टैरिफ विवाद के बीच भारत पर अलग ढंग से व्यापार का दबाव बनाने के लिए ट्रंप ने नया दांंव चला है। पहले जहाँ खबर आई थी कि ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी एजेंसी USAID ने भारत में मतदान बढ़ाने के लिए 175 करोड़ रुपये दिए। लेकिन नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
अमेरिकी दूतावास ने भारत के विदेश मंत्रालय को बताया कि 2014 से 2024 तक USAID ने भारत में चुनाव या मतदान से जुड़ा कोई काम नहीं किया और न ही ऐसी कोई रकम दी या ली और न ही भारत में मतदान से जुड़ी कोई गतिविधि की।
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— Sidhant Sibal (@sidhant) August 21, 2025
US embassy in Delhi contradicts Trump's $21m voter funding claim
US Embassy tells India's foreign ministry that USAID/India did not receive/provide funding of $21 m for voter turnout in India (FY 2014 to 2024) nor implemented any voter turnout-related activities https://t.co/ByUadmf11w pic.twitter.com/aIL9YCIx0l
फरवरी 2025 में विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी विभाग DOGE (Department of Government Efficiency) की एक समीक्षा का हवाला देते हुए दावा किया कि USAID दुनिया भर में चुनाव और मतदाता संबंधी परियोजनाओं को फंड कर रहा है।
ट्रंप ने खास तौर पर कहा कि भारत को भी इसमें शामिल किया गया था और 2.1 करोड़ डॉलर (174.3 करोड़ रुपए) मतदाता संख्या बढ़ाने के लिए रखे गए थे। इस दावे से नई दिल्ली में तुरंत चिंता बढ़ी और भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिका से पूरे मामले की विस्तृत जानकारी माँगी।
28 फरवरी 2025 को विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से पिछले दस सालों में भारत में चलाए गए सभी USAID कार्यक्रमों की पूरी जानकारी देने को कहा। मंत्रालय ने खर्च का विवरण, सहयोगी संगठनों की जानकारी और यह भी पूछा कि क्या किसी तरह की मतदाता जुटाने से जुड़ी गतिविधियाँ हुई थीं।
इस पर अमेरिकी दूतावास ने 2 जुलाई 2025 को जवाब देते हुए आंकड़े सौंपे। दूतावास ने साफ किया कि सभी कार्यक्रम केवल भारत सरकार के साथ किए गए सात साझेदारी समझौतों के तहत ही चलाए गए हैं। ये कार्यक्रम मुख्य रूप से विकास सहयोग, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और शासन सुधार से जुड़े थे, न कि मतदान या चुनाव से।
अमेरिकी दूतावास ने साफ कहा कि USAID भारत ने 2014 से 2024 के बीच भारत में मतदान के लिए न तो 21 मिलियन डॉलर (175 करोड़ रुपए) लिए और न ही दिए और न ही कोई मतदान संबंधी गतिविधि चलाई।
29 जुलाई 2025 को दूतावास ने एक और पत्र भेजकर इस रुख को दोहराया और विदेश मंत्रालय को बताया कि बाइडेन प्रशासन के फैसले के बाद भारत में USAID के सभी काम 15 अगस्त 2025 तक बंद हो जाएँगे।
इसके बाद 11 अगस्त 2025 को दूतावास ने आर्थिक मामलों के विभाग को लिखे पत्र में पुष्टि की कि भारत के साथ किए गए सभी सात साझेदारी समझौते समाप्त कर दिए गए हैं। यह बयान ट्रंप के उन आरोपों के बीच अहम है, जिनमें उन्होंने अमेरिकी विदेशी सहायता के राजनीतिक इस्तेमाल की बात कही थी। ट्रंप के दावे जनवरी 2025 के कार्यकारी आदेश 14169 के बाद सामने आए थे, जिसके तहत विदेशी सहायता कार्यक्रमों की बड़ी समीक्षा शुरू की गई थी।
हालाँकि DOGE ने दुनिया भर में चुनाव और राजनीतिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने वाली CEPPS परियोजनाओं के लिए USAID द्वारा दिए गए 486 मिलियन डॉलर(4,033.8 करोड़ रुपए) के फंड को रद्द करने का ऐलान किया था, लेकिन नई दिल्ली स्थित दूतावास ने साफ कर दिया कि भारत को इसमें से कुछ भी नहीं मिला।
इसके साथ ही दूतावास ने 2022, 2023 और 2024 के लिए कार्यक्रमों और लाभार्थियों का पूरा ब्यौरा भी जारी किया। अधिकारियों ने फिर जोर देकर कहा कि भारत में USAID की सारी गतिविधियाँ विकास से जुड़ी और पारदर्शी हैं और उनका चुनाव या राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
अमेरिकी दूतावास ने यह भी बताया कि 15 अगस्त 2025 तक USAID के सारे काम भारत में बंद हो चुके हैं। ट्रंप का दावा गलत साबित होने से उनकी विश्वसनीयता पर फिर सवाल उठे हैं।


