टैरिफ को लेकर जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी राजनीतिक सहयोगी सर्जियो गोर को शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को भारत में अगला अमेरिकी राजदूत नियुक्त किया है। गोर को ट्रंप ने दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत की भी जिम्मेदारी दी है। भारत और अमेरिका के संबंधों में आई खटास के बीच यह नियुक्ति अहम मानी जा रही है।
गोर मौजूदा वक्त में व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय के डायरेक्टर है। वह भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत एरिक गार्सेटी की जगह लेंगे। लंबे समय से ट्रंप के करीबी रहे गोर का विवादों से भी गहरा नाता है। टेस्ला के CEO एलन मस्क गोर को साँप तक बता चुके हैं।
ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए सर्जियो गोर के नाम का ऐलान किया है। ट्रंप ने लिखा, “सर्जियो गोर के नाम का ऐलान करने में मुझे खुशी हो रही है। वह शानदार दोस्त हैं जो कई वर्षों से मेरे साथ हैं।”
उन्होंने लिखा, “राष्ट्रपति कार्मिक निदेशक के रूप में, सर्जियो और उनकी टीम ने रिकॉर्ड समय में सरकार में लगभग 4,000 देशभक्तों को नियुक्त किया है। सर्जियो अपनी नियुक्ति की पुष्टि होने तक व्हाइट हाउस में अपनी वर्तमान भूमिका में बने रहेंगे।”
उन्होंने लिखा, “गोर ने मेरे ऐतिहासिक राष्ट्रपति चुनाव अभियानों में काम किया, मेरी बेस्टसेलिंग किताबें प्रकाशित कीं हैं। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र के लिए, यह जरूरी है कि मेरे पास कोई ऐसा व्यक्ति हो जिस पर मैं अपने एजेंडे को पूरा करने और ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ में हमारी मदद करने के लिए पूरी तरह भरोसा कर सकूँ। सर्जियो एक शानदार राजदूत साबित होंगे।”
कौन हैं सर्जियो गोर?
39 वर्षीय सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के सबसे युवा राजदूत होंगे। सर्जियो गोर का जन्म उज्बेकिस्तान की ताशकंद में हुआ था, जो उस समय सोवियत संघ के उज्बेक सोवियत समाजवादी गणराज्य का हिस्सा था। 1999 में 12 वर्ष की आयु में वह अपने माता-पिता के साथ अमेरिका आ गए थे।
गोर की स्कूली पढ़ाई लॉस एंजेलिस से हुई और उन्होंने जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था। ग्रेजुएशन के दौरान ही राजनीति में उनकी दिलचस्पी शुरू हो गई थी। वे रिपब्लिकन पॉलिटिक्स में शामिल हुए और कई अमेरिकी सांसदों के साथ काम भी किया। 2020 में जब ट्रंप ने कैंपेन शुरू किया तो वो उनके संपर्क में आए और कैंपेन का चेहरा बन गए। गोर के पिता सोवियत आर्मी के लिए मिलिट्री एयरक्राफ्ट डिजाइन करने का काम करते थे।
गोर ने ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ मिलकर एक पब्लिशिंग कंपनी की भी स्थापना की थी। गोर ने वेडिंग DJ के तौर पर भी काम किया था। 2024 में ट्रंप की जीत के बाद उन्हें व्हाइट हाउस में डायरेक्टर ऑफ प्रेसिडेंशियल पर्सनल के पद पर नियुक्त किया गया।
विवादों से रहा है गहरा नाता
गोर का विवादों से भी गहरा नाता रहा है। द न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में उनके बैंकग्राउंड को लेकर सवाल उठाए थे कि कैसे ट्रंप के राजनीतिक क्षेत्र में उनकी प्रसिद्धि इतनी कैसे बढ़ गई। गोर पर रूसी जासूस होने के भी आरोप लगाए थे। हालाँकि, इन आरोपों को ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताया गया था। मस्क के साथ गोर के गंभीर मतभेद की भी कई खबरें सामने आई हैं।
मस्क ने कह दिया था ‘साँप’
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोर की ट्रंप और मस्क के बीच विवाद में अहम भूमिका थी। DOGE में अमेरिकी सरकार की भूमिका से इस्तीफा देने से पहले मस्क और गोर के बीच महीनों तक टकराव हुआ था। कैबिनेट बैठकों के दौरान भी दोनों के बीच टकराव की खबरें सामने आई थीं।
गोर ने NASA के प्रमुख पद के लिए जेरेड इसाकमैन के नामांकन को रोक दिया था, जिसे मस्क का समर्थन था। इस फैसले से मस्क नाराज हो गए थे। इसके अलावा, मस्क ने X पर ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ की एक खबर पर जवाब देते हुए गोर को ‘साँप’ कह दिया था।
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि गोर ने अपनी पृष्ठभूमि से संबंधित जाँच के लिए आधिकारिक दस्तावेज जमा नहीं किए थे। हालाँकि, व्हाइट हाउस ने इस दावे को खारिज कर दिया था।
नियुक्ति पर गोर ने ट्रंप को दिया धन्यवाद
सर्जियो गोर ने नई जिम्मेदारी मिलने के बाद ट्रंप का आभार जताया है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का आभारी हूं जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया है। मेरे लिए अमेरिकी लोगों की सेवा करने से ज्यादा गर्व की बात कुछ भी नहीं है।” अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी गोर की नियुक्ति का स्वागत किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 5,200 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार को जमकर घेरा है। पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल को नई रोशनी की जरूरत है और TMC जाएगी तभी असली बदलाव आएगा।
केंद्र के पैसे को लूट रही TMC सरकार: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कोलकाता में एक सभा को संबोधित करते हुए ममता सरकार पर तीखे वार किए। पीएम मोदी ने कहा, “जब तक पश्चिम बंगाल का सामर्थ्य नहीं बढ़ेगा तब तक विकसित भारत की यात्रा सफल नहीं हो पाएगी। बीते 11 वर्षों में केंद्र की बीजेपी सरकार ने बंगाल के विकास के लिए लगातार हर प्रकार की मदद की है। बंगाल में नैशनल हाईवे के निर्माण के लिए UPA ने 10 वर्षों में दिया था, उससे तीन गुना अधिक मौजूदा सरकार ने दिया है।”
उन्होंने कहा, “बंगाल में विकास कार्यों के सामने एक बड़ी चुनौती है। बंगाल के लिए जो पैसा केंद्र सरकार, राज्य सरकार को भेजती है, उसका ज्यादातर हिस्सा यहाँ लूट लिया जाता है। जो पैसा भारत सरकार सीधे भेजती है वो पैसा आप लोगों पर खर्च नहीं होता, वो पैसा TMC काडर पर खर्च होता है। इसलिए गरीब कल्याण की योजनाओं में बंगाल पिछड़ा हुआ है।”
बंगाल को नई रोशनी की जरूरत है: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, “आज बंगाल को नई रोशनी और सच्चे परिवर्तन की जरूरत है। यहां आजादी के बाद पहले कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के शासन का लंबा दौरा देखा है। 15 साल पहले आप लोगों ने परिवर्तन का फैसला लिया था। आप लोगों ने माँ, माटी, मानुष के नारे पर भरोसा किया था लेकिन हालात पहले से भी ज्यादा खराब हो गए।”
उन्होंने आगे कहा, “भर्ती घोटालों से नौजवानों का भविष्य खराब हुआ, बहनों-बेटियों पर अत्याचार बढ़ा, आज क्राइम-करप्शन TMC सरकार की पहचान बन गए हैं। जब तक बंगाल में TMC की सरकार रहेगी, तब तक बंगाल का विकास रुका रहेगा। आज बंगाल का जन-जन कह रहा है TMC जाएगी, तभी असली बदलाव आएगा।”
पीएम मोदी ने कहा, “आने वाले साल बंगाल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बंगाल को अब परिवर्तन चाहिए। ऐसा परिवर्तन जो काम में दिखे, परिवर्तन जिससे उद्योग लगें और बेटे-बेटियों को नौकरी मिले। ऐसा परिवर्तन जहां सुशासन होगा। ये परिवर्तन सिर्फ भाजपा ला सकती है।”
INDI गठबंधन के दलों ने घुसपैठियों की शरण ली: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में घुसपैठ को लेकर भी चर्चा की और INDI गठबंधन के दलों पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “मैंने लाल किले से देश में घुसपैठ के बढ़ते खतरे की चिंता व्यक्त की है। पश्चिम बंगाल के लोग समय से आगे की सोचते हैं, आपके बीच में इस चुनौती की चर्चा करता रहा हूँ।”
पीएम मोदी ने कहा, “आजकल जिन देशों को विकसित कहा जाता है, जिनके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। वहाँ घुसपैठियों के खिलाफ मुहिम चल रही है। भारत भी अब घुसपैठियों को ज्यादा नहीं सह सकता है। घुसपैठियों को बंगाल से आपका एक वोट मुक्त करा सकता है।”
उन्होंने कहा, “भारत के पास संसाधन सीमित हैं, हमें अपने युवाओं को रोजगार देना है, अपने नागरिकों को सुविधाएँ देनी हैं। जो घुसपैठिए हमारे युवाओं का रोजगार छीन रहे हैं, हमारे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दबाव डाल रहे हैं। जो हमारी बहनों-बेटियों के साथ अत्याचार कर रहे हैं, ऐसे घुसपैठियों को हम भारत में रहने नहीं देंगे। भारत सरकार ने घुसपैठियों के खिलाफ इतना बड़ा अभियान चलाया है।”
पीएम मोदी ने कहा, “मुझे हैरानी है कि TMC, कॉन्ग्रेस समेत INDI गठबंधन के दल तुष्टिकरण के आगे घुटने टेक चुके हैं। ये राजनीतिक दल सत्ता की भूख के लिए घुसपैठ को बढ़ावा दे रहे हैं। कुछ जगहों पर तो उन्होंने घुसपैठियों की शरण ले ली है। पश्चिम बंगाल सीमावर्ती राज्य है, जिस तरह बॉर्डर के इलाके में डेमोग्राफी बदली जा रही है, यह पश्चिम बंगाल में सामाजिक संकट पैदा कर रहा है। खासतौर पर किसानों से धोखाधड़ी करके उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। जनजातीय लोगों को गुमराह करके उनकी जमीन हड़पी जा रही है।”
उन्होंने आगे कहा, “देश यह सहन नहीं कर सकता है, इसे रोकना ही होगा। जो लोग सिर्फ हमारे लोगों को रोजी-रोटी छीनने आए हैं, जो फर्जी तरीके से कागज बनाकर रुक गए हैं। उनके यहाँ से जाना ही होगा, यह काम ईमानदारी से पूरा हो सके इसके लिए TMC सरकार को यहाँ से जाना ही होगा।”
ऑपरेशन सिंदूर पर क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में पाकिस्तानी आतंकियों के ठिकानों पर किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सेना ने सीमा पार आतंकियों और आतंक के आकाओं के अड्डो को खंडहर में बदल दिया। उन्होंने कहा कि सेना ने आतंकियों को ऐसा सबक सिखाया कि पाकिस्तान की आज भी नींद उड़ी हुई है।
उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सफलता की शक्ति मेड इन इंडिया हथियारों की रही है। भारतीय सेना को ताकत देने में बंगाल की भूमि का बहुत बड़ा योगदान है। इच्छापुर में गुलामी के दौर में डिफेंस मेन्युफैक्चरिंग का काम शुरू हुआ लेकिन कांग्रेस सरकार ने डिफेंस इंडस्ट्री को बर्बाद कर दिया। हमारी सेना को विदेश पर निर्भर कर दिया।”
आप BJP सरकार बनाइए, हम डॉ मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाएँगे: PM
पीएम मोदी ने कहा, “भाजपा सरकार ने डिफेंस सरकार को नई ऊर्जा दी है और इसका लाभ यहाँ की फैक्ट्री को भी मिला है। आज ये फैक्ट्री आधुनिक रायफल और अन्य हथियार बना रही है। इससे यहाँ छोटे-छोटे उद्यमियों के लिए नए अवसर बने हैं। इन कारखानों के कारण दमदम, बैरकपुर क्षेत्र में हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।”
उन्होंने कहा, “आप 2026 में भाजपा की सरकार बनाइए, हम बंगाल को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाएँगे। नया निवेश, नए कारखाने लगेंगे, दमदम फिर से इंडस्ट्रियल हब बनेगा, ये भाजपा का संकल्प है।”
TMC विकास की दुश्मन है: PM मोदी
पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा, “भाजपा के पास बंगाल के विकास का रोडमैप है लेकिन TMC विकास की दुश्मन है। TMC का मिशन भाजपा को रोकना है। केंद्र की योजनाओं को रोकना है। क्या इस राजनीति से बंगाल का भला होगा?”
उन्होंने कहा, “आप यहाँ भी एक बार भाजपा को अवसर देकर देखिए। भाजपा आएगी तो बंगाल में रेल और मेट्रो का तेजी से विकास होगा। यहाँ बहुत बड़ी मात्रा में निवेश आए, युवाओं को रोजगार मिले। ये तभी होगा जब यहाँ कानून का राज आएगा, जब भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और जब बंगाल में डबल इंजन की सरकार होगी।”
एंटी करप्शन बिल को लेकर पीएम ने साधा निशाना
पीएम मोदी ने एंटी करप्शन बिल को लेकर भी TMC पर निशाना साधा है। पीएम मोदी ने कहा, “जेल से भी सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं। TMC का मंत्री शिक्षक भर्ती में आज तक जेल में है, तब भी वो कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे। TMC के एक और मंत्री पर गरीबों के राशन लूटने का आरोप है। ये भी जेल जाने के बाद कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे।”
पीएम मोदी ने कोलकाता में कई मेट्रो रेल परियोजनाओं का किया उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले कोलकाता में कई मेट्रो रेल परियोजनाओं का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने जेसोर रोड मेट्रो स्टेशन से नोआपाड़ा-जय हिंद बिमान बंदर मेट्रो सेवा को हरी झंडी दिखाई है।
इसे साथ ही पीएम मोदी ने सियालदह-एस्प्लेनेड मेट्रो सेवा और बेलेघाटा-हेमंत मुखोपाध्याय मेट्रो सेवा को भी हरी झंडी दिखाई है। 13.61 किलोमीटर लंबे ये मेट्रो नेटवर्क कोलकाता के व्यस्त इलाकों को जोड़कर यात्रा के समय को काफी कम कर देंगे और इन सेवाओं का लाभ हर दिन लाखों यात्रियों को होगा। पीएम मोदी ने सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए 7.2 किलोमीटर लंबे छह-लेन एलिवेटेड कोना एक्सप्रेसवे की आधारशिला भी रखी।
आज का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप वास्तव में आधुनिकता का प्रतीक है या फिर यह हमारे समाज और संस्कृति को खोखला करने वाली एक सोच है? अनिरुद्धाचार्य जी ने जब इसे ‘कुत्ता संस्कृति’ कहा तो बेशक भाषा पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन उनके कहने का असली मतलब बेहद गहरा और गंभीर है।
विवाह भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह केवल दो लोगों का मिलन नहीं बल्कि दो परिवारों, दो परंपराओं और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का वचन है। विवाह रिश्तों में स्थिरता, जिम्मेदारी और भरोसा देता है। इसके विपरीत लिव-इन रिश्ते अक्सर सिर्फ आकर्षण और सुविधा पर टिके होते हैं, जिनमें ना कोई सामाजिक जिम्मेदारी होती है और ना भविष्य की गारंटी।
यह सच है कि भारतीय न्यायपालिका ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता दी है। अदालतों ने इसे दो वयस्कों का व्यक्तिगत निर्णय माना है और कहा है कि इसमें अपराध जैसा कुछ नहीं लेकिन कानूनी मान्यता और सामाजिक स्वीकार्यता में फर्क होता है। कोर्ट का निर्णय कानून की दृष्टि से है जबकि समाज का आधार संस्कार और मूल्य हैं।
युवाओं को यह समझना होगा कि लिव-इन रिलेशन का सबसे बड़ा शिकार बच्चे बनते हैं। जब रिश्ते बिना बँधन के टूटते हैं तो उनका मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य सबसे पहले प्रभावित होता है। यही वजह है कि पश्चिमी देशों में जहाँ लिव-इन संस्कृति फैली वहाँ अकेलापन, डिप्रेशन और पारिवार टूटने की घटनाएँ तेजी से बढ़ीं।
भारत जैसे देश में जहाँ परिवार हमारी सबसे बड़ी ताकत है वहाँ इस तरह की सोच समाज की जड़ों को खोखला कर सकती है। कुछ लोग इसे पर्सनल फ्रीडम का नाम देते हैं लेकिन असली आजादी जिम्मेदारी के साथ होती है। जिस रिश्ते में न कल का भरोसा हो, न समाज और परिवार की स्वीकृति वह रिश्ता सिर्फ क्षणिक सुख है, स्थायी समाधान नहीं।
लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी सुरक्षा मिल चुकी है लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विवाह ही समाज की रीढ़ है और इसे मजबूत करना हमारी जिम्मेदारी है।
कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने जोर शोर से बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली, SIR पर जमकर लोगों को भड़काया। अनर्गल बातें फैलाईं। अब उनके एक-एक झूठ की कलई खुल करल सामने आती जा रही है।
ताजा मामला एक वायरल वीडियो का है। वीडियो में रफीगंज निवासी अमन कुमार से नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव ने पूछा कि वह SIR के बारे में क्या जानते हैं। इस पर अमन ने कहा कि इसका मतलब है कि गरीबों का नाम वोटर्स लिस्ट से हटा दिया जाएगा।
असल में उसकी शिकायत थी कि उसके पिता रजाक का नाम लिस्ट से हटा दिया गया। अमन ने तो राहुल गाँधी के सामने ये तक कह दिया कि आग चलकर गरीबों से मतदान करने का अधिकार छीन लिया जाएगा।
अमन के बयान के बाद राहुल गाँधी ये कहा, “बिल्कुल, यही हो रहा है।”
खुल गई पोल
वीडियो वायरल हुआ तो स्थानीय प्रशासन और चुनाव आयोग ने अमन की शिकायत की जाँच की। इसमें पता चला कि रजाक के साथ अमन का भी का नाम वास्तव में वोटर लिस्ट में मौजूद था। प्रशासन ने अमन से इस पर सवाल पूछे तो उसने कहा कि लिस्ट उसने चेक ही नहीं की थी।
इसके बाद अमन कुमार ने वीडियो बनाकर ही सार्वजनिक रूप से माफी माँगी और कहा कि उसे गलत जानकारी मिली थी।
अमन ही नहीं, राहुल ने अलग अलग क्षेत्रों से कई लोगों से ये कहलवाया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से गायब है। नहाटा के चकला गाँव की एक महिला को भी ये कहकर वोट अधिकार यात्रा में शामिल किया गया कि उसके घरवालों के नाम सूची में नहीं हैं। उसे वह राहुल गाँधी से मिल कर जुड़वा सकती हैं। बाद में पता चला कि उसके घरल के सभी लोगों का नाम लिस्ट में शामिल है।
?पप्पू फिर से पकड़ा गया
बिहार के ग्रामीण इलाके में एक महिला ने दावा किया कि उसके परिवार का नाम मतदाता सूची से गायब है—बाद में उसने स्वीकार किया कि उसे राहुल गांधी से ऐसा कहने के लिए कहा गया था। ?????? pic.twitter.com/B9RuXV2NwN
प्रशासन के पूछे जाने पर महिला ने बताया कि उसे जबरन बुलाया गया था। उसे सही जानकारी नहीं थी।
जबरन मुद्दा बनाने की कोशिश
असल में राहुल गाँधी इस यात्रा के जरिए मतदाता सूची में गड़बड़ी होने की बात उठाना चाह रहे थे, जो असल में हुई नहीं। राहुल गाँधी ने इस मुद्दे को ‘वोट चोरी’ की साजिश बताया था और दावा किया था कि देशभर में गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग ने भी इस पूरे मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और स्पष्ट रूप से कहा कि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया का उद्देश्य मृत या फर्जी नामों को हटाना है, न कि गरीबों या अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना। सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग की प्रक्रिया को सही ठहराया और कहा कि आधार कार्ड को वोटर सत्यापन के लिए अनिवार्य नहीं माना गया है।
चुनाव आयोग ने कहा ता कि वोटर लिस्ट से 65 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। इन्हीं 65 लाख कटे नामों के सहारे राहुल गाँधी राजनीतिक संजीवनी खोजने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि उनका असर लोगों पर नहीं दिख पा रहा है क्योंकि लगभग सभी लोगों के नाम वोटर लिस्ट में मौजूद हैं।
इसके बाद कॉन्ग्रेस नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलीभगत करके, लाखों फर्जी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए हैं। इश पर भी चुनाव आय़ोग ने उनके एक एक आरोपों का तथ्य सहित जवाब पेश कर दिया।
नाम हटाने को लेकर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने पटना से दिल्ली तक एसआईआर के खिलाफ बवाल खड़ा करने की कोशिश की। गले फाड़-फाड़ कर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन आयोग के बार बार पूछे जाने के बावजूद ये नहीं बता पा रहे कि उन्हें आखिर आपत्ति किस बात पर है?
सासाराम में भी यात्रा के दौरान उन्होंने वोट चोरी और मतदाता के हक की बात दोहराते रहे लेकिन यहाँ पर भी लोगों ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया। ऐसे में झूठी शिकायतों के सहारे वे लोगों का बरगलाने का प्रयास तो कर सकते हैं पर सफल नहीं हो सकते।
ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार (20 अगस्त 2025) को वोटर आईडी कार्ड के रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ी के आरोप में 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इससे पहले चुनाव आयोग (ECI) ने इन दागी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बीते 13 अगस्त को राज्य सरकार को 7 दिनों की समय सीमा दी थी।
‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य सचिव मनोज पंत ने चुनाव आयोग को इस संबंध में रिपोर्ट भेज दी है। हालाँकि, अब तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई है लेकिन अधिकारियों ने विभागीय कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है। चुनाव आयोग ने इन अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के भी निर्देश दिए थे।
गौर करने वाली बात यह है कि मनोज पंत ने इससे पहले इन दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को रोकने की कोशिश थी। उनका तर्क था कि ऐसी कार्रवाई न केवल दोषी व्यक्तियों पर बल्कि चुनावी जिम्मेदारियों और अन्य प्रशासनिक कामकाज में लगे अधिकारियों की पूरी टीम के मनोबल पर भी असर डाल सकती है।
फर्जी मतदाता मामले में कार्रवाई का आदेश
इस महीने की शुरुआत में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चार चुनाव अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इन पर आरोप था कि उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर फर्जी मतदाता आवेदनों को पंजीकृत करने की अनुमति दी।
पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के अपडेट के लिए फॉर्म-6 की सैंपल जाँच के दौरान यह गड़बड़ी सामने आई। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई उनमें दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) देबोत्तम दत्ता चौधरी और बिप्लब सरकार और दो सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) तथागत मंडल और सुदीप्त दास शामिल हैं। इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था।
इसके अलावा, चुनाव आयोग ने अस्थाई डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरोजित हलधर के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। आयोग ने कहा कि इन अधिकारियों की हरकतें आपराधिक कदाचार के बराबर हैं।
ECI ने बिना देरी किए इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए और प्राथमिकी दर्ज करने को भी कहा। साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि फर्जी मतदाताओं को सूची में जोड़ने के मामले में दोषी अधिकारियों पर 7 दिन के भीतर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
केंद्र सरकार ने नेताओं के भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के लिए संसद में 130वां संविधान संशोधन बिल पेश किया है। इस बिल के तहत अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री पर 5 वर्ष या उससे अधिक सजा वाली धाराओं में मुकदमा दर्ज होता है तो 30 दिन जेल में रहने के बाद उनका पद चला जाएगा। फिलहाल, यह बिल संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है।
इस बिल के प्रावधानों के खिलाफ लगातार विपक्ष विरोध प्रदर्शन कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को बिहार के गयाजी में कहा कि सरकारी कर्मचारी 50 घंटों तक हिरासत में रहे तो वह सस्पेंड हो जाता है लेकिन PM और CM जेल से भी सत्ता का सुख भोगते रहते हैं।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा, “मेरा साफ मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को अगर अंजाम तक पहुँचाना है तो कोई भी कार्रवाई के दायरे से बाहर नहीं होना चाहिए। आज कानून है कि अगर किसी छोटे सरकारी कर्मचारी को 50 घंटे तक हिरासत में रखा जाए तो वह अपने-आप सस्पेंड हो जाता है, ड्राइवर हो, क्लर्क हो, चपरासी हो उनकी जिंदगी तबाह हो जाती है। अगर कोई मुख्यमंत्री है, मंत्री है या प्रधानमंत्री है, तो वह जेल में रहकर भी सत्ता का सुख पा सकता है।”
उन्होंने कहा, “हमने कुछ समय पहले ही देखा है कि कैसे जेल से ही फाइलों पर साइन किए जा रहे थे, जेल से ही सरकारी आदेश निकाले जा रहे थे। नेताओं का अगर यही रवैया रहेगा, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कैसे लड़ी जा सकती है? संविधान हर जनप्रतिनिधि से ईमानदारी और पारदर्शिता की उम्मीद करता है।”
#WATCH | PM Narendra Modi says, "… If a government employee is imprisoned for 50 hours, then he loses his job automatically, be it a driver, a clerk or a peon. But a CM, a Minister, or even a PM can enjoy staying in the government even from jail… Some time ago, we saw how… pic.twitter.com/1iY1hXr3Xp
भारत में केंद्रीय कर्मियों के वर्गीकरण, उन पर नियंत्रण और कदाचार के मामले में कार्रवाई के लिए दिशानिर्देश ‘केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965’ में दिए गए हैं। ये नियम 1 दिसंबर 1965 से लागू किए थे। इसके भाग 4 में केंद्रीय कर्मियों के निलंबन के नियम दिए गए हैं।
इसमें नियम 10 के उपनियम 2 के खंड (क) में कहा गया है, “किसी सरकारी कर्मचारी को नियुक्ति करने वाली प्राधिकरण (appointing authority) के आदेश से निलंबित माना जाएगा अगर वह किसी आपराधिक आरोप या अन्य वजह से 48 घंटे से अधिक की अवधि के लिए कस्टडी में रखा जाता है। यह निलंबन उसके हिरासत में लिए जाने की तारीख से ही प्रभवी माना जाता है।”E
वहीं, उपनियम 2 के खंड (ख) में कहा गया है, “अदालत अगर किसी कर्मी को किसी अपराध में दोषी ठहराकर 48 घंटे से ज्यादा की कैद की सजा सुनाती है। ऐसे में अगर उसे तुरंत नौकरी से बर्खास्त, हटाया या अनिवार्य सेवानिवृत्त नहीं किया गया हो तो दोषसिद्धि की तारीख से उसे निलंबित माना जाता है।”
इसमें खंड (ख) को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया है, “इसमें दिए गए 48 घंटों को सजा शुरू होने के समय से गिना जाएगा। अगर सजा बीच-बीच में रुक-रुक कर (जैसे अलग-अलग बार जेल जाना पड़े) पूरी की गई हो, तो उन सब अवधियों को जोड़कर देखा जाएगा।”
केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 का भाग
इन नियमों में गृह मंत्रालय द्वारा 25 फरवरी 1955 को जारी एक पत्र भी शामिल किया गया है। इस पत्र में कहा गया है, “यह उस सरकारी सेवक की ड्यूटी होगी जिसे किसी कारण से गिरफ्तार किया गया है कि वह अपनी गिरफ्तारी से संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों को अपने सरकारी वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल सूचित करे चाहे उसे बाद में जमानत पर रिहा ही क्यों न कर दिया गया हो।”
इसमें आगे कहा गया है, “संबंधित व्यक्ति या किसी अन्य स्रोत से सूचना मिलने पर विभागीय प्राधिकारी इस बात का निर्णय लेंगे कि क्या उस व्यक्ति की गिरफ्तारी से संबंधित तथ्य और परिस्थितियों के कारण उसे निलंबित करने की आवश्यकता है कि नहीं?”
IAS, IPS और IFS अधिकारियों का निलंबन
अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के निलंबन किए जाने की शर्तें अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 में दी गई हैं। ये नियम IAS, IPS और IFS अधिकारियों पर लागू होते हैं।
इसके भाग 2 के नियम 3 में निलंबन संबंधी शर्तें हैं और इसके उपनियम 2 में कहा गया है, “इन सर्विसेज का कोई कर्मी अगर किसी आपराधिक आरोप के कारण या किसी अन्य वजह से 48 घंटे से अधिक अवधि के लिए आधिकारिक हिरासत में रखा जाता है तो इस नियम के अंतर्गत संबंधित सरकार द्वारा निलंबित माना जाएगा।”
वहीं, इसके उपनियम 4 में कहा गया है, “अदालत अगर किसी कर्मी को किसी अपराध में दोषी ठहराकर 48 घंटे से ज्यादा की कैद की सजा सुनाती है। ऐसे में अगर उसे तुरंत नौकरी से बर्खास्त, हटाया या अनिवार्य सेवानिवृत्त नहीं किया गया हो तो दोषसिद्धि की तारीख से उसे निलंबित माना जाता है।”
अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 का भाग
निलंबन का रिव्यू
इन सेवा शर्तों में अधिकारियों के निलंबन को रिव्यू किए जाने को लेकर भी नियम दिए गए हैं। अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियम में कहा गया है कि प्रत्येक मामले में निलंबन आदेश की तिथि से 90 दिनों के भीतर समीक्षा की जाएगी। इसमें कहा गया है कि जिन मामलों में निलंबन की अवधि बढ़ा दी जाती है तो उनमें रिव्यू विस्तार की अंतिम तारीख से 180 दिनों के भीतर किया जाएगा।
वहीं, केंद्रीय सिविल सेवा नियम में कहा गया है, “अगर किसी को निलंबित किया गया है, तो वह आदेश सिर्फ 90 दिन तक ही मान्य रहेगा। अगर इसे 90 दिन के बाद भी जारी रखना है, तो 90 दिन पूरे होने से पहले समीक्षा करके ही इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।”
इसमें आगे कहा गया है, “किसी कर्मचारी को निलंबित करने के आदेश दिए जाने के बाद, 90 दिन पूरे होने से पहले उस अधिकारी को उसकी समीक्षा करनी होगा, जिसके पास निलंबन को बदलने या खत्म करने की शक्ति है। यह समीक्षा एक रिव्यू कमेटी की सिफारिश पर होगी। इस समीक्षा के बाद अधिकारी को तय करना होगा कि निलंबन को जारी रखना है या खत्म करना है। निलंबन को एक बार में 180 दिनों से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता।”
निलंबित कर्मी को कितना मिलता है निर्वाह भत्ता?
निलंबन की अवधि के दौरान सरकारी कर्मचारी को जीविका चलाने हेतु निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) दिया जाता है। निलंबन के पहले 90 दिनों तक कर्मचारी को उसके आखिरी वेतन का 50% जीविका भत्ते के रूप में दिया जाता है। यदि विभागीय कार्रवाई में देरी कर्मचारी की गलती से नहीं होती है, तो यह भत्ता बढ़ाकर 75% तक किया जा सकता है लेकिन यदि देरी कर्मचारी की वजह से होती है, तो यह घटाकर 25% कर दिया जाता है।
इस भत्ते में मकान किराया भत्ता (HRA), महंगाई भत्ता (DA) या अन्य कोई विशेष भत्ता शामिल नहीं होता। साथ ही, यह भत्ता कर्मचारी के मूल वेतन से अधिक नहीं हो सकता है।
मुंबई की टाइम्स ऑफ इंडिया में डिप्टी मैनेजर होने का दावा करने वाली दिव्या राणा ने मेरी माँ को अपमानजनक शब्द कहे और उन पर यौन हमला करने की बात लिखी।
इस पूरे विवाद पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने दिव्या को अपना कर्मचारी मानने से इनकार कर दिया और संबंधित अकाउंट को ‘फर्ज़ी’ बताकर मामले से खुद को अलग करने की कोशिश की।
वहीं दिव्या ने मुझे शारीरिक नुकसान पहुँचाने की धमकी भी दी और अपने पिता, जो कथित तौर पर जज हैं, उनके प्रभाव का इस्तेमाल करके मेरी जिंदगी बर्बाद करने की कसम खाई। ये सभी धमकियाँ उन्होंने उस फेसबुक पोस्ट के बाद दीं, जिसमें बेंगलुरु में रेबीज़ से चार साल के बच्चे की मौत पर सवाल उठाए गए थे।
दिव्या राणा का फेसबुक प्रोफाइल, जिसमें वह टाइम्स ऑफ इंडिया की उप प्रबंधक होने का दावा करती हैं
यह घटना गुरुवार (21 अगस्त 2025) को हुई, जब मैंने बेंगलुरु में आवारा कुत्तों के कारण चार साल की एक बच्ची की मौत पर फेसबुक पोस्ट शेयर की थी।
बच्ची एक रेहड़ी-पटरी वाले की बेटी थी, जिसे रेबीज हो गया था और रविवार (17 अगस्त 2025) को उसकी मौत हो गई। लोकप्रिय सोशल मीडिया कमेंटेटर ‘द स्किन डॉक्टर’ ने मंगलवर (19 अगस्त 2025) को इस घटना के बारे में फेसबुक पर पोस्ट किया था।
मैंने उनकी पोस्ट इस कैप्शन के साथ शेयर की थी, “हमने तुम्हें निराश किया, बच्ची। आवारा कुत्तों को सड़क पर रखने के लिए अभियान चलाने वाले ‘डॉग एक्टिविस्ट’ इस बारे में एक शब्द भी नहीं बोलेंगे।”
फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट
दिव्या राणा, जो खुद को ‘पत्रकार’ और उप-प्रबंधक बताती हैं, मेरे फेसबुक पेज पर आईं और अपनी पहचान का इस्तेमाल करके मुझे परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।
उन्होंने कहा कि यह खबर गलत है और असत्यापित जानकारी साझा करने पर मुझे कानूनी सजा मिलेगी। लेकिन जब मैंने दोबारा पूरी जाँच की तो पाया कि खबर बिल्कुल सही थी।
रेबीज से बच्चे की मौत की खबर ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ समेत कई मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हुई थी। फिर भी, दिव्या राणा ने फेसबुक पोस्ट के कमेंट सेक्शन में मुझे चैटजीपीटी से तैयार किया गया ‘सीज एंड डिसिस्ट नोटिस’ भेजा।
— Dibakar Dutta (দিবাকর দত্ত) (@dibakardutta_) August 21, 2025
जब मैंने दिव्या राणा से कहा कि वे कानूनी नोटिस मेरे आधिकारिक ईमेल ([email protected]) पर भेजें, तो उन्होंने समय बर्बाद करना शुरू कर दिया। मैंने टाइम्स ऑफ इंडिया की कथित डिप्टी मैनेजर से अनुरोध किया कि वे जल्दी से नोटिस भेजें।
लेकिन इसके बजाय, उन्होंने मुझे ‘मानहानि’ और ‘गलत जानकारी’ फैलाने के आरोप में गिरफ़्तार कराने की धमकी दी।
दिव्या राणा ने आगे कहा, “इंडियन एक्सप्रेस के लिए वारंट पहले ही जारी हो चुका है। आपको भी कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है। आपने स्वीकार किया है कि यह जानकारी आपने दूसरों द्वारा साझा की गई पोस्ट के आधार पर शेयर की है और आपके पास कोई ठोस तथ्य नहीं हैं। इसलिए यह नोटिस जरूरी है।”
Divya Rana from @TOIIndiaNews claimed that a warrant has been issued to The Indian Express which 'incorrectly' covered the rabies story.
— Dibakar Dutta (দিবাকর দত্ত) (@dibakardutta_) August 21, 2025
राणा ने अपनी धमकी भरी रणनीति जारी रखते हुए कहा, ” आपको सोशल मीडिया पर बदनामी करने और सुनी-सुनाई बातों पर आधारित झूठी जानकारी फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”
गिरफ़्तारी और वारंट की धमकियों के बावजूद, जब मैंने बार-बार अपनी ईमेल आईडी पर ‘कानूनी नोटिस’ भेजने की माँग की, तो टाइम्स ऑफ इंडिया की कथित उप-प्रबंधक गालियाँ देने लगीं।
दिव्या राणा ने मेरी 70 साल की माँ को ‘रं$%’ और ‘हि&$%’ कहने में कोई झिझक नहीं दिखाई। यहाँ तक कि उन्होंने मेरी माँ को सार्वजनिक रूप से नंगा घुमाने की भी धमकी दी।
इसके अलावा, उन्होंने अपने जज पिता के प्रभाव और ताकत का इस्तेमाल करके मेरी जिंदगी बर्बाद करने की चेतावनी दी। मेरी बस इतनी गलती थी कि मैंने एक बच्चे की कुत्ते के काटने और उसके बाद रेबीज से हुई असामयिक मौत का मुद्दा उठाया था।
एक बेटे के तौर पर, माँ को दी गई गालियों का अनुवाद करना मेरे लिए मुश्किल है।
दिव्या राणा: दिबाकर दत्ता, क्या तेरी माँ कोई रं$% है जो तेरी आग बुझाने आती है? चू&$ की गां$ नहीं, तेरी माँ की गां$ है। तेरी माँ का क्या रेट है? हर्ष वर्मा मेरे पापा हैं जो जज हैं। तेरी चड्डी उतरवा दूँगी और तुझे नंगा घुमाऊँगी, हि&$* और रं&* की औलाद।
क्या तेरी गां$ भी है? तेरा चेहरा भद्दा है और तेरी बातें भी। छी, कितना घिनौना चेहरा है तेरा, रं$# की औलाद। देख, तेरी माँ सड़कों पर नं&@ घूम रही है। मा*$@द, अभी भौंकता रह। मैं तुझे कानूनी जवाब दूँगी, नाले के घिनौने कीड़े। भौंकता रह, मैं जवाब भी नहीं दूँगी और मै पढ़ूँगी भी नहीं।
मैं इस बात से आश्चर्यचकित हूँ कि राणा, ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के साथ अपने कथित संबंध और अपने पिता के न्यायाधीश के कथित पेशे के जरिए बिना किसी कानून के डर के एक आम आदमी को धमकाने और गाली देने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की प्रतिक्रिया
एक्स पर जब मैंने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कार्रवाई की माँग करते हुए यह मामला उठाया, तो अखबार ने करीब 16 घंटे बाद, शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को प्रतिक्रिया दी। अखबार ने दावा किया कि मेरे ट्वीट में जिस व्यक्ति का जिक्र है, वह उसका कर्मचारी नहीं है, बल्कि यह किसी वास्तविक कर्मचारी के नाम पर बनाया गया ‘फर्ज़ी अकाउंट’ प्रतीत होता है।
सवाल यह है कि क्या दिव्या राणा वास्तव में टाइम्स ऑफ इंडिया की कर्मचारी हैं या फिर अखबार सिर्फ अपनी छवि बचाने की कोशिश कर रहा है। इस लेख के लिखे जाने तक दिव्या राणा का फेसबुक प्रोफाइल सक्रिय था, जिसकी कवर इमेज पर अब भी ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ लिखा हुआ है।
हालाँकि अखबार ने ‘उचित कार्रवाई’ का आश्वासन दिया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि कार्रवाई किस तरह की होगी और ‘फर्ज़ी अकाउंट’ से उसकी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई के लिए तत्काल क्या कदम उठाए गए हैं।
नोट- मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में दिबाकर दत्ता ने लिखी है, इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है।
‘भारत रूसी युद्ध मशीन को ईंधन दे रहा है’, ‘भारत रूस-यूक्रेन युद्ध से मुनाफाखोरी कर रहा है’, ‘भारत रूस से नजदीकियाँ बढ़ा रहा है’- ट्रंप प्रशासन लगातार इस तरह के आरोप लगाकर भारत को रूसी तेल की खरीद को लेकर बदनाम करता रहा है
इन आरोपों के पीछे मुख्य वजह भारत की ओर से रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना है। भारत इस तेल को रिफाइन कर उन यूरोपीय देशों को बेच रहा है, जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। इस प्रक्रिया के जरिए वैश्विक ऊर्जा संकट को कम करने में मदद मिली है। पहले अमेरिका ने भारत की इस भूमिका की सराहना की थी, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन अचानक भारत से नाराज हो गया है।
अमेरिका खुद रूस-यूक्रेन युद्ध से काफी मुनाफा कमा रहा है, लेकिन भारत को खुलेआम ‘विलेन’ बना रहा है। हाल ही में अमेरिका के ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने भारत की रूसी तेल खरीद और यूरोपीय देशों को बिक्री को ‘आर्बिट्राज’ कहा। उन्होंने दावा किया कि भारत ने $16 बिलियन (लगभग ₹1.32 लाख करोड़ रुपए) का अतिरिक्त मुनाफा कमाया।
बेसेंट ने घोषणा की, “हम भारत पर सेकेंड्री टैरिफ लगाने की योजना बना रहे हैं क्योंकि भारत रूस से प्रतिबंधित तेल खरीद रहा है।” उन्होंने कहा कि 2022 से पहले भारत रूस से 1% से भी कम तेल खरीदता था, लेकिन अब यह 42% तक पहुँच गया है।
उनके अनुसार, “भारत सिर्फ मुनाफाखोरी कर रहा है और भारत के कुछ सबसे अमीर परिवारों ने इस युद्ध से ₹1.32 लाख करोड़ (लगभग $16 बिलियन) का अतिरिक्त लाभ कमाया है।”
बेसेन्ट के ‘भारत के प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीदा’ वाला बयान तब आया जब यूरोपीय संघ के नियमों (Council Regulation 833/2014) के अनुसार, परिष्कृत कच्चा तेल अब ‘रूसी’ नहीं माना जाता। इस लिहाज से भारत जो तेल यूरोप को बेचता है, वह भारत में रिफाइन किया गया उत्पाद होता है, न कि रूसी तेल।
इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन भारत को रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए दोषी ठहराने पर तुला हुआ है। यहाँ तक कि वे यह भी भूल गए कि G7 देशों द्वारा तय की गई $60 (लगभग ₹4,980 रुपए) प्रति बैरल की मूल्य सीमा का उद्देश्य रूसी तेल की आपूर्ति बनाए रखना था, ताकि मास्को को जरूरत से अधिक मुनाफा न हो।
व्हाइट हाउस के ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो ने भी हाल ही में फाइनेंनशियल टाइम्स में एक लेख लिखा, जिसमें उन्होंने भारत को युद्ध का मुख्य दोषी बताया और चीन, यूरोप और अमेरिका को क्लीन चिट दे दी।
नवारो ने लिखा, “भारत रूसी तेल के लिए वैश्विक क्लियरिंगहाउस की तरह काम करता है, प्रतिबंधित कच्चे तेल को उच्च मूल्य वाले निर्यात में बदलता है और मास्को को डॉलर देता है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत के समर्थन से रूस यूक्रेन पर हमला जारी रखता है। इसके कारण अमेरिकी और यूरोपीय टैक्सपेयर्स अरबों डॉलर खर्च करने को मजबूर हैं।
नवारो और बेसेन्ट ने भारतीय कंपनियों को बदनाम किया, लेकिन यह नहीं बताया कि अमेरिकी तेल कंपनियों ने 2022 से अब तक रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है। तरल प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात, हथियारों की बिक्री और युद्ध से जुड़े कई अवसरों पर अमेरिका इस युद्ध का सबसे बड़ा लाभार्थी बन गया है।
अगर ट्रंप वास्तव में उन लोगों को ‘सजा’ देना चाहते हैं जो रूसी युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं तो उन्हें यूरोप से अमेरिका पर ही प्रतिबंध लगाने की माँग करनी चाहिए।
2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप ने रूस से गैस पर अपनी 40% निर्भरता कम कर दी। रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए कई प्रतिबंध लगाए गए, ये सोचकर कि इससे मास्को पश्चिम की शर्तों को मान लेगा और युद्ध खत्म कर देगा।
लेकिन इस योजना के अनुसार सब कुछ नहीं हुआ। अमेरिका ने इस गैस आपूर्ति की कमी को पूरा किया और 2023 में यूरोपीय संघ का शीर्ष LNG आपूर्तिकर्ता बन गया।
अमेरिका ने अपनी सस्ती LNG यूरोप को चार गुना से भी अधिक कीमत पर बेची। इसके पीछे इसने ‘युद्ध के कारण आई रुकावटों’ का हवाला दिया। यूरोप की तत्काल जरूरतों का फायदा उठाते हुए अमेरिका ने भारी मुनाफा कमाया।
गौरतलब है कि 2022 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिका को इन बढ़ी हुई कीमतों के लिए फटकार लगाई थी। यहाँ तक कि एक वरिष्ठ यूरोपीय अधिकारी ने भी कहा था कि अमेरिका ‘इस रूस-यूक्रेन युद्ध से सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाला देश है।’
2022 में अमेरिकी तेल और गैस कंपनियाँ जैसे कि शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल ने युद्ध से पहले वर्ष 2021 की तुलना में 125% की दर से रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया। उसी वर्ष, अमेरिका ने यूरोप को LNG की 50% आपूर्ति की और 12% तेल भी दिया।
रूस पर लगाए गए बहिष्कार, प्रतिबंध और यूरोपीय संघ की मूल्य सीमा के कारण यूरोप को रूसी तेल और गैस की आपूर्ति में भारी गिरावट आई। इस खाली जगह का फायदा उठाते हुए अमेरिका ने अपनी पकड़ मज़बूत की और इसी के ज़रिए NATO में अपना प्रभुत्व भी बढ़ाया।
2023 में अमेरिका यूरोप का सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता बना रहा। उस वर्ष यूरोप की ओर से आयात की गई कुल LNG का लगभग 48% हिस्सा अमेरिका से आया, जिसमें फ्रांस, स्पेन, नीदरलैंड और ब्रिटेन प्रमुख आयातक देश रहे।
2024 में यूरोपीय संघ (EU) की गैस आपूर्ति में नॉर्वे ने 33% हिस्सेदारी के साथ अग्रणी भूमिका निभाई, लेकिन साथ ही अमेरिका ने भी 16.5% हिस्सेदारी दर्ज की। इसी वर्ष, यूरोपियन यूनियन ने 100 अरब घन मीटर (bcm) से अधिक LNG आयात किया और अमेरिका 45% LNG आपूर्ति कर एक बार फिर से सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया।
ऊर्जा क्षेत्र से अलग, अमेरिका को रूस-यूक्रेन युद्ध में रक्षा निर्यात के जरिए भी काफी मुनाफा हुआ है। अमेरिका ने यूक्रेन को $19 बिलियन (₹1.58 लाख करोड़ रुपए) से अधिक के हथियार भेजे। इससे लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन जैसी अमेरिकी रक्षा कंपनियों के शेयरों में उछाल आया। वास्तव में, जर्मन रक्षा कंपनी राइनमेटल को भी इस युद्ध से मुनाफा हुआ। युद्ध शुरू होने के बाद से इस कंपनी के शेयरों की कीमत 14 गुना तक बढ़ चुकी है।
ध्यान देने योग्य बात ये भी है कि मीअमेरिका ने बेशर्मी के साथ ये स्वीकारा है कि यूक्रेन को दी जा रही सैन्य सामग्री से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। पहले अमेरिका ने $95 बिलियन (₹7.88 लाख करोड़ रुपए) का अतिरिक्त रक्षा बजट पेश किया था, जिसमें से $60.7 बिलियन (लगभग ₹5.04 लाख करोड़ रुपए) यूक्रेन को आवंटित किए गए। इसे पीछे वादा किया गया कि इस बजट का 64% हिस्सा अमेरिकी रक्षा उद्योग को दोबारा उठाने में काम आएगा।
अब, डोनाल्ड ट्रंप यूरोपीय देशों के माध्यम से यूक्रेन को 10% प्रीमियम के साथ हथियार बेच रहे हैं। यह रणनीति खासतौर पर अमेरिका के खजाने को भरने के लिए अपनाई गई है, जबकि रूस और यूक्रेन के आम नागरिक युद्ध में जान गँवा रहे हैं। ट्रंप ने यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने में अमेरिका की भूमिका के लिहाज से एक कीमत भी तय कर दी है।
असल में, अमेरिकी सेना अब यूक्रेन के लिए एक प्रकार की ‘भाड़े की सेना’ की तरह काम कर रही है। लेकिन अमेरिका चाहता है कि दुनिया यह माने कि युद्ध से लाभ कमाने वाला देश वॉशिंगटन नहीं, बल्कि नई दिल्ली है।
ट्रंप प्रशासन की हिपोक्रेसी की कोई सीमा नहीं है। अमेरिका का पाखंडी रवैया वैसे तो हैरान करने वाला नहीं है, लेकिन ट्रंप के अधिकारियों ने इसे खुले तौर पर स्वीकार कर अपने दोहरे चरित्र की एक नई मिसाल कायम कर दी है।
यही अमेरिकी ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेन्ट, जिन्होंने भारत पर रूस-यूक्रेन युद्ध से मुनाफाखोरी का आरोप लगाया था, वे अमेरिका की उस रणनीति पर गर्व करते देखे जा सकते हैं जिसमें यूरोप के जरिए यूक्रेन को को हथियार बेचे जा रहे हैं और जिन पर राष्ट्रपति ट्रंप 10% अतिरिक्त शुल्क ले रहे हैं।
बेसेन्ट ने फॉक्स न्यूज़ को बताया, “हम यूरोपीय देशों को हथियार बेच रहे हैं, वे उन्हें यूक्रेन को भेज रहे हैं और राष्ट्रपति ट्रंप इन हथियारों पर 10 प्रतिशत का प्रीमियम ले रहे हैं। शायद यही 10 प्रतिशत एयर कवर की लागत को पूरा कर देगा।”
US Treasury Secretary who accuses India of "profiteering" from its oil purchase from Russia, is gloating over the fact that the US is selling weapons to Europe intended for Ukraine with a 10% markup. Selling weapons that kill people and profiteering from it vs India buying… pic.twitter.com/0ImPlsCgYZ
यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की ओर से अमेरिका से $100 अरब डॉलर (₹8.3 लाख करोड़ रुपए) की कीमत के हथियार खरीदने के प्रस्ताव को लेकर कई खबरें सामने आई हैं। इस सौदे से डोनाल्ड ट्रंप को $10 अरब (₹83,000 करोड़ रुपए) का कमीशन मिलेगा, इसके अलावा हथियार बेचने वाले अमेरिकी कंपनियों की ओर से दिया जाने वाला टैक्स भी इसमें शामिल हैं।
अमेरिका यूरोप को LNG और तेल बेचकर काफी मुनाफा कमा रहा है। साथ ही बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, अपने अनुसार, कीमतों में बदलाव किए और रणनीतिक भू-राजनीतिक लाभ लिए। रूस से आयात में आई गिरावट के बाद अमेरिका एक प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बन गया। इससे अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों की आय में वृद्धि हुई है और घरेलू उद्योग को भी मजबूती मिली है।
हालाँकि अमेरिका ने प्रतिबंधों के चलते रूसी कच्चे तेल का आयात कम किया है, लेकिन वह अब भी रूस के साथ कई क्षेत्रों में व्यापार कर रहा है। यूक्रेन पर रूस के हमले के तीन साल बाद भी अमेरिका ने मास्को से अपने व्यापारिक संबंध पूरी तरह नहीं तोड़े हैं।
जनवरी 2022 से अब तक अमेरिका ने $24.5 अरब (लगभग ₹2.03 लाख करोड़) से अधिक मूल्य के रूसी सामान आयात किए हैं। इस वर्ष अकेले अमेरिका ने $1.27 अरब (₹1.05 लाख करोड़) के उर्वरक, $624 मिलियन (₹5,179 करोड़) के यूरेनियम और प्लूटोनियम और लगभग $878 मिलियन (₹7,287 करोड़) के पैलेडियम खरीदे हैं।
2024 में जनवरी से नवंबर तक पैलेडियम और एल्युमिनियम जैसे गैर-लौह धातुओं का आयात $876.5 मिलियन (लगभग ₹72,754 करोड़) रहा। अकार्बनिक रसायनों का आयात $683 मिलियन (लगभग ₹56,089 करोड़), बिजली उत्पादन मशीनरी $79 मिलियन (लगभग ₹6,557 करोड़) और कॉर्क तथा लकड़ी उत्पाद लगभग $64 (लगभग ₹5,312 करोड़) मिलियन रहा।
अन्य वस्तुओं में $80.81 मिलियन (लगभग ₹6,710 करोड़) मूल्य के परमाणु रिएक्टर और मशीनरी, पशु आहार, लोहा और इस्पात, और तेल बीज शामिल थे। हालाँकि इनका कुल आयात में हिस्सा अपेक्षाकृत कम था।
अमेरिकी सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2024 में अमेरिका से रूस को निर्यात घटकर $528.3 मिलियन (लगभग ₹43,850 करोड़) रह गया, जबकि रूस से आयात इससे कहीं अधिक रहा।
2023 में यह निर्यात लगभग $598.8 मिलियन (लगभग ₹49,700 करोड़) था। ये आँकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद अमेरिका और रूस के बीच व्यापार कभी पूरी तरह रुका नहीं।
दरअसल, 16 अगस्त 2025 को अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुलासा किया कि हाल के महीनों में अमेरिका-रूस द्विपक्षीय व्यापार में 20% से अधिक की वृद्धि हुई है। इससे ट्रंप के उस दावे की पोल खुल गई जिसके तहत वह यह कहते फिर रहे थे कि अमेरिका रूस पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बना रहा है।
ट्रंप, मार्को रुबियो, पीटर नवारो और स्कॉट बेसेन्ट, इनमें से कोई भी चीन की उतनी आलोचना नहीं करता जितनी भारत की, जबकि रूस से सबसे अधिक तेल खरीदने वाला देश भारत नहीं, बल्कि चीन है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में भारत और चीन को लेकर अमेरिका के दोगलेपन को स्वीकार किया और वॉशिंगटन की इश हिपोक्रेसी को सही भी ठहराया।
फिर भी, भारत का घरेलू जरूरतों के लिए रूसी तेल खरीदना और वैश्विक ऊर्जा कीमतों को स्थिर बनाए रखना गलत ठहराया जाता है, जबकि लोगों को मारने के लिए अमेरिका का हथियार बेचकर युद्ध से मुनाफा कमाना उसे शांतिदूत, मसीहा और संरक्षक समेत क्या कुछ नहीं बना देता।
शायद भारत का मई में भारत-पाकिस्तान के संघर्ष विराम का श्रेय ट्रंप को न देना, उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित न करना और भारतीय कृषि और डेयरी बाजार को अमेरिका के लिए न खोलना आदि बातें अब टैरिफ और भारत-विरोधी बयानबाजी के तौर पर सामने आ रही हैं।
यहाँ इस बात का जिक्र करना जरूरी है कि अमेरिका अक्सर संघर्ष और विवाद से ही लाभ कमाता है। असल में वाशिंगटन के लिए अराजकता एक सीढ़ी है, जिससे वह अपने रणनीतिक हितों को साधते हुए मुनाफा कमाता है।
ट्रंप प्रशासन को लगता है कि वह भारत पर दबाव बनाकर उसे अमेरिका-हितैषी व्यापार समझौते के लिए मजबूर कर सकता है, ठीक वैसे ही जैसे पाकिस्तान ने आत्मसमर्पण किया। लेकिन भारत अमेरिका की धमकियों, टैरिफ, प्रतिबंधों और झूठी बयानबाज़ी के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
अमेरिका के दबाव में झुका यूरोपीय संघ, ट्रंप की दबंगई का विरोध करने पर भारत को दोष
ऑपइंडिया ने पहले भी इस पर रिपोर्ट किया है कि कैसे US-EU ट्रेड डील को लेकर यूरोपीय संघ ट्रंप के दबाव में आया और अपने हितों से समझौता किया। इस समझौते में अमेरिका ने अधिकतम मुनाफा लिया, जबकि यूरोप को बहुत कम मिला।
ट्रंप ने भारत की तरह ही यूरोप को भी टैरिफ की धमकी दी थी, लेकिन भारत के उलट, यूरोपियन यूनियन ने अपनी आत्म-सम्मान की कीमत पर ट्रंप की ‘गुड बुक्स’ में रहने का विकल्प चुना।
27 जुलाई 2025 को यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया, जिसमें उसने अपने निर्यात पर टैरिफ को 27.5% से घटाकर 15% कर दिया, जबकि अमेरिका से यूरोप को होने वाले निर्यात पर कोई टैरिफ नहीं लगाया गया।
इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने अमेरिका से $750 अरब (₹62.25 लाख करोड़) की ऊर्जा खरीद, $600 अरब (₹49.8 लाख करोड़) के निवेश और अमेरिकी सैन्य हथियारों की खरीद का वादा भी किया।
ट्रंप की टैरिफ बढ़ाने और यूरोप की अमेरिकी बाजार और सुरक्षा पर निर्भरता का फायदा उठाने वाली धमकी भरी रणनीति ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को इस एकतरफा शर्तों को स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया। इसका खामियाजा यूरोपीय उद्योगों, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों को उठाना पड़ा।
ये ठीक वैसे ही था जैसे अप्रैल में भारत के मामले में देखा गया था। ट्रंप ने यूरोपीय संघ को भी 1 अगस्त 2025 तक व्यापार समझौते की समयसीमा देकर 30% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। ट्रंप ने यूरोपीय फार्मा उत्पादों पर भी 200% टैरिफ लगाने की धमकी भी दी थी।
यूरोपीय संघ के आत्मसमर्पण ने ट्रंप को इस बात से ओत-प्रोत कर दिया कि उनकी टैरिफ रणनीति हर देश पर काम करेगी। लेकिन भारत ने उनकी गलतफहमी को चूर-चूर कर दिया।
अगर भारत ने अमेरिकी कंपनियों के लिए अपने बाजार खोल दिए होते, रूस को छोड़कर व्हाइट हाउस को खुश किया होता, ट्रंप को भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम का श्रेय दिया होता या उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित कर दिया होता तो शायद भारत को अमेरिका के कड़े तेवर का सामना नहीं करना पड़ता।
अमेरिका लगातार रूस-यूक्रेन युद्ध से अपने मुनाफे को जरूरी बताकर दुनिया के सामने रखता है, जबकि भारत पर युद्ध से लाभ उठाने का आरोप लगाता है।
ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी में श्रद्धा पांडे ने लिखा है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को बिहार के बोधगया में ₹13000 करोड़ की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में कनेक्टिविटी, बिजली, स्वास्थ्य और शहरी बुनियादी ढाँचे को बेहतर बनाना है।
इस दौरान पीएम मोदी ने संबोधन में कहा, “बिहार चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य की धरती है। इस धरती पर लिया गया हर संकल्प कभी खाली नहीं जाता। जब कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। तब मैंने बिहार की इसी धरती से आतंकवादियों को मिट्टी में मिलाने की बात कही थी। आज दुनिया देख रही है बिहार की धरती से लिया गया वो संकल्प पूरा हो चुका है।”
कॉन्ग्रेस-RJD पर जमकर बरसे पीएम मोदी
पीएम मोदी कॉन्ग्रेस और RJD पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस-RJD की सरकार ने बिहार के लोगों को शिक्षा और रोजगार नहीं दिया, तब लोग पलायन करने को मजबूर हो गए। पीएम ने कहा, “बिहार में लालटेन राज में लाल आतंक था। न शिक्षा न रोजगार था। बिहार की कितनी पीढ़ियों को इन लोगों ने बिहार से पलायन के लिए मजबूर कर दिया था। बिहार के लोगों को RJD और उनके साथी वोट बैंक मानते थे। उन्हें गरीब के सुख-दुख और गरीब के मान-सम्मान से कोई मतलब नहीं है।”
PM मोदी ने आगे कहा, “हमारे देश में कॉन्ग्रेस हो या RJD हो। इनकी सरकार ने कभी जनता के पैसों का मोल नहीं समझा। इनके लिए जनता के पैसों का मतलब खुद की तिजोरी भरना रहा है। इसीलिए कॉन्ग्रेस-RJD सरकार में सालोंसाल तक परियोजनाएँ पूरी नहीं होती थी। जो परियोजना जितनी लंबी थी उतना उसमें पैसे कमा लेते थे।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “अब इस गलत सोच को भी NDA सरकार ने बदल दिया है। अब शिलान्यास के बाद कोशिश होती है जल्द से जल्द काम को पूरा करने के लिए सफल प्रयास किए जाते हैं। आज का कार्यक्रम में भी इसका उदाहरण है।”
अब भ्रष्टाचारी जेल भी जाएगा और कुर्सी भी जाएगी: पीएम मोदी
पीएम ने केंद्र शासित संसोधन विधेयक और संविधान के 130वें संशोधन विधेयक का भी जिक्र किया। पीएम ने कहा कि अब सरकार ऐसा कानून लाने जा रही है, जिसके जद में खुद देश का प्रधानमंत्री भी होगा। पीएम मोदी ने कहा, “हमने कुछ समय पहले देखा है कि जेल से ही फाइलों पर साइन किए जा रहे थे। जेल से सरकारी आदेश निकाले जा रहे थे। नेताओं का यही रवैया रहेगा, तो ऐसे भ्रष्टाचार के विरुद्ध कैसे लड़ाई लड़ी जाएगी।”
पीएम ने आगे कहा, “हम संविधान की मर्यादा को तार-तार होते नहीं देख सकते। इसीलिए सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसा कानून लाई है जिसमें देश का पीएम भी है। जब यह कानून बन जाएगा, तो मंत्री को गिरफ्तारी के 30 दिन के भीतर जमानत लेनी होगा और अगर जमानत नहीं मिली तो कुर्सी छोड़नी होगी।”
बिहार में डेमोग्राफी बड़ी चिंता: PM
बिहार में डेमोग्राफी पर बदलाव में पीएम मोदी ने कहा कि यह एक बड़ी चिंता है। पीएम ने कहा, “बिहार के सीमावर्ती जिलों में घुसपैठ बढ़ रही है। जिन सुविधाओं पर भारतीयों का अधिकार है उनको घुसपैठी को डाका नहीं डालने देंगे। मैंने डेमीग्राफी मिशन शुरू किया है। हम हर घुसपैठी को देश से बाहर करके रहेंगे। कॉन्ग्रेस और RJD जैसे दल बिहार के गरीबों का हक छीनकर घुसपैठियों को देना चाहते हैं।”
इन विकास प्रोजेक्ट का किया उद्घाटन
पीएम ने गया में NH-31 पर 8.15 किलोमीटर लंबे औंटा-सिमरिया पुल परियोजना का उद्घाटन किया। इसमें गंगा नदी पर 1.86 किलोमीटर लंबा 6 लेन वाला पुल भी शामिल है, जिसका निर्माण ₹1,870 करोड़ की लागत से हुआ है।
इसके बाद पीएम मोदी ने गया-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस और वैशाली-कोडरमा बौद्ध सर्किट ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। पीएम ने 12,000 गरीब लोगों को उनके घर की चाबियाँ भी सौंपी। इसके साथ बक्सर में ₹6,880 करोड़ की लागत से बने थर्मल पावर प्लांट का उद्घाटन भी किया। इससे राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।
राज्य में स्वास्थ्य सेक्टर को मजबूत करने के लिए मुजफ्फरपुर में होमी भाभा कैंसर अस्पताल और रिसर्च सेंटर का भी उद्घाटन किया गया। यह अस्पताल आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाओं के साथ बनाया गया है। अब बिहार के लोगों को कैंसर के इलाज के लिए मेट्रो शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसके साथ पीएम पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी ₹5,200 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।
हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर वीभत्स आतंकी हमला किया था। महिलाओं और बच्चों समेत हजारों लोगों को मारा गया, रेप किए और सैकड़ों लोग बंधक बनाए गए। इसके जवाब में जब इजरायल ने गाजा में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया तो तथाकथित सेकुलर जमात का रोना शुरू हो गया।
स्वरा भास्कर जैसे लोग हमास के आतंकियों पर सवाल उठाने के बजाय इजरायल को ही इसका सारा दोष दे रहे हैं। मुंबई के आजाद मैदान में बुधवार (20 मार्च 2025) को गाजा के समर्थन में करीब 200 लोग इकट्ठा हुए। इस भारी भीड़ की माँग थी कि इजरायल अपने हमले बंद कर दे। स्वरा भास्कर ने भी इस सभा में तकरीर की और इजरायल पर किए गए हमले को ‘वाइटवॉश’ करने की कोशिश की।
स्वरा ने हमास के आतंकियों के कुकृत्यों को जायज ठहराने की भी पूरी कोशिश की। स्वरा ने कहा, “जो 7 अक्टूबर को हुआ जिसमें 1,200 इजरायल के नागरिक मारे गए। इसमें कोई शक नहीं है कि किसी भी दुनिया में किसी भी जगह पर किसी नागरिक की जान जाए तो यह दुख की बात है। लेकिन ऐसा दिखाना कि इतिहास की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 से हुई थी। ये झूठ है और ये मक्कारी है।”
मतलब सीधा है कि 7 अक्टूबर के आतंकी हमले की बात अगर आप करोगे तो आप मक्कार हैं लेकिन असल में मक्कारी क्या है, ये लोग बेहतर जानते समझते हैं। आतंकियों को खुलेआम मंच से बचाना, रेप, हत्याओं को जायज ठहराने की कोशिश करना और आतंकियों को क्लीन चिट दे देना, ये पता नहीं मक्कारी की श्रेणी में आएँगे की नहीं। अपनी तकरीर में स्वरा ने गाजा पर खूब आँसू बहाए लेकिन हमास के आतंकियों को आलोचना में उनके मुँह से 2 शब्द तक नहीं निकले।
पहले भी आतंकियों का बचाव करती रही है स्वरा
ऐसा पहली बार भी नहीं है जब स्वरा ने इस तरह की हिमाकत की हो, जिस दिन हमास के आतंकियों ने हमला किया उस दिन से ही स्वरा ने हमास के आतंकियों को बचाना शुरू कर दिया था।
इस हमले के तुरंत बाद स्वरा ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, “अगर आपको फिलिस्तीनियों पर इजरायल के हमले से सदमा नहीं लगा तो…इजरायल पर हमास के हमलों से आपका सदमा और डर पाखंडी लगता है।” यानी स्वरा यह बता रही थी कि हमास ने जो हत्याएं की हैं, रेप किए हैं उन सब पर लोग शांत रहे, उन्हें सदमा ना लगे क्योंकि यह सब उसकी नजरों में गलत नहीं था।
इजरायल पर ही लगाए यौन हिंसा के आरोप
कुछ दिनों पहले की ही बात है जब BBC ने एक रिपोर्ट छापी कि किस तरह हमास के आतंकियों ने रेप और यौन हिंसा को नरसंहार की रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया था। स्वरा यहाँ भी आतंकियों का बचाव करने से नहीं चूकी। स्वरा ने कह दिया कि स्वरा ने अपने ट्वीट में उल्टा इजरायल पर इल्जाम लगाए। उसने यह बताया कि हमास द्वारा यौन उत्पीड़न की खबरें झूठी हैं।
क्या इजरायल के दर्द पर प्रोपेगैंडा करने वाले ‘मक्कार’ नहीं?
स्वरा जैसे लोग कथित सेकुलर लोग झूठे और मनगढ़ंत इतिहास का लबादा ओढ़कर आतंकियों को कुकृत्यों को जायज ठहराते हैं। स्वरा ने अपनी तकरीर में कहा कि इतिहास 7 अक्टूबर से नहीं बल्कि 1948 से देखा जाएगा। मतलब इतिहास भी जितनी स्वरा की सुविधा हो उनता पीछे ही जाए, अगर स्वरा को इतिहास में ही जाना है तो फिर 2000-2500 साल पीछे क्यों नहीं जाती?
असल में ऐसे लोगों को ना इतिहास से मतलब है, ना किसी के दर्द है इन लोगों को सिर्फ अपने प्रोपेगैंडा से मतलब है। लोग मरते रहे और इनका प्रोपेगैंडा चलता रहे फिर चाहे इसके लिए इन्हें आतंकियों के ही पक्ष में क्यों ना बोलना पड़े। आतंकवाद को जायज ठहराने इनके नैरेटिव को सूट करता है। कभी आपने देखा है कि पाकिस्तान में, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ स्वरा ने हाथों में तख्ती लेकर आवाज उठाई हो?
इस्लामी मुल्कों से घिरे एक यहूदी मुल्क पर जुल्म होता रहे, उनके बच्चे मरते रहें, उनकी बेटियों-महिलाओं का रेप होता रहे उससे इन्हें कोई मतलब नहीं है। हत्याओं को ऐसे लोगों ने अपनी नौटंकी और प्रोपेगैंडा का हिस्सा मान लिया है। इजरायली लोगों का दर्द इनके लिए सजा नहीं है, क्योंकि असल में प्रोपेगैंडा चलाने वाले ये लोग ‘मक्कारी’ करते हैं।