन वैचारिक कम और रणनीतिक अधिक है। INDIA गठबंधन के तहत DMK की माँग थी कि उम्मीदवार दक्षिण भारत से हो वहीं, TMC चाहती थी कि चेहरा गैर-राजनीतिक हो, और कॉन्ग्रेस को एक ऐसा व्यक्ति चाहिए था जिसकी छवि बेदाग हो। रेड्डी इन तीनों शर्तों पर खरे उतरते हैं।

इसके साथ ही जस्टिस बालकृष्ण सुदर्शन रेड्डी का नाम उम्मीदवार के तौर पर लाना राजनीतिक गलियारों में अपेक्षित नहीं था। जाहिर तौर पर कॉन्ग्रेस उनके जरिए संविधान की रक्षा, संघ विचारधारा के खिलाफ वैचारिक लड़ाई जैसे विषय पर बात करके और दक्षिण भारत के वोट बैंक को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है।

उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के लिए उनका चयन एक गंभीर सवाल उठाता है। जैसे कि इस पद के लिहाज से क्या क्या विपक्ष ने एक निष्पक्ष न्यायाधीश को चुना है या ढोंग करके एक ऐसा चेहरा लोगों के सामने पेश किया जो उनके वैचारिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधता है?

कब होगा उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव

संसद में 21 जुलाई 2025 को मानसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया। इशके बाद नए उपराष्ट्रपति को लेकर दोबारा चुनाव प्रक्रिया की जानी है।

उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान 9 सितंबर 2025 को होना निर्धारित किया गया है और उसी दिन मतगणना भी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त 2025 थी, जबकि प्रत्याशी अपना नाम 25 अगस्त तक वापस ले सकते हैं।

उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सांसदों द्वारा किया जाता है। यह चुनाव संविधान के अनुच्छेद 64 और 68 के तहत संचालित होता है और 1952 के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम के अनुसार चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचित किया जाता है।

₹12 करोड़ कैश, ₹6 करोड़ का सोना, 10 किलो चाँदी और विदेशी मुद्रा…. ED के छापे के बाद कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक गिरफ्तार: अवैध सट्टेबाजी मामले में एक्शन, दुबई से मिले लिंक

कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र उर्फ पप्पी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गंगटोक (सिक्किम) से गिरफ्तार कर लिया है। कॉन्ग्रेस विधायक पर अवैध ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी मामले में कार्रवाई की गई है।

साथ ही ED ने कॉन्ग्रेस विधायक के ठिकानों पर छापेमारी कर 12 करोड़ रुपए नगद, 6 करोड़ रुपए सोने के आभूषण, लगभग 10 किलोग्राम चाँदी और 4 वाहन बरामद किए गए हैं। नगद में एक करोड़ विदेशी मुद्रा भी मिली है। इसके अलावा ED ने 17 बैंक खाते और 2 बैंक लॉकर भी सीज किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दो दिन से ED द्वारा देशभर में 31 ठिकानों पर छापेमारी के बाद की गई है। 22 और 23 अगस्त 2025 को ED ने चित्रदुर्ग में 6 स्थानों, बेंगलुरु में 10, हुबली में 1, मुंबई में 2, जोधपुर में 3, गोवा में 8 और गंगटोक में छापेमारी की।

इनमें बिग डैडी कसिनो, ओशियन रिवर कसिनो, पप्पीज कसिनो प्राइड, ओशियन 7 कसिनो और पप्पीज कसिनो गोल्ड भी शामिल हैं। ED को ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिंक दुबई से भी मिले हैं। ED के अनुसार, कॉन्ग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र King567 और Raja567 जैसे नामों से कई अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म चला रहा था।

इन प्लेटफॉर्म को दुबई की कंपनी Diamond Softech, TRS Technologies और Prime9Technologies के माध्यम से विधायक का भाई केसी थिप्पेस्वामी संभालता था। ये कंपनियाँ बेटिंग प्लेटफॉर्म को कॉल सेंटर सेवा उपलब्ध कराती हैं।

ED के मुताबिक, केसी वीरेंद्र एक जमीनी कसिनों को पट्टे पर लेने के लिए बागडोगरा होते हुए गंगटोक गए थे। छापेमारी के दौरान उनके खिलाफ सबूत मिले, जिसके बाद गंगटोक से उन्हें गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद गंगटोक की कोर्ट में उन्हें पेश कर बेंगलुरु कोर्ट में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड ली गई। मामले में आगे की जाँच जारी है।

कौन है केसी वीरेंद्र ?

केसी वीरेंद्र उर्फ पप्पी पेशे से कारोबारी हैं। उन्होंने साल 2023 में कर्नाटक की चित्रदुर्ग विधानसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता। उनके चुनावी हलफनामें में कुल ₹134.9 करोड़ की संपत्ति दर्ज है। इसके अलावा कॉन्ग्रेस विधायक पर 2 अपराधिक मामले दर्ज हैं।

कर्नाटक विधायक सतीश कृष्ण सैल के घर भी हुई थी छापेमारी

केसी वीरेंद्र से पहले कर्नाटक कॉन्ग्रेस विधायक सतीश कृष्ण सैल ED के शिकंजे में आए थे। 14 अगस्त 2025 को ED की छापेमारी में सतीश कृष्ण के घर से ₹1.41 करोड़ नगद मिले थे। इसके साथ उनके और परिवार के बैंक लॉकरों से 6.75 किलो गोल्ड की ज्वेलरी और बिस्किट बरामद किए थे।

यह मामला साल 2010 से जुड़ा हुआ था। मामले में सतीश कृष्ण पर आरोप है कि उन्होंने अन्य कंपनियों और बेलकेरी पोर्ट के अधिकारियों के साथ मिलकर करीब 1.25 लाख मीट्रिक टन आयरन गैरकानूनी तरीके से बाहर भेजा था, जिसकी कुल कीमत ₹86.78 करोड़ बताई गई।

‘भारत रेड लाइन्स से नहीं करेगा समझौता’: जयशंकर की टैरिफ वॉर पर अमेरिका को दो टूक, बोले- तेल खरीदने पर हमें निशाना बनाने वाली दलीलें चीन पर क्यों नहीं होतीं लागू

अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर जारी विवाद पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अहम टिप्पणियाँ की हैं। जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी ‘रेड लाइन’ से कभी समझौता नहीं करेगा, चाहे बात किसानों के हितों की हो या रणनीतिक स्वायत्तता की। अमेरिका द्वारा लगाए टैरिफ पर जयशंकर ने कहा, “इसे तेल का मुद्दा बताया जाता है लेकिन चीन पर कोई टैरिफ नहीं लगाया गया।”

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के साथ ट्रेड को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “बातचीत अभी भी चल रही हैं लेकिन हमारी कुछ रेड लाइन्स हैं। सबसे अहम है किसानों और छोटे उत्पादकों के हित, यह ऐसा मुद्दा है जिस पर समझौता संभव नहीं है।”

जयशंकर ने अमेरिका पर सवाल उठाते हुए कहा, “इसे तेल का मुद्दा बताया जाता है लेकिन चीन, जो रूस से सबसे बड़ा आयातक है, उस पर कोई टैरिफ नहीं लगाया गया। भारत को निशाना बनाने वाली दलीलें चीन पर क्यों लागू नहीं होतीं?”

इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोप और अमेरिका को लेकर कहा, “अगर आपको भारत से तेल या रिफाइंड उत्पाद खरीदने में समस्या है, तो इसे न खरीदें, लेकिन यूरोप खरीदता है, अमेरिका खरीदता है। अगर पसंद नहीं तो हमसे मत खरीदिए।”

उन्होंने आगे कहा, “यह हास्यास्पद है कि एक व्यापार-समर्थक अमेरिकी प्रशासन के लिए काम करने वाले लोग दूसरों पर व्यापार करने का आरोप लगा रहे हैं।” अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “उनका एक-दूसरे के साथ इतिहास रहा है और अपने इतिहास को नजरअंदाज करने का भी उनका इतिहास रहा है।”

ट्रंप जैसा राष्ट्रपति नहीं देखा: जयशंकर

जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कहा, “अब तक हमने ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं देखा है, जिसने विदेश नीति को वर्तमान राष्ट्रपति की तरह सार्वजनिक रूप से संचालित किया हो। यह अपने आप में एक बदलाव है, जो केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप का दुनिया के साथ व्यवहार करने का तरीका, यहाँ तक ​​कि अपने देश के साथ व्यवहार करने का तरीका पारंपरिक रूढ़िवादी तरीके से बहुत बड़ा बदलाव है।”

इंजीनियर ने किया ₹100 करोड़ का भ्रष्टाचार, छापा पड़ा तो बीवी ने ₹2-3 करोड़ के नोट जलाकर फ्लश में ठूँसे: नाला जाम होने पर पता चली हरकत, पति-पत्नी गिरफ्तार

बिहार के पटना में इंजीनियर विनोद राय के घर छापा पड़ा तो उनकी पत्नी ने रातोंरात 2-3 करोड़ रुपए जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की। विनोद राय, ग्रामीण कार्य विभाग में सुपरीटेंडेंट इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने 100 करोड़ रुपए की संपत्ति होने की सूचना पर उनके घर छापेमारी की।

दरअसल, पटना के भूतनाथ रोड स्थित इंजीनियर के आवास पर EOU गुरुवार (21 अगस्त 2025) को छापा मारने पहुँची थी। इंजीनियर की बीवी बबली राय ने घर में अकेले होने का हवाला देते हुए EOU को अगले दिन आने के लिए बोला। उस दिन EOU पूरी रात घर के बाहर बैठी रही। वहीं उसी रात बबली राय ने सबूत मिटाने की कोशिश की।

इंजीनियर की बीवी ने आधी रात को करीब 2-3 करोड़ रुपए नोट और दस्तावेज जला दिए। उन अधजले नोटों को टॉयलेट में फ्लश करने की कोशिश की लेकिन उससे पाइपलाइन जाम हो गई। अगली सुबह शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को सुबह 5 बजे EOU की टीम लौटी, यहाँ टीम को जलने की दुर्गंध आई।

टीम ने भीतर आकर जाँच करने के लिए कहा तो बबली राय ने फिर अकेले होने का हवाला देकर धमकी दी। कहासुनी के बाद परिचितों को बुलाने पर मानी। करीब आधे घंटे बाद EOU ने घर में प्रवेश किया तो हैरानी वाला दृश्य देखा। टीम को छापेमारी में 12-13 लाख रुपए के नोटों के बंडल मिले। छापेमारी की गई तो टॉयलेट, पानी की टंकी, किचन की नाली के पाइप में भी पैसे छिपाकर रखे हुए थे

इंजनीयिर विनोद कुमार राय गिरफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, EOU ने छापेमारी में 39 लाख रुपए नगद, 10 लाख रुपए के जेवर, 6 लाख रुपए की लग्जरी गाड़ियों और करोड़ों की जमीन के दस्तावेज बरामद किए। EOU के अनुसार इंजीनियर ने 2-3 करोड़ रुपए जलाकर सबूत भी मिटाए हैं।

साथ ही EOU ने घर की निचली मंजिल में छिपे इंजीनियर विनोद कुमार राय को भी गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही इंजीनियर की बीवी बबली पर भी कार्रवाई की गई।

मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से ED करेगी जाँच

EOU की कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जाँच शुरू कर सकती है। इंजीनियर विनोट राय के पास मिले 15 बैंक खातों, 18 जमीन के डीड, बीमा पॉलिसी और बाकी निवेश दस्तावेजों से मनी लॉन्ड्रिंग का शक जताया गया है।

ये सारी संपत्ति इंजीनियर की आय से कहीं अधिक है। EOU के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 100 करोड़ रुपए के करीब है।

5 करोड़ रुपए कैश लेकर भागे थे

विनोद राय ग्रामीण कार्य विभाग के सीतामढ़ी डिवीजन में सुपरीटेन्डेंट इंजीनियर के पद पर तैनात हैं। उनके पास मधुबनी का भी प्रभार है। गुरुवार (21 अगस्त 2025) को इंजीनियर सीतामढ़ी से 5 करोड़ रुपए कैश लेकर निकले थे। इसी सूचना पर EOU ने इंजीनियर का पीछा किया लेकिन वो हाथ नहीं लगे। इसके बाद घर में छापेमारी की।

5 साल में करें 5 यूनिकॉर्न तैयार, ताकि हर साल हों 50 रॉकेट लॉन्च: ‘नेशनल स्पेस डे’ पर PM मोदी ने की स्टार्टअप्स से अपील, कहा- अब चाँद और मंगल तक नहीं रहेंगे सीमित, गहरे अंतरिक्ष में पहुँचेगा भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (23 अगस्त 2025) नेशनल स्पेस डे के मौके पर देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इस बार की थीम ‘आर्यभट्ट से गगनयान तक’ है, जिसमें अतीत का आत्मविश्वास और भविष्य का संकल्प दोनों झलकते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “स्पेस सेक्टर से जुड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि भारत लगातार अंतरिक्ष विज्ञान में नए माइलस्टोन बना रहा है और यह देश के लिए गर्व की बात है।”

उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि भारत अब ‘Astronaut Pool’ तैयार करने जा रहा है और इसमें युवाओं को जुड़ने के लिए आमंत्रित किया। हाल ही में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तिरंगा फहराने वाले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उस पल ने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

पीएम मोदी ने बताया कि भारत सेमी क्राइअजेनिक इंजन (semi-cryogenic engine) और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (electric propulsion) जैसी नई तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। जल्द ही गगनयान मिशन लॉन्च होगा और आने वाले वर्षों में भारत अपना स्पेस स्टेशन भी बनाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, “अभी हम चाँद और मंगल तक पहुँचे हैं। अब हमें गहरे अंतरिक्ष में उन हिस्सों में भी झाँकना है, जहाँ मानवता के भविष्य के लिए कई जरूरी रहस्य छिपे हैं।” प्रधानमंत्री ने स्पेस सेक्टर में हुए सुधारों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि पहले इस क्षेत्र को कई पाबंदियों में बांधा गया था लेकिन अब प्राइवेट सेक्टर के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं। आज देश में 350 से ज्यादा स्टार्टअप्स स्पेस-टेक में काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स से अपील की कि वे अगले 5 सालों में कम से कम 5 यूनिकॉर्न तैयार करें और भारत को उस स्थिति तक ले जाएँ कि हर साल 50 रॉकेट लॉन्च कर सके।

क्यों मनाया जाता है नेशनल स्पेस डे?

भारत ने इतिहास रचते हुए 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफलतापूर्वक उतारा था। इसी मिशन में प्रज्ञान रोवर भी सफलतापूर्वक तैनात किया गया।

इस सफलता के बाद भारत चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा और साउथ पोल पर लैंडिंग करने वाला पहला देश बना। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए सरकार ने 23 अगस्त को ‘नेशनल स्पेस डे’ घोषित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक अब सिर्फ विज्ञान तक सीमित नहीं है बल्कि यह Ease of Living का भी साधन बन गई है।

टैरिफ विवाद पर जिस अमेरिकी अधिकारी ने दिया PM मोदी का साथ, उसके घर पड़ी FBI की रेड: ट्रंप को खरी-खोटी सुनाते हुए जॉन बोल्टन ने कहा था- इससे रूस व चीन के करीब आएगा भारत

अमेरिका में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को एफबीआई (FBI) की टीम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के घर पर छापा मारा। यह छापा ऐसे समय में पड़ा है जब बोल्टन लगातार ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते आ रहे हैं और ट्रैरिफ को लेकर भारत के पक्ष में बोल रहे है। FBI प्रमुख काश पटेल के आदेश पर यह कार्रवाई की गई, जिन्होंने छापे के तुरंत बाद ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा, “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है…”

क्या है पूरा मामला?

यह कार्रवाई सिक्ररेट डॉक्यूमेंट्स की एक पुरानी जाँच से जुड़ी है। बाइडेन प्रशासन ने इस जाँच को बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है। ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए बोल्टन ने अपनी किताब ‘द रूम वेयर इट हैपन्ड’ में कई सिक्ररेट बातें उजागर करने का आरोप लगाया था।

ट्रंप ने यह कहते हुए किताब छपने से रोकने की कोशिश भी की थी कि बोल्टन ने गोपनीयता समझौते का उल्लंघन किया है। हालाँकि, बाइडेन प्रशासन ने उस समय इस मामले को बंद कर दिया था।

वहीं, FBI के मौजूदा चीफ काश पटेल ने इस मामले को फिर से खोला है। उन्होंने छापे से एक दिन पहले पूर्व एफबीआई डायरेक्टर जेम्स कोमी पर भी गोपनीय जानकारियाँ लीक करने का आरोप लगाया था।

बोल्टन और ट्रंप के बीच मतभेद

जॉन बोल्टन लगातार ट्रंप की विदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर शुल्क लगाने के ट्रंप के फैसले को गलत बताया।

बोल्टन ने कहा कि रूस से तेल खरीदने के लिए केवल भारत पर शुल्क लगाना एक ‘गलती‘ है। उन्होंने कहा कि चीन भी रूस से तेल खरीदता है, लेकिन उस पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया। बोल्टन के अनुसार, ट्रंप के इस कदम से अमेरिका ने भारत को छोड़ दिया है और इससे भारत रूस और चीन के करीब जा सकता है।

बोल्टन का मानना है कि ट्रंप की नीतियों में ‘रणनीतिक सोच की कमी’ है, जिससे भारत रूस के करीब जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के रूस पर लगे प्रतिबंधों से भारत को रूसी तेल खरीदने से कानूनी तौर पर कोई रोक नहीं है।

यह छापा ऐसे समय में पड़ा है जब भारत रूस और चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने का न्योता दिया है। इसके अलावा, वह चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी शामिल होने वाले हैं।

कर्नाटक के धर्मस्थल से बेटी के लापता होने का दावा करने वाली महिला अपने बयान से पलटी: कहा- पूरी कहानी फर्जी थी, दो लोगों ने जबरन दिलवाया था बयान

कर्नाटक के एक धर्मस्थल में सामूहिक दफन मामले के बाद अपनी बेटी के गायब होने का दावा करने वाली महिला ने अपनी कहानी को झूठा बताया है। सुजाता भट्ट नामक महिला ने दावा किया था कि उनकी बेटी अनन्या भट्ट 2003 में धर्मस्थल यात्रा के दौरान लापता हो गई थी।

एक यूट्यूब चैनल से बात करते हुए सुजाता ने कहा कि उसे यह झूठा दावा करने के लिए गिरीश मत्तणावर और टी जयन्ती ने उकसाया था। उन्होंने बताया, “यह सच नहीं है। कभी कोई अनन्या भट्ट नाम की बेटी थी ही नहीं। तस्वीरें भी नकली थीं। सबकुछ पूरी तरह से फर्जी था।”

जब पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, तो सुजाता ने कहा, “कुछ लोगों ने मुझे ऐसा कहने को कहा। यह सब जमीन के विवाद की वजह से हुआ। यही एक कारण था।”

सुजाता के मुताबिक, यह विवाद उनके नाना की जमीन को लेकर था, जो कथित रूप से धर्मस्थल मंदिर प्रशासन ने ले ली थी। उन्होंने कहा, “मैंने सिर्फ यह पूछा था कि मेरे नाना की जमीन मेरी मंजूरी के बिना कैसे दे दी गई।” उन्होंने यह भी साफ किया कि इस पूरे मामले में किसी ने उनसे पैसे नहीं माँगे और न ही उन्होंने किसी से पैसे लिए।

यह बयान पहले के दावे से बिल्कुल उलटा है। इससे पहले पुलिस को दिए अपने बयान में उन्होंने कहा था कि उनकी 18 साल की बेटी अनन्या मेडिकल की छात्रा थी, वह मई 2003 में धर्मस्थल गई थी और वहीं से गायब हो गई।

उन्होंने यह भी दावा किया था कि जब उन्होंने बेटी की खोज शुरू की तो उन्हें अगवा कर लिया गया और धर्मस्थल न लौटने या सार्वजनिक रूप से घटना के बारे में कुछ न कहने की चेतावनी दी गई। उनका कहना था कि अगवा करने के बाद उन्हें बेरहमी से पीटा गया, जिससे वह कोमा में चली गई थी। बाद में उन्हें बेंगलुरु के एक अस्पताल में इलाज के बाद होश आया।

अब वह इन सभी बातों से पीछे हट गई हैं और जनता से माफी माँग रही हैं। उनका कहना है, “मैं कर्नाटक की जनता से, धर्मस्थल के भक्तों और पूरे देश से माफी माँगती हूँ।” मामले की जाँच कर रही विशेष जाँच टीम (SIT) ने उन्हें शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को बेल्थंगडी कार्यालय में पेश होने का नोटिस भेजा था।

बता दें कि यह मामला तब सामने आया था जब एक सफाईकर्मी ने चौंकाने वाला दावा किया कि उसे 1998 से 2014 के बीच धर्मस्थल में कई जगहों पर सैकड़ों शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। यह सफाईकर्मी भगवान मंजूनाथ मंदिर में काम करता था और उसने 3 जून 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

सफाईकर्मी ने अपनी शिकायत में बताया था कि जिन शवों को वह दफनाता था, उनमें कई महिलाएँ और नाबालिग लड़कियाँ थीं, जिनका यौन शोषण किया गया था। हालाँकि, इसके बाद कई जगहों पर खुदाई की गई लेकिन ज्यादातर जगहों से कोई मानव अवशेष नहीं मिले थे। सिर्फ नेत्रवती नदी के पास एक जगह से कुछ हड्डियाँ मिलीं थीं जो पुरुषों की बताया गई थीं।

इसी के बाद सुजाता भट्ट का भी बयान आया था कि उनकी बेटी भी धर्मस्थल से ही लापता हुई है। हालाँकि, उनके हालिया बयान ने पूरे केस को ही उलट-पलट दिया है।

पत्रकार शिव अरूर के खिलाफ कॉन्ग्रेस ने दर्ज कराई FIR: राहुल गाँधी के वोट चोरी के आरोपों का किया था पर्दाफाश, करण थापर के लिए रोने वाला एडिटर्स गिल्ड हुआ ‘खामोश’

भारत में पत्रकारों पर कानूनी कार्रवाई को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। NDTV के पत्रकार शिव अरूर ने राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ वाले आरोपों का पर्दाफाश किया था। ये बदनामी कॉन्ग्रेस को हजम नहीं हुई और उन्होंने पत्रकार पर पार्टी को बदनाम करने के लिए पत्रकार शिव पर आपराधिक केस दर्ज करा दिया। सबसे दिलचस्प बात तो ये है कि इस मामले पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने चुप्पी साध रखी है। ये ही एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया उस समय तुरंत सामने आया था, जब करन थापर और सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ असम में गिरफ्तारी का वारंट जारी हुआ था।

शिव अरूर पर क्या है आरोप?

हाल ही में, NDTV पर प्रसारित होने वाले शो ‘इंडिया मैटर्स’ में पत्रकार शिव अरूर ने 19 अगस्त 2025 को एक रिपोर्ट दिखाई थी। इस रिपोर्ट में कथित तौर पर राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पर ‘वोट चोरी’ का पर्दाफाश किया गया था। शिव अरूर ने शो में जिस डेटा का जिक्र किया था वो डेटा एक सर्वे कंपनी CSDS के संजय कुमार ने दिया था। संजय कुमार ने कहा था कि महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है। राहुल गाँधी ने इस डेटा का इस्तेमाल किया और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप मड़ दिया।

लेकिन बाद में, संजय कुमार ने माना कि उनसे गलती हुई है और उन्होंने अपना पुराना पोस्ट हटाकर सोशल मीडिया पर माफी माँगी। NDTV के पत्रकार शिव अरूर ने भी अपने शो में यही बताया कि राहुल गाँधी का ‘वोट चोरी’ वाला आरोप गलत था और उन्होंने अपनी बात साबित नहीं की।

लेकिन इस बेज्जती को कॉन्ग्रेसी नेता सहन कर पाए और इसे राहुल गाँधी की छवि खराब करने की बात कह दी। पवन खेड़ा ने तो यहाँ तक कह दिया कि इस मामले में शिव अरूर के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। कॉन्ग्रेस की वकील ईशा बख्शी ने भी कानूनी कार्रवाई करने की बात कही।

आनंद रंगनाथन ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि कॉन्ग्रेस ने पत्रकार शिव अरूर के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत उनके उस कार्यक्रम के लिए है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के दावे का पर्दाफाश किया था।

रंगनाथन ने इस कार्रवाई को गलत बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में ऐसे और मामले दर्ज हो सकते हैं। उन्होंने पूछा कि इस पर एडिटर्स गिल्ड (EGI) और अभिव्यक्ति की आजादी के तथाकथित योद्धा चुप क्यों हैं। अंत में, उन्होंने कहा कि वह शिव अरूर के साथ खड़े हैं।

करण थापर के मामले में EGI का रुख

दूसरी तरफ, पत्रकार करण थापर और सिद्धार्थ वरदराजन पर भी कानूनी शिकंजा कसा था। असम पुलिस ने उन पर एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 लगाई गई थी। यह धारा पुराने राजद्रोह कानून का ही नया रूप है। यह एफआईआर ‘द वायर’ पर छपी एक रिपोर्ट को लेकर थी, जिसमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी जानकारी थी।

जब ये पत्रकार मुश्किल में आए तो एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) तुरंत उनके समर्थन में सामने आया। गिल्ड ने एक बयान जारी कर असम पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने भी करण थापर और सिद्धार्थ वरदराजन को गिरफ्तारी से सुरक्षा दी।

ये दोनों मामले एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। जब करण थापर जैसे पत्रकार पर केस होता है तो एडिटर्स गिल्ड (EGI) तुरंत उनके साथ खड़ा हो जाता है। लेकिन शिव अरूर के मामले में गिल्ड पूरी तरह से चुप रहता है। क्या इसका मतलब यह है कि पत्रकारों के लिए न्याय के नियम अलग-अलग हैं? या फिर यह दिखाता है कि पत्रकारिता की संस्थाएँ भी राजनीतिक विचारधारा के हिसाब से काम करती हैं?