उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के सैधरी गाँव में एक ऐसी भयानक घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। यहाँ अनुसूचित जाति का युवक नितिन का मुस्लिम प्रेमिका से प्रेम-प्रसंग चल रहा था, जिसकी वजह से न सिर्फ उस पर जानलेवा हमला हुआ, बल्कि उनके भाई की हत्या भी कर दी गई।
जानकारी के मुताबिक, 2 अगस्त 2025 की सुबह, नितिन अपनी प्रेमिका से मिलने महेवागंज थाना क्षेत्र के एक नदी के पुल पर गया था। उसके साथ दो दोस्त भी थे। लेकिन उसे क्या पता था कि वहाँ उसका इंतजार सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि मौत का खौफनाक साया कर रहा था। अचानक प्रेमिका के परिजनों का गुस्से से भरा गैंग वहाँ आ धमका। वसीम, कलीम, अजीज, असलम और पप्पू नाम के ये पाँच लोग लाठी-डंडों और तेज धार वाले हथियारों से लैस थे। उनके चेहरों पर नफरत की आग साफ झलक रही थी, जैसे वे नितिन को सबक सिखाने आए हों।
बिना एक शब्द बोले हमलावरों ने नितिन पर टूट पड़ने का इरादा कर लिया। लाठियों की बौछार और डंडों की मार के बीच नितिन को बेरहमी से पीटा गया। उसकी चीखें हवा में गूँज रही थीं, लेकिन हमलावरों का दिल नहीं पसीजा। एक हमलावर ने उसकी गर्दन पर तेज धार वाले हथियार से वार किया। नितिन का शरीर खून से लथपथ हो गया, कपड़े फट गए और वह दर्द से कराहता हुआ बेहोश होकर नदी किनारे गिर पड़ा।
हमलावरों ने उसे मरा समझकर नदी में फेंक दिया, जैसे वह कोई बेकार चीज हो। यह सिर्फ एक हमला नहीं था, बल्कि नफरत और हिंसा का वह खौफनाक चेहरा था, जो अनुसूचित जाति नितिन की धार्मिक और जातिगत पहचान को कुचलना चाहता था।
मरा समझकर नदी किनारे छोड़ा
ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR की कॉपी के मुताबिक, नितिन के दोस्त किसी तरह जान बचाकर भागे और करीब एक किलोमीटर दूर उसके घर पहुँचे। वहाँ उन्होंने परिवार को बताया कि नितिन की जिंदगी खतरे में है। परिजन दौड़ते हुए नदी के पास पहुँचे। वहाँ का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए, क्योंकि नितिन खून से लथपथ बेहोश नदी में पड़ा था। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत गंभीर थी।
भाई को उतारा मौत के घाट
इस बीच वहाँ पहुँचे मुस्लिमों की भीड़ और नितिन के परिवार के बीच तीखी झड़प हो गई। इस झगड़े में नितिन का बड़ा भाई अमित भी हमलावरों के हत्थे चढ़ गया। उसे इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसके सिर और शरीर पर गहरे जख्म बन गए। अस्पताल में इलाज के दौरान अमित ने दम तोड़ दिया। एक परिवार का बेटा मर गया, दूसरा जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था। यह दृश्य गाँव के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं था।
वसीम, कलीम, अजीज, असलम और पप्पू के खिलाफ FIR
पुलिस ने नितिन के बड़े भाई की शिकायत पर FIR दर्ज की। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 115(2), 118(1), और 109(1) लगाई गईं, जो हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश और उकसावे जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ी हैं। FIR में वसीम, कलीम, अजीज, असलम और पप्पू को नामजद किया गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और 4 आरोपित को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन बाकी चार अब भी फरार हैं। पुलिस जगह-जगह छापेमारी कर उनकी तलाश में जुटी है।
इस मामले में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे हिंदू संगठनों ने भी दखल दिया है और जल्द कार्रवाई की माँग की है।
संदर्भित प्रकरण में कोतवाली सदर पर तत्काल सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर घटना करने वाले नामजद सभी चारो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अग्रिम विधिक कार्यवाही प्रचलित है।
यह घटना सिर्फ एक प्रेम कहानी का दुखद अंत नहीं है। यह उस गहरी नफरत को उजागर करती है, जो धर्म और जाति की दीवारों से पनपती है। नितिन का प्यार उसे और उसके भाई को मौत के मुँह में ले गया। हमलावरों ने न सिर्फ नितिन को निशाना बनाया, बल्कि उसकी धार्मिक और जातिगत पहचान को अपमानित किया। खून से सनी नदी और अमित की लाश इस बात का सबूत है कि यह हमला सिर्फ व्यक्तिगत रंजिश नहीं था। यह एक ऐसी सोच का नतीजा था, जो अनुसूचित जाति और हिंदू होने की सजा देना चाहती थी।
कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कुछ दिनों पहले चुनाव आयोग पर फर्जी वोटर बनाने का आरोप लगाते हुए दावा किया था कि कई वोटर लिस्ट में कई मकानों की संख्या 0 है। अब सामने आया है कि राहुल गाँधी उत्तर प्रदेश की जिस रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद हैं, वहाँ भी वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में लोगों के मकान नंबर 0 मिले हैं।
इसके अलावा रायबरेली में वोटर लिस्ट में एक ही पते पर 27 लोगों के नाम दर्ज मिले हैं। अब सवाल उठते हैं कि क्या राहुल गाँधी जो वोटर फर्जीवाड़े का आरोप चुनाव आयोग और बीजेपी पर लगा रहे हैं, वैसा ही फर्जीवाड़ा करके उन्होंने भी अपनी सीट जीती है?
राहुल की लोकसभा सीट पर भी 0 मकान नंबर वाले वोटर
राहुल गाँधी ने 7 अगस्त 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेस में कर्नाटक की बेंगलौर सेंट्रल लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का डेटा दिखाया था जिसमें वोटर लिस्ट में कई लोगों के नंबर के आगे 0 लिखा हुआ था। राहुल ने ऐसे दावों को बहुत बड़ा षड्यंत्र बताया लेकिन अपने बुने हुए जाल में राहुल गाँधी खुद ही फँस गए हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रायबरेली लोकसभा के तहत आने वाली रायबरेली विधानसभा की वोटर लिस्ट में भी ऐसे कई वोटर हैं जिनके मकान नंबर के आगे 0 लिखा हुआ है। रायबरेली वही सीट है जिस पर अब राहुल गाँधी और पहले उनकी माँ सोनिया गाँधी लगातार लोकसभा का चुनाव जीतते रहे हैं।
वोटर लिस्ट के जिस 0 मकान नंबर के आधार पर राहुल गाँधी ने वोटर चोरी और बीजेपी की जीत का दावा किया है, अगर उसकी कसौटी पर उनकी खुद की सीट को भी कसा जाए तो सवाल उठता है कि क्या उन्होंने भी फर्जी वोटों के सहारे अपना चुनाव जीता है? राहुल गाँधी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तो यही साबित करने की कोशिश की थी कि सारे फर्जी वोट जीतने वाली पार्टी को ही मिले हैं।
असल में वोटर लिस्ट में मकान नंबर 0 मिलना सिर्फ गड़बड़ी नहीं हो सकती है, क्योंकि अक्सर ऐसा होता है कि गाँव में लोगों को मकान नंबर की जानकारी नहीं होती है और वोटर लिस्ट में उनका नंबर 0 ही दर्ज कर लिया जाता है।
रायबरेली में एक पते पर कई वोटर, क्या राहुल गाँधी ने किया फर्जीवाड़ा?
राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि वोटर लिस्ट में एक ही पते पर 80 वोटर दर्ज हैं और उन्होंने इसे भी फर्जीवाड़े से जोड़ दिया था। राहुल गाँधी की रायबरेली सीट पर भी वैसा ही पैटर्न सामने आया जैसा वे दूसरों पर आरोप लगाते समय गिना रहे थे। एक बूथ में मकान संख्या 8 में 27 लोगों के नाम दर्ज मिले। दो अन्य बूथों में मकान संख्या 80 और मकान संख्या 4 पर 18-18 लोगों के नाम दर्ज हैं।
यह राजनीतिक विडंबना ही है कि जिस कथित फर्जीवाड़े का वो दावा कर रहे हैं, वैसा ही उनके चुनावी क्षेत्र में भी हो रहा है। भारत की विस्तृत चुनाव प्रणाली में यह कोई विशेष बात नहीं है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में अक्सर संयुक्त परिवार या किराएदारों के चलते ऐसी स्थिति बन जाती है। चुनाव आयोग समय-समय पर अपनी सूची में सुधार भी करता है।
बिहार में वोटर लिस्ट से जुड़ी विस्तृत SIR प्रक्रिया ऐसे ही सुधार का हिस्सा है। अब राहुल गाँधी को उस चुनाव सुधार पर भी ऐतराज है और उसके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। जब चुनाव आयोग ने शिकायत माँगी है तो किसी भी मामले में वो लिखित शिकायत देने को तैयार नहीं हैं।
क्या है राहुल गाँधी के एक पते 80 वोटरों वाले दावे का सच?
राहुल गाँधी ने एक मकान संख्या पर 80 फर्जी वोटरों का आरोप लगाते हुए जो दावा किया था उसकी भी अब पोल खुल गई है। महादेवपुरा के जिस मुनीयप्पा रेड्डी गार्डन क्षेत्र में यह मकान स्थित वहाँ के BLO मुनीरत्न ने न्यूज चैनल से बातचीत में बताया है कि यहाँ कोई डुप्लीकेसी का मामला नहीं है।
इस घर में अधिकांश लोग किराए पर रहने आते हैं और बीते 14 वर्षों से कोई स्थाई रूप से इसमें नहीं रहा है। पते के प्रमाण के लिए लोग रेंट एग्रीमेंट करवाकर वोटर आईडी बनवाते हैं लेकिन फिर मकान को छोड़ देते हैं।
मुनीरत्न ने कहा कि लोग रजिस्टर्ड हैं और जो अब कहीं और बाहर रह रहे हैं। पहले जिन लोगों का नाम यहाँ से रजिस्टर्ड था उनकी सूची बनाकर चुनाव आयोग को दे दी गई है और उसे हटा दिया जाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ युद्ध छेड़ा हुआ है और उनके निशाने पर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि सभी BRICS देश हैं। अमेरिकी टैरिफ से अलग-अलग देशों के व्यापार पर जो असर होना है, वो तो होगा है लेकिन ऐसा लग रहा है कि ट्रंप ने दुनिया भर के कई दुश्मन देशों को एकजुट कर दिया है। ट्रंप के इस टैरिफ वॉर से भारत-चीन भी फिर से नजदीक आते दिख रहे हैं।
ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर टैरिफ लगाया और तमाम तरह की धमकियाँ भी दी हैं। भारत को दी गईं इन धमकियों के चलते चीन ट्रंप पर बरस पड़ा है। यह असर सिर्फ चीन के राजनीतिक हलकों तक ही सीमित नहीं है बल्कि चीन का सरकारी मीडिया भी भारत को लेकर अपने सुर बदल रहा है।
ग्लोबल टाइम्स, चीनी सरकार का वो अखबार जो भारत के खिलाफ नैरेटिव फैलाने के लिए कुख्यात था, वो अब भारत के साथ दोस्ती और विकास की बातें करने लगा है। ट्रंप के टैरिफ के बीच चीन अब भारत के साथ अपनी दोस्ती पक्की करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है।
6 अगस्त 2025 को ग्लोबल टाइम्स ने एक ओपिनियन (विचार) प्रकाशित किया था। इसकी हेडलाइन थी “भारत ‘विदेशी निवेश का कब्रिस्तान’ के लेबल को क्यों नहीं हटा पा रहा?” इस लेख में तर्क दिया गया कि पश्चिमी मीडिया द्वारा फैलाया गया चीन और भारत के बीच ‘कौन किसकी जगह लेगा’ का नैरेटिव असल में बेबुनियाद है।
इस लेख में कहा गया है, “भारत और चीन के बीच सहयोग का लंबा इतिहास रहा है और उनकी अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के पूरक हैं। चीन भारत के साथ सहयोग को बहुत महत्व देता है और भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदारों में से शामिल है। आज के जटिल और लगातार बदलते वैश्विक परिदृश्य में, यह चर्चा करने के बजाय कि कौन किसकी जगह लेता है, एक-दूसरे की ताकत का इस्तेमाल करना, व्यावहारिक सहयोग पर काम करना और आपसी लाभ, सभी के लिए फायदे वाले परिणामों और साझा विकास को बढ़ावा देना कहीं अधिक समझदारी है।”
इस लेख में बात पर भी जोर दिया गया है कि भारत-चीन के संबंध खराब दौर से गुजरकर अब एक महत्वपूर्ण जगह पर पहुँच गए हैं। साथ ही, कहा गया है कि भारत-चीन के संबंध दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध दोनों के हित में रहते हैं।
भारत स्थित चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भी X पर यह लेख शेयर किया है। उन्होंने हाथी और ड्रेगन की दोस्ती दिखाने वाली तस्वीर शेयर कर लिखा, “आज के समय में दोनों देशों के लिए सहयोग और सहमति को बढ़ाना और एशिया व विश्व स्तर पर शांति को बढ़ावा देना समझदारी की बात होगी।”
Share with you an article @globaltimesnews. Western media create narrative of "who will replace whom" between #China and #India, which has little substantive value. In today's complex landscape, it makes far more sense for both nations to deepen trust, manage disagreements,… pic.twitter.com/W0CUcX9FRL
इसके बाद 7 अगस्त को ग्लोबल टाइम्स ने एक और ओपिनियन (विचार) प्रकाशित किया। इसे ब्राज़ील के एक पत्रकार ने लिखा था और इसमें बताया गया कि कैसे अमेरिका के आर्थिक दबाव के खिलाफ ग्लोबल साउथ को एकजुट होने की आवश्यकता है। इसमें लिखा गया कि ग्लोबल साउथ में अपने रणनीतिक साझेदारों को अलग थलग करने की जो अमेरिका की कोशिश है, उसका असर उल्टा ही होता है। इससे उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएँ और करीब आ जाती हैं और अमेरिका पर उनकी निर्भरता कम हो जाती है। ग्लोबल टाइम्स के 7 अगस्त के ही एक लेख में बताया गया कि भारत और ब्राज़ील के साथ मिलकर अमेरिका के टैरिफ का विरोध कर रहे हैं।
भारत को कभी इस बात का भ्रम नहीं था कि अमेरिका भारत के साथ बहुत गहरी दोस्ती निभाएगा। भारत को पता है कि अमेरिका का उससे दोस्ती रखने का बड़ा मकसद चीन के साथ बैलेंस बनाने की नीति ही है। इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि अमेरिका का एजेंडा अगर कोई देश ना माने तो उन्हें वो बिल्कुल भूल जाता है फिर चाहे दोस्ती कैसी भी हो।
अगर भारत अमेरिका का बराबरी का साझेदार न होता, तो वह खुशी-खुशी अमेरिका के आगे झुक जाता और ट्रंप की शर्तों पर ट्रेड डील साइन कर देता। लेकिन हुआ इसका उल्टा, भारत ने अपने किसानों की रोजी-रोटी पर चोट करने वाली माँग यानी अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए बाजार खोलने से साफ मना कर दिया। भारत ने रूस से तेल खरीदना भी बंद नहीं किया और अमेरिका व यूरोप की दोहरी नीति वाली सोच पर खुलकर वार भी किया है। इससे इतना तो साफ है कि अगर कोई देश भारत को जूनियर पार्टनर समझता है तो वह भूल ही कर रहा है। क्योंकि भारत पाकिस्तान नहीं है।
अमेरिका ने अगर यह सोचा था कि भारत, अमेरिका का भोंपू बनकर काम करेगा तो उसे BRICS और क्वाड में भारत की मौजूदगी से साफ पता चल जाना चाहिए था कि भारत किसी और देश की झोली में नहीं है और ना ही किसी एक महाशक्ति के सर्वशक्तिमान होने पर उसका भरोसा है।
ग्लोबल टाइम्स में 7 अगस्त को ‘RIC बहुध्रुवीय व्यवस्था को आगे बढ़ाने का एक रणनीतिक अवसर’ हेडलाइन से प्रकाशित एक अन्य लेख में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय सहयोग को फिर से शुरू करने के लिए इसे सिर्फ प्रतीक नहीं रहने देना होगा। इसमें कहा गया, “यह तीनों के लिए बाहरी प्रतिबंधों के दबाव के खिलाफ एकजुट होने, मुक्त विदेश नीति दिखाने और एक बहुध्रुवीय व्यवस्था को आगे बढ़ाने का एक रणनीतिक अवसर है।”
SCO शिखर सम्मेलन के लिए पीएम मोदी के चीन जाने की भी चर्चा है। इसी को लेकर गुरुवार को ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित संपादकीय लेख में कहा गया है, “अगर भारत पीएम मोदी की इस यात्रा को मौका मानकर अपनी चीन नीति में जल्दी बदलाव करे और बेवजह की रुकावटें हटाए, तो दोनों देशों के रिश्तों में आगे बढ़ने की बहुत ज्यादा गुंजाइश है।”
लेख में कहा गया कि पश्चिमी मीडिया जिस तरह मोदी जी की चीन यात्रा को अमेरिका के खिलाफ ‘संतुलन बनाने’ की कोशिश बता रहा है, वैसा नहीं है। इसमें लिखा गया, “आज दुनिया के ज्यादातर देशों की इच्छा है कि मुक्त व्यापार होता रहे और एकतरफा टैरिफ का विरोध हो।” ग्लोबल टाइम्स ने यह भी कहा कि भारत और चीन दोनों पुरानी सभ्यताएं हैं और तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी हैं। ये दोनों देश ग्लोबल साउथ के अहम सदस्य हैं और अपने विकास के एक अहम मोड़ पर हैं।
अखबार ने मोदी जी का स्वागत करते हुए एक हिंदू कहावत ‘अपने भाई की नाव पार लगाओ तो तुम्हारी नाव किनारे तक पहुँच जाएगी’ का जिक्र भी किया है। लेख में यह भी कहा गया कि क्षेत्रीय ताकतों के रूप में भारत और चीन के बीच आतंकवाद-रोधी कदम, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्रों में साझा हित हैं।
ग्लोबल टाइम्स ने संपादकीय में चीन का प्रतिनिधित्व करने के लिए आक्रामक ड्रैगन के बजाय पांडा का इस्तेमाल किया
दरअसल, भारत और चीन के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर दोनों पड़ोसी मिलकर काम कर सकते हैं, खासकर आतंकवाद से लड़ाई में लेकिन दिक्कत यह है कि चीन, पाकिस्तान को सैन्य और नीतिगत मदद देता है। पाकिस्तान में असल में सेना ही हुकूमत चलाती है और वह भारत के खिलाफ सीमा पार जिहादी आतंकवाद को बढ़ावा देता है। चीन का ऐसे देश का समर्थन करना भारत को कभी भी मंजूर नहीं होगा।
अगर भारत-चीन रिश्ते सच में सुधरने हैं तो बीजिंग को इस मसले पर गंभीर कदम उठाने होंगे। भारत यह भी नहीं भूला है कि पिछले मई में जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, तब चीन ने पाकिस्तान को बचाने का वादा किया था और रक्षा समर्थन भी दिया था।
पाकिस्तान का अमेरिका की तरफ झुकाव और ट्रंप की चापलूसी चीन के लिए आंख खोलने वाली बात होनी चाहिए। उसका यह ‘हर मौसम का दोस्त’ असल में सिर्फ डॉलर का दोस्त है।
जैसा कहा जाता है, वक्त की सबसे अच्छी बात यह है कि वह बदलता है। आज जब चीन खुद अमेरिका के टैरिफ युद्ध का सामना कर रहा है तो उसे भारत में एक अहम साझेदार और पश्चिमी दबाव के खिलाफ संतुलन का साधन दिखने लगा है। भले ही चीन की अपनी क्षेत्र में दबदबा बनाने और विस्तारवाद की महत्वाकांक्षाएं रही हैं लेकिन अब वह खुलकर भारत की उस सोच का समर्थन कर रहा है जिसमें दुनिया एक ही ताकत के बजाय कई ताकतों में बँटी हो। वहीं, अमेरिका एकतरफा दुनिया बनाना चाहता है जहाँ वह ‘बड़ा भाई’ बना रह सके।
भारत ने BRICS और SCO जैसे मंचों पर हमेशा अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता और संतुलित वैश्विक व्यवस्था की सोच रखी है। अब जब चीन भी इस सोच की तारीफ कर रहा है और ग्लोबल टाइम्स के लेखों में इसका असर दिख रहा है तो लगने लगा है कि बीजिंग भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है ताकि अमेरिका को टक्कर दी जा सके।
ग्लोबल टाइम्स अब भले ही मीठी बातें कर रहा हो लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि पहले यही अखबार भारत के खिलाफ लगातार जहर उगलता रहा है।
इसी साल मई में जब पहलगाम में पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के आतंक और सैन्य ढाँचों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था, तो ग्लोबल टाइम्स और शिन्हुआ जैसे बाकी चीनी प्रोपेगेंडा मीडिया ने झूठी खबर फैलाई कि पाकिस्तान के चीनी JF-17 लड़ाकू विमान ने पंजाब के आदमपुर में भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट कर दिया। बाद में भारतीय सेना ने सबूत देकर इन दावों को पूरी तरह झूठा साबित कर दिया।
इतना ही नहीं, ग्लोबल टाइम्स ने पाकिस्तानी फोर्स के इस दावे को भी फैलाया कि उन्होंने साइबर अटैक करके भारत के 70% पावर ग्रिड को ठप कर दिया है। इस झूठ को भी चीनी सरकारी मीडिया जैसे शिन्हुआ ने बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था।
चीन की वेबसाइट China.com ने भी पाकिस्तान के उस झूठे दावे को छापा था जिसमें कहा गया था कि उसने भारत के ब्रह्मोस मिसाइल भंडारण केंद्र को नष्ट कर दिया। इसी तरह Sina News ने पाकिस्तान के इस झूठ को फैलाया कि भारत ने नीलम-झेलम हाइड्रोपावर स्टेशन को निशाना बनाया। पाकिस्तान ने तो यहाँ तक फर्जी दावा किया था कि उसने एक भारतीय महिला पायलट को पकड़ लिया है और चीनी मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने इसे भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।
सबसे शर्मनाक बात यह रही कि Xinhua जैसे चीनी मीडिया ने पहलगाम में हुए इस्लामी आतंकी हमले को ‘शूटिंग की घटना’ बताया था। जबकि साफ था यह हमला पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के एक गुट द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकियों ने अंजाम दिया था। इस हमले में दो दर्जन से ज्यादा मासूम लोगों को सिर्फ इसलिए मार दिया गया क्योंकि वे मुस्लिम नहीं थे और चीनी मीडिया ने इसे धार्मिक नफरत से प्रेरित नरसंहार के बजाय एक मामूली गोलीबारी की घटना दिखाने की कोशिश की।
मई में जब पाकिस्तान के चीनी हथियार भारत के सामने नाकाम हो गए, तो चीन ने पश्चिमी मीडिया में प्रोपेगेंडा चलाकर अपनी इज्जत बचाने और भारतीय सेना को कमजोर दिखाने की कोशिश की। हकीकत यह है कि भारत ने हमले के दौरान पाकिस्तान के चीनी एयर डिफेंस सिस्टम को कुछ समय के लिए बेकार कर दिया था और पाकिस्तान को गहरे अंदर तक चोट पहुंचाई थी।
दरअसल, यह कोई नई बात नहीं है। चीनी सरकारी मीडिया लंबे समय से भारत की विदेश नीति को निशाना बनाता रहा है और भारत के अंदरूनी मामलों पर भी नकारात्मक और चालाकी भरे नैरेटिव फैलाता रहा है। OpIndia पहले भी चीन और कॉन्ग्रेस राहुल गाँधी के रिश्तों पर रिपोर्ट कर चुका है। हालाँकि, यह प्यार एक-तरफा नहीं है। ग्लोबल टाइम्स और बाकी चीनी मीडिया कई बार राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के बयानों का इस्तेमाल भारत को घेरने के लिए करते रहे हैं।
चीन खुद अपने विस्तारवादी रवैये और पड़ोसियों के साथ सीमा विवादों पर आक्रामक व्यवहार के लिए बदनाम है। फिर भी, अब उसका सरकारी मीडिया रणनीतिक स्वतंत्रता और संप्रभुता की बातें करने लगा है। लेकिन जब अगस्त 2024 में भारत ने अपना दूसरा परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN), INS अरिघाट को नौसेना में शामिल किया, तो ग्लोबल टाइम्स ने एक द्वेष से भरा लेख छापा कि ‘भारत की दूसरी परमाणु मिसाइल पनडुब्बी का जिम्मेदारी से इस्तेमाल होना चाहिए: विशेषज्ञ’ यानी भारत को ‘जिम्मेदार इस्तेमाल’ का नैतिकता का पाठ पढ़ाने की कोशिश की थी।
इतिहास देखें तो भारत-चीन रिश्ते हमेशा तनाव से भरे रहे हैं, सीमा विवाद, 2017 का डोकलाम संकट, 2020 की गलवान झड़प, आर्थिक मुकाबला, रणनीतिक अविश्वास और अलग-अलग वैश्विक गुटों में खड़ा होना, ये सब रिश्तों को मुशकिल बनाते रहे। मगर अब हवाएँ कुछ बदलती दिख रही हैं।
रिश्ते सुधारने के हाल के प्रयास उम्मीद जगाते हैं लेकिन भारत अभी भी चीन के इरादों पर पूरी तरह भरोसा नहीं करता है। मोदी सरकार, चीन की भारत-चीन दोस्ती की बातों को सावधानी और आशा के साथ देख रही है लेकिन साथ-साथ पूरी तरह सतर्क भी है।
दिलचस्प यह है कि ट्रंप के टैरिफ युद्ध ने अनजाने में वो कर दिया जो लगभग असंभव लगता है यानि चीन और भारत को एक मुद्दे पर साथ खड़ा कर दिया है। चीन के सख्त कंट्रोल वाले सरकारी मीडिया का यह बदला हुआ लहजा अहम है। टकराव से मेल-मिलाप की ओर यह बदलाव बीजिंग की एक नई दिशा को दिखा रहा है। लगता है कि पीएम मोदी की चीन यात्रा से पहले चीन, भारत के साथ विचारधारा और रणनीति की खाई पाटने की कोशिश कर रहा है।
यह जितना अजीब सुनने में लगता है, उतना ही सच भी है। चीन का टकराव से दोस्ती की ओर आना दिखाता है कि ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ का सपना, असल में ‘BRICS फर्स्ट’ की हकीकत में बदलता जा रहा है।
मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में श्रद्धा पाण्डेय ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 1 लाख 50 हजार 590 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह पिछले साल से 18% ज्यादा और 2019-20 की तुलना में 90% की बड़ी बढ़ोतरी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियानों की ऐतिहासिक कामयाबी बताया।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस बारे में एक्स पर पोस्ट करके सूचना दी है। उन्होंने लिखा, “भारत का रक्षा उत्पादन 2024-25 में रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया। पिछले साल के 1.27 लाख करोड़ से 18% ज्यादा और 2019-20 के 79,071 करोड़ से 90% की बड़ी बढ़ोतरी। मैं रक्षा उत्पादन विभाग, सरकारी कंपनियों और निजी उद्योगों की मेहनत की तारीफ करता हूं। ये तरक्की दिखाती है कि भारत का रक्षा उद्योग कितना मजबूत हो रहा है।”
I commend the collective efforts of the Department of DefenceProduction and all stakeholders i.e., DPSUs, public sector manufacturers, and the private industry in achieving this landmark. This upward trajectory is a clear indicator of India's strengthening defence industrial…
सरकार के आँकड़ों के मुताबिक, रक्षा उत्पादन में 77% हिस्सा रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (डीपीएसयू) और सरकारी संस्थाओं का है, जबकि 23% निजी कंपनियों का योगदान है। खास बात ये है कि निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी में 2% की बढ़ोतरी हुई, जो रक्षा निर्माण में उनकी बढ़ती भूमिका दिखाती है। डीपीएसयू के उत्पादन में 16% और निजी क्षेत्र में 28% की वृद्धि हुई।
मंत्रालय का कहना है कि नीतिगत सुधार, व्यापार को आसान बनाना और स्वदेशी उत्पादन पर जोर देने से ये मुमकिन हुआ। यह न सिर्फ रक्षा क्षेत्र को मजबूत कर रहा है, बल्कि रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा दे रहा है।
आत्मनिर्भर भारत के तहत पुराने हेलीकॉप्टरों की विदाई, नए निर्माण की तैयारी
इसके साथ ही, मोदी सरकार सेना और एयरफोर्स को अपग्रेड करने में जुटी है। पुराने चेतक और चीता हेलीकॉप्टरों को रिटायर करने की तैयारी शुरू हो गई है। ये हेलीकॉप्टर 1960 के दशक की डिजाइन पर बने थे और लंबे समय से सेना-एयरफोर्स में काम कर रहे थे। लेकिन अब इनकी क्षमता और सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। हाल के सालों में इनमें कई दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें बहादुर सैनिकों ने बलिदान दिया। इसलिए इन्हें धीरे-धीरे हटाया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने 200 नए हल्के हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए जानकारी माँगी है। इनमें से 120 सेना को और 80 एयरफोर्स को मिलेंगे। ये हेलीकॉप्टर दिन-रात टोही, निगरानी, खोज-बचाव, विशेष मिशन, सैनिकों की तेज तैनाती और सामान ढोने में सक्षम होंगे। ये हमलावर हेलीकॉप्टरों के साथ तालमेल बनाकर काम करेंगे और अंदर-बाहर से भारी सामान उठा सकेंगे, जिससे इनका इस्तेमाल बहुत लचीला होगा।
रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि ये हेलीकॉप्टर भारत में ही बनाए जाएँगे। भारतीय कंपनियाँ विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर इन्हें तैयार करेंगी। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल मिलेगा और स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से 156 हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर खरीदने की मंजूरी दी गई है। इनकी लागत 45 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है।
ये हेलीकॉप्टर सेना और एयरफोर्स के पास रहेंगे और चीन-पाकिस्तान सीमाओं पर तैनात होंगे। इससे सीमाओं पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी। एयरफोर्स हल्के फाइटर जेट (एलसीए), हल्के उपयोगी हेलीकॉप्टर (एलयूएच), मल्टी-परपज हेलीकॉप्टर और हवा में ईंधन भरने वाले विमानों की खरीद की योजना बना रही है। साथ ही रडार, गाइडेड हथियार, ड्रोन (यूएवी) और ट्रेनिंग विमानों के निर्माण पर भी ध्यान दे रही है।
ये आधुनिक हेलीकॉप्टर न केवल सर्वे और निगरानी करेंगे, बल्कि छोटे सैनिक दलों की आवाजाही, विशेष अभियानों में सहायता, हमलावर हेलीकॉप्टरों के साथ समन्वय और सामरिक रसद पहुँचाने जैसे कार्यों के लिए भी सक्षम होंगे। साथ ही ये आंतरिक और बाहरी भार वहन करने में भी सक्षम होंगे, जिससे इनका इस्तेमाल बेहद लचीला और उपयोगी बन जाता है।
यह सारी कोशिशें भारत को एक ताकतवर रक्षा शक्ति बनाने की दिशा में हैं। रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी से न सिर्फ सेना-एयरफोर्स आधुनिक होंगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा। स्वदेशी निर्माण से विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा। निजी और सरकारी क्षेत्र की साझेदारी इस दिशा में एक नया रास्ता खोल रही है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि भारत के रक्षा क्षेत्र की ताकत और आत्मनिर्भरता की मिसाल है। पुराने उपकरणों को हटाकर नए लाना और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना देश को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पुरुष और दलित महिला के उस जोड़े को राहत देने से इनकार किया है, जिसने ‘लिव इन’ में रहने की बात करते हुए गिरफ्तारी पर रोक की गुहार लगाई थी। हाई कोर्ट ने कहा है कि इस्लामी कानून के अनुसार हिंदू और मुस्लिम का लिव इन में रहना ‘हराम’ है।
अदालत ने कहा कि इस्लामी कानून में ‘जिना’ की सजा 100 कोड़े हैं। मोटे तौर पर जिना का अर्थ निकाह के बगैर कामुक रिश्तों से है। अदालत ने कहा कि इस्लाम में निकाह से पहले ‘किस’ और ‘टच’ जैसी किसी भी प्रकार की यौन गतिविधि ‘हराम’ बताई गई है।
29 जुलाई 2025 के अपने इस आदेश में जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ ने यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश में जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए बनाने गए कानून से बचने के लिए भी लिव इन का दुरुपयोग हो रहा है।
इस मामले में युवती के पिता ने BNS और SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई है। कोर्ट में युवक-युवती लिव इन में रहने से जुड़े पूरे सबूत भी नहीं दे पाए। इसके बाद कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे रिश्तों को धर्मांतरण के कानून या पर्सनल लॉ के तहत नैतिकता से बचने का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे एक-दूसरे से प्यार करते हैं। बालिग हैं। इसके कारण अपनी मर्जी से किसी के भी साथ रहने को स्वतंत्र हैं। लेकिन युवती के पिता और पुलिस उन्हें परेशान कर रही है। इस दलील को मानने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि कपल को साथ रहने के लिए उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी ऐक्ट के हिसाब से कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
क्या है इस्लाम का जिना, इस पर हाई कोर्ट ने क्या कहा?
इलाहाबाद हाई कोर्ट कहा, “इस्लामी कानून में निकाह के बिना यौन संबंध को मान्यता नहीं दी जा सकती। मियाँ-बीवी बीच के यौन संबंध के अलावा किसी भी अन्य यौन संबंध को ‘जिना’ माना गया है। इसमें निकाह से पहले या निकाह के बाद किसी गैर मर्द/औरत से संबंध भी शामिल है। इस तरह निकाह से पहले यौन संबंध इस्लाम में जायज़ नहीं है।”
हाई कोर्ट ने आगे कहा, “निकाह से पहले किसी भी प्रकार की यौन, कामुक, स्नेहपूर्ण क्रिया जैसे चुंबन, स्पर्श, घूरना जैसी चीजें इस्लाम में ‘हराम’ है क्योंकि इन्हें ‘ज़िना’ का हिस्सा माना जाता है। कुरान के अनुसार ऐसे अपराध की सजा व्यभिचार सौ कोड़े मारने की है। ‘सुन्नत’ में इसकी सज़ा पत्थर से मार-मारकर जान लेने की है।”
हाईकोर्ट के आदेश का हिस्सा
हाई कोर्ट ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अपनी रिश्ते को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर पाए। वे अपनी उम्र और अन्य जरूरी तथ्यों की जाँच कराए बगैर रिश्ते पर अदालत की मुहर चाहते थे। हाई कोर्ट ने इस दौरान लिव इन से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का हवाला भी दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि कुछ फैसले बालिगों के सहमति से बनाए संबंधों के पक्ष में हैं, लेकिन इन्हें सभी लिव इन रिलेशनशिप पर लागू नहीं माना जा सकता।
मुस्लिमों को लिव इन में रहने का अधिकार नहीं: हाई कोर्ट
इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अन्य फैसले में कहा था कि इस्लाम को मानने वाला व्यक्ति लिव इन रिलेशनशिप में रहने का दावा नहीं कर सकता। खासकर तब जब उसका जीवन साथी जीवित हो। यह फैसला जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनाया था।
लिव इन रिलेशनशिप पर क्या कहता है भारत का कानून?
भारतीय कानून में लिव इन रिलेशनशिप को खास तौर पर परिभाषित करने वाला कोई अधिनियम नहीं है। लेकिन इन संबंधों को संविधान के अनुच्छेद 21 से कानूनी अधिकार मिलता है। सुप्रीम कोर्ट यह मानता है कि वयस्कों को अपनी पसंद के साथी के साथ रहने का मौलिक अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा शर्मा बनाम वीएवी शर्मा 2013 के मामले में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर गाइडलाइंस दी हैं। इनमें ‘लिव-इन में रहने वालों का व्यस्क होना, एक तय अवधि तक साथ रहना, एक घर में साथ रहना, एक ही घर की वस्तुओं का इस्तेमाल करना, बच्चों को प्रेम से रखना और लोगों को यह जानकारी होना कि दोनों साथ रहते हैं’ जैसी चीजें शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2006) मामले में कहा है कि दो बालिगों के बीच सहमति से लिव इन संबंध कोई अपराध नहीं है, भले ही इसे अनैतिक माना जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में कट्टुकंडी एडथिल कृष्णन बनाम वाल्सन मामले में कहा कि लंबे समय के लिव इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों को वैध माना जा सकता है। यदि कोई पुरुष और महिला सहमति से लंबे समय तक एक साथ रहते हैं तो उनके बच्चे को पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी से वंचित नहीं किया जा सकता है।
अखिलेश बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2020) में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि कोई पक्षकार पहले से विवाहित है तो लिव इन रिलेशनशिप अवैध मानी जा सकती है।
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 9 अगस्त 2024 को महिला जूनियर डॉक्टर के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने राज्यभर में आक्रोश फैला दिया और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो छह हफ्तों से ज्यादा समय तक चले। ये प्रदर्शन अब भी जारी है, जिसे अब ममता सरकार ताकत के दम पर दबाने में जुट गई है।
अब, इस घटना को एक साल बीत चुका है, लेकिन द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता को न्याय दिलाने की माँग को लेकर प्रदर्शन करने वाले जूनियर डॉक्टरों को लगातार कानूनी और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
जिन डॉक्टरों ने विरोध का नेतृत्व किया, उनमें अनिकेत महतो, अशफाकउल्ला नैया, किंजल नंदा और देबाशीष हलदर प्रमुख नाम हैं। इन सभी को या तो दंडात्मक तरीके से दूर-दराज अस्पतालों में भेज दिया गया या फिर उन पर पुलिस एफआईआर, कोर्ट केस और जाँचों के जरिए दबाव डाला जा रहा है। डॉ अनिकेत महतो, अशफाकउल्ला नैया और देबाशीष हलदर को ऐसे समय में ट्रांसफर किया गया जब उन्हें मात्र तीन महीने पहले ही नई नियुक्तियाँ मिली थीं।
उन्होंने इस कार्रवाई को बदला बताया और इसके खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। सरकार का तर्क है कि यह ‘नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया’ है, लेकिन विरोध कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि यह साफ तौर पर उन्हें सबक सिखाने और आंदोलन दबाने की कोशिश है।
पुलिस ने कई डॉक्टरों को उस आंदोलन के सिलसिले में नोटिस भेजे हैं, जिसमें ‘अवैध जमावड़ा’, ‘पुलिस पर हमला’ जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें से कुछ डॉक्टरों के घरों पर छापे भी मारे गए।
उदाहरण के तौर पर, डॉ अशफाकउल्ला नैया के खिलाफ उनकी डिग्री को लेकर एक शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा। डॉ किंजल नंदा से भी पूछताछ की जा रही है कि क्या उन्होंने फिल्मों में अभिनय करने से पहले संस्थान से अनुमति ली थी।
साथ ही उनके भत्तों और ड्यूटी घंटों की जानकारी भी माँगी गई है। डॉ अनिकेत महतो का कहना है कि वह अप्रैल से ड्यूटी से बाहर हैं और उन्हें वेतन भी नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि मानसिक रूप से भी वे इस स्थिति से बहुत प्रभावित हुए हैं।
डॉक्टरों की प्रमुख माँगें जैसे कि हेल्थ वर्कर्स की सुरक्षा, केंद्रीय रेफरल प्रणाली और रिक्त पदों की भर्ती अब तक पूरी नहीं की गई हैं। डॉक्टरों को संदेह है कि इस केस में केवल संजय रॉय ही नहीं, बल्कि और भी लोग शामिल हो सकते हैं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है।
हालाँकि सियालदह की एक अदालत ने जनवरी 2025 में संजय रॉय को दोषी ठहराया था, लेकिन अब भी पुलिस जाँच की निष्पक्षता और राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़िता के माता-पिता और साथी डॉक्टर आज भी इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों को अपनी नौकरी और मानसिक स्वास्थ्य की कीमत चुकानी पड़ रही है।
इस बीच, आरजे कर रेप-मर्डर केस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बंगाल पुलिस ने लाठीचार्ज भी कर दिया है, जिसमें पीड़िता की माँ को भी नहीं छोड़ा गया। इस लाठीचार्ज में पीड़िता की माँ गंभीर रूप से घायल हो गई। इस प्रदर्शन में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी, अग्निमित्रा पॉल और अन्य विधायक भी शामिल हुए, उन्हें भी पुलिस की हिंसा झेलनी पड़ी।
इस पूरी घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी महिला डॉक्टर की सुरक्षा और उसके लिए न्याय की माँग करना इतना महँगा पड़ सकता है कि उसकी कीमत एक डॉक्टर को अपनी नौकरी, मानसिक शांति और पेशेवर पहचान से चुकानी पड़े?
तेलंगाना विधानसभा का चुनाव हारते ही KCR के नेतृत्व वाली BRS सरकार ने 62 हार्ड डिस्क नष्ट कर दिए थे। ये हार्ड डिस्क 600 से अधिक प्रभावशाली लोगों की जासूसी से जुड़े थे। इनमें कई नेता, पत्रकार और एक्टिविस्ट शामिल थे। बीआरएस सरकार ने इनके फोन टैप करवाए थे। लेकिन चुनाव हारते ही करीब 1 घंटे के लिए सीसीटीवी कैमरे बंद कर हार्ड डिस्क नष्ट करवा दिए।
तेलंगाना की विशेष खुफिया शाखा (SIB) के हैदराबाद स्थित दफ्तर में 4 दिसंबर 2023 की रात को यह घटना हुई। रात 8:34 बजे से लेकर 9:34 बजे तक पूरे एक घंटे के लिए SIB ऑफिस के CCTV कैमरे बंद कर दिए गए थे। जाँच में सामने आया है कि इसी एक घंटे के अंदर 62 हार्ड डिस्क नष्ट किए गए।
इन हार्ड डिस्क को काटा गया, उन्हें पीसकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदला गया और फिर उन्हें एक नदी में फेंक दिया गया। ये सब SIB ऑफिस के एक छोटे से कमरे में हुआ।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार हैदराबाद पुलिस की जाँच में सामने आया है कि इन हार्ड डिस्क में 600 से ज्यादा प्रभावशाली लोगों की फोन टैपिंग से जुड़ी जानकारी थी। कहा जा रहा है कि भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने अपने कार्यकाल के दौरान इन लोगों की फोन रिकॉर्डिंग करवाई थी।
जो तकनीक नक्सलियों से लड़ने के लिए उससे राजनीतिक विरोधियों की जासूसी
यह मामला एक बड़े जाँच का हिस्सा है, जिसमें यह आरोप है कि 5 वरिष्ठ पुलिस-खुफिया अधिकारी और एक टीवी चैनल के संचालक ने मिलकर करीब 600 लोगों की अवैध निगरानी (जासूसी) की। यह निगरानी उस समय की सत्तारूढ़ पार्टी BRS के फायदे के लिए की गई थी।
जिन लोगों की जासूसी की गई उनमें नेता, अफसर, व्यापारी और मौजूदा हाई कोर्ट के एक जज तक शामिल हैं। इनलोगों के परिजनों, ड्राइवर और दोस्तों के भी फोन टैप किए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि यह निगरानी उन तकनीकी सिस्टम्स के जरिए की गई, जिन्हें असल में नक्सली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनाया गया था। अब इस पूरे मामले की गहराई से जाँच चल रही है।
बीजेपी नेता ने दर्ज कराया बयान
जिन लोगों की निगरानी की गई उनमें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और बीजेपी नेता बांदी संजय कुमार के होने की बात भी कही जा रही है। वे शुक्रवार (8 अगस्त 2025) को हैदराबाद पुलिस के सामने पेश हुए। बयान दर्ज कराने के बाद उन्होंने दावा किया कि इस जासूसी मामले में करीब 6500 फोन टैप किए गए थे। इनमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और BRS के कई विधायकों के फोन भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक अलग टीम सिर्फ रेवंत रेड्डी और उनके करीबियों की निगरानी के लिए बनाई गई थी।
किसके आदेश पर नष्ट किए गए हार्ड डिस्क?
जाँचकर्ताओं का मानना है कि डिस्क को नष्ट करने का आदेश उस समय के SIB प्रमुख टी प्रभाकर राव ने दिया था। उन्होंने राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार बनने के ठीक एक दिन बाद 4 दिसंबर 2023 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में राव ने दावा किया है कि डेटा नष्ट करने का फैसला 2 दिसंबर को ही ले लिया गया था। यह फैसला एक समिति द्वारा लिया गया था। इस समिति में मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव और विधि सचिव शामिल थे।
डिस्क के अंदर क्या था?
पुलिस का कहना है कि नष्ट की गई ज्यादातर डिस्कों में ‘राजनीतिक खुफिया जानकारी’ थी। जिसमें नेताओं की निजी प्रोफाइल, फोन पर हुई बातचीत और ऑनलाइन चैट्स थे। हालाँकि कुछ डिस्क में CPI (माओवादी) से जुड़ी जानकारी भी थी, जिसे इकट्ठा करना SIB का काम होता है। जाँचकर्ताओं के मुताबिक, इन ड्राइव को नष्ट करने से कई दशकों की उपयोगी खुफिया जानकारी खत्म हो गई और यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है।
SOT के पास भी थे नष्ट किए गए डिस्क
62 डिस्कों में से 36 डिस्क एक स्पेशल ऑपरेशंस टीम (SOT) के कंट्रोल में थी, जो 2020 में SIB के तहत बनाई गई थी। यह टीम नक्सल गतिविधियों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक जासूसी पर फोकस कर रही थी। इस टीम का नेतृत्व डीएसपी डी प्रनीत कुमार, जिन्हें प्रनीत राव के नाम से भी जाना जाता है, कर रहे थे। उन्हें इस मामले में बाद गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अब वे जमानत पर बाहर हैं। प्रनीत राव के पास SIB दफ्तर में तीन अलग कमरे, 11 स्टाफ मेंबर, 17 डेस्कटॉप कंप्यूटर, दो लैपटॉप, अलग फोन लाइन और एक प्राइवेट इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा थी।
किसके आदेश पर हुए फोन टैप?
जाँच में पता चला है कि SOT विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों को चिट्ठी भेजकर फोन कॉल्स को इंटरसेप्ट (जासूसी के लिए सुनने) करने की अनुमति माँगता था। इस प्रक्रिया को ‘लीगल इंटरसेप्शन’ कहा जाता है। इसे प्रभाकर राव नाम के अधिकारी द्वारा मँजूरी दी जाती थी।
कानून के मुताबिक, ऐसे डेटा को हर छह महीने में नष्ट करना जरूरी होता है। लेकिन इस मामले में एक गवाह ने पुलिस को बताया कि डेटा नष्ट करने का आदेश एक महीने पहले ही आ गया। इस दौरान CCTV कैमरे भी बंद कर दिए गए, जबकि ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी।
गौर करने वाली बात यह है कि किसी मशीन में खराबी आने पर भी टेक्नीशियन को SOT रूम के अंदर जाने की इजाजत नहीं होती थी। उन्हें मशीन बाहर ही लेकर मरम्मत करनी पड़ती थी।
एक निजी निगरानी कंपनी से सहायता
हैदराबाद की एक निजी कंपनी के साथ मिलकर SOT निगरानी कर रही थी। यह निगरानी कंपनी ऑनलाइन चैट्स, जैसे WhatsApp पर होने वाली बातचीत को इंटरसेप्ट करने में माहिर है। जाँचकर्ताओं के मुताबिक, इस कंपनी ने SOT को तीन खास तकनीकी टूल दिए।
पहला टूल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X, Facebook, Instagram, YouTube और Snapchat से जानकारी निकालने के लिए था। दूसरा टूल नेटवर्क डेटा को डिक्रिप्ट यानी पढ़ने लायक बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। वहीं तीसरे टूल की मदद से टारगेट किए गए मोबाइल फोनों से WhatsApp मैसेज पढ़े जा सकते हैं।
कैसे शुरू हुआ विरोधियों की निगरानी का खेल?
तेलंगाना में अवैध फोन टैपिंग और निगरानी की शुरुआत 2018-19 में हुई थी। लेकिन नवंबर 2023 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले यह बेहद तेज हो गया। 16 नवंबर से 30 नवंबर (चुनाव वाले दिन) तक, कम से कम 600 लोगों की जासूसी की गई। यह SIT की रिपोर्ट में सामने आया है।
जिन लोगों की निगरानी की गई, उनमें प्रमुख राजनीतिक नेता भी शामिल थे। उदाहरण के तौर पर तेलंगाना प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ और केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार। इस मामले का खुलासा मार्च 2024 में तब हुआ जब SIB के एक एडिशनल एसपी ने डीएसपी प्रनीत राव के खिलाफ FIR दर्ज कराई। उन पर गलत तरीके से जानकारी इकट्ठा करने का आरोप है।
बाद में पंजागुट्टा पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को आरोपित बनाया। इनमें पूर्व SIB प्रमुख टी प्रभाकर राव, डीएसपी प्रनीत राव, एएसपी एम तिरुपथन्ना, एन भुजंगा राव, पूर्व डीसीपी टी राधा किशन राव, टीवी चैनल मालिक एन श्रवण कुमार शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रभाकर राव को अगस्त तक गिरफ्तारी से छूट दी है। बाकी आरोपितों को पहले गिरफ्तार किया गया, लेकिन बाद में उन्हें जमानत मिल गई। एन श्रवण कुमार अभी भी चंचलगुड़ा जेल में हैं। हालाँकि उन्हें फोन टैपिंग केस में अंतरिम राहत मिल चुकी है।
जाँच अधिकारियों के मुताबिक, इस निगरानी के लिए भारतीय टेलीग्राफ नियमों की धारा 419(A) का गलत इस्तेमाल किया गया। यह नियम केवल उच्च सरकारी अधिकारियों या आपात स्थिति में विशेष रूप से अधिकृत अधिकारियों को फोन इंटरसेप्ट करने की अनुमति देता है। लेकिन इस मामले में इसे तोड़-मरोड़कर ऐसे लोगों की जासूसी की गई जिनका नक्सलवाद या किसी सुरक्षा खतरे से कोई लेना-देना नहीं था। यानी यह सब राजनीतिक फायदे के लिए किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तानी रक्षा पंक्ति की कमर तोड़ कर रख दी। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी वायुसेना को भारी नुकसान पहुँचाते हुए 1 अवॉक्स सिस्टम और कम से कम 5 फाइटर जेट्स को तबाह कर दिया। भारत के एयरफोर्स के मुखिया एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बेंगलुरु में 16वें एयर चीफ मार्शल एलएम कात्रे लेक्चर के दौरान इस ऑपरेशन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने रूस निर्मित एस-400 हवाई रक्षा प्रणाली ( भारत में ‘सुदर्शन’) का इस्तेमाल कर 5 पाकिस्तानी फाइटर जेट और एक बड़ा AEW&C (एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) विमान 300 किलोमीटर की दूरी से मार गिराया। यह अब तक की सबसे लंबी दूरी से हवाई हमले में दर्ज की गई कामयाबी है।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, “हमने कम से कम पाँच फाइटर जेट और एक बड़े विमान को पक्के तौर पर मार गिराया। यह बड़ा विमान या तो ELINT विमान था या AEW&C विमान। इसे 300 किलोमीटर की दूरी से निशाना बनाया गया। यह अब तक का सबसे लंबी दूरी का सतह से हवा में मार करने वाला हमला है।”
पाकिस्तानी हवाई ठिकानों पर भारी तबाही
वायुसेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ, जो 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था। इस हमले में पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की जान ले ली थी। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए।
एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि पाकिस्तान के शहबाज जैकोबाबाद हवाई अड्डे पर हमला किया गया, जहाँ एक F-16 हैंगर को नष्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा, “शहबाज जैकोबाबाद हवाई अड्डा, जो एक बड़ा हवाई ठिकाना है, वहाँ F-16 का हैंगर था। इसका आधा हिस्सा पूरी तरह से तबाह हो गया। हमें यकीन है कि वहाँ कुछ और विमान थे, जो नष्ट हो गए।” इसके अलावा मुरिदके और चकलाला जैसे कमांड और कंट्रोल सेंटर, छह रडार और भोलारी में एक AEW&C हैंगर पर भी हमला किया गया। भोलारी में एक और AEW&C विमान के नष्ट होने की पुष्टि हुई है।
#WATCH | Bengaluru, Karnataka | Speaking on Operation Sindoor, Chief of the Air Staff, Air Chief Marshal AP Singh says, "…We have at least five fighters confirmed kills and one large aircraft, which could be either an ELINT aircraft or an AEW &C aircraft, which was taken on at… pic.twitter.com/ieL6Gka0rG
एयर चीफ मार्शल सिंह ने सुदर्शन (S-400) मिसाइल सिस्टम की तारीफ करते हुए कहा कि यह हथियार भारतीय वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। उन्होंने कहा, “हमारी हवाई रक्षा प्रणालियों ने शानदार काम किया। सुदर्शन सिस्टम ने गेम बदल दिया। इसकी लंबी रेंज की वजह से पाकिस्तानी विमान अपने लंबी दूरी के ग्लाइड बम जैसे हथियारों का इस्तेमाल नहीं कर पाए। वे हमारे सिस्टम में घुसपैठ नहीं कर सके।”
#WATCH | Bengaluru, Karnataka | Speaking on Operation Sindoor, Chief of the Air Staff, Air Chief Marshal AP Singh says, "…Our air defence systems have done a wonderful job. The S-400 system, which we had recently bought, has been a game-changer. The range of that system has… pic.twitter.com/16DJkn8E8T
उन्होंने आगे बताया कि पाकिस्तानी विमान आकाश और MRSAM की सीमा के पास भी नहीं आ सके। सभी विमान LRSAM की रेंज में आए और वहीं निशाना बनाए गए। सिंह ने कहा, “उनके विमान हमारी सीमा के पास नहीं आ सके। वे दूर रहने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन फिर भी वे हमारी रेंज में थे। यही मौके थे, जिन्हें हमने भुनाया।”
#WATCH | Bengaluru, Karnataka | Speaking on Operation Sindoor, Chief of the Air Staff, Air Chief Marshal AP Singh says, "None of their aircraft could come anywhere near the boundaries of Akash and even MRSAM. All their aircraft were taken on by LRSAM because they were trying to… pic.twitter.com/WBAXFlpsvN
वायुसेना प्रमुख ने मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय पर हमले की तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने कहा, “यह उनके वरिष्ठ नेताओं का रिहायशी इलाका था। यहीं उनकी ऑफिस बिल्डिंग थी, जहाँ वे मीटिंग करते थे। हमें हथियारों से वीडियो मिले, क्योंकि यह जगह हमारी रेंज में थी।”
तस्वीरों में साफ दिखा कि हमले में आतंकी ठिकाने पूरी तरह तबाह हो गए, लेकिन आसपास की इमारतों को कोई नुकसान नहीं हुआ। सिंह ने कहा, “हमें सैटेलाइट तस्वीरों के साथ-साथ स्थानीय मीडिया से भी तस्वीरें मिलीं, जिनसे हमें अंदर की स्थिति का पता चला।”
पाकिस्तान को बहुत नुकसान पहुँचा
एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने कई हवाई ठिकानों को निशाना बनाया, ताकि पाकिस्तान को यह संदेश जाए कि भारत कहीं भी, कभी भी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमारा मकसद एक हवाई अड्डे को पूरी तरह तबाह करना नहीं था। हम चाहते थे कि उन्हें यह एहसास हो कि हम उनके क्षेत्र में गहराई तक हमला कर सकते हैं।”
पाकिस्तान के सरगोधा हवाई अड्डे पर हमले का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा, “हमारी वायुसेना में हम बचपन से सरगोधा पर हमले का सपना देखते थे। मुझे रिटायर होने से पहले यह मौका मिला। हमने वहाँ हवाई अड्डे पर हमला किया।”
#WATCH | Bengaluru, Karnataka | Speaking on Operation Sindoor, Chief of the Air Staff, Air Chief Marshal AP Singh says, "Sargodha, we've grown up in our Air Force, dreaming about days like this, someday we'll get a chance to go there. So it just so happens that I got my chance… pic.twitter.com/25AmC3lAdf
एयर चीफ मार्शल ने आगे बताया कि 80 से 90 घंटे के इस हाई-टेक युद्ध में भारत ने इतना नुकसान पहुँचाया कि पाकिस्तान को समझ आ गया कि अगर वे जारी रखते हैं, तो और भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत के DGMO को बातचीत का संदेश भेजा, जिसे भारत ने स्वीकार किया।
#WATCH | Bengaluru, Karnataka | Speaking on Operation Sindoor, Chief of the Air Staff, Air Chief Marshal AP Singh says, "It was a high-tech war. In 80 to 90 hours of war, we were able to achieve so much damage that it was clear to them that if they continue, they are going to pay… pic.twitter.com/KBZnyrhOps
भारतीय वायुसेना ने S-400 मिसाइल सिस्टम का नाम ‘सुदर्शन‘ रखा है, जो भगवान कृष्ण के प्राथमिक हथियार सुदर्शन चक्र से प्रेरित है। सुदर्शन चक्र एक बार चलने के बाद अपने लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट कर देता है। वायुसेना ने इस सिस्टम को पूरी तरह एकीकृत कर लिया है और इसके तीन स्क्वाड्रन पहले ही तैनात किए जा चुके हैं। भारत ने 2018-19 में रूस के साथ 35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत से 5 स्क्वाड्रन के लिए समझौता किया था। तीन स्क्वाड्रन मिल चुके हैं, और बाकी दो 2026 तक मिलने की उम्मीद है।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की वजह से डिलीवरी में देरी हुई है, लेकिन भारत ने स्वदेशी और इजरायली मिसाइल सिस्टम जैसे प्रोजेक्ट कुशा, आकाश, MRSAM और स्पाइडर क्विक रिएक्शन मिसाइल सिस्टम को भी अपनी सेना में शामिल किया है।
राजनीतिक इच्छाशक्ति ने दिलाई जीत
एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि ऑपरेशन की सफलता का एक बड़ा कारण सरकार की स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति थी। उन्होंने कहा, “हमें कोई राजनीतिक बाधा नहीं आई। हमें पूरी आजादी दी गई थी। हमने खुद तय किया कि कितना बढ़ाना है। हमने हमले को सोच-समझकर अंजाम दिया, क्योंकि हम परिपक्व तरीके से जवाब देना चाहते थे।”
#WATCH | Bengaluru, Karnataka | Speaking on Operation Sindoor, Chief of the Air Staff, Air Chief Marshal AP Singh says, "A key reason for success was the presence of political will. There were very clear directions given to us. No restrictions were put on us… If there were any… pic.twitter.com/nnveLS1fJr
एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा, “लोगों ने युद्ध में अपने अहंकार को बीच में ला दिया। एक बार जब हमने अपने लक्ष्य हासिल कर लिए, तो हमें रुकने के लिए सभी मौकों को देखना चाहिए था। मेरे कुछ करीबी लोग कह रहे थे, ‘और मारना था।’ लेकिन क्या हम हमेशा युद्ध में रह सकते हैं? देश ने शांति का सही फैसला लिया।”
#WATCH | Bengaluru | "People got down to their egos in the war… Once we achieved our objective, we should have looked for all windows of opportunity to stop… Some people very close to me said, 'Aur maarna tha'. But can we continue to be at war?… The nation has taken a good… pic.twitter.com/HHzwombn1P
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने अपनी ताकत और तकनीकी श्रेष्ठता का शानदार प्रदर्शन किया। सुदर्शन मिसाइल सिस्टम ने न सिर्फ पाकिस्तानी विमानों को दूर रखा, बल्कि उन्हें भारी नुकसान भी पहुँचाया। यह ऑपरेशन भारत की सैन्य ताकत और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का प्रतीक बन गया है।
फेसबुक पर भगवान श्रीकृष्ण की फोटो पोस्ट कर एक व्यक्ति ने अपमानजनक बातें की। तमिलनाडु पुलिस ने इस मामले में फाइनल रिपोर्ट यह कहते हुए दाखिल कर दी कि ‘आरोपित’ का पता नहीं चल सका है। मद्रास हाई कोर्ट ने इस पर फटकार लगाते हुए कहा है कि हिंदू देवी-देवताओं का अपमान नहीं किया जा सकता है।
अदालत ने यह भी कहा है कि बोलने की स्वतंत्रता का मतलब हिंदुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाना नहीं है। इससे धार्मिक आक्रोश भड़क सकता है और कानून व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो सकता है। मजिस्ट्रेट कोर्ट की रिपोर्ट को रद्द कर पुलिस को तीन महीने के भीतर जाँच कर इस मामले में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
हाई कोर्ट ने कहा है कि तूतीकोरिन पुलिस ने जाँच में लापरवाही की है। फाइनल रिपोर्ट जल्दबाजी में दाखिल की है। उल्लेखनीय है कि सतीश कुमार नाम के व्यक्ति ने अगस्त 2022 में फेसबुक पर यह अपमानजनक पोस्ट की थी। उसने भगवान कृष्ण द्वारा गोपियों के वस्त्र चुराने की तस्वीर के साथ अभद्र कैप्शन लिखे थे।
भगवान श्रीकृष्ण के अपमान पर मद्रास हाई कोर्ट सख्त
बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने कहा कि देवी-देवताओं के चित्रण को लेकर ज्यादा संवेदनशीलता बरतनी चाहिए और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना न हो। जस्टिस के मुरली शंकर ने 4 अगस्त के आदेश में कहा है, “हिंदू देवी-देवताओं को अपमानजनक तरीके से दिखाना, जानबूझकर लाखों-करोड़ों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना है। इसे किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता। इससे धार्मिक शत्रुता और सामाजिक अशांति फैल सकती है।”
उन्होंने कहा, “धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था को देखते हुए उनका अपमान समाज के बड़े हिस्से को आहत कर सकता है और सामाजिक अशांति फैल सकती है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना न हो।”
अदालत ने कहा कि भगवान कृष्ण द्वारा गोपियों के कपड़े छिपाने की कहानी एक प्रतीकात्मक कथा है। इसकी कई तरह से व्याख्या की जाती है। इनमें से एक के अनुसार यह जानने के लिए भगवान ने परीक्षा ली थी कि क्या गोपियों की भक्ति सांसारिक मोह-माया से ऊपर है? कोर्ट ने कहा, “यह कहानी आध्यात्मिक साधना और विरक्ति के महत्व को दर्शाती है।”
भगवान श्रीकृष्ण को लेकर किया था अपमानजनक पोस्ट
सतीश कुमार नामक व्यक्ति के अकाउंट से टिप्पणी की गई थी कि कृष्ण जन्माष्टमी उनका त्योहार है, जिन्होंने नहाती हुई महिलाओं के कपड़े चुरा लिए थे। इस मामले में पी. परमेसिवन नामक शख्स ने शिकायत दर्ज कराई थी कि यह पोस्ट हिंदू देवी-देवताओं के अपमान के इरादे से की गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी चिंता जताई थी कि यह पोस्ट कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ सकती है।
इसी साल फरवरी में पुलिस ने निचली कोर्ट में ‘निगेटिव फाइनल रिपोर्ट’ दाखिल की। इसमें कहा गया कि उन्होंने पोस्ट अपलोड करने वाले फेसबुक यूज़र की जानकारी के लिए मेटा से संपर्क किया। लेकिन उन्हें यूज़र की जानकारी नहीं मिल पाई। ट्रायल कोर्ट ने पुलिस की इस निगेटिव रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और मामले को बंद कर दिया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
तमिलनाडु पुलिस को हाई कोर्ट ने फटकारा
हाई कोर्ट ने इस मामले में एमके स्टालिन सरकार की पुलिस को फटकार लगाई है कि उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई। कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि फिर से जाँच शुरू कर 3 महीने के भीतर फाइनल रिपोर्ट दाखिल करे। हाई कोर्ट ने कहा, “गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस ने मामले को लापरवाही से देखा, जाँच रोक दी और इसे ‘अनडिटेक्टेड’ बताकर बंद कर दिया।”
हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने जाँच सिर्फ फेसबुक से जानकारी माँगने तक सीमित रखा। कोर्ट ने बताया कि जिस फेसबुक पेज की बात हो रही है, उस पर पहले से कुछ निजी जानकारी मौजूद थी जिसे देखकर फेसबुक यूजर को खोजा जा सकता था। हाई कोर्ट ने कहा कि जाँच को गंभीरता से नहीं किया गया और फाइनल रिपोर्ट बस औपचारिक तौर पर दाखिल कर दी गई।
हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को लेकर कहा कि उन्होंने केस बंद करते समय फाइनल रिपोर्ट पर उठाए गए आपत्तियों पर ध्यान ही नहीं दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार करने का मजिस्ट्रेट का आदेश कानूनी रूप से सही नहीं था।
मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने विधानसभा में लव जिहाद से जुड़े आँकड़े पेश किए हैं। इसके अनुसार जनवरी 2020 से 15 जुलाई 2024 तक प्रदेश में लव जिहाद के 283 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 73 पीड़िता नाबालिग है।
इन आँकड़ों से यह भी पता चलता है कि लव जिहाद के सर्वाधिक मामले मालवा-निमाड़ अंचल से सामने आए हैं। इसी इलाके में कभी प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी (SIMI) भी पसरा हुआ था। इंदौर भी इसी इलाके में आता है, जहाँ से हाल ही में ‘मुस्लिम गैंग’ द्वारा हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने के कई मामले सामने आए हैं।
विधानसभा में रखे गए आँकड़ों से यह भी पता चलता है कि काफी मामलों में पीड़िता दबाव नहीं झेल पाती हैं। वे या तो गवाही के दौरान पलटने को मजबूर हो जाती हैं या फिर दबाव बनाकर ‘सुलह’ कर लिया जाता है। आँकड़े बताते हैं कि अब तक ऐसे 86 मामलों में से 50 मामलों में आरोपित बरी हो चुके हैं। सजा केवल 7 मामलों में हुई है। एक मामला ‘सुलह’ के कारण खत्म हो गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहर, जहाँ पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है, वहाँ भी लव जिहादी लड़कियों को अपना निशाना बना रहे हैं। इंदौर के सिर्फ नगरीय क्षेत्र के पुलिस थानों में लव जिहाद के 55 मामले दर्ज किए गए है। वहीं, पूरे इंदौर जिले में लव जिहाद के 74 मामले सामने आए हैं। यह पूरे राज्य में सर्वाधिक है। इसके अलावा राजधानी भोपाल में लव जिहाद के 33 मामले, खंडवा और उज्जैन में 12-12 मामले और छतरपुर में 11 मामले दर्ज किए गए हैं। राज्य के अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज 283 मामलों में से 197 कोर्ट में लंबित हैं।
लव जिहाद पर MP सरकार ने विधानसभा में क्या बताया?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीजेपी विधायक आशीष गोविंद शर्मा के सवाल के जवाब में विधानसभा में लव जिहाद के मामलों को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा, “2020 से लेकर अब तक हुए लव जिहाद के प्रकरणों में प्रदेश के सभी जिलों में असुरक्षित बालिकाओं/महिलाओं को लक्ष्य बनाकर उनका शोषण करने एवं भय या दबाव पूर्वक मतांतरण कराने की घटनाओं की जाँच के लिए पुलिस मुख्यालय ने 4 मई 2025 को राज्य स्तरीय विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है।”
CM मोहन यादव ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि पुलिस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है और पीड़ितों को कानूनी मदद भी मिल रही है। ये मामले मध्य प्रदेश धार्मिक स्वंतत्रता अधिनियम 2021 के तहत दर्ज किए गए हैं।
लव जिहाद के खिलाफ हिंदू पंचायत
मध्य प्रदेश में लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं को लेकर उज्जैन में शुक्रवार (8 अगस्त 2025) को हिंदू पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें साधु-संतों समेत हजारों हिंदू परिवार शामिल हुए और पूरे शहर में लव जिहाद की घटनाओं के खिलाफ रैली निकाल गई। साथ ही, इस पंचायत में जिहादियों का समर्थन करने वाले समाज का आर्थिक बहिष्कार करने का फैसला लिया गया।
लव जिहाद कहीं बड़ी आतंकी साज़िश तो नहीं?
हिंदू युवतियों को लव जिहाद के जाल में फँसा कर उनकी जिंदगी तबाह करने की साजिश का केंद्र बना मालवा-निमाड़ अंचल वही इलाका है, जहाँ सिमी जैसे इस्लामिक आतंकी संगठन गहराई से अपनी जड़ें जमा चुके थे। सिमी का गढ़ रहे बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन जैसे जिलों से कुछ वर्षों पहले खबरें आई थीं कि ISIS यहाँ अपना नेटवर्क बना रहा है।
ऐसे में यह सवाल भी उठने लगे हैं कि लव जिहाद की साजिश के पीछे आतंकियों का कोई संगठित गिरोह तो साजिश नहीं कर रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी लव जिहाद के पीछे संगठित किसी साजिश की ही आशंका जताई है। ऐसे में इन तथ्यों को और बल मिलता है कि शहरी क्षेत्रों में सफेदपोश लोगों ने सिमी या उस जैसा कोई आतंकी नेटवर्क ने खड़ा कर लिया है और यही लोग लव जिहाद को अंजाम दे रहे हैं।