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नक्सलियों के ‘सुरक्षा कवच’, गाँधी परिवार के ‘वफादार’… कॉन्ग्रेस ने जिन्हें बनाया उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार, जानिए उन सुदर्शन रेड्डी पर गृह मंत्री शाह ने क्यों उठाए सवाल: पढ़ें चिट्ठा

रिटायर्ड जस्टिस बालकृष्ण सुदर्शन रेड्डी को विपक्षी INDIA गठबंधन ने 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। इस गठबंधन में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राजद, सपा, डीएमके, और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल हैं। इस चुनाव में उनका मुकाबला NDA के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन से होगा।

केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ रही INDIA गठबंधन ने रेड्डी को एक न्यायप्रिय, निष्पक्ष और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े चेहरे के तौर पर पेश किया है। हालाँकि जस्टिस रेड्डी अपने कार्यकाल के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने फैसलों से कॉन्ग्रेस के प्रति अपनी वफादारी को साफ तौर पर जाहिर कर दिया है।

गृह मंत्री ने उजागर की असलियत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी पर तीखा हमला बोला।,उन्होंने जस्टिस रेड्डी के पुराने न्यायिक निर्णयों के जरिए वामपंथी उग्रवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया।

केरल में एक कार्यक्रम में बोलते हुए गृह मंत्री ने कहा, “विपक्ष (कॉन्ग्रेस) के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने सलवा जुडूम पर ऐसा फैसला दिया जो नक्सलवाद के समर्थन में था। अगर यह फैसला न दिया गया होता, तो 2020 तक उग्रवाद समाप्त हो चुका होता।”

अमित शाह ने आगे कहा, “केरल ने नक्सलवाद की पीड़ा झेली है और उग्रवाद का दंश सहा है। केरल की जनता निश्चित रूप से देखेगी कि कैसे वामपंथियों के दबाव में कॉन्ग्रेस ने ऐसा उम्मीदवार चुना जिसने सुप्रीम कोर्ट जैसे मंच का इस्तेमाल वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद को समर्थन देने के लिए किया।”

गृह मंत्री के बयान पर सुदर्शन रेड्डी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पीटीआई भोषा से बात करते हुए रेड्डी ने कहा कि सलवा जुडूम पर फैसला उनका अपना नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट का था। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह गृह मंत्री के साथ बहस नहीं करना चाहते।

जस्टिस के तौर पर विवादित रहा सफर

जस्टिस रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को तेलंगाना के रंगा रेड्डी ज़िले में एक किसान परिवार में हुआ। उनका न्यायिक करियर 1995 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर शुरू हुआ। इसके बाद वे गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। 2007 से 2011 तक भारत के सर्वोच्च न्यायालय में बतौर जस्टिस अपनी सेवा भी दी।

जस्टिस रेड्डी के कार्यकाल में कई अहम फैसले आए, जिनमें मानवाधिकार, प्रशासनिक पारदर्शिता और सामाजिक न्याय से जुड़े विषय शामिल थे। लेकिन उनके कुछ ऐसे भी फैसलों रहे जिन पर विवाद हुआ और उसकी आलोचना आज भी होती आ रही है। आइए जानते हैं उन फैसलों के बारे में।

सलवा जुडूम को भंग करने का फैसला

छ्त्तीसगढ़ में नक्सलवादल को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने ‘सलवा जुडूम’ अभियान चलाया था। खास बात ये है कि ये अभियान छत्तीसगढ़ की तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार के समर्थन से ही चलाया गया था। इसका उद्देश्य राज्य में नक्सली हिंसा को रोककर शांति स्थापित करना था। इस अभियान की शुरुआत जून 2005 में कॉन्ग्रेस नेता महेंद्र कर्मा ने की थी।

कई वर्षों तक जनजातीय क्षेत्रों में हिंसा कर अपना गढ़ बना चुके नक्सलियों को खत्म करने में जनजातीय लोगों के हौसलों को सैन्य और पुलिस समर्थन भी मिलने लगा था। लेकिन जस्टिस रेड्डी और जस्टिस एस.एस. निज्जर की पीठ ने अपने फैसले में सलवा जुडूम अभियान को असंवैधानिक करार दिया।

5 जुलाई 2011 ने इसे भंग करते हुए पीठ ने फैसला में कहा कि सरकार गरीब आदिवासियों को बंदूक थमा कर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। जस्टिस रेड्डी के इस फैसले ने नक्सलियों के खिलाफ जंग को स्पष्ट तौर पर कमजोर कर दिया।

भोपाल गैस त्रासदी मामला

1984 की त्रासदी में हजारों लोगों की मौत हुई थी। CBI ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर कर पुराने फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने यूनियन कार्बाइड और वॉरेन एंडरसन पर गंभीर आरोप लगाने की माँग की थी।

जस्टिस रेड्डी उस पाँच सदस्यीय पीठ का हिस्सा थे जिसने याचिका खारिज कर दी। इसका फैसला मई 2012 में आया था। इस फैसले से पीड़ितों को न्याय मिलने का एक मौका तो गया ही पर साथ ही जस्टिस रेड्डी और पीठ ने कॉन्ग्रेस की छत्रछाया में पल रही अमेरिकी कंपनी को भी साफ तौर पर बचाने का काम किया।

अर्मी कॉलेज की सीटों में आरक्षण मामला

दिल्ली स्थित आर्मी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (ACMS) एक प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान है, जिसकी स्थापना भारतीय सेना द्वारा की गई थी। इस कॉलेज में MBBS की सीटें उपलब्ध हैं और लंबे समय से यह परंपरा रही है कि यहाँ प्रवेश केवल सेना के कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मियों के बच्चों को ही दिया जाता है।

इस नीति के खिलाफ कुछ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि कॉलेज सार्वजनिक संसाधनों और रक्षा मंत्रालय के अधीन आता है, इसलिए इसकी सीटें सिर्फ एक वर्ग के लिए आरक्षित करना अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।

जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया कि ACMS की सभी सीटें केवल सैन्यकर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षित रहेंगी। फैसले में यह भी कहा गया कि चूंकि यह संस्थान रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है और इसका संचालन सेना की आवश्यकताओं के अनुरूप होता है, इसलिए इसकी प्रवेश नीति को संवैधानिक रूप से वैध माना जा सकता है।

इसके अलावा रेड्डी ने 4 जुलाई 2011 को केंद्र सरकार को काले धन पर ढिलाई बरतने के लिए फटकार लगाई थी और एक विशेष जाँच टीम (SIT) गठित करने का निर्देश दिया। यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कदम माना गया था। लेकिन अब कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाला INDIA गठबंधन अब उसी व्यक्ति को अपना उम्मीदवार बना रहा है। इससे सवाल उठना तो बनता है कि आखिर ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार के तौर पर कॉन्ग्रेस ने क्यों खड़ा किया?

क्यों किया गया जस्टिस रेड्डी का चयन?

रेड्डी की उम्मीदवारी को विपक्ष ने न्यायप्रिय और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा बताया है। लेकिन यह चयन वैचारिक कम और रणनीतिक अधिक है। INDIA गठबंधन के तहत DMK की माँग थी कि उम्मीदवार दक्षिण भारत से हो वहीं, TMC चाहती थी कि चेहरा गैर-राजनीतिक हो, और कॉन्ग्रेस को एक ऐसा व्यक्ति चाहिए था जिसकी छवि बेदाग हो। रेड्डी इन तीनों शर्तों पर खरे उतरते हैं।

इसके साथ ही जस्टिस बालकृष्ण सुदर्शन रेड्डी का नाम उम्मीदवार के तौर पर लाना राजनीतिक गलियारों में अपेक्षित नहीं था। जाहिर तौर पर कॉन्ग्रेस उनके जरिए संविधान की रक्षा, संघ विचारधारा के खिलाफ वैचारिक लड़ाई जैसे विषय पर बात करके और दक्षिण भारत के वोट बैंक को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है।

उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के लिए उनका चयन एक गंभीर सवाल उठाता है। जैसे कि इस पद के लिहाज से क्या क्या विपक्ष ने एक निष्पक्ष न्यायाधीश को चुना है या ढोंग करके एक ऐसा चेहरा लोगों के सामने पेश किया जो उनके वैचारिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधता है?

कब होगा उपराष्ट्रपति के लिए चुनाव

संसद में 21 जुलाई 2025 को मानसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दिया। इशके बाद नए उपराष्ट्रपति को लेकर दोबारा चुनाव प्रक्रिया की जानी है।

उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान 9 सितंबर 2025 को होना निर्धारित किया गया है और उसी दिन मतगणना भी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त 2025 थी, जबकि प्रत्याशी अपना नाम 25 अगस्त तक वापस ले सकते हैं।

उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सांसदों द्वारा किया जाता है। यह चुनाव संविधान के अनुच्छेद 64 और 68 के तहत संचालित होता है और 1952 के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम के अनुसार चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचित किया जाता है।

₹12 करोड़ कैश, ₹6 करोड़ का सोना, 10 किलो चाँदी और विदेशी मुद्रा…. ED के छापे के बाद कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक गिरफ्तार: अवैध सट्टेबाजी मामले में एक्शन, दुबई से मिले लिंक

कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र उर्फ पप्पी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गंगटोक (सिक्किम) से गिरफ्तार कर लिया है। कॉन्ग्रेस विधायक पर अवैध ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी मामले में कार्रवाई की गई है।

साथ ही ED ने कॉन्ग्रेस विधायक के ठिकानों पर छापेमारी कर 12 करोड़ रुपए नगद, 6 करोड़ रुपए सोने के आभूषण, लगभग 10 किलोग्राम चाँदी और 4 वाहन बरामद किए गए हैं। नगद में एक करोड़ विदेशी मुद्रा भी मिली है। इसके अलावा ED ने 17 बैंक खाते और 2 बैंक लॉकर भी सीज किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दो दिन से ED द्वारा देशभर में 31 ठिकानों पर छापेमारी के बाद की गई है। 22 और 23 अगस्त 2025 को ED ने चित्रदुर्ग में 6 स्थानों, बेंगलुरु में 10, हुबली में 1, मुंबई में 2, जोधपुर में 3, गोवा में 8 और गंगटोक में छापेमारी की।

इनमें बिग डैडी कसिनो, ओशियन रिवर कसिनो, पप्पीज कसिनो प्राइड, ओशियन 7 कसिनो और पप्पीज कसिनो गोल्ड भी शामिल हैं। ED को ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिंक दुबई से भी मिले हैं। ED के अनुसार, कॉन्ग्रेस विधायक केसी वीरेंद्र King567 और Raja567 जैसे नामों से कई अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म चला रहा था।

इन प्लेटफॉर्म को दुबई की कंपनी Diamond Softech, TRS Technologies और Prime9Technologies के माध्यम से विधायक का भाई केसी थिप्पेस्वामी संभालता था। ये कंपनियाँ बेटिंग प्लेटफॉर्म को कॉल सेंटर सेवा उपलब्ध कराती हैं।

ED के मुताबिक, केसी वीरेंद्र एक जमीनी कसिनों को पट्टे पर लेने के लिए बागडोगरा होते हुए गंगटोक गए थे। छापेमारी के दौरान उनके खिलाफ सबूत मिले, जिसके बाद गंगटोक से उन्हें गिरफ्तार किया गया है। इसके बाद गंगटोक की कोर्ट में उन्हें पेश कर बेंगलुरु कोर्ट में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड ली गई। मामले में आगे की जाँच जारी है।

कौन है केसी वीरेंद्र ?

केसी वीरेंद्र उर्फ पप्पी पेशे से कारोबारी हैं। उन्होंने साल 2023 में कर्नाटक की चित्रदुर्ग विधानसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता। उनके चुनावी हलफनामें में कुल ₹134.9 करोड़ की संपत्ति दर्ज है। इसके अलावा कॉन्ग्रेस विधायक पर 2 अपराधिक मामले दर्ज हैं।

कर्नाटक विधायक सतीश कृष्ण सैल के घर भी हुई थी छापेमारी

केसी वीरेंद्र से पहले कर्नाटक कॉन्ग्रेस विधायक सतीश कृष्ण सैल ED के शिकंजे में आए थे। 14 अगस्त 2025 को ED की छापेमारी में सतीश कृष्ण के घर से ₹1.41 करोड़ नगद मिले थे। इसके साथ उनके और परिवार के बैंक लॉकरों से 6.75 किलो गोल्ड की ज्वेलरी और बिस्किट बरामद किए थे।

यह मामला साल 2010 से जुड़ा हुआ था। मामले में सतीश कृष्ण पर आरोप है कि उन्होंने अन्य कंपनियों और बेलकेरी पोर्ट के अधिकारियों के साथ मिलकर करीब 1.25 लाख मीट्रिक टन आयरन गैरकानूनी तरीके से बाहर भेजा था, जिसकी कुल कीमत ₹86.78 करोड़ बताई गई।

‘भारत रेड लाइन्स से नहीं करेगा समझौता’: जयशंकर की टैरिफ वॉर पर अमेरिका को दो टूक, बोले- तेल खरीदने पर हमें निशाना बनाने वाली दलीलें चीन पर क्यों नहीं होतीं लागू

अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ को लेकर जारी विवाद पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अहम टिप्पणियाँ की हैं। जयशंकर ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी ‘रेड लाइन’ से कभी समझौता नहीं करेगा, चाहे बात किसानों के हितों की हो या रणनीतिक स्वायत्तता की। अमेरिका द्वारा लगाए टैरिफ पर जयशंकर ने कहा, “इसे तेल का मुद्दा बताया जाता है लेकिन चीन पर कोई टैरिफ नहीं लगाया गया।”

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के साथ ट्रेड को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “बातचीत अभी भी चल रही हैं लेकिन हमारी कुछ रेड लाइन्स हैं। सबसे अहम है किसानों और छोटे उत्पादकों के हित, यह ऐसा मुद्दा है जिस पर समझौता संभव नहीं है।”

जयशंकर ने अमेरिका पर सवाल उठाते हुए कहा, “इसे तेल का मुद्दा बताया जाता है लेकिन चीन, जो रूस से सबसे बड़ा आयातक है, उस पर कोई टैरिफ नहीं लगाया गया। भारत को निशाना बनाने वाली दलीलें चीन पर क्यों लागू नहीं होतीं?”

इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोप और अमेरिका को लेकर कहा, “अगर आपको भारत से तेल या रिफाइंड उत्पाद खरीदने में समस्या है, तो इसे न खरीदें, लेकिन यूरोप खरीदता है, अमेरिका खरीदता है। अगर पसंद नहीं तो हमसे मत खरीदिए।”

उन्होंने आगे कहा, “यह हास्यास्पद है कि एक व्यापार-समर्थक अमेरिकी प्रशासन के लिए काम करने वाले लोग दूसरों पर व्यापार करने का आरोप लगा रहे हैं।” अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “उनका एक-दूसरे के साथ इतिहास रहा है और अपने इतिहास को नजरअंदाज करने का भी उनका इतिहास रहा है।”

ट्रंप जैसा राष्ट्रपति नहीं देखा: जयशंकर

जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कहा, “अब तक हमने ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं देखा है, जिसने विदेश नीति को वर्तमान राष्ट्रपति की तरह सार्वजनिक रूप से संचालित किया हो। यह अपने आप में एक बदलाव है, जो केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप का दुनिया के साथ व्यवहार करने का तरीका, यहाँ तक ​​कि अपने देश के साथ व्यवहार करने का तरीका पारंपरिक रूढ़िवादी तरीके से बहुत बड़ा बदलाव है।”

इंजीनियर ने किया ₹100 करोड़ का भ्रष्टाचार, छापा पड़ा तो बीवी ने ₹2-3 करोड़ के नोट जलाकर फ्लश में ठूँसे: नाला जाम होने पर पता चली हरकत, पति-पत्नी गिरफ्तार

बिहार के पटना में इंजीनियर विनोद राय के घर छापा पड़ा तो उनकी पत्नी ने रातोंरात 2-3 करोड़ रुपए जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की। विनोद राय, ग्रामीण कार्य विभाग में सुपरीटेंडेंट इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने 100 करोड़ रुपए की संपत्ति होने की सूचना पर उनके घर छापेमारी की।

दरअसल, पटना के भूतनाथ रोड स्थित इंजीनियर के आवास पर EOU गुरुवार (21 अगस्त 2025) को छापा मारने पहुँची थी। इंजीनियर की बीवी बबली राय ने घर में अकेले होने का हवाला देते हुए EOU को अगले दिन आने के लिए बोला। उस दिन EOU पूरी रात घर के बाहर बैठी रही। वहीं उसी रात बबली राय ने सबूत मिटाने की कोशिश की।

इंजीनियर की बीवी ने आधी रात को करीब 2-3 करोड़ रुपए नोट और दस्तावेज जला दिए। उन अधजले नोटों को टॉयलेट में फ्लश करने की कोशिश की लेकिन उससे पाइपलाइन जाम हो गई। अगली सुबह शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को सुबह 5 बजे EOU की टीम लौटी, यहाँ टीम को जलने की दुर्गंध आई।

टीम ने भीतर आकर जाँच करने के लिए कहा तो बबली राय ने फिर अकेले होने का हवाला देकर धमकी दी। कहासुनी के बाद परिचितों को बुलाने पर मानी। करीब आधे घंटे बाद EOU ने घर में प्रवेश किया तो हैरानी वाला दृश्य देखा। टीम को छापेमारी में 12-13 लाख रुपए के नोटों के बंडल मिले। छापेमारी की गई तो टॉयलेट, पानी की टंकी, किचन की नाली के पाइप में भी पैसे छिपाकर रखे हुए थे

इंजनीयिर विनोद कुमार राय गिरफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, EOU ने छापेमारी में 39 लाख रुपए नगद, 10 लाख रुपए के जेवर, 6 लाख रुपए की लग्जरी गाड़ियों और करोड़ों की जमीन के दस्तावेज बरामद किए। EOU के अनुसार इंजीनियर ने 2-3 करोड़ रुपए जलाकर सबूत भी मिटाए हैं।

साथ ही EOU ने घर की निचली मंजिल में छिपे इंजीनियर विनोद कुमार राय को भी गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही इंजीनियर की बीवी बबली पर भी कार्रवाई की गई।

मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से ED करेगी जाँच

EOU की कार्रवाई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जाँच शुरू कर सकती है। इंजीनियर विनोट राय के पास मिले 15 बैंक खातों, 18 जमीन के डीड, बीमा पॉलिसी और बाकी निवेश दस्तावेजों से मनी लॉन्ड्रिंग का शक जताया गया है।

ये सारी संपत्ति इंजीनियर की आय से कहीं अधिक है। EOU के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 100 करोड़ रुपए के करीब है।

5 करोड़ रुपए कैश लेकर भागे थे

विनोद राय ग्रामीण कार्य विभाग के सीतामढ़ी डिवीजन में सुपरीटेन्डेंट इंजीनियर के पद पर तैनात हैं। उनके पास मधुबनी का भी प्रभार है। गुरुवार (21 अगस्त 2025) को इंजीनियर सीतामढ़ी से 5 करोड़ रुपए कैश लेकर निकले थे। इसी सूचना पर EOU ने इंजीनियर का पीछा किया लेकिन वो हाथ नहीं लगे। इसके बाद घर में छापेमारी की।

5 साल में करें 5 यूनिकॉर्न तैयार, ताकि हर साल हों 50 रॉकेट लॉन्च: ‘नेशनल स्पेस डे’ पर PM मोदी ने की स्टार्टअप्स से अपील, कहा- अब चाँद और मंगल तक नहीं रहेंगे सीमित, गहरे अंतरिक्ष में पहुँचेगा भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (23 अगस्त 2025) नेशनल स्पेस डे के मौके पर देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इस बार की थीम ‘आर्यभट्ट से गगनयान तक’ है, जिसमें अतीत का आत्मविश्वास और भविष्य का संकल्प दोनों झलकते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “स्पेस सेक्टर से जुड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि भारत लगातार अंतरिक्ष विज्ञान में नए माइलस्टोन बना रहा है और यह देश के लिए गर्व की बात है।”

उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि भारत अब ‘Astronaut Pool’ तैयार करने जा रहा है और इसमें युवाओं को जुड़ने के लिए आमंत्रित किया। हाल ही में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तिरंगा फहराने वाले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उस पल ने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

पीएम मोदी ने बताया कि भारत सेमी क्राइअजेनिक इंजन (semi-cryogenic engine) और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (electric propulsion) जैसी नई तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। जल्द ही गगनयान मिशन लॉन्च होगा और आने वाले वर्षों में भारत अपना स्पेस स्टेशन भी बनाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, “अभी हम चाँद और मंगल तक पहुँचे हैं। अब हमें गहरे अंतरिक्ष में उन हिस्सों में भी झाँकना है, जहाँ मानवता के भविष्य के लिए कई जरूरी रहस्य छिपे हैं।” प्रधानमंत्री ने स्पेस सेक्टर में हुए सुधारों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि पहले इस क्षेत्र को कई पाबंदियों में बांधा गया था लेकिन अब प्राइवेट सेक्टर के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं। आज देश में 350 से ज्यादा स्टार्टअप्स स्पेस-टेक में काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स से अपील की कि वे अगले 5 सालों में कम से कम 5 यूनिकॉर्न तैयार करें और भारत को उस स्थिति तक ले जाएँ कि हर साल 50 रॉकेट लॉन्च कर सके।

क्यों मनाया जाता है नेशनल स्पेस डे?

भारत ने इतिहास रचते हुए 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफलतापूर्वक उतारा था। इसी मिशन में प्रज्ञान रोवर भी सफलतापूर्वक तैनात किया गया।

इस सफलता के बाद भारत चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा और साउथ पोल पर लैंडिंग करने वाला पहला देश बना। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए सरकार ने 23 अगस्त को ‘नेशनल स्पेस डे’ घोषित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक अब सिर्फ विज्ञान तक सीमित नहीं है बल्कि यह Ease of Living का भी साधन बन गई है।

टैरिफ विवाद पर जिस अमेरिकी अधिकारी ने दिया PM मोदी का साथ, उसके घर पड़ी FBI की रेड: ट्रंप को खरी-खोटी सुनाते हुए जॉन बोल्टन ने कहा था- इससे रूस व चीन के करीब आएगा भारत

अमेरिका में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को एफबीआई (FBI) की टीम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के घर पर छापा मारा। यह छापा ऐसे समय में पड़ा है जब बोल्टन लगातार ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते आ रहे हैं और ट्रैरिफ को लेकर भारत के पक्ष में बोल रहे है। FBI प्रमुख काश पटेल के आदेश पर यह कार्रवाई की गई, जिन्होंने छापे के तुरंत बाद ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा, “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है…”

क्या है पूरा मामला?

यह कार्रवाई सिक्ररेट डॉक्यूमेंट्स की एक पुरानी जाँच से जुड़ी है। बाइडेन प्रशासन ने इस जाँच को बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है। ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए बोल्टन ने अपनी किताब ‘द रूम वेयर इट हैपन्ड’ में कई सिक्ररेट बातें उजागर करने का आरोप लगाया था।

ट्रंप ने यह कहते हुए किताब छपने से रोकने की कोशिश भी की थी कि बोल्टन ने गोपनीयता समझौते का उल्लंघन किया है। हालाँकि, बाइडेन प्रशासन ने उस समय इस मामले को बंद कर दिया था।

वहीं, FBI के मौजूदा चीफ काश पटेल ने इस मामले को फिर से खोला है। उन्होंने छापे से एक दिन पहले पूर्व एफबीआई डायरेक्टर जेम्स कोमी पर भी गोपनीय जानकारियाँ लीक करने का आरोप लगाया था।

बोल्टन और ट्रंप के बीच मतभेद

जॉन बोल्टन लगातार ट्रंप की विदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर शुल्क लगाने के ट्रंप के फैसले को गलत बताया।

बोल्टन ने कहा कि रूस से तेल खरीदने के लिए केवल भारत पर शुल्क लगाना एक ‘गलती‘ है। उन्होंने कहा कि चीन भी रूस से तेल खरीदता है, लेकिन उस पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया। बोल्टन के अनुसार, ट्रंप के इस कदम से अमेरिका ने भारत को छोड़ दिया है और इससे भारत रूस और चीन के करीब जा सकता है।

बोल्टन का मानना है कि ट्रंप की नीतियों में ‘रणनीतिक सोच की कमी’ है, जिससे भारत रूस के करीब जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के रूस पर लगे प्रतिबंधों से भारत को रूसी तेल खरीदने से कानूनी तौर पर कोई रोक नहीं है।

यह छापा ऐसे समय में पड़ा है जब भारत रूस और चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने का न्योता दिया है। इसके अलावा, वह चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी शामिल होने वाले हैं।

कर्नाटक के धर्मस्थल से बेटी के लापता होने का दावा करने वाली महिला अपने बयान से पलटी: कहा- पूरी कहानी फर्जी थी, दो लोगों ने जबरन दिलवाया था बयान

कर्नाटक के एक धर्मस्थल में सामूहिक दफन मामले के बाद अपनी बेटी के गायब होने का दावा करने वाली महिला ने अपनी कहानी को झूठा बताया है। सुजाता भट्ट नामक महिला ने दावा किया था कि उनकी बेटी अनन्या भट्ट 2003 में धर्मस्थल यात्रा के दौरान लापता हो गई थी।

एक यूट्यूब चैनल से बात करते हुए सुजाता ने कहा कि उसे यह झूठा दावा करने के लिए गिरीश मत्तणावर और टी जयन्ती ने उकसाया था। उन्होंने बताया, “यह सच नहीं है। कभी कोई अनन्या भट्ट नाम की बेटी थी ही नहीं। तस्वीरें भी नकली थीं। सबकुछ पूरी तरह से फर्जी था।”

जब पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, तो सुजाता ने कहा, “कुछ लोगों ने मुझे ऐसा कहने को कहा। यह सब जमीन के विवाद की वजह से हुआ। यही एक कारण था।”

सुजाता के मुताबिक, यह विवाद उनके नाना की जमीन को लेकर था, जो कथित रूप से धर्मस्थल मंदिर प्रशासन ने ले ली थी। उन्होंने कहा, “मैंने सिर्फ यह पूछा था कि मेरे नाना की जमीन मेरी मंजूरी के बिना कैसे दे दी गई।” उन्होंने यह भी साफ किया कि इस पूरे मामले में किसी ने उनसे पैसे नहीं माँगे और न ही उन्होंने किसी से पैसे लिए।

यह बयान पहले के दावे से बिल्कुल उलटा है। इससे पहले पुलिस को दिए अपने बयान में उन्होंने कहा था कि उनकी 18 साल की बेटी अनन्या मेडिकल की छात्रा थी, वह मई 2003 में धर्मस्थल गई थी और वहीं से गायब हो गई।

उन्होंने यह भी दावा किया था कि जब उन्होंने बेटी की खोज शुरू की तो उन्हें अगवा कर लिया गया और धर्मस्थल न लौटने या सार्वजनिक रूप से घटना के बारे में कुछ न कहने की चेतावनी दी गई। उनका कहना था कि अगवा करने के बाद उन्हें बेरहमी से पीटा गया, जिससे वह कोमा में चली गई थी। बाद में उन्हें बेंगलुरु के एक अस्पताल में इलाज के बाद होश आया।

अब वह इन सभी बातों से पीछे हट गई हैं और जनता से माफी माँग रही हैं। उनका कहना है, “मैं कर्नाटक की जनता से, धर्मस्थल के भक्तों और पूरे देश से माफी माँगती हूँ।” मामले की जाँच कर रही विशेष जाँच टीम (SIT) ने उन्हें शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को बेल्थंगडी कार्यालय में पेश होने का नोटिस भेजा था।

बता दें कि यह मामला तब सामने आया था जब एक सफाईकर्मी ने चौंकाने वाला दावा किया कि उसे 1998 से 2014 के बीच धर्मस्थल में कई जगहों पर सैकड़ों शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। यह सफाईकर्मी भगवान मंजूनाथ मंदिर में काम करता था और उसने 3 जून 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

सफाईकर्मी ने अपनी शिकायत में बताया था कि जिन शवों को वह दफनाता था, उनमें कई महिलाएँ और नाबालिग लड़कियाँ थीं, जिनका यौन शोषण किया गया था। हालाँकि, इसके बाद कई जगहों पर खुदाई की गई लेकिन ज्यादातर जगहों से कोई मानव अवशेष नहीं मिले थे। सिर्फ नेत्रवती नदी के पास एक जगह से कुछ हड्डियाँ मिलीं थीं जो पुरुषों की बताया गई थीं।

इसी के बाद सुजाता भट्ट का भी बयान आया था कि उनकी बेटी भी धर्मस्थल से ही लापता हुई है। हालाँकि, उनके हालिया बयान ने पूरे केस को ही उलट-पलट दिया है।

पत्रकार शिव अरूर के खिलाफ कॉन्ग्रेस ने दर्ज कराई FIR: राहुल गाँधी के वोट चोरी के आरोपों का किया था पर्दाफाश, करण थापर के लिए रोने वाला एडिटर्स गिल्ड हुआ ‘खामोश’

भारत में पत्रकारों पर कानूनी कार्रवाई को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। NDTV के पत्रकार शिव अरूर ने राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ वाले आरोपों का पर्दाफाश किया था। ये बदनामी कॉन्ग्रेस को हजम नहीं हुई और उन्होंने पत्रकार पर पार्टी को बदनाम करने के लिए पत्रकार शिव पर आपराधिक केस दर्ज करा दिया। सबसे दिलचस्प बात तो ये है कि इस मामले पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने चुप्पी साध रखी है। ये ही एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया उस समय तुरंत सामने आया था, जब करन थापर और सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ असम में गिरफ्तारी का वारंट जारी हुआ था।

शिव अरूर पर क्या है आरोप?

हाल ही में, NDTV पर प्रसारित होने वाले शो ‘इंडिया मैटर्स’ में पत्रकार शिव अरूर ने 19 अगस्त 2025 को एक रिपोर्ट दिखाई थी। इस रिपोर्ट में कथित तौर पर राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पर ‘वोट चोरी’ का पर्दाफाश किया गया था। शिव अरूर ने शो में जिस डेटा का जिक्र किया था वो डेटा एक सर्वे कंपनी CSDS के संजय कुमार ने दिया था। संजय कुमार ने कहा था कि महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है। राहुल गाँधी ने इस डेटा का इस्तेमाल किया और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप मड़ दिया।

लेकिन बाद में, संजय कुमार ने माना कि उनसे गलती हुई है और उन्होंने अपना पुराना पोस्ट हटाकर सोशल मीडिया पर माफी माँगी। NDTV के पत्रकार शिव अरूर ने भी अपने शो में यही बताया कि राहुल गाँधी का ‘वोट चोरी’ वाला आरोप गलत था और उन्होंने अपनी बात साबित नहीं की।

लेकिन इस बेज्जती को कॉन्ग्रेसी नेता सहन कर पाए और इसे राहुल गाँधी की छवि खराब करने की बात कह दी। पवन खेड़ा ने तो यहाँ तक कह दिया कि इस मामले में शिव अरूर के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। कॉन्ग्रेस की वकील ईशा बख्शी ने भी कानूनी कार्रवाई करने की बात कही।

आनंद रंगनाथन ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि कॉन्ग्रेस ने पत्रकार शिव अरूर के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत उनके उस कार्यक्रम के लिए है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के दावे का पर्दाफाश किया था।

रंगनाथन ने इस कार्रवाई को गलत बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में ऐसे और मामले दर्ज हो सकते हैं। उन्होंने पूछा कि इस पर एडिटर्स गिल्ड (EGI) और अभिव्यक्ति की आजादी के तथाकथित योद्धा चुप क्यों हैं। अंत में, उन्होंने कहा कि वह शिव अरूर के साथ खड़े हैं।

करण थापर के मामले में EGI का रुख

दूसरी तरफ, पत्रकार करण थापर और सिद्धार्थ वरदराजन पर भी कानूनी शिकंजा कसा था। असम पुलिस ने उन पर एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 लगाई गई थी। यह धारा पुराने राजद्रोह कानून का ही नया रूप है। यह एफआईआर ‘द वायर’ पर छपी एक रिपोर्ट को लेकर थी, जिसमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी जानकारी थी।

जब ये पत्रकार मुश्किल में आए तो एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) तुरंत उनके समर्थन में सामने आया। गिल्ड ने एक बयान जारी कर असम पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने भी करण थापर और सिद्धार्थ वरदराजन को गिरफ्तारी से सुरक्षा दी।

ये दोनों मामले एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। जब करण थापर जैसे पत्रकार पर केस होता है तो एडिटर्स गिल्ड (EGI) तुरंत उनके साथ खड़ा हो जाता है। लेकिन शिव अरूर के मामले में गिल्ड पूरी तरह से चुप रहता है। क्या इसका मतलब यह है कि पत्रकारों के लिए न्याय के नियम अलग-अलग हैं? या फिर यह दिखाता है कि पत्रकारिता की संस्थाएँ भी राजनीतिक विचारधारा के हिसाब से काम करती हैं?

एलन मस्क ने जिसे कहा था साँप, ट्रंप ने उसे ‘शानदार दोस्त’ कहकर बनाया भारत में अमेरिका का नया राजदूत; जानें कौन हैं सर्जियो गोर जिन पर रूसी जासूस होने के लगे आरोप

टैरिफ को लेकर जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी राजनीतिक सहयोगी सर्जियो गोर को शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को भारत में अगला अमेरिकी राजदूत नियुक्त किया है। गोर को ट्रंप ने दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत की भी जिम्मेदारी दी है। भारत और अमेरिका के संबंधों में आई खटास के बीच यह नियुक्ति अहम मानी जा रही है।

गोर मौजूदा वक्त में व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय के डायरेक्टर है। वह भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत एरिक गार्सेटी की जगह लेंगे। लंबे समय से ट्रंप के करीबी रहे गोर का विवादों से भी गहरा नाता है। टेस्ला के CEO एलन मस्क गोर को साँप तक बता चुके हैं।

ट्रंप ने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए सर्जियो गोर के नाम का ऐलान किया है। ट्रंप ने लिखा, “सर्जियो गोर के नाम का ऐलान करने में मुझे खुशी हो रही है। वह शानदार दोस्त हैं जो कई वर्षों से मेरे साथ हैं।”

उन्होंने लिखा, “राष्ट्रपति कार्मिक निदेशक के रूप में, सर्जियो और उनकी टीम ने रिकॉर्ड समय में सरकार में लगभग 4,000 देशभक्तों को नियुक्त किया है। सर्जियो अपनी नियुक्ति की पुष्टि होने तक व्हाइट हाउस में अपनी वर्तमान भूमिका में बने रहेंगे।”

उन्होंने लिखा, “गोर ने मेरे ऐतिहासिक राष्ट्रपति चुनाव अभियानों में काम किया, मेरी बेस्टसेलिंग किताबें प्रकाशित कीं हैं। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र के लिए, यह जरूरी है कि मेरे पास कोई ऐसा व्यक्ति हो जिस पर मैं अपने एजेंडे को पूरा करने और ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ में हमारी मदद करने के लिए पूरी तरह भरोसा कर सकूँ। सर्जियो एक शानदार राजदूत साबित होंगे।”

कौन हैं सर्जियो गोर?

39 वर्षीय सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के सबसे युवा राजदूत होंगे। सर्जियो गोर का जन्म उज्बेकिस्तान की ताशकंद में हुआ था, जो उस समय सोवियत संघ के उज्बेक सोवियत समाजवादी गणराज्य का हिस्सा था। 1999 में 12 वर्ष की आयु में वह अपने माता-पिता के साथ अमेरिका आ गए थे।

गोर की स्कूली पढ़ाई लॉस एंजेलिस से हुई और उन्होंने जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था। ग्रेजुएशन के दौरान ही राजनीति में उनकी दिलचस्पी शुरू हो गई थी। वे रिपब्लिकन पॉलिटिक्स में शामिल हुए और कई अमेरिकी सांसदों के साथ काम भी किया। 2020 में जब ट्रंप ने कैंपेन शुरू किया तो वो उनके संपर्क में आए और कैंपेन का चेहरा बन गए। गोर के पिता सोवियत आर्मी के लिए मिलिट्री एयरक्राफ्ट डिजाइन करने का काम करते थे।

गोर ने ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ मिलकर एक पब्लिशिंग कंपनी की भी स्थापना की थी। गोर ने वेडिंग DJ के तौर पर भी काम किया था। 2024 में ट्रंप की जीत के बाद उन्हें व्हाइट हाउस में डायरेक्टर ऑफ प्रेसिडेंशियल पर्सनल के पद पर नियुक्त किया गया।

विवादों से रहा है गहरा नाता

गोर का विवादों से भी गहरा नाता रहा है। द न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में उनके बैंकग्राउंड को लेकर सवाल उठाए थे कि कैसे ट्रंप के राजनीतिक क्षेत्र में उनकी प्रसिद्धि इतनी कैसे बढ़ गई। गोर पर रूसी जासूस होने के भी आरोप लगाए थे। हालाँकि, इन आरोपों को ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताया गया था। मस्क के साथ गोर के गंभीर मतभेद की भी कई खबरें सामने आई हैं।

मस्क ने कह दिया था ‘साँप’

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोर की ट्रंप और मस्क के बीच विवाद में अहम भूमिका थी। DOGE में अमेरिकी सरकार की भूमिका से इस्तीफा देने से पहले मस्क और गोर के बीच महीनों तक टकराव हुआ था। कैबिनेट बैठकों के दौरान भी दोनों के बीच टकराव की खबरें सामने आई थीं।

गोर ने NASA के प्रमुख पद के लिए जेरेड इसाकमैन के नामांकन को रोक दिया था, जिसे मस्क का समर्थन था। इस फैसले से मस्क नाराज हो गए थे। इसके अलावा, मस्क ने X पर ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ की एक खबर पर जवाब देते हुए गोर को ‘साँप’ कह दिया था।

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि गोर ने अपनी पृष्ठभूमि से संबंधित जाँच के लिए आधिकारिक दस्तावेज जमा नहीं किए थे। हालाँकि, व्हाइट हाउस ने इस दावे को खारिज कर दिया था।

नियुक्ति पर गोर ने ट्रंप को दिया धन्यवाद

सर्जियो गोर ने नई जिम्मेदारी मिलने के बाद ट्रंप का आभार जताया है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का आभारी हूं जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया है। मेरे लिए अमेरिकी लोगों की सेवा करने से ज्यादा गर्व की बात कुछ भी नहीं है।” अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी गोर की नियुक्ति का स्वागत किया है।

‘TMC जाएगी, बदलाव आएगा…बंगाल को नई रोशनी की जरूरत’: PM मोदी ने ममता सरकार पर जमकर साधा निशाना, कहा- सत्ता के लिए घुसपैठ को बढ़ावा दे रहे इंडी गठबंधन वाले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 5,200 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार को जमकर घेरा है। पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल को नई रोशनी की जरूरत है और TMC जाएगी तभी असली बदलाव आएगा।

केंद्र के पैसे को लूट रही TMC सरकार: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कोलकाता में एक सभा को संबोधित करते हुए ममता सरकार पर तीखे वार किए। पीएम मोदी ने कहा, “जब तक पश्चिम बंगाल का सामर्थ्य नहीं बढ़ेगा तब तक विकसित भारत की यात्रा सफल नहीं हो पाएगी। बीते 11 वर्षों में केंद्र की बीजेपी सरकार ने बंगाल के विकास के लिए लगातार हर प्रकार की मदद की है। बंगाल में नैशनल हाईवे के निर्माण के लिए UPA ने 10 वर्षों में दिया था, उससे तीन गुना अधिक मौजूदा सरकार ने दिया है।”

उन्होंने कहा, “बंगाल में विकास कार्यों के सामने एक बड़ी चुनौती है। बंगाल के लिए जो पैसा केंद्र सरकार, राज्य सरकार को भेजती है, उसका ज्यादातर हिस्सा यहाँ लूट लिया जाता है। जो पैसा भारत सरकार सीधे भेजती है वो पैसा आप लोगों पर खर्च नहीं होता, वो पैसा TMC काडर पर खर्च होता है। इसलिए गरीब कल्याण की योजनाओं में बंगाल पिछड़ा हुआ है।”

बंगाल को नई रोशनी की जरूरत है: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, “आज बंगाल को नई रोशनी और सच्चे परिवर्तन की जरूरत है। यहां आजादी के बाद पहले कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के शासन का लंबा दौरा देखा है। 15 साल पहले आप लोगों ने परिवर्तन का फैसला लिया था। आप लोगों ने माँ, माटी, मानुष के नारे पर भरोसा किया था लेकिन हालात पहले से भी ज्यादा खराब हो गए।”

उन्होंने आगे कहा, “भर्ती घोटालों से नौजवानों का भविष्य खराब हुआ, बहनों-बेटियों पर अत्याचार बढ़ा, आज क्राइम-करप्शन TMC सरकार की पहचान बन गए हैं। जब तक बंगाल में TMC की सरकार रहेगी, तब तक बंगाल का विकास रुका रहेगा। आज बंगाल का जन-जन कह रहा है TMC जाएगी, तभी असली बदलाव आएगा।”

पीएम मोदी ने कहा, “आने वाले साल बंगाल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बंगाल को अब परिवर्तन चाहिए। ऐसा परिवर्तन जो काम में दिखे, परिवर्तन जिससे उद्योग लगें और बेटे-बेटियों को नौकरी मिले। ऐसा परिवर्तन जहां सुशासन होगा। ये परिवर्तन सिर्फ भाजपा ला सकती है।”

INDI गठबंधन के दलों ने घुसपैठियों की शरण ली: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में घुसपैठ को लेकर भी चर्चा की और INDI गठबंधन के दलों पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “मैंने लाल किले से देश में घुसपैठ के बढ़ते खतरे की चिंता व्यक्त की है। पश्चिम बंगाल के लोग समय से आगे की सोचते हैं, आपके बीच में इस चुनौती की चर्चा करता रहा हूँ।”

पीएम मोदी ने कहा, “आजकल जिन देशों को विकसित कहा जाता है, जिनके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। वहाँ घुसपैठियों के खिलाफ मुहिम चल रही है। भारत भी अब घुसपैठियों को ज्यादा नहीं सह सकता है। घुसपैठियों को बंगाल से आपका एक वोट मुक्त करा सकता है।”

उन्होंने कहा, “भारत के पास संसाधन सीमित हैं, हमें अपने युवाओं को रोजगार देना है, अपने नागरिकों को सुविधाएँ देनी हैं। जो घुसपैठिए हमारे युवाओं का रोजगार छीन रहे हैं, हमारे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दबाव डाल रहे हैं। जो हमारी बहनों-बेटियों के साथ अत्याचार कर रहे हैं, ऐसे घुसपैठियों को हम भारत में रहने नहीं देंगे। भारत सरकार ने घुसपैठियों के खिलाफ इतना बड़ा अभियान चलाया है।”

पीएम मोदी ने कहा, “मुझे हैरानी है कि TMC, कॉन्ग्रेस समेत INDI गठबंधन के दल तुष्टिकरण के आगे घुटने टेक चुके हैं। ये राजनीतिक दल सत्ता की भूख के लिए घुसपैठ को बढ़ावा दे रहे हैं। कुछ जगहों पर तो उन्होंने घुसपैठियों की शरण ले ली है। पश्चिम बंगाल सीमावर्ती राज्य है, जिस तरह बॉर्डर के इलाके में डेमोग्राफी बदली जा रही है, यह पश्चिम बंगाल में सामाजिक संकट पैदा कर रहा है। खासतौर पर किसानों से धोखाधड़ी करके उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। जनजातीय लोगों को गुमराह करके उनकी जमीन हड़पी जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “देश यह सहन नहीं कर सकता है, इसे रोकना ही होगा। जो लोग सिर्फ हमारे लोगों को रोजी-रोटी छीनने आए हैं, जो फर्जी तरीके से कागज बनाकर रुक गए हैं। उनके यहाँ से जाना ही होगा, यह काम ईमानदारी से पूरा हो सके इसके लिए TMC सरकार को यहाँ से जाना ही होगा।”

ऑपरेशन सिंदूर पर क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में पाकिस्तानी आतंकियों के ठिकानों पर किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सेना ने सीमा पार आतंकियों और आतंक के आकाओं के अड्डो को खंडहर में बदल दिया। उन्होंने कहा कि सेना ने आतंकियों को ऐसा सबक सिखाया कि पाकिस्तान की आज भी नींद उड़ी हुई है।

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सफलता की शक्ति मेड इन इंडिया हथियारों की रही है। भारतीय सेना को ताकत देने में बंगाल की भूमि का बहुत बड़ा योगदान है। इच्छापुर में गुलामी के दौर में डिफेंस मेन्युफैक्चरिंग का काम शुरू हुआ लेकिन कांग्रेस सरकार ने डिफेंस इंडस्ट्री को बर्बाद कर दिया। हमारी सेना को विदेश पर निर्भर कर दिया।”

आप BJP सरकार बनाइए, हम डॉ मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाएँगे: PM

पीएम मोदी ने कहा, “भाजपा सरकार ने डिफेंस सरकार को नई ऊर्जा दी है और इसका लाभ यहाँ की फैक्ट्री को भी मिला है। आज ये फैक्ट्री आधुनिक रायफल और अन्य हथियार बना रही है। इससे यहाँ छोटे-छोटे उद्यमियों के लिए नए अवसर बने हैं। इन कारखानों के कारण दमदम, बैरकपुर क्षेत्र में हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।”

उन्होंने कहा, “आप 2026 में भाजपा की सरकार बनाइए, हम बंगाल को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाएँगे। नया निवेश, नए कारखाने लगेंगे, दमदम फिर से इंडस्ट्रियल हब बनेगा, ये भाजपा का संकल्प है।”

TMC विकास की दुश्मन है: PM मोदी

पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा, “भाजपा के पास बंगाल के विकास का रोडमैप है लेकिन TMC विकास की दुश्मन है। TMC का मिशन भाजपा को रोकना है। केंद्र की योजनाओं को रोकना है। क्या इस राजनीति से बंगाल का भला होगा?”

उन्होंने कहा, “आप यहाँ भी एक बार भाजपा को अवसर देकर देखिए। भाजपा आएगी तो बंगाल में रेल और मेट्रो का तेजी से विकास होगा। यहाँ बहुत बड़ी मात्रा में निवेश आए, युवाओं को रोजगार मिले। ये तभी होगा जब यहाँ कानून का राज आएगा, जब भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और जब बंगाल में डबल इंजन की सरकार होगी।”

एंटी करप्शन बिल को लेकर पीएम ने साधा निशाना

पीएम मोदी ने एंटी करप्शन बिल को लेकर भी TMC पर निशाना साधा है। पीएम मोदी ने कहा, “जेल से भी सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं। TMC का मंत्री शिक्षक भर्ती में आज तक जेल में है, तब भी वो कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे। TMC के एक और मंत्री पर गरीबों के राशन लूटने का आरोप है। ये भी जेल जाने के बाद कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे।”

पीएम मोदी ने कोलकाता में कई मेट्रो रेल परियोजनाओं का किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले कोलकाता में कई मेट्रो रेल परियोजनाओं का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने जेसोर रोड मेट्रो स्टेशन से नोआपाड़ा-जय हिंद बिमान बंदर मेट्रो सेवा को हरी झंडी दिखाई है।

इसे साथ ही पीएम मोदी ने सियालदह-एस्प्लेनेड मेट्रो सेवा और बेलेघाटा-हेमंत मुखोपाध्याय मेट्रो सेवा को भी हरी झंडी दिखाई है। 13.61 किलोमीटर लंबे ये मेट्रो नेटवर्क कोलकाता के व्यस्त इलाकों को जोड़कर यात्रा के समय को काफी कम कर देंगे और इन सेवाओं का लाभ हर दिन लाखों यात्रियों को होगा। पीएम मोदी ने सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए 7.2 किलोमीटर लंबे छह-लेन एलिवेटेड कोना एक्सप्रेसवे की आधारशिला भी रखी।