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2 हिंदू बहनें, 1 महिला पुलिसकर्मी, 6 राज्य और 9 ठिकाने… आगरा के धर्मांतरण गिरोह की कैसे टूटी कमर, पढ़ें ऑपइंडिया पर ‘ऑपरेशन अस्मिता’ के बारे में Exclusive डिटेल

आगरा से गायब हुई दो सगी बहनों के बरामदगी से जुड़े मामले की जाँच के दौरान उजागर हुआ ‘धर्मांतरण गैंग’ आज पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस गिरोह के साथ ही चर्चा उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘ऑपरेशन अस्मिता’ की भी है, जिसके तहत यूपी पुलिस ने 6 राज्यों में जाकर 9 स्थानों पर एक समय पर छापे मारे और 7 लड़कियों को बचाया।

इस केस और ऑपरेशन से जुड़ी हर जानकारी लेने के लिए हमने पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार से मुलाकात की। इस दौरान पुलिस कमिश्नर ने पूरे ऑपरेशन अस्मिता और धर्मांतरण गैंग को लेकर ऑपइंडिया के साथ कई चौंकाने वाले खुलासे किए। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार के मुताबिक आगरा पुलिस को 24 मार्च के दिन सदर थाने से दो सगी बहनों के अचानक गायब होने की लिखित शिकायत मिली थी। पीड़ित पिता की शिकायत पर सदर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई और छानबीन शुरू हुई।

प्रारंभिक जाँच के दौरान पुलिस को गुमशुदगी मामले में कोई सुराग नहीं मिला क्योंकि दोनों बहनों के पास न तो मोबाइल था और न कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस। पुलिस हर प्रयास करने के बावजूद लड़कियों की लोकेशन नहीं ट्रेस कर पा रही थी और केस वहीं का वहीं रुका हुआ था। देखते ही देखते 41 दिन बीत गए और पुलिस खाली हाथ ही रही।

इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर AK-47 देख उड़े पुलिस के होश

एक दिन अचानक पुलिस के सामने पीड़ित पिता ने साइमा नाम की लड़की के नाम पर संदेह जाहिर किया और पुलिस ने गुमशुदगी वाली रिपोर्ट में धाराएँ बढ़ाते हुए जाँच शुरू की। पड़ताल के दौरान छोटी बहन के इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर AK-47 के साथ मिली डीपी ने आगरा पुलिस के होश उड़ा दिए। केस की जाँच अब तेजी से आगे बढ़ने लगी थी।

मामले की गहनता से जाँच कर रही साइबर सेल व सर्विलांस यूनिट को एक बड़ी जानकारी हाथ लगी। वह ये कि अचानक से गायब दोनों बहन एक बड़े धर्मांतरण गिरोह का हिस्सा बन चुकी हैं। इसके बाद मामले की गंभीरता से देखते हुए आगरा पुलिस ने जाँच साइबर क्राइम और एटीएस को सौंप दी। इस बीच, दो ग़ायब बहनों की तीसरी बहन से उस माइक्रो ब्लॉगिंग साइट के बारे में जानकारी मिली, जिस पर अक्सर वो दोनों बहनें जुड़ा करती थीं।

इस ब्लॉग पर आगरा पुलिस को ‘रिवर्टी’ नाम का एक पेज मिला जिस पेज की लोकेशन, कोलकाता थी। यहीं से आगरा पुलिस को सुराग मिला कि कोलकाता से चार देशों, अमेरिका, कनाडा, दुबई और लंदन, में संवाद हो रहा है और इसी लोकेशन से देश के 15 राज्यों में बैंक द्वारा पैसों का लेनदेन हुआ है। यही तथ्य आगरा पुलिस के लिए संजीवनी साबित हो गया।

जब एक महिला सब इंस्पेक्टर ‘रिवर्टी’ ग्रुप में हुई शामिल

पुलिस के लिए अब बड़ी चुनौती दो बहनों को वापस लाने के साथ ही धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश करने की थी। इसके लिए एक महिला सब इंस्पेक्टर को तैयार किया गया। गायब दो बहनों की तीसरी बहन से एक सोशल मीडिया एकाउंट के बारे में मिली जानकारी के बाद महिला पुलिस अधिकारी गैंग के एक ‘रिवर्टी’ ग्रुप में शामिल हो जाती है और फिर सदस्यों से व्यक्तिगत बातचीत करते हुए कई जानकारी जुटाती है।

कमिश्नर दीपक कुमार ने आईपीएस आदित्य के नेतृत्व में एक टीम बनाई। 100 फीसदी मुस्लिम इलाका होने के चलते एक विशेष टीम को तत्काल कोलकाता भेजा गया। यहाँ टीम ने अपनी पहचान छुपाकर करीब 5 दिन तक इलाके की रेकी की और फिर डीजीपी राजीव कृष्ण और पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने ऑपरेशन अस्मिता को अंजाम देने के लिए 11 टीमों का गठन किया।

ऑपरेशन अस्मिता को रखा गया था गोपनीय

टीम में शामिल करीब 45 पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से ट्रेनिंग दी गई। ऑपरेशन को इतना गोपनीय रखा गया था कि एक-आध अधिकारियों के अलावा किसी को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह कितने बड़े धर्मांतरण गिरोह की कमर तोड़ने वाले हैं। यहाँ तक कि किसी भी टीम को यह भी जानकारी नहीं थी कि कौन सी टीम कहाँ जाएगी। बड़ी बात यह कि पूरे ऑपरेशन में सरकारी गाड़ी के बदले किराए की टैक्सी का ही इस्तेमाल किया गया।

कुछ ही देर में ऑपरेशन अस्मिता के तहत दोनों गायब बहनों को मुस्लिम इलाके से बरामद कर लिया गया। हालाँकि इस दौरान आगरा पुलिस को स्थानीय लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा था। आगरा पुलिस कमिश्नर का तो यहाँ तक दावा है कि यूपी पुलिस ने एक साथ इतने स्थानों पर छापेमारी पहली बार की है।

‘ऑपरेशन अस्मिता’ की सफलता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में 9 स्थानों पर की गई छापेमारी में 7 बहनों को सही सलामत गैंग के चंगुल से निकाला गया है। साथ ही इस मामले में गैंग से जुड़े 14 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। आरोपितों के पास से ‘इस्लाम और बहुजन समाज’, ‘धर्म परिवर्तन’ और ‘आपकी अमानत आपकी सेवा’ में जैसी पुस्तकें बरामद हुई हैं। साथ ही मोबाइल से हिंदू समाज को तोड़ने वाले तमाम वीडियो भी मिले हैं।

किसानों की 65000 एकड़+ जमीन ले रही थी पंजाब की AAP सरकार, विरोध के बाद दबी: लैंड पूलिंग पॉलिसी ली वापस, HC ने दी थी रद्द करने की चेतावनी

किसानों के आंदोलन और विपक्ष के विरोध के बीच आखिरकार पंजाब सरकार बैकफुट पर आ गई है। आप सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी को वापस लेने का फैसला लिया है। इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी अगले आदेश तक पॉलिसी पर रोक लगा दी थी। साथ ही पंजाब की मान सरकार को पॉलिसी रद्द करने की चेतावनी दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने लेटर जारी कर यह जानकारी दी। लेटर में बताया गया कि 14 मई 2025 को लागू की गई पंजाब लैंड पॉलिसी और इससे जुड़े संशोधनों को वापस लिया जा रहा है।

बता दें कि इससे पहले पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने लैंड पूलिंग पॉलिसी मामले की सुनवाई पर 4 हफ्ते की रोक लगा दी थी। कोर्ट ने पंजाब सरकार को 2 विकल्प दिए थे, जिसमें कहा गया था कि या तो पॉलिसी वापस ली जाए वरना अदालत इसे रद्द कर देगी।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 10 सितंबर 2025 तय कर पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का समय दिया था। साथ ही कोर्ट ने पंजाब सरकार को भी फटकार लगाते हुए कहा था कि यह पॉलिसी जल्दबाजी में बनाई गई है।

किसानों ने आंदोलन की दी थी चेतावनी

लैंड पूलिंग पॉलिसी के विरोध में किसान लगातार विरोध प्रदर्शन किया। किसान मजदूर संघर्ष समिति ने पंजाब के कई जिलों में बाइक रैली निकाली। इस दौरान समिति ने फैसले का जमकर विरोध करते हुए पॉलिसी वापस लेने की माँग की थी। साथ ही ऐसा ना करने पर पंजाब सरकार को बड़े आंदोलन की भी चेतावनी दी थी।

पॉलिसी को लेकर किसान नेताओं ने दावा किया था कि लैंड पूलिंग से सरकार प्रदेश की 65000 एकड़ से ज्यादा जमीन को निजी संस्थानों के हाथों में देना चाहती है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल ने पूरे पंजाब में विरोध रैलियाँ की। अब 01 सितंबर 2025 को पक्का मोर्चा निकालने की तैयारी थी।

क्या है लैंड पूलिंग पॉलिसी?

लैंड पूलिंग पॉलिसी 2011 में अकाली दल की सरकार के दौरान लागू की गई थी। इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी इसे बढ़ावा दिया। फिर अब पंजाब की मौजूदा मान सरकार ने पॉलिसी में बदलाव करते हुए इसे लागू किया। जून 2025 में पंजाब कैबिनेट में पॉलिसी को बदलाव के साथ मंजूरी मिल गई।

इस पॉलिसी के तहत प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहित कर इंडस्ट्रिटयल, कमर्शियल और रिहायशी सेक्टर विकसित किए जाने थे। पॉलिसी में यह भी बताया कि किसानों को जमीन के बदले मुआवजा नहीं दिया जाएगा बल्कि उसी क्षेत्र में कमर्शियल और रिहायशी प्लॉट दिए जाएँगे।

वहीं किसानों का कहना था कि पॉलिसी के तहत जमीन को कॉरपोरेट को देने की साजिश है। किसानों ने कहा कि उनपर चारों ओर से हमले किए जा रहे हैं। एक तरफ जमीन छीनने की साजिश की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत पर लगातार अमेरिका दबाव बना रहा है कि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री, मछलीपालन जैसे क्षेत्र में उसे भारत में घुसने दिया जाए।

PMAY, मुद्रा, लखपति दीदी… मोदी सरकार की योजनाओं के बूते 12 वर्षों में 27 करोड़+ गरीबी से निकले बाहर: बच्चों-महिलाओं को सबसे ज्यादा फायदा, रिसर्च ने बताया- अब केवल 2.2% औरतें निर्धन

मोदी सरकार की योजनाओं ने करोड़ों लोगों को गरीबी से निकालने में बड़ी भूमिका निभाई है। PM आवास योजना से लेकर मुद्रा और लखपति दीदी जैसी योजनाओं ने देश में महिलाओं और बच्चों की गरीबी कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है। यह जानकारियाँ एक रिपोर्ट से सामने आई हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 12 वर्षों के समय में देश में 27 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से निकाले गए हैं।

27 करोड़ गरीबी से बाहर निकले

यह रिसर्च रिपोर्ट शमिका रवि और मुदित कपूर ने लिखी है। रिपोर्ट बताती है कि 2011-12 के मुकाबले 2023-24 में देश के घरों में महिलाओं को अधिक संसाधन मिलने लगे हैं। महिलाओं के साथ ही बच्चों को भी घर के संसाधनों में ज्यादा हिस्सा मिलने लगा है। इसका असर सीधे तौर पर महिलाओं और बच्चों की आर्थिक हालत पर पड़ा है। रिपोर्ट बताती है कि 2011-12 में बच्चों की गरीबी दर सबसे ज़्यादा (58.3%) थी, उसके बाद महिलाओं (33.3%) और पुरुषों (15.1%) का स्थान था।

रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 तक, बच्चों की गरीबी घटकर 17.8%, महिलाओं की गरीबी घटकर 2.2% रह गई, लेकिन पुरुषों की गरीबी मामूली रूप से घटकर 13.5% ही रह गई। यह बदलाव मात्र 12 वर्षों के भीतर हुए। इस दौरान अधिकांश समय में केंद्र में मोदी सरकार ही रही है। ऐसे में स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है कि इसमें बड़ा योगदान सरकार का रहा है, जिससे महिलाएँ सशक्त हुई हैं और बच्चे भी गरीबी के कुचक्र से निकले हैं।

रिपोर्ट कहती है कि प्रधानमंत्री आवास योजना, मुद्रा योजना और लखपति दीदी योजना के चलते गरीबी घटाने में बड़ी सहायता मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक देश में 4 करोड़ घर बन चुके हैं। इस योजना में मकान में महिला को सह स्वामिनी रखना जरूरी है। ऐसे में संसाधनों के बँटवारे में महिलाएँ और सशक्त हुई हैं। इसके अलावा लखपति दीदी योजना ने उन्हें रोजगार का अवसर दिया है। मुद्रा ने उन्हें वह पूँजी उपलब्ध करवाई है, जिससे वह सशक्त हो सकें।

पहले आई रिपोर्ट्स ने भी दिखाई बदली तस्वीर

यह ऐसी कोई पहली रिपोर्ट नहीं है, जिसमें देश में गरीबी कम होने की पुष्टि की गई हो। इससे पहले कई और रिपोर्ट्स गरीबी कम होने के साथ ही खर्च बढ़ने तक की बात बता चुकी हैं। केंद्र सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वन मंत्रालय (MoSPI) के देश के परिवारों द्वारा किए जाने खर्चे को लेकर किए गए पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वे के अनुसार, अब देश के गाँवों में बसने वाली आबादी में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च ₹3773 है जबकि शहर में रहने वाला एक आदमी औसतन ₹6459 प्रति माह अपने ऊपर खर्च करता है। 

2011-12 में किए गए सर्वे की तुलना में लगभग 2.5 गुना है। 2011-12 में गाँव में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने ऊपर ₹1430 जबकि शहरी व्यक्ति ₹2630 खर्च करता था। गाँवों में रहने वाला व्यक्ति अपने कुल खर्चे का 46% जबकि शहरों में रहने वाला व्यक्ति 39% खर्च खाने-पीने पर करता है। रिपोर्ट के आँकड़े दर्शाते हैं कि गाँव और शहर के खर्चे के बीच की खाई भी कम हुई है। अब दोनों के खर्चे में 71% का अंतर है जबकि 2011-12 में यह लगभग 84% था।

भारत में गरीबी कम होने की बात की पुष्टि वर्ल्ड बैंक तक कर चुका है। वर्ल्ड बैंक के अनुसार, वर्ष 2011-12 में 27% लोग भारत में अत्यंत निर्धनता में रह रहे थे। अब यह संख्या मात्र 5.3% ही रह गई है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट बताती है कि सबसे अधिक काम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में हुआ है। इन राज्यों से सबसे अधिक लोग अत्यंत निर्धनता से बाहर निकाले गए हैं। भारत ने यह उपलब्धि तब हासिल की है जब वर्ल्ड बैंक ने किसी व्यक्ति को गरीब माने जाने के मानदंड बदले हैं और उन्हें और ऊँचा कर दिया है।

मोदी सरकार ने घर-पानी-बिजली पर सबसे पहले किया काम

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार आने के बाद सबसे पहले देश की मूलभूत समस्याओं को हल करने का प्रयास चालू किया है। मोदी सरकार ने देश की बड़ी आबादी को मूलभूत सुविधाएँ मुहैया करवाना चालू किया। देश में जिन लोगों के पक्का मकान नहीं था, उन्हें मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत मकान देना चालू किया। अब तक ग्रामीण योजना के तहत 2.82 करोड़ मकान बनाए जा चुके हैं जबकि शहरी योजना के तहत 94 लाख से अधिक घर बन गए हैं।

वहीं मोदी सरकार में घर-घर बिजली सौभाग्य योजना के तहत बिजली पहुँची। इसके अलावा पानी पहुँचाने के लिए मोदी सरकार ने वर्तमान में जल जीवन मिशन चालू कर रखा है। इसके चालू होने के बाद से देश में 12.44 करोड़ घरों में पानी पहुँच चुका है। जनधन योजना से बैंकिंग की पहुँच देश के 50 करोड़ से अधिक लोगों तक हुई है। यह मूलभूत सुविधाएँ देश में गरीबी उन्मूलन का आधार बन रही हैं।

‘न्यूक्लियर धमकी में नहीं आएगा भारत’: अमेरिका की जमीन से ‘मुल्ला मुनीर’ की गीदड़भभकी का भारत ने दिया जवाब, PM मोदी ने भी किया साफ़- परमाणु ब्लैकमेल नहीं करेगा काम

अमेरिका की सरजमीं से पाकिस्तान का आर्मी चीफ आसिम मुनीर भारत को परमाणु बम की धमकी दे रहा है। इस पर विदेश मंत्रालय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। MEA ने पाकिस्तान के साथ-साथ अमेरिका को भी आईना दिखाया है।

भारत ने कहा है कि पाकिस्तानी आर्मी चीफ के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयान पर उनकी नजर पड़ी है। पाकिस्तान की पुरानी आदत है परमाणु हमले की धमकी देना। विश्व समुदाय पाकिस्तान के इस बयान पर मतलब निकाल सकता है। क्योंकि ये सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

‘ढोंगी’ पाकिस्तान के हाथ में परमाणु बम सुरक्षित नहीं- MEA

आगे विदेश मंत्रालय ने कहा, ” ये काफी खेदजनक है कि ये बयान एक मित्र देश की जमीन से दी गई है।” परमाणु हथियार का दम भरने वाले पाकिस्तान का ‘ढोंग’ बताते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के बयान ये बताता है कि ऐसे देश के हाथ में परमाणु बम कितना सुरक्षित है। ‘आतंकियों से गठजोड़ वाला’ पाकिस्तान पुरी दुनिया के लिए खतरा है।

भारत ब्लैकमेलिंग बर्दाश्त नहीं करेगा- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने पहले ही साफ कर दिया था कि भारत ब्लैकमेलिंग बर्दाश्त नहीं करेगा। हम अपनी सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएँगे। ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में बहस के दौरान पीएम मोदी ने कहा था, “पाकिस्तान को क्या लगा था कि परमाणु ब्लैकमेल काम करेगा? हमने अपने हिसाब से हमलों का जवाब दिया। कोई परमाणु धमकी हमें रोक नहीं पाएँगी और हम आतंकियों को पनाह देने वालों के साथ भी आतंकियों जैसा ही व्यवहार करेंगे।”

मुनीर के अमेरिका की गोद में बैठकर दिए बयान को भी भारत ‘बकवास’ और ‘बेफिजुल की बातें’ ही करार दे रहा है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान जैसा देश जहाँ लोकतंत्र नहीं है और सेना ही सबकुछ करती है, ऐसे देश के पास परमाणु बम होना कितना खतरनाक है, ये भी मुनीर के बयान से समझा जा सकता है।

पाकिस्तानी आर्मी चीफ ने क्या कहा ?

अमेरिकी दौरे पर गए पाक आर्मी चीफ मुनीर ने एक डिनर पार्टी में गीदड़भभकी देते हुए कहा कि भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान के अस्तित्व को खतरा हुआ तो वो इस क्षेत्र को परमाणु युद्ध में झोंक देगा। मुनीर ने कहा, “हम एक परमाणु राष्ट्र हैं, अगर हमें लगता है कि हम डूब रहे हैं, तो हम आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे।”

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है। मुनीर ने इस पर भी जहर उगला है। मुनीर ने इस फैसले से 25 करोड़ लोगों को भुखमरी का खतरा बताया। मुनीर ने कहा, “हम भारत के बांध बनाने का इंतजार करेंगे और जब वह ऐसा करेगा, तो हम उसे 10 मिसाइलों से तबाह कर देंगे।”

पाकिस्तान बजरी से भरा ट्रक, भारत चमचमाती मर्सिडीज- मुनीर

मुनीर ने कहा, “भारत एक चमचमाती हुई मर्सिडीज है जो फेरारी की तरह हाईवे पर आ रही है। हम बजरी से भरा एक डंप ट्रक हैं। अगर ट्रक कार से टकरा जाए, तो नुकसान किसका होगा?” ऐसे पाकिस्तानी आर्मी चीफ के बयान पर भारत प्रतिक्रिया देना भी अपनी तोहीन समझता है। लेकिन बात अमेरिका से जुड़ी हुई थी, इसलिए विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों को ही लताड़ दिया।

मोदी सरकार ने J&K से 370 किया साफ तो हूर पाने की कश्मीरी लौंडों की तमन्ना भी हुई फुर्र: 2018 में 200 बने थे आतंकी, 2025 में केवल 1

जम्मू-कश्मीर में नए स्थानीय आतंकियों की भर्ती लगभग ना के बराबर बची है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आतंकियों की भर्ती में लगातार कमी हुई है। 2018 में 200 युवाओं ने आतंकवाद के लिए बंदूक उठाई थी। वहीं, इस वर्ष जम्मू-कश्मीर से केवल एक युवक आतंकी बना है।

अनुच्छेद 370 से कैसे बढ़ा आतंकवाद?

अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर में बढ़ते आतंकवाद से जोड़कर देखा जाता रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनवरी 2025 में कहा था कि अनुच्छेद 370 ने युवाओं के मन में अलगाव का बीज बोया था।

उन्होंने कहा था, “आतंकवाद देश के अन्य मुस्लिम इलाकों में क्यों नहीं फैला? एक तर्क यह भी है कि कश्मीर की सीमा पाकिस्तान से लगती है। यहाँ तक कि गुजरात और राजस्थान की सीमा भी पाकिस्तान से लगती है लेकिन आतंकवाद वहाँ तक नहीं पहुँचा। अनुच्छेद 370 ने इस भ्रांति को बढ़ावा दिया कि भारत और कश्मीर के बीच संबंध अस्थाई हैं। धीरे-धीरे, अलगाववाद आतंकवाद में बदल गया।”

जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि अनुच्छेद 370 के कारण आतंकवाद और आतंकी तंत्र को बढ़ावा मिला है। सिन्हा ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को आतंकी तंत्र के खात्मे की शुरुआत हो गई थी।

200 से 1 आतंकी तक: 7 वर्षों में बदली सूरत

2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में आतंकी भर्ती तेज हुई थी। 2018 में यह उच्चतम स्तर पर पहुँच गई। यह वही दौर था, जब आतंकियों के खुलेआम जनाजे निकाले जाते थे, स्थानीय युवाओं को भड़काया जाता था और सोशल मीडिया प्रचार व भाषणों के जरिए युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया जाता था।

5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया गया और विशेष दर्जा खत्म हो गए। इसके बाद हालात तेजी से बदलने लगे। 2018 में जहाँ करीब 200 कश्मीरी युवाओं ने आतंकी संगठनों का रुख किया था, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर सिर्फ 7 रह गई। 2025 में अब तक सिर्फ एक मामला सामने आया है।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकी भर्ती में रिकॉर्ड कमी आई है। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, आतंकी संगठनों में भर्ती हुए स्थानीय युवकों की संख्या 2020 में 160, 2021 में 125, 2022 में 100, 2023 में 22 और 2024 में सिर्फ 7 रह गई। वहीं, 2025 में जनवरी में कुलगाम से एक युवक गायब हुआ था और बाद में खबर आई कि वह आतंकी संगठन में शामिल हो गया है।

अब आतंकियों के छोटे-छोटे समूह ज्यादातर पाकिस्तान से आने वाले प्रशिक्षित लड़ाकों से बनते हैं। 2019 से 2024 के बीच आतंकवाद से जुड़ी 700 घटनाओं में 1,050 आतंकियों को ढेर कर दिया गया है।

इन वजहों से कम हुई आतंकियों की भर्ती

अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में आतंकी भर्ती को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदमों का असर अब साफ नजर आ रहा है। एजेंसियों ने एक के बाद एक ऐसे कई कदम उठाए जिनके चलते आतंकियों की भर्ती कम होती गई। पुलिस और एजेंसियों ने इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशनों पर जोर दिया। संदिग्ध युवाओं की सोशल मीडिया गतिविधियों, फोन कॉल्स और आने-जाने पर कड़ी निगरानी रखी गई।

जिन युवकों के आतंकी रास्ते पर जाने का शक था, उनके परिवारों से सीधे संपर्क किया गया। वहीं, जो लोग गाँँव-गाँँव घूमकर या सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काते थे। उन पर भी सरकार ने नजर बनाए रखी। इन्हें गिरफ्तार किया गया या ऑपरेशनों में ढेर किया गया।

2020 से एक बड़ा बदलाव आया और मारे गए आतंकियों के जनाजों पर रोक लगा दी गई। पहले, मारे गए आतंकियों के शव उनके गाँँवों में सौंप दिए जाते थे, जहां हजारों की भीड़ जुटती थी और भड़काऊ भाषण होते थे। ऐसे जनाजे कई बार भर्ती का मंच बन जाते थे। लेकिन अब शव गाँवों में देने की बजाय उत्तर कश्मीर के दूरदराज इलाकों में दफनाए जाने लगे।

LoC (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर घुसपैठ पर नकेल कसी गई। इसके सहारे पाकिस्तान से लोग आकर स्थानीय आतंकियों को भड़काते थे। इसके लिए ड्रोन निगरानी, मजबूत फेंसिंग और हाई-टेक काउंटर-इंफिल्ट्रेशन ग्रिड का इस्तेमाल हुआ। इससे पाकिस्तान से हथियार, गोलाबारूद और आतंकी घुसपैठियों की सप्लाई चेन लगभग टूट गई।

370 हटने के बाद कैसे बदले हालात?

संसद ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने को मंजूरी दी और 31 अक्टूबर, 2019 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया गया। इसके साथ ही, केंद्र सरकार के 170 कानून जो पहले लागू नहीं थे, अब वे इस क्षेत्र में लागू कर दिए गए।

370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में सत्ता का विकेंद्रीकरण होने भी शुरू हो गया। जनपद और जिला पंचायत के चुनाव हुए, 2018 में पंचायत चुनाव हुए और इसमें 74.1% मतदान हुआ। 2019 में पहली बार आयोजित ब्लॉक डेवलेपमेंट काउंसिल चुनाव में 98.3% मतदान हुआ।

कुछ दिनों पहले हुआ पहलगाम आतंकी हमला एक अपवाद जैसा था। आँकड़ों के मुताबिक, बीते एक दशक के दौरान वर्ष 2023 में आतंकी हिंसा में मरने वालों की संख्या सबसे कम रही है। इनमें 33 प्रतिशत कमी आ चुकी है।

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 5 अगस्त 2019 से 4 अगस्त 2025 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से संबंधित कुल 1,230 मौतें दर्ज की गईं। वहीं, वर्ष 2013 से 2019 तक की अवधि में हुई कुल 1,845 मौतें हुई थीं। अनुच्छेद 370 हटने से पहले की छह वर्ष की अवधि 1121 आतंकवादी मारे गए, 475 सुरक्षाकर्मी और 243 नागरिक बलिदानी हुए हैं।

370 हटने के बाद विकास कार्यों में तेजी आई है। आईआईटी जम्मू, रियासी मेडिकल कॉलेज, एम्स अवंतीपोरा (2025 तक शुरू होने की उम्मीद) जैसे संस्थानों से शिक्षा को बढ़ावा मिला, वहीं 2019 के बाद 80,000 करोड़ रुपए का निवेश आया।

उदहमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक पूरी तरह चालू हो गया, कई टनल प्रोजेक्ट्स से कनेक्टिविटी बेहतर हुई और भारतनेट के तहत 9,789 फाइबर कनेक्शन दिए गए। पर्यटन में भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई, श्रीनगर को 2024 में यूनेस्को ने ‘वर्ल्ड क्राफ्ट सिटी’ का दर्जा दिया और 2019 की तुलना में फ्लाइटों की संख्या 35 से बढ़कर 125 प्रतिदिन हो गई।

जम्मू-कश्मीर में कर राजस्व में भारी वृद्धि देखी गई। 2022 और 2024 के बीच जीएसटी संग्रह में 12%, उत्पाद शुल्क में 39% और कुल गैर-कर राजस्व में 25% की वृद्धि हुई है। राज्य का GDP 2015-16 के 1.17 लाख करोड़ रुपए से दोगुना होकर 2023-24 में 2.45 लाख करोड़ रुपए और 2024-25 में 2.63 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

2023 में, रिकॉर्ड 2.11 करोड़ पर्यटक जम्मू-कश्मीर आए और पर्यटन ने GDP में 7% का योगदान दिया। 2019 के बाद 75 नए स्पॉ खोले गए। 2,000 से अधिक होमस्टे पंजीकृत किए गए जिनमें बहुत सारे दूरदराज के गांवों में स्थित है।

‘रनवे पर था विमान, उस पर ही पायलट उतार रहा था हवाई जहाज’: कॉन्ग्रेस MP केसी वेणुगोपाल के दावे को एयर इंडिया ने बताया झूठ, BJP बोली- इन्हें नो फ्लाई लिस्ट में डालो

केसी वेणुगोपाल ने अपने एक ट्वीट से सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया। उन्होंने दावा किया कि एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2455… जिसमें वो खुद, कई सांसद और सैकड़ों यात्री सवार थे, एक बड़े हादसे से बाल-बाल बची।

वेणुगोपाल के मुताबिक, तिरुवनंतपुरम से दिल्ली जा रही इस फ्लाइट में पहले तो देरी हुई, फिर टेकऑफ के बाद भयानक टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। करीब एक घंटे बाद कैप्टन ने बताया कि फ्लाइट के सिग्नल में खराबी है, जिसके चलते फ्लाइट को चेन्नई डायवर्ट करना पड़ा।

चेन्नई में लैंडिंग के दौरान के समय को लेकर वेणुगोपाल ने दावा किया कि रनवे पर दूसरा विमान होने की वजह से पायलट को आखिरी पल में फ्लाइट को फिर से ऊपर ले जाना पड़ा। उनके अनुसार, पायलट की सूझबूझ ने सभी की जान बचाई। दूसरी कोशिश में फ्लाइट सुरक्षित उतर गई। वेणुगोपाल ने DGCA और MoCA से इस मामले की तुरंत जाँच करने और दोषियों को सजा देने की माँग की। लेकिन इस पूरे मामले में एयर इंडिया का जवाब बिल्कुल अलग है।

एयर इंडिया ने तुरंत जवाब दिया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ। उनके अनुसार, खराब मौसम और तकनीकी खराबी की आशंका में फ्लाइट को चेन्नई डायवर्ट किया गया था, और लैंडिंग के दौरान कोई दूसरा विमान रनवे पर नहीं था। एयर इंडिया ने साफ कहा कि उनके पायलट ने पूरी प्रक्रिया का पालन किया और सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा।

एयर इंडिया ने कहा कि उनके पायलट अच्छी तरह प्रशिक्षित हैं और उन्होंने इस स्थिति में सभी मानक प्रक्रियाओं का पालन किया। एयरलाइन ने ये भी कहा कि ऐसी घटनाएँ यात्रियों के लिए परेशान करने वाली हो सकती हैं और इसके लिए उन्हें खेद है, लेकिन सुरक्षा हमेशा उनकी पहली प्राथमिकता है।

ये मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि एक बड़े नेता के ऐसे बयान से न सिर्फ एयर इंडिया की साख पर सवाल उठते हैं, बल्कि आम यात्रियों में डर और अविश्वास भी पैदा होता है।

इस मामले में बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता केसी वेणुगोपाल के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया। मालवीय ने कहा कि वेणुगोपाल का दावा बहुत गंभीर है। वेणुगोपाल ने कहा था कि चेन्नई में एक एयर इंडिया की फ्लाइट को लैंडिंग रोकनी पड़ी क्योंकि रनवे पर दूसरा विमान था। लेकिन एयर इंडिया ने तुरंत उनके दावे को गलत बताया।

मालवीय ने कहा कि इनमें से कोई एक झूठ बोल रहा है। उन्होंने कहा कि विमानन सुरक्षा सबसे जरूरी है और जिम्मेदार लोगों के सोशल मीडिया पोस्ट को बिना जाँच के नहीं छोड़ा जा सकता। अगर वेणुगोपाल का दावा सही है, तो चेन्नई एटीसी और एयर इंडिया को जवाब देना होगा। लेकिन अगर ये गलत है, तो वेणुगोपाल को सजा मिलनी चाहिए, जैसे कि उन्हें नो-फ्लाई लिस्ट में डाल देना चाहिए। मालवीय ने कहा कि झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठने चाहिए।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लाखों लोगों तक पहुँचती है और अगर वो गलत है, तो अफवाहें और डर फैलने में वक्त नहीं लगता। लोग पहले से ही हवाई यात्रा को लेकर सतर्क रहते हैं। ऐसे में अगर कोई जिम्मेदार नेता बिना पुख्ता सबूत के ऐसी बातें कहता है, तो लोग सोचने लगते हैं कि क्या हवाई यात्रा वाकई सुरक्षित है? इससे न सिर्फ एयर इंडिया, बल्कि पूरे विमानन उद्योग और सार्वजनिक परिवहन पर लोगों का भरोसा डगमगा सकता है।

आसिम मुनीर ने मुकेश अंबानी को धमकाया: अमेरिका के प्यादे बना रहे भारत के उद्योगपतियों को निशाना, राहुल गाँधी दे रहे ‘मौन समर्थन’

भारत की आर्थिक तरक्की में उसके उद्योगपतियों का बड़ा हाथ है। पहले टाटा-बिरला और बाद में अडानी-अम्बानी जैसे कारोबारी समूह भारत की आर्थिक तरक्की को आगे ले जा रहे हैं। इसी आर्थिक तरक्की ने भारत को पाकिस्तान से कई गुना आगे खड़ा किया है और मजबूत बनाया है। इस आर्थिक तरक्की के स्तम्भों को लगातार निशाने पर लिया जा रहा है। इसके पीछे वह तत्व हैं, जिन्हें अमेरिका या उससे जुड़ी एजेंसियों का समर्थन प्राप्त है। कॉन्ग्रेस MP राहुल गाँधी भारतीय आर्थिक हितों को निशाना बनाने वालों के सुर में सुर मिलाते रहे हैं।

मुल्ला मुनीर’ ने अब मुकेश अम्बानी पर किया प्रलाप

आर्थिक दौड़ में भारत से कोसों पीछे हो चुका पाकिस्तान वर्तमान में कर्जों के बल पर ज़िंदा है। IMF, अमेरिका और सऊदी के पैसों पर उसकी अर्थव्यवस्था दिवालिया होने से बच रही है। भारत की बराबरी ना कर पाने के चलते पाकिस्तान अब भारत की अर्थव्यवस्था के स्तम्भों को कमजोर करने की धमकियाँ दे रहा है। इसी कड़ी में पाक फ़ौज के सरगना आसिम मुनीर ने अमेरिकी जमीन से भारतीय कारोबारी मुकेश अम्बानी को निशाना बनाने की बात कही है।

द प्रिंट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर ने अमेरिका में एक जनरल के विदाई समारोह में अपने भाषण में खूब जहर उगला। इसमें मुनीर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया। इसमें मुकेश अम्बानी की एक तस्वीर और कुरान की एक आयत थी। मुनीर ने अपने इस वक्तव्य में मुकेश अम्बानी की हत्या की धमकी एक तरह से दी। दरअसल, जिस आयत का जिक्र मुकेश अम्बानी की फोटो पर था, चिड़ियों ने दुश्मन की सेना पर पत्थर गिराए और उसे तबाह किया।

मुनीर ने सीधे तौर पर यह कहने का प्रयास किया कि वह अगले युद्ध में मुकेश अम्बानी को निशाना बनाएँगे। किसी सैन्य अधिकारी का दूसरे देश के उद्योगपति को लेकर ऐसा बयान काफी चौंकाने वाला था। हालाँकि, पाक फ़ौज के मुखिया से और कोई उम्मीद नहीं की जा सकती थी। ज्यादा परेशान करने वाली बात है कि यह धमकी लाहौर या इस्लामाबाद से नहीं बल्कि अमेरिका की जमीन से दी गई। उस कमरे से दी गई, जहाँ अमेरिका के बड़े से बड़े सैन्य अधिकारी तक मौजूद थे।

इसे सीधे तौर पर समझा जाए कि अमेरिका की शह पर मुनीर भारतीय कारोबारी को धमका रहे हैं, इसमें अमेरिका की मौन सहमति भी मानी जाए। उन्हें भारतीय कारोबारी को धमकाते टाइम ना किसी ने रोका, ना किसी ने टोका। यह मौन स्वीकृति बताती है कि मुनीर के अम्बानी पर हमले के दौरान अमेरिका उसके साथ खड़ा रहेगा। मुनीर की लफंगई का कई तरीकों से अर्थ निकाला गया है। कुछ ने इसे गुजरात के के जामनगर रिफाइनरी से भी जोड़ा।

जामनगर में रिलाइंस की बड़ी रिफाइनरी है। यह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी खतरे की जद में बताई गई थी। इस तरह से यह मतलब भी निकाला जाए कि भारतीय औद्योगिक हितों का निशाना बनाए जाने से अमेरिका को कोई समस्या नहीं है और वह इसके लिए अपनी जमीन भी इस्तेमाल होने देगा, इसके साथ ही वह पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा। मुनीर का बयान भले ही चौंकाने वाला हो लेकिन अमेरिका का भारतीय कारोबारी हितों को प्रभावित करना कोई नई बात नहीं है।

अडानी को निशाना बना रही थी अमेरिकी फर्म

अमेरिकी जमीन से जहाँ मुनीर ने भारतीय कारोबारी मुकेश अम्बानी को निशाना बनाया, तो कुछ समय पहले तक दूसरे कारोबारी गौतम अडानी भी उसकी ही जमीन से निशाना बनाए जा रहे थे। अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग ने जनवरी, 2023 से लेकर 2024 तक लगातार अडानी पर रिपोर्ट्स छापीं। अडानी पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने तमाम तरह के आरोप लगाए। इसके आधार पर भारत में खूब हंगामा हुआ। भारतीय निवेशकों की लाखों करोड़ की पूँजी चली गई।

अडानी पर हिंडनबर्ग की इस रिपोर्ट के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी तक को निशाना बनाया गया। अडानी समूह पर धोखाधड़ी, शेयर बाजार में गड़बड़ी और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने जैसे आरोप तक लगाए गए। यह सब उस हिंडनबर्ग ने किया, जिसका सीधा संबंध जॉर्ज सोरोस से था। यह वही सोरोस है, जिसने दुनिया भर में सत्ताएँ बदलने का काम किया है। वह भारत के खिलाफ भी जहर उगल रहा था। तब अमेरिका के बायडेन प्रशासन ने हिंडनबर्ग और बाकी ऐसे तत्वों को खुली छूट दी कि वह भारतीय कारोबारी हितों को नुकसान पहुँचे।

अडानी के खिलाफ अमेरिका में बायडेन प्रशासन के अंतिम दिनों में मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया। एक कथित रिश्वतखोरी के मामले में गौतम अडानी और उनकी कम्पनी के बाकी लोगों को आरोपित बनाया गया है। इसमें अमेरिका की सरकारी एजेंसी SEC तक अडानी को निशाना बनाने में जुटी हुई थी। अडानी को इससे भी कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा लेकिन भारत के आर्थिक हितों को लेकर अमेरिका का क्या रुख है, यह जरूर साफ़ हुआ।

राहुल गाँधी भी इसी गेम में शामिल!

जहाँ पाकिस्तान-अमेरिका का नेक्सस भारतीय कारोबारियों को निशाने ले रहा है तो वहीं उसको मौन सहयोग कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी दे रहे हैं। राहुल गाँधी ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद तमाम आरोप प्रधानमंत्री मोदी पर लगाए थे। कॉन्ग्रेस ने इस दौरान हिंडनबर्ग द्वारा प्रसारित हर झूठ को आगे बढ़ाया। राहुल गाँधी ने अडानी को PM मोदी का दोस्त बताया था और कई आरोप लगाए थे। कॉन्ग्रेस कहीं अडानी और प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कोई नया शब्द गढ़ती थी तो कहीं इस्तीफ़ा माँगती थी।

हिंडनबर्ग के सहारे प्रधानमंत्री मोदी और अडानी को जोड़ कर सारा प्रोपेगेंडा चलाने का नेतृत्व राहुल गाँधी के पास ही था। बाद हिंडनबर्ग के लगाए आरोप ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। हालाँकि, इतने दिनों तक राहुल गाँधी अमेरिकी कम्पनी हिंडनबर्ग की प्लेबुक पर खेलते रहे। दुखद बात यह है कि पाकिस्तानी जनरल मुनीर के बयान के दौरान भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है। उनका समर्थन भारत के आर्थिक हितों को नहीं है।

यहाँ तक कि जो सेना इन आर्थिक हितों को प्रभावित होने से बचाएगी, उसके शौर्य पर प्रश्न उठाने स भी राहुल गाँधी नहीं चूके हैं। राहुल गाँधी की पार्टी के कई नेताओं ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के एक्शन को लेकर प्रश्न पूछे हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता यह भी नहीं मानने को तैयार हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के 5-6 विमान मार गिराए। इससे पाकिस्तान को शह मिल रही है और उसकी फ़ौज की मुखिया अब भारतीय कारोबारी हितों को निशाना बना रहा है।

बिहार SIR पर विपक्ष ने नहीं दर्ज कराई एक भी आपत्ति, न तो कॉन्ग्रेस के पास शिकायत न RJD के पास: ‘हंगामा खड़ा करना’ वाले मकसद पर चला विपक्ष, बैरिकेट्स तक कूदे

बिहार में वोटर वेरिफिकेशन पर लगातार विपक्ष संसद से सड़क तक हंगामा कर रहा है। वोटर लिस्ट में नाम काटने का आरोप लगा रहा है लेकिन चुनाव आयोग ने 1 अगस्त से एक महीने तक किसी भी तरह की शिकायत होने पर राजनीतिक दलों को दर्ज कराने को कहा है। 10 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी आपत्ति या शिकायत कोई भी पार्टी दर्ज नहीं करा पाई है।

ऊपर से तेजस्वी यादव के दो जगह नाम होने पर चुनाव आयोग को जवाब नहीं दे पा रहे। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पटना से दिल्ली तक एसआईआर के खिलाफ बवाल कर रहे हैं, गले फाड़-फाड़ कर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन आयोग को बताने नहीं जा रहे कि उन्हें आखिर आपत्ति किस बात पर है?

दिल्ली पुलिस से बगैर अनुमति माँगे SIR के खिलाफ इंडी गठबंधन ने राहुल गाँधी के नेतृत्व में संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस तक जाने की कोशिश की। इस दौरान बैरिकेड्स लगा कर नेताओं को रोकने की कोशिश की गई। इस दौरान एसपी नेता अखिलेश यादव उस पर चढ़ गए। कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा नारा लगाते दिखाई दी। नेताओं के बवाल के बाद पुलिस ने इन लोगों को हिरासत में ले लिया।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का कहना है कि “ये लोग बात नहीं करना चाहते हैं। देश के सामने सबकुछ सामने आ गया है। ये लड़ाई राजनीति नहीं है।”

चुनाव आयोग ने दिया सुप्रीम कोर्ट को भरोसा

चुनाव आयोग ने SIR पर शनिवार (9 अगस्त 2025) को सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल कर दिया। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना नोटिस दिए किसी भी मतदाता को अंतिम वोटर लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने भरोसा दिया है कि बगैर सूचना दिए या बिना आदेश के वोटर लिस्ट में किसी का नाम नहीं हटाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में आयोग ने कहा कि वह हर वोटर को शामिल करने की पूरी कोशिश कर रहा है।

अब तक एक भी नाम नहीं बता पाई है पार्टियाँ

इससे पहले चुनाव आयोग ने 1 सितंबर तक किसी तरह की आपत्ति होने पर राजनीतिक दलों और आम लोगों से शिकायत, सुझाव और बदलाव हर तरह की जानकारी देने के लिए कहा है। 1 अगस्त से 9 अगस्त तक विपक्षी पार्टियों में किसी भी दल ने न तो कोई आपत्ति दर्ज की और न ही बदलाव की बात कही। सभी पार्टियाँ पूरी तरह निष्क्रिय दिख रहीं है। अगर किसी तरह की गड़बड़ी पार्टियों को दिख रही है, तो आधिकारिक तौर पर आयोग को सबूत के साथ बताएँ, न की बैरिकेड तोड़ कर मीडिया के सामने ड्रामा करने की कोशिश करें।

तेजस्वी यादव का वोटर लिस्ट में दो जगहों पर नाम

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं है। इसके बाद चुनाव आयोग ने उनके आरोप को बेबुनियाद करार देते हुए नाम लिस्ट भेजा। इस दौरान तेजस्वी यादव के दो जगह वोटर लिस्ट में नाम सामने आये। आयोग ने उनसे जवाब माँगा है लेकिन जवाब देने के बजाए तेजस्वी यादव नकारात्मक राजनीति करते नजर आ रहे हैं।

वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर वोटिंग प्रक्रिया का एक जरूरी हिस्सा है। विपक्षी पार्टियाँ शुरू से इसका विरोध कर रही हैं। कभी कहती हैं कि दस्तावेजों की कमी से योग्य मतदाता वोटिंग से वंचित रह जाएगा। जबकि इसी देश में राशन कार्ड पर मुफ्त राशन देने, बैंकों का खाता खोलने के लिए जरूरी दस्तावेज देने जैसी प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक की गई हैं और इसका फायदा आम लोगों को मिल रहा है। ऐसे में वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण भी उतना ही जरूरी है जिसका अधिकार चुनाव आयोग को संविधान ने दिया है।

कॉलेज में साथ पढ़ता था मोहम्मद रमीस, ईसाई युवती पर धर्मांतरण और निकाह का डाला दबाव: पिटाई से परेशान युवती ने दे दी जान, केरल के एर्नाकुलम का मामला

केरल के एर्नाकुलम जिले में 23 वर्षीय सोना एल्धोसे ने धर्म परिवर्तन के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। युवती को मोहम्मद रमीस इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर कर रहा था। आए दिन उसके साथ मारपीट की जाती थी, जिससे तंग आकर उसने खुदकुशी कर ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना शनिवार (11 अगस्त 2025) को कोठामंगलम शहर की है। सोना ने आत्महत्या से पहले नोट भी लिखा है। नोट में आत्महत्या की वजह धर्म परिवर्तन का दबाव और प्रताड़ना बताई गई है। वहीं सोना के भाई ने भी रमीस और उसके परिवार पर आरोप लगाए हैं।

सोना के भाई ने बताया कि उसकी बहन सोना को रमीस ने कॉलेज के दौरान प्रेमजाल में फँसाया था। रमीस उनके घर पर निकाह करने का प्रस्ताव लेकर पहुँचा था, लेकिन इस शर्त पर कि सोना इस्लाम कबूल करेगी। सोना भी इस शर्त को मानने के लिए तैयार हो गई थी। लेकिन कुछ समय बाद सोना के पिता का निधन हो गया, जिसके कारण एक साल तक निकाह को टाल दिया गया।

इस एक साल में रमीस को पुलिस ने एक लॉज से अवैध व्यापार करते हुए पकड़ा। इसके बावजूद सोना ने निकाह के लिए इनकार नहीं किया और कोर्ट मैरिज करने की बात कही। लेकिन रमीस जल्द से जल्द सोना का धर्म परिवर्तन करवाना चाहता था। एक दिन सोना अपनी दोस्त के घर गई थी, तभी रमीस उसे वहाँ से अपने घर ले गया। यहाँ रमीस और उसके परिवार ने सोना को एक कमरे में बंद कर पीटा।

रमीस और उसके परिवार ने सोना को पोन्नानी में जाकर धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव डाला, लेकिन सोना लगातार मना करती रही। इसके चलते रमीस रोजाना सोना को प्रताड़ित करता रहा। इससे परेशान आकर सोना ने खुदकुशी कर ली। फिलहाल पुलिस मृतका के परिवार की शिकायत पर मामले की जाँच में जुटी हुई है।

कटिहार में 250 जनजातीय लोगों के धर्मांतरण की साजिश नाकाम, बजरंग दल ने रुकवाया: बिहार पुलिस ने 6 को दबोचा, 1 ईसाई परिवार ने की घर वापसी

बिहार के कटिहार जिले में 200-250 जनजातीय समाज के लोगों को ईसाई बनाने की साजिश की जा रही थी। इससे पहले की मिशनरी अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते बजरंग दल से जुड़े लोगों ने मौके पर पहुँचकर इसे रुकवा दिया।

विदेशी ताकतों और कट्टरपंथियों का मंसूबा है कि भारत में डेमोग्राफी बदलकर किसी तरह सामाजिक ताने-बाने को तोड़ दिया जाए। देश में जगह-जगह इस्लामिक कट्टरपंथी और ईसाई मिशनरियों के गिरोह दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कटिहार के सहायक थाना क्षेत्र में आदिवासी टोला में रविवार (10 अगस्त 2025) को सैकड़ों हिंदुओं का धर्मांतरण कर उन्हें ईसाई बनाने की साज़िश चल रही थी। इस गिरोह के निशाने पर मुख्यत: संथाली जनजातीय समाज के लोग थे।

इलाके के इन गरीब और मासूम लोगों का ब्रेन-वॉश किया गया था। हालाँकि, इसकी जानकारी बजरंग दल के लोगों को मिल गई और वे पुलिस लेकर घटनास्थल पर पहुँच गए। पुलिस ने इस साजिश में शामिल 6 लोगों को हिरासत में ले लिया है। दावा किया जा रहा है कि जब बजरंग दल के लोग ईसाइयों की प्रार्थना सभा रुकवाने पहुँचे थे तो वहाँ झड़प भी हुई थी।

बजरंग दल के लोगों ने क्या कहा?

बजरंग दल के जिला संयोजक राणा कुमार का कहना है कि कई दिनों से उन्हें इस इलाके में हिंदुओं का धर्मांतरण कराए जाने की खबर मिल रही थी। इसके बाद वे मौके पर पहुँचे तो पता चला कि 200 से 250 लोगों को धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। राणा को मौके से कुछ ऐसी धार्मिक किताबें और आपत्तिजनक चीजें मिली हैं जो धर्मांतरण की बात को पुख्ता करती हैं।

बजरंग दल के उत्तर बिहार प्रांत सुरक्षा प्रमुख अनिश सिंह ने बताया कि धर्मांतरण की सूचना मिलने के बाद पुलिस को बुलाया गया था। पुलिस ने छापेमारी की और संदिग्धों को थाने ले आई है। बजरंग दल की माँग है कि इस मामले में FIR दर्ज की जाए और सख्ती से जाँच की जाए।

पुलिस ने क्या कहा?

पुलिस ने धर्मांतरण की शिकायत मिलने के बाद 2 पुरुषों और 4 महिलाओं को हिरासत में लिया है। कटिहार के SP शिखर चौधरी का कहना है कि धर्मांतरण कराने का मामला सामने आया है और पुलिस इसकी जाँच कर रही है। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों को पूछताछ के लिए थाने लाया गया है। आरोप लगाने वालों ने मारपीट की है जिसमें 2 लोग घायल हुए हैं।”

SP के मुताबिक, आरोपितों की पहचानकर FIR कर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने जाँच की बात कही है। वहीं, हिंदू संगठन से जुड़े लोगों का साफ कहना है कि अगर ऐसी गतिविधियाँ अगर चलती रहीं तो वे बड़ा प्रदर्शन करेंगे।

भारत तोड़ने की साजिश: पूर्व डिप्टी CM

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कटिहार के बीजेपी विधायक तारकिशोर प्रसाद ने इसे भारत को तोड़ने की साजिश बताया है। तारकिशोर प्रसाद का कहना है कि सीमांचल में धर्मांतरण का खेल चल रहा है जिससे सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण की साजिश के जरिए कोई पुण्य का काम नहीं हो रहा है और लोग इसे अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

कटिहार में ईसाई परिवार ने की घर वापसी

धर्मांतरण की गहरी साजिश के बीच ईसाई धर्म अपनाने वाले एक परिवार ने घर वापसी की है। महाकाल सेना से जुड़े लोगों ने विधिवत पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार के साथ इस परिवार की घर वापसी कराई है।

महाकाल सेना के शिवानंद का कहना है कि उन लोगों तक पहुँचा जा रहा है, जिन्होंने किसी लोभ, साजिश या मजबूरी में अपना धर्म बदला है। संख्या बढ़ाकर सीमावर्ती क्षेत्रों में कब्जा कर रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए और मिशनरी संगठनों की संगठित कोशिशों को उन्होंने दो बड़ी चुनौती बताया है।