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एअर इंडिया में 100 गड़बड़ियाँ, 7 बेहद गंभीर: ऑडिट रिपोर्ट से हुई पहचान, DGCA ने सुधार के लिए 23 अगस्त तक का समय दिया

अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे के बाद इसकी जाँच जारी है। 12 जून 2025 को हुए इस हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी। इस पर AAIB की शुरुआती जाँच रिपोर्ट के बाद अब कंपनी में विमान संचालन को लेकर DGCA की ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है।

ऑडिट रिपोर्ट में 100 से ज्यादा गड़बड़ियों का जिक्र

विमानन सुरक्षा नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA ने अपने ऑडिट में टाटा समूह की एयरलाइंस एअर इंडिया में 100 से ज्यादा खामियाँ पाई हैं। जानकारी के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट में चालक दल के आराम और काम की अवधि, प्रशिक्षण, चालक दल की संख्या में कमी और उड़ान की योग्यता से संबंधित 100 से ज्यादा उल्लंघन और निष्कर्ष डीजीसीए ने अपनी रिपोर्ट में दिए हैं।

इन खामियों को 7 भागों में विभाजित किया गया है। लेवल 1 में 7 गडबड़ियाँ हैं जो सुरक्षा मानको की दृष्टि से अति गंभीर श्रेणी में आते हैं। इन गड़बड़ियों को 30 जुलाई तक ठीक करने के लिए कहा गया है। शेष 93 खामियों को सुधारने के लिए 23 अगस्त 2025 तक का समय दिया गया है। डीजीसीए की रिपोर्ट के मुताबिक, ” एअर इंडिया की संचालन प्रणाली में पायलटों के प्रशिक्षण अधूरे, ट्रेनिंग रिकॉर्ड बिखरे और रोस्टर में गड़बड़ियाँ मिली। कम विजिबिलिटी में उड़ान भरने के लिए जरूरी अनुमतियों में भी अनियमितता मिलीं।”

ऑडिट रिपोर्ट पर एअर इंडिया की प्रतिक्रिया

एअर इंडिया ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एअर इंडिया ने कहा है कि डीजीसीए की रिपोर्ट का एयरलाइन जवाब देगी और सुधार के लिए कदम उठाए जाएँगे। एअर इंडिया के मुताबिक, “सभी एयरलाइन कंपनियों में नियमित परीक्षण और उन्हें लगातार मजबूत बनाने के लिए नियमित ऑडिट की जाती है।” एअर इंडिया के मुताबिक, “हम अपना जवाब सुधारात्मक कार्रवाइयों की जानकारी देते हुए डीजीसीए के सामने तय समय में पेश करेंगे।” कंपनी ने कहा है कि 12 जून 2025 को हुए विमान हादसे के बाद विमानों की नियमित जाँच की जा रही है।

गुरुग्राम सेंटर में 1-4 जुलाई तक हुआ ऑडिट

एअर इंडिया का ऑडिट 1 से 4 जुलाई के बीच गुरुग्राम सेंटर पर हुआ था। इसमें फ्लाइट के पूरे ऑपरेशन की जाँच की गई थी। डीजीसीए ने 23 जुलाई को एअर इंडिया को कारण बताओ नोटिस भेजा था। इसमें ऑपरेशनल प्रोसीजर मसलन चालक दल के आराम और ड्यूटी नियमों का उल्लंघन, ट्रेनिंग के नियम को लेकर सवाल पूछे गए थे।

3 अधिकारियों पर गिरी थी गाज

इससे पहले 21 जून को एअर इंडिया के 3 अधिकारियों को शेड्यूलिंग और रोस्टरिंग में लापरवाही का आरोप लगाते हुए ड्यूटी से हटाने का निर्देश डीजीसीए ने एअर इंडिया को दिया था। डीजीसीए ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे और घोर लापरवाही की बात कहते हुए एअर इंडिया को कड़ी फटकार लगाई थी।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक डीजीसीए ने एअर इंडिया को कहा था कि एयरबस ए 320 के पार्टस् का बदलाव तय समय पर नहीं किया गया और काम समय पर पूरा दिखाने के लिए एएओ रिकॉर्ड बदला गया। एजेंसी के मुताबिक एयरलाइन ने अपनी गलती मान ली थी। हालाँकि कहा था कि दिक्कत की जानकारी मिलते ही उसने जरूरी कदम उठा लिए थे।

AAIB की शुरुआती जाँच रिपोर्ट

AAIB ने अपनी रिपोर्ट में कॉकपिट के ऑडियो रिकॉर्ड के आधार पर बताया था कि विमान के इंजन हवा में बंद हो गए थे। दोनों इंजनों के काम नहीं करने पर विमान नीचे गिर गया। रिपोर्ट के मुताबिक MAY DAY का कॉल पायलट की तरफ से दुर्घटना के चंद सैकेंड पहले आया था, हालाँकि विमान नॉर्मल टेकऑफ की तरह की उड़ान भरा था लेकिन चंद सेकेंड के बाद ही उसमें गड़बड़ी आ गयी।

रिपोर्ट में उन तकनीकी चीजों का सिलसिलेवार तरीके से जिक्र किया गया, जो विमान के उड़ान के बाद कुछ सेकेंड में घटित हुए।

अहमदाबाद में हुआ था विमान हादसा

एअर इंडिया की फ्लाइट AI 171 अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। एअर इंडिया का ये बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान कुछ सेकेंड बाद ही बी जे मेडिकल कॉलेज के होस्टल पर गिर गया। इस दुर्घटना में 260 लोग मारे गए।

मरने वालों में 241 यात्री और चालक दल के सदस्य शामिल थे। इसके अलावा बीजी मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में मौजूद कई छात्रों समेत 19 अन्य लोग भी अपनी जान गँवा बैठे। इस हादसे में एक यात्री की जान बच गई। ये विमान हादसा भारत की सबसे भयानक विमान दुर्घटनाओं में एक माना जाता है।

रूस में 73 साल का सबसे जोरदार भूकंप आया, अमेरिका-जापान समेत 30+ देशों में सुनामी की चेतावनी: 12 फीट ऊँची लहरें उठने की आशंका, भारत ने भी नागरिकों के लिए जारी किया अलर्ट

रूस के पूर्वी क्षेत्र के तटवर्ती इलाके कामचटका में बुधवार (30 जुलाई 2025) को जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर तीव्रता 8.8 मापी गई है। यह भूकंप समुद्र के नीचे 19.3 किलोमीटर (12 मील) की गहराई पर आया है।

इसके बाद अमेरिका के कैलिफोर्निया के तट से लेकर जापान तक सुनामी के लिए चेतावनी जारी कर दी गई है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के अनुसार, समुद्र में 3 से 12 फीट तक ऊँची लहरें उठ सकती हैं जिसके कारण कई क्षेत्रों में तबाही के आशंका जताई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भूकंप जापान के चार बड़े द्वीपों में से सबसे उत्तरी द्वीप होक्काइडो से लगभग 250 किलोमीटर (160 मील) दूर था। वहाँ इसके हल्के झटके महसूस हुए। हालाँकि होक्काइडो तट पर भी 30 सेंटीमीटर ऊँची लहरें पहुँचीं।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की मानें तो भूकंप समुद्र में आया। कुरील द्वीप समूह की मुख्य बस्ती सेवेरो-कुरील्स्क में पहली सुनामी लहर टकराई। इसके बाद आस पास के क्षेत्रों में बाढ़ आ गई। हालाँकि अलर्ट के चलते पहले ही संभावित क्षेत्रों से लोगों को हटा दिया गया था। लगभग 2,000+ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है।

73 वर्षों बाद फिर हिला कामचटका

रूस में 1 महीने के अंदर 5 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। कामचटका में इतना तीव्रता वाला भूकंप इससे पहले 4 नवंबर 1952 को आया था जिसकी तीव्रता 9 थी और इसके कारण कामचटका में काफी नुकसान हुआ था।

रूस में कामचटका एक प्रायद्वीप है, जो उसके पूर्वी हिस्से में स्थित है। यह प्रशांत महासागर के किनारे साइबेरिया के पूर्व में बसा है। मुख्यतः रूस से जुड़े होने के साथ इसके उत्तर में बेरिंग सागर, दक्षिण में जापान और पूर्व में प्रशांत महासागर है।

जापान में भी जारी हुआ अलर्ट

सुनामी की चेतावनी पर जापान के फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को खाली कर दिया गया है। 2011 में यहाँ पर 9 की तीव्रता पर भूकंप और सुनामी आई थी, जिसके बाद फुकुशिमा न्यूक्लियर पावर प्लांट को काफी क्षति पहुँची थी। स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि सुनामी के लहरों के कारण यहाँ का कूलिंग और बिजली का सिस्टम ठप हो गया था इसकी वजह से रेडियोएक्टिव रिसाव की स्थिति भी बन गई थी।

इन देशों में भी सुनामी का खतरा

रूस में आई सुनामी के बाद जापान समेत आसपास के 30 देशों में भूकंप और सुनामी के लिए चेतावनी जारी की गई है और चपेट में आ सकने वाले संभावित उलाकों को खाली करवाया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ पर भूकंप की जानकारी साझा की है।

अलर्ट जारी किए गए देशों में अमेरिकी समोआ, एंटार्टिका, कोलंबिया, कुक आइलैंड्स, कोस्टा रीका, अल सल्वाडोर, फिजी, गुआम, गुआटेमाला, होलैंड एंड बेकर, इंडोनेशिया, जार्विस आइलैंड, कैर्मेडिस आइलैंड, किरीबाटी, मार्शल आइलैंड, मेक्सिको, मिडवे आइलैंड, न्यूजीलैंड, निकारागुआ, पलाऊ, पल्मिरा आइलैंड, पनामा, पापुआ न्यू गिनी, पेरू, फिलीपींस,समोआ, ताइवान, टोन्गा और वानुअतु शामिल हैं। सभी देशों में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए चेतावनी जारी की गई है।

अलर्ट में मोड पर आया भारत

भूकंप की खबर के बाद भारत सरकार भी अपने पर्यटकों और भारतीय नागरिकों को लेकर अलर्ट मोड पर है। सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास से भारतीय नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की गई है। इसके तहत कैलिफोर्निया, हवाई और अमेरिका के अन्य पश्चिमी तटीय राज्यों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।

लोगों ने सोशल मीडिया पर साझा किए वीडियो

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सुनामी को लेकर उनके घर में आए भूकंप के झटकों की वीडियो और तस्वीरें साझा की हैं जिसमें झटकों के साथ उसके बाद की भयावहता को साफ तौर पर देखा जा सकता है।

सुनामी के चलते कामचटका में छोटे बच्चों के स्कूल किंडरगार्टन की इमारत भी ध्वस्त हो गई। हालाँकि उस समय इमारत में कोई भी नहीं था। अलर्ट से इमारत को पहले ही खाली करवा लिया गया था।

‘वाह रे बयानबहादुरों, पूरा देश आप पर हँस रहा है’: PM मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर कॉन्ग्रेस को दिखाया आइना, कहा- इनका भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल के सहारे

मैं भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ… प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपना वक्तव्य इन लाइनों के साथ चालू किया। उन्होंने इस दौरान जहाँ भारतीय सेनाओं की सफलता पर बात की तो वहीं कॉन्ग्रेस को लगातार उलटे-सीधे प्रश्न उठाने पर आइना भी दिखाया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है।

ऑपरेशन सिंदूर में कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाया

लोकसभा में प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस अब पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ा रही है।

पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर को दुनिया का समर्थन तो मिला, लेकिन दुर्भाग्य है कि मेरे देश के वीरों के पराक्रम को कॉन्ग्रेस का समर्थन नहीं मिला। 22 अप्रैल 2025 के बाद 3-4 दिन में ही यह उछल रहे थे। ये लोग अपनी स्वार्थी राजनीति के लिए मुझ पर निशाना साध रहे थे, लेकिन इनकी बयानबाजी और इनका छिछोरापन देश के सैनिकों का मनोबल गिराती रही।”

ऑपरेशन सिंदूर पर कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाने काम किया है। इस पर पीएम ने कहा, “10 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हो रहे एक्शन को रोकने की घोषणा की। इसको लेकर यहाँ भांति-भांति की बातें कही गईं। यह वही प्रोपेगेंडा है जो सीमा पार से फैलाया गया है। कुछ लोग सेना द्वारा दिए तथ्यों की जगह पाकिस्तान के झूठ को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।”

पीएम ने आगे कहा, “देश देख रहा है कि कॉन्ग्रेस राजनीतिक मुद्दों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर होता जा रहा है। कॉन्ग्रेस को पाकिस्तान के मुद्दे इम्पोर्ट करने पड़ रहे हैं। जब बालाकोट में एयरस्ट्राइक हुई तो कॉन्ग्रेस वाले पूछने लगे कि फोटो दिखाई, पाकिस्तान भी यही पूछता था, ये भी यही पूछते थे। आतंकवादी रो रहे हैं, उनके आका रो रहे हैं और उनको रोते देख यहाँ भी कुछ लोग रो रहे हैं।”

पीएम ने कॉन्गेस के लिए कहा, “पाकिस्तान के बयान और हमारा विरोध करने वालों के बयान फुल स्टॉप और कॉमा के साथ एक हैं। देश हैरान है कि कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस को भारत के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और गृह मंत्री पर भरोसा नहीं है, इनका भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल से बनता और बदलता है।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कॉन्ग्रेस के उठाए गए सवालों को लेकर विपक्ष को जमकर घेरा। पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर पर इन्होंने (विपक्ष) कहा कि रोक क्यों दिया, पहले मानते ही नहीं थे और पूछते हैं कि रोक क्यों दिया। वाह रे बयानबहादुरों, पूरा देश आप पर हँस रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने कारगिल की लड़ाई में भारत की जीत को भी अब तक नहीं अपनाया है।

कॉन्ग्रेस की गलती याद दिलाईं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस सरकार को उनकी गलती याद दिलाईं। इनमें सिंधु जल समझौता से लेकर बाटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “1962 और 1963 के बीच कॉन्ग्रेस के नेता जम्मू-कश्मीर के नेता पूँछ, नीलम वैली और उरी को छोड़ देने का प्रस्ताव रख रहे थे। यह सब लाइन ऑफ़ पीस के नाम पर किया जा रहा था, 1966 में इन्होंने ही कच्छ के रण पर मध्यस्थता स्वीकार की थी, यह इनका राष्ट्रीय सुरक्षा पर विजन है।

पीएम ने आगे कहा, “1971 में पाकिस्तान के 93 हजार फौजी हमारे पास बंदी थे, उसका हजारों किलोमीटर एरिया हमने कब्जा किया था। हम बहुत कुछ कर सकते थे। उस दौरान थोड़ी समझ होती तो POK वापस लिया जा सकता था। इतना सारा जब सामने टेबल पर था तो करतारपुर साहिब वापस ले सकते थे।”

सिंधु जल समझौते पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “सिंधु नदी से भारत जाना जाता था, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उस पर पंचायत करने का अधिकार वर्ल्ड बैंक को दिया। सिंधु जल समझौता भारत के स्वाभिमान के साथ बहुत बड़ा धोखा था। राज्यों के भीतर पानी को लेकर विवाद होता रहा और पाकिस्तान मौज मनाता रहा। अगर सिंधु जल समझौता ना होता तो कई बड़ी परियोजनाएँ बनतीं। सिंधु जल समझौते के बाद नेहरूजी ने करोड़ों रूपए भी दिए ताकि पाकिस्तान नहर बना सके।”

पीएम ने आगे कहा, “बाँध हमारा है, पानी हमारा है लेकिन पाकिस्तान का निर्णय है कि आप उसकी सफाई (डीसिल्टिंग) नहीं कर सकते। नेहरू ने कहा था कि सिंधु जल समझौता बाकी समस्याओं के लिए रास्ता खोलेगा। उन्होंने बाद में कहा लेकिन हम वहीं के वहीं हैं।”

कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान देश में असुरक्षा के माहौल पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “2014 से पहले असुरक्षा का जो माहौल था, उसे याद करके लोग सिहर जाते हैं… हर जगह पर घोषणा होती थी कि कोई भी लावारिस चीज दिखे छूना मत, ये बम हो सकता है। देश के कोने-कोने में यही हाल था।”

बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान सोनिया गाँधी के आँसूओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “दिल्ली में जब बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ तो कॉन्ग्रेस की एक बड़ी नेता के आँख में आसू थे, वोट पाने के लिए इसे देश भर में प्रसारित किया गया।”

पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने हिंदुत्व का अपमान किया है। पीएम ने बताया, “कॉन्ग्रेस दुनिया को हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी बेचने में लगी हुई थी। कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता ने अमेरिका के राजनयिक को कह दिया था कि लश्कर से बड़ा खतरा हिंदुत्व हैं।”

लोकसभा से पाकिस्तान को लताड़ा

प्रधानमंत्री ने लोकसभा से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फैलाई गई झूठी साजिशों का पर्दाफाश किया। पाकिस्तान को ‘आतंकियों का आका’ बताकर पीएम ने कहा कि उनकी रूह काँप रही है।

पीएम ने कहा, “सेना को कार्रवाई की खुली छूट दी गई कि कब, कहाँ और कैसे जवाब दिया जाए। आतंकियों के आकाओं को ऐसी सजा मिली कि उनकी अब तक रूह काँप रही है। ऑपरेशन सिंदूर में 22 मिनट में 22 अप्रैल 2025 का बदला सेना ने निर्धारित लक्ष्य के साथ ले लिया।”

उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी को हमने झूठा साबित कर दिया, भारत ने सिद्ध कर दिया कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग अब नहीं चलेगी और ना ही अब इसके सामने भारत झुकेगा। आज तक पाकिस्तान के कई एयरबेस ICU में पड़े हैं… ऑपरेशन सिंदूर तकनीक की महारत में सफल सिद्ध हुआ है, पिछले 10 साल में हमने जो तैयारियाँ की हैं, वह ना की होती तो तकनीक के युग में हमारा कितना नुकसान हो सकता था, इसका अंदाजा लगा सकते है।”

पाकिस्तान को धमकी देते हुए पीएम ने कहा, “पहले दिन से क्लियर था कि हमारा लक्ष्य आतंकी और उनके आका हैं, उनके अड्डे हैं… उनको हम ध्वस्त करना चाहते हैं, हमने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि हमने अपना काम कर दिया है। पाकिस्तान में समझदारी होती तो आतंकियों के साथ खुलेआम खड़े रहने की गलती ना करता, उसने निर्लज्ज होकर आतंकियों के साथ खड़े होने का फैसला किया… हम पूरी तरह तैयार थे और मौके की तलाश में थे।”

प्रधानमंत्री ने सीजफायर पर बोलते हुए कहा, “पकिस्तान ने इतने कड़े प्रहार के बाद DGMO को पाकिस्तान ने फोन करके गुहार लगाई कि बहुत मारा, अब और मार झेलने की ताकत नहीं है, हमला रोक दो। उसी दौरान 9 मई, 2025 को रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे बात का प्रयास किया।”

पीएम ने आगे कहा, “वह घंटे भर प्रयास कर रहे थे, लेकिन सेना के साथ मीटिंग के चलते मैं फोन उठा नहीं पाया। मैंने उन्हें कॉल बैक किया… तब उन्होंने फोन पर बताया कि पाकिस्तान बहुत बड़ा हमला करने वाला है। मेरा जवाब था- अगर पाकिस्तान का यह इरादा है तो उसे बहुत महँगा पड़ेगा। मैंने कहा था- हम गोली का जवाब गोले से देंगे।”

अंत में पीएम मोदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है।”

पेमेंट रिवर्सल, पैसे भेजने वाले का दिखेगा नाम… 50 बार बैलेंस चेक: 1 अगस्त से UPI हो रहा और आसान-तेज, NPCI बोली- नई टेक्निक से कम होंगे साइबर क्राइम

जल्दी ही UPI (Unified Payments Interface) में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इससे पैसा भेजते वक्त अकाउंट होल्डर का नाम भी दिखेगा। बैलेंस देखने और गलती से पेमेंट होने पर भी पैसा वापस लेने को लेकर भी नियम बदल रहे हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के अनुसार, यह बदलाव 1 अगस्त, 2025 से लागू हो रहे हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, NPCI का कहना है कि इससे रिस्पॉन्स टाइम (भुगतान में लगने वाला समय) बेहतर होगा और UPI ट्रांजैक्शन्स की परफॉर्मेंस सुधरेगी। अब आप एक दिन में किसी एक UPI एप से 50 से ज्यादा बार अपना बैंक बैलेंस चेक कर पाएँगे। वहीं ऑटो-पे (जैसे EMI, सब्सक्रिप्शन या बिल पेमेंट) अब किसी भी समय के बजाय तय समय स्लॉट्स में होंगे। वहीं अगर कोई पेमेंट अटक जाता है तो आप उसका स्टेटस सिर्फ 3 बार चेक कर सकते हैं।

जानिए कौन-कौन से फीचर्स में होगा बदलाव?

1. डेली बैलेंस चेक लिमिट: अब हर UPI ऐप पर यूजर एक दिन में केवल 50 बार ही अपना बैंक बैलेंस चेक कर सकेंगे। अगर आप अलग-अलग ऐप (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) इस्तेमाल करते हैं, तो हर ऐप पर अलग-अलग यह लिमिट लागू होगी।

2. ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक लिमिट: पेंडिंग ट्रांजैक्शन का स्टेटस आप सिर्फ 3 बार ही चेक कर सकते हैं और हर बार इसके बीच में 90 सेकंड का अंतर जरूरी होगा।

3. ऑटो-पे (AutoPay) टाइमिंग: ऑटो पे ट्रांजैक्शन्स में अब सिर्फ तीन विशेष समय स्लॉट में ही प्रोसेस होंगी- सुबह 10 बजे से पहले, दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे के बीच और रात 9:30 बजे के बाद

4. लिंक्ड बैंक अकाउंट व्यू लिमिट: इसके तहत आप अपने ऐप में बैंक अकाउंट की डिटेल्स एक दिन में केवल 25 बार ही देख पाएँगे।

5. पेमेंट रिवर्सल लिमिट: अगर कोई ट्रांजैक्शन गलत हो गया हो, तो आप 30 दिनों में अधिकतम 10 बार रिवर्सल की रिक्वेस्ट कर सकते हैं। वहीं एक सेंडर की ओर से अधिकतम 5 रिक्वेस्ट ही मान्य होंगी।

6. बेनीफिशियरी नाम डिस्प्ले: अब पेमेंट करने से पहले रिसीवर का बैंक में रजिस्टर्ड नाम दिखेगा, जिससे गलती और फ्रॉड की संभावना कम होगी।

7. बैंक और UPI ऐप्स पर सख्त निगरानी: NPCI अब बैंकों और UPI ऐप्स की API यूजेज को मॉनिटर करेगा। अगर कोई ऐप या बैंक नियमों का पालन नहीं करता, तो उस पर जुर्माना लग सकता है या उसकी UPI एक्सेस सीमित भी की जा सकती है।

यूजर्स के लिए ऐप में खुद ही लागू होंगे सभी बदलाव

आम यूजर्स को इन बदलावों के लिए कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं होगी। आपका हर दिन का पेमेंट, बिल पेमेंट या मनी ट्रांसफर सब उसी तरह से चलता रहेगा, जैसे नियम बदलने से पहले चलता था। वहीं ये सभी बदलाव आपके UPI एप्स में अपने आप लागू हो जाएँगे।

NPCI का कहना है कि पिछले महीनों में UPI सर्वर पर बोझ बढ़ा था, जिससे कई बार ट्रांजैक्शन फेल होने या स्लो होने की शिकायतें आईं थी। NPCI के मुताबिक, बार-बार बैलेंस चेक करने या ऑटोपे प्रोसेसिंग से सिस्टम पर दबाव पड़ता है। अब नए नियमों से सर्वर लोड कम होगा।

NPCI इस नई तकनीक पर काम कर रहा है ताकि बढ़ते साइबर क्राइम से बचा जा सके और पेमेंट प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाया जा सके। इसके अलावा इस योजना पर भी विचार चल रहा है कि UPI में पिन को वैकल्पिक करके फेस और फिंगर का भी इस्तेमाल किया जाए।

भविष्य में यह सुविधा करोड़ों UPI यूजर्स के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। यह फीचर कम पढ़े-लिखे लोगों और बुजुर्गों के लिए मददगार सिद्ध होगा। जानकारी के अनुसार, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की तेज और उन्नत डिजिटल पेमेंट प्रणाली की तारीफ भी की है।

IMF ने कहा, “भारत अब दुनिया में सबसे तेज पेमेंट्स करने वाला देश बन गया है।” गौरतलब है कि UPI के आने के बाद से कैश का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम हो रहा है और डेबिट/क्रेडिट कार्ड्स जैसे अन्य माध्यमों की तुलना में UPI ने बहुत तेजी से विस्तार किया है।

आज UPI हर महीने 18 अरब (18 billion) से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है और भारत में इलेक्ट्रॉनिक रिटेल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है।

जिस बाटला हाउस एनकाउंटर पर ‘रोईं’ सोनिया गाँधी, अमित शाह ने उसी से कॉन्ग्रेस को घेरा:पूछा-वीडियो सदन में लगा दूं, ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठा रही थी ग्रैंड ओल्ड पार्टी

लोकसभा में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में मंगलवार (29 जुलाई 2025) को अमित शाह ने बाटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि सोनिया गाँधी बाटला हाउस एनकाउंटर पर रो रही थीं, लेकिन शहीद पुलिस इंस्पेक्टर मोहन शर्मा की शहादत पर चुप रहीं।

लोकसभा में वाकया सुनाते हुए अमित शाह ने कहा, “मैं सलमान खुर्शीद को याद करना चाहूँगा। एक दिन, मैं सुबह ब्रेकफास्ट कर रहा था, तब मैंने टीवी पर सलमान खुर्शीद को सोनिया गाँधी के घर से बाहर निकलते देखा। वो रो रहे थे। मैंने सोचा कुछ बड़ा हो गया है। लेकिन खुर्शीद ने कहा कि सोनिया गाँधी बाटला हाउस एनकाउंटर पर रो रही हैं।”

अमित शाह ने आगे कहा कि इसका वीडियो उनके मोबाइल में सेव है और वे इसे सुबह से रिपीट पर देख रहे हैं। अगर स्पीकर चाहें तो इस वीडियो को सदन में लगे टीवी पर दिखाने को भी तैयार हैं। अमित शाह की सोनिया गाँधी पर टिप्पणी करते ही विपक्ष ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया।

जानिए सलमान खुर्शीद ने क्या कहा था ?

सलमान खुर्शीद के जिस बयान का जिक्र अमित शाह ने लोकसभा में किया, वह बयान सलमान खुर्शीद ने साल 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तहत आजमगढ़ में आयोजित एक जनसभा के दौरान दिया था। इसका वीडियो क्लिप एक बार फिर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सलमान खुर्शीद बताते हैं कि बाटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीरें देख सोनिया गाँधी रोने लग गईं।

असल में सलमान खुर्शीद ने कहा था, “हमने सोनिया गाँधी से बात की, उन्हें बाटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीर दिखाई तो उनके आँसू फूट पड़े और उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि ये तस्वीर मुझे मत दिखाओ। फौरन जाओ वजीर-ए-आजम (प्रधानमंत्री) से बात करो।”

हालाँकि, बाद में कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ऐसी किसी भी मुलाक़ात से इनकार कर दिया। सोनिया गाँधी से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल कॉन्ग्रेस नेता परवेज़ हाशमी ने भी सोनिया गाँधी को रोते हुए देखने से इनकार किया। उन्होंने तब स्पष्ट किया था, “वह चिंतित थीं।” इसके 7 साल बाद खुर्शीद ने भी कहा कि वह कभी रोई ही नहीं।

कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल के सामने हुई थी पुलिस की पेशी

बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद पुलिसकर्मियों को जहाँ-तहाँ इस बारे में अपनी बेगुनाही का सबूत देना पड़ा था। यहाँ तक कि उनको साल 2008 में तत्कालीन UPA सरकार में केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भी लंबी पूछताछ के लिए तलब कर लिया था। इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस के पूर्व IPS अधिकारी करनाल सिंह ने अपनी एक किताब में दी है।

करनाल सिंह दिल्ली पुलिस के ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर थे और वो बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में भी जुड़े थे। करनाल सिंह ने अपनी किताब ‘बाटला हाउस: एन एनकाउंटर दैट शुक द नेशन’ में बताया था कि एक दिन दिल्ली के तत्कालीन लेफ्टिनेन्ट गवर्नर तेजेंद्र खन्ना का फोन उन्हें आया था।

करनाल सिंह ने बताया है कि तेजेंद्र खन्ना ने उन्हें केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के सामने बाटला हाउस एनकाउंट की जानकारी रखने के लिए बुलाया था। करनाल सिंह ने किताब में लिखा है कि तेजेंद्र खन्ना ने सिंह को ‘तैयार होकर आने’ की सलाह दी थी।

करनाल सिंह लिखते हैं कि सिब्बल ने उन्हें मीडिया सहित कई विभिन्न मुद्दों के बारे में बताने के लिए कहा और उन्होंने हर मुद्दे पर जवाब दिया और पुलिस के पास उपलब्ध सभी सूचनाओं को सिब्बल से शेयर किया।

करनाल सिंह के अनुसार, दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल के घर पर कैबिनेट मंत्री कपिल सिब्बल को एनकाउंटर के सारे तथ्य दिखाए गए थे। इन तथ्यों से तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को भी अवगत कराया गया था। बाद में एक मुलाकात में मनमोहन सिंह ने खुद उन्हें बेहतरीन जाँच के लिए बधाई भी दी थी।

आखिर बाटला हाउस एनकाउंटर में क्या हुआ था?

13 सितंबर, 2008 को दिल्ली में पाँच बम धमाके हुए। एक धमाका गफ्फार मार्केट में शाम 6 बजकर 7 मिनट पर हुआ। यह धमाका कार के पास विस्फोट रखकर किया गया था। कुछ देर बाद कनॉट प्लेस में दो बम धमाके हुए। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि दो व्यक्तियों ने कचरे के डब्बे में विस्फोटक रखे थे। इसके कुछ मिनट बाद ही ग्रेटर कैलाश-1 के एम-ब्लॉक मार्केट में दो और ब्लास्ट हुए। बम ब्लास्ट में 26 लोगों की मौत हुई थी और 133 लोग घायल हुए थे।

इन बम धमाकों के 5 दिन बाद 19 सितंबर 2008 एनकाउंटर स्पेशलिस्ट मोहन चंद शर्मा की लीडरशिप में दिल्ली पुलिस की टीम बाटला हाउस पहुँची। पुलिस को बाटला हाउस में बम धमाके से जुड़े एक आतंकी के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिली थी। पुलिस उसे खोजते हुए बिल्डिंग की दूसरी मंजिल के फ्लैट में घुसी।

तभी दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। इस गोलीबारी में आतंकी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए। वहीं, मोहम्मद सैफ को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि शहजाद और जुनैद भागने में कामयाब हो गए। माना जा रहा है कि भागने वालों में एक आतंकी ISIS का रिक्रूटर बन गया।

एनकाउंटर में पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा घायल हुए, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। साथ ही हेड कॉन्सटेबल बलविंदर घायल हुए थे। इस पुलिस और आतंकियों के बीच मुठभेड़ को बाटला हाउस एनकाउंटर का नाम दिया गया।

सत्ताधारी कॉन्ग्रेस ने बाटला हाउस एनकाउंटर को हमेशा फर्जी बताया है। कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी एनकाउंटर को फर्जी करार दिया था। उन्होंने मई 2016 टाइम्स नाउ को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, मैंने हमेशा कहा है कि यह एनकाउंटर फर्जी है और आज भी इस पर अडिग हूँ।

यह जाँच एजेंसी की जिम्मेदारी है कि इसकी पुष्टि करे हमने न्यायिक जाँच की माँग की थी। अगर इसे मान लिया जाता तो सही तथ्य सामने आ जाते। बाद में यह पूरा मामला खुला और सामने आया कि बाटला हाउस एनकाउंटर फर्जी नहीं था बल्कि यहाँ देश पर हमले की फैक्ट्री चल रही थी।

कॉन्ग्रेस ने तब इस एनकाउंटर के तथ्य जानते हुए भी फर्जी इसलिए बताया क्योंकि उसे मुस्लिम वोटों की चिंता थी। बाटला हॉउस एनकाउंटर मुस्लिम इलाके में हुआ था, यहाँ मारे जाने वाले आतंकी मुस्लिम थे। कॉन्ग्रेस को लगता था कि अगर वह बाटला हाउस पर मुस्लिमों का पक्ष लेगी तो उसे लगातार मुस्लिम वोट मिलते रहेंगे।

हैरानी वाली बात यह है कि स्पष्ट सबूत सामने होते हुए भी कॉन्ग्रेस ने तब बाटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी बताया लेकिन हिन्दू आतंकवाद के नैरेटिव को लगातार हवा देती रही। 26/11 हमले तक को हिन्दुओं पर मढ़ने का प्रयास हुआ। अब अमित शाह ने फिर उस साजिश की याद दिलाकर कॉन्ग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया है।

वाराणसी में काँवड़ियों को इस्लामी कट्टरपंथियों ने घेरा, जबरन बुलवाया अल्लाह-हू-अकबर… इस्लाम कबूलने को भी कहा: 6 गिरफ्तार, पुलिस ने बताया दुकानदार-ग्राहक का झगड़ा

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मुस्लिम भीड़ ने काँवड़ियों को जान से मारने की कोशिश की। काँवड़िए हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगा रहे थे, यह इस्लामी कट्टरपंथियों को नागवारा हुआ। काँवड़ियों को अल्लाह हू अकबर बोलने और इस्लाम कबूलने का दबाव डालने लगे। ऐसा न करने पर धारदार हथियार से सिर पर हमला किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 जुलाई 2025 की शाम 5 बजे राजातालाब थाना इलाके में मुख्य बाजार से शुभम यादव और पलटू राम यादव काँवड़ लेकर जा रहे थे। यहाँ 10-12 मुस्लिम युवकों ने उन्हें घेरा और जबरन लड़की को छेड़ने का आरोप लगा दिया। फिर हर-हर महादेव और बोल बम जयकारे बोलने से रोकने लगे।

एक मुस्लिम युवक बोला, “ये सब तुम्हें नहीं बोलना चाहिए। तुम लोग अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाओ।” इसे नजरअंदाज कर काँवड़िए शुभम और पलटू आगे बढ़ गए। इतने में पीछे से मुस्लिम युवक हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने लगे। काँवड़ियों ने इसका विरोध किया, तो मुस्लिम युवकों ने मिलकर हमला कर दिया।

काशी के बडैनीकला निवासी पीड़ित काँवड़िए पलटू यादव ने कहा, “हम अपने दोस्त शुभम के साथ अदलपुरा से जल लेकर जंसा शिव मंदिर जा रहे थे। हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगा रहे थे। राजातालाब के रेलवे फाटक के पास 10-12 युवकों ने रोककर बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे लगाने से रोका।”

पीड़ित ने बताया कि मुस्लिम युवकों ने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूलने के लिए भी बोला और अल्लाह-हू-अकबर बोलने पर मजबूर किया। उन्होंने बताया कि विरोध करने पर धारदार हथियार के सिर पर हमला कर दिया। इससे पलटू का सिर फट गया। पलटू के दोस्त शुभम जान बचाते हुए भागा तो उसे भी सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।

सड़क पर मौजूद बाकी काँवड़ियों ने शुभम और पलटू को बचाया। दोनों घायलों को ऑटो से अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद गुस्साए काँवड़ियों और हिंदू संगठन ने सड़क जाम कर हंगामा भी किया। इसकी सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची, लेकिन काँवड़िए कार्रवाई की माँग कर धरने पर डटे रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देर रात 12 बजे हंगामे के बीच पलटू यादव की तहरीर पर 12 आरोपितों के खिलाफ मारपीट, लूट, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और लालच देने का केस दर्ज किया गया।

अपर पुलिस आयुक्त ने शिवहरी मीणा ने बताया कि काँवड़ यात्री और स्थानीय दुकानदार के बीच विवाद हुआ था। काँवड़ियों की तहरीर पर मुनव्वर समेत 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। शांति व्यवस्था कायम है। वहीं, बाजार के हालत को देखते हुए बैरिकेडिंग करके जंसा और राजातालाब के रास्ते को बंद कर दिया है।

जिस भारतीय तेल कम्पनी में रूस की हिस्सेदारी, उसके अकाउंट माइक्रोसॉफ्ट ने बिन बताए किए ब्लॉक: एक्सेल का डाटा भी रोका, नायरा एनर्जी ने हाई कोर्ट से माँगा न्याय

मार्केटिंग कंपनी नायरा एनर्जी ने माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह रूस की भागीदारी वाली भारत की एक प्रमुख तेल रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनी है। कंपनी का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट ने बिना किसी पूर्व सूचना के उसके ईमेल एक्सेस जैसी जरूरी डिजिटल सेवाएँ अचानक बंद कर दी।

नायरा एनर्जी का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट के इस कदम से पूरे भारत भर के संचालन पर बुरा असर पड़ा है और कंपनी की रोजमर्रा की गतिविधियाँ बाधित हो गई हैं।

प्रतिबंधों का परिणाम और परिचालन पर प्रभाव

हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) ने नायरा एनर्जी पर प्रतिबंध लगाए हैं क्योंकि उसका संबंध रूसी तेल कंपनी रोजनेफ्ट (Rosneft) से है। इस फैसले के बाद कई असर दिखाई दिए। हालाँकि माइक्रोसॉफ्ट का मुख्यालय अमेरिका में है और नायरा का तर्क है कि माइक्रोसॉप्ट कंपनी अमेरिकी या भारतीय कानूनों के तहत किसी भी तरह से यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों को लागू नहीं कर सकती।

EU के प्रतिबंधों के बाद कम से कम दो जहाजों ने नायरा की वडिनार रिफाइनरी से रिफाइंड प्रोडक्ट्स की लोडिंग टाल दी। साथ ही एक टैंकर जो रूसी Urals क्रूड लेकर आ रहा था, उसे रास्ते में ही मोड़ दिया गया। इस पूरे संकट के बीच नायरा के CEO ने इस्तीफा दे दिया है और उनकी जगह अब सर्गेई डेनिसोव (Sergey Denisov) को नया CEO नियुक्त किया गया है।

नायरा ने की कोर्ट से तत्काल राहत की माँग

याचिका में अंतरिम आदेश और सेवाओं की तुरंत बहाली की माँग की गई है। नायरा का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट ने यह कदम ‘एकतरफा, बिना किसी पूर्व सूचना, सलाह या बातचीत के’ उठाया और इसे ‘कानूनी अनुपालन (compliance)’ के नाम पर किया गया।

खास बात यह है कि नायरा ने जिन सेवाओं का उपयोग किया, वे ‘पूरी तरह से भुगतान की गई लाइसेंस (fully paid-up licences)’ के तहत ली गई थीं। यही वजह है कि यह कार्रवाई और भी अनुचित लगती है।

नायरा का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट की इस कार्रवाई की वजह से उन्हें अपने ही डाटा और खुद के बनाए टूल्स और प्रोडक्ट्स तक पहुँच नहीं मिल पा रही है। मंगलवार (29 जुलाई 2025) को लगाई गई इस रोक से उनके रोजमर्रा के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है।

भारत की ईंधन अर्थव्यवस्था में रणनीतिक महत्व

अपनी याचिका में कंपनी ने भारत के ऊर्जा बुनियादी ढाँचे में अपने महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया है। कंपनी देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता के लगभग 8% हिस्से के लिए जिम्मेदार है और 7% पेट्रोल पंप का संचालन करती है। इसके अलावा कंपनी भारत की 8% पॉलीप्रोपाइलीन उत्पादन क्षमता भी विकसित कर रही है।

कंपनी ने मौजूदा चुनौतियों के बावजूद यह भरोसा दिलाया है कि वह पूरे देश में ईंधन की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रखेगी और भारतीय नियमों का पूरी तरह से पालन करते हुए काम करती रहेगी।

इस महीने की शुरुआत में यूरोपीय संघ ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के 18वें पैकेज के तहत नायरा की वाडिनार रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगा दिए। इन प्रतिबंधों में संपत्तियों को फ्रीज करना, शिपिंग और बीमा पर रोक, और रूसी कच्चे तेल की कीमत की सीमा में कटौती शामिल हैं। हालाँकि, भारत सरकार ने एकतरफा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को मानने से स्पष्ट इनकार किया है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नायरा एनर्जी ने यूरोपीय संघ के इस कदम को ‘अनुचित और गैरकानूनी’ बताया। कंपनी ने कहा, “नायरा एनर्जी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दबाव और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है, जिनका कोई कानूनी आधार भी नहीं है। यह एकतरफा कदम बिल्कुल निराधार आरोपों पर आधारित है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है।

नायरा ने कहा, “ध्यान देने योग्य बात यह है कि कई यूरोपीय देश आज भी रूसी ऊर्जा का आयात कर रहे हैं, लेकिन एक ऊँचे नैतिक स्तर का दिखावा करते हुए एक भारतीय रिफाइनरी पर सवाल उठा रहे हैं, जो कि रूसी कच्चे तेल को परिशोधित करके भारत की 1.4 अरब आबादी और व्यवसायों के लिए उपयोग करती है।”

इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में जल्दी ही होने की उम्मीद है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट ने इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

पश्चिमी प्रतिबंधों की रणनीति में भू-राजनीतिक हथियार के रूप में बिग टेक

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद कई बड़ी पश्चिमी कंपनियों ने रूस में अपने कामकाज को निलंबित कर दिया था। इन कंपनियों ने इसका कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन करना और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को बताया।

वीजा और मास्टरकार्ड जैसी बड़ी वित्तीय कंपनियों ने रूसी बैंकों से जुड़ी सेवाएँ बंद कर दीं, जिससे रूस के बाहर लेन-देन (cross-border payments) पर बड़ा असर पड़ा।

गूगल जैसी टेक कंपनियों ने भी कई सेवाएँ, विज्ञापन और कमाई के रास्ते (monetisation channels) रूस में सीमित कर दिए। मैकडॉनल्ड्स जैसी कंपनियों ने भी रूस से पूरी तरह कारोबार समेट लिया, लेकिन बाद में उनकी जगह स्थानीय ब्रांडों ने ले ली।

ये सभी कदम उस समय उठाए गए जब कंपनियाँ युद्ध और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को देखते हुए कानूनी, नैतिक और अपनी छवि से जुड़ी जोखिमों का फिर से मूल्यांकन कर रही थीं। इस तरह रूस से कंपनियों का एक बड़ा पलायन देखने को मिला।

ऑपरेशन सिंदूर गेमचेंजर, भारतीय सेना के सामने फुस्स हुए पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक हथियार भी: राज्यसभा में बोले राजनाथ सिंह, विपक्ष पर कसा ‘लाइटहाउस’ वाला तंज

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिंदूर में 100 से अधिक पाकिस्तानी आतंकी मारे गए हैं। उन्होंने यह भी बताया है कि ऑपरेशन के दौरान कोई भी नुकसान भारतीय सैन्य ठिकानों को नहीं पहुँचा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राज्यसभा में मंगलवार (29 जुलाई, 2025) को अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि भारत ने 7-8 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर किया था, लेकिन इसका उद्देश्य आतंकी ठिकानों को नष्ट करना ही था। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी मारे गए।

उन्होंने बताया कि भारत के आत्मसुरक्षा में कार्रवाई करने के बावजूद 10 मई की रात पाकिस्तान ने कई मिसाइलों और ड्रोन से भारत पर हमला करने का प्रयास किया और साथ ही इलेक्ट्रॉनिक हथियार भी उपयोग किए। रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के निशाने पर भारतीय वायु सेना और सेना के अड्डे थे।

रक्षा मंत्री ने बताया कि इस हमले को भारतीय सेनाओं ने नाकाम कर दिया। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के हमले में कोई भारतीय एसेट को नुकसान नहीं हुआ है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने पकिस्तान के बड़े एयरबेस तबाह किए, उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन को पूरी दुनिया ने देखा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 10 मई, 2025 को जब भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान में कहर मचाया तो वह घुटनों पर आ गया और सीजफायर की पेशकश की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि यह भी स्पष्ट किया गया था कि किसी भी आतंकी घटना पर ऑपरेशन वापस चालू हो जाएगा।

रक्षा मंत्री ने बताया कि 800 वर्षों की गुलामी के चलते भारतीय जनता को आक्रामक ना मानने की भ्रान्ति पैदा हो गई थी। उन्होंने कहा कि भारतीयों को कमतर दिखाने का प्रयास हुआ। राजनाथ सिंह ने यह भी बताया कि आजादी के आंदोलन में जब क्रांतिकारियों ने साहस दिखाया तो वह रीडिस्कवरी ऑफ़ इंडिया थी।

उन्होंने कहा कि हिन्दू देवी देवताओं श्रीराम और शिव कृष्ण ने शस्त्र धारण किया है, उन्होंने हमें कायरता का पाठ नहीं पढ़ाया है। रक्षा मंत्री ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय पहचान को वापस जानने की प्रक्रिया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि पहले के समय में आतंकी भारत में घुस कर लोगों का कत्लेआम करते थे और सरकारें देखती थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब यह नहीं चलेगा। उन्होंने पाकिस्तान और आतंकियों ने सोचा था भारत में हमले करना एक लो कॉस्ट हाई रिटर्न काम है लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस इक्वेशन को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर गेम चेंजर साबित हुआ है।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अभी ऑपरेशन सिंदूर पर सिर्फ स्टॉप है, फुल स्टॉप नहीं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अगर नहीं किया जाता तो क्या विकल्प था, क्या भारत को डोजियर सौंपना था। रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी के चलते बड़ी संख्या में नागरिकों को खोया गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर प्रहार भी किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की नीतिगत गड़बड़ी नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने इसके लिए ‘बाप मरे अँधेरे में, बेटा पॉवर हाउस’ वाली कहावत सुनाई। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह दिन आएगा जब POK के लोग भारतीय प्रशासन व्यवस्था का हिस्सा होंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कॉन्ग्रेस पर हमला करने के लिए एक गजल भी सुनाई।

राज्यसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि दुश्मन का इस ऑपरेशन में बड़ा नुकसान हुआ है और विपक्ष को उससे जुड़े प्रश्न पूछने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने 1962 के बाद जो प्रश्न पूछे थे उनमें था कि देश की जमीन क्यों गई, यह नहीं कि मशीन का क्या नुकसान हुआ।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र की हीलाहवाली पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड पर भी प्रश्न उठाए। उन्होए UPA सरकार के पहले एक्शन ना लेने को भी इस दौरान घेरा। इससे पहले लोकसभा में भी उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर बयान दिया था।

ST महिला से रेप में गिरफ्तार आफताब अंसारी पुलिस की गिरफ्त से भागा, बाद में नदी में मिली लाश: झारखंड पुलिस ने शिकायत करने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं पर ही ठोक दिया केस

झारखंड के रामगढ़ में आफताब अंसारी ने एक विवाहित जनजातीय महिला का रेप किया था। इसके बाद उस पर धर्मांतरण के लिए दबाव बना रहा था। उसकी शिकायत होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। हालाँकि वह हिरासत से भाग निकला था। शनिवार (26 जुलाई 2025) को नदी में उसकी लाश मिली है। पुलिस ने उसकी शिकायत करने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

हिंदू जनजातीय महिला को आफताब ने नौकरी का लालच देकर अर्शी गारमेंट्स नाम की एक दुकान पर बुलाया था। बाद में दुकान के पीछे लेजाकर महिला के साथ रेप किया। मामले की सूचना मिलने पर बुधवार (23 जुलाई 2025) को ‘हिंदू टाइगर फोर्स’ नामक एक संगठन से जुड़े हिंदू कार्यकर्ताओं ने आफताब अंसारी की पहले पिटाई की। इसके बाद रेप जैसे जघन्य अपराध के लिए उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

हालाँकि, आफताब पुलिस हिरासत से भाग निकला और अधिकारियों से बचने के लिए दामोदर नदी में कूद गया। इसका सीसीटीवी फुटेज भी जारी हुआ है। इसमें अंसारी को जेल से भागते हुए देखा जा सकता है।

इसके बाद शनिवार ( 26 जुलाई 2025) को आफताब अंसारी का शव उसी नदी में मिला। हालाँकि उसकी मौत से इलाके में काफी तनाव पैदा हो गया है। उसके परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने हिरासत में लेकर उसकी हत्या कर दी। स्थानीय मुस्लिम समुदाय भी परिवार के समर्थन में सामने आया है और आरोप लगाया है कि आफताब की हत्या पुलिस ने की है।

आफताब अंसारी की मौत के बाद, स्थानीय पुलिस ने हिंदू संगठन ‘हिंदू टाइगर फोर्स’ के 12 सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं एक सदस्य राजेश सिन्हा को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि उन्हें सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले एक वीडियो को ऑनलाइन पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

इस बीच हजारीबाग से भाजपा सांसद मनीष जायसवाल ने उनकी गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा है कि लिखित शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई इसलिए पीड़ित महिला ने मदद के लिए सिन्हा से संपर्क किया था।

इसके अलावा रविवार (27 जुलाई 2025) को बड़कागाँव के भाजपा विधायक रोशन लाल चौधरी के नेतृत्व में हिंदू संगठनों ने न्याय की इस चूक के खिलाफ करीब डेढ़ घंटे तक धरना दिया।

बोकारो रेंज के IGP क्रांति कुमार गरिदेशी ने घटना के बाद कार्रवाई में लापरवाही के लिए रामगढ़ पुलिस स्टेशन के प्रभारी प्रमोद कुमार सिंह और तीन कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है।

इस बीच पार्टी के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने रामगढ़ SP अजय कुमार से मुलाकात की। उन्होंने अंसारी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।

भारतीय के घर में घुसा अमेरिकी, कहा- ईसाई बनो, समृद्धि मिलेगी: टूरिस्ट-बिजनेस वीजा पर भारत आता था जैकब, हिंदुओं को धर्मांतरण के लिए देता था लालच

महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड में एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ विदेशी पैसे का इस्तेमाल कर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में पुलिस ने एक अमेरिकी नागरिक और उसके भारतीय साथी को गिरफ्तार किया है। ये लोग ईसाइयत अपनाने के लिए पैसों का लालच देते थे। इस मामले में एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है।

इससे देश में विदेशी फंड के जरिए धर्मांतरण पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि ये लोग स्थानीय लोगों को ईसाई बनाने के लिए पैसों का लालच देते थे। फिलहाल जाँच चल रही है और पुलिस पूरे मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।

धर्मांतरण कराने की साजिश में शामिल था विदेशी नागरिक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपितों की पहचान अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया निवासी शेफ़र जैविन जैकब (41) और पिंपरी के रईसोनी सोसाइटी निवासी स्टीवन विजय कदम (46) के रूप में हुई है। जैकब पिंपरी-चिंचवड के मुकाई चौक के पास एक किराए के फ्लैट में रह रहा था।

जाँच में पता चला है कि जैकब 2016 से भारत आ रहा है। टूरिस्ट और बिजनेस वीजा पर कई बार भारत का दौरा किया। इससे यह संदेह पैदा हुआ कि कहीं वह वैध यात्रा के बहाने धर्म प्रचार जैसे गतिविधियों में तो शामिल नहीं था।

FIR विवरण: हिंदू व्यक्ति को पैसे का लालच देने का कथित प्रयास

पिंपरी के रहने वाले हिंदू-सिंधी समुदाय के 27 वर्षीय सनी धनानी ने रविवार (27 जुलाई 2025) को पिंपरी पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई। FIR के अनुसार, जैकब और कदम 27 जुलाई सुबह करीब 11:30 बजे सनी के घर आए और उन्हें ईसाइयत अपनाने के लिए कहने लगे।

शिकायत के मुताबिक आरोपितों ने खुद को धार्मिक जानकार बताते हुए हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला दिया और मोक्ष के लिए हिन्दू धर्म के बजाए ईसाइयत को बेहतर रास्ता बताया। उन्होंने सनी और उनके परिवार से वादा किया कि अगर वे ईसाइयत अपना लेंगे, तो उन्हें मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और विदेशों से आर्थिक सहायता मिलेगी।

सनी को जब शक हुआ, तो पिंपरी पुलिस स्टेशन गया और मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। FIR में सनी ने कहा है कि अमेरिकी नागरिक ने उससे कहा था कि अगर वह ईसाइयत अपनाता है तो वह खुश रहेगा। मानसिक रूप से शांत रहेगा और आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएगा। उन्होंने विदेशी मदद दिलाने का भी वादा किया।

डिजिटल ट्रेल और व्यवस्थित आउटरीच संदिग्ध

पुलिस को शक है कि जैकब और कदम एक बड़े अभियान का हिस्सा थे जो लोगों का धर्मांतरण कराने की कोशिश में लगे हैं। माना जा रहा है कि ये लोग स्थानीय परिवारों से संपर्क बनाने के लिए WhatsApp, मोबाइल कॉल्स और आमने-सामने की बातचीत जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

FIR में बताया गया है कि वे भावनात्मक दबाव और धार्मिक ग्रंथों की चुनी हुई व्याख्या का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते थे।

पुलिस ने उनके पास से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कुछ किताबें जब्त की हैं। पुलिस को शक है कि इसका इस्तेमाल धार्मिक प्रचार के लिए किया गया होगा। फिलहाल इन सब की फॉरेंसिक जाँच और पैसों के लेन-देन की भी जाँच चल रही है।

नाबालिग के भूमिका की जाँच जारी

अधिकारियों ने एक नाबालिग लड़के को भी हिरासत में लिया है। हालाँकि मामले में उसकी भूमिका अभी तक स्पष्ट नहीं है। आशंका है कि उसका इस्तेमाल परिवारों का विश्वास जीतने या बैठकों और आउटरीच में मदद करने के लिए किया जाता था।

BNS और विदेशी अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई

पिंपरी-चिंचवड पुलिस ने आरोपित अमेरिकी नागरिक और उसके साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और विदेशियों अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

BNS की धारा 299 के तहत उन्हें धार्मिक भावनाएँ भड़काने के इरादे से जानबूझकर की गई हरकतों के लिए आरोपित बनाया गया है। साथ ही, धारा 3(5) के तहत उन पर प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप भी लगाया गया है।

इसके अलावा विदेशी नागरिक होने के कारण उन पर विदेशियों अधिनियम की धारा 14(b) और 14(c) के तहत भी केस दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत उस पर वीजा की शर्तों का उल्लंघन करने और भारत में अनुमति से बाहर जाकर गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

2016 से भारत आ रहा है जैकब

यह मामला भारत के छोटे शहरों और कस्बों में संगठित रूप से विदेशी फंडिंग के सहारे धर्मांतरण की गहरी साजिश की ओर भी इशारा कर रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने माँग की है कि जैकब के 2016 से अब तक के भारत दौरे और उसके संपर्कों की गहराई से जाँच होनी चाहिए।

ऐसा माना जा रहा है कि आरोपित ने पिंपरी-चिंचवड इलाके में संपर्कों का एक नेटवर्क बना लिया था। ये भी आशंका जताई जा रही है कि उसने कई कमजोर परिवारों के साथ भी इसी तरह की कोशिश की होगी।

अमेरिकी नागरिक इस समय न्यायिक हिरासत में है और इमिग्रेशन अधिकारियों को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक उसके वीजा को स्थायी रूप से रद्द कर उसे देश से डिपोर्ट भी जा सकता है।