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जब माँ कौशकी ने किया असुरों का संहार, माँ काली ने दैत्यों का खून पिया… दिल्ली के कालिका मंदिर का 3000 वर्ष पुराना है इतिहास, जानें कैसे शुरू हुई यहाँ पूजा-पाठ

देश की राजधानी दि्ल्ली की धड़कती रफ्तार के बीच एक ऐसा स्थान है जहाँ आत्मा को नई ऊर्जा मिलती है। यह जगह है श्री कालकाजी मंदिर। देवी काली को समर्पित ये मंदिर दिल्ली के दक्षिणी भाग में स्थित है। यहाँ देवी काली को ‘कालिका’ के नाम से पूजा जाता है। माँ कालिका को शक्ति और समय की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मंदिर का नाम भी ‘कालकाजी’ इसी कारण पड़ा है।

नवरात्रों में जहाँ ये मंदिर एक महाआरती स्थल बन जाता है। वहीं, रोजमर्रा में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें गवाह हैं कि मंदिर में केवल देवी की मूर्ति नहीं बल्कि माँ कालिका का जीवंत रूप विराजमान है। कहा जाता है कि सच्चे मन से पुकारने वाले भक्तों की आवाज माता जरूर सुनती हैं। दिल्लीवासी हर शुभ कार्य से पहले माँ के दरबार में माथा टेकने आते हैं।

श्री कालकाजी मंदिर
दिल्ली स्थित श्री कालकाजी मंदिर (साभार : HindusthanPost)

मंदिर रोज़ाना खुलता है। सुबह 4 बजे से लेकर रात 11 बजे तक भक्त दर्शन के लिए पहुँच सकते हैं। सुबह की मंगला आरती और शाम की संध्या आरती यहाँ की खास हैं। इस दौरान देवी को विशेष श्रृंगार में सजाया जाता है और मंदिर का वातावरण दिव्य संगीत से भर जाता है।

मंदिर का इतिहास

कालकाजी मंदिर को कालकाजी तीर्थस्थल भी कहा जाता है। मंदिर का इतिहास तीन हजार वर्षों से भी पुराना माना जाता है। यानी महाभारत काल से भी पहले की स्थापना है। मान्यता है कि यहीं पर माँ ने असुरों का संहार कर धरती से बुराई को मिटाया था। उसी क्षण से यह स्थान देवी के विशेष रूप का प्रतीक बन गया।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, कालका देवी की उत्पत्ति मंदिर के वर्तमान स्थान दिल्ली के पूर्वी कैलाश के अरावली हिल्स में हुई। सतयुग के दौरान कई देवता सदियों पहले श्री कालका जी मंदिर के आसपास के क्षेत्र में रहते थे। लाखों साल पहले दो असुरों ने मंदिर स्थल के पास रहने वाले देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया। परेशान देवताओं ने देवी पार्वती से मदद माँगी और पार्वती के मुख से देवी कौशकी प्रकट हुईं। उन्होंने इन विशाल जीवों पर हमला किया और मारने में कामयब रहीं।

श्री कालकाजी मंदिर
दिल्ली स्थित श्री कालकाजी मंदिर ( साभार : So City)

इस दौरान इन जीवों का खून धरती पर गिर गया, जिससे हज़ारों ऐसे और असुर पैदा हो गए। इतने सारे अपवित्र जीवों से एक साथ लड़ना कौशकी देवी के लिए बड़ा काम था। इसका साथ देने के लिए माँँ पार्वती ने अपना अलग अवतार लिया, जो देवी काली थीं।

देवी काली ने कौशकी देवी द्वारा मारे गए दैत्यों से गिरे खून को चूस लिया। दोनों देवियों ने मिलकर दैत्यों के खतरे को पूरी तरह से मिटा दिया। इसके बाद से देवी काल को क्षेत्र के दिव्य प्राणियों की प्रमुख माना जाने लगा। यही देखते हुए देवी ने अनिश्चित काल तक वहीं रहने का फैसला किया।

मंदिर की संरचना

मंदिर की वास्तुकला हिंदू मंदिरों की पारंपरिक शैली में बनी है। माना जाता है कि इसका सबसे पुराना हिस्सा मराठों द्वारा 1764 ई. के आसपास स्थापित किया गया था। कालका जी मंदिर पर संगमरमर की नक्काशी शानदार है। नींव ईंट की है, लेकिन ब्लॉकों को प्लास्टर किया गया है और फिर अधिक भव्यता के लिए संगमरमर से ढका गया है।

मंदिर की बाहरी संरचना एक पिरामिड के आकार के टॉवर द्वारा संरक्षित है। केंद्र के कमरे में 12 पक्ष हैं, जिसके अपने प्रवेश द्वार हैं। हर पक्ष की लंबाई 24 फीट है। सभी दरवाज़े गलियारे की ओर ले जाते हैं। इनमें से हर गैलरी आठ फीट और नौ इंच चौड़ी है। इसमें तीन बाहरी द्वार भी हैं।

श्री कालकाजी मंदिर
दिल्ली स्थित श्री कालकाजी मंदिर ( साभार : skmpsc.org)

मंदिर के बीचोबीच संगमरमर का चबूतरा है, जिसपर पत्थर को तराश कर माँ की काली की मूर्ति रखी गई है। इसी मूर्ति पर एक शिलालेख है जिसपर देवी का नाम हिंदी में खोदा गया है। कालकाजी की प्रतिमा संगमरमर की रेलिंग से सुरक्षित हैं। इन सलाखों और चबूतरे पर नस्तलक शैली में सुलेख भी अंकित है।

नवरात्रों पर माँ का खास शृंगार

नवरात्रों के दौरान यह मंदिर एक उत्सव का रूप ले लेता है। नौ दिनों तक यहाँ मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। माता के जयकारों से गूंजता वातावरण, रंग-बिरंगे झूले, भक्ति संगीत और पूजा-पाठ का माहौल हर किसी के हृदय को छू जाता है। मंदिर के बाहर का चौक इन दिनों जीवन से भर उठता है। दुकानों में प्रसाद, खिलौने, चूड़ियाँ और धार्मिक वस्तुएँ बिकती हैं। हर कोना माँ की भक्ति में डूबा नजर आता है।

श्री कालकाजी मंदिर
दिल्ली स्थित श्री कालकाजी मंदिर (साभार : Travel -NativePlanet)

कैसे पहुँचे कालकाजी मंदिर?

दिल्ली मेट्रो की वायलेट और मैजेंटा लाइन पर ‘कालकाजी मंदिर’ नाम का स्टेशन स्थित है, जो मंदिर से मात्र पाँच सौ मीटर की दूरी पर है। स्टेशन से मंदिर तक पैदल कुछ ही मिनटों में पहुँचा जा सकता है या फिर स्थानीय ऑटो से भी जाया जा सकता है। इसके अलावा, दिल्ली की डीटीसी बसें, टैक्सियाँ और निजी वाहन से भी यहाँ पहुँचना बहुत सुगम है।

एक्टिविस्ट ‘दिखने’ की चाहत में टूटी झुग्गियों में पहुँचे राहुल गाँधी, SC के आदेश पर हुई डिमोलिशन ड्राइव से की पॉलिटिकल माइलेज लेने की कोशिश: फिर भी युवराज रहे खाली ‘हाथ’

कॉन्ग्रेस के युवराज राहुल गाँधी शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को दिल्ली के अशोक विहार और वजीरपुर के जेलर वाला बाग की झुग्गियों में पहुँच गए। ये वही जगह है, जहाँ पिछले महीने डीडीए (दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी) ने झुग्गियों पर बुलडोजर चलाया था। राहुल गाँधी ने वहाँ मौजूद लोगों से मुलाकात की, उनकी बात सुनी और आश्वासन दिया कि कॉन्ग्रेस उनकी लड़ाई को कोर्ट तक ले जाएगी और संसद में भी यह मुद्दा उठाएगी।

हालाँकि सवाल यह है कि क्या यह दौरा वाकई लोगों की मदद के लिए था या फिर यह सिर्फ पॉलिटिक्स का एक और मौका था, जिसे राहुल गाँधी ने भुनाने की कोशिश की?

क्या है पूरा मामला?

जेलर वाला बाग में डीडीए ने 16 जून 2025 को एक बड़ा डिमोलिशन ड्राइव चलाया था। इस कार्रवाई में करीब 500 से ज्यादा झुग्गियों को तोड़ा गया, जिसके बाद कई परिवार बेघर हो गए। डीडीए का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई, क्योंकि इन झुग्गियों ने डीडीए की जमीन और रेलवे पटरी के आसपास अवैध कब्जा किया था। डीडीए ने पहले लोगों को नोटिस भी जारी किए थे, लेकिन कई लोगों ने जमीन खाली करने में इंटरेस्ट नहीं दिखाया।

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू यह है कि सरकार ने इन झुग्गीवासियों के लिए पुनर्वास की योजना बनाई थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अशोक विहार फेज-2 में स्वाभिमान अपार्टमेंट बनाए गए हैं, जहाँ 1675 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैट्स तैयार किए गए हैं।

इनमें से 1078 पात्र परिवारों को फ्लैट्स अलॉट हो चुके हैं। प्रत्येक फ्लैट की लागत 25 लाख रुपये है, लेकिन पात्र लोगों को सिर्फ 1.42 लाख रुपये और 30,000 रुपये रखरखाव के लिए देने हैं। बाकी लागत सरकार वहन कर रही है। डीडीए का कहना है कि यह योजना ‘जहाँ झुग्गी, वहीं मकान’ के तहत चल रही है, जिसे 2015 में तत्कालीन दिल्ली सरकार ने मंजूरी दी थी।

राहुल गाँधी का दौरा झुग्गी वासियों की मदद या पॉलिटिक्स?

राहुल गाँधी का यह दौरा तब हुआ, जब संसद का मानसून सत्र चल रहा था। अचानक जेलर वाला बाग पहुँचकर उन्होंने वहाँ के लोगों से बात की और उनकी समस्याएँ सुनीं। उन्होंने लोगों से पूछा कि यह इलाका कितने एकड़ में है और डीडीए ने कितने एकड़ में बुलडोजर चलाया। जवाब में एक व्यक्ति ने कहा कि 100 एकड़। इस पर राहुल गाँधी का जवाब था, “भइया, सौ एकड़ तो मैं पैदल चला हूं।” इस बातचीत का वीडियो कॉन्ग्रेस ने अपने ‘X’ अकाउंट पर शेयर किया, जिसमें लिखा गया कि राहुल गाँधी ने प्रभावित परिवारों का दर्द बाँटा और उनकी शिकायतें सुनीं।

लेकिन सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ आईं। कुछ यूजर्स ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पर तंज कसा। एक यूजर पीतांबरा दत्त शर्मा ने लिखा, “इनमें से किसी ने जगह को मोल खरीदा है क्या? जो लोग सरकार से मोल प्लॉट खरीद कर टैक्स देकर मकान बनाते हैं, वो तो मूर्ख ही हुए न?”

एक अन्य यूजर, मुकेश अग्रवाल ने सवाल उठाया कि क्या राहुल गाँधी कभी पाकिस्तान से आए विस्थापितों की झुग्गियों में गए? राजेश जैन नाम के यूजर ने तो कॉन्ग्रेस पर ही आरोप लगाया कि वह रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को दोबारा बसाने की कोशिश कर रही है।

झुग्गियों को ढहाने के मामले की क्या है सच्चाई?

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस का दावा है कि डीडीए की कार्रवाई से लोग बेघर हो गए और उन्हें फ्लैट्स में पर्याप्त सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि फ्लैट्स में साफ पानी, सफाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी है। वहीं, कुछ ने यह भी आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद उनके घर तोड़े गए।

लेकिन डीडीए पक्ष इससे अलग है। डीडीए का कहना है कि जिन लोगों को फ्लैट्स अलॉट किए गए हैं, उन्हें सस्ती कीमत पर पक्के मकान दिए जा रहे हैं। जो लोग पात्र नहीं थे, उनके पास 2015 से पहले का वैध राशन कार्ड या मतदाता सूची में नाम नहीं था। ऐसे लोगों को अपीलीय प्राधिकरण में अपील करने का मौका दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई इस कार्रवाई को लेकर बीजेपी ने साफ कहा कि दिल्ली सरकार झुग्गीवासियों को पक्के मकान देकर अपना वादा पूरा कर रही है। यह योजना न सिर्फ कानूनी है, बल्कि लोगों को बेहतर जीवन देने का प्रयास भी है। हालाँकि राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस इसे बीजेपी की नाकामी बता रहे हैं और इसे एक प्रोपेगेंडा के तौर पर पेश कर रहे हैं कि बीजेपी लोगों को बेघर कर रही है।

हालाँकि अशोक विहार में डिमोलिशन ड्राइव के समय ऑपइंडिया की टीम भी मौके पर पहुँची थी। ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ये सब कुछ बीजेपी और दिल्ली सरकार को बदनाम करने की कोशिश है, जबकि सच्चाई ये है कि रेखा गुप्ता की सरकार अपने वादों को पूरा कर रही है। रेखा गुप्ता की बीजेपी सरकार झुग्गी में रहने वालों को पक्का मकान देने का वादा पूरा कर रही है।

राहुल गाँधी की पॉलिटिक्स का पुराना पैटर्न

राहुल गाँधी का यह कोई पहला मौका नहीं है, जब वह किसी मुद्दे को लेकर चर्चा में आए हों। चाहे वह किसान आंदोलन हो, बेरोजगारी का मुद्दा हो या कोई और सामाजिक मसला, राहुल गाँधी अक्सर ऐसे मौकों पर लोगों के बीच पहुँचते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं। लेकिन क्या इन वादों का कोई ठोस नतीजा निकलता है? यह सवाल बार-बार उठता है।

उदाहरण के लिए, 2020 में जब दिल्ली में दंगे हुए थे, तब भी राहुल गाँधी ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया था और सरकार पर निशाना साधा था। लेकिन उनके इस दौरे का कोई खास असर नहीं हुआ।

इसी तरह साल 2023 में छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस की सरकार थी, जब वहाँ 1000 से ज्यादा झुग्गियों को तोड़ा गया था। उस वक्त राहुल गाँधी ने इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया। सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बार भी यही सवाल उठाया कि जब कॉन्ग्रेस की सरकार थी, तब राहुल गाँधी को गरीबों का दर्द क्यों नहीं दिखा? यह सवाल उनके इरादों पर संदेह पैदा करता है।

राहुल गाँधी की छवि एक ऐसे नेता की रही है, जो मुद्दों को उठाता तो है, लेकिन उसका कोई ठोस समाधान पेश नहीं करता। उनकी रैलियों और बयानों में अक्सर भावनात्मक बातें होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत से उनका कनेक्शन कम ही दिखता है। जेलर वाला बाग के मामले में भी यही लगता है कि राहुल गाँधी ने इसे एक पॉलिटिकल मौके के तौर पर देखा, न कि वाकई लोगों की मदद करने के इरादे से।

लोगों को गुमराह करने की कोशिश?

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस का यह दावा कि बीजेपी लोगों को बेघर कर रही है, कई मायनों में भ्रामक लगता है। डीडीए की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई थी, और यह पूरी तरह कानूनी थी। जिन लोगों को फ्लैट्स अलॉट किए गए हैं, उन्हें सस्ती कीमत पर पक्के मकान मिल रहे हैं। जो लोग पात्र नहीं थे, उनके लिए अपील का रास्ता खुला है। ऐसे में यह कहना कि बीजेपी लोगों को बेघर कर रही है, हकीकत से परे है।

कॉन्ग्रेस का यह प्रोपेगेंडा लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश लगता है। राहुल गाँधी ने अपने दौरे में लोगों से मुलाकात तो की, लेकिन क्या वह इस मामले में कोई ठोस समाधान लेकर आए? नहीं। उनके आश्वासनों में कोर्ट और संसद में मुद्दा उठाने की बात तो थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि इससे लोगों को तुरंत राहत कैसे मिलेगी। यह सब सिर्फ पॉलिटिकल पॉइंट्स स्कोर करने की कोशिश नजर आती है।

सोशल मीडिया पर भी लोग इस बात को समझ रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “कॉन्ग्रेस को गरीबों का दर्द सिर्फ कैमरे के सामने दिखता है।” यह टिप्पणी राहुल गाँधी की मंशा पर सवाल उठाती है। अगर वह वाकई लोगों की मदद करना चाहते, तो शायद वह डीडीए और सरकार से बातचीत करके कोई रास्ता निकालने की कोशिश करते। लेकिन इसके बजाय, उन्होंने इसे सिर्फ एक पॉलिटिकल इवेंट बना दिया।

एकतरफा नरेटिव गढ़ने की कोशिश हुई ध्वस्त

बीजेपी और डीडीए का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई पारदर्शी और कानूनी थी। ‘जहाँ झुग्गी, वहीं मकान’ योजना के तहत सरकार ने झुग्गीवासियों को पक्के मकान देने का वादा किया था, जिसे वह पूरा कर रही है। 1675 फ्लैट्स में से 1078 पहले ही अलॉट हो चुके हैं, और बाकी जल्द ही अलॉट किए जाएँगे। यह योजना न सिर्फ लोगों को बेहतर जीवन दे रही है, बल्कि दिल्ली को और व्यवस्थित बनाने की दिशा में भी एक कदम है।

हाँ, यह सच है कि कुछ लोगों को अभी तक फ्लैट्स नहीं मिले, और कुछ ने फ्लैट्स की सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं। लेकिन डीडीए का कहना है कि इन समस्याओं को जल्द ही हल किया जाएगा। डीडीए का यह भी तर्क है कि अवैध कब्जों को हटाना जरूरी था, क्योंकि यह शहर की सुरक्षा और विकास के लिए जरूरी है।

पॉलिटिकल माइलेज लेने की कोशिश या लोगों का भला?

राहुल गाँधी का जेलर वाला बाग दौरा और उनकी बातें सुनने में तो भावनात्मक लगती हैं, लेकिन गहराई से देखें तो यह सिर्फ पॉलिटिक्स की चमक नजर आती है। बीजेपी और डीडीए अपनी योजना के तहत लोगों को पक्के मकान दे रहे हैं, और यह पूरी प्रक्रिया कानूनी है। ऐसे में राहुल गाँधी का इसे प्रोपेगेंडा बनाकर बीजेपी को घेरने की कोशिश लोगों को गुमराह करने जैसा लगता है।

कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी को अगर वाकई लोगों की चिंता है, तो उन्हें सरकार के साथ मिलकर समस्याओं का समाधान ढूँढना चाहिए। सिर्फ कैमरे के सामने जाकर आँसू बहाने और बड़े-बड़े वादे करने से कुछ नहीं होगा। दिल्ली के लोग अब समझने लगे हैं कि कौन उनकी मदद कर रहा है और कौन सिर्फ पॉलिटिक्स की रोटियाँ सेंक रहा है। राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस को एक बार फिर से शायद निराशा ही ‘हाथ’ लगने वाली है।

लव जिहाद गैंग का मास्टरमाइंड आरिफ अंसारी गिरफ्तार, 150+ लड़कियों के अश्लील फोटो-वीडियो बरामद: रेप-धर्मांतरण-तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा, UP के बिजनौर का मामला

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चाँदपुर कस्बे में एक सनसनीखेज लव जिहाद मामले ने स्थानीय हिंदुओं को झकझोर दिया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित आरिफ अंसारी को गिरफ्तार कर लिया है, जिसे लव जिहाद गैंग का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, बिजनौर में शंकर मूर्ति चौराहे के पास गैस स्टोव और चूल्हा मरम्मत का काम करने वाले आरिफ पर हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने, उनका यौन शोषण करने, ब्लैकमेलिंग, जबरन धर्मांतरण और मानव तस्करी के गंभीर आरोप हैं। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन से 150 से अधिक लड़कियों और महिलाओं की अश्लील तस्वीरें और वीडियो बरामद किए हैं, जिसके बाद पूरे नेटवर्क की जाँच तेज कर दी गई है।

मामला तब सामने आया जब एक पीड़िता के भाई ने पुलिस को बताया कि आरिफ ने उनकी बहन को नशीली गोली देकर उसका शोषण किया। उसने पीड़िता का फर्जी आधार कार्ड ‘जिया आरिफ’ के नाम से बनवाया और पासपोर्ट के लिए उनके घर के पते का इस्तेमाल किया। पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान इस साजिश का खुलासा हुआ।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरिफ ने उसे धोखे से नशीला पदार्थ खिलाकर अश्लील फोटो और वीडियो बनाए, जिनका इस्तेमाल कर वह उसे ब्लैकमेल करता था। उसने कई बार उसका बलात्कार किया और धर्मांतरण के लिए दबाव डाला।

पीड़िता के अनुसार, आरिफ का गैंग अन्य लड़कियों को भी निशाना बनाता था और उन्हें विदेश खासकर दुबई भेजने की साजिश रच रहा था। पुलिस को आरिफ के मोबाइल से जाँच के दौरान 150 से अधिक लड़कियों और महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो मिले है।

बिजनौर के पुलिस अधीक्षक (SP) विनय कुमार सिंह ने बताया कि आरिफ के खिलाफ जालसाजी, ब्लैकमेलिंग, बलात्कार, जान से मारने की धमकी और मानव तस्करी के आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

प्रारंभिक जाँच में संदेह है कि यह नेटवर्क संगठित रूप से हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर धर्मांतरण और तस्करी का रैकेट चला रहा था। पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि बरामद तस्वीरें और वीडियो इस साजिश से कैसे जुड़े हैं।

मामले के खुलासे के बाद स्थानीय हिंदू संगठनों ने चाँदपुर थाने के बाहर प्रदर्शन कर कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस बीच, सोशल मीडिया पर आरिफ की कुछ पुलिस अधिकारियों के साथ तस्वीरें वायरल होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों में आक्रोश है, क्योंकि आरिफ शादीशुदा होने के बावजूद लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में लिप्त था।

पुलिस ने पूरे गैंग को पकड़ने के लिए कई टीमें गठित की हैं और जाँच को गति दी है। इस मामले ने बिजनौर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।

मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य अतिथि बने PM मोदी, बोले- हमारे संबंध इतिहास से पुराने-समुद्र से गहरे: मुइज्जू सरकार के लिए ₹5000 करोड़ की व्यवस्था, डाक टिकट भी किया जारी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को मालदीव पहुँचे। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के आमंत्रण पर पीएम मोदी मालदीव गए हैं। वे मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।

पीएम मोदी की मालदीव की ये तीसरी यात्रा है। इससे पहले जून 2019 में उन्होंने मालदीव का दौरा किया था। मुइज्जू के सत्ता संभालने के बाद किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का ये पहला मालदीव दौरा है।

मोहम्मद मुइज्जूसरकार के कार्यकाल में पीएम मोदी की यह यात्रा इसलिए भी अहम है, क्योंकि दोनों देशों के संबंधों में तनाव के बाद पहली बार पीएम मोदी मालदीव पहुँचे हैं। इस दौरान भारत-मालदीव राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ पर संयुक्त स्मारक डाक टिकट जारी किया गया है।

इस अवसर पर पीएम मोदी ने मुइज्जू के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा, “मैं भारत की जनता की ओर से स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति और मालदीव की जनता को हार्दिक बधाई देता हूँ। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुझे मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए मैं राष्ट्रपति मुइज्जू का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। “

पीएम मोदी ने आगे कहा, “इस वर्ष भारत और मालदीव अपने राजनयिक संबंधों के 60 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। हमारे संबंधों की जड़ें इतिहास से भी पुरानी और समुद्र जितनी गहरी हैं। आज जारी किए गए स्मारक डाक टिकटों में दोनों देशों की पारंपरिक नौकाओं को प्रदर्शित किया गया है। यह दर्शाता है कि हम सिर्फ़ पड़ोसी ही नहीं, बल्कि सह-यात्री भी हैं।”
भारत मालदीव का सबसे करीबी पड़ोसी है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारे लिए दोस्ती हमेशा पहले आती है। भारत की पड़ोसी पहले नीति और महासागर विजन में मालदीव का अहम स्थान है। भारत को मालदीव का सबसे भरोसेमंद दोस्त होने पर गर्व है। चाहे संकट हो या महामारी, भारत हमेशा सबसे पहले उनके साथ खड़ा रहा है। इसके साथ ही चाहे आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता हो या कोविड के बाद अर्थव्यवस्था को संभालना हो, भारत ने हमेशा साथ मिलकर काम किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अक्तूबर 2024 में राष्ट्रपति मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान हमने व्यापक आर्थिक और समुद्री साझेदारी पर चर्चा की थी। अब यह एक वास्तविकता बन रहा है। भारत के सहयोग से निर्मित 4000 सामाजिक आवास इकाइयाँ मालदीव के कई परिवारों के लिए एक नई शुरुआत बनेंगी।

नौका प्रणाली से आसान होगा सफर

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आगे कहा, “ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट, अड्डू रोड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और हनीमाधू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का पुनर्विकास अदि का पूरा क्षेत्र एक महत्वपूर्ण पारगमन और आर्थिक केंद्र के रूप में उभरेगा। जल्द ही नौका प्रणाली की शुरुआत के साथ विभिन्न द्वीपों के बीच आवागमन आसान हो जाएगा।”

पीएम मोदी ने ये भी जोड़ा कि साझा निवेश को गति देने के लिए हम जल्द ही द्विपक्षीय निवेश संधि को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत भी शुरू हो गई है।

उन्होंने कहा, “अब हमारा लक्ष्य कागज़ी कार्रवाई से समृद्धि की ओर है। स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली से हम रुपये और रूफिया के बीच सीधा व्यापार कर पाएँगे। मालदीव में UPI तेजी से गति पकड़ रहा है, उससे पर्यटन और खुदरा व्यापार मजबूत होगा।”

समुद्री सुरक्षा होगी मजबूत

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग, आपसी विश्वास का प्रतीक है। आज रक्षा मंत्रालय के भवन का उद्घाटन एक विश्वसनीय और ठोस इमारत की पहचान बन गया है। यह हमारी मजबूत साझेदारी का प्रतीक है।

पीएम ने कहा, “हमारी साझेदारी मौसम विज्ञान के क्षेत्र में भी रहेगी। मौसम कैसा भी हो, हमारी दोस्ती हमेशा उज्ज्वल और स्पष्ट रहेगी। मालदीव की रक्षा क्षमताओं के विकास में भारत निरंतर सहयोग करेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि हमारा साझा लक्ष्य है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन में हम मिलकर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेंगे। जलवायु परिवर्तन हम दोनों के लिए एक चुनौती है। हमने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इस क्षेत्र में भारत मालदीव के साथ अपने अनुभव साझा करेगा।


मुइज्जू बोले- FTA से मजबूत होगी साझेदारी

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भी प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि आज दोपहर में प्रधानमंत्री मोदी और मैंने व्यापक चर्चा की। दोनों देशों के बीच कई प्रमुख क्षेत्रों में चार समझौता ज्ञापनों और तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें 565 मिलियन डॉलर (5000 करोड़ रुपए) का एक ऋण समझौता भी शामिल है। इसका उपयोग प्रमुख क्षेत्रों की परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।”

मुइज्जू ने आगे कहा, “मुझे भारत और मालदीव के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू होने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है। यह ऐतिहासिक पहल हमारी आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

पीएम ने मालदीव को सौंपा भीष्म

मालदीव पहुँचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का माले के रिपब्लिक स्क्वायर में औपचारिक स्वागत किया गया। इसके बाद भारत और मालदीव ने कई समझौतों पर बात की। भारत सरकार ने मालदीव के रक्षा मंत्रालय को 72 भारी वाहन उपलब्ध कराने पर डील की है।

इसके अलावा मालदीव को 4,850 करोड़ रुपये की ऋण सीमा (एलओसी) का विस्तार, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित एलओसी पर मालदीव के वार्षिक ऋण चुकौती दायित्वों में कमी, भारत-मालदीव मुक्त व्यापार समझौता (IMFTA) वार्ता की शुरुआत, भारत की क्रेता ऋण सुविधाओं के तहत हुलहुमाले में 3,300 सामाजिक आवास इकाइयों को सौंपने जैसे कई समझौतों पर भी दोनों देशों की सहमति बनी।

दौरे में पीएम मोदी और राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने मालदीव के माले में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधे लगाए। साथ ही पीएम मोदी ने मालदीव को भीष्म (सहयोग हित और मैत्री के लिए भारत स्वास्थ्य पहल) क्यूब्स सौंपे।

सेक्स के लिए 18 साल से कम नहीं हो सकती उम्र, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने POCSO और BNS कानून का दिया हवाला: सरकार बोली- सुरक्षा और यौन शोषण से बचाने के लिए जरूरी है ये सीमा

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें यह माँग की गई कि यौन संबंधों के लिए सहमति की न्यूनतम उम्र को 18 साल से घटाकर 16 साल किया जाए। इस याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यौन संबंधों की सहमति की वैधानिक उम्र 18 साल से कम नहीं की जा सकती।

केंद्र ने अपने लिखित जवाब में कहा कि यह उम्र सीमा बच्चों की सुरक्षा के लिए और यौन शोषण से उन्हें बचाने के लिए जरूरी है।

सरकार का रुख

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत में ‘यौन सहमति’ की उम्र को 18 साल तय करना एक सावधानीपूर्वक लिया गया निर्णय है।

यह निर्णय भारत के संविधान में निहित बाल संरक्षण की भावना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार ने कहा कि यह एक ‘गैर-परक्राम्य’ (Non-negotiable) सुरक्षा ढाँचा है, जिसे कमजोर करना बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

POCSO और BNS कानूनों पर केंद्र की दलील

सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 और हाल ही में लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) इस सिद्धांत पर आधारित है कि 18 वर्ष से कम उम्र का बच्चा वैध और सूचित सहमति देने में सक्षम नहीं होता।

यदि इस सीमा में कोई छूट दी जाती है तो यह कानून का गलत इस्तेमाल करने वालों के लिए बचाव का रास्ता बन सकता है, खासतौर पर उनके लिए जो पीड़ित की भावनाओं का फायदा उठाते हैं।

सहमति की उम्र को लेकर समय-समय पर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों को कानूनी रूप से अधिक सुरक्षित बनाना है। पहले 1860 में सहमति की उम्र केवल 10 साल रखी गई थी। इसके बाद 1891 में इसे बढ़ाकर 12 साल कर दिया गया।

आगे चलकर 1925 और 1929 में इसे 14 साल किया गया। 1940 में एक और संशोधन करते हुए सहमति की उम्र को 16 साल कर दिया गया। फिर 1978 में इसे बढ़ाकर 18 साल कर दिया गया, जो अभी तक लागू है। इन सभी बदलावों का उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें यौन शोषण से सुरक्षित रखना रहा है।

हालाँकि केंद्र सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि कोर्ट विशेष मामलों में न्यायिक विवेक का प्रयोग कर सकता है। खासकर उन मामलों में जहाँ दोनों पक्ष किशोर हों और उनकी उम्र 18 वर्ष के आसपास हो।

ऐसी स्थिति में ‘निकट-आयु अपवाद’ (close-in-age exception) का विचार किया जा सकता है, जिससे यह तय हो सके कि किशोर प्रेम संबंधों को अनावश्यक रूप से अपराध न बनाया जाए।

परिचितों द्वारा यौन अपराधों का खतरा

NCRB और अन्य बाल संरक्षण संगठनों के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि 50% से अधिक यौन अपराध, पीड़ित के परिचित लोगों, परिवार के सदस्यों, शिक्षक, पड़ोसी या रिश्तेदार द्वारा किए जाते हैं।

यदि सहमति की उम्र को कम किया गया तो ऐसे अपराधियों को यह कहने का अवसर मिल सकता है कि संबंध सहमति से बनाए गए थे, जिससे POCSO कानून के प्रभाव पर असर पड़ेगा।

सहमति की उम्र घटाना और उसका दुरुपयोग

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि जब यौन अपराध किसी परिवार के सदस्य द्वारा किया जाता है, तो पीड़ित बच्चा विरोध करने या शिकायत करने की स्थिति में नहीं होता। ऐसी स्थिति में सहमति की दलील देना बच्चे को ही दोषी ठहराने जैसा है, जो उसके अधिकारों और गरिमा के खिलाफ है।

केंद्र सरकार ने अपने विस्तृत हलफनामे में यह इस बात को बताया है कि सहमति की उम्र 18 साल से कम नहीं की जा सकती क्योंकि यह बच्चों के लिए एक मजबूत और अनिवार्य सुरक्षा तंत्र है।

हालाँकि, किशोरों के बीच रोमांटिक संबंधों के मामलों में न्यायिक विवेक का स्थान बना रहेगा। सरकार का मानना है कि सहमति की उम्र को घटाने से बाल यौन शोषण के खिलाफ वर्षों से बने कानूनी सिस्टम और संरक्षण की भावना को गंभीर नुकसान होगा।

झारखंड बनाने वाले का नाम मिटाने पर तुली हेमंत सरकार, ‘अटल क्लीनिक’ का नाम बदलकर रखा ‘मदर टेरेसा एडवांस क्लीनिक’: ‘भारत रत्न’ का हो रहा अपमान

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने अटल मोहल्ला क्लिनिक का नाम बदल दिया है। राज्य सरकार ने इसका नाम मदर टेरेसा एडवांस क्लीनिक कर दिया है जिसके बाद राज्य में सियासी बवाल शुरू हो गया है।

बीजेपी ने इसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अपमान बताया है। पार्टी का कहना है कि हेमंत सोरेन सरकार ने झारखंड की आत्मा का अपमान किया है। जनता ऐसे फैसलों के लिए कभी माफ नहीं करेगी। ये तुच्छ राजनीति का परिचायक है।

बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा है कि झारखंड को जिस व्यक्ति ने राज्य के रूप में नई पहचान दी। वे हैं अटल बिहारी वाजपेयी। आज उनका नाम मिटाया जा रहा है।

उनके नाम पर बने क्लिनिक का नाम मदर टेरेसा के नाम पर रखा जा रहा है। ये सरासर गलत है। झारखंड सरकार से उन्होंने सवाल किया है कि आखिर राष्ट्रीय शख्सियत से सरकार को इतनी नफरत क्यों है?

बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाह ने मदर टेरेसा की संस्था मिशनरी ऑफ चैरिटी को लेकर कहा है कि ब्रिटिश लेखक क्रिस्टोफर हिचेंस और अरूप चटर्जी ने अपने किताब में मदर टेरेसा की संस्था पर धर्मांतरण करने जैसे गंभीर आरोप लगाए।

2021 में संस्था की एफसीआरए लाइसेंस को रिन्यू नहीं किया गया। इसकी वजह धर्मांतरण में संलिप्त होना और संविधान विरोधी होना बताया गया।

झारखंड बीजेपी के नेता अजय साह ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार राज्य में विकास की हर सकारात्मक पहल को विवादित बना रही है।

आयुष्मान योजना और अटल मोहल्ला क्लिनिक जनता की फ्री स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के मकसद से शुरू किया गया था। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कॉन्ग्रेस की सरकार इसका नाम बदलकर राजनीति कर रही है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बिहार से अलग झारखंड राज्य का निर्माण किया। उनका नाम हटाने का विरोध जनता करेगी। अगर राज्य सरकार कोई नई स्वास्थ्य सेवा शुरू करना चाहती है तो वह किसी के भी नाम पर रख सकती है, लेकिन पुरानी योजना का नाम बदलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और जनविरोधी है।

ये पहली बार नहीं है जब झारखंड की कॉन्ग्रेस समर्थित सोरेन सरकार ने महापुरुषों को अपमानित किया है। इनलोगों ने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर दूसरे स्वतंत्रता सेनानी वीर बुधु भगत के नाम पर रख दी। ये दोनों महापुरुषों का ही अपमान था।

रांची में शुक्रवार (24 जुलाई 2025) को हेमंत कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें नाम बदलने के प्रस्ताव पर मुहर लगी।

कैबिनेट ने कई प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। नाम बदलने के मुद्दे पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का कहना है कि मेडिकल सुविधाओं को आधुनिक बनाने के बाद नाम बदला जा रहा है।

दुबई के 50+ ट्रिप, 30+ देशों का टूर, 10 विदेशी बैंक खाते: तुर्की की नागरिकता वाले अहसान अली के साथ मिल कर ठगी करता था गाजियाबाद का ‘नटवरलाल’, साथी भी करोड़ों का घोटालेबाज

गाजियाबाद फर्जी दूतावास मामले के आरोपित हर्षवर्धन जैन को लेकर अब एक नया खुलासा हुआ है। जाँच में सामने आया है कि हर्षवर्धन पिछले करीब 10 सालों में 53 बार दुबई जा चुका है। पूछताछ में पता चला है कि वह 30 से अधिक देशों की यात्रा कर चुका है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को हर्षवर्धन के पास से कई डिप्लोमैटिक पासपोर्ट बरामद हुए हैं। पुलिस ने बताया कि वह खुद को अलग-अलग देशों का राजदूत बताता था और अधिकारियों से अपना भौकाल बनाता था।

रिपोर्ट के मुताबिक उसने यूके, यूएई, मॉरीशस, फ्रांस, कैमरून, स्विट्ज़रलैंड, पोलैंड, श्रीलंका, बेल्जियम देशों की यात्रा की है। उसके पिता राजस्थान के प्रभावशाली कारोबारियों में से एक थे। उनकी मौत के बाद हर्षवर्धन से पिता का कारोबार नहीं संभल सका और नुकसान की भरपाई के लिए उसने फ्रॉड करना शुरू कर दिया।

अपनी आलीशान कोठी में फर्जी दूतावास खोलने के बाद वह खुद को वेस्ट आर्टिका और सेबोर्गा, पोल्बिया, लोडोनिया जैसे अज्ञात देशों का राजदूत कहता था। क्योंकि वह राजयनिक नंबर प्लेट लगी लग्जरी गाड़ियों से चलता था, इसलिए उसकी धोखाधड़ी का कोई सुराग भी नहीं मिल पाता था।

नई जानकारी के अनुसार, इस मामले में यूपी STF की तरफ से अब हर्षवर्धन के एक साथी एहसान अली का नाम शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को सामने आया है। उसने हर्षवर्धन के साथ मिलकर कई शेल कंपनियाँ बनाई और फिर लोन लेकर फरार हो गया था।

अब STF को पता चला है कि एहसान स्विट्जरलैंड के लेक ल्यूसर्न पर एक आलीशान फ्लैट का मालिक है। वह एक स्पैनिश फुटबॉल क्लब का भी हिस्सा है। हर्षवर्धन के साथ ही वह भी महँगी कारों का शौक रखता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एहसान अली सैयद पर एडवांस मनी के रूप में धोखाधड़ी के जरिए 2.5 करोड़ पाउंड हड़पने के बाद उसे फिजूल खर्च करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ कई देशो में धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं और वहाँ की एजेंसियाँ भी उसकी तलाश कर रही हैं।

हैदराबाद का एहसान टर्किश की नागरिकता लेकर लंदन में बैठ कर हर्षवर्धन के साथ मिला हुआ था। दोनों कई सालों से अलग-अलग देशों में शेल कंपनियों का नाम लेकर करोड़ों की ठगी कर रहे थे। STF को हर्षवर्धन जैन के विदेशों में 10 बैंक खातों की भी जानकारी मिली है। इसके तहत उनमें हुए ट्रांजेक्शन का ब्योरा बैंकों से माँगा जाएगा।

STF एसपी राजकुमार मिश्रा का कहना है कि दोनों की संलिप्तता और पूरे मामले की जाँच की जा रही है। जाँच के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

छांगुर पीर हो या फरहान, मोहम्मद कैफ हो या रहमान… सबका टारगेट सिर्फ हिंदू लड़कियों को कलमा पढ़वाना: 2 महीने में 6 धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़, कट्टरपंथियों को ₹100-100 करोड़ की होती थी फंडिंग

हिंदू लड़कियों को मुस्लिम बनने के लिए धर्म परिवर्तन कराने को लेकर धर्मांतरण के कई मामले हाल ही में सामने आए। महीने भर में भोपाल, बलरामपुर, आगरा, प्रयागराज, अलीगढ़ और कुशीनगर में बड़ी संख्या में लड़कियों को बरगलाकर या उन्हें प्रेम जाल में फाँस कर धर्मांतरण करने वाले गिरोहों का पर्दाफाश हुआ और साथ ही कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

हिंदू छात्राओं और परिवारों को निशाना बनाकर उन्हें मुस्लिम धर्म में जबरन परिवर्तित करने की न केवल कोशिश की गई बल्कि इन गिरोहों के सरगना भी देश- विदेश की फंडिंग से मालामाल हुए। इसके साथ ही इन गिरोहों के आतंकी संगठनों से भी तार जुड़े मिले।

भोपाल में कॉलेज की लड़कियाँ बनी शिकार

सबसे पहले धर्मांतरण के गिरोह का बड़ा मामला मध्यप्रदेश के भोपाल से आया। यहाँ कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों को फरहान नाम के युवक ने पहले अपनी दोस्ती के जाल में फँसाया। इसके बाद उनसे प्यार का नाटक कर रेप किया। इसकी वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करना शुरू किया। पीड़िताओं को रेप का वीडियो दिखा कर ये धमकी भी दे कि उनके साथ भी वैसे ही होगा। एक के बाद एक, कई लड़कियों के साथ ये पूरी प्रक्रिया दोहराई गई।

हिम्मत करके 11 अप्रैल 2025 को भोपाल के बागसेवनिया थाना में कुछ छात्राओं ने शिकायत की कि उन्हें मुस्लिम लड़कों ने ब्लैकमेल किया, उनका वीडियो बनाया और धमकी देकर रेप किया गया। जाँच शुरू हुई तो और लड़कियाँ भी सामने आईं। साथ ही फरहान के साथ साथ साहिल खान, अली खान, साद, नबील और अबरार के साथ 11 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। मामले में SIT टीम गठित हुई और इस ‘मुस्लिम गैंग’ पर शिकंजा कसा गया।

छांगुर पीर ने बिछाया धर्मांतरण का जाल

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में धर्मांतरण का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया। इसका सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर गाँव गाँव जाकर नग और छोटी मोटी चीजें बेचता था। इसके बाद वह मुंबई पहुँचा और वहाँ पर मिले हिंदू परिवार नीतू और नवीन वोहरा के परिवार का सबसे पहले बरगलाकर धर्म परिवर्तन करवाया। इस परिवार की 158 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी को अपने हिसाब से खरीद फरोख्त की और उन्हें मुंबई से बलरामपुर के उतौरला में लाकर बसा दिया।

इसके बाद छांगुर ने धर्मांतरण को ही अपना धंधा बना लिया। इसके तहत उसने 1500 से भी अधिक हिंदू युवतियों का धर्मांतरण करवाया। 5 जुलाई 2025 को यूपी एटीएस ने छांगुर पीर और नीतू उर्फ नसरीन को लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया था।

छांगुर धर्म परिवर्तन के नाम पर आलीशान जीवन और पैसे का लालच देता था। इसके लिए उसे विदेशों से भी फंडिंग मिलती थी। उसके नाम पर 106 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी के साथ 40 से अधिक बैंक अकाउंट में 100+ करोड़ से अधिक की फंडिग मिली है।

छांगुर के धर्मांतरण गिरोह में धर्म परिवर्तन के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से एक फीस तय थी। ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए ₹15-16 लाख, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए ₹10-12 लाख और अन्य जातियों के लिए ₹8-10 लाख की रकम फिक्सड थी। इस मामले में ATS के साथ ED की जाँच भी जारी है।

आगरा में ‘अस्मिता’ ने खोला धर्म परिवर्तन का राज

यूपी पुलिस ने हाल ही में ‘ऑपरेशन अस्मिता’ चलाया। इसमें एक बड़ा धर्मांतरण गिरोह पकड़ा गया। इस ऑपरेशन में 19 जुलाई 2025 को 6 राज्यों से 10 लोग गिरफ्तार हुए। पुलिस ने यूपी, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, दिल्ली और राजस्थान में छापे मारे। इसी के जरिए आगरा में एक बड़े धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश हुआ।

आगरा का मामला सबसे पहले दो सगी बहनों के गायब होने की शिकायत से खुला। आगरा की दो सगी बहनों को कोलकाता तक पहुँचाया गया था। बताया गया कि दोनों बहनें घर से ₹25 हजार और कुछ गहने लेकर भागी थीं। दोनों बस से दिल्ली, मुजफ्फरनगर, समस्तीपुर होते हुए कोलकाता पहुँचीं। कोलकाता में ओसामा नाम के युवक ने बहनों को होटल दिलाया। फिर कोलकाता की मुस्लिम बस्ती ‘तपसिया’ में कमरा दिलाने में भी मदद की।

आगरा के मामले में सरगना अब्दुल रहमान पहले हिंदू था। उसका नाम महेंद्र पाल हुआ करता था। 1990 में वह ईसाई बन गया। फिर इस्लाम में धर्म परिवर्तन किया।बताया गया कि अब्दुल के पास से हरियाणा के रोहतक की हिंदू लड़की को भी बचाया गया है।

 आगरा का गिरोह केवल ‘बालिग’ युवतियों को निशाना बनाता था। इससे उन्हें अपने साथ ले जाने में परेशानी नहीं होती थी। इस धर्मांतरण गैंग में शामिल 10 लोगों में से 6 पहले हिंदू थे। आरोपितों में से अबू रहमान इस गैंग का सरगना है।

इन लोगों ने धर्म परिवर्तन कर अपने नाम भी बदल लिए। धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों का कोलकाता में वोटर आईडी और आधार कार्ड भी बनाए जाते थे। इन्हें वोट डालने का भी अधिकार मिल जाता था।

प्रयागराज में हुआ गिरोह का भंडाफोड़

प्रयागराज 28 जून 2025 को दलित लड़की की मां ने फूलपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया था कि उसकी बेटी को दरकशा बानो नाम की एक महिला ने ब्रेनवॉश किया है। मामले में पुलिस ने आगे जाँच की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। 15 वर्षीय बच्ची को दरकशा बानो इस्लाम अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया और हिन्दू धर्म के प्रति जहर भरती रही। दरकशा बानो ने मोहम्मद कैफ के साथ मिलकर दलित लड़की को पैसों का लालच दिया और झाँसे में लेकर दिल्ली से केरल चली गई।

केरल में लड़की को पैसों का लालच, फिर जबरन धर्मांतरण और ‘जिहाद’ में शामिल होने का दबाव डाला गया। लड़की ने केरल के एक रेलवे स्टेशन से भागकर स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने उसे सुरक्षित बरामद कर प्रयागराज वापस भेजा और वन स्टॉप सेंटर में रखा। मामले में पहले दरकशा बानो और मोहम्मद कैफ और इसके बाद मुख्य आरोपी मोहम्मद ताज को 14 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने तीन विशेष टीमें बनाईं और गिरोह के नेटवर्क की जाँच शुरू की।

गिरोह विशेष रूप से दलित नाबालिग लड़कियों को निशाना बना रहा था। जांच एजेंसियों को शक है कि यह एक मल्टी-स्टेट नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य धर्मांतरण के बाद आतंकी गतिविधियों में शामिल करना था।

अलीगढ़ में धर्म परिवर्तन कर गायब हुई हिंदू महिलाएँ

आगरा की तरह ही अलीगढ़ में अवैध धर्मांतरण के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इसके झाँसे में आईं करीब 97 महिलाओं का पता नहीं चल पा रहा है। ये महिलाएँ लापता बताई जा रही हैं। इसका सरगना उमर गौतम ही था जिसने पूरा नेटवर्क फैला रखा था।

इस मामले में भी उमर गौतम की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि 2018 में 33 महिलाओं का धर्मांतरण कराया गया था जिसमें 3 अलीगढ़ की थीं। लेकिन ये नेटवर्क धीरे-धीरे महिलाओं और युवतियों को अपने झाँसे में लेने लगा। यही वजह है कि जनवरी से अब तक 97 महिलाएँ लापता हैं जिनमें से 17 टीन एजर्स हैं।

कुशीनगर में मिला धर्मांतरण गैंग

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में सक्रिय धर्मांतरण गैंग का खुलासा हुआ है। रामकोला पुलिस ने गैंग की मास्टरमाइंड जैरुन्निशा और उसके साथी अरमान अली, अरबाद और इकरामुल को गिरफ्तार किया है। गैंग ने 3 हिंदू नाबालिग लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाया और फिर उन्हें मुंबई में जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया।

टेकुआटार टोला खैरटवा के प्रेम मधेशिया ने अपनी 15 साल की नाबालिग को शादी का झाँसा देकर भगाने के आरोप में गाँव के ही अरमान के खिलाफ शिकायत की थी। इससे पहले पीड़ित रामचरित प्रसाद ने भी अपनी दो बेटी और उसकी सहेली के अपहरण मामले में इसी प्रकार की शिकायत दर्ज कराई थी।

कोडवर्ड में होती थी बात

आगरा मामले में गिरफ्तार धर्मांतरण गिरोह ने धर्मांतरण का शिकार बन चुके लोगों के लिए कोडवर्ड बनाए था। जिन लोगों का धर्मांतरण यह गैंग कर लेता था, उन्हें ‘रिवर्ट’ नाम दे दिया जाता था। धर्मांतरण में आने वाले लोगों के लिए इसे ‘सेफ जोन’ कहा जाता था।

इसी तरह छांगुर पीर भी अपने गैरकानूनी कामों को छुपाने के लिए कुछ खास और गुप्त शब्दों (कोडवर्ड्स) का इस्तेमाल करता था। जब वो लड़कियों को अपने जाल में फँसाने की बात करता था तो उन्हें ‘प्रोजेक्ट’ कहता था।

किसी के धर्मांतरण की प्रक्रिया को वो ‘मिट्टी पलटना’ कहता था। छांगुर पीर से कोई मिलने आता था तो इसे ‘दीदार करना’ कहा जाता था। किसी का ब्रेनवॉश करने या उसे अपने विचारों में ढालने को ‘काजल करना’ कहा जाता था।

विदेशों से मिलती थी फंडिंग

आगरा, बलरामपुर, प्रयागराज और अलीगढ़ में मिले धर्मांतरण गिरोह के तार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन्हें अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, यूएई से फंडिंग मिलती थी। पुलिस का मानना है कि यह तरीका ISIS जैसे आतंकी संगठन इस्तेमाल करते हैं।

इस तरह के धर्मांतरण गिरोह केवल कुछ शहरों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत में बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, हर जगह इनकी पकड़ तेज हो रही है। इनका सिर्फ एक मकसद है- हिंदुओं को अत्संख्यक बनाना और उनका प्रमाण भी भारत से मिटा देना।

अब जरूरत आन पड़ी है कि इन पर अंकुश लगाने के लिए सिर्फ जाँच एजेंसियों पर ही निर्भर न रहा जाए बल्कि अपने आसपास भी जागरूकता बढ़ाई जाए, सतर्कता बरती जाए और अपनी आगामी पीढ़ी को अपने धर्म, संस्कृति और पौराणिकता के बारे में जानकारी दी जाए। तभी इन जैसे गिरोहों को अपने ज्ञान और बुद्दि कौशल से समाज से खत्म किया जा सकता है।

आज की आवश्कता ये है कि आपस में जात-पात, ऊँच-नीच के बार में न लड़कर, समाज में बढ़ रही गंदगी के लिए एकजुट हुआ जाए और उसके खिलाफ लड़ा जाए।

‘आपातकाल’ मिलाकर भी इंदिरा गाँधी रह गईं पीछे, ‘लगातार सबसे ज्यादा दिन’ प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले दूसरे नेता बने PM मोदी, 4078 दिन का कार्यकाल पूरा, 6 चुनावों में मिली जीत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को पीछे छोड़ दिया है। शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को नरेन्द्र मोदी ने लगातार 4078 दिन कार्यभार संभाला। उनका कार्यकाल अभी जारी है। जबकि इंदिरा गाँधी ने लगातार 4077 दिन प्रधानमंत्री रहीं। हालाँकि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू अभी सबसे आगे हैं जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से लगातार 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री रहे यानी कुल 6130 दिन।

इंदिरा गाँधी से आगे निकले नरेन्द्र मोदी

इंदिरा गाँधी 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक लगातार 4077 दिनों तक प्रधानमंत्री रहीं। इस दौरान 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच 21 महीने का आपातकाल का दौर भी आया। 16 मार्च 1977 को लोकसभा चुनाव में इंदिरा गाँधी और कॉन्ग्रेस की करारी हार के बाद उन्हें सत्ता से बेदखल होना पड़ा।

लगातार 6 बार नरेन्द्र मोदी को मिला जनता का आशीर्वाद

प्रधानमंत्री मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। वह अभी भी प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए गठबंधन को जीत दिलाई। इस मामले में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की बराबरी की है, जिनके नेतृत्व में कॉन्ग्रेस लगातार सत्तासीन रही।

राज्य और केंद्र मिलाकर बात करें तो नरेन्द्र मोदी के समान कोई दूसरा नेता भारत के इतिहास में नहीं है, जो 6 बार लगातार मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बने। एक निर्वाचित सरकार के मुखिया के तौर पर पीएम मोदी का कार्यकाल सबसे लंबे कार्यकालों में एक है।

गुजरात में 7 अक्टूबर 2001 से मुख्यमंत्री पद पर विराजमान नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2002, 2007 और 2012 का विधानसभा चुनाव बीजेपी ने लड़ा और जीत हासिल की।

मुख्यमंत्री रहते हुए उनके नेतृत्व में बीजेपी ने 2014 का चुनाव लड़ा और जबरदस्त जीत हासिल की। इसके बाद 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव भी एनडीए ने उनके नेतृत्व में लड़ा और सत्ता पर काबिज हुई।

आजाद भारत में पैदा होने वाले पहले पीएम

देश की आजादी के बाद पैदा होने वाले नरेन्द्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री होने के साथ साथ सबसे लंबे समय तक पीएम पद पर रहने वाले गैर कॉन्ग्रेसी नेता भी हैं, जो लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीत कर प्रधानमंत्री बने हैं।

उन्होंने दो लगातार बार 5 साल का कार्यकाल भी पूरा किया और तीसरा कार्यकाल चल रहा है।

हिंदू लड़कियों को ड्रग देना, सेक्स का धंधा करवाना और प्राइवेट पार्ट पर बेरहमी से मारना… ये था यासीन-शाहवर का काम: भोपाल में चाचा-भतीजा गिरफ्तार, फोन से मिले यौन शोषण के 22 वीडियो

भोपाल में डीजे काम करने वाले यासीन और उसके चाचा शाहवर हिंदू लड़कियों को ड्रग्स के नशे में डुबोते, फिर उनके साथ रेप करते और उसका वीडियो बना लेते। लड़कियों को ड्रग्स की लत लगने के बाद उन्हें अपनी ‘पूल पार्टियों’ में बुलाते और ग्राहकों के सामने परोस कर पैसे बनाते। वो अमीर घरों की हिंदू लड़कियों को अपना शिकार बनाते और उन्हें सेक्स स्लेव की तरह रखते। विरोध करने पर सेक्स वीडियो दिखाकर मुँह बंद कर देते। वो अपनी पार्टियों में ड्रग्स बेचकर खूब सारा पैसा बनाते।

भोपाल क्राइम ब्रांच ने जिन दो ड्रग तस्करों चाचा शाहवर और भतीजे यासीन को गिरफ्तार किया था, उनसे पूछताछ में गंभीर खुलासे हो रहे हैं। ये पूरा गैंग हिंदू लड़कियों और महिलाओं को शुरुआत में फ्री में ड्रग्स देता और फिर धीरे-धीरे अपनी सेक्स स्लेव बना लेता। फिर उसे जो भी काम कराना होता, वो कराता।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को जाँच के दौरान शाहवर और यासीन के मोबाइल से लड़कियों के साथ शारीरिक शोषण के 22 वीडियो मिले हैं। इनमें से कुछ वीडियो में दोनों लड़कों को बंद कर उनके साथ मारपीट करते भी दिखाई दे रहे हैं।

पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यासीन हबीबगंज के एक मॉल के क्लब में डीजे का काम करता है। पुलिस का कहना है कि वह क्लब में आने वाली महिलाओं और युवतियों को एमडी ड्रग देकर उनका शारीरिक शोषण करता था। वीडियो के जरिए पुलिस ने एक पीड़िता से भी संपर्क किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो में आरोपित अपने दोस्तों के सामने युवती से अश्लील हरकतें करता दिखाई दे रहा है। फिलहाल पुलिस उसकी काउंसलिंग कराना चाहती है और इसके बाद अगर वह तैयार होती है तो उसके बयान के आधार पर भी FIR दर्ज की जाएगी। इनमें से कुछ वीडियो में आरोपितों को युवतियों के प्राइवेट पार्ट्स पर बेरहमी से हमला करते भी देखा जा सकता है।

कुछ दिनों पहले ही भोपाल पुलिस ने सैफुद्दीन और शाहरुख नाम के दो ड्रग पेडलरों को पकड़ा था। दोनों जो शहर के क्लबों और पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई करते थे। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे पार्टी, क्लब और जिम के माध्यम से युवाओं को फिटनेस और पार्टी कल्चर के नाम पर ड्रग्स की लत लगाते थे।

दोनों ने पुलिस को बताया कि यहाँ संपन्न घरों की हिंदू लड़कियों को पहले फ्री में नशा करवा कर उनका शोषण किया जाता था। जब युवतियाँ नशे की गिरफ्त में आ जाती थीं, तब उन्हें ड्रग्स के बदले शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया जाता था। उनके वीडियो भी बनाए जाते थे और फिर उन्हें वायरल करने की धमकी देकर लगातार शोषण किया जाता था।

इन्हीं दोनों ड्रग पेडलरों ने पुलिस को शाहवर और यासीन के बारे में भी बताया था। इसके बाद पुलिस ने उन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने यासीन के पास से 1.05 ग्राम एमडी पाउडर (ड्रग्स), एक पिस्तौल और स्कॉर्पियो जब्त की है। वहीं, शाहवर के पास से 2.052 ग्राम ड्रग के साथ बीई 6 महिंद्रा गाड़ी जब्त की है।

मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने एक्स पर लिखा, “स्कूल कॉलेज में पढ़ने वाली हिंदू लड़कियों को टारगेट कर उनको पार्टियों के बहाने ड्रग्स की लत लगवाना, बलात्कार कर के वीडियो बनाना,वीडियो के माध्यम से ब्लैकमेल कर सामूहिक यौन शोषण करना और फिर धर्मांतरण का दबाव बनाकर आजीवन के लिए सेक्स स्लेव बना कर रखना।”

उन्होंने लिखा, “हमारी जाँच की फाइंडिंग्स में हमने साफ साफ लिखा है कि पुलिस की जाँच अपर्याप्त है जाँच की दिशा अपराध के संरक्षकों की तरफ होना चाहिए अतः पुनः जाँच के लिए निर्देश दिए।”