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’24 घंटे में बढ़ा देंगे टैरिफ’: रूस के साथ तेल कारोबार रोकने के लिए ट्रंप की नई गीदड़भभकी, भारत ने कहा- राष्ट्रीय हित के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएँगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (5 अगस्त 2025) को कहा कि अगले 24 घंटे में ही भारत पर टैरिफ की दरों में बढ़ोतरी की जाएगी। इस दौरान ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत ने अमेरिका को शून्य टैरिफ का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखे हुए है।

इस दौरान ट्रंप भारत के लिए ये कहने से भी नहीं चूके कि भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं है और भारत के टैरिफ दुनिया में सबसे अधिक हैं। ट्रंप असल में मंगलवार को CNBC के शो स्क्वॉक बॉक्स के लिए इंटरव्यू दे रहे थे।

भारत के लेकर ट्रंप का ये बयान तब आया है जब महज एक दिन पहले ही वह भारत को रूस से तेल खरीदने के एवज में टैरिफ की दर बढ़ाने की धमकी दे चुके हैं। उनका कहना था कि भारत रूस से किफायती दरों पर तेल लेकर वैश्विक बाजार में महँगे दामों पर बेचता है और मुनाफा कमाता है। इसके साथ ट्रंप ने भारत-रूस के व्यापार को यूक्रेन युद्ध से भी जोड़ दिया था और कहा था कि भारत के कारण यूक्रेन में लोग मारे जा रहे हैं।

इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप और यूरोपियन यूनियन के लिए आँकड़ों के साथ जवाब दिया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका खुद भी रीस के साथ कई क्षेत्रों में व्यापार करता है। ऐसे में भारत के लिए ट्रंप का तंज कसना न केवल अनैतिक है बल्कि अकारण भी है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “अमेरिका भी रूस से परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, ईवी उद्योग के लिएपैलेडियम के साथ उर्वरक और रसायन आयात करता है। ऐसे में भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि गलत भी है। भारत हर बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”

विदेश मंत्रालय की ओर से इस जानकारी के साझा करने के बाद व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप से रूस- अमेरिका के मुद्दे पर सवाल किया गया तो ट्रंप ने इस बारे में कोई जानकारी न होने की बात कह डाली। ट्रंप ने कहा कि रूस के साथ किन किन चीजों का व्यापार और आयात किया जाता है, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।

खीझे तो बोले ट्रंप- बढ़ाएँगे शुल्क

ट्रंप ने कहा कि अगले 24 घंटों में भारत से आने वाले सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 25% की दर से बढ़ा दी जाएगी। बताते चलें कि 30 जुलाई 2025 को भारत के सामान पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। साथ ही भारत पर रूस के साथ व्यापार करने पर अतिरिक्त कर लगाने की बात कही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने फार्मास्यूटिकल्स के आयात पर 250% तक करने के संकेत भी दिए हैं। इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि हम चाहते हैं कि फार्मास्यूटिकल्स अमेरिका में बने इसलिए जो टैरिफ 150% था वह 250% तक भी जा सकता है।

ट्रंप पहले भी ब्रिक्स देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। अगर ऐसा होता है, तो भारतीय सामानों के आयात पर प्रभावी टैरिफ 35% होगा। अमेरिका में एक विधेयक भी पारित होने वाला है। इसके तहत रूस के साथ भारत, चीन और ब्राजील के लेन-देन पर 500% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।

कनाडा में SFJ ने बनाया ‘दूतावास’, टैक्स पेयर के पैसे से बने गुरूद्वारे का हिस्सा कब्जाया: ‘डिप्लोमेटिक पोस्ट’ पर ‘रिपब्लिक ऑफ़ खालिस्तान’ लिखा

कनाडा के सरे में प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने ‘एंबेसी ऑफ द रिपब्लिक खालिस्तान’ के नाम से कथित ‘दूतावास’ स्थापित कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों की इस पर कड़ी नजर है क्योंकि प्रतिबंधित संगठन एसएफजे वहाँ सिख जनमत संग्रह यानी सिख रेफेरेंडम से पहले एक बार फिर इस रूप में सामने आया है।

गुरुद्वारे में खोला गया कथित खालिस्तानी दूतावास

‘सिख फॉर जस्टिस’ ने गुरु नानक सिख गुरुद्वारे के साथ मिलकर कथित ‘खालिस्तान दूतावास’ खोला है। गुरुद्वारा परिसर में मौजूद एक इमारत में ‘खालिस्तान गणराज्य’ के बोर्ड के साथ यह अस्थायी डिप्लोमेटिक पोस्ट भी स्थापित की गई है।

गौर करने वाली बात यह है कि जिस इमारत में कथित दूतावास खोला गया है, वह टैक्स पेयर्स के पैसे से बना था। स्थानीय लोगों ने CNN-News18 को बताया गया है कि ब्रिटिश कोलंबिया सरकार ने हाल ही में उसी इमारत में एक लिफ्ट लगाने के लिए 150,000 डॉलर यानी 1,31,73,225 रुपए आवंटित किए।

खालिस्तानियों का घर बना कनाडा

इससे पहले कनाडा की खुफिया एजेंसी कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने सार्वजनिक तौर पर ये माना था कि खालिस्तानी कनाडा की धरती का इस्तेमाल हिंसा को बढ़ावा देने, धन जुटाने और योजना बनाने के लिए कर रहे हैं। ये लोग भारत को निशाना बनाना चाहते हैं। यह पहली बार हुआ है जब कनाडा की खुफिया एजेंसी ने अपनी सालाना रिपोर्ट में खास तौर पर कहा है कि खालिस्तानी संगठन हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत लगातार जताता रहा है विरोध

भारत पहले से कहता आ रहा है कि कनाडा खालिस्तानियों की शरणस्थली बन गया है। 1980 से कनाडा में मौजूद खालिस्तानी चरमपंथी भारत में पंजाब को ‘एक स्वतंत्र खालिस्तान’ बनाने की माँग करते रहे हैं। अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए हिंसा का सहारा लिया गया। पंजाब सालों तक हिंसा की आग में जलता रहा।

भारत ने खालिस्तानी उग्रवादियों के प्रति ढिलाई बरतने पर बार-बार कनाडा से आपत्ति दर्ज कराई है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में कनाडा में आतंकवाद को पनपने दिया गया और अब कनाडा की धरती पर टैक्सपेयर के पैसे से कथित “खालिस्तानी दूतावास” का निर्माण भारत के साथ में और खटास पैदा करेगा।

जहाँ प्रकट हुईं जानकी, उसे भव्य बनाएँगे ‘लव (नीतीश कुमार)-कुश (अमित शाह)’: घर-घर पहुँच रहा आमंत्रण का अक्षत, जानिए कैसे ‘पुनौरा धाम’ का होगा कायाकल्प

इस्लामी आक्रांताओं ने राम जन्मभूमि पर ढाँचा खड़ा कर दिया, भारत माता गुलाम रहीं, स्वतंत्र भारत में मामला न्यायालय में चला गया, इसलिए हिंदुओं को अपने ही अराध्य को भव्य मंदिर में देखने के लिए 5 सदी की प्रतीक्षा करनी पड़ी। पर हिंदुओं का उससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह रहा कि ऐसा कोई संकट नहीं होने के बाद भी मिथिला की वह पवित्र भूमि दशकों उपेक्षित रही, जहाँ से जगत जननी जानकी सीता प्रकट हुईं। अब इस प्राकट्य स्थल को नव जीवन देने का बीड़ा उनके ‘लव (नीतीश कुमार)-कुश (अमित शाह)’ ने उठाया है।

अक्षत-तुलसीदल से लोगों को किया जा रहा आमंत्रित

जानकी मंदिर और कॉरिडोर के शिलान्यास को भव्य बनाने के लिए पुनौरा धाम में तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। अमित शाह और नीतीश कुमार समेत कई बड़े नेता और साधु-संत व आम लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में लाखों लोगों को पहुँचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

इस शिलान्यास समारोह के लिए घर-घर आमंत्रण का अभियान भी चलाया जा रहा है। घर-घर जाकर लोगों को पीले अक्षत और तुलसी दल देकर कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। साथ ही, नगर से गुजरने वाले राहगीरों को भी कार्यक्रम में बुलाने के लिए न्योता दिया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस शिलान्यास कार्यक्रम को तीन दिवसीय भव्य उत्सव के तौर पर मनाया जाएगा। माता जानकी के दिव्य मंदिर की नींव के लिए 11 नदियों का पवित्र जल लाया जाएगा। इनमें गंगा, यमुना, भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर, धौलीगंगा, लक्ष्मणा गंगा, सरस्वती, कमला और सरयू नदियाँ शामिल हैं।

मंदिर प्रबंधन ने शिलान्यास कार्यक्रम की शाम मंदिर पर दीपोत्सव का आयोजन करने करने का फैसला भी लिया है। इसे लेकर शिलान्यास के दिन लोगों से एक दीपक के साथ आने की अपील की जा रही है। उस दिन मंदिर के साथ-साथ सीताकुंड परिसर को 51,000 दीपों से सजाने की योजना है।

क्या है पुनौरा धाम के विकास की योजना?

बीते 1 जुलाई को बिहार कैबिनेट ने पुनौरा धाम में मंदिर निर्माण के लिए 882.87 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी थी। इस राशि में से 137 करोड़ रुपए से जानकी मंदिर का निर्माण किया जाएगा, 728 करोड़ रुपए से पर्यटन से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास होना है। 10 वर्षों तक इसके रख-रखाव पर 16.62 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान किया गया है।

इस तीर्थ के विकास के लिए 50 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। विकास परियोजना में पारंपरिक वास्तुकला के अनुरूप एक विशाल मंदिर का निर्माण और इसका संरक्षण व सौंदर्यीकरण शामिल है। साथ ही, मंदिर परिसर के चारों तरफ प्रवेश द्वार, विश्राम गृह, यज्ञशाला, भोजनालय, मेडिटेशन सेंटर और प्रवचन हॉल का निर्माण भी किया जाएगा।

पर्यटन सुविधाओं के विकास के तहत परिसर में होटल, रेस्टहाउस, संग्रहालय, स्मृति द्वार और स्मारक भवन का निर्माण किया जाएगा। मंदिर के आस-पास के क्षेत्र में हरियाली बनाए रखने के लिए सुंदर जलाशय और फव्वारे लगाए जाएँगे और बगीचों का निर्माण भी किया जाएगा। साथ ही, ‘सीता-वाटिका’ और ‘लव-कुश वाटिका’ का भी विकास किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बस टर्मिनल का निर्माण किया जाएगा और मंदिर तक पहुँचने और ठहरने के लिए भी इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। साथ ही, आधुनिक पार्किंग स्थल, चौड़ी सड़कें और स्ट्रीट लाइट्स के साथ फुटपाथ बनाए जाएँगे। इसके अलावा क्षेत्र में डिजिटल सूचना केंद्र और सुरक्षा के लिए कैमरे लगाए जाएँगे।

दशकों से उपेक्षित रहे जानकी जन्मस्थान की नीतीश कुमार ने ली सुध

अयोध्या की राम जन्मभूमि की तरह ही माता सीता का जन्मस्थान भी वर्षों तक उपेक्षा और अनदेखी का शिकार रहा है। अयोध्या में तो विवाद का बहाना बनाकर दशकों तक मंदिर निर्माण को टाल दिया गया लेकिन मिथिला की इस पवित्र पर किसी तरह का विवाद भी नहीं था फिर भी यह पावन स्थल अनदेखी के अँधेरे में डूबा रहा। ना भव्य मंदिर बनाया गया और ना ही किसी तरह के बड़े स्तर के विकास कार्य किए गए।

वर्षों तक ना केवल स्थानीय लोग बल्कि दूर-दराज के श्रद्धालु यहाँ एक भव्य मंदिर का इंतजार करते रहे लेकिन अब इन हालातों को बदलने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उठाई है। उनके प्रयासों के बाद माता जानकी का भव्य मंदिर आकार लेने जा रहा है। यह भव्य मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र तो बनेगा है, साथ ही साथ बिहार के धार्मिक-सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी होगा।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद माता सीता के जन्मस्थान को भी संजीवनी मिली है। सीएम नीतीश कुमार कहते हैं कि यहाँ भव्य मंदिर बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ माँ जानकी की पूजा-अर्चना करने आएँगे। साथ ही, वे कहते हैं कि पर्यटकों के आगमन से रोजगार का भी सृजन भी किया होगा।

नीतीश कुमार लगातार पुनौरा धाम जाकर तैयारियों को जायजा ले रहे हैं। बीते 26 जुलाई को सीएम नीतीश और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पुनौरा धाम पहुँचे थे और वहाँ उन्होंने पूजा-अर्चना करने के अलावा तैयारियों की समीक्षा की भी की थी। कुछ दिनों पहले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने भी इस पवित्र स्थल का दौरा किया था।

पुनौरा धाम में तैयारियों का जायजा लेते सीएम नीतीश कुमार

कैसा होगा माता जानकी का मंदिर?

इस तीर्थ स्थल के विकास के लिए डिजाइन सलाहकार के तौर पर उसकी कंपनी को नियुक्त किया गया है जो अयोध्या में राम मंदिर की मास्टर प्लानिंग और वास्तुकला सेवाओं के लिए नियुक्त की गई थी। पिछले 22 जून को नीतीश कुमार ने सीएम नीतीश ने मंदिर सहित अन्य संरचनाओं का डिजाइन शेयर किया था।

राम मंदिर के वास्तुकार रहे आशीष सोमपुरा ही इस मंदिर के आर्किटेक्ट हैं। उनका कहना है कि माँ जानकी के मंदिर का आर्किटेक्चर राम मंदिर के जैसा ही भव्य हो इसका पूरी कोशिश रहेगी। माता जानकी का यह मंदिर दशकों-सदियों तक मजबूती से टिका रहे इसके लिए खास तैयारियाँ की गई हैं।

इस मंदिर का निर्माण राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के लाल बलुआपत्थरों (रेड सैंडस्टोन) से किया जाएगा जिसके चलते पूरे मंदिर का स्वरूप एक तरह से दिखेगा। यह पत्थर सदियों तक बिना टूटे या क्षतिग्रस्त हुए संरचना को मजबूती देता है। इस मंदिर की ऊँचाई 151 फीट होगी।

मंदिर परिसर निर्माण की परियोजना

क्या है सीतामढ़ी का ऐतिहासिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजा जनक को भूमि में हल चलाते समय सोने के घड़े में सीता मिली थीं। भूमि से मिलने के कारण माता सीता को भूमिपुत्री या भूसुता भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाराजा जनक के राज्य जनकपुर में भयंकर अकाल पड़ने के बाद एक ऋषि ने उन्हें यज्ञ करने की सलाह दी थी और बंजर जमीन जोतने को कहा था।

जिले की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, भगवान इंद्र को वर्षा करने हेतु मनाने के लिए जब राजा जनक सीतामढ़ी के पास कहीं हल चला रहे थे। ऐसा कहा जाता है कि राजा जनक ने उस स्थान पर एक कुंड खुदवाया था जहाँ सीता प्रकट हुई थीं और उनके विवाह के बाद उस स्थान को चिह्नित करने के लिए राम, सीता और लक्ष्मण की पत्थर की मूर्तियाँ स्थापित की थीं।

इस कुंड को अब जानकी कुंड के नाम से जाना जाता है और जानकी मंदिर के दक्षिण में स्थित है। वेबसाइट के मुताबिक, समय के साथ-साथ यह स्थान जंगल में तब्दील हो गया और करीब 500 वर्ष पहले बीरबल दास नामक एक हिंदू तपस्वी को ईश्वरीय प्रेरणा से उस स्थान का पता चला था।

वे जब अयोध्या से आए तो उन्होंने जंगल साफ किया और उन्हें राजा जनक द्वारा स्थापित मूर्तियाँ मिलीं और उन्हें वहाँ मंदिर बनवाकर माता जानकी की पूजा शुरू कर दी। इस स्थान पर मौजूदा मंदिर को करीब 100 वर्ष पुराना माना गया है।

वृन्दावन के बाँके बिहारी मंदिर के प्रबन्धन के लिए बनेगी समिति, रिटायर्ड जज होंगे मुखिया: सुप्रीम कोर्ट में UP सरकार बोली- भक्तों के भले के लिए बनाया है कानून

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि वृंदावन में बाँके बिहारी मंदिर ट्रस्ट के लिए बनाया जा रहा कानून भक्तों के भले के लिए है। योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए सुविधाएँ बढ़ाना चाहती है। योगी सरकार ने यह बातें सुप्रीम कोर्ट में कहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बीच मंदिर के प्रबन्धन के लिए एक अंतरिम समिति बनाने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से अब समिति के लिए नाम माँगे हैं। यह पूरा मामला बाँके बिहारी कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है।

मंगलवार (5 अगस्त, 2025) को बाँके बिहारी कॉरिडोर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक राज्य सरकार और गोस्वामियों के बीच का विवाद नहीं सुलझता, तब तक मंदिर के प्रबन्धन के लिए एक समिति का गठन किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके मुखिया कोई हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले को 8 अगस्त, 2025 को सुनने को कहा है। तब तक दोनों पक्षों को जज का नाम देना होगा।

इस सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि मंदिर में प्रबन्धन के लिए ट्रस्ट बनाया जाना है, और इसके लिए एक अध्यादेश लाया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि वह मंदिर के कामकाज में कोई दखल नहीं देने वाली है और अध्यादेश का उद्देश्य श्रद्धालुओं की भलाई है। राज्य ने बताया, “उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी और कुछ निर्देश जारी किए गए थे। राज्य का धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करने का कभी इरादा नहीं था, न ही है।”

इस मामले में 4 अगस्त को भी सुनवाई हुई थी। 4 अगस्त, 2025 को उत्तर प्रदेश ने सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट तौर पर बताया था कि मंदिर के खातों में जमा ₹500 करोड़ का इस्तेमाल केवल मंदिर के ही कामों के लिए किया जाएगा। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ पहुँचे याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार का अध्यादेश मंदिर के प्रबन्धन से गोस्वामियों को हटा देता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मंदिर में अभी तक कोई प्रबन्धन समिति ही नहीं है।

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश सरकार के वृंदावन में बाँके बिहारी मंदिर का कॉरिडोर बनाने से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार यहाँ कॉरिडोर बना कर भीड़ का प्रबन्धन ठीक करना चाहती है। इसका विरोध कुछ परिवार कर रहे हैं। विरोध का एक पॉइंट यह भी है कि मंदिर ट्रस्ट का पैसा, यहाँ कॉरिडोर की जमीन खरीदने में क्यों लगाया जाए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस पैसे के इस्तेमाल की अनुमति दे दी थी। हालाँकि, अब फिर से इसमें कानूनी लड़ाई चालू हो गई है।

MP का यासीन मछली करवाता था रेव पार्टी, ₹25 हजार में देता था एंट्री… हिन्दू लड़कियाँ होती थीं टारगेट पर: शहर से बाहर होते थे वेन्यू, पीड़िता ने करवाई रेप की FIR

भोपाल में हाई प्रोफाइल ड्रग तस्करी मामले में गिरफ्तार यासीन मछली को लेकर कई खुलासे हुए हैं। यासीन मछली हिन्दू लड़कियों को टारगेट करता था। यासीन पार्टी में आने वाली हिन्दू लड़कियों को ड्रग्स की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल करता था। इन लड़कियों को प्रेम जाल में फँसा कर उनका रेप करता और फिर ब्लैकमेल करता था। रेव पार्टियों से जुड़े कई वीडियो भी पुलिस के हाथ लगे हैं।

वह शहर के बाहरी इलाकों में रेव पार्टी आयोजित करता था। इन पार्टियों में एंट्री के लिए 10 से 25 हजार रुपए वसूले जाते थे। पार्टी में ड्रग्स के लिए अलग से रकम ऐंठी जाती थी। इस पूरे काले कारोबार में यासीन मछली और उसका परिवार शामिल था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ड्रग तस्करी मामले में पकड़े गए यासीन मछली और उसके चाचा शाहवर मछली ने क्राइम ब्रांच की पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। क्राइम ब्रांच के एडिशनल DCP शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि रेव पार्टी में शामिल होने से पहले सभी लोग यासीन के बताए पब में इकट्ठा होते थे। यहाँ से पार्टी के लिए तय जगह पर रवाना होते थे।

रेव पार्टियों में नाच गाना, भारी शोर शराबा और ड्रग्स के नशे के बीच युवाओं को ‘एंजॉय’ करवाया जाता था। रात भर लाउड म्यूजिक होने के बाद भी शिकायत नहीं की जाती थी, क्योंकि पार्टी के लिए ऐसे फार्म हाउस चुने जाते थे, जो शहर की भीड़-भाड़ वाले इलाकों से काफी दूर हुआ करते थे।

क्राइम ब्रांच ने शहर के उन सभी पब, क्लब और लाउंज को नोटिस जारी किया है, जिसमें यासीन और उसके गिरोह के लोगों का आना-जाना लगा रहता था। अधिकारियों को शक है कि गिरोह में पब, क्लब और लाउंज के मालिक या स्टाफ भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए क्राइम ब्रांच ने उन सभी पब क्लब और लाउंज मालिकों को नोटिस जारी कर दिया है।

यासीन ने पब में मिली युवती का किया रेप

भोपाल के एमपी नगर थाने में यासीन मछली के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज हुआ है। यासीन पर 29 वर्षीय युवती के रेप का आरोप है। थाने की सब इंस्पेक्टर अर्चना तिवारी ने बताया कि प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली युवती ने रेप की शिकायत दर्ज कराई है।

युवती ने शिकायत में बताया कि करीब एक साल पहले एक पब में यासीन से मुलाकात हुई थी। यासीन ने युवती से दोस्ती की। दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लग गईं। यासीन ने युवती को शादी का झाँसा देकर फाइव स्टार में बुलाया और रेप किया।

यासीन के परिवार ने 55 साल में अवैध काम कर खड़ा किया ‘साम्राज्य’

ड्रग तस्कर यासीन मछली के परिवार ने 55 साल में अवैध कारोबार के जरिए बड़ा साम्राज्य खड़ा किया। यासीन का परिवार 1970 से पहले बुधवारा में रहता था और मछलियों की दलाली करता था। इसके बाद हथाईखेड़ा आया और यहाँ मछली पालने का ठेका लिया। 1980 में राजनीतिक पार्टियों की मदद कर इलाके में दबदबा बनाया। राजनीतिक मदद से ही मुस्लिमों की बस्ती बसा ली और पत्थर खदानों ने अवैध खनन शुरू किया।

साल 2000 में दुर्गा पंडाल के लिए चंदा और देवी जागरण के आयोजन के जरिए हिंदुओं का भरोसा जीतना शुरू किया। इसके बाद 2005 से 2010 के बीच हथाईखेड़ा के आसपास कई इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों का निर्माण हुआ। इन्हीं कॉलेजों के छात्रों के लिए फ्रेशर्स पार्टियाँ और क्रिकेट टीम बनाकर टूर्नामेंट कराए।

2015 के बाद इन पार्टियों में नशे का कारोबार चालू किया। छात्रों को नशे की लत लगा दी। मछली परिवार अवैध हथियारों की सप्लाई, ड्रग्स के अवैध कारोबार में पूरी तरह शामिल था। इस दौरान लड़कियों से रेप और ब्लैकमेलिंग का सिलसिला भी शुरू हुआ।

यासीन का गुर्गा अंशुल सिंह कॉन्ग्रेस नेत्री का बेटा निकला

यासीन के गुर्गे अंशुल सिंह उर्फ भूरी को 31 जुलाई 2025 को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। सोमवार (04 अगस्त 2025) को कोर्ट में पेशी के बाद अंशुल की रिमांड 07 अगस्त 2025 तक बढ़ा दी गई। पूछताछ में अंशुल ने खुद को कॉन्ग्रेस की महिला नेता का बेटा बताया।

अंशुल पर शहर के अलग-अलग थानों में 20 से अधिक हत्या के प्रयास, मारपीट, आर्म्स एक्ट, शराब और तस्करी के केस दर्ज हैं। टीटी नगर थाने में उसको हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया है।

पुलिस ने अंशुल के बयान के आधार पर 32 वर्षीय तौफीक निजामी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक पिस्टल और कारतूस जब्त किया गया है। तौफीक ने ही अंशुल को अवैध पिस्टल दी थी।

पुलिस की गिरफ्त में आया शाहवर मछली

18 जुलाई 2025 को भोपाल के गोविंदपुरा से सैफुद्दीन और आशू उर्फ शाहरुख को गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से ₹3 लाख और बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद की गई। इन्हीं की निशानदेही पर ड्रग तस्करी का सरगना शाहवर मछली और उसका भतीजा यासीन मछली को क्राइम ब्रांच ने दबोचा। दोनों के पास से 3 ग्राम एमडी ड्रग और एक देशी पिस्टल बरामद की गई थी।

जाँच में सामने आया कि यासीन और उसके चाचा शाहवर ड्रग्स तस्करी का धंधा करते थे। मुंबई, राजस्थान और पंजाब से चरस और अन्य ड्रग्स लाते थे। फिर इन्हें शहर के पब, लाउंज और क्लब में पार्टियों में बेचा करते थे। ड्रग्स की डिलीवरी के लिए हिंदू लड़कियों को इस्तेमाल किया जाता था। युवाओं के लिए रेव पार्टी आयोजित कर उन्हें नशे की लत लगाते थे। ये दोनों हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण करते थे और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव भी बनाते थे।

सेना के अपमान पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी को लताड़ा, न्यायपालिका पर झुंड बना कर INDI गठबंधन टूटा: प्रियंका बोलीं- जज नहीं करेंगे तय

सेना पर आपत्तिजनक बयान मामले में राहुल गाँधी को सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा है। इसके बाद कॉन्ग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ ही खड़ी हो गई है। कॉन्ग्रेस सांसद प्रियंका गाँधी ने न्यायपालिका को घेरने का प्रयास किया है। उन्होंने एक तरह से यह इशारा कर दिया है कि जज राहुल गाँधी पर टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। कॉन्ग्रेस के साथ ही बाक़ी विपक्षी दल भी सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ लामबंद हैं।

प्रियंका गाँधी ने क्या कहा?

प्रियंका गाँधी ने मंगलवार (5 अगस्त,2025) को संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट के जजों का पूरा सम्मान रखते हुए मैं ये कहना चाहती हूँ कि वे यह तय नहीं करेंगे कि सच्चा भारतीय कौन है।”

उन्होंने आगे कहा, “विपक्ष के नेता के नाते सरकार से सवाल पूछना उनका (राहुल गाँधी) कर्तव्य है। मेरे भाई कभी भी सेना के खिलाफ नहीं बोलेंगे, वह उनके प्रति बहुत सम्मान रखते हैं। उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया।”

INDI ब्लॉक ने भी सुप्रीम कोर्ट का किया अपमान

कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने एक X पोस्ट में लिखा, “आज सुबह इंडी गठबंधन के नेताओं की बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश द्वारा राहुल गाँधी जी पर की गई टिप्पणी पर चर्चा हुई।”

श्रीनेत ने आगे लिखा, “इंडी गठबंधन के सभी घटक दल इस बात से सहमत हैं कि वर्तमान न्यायाधीश ने एक ऐसी टिप्पणी की है जो राजनीतिक दलों के लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध है। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर टिप्पणी करना राजनीतिक दलों, विशेषकर नेता प्रतिपक्ष का दायित्व है।”

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं। माकन ने एक X पोस्ट में लिखा, “राहुल गाँधी जी और कॉन्ग्रेस पार्टी लगातार चीन के मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछ रही है, यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है… राहुल गाँधी की आवाज़ दबाने की हर कोशिश, सरकार की विफलताओं और उनके डर को उजागर करती है। ओ माई लार्ड।”

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (4 अगस्त) को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने राहुल गाँधी की याचिका पर सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राहुल गाँधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा था, “आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है? क्या आप वहाँ थे?

कोर्ट ने आगे कहा, “आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है? आप बिना किसी सबूत के ये बयान क्यों दे रहे हैं…अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ये सब नहीं कहते।”

सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि अगर वह प्रेस में छपी ये बातें नहीं कह सकते तो वह विपक्ष के नेता नहीं हो सकते। तो इस पर जस्टिस दत्ता ने पूछा, “आपको जो कुछ भी कहना है, संसद में क्यों नहीं कहते? आपको सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसा क्यों कहना पड़ता है?”

क्या था मामला?

यह मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी की चीन पर भारत के कब्जे और भारतीय सैनिकों के चीनी सैनिकों द्वारा ‘पीटे जाने’ की टिप्पणी से जुड़ा था। उन्होंने कहा था, “लोग भारत जोड़ो यात्रा, अशोक गहलोत और सचिन पायलट वगैरह के बारे में तो पूछेंगे ही। लेकिन चीन द्वारा 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा करने, 20 भारतीय सैनिकों को पीटने और अरुणाचल प्रदेश में हमारे सैनिकों की पिटाई के बारे में एक भी सवाल नहीं पूछेंगे।”

राहुल के इस बयान के बाद सीमा सड़क संगठन के एक अधिकारी ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में केस दर्ज करने से मना कर दिया था जिसके बाद राहुल गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था

पीएम मोदी ने भी किया SC की टिप्पणी का जिक्र

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए की संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट की राहुल गाँधी पर की गई टिप्पणी की जिक्र किया है। पीएम मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कल लगाई गई फटकार से बड़ी कोई फटकार नहीं हो सकती है।

उन्होंने कहा, “हम क्या कहें, जब सुप्रीम कोर्ट ने ही कह दिया… ये तो पत्थर मारना ही नहीं, ये ‘आ बैल मुझे मार’ वाली स्थिति है।”

‘न्यूक्लियर पर बयानबाजी में रखो सावधानी’: रूस ने अमेरिका को चेताया, मेदवेदेव के बयान के बाद ट्रंप ने भेजी थी परमाणु हथियार वाली 2 पनडुब्बी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस के पास दो परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करने के आदेश दिए जाने के बाद अब रूस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति को उनके बयानों को लेकर चेतावनी दी है।

एक प्रेस ब्रीफ्ंग में पेसकोव ने कहा, “रूस परमाणु अप्रसार के विषय पर बहुत सतर्क है और हमारा मानना है कि सभी लोगों को परमाणु से जुड़ी कोई भी बयानबाजी करने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।”

वाकयुद्ध से परमाणु हथियार तक पहुँचे अमेरिका-रूस के हालात?

अमेरिका और रूस के बीच हालिया विवाद की शुरुआत ट्रंप और रूस के पूर्व राष्ट्रपति और रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव के बीच हुए वाकयुद्ध के बाद हुई थी। दरअसल, ट्रंप ने रूस को 10 दिनों के भीतर रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रोकने पर सहमति देने का अल्टीमेटम दिया था। ट्रंप ने कहा था कि अगर ऐसा नहीं होता है तो वह रूस और उसके तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाएँगे।

इस पर मेदवेदेव ने कड़ा पलटवार किया था। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बेहद खास मेदवेदेव ने 28 जुलाई को एक X पोस्ट में कहा था कि ट्रंप का हर नया अल्टीमेटम ‘युद्ध की ओर एक कदम’ माना जाएगा और ये युद्ध यूक्रेन-रूस के बीच नहीं बल्कि अमेरिका के साथ होगा।

उन्होंने लिखा था, “रूस के साथ ट्रंप अल्टीमेटम का खेल खेल रहे हैं: 50 दिन या 10… उन्हें दो बातें याद रखनी चाहिए। एक तो रूस इज़रायल या ईरान नहीं है। दूसरा हर नया अल्टीमेटम एक खतरा और युद्ध की ओर एक कदम है। रूस और यूक्रेन के बीच नहीं बल्कि उनके अपने देश के साथ होगा।”

मेदवेदेव के इस बयान के बाद ट्रंप भड़क गए और दो परमाणु पनडुब्बियों को रूस के पास तैनात कर दिया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, “मेदवेदेव के भड़काऊ बयानों के आधार पर मैंने दो परमाणु पनडुब्बियों को उपयुक्त क्षेत्रों में तैनात करने का आदेश दिया है- इस आशंका के तहत कि कहीं ये मूर्खतापूर्ण और उकसाने वाले बयान केवल शब्दों तक सीमित न रह जाएँ।”

फोटो साभार- ट्रुथ सोशल

ट्रंप ने आगे लिखा, “शब्द बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, और अक्सर अनजाने में गंभीर परिणामों की ओर ले जाते हैं। मैं आशा करता हूँ कि यह मामला ऐसा न हो।” इसके अलावा मेदवेदेव ने रूस के डेड इकोनॉमी वाले बयान को लेकर ट्रंप के बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

अमेरिका का दूत जाएगा रूस

ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध विराम करने को लेकर कदम उठाने की बात कही है। वो पुतिन को अपना दोस्त भी बताते रहे हैं। हालाँकि, दोनों देशों के बीच बीते कुछ दिनों से संबंध लगातार बिगड़े हैं ऐसे में ट्रंप अपने विशेष दूत को रूस भेज रहे हैं।

ट्रंप ने कहा कि वह विशेष दूत स्टीव विटकॉफ को मास्को भेजेंगे क्योंकि अमेरिकी प्रशासन रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम सुनिश्चित करने के अपने प्रयासों में लगा हुआ है। ट्रंप ने कहा कि वह ऐसा समझौता चाहते हैं जिसके बाद लोगों की हत्याएँ बंद हो जाएँ।

क्या है परमाणु अप्रसार संधि?

परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना है। इस अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत 1968 में देशों के हस्ताक्षर के लिए खोली गई और 1970 में लागू हुई। 1995 में इस संधि को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया था और अब इस पर 191 हस्ताक्षरकर्ता हैं।

इस संधि के तहत परमाणु हथियार वाले देश दूसरों को परमाणु हथियार पाने में मदद न करने का भरोसा देते हैं और परमाणु हथियार न रखने वाले देश परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा करते हैं।

‘बहुत फजीहत हुई, पछता रहा होगा’: NDA संसदीय दल की बैठक में PM मोदी ने विपक्ष को घेरा, कहा- राहुल गाँधी का बचपना जाता नहीं

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता को लेकर एनडीए संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी का सम्मान किया गया। बैठक में प्रस्ताव पास किया गया जिसमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से लेकर आतंकी संगठन टीआरएफ तक का जिक्र है।

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ देश की सेना का सम्मान है और इसे देश के सामने लाना बेहद जरूरी है। विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बहस की माँग करके विपक्ष खुद पछता रहा होगा। उनकी बहुत फजीहत हुई। उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चा विपक्ष रोज कराए और हमें जवाब देने का मौका दे।

बैठक में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर प्रस्ताव भी पास किया गया। इसमें पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए पर्यटकों के प्रति गहरी संवेदन प्रकट करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। प्रस्ताव में कहा गया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘ऑपरेशन महादेव’ में अदम्य साहस दिखाने वाले सेना के जांबाजों को सलाम करता है। उनका साहस देश की सुरक्षा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।

पीएम मोदी ने एनडीए संसदीय दल की बैठक में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 अगस्त 2025) के ऑबजर्वेशन में कह दिया है अब हम क्या कहें। सुप्रीम कोर्ट ने जितनी बड़ी फटकार लगाई है ये बहुत बड़ी बात है। ये तो पत्थर पैर पर मारना ही नहीं बल्कि आ बैल मुझे मार वाली हालत है।

भारत की कूटनीतिक जीत की हुई चर्चा

बैठक में पारित प्रस्ताव में अमेरिका ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन टीआरएफ को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया। ब्रिक्स देशों ने साझा बयान में पहलगाम हमले की निंदा की। पाकिस्तान की धरती से आतंकवाद फैलाने का क्वाड देशों ने विरोध किया। ये भारत की कूटनीतिक जीत को दर्शाता है।

तिरंगा यात्रा में बढ़ चढ़ कर लें हिस्सा- पीएम

पीएम मोदी ने सांसदों से कहा कि वे खेल दिवस और तिरंगा यात्रा जैसे देशव्यापी कार्यक्रम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें और संसदीय क्षेत्र के लोगों को इसमें शामिल होने के लिए उत्साहित करें। इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि लाल कृष्ण आडवाणी के बाद सबसे लंबे समय तक गृह मंत्री के पद पर अमित शाह बने हुए हैं। ये तो अभी शुरुआत है।

एनडीए संसदीय दल की बैठक में संसद भवन का ऑडिटोरियम ‘हर हर महादेव’ और ‘भारत माता की जय’ के जयकारे से गूँज उठा। बैठक के दौरान महिला सांसदों को अग्रिम पंक्ति में बैठाया गया था। नए सांसदों से पीएम मोदी का परिचय भी कराया गया। कठिन परिस्थिति में पीएम मोदी के असाधारण नेतृत्व की सराहना की गई। प्रस्ताव में कहा गया कि पीएम मोदी के दूरदर्शी और दृढ़ नेतृत्व ने देश को दिशा दी और देशवासियों के दिल में एकता, अखंडता और गर्व की भावना जगाई।

जिन कम्युनिस्टों ने काटे स्वयंसेवक सदानंदन के पैर, सरेंडर से पहले उनको CPM के गुंडों ने दिया ‘हीरो’ जैसा मान: केरल का Video वायरल

केरल में राज्यसभा सांसद C सदानंदन मास्टर के 1994 में पैर काटने वाले कम्युनिस्टों को हीरो की तरह विदाई दी गई है। यह विदाई जेल जाने से पहले दी गई। विदाई पाने वाले 8 कम्युनिस्ट 7 महीनों से फरार थे। इस विदाई समारोह में केरल की पूर्व शिक्षा मंत्री KK शैलजा तक मौजूद रहीं।

इस विदाई को लेकर अब कम्युनिस्ट पार्टी की थू-थू हो रही है। यह सम्मान समारोह थालसेरी सेशंस कोर्ट के बाहर और फिर कन्नूर जिले के मत्तनूर में आयोजित किया गया। यह वहीं जगह है जहाँ हमला हुआ था। कार्यक्रम में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दोषियों को माला पहनाई, नारे लगाए और हीरो की तरह विदा किया।

इसमें मत्तनूर की विधायक और राज्य की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा भी शामिल हुईं। उनके इस सार्वजनिक समर्थन पर अब सभी राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया आई है। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे को हीरो जैसा सम्मान दिया जा रहा है। यह सब तब हो रहा है जब  सुप्रीम कोर्ट ने भी इन कम्युनिस्टो की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने हमले को ‘पूर्वनियोजित’ और ‘गंभीर रूप से निंदनीय’ बताया था।

सदानंदन मास्टर इस हमले में स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए थे। उन्होंने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और समाज को गलत संदेश देता है। ये लोग दोषी हैं, किसी कोर्ट ने इन्हें बरी नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट तक ने इनकी सजा बरकरार रखी। इसके बावजूद CPI(M) ने उन्हें नायक की तरह विदाई दी और एक निर्वाचित विधायक के.के. शैलजा ने इसमें हिस्सा लिया,  यह और भी चिंता की बात है।”

हमला, जमानत और जश्न

25 जनवरी 1994  को, कन्नूर (केरल) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह कार्यवाह और स्कूल टीचर सदानंदन अपने रिश्तेदारों से मिलकर अपनी बहन की शादी की तैयारी के लिए घर लौट रहे थे। तभी CPI(M) पार्टी से जुड़े गुंडों ने उन पर हमला किया। इस हमले में वे पूरी तरह से अपाहिज हो गए और तब से अब तक व्हीलचेयर पर हैं।

इस मामले में कुल 12 लोगों को आरोपित बनाया गया था, लेकिन 1997 में कन्नूर की अदालत ने केवल 8 को दोषी ठहराया। चार अन्य आरोपितों को साजिश के आरोप से बरी कर दिया गया। शुरुआत में सभी पर TADA के तहत आरोप लगाए गए थे, लेकिन बाद में ये प्रावधान हटा दिए गए।

इन दोषियों को 7 साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन पिछले करीब 30 सालों में वे ज्यादातर समय जमानत पर बाहर रहे क्योंकि उनकी अपीलें कोर्ट में लंबित थीं।

जनवरी 2025 में,  केरल हाईकोर्ट ने दोषियों की सजा को बरकरार रखा और कहा,  “यह हमला किसी गुस्से या अचानक उकसावे में नहीं हुआ था, यह एक पूर्व-नियोजित हमला था। आरोपितों को किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जा सकती।”

कोर्ट ने मुआवजे की राशि भी बढ़ाकर हर दोषी को पीड़ित को 50,000 रुपए देने का आदेश दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की अंतिम याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी और उन्हें 4 अगस्त 2025  तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।

खुद कर रहे रूस से व्यापार, भारत को दे रहे शांति का ज्ञान: तेल खरीद पर ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाने की कही बात, विदेश मंत्रालय ने दिखा दिया आईना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (4 अगस्त 2025) को कहा कि भारत रूसी तेल खरीद कर यूक्रेन के साथ युद्ध को बढ़ावा दे रहा है इसलिए अमेरिका भारत से आने वाले सामानों पर और अधिक टैरिफ लगाएगा। इसके बाद भारत ने भी अमेरिका को करारा जवाब दिया है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर भारत पर टैरिफ को लेकर पोस्ट साझा की। ट्रंप ने लिखा, “भारत भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसे ऊँचे दामों पर बेच रहा है और भारी मुनाफा कमा रहा है। भारत को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि रूस के कारण यूक्रेन में कितने लोगों की जान जा रही है। इस वजह से मैं भारत से आने वाले सामानों पर अधिक टैरिफ लगाऊँगा।”

इससे पहले 30 जुलाई को ट्रंप ने भारत से आयात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।

भारत ने दिया करारा जवाब

ट्रंप के इस पोस्ट के बाद भारत ने भी जवाब दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, “अमेरिका भी रूस से परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, ईवी उद्योग के लिएपैलेडियम के साथ उर्वरक और रसायन आयात करता है। ऐसे में भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि गलत भी है। भारत हर बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”

विदेश मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी में भारत ने अमेरिका के साथ यूरोपियन यूनियन पर भी जमकर निशाना साधा। मंत्रालय ने लिखा कि यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद भारत को रूस से तेल आयात करने पर अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, जबकि भारत ने यह आयात तब शुरू किया जब यूरोप ने पारंपरिक आपूर्ति को अपनी ओर मोड़ लिया था। उस समय अमेरिका ने भी भारत को ऐसे आयात के लिए प्रोत्साहित किया ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके।

अमेरिका को करारा जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि जो देश भारत की आलोचना कर रहे हैं वे खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं और उनके लिए यह कोई मजबूरी नहीं है। भारत का तेल आयात पूरी तरह से घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती और स्थिर ऊर्जा कीमतें देने के उद्देश्य से किया गया है और यह वैश्विक बाजार की स्थिति से मजबूरी में उठाया गया कदम है।

डेटा के साथ यूरोपियन यूनियन को दिया जवाब

अपने पोस्ट में विदेश मंत्रालय ने महज कोरी बात ही नहीं की, बल्कि तथ्यों को भी साथ ही साथ सबके सामने रख दिया। पोस्ट में रणधीर ने लिखा, “2024 में यूरोपीय संघ ने रूस से 67.5 बिलियन यूरो का व्यापार किया और 2023 में सेवाओं का व्यापार 17.2 बिलियन यूरो रहा। ये भारत-रूस व्यापार से कहीं अधिक है।”

विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि यूरोपीय संघ ने 2024 में 16.5 मिलियन टन LNG (गैस) आयात किया, जो 2022 के रिकॉर्ड 15.21 मिलियन टन से भी ज्यादा था। यूरोप रूस के साथ जो व्यापार करता है उसमें ऊर्जा के अलावा उर्वरक, खनिज, रसायन, स्टील, मशीनरी और ट्रांसपोर्ट उपकरण भी शामिल हैं।

ट्रंप पहले भी ब्रिक्स देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। अगर ऐसा होता है, तो भारतीय सामानों के आयात पर प्रभावी टैरिफ 35% होगा। अमेरिका में एक विधेयक भी पारित होने वाला है। इसके तहत रूस के साथ भारत, चीन और ब्राजील के लेन-देन पर 500% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।

भारत ने भी साफ तौर पर बता दिया है कि वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है लेकिन किसी के भी दबाव में नहीं आकर ऐसा नहीं होगा।