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‘लैंड पूलिंग पॉलिसी जल्द वापस ले पंजाब सरकार, वरना करेंगे बड़ा आंदोलन’: भगवंत मान सरकार के खिलाफ सड़कों पर किसान, हाईकोर्ट पहले ही लगा चुका है फटकार

पंजाब में किसानों ने भगवंत मान सरकार को चेताया है कि अगर लैंड पूलिंग पॉलिसी वापस नहीं लिया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसानों ने इसको लेकर पंजाब के कई जिलों में बाइक रैली निकाली। ये रैली सोमवार (11 अगस्त 2025) को किसान मजदूर संघर्ष समिति (केएमएम) के नेता सरवन सिंह पंधेर की अगुआई में अमृतसर के जलियांवाला बाग से अटारी बॉर्डर तक गई। इस दौरान भगवंत मान सरकार के फैसले का जमकर विरोध किया गया।

किसानों से जमीन छीनने की साजिश- पंधेर

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा, “हम चाहते हैं कि भगवंत मान सरकार जल्द से जल्द लैंड पूलिंग नीति वापस ले, वरना हमें उन्हें ऐसा करने पर मजबूर करना पड़ेगा। यह सिर्फ किसानों का मुद्दा नहीं है।”

किसान मोर्चा का कहना है कि राज्य के उपजाऊ कृषि भूमि को कॉर्पोरेट के हाथों में जाने से बचाना उनका मकसद है। उन्होंने प्रस्तावित लैंड पूलिंग नीति को ‘काला कानून’ करार दिया। किसान नेताओं का कहना है कि इसका मकसद 65000 एकड़ से ज्यादा जमीन निजी हाथों में सौंपना चाहती है राज्य सरकार।

हाईकोर्ट ने भगवंत सरकार को लगाई थी फटकार

इससे पहले भगवंत मान सरकार को ‘लैंड अर्बन डेवलपमेंट’ के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई थी और इस पर 4 हफ्ते के लिए रोक लगा दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है कि लैंड पूलिंग पॉलिसी जल्दीबाजी में बनाया गया है । सरकार ने सामाजिक असर, पर्यावरण और दूसरी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। इन पर ध्यान देना चाहिए था।

क्या है लैंड पूलिंग पॉलिसी?

पंजाब की मान सरकार ने जमीन पर आवासीय कॉलोनी और फ्लैट बनाने के लिए जमीन किसानों से लेना चाहती है। इसमें कहा गया है कि किसानों की इच्छा के बिना ये नहीं हो सकता। किसानों का कहना है कि ये पॉलिसी किसानों की जमीन लेकर कॉरपोरेट को देने की साजिश है। किसान खुलकर इसका विरोध कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि उनपर चारों ओर से हमले किए जा रहे हैं। एक तरफ जमीन छीनने की साजिश की जा रही है वहीं दूसरी तरफ भारत पर लगातार अमेरिका दबाव बना रहा है कि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री, मछलीपालन जैसे क्षेत्र में उसे भारत में घुसने दिया जाए।

निमिषा प्रिया मामले में केरल के मौलाना का नहीं लेना-देना, यमन में पीड़ित के भाई ने किया साफ़: मौत की सजा के नाम पर क्रेडिट लेने की कोशिश कर चुका है कंथापुरम, हर बार साबित हुआ झूठा

यमन में मौत की सजा पा चुकी भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को बचाने के मलयाली मौलाना के दावे झूठे सिद्ध हुए हैं। मौलाना कंथापुरम के निमिषा प्रिया के बचाने के दावों को अब्दुल फतह मेहदी ने नकार दिया है। अब्दुल फतह मेहदी, उस तलाल मेहदी का भाई है जिसकी हत्या के आरोप में निमिषा प्रिया को मौत की सजा दी जा रही है। अब्दुल फतह मेहदी ने कहा है कि वह तलाल के परिजनों से कंथापुरम के सम्पर्क करने की कोई कोशिश कामयाब नहीं होने देगा। उसने कंथापुरम को झूठा भी करार दिया है।

निमिषा प्रिया पर क्या बोला अब्दुल?

ऑनमनोरमा की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल ने इससे सम्बन्धित दो फेसबुक पोस्ट की हैं। अब्दुल ने कहा, “यह भारतीय मौलाना का कर्तव्य था कि वह पीड़ित के खून का सम्मान करें और इस दौरान सच्चाई को ईमानदारी से रखें। हमने दाम तलाल के माता-पिता के साथ किसी के भी मिलने या बैठक पर रोक लगी हुई है… चाहे यह सीधे हो, कंथापुरम हो या फिर हबीब उमर बिन हाफिज के कार्यालय द्वारा किसी भी माध्यम से हो।”

अब्दुल ने इसके बाद कंथापुरम पर झूठ बोलने का आरोप भी लगाया। अब्दुल ने कहा कि इस्लाम सच्चाई का धर्म है और यहाँ झूठ की कोई गुंजाइश नहीं है। अब्दुल ने स्पष्ट किया कि निमिषा प्रिया की मौत की सजा रोकने या उसके परिवार से कोई डील करने की बात सच नहीं है। अब्दुल ने बताया कि ऐसी खबर अगर सच होती तो पहले ही इसकी घोषणा कर देते। अब्दुल मेहदी ने कहा कि हम खून का बदला खून से लेंगे और इसे कोई बदल नहीं सकता।

निमिषा प्रिया की मौत को भुनाने का आरोप भी अब्दुल ने कुछ लोगों पर लगाया। अब्दुल ने कहा कि जिस त्रासदी से उसका भाई और उसका परिवार गुजरा है, निमिषा प्रिया को मौत की सजा के जरिए उसका बदला पूरा होगा। अब्दुल और उसके परिवार ने यमन के अधिकारियों से बातचीत करके निमिषा की मौत की सजा की डेट जल्द फाइनल करने को कहा है। अब्दुल का यह बयान तब आया है जब कंथापुरम लगातार निमिषा प्रिया को बचाने से जुड़े दावे कर रहे हैं।

कंथापुरम कर रहे बचाने का दावा

मौलाना कंथापुरम ने हाल ही में एक समारोह में दावा किया था कि वह निमिषा प्रिया को मानवीय आधार पर बचा रहे हैं। कंथापुरम ने बोला था कि वह इसके लिए कोई क्रेडिट नहीं चाहते। हालाँकि, यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब उन्होंने या उनके दफ्तर ने यह दावा किया हो कि निमिषा प्रिया को बचा लिया गया है। इससे पहले कंथापुरम के दफ्तर ने दावा किया था कि निमिषा प्रिया की मौत की सजा खत्म कर दी गई है।

इससे पहले 16 जुलाई, 2025 को होने वाली निमिषा प्रिया की मौत की सजा जब टली थी, तब भी कंथापुरम को हीरो की तरह पेश किया गया था। मुस्लिमों के साथ ही वामपंथी मीडिया पोर्टल्स ने यह दिखाने का प्रयास किया था कि निमिषा की मौत की सजा उन्होंने टलवाई। इसको लेकर खूब प्रचार हुआ था। मौलाना के दफ्तर ने भी कई पोस्ट की थीं। इसके पीछे मौलाना का इस्लामी प्रभाव बताया गया था। इसको लेकर लम्बे लम्बे लेख लिखे गए थे। हालाँकि, यह बातें बाद में झूठी साबित हुईं।

निमिषा प्रिया पर बार-बार पकड़ा गया मौलाना का झूठ

निमिषा प्रिया की मौत को लेकर मौलाना कंथापुरम का झूठ कोई पहली बार नहीं पकड़ा गया है। जब मौत की सजा रोकी गई थी, तो भी मौलाना के रोल को भारतीय विदेश मंत्रालय ने नकार दिया था। इसके अलावा जब मौलाना के दफ्तर ने निमिषा प्रिया के मौत की सजा रुकने की बात कही थी तब भी यह झूठ निकला था और मौलाना के दफ्तर के पोस्ट हटानी तक पड़ी थी। अब जब उसने फिर से इससे जुड़ा दावा किया है तो मृतक मेहदी के भाई ने ही इसे नकार दिया है और मौलाना को झूठा तक करार दे दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR से आवारा कुत्तों को हटाने को कहा, जो रुकावट डालें – उन पर हो कार्रवाई: रेबीज से मरे लोगों को वापस लाएँगे क्या NGO वाले?

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों को तुरंत हटाने का बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि जो भी इस काम में रुकावट डालेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, “जो लोग रेबीज से मर गए, क्या कोई उन्हें वापस ला सकता है?” यह आदेश दिल्ली में कुत्तों के काटने और रेबीज से होने वाली मौतों के बढ़ते मामलों को देखते हुए आया है।

जस्टिस जे.बी. परदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में आवारा कुत्तों को पकड़कर दूर के इलाकों में ले जाने का आदेश दिया। जस्टिस परदीवाला ने कहा कि यह जनता के हित में है और भावनाओं में बहकर फैसला नहीं लिया जा सकता। उन्होंने साफ कहा, “सभी इलाकों से कुत्तों को पकड़ो और उन्हें दूर ले जाओ।”

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली के कई हिस्सों में हालात गंभीर हैं। खासकर बच्चे और बुजुर्ग रेबीज का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता कोर्ट के इस कदम से खुश हैं, क्योंकि बच्चों की जान बचाना सबसे जरूरी है।

मेहता ने यह भी बताया कि पहले कुत्तों को हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन एक डॉग राइट्स एक्टिविस्ट ने कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया था, जिससे काम रुक गया। इस पर जस्टिस परदीवाला ने तल्ख टिप्पणी की, “क्या ये एक्टिविस्ट रेबीज से मरे लोगों को वापस ला सकते हैं?”

कुत्तों के लिए शेल्टर और सख्त निगरानी की व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार, MCD और NDMC को आदेश दिया कि वो कुत्तों के लिए शेल्टर बनाएँ, जहाँ उनकी नसबंदी और वैक्सीनेशन हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि शेल्टर में CCTV कैमरे लगाए जाएँ, ताकि कोई कुत्ता वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए। कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले सभी इलाकों को आवारा कुत्तों से मुक्त करना है। इसके लिए जरूरत पड़े तो अलग से फोर्स बनाई जाए।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर कोई इस काम में अड़ँगा डालेगा, तो उसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा और सख्त कार्रवाई होगी। यह फैसला दिल्ली-NCR में रेबीज के खतरे को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

दैनिक भास्कर ने बिहार SIR पर की सनसनी फैलाने की कोशिश, राजदीप सरदेसाई ने डाला ‘आग में घी’: मुजफ्फरपुर प्रशासन ने खोल दी सबकी पोल

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच दैनिक भास्कर ने एक खबर से सनसनी फैलाने की कोशिश की। भास्कर ने एक पते पर 269 वोटर होने की खबर दी। ‘पत्रकार’ कहे जाने वाले राजदीप सरदेसाई ने भी इस मुद्दे पर ‘आग में घी’ डाल दिया। हालाँकि, इस आग से कुछ नुकसान हो पाता, इससे पहले ही प्रशासन ने इसकी पोल खोल दी।

दैनिक भास्कर के दावे को राजदीप ने दी हवा

दैनिक भास्कर ने 10 अगस्त को बिहार के मतदाता सूची प्रारूप को लेकर खबर छापी। इसमें कहा गया, “मुजफ्फरपुर में एक ही पते पर 269 तो जमुई में 247 वोटर रहते हैं”। खबर में मुजफ्फरनगर में बूथ नंबर 370 के मकान नंबर 27 पर 269 मतदाता और जमुई के बूथ नंबर 86 पर मकान नंबर 3 पर 247 वोटर होने की बात कही गई।

विपक्ष लगातार SIR को लेकर हल्ला-हंगामा कर रहा है। TMC की राज्यसभा साँसद सागरिका घोष के पति राजदीप सरदेसाई ने भी विपक्ष के सुर में सुर मिलाए हैं। राजदीप ने इस खबर को लेकर भास्कर की तारीफ की। उन्होंने X पर खबर शेयर करते हुए मतदाता सूची के रिवीजन को जल्दबाजी का काम बताया है।

प्रशासन ने दिया जवाब

मुजफ्फरपुर के जिला प्रशासन ने राजदीप को जवाब देते हुए इस खबर की असली कहानी खोल दी। प्रशासन ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि निर्वाचक सूची में वोटरों को दिया जाने वाला मकान नंबर अस्थाई और प्रतीकात्मक (Notional) होता है। प्रशासन ने कहा, “इसका निर्वाचक के असली मकान नंबर या परिवार से कोई संबंध नहीं होता है।”

प्रशासन के मुताबिक, SIR में योग्य निर्वाचकों का केवल सत्यापन किया गया है। निर्वाचक सूची में यह मकान नंबर SIR के पहले से दर्ज है। 7 जनवरी 2025 को प्रकाशित मतदाता सूची में ही मकान नंबर इसी तरह दर्ज थे। SIR के दौरान भी किसी ने इस पर आपत्ति नहीं की।

जिस बड़े खुलासे के सहारे भास्कर और राजदीप बिहार में सनसनी फैलाने की कोशिश कर रहे थे, प्रशासन और चुनाव आयोग को घेरने की कोशिश कर रहे थे। वो बस एक भ्रामक दावा ही साबित हुआ है। चुनाव आयोग लगातार विपक्ष के निशाने पर है और ऐसे में कुछ खास राजनीतिक झुकाव वाले पत्रकार तथ्यों को परवाह किए बगैर बस हमलावर हैं।

इजरायल ने जिस आतंकी अनस-अल को ठोका, उसे इस्लामी-लिबरल बता रहे ‘शरीफ’: मौत के बाद सामने आई अल-जजीरा के जिहादी की सच्चाई

इजरायली हमले में मारे गए अनस अल शरीफ समेत अल जजीरा के 5 कथित पत्रकारों को लेकर सोशल मीडिया इजरायल पर अटैक कर रहा है। कोई उसकी दूर दराज में किए गए रिपोर्टिंग को शेयर कर उसे ‘सच्चा पत्रकार’ साबित करने की कोशिश कर रहा है तो कोई ‘प्रेस टैंट पर अटैक’ कह कर मीडिया को खामोश करने की कवायद करार दे रहा है। हालाँकि इजरायल पहले ही बता चुका था कि अनस उसके ‘हिट लिस्ट’ में शामिल था।

इजरायल के मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था अनस

गाजा में इजरायली हमले में अनस अल शरीफ और उसके 4 साथियों की मौत हो गई है। ये सभी अल जजीरा से जुड़े कथित पत्रकार थे। इजरायल पहले ही उसका नाम मोस्ट वॉन्टेड की सूची में शामिल कर चुका था। IDF ने अल जजीरा के 6 पत्रकारों की लिस्ट जारी की थी, जो हमास के लिए काम करता था। इसमें अनस अल शरीफ का नाम भी शामिल था। IDF के मुताबिक अनस अल-शरीफ रॉकेट लॉन्चिंग स्क्वॉड का प्रमुख था और हमास की नुसीरत बटालियन में नुखबा फोर्स कंपनी का आतंकी था।

हालाँकि अल जजीरा ने दावा किया था कि उसके पत्रकार का आंतकी संगठनों से कोई संबंध नहीं है। लेकिन IDF ने इसे खारिज कर कहा था कि उसके पास दस्तावेज मौजूद हैं जिससे साबित होता है कि वह आतंकी था।

इजरायल के खिलाफ अल जजीरा का दुष्प्रचार

अल जजीरा लगातार इजरायल को लेकर दुष्प्रचार करता रहा है। इस साल मई में बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने हमास का प्रोपेगेंडा चलाने के कारण इजरायल के भीतर अल जजीरा को बंद कर दिया था। सितम्बर, 2024 में इजरायल सरकार ने वेस्ट बैंक के रामल्लाह में अल जजीरा ब्यूरो को भी बंद कर दिया था।

अलजजीरा एक ऐसा नेटवर्क है जिसे कतर सरकार फंडिंग करती है। ये इजरायल के खिलाफ खबरें दिखाता है और फिलिस्तीन की मदद करता है। इजरायल कहता रहा है कि अल जजीरा हमास के आतंकियों को रिपोर्टर के रूप में फिलिस्तीन के दूर दराज के इलाके में भेजता है जो मुख्य रूप से आतंकी गतिविधि में शामिल रहते हैं। अनस अल शरीफ इसका अच्छा उदाहरण है जिसे पहले ही इजरायल ने हमास का आतंकी घोषित कर दिया था। आखिर एक वॉन्टेड आतंकी को रिपोर्ट बनाकर अल जजीरा हमास की मदद ही कर रहा है। वह गाजा के लोगों के बीच में छिप कर जिहादी मंसूबों को अंजाम दे रहा था।

लेकिन अनस अल शरीफ की मौत के बाद सोशल मीडिया पर उसके प्रति सहानुभूति जताने वाले इस्लामी और कथित लिबरल गैंग की बाढ़ आ गई है। कोई उसे ‘शहीद’ कह रहा है तो कोई पत्रकारों पर हमले को ‘इजरायली बर्बरता’ करार दे रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि दुनिया, मीडिया सब खामोश हैं।

कोई उसे अल जजीरा का बड़ा चेहरा बता रहा है तो साहसपूर्ण रिपोर्टिंग की बात कह रहा है। कोई हमास के हमलावरों की तारीफों के पुल बाँधे जा रहे हैं। यहाँ तक कि परिवार के साथ फोटो और वीडियो शेयर किया जा रहे हैं।

इजरायली हमले को भयावह करार देते हुए सीएनएन ने कहा है कि ये स्थानीय पत्रकारों की स्थिति को बयां करता है। सीएनएन के मुताबिक अल शरीफ हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हनीयेह के पारिवारिक घर के पास एक स्थान से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे थे, इसलिए वहाँ मौजूद थे। हनीयेह की मंगलवार को तेहरान में हत्या कर दी गई थी। वहीं बीबीसी ने इसे ‘प्रेस की आजादी’ पर हमला करार दिया है।

लेकिन इससे अनस अल शरीफ की असलियत नहीं बदल सकती। उसके खिलाफ कई तरह के सबूत होने की बात इजरायल पहले से करता रहा है। जिहादी सोच का संबंध किसी पेश से नहीं होता। ये इंजीनियर ओसामा बिन लादेन से लेकर डॉक्टर अल जवाहिरी तक के केस में देखा जा सकता है। पत्रकार बनकर लोगों से बातें करना और उनके बीच रहना तो और आसान है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी राफेल की डिमांड, भारतीय वायुसेना ने माँगे 114 फाइटर जेट: कहा – चीन और पाकिस्तान से लड़ाई में आएँगे काम

भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बार फिर फ्रांस से और राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए जोरदार माँग उठाई है। यह माँग उसकी लंबे समय से लटकी हुई 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) परियोजना के तहत है, जिसमें ज्यादातर विमान भारत में ही विदेशी सहयोग से बनाए जाने हैं।

वायुसेना जल्द ही इस परियोजना को शुरू करने के लिए रक्षा खरीद परिषद (DAC) से प्रारंभिक मंजूरी (AoN) माँगेगी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह मंजूरी अगले एक-दो महीनों में मिल सकती है।

हालाँकि सवाल ये है कि ये माँग आखिर उठ क्यों रही है? भारतीय वायुसेना को किस चीज की कमी है? इस माँग को पूरा करने में कितना खर्च आएगा? और वायुसेना के सामने किस तरह की चुनौतियाँ हैं, आईए… आसान तरीके से समझते हैं।

राफेल से जुड़ा क्या है ये पूरा मामला

बीते कुछ सालों से भारतीय वायुसेना की ताकत कम हो रही है। अभी वायुसेना के पास 31 फाइटर स्क्वाड्रन (16-18 विमानों की टुकड़ी) हैं, जो अगले महीने पुराने मिग-21 विमानों के रिटायर होने के बाद 29 तक सिमट जाएँगे। यह अब तक का सबसे निचला स्तर होगा।

वायुसेना को 42.5 स्क्वाड्रन की जरूरत है, ताकि वह पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों से एक साथ होने वाली चुनौतियों का सामना कर सके। इस कमी को पूरा करने के लिए वायुसेना चाहती है कि फ्रांस से और राफेल विमान खरीदे जाएँ, जो 4.5वीं पीढ़ी के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं।

यह माँग हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर (7-10 मई 2025) के बाद और तेज हो गई है। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इन हमलों में राफेल विमानों ने लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे उनकी ताकत और उपयोगिता साबित हुई। लेकिन इस ऑपरेशन ने यह भी दिखाया कि अगर भारत को भविष्य में ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, तो उसके पास पर्याप्त आधुनिक विमान नहीं हैं।

वायुसेना को क्यों है इतने सारे राफेल की जरूरत

भारत के सामने दो बड़े खतरे हैं: पाकिस्तान और चीन। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीनी मूल के J-10 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया, जो PL-15 मिसाइलों से लैस थे। ये मिसाइलें 200 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक मार कर सकती हैं। इसके अलावा खबर है कि चीन जल्द ही पाकिस्तान को 40 J-35A स्टील्थ फाइटर जेट्स देने वाला है, जो पाँचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक विमान हैं। दूसरी ओर भारत के पास अभी पाँचवीं पीढ़ी का कोई विमान नहीं है। राफेल जो 4.5वीं पीढ़ी का है, भारत का सबसे आधुनिक विमान है।

वायुसेना का कहना है कि अगर हमें पाकिस्तान और चीन की संयुक्त चुनौती का सामना करना है, तो हमें और राफेल विमानों की जरूरत है। ये विमान न केवल हवा में दुश्मन के विमानों से लड़ सकते हैं, बल्कि जमीन पर सटीक हमले भी कर सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर में राफेल ने SCALP क्रूज मिसाइलों और HAMMER प्रेसिजन-गाइडेड हथियारों का इस्तेमाल करके आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया था। यह दिखाता है कि राफेल भारत की रक्षा के लिए कितना जरूरी है।

भारतीय वायुसेना को किस बात की कमी?

भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी कमी है उसके फाइटर स्क्वाड्रनों की घटती संख्या। अभी 31 स्क्वाड्रन हैं, जो अगले महीने 29 हो जाएँगे। यह कमी तब और गंभीर हो जाती है, जब हम देखते हैं कि हमें 42.5 स्क्वाड्रनों की जरूरत है। पुराने मिग-21 विमान अब रिटायर हो रहे हैं, और नए विमानों की खरीद में देरी हो रही है। MRFA प्रोजेक्ट, जिसके तहत 114 नए विमान खरीदे जाने हैं, वो पिछले 7-8 सालों से अटका हुआ है। इसका शुरुआती खर्च 1.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा अनुमानित था, और अब यह और बढ़ सकता है।

इसके अलावा भारत के पास अभी पाँचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स नहीं हैं, जबकि पाकिस्तान को चीन से ऐसे विमान मिलने वाले हैं। भारत का अपना AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) 2035 तक तैयार होगा, लेकिन तब तक हमें रूसी सुखोई-57 या अमेरिकी F-35 जैसे विमानों पर विचार करना पड़ सकता है। हालाँकि, इनके लिए अभी कोई आधिकारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।

सरकार को ये डिमांड कब तक पूरी करनी होगी?

वायुसेना चाहती है कि MRFA प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द शुरू किया जाए। इसके लिए पहला कदम, यानी AoN, अगले एक-दो महीनों में DAC से माँगा जाएगा। अगर मंजूरी मिल जाती है, तो फ्रांस के साथ सरकारी स्तर पर डील जल्द हो सकती है। वायुसेना का कहना है कि सरकारी डील से प्रक्रिया तेज होगी, क्योंकि वैश्विक टेंडर में समय लगता है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो अगले कुछ सालों में नए राफेल भारत में आ सकते हैं। नौसेना को भी 2028-2030 तक 26 राफेल-मरीन विमान मिलने वाले हैं, जो INS विक्रांत विमानवाहक पोत से ऑपरेट करेंगे।

भारत सरकार के सामने क्या है चुनौती

सबसे बड़ी चुनौती है पैसा और समय। MRFA प्रोजेक्ट का अनुमानित खर्च 1.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, और इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं है। इसके अलावा भारत चाहता है कि ज्यादातर विमान देश में ही बनें, ताकि ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिले। लेकिन इसके लिए विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी और स्थानीय उत्पादन की व्यवस्था करनी होगी, जो समय लेने वाली प्रक्रिया है।

दूसरी चुनौती है पड़ोसियों की बढ़ती ताकत। पाकिस्तान के पास पहले से ही चीनी J-10 विमान हैं, और जल्द ही J-35A जैसे स्टील्थ जेट्स भी आ जाएँगे। चीन की वायुसेना भी तेजी से आधुनिक हो रही है। ऐसे में भारत को अपनी रक्षा तैयारियों को तेज करना होगा। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान के 5 फाइटर जेट्स और एक बड़े विमान को मार गिराया।

इस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च आएगा?

MRFA प्रोजेक्ट का शुरुआती अनुमान 1.2 लाख करोड़ रुपए था, लेकिन अब यह रकम और बढ़ सकती है। पहले से ही भारत ने 36 राफेल विमानों के लिए 2016 में 59,000 करोड़ रुपए की डील की थी। इसके अलावा नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन विमानों की डील 63,887 करोड़ रुपए (लगभग 7 बिलियन यूरो) में हुई है। नए विमानों की खरीद में भी इतना ही या इससे ज्यादा खर्च हो सकता है। हालाँकि अगर विमान भारत में बनते हैं, तो लागत कुछ कम हो सकती है और स्थानीय उद्योग को फायदा होगा।

राफेल ही क्यों?

वायुसेना का कहना है कि और राफेल खरीदना ज्यादा फायदेमंद है। पहला – भारत के पास पहले से 36 राफेल हैं, जो अंबाला और हासिमारा एयरबेस पर तैनात हैं। इन बेस पर और स्क्वाड्रन रखने की जगह और बुनियादी ढांचा पहले से तैयार है। दूसरा – अगर नौसेना और वायुसेना दोनों राफेल का इस्तेमाल करें, तो रखरखाव और उपकरणों में समानता रहेगी, जिससे लागत और समय बचेगा। तीसरा – सरकारी डील से प्रक्रिया तेज होगी, जबकि वैश्विक टेंडर में सालों लग सकते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को यह एहसास दिलाया कि आधुनिक युद्ध में मजबूत वायुसेना कितनी जरूरी है। राफेल विमानों ने इस ऑपरेशन में अपनी ताकत दिखाई, लेकिन स्क्वाड्रनों की कमी और पड़ोसियों की बढ़ती ताकत भारत के लिए चिंता का सबब है। MRFA प्रोजेक्ट के जरिए और राफेल खरीदने की माँग इस दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन इसके लिए पैसा, समय और सही रणनीति की जरूरत है। अगर भारत इस दिशा में तेजी से कदम उठाता है, तो वह अपनी रक्षा को और मजबूत कर सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप की गोद में बैठ असीम मुनीर ने भारत को दी ‘न्यूक्लियर हमले’ की गीदड़भभकी, कहा- आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे: सिंधु पर बाँध बना तो 10 मिसाइल मारेंगे

भूखे-प्यासे पाकिस्तान में जनता रोटी को तरस रही और हुक्मरान परमाणु बम का ख्वाब देख रहे हैं। कुछ दिनों पहले भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान बीच बचाव के लिए अमेरिका से भीख माँग रहा था। अब पाकिस्तान का फौजी चीफ असीम मुनीर डोनाल्ड ट्रंप की गोद में बैठकर भारत को गीदड़भभकी दे रहा है। वो भी न्यूक्लियर हमले की।

मुनीर ने क्या कहा?

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी दौरे पर पहुँचे मुनीर ने एक डिनर पार्टी में गीदड़भभकी देते हुए कहा कि भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान के अस्तित्व को खतरा हुआ तो वो इस क्षेत्र को परमाणु युद्ध में झोंक देगा। मुनीर ने कहा, “हम एक परमाणु राष्ट्र हैं, अगर हमें लगता है कि हम डूब रहे हैं, तो हम आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे।” माना जा रहा है कि यह अमेरिकी धरती से किसी तीसरे देश को पहली परमाणु धमकी है।

पाकिस्तान द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है। मुनीर ने इस पर भी जहर उगला है। मुनीर ने इस फैसले से 25 करोड़ लोगों को भुखमरी का खतरा बताया है। मुनीर ने कहा, “हम भारत के बांध बनाने का इंतजार करेंगे और जब वह ऐसा करेगा, तो हम उसे 10 मिसाइलों से तबाह कर देंगे।” मुनीर ने कहा, “सिंधु नदी भारत की पारिवारिक संपत्ति नहीं है। हमें मिसाइलों की कमी नहीं है, अल्हम्दुलिल्लाह।”

मुनीर ने खुद ही कर दी पाकिस्तान की बेइज्जती

मदरसे में पढ़े और कट्टर इस्लामिक विचारधारा को मानने वाले मुनीर ने खुद ही पाकिस्तान की बेइज्जती भी कर दी है। पाकिस्तान की भूखी-नंगी हालात को मुनीर से बेहतर कौन जानता होगा। उसके उदाहरण भी वैसे ही है।

मुनीर ने कहा, “भारत एक चमचमाती हुई मर्सिडीज़ है जो फेरारी की तरह हाईवे पर आ रही है। हम बजरी से भरा एक डंप ट्रक हैं। अगर ट्रक कार से टकरा जाए, तो नुकसान किसका होगा?”

पाकिस्तान खुद को सड़क छाप, टक्कर मारने वाले गुंडे से ज्यादा क्या ही समझेगा। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान का ‘डंप ट्रक’ अब बिना पेट्रोल, बिना ड्राइवर और बिना ब्रेक के खाई में गिर चुका है। मुनीर ये मत भूलना कि भारत की मर्सिडीज दौड़ती रहेगी और पाकिस्तान का ट्रक कबाड़ में ही बिकेगा।

यह बात भी साफ है कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेल को ना सुनने का भी मन बना लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट कर चुके हैं कि अब कोई न्यूक्लियर धमकी नहीं सुनी जाएगी।

मुनीर ने अपने दौरे के दौरान अमेरिकी राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ पाकिस्तानी प्रवासी समुदाय से भी मुलाकात की। इस दौरान मुनीर ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के निवर्तमान कमांडर जनरल माइकल कुरीला के सेवानिवृत्ति समारोह और एडमिरल ब्रैड कूपर के कार्यभार ग्रहण समारोह में भी हिस्सा लिया है।

‘खुद को बॉस समझने वाले अर्थव्यवस्था करना चाहते हैं बर्बाद’…राजनाथ सिंह ने टैरिफ वॉर पर ट्रंप को सुनाई खरी-खरी: कहा – भारत को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर पर तीखा हमला बोला है। राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग खुद को दुनिया का बॉस समझ बैठे हैं। ये लोग भारत की तेज विकास गति से नाराज हैं लेकिन कोई अब भारत को नहीं रोक सकता है।

टैरिफ वॉर पर राजनाथ सिंह का करारा वार

मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित एक कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा, “कुछ लोगों को भारत का तेज़ गति से होता हुआ विकास रास नहीं आ रहा है। उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है। सबके बॉस तो हम हैं फिर भारत कैसे आगे बढ़ रहा है।”

उन्होंने कहा, “बहुत सारे लोगों द्वारा कोशिश की जा रही है, कुछ ऐसा करें कि भारत में, भारतवासियों के हाथों से जो चीजें तैयार होती हैं। वे दुनिया के देशों में जाएँ तो उन देशों में बनने वाली चीजें महँगी हो जाएँ ताकि दुनिया के लोग उन्हें ना खरीदें। भारत जितनी तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है, दुनिया की कोई ताकत भारत को विश्व की बड़ी शक्ति बनने से रोक नहीं सकती है।”

ट्रंप की टैरिफ धमकियों पर भारत का कड़ा पलटवार

ट्रंप द्वारा शुरू किए गए टैरिफ वॉर और भारत की दी गई रूस से तेल ना खरीदने की धमकी पर भारत ने कड़ा पलटवार किया है। ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा करते हुए रूस से तेल खरीदना बंद करने की माँग की है। ट्रंप की टैरिफ धमकी के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की है। भारत ने दिखा दिया है कि वो किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

ट्रंप के टैरिफ की मार से जूझ रहे ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा से भी पीएम मोदी ने बातचीत की है। लुला दा सिल्वा ने स्पष्ट किया था कि वे ट्रंप से टैरिफ के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं करेंगे। इसके अलावा वह पीएम मोदी चीन भी जाने वाले हैं और ट्रंप के टैरिफ के जवाब में रूस-भारत-चीन (RIC) सहयोग को फिर से मजबूत करने की बातचीत चल रही है।

पीएम मोदी कह चुके हैं ‘कीमत चुकाने’ की बात

पीएम मोदी ने टैरिफ धमकियों पर सीधे बयान नहीं दिया है। वह परोक्ष रूप से डेयरी उद्योग को लेकर अमेरिका से अटके व्यापार समझौते पर स्पष्ट संदेश दे चुके हैं। वह खुद ‘बहुत बड़ी कीमत चुकाने‘ की बात कह चुके हैं।

पीएम मोदी ने एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा था, “किसानों का हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। और मुझे पता है कि इसके लिए मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं तैयार हूँ।”

भारतीय और अमेरिकी अधिकारी व्यापार समझौते के लिए कई दौर की बैठकें कर चुके हैं और 15% टैरिफ पर यह समझौता होने की उम्मीद थी। भारत ने सिर्फ अमेरिका की शर्तों पर यह समझौता करने से इनकार कर दिया है।

ट्रंप बार-बार यह दावा भी करते रहे हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष को उन्होंने रुकवाया था। हालाँकि, भारत यह बार-बार नकारता रहा है और भारत ने कई बार यह साफ किया है कि पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO से बात कर संघर्ष रोकने का अनुरोध किया था। इसे लेकर भी ट्रंप झल्लाए हुए हैं।

‘फर्जी दस्तावेज’ के आधार पर 2 बार वोटिंग के दावे पर राहुल गाँधी को चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए आरोपों के माँगे सबूत: 1 पते पर 80 वोटर वाला मामला भी निकला फेक

कॉन्ग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी चुनाव आयोग के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘फर्जी दस्तावेज’ दिखाने को लेकर आयोग के निशाने पर आ गए हैं। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने राहुल गाँधी को नोटिस जारी करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े कागजात माँगे हैं।

राहुल गाँधी ने दिखाए फर्जी दस्तावेज!

7 अगस्त 2025 को राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया था कि शकुन रानी नामक एक मतदाता की आईडी से दो बार वोट डाला गया है। राहुल गाँधी ने 70 वर्षीय शकुन रानी ने दो बार वोट बनवाने के लिए अप्लाई करने का दावा भी किया था। राहुल ने कहा, “इन्होंने (शकुन रानी) दो बार वोट किया है। पता नहीं इन्होंने किया है या किसी और ने किया है लेकिन इस ID कार्ड पर दो बार वोट लगा है। जो टिक लगी है वो पोलिंग बूथ के अधिकारी की है।”

राहुल गाँधी ने जो स्लाइड अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई थी, उसमें बूथ नंबर 341 पर शकुन के दो बार वोट डालने का दावा था। इस स्लाइड में स्रोत के तौर पर ‘BLA द्वारा मार्क किया गया इलेक्टोरल रोल’ लिखा गया था।

राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई गई स्लाइड

कर्नाटक के CEO ने राहुल गाँधी के इस दावे पर आपत्ति जताते हुए इसे जाँच में गलत बताया गया है। CEO द्वारा जारी किए गए नोटिस में कहा गया है, “जाँच करने पर शकुन रानी ने बताया कि उन्होंने केवल एक बार मतदान किया है, 2 बार नहीं, जैसा कि आपने (राहुल गाँधी) आरोप लगाया है।”

CEO ने कहा, “हमारे ऑफिस द्वारा की गई शुरुआती जाँच से यह भी पता चला है कि आपके द्वारा प्रजेंटेशन में दिखाया गया टिक मार्क किया गया दस्तावेज मतदान अधिकारी द्वारा जारी किया गया दस्तावेज नहीं है।”

CEO ने राहुुल गाँधी से वो सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने की माँग की है, जिनके आधार पर शकुन रानी या किसी अन्य शख्स के दो बार वोट करने की बात उन्होंने कही है।

मतदाता सूची पर भी राहुल गाँधी का फर्जी दावा

राहुल गाँधी ने रविवार (10 अगस्त 2025) को वोटर चोरी से जुड़ा एक कैंपेन लॉन्च किया। राहुल गाँधी ने X पर इसका वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “चुनाव आयोग से हमारी मांग साफ है-पारदर्शिता दिखाएं और डिजिटल मतदाता सूची सार्वजनिक करें।”

चुनाव आयोग ने कुछ ही देर में राहुल गाँधी की इस माँग का फैक्ट-चेक कर दिया। चुनाव आयोग ने कहा, “चुनाव से पहले प्रारूप एवं अंतिम मतदाता सूची की डिजिटल तथा भौतिक प्रतियाँ समस्त राजनीतिक दलों, जिनमें कॉन्ग्रेस (INC) भी सम्मिलित है, को उनके हस्ताक्षर के साथ विधिवत रूप से प्रदान की जाती हैं।”

चुनाव आयोग ने कहा, “यह दावा कि राजनीतिक दलों को मतदाता सूची की डिजिटल प्रतियाँ प्रदान नहीं की जातीं, पूरी तरह से झूठा और पूरी तरह भ्रामक है।”

राहुल गाँधी का एक पते 80 वोटर वाला दावा भी नहीं निकला सच

राहुल गाँधी ने एक मकान संख्या पर 80 फर्जी वोटरों का आरोप लगाते हुए जो दावा किया था उसकी भी अब पोल खुल गई है। महादेवपुरा के जिस मुनीयप्पा रेड्डी गार्डन क्षेत्र में यह मकान स्थित वहाँ के BLO मुनीरत्न ने न्यूज चैनल से बातचीत में बताया है कि यहाँ कोई डुप्लीकेसी का मामला नहीं है।

इस घर में अधिकांश लोग किराए पर रहने आते हैं और बीते 14 वर्षों से कोई स्थाई रूप से इसमें नहीं रहा है। पते के प्रमाण के लिए लोग रेंट एग्रीमेंट करवाकर वोटर आईडी बनवाते हैं लेकिन फिर मकान को छोड़ देते हैं।

मुनीरत्न ने कहा कि लोग रजिस्टर्ड हैं और जो अब कहीं और बाहर रह रहे हैं। पहले जिन लोगों का नाम यहाँ से रजिस्टर्ड था उनकी सूची बनाकर चुनाव आयोग को दे दी गई है और उसे हटा दिया जाएगा।

चुनाव आयोग ने राहुल से की है माफी की माँग

चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा है कि इससे आयोग की निष्पक्षता पर गलत सवाल उठाए जा रहे हैं। आयोग ने जोर देकर कहा है कि लोकतंत्र की प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए नेताओं को अपने बयान हमेशा तथ्य और ठोस सबूतों के साथ देना चाहिए।

आयोग ने यह भी कहा कि अगर राहुल गाँधी के पास अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई आधिकारिक दस्तावेज या साक्ष्य है, तो वे तुरंत उसे प्रस्तुत करें नहीं तो उन्हें पूरे देश से माफी माँगनी चाहिए।

जब से वित्त मंत्री ने गोल्ड से इंपोर्ट ड्यूटी घटाई, तब से केरल की ब्लैक इकॉनमी डगमगाई: काला धन घटने से रियल एस्टेट में छाई मंदी, अब 1Kg सोने पर सिर्फ ₹3 लाख मुनाफा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई 2024 में देश में सोने के आयात पर 15% से घटाकर 6% शुल्क लगाने का फैसला लिया। इसका सबसे अधिक असर केरल को हुआ, जहाँ सालों से सोने के अवैध कारोबार के जरिए पैरलल इकॉनमी मजबूत हो रही थी। पैरलल इकॉनमी का मतलब है कि पैसों का लेन-देन तो हो रहा होता है, लेकिन वो किसी सिस्टम में दर्ज नहीं होता। इसी पैरलल इकॉनमी से निकले मनी को ब्लैक मनी भी कहते हैं।

बिजनेस वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के चार अतंरराष्ट्रीय हवाई अड्डे- तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, कोझिकोड और कन्नुर खाड़ी देशों से सोने की तस्करी करने वाले मुख्य रास्ते हैं। यहाँ तक कि केरल की सोने की तस्करी का गढ़ माने जाने वाले दुबई से भी कनेक्शन मिले। केरल इन खाड़ी देशों से संबंध बेहतर करने के चलते ही ‘तस्करों का स्वर्ग’ बनता गया।

साल 2020 से 2023 तक केरल में 3,100 से अधिक सोना तस्करी के मामले सामने आए, इन सभी मामलों में करीब 200 से 400 टन अवैध सोना बरामद किया गया। लेकिन इससे भी हैरानी की बात यह है कि केरल में हर साल ₹1,31,586 करोड़ (15 अरब डॉलर) की कीमत के सोने की तस्करी होती थी, जो कि जब्त किए गए सोने के मुकाबले काफी कम मानी गई।

यह सोना तस्करी का कारोबार तब तक बढ़ता चला गया जब तक सोने के आयात में अच्छा शुल्क था। उस समय एक किलो सोने में करीब ₹9 लाख का मुनाफा होता, जिसमें से कुछ कैरियर शुल्क भी दिया जाता था। इस मुनाफा ने केवल तस्करों को अमीर नहीं बल्कि केरल की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (जिसका कागजों में कोई आकड़ा नहीं है) को भी गति दी।

इस काले धन से बिना हिसाब-किताब के रीयल एस्टेट डील, ज्वैलरी नेटवर्क और हवाला कारोबार चलाया गया। इससे जुड़ा एक मामला भी सामने आया था, जिसमें एक ज्वैलरी चेन के 4000 निवेशक थे, जो SEBI की सीमा का उल्लंघन है। ऐसी कंपनियाँ मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराध में भी सक्रिय रहती हैं।

लेकिन वित्त मंत्री ने जब से सोने के आयात पर शुल्क घटाने का फैसला लिया है, तभी से यह पूरी व्यवस्था ढह गई है। एक किलों पर मुनाफा घटकर अब करीब ₹3 लाख रह गया है, कैरियर की फीस भी कम हो गई और यहाँ तक की खाड़ी देशों से केरल आने वाला सोना भी अब कम हो गया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने भी इस फैसले के बाद जब्तियों में तेज गिरावट की पुष्टि की है।

एयर ट्रैफिक के आँकड़े बताते हैं कि खाड़ी देशों से आने वाले यात्रियों की संख्या भी भारत में कम हुई है। यहाँ तक कि गल्फ एयर ने डिमांड कम होने के चलते साल 2025 में कालीकट की उड़ानें बंद कर दीं। इससे साफ है कि तस्करी के तार टूटने लगे हैं।

हालाँकि, इससे कानूनी सोने का व्यापार जरूर बढ़ा और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने साल 2024 की तीसरी तिमाही में हर साल 18% वृद्धि दर्ज की। लेकिन अवैध नगदी के अचानक गायब होने से केरल की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा। 2024-25 में प्रदेश की GSDP ग्रोथ 6.19% रह गई, जो दक्षिण भारत में सबसे कम थी। रीयल एस्टेट, निर्माण और लग्जरी रिटेल जैसे सभी क्षेत्रों में गिरावट साफ दिखने लगी।

इस मंदी ने साफ कर दिया केरल की अर्थव्यवस्था अब तक काले धन पर निर्भर थी। केरल में प्रॉपर्टी डील 18% घटी, लग्जरी हाउसिंग की कीमतें 25% तक नीचे आईं और निर्माण क्षेत्र की वृद्धि राष्ट्रीय औसत से पीछे रह गई। खाड़ी से आने वाले रेमिटेंस में भी 2024 में 10% की कमी आई, जिससे प्रदेश में काला धन लाने वाले कानूनी और अवैध सोर्स दोनों की कमजोर हो गए।

यह कदम महज एक टैक्स सुधार नहीं था बल्कि एक रणनीतिक प्रहार था, जिसने आतंकवाद फंडिंग और राजनीतिक भ्रष्टाचार से जुड़े एक अपराधिक नेटवर्क को कमजोर कर दिया। लेकिन इस कहानी का राजनीतिक पहलू अभी भी जीवित है। साल 2020 के केरल गोल्ड स्मगलिंग केस की मुख्य आरोपितों में से एक स्वप्ना सुरेश ने 2023 में सनसनीखेज दावा किया कि उन्हें मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम केस से हटाने के लिए 30 करोड़ रुपए की पेशकश हुई थी।

एक फेसबुक लाइव ब्रॉडकास्ट में स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया कि खुद मुख्यमंत्री ने उन्हें देश छोड़ने की धमकी दी और CPM के प्रदेश सचिव गोविंदन मास्टर के कहने पर पार्टी के लोग उन्हें डराने-धमकाने लगे। यहाँ तक कि उन्हें हरियाणा या जयपुर भेजने की योजना बनाई गई थी, जिसमें सरकार की तरफ से फ्लैट और फर्जी पासपोर्ट की भी व्यवस्था की जा रही थी।

स्वप्ना ने कई बार सीएम विजयन और उनके परिवार के सदस्यों और तीन कैबिनेट मंत्रियों के नाम हवाला और तस्करी से जुड़े मामलों में लिए हैं। उन्होंने पहले भी गवाही में कहा था कि 2016 में दुबई में मौजूद सीएम को भेजे जा रहे नगदी से भरे बैग को एयरपोर्ट स्कैनिंग में पकड़ा गया था, जो कांसुलर प्रोटोकॉल के तहत भेजा जा रहा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि तब के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एम. शिवशंकर के निर्देश पर UAE कॉन्सुलेट से मेटल से भरे बिरयानी के बर्तन मुख्यमंत्री के सरकारी आवास क्लिफ हाउस में ले जाए गए।

ये आरोप 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए थे और 2024 में फिर से चर्चा में आ गए, जब केंद्र सरकार के इस राजकोषीय प्रहार ने उस आर्थिक जड़ को काट दिया, जिस पर यह पूरा अवैध साम्राज्य खड़ा था।