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भारतीय के घर में घुसा अमेरिकी, कहा- ईसाई बनो, समृद्धि मिलेगी: टूरिस्ट-बिजनेस वीजा पर भारत आता था जैकब, हिंदुओं को धर्मांतरण के लिए देता था लालच

महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड में एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ विदेशी पैसे का इस्तेमाल कर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में पुलिस ने एक अमेरिकी नागरिक और उसके भारतीय साथी को गिरफ्तार किया है। ये लोग ईसाइयत अपनाने के लिए पैसों का लालच देते थे। इस मामले में एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है।

इससे देश में विदेशी फंड के जरिए धर्मांतरण पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि ये लोग स्थानीय लोगों को ईसाई बनाने के लिए पैसों का लालच देते थे। फिलहाल जाँच चल रही है और पुलिस पूरे मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।

धर्मांतरण कराने की साजिश में शामिल था विदेशी नागरिक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपितों की पहचान अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया निवासी शेफ़र जैविन जैकब (41) और पिंपरी के रईसोनी सोसाइटी निवासी स्टीवन विजय कदम (46) के रूप में हुई है। जैकब पिंपरी-चिंचवड के मुकाई चौक के पास एक किराए के फ्लैट में रह रहा था।

जाँच में पता चला है कि जैकब 2016 से भारत आ रहा है। टूरिस्ट और बिजनेस वीजा पर कई बार भारत का दौरा किया। इससे यह संदेह पैदा हुआ कि कहीं वह वैध यात्रा के बहाने धर्म प्रचार जैसे गतिविधियों में तो शामिल नहीं था।

FIR विवरण: हिंदू व्यक्ति को पैसे का लालच देने का कथित प्रयास

पिंपरी के रहने वाले हिंदू-सिंधी समुदाय के 27 वर्षीय सनी धनानी ने रविवार (27 जुलाई 2025) को पिंपरी पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई। FIR के अनुसार, जैकब और कदम 27 जुलाई सुबह करीब 11:30 बजे सनी के घर आए और उन्हें ईसाइयत अपनाने के लिए कहने लगे।

शिकायत के मुताबिक आरोपितों ने खुद को धार्मिक जानकार बताते हुए हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला दिया और मोक्ष के लिए हिन्दू धर्म के बजाए ईसाइयत को बेहतर रास्ता बताया। उन्होंने सनी और उनके परिवार से वादा किया कि अगर वे ईसाइयत अपना लेंगे, तो उन्हें मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और विदेशों से आर्थिक सहायता मिलेगी।

सनी को जब शक हुआ, तो पिंपरी पुलिस स्टेशन गया और मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। FIR में सनी ने कहा है कि अमेरिकी नागरिक ने उससे कहा था कि अगर वह ईसाइयत अपनाता है तो वह खुश रहेगा। मानसिक रूप से शांत रहेगा और आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएगा। उन्होंने विदेशी मदद दिलाने का भी वादा किया।

डिजिटल ट्रेल और व्यवस्थित आउटरीच संदिग्ध

पुलिस को शक है कि जैकब और कदम एक बड़े अभियान का हिस्सा थे जो लोगों का धर्मांतरण कराने की कोशिश में लगे हैं। माना जा रहा है कि ये लोग स्थानीय परिवारों से संपर्क बनाने के लिए WhatsApp, मोबाइल कॉल्स और आमने-सामने की बातचीत जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

FIR में बताया गया है कि वे भावनात्मक दबाव और धार्मिक ग्रंथों की चुनी हुई व्याख्या का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते थे।

पुलिस ने उनके पास से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कुछ किताबें जब्त की हैं। पुलिस को शक है कि इसका इस्तेमाल धार्मिक प्रचार के लिए किया गया होगा। फिलहाल इन सब की फॉरेंसिक जाँच और पैसों के लेन-देन की भी जाँच चल रही है।

नाबालिग के भूमिका की जाँच जारी

अधिकारियों ने एक नाबालिग लड़के को भी हिरासत में लिया है। हालाँकि मामले में उसकी भूमिका अभी तक स्पष्ट नहीं है। आशंका है कि उसका इस्तेमाल परिवारों का विश्वास जीतने या बैठकों और आउटरीच में मदद करने के लिए किया जाता था।

BNS और विदेशी अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई

पिंपरी-चिंचवड पुलिस ने आरोपित अमेरिकी नागरिक और उसके साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और विदेशियों अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

BNS की धारा 299 के तहत उन्हें धार्मिक भावनाएँ भड़काने के इरादे से जानबूझकर की गई हरकतों के लिए आरोपित बनाया गया है। साथ ही, धारा 3(5) के तहत उन पर प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप भी लगाया गया है।

इसके अलावा विदेशी नागरिक होने के कारण उन पर विदेशियों अधिनियम की धारा 14(b) और 14(c) के तहत भी केस दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत उस पर वीजा की शर्तों का उल्लंघन करने और भारत में अनुमति से बाहर जाकर गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

2016 से भारत आ रहा है जैकब

यह मामला भारत के छोटे शहरों और कस्बों में संगठित रूप से विदेशी फंडिंग के सहारे धर्मांतरण की गहरी साजिश की ओर भी इशारा कर रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने माँग की है कि जैकब के 2016 से अब तक के भारत दौरे और उसके संपर्कों की गहराई से जाँच होनी चाहिए।

ऐसा माना जा रहा है कि आरोपित ने पिंपरी-चिंचवड इलाके में संपर्कों का एक नेटवर्क बना लिया था। ये भी आशंका जताई जा रही है कि उसने कई कमजोर परिवारों के साथ भी इसी तरह की कोशिश की होगी।

अमेरिकी नागरिक इस समय न्यायिक हिरासत में है और इमिग्रेशन अधिकारियों को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक उसके वीजा को स्थायी रूप से रद्द कर उसे देश से डिपोर्ट भी जा सकता है।

1000+ लोग, 3000 घंटे की पूछताछ… देश को गृह मंत्री ने बताया कैसे भारतीय सेना ने पूरा किया पहलगाम का बदला: चिंदबरम से लेकर POTA तक पर अमित शाह ने कॉन्ग्रेस को किया नंगा

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि पहलगाम आतंकी हमले का बदला ले लिया गया है। यह हमला करने वाले तीन आतंकी मार गिराए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकियों की पहचान भी स्पष्ट हो गई है। गृह मंत्री ने यह सारी बातें ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान लोकसभा में मंगलवार (29 जुलाई, 2025) को बताईं। उन्होंने इस दौरान कॉन्ग्रेस और बाकी विपक्ष पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि आतंकियों का बचाव करके वोटबैंक बनाने वालों को नरेन्द्र मोदी की आतंक विरोधी नीति नहीं पसंद आएगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया, “22 जुलाई को दाचीगाम में आतंकी मौजूद होने की पुष्टि हो गई। इसके बाद 4 पैरा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने आतंकियों को घेरा। 28 जुलाई को जो ऑपरेशन हुआ, उसमे हमारे निर्दोष नागरिकों को मारने वाले आतंकी मौत के घाट उतारे गए… आतंकियों की राइफल विशेष विमान चंडीगढ़ भेजी गईं, इनको रात भर फायर करके खोखे का मिलान हुआ। इसके बाद स्पष्ट हुआ कि यही आतंकी पहलगाम हमले में शामिल थे।”

उन्होंने इस दौरान विपक्ष पर भी प्रश्न उठाए। विपक्ष के शोर मचाने पर उन्होंने कहा, “मुझे तो लगा था आतंकियों के मरने की खबर पर विपक्ष में ख़ुशी की लहर दौड़ जाएगी, लेकिन यहाँ तो स्याही पड़ गई… यह कैसी राजनीति है।” उन्होंने इस दौरान पहलगाम हमले की जाँच को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “पहलगाम हमले की जाँच के दौरान मृतकों के परिजनों से बातचीत, दुकानदारों, खच्चर वालों, पर्यटकों समेत 1055 लोगों की 3000 घंटे जानकारी के लिए की गई।”

उन्होंने आगे कहा, “इसका वीडियो बनाया गया, इसके आधार पर स्केच बनाया गया। 22 जून, 2025 को बशीर और परवेज की पहचान की गई। इन्होंने हमले के अगले दिन आतंकियों को शरण दी थी। गिरफ्तार किए गए सहायक आरोपितों की माँ ने तीनों आतंकियों की लाश पहचान ली है। दोनों सहायकों ने पहचान लिया है। FSL की पुष्टि भी आज सुबह (29 जुलाई, 2025) को हो गई है।” गृह मंत्री अमित शाह ने इस दौरान पूर्व गृह मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता चिदंबरम के बयान की आलोचना भी की।

चिदंबरम ने पहलगाम में हमला करने वाले आतंकियों के पाकिस्तानी होने पर प्रश्न उठाए थे। उन्होंने कहा, “हमारे पास प्रूफ है कि तीनों आतंकी पाकिस्तानी थे। तीनों के पाकिस्तानी वोटर नम्बर हमारे पास हैं, उनकी राइफल हमारे पास हैं। उनके पास पाकिस्तान से बनाई चॉकलेट मिली हैं। ये कहते हैं कि वो पाकिस्तानी नहीं थे। पूरी दुनिया को इस देश के पूर्व गृह मंत्री (चिदंबरम) पाकिस्तान को क्लीन चिट दे रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि चिदंबरम को शक था तो मुझसे पूछ लेते। उन्होंने इस दौरान लगातार कॉन्ग्रेस के हंगामे पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि रक्षा मंत्री के भाषण के बाद पक्ष में भाषण चालू करेगी और अगर थोड़ी-बहुत जनता की इच्छा की परख होती तो यही करते… लेकिन फिर भी उन्होंने सवाल किए, सवाल किए तो मुझे जवाब देना पड़ेगा।”

गृह मंत्री शाह ने इस दौरान कॉन्ग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में मारे गए 10 बड़े आतंकियों में से 8 चिदंबरम के समय आतंकी घटनाएँ करते थे, नरेन्द्र मोदी की सरकार ने उन्हें ठिकाने लगाया है।” उन्होंने आगे कहा, “उरी में हमला हुआ, हमने सर्जिकल स्ट्राइक किया। पुलवामा में हमला हुआ, एयरस्ट्राइक किया। पहलगाम में हमला हुआ, एयरस्ट्राइक की… मनमोहन सिंह ने सर्टीफाइड कर दिया था कि पाकिस्तान भी आतंक के विक्टिम हैं।

गृह मंत्री शाह ने 10 मई, 2025 को हुए सीजफायर पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “9 मई को सेना को हुक्म दिया। एक मीटिंग हुई राजनाथ सिंह, NSA और सेना प्रमुखों ने तय किया और पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर हमला हुआ। 8 एयरबेस ऐसे निशाना बनाए गए कि पाकिस्तान का एयर डिफेन्स बेकार हो गया…पाकिस्तान के पास शरण में आने के अलावा कोई चारा नहीं था, इसलिए 10 मई को पाकिस्तान के DGMO ने भारतीय DGMO को फोन किया, हमने 5 बजे इस संघर्ष को विराम किया।”

कॉन्ग्रेस के प्रश्नों पर उन्होंने ऐतिहासिक गलतियाँ भी बताईं। उन्होंने कहा, “1948 में कश्मीर में हमारी सेनाएँ निर्णायक बढ़त पर थीं, सरदार पटेल मना करते रहे लेकिन नेहरू ने सीजफायर कर दिया… मैं जिम्मेदारी से बोलता हूँ कि अगर POK है तो इसका जिम्मेदार जवाहर लाल नेहरू है। 1965 की लड़ाई में हाजी पीर जैसी जगह पर हमने कब्जा किया था। 1966 में हमने उसे लौटा दिया।”

उन्होंने 1971 के युद्ध पर भी प्रकाश डाला। गृह मंत्री शाह ने कहा, “1971 के युद्ध के बाद 93 हजार युद्धबंदी हमारे पास थे, 15 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हमारे पास था लेकिन शिमला में समझौता हुआ और POK वापस माँगना ही भूल गए… तब वापस माँग लेते तो हमें कैम्प तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।” उन्होंने जवाहर लाल नेहरू सरकार की और भी कई कमियाँ गिनवाई। उन्होंने 1962 युद्ध का भी जिक्र किया।

लोकसभा में गृह मंत्री शाह ने कहा, “1962 के युद्ध में हमने जमीन चीन को दे दी… तब बहस हुई तो नेहरू जी ने कहा कि वहाँ घास का तिनका तक नहीं उगता।” उन्होंने आगे कहा, “गौरव गोगोई जी जानते हैं क्या कि उन्होंने (नेहरू ने) असम को बाय-बाय बोल दिया था।”

भारत के UNSC सदस्यता ठुकराने पर उन्होंने कहा, “अनौपचारिक रूप से USA ने प्रस्ताव दिया कि चीन को UN में ले लिया जाए लेकिन सुरक्षा परिषद् में नहीं, नेहरू जी ने कहा कि हम इसे स्वीकार नहीं करते क्योंकि इससे चीन के साथ हमारे संबंध खराब होंगे और चीन जैसे महान देश को बुरा लगेगा।”

उन्होंने UPA सरकार पर भी निशाना साधा। गृह मंत्री शाह ने कहा, “मनमोहन सिंह-सोनिया गाँधी की सरकार ने पहली ही कैबिनेट में POTA कानून रद्द किया। मैं पूछता हूँ कि किसके फायदे के लिए यह हुआ… 2005 में अयोध्या में रामलला के टेंट पर हमला हुआ, 2006 में मुंबई में ट्रेन में धमाके हुए, 2006 में डोडा में हमला हुआ।”

उन्होंने पूछा, “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई होती है… 2005 से 2011 के बीच 27 जघन्य हमले हुए… 1000 लोग मारे गए। मैं आपसे पूछना चाहता हूँ अपने क्या किया।” गृह मंत्री ने इसके साथ ही अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया और बताया कि इस दौरान हुए हमले पाक प्रायोजित और कश्मीर पर केन्द्रित थे। उन्होंने इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के बाटला हाउस पर सोनिया गाँधी के रोने वाले बयान का भी जिक्र किया।

उन्होंने मोदी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होंने कहा, “2004-14 में 1770 में नागरिकों की मृत्यु हुई थी। 2015-25 में कम होकर 357 हो गईं थी। 80% की कमी हो गई। सुरक्षाबलों की मृत्यु में 1060 थी, हमारे समय में 542 हुईं। आतंकियों की मौत में 123% का इजाफा हुआ।” उन्होंने UPA सरकार पर हुर्रियत नेताओं को VIP ट्रीटमेंट देने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “एक समय में यहाँ हुर्रियत के नेताओं को VIP ट्रीटमेंट मिलता था… मनमोहन सिंह की सरकार के दूत इनके साथ चर्चा करते थे, हमने हुर्रियत के सारे कॉम्पोनेन्ट बैन कर दिए थे।” गौरव गोगोई के हंगामा मचाने पर गृह मंत्री ने कहा, “आपके समय में आतंकी को घुसने की जरूरत ही नहीं थी… जैसे आप पाकिस्तान जाते हो, वैसे वो यहाँ आते थे।”

गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार में आतंक पर एकदम कड़ा स्टैंड लिया जाएगा।

सुपारी की जगह 11000 बीघे पर उग गए ‘घुसपैठिए’, अब ‘सफाई’ करवा रही असम की हिमंता बिस्वा सरकार: 2000 परिवारों का कब्जा हटा, स्थानीय बोले- ज्यादातर अतिक्रमणकारी मुस्लिम

असम सरकार ने गोलाघाट और उरियमघाट में बेदखली अभियान तेज कर दिया है। असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने गोलागाट के रिजर्व वन के 11,000 बीघा जमीन से 2000 से अधिक परिवारों को हटाने और 3,600 एकड़ वन भूमि को खाली करने का अभियान शुरू करने की कवायद तेज कर दी है।

गोलाघाट के रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट असम-नागालैंड सीमा पर स्थित है। यहाँ लगभग 2,000 अवैध घुसपैठिए परिवारों ने कब्जा कर लिया था। इसके कारण लगभग 3,600 एकड़ (11,000 बीघे) जमीन पर अवैध कब्जा जमा हुआ था। इस जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है।

11,000 बीघे जमीन पर लगभग 2,000 घुसपैठिए परिवारों के कब्जे को हटाने के लिए लगभग 1,500 परिवारों को 7 दिन का नोटिस दिया गया था। इनमें से 80% से अधिक परिवारों ने पहले से ही घर खाली कर दिए। इसके अलावा लगभग 500 परिवारों के पास फॉरेस्ट राइट्स कमेटी (एफआरसी) से प्रमाणपत्र हैं। वे कानूनी रूप से जंगल क्षेत्र में रह रहे हैं।

गोलाघाट जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरुपथार उप-मंडल में असम-नगालैंड सीमा पर उरियमघाट में रेंगमा वन अभयारण्य की लगभग 11,000 बीघा (3,600 एकड़ से अधिक) भूमि पर अतिक्रमण को हटाने के लिए मंगलवार (29 जुलाई 2025) की सुबह से बेदखली अभियान शुरू किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिद्यापुर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान अवैध मकानों को तोड़ा जा रहा है। स्थानीयों के अनुसार, जिनके पास एफआरसी प्रमाणपत्र हैं वे बोडो, नेपाली समेत अन्य जनजातीय समुदायों से हैं। इसके अलावा स्थानीयों ने यह भी कहा कि जिनके घर अतिक्रमण के तहत तोड़े जा रहे हैं वे लगभग सभी मुस्लिम समुदाय से हैं।

अतिक्रमण को हटाने के लिहाज से क्षेत्र में वन विभाग के कर्मियों के साथ काफी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किया गया है। इस दौरान 12 गाँवों के 2648 अवैध घरों को तोड़ने की तैयारी है। इन गाँवों में – सोनारीबिल टॉप, नंबर 2 पिथाघाट, नंबर 2 और नंबर 3 दयालपुर, दलानपाथर, खेरबारी, विद्यापुर, विद्यापुर बाजार, नंबर 2 मधुपुर, आनंदपुर, राजापुखुरी और गेलाजा शामिल हैं।

असम सरकार का कहना है कि जंगल की जमीन को अतिक्रमणकारियों ने सुपारी की खेती के लिए साफ कर दिया था। जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा जमा लिया गया। इसके कारण असम की सांस्कृतिक पहचान को भी खतरा है। यह इलाका रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट का हिस्सा है, जो पारिस्थितिकीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बेदखली अभियान को लेकर 21 जुलाई 2025 को बयान दिया था कि पिछले चार वर्षों में राज्य में 1.29 लाख बीघा भूमि से अतिक्रमण हटाया गया है, जबकि अभी भी 29 लाख बीघा भूमि पर अभी भी अतिक्रमण है।

नेपाल में ‘तबलीग’ कर रहा बांग्लादेश का इस्लामी संगठन, हिंदू बहुल इलाकों में उग रहीं मस्जिदें: ‘दावत’ के जरिए डेमोग्राफी जिहाद में जुटा है ASH

दक्षिण एशिया में भारत के अलावा नेपाल ही एकमात्र हिंदू-बहुल देश है। यहाँ की कुल जनसंख्या में लगभग 81% यानी लगभग 2.36 करोड़ (2021 के डाटा के अनुसार) लोग हिंदू हैं। वहीं, मुस्लिम आबादी करीब 5% है।

लेकिन अब नेपाल में धार्मिक जनसंख्या को बदलने की एक संगठित कोशिश की जा रही है। बांग्लादेश के मुस्लिम संगठन नेपाल में धार्मिक जनसांख्यिकी को बदलने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह सब ‘मानवता की सेवा’ के नाम पर बहुत चतुराई से किया जा रहा है।

नेपाल में एएसएच की पहली मस्जिद की आधारशिला रखते हुए (फाइल फोटो,साभार – दैनिक अभिविन्यास,बांग्ला )

‘अलहाज शम्सुल हक फाउंडेशन’ (ASH) नामक एक बांग्लादेशी संगठन इस लक्ष्य पर मिशन मोड में काम कर रहा है।

मोहम्मद नासिर उद्दीन द्वारा स्थापित ASH फाउंडेशन नाम की यह संस्था बांग्लादेश के चटगाँव से संचालित होती है। यह संस्था बांग्लादेश, अमेरिका, ब्रिटेन और मिस्र में भी काम करती है। हालाँकि ASH फाउंडेशन का दावा है कि इसका उद्देश्य भूख और गरीबी मिटाना है, लेकिन असल में इसके काम इस्लाम के प्रचार (तबलीग़) और धर्म परिवर्तन से जुड़े हुए हैं।

(फाइल फोटो,साभार – दैनिक अभिविन्यास,बांग्ला )

हाल ही में मोहम्मद नासिर उद्दीन ने नेपाल के सुनसरी जिले में ‘मस्जिद-ए-रज़्ज़ाक़’ की नींव रखी। इसके लिए उसने बांग्लादेश से फंड जुटाया। शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को फेसबुक पर वायरल वीडियो में उसने कहा, “नेपाल में केवल 5% मुस्लिम हैं। यहाँ दावत (इस्लामी धर्मांतरण) का अवसर है।”

18 जुलाई को एक फेसबुक पोस्ट में ASH फाउंडेशन ने बताया कि यह मस्जिद कम से कम 15% आबादी तक इस्लाम का संदेश पहुँचाने का केंद्र बनेगी। इसने बैंक खातों का विवरण भी जारी किया और बांग्लादेशियों से दान माँगा ताकि वे हिंदू बहुल देश में और अधिक मस्जिदें बनाने और स्थानीय आबादी का धर्म परिवर्तन करने के अपने मिशन में योगदान दे सकें।

ASH के संस्थापक मुहम्मद नासिर उद्दीन ने स्थानीय मुस्लिमों के साथ बातचीत के दौरान अपने नापाक एजेंडे का खुलासा किया। उसने कहा, “नेपाल दुनिया के सबसे बड़े हिंदू राष्ट्रों में से एक है, इसलिए दावत का आयोजन बेहद जरूरी है। हमारे धर्म के सबसे बड़े सिद्धांतों में से एक है लोगों को अल्लाह के मार्ग पर चलने का न्योता देना।” 

संस्था का काम करने का तरीका-

1. हिंदुओं की सहनशीलता की तारीफ करके उनका विश्वास जीतना।

2. बांग्लादेश के मुस्लिमों से चंदा इकट्ठा करना।

3. उसी पैसे से मस्जिदें बनाना और गरीब हिंदुओं को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करना।

नेपाल के कुछ हिंदू संगठनों ने सरकार और पुलिस को इसके लिए सचेत किया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

हिंदू बहुल नेपाल में बढ़ता इस्लामवाद

ऑपइंडिया ने नेपाल में मूल हिंदुओं के प्रति मुस्लिम समुदाय की बढ़ती दुश्मनी के कई उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। अप्रैल 2025 में नेपाल के परसा जिले के बीरगंज शहर में हिंसक मुस्लिम भीड़ ने हनुमान जयंती के जुलूस पर हमला किया था।

जुलाई 2024 में मुस्लिमों ने नेपाल के सरलाही जिले में सड़क निर्माण कार्य रोक कर उन पर पथराव किया था और दलित हिंदुओं के घरों पर भी हमला किया था।

एक महीने पहले हिंदू बहुल यह देश तब भी चर्चा में आया था जब मुस्लिमों ने रौतहट जिले में एक गाँव का नाम बदलकर ‘इस्लाम नगर’ और ‘ब्रह्म स्थान’ का नाम बदलकर ‘मदरसा चौक’ कर दिया था।

ब्रह्मस्थान को मदरसा चौक में बदला गया (फाइल फोटो – ऑपइंडिया)

ऑपइंडिया ने एक जमीन जिहाद मामले की भी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें बताया था कि मुस्लिमों ने सरकारी जमीन पर नमाज पढ़कर और अवैध रूप से दीवार बनाकर कब्जा करने की कोशिश की थी। यह घटना नेपाल के जनकपुर शहर में हुई थी। सितंबर 2022 की शुरुआत में ही हमने देश के पूर्व हिंदू क्षेत्रों में मस्जिदों और मदरसों और मदरसों की बढ़ती संख्या के बारे में चेतावनी दी थी।

नेपाल में ASH फाउंडेशन जैसे बांग्लादेशी मुस्लिम संगठनों की बढ़ती उपस्थिति के कारण, धर्मांतरण और हिंदू समुदाय के प्रति आक्रामकता बढ़ने की संभावना है।

‘बंगाली बोलने के कारण महिला और उसके बच्चे का उत्पीड़न’: दिल्ली पुलिस ने ममता बनर्जी का ‘फैक्ट’ किया दुरुस्त, बताया कैसे बीबी सजनूर ने गढ़ी झूठी कहानी

पश्चिम बंगाल के मालदा से दिल्ली के गीता कॉलोनी में रहने आए एक बंगाली प्रवासी परिवार ने सोशल मीडिया पर लाइक्स और चर्चा में आने के लिए एक ऐसा वीडियो बनाया जिसके कारण राजनीतिक उठापटक मच गई। इसके बाद पुलिस जाँच हुई तो मामले की सच्चाई सामने आ गई।

शनिवार (26 जुलाई 2025) को एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें मुख्तार खान अपने छोटे से बच्चे के कान और चेहरे के साथ अपनी पत्नी सजनूर बीबी के चेहरे को भी दिखलाकर बंगाली भाषा में यह कहता नजर आ रहा है कि उन दोनों के साथ मारपीट की गई है और साधारण कपड़ों में आए कुछ पुलिस वालों ने उनसे 25,000 रुपए भी वसूले हैं। वीडियो में जीपीएस ट्रैक में लिखा है कि यह वीडियो नई दिल्ली के गीता कॉलोनी में बनाया गया है।

ममता ने लपका मौका

सोशल मीडिया में वायरल होते ही पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ा। 27 जुलाई 2025 को वीडियो को साझा करते हुए ममता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भयानक, बेहद भयावह! देखिए मालदा के चंचल से दिल्ली आए एक प्रवासी परिवार के बच्चे और उसकी माँ को दिल्ली पुलिस ने कितनी बुरी तरह से मारा है।”

ममता बनर्जी ने आगे लिखा, “देखिए किस तरह बच्चों तक को हिंसा की क्रूरता से बक्शा नहीं जा रहा है। भाषाई आतंक के दौर में बीजेपी ने देश के बंगालियों के खिलाफ हिंसा शुरू कर दी है। हमारा देश किस दिशा में जा रहा है?”

पुलिस ने की पड़ताल

टीएमसी सुप्रीमो के इस ट्वीट के बाद पूर्वी दिल्ली के डीसीपी अभिषेक धनिया ने इस मामले की पूरी पड़ताल करवाई। सीसीटीवी फुटेज और परिवार से कड़ाई से पूछताछ की। पूरी जाँच के बाद डीसीपी ने अपना बयान जारी किया।

उन्होंने बताया कि यह पूरा मामला ही झूठा था और महिला ने मालदा जिले में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार के कहने पर भी झूठा वीडियो बनाया था। यह रिश्तेदार एक राजनीतिक कार्यकर्ता है जिसने जानबूझकर इस तरह का वीडियो बनवाया जिससे वह किसी तरह का राजनीतिक लाभ उठा सके।

डीसीपी अभिषेक ने कहा, “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने ‘X’ पर एक पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि दिल्ली पुलिस ने एक बंगाली भाषी महिला और उसके बच्चे के साथ मारपीट की। जानकारी मिलते ही हमने जाँच शुरू की और पता चला कि महिला का नाम सजनूर बीबी है। वह अपने पति मुख्तार खान और दो बच्चों के साथ पश्चिम विनोद नगर के मजबूर नगर में रहती है। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि 26 जुलाई की रात लगभग 10:30 बजे चार पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में उनके घर आए और उन्हें एक सुनसान जगह ले जाकर पीटा, साथ ही ₹25,000 की माँग की, जो उन्होंने बाद में दे दिए।”

डीसीपी ने आगे कहा, “मामले की गंभीरता को देखते हुए हमने कई टीमें गठित कीं। तकनीकी और स्थानीय इंटेलिजेंस के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमने कई सबूत इकट्ठा किए। उन सबूतों के आधार पर हमें यह ज्ञात हुआ कि महिला द्वारा बताई गई पूरी कहानी निराधार है। महिला अपनी मर्जी से दोपहर 12:03 बजे दोनों बच्चों के साथ घर से निकली। उसके साथ किसी के भी होने की बात CCTV फुटेज में सामने नहीं आई।”

डीसीपी अभिषेक ने बताया कि पूछताछ में महिला ने यह भी बताया कि वह रास्ता भटक गई थी। किसी स्थानीय की मदद से उसने अपने मामा को फोन किया। वह पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में रहता है और एक राजनीतिक कार्यकर्ता है। उसके कहने पर ही उसने यह झूठा वीडियो बनाया और उसे भेजा, जिसे बाद में स्थानीय मीडिया में प्रसारित किया गया।

डीसीपी ने कहा, “गहन जाँच और पूछताछ के बाद ये बात सामने आई है कि पूरा वीडियो झूठा और मनगढ़ंत है। इस वीडियो को जानबूझकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया ताकि दिल्ली पुलिस की छवि को नुकसान पहुँचाया जा सके। आगे की जाँच अभी भी जारी है।”

यूजर्स ने भी ममता ‘दीदी’ को लताड़ा

पुलिस के बयान के बाद एक्स पर कई यूजर्स ने TMC सुप्रीमो और कोलकाता पुलिस को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने कहा कि कोलकाता पुलिस ने फेक न्यूज़ फैलाने के एवज में ममता बनर्जी का अकाउंट सस्पेंड नहीं किया, उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं किया। लेकिन इसी जगह कोई दूसरा होता तो उसका अकाउंट अब तक बंद हो चुका होता। समानता सभी नागरिकों के लिए एक जैसी होनी चाहिए। जय हिंद।

एक अन्य यूजर ने दिल्ली पुलिस के लिए लिखा कि दिल्ली पुलिस को निराधार आरोप लगाने के लिए ममता बनर्जी पर मुकदमा करना चाहिए। एक यूजर ने लिखा, “हम सभी को पता है कि अब चुनाव होने वाले हैं तो बंगाल की ओर से इस तरह के अनगिनत ड्रामा देखने को मिलेंगे।”

पहलगाम में हिंदू नरसंहार के बाद आतंकियों ने बंद कर लिया सैटेलाइट फोन, 95 दिन बाद किया ऑन… सेना ने हूरों के पास भेजा: जानिए कैसे चला ‘ऑपरेशन महादेव’, कौन था मूसा

जम्मू कश्मीर में 22 अप्रैल, 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले का सरगना सुलेमान मूसा मार गिराया गया है। उसे भारतीय सेना और बाकी सुरक्षाबलों के एक ऑपरेशन में 28 जुलाई, 2025 को श्रीनगर के जंगलों में मार गिराया गया। उसके साथ 2 और आतंकी मारे गए हैं। इनके लिए सेना बीते कई दिनों से तलाश कर रही थी। इनके बारे में सुराग सैटेलाइट फोन से मिला। सेना ने कुछ ही घंटों में इनके ठिकाने को ध्वस्त कर इन्हें मार गिराया। सेना ने इस पूरी कार्रवाई को ऑपरेशन महादेव नाम दिया।

कहाँ हुआ ऑपरेशन महादेव?

ऑपरेशन महादेव को 28 जुलाई, 2025 की सुबह चालू किया गया था। यह विशेष ऑपरेशन श्रीनगर जिले के दाचीगाम इलाके में हुआ। यह इलाका महादेव की पहाड़ियों के नीचे पड़ता है। यहाँ यह आतंकी कई दिनों से छुपे हुए थे। इन्होंने यहाँ अपना टेंट लगाया हुआ था। इलाके में घने जंगल होने के चलते इन्हें कोई जल्दी पहचान नहीं पाता। यह तीन आतंकी यहाँ टेंट में अपने खाने-पीने का सामान रखे हुए थे। यहीं पर बड़ी मात्रा में हथियारों का इंतजाम था। इनके पास अपने हैंडलर्स से बातचीत के लिए भी पूरा इंतजाम था।

कैसे ढूंढें गए आतंकी?

इन तीनों आतंकियों की मूवमेंट के बारे में कई दिनों से सेना को सूचना मिल रही थी। इनको 14 दिनों से ट्रैक किया जा रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनकी मौजूदगी की पुष्टि एक रेडियो सिग्नल से हुई। यह आतंकी चीन में बने सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे ही बातचीत करते थे।

इसके सिग्नल को सेना ने शनिवार (26 जुलाई, 2025) को डिटेक्ट किया। इसके बाद सेना ने पुष्टि के लिए स्थानीय मुखबिरों को एक्टिव किया। बताया गया कि इस काम में स्थानीय घोड़े-खच्चर वालों से पूछताछ की गई। यहाँ ड्रोन से भी सर्वे करवाया गया, जिसमें हरकत दिखी।

इनसे इनकी मूवमेंट की पुष्टि हो गई। रेडियो सिग्नल भी इसलिए पकड़ लिया गया क्योंकि पहलगाम हमले के समय भी ऐसा ही हुआ था। पहलगाम हमले के समय भी बैसारन घाटी में यही चीनी सैटेलाइट सिग्नल पकड़ा गया था। सुरक्षाबल इसे तबसे ट्रैक कर रहे थे। जब सेना को इसका सुराग मिला तो पक्का करके उन पर सीधा हमला बोला गया। पक्की सूचना ही वह आधार बनी, जिसके कारण तीनों आतंकी मारे गए और सेना को कोई नुकसान नहीं हुआ।

ऑपरेशन महादेव कैसे हुआ?

रेडियो सिग्नल और स्थानीय मुखबिरों से मिली सूचना के चलते सुरक्षाबलों ने यह अपनी तैनाती चालू कर दी थी। ऑपरेशन वाली साइट के आसपास CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घेरा बनाया था जबकि जंगल के भीतर सेना की 4 पैरा SF यूनिट सर्च अभियान चला रही थी। यह इलाका सेना की चिनार कोर के अंतर्गत आता है। बताया गया कि 11 बजे सेना की मुठभेड़ आतंकियों से चालू हो गई। इसके बाद सेना की कार्रवाई में यह तीनों आतंकी मारे गए। यह ऑपरेशन कुछ ही देर चला और आतंकी कोई नुकसान नहीं पहुँचा पाए।

कौन-कौन थे मारे गए आतंकी?

इस ऑपरेशन में 3 आतंकी सुरक्षाबलों ने मार गिराए। इनके नाम हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान शाह, जिबरान तथा हमजा अफगानी हैं। यह तींनों पाकिस्तानी हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम हाशिम मूसा का है। हाशिम मूसा को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार माना गया है। वह आतंकियों की टीम का मुखिया था। पहलगाम हमले के बाद उसका स्केच भी जारी हुआ था। उस पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ₹20 लाख का इनाम घोषित किया था।

हाशिम मूसा पाकिस्तानी फ़ौज की SSG यूनिट का पूर्व फौजी है। वह लश्कर-ए-तैयबा के लिए कई सालों से काम कर रहा है। मूसा को विशेष ट्रेनिंग हासिल है। मूसा की तलाश हमले के बाद से जारी थी। बताया गया कि ऑपरेशन चालू होने से कुछ देर पहले तक मूसा सो रहा था। बताया गया कि वह Z मोड़ सुरंग आतंकी हमले को अंजाम देने में शामिल था। इसमें 6 लोग मारे गए थे। मूसा के भारत में कठुआ और साम्बा इलाके से घुसने की सूचना आई थी। अब उसका अंत हो गया है।

आतंकियों के पास से क्या मिला?

सुरक्षाबलों ने आंतकियों को जहाँ ढेर किया है, वहाँ पर वह पिछले लगभग 2 सप्ताह से से टेंट लगाकर रह रहे थे। मारे गए आतंकियों के पास से 1 अमेरिकी M4 राइफल, 2 AK-47 राइफल और बड़ी संख्या में ग्रेनेड बरामद हुए हैं। इसके अलावा यहाँ बड़ी मात्रा में खाने-पीने का सामान मिला है। इससे पता चला है कि यह आतंकी संभवतः किसी बड़े हमले की फिराक में थे और लम्बे समय तक जंगल में रुकने वाले थे।

पहलगाम हमले के 97 दिन बाद यह ऑपरेशन हुआ है और बदला पूरा हुआ है। इस हमले में 26 हिन्दुओं को चुन-चुन कर मारा था। सेना के DGMO राजीव घई ने कहा है कि चिनार कोर आतंकियों को उनके पास भेजेगी, जिन्होंने उन्हें बनाया है।

बाहर से आने लगे मौलवी, उगने लगे मस्जिद-मदरसे: बच्चों का खतना करवाने को कर रहे मजबूर, शवों का दाह संस्कार करने से भी हिंदुओं को रोक रहे

राजस्थान के अजमेर, भीलवाड़ा, ब्यावर, पाली और राजसमंद जैसे जिलों में मेहरात (Mehrat) समुदाय के लोग रहते हैं। इन्हें चीता-मेहरात भी कहा जाता है। मुख्य धारा की मीडिया इन्हें एक ऐसे समुदाय के रूप में पेश करती है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम अपने-अपने रीति-रिवाजों के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से रहते हैं।

लेकिन अब इस समुदाय के लोगों पर जबरन मजहब थोपा जा रहा है। हिंदुओं को दाह संस्कार से रोका जा रहा है। बच्चों का खतना करवाने को मजबूर किया जा रहा है। होलिका दहन जैसी हिंदू परंपराओं को रोका जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए बाहर से मौलवी आ रहे हैं। वे गाँव में मस्जिद और मदरसे बनवाकर धर्मांतरण की कोशिश कर रहे हैं।

मेहरात समुदाय OBC वर्ग में आता है। गौर करने वाली बात है कि जो मेहरात इस्लाम का अनुकरण करते हैं। उनके पूर्वज भी हिंदू से मुस्लिम बने थे। लेकिन उन्होंने इस्लाम की कुछ ही रिवाजों को अपनाया था। इन इलाकों को मजहबी कट्टरपंथ के प्रभाव से पहले तक ये लोग भी हिंदू परंपराओं का निर्वहन करते थे।

मेहरात समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता को छीनने की चल रही साजिश पर राजस्थान पत्रिका ने विस्तार से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस्लामिक कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव के कारण कई गाँवों में शव का दाह संस्कार कराने के लिए लोगों का पुलिस का सहयोग तक लेना पढ़ा।

राजस्थान चीता मेहरात हिंदू मगरा-मेरवाड़ा महासभा के संरक्षक छोटू सिंह चौहान के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है, “अजमेर, ब्यावर, पाली, राजसमंद और भीलवाड़ा में चीता, मेहरात और काठात समुदाय के धर्मांतरण का प्रयास इस्लामी संस्थाएँ कर रही हैं। गाँवों में मस्जिदें और मदरसे बनवा कर मौलवी ओबीसी में आने वाली जातियों के लोगों को मुस्लिम बनाने के प्रयास कर रहे हैं।”

छोटू सिंह के अनुसार करीब 800 साल पहले उनके समाज के कुछ लोगों ने इस्लामी रीतियों को अपना लिया था। बावजूद हिंदू धर्म का प्रभाव बना रहा। समाज के लोग पूजा से लेकर विवाह तक हिंदू परंपराओं का निर्वहन करते रहे हैं। लेकिन बीते दो दशक से क्षेत्र में बाहर के मौलवियों का आना-जाना बढ़ गया है। इसके बाद से दाढ़ी-टोपी रखने, इस्लामी नाम रखने, मस्जिद जाने का चलन बढ़ गया है।

मेहरात जाति बताते ही मुस्लिम समझा

ब्यावर के राजियावास गाँव निवासी सूरज काठात बताते हैं कि वह यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। फॉर्म भरते समय जाति में मेहरात लिखा, लेकिन फिर भी धर्म के कॉलम में हिंदू धर्म के बजाए मुसलमान बना दिया गया। सूरज कहते हैं कि वह हिंदू हैं और उन्हें इसी धर्म से पहचाना जाए।

बच्चों का खतना नहीं करवाया तो गाँव से निकाला

सुहावा गाँव में बच्चों का खतना ना करवाने वाले लोगों को दुश्मन बना लिया जाता है। इस गाँव में 90 के दशक से बाहर से मौलवी आकर इस्लामी तौर-तरीके बताते हैं। जब इनपर रोक लगाई गई तो कट्टरपंथियों ने गाँव के ही मोहन को शम्सुद्दीन बनाकर मस्जिद का मौलवी लगा दिया।

गाँव के सज्जन काठात ने बताया कि उनके बेटे का खतना करवाना चाहते थे, उन्होंने मना किया तो गाँव से निकाल दिया। यहाँ तक की सज्जन को उनके ही खेतों पर जाने से तक रोका गया।

दाह संस्कार के बजाए देह दफनाने का डाला दबाव

ब्यावर के सराधना गाँव में हिंदू रीति-रिवाजों से दाह संस्कार करने से रोका जाता है। यहाँ इस्लामी कट्टरपंथी शव को दफनाने का दबाव डालते हैं। गाँव के कालू सिंह कहते हैं कि पिता का दाह संस्कार करना चाहा, तो भीड़ ने पथराव किया। यहाँ तक लोगों ने उनके बूथ से दूध खरीदने बंद कर दिया। अब वह बूथ को किराए पर देकर टैंकर चलाते हैं।

बाडिया गाँव के रहने वाले प्रेम चीता के साथ भी ऐसा ही हुआ। जब उनके पिता का देहांत हुआ और वे दाह संस्कार करवाने पहुँचे तो लोगों ने विरोध किया। बाद में पुलिस की सुरक्षा में दाह संस्कार करवाया गया। वह बताते हैं कि गाँव में पहले शवदाह स्थल भी नहीं था, जिसे उन्होंने ही आवंटित करवाया है।

बांग्लादेश के रंगपुर में 15 हिंदुओं के घरों को लूटा, किया आग के हवाले: इस्लामी भीड़ ने ईशनिंदा के नाम पर 50 परिवारों को किया भागने पर मजबूर

बांग्लादेश के रंगपुर जिले में इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं को निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गंगाचारा उपजिला के बेटगारी यूनियन में रविवार (27 जुलाई 2025) को 500-600 मुस्लिमों की भीड़ ने 15 से ज्यादा हिंदू घरों पर हमला किया। उन्होंने ‘ईशनिंदा’ के बहाने घरों में तोड़फोड़ की और सामान लूट लिया।

खबरों के मुताबिक, यह हमला रविवार शाम करीब 4:30 बजे हुआ। मुस्लिम भीड़ ने सिर्फ हिंदू घरों को निशाना बनाया और उनका सामान लूट लिया। डर की वजह से कम से कम 50 हिंदू परिवार अपने घर छोड़कर भाग गए।

यह हिंसा शनिवार (26 जुलाई 2025) से शुरू हुई, जब मुस्लिमों ने एक हिंदू व्यक्ति के घर पर लाठी और हथियारों से हमला किया।

रविवार शाम को फिर से मुस्लिम भीड़ ने हिंदू परिवारों के घरों को घेर लिया, तोड़फोड़ की और लूटपाट की। उनके पास लाठियाँ और देसी हथियार थे। एक हिंदू महिला ने रोते हुए कहा, “अब हम कैसे जिएँगे? हम पूरी तरह बर्बाद हो गए। उन्होंने (मुस्लिमों ने) सब कुछ छीन लिया।”

एक युवा हिंदू लड़की ने ‘आजकर पत्रिका’ को बताया कि जब हमलावर उनके घरों में तोड़फोड़ करने आए, तब पुलिस वहाँ थी। पुलिस ने पहले भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन बाद में भाग गई और हिंदुओं को उनकी किस्मत के भरोसे छोड़ दिया।

लड़की ने पूछा, “हम जैसे निर्दोष लोगों के घर क्यों तोड़े और लूटे गए?” उसे नहीं पता था कि मुस्लिम भीड़ ‘सामूहिक सजा’ देने के लिए ऐसा करती है।

गंगाचारा पुलिस के ओसी अल इमरान ने माना कि उन्होंने 500-600 मुस्लिमों की भीड़ को इकट्ठा होने दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि यह ‘शांतिपूर्ण मार्च’ है। उन्होंने कहा, “लेकिन अचानक उन्होंने हमला शुरू कर दिया। एक पुलिसवाला गंभीर रूप से घायल हो गया।”

उन्होंने यह भी बताया कि मुस्लिम भीड़ ने दोपहर की नमाज के बाद यह हमला किया।

स्थानीय हिंदू निवासी प्रमोद महंत ने ‘प्रथम आलो’ को बताया कि मुस्लिमों ने बाजार में विरोध प्रदर्शन की बात कही थी, लेकिन जल्द ही नारे लगाने शुरू किए और हिंदू घरों पर हमला कर दिया।

बाद में पुलिस और फौज ने स्थिति को नियंत्रण में किया। हमलावर मौके से भाग गए। ऑपइंडिया के सूत्रों ने बताया कि हिंदू घरों को नष्ट करने के मामले में अभी तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

इसी तरह की हिंसा और आगजनी का तरीका मई में बांग्लादेश के जेसोर जिले में हिंदू समुदाय को सजा देने के लिए मुस्लिम भीड़ ने इस्तेमाल किया था।

कैसे शुरु हुए इस्लामी भीड़ के हमले?

शनिवार (26 जुलाई) को गंगाचारा में 18 साल के हिंदू लड़के रंजन रॉय को ‘ईशनिंदा’ के बिना सबूत के आरोपों में गिरफ्तार किया गया।

खबरों के मुताबिक, रंजन पर इस्लाम का अपमान करने और फेसबुक पर पैगंबर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक पोस्ट करने का आरोप था। कहा गया कि उसने ‘रंजन रॉय एलआरएम’ नाम के आईडी से पाँच दिनों तक ऐसी पोस्ट कीं।

पत्रकार और फैक्ट-चेकर सोहन आरएसबी ने बताया कि रंजन का फेसबुक पर एक डुप्लिकेट अकाउंट था, और कथित तौर पर अपमानजनक पोस्ट उसी नए अकाउंट से की गई थीं। उन्होंने बताया कि नए अकाउंट ने रंजन के पुराने अकाउंट की तस्वीरें लेकर उसके परिवार के बारे में अपमानजनक कैप्शन के साथ पोस्ट की थीं।

बिना तथ्यों की जाँच किए, गुस्साई मुस्लिम भीड़ गंगाचारा की सड़कों पर उतर आई और हिंदू लड़के के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगी।

पुलिस ने जल्दी ही उनकी माँग मान ली और यह जाँच किए बिना कि नया फेसबुक अकाउंट रंजन का है भी या नहीं, 18 साल के लड़के को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ओसी अल इमरान ने कहा, “जब लोग गुस्सा हो गए, तो हमने उसे गिरफ्तार करने के लिए छापा मारा और कानून-व्यवस्था को नियंत्रित किया। उससे पूछताछ हो रही है।”

इसके बावजूद, यह मुस्लिमों के लिए हिंदू घरों में तोड़फोड़ और लूटपाट का बहाना बन गया, जिससे उनकी घर, दुकान और जीवन जीने के साधन नष्ट हो गए।

ऑपइंडिया ने पहले भी 13 ऐसे मामलों को उजागर किया था, जहाँ ‘ईशनिंदा’ के बहाने हिंदुओं पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया, उन्हें प्रताड़ित किया और सताया।

हिंदू लड़कों ने खोली लव जिहाद की पोल तो पेशाब पीने को किया मजबूर, खुद को ‘RSS कार्यकर्ता’ बताते थे बहराइच ‘मुस्लिम गैंग’ के मेंबर: जाति की लड़ाई करवाना चाहते थे

बहराइच में लव जिहाद गैंग में शामिल मुस्लिम लड़के हिंदुओं में जातिगत लड़ाई करवाना चाहते थे। उन्होंने हिंदू नाम से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाए थे और वह हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण में भी लगे हुए थे। यह खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य भी बताया करते थे। इन मुस्लिमों को हिन्दू लड़कों पर हमले के बाद गिरफ्तार किया गया था।

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम गैंग में शामिल शहाबुद्दीन ने सोशल मीडिया पर सन्नी प्रताप सिंह नाम से अकाउंट बनाया हुआ था। इससे वह हिन्दुओं के बीच जातिगत घृणा फैलाता था। वह इसी अकाउंट के माध्यम से जातिगत टिप्पणियाँ करता था। वह खुद को बजरंग बली का भक्त बताता था।

उसके अकाउंट पर और भी जाँच चल रही है। वर्तमान में वह गिरफ्तार हो चुका है। हिन्दुओं को जातिगत तौर पर लड़ाने की मंशा रखने वाले यह युवक हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए भी पहचान छुपाने का पैंतरा अपनाते थे।

उसने और उसके साथियो युवकों ने हिंदू युवतियों को प्रेमजाल में फँसाने के लिए फर्जी पहचान अपनाई थी। गुरुवार (24 जुलाई 2025) को पुलिस ने लव जिहाद गैंग के तीन मुख्य आरोपितों शहाबुद्दीन, अनस और जीशान को गिरफ्तार किया है।

RSS के जिला प्रचार प्रमुख विपिन कुमार ने मामले को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री और प्रशासन को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की माँग की है। उनके अनुसार इस गैंग में 15 से अधिक युवक शामिल हैं, जिन्होंने हिंदू नामों से फर्जी आइडी बनाकर समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की है।

गौरतलब है कि इन मुस्लिमों ने लव जिहाद का विरोध करने पर 2 हिन्दू युवकों को बुरी तरह पीटा था। उन्हें जबरन पेशाब पिलाकर इस्लाम जिंदाबाद और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगवाए थे। पुलिस ने इसके बाद इन्हें गिरफ्तार किया था।

‘क्या अपने पक्ष में चाहते थे जाँच रिपोर्ट’: सुप्रीम कोर्ट ने ‘कैश कांड’ वाले जस्टिस यशवंत वर्मा से पूछा, कहा- दायर ही नहीं होनी चाहिए थी आपकी याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने ‘घर से निकले जले नोट’ वाले जस्टिस यशवंत वर्मा को सोमवार को जमकर लताड़ लगाई। जाँच रिपोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूछा, “अगर जस्टिस वर्मा को जाँच प्रक्रिया में दिक्कत थी, तो समिति के सामने पेश क्यों हुए। क्या अपने पक्ष में रिपोर्ट चाहते थे?”

सुप्रीम कोर्ट की इन हाउस कमेटी ने जस्टिस वर्मा को इस मामले में दोषी पाया था। इसके खिलाफ जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, “ये याचिका दायर ही नहीं होनी चाहिए थी।”

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में माँगी गई राहत दरअसल सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ ही है।

कोर्ट ने पूछे जस्टिस वर्मा के वकील से सवाल

जस्टिस दत्ता ने कहा, “अगर जस्टिस वर्मा को जाँच प्रक्रिया में दिक्कत थी, तो जाँच कमेटी के सामने क्यों पेश हुए, क्या आप जाँच के पूरा होने और रिपोर्ट के आने का इंतजार कर रहे थे। क्या आप अपने पक्ष में रिपोर्ट चाहते थे। आप उस वक्त ही कोर्ट की शरण में क्यों नहीं आए?”

जस्टिस ने कहा कि याचिका में असली आपत्ति सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया पर है। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से ऐसी चूक कैसे हो गई? कोर्ट से साफ किया है कि वह रिकॉर्ड से बाहर के किसी दस्तावेज पर विचार नहीं करेंगे। जस्टिस दत्ता ने कहा, ” अगर आप रिपोर्ट पर बहस करना चाहते हैं तो उसे रिकॉर्ड में लाना जरूरी है।”

समिति की प्रक्रिया पर कोर्ट ने साफ किया, “समिति ने प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखी है। ये सिर्फ एक अनुशंसा है, फैसला नहीं।”

जस्टिस वर्मा की दलीलें

जस्टिस वर्मा के वकील कपिल सिब्बल ने जब संविधान का हवाला दिया, तो टॉप कोर्ट ने पूछा, ” क्या कहीं ये लिखा है कि इन हाउस समिति जाँच नहीं कर सकती है।”

जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना ने उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश की थी, जो असंवैधानिक और उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। सुनवाई के दौरान ये भी तर्क कपिल सिब्बल ने दिया कि अगर नकदी बरामद हुई थी तो ये किसकी थी? कितनी थी और उसे जस्टिस वर्मा के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है?

यशवंत वर्मा के घर से मिले थे अधजले नोट

जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित निवास स्थान पर 14 मार्च 2025 को आग लग गई थी। इस आगजनी में घर के स्टोर रूप में बड़ी मात्रा में अधजले नोट मिले थे। इसको लेकर जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाई थी।

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कई गवाहों, वीडियो और तस्वीरों से यह साबित होता है कि जस्टिस वर्मा के दिल्ली वाले घर के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में कैश खासकर 500 रुपए के नोट मिले थे, जिनमें से कुछ आधे जले हुए थे।

सबसे हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद ना तो जस्टिस वर्मा और ना ही उनके परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी और ना ही किसी बड़े ज्यूडिशियल ऑफिसर को इसकी जानकारी दी थी।